Category: Madhya Pradesh

  • मेरी पत्नी को बुलाओ कहकर पानी की टंकी पर चढ़ा युवक पुलिस और प्रशासन की समझाइश से बची बड़ी अनहोनी

    मेरी पत्नी को बुलाओ कहकर पानी की टंकी पर चढ़ा युवक पुलिस और प्रशासन की समझाइश से बची बड़ी अनहोनी


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के विजयपुर में शनिवार को एक पारिवारिक विवाद उस समय सार्वजनिक तमाशे में बदल गया जब एक युवक अपनी पत्नी के मायके चले जाने से नाराज होकर करीब 60 फीट ऊंची पानी की टंकी पर चढ़ गया। देखते ही देखते मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई और पूरे इलाके में अफरा तफरी का माहौल बन गया। किसी अनहोनी की आशंका को देखते हुए पुलिस और प्रशासन की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और युवक को सुरक्षित नीचे उतारने के प्रयास शुरू किए।

    घटना विजयपुर नगर के बस स्टैंड क्षेत्र की बताई जा रही है। टंकी पर चढ़े युवक की पहचान धीरज खटीक के रूप में हुई है। ऊंचाई पर बैठे युवक को देखकर स्थानीय लोग घबरा गए और बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर पहुंच गए। पुलिस ने तत्काल इलाके की घेराबंदी कर सुरक्षा व्यवस्था संभाली और लगातार युवक से बातचीत कर उसे शांत करने की कोशिश करती रही।

    करीब दो घंटे तक चले इस घटनाक्रम के दौरान युवक बार बार अपनी पत्नी को मौके पर बुलाने की मांग करता रहा। वह मीडिया से बात कराने की भी जिद करता रहा ताकि अपनी बात सार्वजनिक रूप से रख सके। पुलिस अधिकारियों प्रशासनिक अमले और स्थानीय लोगों ने धैर्य के साथ उससे बातचीत जारी रखी। काफी समझाइश और भरोसा दिलाने के बाद आखिरकार युवक सुरक्षित नीचे उतर आया जिससे सभी ने राहत की सांस ली।

    नीचे आने के बाद युवक ने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी लगभग पंद्रह दिन पहले उसे छोड़कर मायके चली गई थी। उसका कहना था कि उसने इस संबंध में पुलिस से शिकायत भी की थी लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हुई। इसी नाराजगी और मानसिक तनाव के चलते उसने विरोध दर्ज कराने के लिए पानी की टंकी पर चढ़ने जैसा कदम उठाया। युवक का कहना था कि वह चाहता था उसकी बात सुनी जाए और उसकी पत्नी को वापस बुलाया जाए।

    हालांकि पुलिस का पक्ष इससे अलग है। विजयपुर थाना प्रभारी के अनुसार युवक की पत्नी पहले ही उसके खिलाफ शिकायत दर्ज करा चुकी थी। पुलिस ने बताया कि पत्नी की शिकायत के आधार पर पहले शांति भंग की कार्रवाई भी की गई थी। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि युवक ने पत्नी पर दबाव बनाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम के दौरान प्रशासन ने संयम और सतर्कता के साथ स्थिति को संभाला जिससे किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई। अधिकारियों ने युवक को उसकी शिकायत पर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन भी दिया। फिलहाल पुलिस पति पत्नी के बीच विवाद की वास्तविक वजह जानने में जुटी है और जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    यह घटना एक बार फिर इस बात की ओर संकेत करती है कि पारिवारिक विवाद यदि समय रहते बातचीत और कानूनी प्रक्रिया से नहीं सुलझाए जाएं तो वे सार्वजनिक घटनाओं का रूप ले सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में भावनात्मक आवेश में खतरनाक कदम उठाने के बजाय संवाद और कानून का सहारा लेना ही सबसे सुरक्षित और उचित रास्ता है।

  • MP में दो साल तक फिजूलखर्ची पर लगी रोक…. होटलों में नहीं होंगी सरकारी बैठकें.. हवाई यात्राएं भी की सीमित

    MP में दो साल तक फिजूलखर्ची पर लगी रोक…. होटलों में नहीं होंगी सरकारी बैठकें.. हवाई यात्राएं भी की सीमित


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की मोहन यादव सरकार (Mohan Yadav Government) ने वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने के लिए सरकारी खर्चों में बड़ी कटौती का फैसला किया है. वित्त विभाग ने सभी विभागों, निगम-मंडलों, विश्वविद्यालयों और सरकारी संस्थाओं के लिए मितव्ययिता संबंधी नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं. इन निर्देशों के तहत अगले दो वर्षों तक गैर-जरूरी सरकारी खर्चों (Non-Essential Government Expenditures) पर रोक रहेगी और संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया जाएगा.

    नए आदेश के मुताबिक, अधिकारियों की विदेश यात्राएं केवल अत्यावश्यक सरकारी कार्यों तक सीमित रहेंगी. देश के भीतर हवाई यात्रा भी आवश्यकता के आधार पर ही की जाएगी और सभी अधिकारी सरकारी खर्च पर केवल इकोनॉमी क्लास में ही सफर कर सकेंगे.


    होटल में बैठकें और प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं

    वित्त विभाग ने होटलों और अन्य व्यावसायिक परिसरों में कार्यशालाएं, बैठकें और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने पर रोक लगा दी है. ऐसे कार्यक्रम अब सरकारी भवनों में आयोजित किए जाएंगे. जहां संभव होगा, वहां प्रशिक्षण और बैठकों को वर्चुअल माध्यम या वेबिनार के जरिए आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अनावश्यक खर्च से बचा जा सके.


    किराए के वाहनों की संख्या घटेगी

    सरकार ने सभी विभागों को किराए के वाहनों की संख्या कम करने के निर्देश दिए हैं. इसके लिए व्हीकल पूलिंग सिस्टम लागू किया जाएगा. दो या अधिक अधिकारियों के लिए अलग-अलग वाहन उपलब्ध कराने के बजाय साझा वाहन व्यवस्था अपनाई जाएगी. यदि किसी अधिकारी को अतिरिक्त विभाग का प्रभार दिया जाता है तो उसे दूसरे विभाग का अलग वाहन उपलब्ध नहीं कराया जाएगा.


    दफ्तरों की साज-सज्जा पर भी रोक

    आदेश में अधिकारियों के कार्यालयों और केबिन की सजावट तथा इंटीरियर पर होने वाले अनावश्यक खर्च पर भी रोक लगा दी गई है. विभागाध्यक्षों को इन खर्चों की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं.


    नई कंसल्टेंसी सेवाओं पर रोक

    राज्य सरकार ने फिलहाल नई कंसल्टेंसी सेवाओं के अनुबंध करने पर भी रोक लगा दी है. साथ ही सभी निगम-मंडलों और सरकारी उपक्रमों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने लाभांश की अधिकतम संभव राशि राज्य शासन के खाते में जमा कराएं, ताकि सरकारी वित्तीय संसाधनों को मजबूत किया जा सके.

  • MP: केन-बेतवा प्रोजेक्ट के विरोध में जल चिता व फांसी सत्याग्रह…. 15 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे विस्थापित

    MP: केन-बेतवा प्रोजेक्ट के विरोध में जल चिता व फांसी सत्याग्रह…. 15 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे विस्थापित


    छतरपुर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बुंदेलखंड क्षेत्र (Bundelkhand region) में केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट (Ken-Betwa Link Project) और अन्य सिंचाई परियोजनाओं के विरोध में चल रहा आंदोलन शनिवार को 15वें दिन में प्रवेश कर गया. छतरपुर जिले के कुपी गांव के पास बराना नदी किनारे बड़ी संख्या में आदिवासी महिलाएं और परियोजना से प्रभावित परिवार अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें अब तक उचित पुनर्वास और मुआवजा नहीं मिला।

    इस आंदोलन का नेतृत्व अमित भटनागर कर रहे हैं और पिछले 11 दिनों से अनिश्चितकालीन उपवास पर हैं. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस दौरान भटनागर की केवल एक बार औपचारिक मेडिकल जांच की गई. प्रदर्शनकारियों ने ‘जल सत्याग्रह’, ‘चिता सत्याग्रह’ और आंदोलन के आठवें दिन से प्रतीकात्मक ‘फांसी सत्याग्रह’ भी शुरू किया है।

    बता दें कि केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट का मकसद केन नदी के अतिरिक्त पानी को बेतवा नदी में पहुंचाना है ताकि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सूखा-प्रवण बुंदेलखंड इलाके में सिंचाई और पीने का पानी उपलब्ध कराया जा सके।

    हालांकि, इस प्रोजेक्ट का विस्थापन, पुनर्वास और जंगलों व वन्यजीवों (जिसमें पन्ना टाइगर रिजर्व का हिस्सा भी शामिल है) पर इसके असर से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रोजेक्ट से प्रभावित परिवारों के कुछ वर्गों और पर्यावरण समूहों ने विरोध किया है. मौजूदा आंदोलन में रुंझ और मझगांव सिंचाई प्रोजेक्ट से प्रभावित परिवार भी शामिल हैं, जिनका दावा है कि अधिकारियों द्वारा किए गए पुनर्वास के वादों को पूरी तरह से लागू नहीं किया गया है।

    छतरपुर जिला प्रशासन के अनुसार, प्रदर्शनकारियों में पड़ोसी पन्ना जिले के रुंझ और मझगांव सिंचाई प्रोजेक्ट से प्रभावित 176 लोग शामिल हैं और इनका छतरपुर जिले में किसी विस्थापन या मुआवजे की प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं है.

    एक बयान में प्रशासन ने प्रभावित परिवारों से पन्ना लौटने और पुनर्वास का लाभ उठाने के लिए वहां के जिला अधिकारियों से संपर्क करने का आग्रह किया. इसमें कहा गया है कि राज्य सरकार ने पुनर्वास और पुनर्स्थापना के लिए अतिरिक्त 202.50 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं और प्रति प्रभावित परिवार पुनर्वास सहायता को 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 12.50 लाख रुपये कर दिया है।

    प्रशासन ने कहा कि अतिरिक्त आवंटन पात्र लाभार्थियों के समय पर पुनर्वास में मदद करेगा. इसमें कहा गया कि कलेक्टर पार्थ जायसवाल के निर्देश पर मानवीय आधार पर विरोध स्थल पर पीने के पानी, भोजन, स्वास्थ्य सेवा और अन्य जरूरी सुविधाओं का इंतजाम किया गया था. पास के एक स्वास्थ्य केंद्र में मेडिकल स्टाफ और दवाइयां भी तैनात की गई थीं, जबकि स्थानीय अधिकारी इंतजामों पर नजर रखे हुए थे।

    प्रशासन ने कहा कि चुने हुए प्रतिनिधि, राजस्व और पुलिस अधिकारी, सरपंच और अन्य स्थानीय प्रतिनिधि प्रभावित परिवारों को पन्ना लौटने और पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी करने के लिए मना रहे थे. उसने दावा किया कि कुछ लोग प्रोजेक्ट के बारे में गलत जानकारी फैला रहे थे और जनता से अफवाहों पर विश्वास न करने की अपील की।

    प्रशासन का कहना था कि केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट राष्ट्रीय महत्व का है और इससे बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई, पीने के पानी की आपूर्ति और समग्र विकास को बढ़ावा मिलेगा. हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि अप्रैल में प्रशासन द्वारा दिए गए आश्वासन पूरे नहीं किए गए।

    अमित भटनागर ने दावा किया कि केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट के साथ-साथ मझगांव और रुंझ सिंचाई प्रोजेक्ट से प्रभावित लोगों को न्याय नहीं मिला. उन्होंने आरोप लगाया कि विस्थापित परिवारों ने अपनी जमीन, जंगल, जल संसाधन, आजीविका और सांस्कृतिक पहचान खो दी है, जबकि कुछ लोगों पर झूठे आपराधिक मामले दर्ज किए गए, उन्हें अवैध रूप से बेदखल किया गया, बिजली आपूर्ति काट दी गई और स्कूल तोड़ दिए गए। उन्होंने मांग की कि प्रशासन ग्रामीणों को डराना-धमकाना बंद करे और हर गांव में प्रोजेक्ट से प्रभावित परिवारों की सूची सार्वजनिक रूप से दिखाए।

    बिजावर के SDM विजय द्विवेदी ने कहा कि प्रशासन को मीडिया रिपोर्टों के ज़रिए आंदोलन के बारे में पता चला, क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने न तो पहले से कोई जानकारी दी थी और न ही कोई औपचारिक ज्ञापन सौंपा था. उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की और उनकी लंबित मांगों का जायजा लिया।

    द्विवेदी ने कहा कि पन्ना जिले के लोगों की शिकायतों का समाधान स्थानीय प्रशासन करेगा, जबकि छतरपुर के निवासियों से जुड़े मुद्दों का समाधान छतरपुर प्रशासन करेगा. उन्होंने प्रदर्शनकारियों से घर लौटने की अपील की, खासकर मॉनसून को देखते हुए, और उन आरोपों को खारिज कर दिया कि फ़ायदे चुनिंदा लोगों को दिए गए थे; उन्होंने कहा कि अगर कोई खास मामला प्रशासन के ध्यान में लाया जाता है तो कार्रवाई की जाएगी।

  • MP: दतिया में आशुतोष तिवारी का प्रचार कर रहे नरोत्तम… स्वागत के दौरान कार्यकर्ताओं से बोले- माला वाला पीछे है

    MP: दतिया में आशुतोष तिवारी का प्रचार कर रहे नरोत्तम… स्वागत के दौरान कार्यकर्ताओं से बोले- माला वाला पीछे है


    दतिया।
    दतिया विधानसभा (Datia Assembly Constituency) के चुनाव प्रचार के दौरान पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा (Narottam Mishra) का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. नरोत्तम मिश्रा रात को बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी (BJP candidate Ashutosh Tiwari) के साथ जनसंपर्क कर रहे थे. चुनाव प्रचार के दौरान एक जगह पार्टी कार्यकर्ता स्वागत करने आए तो नरोत्तम मिश्रा ने इनकार करते हुए कहा कि प्रत्याशी आशुतोष तिवारी पीछे हैं. उनको माला पहनाओ।

    वायरल वीडियो के अनुसार, दतिया में घर-घर जाकर चुनाव प्रचार करने के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं और स्थानीय समर्थकों में भारी उत्साह देखा जा रहा था. जनसंपर्क के दौरान एक मोड़ पर उत्साहित भाजपा कार्यकर्ता अपने चहेते नेता नरोत्तम मिश्रा का स्वागत करने के लिए फूल-मालाएं लेकर आगे बढ़े. जैसे ही कार्यकर्ताओं ने मिश्रा के गले में माला डालनी चाही, नरोत्तम मिश्रा ने तुरंत उनका हाथ रोक दिया और माला पहनने से पूरी तरह मना कर दिया।


    ‘माला वाला पीछे आ रहा है…’ बोलकर प्रत्याशी को बढ़ाया आगे

    नरोत्तम मिश्रा ने न सिर्फ माला पहनने से मना किया, बल्कि वहां मौजूद कार्यकर्ताओं को याद दिलाया कि असली प्रत्याशी वह खुद नहीं, बल्कि उनके पीछे चल रहे आशुतोष तिवारी हैं। नरोत्तम मिश्रा ने मुस्कुराते हुए और अपने चिर-परिचित मजाकिया अंदाज में पीछे आ रहे आशुतोष तिवारी की तरफ उंगली से इशारा किया और जोर से कहा, ”माला वाला पीछे आ रहा है, उसे ही माला पहनाओ.”

    मिश्रा के इतना कहते ही वहां मौजूद सभी कार्यकर्ता और खुद प्रत्याशी आशुतोष तिवारी भी हंस पड़े. इसके बाद कार्यकर्ताओं ने आगे बढ़कर प्रत्याशी का फूल-मालाओं से जोरदार स्वागत किया।


    सोशल मीडिया पर क्यों हो रही है चर्चा?

    राजनीतिक गलियारों में नरोत्तम मिश्रा के इस कदम को बेहद सूझबूझ भरा माना जा रहा है. चुनाव के समय अक्सर बड़े नेताओं के इर्द-गिर्द भीड़ जमा हो जाती है और मुख्य प्रत्याशी उपेक्षित महसूस करने लगता है. ऐसे में नरोत्तम मिश्रा ने खुद को पीछे रखकर और आशुतोष तिवारी को ‘माला वाला प्रत्याशी’ बताकर यह संदेश दिया है कि पूरी पार्टी एकजुट होकर नए उम्मीदवार को जिताने के लिए मैदान में पसीना बहा रही है. दतिया के स्थानीय व्हाट्सएप ग्रुप्स से लेकर ट्विटर तक इस वीडियो को भाजपा के मजबूत टीमवर्क के रूप में शेयर किया जा रहा है।

  • एमपी में बदला मौसम का मिजाज, छतरपुर-पन्ना में भारी बारिश का अलर्ट, 34 जिलों में हल्की बारिश के आसार

    एमपी में बदला मौसम का मिजाज, छतरपुर-पन्ना में भारी बारिश का अलर्ट, 34 जिलों में हल्की बारिश के आसार


    भोपाल। मध्य प्रदेश में रविवार को भी मौसम का मिजाज बदला रहेगा। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के लिए छतरपुर और पन्ना जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। वहीं, जबलपुर, ग्वालियर सहित 34 जिलों में हल्की बारिश या बूंदाबांदी होने की संभावना जताई गई है। दूसरी ओर, भोपाल, इंदौर और उज्जैन समेत कई जिलों में मौसम साफ रहने का अनुमान है।

    मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश के आसपास सक्रिय चार साइक्लोनिक सर्कुलेशन (चक्रवाती परिसंचरण) और एक टर्फ के प्रभाव से प्रदेश में बारिश की गतिविधियां बनी हुई हैं। इसी सिस्टम के कारण शनिवार को भोपाल, नर्मदापुरम सहित कई जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश दर्ज की गई। रविवार को भी इसी तरह का मौसम बने रहने की संभावना है।

    विभाग के अनुसार, छतरपुर और पन्ना में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं रायसेन, विदिशा, नर्मदापुरम, बैतूल, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, दमोह, टीकमगढ़ और निवाड़ी में बूंदाबांदी या हल्की बारिश हो सकती है।

    इसके विपरीत भोपाल, राजगढ़, सीहोर, हरदा, इंदौर, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, शाजापुर और देवास में मौसम सामान्य और साफ रहने का पूर्वानुमान है।

    जुलाई में सामान्य से 15 फीसदी कम बारिश
    प्रदेश में पिछले नौ दिनों के दौरान किसी भी जिले में भारी या अति भारी बारिश दर्ज नहीं की गई है। इसका असर मानसूनी आंकड़ों पर भी दिखाई दे रहा है। शनिवार तक मध्य प्रदेश में सामान्य से 15 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई है।

    अब तक प्रदेश में 247 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य औसत 291 मिमी बारिश होती है। पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 26 प्रतिशत कम और पश्चिमी हिस्से में 5 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।

    बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो देवास प्रदेश का सबसे अधिक वर्षा वाला जिला बना हुआ है, जहां सामान्य से 102 प्रतिशत अधिक बारिश हो चुकी है। यहां अब तक करीब 18 इंच वर्षा दर्ज की गई है। इसके अलावा हरदा में 15 इंच, इंदौर और सीहोर में करीब 14 इंच, जबकि भोपाल में अब तक 13.1 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है।

  • बानमौर में दिनदहाड़े फोन से बुलाकर किया युवक का अपहरण

    बानमौर में दिनदहाड़े फोन से बुलाकर किया युवक का अपहरण

    मुरैना। जिले के बानमोर थाना क्षेत्र में शनिवार सुबह दिनदहाड़े हुई अपहरण की सनसनीखेज वारदात ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी। अपहरणकर्ताओं ने फोन कर युवक को घर के बाहर बुलाया। बानमौर नगर की पवाया रोड पर आते ही  26 वर्षीय युवक को अज्ञात कार सवार बदमाशों ने रोक लिया।आरोपियों ने पहले युवक के साथ बेरहमी से मारपीट की और फिर जबरन कार में बैठाकर फरार हो गए।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और युवक की तलाश के लिए चार विशेष टीमें गठित कर दी गई हैं। अपह्रत युवक दिल्ली में सीसीटीवी कैमरा लगाने के साथ-साथ पैसों के ऑनलाइन ट्रांसफर का काम करता था।यह  लेनदेन का ही मामला माना जा रहा है और यह घटना दिल्ली में हुई किसी लेनदेन को लेकर हुए विवाद के कारण ही बताई जा रही है।

    लपुलिस के अनुसार अपहृत युवक की पहचान सोनू कुशवाह (26) निवासी पवाया रोड, बानमोर के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि शनिवार सुबह करीब 10 बजे किसी ने फोन कर उसे बाहर बुलाया। वह हाईवे के समीप पहुंचा, पहले से घात लगाए बैठे कार सवार बदमाशों ने उसे घेर लिया। सोनू कुशवाहा के साथ मारपीट के बाद कार में अपहरण करने की घटना को एक नाबालिक बालक ने देख लिया । उसने तुरंत सोनू के  परिजनों को घटना की सूचना दी।
    घटना की जानकारी मिलते ही बानमोर थाना पुलिस तत्काल हरकत में आ गई। जिलेभर में नाकेबंदी कराई गई और संभावित भागने के मार्गों पर पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस ने मुरैना, ग्वालियर सहित आधा दर्जन संभावित ठिकानों पर दबिश भी दी, लेकिन  घटना के 36 घंटे बीत जाने के बाद भी अपरहत युवक के साथ-साथ अपहरण कर्ताओं की पहचान नहीं हुई है हालांकि सोनू कुशवाहा के मोबाइल से ही अपहरण करता उसके परिजनों पर रिश्तेदारों को मैसेज भेज रहे हैं कि जिस तरह वह अपहरण कर ले गए हैं इस तरह उसको वापस छोड़ देंगे। 
    पुलिस अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए चार विशेष टीमें गठित की हैं। टीमें तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर तंत्र की मदद से आरोपियों की तलाश में जुटी हुई हैं। आसपास के क्षेत्रों के सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग भी खंगाली जा रही है, ताकि कार और उसमें सवार आरोपियों की पहचान की जा सके।
    एसडीओपी अनिल कुमार ने बताया कि फिलहाल अपहरण के पीछे का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। पुलिस सभी संभावित पहलुओं पुरानी रंजिश, लेन-देन, आपसी विवाद और अन्य कारणों को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि युवक की सकुशल बरामदगी पुलिस की पहली प्राथमिकता है और आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है।
    दिनदहाड़े हुई इस घटना के बाद बानमोर क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल है। स्थानीय लोगों ने पुलिस से क्षेत्र में गश्त बढ़ाने, हाईवे पर निगरानी मजबूत करने और आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की है। लोगों का कहना है कि सार्वजनिक स्थान से इस तरह किसी युवक का अपहरण होना कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

  • श्योपुर में पारिवारिक विवाद बना सार्वजनिक हंगामा, पत्नी को बुलाने की मांग पर पानी की टंकी पर चढ़ा युवक; पुलिस जांच में जुटी

    श्योपुर में पारिवारिक विवाद बना सार्वजनिक हंगामा, पत्नी को बुलाने की मांग पर पानी की टंकी पर चढ़ा युवक; पुलिस जांच में जुटी


    मध्य प्रदेश
    के श्योपुर जिले के विजयपुर कस्बे में शनिवार को पारिवारिक विवाद के चलते उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब एक युवक 60 फीट ऊंची पानी की टंकी पर चढ़ गया। घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए। सूचना पर पुलिस और प्रशासन की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और करीब दो घंटे तक लगातार समझाइश देने के बाद युवक को सुरक्षित नीचे उतार लिया। पूरे घटनाक्रम के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई।

    घटना विजयपुर के बस स्टैंड क्षेत्र की बताई जा रही है। टंकी पर चढ़े युवक की पहचान धीरज खटीक के रूप में हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार युवक ऊंचाई पर बैठकर बार-बार अपनी पत्नी को मौके पर बुलाने और मीडिया से बात कराने की मांग कर रहा था। पुलिस अधिकारियों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित कराया और स्थानीय लोगों से भीड़ से दूरी बनाए रखने की अपील की, ताकि किसी प्रकार का जोखिम न हो।

    करीब दो घंटे तक चले प्रयासों के दौरान पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय लोगों ने युवक से लगातार बातचीत की। समझाइश और आश्वासन के बाद वह स्वयं नीचे उतरने के लिए तैयार हो गया। प्रशासन ने राहत की सांस ली क्योंकि पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई और किसी को कोई चोट नहीं पहुंची।

    नीचे उतरने के बाद युवक ने बताया कि उसकी पत्नी लगभग 15 दिन पहले मायके चली गई थी। उसका आरोप था कि उसने इस संबंध में पुलिस से शिकायत भी की थी, लेकिन उसकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। युवक का कहना था कि उसकी बात सुनी जाए और उसकी पत्नी को वापस बुलाया जाए। इसी कारण उसने विरोध दर्ज कराने के लिए पानी की टंकी पर चढ़ने का कदम उठाया।

    दूसरी ओर पुलिस ने मामले को लेकर अलग पक्ष भी सामने रखा है। थाना प्रभारी के अनुसार युवक की पत्नी पहले ही उसके खिलाफ शिकायत दर्ज करा चुकी थी। पुलिस का कहना है कि पत्नी के आवेदन के आधार पर पहले शांति भंग की कार्रवाई भी की गई थी। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि युवक ने पत्नी पर दबाव बनाने के उद्देश्य से सार्वजनिक स्थान पर इस तरह का कदम उठाया। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि दोनों पक्षों के आरोपों की निष्पक्ष जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    प्रशासनिक अधिकारियों ने युवक को भरोसा दिलाया कि उसकी शिकायत पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद स्थिति पूरी तरह सामान्य हो गई और पुलिस ने क्षेत्र में यातायात एवं सामान्य गतिविधियां बहाल कर दीं। घटना के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौके पर मौजूद रहे, जिससे कुछ समय के लिए वहां भीड़भाड़ की स्थिति बन गई थी।

    यह घटना एक बार फिर पारिवारिक विवादों के सार्वजनिक रूप लेने और समय रहते संवाद तथा कानूनी प्रक्रिया की आवश्यकता की ओर ध्यान आकर्षित करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में भावनात्मक आवेश में उठाए गए कदम व्यक्ति और आसपास मौजूद लोगों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों से पूछताछ कर मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है और जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • सिंगरौली में 2 हजार रुपये की रिश्वत लेते वन विभाग का बीट गार्ड रंगे हाथ गिरफ्तार, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज

    सिंगरौली में 2 हजार रुपये की रिश्वत लेते वन विभाग का बीट गार्ड रंगे हाथ गिरफ्तार, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज

    मध्य प्रदेश। सिंगरौली जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए वन विभाग के एक बीट गार्ड को दो हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई बरगवां रेंज के ओबरी जंगल चौकी क्षेत्र में की गई। शिकायत के सत्यापन के बाद लोकायुक्त टीम ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया और आरोपी कर्मचारी को रिश्वत की रकम स्वीकार करते समय मौके पर ही पकड़ लिया। घटना के बाद वन विभाग के स्थानीय कार्यालयों में हलचल का माहौल बन गया।

    जानकारी के अनुसार, ओबरी बीट में पदस्थ बीट गार्ड अखिलेश शुक्ला पर क्षेत्र के निवासी रामलोचन प्रजापति से एक शासकीय कार्य के बदले रिश्वत मांगने का आरोप लगा था। शिकायतकर्ता ने कथित रूप से बार-बार रिश्वत की मांग से परेशान होकर लोकायुक्त पुलिस से संपर्क किया और पूरे मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच और तथ्यों का सत्यापन किया, जिसमें शिकायत प्रथम दृष्टया सही पाई गई।

    सत्यापन के बाद लोकायुक्त टीम ने आरोपी को रंगे हाथ पकड़ने के लिए विशेष योजना बनाई। निर्धारित समय पर शिकायतकर्ता को रासायनिक पदार्थ लगे दो हजार रुपये के नोट दिए गए और उसे आरोपी के पास भेजा गया। जैसे ही बीट गार्ड ने शिकायतकर्ता से रिश्वत की राशि स्वीकार की, पहले से निगरानी कर रही लोकायुक्त टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे मौके पर ही पकड़ लिया।

    कार्रवाई के दौरान निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आरोपी के हाथ धुलवाए गए। परीक्षण में हाथों का रंग गुलाबी होने से रासायनिक पदार्थ के संपर्क की पुष्टि हुई, जिसे ट्रैप कार्रवाई का महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जाता है। इसके बाद टीम ने रिश्वत की राशि बरामद कर आवश्यक दस्तावेजी कार्रवाई शुरू की।

    लोकायुक्त अधिकारियों ने बताया कि शिकायतकर्ता की सूचना और उसके सत्यापन के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। आरोपी कर्मचारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। साथ ही मामले से जुड़े अन्य आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं ताकि आगे की वैधानिक प्रक्रिया नियमानुसार पूरी की जा सके।

    कार्रवाई के बाद आरोपी बीट गार्ड को बरगवां स्थित सर्किट हाउस ले जाया गया, जहां पूछताछ, दस्तावेजी औपचारिकताओं और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा किया गया। अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान प्राप्त तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मामले में यदि अतिरिक्त साक्ष्य सामने आते हैं तो उन्हें भी जांच का हिस्सा बनाया जाएगा।

    इस कार्रवाई के बाद वन विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच चर्चा का माहौल है। लोकायुक्त की इस ट्रैप कार्रवाई को सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों पर नियमानुसार जांच की जाती है और शिकायत सही पाए जाने पर कानून के तहत सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। ऐसे मामलों में नागरिकों से भी अपील की जाती है कि यदि किसी सरकारी कार्य के बदले अवैध धनराशि की मांग की जाए तो उसकी सूचना संबंधित जांच एजेंसियों को दें, ताकि निष्पक्ष कार्रवाई की जा सके।

  • छतरपुर मामले पर समाजवादी पार्टी का सरकार पर तीखा हमला, भूमाफिया संरक्षण और निष्पक्ष जांच की उठाई मांग

    छतरपुर मामले पर समाजवादी पार्टी का सरकार पर तीखा हमला, भूमाफिया संरक्षण और निष्पक्ष जांच की उठाई मांग

    मध्य प्रदेश: के छतरपुर जिले में हाल के घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी ने भोपाल में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान राज्य सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि जिले में कथित रूप से भूमाफिया से जुड़ा एक संगठित नेटवर्क सक्रिय है, जिसे सत्ता और प्रशासन का संरक्षण प्राप्त है। पार्टी ने पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग भी उठाई है।

    समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता यश भारतीय ने आरोप लगाया कि छतरपुर में कानून व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि धर्म की आड़ में अवैध गतिविधियों को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है और इससे आम लोगों का भरोसा प्रभावित हो रहा है। उनके अनुसार, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की आशंका समाप्त हो सके।

    प्रेस वार्ता के दौरान यश भारतीय ने धीरेंद्र शास्त्री और उनके छोटे भाई शालिग्राम का नाम लेते हुए कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि क्षेत्र में कथित भूमाफिया गतिविधियों से जुड़े मामलों की स्वतंत्र जांच आवश्यक है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि हाल में हुई गिरफ्तारी और उससे जुड़े घटनाक्रम कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े करते हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

    समाजवादी पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि शालिग्राम पर पहले से विभिन्न गंभीर आरोप लगते रहे हैं और हाल की घटनाओं में भी उनका नाम सामने आया है। पार्टी का कहना है कि यदि किसी भी व्यक्ति पर गंभीर आरोप हैं, तो मामले की जांच बिना किसी दबाव या राजनीतिक हस्तक्षेप के होनी चाहिए। उन्होंने संबंधित मामलों में गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की।

    पार्टी ने जेल प्रशासन पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि संबंधित आरोपी को कथित रूप से विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। समाजवादी पार्टी ने मांग की कि यदि इस संबंध में लगाए गए आरोपों में कोई तथ्य पाया जाता है तो जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही पूरे प्रकरण की निगरानी किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी को सौंपने की मांग दोहराई गई।

    प्रवक्ता ने कहा कि कानून सभी नागरिकों के लिए समान होना चाहिए और किसी भी व्यक्ति को उसके सामाजिक, धार्मिक या राजनीतिक प्रभाव के आधार पर विशेष संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होना लोकतांत्रिक व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया के हित में आवश्यक है।

    फिलहाल समाजवादी पार्टी द्वारा लगाए गए ये आरोप राजनीतिक बयान के रूप में सामने आए हैं। संबंधित आरोपों पर इस समाचार के प्रकाशित होने तक राज्य सरकार, प्रशासन अथवा आरोपित पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं आई है। ऐसे मामलों में आरोपों की पुष्टि सक्षम जांच एजेंसियों की जांच और आधिकारिक निष्कर्षों के बाद ही हो सकेगी। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है और संबंधित एजेंसियां इस मामले में क्या कदम उठाती हैं।

  • भोपाल में कांग्रेस विचार विभाग की बैठक, केप्टन डाबर बोले- नेहरू ने आधुनिक भारत बनाया, भाजपा ने अफवाह तंत्र खड़ा किया

    भोपाल में कांग्रेस विचार विभाग की बैठक, केप्टन डाबर बोले- नेहरू ने आधुनिक भारत बनाया, भाजपा ने अफवाह तंत्र खड़ा किया

    मध्यप्रदेश: की राजधानी भोपाल में आयोजित कांग्रेस विचार विभाग की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और केंद्र सरकार पर कई राजनीतिक एवं वैचारिक मुद्दों को लेकर तीखे आरोप लगाए। कांग्रेस विचार विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष केप्टन प्रवीण डाबर ने कहा कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने आधुनिक भारत की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जबकि भाजपा ने देश में अफवाहों का तंत्र खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि नेहरू की सोच वैज्ञानिक दृष्टिकोण, लोकतांत्रिक संस्थाओं और आधुनिक विकास पर आधारित थी, जिसे आज भी देश की प्रगति का आधार माना जाता है।

    बैठक के दौरान केप्टन डाबर ने अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावे और उसके प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम करोड़ों भारतीयों की आस्था, सांस्कृतिक चेतना और नैतिक मूल्यों के प्रतीक हैं। मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं और प्रबंधन को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में सरकार की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

    डाबर ने राम मंदिर के लिए नए मुख्य कार्यपालन अधिकारी की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि यदि नियुक्ति के लिए केवल “राम भक्त” होने की शर्त रखी जाती है तो यह अन्य देवी-देवताओं के श्रद्धालुओं के साथ भेदभाव जैसा प्रतीत होता है। उन्होंने सवाल किया कि भगवान को अलग-अलग वर्गों में बांटने की आवश्यकता क्यों महसूस की जा रही है और धार्मिक संस्थानों में समान भाव की भावना बनाए रखना अधिक आवश्यक है।

    प्रदेश कांग्रेस विचार विभाग के अध्यक्ष भूपेन्द्र गुप्ता ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय हितों और देश की संप्रभुता से जुड़े मुद्दों पर सतर्क रहने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार के ऐसे समझौतों से बचना चाहिए जो देश के हितों को प्रभावित कर सकते हों। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से वैचारिक रूप से सक्रिय रहने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए जनता के बीच संवाद बढ़ाने का आह्वान किया।

    बैठक में शामिल पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि मंदिरों के संचालन और धार्मिक संस्थाओं में संघ के प्रचारकों की भूमिका बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मंदिरों का संचालन संतों और धार्मिक परंपराओं से जुड़े लोगों के हाथों में रहना चाहिए। दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा कि धर्म का मूल आधार इंसानियत और मानवता है तथा कांग्रेस सभी धर्मों के सम्मान और समानता में विश्वास करती है। उन्होंने मंदिरों के संचालन में शंकराचार्यों की भूमिका सुनिश्चित किए जाने की भी मांग रखी।

    बैठक के दौरान कांग्रेस नेताओं ने सामाजिक सौहार्द, धार्मिक सद्भाव और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा को पार्टी की प्राथमिकता बताया। वहीं भाजपा और सरकार पर लगाए गए आरोपों को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। इन बयानों के बाद संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया का भी इंतजार किया जा रहा है, क्योंकि इस तरह के मुद्दे प्रदेश की राजनीति में आगे भी बहस का विषय बने रह सकते हैं।