Category: Madhya Pradesh

  • पीएम आवास और बिजली सुविधा वाली जमीन पर चला बुलडोजर, ग्रामीणों ने वन विभाग पर लगाए गंभीर आरोप, जांच शुरू

    पीएम आवास और बिजली सुविधा वाली जमीन पर चला बुलडोजर, ग्रामीणों ने वन विभाग पर लगाए गंभीर आरोप, जांच शुरू

    मध्य प्रदेश:के सिंगरौली जिले के चितरंगी तहसील अंतर्गत ग्राम भुईधरवा में वन विभाग की कार्रवाई के बाद भूमि अधिकार और बेदखली को लेकर नया विवाद सामने आया है। वन विभाग द्वारा कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान कई परिवारों के आशियाने प्रभावित हुए, जिसके बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग करते हुए न्याय की गुहार लगाई है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि वे कई दशकों से संबंधित भूमि पर निवास और खेती करते आ रहे हैं तथा अब अचानक की गई कार्रवाई से उनके सामने आवास और आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।

    ग्रामीणों का दावा है कि उनके परिवार वर्ष 1969 से इस भूमि पर रह रहे हैं और पीढ़ियों से खेती-बाड़ी कर जीवनयापन कर रहे हैं। उनका कहना है कि जिस जमीन को अब वन विभाग अतिक्रमित बता रहा है, उसी क्षेत्र में सरकारी योजनाओं के तहत प्रधानमंत्री आवास बनाए गए, हैंडपंप स्थापित किए गए और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं। ग्रामीणों के अनुसार इन परिस्थितियों ने उन्हें यह विश्वास दिलाया कि उनका निवास और खेती वैध प्रक्रिया के दायरे में है।

    मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब कुछ ग्रामीणों ने वन विभाग के एक बीट गार्ड पर पट्टा दिलाने के नाम पर रिश्वत लेने का आरोप लगाया। आरोप है कि एक ग्रामीण से नकद राशि और एक बकरा कथित रूप से लिए गए, लेकिन इसके बावजूद भूमि का पट्टा नहीं मिला। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, हालांकि ग्रामीणों ने इसकी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। विभाग की ओर से आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    प्रभावित परिवारों का कहना है कि खेती ही उनकी आय का मुख्य साधन है और बेदखली की कार्रवाई के बाद उनके सामने रोजगार और आवास दोनों का संकट उत्पन्न हो गया है। उन्होंने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय तक समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे चितरंगी तहसील कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन शुरू करेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी मांग केवल स्थायी समाधान और भूमि अधिकार से जुड़े मामलों के निष्पक्ष निपटारे की है।

    विवाद बढ़ने के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच के लिए राजस्व और वन विभाग की संयुक्त टीम गठित की गई है। जांच पूरी होने तक संबंधित कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगाने का निर्णय लिया गया है ताकि सभी तथ्यों का निष्पक्ष परीक्षण किया जा सके। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    प्रशासन ने यह भी आश्वासन दिया है कि यदि जांच में कोई व्यक्ति वास्तव में भूमिहीन पाया जाता है और पात्रता की शर्तें पूरी करता है तो नियमानुसार उसे भूमि से संबंधित लाभ दिलाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। जिन परिवारों के मकान कार्रवाई के दौरान क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनके पुनर्वास और वैकल्पिक आवास की व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है। साथ ही बरसात के मौसम को देखते हुए प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी रहने और भोजन की व्यवस्था स्थानीय स्तर पर कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    यह मामला अब केवल भूमि विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सरकारी योजनाओं के लाभ, वन भूमि पर निवास, प्रशासनिक कार्रवाई और कथित भ्रष्टाचार जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों से जुड़ गया है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि सभी पक्षों के दावों और उपलब्ध अभिलेखों की जांच के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा, ताकि किसी भी पात्र व्यक्ति के अधिकार प्रभावित न हों और कानून के अनुरूप उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

  • MP: भोपाल में पुलिस की निगरानी में खड़ी स्कूटी लेकर भागा युवक…. चोर को खुद चाबी देने के आरोप

    MP: भोपाल में पुलिस की निगरानी में खड़ी स्कूटी लेकर भागा युवक…. चोर को खुद चाबी देने के आरोप


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) में वाहन चेकिंग (Vehicle Checking) के दौरान पुलिस (Police) की कथित लापरवाही का मामला सामने आया है. आरोप है कि चेकिंग के दौरान पुलिस की निगरानी में खड़ी एक स्कूटी (Scooty) को एक अज्ञात युवक लेकर फरार हो गया. शिकायतकर्ता का दावा है कि स्कूटी की चाबी पुलिस के पास थी और कथित तौर पर एक पुलिसकर्मी ने वही चाबी अज्ञात युवक को सौंप दी. इस पूरे घटनाक्रम के सामने आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं. पीड़ित ने मामले की शिकायत भोपाल पुलिस कमिश्नर से करते हुए निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।

    जानकारी के अनुसार, घटना 13 जुलाई की रात करीब 8 बजे भोपाल के सेंट्रल लाइब्रेरी चौराहे पर हुई. शिकायतकर्ता नदीम आलम का आरोप है कि वाहन चेकिंग के दौरान ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उनकी सुजुकी बर्गमैन स्कूटी को रोक लिया था. उनका कहना है कि जांच के दौरान पुलिसकर्मियों ने स्कूटी की चाबी अपने पास रख ली थी और वाहन वहीं खड़ा था. शिकायतकर्ता का आरोप है कि कुछ देर बाद वहां मौजूद एक पुलिसकर्मी ने कथित तौर पर वही चाबी एक अज्ञात युवक को दे दी।


    चेकिंग के दौरान रोकी गई थी स्कूटी

    आरोप है कि युवक ने बिना किसी रोक-टोक के स्कूटी स्टार्ट की और मौके से फरार हो गया. नदीम आलम के मुताबिक, जब उन्होंने पुलिसकर्मियों से अपनी स्कूटी वापस मांगी, तब उन्हें पता चला कि वाहन वहां से गायब हो चुका है. उन्होंने मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों से जानकारी लेने की कोशिश की, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

    पीड़ित का कहना है कि यदि स्कूटी की चाबी पुलिस के कब्जे में थी, तो वाहन किसी दूसरे व्यक्ति के हाथ कैसे लग गया और वह वहां से कैसे निकल गया. घटना के बाद नदीम आलम ने पूरे मामले की शिकायत भोपाल पुलिस कमिश्नर से की है. उन्होंने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और उनकी स्कूटी जल्द से जल्द बरामद की जाए।

    शिकायत के बाद पुलिस महकमे में मचा हड़कंप
    शिकायतकर्ता का दावा है कि सेंट्रल लाइब्रेरी चौराहे पर लगे सीसीटीवी कैमरों में पूरी घटना रिकॉर्ड हुई है. उनका कहना है कि यदि सीसीटीवी फुटेज की जांच की जाए तो पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सकती है. इस मामले के सामने आने के बाद वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस की जिम्मेदारी और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं. यदि शिकायतकर्ता के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह ड्यूटी के दौरान गंभीर लापरवाही का मामला माना जा सकता है. फिलहाल इस मामले में पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. अब जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप कितने सही हैं और घटना के लिए कौन जिम्मेदार है।

  • MP Weather : एमपी में सामान्य से 11% कम बारिश, 35 जिलों में सूखे जैसे हालात, जाने आगे कैसा रहेगा मौसम?

    MP Weather : एमपी में सामान्य से 11% कम बारिश, 35 जिलों में सूखे जैसे हालात, जाने आगे कैसा रहेगा मौसम?


    भोपाल। मध्य प्रदेश में पिछले एक सप्ताह से कहीं भी भारी या अति भारी बारिश दर्ज नहीं की गई है। लगातार कमजोर मानसूनी गतिविधियों के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति बनने लगी है। सबसे अधिक असर पूर्वी मध्य प्रदेश पर दिखाई दे रहा है, जहां जबलपुर सहित 35 जिलों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है।

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में अब तक 241.8 मिमी (9.5 इंच) बारिश रिकॉर्ड की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 270.3 मिमी (10.6 इंच) होनी चाहिए थी। यानी अब तक प्रदेश में 11 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

    पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग सबसे अधिक प्रभावित हैं, जहां औसतन 24 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। इसके विपरीत पश्चिमी हिस्से के भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल संभाग में सामान्य से 2 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है।

    19 जुलाई से बदलेगा मौसम, तेज बारिश के आसार
    भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 19 जुलाई से उत्तर-पश्चिम भारत में नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) सक्रिय होने जा रहा है। इसके साथ ही बंगाल की खाड़ी में भी नया मौसम तंत्र विकसित हो रहा है और साइक्लोनिक सर्कुलेशन भी सक्रिय है। इन मौसम प्रणालियों के प्रभाव से मध्य प्रदेश में एक बार फिर तेज बारिश का दौर शुरू होने की संभावना जताई गई है।

    आज इन जिलों में हल्की बारिश और आंधी की संभावना
    मौसम विभाग के मुताबिक गुरुवार को इंदौर, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, भिंड, दतिया, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में हल्की बारिश के साथ आंधी चलने का अनुमान है।

    वहीं मुरैना, ग्वालियर, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, विदिशा, सागर, रायसेन, भोपाल, सीहोर, राजगढ़, शाजापुर, देवास, उज्जैन, आगर-मालवा, रतलाम, नीमच और मंदसौर में उमस और गर्मी का असर बना रह सकता है।

    जुलाई के दूसरे पखवाड़े में राहत मिलने की उम्मीद
    मौसम विभाग का कहना है कि प्रदेश स्तर पर मानसून की स्थिति फिलहाल संतोषजनक है, लेकिन पूर्वी जिलों में वर्षा की कमी कृषि और जल संसाधनों के लिहाज से चिंता का विषय बनी हुई है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, आगामी निम्न दाब प्रणाली की दिशा और उसकी तीव्रता तय करेगी कि मानसून कितनी तेजी से दोबारा सक्रिय होगा। यदि मौसम प्रणालियां अनुकूल रहीं तो जुलाई के दूसरे पखवाड़े में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है।

    जून के बाद जुलाई में भी बारिश का ग्राफ कमजोर
    मौसम विभाग के अनुसार जून में भी सामान्य से कम बारिश हुई थी। हालांकि जुलाई के शुरुआती दिनों में तेज बारिश के कारण वर्षा का आंकड़ा सुधरा था, लेकिन पिछले सात दिनों से भारी बारिश नहीं होने के कारण लगातार तीसरे दिन प्रदेश की कुल वर्षा सामान्य से नीचे बनी हुई है।

  • जबलपुर में आदिवासी युवक की संदिग्ध मौत पर उठे सवाल, पुलिस जांच पर छात्र संगठन ने जताई आपत्ति, निष्पक्ष कार्रवाई की मांग

    जबलपुर में आदिवासी युवक की संदिग्ध मौत पर उठे सवाल, पुलिस जांच पर छात्र संगठन ने जताई आपत्ति, निष्पक्ष कार्रवाई की मांग

    मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में एक आदिवासी युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसओ) ने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग उठाते हुए पुलिस प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। संगठन का कहना है कि यदि मामले में शीघ्र और पारदर्शी कार्रवाई नहीं की गई तो मृतक के परिजनों के साथ मिलकर व्यापक आंदोलन किया जाएगा। इस घटनाक्रम के बाद मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर भी गंभीर चर्चा शुरू हो गई है।

    जानकारी के अनुसार डुमना चौकी क्षेत्र के महंगवा गांव निवासी नितिन बैगा 8 जून की शाम घर से निकला था, जिसके बाद वह वापस नहीं लौटा। परिजनों ने उसकी गुमशुदगी की सूचना पुलिस को दी थी। बाद में उसका शव महंगवा स्थित खाटू श्याम मंदिर के पास जंगल में बरामद हुआ। घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।

    भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन के जिला उपाध्यक्ष राहुल पाण्डेय ने थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि युवक की गुमशुदगी की सूचना मिलने के बाद समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। संगठन का कहना है कि यदि शुरुआती स्तर पर गंभीरता से प्रयास किए जाते तो परिस्थितियां अलग हो सकती थीं। संगठन ने पुलिस से पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक तथ्यों को सार्वजनिक करने की मांग की है।

    संगठन का यह भी कहना है कि मामले की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए ताकि मृतक के परिवार को न्याय मिल सके। ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द उचित कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन मृतक के परिजनों के साथ मिलकर बड़े स्तर पर आंदोलन करेगा। संगठन ने प्रशासन से मामले की हर पहलू से जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।

    वहीं पुलिस का कहना है कि मामले की जांच नियमानुसार जारी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार युवक की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज होने के बाद जांच शुरू की गई थी और बाद में उसका शव बरामद हुआ। पुलिस ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फांसी लगने की पुष्टि हुई है। साथ ही रिपोर्ट के अनुसार मृतक के शरीर पर किसी प्रकार के बाहरी चोट के निशान नहीं पाए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों और सभी परिस्थितियों की विस्तृत जांच की जा रही है।

    पुलिस का यह भी कहना है कि परिजनों द्वारा निष्पक्ष जांच की मांग की गई है, जिसे गंभीरता से लिया गया है। जांच के दौरान सभी तथ्यों, परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि जांच पूरी होने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    यह मामला अब जांच के महत्वपूर्ण चरण में है और पुलिस की अंतिम जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। दूसरी ओर छात्र संगठन और परिजन निष्पक्ष जांच की मांग पर कायम हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष और प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।

  • सरकारी वकीलों की भर्ती पर हाई कोर्ट का सख्त रुख, पांचवीं बार भी जवाब नहीं देने पर महाधिवक्ता को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश

    सरकारी वकीलों की भर्ती पर हाई कोर्ट का सख्त रुख, पांचवीं बार भी जवाब नहीं देने पर महाधिवक्ता को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश

    मध्य प्रदेश में सरकारी वकीलों की नियुक्ति को लेकर उठे विवाद पर हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। लॉ ऑफिसर्स की नियुक्ति प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार की ओर से बार-बार जवाब प्रस्तुत नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई। लगातार कई अवसर दिए जाने के बावजूद जवाब दाखिल नहीं होने पर हाई कोर्ट ने महाधिवक्ता को अगली सुनवाई में स्वयं उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।

    मामला हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के संयुक्त सचिव योगेश सोनी द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में महाधिवक्ता कार्यालय के अंतर्गत 157 सरकारी लॉ ऑफिसर्स की नियुक्तियों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि चयन प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया और नियुक्तियों में मनमानी, पक्षपात तथा पात्रता संबंधी मानकों की अनदेखी की गई। याचिकाकर्ता ने पूरी भर्ती प्रक्रिया की न्यायिक जांच की मांग भी की है।

    याचिका में कहा गया है कि सरकारी लॉ ऑफिसर नियुक्त किए जाने के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार कम से कम दस वर्ष का अधिवक्ता अनुभव होना आवश्यक है। आरोप है कि नियुक्त किए गए कुछ लोगों के पास निर्धारित अनुभव उपलब्ध नहीं था, फिर भी उन्हें सरकारी वकील नियुक्त कर दिया गया। इन आरोपों के आधार पर याचिकाकर्ता ने नियुक्तियों की वैधता पर प्रश्न उठाते हुए न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की है।

    सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी सामने आया कि पूर्व में जारी न्यायालय के नोटिस संबंधित पक्षों तक पहुंचाने में भी कठिनाई आई। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि कुछ अवसरों पर नोटिस स्वीकार नहीं किए गए। अदालत ने इस तथ्य को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले की गंभीरता पर चिंता व्यक्त की। इसके बाद राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए कई अवसर दिए गए, लेकिन निर्धारित समय में जवाब प्रस्तुत नहीं किया जा सका।

    लगातार देरी पर असंतोष जताते हुए हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब मामले में और विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा। अदालत ने महाधिवक्ता को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह बताने का निर्देश दिया है कि अब तक जवाब क्यों प्रस्तुत नहीं किया गया और नियुक्तियों से जुड़े आरोपों पर सरकार का आधिकारिक पक्ष क्या है। अदालत का यह रुख इस मामले को गंभीरता से लिए जाने का संकेत माना जा रहा है।

    मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त को निर्धारित की गई है। इस दौरान महाधिवक्ता की व्यक्तिगत उपस्थिति के साथ राज्य सरकार से विस्तृत जवाब अपेक्षित रहेगा। अदालत में प्रस्तुत होने वाले उत्तर के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया तय होगी। फिलहाल इस मामले में किसी भी पक्ष के आरोपों पर न्यायालय ने अंतिम टिप्पणी नहीं की है और विवाद विचाराधीन है।

    यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सरकारी लॉ ऑफिसर्स राज्य सरकार की ओर से विभिन्न न्यायालयों में महत्वपूर्ण मामलों की पैरवी करते हैं। ऐसे में उनकी नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता, पात्रता और नियमों के पालन को लेकर उठे प्रश्नों पर न्यायिक परीक्षण की प्रक्रिया अब आगे बढ़ेगी। अगली सुनवाई में अदालत के समक्ष प्रस्तुत होने वाले जवाब पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

  • प्रेम, लालच और विश्वासघात की खौफनाक साजिश, गोद ली हुई 8 साल की बेटी की गवाही से खुला नर्स हत्याकांड का राज, तीनों आरोपियों को मिली उम्रकैद

    प्रेम, लालच और विश्वासघात की खौफनाक साजिश, गोद ली हुई 8 साल की बेटी की गवाही से खुला नर्स हत्याकांड का राज, तीनों आरोपियों को मिली उम्रकैद

     मध्य प्रदेश के खंडवा में वर्ष 2013 में सामने आए चर्चित नर्स ट्रेजा पारे हत्याकांड ने एक बार फिर यह साबित किया कि किसी भी सुनियोजित अपराध के पीछे छिपा सच अंततः सामने आ ही जाता है। शुरुआत में इस घटना को सड़क हादसे का रूप देने की कोशिश की गई थी, लेकिन आठ वर्ष की गोद ली हुई बेटी की गवाही, वैज्ञानिक साक्ष्यों और पुलिस जांच ने पूरे षड्यंत्र का पर्दाफाश कर दिया। बाद में अदालत ने इस मामले में तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

    पुलिस जांच के दौरान सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब बच्ची ने बताया कि घटना के समय कार में मौजूद व्यक्ति वही नहीं था, जिसका पहले संदेह जताया जा रहा था। उसकी जानकारी के आधार पर पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया और तीसरे आरोपी तक पहुंचने में सफलता हासिल की। इसके बाद कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच की गई, जिससे आरोपियों के बीच लगातार संपर्क होने की पुष्टि हुई। जांच में सामने आया कि पूरी वारदात एक पूर्व नियोजित साजिश थी।

    पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान यह भी स्पष्ट हुआ कि ट्रेजा पारे और एक पत्रकार के बीच लंबे समय से निजी संबंध थे। आरोप है कि इस दौरान ट्रेजा ने उस पर आर्थिक रूप से भी भरोसा किया और कई बार बड़ी रकम देने के साथ उसके लिए कार और बुलेट मोटरसाइकिल तक खरीदी। समय के साथ दोनों के रिश्तों में तनाव बढ़ा और विवाद गहराता चला गया। जांच में यह भी सामने आया कि निजी जीवन से जुड़ी कुछ जानकारियां सामने आने के बाद दोनों के बीच विश्वास पूरी तरह टूट गया था।

    पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, विवाद बढ़ने पर ट्रेजा ने आरोपी के खिलाफ शिकायत तैयार कर थाने में जमा कराने के लिए अपने ड्राइवर को दी थी। आरोप है कि शिकायत पुलिस तक पहुंचाने के बजाय ड्राइवर ने इसकी जानकारी आरोपी को दे दी। इसके बाद कथित रूप से शिकायत को रोकने और कानूनी कार्रवाई से बचने के उद्देश्य से हत्या की साजिश रची गई। जांच में यह आरोप भी सामने आया कि वारदात को अंजाम देने के लिए सुपारी दी गई थी।

    घटना वाले दिन आरोपियों ने ट्रेजा और उनकी बेटी को इलाज के बहाने अपने साथ ले जाकर सुनसान इलाके में पहुंचाया। वहीं कथित रूप से ट्रेजा की हत्या कर दी गई और पूरे मामले को सड़क दुर्घटना जैसा दिखाने का प्रयास किया गया। बच्ची भी हमले की शिकार हुई, लेकिन वह जीवित बच गई। बाद में उसी की गवाही ने पूरे मामले की दिशा बदल दी और पुलिस को वास्तविक घटनाक्रम तक पहुंचने में मदद मिली।

    मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने प्रत्यक्ष गवाही, तकनीकी साक्ष्य और परिस्थितिजन्य प्रमाण अदालत के सामने प्रस्तुत किए। अदालत ने पाया कि उपलब्ध साक्ष्य आरोपियों की भूमिका को प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त हैं। इसके आधार पर वर्ष 2016 में खंडवा जिला न्यायालय ने तीनों आरोपियों को ट्रेजा पारे की हत्या और बच्ची की हत्या के प्रयास का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

    यह मामला इस बात का भी उदाहरण माना गया कि किसी अपराध की जांच में प्रत्यक्षदर्शी गवाही, वैज्ञानिक साक्ष्य और निष्पक्ष विवेचना कितनी महत्वपूर्ण होती है। एक मासूम बच्ची के साहस और पुलिस की विस्तृत जांच ने उस साजिश का खुलासा किया, जिसे दुर्घटना का रूप देकर हमेशा के लिए छिपाने की कोशिश की गई थी।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बोले- विश्व स्तरीय विज्ञान कृतियां नई पीढ़ी को देंगी नवाचार की नई उड़ान

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बोले- विश्व स्तरीय विज्ञान कृतियां नई पीढ़ी को देंगी नवाचार की नई उड़ान

    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में विज्ञान शिक्षा और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने आंचलिक विज्ञान केंद्र में अत्याधुनिक अंतरिक्ष अन्वेषण दीर्घा का लोकार्पण किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने गैलरी का अवलोकन किया और अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े आधुनिक प्रदर्शों को करीब से देखा। कार्यक्रम में विभिन्न वैज्ञानिक मॉडल और तकनीकी प्रदर्शनियों की भी सराहना की गई।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह अंतरिक्ष अन्वेषण दीर्घा प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने बताया कि कम लागत में तैयार की गई इस गैलरी में अधिकतम वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है। यहां स्थापित विभिन्न वैज्ञानिक कृतियां विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान करने के साथ उन्हें विज्ञान और नवाचार की ओर प्रेरित करेंगी। उन्होंने कहा कि विज्ञान से जुड़ी ये प्रस्तुतियां विश्व स्तरीय हैं और प्रदेश की वैज्ञानिक पहचान को नई मजबूती देंगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने विज्ञान और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। भारत आज स्पेस टेक्नोलॉजी से लेकर अनुसंधान और नवाचार तक नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। ऐसे समय में भोपाल में अंतरिक्ष अन्वेषण दीर्घा की स्थापना विद्यार्थियों और युवाओं के लिए प्रेरणादायक पहल साबित होगी। उन्होंने कहा कि यह गैलरी भविष्य की वैज्ञानिक पीढ़ी तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि मध्य प्रदेश देश के विकास और सांस्कृतिक विरासत दोनों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। उन्होंने कहा कि यह नई दीर्घा विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान के नवीनतम ज्ञान, शोध और तकनीकों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बनेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि यह पहल राज्य की स्पेस पॉलिसी को मजबूती देने के साथ वैज्ञानिक सोच और नवाचार की संस्कृति को भी बढ़ावा देगी। नई शिक्षा नीति में भी स्पेस टेक्नोलॉजी को विशेष महत्व दिया गया है और यह गैलरी उसी दिशा में एक सार्थक प्रयास है।

    आंचलिक विज्ञान केंद्र में विकसित ‘हॉल ऑफ स्पेस एक्सप्लोरेशन’ को अत्याधुनिक और अनुभवात्मक विज्ञान गैलरियों में शामिल किया गया है। इसे राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद और भोपाल जिला प्रशासन के सहयोग से विकसित किया गया है। गैलरी में आगंतुकों को ब्रह्मांड की उत्पत्ति से लेकर आधुनिक अंतरिक्ष अभियानों तक की वैज्ञानिक यात्रा को आकर्षक और इंटरैक्टिव तरीके से समझने का अवसर मिलेगा। यहां प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक खगोल विज्ञान और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के साथ जोड़कर प्रस्तुत किया गया है।

    गैलरी में 30 से अधिक इंटरैक्टिव और इमर्सिव प्रदर्श स्थापित किए गए हैं। इनमें स्पेस फ्लाइट सिम्युलेटर, स्पेस वॉक, तीन-आयामी खगोलीय पिंडों का अवलोकन, अंतरिक्ष अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग, स्पेस टूरिज्म, रॉकेट और अंतरिक्ष यान की कार्यप्रणाली, कक्षीय यांत्रिकी तथा अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन जैसी अवधारणाओं को सरल और रोचक तरीके से प्रदर्शित किया गया है। साथ ही भारत की अंतरिक्ष यात्रा को भी विस्तार से दर्शाया गया है, जिसमें आर्यभट्ट, चंद्रयान, मंगलयान, आदित्य-एल1 और आगामी गगनयान मिशन जैसी उपलब्धियों को प्रमुखता से शामिल किया गया है।

    राज्य सरकार का मानना है कि यह अंतरिक्ष अन्वेषण दीर्घा विद्यार्थियों, शोधार्थियों और आम नागरिकों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, जिज्ञासा, नवाचार और अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी। साथ ही यह मध्य प्रदेश की स्पेस पॉलिसी के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने और विज्ञान आधारित शिक्षा को नई दिशा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

  • जनकल्याण और बुनियादी ढांचे पर सरकार का बड़ा निवेश, 8,445 करोड़ रुपये शहरी विकास के लिए स्वीकृत, मूंग उपार्जन और सिंचाई परियोजनाओं को भी मिली मंजूरी

    जनकल्याण और बुनियादी ढांचे पर सरकार का बड़ा निवेश, 8,445 करोड़ रुपये शहरी विकास के लिए स्वीकृत, मूंग उपार्जन और सिंचाई परियोजनाओं को भी मिली मंजूरी

    मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और जनकल्याण योजनाओं को गति देने के उद्देश्य से 10 हजार 800 करोड़ रुपये से अधिक के विभिन्न विकास प्रस्तावों को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में शहरी अधोसंरचना, सिंचाई, कृषि, महिला एवं बाल विकास तथा प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सरकार का मानना है कि इन फैसलों से प्रदेश के विकास कार्यों को नई दिशा मिलेगी और विभिन्न वर्गों को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होगा।

    बैठक में सबसे बड़ी स्वीकृति नगरीय क्षेत्रों के अधोसंरचना विकास के लिए दी गई। राज्य सरकार ने आगामी पांच वर्षों के लिए 8 हजार 445 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की है। यह धनराशि नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषद क्षेत्रों में सड़क, जल निकासी, पेयजल, सार्वजनिक सुविधाओं और अन्य आधारभूत विकास परियोजनाओं पर खर्च की जाएगी। साथ ही स्थानीय निकायों द्वारा विकास कार्यों के लिए लिए गए ऋणों के पुनर्भुगतान में भी इसका उपयोग किया जाएगा, जिससे शहरी विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी।

    मंत्रिपरिषद ने किसानों के हित में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया। रबी वर्ष 2023-24 के दौरान लक्ष्य से अधिक खरीदी गई मूंग के भुगतान के लिए 1,587 करोड़ रुपये की निःशुल्क शासकीय प्रत्याभूति उपलब्ध कराने को मंजूरी दी गई। इस निर्णय के तहत विभिन्न बैंकों से ली गई साख सीमा के शेष दायित्वों के लिए सरकारी गारंटी प्रदान की जाएगी। सरकार का उद्देश्य किसानों के हितों की रक्षा करना और उपार्जन प्रक्रिया को वित्तीय रूप से सुचारु बनाए रखना है।

    सिंचाई सुविधाओं के विस्तार को लेकर भी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राजगढ़ जिले की कुण्डलिया वृहद सिंचाई परियोजना के संचालन को वर्ष 2031 तक जारी रखने के लिए 245 करोड़ 45 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस परियोजना के माध्यम से राजगढ़ और आगर-मालवा जिलों के लगभग 1 लाख 39 हजार 600 हेक्टेयर क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के जरिए सिंचाई क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है। सरकार का मानना है कि इससे कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी और किसानों को स्थायी सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी।

    बैठक में महिला एवं बाल विकास से जुड़ा भी अहम निर्णय लिया गया। टेक-होम राशन के उत्पादन और वितरण की व्यवस्था को राज्य आजीविका फोरम से वापस लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग को सौंपने का निर्णय लिया गया है। अंतरिम व्यवस्था के तहत स्व-सहायता समूहों के माध्यम से पूरक पोषण आहार उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही भविष्य में केंद्र सरकार के नए दिशा-निर्देशों के अनुरूप स्थायी व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे पोषण योजनाओं का संचालन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सके।

    मंत्रिपरिषद ने वाणिज्यिक कर विभाग की स्थापना योजनाओं के संचालन के लिए भी 521 करोड़ 4 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। यह राशि आगामी पांच वर्षों तक मुख्यालय, जिला और परिक्षेत्रीय कार्यालयों के संचालन, कर्मचारियों के वेतन-भत्तों, कार्यालय व्यय, व्यावसायिक सेवाओं तथा आवश्यक संसाधनों के रखरखाव पर खर्च की जाएगी। सरकार का मानना है कि इन निर्णयों से प्रशासनिक व्यवस्था और सेवा वितरण प्रणाली को मजबूती मिलेगी।

    राज्य सरकार का कहना है कि शहरी विकास, कृषि, सिंचाई, पोषण और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े इन फैसलों का उद्देश्य प्रदेश के समग्र विकास को नई गति देना है। विभिन्न विभागों को मिली वित्तीय स्वीकृतियों के माध्यम से विकास परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन, किसानों के हितों की सुरक्षा, शहरी सुविधाओं के विस्तार और जनकल्याण कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होने की उम्मीद है।

  • मध्य प्रदेश के 41 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों को बड़ी सौगात, राज्य सरकार इस वर्ष बांटेगी 139 करोड़ रुपये का बोनस, वन विभाग ने शुरू की तैयारियां

    मध्य प्रदेश के 41 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों को बड़ी सौगात, राज्य सरकार इस वर्ष बांटेगी 139 करोड़ रुपये का बोनस, वन विभाग ने शुरू की तैयारियां

    मध्य प्रदेश सरकार ने तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए इस वर्ष बड़ी आर्थिक राहत का ऐलान करते हुए 139 करोड़ रुपये के बोनस वितरण की तैयारी शुरू कर दी है। राज्य के लगभग 41 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों को इस योजना का लाभ मिलेगा। वन विभाग के अंतर्गत कार्यरत राज्य लघु वनोपज संघ ने बोनस वितरण की पूरी कार्ययोजना तैयार कर ली है और इस संबंध में विस्तृत प्रस्तुतीकरण भी मुख्य सचिव अनुराग जैन के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। सरकार का उद्देश्य वन क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों की आय बढ़ाना और उन्हें समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है।

    राज्य में तेंदूपत्ता संग्रहण लाखों ग्रामीण और वनवासी परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार है। हर वर्ष संग्रहण सीजन के दौरान बड़ी संख्या में लोग इस कार्य से जुड़ते हैं और इससे होने वाली आय उनके परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने बोनस वितरण की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की तैयारी शुरू कर दी है ताकि पात्र संग्राहकों तक राशि शीघ्र पहुंचाई जा सके।

    वन विभाग की योजना के अनुसार वर्ष 2026-27 के लिए 17.72 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण का भौतिक लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए विभिन्न वन मंडलों में आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। अधिकारियों का मानना है कि बेहतर प्रबंधन और संगठित व्यवस्था के माध्यम से संग्रहण कार्य को प्रभावी ढंग से संचालित किया जाएगा, जिससे संग्राहकों को भी अधिक लाभ मिल सके।

    सरकार ने संग्रहण वर्ष 2026 के दौरान तेंदूपत्ता संग्रहण करने वाले 41 लाख संग्राहकों को कुल 708 करोड़ रुपये संग्रहण पारिश्रमिक के रूप में देने की व्यवस्था की है। इसके अतिरिक्त संग्रहण वर्ष 2024 के लाभांश का 75 प्रतिशत हिस्सा, जो 139 करोड़ रुपये है, इस वर्ष बोनस के रूप में वितरित किया जाएगा। इससे लाखों परिवारों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता मिलेगी और उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

    वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार बोनस वितरण की प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पात्र हितग्राहियों की जानकारी का सत्यापन, भुगतान से जुड़ी औपचारिकताओं का समय पर निष्पादन और सभी आवश्यक प्रशासनिक तैयारियां तेजी से पूरी की जा रही हैं। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बोनस राशि बिना किसी अनावश्यक विलंब के लाभार्थियों तक पहुंच सके।

    राज्य सरकार का मानना है कि तेंदूपत्ता संग्रहण केवल वन उपज से जुड़ी गतिविधि नहीं, बल्कि ग्रामीण और आदिवासी अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार भी है। इसलिए इस क्षेत्र में कार्यरत संग्राहकों को नियमित पारिश्रमिक और लाभांश उपलब्ध कराना उनकी आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है। सरकार भविष्य में भी लघु वनोपज आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहित करने, वनवासी परिवारों की आय बढ़ाने और रोजगार के अवसरों का विस्तार करने के लिए विभिन्न योजनाओं पर कार्य करती रहेगी। बोनस वितरण की इस पहल से प्रदेश के लाखों तेंदूपत्ता संग्राहकों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिलेगा और वन आधारित आजीविका को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषित किए कई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और हजारों रोजगार देने वाली परियोजनाएं

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषित किए कई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और हजारों रोजगार देने वाली परियोजनाएं

    मध्य प्रदेश ने तकनीकी और डिजिटल उद्योगों के क्षेत्र में अपनी विकास रणनीति को नई गति देते हुए एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 3.0 के दौरान कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। राज्य सरकार ने सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर और आईटी अवसंरचना के विस्तार को प्राथमिकता देते हुए निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने का भरोसा जताया। कॉन्क्लेव में लगभग 40 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनसे राज्य में 34 हजार से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होने का अनुमान है। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी 51 प्रमुख गतिविधियों का आयोजन किया गया।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार भविष्य की तकनीकों को अपनाने और उद्योगों के लिए आधुनिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने पर लगातार काम कर रही है। इसी दिशा में प्रदेश में सेमीकंडक्टर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा, जो कौशल विकास, अनुसंधान, उद्योगों के साथ सहयोग और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देगा। इसके साथ ही एवीजीसी-एक्सआर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना भी की जाएगी, जिससे एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स और एक्सटेंडेड रियलिटी जैसे क्षेत्रों को प्रोत्साहन मिलेगा।

    राज्य सरकार ने आईटी अवसंरचना को मजबूत करने के लिए कई नई परियोजनाओं की भी घोषणा की है। भोपाल आईटी पार्क में नया आईटी टॉवर विकसित किया जाएगा, जहां जीसीसी, आईटी और डिजिटल सेवा कंपनियों के लिए आधुनिक प्लग-एंड-प्ले कार्यालय उपलब्ध होंगे। भोपाल के कोलार क्षेत्र में भी इसी सुविधा से युक्त नया आईटी पार्क बनाया जाएगा, ताकि नई तकनीकी कंपनियां कम समय में अपना संचालन शुरू कर सकें। वहीं इंदौर के सुपर कॉरिडोर क्षेत्र में लगभग तीन लाख वर्ग फीट निर्मित क्षेत्र वाला अत्याधुनिक आईटी पार्क विकसित किया जाएगा, जहां विश्वस्तरीय डिजिटल और आईटी कंपनियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि भारत सरकार के सहयोग से मंथन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और ग्लोबल स्किल्स पार्क में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी स्थापित किए जाएंगे। इन संस्थानों के माध्यम से नवाचार, अनुसंधान, उद्योग-अकादमिक सहयोग और आधुनिक तकनीकी कौशल को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश साइंस सिटी, डीप टेक पार्क, डेटा सेंटर और एआई आधारित परियोजनाओं के माध्यम से नई तकनीकों को तेजी से अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

    सरकार के अनुसार ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 के बाद तकनीकी क्षेत्र में 12 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश पर काम शुरू हो चुका है। वहीं पिछले दो टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव के माध्यम से राज्य को 46 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि आठ देशों की दस प्रमुख कंपनियों की 28 हजार 200 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं वर्तमान में ग्राउंडब्रेकिंग चरण में हैं। इनमें एआई-रेडी डेटा सेंटर, फूड प्रोसेसिंग, फार्मास्यूटिकल्स और स्पेशियलिटी फिल्म्स जैसे क्षेत्रों की परियोजनाएं शामिल हैं। इनमें स्पेन की कंपनी द्वारा भोपाल में बड़े एआई-रेडी डेटा सेंटर की स्थापना भी प्रस्तावित है।

    कॉन्क्लेव के दौरान आठ कंपनियों को भूमि आवंटन के आशय-पत्र भी सौंपे गए। इन परियोजनाओं में 203.58 करोड़ रुपये का निवेश और 1,242 नए रोजगार सृजित होने का अनुमान है। यह निवेश इंदौर के सिंहासा आईटी पार्क और भोपाल के बड़वई आईटी पार्क में आईटी, आईटीईएस, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, आईटी अवसंरचना और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करेगा। कार्यक्रम के दौरान गूगल प्ले के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल क्षमता विकास के क्षेत्र में सहयोग को लेकर समझौता भी किया गया। राज्य सरकार का मानना है कि इन पहलों से मध्य प्रदेश तकनीकी निवेश, नवाचार और डिजिटल उद्योगों के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित करेगा।