Category: Madhya Pradesh

  • एमपी में भीषण गर्मी का कहर स्कूल खुले बच्चे परेशान ग्वालियर उज्जैन समेत कई जिलों में लू का अलर्ट

    एमपी में भीषण गर्मी का कहर स्कूल खुले बच्चे परेशान ग्वालियर उज्जैन समेत कई जिलों में लू का अलर्ट


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में इन दिनों भीषण गर्मी ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है और सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को उठानी पड़ रही है। प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है इसके बावजूद स्कूलों में अब तक ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित नहीं किया गया है। राजधानी भोपाल के सेंट जोसेफ स्कूल को छोड़ दें तो बाकी जगहों पर सिर्फ स्कूल का समय कम किया गया है लेकिन बच्चे दोपहर की तेज धूप में ही घर लौटने को मजबूर हैं जिससे अभिभावकों की चिंता लगातार बढ़ रही है।

    मौसम की बात करें तो भारत मौसम विज्ञान विभाग के भोपाल केंद्र ने शनिवार को प्रदेश के 20 से अधिक जिलों में लू चलने की चेतावनी जारी की है। इनमें ग्वालियर उज्जैन मुरैना भिंड दतिया टीकमगढ़ छतरपुर सतना रीवा मंडला बालाघाट नीमच मंदसौर रतलाम धार और अलीराजपुर जैसे जिले शामिल हैं जहां तापमान और गर्म हवाओं का असर तेज बना हुआ है।

    शुक्रवार को प्रदेश का सबसे गर्म क्षेत्र खजुराहो रहा जहां तापमान 43.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जबकि नौगांव में 43.5 डिग्री तापमान रहा। इसके अलावा रतलाम में 43.2 डिग्री सतना और टीकमगढ़ में 42.8 डिग्री दमोह में 42.6 डिग्री और रीवा मंडला में 42.5 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। बड़े शहरों में ग्वालियर सबसे गर्म रहा जहां पारा 42.1 डिग्री पहुंच गया जबकि भोपाल में 41.6 डिग्री इंदौर में 41.2 डिग्री जबलपुर में 42 डिग्री और उज्जैन में 41.5 डिग्री तापमान दर्ज किया गया।

    हालांकि राहत की उम्मीद भी बनी हुई है। मौसम विभाग के अनुसार 27 और 28 अप्रैल को ग्वालियर चंबल जबलपुर और सागर संभाग के जिलों में गरज चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। इसके पीछे पश्चिमी विक्षोभ को कारण बताया गया है जो मौसम में बदलाव ला सकता है।

    गर्मी के बढ़ते असर को देखते हुए मौसम विभाग ने लोगों के लिए एडवायजरी भी जारी की है। इसमें पर्याप्त मात्रा में पानी पीने शरीर को हाइड्रेट रखने दोपहर में तेज धूप से बचने और हल्के रंग के सूती कपड़े पहनने की सलाह दी गई है। खास तौर पर बच्चों और बुजुर्गों को अतिरिक्त सावधानी बरतने के लिए कहा गया है क्योंकि वे गर्मी के प्रभाव से जल्दी प्रभावित होते हैं।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अप्रैल और मई को साल के सबसे गर्म महीने माना जाता है और अप्रैल के दूसरे पखवाड़े से गर्मी अपने चरम पर पहुंचने लगती है। पिछले वर्षों के आंकड़े भी यही बताते हैं कि इस दौरान तापमान कई बार रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच जाता है। ऐसे में मौजूदा हालात को देखते हुए आने वाले दिनों में गर्मी और बढ़ने की संभावना है जिससे लोगों को अभी और सतर्क रहने की जरूरत है।

  • सीएम मोहन यादव ने जानकी नवमी पर दीं शुभकामनाएं मां सीता की कृपा से सुख समृद्धि की कामना

    सीएम मोहन यादव ने जानकी नवमी पर दीं शुभकामनाएं मां सीता की कृपा से सुख समृद्धि की कामना


    भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संदेश सामने आया है जहां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को पावन जानकी नवमी के अवसर पर शुभकामनाएं दी हैं। इस विशेष दिन पर उन्होंने जनक नंदिनी माता सीता के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए सभी के जीवन में सुख समृद्धि और खुशहाली की मंगल कामना की।

    मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि माता सीता भारतीय संस्कृति और आदर्शों की प्रतीक हैं जिनका जीवन त्याग धैर्य और मर्यादा का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने प्रार्थना की कि मां सीता की कृपा से प्रदेश के हर परिवार में शांति समृद्धि और आनंद की वृद्धि हो तथा समाज में सद्भाव और सकारात्मकता का वातावरण बना रहे।

    उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे पावन पर्व हमें अपने सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ने और जीवन में नैतिकता तथा आदर्शों को अपनाने की प्रेरणा देते हैं। माता सीता का जीवन हमें कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश देता है जो आज के समय में और भी प्रासंगिक हो जाता है।

    उल्लेखनीय है कि जानकी नवमी वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है और इसे माता सीता के अवतरण दिवस के रूप में विशेष महत्व प्राप्त है। इस दिन श्रद्धालु पूजा अर्चना कर मां सीता से परिवार की सुख समृद्धि और जीवन में शांति की कामना करते हैं।

    मुख्यमंत्री का यह संदेश प्रदेशवासियों के लिए आस्था और प्रेरणा का प्रतीक बनकर सामने आया है जो न केवल धार्मिक भावना को सुदृढ़ करता है बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करता है।

  • महाकाल की नगरी में विजय सिन्हा भक्ति में लीन भस्म आरती के साक्षी बन मांगी देश और बिहार की खुशहाली

    महाकाल की नगरी में विजय सिन्हा भक्ति में लीन भस्म आरती के साक्षी बन मांगी देश और बिहार की खुशहाली


    उज्जैन । मध्यप्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन एक बार फिर आध्यात्मिक आस्था का केंद्र बनी जब बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने अपने प्रवास के दौरान विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में पहुंचकर बाबा महाकाल के दर्शन किए। कालों के काल कहे जाने वाले भगवान महाकाल की शरण में पहुंचे उपमुख्यमंत्री पूरी तरह भक्ति भाव में डूबे नजर आए और उन्होंने मंदिर परिसर में कुछ समय बिताकर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया।

    मंदिर पहुंचने के बाद विजय कुमार सिन्हा ने सबसे पहले नंदी हॉल में बैठकर ध्यान लगाया जहां वे कुछ समय तक गहन भक्ति में लीन रहे। इस दौरान उन्होंने मन की शांति और आध्यात्मिक संतुलन का अनुभव किया। इसके बाद उन्होंने विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती के दिव्य और अलौकिक दृश्य के दर्शन किए जो उज्जैन की पहचान मानी जाती है। भस्म आरती के साक्षी बनने के बाद उन्होंने गर्भगृह की चौखट से भगवान महाकाल के दर्शन कर अपने जीवन को धन्य माना।

    परंपराओं का पालन करते हुए उपमुख्यमंत्री ने बाबा महाकाल को जल अर्पित किया और पूरे विधि विधान के साथ पूजन अर्चन किया। इस दौरान उन्होंने बिहार राज्य की प्रगति और समृद्धि के साथ साथ पूरे देशवासियों के सुख समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। उन्होंने मां भारती के गौरव को बढ़ाने और राष्ट्र के उज्जवल भविष्य के लिए भी प्रार्थना की।

    विजय कुमार सिन्हा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि सनातन संस्कृति की जड़ें अत्यंत गहरी हैं और महाकाल की ऊर्जा समाज में सकारात्मकता और संतुलन स्थापित करने का आधार है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे आध्यात्मिक स्थलों से व्यक्ति को नई ऊर्जा और प्रेरणा मिलती है जो उसे समाज और राष्ट्र के लिए बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करती है।

    उन्होंने विशेष रूप से महिला शक्ति के सशक्तिकरण और समाज के समग्र विकास के लिए भी प्रार्थना की और कहा कि एक सशक्त समाज के निर्माण में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही उन्होंने मंदिर की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि यहां की सुव्यवस्थित व्यवस्था और अनुशासन हर श्रद्धालु को एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है।

    उज्जैन में उपमुख्यमंत्री का यह दौरा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं बल्कि आस्था और संस्कृति के प्रति उनकी गहरी श्रद्धा को दर्शाता है। यह यात्रा इस बात का प्रतीक है कि देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले जनप्रतिनिधि भी भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं से गहराई से जुड़े हुए हैं और समय समय पर इन पवित्र स्थलों पर पहुंचकर राष्ट्र और समाज के कल्याण की कामना करते हैं।

  • जमीनी अनुभव से बनेगा मजबूत प्रशासन सीएम मोहन यादव ने 8 IAS अधिकारियों को सौंपी अहम जिम्मेदारी

    जमीनी अनुभव से बनेगा मजबूत प्रशासन सीएम मोहन यादव ने 8 IAS अधिकारियों को सौंपी अहम जिम्मेदारी


    भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल सामने आई है जहां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने युवा प्रशासनिक अधिकारियों को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने के उद्देश्य से एक दूरदर्शी निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने 2025 बैच के 8 युवा आईएएस अधिकारियों को उनकी पहली पदस्थापना के रूप में आदिवासी बहुल और ग्रामीण जिलों में सहायक कलेक्टर के पद पर नियुक्त किया है। यह कदम केवल एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि एक व्यापक सोच का हिस्सा है जिसका उद्देश्य भविष्य के प्रशासन को अधिक संवेदनशील और प्रभावी बनाना है।

    सरकार का मानना है कि प्रशासनिक सेवा में आने वाले युवा अधिकारियों के लिए केवल किताबों का ज्ञान पर्याप्त नहीं होता बल्कि उन्हें वास्तविक परिस्थितियों में काम करने का अनुभव भी उतना ही जरूरी है। इसी सोच के तहत इन अधिकारियों को ऐसे जिलों में भेजा गया है जहां विकास की चुनौतियां अधिक जटिल और बहुआयामी हैं। आदिवासी क्षेत्रों में काम करते हुए ये अधिकारी न केवल शासन की योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करेंगे बल्कि स्थानीय समाज की वास्तविक समस्याओं को समझने का भी अवसर प्राप्त करेंगे।

    जिन अधिकारियों को पहली पोस्टिंग दी गई है उनमें आयुषी बंसल को झाबुआ आशी शर्मा को धार माधव अग्रवाल को बड़वानी सौम्या मिश्रा को सिंगरौली श्लोक वाइकर को कटनी शिल्पा चौहान को खंडवा खोट पुष्पराज को बैतूल और शैलेन्द्र चौधरी को मंडला में सहायक कलेक्टर के रूप में जिम्मेदारी सौंपी गई है। ये सभी जिले आदिवासी और ग्रामीण विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जाते हैं जहां प्रशासनिक हस्तक्षेप की आवश्यकता लगातार बनी रहती है।

    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का स्पष्ट मानना है कि जब युवा अधिकारी अपने करियर की शुरुआत में ही इन क्षेत्रों में कार्य करेंगे तो उन्हें विकास की असली तस्वीर देखने और समझने का अवसर मिलेगा। यहां की सामाजिक संरचना स्थानीय भाषा सांस्कृतिक विविधता और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसे पहलुओं से रूबरू होकर वे अधिक संवेदनशील निर्णय लेने में सक्षम बनेंगे। इससे भविष्य में नीति निर्माण और क्रियान्वयन दोनों स्तरों पर सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे।

    यह पहल प्रशासनिक प्रशिक्षण की एक नई दिशा को भी दर्शाती है जहां अनुभव को प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार का उद्देश्य है कि ये युवा अधिकारी सीधे जनता से संवाद स्थापित करें उनकी समस्याओं को समझें और समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाएं। इससे न केवल योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन होगा बल्कि शासन और जनता के बीच विश्वास भी मजबूत होगा।

    कुल मिलाकर यह निर्णय मध्यप्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जमीनी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह पहल आने वाले समय में राज्य के विकास मॉडल को नई दिशा दे सकती है जहां युवा ऊर्जा और अनुभव का संतुलन बेहतर शासन की नींव तैयार करेगा।

  • चार साल बाद दी चुनौती नहीं मिली राहत हाईकोर्ट ने डबरा नगर पालिका चुनाव याचिका खारिज की

    चार साल बाद दी चुनौती नहीं मिली राहत हाईकोर्ट ने डबरा नगर पालिका चुनाव याचिका खारिज की


    ग्वालियर । मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले के डबरा नगर पालिका से जुड़े बहुचर्चित चुनावी विवाद में हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए अध्यक्ष लक्ष्मीबाई को बड़ी राहत दी है। ग्वालियर हाईकोर्ट ने चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया और स्पष्ट कर दिया कि देर से न्याय की मांग करने वालों को राहत नहीं दी जा सकती।

    यह मामला वर्ष 2022 के नगर पालिका चुनाव से जुड़ा हुआ था जिसमें लक्ष्मीबाई अध्यक्ष चुनी गई थीं। इस चुनाव को डबरा नगर पालिका के उपाध्यक्ष सत्येंद्र कुमार दुबे और अन्य पार्षदों द्वारा चुनौती दी गई थी। याचिका में यह तर्क रखा गया कि अध्यक्ष के चुनाव का गजट नोटिफिकेशन निर्धारित समय सीमा यानी 30 दिनों के भीतर जारी नहीं किया गया, इसलिए पूरे चुनाव को अवैध घोषित किया जाना चाहिए।

    हालांकि सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और पाया कि जिस मुद्दे को आधार बनाकर याचिका दायर की गई है वह वर्ष 2022 से संबंधित है, जबकि याचिका जनवरी 2026 में दायर की गई। अदालत ने इस देरी को अत्यधिक और अनुचित माना। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं द्वारा इतनी लंबी देरी के पीछे कोई ठोस और संतोषजनक कारण प्रस्तुत नहीं किया गया।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि जो पक्ष वर्षों तक अपने अधिकारों को लेकर निष्क्रिय रहता है, उसे बाद में संवैधानिक राहत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत राहत पाने के लिए समय पर कार्रवाई करना अनिवार्य है। देरी से दायर याचिकाओं पर अदालत हस्तक्षेप करने से बचती है, खासकर तब जब संबंधित पदाधिकारी अपने कार्यकाल में कई प्रशासनिक और नीतिगत फैसले ले चुका हो।

    कोर्ट ने यह भी माना कि अध्यक्ष लक्ष्मीबाई द्वारा पिछले वर्षों में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा चुके हैं और अब इतने समय बाद चुनाव प्रक्रिया में दखल देना प्रशासनिक स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में न्यायालय ने हस्तक्षेप से इनकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया।

    इस फैसले के साथ ही डबरा नगर पालिका में चल रहा यह विवाद समाप्त हो गया है और अध्यक्ष लक्ष्मीबाई की स्थिति पूरी तरह मजबूत हो गई है। हाईकोर्ट के इस निर्णय को प्रशासनिक स्थिरता और समयबद्ध न्याय की आवश्यकता के रूप में देखा जा रहा है, जो यह संदेश देता है कि कानूनी अधिकारों के लिए समय पर कदम उठाना बेहद जरूरी है, अन्यथा देर से की गई कार्रवाई का कोई लाभ नहीं मिलता।

  • कुपोषण और राशन गड़बड़ी पर प्रशासन सख्त बैतूल में कलेक्टर ने दिए तत्काल कार्रवाई के आदेश

    कुपोषण और राशन गड़बड़ी पर प्रशासन सख्त बैतूल में कलेक्टर ने दिए तत्काल कार्रवाई के आदेश


    भोपाल । मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में प्रशासनिक सख्ती का एक स्पष्ट संदेश देखने को मिला जब कलेक्टर डॉ. सौरभ सोनवणे ने जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करते हुए लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया। शाहपुर क्षेत्र के ग्राम निशान और पाठई के दौरे के दौरान उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति का जायजा लिया जहां मध्यान्ह भोजन में गंभीर खामियां सामने आईं। निरीक्षण के दौरान जब यह पाया गया कि बच्चों को दिए जाने वाले भोजन में सब्जी तक उपलब्ध नहीं है तो कलेक्टर ने तत्काल नाराजगी जाहिर की और स्पष्ट निर्देश दिए कि गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    निरीक्षण के दौरान तीन गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों का मामला सामने आया जिन्हें अब तक न्यूट्रिशन रिहैबिलिटेशन सेंटर में भर्ती नहीं कराया गया था। इस पर कलेक्टर ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे सभी बच्चों को बिना देरी के NRC में भर्ती कराया जाए ताकि उनका उचित इलाज और पोषण सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुपोषण जैसी गंभीर समस्या को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    इसी क्रम में राशन वितरण प्रणाली की भी जांच की गई जहां एक दुकान में स्टॉक में गड़बड़ी पाई गई। इस अनियमितता को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने फूड इंस्पेक्टर और समिति प्रबंधक को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली गरीबों के जीवन से जुड़ी योजना है और इसमें किसी भी तरह की हेराफेरी सीधे तौर पर जरूरतमंदों के अधिकारों का हनन है।

    इसके अलावा खाद्यान्न पर्ची के लंबित आवेदनों को लेकर भी उन्होंने नाराजगी जताई और पंचायत सचिव को नोटिस देने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया कि सभी लंबित मामलों का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित किया जाए ताकि पात्र हितग्राहियों को समय पर लाभ मिल सके।

    महिला स्व सहायता समूहों के संदर्भ में भी उन्होंने विशेष जोर दिया और कहा कि समूहों को केवल योजनाओं तक सीमित न रखकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए ठोस प्रयास किए जाएं। उन्होंने उत्पादों की बेहतर मार्केटिंग और आय बढ़ाने के लिए नवीन उपाय अपनाने की बात कही जिससे ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सके।

    शाहपुर क्षेत्र में किए गए इस निरीक्षण ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रशासन अब योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर पूरी तरह सतर्क और सख्त है। कलेक्टर ने साफ शब्दों में कहा कि किसी भी योजना में लापरवाही अब किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी और जिम्मेदारों पर सीधे कार्रवाई होगी। यह सख्ती न केवल सिस्टम को सुधारने का प्रयास है बल्कि यह भी संकेत है कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रशासन पूरी गंभीरता से काम कर रहा है।

  • बालाघाट में पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप का समापन जबलपुर ओपन में अव्वल

    बालाघाट में पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप का समापन जबलपुर ओपन में अव्वल


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के बालाघाट में आयोजित राज्यस्तरीय पावर लिफ्टिंग प्रतियोगिता का समापन शानदार अंदाज में हुआ। नूतन कला निकेतन में दो दिनों तक चले इस आयोजन में प्रदेशभर के खिलाड़ियों ने अपनी ताकत और तकनीक का प्रदर्शन किया। शुक्रवार रात हुए पुरस्कार वितरण समारोह के साथ पुरुष वर्ग की प्रतियोगिता संपन्न हुई जिसमें विभिन्न जिलों के खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर खिताब अपने नाम किए।

    ओपन वर्ग में जबलपुर ने 50 रैंक के साथ पहला स्थान हासिल किया और चैंपियन बना। वहीं जूनियर वर्ग में इंदौर कार्पोरेशन ने 54 रैंक के साथ शीर्ष स्थान प्राप्त किया। सब जूनियर वर्ग में कटनी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए विजेता बनने का गौरव हासिल किया।

    अन्य स्थानों की बात करें तो ओपन वर्ग में इंदौर कार्पोरेशन दूसरे और छिंदवाड़ा तीसरे स्थान पर रहा। जूनियर वर्ग में रीवा ने दूसरा और छिंदवाड़ा ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। सब जूनियर वर्ग में भोपाल कार्पोरेशन दूसरे और रीवा तीसरे स्थान पर रहा।

    बॉडी वेट प्रतियोगिता में भी खिलाड़ियों ने दमदार प्रदर्शन किया। सब जूनियर डिवीजन में भोपाल के मोहित चतुर्वेदी ने पहला स्थान हासिल किया जबकि कटनी के देव ताम्रकर दूसरे और अमृतांश मिश्रा तीसरे स्थान पर रहे। जूनियर वर्ग में भोपाल के जावेद आलम विजेता बने जबकि रीवा के मोहित वर्मा और अमित मुजालडे क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। ओपन वर्ग में छिंदवाड़ा के शैलेंद्र सेवतिया ने पहला स्थान प्राप्त किया जबकि भोपाल के ध्रुवराज कुरे दूसरे और रीवा के अमन सिंह तीसरे स्थान पर रहे।

    इस दो दिवसीय प्रतियोगिता की शुरुआत 23 अप्रैल को हुई थी जिसमें लगभग 200 महिला और पुरुष खिलाड़ियों ने भाग लिया। आयोजन जिला पावर लिफ्टिंग और वेट लिफ्टिंग एसोसिएशन के तत्वावधान में किया गया। खिलाड़ियों ने बेंच प्रेस स्क्वॉट और डेड लिफ्ट जैसी विधाओं में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया।

    समापन समारोह में विभिन्न अतिथियों ने विजेताओं को सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। आयोजकों के अनुसार इस प्रतियोगिता का उद्देश्य युवाओं को खेलों के प्रति प्रोत्साहित करना और उन्हें फिटनेस के प्रति जागरूक बनाना था।

    इस प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों का चयन अब राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए किया गया है जहां वे प्रदेश का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह आयोजन न केवल प्रतिभाओं को मंच देने में सफल रहा बल्कि आने वाले समय के लिए नए खिलाड़ियों को प्रेरित भी करता नजर आया।

  • अशोकनगर में बड़ा हादसा टला फंदे से लटकी महिला को देवर ने बचाया पति पर गंभीर आरोप

    अशोकनगर में बड़ा हादसा टला फंदे से लटकी महिला को देवर ने बचाया पति पर गंभीर आरोप


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के छैलाई धुर्रा गांव में एक गंभीर घरेलू विवाद ने उस समय भयावह रूप ले लिया जब 25 वर्षीय महिला ने आत्महत्या का प्रयास कर लिया। हालांकि, देवर की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई के चलते उसकी जान बच गई और उसे तुरंत जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उसका इलाज जारी है।

    जानकारी के अनुसार महिला ने घर के अंदर शर्ट के कपड़े से फंदा बनाकर आत्महत्या करने की कोशिश की। इसी दौरान देवर की नजर उस पर पड़ गई और उसने बिना देर किए समझदारी दिखाते हुए घर की छत पर चढ़कर छप्पर हटाया और हंसिया से फंदा काट दिया। समय रहते की गई इस कार्रवाई से महिला की जान बच गई। परिजन तुरंत उसे अस्पताल लेकर पहुंचे जहां डॉक्टरों ने उसकी हालत फिलहाल स्थिर बताई है।

    महिला अरूणा ने अपने पति विवेक जाटव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उसका कहना है कि पति लंबे समय से उस पर चरित्र को लेकर शक करता था और इसी वजह से उसके साथ मारपीट करता था। महिला के अनुसार वह मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की प्रताड़ना का सामना कर रही थी जिससे वह बेहद परेशान हो गई थी।

    महिला ने बताया कि करीब एक साल पहले वह अपने पति के साथ मजदूरी के लिए इंदौर गई थी। वहीं से दोनों के बीच विवाद शुरू हुआ जो समय के साथ बढ़ता गया। उसने यह भी आरोप लगाया कि उसका नंदोई सोनू उसके पति को उसके खिलाफ भड़काता था जिसके बाद पति का व्यवहार और आक्रामक हो गया।

    गांव लौटने के बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। महिला का आरोप है कि उसका पति शराब के नशे में उसके साथ मारपीट करता था और उसे छोड़कर दूसरी शादी करने की धमकी भी देता था। लगातार बढ़ते मानसिक दबाव के कारण उसने यह खौफनाक कदम उठा लिया।

    घटना की सूचना मिलते ही मध्य प्रदेश पुलिस ने मामले की जानकारी जुटाना शुरू कर दिया है। पुलिस महिला के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी। यह घटना घरेलू हिंसा और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर पहलू को उजागर करती है जहां समय रहते हस्तक्षेप और सहायता से एक बड़ी त्रासदी टल गई।

  • खंडवा में प्रशासन का बड़ा खुलासा: चर्बी से नकली घी-आइसक्रीम बनाने वाला अवैध कारखाना पकड़ा

    खंडवा में प्रशासन का बड़ा खुलासा: चर्बी से नकली घी-आइसक्रीम बनाने वाला अवैध कारखाना पकड़ा

    खंडवा। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में जिला प्रशासन ने एक चौंकाने वाली कार्रवाई करते हुए अवैध तरीके से संचालित हो रहे कारखाने का पर्दाफाश किया है। यहां पशुओं की चर्बी से नकली घी और आइसक्रीम बनाने का गोरखधंधा चल रहा था। संयुक्त टीम ने मौके से भारी मात्रा में सामग्री जब्त कर आरोपी को हिरासत में ले लिया है।

    शुक्रवार सुबह सिटी मजिस्ट्रेट, नगर निगम, खाद्य विभाग और पशु चिकित्सा विभाग की संयुक्त टीम ने मुखबिर की सूचना पर मोघट थाना क्षेत्र के इमलीपुरा वार्ड स्थित बेगम पार्क के पास दबिश दी। संकरी गलियों में बने कमरों की तलाशी के दौरान टीम को एक के बाद एक चौंकाने वाले तथ्य मिले।

    कार्रवाई के दौरान 79 टीन कनस्तरों और 9 नीले ड्रमों में भरा चर्बी से बना नकली घी बरामद किया गया। इसके अलावा बड़ी संख्या में बोरे भरकर पशुओं के अवशेष भी मिले। प्राथमिक जांच में सामने आया कि मृत पशुओं की चर्बी, खाल और हड्डियों का इस्तेमाल कर घी तैयार किया जा रहा था, जिसे बाजार में सप्लाई किया जाता था।

    मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने पूरे परिसर को सील कर दिया और जब्त सामग्री के सैंपल जांच के लिए लैब भेज दिए हैं। पशु चिकित्सा विभाग ने भी चर्बी और अन्य अवशेषों के नमूने लेकर यह पता लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है कि किन पशुओं का उपयोग किया गया।

    इस मामले में आरोपी अनवर कुरैशी को पुलिस के हवाले कर दिया गया है। सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर ने बताया कि आरोपी से पूछताछ जारी है और उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    वहीं स्थानीय विधायक ने इस कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के अवैध कारोबार से लोगों के स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ हो रहा है। उन्होंने दोषियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) जैसी कड़ी कार्रवाई की मांग भी की है।

    प्रशासन का कहना है कि पूरे जिले में इस तरह के अन्य अवैध ठिकानों की भी जांच की जाएगी, ताकि खाद्य सुरक्षा से जुड़े इस तरह के खतरनाक नेटवर्क पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।

  • MP: उज्जैन में 8 करोड़ के बीमा घोटाले का खुलासा… पैसों के लिए मरे हुए लोगों को भी नहीं छोड़ा

    MP: उज्जैन में 8 करोड़ के बीमा घोटाले का खुलासा… पैसों के लिए मरे हुए लोगों को भी नहीं छोड़ा


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन जिले (Ujjain district) से एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां लोगों ने पैसे कमाने के लिए मृतकों को भी नहीं बख्शा. आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (Economic Offences Cell) ने एक बड़े इंश्योरेंस घोटाले (Major Insurance Scams) का खुलासा किया है, जिसमें करीब 8 करोड़ रुपए की ठगी सामने आई है. इस पूरे मामले में बीमा एजेंट से लेकर पंचायत स्तर तक के लोग शामिल पाए गए हैं. जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस से जुड़ा हुआ है. इस घोटाले में मृत लोगों और गंभीर बीमार व्यक्तियों के नाम पर बीमा पॉलिसी करवाई गई और बाद में फर्जी दस्तावेजों के जरिए क्लेम करने की कोशिश की गई.

    इस मामले में अब तक 21 नॉमिनी सहित कुल 40 लोगों को आरोपी बनाया गया है. आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ के एसपी समर वर्मा ने इस मामले का खुलासा करते हुए बताया कि यह स्कैम तब सामने आया जब बीमा कंपनी के पास लगातार ऐसे क्लेम आने लगे, जिनमें पॉलिसी लेने के कुछ समय बाद ही लोगों की मौत दिखाई गई थी. इस पर कंपनी को शक हुआ और उसने अपने स्तर पर जांच शुरू की.

    जांच के दौरान करीब 27 ऐसे मामले सामने आए, जिनमें बीमा पॉलिसी लेने के बाद जल्दी मौत दिखाई गई थी. इनमें से 8 मामले तो ऐसे निकले, जिनमें पहले से ही मृत लोगों के नाम पर पॉलिसी करवाई गई थी. यह मामला सामने आने के बाद बीमा कंपनी ने इसकी शिकायत आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ को दी. ईओडब्ल्यू ने जब इस पूरे मामले की जांच शुरू की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए. जांच में पता चला कि आरोपियों ने पहले से मृत या गंभीर रूप से बीमार लोगों के नाम पर बीमा पॉलिसी जारी करवाई. इसके बाद उनके नाम पर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार किए गए और बीमा क्लेम के लिए आवेदन किया गया.


    मृत लोगों के नाम पर बनाई गई बीमा पॉलिसियां

    कुछ मामलों में तो यह भी सामने आया कि पहले से मृत लोगों को जीवित दिखाकर उनके नाम पर पॉलिसी करवाई गई और बाद में उनकी मौत दिखाकर क्लेम करने की कोशिश की गई. इस पूरे खेल में पंचायत स्तर के अधिकारी भी शामिल पाए गए. जांच में सामने आया कि ग्राम सरपंच, ग्राम सचिव और सहायक सचिव ने मिलकर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाए. इन दस्तावेजों के आधार पर बीमा कंपनी में क्लेम लगाया गया. इसके अलावा क्लेम को सही साबित करने के लिए झूठे साक्ष्य भी तैयार किए गए.

    ईओडब्ल्यू की जांच में यह भी सामने आया कि इस घोटाले में 10 बीमा एजेंट शामिल थे. इनमें से कुछ एजेंटों ने एक से अधिक पॉलिसियां जारी करवाई थीं. इससे साफ है कि यह एक संगठित तरीके से किया गया अपराध था, जिसमें कई लोग मिलकर काम कर रहे थे. एसपी समर वर्मा ने बताया कि अब तक दो ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें ग्राम सरपंच, ग्राम सचिव और सहायक सचिव की भूमिका स्पष्ट रूप से सामने आई है. इन लोगों ने पहले से मृत व्यक्तियों के नाम पर दोबारा मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार किए और उन्हें आधार बनाकर बीमा क्लेम करने की कोशिश की.

    इस मामले में अभी विस्तृत जांच जारी है. ईओडब्ल्यू दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच करवा रही है और आरोपियों से पूछताछ की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि आगे की जांच में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं. यह मामला इस बात को भी उजागर करता है कि किस तरह कुछ लोग सरकारी सिस्टम और बीमा प्रक्रियाओं का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं. संगठित तरीके से किए गए इस अपराध में कई स्तरों पर मिलीभगत सामने आई है, जो बेहद गंभीर चिंता का विषय है.


    जांच में 40 आरोपी, आगे और खुलासे की संभावना

    फिलहाल ईओडब्ल्यू ने सभी आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और इस तरह के मामलों को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे. यह घोटाला न केवल आर्थिक अपराध है, बल्कि यह समाज की संवेदनाओं को भी ठेस पहुंचाने वाला मामला है, जहां लोगों ने पैसे के लिए मृतकों के नाम का भी दुरुपयोग किया. अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच में आगे क्या खुलासे होते हैं और कितने लोग इस मामले में और सामने आते हैं.