Category: Madhya Pradesh

  • नर्मदा संरक्षण की अनोखी पहल ,आटे के दीपक से बदल रही महिलाओं की किस्मत

    नर्मदा संरक्षण की अनोखी पहल ,आटे के दीपक से बदल रही महिलाओं की किस्मत


    भोपाल । मध्यप्रदेश के खंडवा जिले के ओंकारेश्वर क्षेत्र में महिलाओं के एक स्वयं सहायता समूह ने पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल की है। इस समूह ने आटे से बने दीपक का व्यवसाय शुरू कर न केवल नर्मदा नदी को प्रदूषण से बचाने का संकल्प लिया बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं। यह पहल आज पूरे क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बन चुकी है।

    ग्राम मोरटक्का निवासी श्रीमती विजया जोशी ने मां नर्मदा आजीविका स्वयं सहायता समूह का गठन कर इस नवाचार की शुरुआत की। उनका उद्देश्य केवल आर्थिक लाभ कमाना नहीं था बल्कि नर्मदा नदी को प्रदूषण मुक्त रखना भी था। उन्होंने देखा कि परंपरागत रूप से प्लास्टिक के दोने और अन्य सामग्री में दीपदान किया जाता है जिससे नदी में प्रदूषण बढ़ता है और जलीय जीवों को नुकसान पहुंचता है। इसी चिंता के चलते उन्होंने एक नया और पर्यावरण अनुकूल विकल्प तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाया।

    समूह की महिलाओं ने मिलकर आटे के दीपक बनाने का कार्य शुरू किया। यह दीपक पूरी तरह प्राकृतिक सामग्री से तैयार किए जाते हैं और उपयोग के बाद पानी में घुल जाते हैं जिससे पर्यावरण को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता। इस पहल ने न केवल धार्मिक परंपराओं को सुरक्षित रखा है बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

    इस कार्य को आगे बढ़ाने के लिए महिलाओं ने स्वयं सहायता समूह के माध्यम से लगभग डेढ़ लाख रुपये का ऋण लेकर दीपक निर्माण की मशीन भी खरीदी। इससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि हुई और महिलाओं को नियमित रोजगार मिलने लगा। धीरे धीरे यह कार्य उनके लिए स्थायी आय का स्रोत बन गया और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होने लगा।

    सरकार और ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से इन महिलाओं को बाजार भी उपलब्ध कराया गया जिससे उनके उत्पादों की बिक्री बढ़ी और उन्हें नई पहचान मिली। आज यह समूह न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी अपने पर्यावरण अनुकूल दीपकों के लिए जाना जाता है।

    यह पहल इस बात का उदाहरण है कि यदि सही मार्गदर्शन और अवसर मिले तो ग्रामीण महिलाएं भी बड़े बदलाव की वाहक बन सकती हैं। एक ओर जहां यह परियोजना नर्मदा नदी को स्वच्छ रखने में मदद कर रही है वहीं दूसरी ओर यह महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में भी अहम भूमिका निभा रही है। ओंकारेश्वर की यह कहानी दर्शाती है कि छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं। आटे के दीपक का यह नवाचार आज पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण दोनों के लिए प्रेरणा बन गया है।

  • IPS को धमकी मामले में सियासत गरमाई जीतू पटवारी ने पुलिस की चुप्पी पर साधा निशाना


    भोपाल । भोपाल में बीजेपी विधायक प्रीतम सिंह लोधी द्वारा एक आईपीएस अधिकारी को कथित धमकी दिए जाने के मामले ने अब सियासी तूल पकड़ लिया है। इस घटना को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मध्यप्रदेश पुलिस की भूमिका और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पुलिस तंत्र को एक खुला पत्र लिखते हुए न केवल मौजूदा व्यवस्था पर टिप्पणी की है बल्कि कानून व्यवस्था और पुलिस की निष्पक्षता को लेकर भी तीखी चिंता जताई है।

    अपने पत्र में जीतू पटवारी ने लिखा कि यह घटना केवल किसी एक व्यक्ति की भाषा या व्यवहार का मामला नहीं है, बल्कि यह उस खतरनाक माहौल का संकेत है जिसमें सत्ता का अहंकार कानून और संविधान पर भारी पड़ता दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि बार-बार ऐसे मामले सामने आते हैं जहां सत्ताधारी दल से जुड़े लोग पुलिस अधिकारियों पर दबाव बनाने या उन्हें अपमानित करने की कोशिश करते हैं, लेकिन इन घटनाओं के बाद पुलिस की प्रतिक्रिया अक्सर सीमित और संयमित रह जाती है।

    पटवारी ने पुलिस अधिकारियों से सवाल करते हुए पूछा कि आखिर कौन सी परिस्थितियां हैं जिनके कारण देश के सबसे प्रशिक्षित और अनुशासित अधिकारी भी रक्षात्मक स्थिति में नजर आते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब अन्याय के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की जरूरत होती है तब पुलिस की आवाज कमजोर क्यों पड़ जाती है और आम नागरिकों के मामलों में वही तंत्र इतना कठोर कैसे हो जाता है।

    अपने पत्र में उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यदि पुलिस निष्पक्ष होकर और संविधान के दायरे में काम करे तो किसी भी नेता या प्रभावशाली व्यक्ति की हिम्मत नहीं होगी कि वह कानून पर दबाव डाल सके। लेकिन जब पुलिस को दबाव में काम करना पड़ता है तो उसकी स्वतंत्रता और कार्यक्षमता दोनों प्रभावित होती हैं।

    जीतू पटवारी ने IPS एसोसिएशन के पत्र का भी उल्लेख किया और कहा कि उसमें आक्रोश कम और विवशता अधिक नजर आती है। उनके अनुसार यह स्थिति केवल पुलिस के लिए नहीं बल्कि पूरे लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है क्योंकि यदि कानून लागू करने वाली संस्था ही कमजोर दिखाई देगी तो आम जनता का भरोसा व्यवस्था पर कैसे कायम रहेगा।

    हालांकि उन्होंने अपने पत्र में यह भी स्पष्ट किया कि यह आलोचना पुलिस बल के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि देश के लाखों पुलिसकर्मी दिन रात अपनी जान जोखिम में डालकर सेवा करते हैं और उनके साहस और मेहनत का पूरा देश सम्मान करता है। उनका संदेश उन परिस्थितियों के खिलाफ है जो पुलिस को उसकी मूल भूमिका से दूर कर रही हैं।

    पटवारी ने कहा कि पुलिस को अपने भीतर के साहस को याद रखना चाहिए और संविधान को अपना सबसे बड़ा संरक्षक मानना चाहिए न कि किसी व्यक्ति या सत्ता को। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कानून की रक्षा करने वाले ही चुप हो जाएंगे तो समाज में अन्याय को बढ़ावा मिलेगा और कानून का शासन कमजोर पड़ जाएगा।

    यह पूरा मामला अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है जहां एक तरफ कांग्रेस पुलिस की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर सवाल उठा रही है वहीं दूसरी ओर सत्ता पक्ष इसे राजनीतिक बयानबाजी बता रहा है। फिलहाल इस पत्र ने मध्यप्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में नई चर्चा जरूर छेड़ दी है।

  • मासूम की मौत पर सनसनी: Rewa में शरीर पर चोट के निशान, परिवार ने जताई हत्या की आशंका

    मासूम की मौत पर सनसनी: Rewa में शरीर पर चोट के निशान, परिवार ने जताई हत्या की आशंका

    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के Rewa जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां 7 साल की बच्ची की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों ने सौतेली मां पर बेरहमी से पिटाई कर हत्या करने का आरोप लगाया है। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है, वहीं पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।
    भाई का आरोप रात में पीटा, फिर बिगड़ी हालत
    मृतक बच्ची रागिनी साकेत के भाई पुष्पराज साकेत ने आरोप लगाया कि घटना वाली रात करीब 12 बजे उनकी सौतेली मां ने रागिनी को बुरी तरह पीटा। इसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई, उसे तेज बुखार आया और कुछ ही समय में उसकी मौत हो गई।
    भाई का कहना है कि पिटाई इतनी ज्यादा थी कि बहन की हालत संभल नहीं पाई।
    दादी का दावा शरीर पर थे चोट के कई निशान
    बच्ची की दादी गोमती साकेत ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि रागिनी के पूरे शरीर पर चोट के निशान थे और उसे पानी तक नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बच्ची दर्द से तड़पती रही, लेकिन समय पर इलाज नहीं मिल सका।
    80 किमी दूर गांव में हुई घटना
    यह घटना रीवा मुख्यालय से करीब 80 किलोमीटर दूर त्योंथर विधानसभा क्षेत्र के आमिर कोनी गांव की है। बताया जा रहा है कि बच्ची के पिता मनोज साकेत जब शाम को घर लौटे, तो रागिनी की हालत बेहद खराब थी। वे उसे तुरंत एक निजी डॉक्टर के पास लेकर गए, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
    दूसरी शादी के बाद बढ़ी थीं मारपीट की घटनाएं
    परिजनों का कहना है कि पिता की दूसरी शादी के बाद से ही बच्चों के साथ मारपीट की घटनाएं बढ़ गई थीं। भाई-बहनों ने भी आरोप लगाया कि सौतेली मां अक्सर उन्हें प्रताड़ित करती थी और घटना वाले दिन भी रागिनी को बुरी तरह पीटा गया था।
    तीन डॉक्टरों की टीम ने किया पोस्टमार्टम
    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा, जहां तीन डॉक्टरों की टीम से पोस्टमार्टम कराया गया है। फिलहाल सभी को पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है, जिसके बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा हो सकेगा।
    पुलिस की भूमिका पर भी उठे सवाल
    इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। जब थाना प्रभारी Balkesh Dwivedi से जानकारी ली गई, तो उन्हें बच्ची और परिजनों के नाम तक स्पष्ट नहीं थे। इससे जांच की गंभीरता पर सवाल उठने लगे हैं।
    हालांकि पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
    सार:
  • भोपाल से बड़ा संदेश ,देने की तैयारी में CM मोहन यादव, रात 9 बजे लाइव संबोधन से बढ़ी हलचल

    भोपाल से बड़ा संदेश ,देने की तैयारी में CM मोहन यादव, रात 9 बजे लाइव संबोधन से बढ़ी हलचल


    भोपाल । भोपाल में आज रात प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल एक बार फिर बढ़ने वाली है क्योंकि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रात 9 बजे सोशल मीडिया पर लाइव आकर प्रदेशवासियों को संबोधित करेंगे। मुख्यमंत्री ने स्वयं अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर इस बात की जानकारी साझा की है जिसके बाद से ही लोगों के बीच उत्सुकता और अटकलों का दौर तेज हो गया है।

    मुख्यमंत्री ने अपने पोस्ट में लिखा है कि वे एक महत्वपूर्ण विषय को लेकर प्रदेश की जनता से सीधा संवाद करेंगे। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह विषय क्या होगा लेकिन इसे लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। माना जा रहा है कि यह संबोधन किसी बड़ी योजना घोषणा नीति बदलाव या जनकल्याण से जुड़े अहम फैसले से जुड़ा हो सकता है।

    इस लाइव कार्यक्रम को केवल औपचारिक संबोधन नहीं माना जा रहा है बल्कि इसे मध्यप्रदेश के विकास और आने वाले समय की दिशा तय करने वाला संवाद बताया जा रहा है। मुख्यमंत्री का यह कदम उनकी संवादात्मक और पारदर्शी कार्यशैली को भी दर्शाता है जिसमें वे सीधे जनता से जुड़कर उनकी राय और सुझावों को महत्व देते हैं।

    पिछले कुछ समय से मुख्यमंत्री मोहन यादव लगातार सोशल मीडिया के माध्यम से जनता से संवाद करते रहे हैं और विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी इसी माध्यम से साझा करते आए हैं। उनकी यह शैली सरकार और जनता के बीच विश्वास और संवाद को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही है।

    राजनीतिक और प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह लाइव संबोधन किसी नई विकास योजना या बड़े प्रशासनिक निर्णय से जुड़ा हो सकता है। इसके अलावा यह भी संभावना जताई जा रही है कि इसमें किसानों युवाओं या रोजगार से जुड़े किसी बड़े फैसले की घोषणा हो सकती है। हालांकि आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है जिससे लोगों की उत्सुकता और बढ़ गई है।

    प्रदेशभर में लोग इस लाइव संबोधन का इंतजार कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर चर्चाएं तेज हैं। कई लोग इसे संभावित बड़े राजनीतिक या प्रशासनिक बदलाव से जोड़कर देख रहे हैं जबकि कुछ इसे सरकार की जनसंपर्क रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं।

    कुल मिलाकर मुख्यमंत्री का यह संबोधन आज रात प्रदेश की नजरों का केंद्र रहने वाला है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि वे जनता के सामने क्या बड़ा संदेश रखते हैं और क्या कोई नई घोषणा प्रदेश के विकास की दिशा को और गति देती है या नहीं।

  • बीमा कंपनी पर 5 हजार का जुर्माना, कार एक्सीडेंट क्लेम नहीं देने पर देना होगा ₹31,320

    बीमा कंपनी पर 5 हजार का जुर्माना, कार एक्सीडेंट क्लेम नहीं देने पर देना होगा ₹31,320


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के Sagar में बीमा क्लेम को लेकर एक अहम फैसला सामने आया है। कार एक्सीडेंट के बाद क्लेम राशि नहीं देने पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने बीमा कंपनी को फटकार लगाते हुए ग्राहक के पक्ष में निर्णय सुनाया है। आयोग ने कंपनी को बीमा राशि, ब्याज, मुआवजा और केस खर्च मिलाकर तय समय में भुगतान करने का आदेश दिया है।
    वाराणसी के रहने वाले उपभोक्ता ने लगाई थी गुहार
    यह मामला मूल रूप से Varanasi निवासी तेजबहादुर बिंद का है, जो वर्तमान में सागर की स्टेट कॉलोनी में रहते हैं। उन्होंने IFFCO Tokio General Insurance Company Limited और Adinath Cars Private Limited (नेक्सा, सागर) के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी।
    बीमा होने के बावजूद क्लेम अटका
    तेजबहादुर के मुताबिक, उनकी कार (MP 15 ZK 5718) का बीमा नवंबर 2024 से नवंबर 2025 तक वैध था। 17 मार्च 2025 को कार की बैक लाइट टूट गई थी। अगले दिन वे सर्विस सेंटर पहुंचे, लेकिन पार्ट उपलब्ध नहीं होने के कारण गाड़ी वापस ले आए। इसके बाद 29 मार्च 2025 को Narmadapuram में ट्रैफिक जाम के दौरान उनकी कार आगे चल रही ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकरा गई, जिससे गाड़ी को नुकसान पहुंचा। उन्होंने तुरंत बीमा कंपनी को सूचना दी और 1 अप्रैल को गाड़ी मरम्मत के लिए जमा कर दी। कंपनी ने भुगतान से किया इनकार सर्विस सेंटर ने मरम्मत का खर्च बताकर क्लेम प्रक्रिया शुरू की, लेकिन बीमा कंपनी ने भुगतान करने से मना कर दिया। इससे परेशान होकर तेजबहादुर ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
    आयोग का सख्त रुख सेवा में कमी मानी
    सुनवाई के दौरान आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें और दस्तावेजों की जांच की। इसके बाद आयोग ने माना कि बीमा कंपनी की ओर से सेवा में कमी (deficiency in service) हुई है। आयोग ने आदेश दिया कि बीमा कंपनी ग्राहक को 31,320 रुपए की क्लेम राशि 6% वार्षिक ब्याज के साथ अदा करे। इसके अलावा 5,000 रुपए मुआवजा और 2,000 रुपए केस खर्च के रूप में भी देने होंगे।
    दो महीने में करना होगा भुगतान
    आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि पूरी राशि का भुगतान दो महीने के भीतर किया जाए और बीमा क्लेम का निपटारा समय पर किया जाए।
    उपभोक्ताओं के लिए अहम संदेश
    यह फैसला उन उपभोक्ताओं के लिए राहत भरा है, जो बीमा क्लेम में देरी या इंकार का सामना करते हैं। इससे साफ है कि अगर कंपनी नियमों के अनुसार सेवा नहीं देती, तो उपभोक्ता आयोग से न्याय मिल सकता है।
  • फिरौती की साजिश नाकाम इंदौर में अपहृत दोनों बच्चे बरामद पुलिस ने दंपती समेत 4 को दबोचा

    फिरौती की साजिश नाकाम इंदौर में अपहृत दोनों बच्चे बरामद पुलिस ने दंपती समेत 4 को दबोचा

    इंदौर । इंदौर में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक सनसनीखेज अपहरण मामले का महज सात घंटे में खुलासा कर दिया और अपहृत दोनों बच्चों को सुरक्षित बरामद कर लिया। इस मामले में पुलिस ने पति पत्नी समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है जिनमें एक भाई बहन की जोड़ी भी शामिल है। फिरौती के तौर पर 15 लाख रुपए की मांग की गई थी जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया था।

    घटना गुरुवार शाम की है जब तिरुपति गार्डन क्षेत्र से 9 वर्षीय नैतिक सोनकर और 11 वर्षीय सम्राट अचानक लापता हो गए। दोनों बच्चे शाम करीब 6 बजे तक गार्डन में क्रिकेट खेल रहे थे लेकिन कुछ ही देर बाद उनका कोई पता नहीं चला। परिवार ने जब तलाश शुरू की तो सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए जिसमें एक युवती बच्चों को अपने साथ ले जाती हुई नजर आई। इसी के बाद मामला गंभीर हो गया और पुलिस को सूचना दी गई।

    बच्चों के दादा पूनमचंद जयदेव ने पुलिस को बताया कि उन्हें एक वीडियो कॉल के जरिए 15 लाख रुपए की फिरौती की मांग की गई है। कॉल आने के तुरंत बाद फोन बंद कर दिया गया जिससे मामला और संदिग्ध हो गया। सूचना मिलते ही टीआई सुरेंद्र रघुवंशी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की गई।

    पुलिस ने तुरंत कई थानों की टीमों को सक्रिय किया जिनमें संयोगितागंज बड़ी ग्वालटोली राजेंद्र नगर द्वारकापुरी तुकोगंज और पलासिया थाना शामिल थे। साथ ही जिस नंबर से फिरौती की कॉल आई थी उसे सर्विलांस पर लगाया गया और उसकी लोकेशन ट्रेस की जाने लगी। इसी दौरान सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने आरोपी युवती के रूट की पहचान की जिससे जांच को दिशा मिली।

    जांच के दौरान पता चला कि सभी आरोपी आपस में व्हाट्सएप के जरिए संपर्क में थे और वहीं से योजना बनाई गई थी। एक नंबर से ही वीडियो कॉल कर फिरौती की मांग की गई थी। पुलिस ने तकनीकी निगरानी और मुखबिर तंत्र की मदद से लोकेशन ट्रेस करते हुए राजेंद्र नगर के दत्त नगर स्थित एक बिल्डिंग पर दबिश दी जहां बच्चों को रखा गया था।

    एसीपी तुषार सिंह ने बताया कि पुलिस टीम ने बेहद सतर्कता से कार्रवाई करते हुए आरोपियों को घेर लिया। पुलिस को देखते ही आरोपियों ने भागने की कोशिश की लेकिन सभी को मौके पर ही पकड़ लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों में विनीत पिता राजेश उम्र 22 वर्ष राधिका पिता राजेश उम्र 18 वर्ष ललित पिता दशरथ सेन उम्र 21 वर्ष और तनीषा पति ललित उम्र 21 वर्ष शामिल हैं।

    पुलिस के अनुसार तनीषा ने ही बच्चों को अपने साथ ले जाने की योजना बनाई थी और वह राधिका की सहेली है। अच्छी बात यह रही कि बच्चों को किसी तरह की चोट या नुकसान नहीं पहुंचाया गया और दोनों पूरी तरह सुरक्षित पाए गए। मेडिकल जांच के बाद उनकी स्थिति सामान्य बताई गई है।

    इस पूरे ऑपरेशन में इंदौर पुलिस की तेज कार्रवाई और समन्वय की सराहना की जा रही है। महज कुछ घंटों में अपहरण जैसे गंभीर मामले का खुलासा कर बच्चों को सुरक्षित बरामद करना पुलिस की बड़ी सफलता मानी जा रही है। फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है ताकि इस साजिश के पीछे के पूरे नेटवर्क और कारणों का पता लगाया जा सके।

  • दर्दनाक हादसा: Jabalpur में तीनों छात्राओं की मौत, एक फार्मासिस्ट तो दूसरी बनना चाहती थी डॉक्टर

    दर्दनाक हादसा: Jabalpur में तीनों छात्राओं की मौत, एक फार्मासिस्ट तो दूसरी बनना चाहती थी डॉक्टर


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के Jabalpur में दिल दहला देने वाले बरगी नहर हादसे में डूबी तीन बहनों में से तीसरी युवती का शव भी बरामद कर लिया गया है। गुरुवार रात करीब 11 बजे 23 वर्षीय शीतल पटेल का शव घटनास्थल से कुछ दूरी पर मिला। इससे पहले सानिया पटेल (14) और सृष्टि पटेल (17) के शव हादसे के कुछ घंटों बाद ही मिल गए थे। तीनों का शुक्रवार को पोस्टमार्टम किया गया और आज शहर के अलग-अलग शमशान घाटों पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
    रिश्ते में बहनें, एक ही हादसे में बुझ गए तीन घरों के चिराग
    बरगी थाना क्षेत्र के सालीवाड़ा गांव में हुए इस हादसे ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है। तीनों लड़कियां मामा-बुआ के रिश्ते से बहनें थीं और एक पारिवारिक शादी में शामिल होने आई थीं। अचानक हुए इस हादसे ने खुशियों के माहौल को मातम में बदल दिया।
    रील बनाते समय फिसला पैर, तेज बहाव में बह गईं
    गुरुवार सुबह करीब 11 बजे पांच लड़कियां नहर पर नहाने और वीडियो (रील) बनाने गई थीं। बताया जा रहा है कि सृष्टि नहर में थी, जबकि बाकी लड़कियां किनारे पर मोबाइल से वीडियो बना रही थीं। तभी पैर फिसलने से चार लड़कियां तेज बहाव में बह गईं।
    मौके पर मौजूद एक सहेली ने हिम्मत दिखाते हुए एक लड़की को बचा लिया, लेकिन बाकी तीनों तेज धारा में दूर तक बह गईं। स्थानीय लोगों ने बचाने की कोशिश की, पर पानी का बहाव इतना तेज था कि वे सफल नहीं हो सके। इसके बाद पुलिस और प्रशासन ने सर्च ऑपरेशन चलाकर तीनों के शव बरामद किए।
    अधूरे रह गए सपने: कोई बनने वाली थी फार्मासिस्ट, कोई डॉक्टर
    इस हादसे में सिर्फ जानें ही नहीं गईं, बल्कि कई सपने भी टूट गए। शीतल पटेल ने फार्मेसी की पढ़ाई पूरी कर ली थी और चार महीने बाद उसकी शादी Bhopal में तय थी। वहीं सृष्टि पटेल ने 12वीं अच्छे अंकों से पास की थी और डॉक्टर बनने का सपना देख रही थी।
    सानिया अभी पढ़ाई कर रही थी और परिवार की उम्मीदों का हिस्सा थी। तीनों बेटियों की एक साथ मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
    परिवार का रो-रोकर बुरा हाल
    मर्चुरी के बाहर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। हर किसी की आंखें नम हैं और गांव में शोक का माहौल है। शादी में शामिल होने आईं बेटियां अब हमेशा के लिए खामोश हो गईं।
    नहर किनारे सुरक्षा को लेकर उठे सवाल
    इस हादसे के बाद एक बार फिर नहरों और जलाशयों के किनारे सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बरगी नहर पर अक्सर लोग नहाने और घूमने आते हैं, लेकिन यहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं।

  • इलाज पर विवाद: Gwalior में बच्चे की मौत के बाद परिजनों का हंगामा, डॉक्टरों ने झाड़-फूंक का लगाया आरोप

    इलाज पर विवाद: Gwalior में बच्चे की मौत के बाद परिजनों का हंगामा, डॉक्टरों ने झाड़-फूंक का लगाया आरोप


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के Gwalior में 9 महीने के मासूम की मौत के बाद शुक्रवार सुबह माहौल तनावपूर्ण हो गया। निजी नर्सिंग होम में इलाज के दौरान बच्चे की मौत से गुस्साए परिजनों ने अस्पताल के बाहर चक्का जाम कर दिया और डॉक्टर पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए। वहीं अस्पताल प्रबंधन ने मामले को लेकर अलग दावा करते हुए पुलिस को सीसीटीवी फुटेज सौंपा है।
    22 अप्रैल को भर्ती, देर रात हुई मौत
    मृतक बच्चे की पहचान तनुज कुशवाहा के रूप में हुई है। परिजनों के मुताबिक, बच्चे को उल्टी और सांस लेने में दिक्कत (पसली चलना) की शिकायत थी। 22 अप्रैल को उसे जनकगंज क्षेत्र स्थित एक निजी बाल चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान गुरुवार देर रात उसकी मौत हो गई, जिसके बाद परिवार में कोहराम मच गया।
    परिजनों का आरोप गलत इलाज से गई जान
    परिवार का आरोप है कि डॉक्टर Dr Sneha Gadkar ने उनकी अनुमति के बिना बच्चे को सांस की नली (वेंटिलेशन) पर डाल दिया और कई इंजेक्शन दिए। उनका कहना है कि बच्चे को मामूली तकलीफ थी, लेकिन गलत इलाज के चलते उसकी हालत बिगड़ी और मौत हो गई।मृतक की मां ने यह भी आरोप लगाया कि डॉक्टर ने मामले को दबाने के लिए ₹50 हजार की पेशकश की, जिससे आक्रोश और बढ़ गया।
    डॉक्टर का दावा परिजनों ने करवाई झाड़-फूंक
    वहीं अस्पताल प्रबंधन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए चौंकाने वाला दावा किया है। डॉक्टर ने पुलिस को सीसीटीवी वीडियो सौंपा है, जिसमें कथित तौर पर परिजन बच्चे का झाड़-फूंक कराते नजर आ रहे हैं। डॉक्टर का कहना है कि बच्चा गंभीर हालत में वेंटिलेटर पर था, लेकिन परिजनों ने उसे हटाकर झाड़-फूंक करवाई, जिससे उसकी स्थिति और बिगड़ गई।
    अस्पताल के बाहर प्रदर्शन, सड़क जाम
    घटना के बाद गुस्साए परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल के बाहर धरना देकर चक्का जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने डॉक्टर के खिलाफ सख्त कार्रवाई और न्याय की मांग की। मौके पर भारी भीड़ जुट गई, जिससे यातायात भी प्रभावित हुआ।
    पुलिस पहुंची, जांच शुरू-पोस्टमार्टम से खुलेगा राज
    सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया। Manish Yadav ने बताया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि बच्चे के शव का पैनल पोस्टमार्टम कराया जाएगा, ताकि मौत के सही कारणों का पता चल सके। इसके साथ ही अस्पताल से इलाज से जुड़े दस्तावेज और सीसीटीवी फुटेज भी जब्त कर लिए गए हैं।
    दोनों पक्षों के दावों से उलझा मामला
    एक तरफ परिजन इलाज में लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं, तो दूसरी ओर अस्पताल प्रबंधन झाड़-फूंक को जिम्मेदार ठहरा रहा है। ऐसे में पूरा मामला जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
  • खेतों में धुआं और खतरा एमपी बना पराली जलाने का हॉटस्पॉट आंकड़ों ने खोली सच्चाई

    खेतों में धुआं और खतरा एमपी बना पराली जलाने का हॉटस्पॉट आंकड़ों ने खोली सच्चाई

    भोपाल । मध्यप्रदेश में गेहूं की पराली जलाने के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी ने चिंता बढ़ा दी है और ताजा आंकड़ों के अनुसार राज्य इस मामले में देश में पहले स्थान पर पहुंच गया है। कंसोर्टियम फॉर रिसर्च ऑन एग्रोइकोसिस्टम मॉनिटरिंग एंड मॉडलिंग फ्रॉम स्पेस और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि फसल अवशेष जलाने की समस्या प्रदेश में गंभीर रूप लेती जा रही है।

    1 से 21 अप्रैल के बीच देश के पांच राज्यों में कुल 29167 मामलों में से लगभग 69 प्रतिशत हिस्सेदारी अकेले मध्यप्रदेश की है। इस अवधि में राज्य में 20164 घटनाएं दर्ज की गईं जो देश में सबसे ज्यादा हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि खेतों में पराली जलाने की प्रवृत्ति किस तेजी से बढ़ रही है और इसका असर पर्यावरण पर कितना व्यापक हो सकता है।

    जिला स्तर पर स्थिति और भी चिंताजनक दिखाई देती है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का संसदीय क्षेत्र विदिशा इस मामले में सबसे आगे है जहां 2086 घटनाएं सामने आई हैं। इसके बाद उज्जैन में 2053 और रायसेन में 1982 मामले दर्ज किए गए हैं। होशंगाबाद में 1705 और सिवनी में 1369 घटनाएं सामने आई हैं। हालांकि यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में थोड़ा कम बताया जा रहा है लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल भी रिकॉर्ड स्तर पर मामले दर्ज हो सकते हैं।

    यदि अन्य राज्यों से तुलना करें तो मध्यप्रदेश के बाद उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर है जहां इसी अवधि में 8889 मामले सामने आए हैं। हरियाणा और पंजाब जैसे राज्यों में यह संख्या काफी कम है जिससे यह स्पष्ट होता है कि मध्यप्रदेश में यह समस्या अधिक गंभीर हो चुकी है।

    विशेषज्ञों के अनुसार पराली जलाने के पीछे किसानों की मजबूरी भी एक बड़ा कारण है। गंजबासौदा स्थित कृषि महाविद्यालय के प्रोफेसर आशीष श्रीवास्तव बताते हैं कि गेहूं की कटाई के तुरंत बाद किसान ग्रीष्मकालीन मूंग की बुवाई करना चाहते हैं और उनके पास समय बहुत कम होता है। ऐसे में पराली को हटाने के लिए वे सबसे आसान और सस्ता तरीका यानी जलाने का विकल्प चुनते हैं।

    हालांकि इसके कई वैकल्पिक उपाय भी मौजूद हैं जिनका उपयोग करके इस समस्या को कम किया जा सकता है। किसान सुपरसीडर रोटावेटर मल्चर और रीपर जैसे कृषि यंत्रों का उपयोग कर सकते हैं जिससे पराली को मिट्टी में मिलाया जा सके। इसके अलावा भूसे का उपयोग पशु चारे के रूप में भी किया जा सकता है। पूसा डीकंपोजर का छिड़काव कर पराली को प्राकृतिक खाद में बदला जा सकता है जिससे मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ती है।

    सरकार द्वारा पराली जलाने पर प्रतिबंध लगाया गया है और ऐसा करते पाए जाने पर किसानों पर जुर्माने का प्रावधान भी है जो 2500 से 15000 रुपए तक हो सकता है। बार बार उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई भी की जा सकती है।

    इसके बावजूद बढ़ते मामलों ने यह संकेत दिया है कि केवल नियम बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा बल्कि किसानों को जागरूक करने और उन्हें वैकल्पिक साधन उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस प्रयास करने होंगे। अन्यथा यह समस्या पर्यावरण और कृषि दोनों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

  • Ujjain में पति-पत्नी ने फांसी लगाई, पुलिस ने दरवाजा तोड़कर उतारा; व्हाट्सएप स्टेटस में 12 लोगों के नाम

    Ujjain में पति-पत्नी ने फांसी लगाई, पुलिस ने दरवाजा तोड़कर उतारा; व्हाट्सएप स्टेटस में 12 लोगों के नाम


    नई दिल्ली । व्हाट्सएप स्टेटस बना ‘अलर्ट’, पुलिस ने बचाईं दो जानें: उज्जैन में पति-पत्नी ने फांसी की कोशिश की
    मध्य प्रदेश के Ujjain जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहां पारिवारिक विवाद से परेशान पति-पत्नी ने आत्महत्या का प्रयास किया। हालांकि, समय रहते पुलिस की सतर्कता और तेजी से कार्रवाई ने दोनों की जान बचा ली।
    स्टेटस में लिखा दर्द, 12 लोगों का किया जिक्र
    जानकारी के मुताबिक, घट्टिया थाना क्षेत्र के नजरपुर गांव में रहने वाले दंपती लंबे समय से पारिवारिक तनाव से जूझ रहे थे। मानसिक दबाव इतना बढ़ गया कि उन्होंने आत्मघाती कदम उठाने का फैसला कर लिया। आत्महत्या से पहले युवक ने WhatsApp पर स्टेटस लगाकर अपनी परेशानी जाहिर की, जिसमें मां-बाप समेत 12 लोगों के नाम का जिक्र किया गया था। यही स्टेटस पुलिस के लिए अलर्ट साबित हुआ और वक्त रहते पूरी घटना की जानकारी मिल गई।
    स्टेटस देखते ही हरकत में आई पुलिस टीम
    थाना प्रभारी Karan Khowal को जैसे ही स्टेटस की सूचना मिली, उन्होंने तुरंत पुलिस टीम को मौके पर रवाना किया। जब पुलिस दंपती के घर पहुंची, तो दरवाजा अंदर से बंद था। खिड़की से झांककर देखा गया कि दोनों फंदे पर लटके हुए थे। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए पुलिस ने बिना देर किए कार्रवाई शुरू की।
    दरवाजा तोड़कर उतारा फंदे से, अस्पताल में भर्ती
    थाना प्रभारी ने बाहर से बातचीत कर दंपती का ध्यान भटकाया और इसी दौरान टीम ने दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया। पुलिसकर्मियों ने तुरंत दोनों को फंदे से नीचे उतारा। उस वक्त उनकी सांसें चल रही थीं। इसके बाद उन्हें तुरंत शासकीय अस्पताल घट्टिया ले जाया गया, जहां इलाज के बाद दोनों की हालत स्थिर बताई गई और अब वे खतरे से बाहर हैं।
    पारिवारिक विवाद बना वजह, पिता से था टकराव
    होश में आने के बाद दंपती ने पुलिस को बताया कि वे लंबे समय से पारिवारिक विवाद और पिता की प्रताड़ना से परेशान थे। जांच में सामने आया कि युवक की दूसरी शादी को लेकर उसके पिता नाराज थे और उसे घर से बेदखल कर दिया था।
    अपने अधिकार को लेकर कई बार बातचीत के बावजूद विवाद सुलझ नहीं पाया, जिससे युवक मानसिक तनाव में रहने लगा।
    परिवारिक स्थिति भी जटिल पुलिस के अनुसार, युवक की पहली पत्नी से दो बच्चे हैं, जबकि दूसरी पत्नी (रीना) से उसकी कोई संतान नहीं है। इस पारिवारिक जटिलता ने तनाव को और बढ़ा दिया था।
    पुलिस की सूझबूझ से टली बड़ी घटना
    पूरे घटनाक्रम में Karan Khowal सहित पुलिस टीम की तत्परता सराहनीय रही। उपनिरीक्षक अलकेश डांगे और प्रधान आरक्षक राजेंद्र राठौर ने भी बचाव अभियान में अहम भूमिका निभाई।पुलिस ने दंपती को समझाइश देते हुए निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया है और पारिवारिक विवाद के हर पहलू की जांच की जा रही है।