Category: Madhya Pradesh

  • Ujjain में पति-पत्नी ने फांसी लगाई, पुलिस ने दरवाजा तोड़कर उतारा; व्हाट्सएप स्टेटस में 12 लोगों के नाम

    Ujjain में पति-पत्नी ने फांसी लगाई, पुलिस ने दरवाजा तोड़कर उतारा; व्हाट्सएप स्टेटस में 12 लोगों के नाम


    नई दिल्ली । व्हाट्सएप स्टेटस बना ‘अलर्ट’, पुलिस ने बचाईं दो जानें: उज्जैन में पति-पत्नी ने फांसी की कोशिश की
    मध्य प्रदेश के Ujjain जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहां पारिवारिक विवाद से परेशान पति-पत्नी ने आत्महत्या का प्रयास किया। हालांकि, समय रहते पुलिस की सतर्कता और तेजी से कार्रवाई ने दोनों की जान बचा ली।
    स्टेटस में लिखा दर्द, 12 लोगों का किया जिक्र
    जानकारी के मुताबिक, घट्टिया थाना क्षेत्र के नजरपुर गांव में रहने वाले दंपती लंबे समय से पारिवारिक तनाव से जूझ रहे थे। मानसिक दबाव इतना बढ़ गया कि उन्होंने आत्मघाती कदम उठाने का फैसला कर लिया। आत्महत्या से पहले युवक ने WhatsApp पर स्टेटस लगाकर अपनी परेशानी जाहिर की, जिसमें मां-बाप समेत 12 लोगों के नाम का जिक्र किया गया था। यही स्टेटस पुलिस के लिए अलर्ट साबित हुआ और वक्त रहते पूरी घटना की जानकारी मिल गई।
    स्टेटस देखते ही हरकत में आई पुलिस टीम
    थाना प्रभारी Karan Khowal को जैसे ही स्टेटस की सूचना मिली, उन्होंने तुरंत पुलिस टीम को मौके पर रवाना किया। जब पुलिस दंपती के घर पहुंची, तो दरवाजा अंदर से बंद था। खिड़की से झांककर देखा गया कि दोनों फंदे पर लटके हुए थे। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए पुलिस ने बिना देर किए कार्रवाई शुरू की।
    दरवाजा तोड़कर उतारा फंदे से, अस्पताल में भर्ती
    थाना प्रभारी ने बाहर से बातचीत कर दंपती का ध्यान भटकाया और इसी दौरान टीम ने दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया। पुलिसकर्मियों ने तुरंत दोनों को फंदे से नीचे उतारा। उस वक्त उनकी सांसें चल रही थीं। इसके बाद उन्हें तुरंत शासकीय अस्पताल घट्टिया ले जाया गया, जहां इलाज के बाद दोनों की हालत स्थिर बताई गई और अब वे खतरे से बाहर हैं।
    पारिवारिक विवाद बना वजह, पिता से था टकराव
    होश में आने के बाद दंपती ने पुलिस को बताया कि वे लंबे समय से पारिवारिक विवाद और पिता की प्रताड़ना से परेशान थे। जांच में सामने आया कि युवक की दूसरी शादी को लेकर उसके पिता नाराज थे और उसे घर से बेदखल कर दिया था।
    अपने अधिकार को लेकर कई बार बातचीत के बावजूद विवाद सुलझ नहीं पाया, जिससे युवक मानसिक तनाव में रहने लगा।
    परिवारिक स्थिति भी जटिल पुलिस के अनुसार, युवक की पहली पत्नी से दो बच्चे हैं, जबकि दूसरी पत्नी (रीना) से उसकी कोई संतान नहीं है। इस पारिवारिक जटिलता ने तनाव को और बढ़ा दिया था।
    पुलिस की सूझबूझ से टली बड़ी घटना
    पूरे घटनाक्रम में Karan Khowal सहित पुलिस टीम की तत्परता सराहनीय रही। उपनिरीक्षक अलकेश डांगे और प्रधान आरक्षक राजेंद्र राठौर ने भी बचाव अभियान में अहम भूमिका निभाई।पुलिस ने दंपती को समझाइश देते हुए निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया है और पारिवारिक विवाद के हर पहलू की जांच की जा रही है।

  • अब आसमान से ओरछा के दर्शन हेली सेवा से साढ़े चार घंटे में भोपाल से यात्रा पूरी

    अब आसमान से ओरछा के दर्शन हेली सेवा से साढ़े चार घंटे में भोपाल से यात्रा पूरी


    भोपाल । मध्यप्रदेश में पर्यटन को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है जहां अब ओरछा और चंदेरी जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों तक पहुंचना पहले से कहीं ज्यादा आसान और रोमांचक हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा शुरू की गई हेली पर्यटन सेवा के जरिए अब भोपाल से ओरछा की यात्रा महज कुछ घंटों में पूरी की जा सकती है। इस नई सुविधा के शुरू होने से श्रद्धालुओं और पर्यटकों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।

    इस सेवा के तहत हेलिकॉप्टर रोजाना सुबह 9.30 बजे भोपाल से उड़ान भरता है और सीधे ओरछा पहुंचता है जहां पर्यटक भगवान रामराजा के दर्शन कर सकते हैं। इसके बाद दोपहर करीब 2 बजे हेलिकॉप्टर वापस भोपाल लौट आता है। इस तरह यात्री केवल साढ़े चार घंटे में अपनी यात्रा पूरी कर सकते हैं जो पहले सड़क मार्ग से काफी लंबी और समय लेने वाली होती थी।

    इस हवाई सेवा की खास बात यह है कि इसमें केवल यात्रा ही नहीं बल्कि अनुभव को भी खास बनाया गया है। पर्यटक 3000 फीट की ऊंचाई से ओरछा और चंदेरी के ऐतिहासिक नजारे देख सकते हैं वहीं 500 फीट की ऊंचाई पर जॉय राइड का भी आनंद ले सकते हैं। यह अनुभव पर्यटकों को एक अलग ही रोमांच का एहसास कराता है जहां वे इन शहरों की खूबसूरती को आसमान से निहार सकते हैं।

    ओरछा को बुंदेलखंड की अयोध्या कहा जाता है और यहां स्थित रामराजा मंदिर की विशेष मान्यता है। यहां भगवान राम को राजा के रूप में पूजा जाता है और उन्हें प्रतिदिन गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया जाता है। यह अनोखी परंपरा देश भर में अपनी अलग पहचान रखती है। दीपावली के अवसर पर यहां का नजारा और भी भव्य हो जाता है जब पूरा दरबार रोशनी और फूलों से सजा होता है और आसपास के क्षेत्रों से लोग विशेष आयोजनों में शामिल होने आते हैं।

    वहीं चंदेरी अपनी ऐतिहासिक विरासत और चंदेरी साड़ियों के लिए प्रसिद्ध है। यहां के किले और प्राचीन इमारतें इतिहास की गवाही देती हैं। साथ ही यह शहर फिल्म शूटिंग के लिए भी पसंदीदा स्थान बनता जा रहा है जहां कई चर्चित फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है।

    इस सेवा के तहत भोपाल से ओरछा का किराया 6500 रुपए और चंदेरी का किराया 5500 रुपए तय किया गया है। इसके अलावा 14500 रुपए के विशेष पैकेज में टैक्सी वीआईपी दर्शन और अन्य सुविधाएं भी शामिल हैं जिससे पर्यटकों को पूरी यात्रा का एक समग्र अनुभव मिल सके। जॉय राइड का शुल्क 3500 रुपए रखा गया है।

    यह हेली सेवा सप्ताह में पांच दिन संचालित होगी और पीपीपी मॉडल पर चलाई जा रही है जिसमें सुरक्षा और सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया है। आधुनिक छह सीटर हेलिकॉप्टर के माध्यम से यात्रियों को आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलेगा।

    सरकार का मानना है कि इस पहल से न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक स्थलों की पहचान भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होगी। यह सेवा राज्य के पर्यटन को नई दिशा देने के साथ साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगी।

  • मासूमों पर मंडराया खतरा फेल हुई बच्चों की दवा पर स्वास्थ्य विभाग का बड़ा एक्शन

    मासूमों पर मंडराया खतरा फेल हुई बच्चों की दवा पर स्वास्थ्य विभाग का बड़ा एक्शन


    जबलपुर । मध्यप्रदेश के जबलपुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां बच्चों को दी जाने वाली एक दवा जांच में मानकों पर खरी नहीं उतरी है। इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल सख्त कदम उठाते हुए संबंधित सिरप के उपयोग और वितरण पर रोक लगा दी है। यह मामला बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा होने के कारण पूरे स्वास्थ्य तंत्र में हलचल मच गई है और अभिभावकों के बीच भी चिंता का माहौल बन गया है।

    जानकारी के अनुसार पैरासिटामॉल पीडियाट्रिक ओरल सस्पेंशन आईपी 125mg 5ml नाम की सिरप जांच के दौरान फेल पाई गई है। यह दवा बच्चों को बुखार और दर्द में दी जाती है और सरकारी अस्पतालों में भी इसकी सप्लाई की गई थी। जैसे ही जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी सामने आई स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सभी अस्पतालों और चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए।

    मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी नवीन कोठारी ने सभी संबंधित संस्थानों को पत्र लिखकर इस विशेष बैच की दवा के उपयोग और वितरण को पूरी तरह से बंद करने के आदेश दिए हैं। साथ ही अस्पतालों और क्लिनिक को अपने स्टॉक की जांच करने और संदिग्ध बैच को अलग रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी तरह से यह दवा मरीजों तक न पहुंचे।

    इस दवा का निर्माण इंदौर स्थित मेसर्स जेनिथ ड्रग्स लिमिटेड द्वारा किया गया है। बताया जा रहा है कि दवा का सैंपल कुछ समय पहले जांच के लिए भोपाल भेजा गया था जहां परीक्षण के दौरान यह मानकों पर खरी नहीं उतरी। रिपोर्ट सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने बिना देरी किए इसे प्रतिबंधित कर दिया।

    सीएमएचओ नवीन कोठारी ने इस पूरे मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि राज्य में दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित जांच की प्रक्रिया अपनाई जाती है। स्टोर में रखी दवाओं का समय समय पर परीक्षण किया जाता है और एनएबीएल रिपोर्ट आने के बाद ही उन्हें उपयोग में लाया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंधित सिरप में क्लंपिंग की समस्या पाई गई है जिससे उसमें क्रिस्टलाइजेशन हो रहा था और यह निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं थी।

    हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह दवा पूरी तरह खराब नहीं है लेकिन तय गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरने के कारण इसे उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं माना जा सकता। फिलहाल यह दवा बाजार में उपलब्ध नहीं है और केवल सरकारी स्टॉक में ही थी जिससे स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिली है।

    स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे अपने बच्चों को यह विशेष सिरप न दें और यदि उनके पास इस बैच की दवा है तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। यह घटना एक बार फिर यह संकेत देती है कि दवाओं की गुणवत्ता को लेकर सतर्कता कितनी जरूरी है खासकर जब मामला बच्चों की सेहत से जुड़ा हो।

    इस कार्रवाई से साफ है कि स्वास्थ्य विभाग किसी भी तरह की लापरवाही को लेकर गंभीर है और मरीजों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। अब आगे इस मामले में विस्तृत जांच के बाद और भी कदम उठाए जा सकते हैं।

  • 16 साल की लड़ाई के बाद न्याय: National Investigation Agency केस में आरोपी बने राजेंद्र चौधरी बरी, पहली बार में पास की थी PSC परीक्षा

    16 साल की लड़ाई के बाद न्याय: National Investigation Agency केस में आरोपी बने राजेंद्र चौधरी बरी, पहली बार में पास की थी PSC परीक्षा


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के Depalpur निवासी राजेंद्र चौधरी की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं, लेकिन यह हकीकत है-दर्द, संघर्ष और आखिरकार न्याय की जीत की कहानी। 16 साल तक आतंकवाद के गंभीर मामलों में आरोपी रहे राजेंद्र को अदालत ने सभी आरोपों से बरी कर दिया। बुधवार को आए फैसले के बाद उन्होंने कहा, “मेरा सपना अधिकारी बनकर समाज सेवा करना था, लेकिन मुझे आरोपी बना दिया गया।”
    पहले ही प्रयास में PSC क्लियर, फिर बदली जिंदगी की दिशा
    राजेंद्र चौधरी ने बीकॉम की पढ़ाई के बाद MPPSC की प्रारंभिक परीक्षा पहले ही प्रयास में पास कर ली थी। वे प्रशासनिक सेवा में जाकर समाज के लिए काम करना चाहते थे। लेकिन दिसंबर 2012 की एक रात ने उनकी जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया।
    रामायण पाठ के दौरान गिरफ्तारी, NIA ने घेरा
    राजेंद्र के मुताबिक, 15 दिसंबर 2012 को वे गांव में रामायण का पाठ कर रहे थे, तभी National Investigation Agency (NIA) की टीम ने उन्हें चारों तरफ से घेरकर गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर हरियाणा ले जाया गया और पंचकूला की विशेष अदालत में पेश किया गया। उन पर Mecca Masjid Blast, Samjhauta Express Blast और मालेगांव ब्लास्ट जैसे मामलों में शामिल होने के आरोप लगाए गए।
    कस्टडी में टॉर्चर के आरोप, ‘अंधेरी कोठरी में रखा गया’
    राजेंद्र ने दावा किया कि गिरफ्तारी के बाद उन्हें कस्टडी में मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। उन्हें अंधेरी कोठरी में अकेले रखा जाता था, घंटों तक एक ही स्थिति में बैठने या खड़े रहने को मजबूर किया जाता था।
    उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें सोने नहीं दिया जाता था, मारपीट की जाती थी और कोरे कागजों पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव बनाया जाता था। यहां तक कि बिजली के झटके देने जैसी यातनाएं भी दी गईं।
    फरारी, जेल और अदालत-संघर्ष के 16 साल
    राजेंद्र के परिचितों के अनुसार, गिरफ्तारी से पहले वे करीब दो साल जम्मू-कश्मीर में फरारी काट चुके थे। इससे पहले उज्जैन के एक हत्याकांड में भी उन्हें आरोपी बनाया गया था, जिसमें वे 2014 में बरी हो गए थे। इन वर्षों में उन्हें अलग-अलग जेलों में रखा गया और कई मामलों में सुनवाई चली। इस दौरान उनका करियर, सामाजिक जीवन और परिवार सब प्रभावित हुआ।
    अदालत से बरी, न्याय व्यवस्था पर जताया भरोसा
    हाल ही में अदालत ने उन्हें सभी मामलों में बरी कर दिया। फैसले के बाद राजेंद्र ने कहा, “हमें शुरू से ही भारतीय न्याय व्यवस्था पर भरोसा था। आज उसी विश्वास की जीत हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि इतने सालों का नुकसान कोई वापस नहीं कर सकता, लेकिन न्याय मिलने से सुकून जरूर मिला है।
    अब आगे क्या? राजनीति में एंट्री के संकेत
    राजेंद्र चौधरी से जब पूछा गया कि क्या वे अब राजनीति में कदम रखेंगे, तो उन्होंने कहा कि यह फैसला समाज और उनके समर्थकों की राय पर निर्भर करेगा। फिलहाल उन्हें किसी राजनीतिक दल से कोई प्रस्ताव नहीं मिला है, लेकिन वे भविष्य के लिए विकल्प खुले रखे हुए हैं।
    सवालों के घेरे में जांच एजेंसियां
    यह मामला एक बार फिर जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। 16 साल तक गंभीर आरोपों में फंसे रहने के बाद बरी होना इस बात की ओर इशारा करता है कि जांच और साक्ष्यों की प्रक्रिया में कहीं न कहीं खामियां रही होंगी।

  • रसोई बना मौत का मंजर ,तेज विस्फोट में बुजुर्ग की जान गई ,पत्नी गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती

    रसोई बना मौत का मंजर ,तेज विस्फोट में बुजुर्ग की जान गई ,पत्नी गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती


    राजगढ़ । मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा शहर में शुक्रवार सुबह एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया जिसने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया। बायपास स्थित शिवधाम कॉलोनी में एक घर के रसोईघर में गैस सिलेंडर में हुए भीषण विस्फोट ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। इस दर्दनाक घटना में पति की मौके पर ही हालत गंभीर हो गई और बाद में अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई जबकि पत्नी गंभीर रूप से झुलसकर जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही है।

    जानकारी के अनुसार यह हादसा सुबह करीब पांच बजे हुआ जब सुरेंद्र सिंह भल्ला अपने घर में मौजूद थे। रसोईघर में रखे गैस सिलेंडर में अचानक आग लग गई और देखते ही देखते जोरदार विस्फोट हो गया। धमाका इतना तेज था कि उसकी आवाज दूर तक सुनाई दी और आसपास के लोग घबराकर अपने घरों से बाहर निकल आए। कुछ ही पलों में पूरी कॉलोनी में अफरा तफरी का माहौल बन गया।

    विस्फोट की चपेट में आकर 60 वर्षीय सुरेंद्र सिंह भल्ला और उनकी पत्नी पद्मा भल्ला बुरी तरह झुलस गए। दोनों को तत्काल बाहर निकालकर प्राथमिक उपचार के लिए स्थानीय अस्पताल ले जाया गया जहां उनकी हालत गंभीर देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें भोपाल रेफर कर दिया। लेकिन रास्ते में नरसिंहगढ़ पहुंचते ही सुरेंद्र सिंह ने दम तोड़ दिया जिससे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। वहीं उनकी पत्नी का इलाज जारी है और उनकी स्थिति नाजुक बताई जा रही है।

    घटना के समय दंपती घर में अकेले थे जिससे किसी को तुरंत मदद के लिए बुलाने का मौका भी नहीं मिल पाया। घर में पीएनजी गैस कनेक्शन के साथ एलपीजी सिलेंडर भी मौजूद था जिससे हादसे की वजह को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि पहले आग लगी और उसके बाद विस्फोट हुआ या फिर विस्फोट के कारण आग भड़की।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंचा और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने शव को सिविल अस्पताल ब्यावरा भेजकर पोस्टमार्टम कराया और मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए हर पहलू की जांच की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

    इस हादसे ने एक बार फिर घरेलू गैस सिलेंडर की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि गैस सिलेंडर के उपयोग में थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है इसलिए समय समय पर सुरक्षा मानकों का पालन करना बेहद जरूरी है।

    पूरी कॉलोनी में इस घटना के बाद शोक और डर का माहौल है। स्थानीय लोग इस दर्दनाक हादसे को लेकर स्तब्ध हैं और पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त कर रहे हैं। यह घटना एक चेतावनी भी है कि घर में उपयोग होने वाली गैस से जुड़ी सावधानियों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए क्योंकि एक छोटी सी चूक भी जानलेवा साबित हो सकती है।

  • धार्मिक प्रतीकों पर रोक का विरोध: Bhopal में कर्मचारियों को बांधा कलावा, प्रदर्शन तेज

    धार्मिक प्रतीकों पर रोक का विरोध: Bhopal में कर्मचारियों को बांधा कलावा, प्रदर्शन तेज


    नई दिल्ली । राजधानी Bhopal के एमपी नगर स्थित एक निजी कंपनी में कर्मचारियों के धार्मिक प्रतीकों पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। तिलक, बिंदी, मंगलसूत्र और कलावा जैसे प्रतीकों पर रोक के फैसले ने सामाजिक और धार्मिक संगठनों को नाराज़ कर दिया है, जिसके बाद मामला सड़कों तक पहुंच गया।
    हिंदू उत्सव समिति का प्रदर्शन, कर्मचारियों को बांधा कलावा
    इस फैसले के विरोध में Hindu Utsav Samiti ने जोरदार प्रदर्शन किया। समिति के अध्यक्ष Chandrashekhar Tiwari ने आरोप लगाया कि कंपनी ने नोटिस जारी कर कर्मचारियों को धार्मिक प्रतीक पहनकर आने से मना किया है, जो आस्था पर सीधा हमला है।
    प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने फैक्ट्री पहुंचकर कर्मचारियों को तिलक लगाया और कलावा बांधा, ताकि विरोध दर्ज कराया जा सके। साथ ही प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर एफआईआर दर्ज करने की मांग भी की गई।
    कर्मचारी का आरोप-तिलक लगाकर आने पर रोका गया
    विवाद तब और बढ़ गया जब एक कर्मचारी ने दावा किया कि वह तिलक और कलावा लगाकर काम पर पहुंचा, लेकिन उसे गेट पर ही रोक दिया गया। इस घटना के बाद कर्मचारियों में नाराज़गी बढ़ गई है और मामला संवेदनशील होता जा रहा है।
    कंपनी का पक्ष-प्रोडक्ट क्वालिटी का हवाला
    वहीं कंपनी प्रबंधन ने इस फैसले को धार्मिक नहीं, बल्कि तकनीकी और गुणवत्ता से जुड़ा बताया है। फैक्ट्री के मैनेजर VS Rajput के अनुसार, इन वस्तुओं के उपयोग से प्रोडक्ट के दूषित होने या रिजेक्ट होने का खतरा रहता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि संगठन की आपत्ति के बाद नोटिस पर पुनर्विचार किया जा रहा है और समाधान निकालने की कोशिश होगी।
    बहिष्कार की चेतावनी, प्रशासन पर नजर
    Hindu Utsav Samiti ने कंपनी के फैसले को वापस न लेने पर उसके उत्पादों के बहिष्कार की चेतावनी दी है। प्रदर्शनकारियों ने बीडीए कार्यालय से लेकर फैक्ट्री तक रैली निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया। फिलहाल दोनों पक्ष आमने-सामने हैं और प्रशासन की ओर से किसी ठोस कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है
    धार्मिक स्वतंत्रता बनाम कार्यस्थल नियम-बड़ा सवाल
    यह मामला अब केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह बहस भी तेज हो गई है कि कार्यस्थल पर धार्मिक प्रतीकों की सीमा क्या होनी चाहिए। एक ओर जहां कर्मचारी अपनी आस्था को बनाए रखने की बात कर रहे हैं, वहीं कंपनी गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का हवाला दे रही है। आने वाले दिनों में प्रशासन का रुख तय करेगा कि यह विवाद शांत होता है या और तूल पकड़ता है
  • ‘हर युग में हुआ विरोध’: हर्षा बोलीं-मेरा मार्ग राम ने तय किया, विवाद पर दिया जवाब

    ‘हर युग में हुआ विरोध’: हर्षा बोलीं-मेरा मार्ग राम ने तय किया, विवाद पर दिया जवाब


    नई दिल्ली । उज्जैन में संन्यास को लेकर छिड़े विवाद के बीच Swami Harshanand Giri ने एक वीडियो जारी कर संत समाज के आरोपों का जवाब दिया है। उन्होंने साफ कहा कि उनका संन्यास कोई आवेश में लिया गया फैसला नहीं, बल्कि आस्था और कर्म का मार्ग है-और अगर भगवान राम ने उनके जीवन में यह लिखा है, तो इसे कोई रोक नहीं सकता।

    ‘डेढ़ साल से सह रही हूं अपमान, अब हो गई मजबूत’

    वीडियो में Swami Harshanand Giri ने कहा कि वे पिछले डेढ़ साल से लगातार आलोचना और अपमान झेल रही हैं, लेकिन इस दौरान उन्होंने खुद को मानसिक रूप से मजबूत किया है। उन्होंने इसे अपनी “अग्नि परीक्षा” बताते हुए कहा कि अब वे किसी भी तरह के विरोध का सामना करने के लिए तैयार हैं। गौरतलब है कि महाकुंभ 2024 के दौरान चर्चा में आईं हर्षा रिछारिया ने हाल ही में संन्यास ग्रहण किया और अब वे स्वामी हर्षानंद गिरि के नाम से जानी जाती हैं। उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में Mahant Sumananand Ji Maharaj ने उन्हें दीक्षा दी थी। हालांकि, उनके इस कदम पर Anilanand Maharaj सहित कुछ संतों ने आपत्ति जताई है।

    मीरा, बुद्ध और सीता का उदाहरण देकर जवाब

    अपने बयान में उन्होंने इतिहास और धर्मग्रंथों का हवाला देते हुए कहा कि जब-जब किसी ने सत्य और धर्म का मार्ग चुना, उसे विरोध का सामना करना पड़ा। उन्होंने Meera Bai, Gautama Buddha, Jesus Christ, भगवान राम और सीता का उदाहरण देते हुए कहा कि हर युग में सच्चाई के रास्ते पर चलने वालों की परीक्षा ली जाती रही है और महिलाओं को अक्सर ज्यादा आलोचना झेलनी पड़ती है।

    ‘परिवर्तन कभी भी संभव, वाल्मीकि इसका उदाहरण’

    संन्यास की उम्र और परंपरा पर उठे सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में परिवर्तन का सिद्धांत हमेशा से रहा है। उन्होंने Valmiki का उदाहरण देते हुए कहा कि जीवन में किसी भी समय बदलाव संभव है। अगर ऐसा नहीं होता, तो ऐसे उदाहरण धर्मग्रंथों में क्यों मिलते?

    ‘प्रचार के लिए मुझे बनाया गया निशाना’

    Swami Harshanand Giri ने आरोप लगाया कि कुछ लोग सिर्फ प्रसिद्धि पाने के लिए उन्हें निशाना बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि “आपको वायरल होने के लिए एक मुद्दा चाहिए था, और आपने मुझे चुन लिया। साथ ही उन्होंने संतों द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा पर भी आपत्ति जताई और कहा कि एक महिला के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग संत परंपरा के खिलाफ है।

    युवाओं को धर्म से जोड़ने की अपील

    वीडियो के अंत में उन्होंने संत समाज से अपील की कि वे विवाद बढ़ाने के बजाय युवाओं को धर्म से जोड़ने का प्रयास करें। उनका कहना था कि इस तरह के विवाद युवाओं को आस्था से दूर कर सकते हैं।

    उन्होंने अपनी बात “होइहि सोइ जो राम रचि राखा” के साथ खत्म करते हुए कहा कि उनका मार्ग ईश्वर ने तय किया है और उन्हें किसी की स्वीकृति की आवश्यकता नहीं है।

  • विकास में किसानों की भागीदारी मजबूत,चार गुना मुआवजे से बदलेगी आर्थिक तस्वीर ,सीएम का बड़ा बयान

    विकास में किसानों की भागीदारी मजबूत,चार गुना मुआवजे से बदलेगी आर्थिक तस्वीर ,सीएम का बड़ा बयान


    भोपाल । भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने भूमि अधिग्रहण और किसानों के हितों को लेकर एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि अब प्रदेश में जमीन देने वाले किसानों को चार गुना तक मुआवजा दिया जाएगा। इस फैसले को सरकार की विकास नीति और किसान हितैषी दृष्टिकोण का महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य किसानों को केवल मुआवजा देना नहीं बल्कि उन्हें विकास की मुख्यधारा में भागीदार बनाना है ताकि वे आर्थिक रूप से मजबूत हो सकें।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जब किसानों को उनकी जमीन के बदले पर्याप्त और संतोषजनक मुआवजा मिलेगा तो वे न केवल अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा कर पाएंगे बल्कि नई जमीन खरीदने या अन्य निवेश करने में भी सक्षम होंगे। इससे उनकी आजीविका सुरक्षित होगी और वे भविष्य को लेकर अधिक आत्मविश्वास महसूस करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार द्वारा लिए गए इस निर्णय से भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों के निपटारे में तेजी आएगी और लंबे समय से लंबित प्रकरणों का समाधान भी शीघ्र हो सकेगा।

    सीएम ने जोर देते हुए कहा कि प्रदेश में सिंचाई परियोजनाएं सड़क निर्माण पुल रेलवे और बांध जैसे बड़े विकास कार्य अक्सर भूमि अधिग्रहण में देरी के कारण प्रभावित होते रहे हैं। लेकिन अब जब किसानों को चार गुना मुआवजा मिलेगा तो इन परियोजनाओं के लिए जमीन उपलब्ध कराना आसान होगा और विकास कार्यों को गति मिलेगी। इससे न केवल शहरी क्षेत्रों में बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार होगा।

    मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि सरकार हर साल करीब 20 हजार करोड़ रुपए मुआवजे के रूप में किसानों को प्रदान करेगी। यह एक बड़ी आर्थिक राशि है जो सीधे तौर पर किसानों के खातों में पहुंचेगी और उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगी। उन्होंने कहा कि भूमि देने वाले किसान परिवारों को इस योजना से बड़ा लाभ मिलेगा और उनके जीवन स्तर में सुधार आएगा।

    इस फैसले को राज्य में कृषि और विकास के बीच संतुलन बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। जहां एक ओर सरकार विकास परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाना चाहती है वहीं दूसरी ओर किसानों के हितों को भी प्राथमिकता दी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस योजना का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।

    कुल मिलाकर सरकार का यह निर्णय किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के साथ साथ विकास कार्यों को गति देने वाला साबित हो सकता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस योजना का जमीनी स्तर पर किस तरह क्रियान्वयन होता है और किसानों को इसका वास्तविक लाभ कितनी तेजी से मिल पाता है।

  • इंदौर में जनगणना की तैयारी तेज तीसरे चरण का प्रशिक्षण शुरू 2000 अधिकारी बने प्रक्रिया का हिस्सा

    इंदौर में जनगणना की तैयारी तेज तीसरे चरण का प्रशिक्षण शुरू 2000 अधिकारी बने प्रक्रिया का हिस्सा


    इंदौर । इंदौर में आगामी जनगणना को लेकर प्रशासन ने अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है और इसी कड़ी में प्रशिक्षण का तीसरा चरण शुरू कर दिया गया है। इस चरण में लगभग 2000 अधिकारी और कर्मचारी भाग ले रहे हैं जिन्हें जनगणना की पूरी प्रक्रिया को बेहतर तरीके से समझाने और लागू करने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। शहर में यह प्रशिक्षण कार्यक्रम होलकर साइंस कॉलेज में आयोजित किया जा रहा है जहां मास्टर ट्रेनर्स द्वारा प्रतिभागियों को विस्तृत और व्यावहारिक जानकारी दी जा रही है।

    इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य जनगणना प्रक्रिया को अधिक सटीक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है ताकि एकत्रित की जाने वाली जानकारी पूरी तरह विश्वसनीय हो सके। बदलते समय के साथ अब जनगणना की प्रक्रिया भी डिजिटल होती जा रही है और इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार डिजिटल डेटा कलेक्शन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों और कर्मचारियों को यह बताया जा रहा है कि किस प्रकार डिजिटल माध्यम से डेटा को सही तरीके से एकत्रित किया जाए और फॉर्म भरने की प्रक्रिया को सरल और त्रुटिरहित बनाया जाए।

    प्रशिक्षण सत्र के दौरान प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को अलग अलग मॉड्यूल के माध्यम से तैयार किया जा रहा है ताकि वे फील्ड में जाकर बिना किसी परेशानी के अपना कार्य कर सकें। उन्हें यह भी सिखाया जा रहा है कि जनगणना के दौरान किन बातों का विशेष ध्यान रखना जरूरी है और किस प्रकार प्रत्येक परिवार से सटीक जानकारी प्राप्त की जा सकती है। इसके अलावा प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों की शंकाओं का समाधान भी मौके पर ही किया जा रहा है जिससे उन्हें किसी भी प्रकार की उलझन न रहे।

    प्रशासन का मानना है कि यदि प्रशिक्षण मजबूत होगा तो फील्ड में काम करने वाले कर्मचारी बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे और जनगणना की पूरी प्रक्रिया सुचारू रूप से संपन्न होगी। यही कारण है कि इस बार प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है और हर स्तर पर अधिकारियों को तैयार किया जा रहा है।

    जनगणना किसी भी देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है क्योंकि इसके आधार पर ही भविष्य की नीतियां और योजनाएं तैयार की जाती हैं। ऐसे में डेटा की सटीकता और विश्वसनीयता बेहद जरूरी हो जाती है। इंदौर में शुरू हुआ यह प्रशिक्षण कार्यक्रम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है जो आने वाले समय में जनगणना को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।

    प्रशासन को उम्मीद है कि इस तरह के व्यवस्थित और तकनीकी रूप से सशक्त प्रशिक्षण के माध्यम से जनगणना प्रक्रिया को नई दिशा मिलेगी और शहर में इसे बिना किसी त्रुटि के पूरा किया जा सकेगा। इससे न केवल प्रशासनिक कार्यों में सुधार होगा बल्कि विकास योजनाओं को भी सही दिशा देने में मदद मिलेगी।

  • गेहूं खरीदी पर सियासी संग्राम तेज सरकार के दावों पर कांग्रेस का बड़ा हमला

    गेहूं खरीदी पर सियासी संग्राम तेज सरकार के दावों पर कांग्रेस का बड़ा हमला


    भोपाल । मध्यप्रदेश में गेहूं खरीदी को लेकर सियासी माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा खरीदी का कोटा बढ़ाने के दावों के बीच अब कांग्रेस ने राज्य सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव कुणाल चौधरी ने सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि जमीनी हकीकत सरकार के दावों से बिल्कुल अलग नजर आ रही है।

    कुणाल चौधरी ने आरोप लगाया कि सरकार भले ही 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी का दावा कर रही हो लेकिन असल स्थिति बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि पिछले पंद्रह दिनों के आंकड़े ही सरकार की पोल खोलने के लिए काफी हैं। उनके अनुसार इस अवधि में लगभग 2.25 लाख किसानों से केवल 9.5 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी हो पाई है जबकि राज्य में कुल 19.04 लाख किसानों से खरीदी किया जाना बाकी है।

    उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि मध्यप्रदेश में वास्तविक आवश्यकता लगभग 160 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी की है लेकिन वर्तमान गति को देखते हुए यह लक्ष्य बेहद दूर दिखाई दे रहा है। चौधरी का कहना है कि अगर इसी रफ्तार से काम चलता रहा तो पूरी खरीदी प्रक्रिया को पूरा होने में करीब छह महीने का समय लग सकता है जो किसानों के हित में बिल्कुल भी नहीं है।

    कांग्रेस नेता ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह केवल विज्ञापनों के जरिए उपलब्धियां दिखाने में लगी हुई है जबकि जमीनी स्तर पर किसान परेशान हैं। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर गेहूं की खरीदी को घुन या मिट्टी का हवाला देकर रोक दिया जा रहा है जिससे किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। किसान अपनी फसल लेकर मंडियों में खड़े हैं लेकिन खरीदी प्रक्रिया धीमी होने के कारण उन्हें आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानी झेलनी पड़ रही है।

    चौधरी ने यह भी कहा कि सरकार को किसानों को भ्रमित करना बंद करना चाहिए और वास्तविक स्थिति को स्वीकार करते हुए तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए। उन्होंने मांग की कि सरकार 24 घंटे के भीतर खरीदी प्रक्रिया को तेज करे ताकि किसानों को राहत मिल सके। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि किसानों से किए गए वादों को निभाना सरकार की जिम्मेदारी है और इसमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    मध्यप्रदेश में गेहूं खरीदी हर साल एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहता है क्योंकि बड़ी संख्या में किसान अपनी आजीविका के लिए इस पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में खरीदी की धीमी रफ्तार न केवल किसानों की आय को प्रभावित करती है बल्कि राज्य की कृषि व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है। अब देखना यह होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या वास्तव में खरीदी प्रक्रिया को तेज करने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं।