Category: Madhya Pradesh

  • तेज रफ्तार बस का कहर, बाइक सवार की दर्दनाक मौत, के बाद ग्रामीणों ने किया चक्का जाम

    तेज रफ्तार बस का कहर, बाइक सवार की दर्दनाक मौत, के बाद ग्रामीणों ने किया चक्का जाम


    इंदौर । इंदौर जिले के महू क्षेत्र में स्थित किशनगंज थाना इलाके के भैंसलाए गांव में एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। तेज रफ्तार से दौड़ रही एक फैक्ट्री बस ने बाइक सवार युवक को इतनी जोरदार टक्कर मारी कि उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टक्कर के बाद युवक को संभलने का मौका तक नहीं मिला और घटनास्थल पर ही उसकी सांसें थम गईं। देखते ही देखते मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई और माहौल गम और गुस्से में बदल गया।

    यह घटना केवल एक हादसा नहीं बल्कि लंबे समय से चली आ रही लापरवाही का नतीजा मानी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव की सड़क से तेज रफ्तार में गुजरने वाले वाहनों को लेकर कई बार प्रशासन को चेताया गया था। विशेष रूप से फैक्ट्री की बसों की रफ्तार पर लगाम लगाने और गांव में स्पीड ब्रेकर बनाने की मांग बार बार उठाई गई थी लेकिन हर बार इसे नजरअंदाज कर दिया गया। इस अनदेखी ने आखिरकार एक युवक की जान ले ली और अब ग्रामीणों का धैर्य टूट गया।

    हादसे के बाद गुस्साए ग्रामीण बड़ी संख्या में सड़क पर उतर आए और उन्होंने चक्का जाम कर दिया। लोगों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए प्रशासन के खिलाफ अपना आक्रोश जाहिर किया। उनका साफ कहना था कि यदि समय रहते स्पीड ब्रेकर बनाए गए होते तो शायद यह हादसा टल सकता था। प्रदर्शन के चलते इलाके में यातायात पूरी तरह ठप हो गया और सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।

    ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि फैक्ट्री की बसें अक्सर लापरवाही से और तेज रफ्तार में गांव के भीतर से गुजरती हैं जिससे हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है। इसके बावजूद न तो कोई गति नियंत्रण के उपाय किए गए और न ही सुरक्षा के अन्य इंतजाम किए गए। लोगों का कहना है कि प्रशासन केवल घटनाओं के बाद सक्रिय होता है जबकि पहले से चेतावनी देने के बावजूद कोई कदम नहीं उठाया जाता।

    घटना की सूचना मिलते ही किशनगंज थाना पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को काबू में करने की कोशिश की। पुलिस ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया और यातायात बहाल कराने की दिशा में कदम उठाए। साथ ही मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा गया और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

    यह हादसा एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी घटना का इंतजार करता है या फिर समय रहते जरूरी कदम उठाए जाएंगे। एक जान जाने के बाद अब गांव के लोग ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।

  • कांग्रेस IT सेल वर्कर्स को लेकर विवाद: Bhopal में परिजनों ने लगाया अपहरण का आरोप, जांच की मांग

    कांग्रेस IT सेल वर्कर्स को लेकर विवाद: Bhopal में परिजनों ने लगाया अपहरण का आरोप, जांच की मांग


    नई दिल्ली । राजधानी Bhopal में राजस्थान साइबर पुलिस की कार्रवाई ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। कांग्रेस आईटी सेल से जुड़े तीन कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने के बाद परिजनों ने गंभीर आरोप लगाते हुए इसे ‘अपहरण’ तक करार दिया है। मामला अब कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तर पर गरमा गया है, जबकि पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
    परिजनों का आरोप: बिना सूचना ले गए, कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं अपनाई
    शिकायतकर्ता मोहम्मद आमिर ने आरोप लगाया कि उनके भांजे बिलाल खान समेत तीन युवकों निखिल और इनाम को कुछ लोग खुद को राजस्थान पुलिस बताकर अपने साथ ले गए। परिवार का कहना है कि उन्हें यह कहकर गुमराह किया गया कि तीनों को कोर्ट में पेश किया जाएगा, लेकिन न तो उन्हें किसी स्थानीय अदालत में पेश किया गया और न ही मेडिकल कराया गया। परिजनों का आरोप है कि बिना आधिकारिक जानकारी के इस तरह ले जाना कानून के खिलाफ है।
    वायरल पत्र से जुड़ा है पूरा विवाद
    यह पूरा मामला राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री Vasundhara Raje के नाम से वायरल हुए एक कथित पत्र से जुड़ा बताया जा रहा है। सोशल मीडिया पर प्रसारित इस पत्र के तार भोपाल स्थित कांग्रेस आईटी सेल से जुड़े होने की आशंका जताई गई थी। इसी सिलसिले में राजस्थान साइबर पुलिस की टीम जांच के लिए भोपाल पहुंची थी।
    राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
    कांग्रेस नेता PC Sharma ने इस मामले को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब परिवार ने शिकायत दर्ज करा दी है, तो संबंधित एजेंसियों को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना सूचना, बिना मेडिकल और बिना कोर्ट पेशी के कार्रवाई पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है। परिवार की मांग है कि तीनों युवकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जाए।
    टाइमलाइन से बढ़ी शंका
    घटना की टाइमलाइन भी कई सवाल खड़े करती है। 19 अप्रैल: तीनों कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर रोका गया। 21 अप्रैल दोपहर: परिजनों को जानकारी मिली कि उन्हें कलेक्टर कार्यालय के पास रखा गया है। उसी दिन दोपहर 3 बजे: एक कार से उन्हें कहीं ले जाया गया, परिजनों को जमानत की बात कहकर भेज दिया गया। शाम तक कोई जानकारी नहीं मिलने पर परिजनों ने थाना कोहेफिजा में शिकायत दर्ज कराई। इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता पर संदेह और गहरा कर दिया है।
    हाईकोर्ट सख्त, 27 अप्रैल को पेश करने के आदेश
    मामले ने जब कानूनी मोड़ लिया तो Madhya Pradesh High Court की जबलपुर बेंच ने हस्तक्षेप किया। अदालत ने राजस्थान पुलिस को 27 अप्रैल को तीनों कार्यकर्ताओं को पेश करने का निर्देश दिया है। साथ ही मध्य प्रदेश और राजस्थान पुलिस से पूरी कार्रवाई का विवरण मांगा गया है। कोर्ट ने 20-21 अप्रैल के सीसीटीवी फुटेज भी प्रस्तुत करने को कहा है।
    गिरफ्तारी प्रक्रिया पर उठे बड़े सवाल
    याचिका में गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताते हुए न्याय की मांग की गई है। सवाल यह है कि यदि कार्रवाई नियमों के तहत हुई, तो परिजनों को अंधेरे में क्यों रखा गया? यही वजह है कि यह मामला अब सिर्फ एक पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही की बड़ी परीक्षा बन गया है।
    सच्चाई सामने आना जरूरी
    भोपाल में हुई इस घटना ने पुलिस की कार्यशैली, कानूनी प्रक्रिया और पारदर्शिता पर गंभीर बहस छेड़ दी है। अब सबकी नजर 27 अप्रैल पर टिकी है, जब अदालत में सच्चाई सामने आएगी और यह तय होगा कि कार्रवाई कानून के दायरे में थी या नहीं।
  • CM का बयान: एक्सपोर्ट बाधित होने से बढ़ा दबाव, गेहूं खरीद बढ़ाने और जूट सप्लाई सुधारने की अपील

    CM का बयान: एक्सपोर्ट बाधित होने से बढ़ा दबाव, गेहूं खरीद बढ़ाने और जूट सप्लाई सुधारने की अपील


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी को लेकर सरकार ने बड़ा रुख साफ किया है। मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने कहा है कि प्रदेश में रिकॉर्ड उत्पादन को देखते हुए केंद्र सरकार से खरीदी का कोटा बढ़ाने की मांग की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक हालातों के चलते निर्यात में कमी और जूट आयात में आ रही दिक्कतों के बावजूद राज्य सरकार किसानों का एक-एक दाना खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है।
    वैश्विक संकट का असर: एक्सपोर्ट रुका, जूट आयात प्रभावित
    मुख्यमंत्री ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां इस समय जटिल बनी हुई हैं, जिसके कारण भारत से गेहूं का निर्यात लगभग ठप हो गया है। वहीं पश्चिम एशिया में युद्ध जैसे हालातों के चलते जूट की आपूर्ति भी बाधित हुई है। इसके बावजूद प्रदेश सरकार ने वैकल्पिक इंतजाम करते हुए पीपी बैग्स की व्यवस्था कर खरीदी प्रक्रिया को प्रभावित नहीं होने दिया है।
    रिकॉर्ड पैदावार से बढ़ी चुनौती, कोटा कम पड़ने की आशंका
    इस साल प्रदेश में गेहूं का उत्पादन लगभग दोगुना हुआ है, जिससे खरीदी व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। केंद्र सरकार ने फिलहाल 78 लाख मीट्रिक टन का कोटा तय किया है, लेकिन मौजूदा उत्पादन को देखते हुए यह लक्ष्य अपर्याप्त साबित हो सकता है। इसी कारण राज्य सरकार लगातार केंद्र से संपर्क कर कोटा बढ़ाने की मांग कर रही है, ताकि हर किसान को उसकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।
    किसानों के हित में रणनीति: छोटे किसानों को प्राथमिकता
    सरकार ने किसान संगठनों के साथ चर्चा के बाद खरीदी की प्राथमिकता तय की है। इसके तहत पहले छोटे किसानों, फिर मध्यम और अंत में बड़े किसानों की उपज खरीदी जाएगी। इससे छोटे और जरूरतमंद किसानों को पहले राहत मिलने की उम्मीद है।
    एमएसपी पर बोनस के साथ खरीदी, 2700 का वादा बरकरार
    प्रदेश में इस साल गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य ₹2585 प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। इसके साथ ₹40 प्रति क्विंटल बोनस जोड़कर किसानों को कुल ₹2625 प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि संकल्प पत्र में किए गए ₹2700 प्रति क्विंटल के वादे को अगले तीन वर्षों में पूरा किया जाएगा।
    भंडारण भी बड़ी चुनौती, फिर भी खरीदी जारी
    सीएम ने यह भी माना कि पिछले साल का गेहूं अभी भी बड़ी मात्रा में गोदामों में रखा हुआ है, जिससे भंडारण की समस्या सामने आ रही है। बावजूद इसके, सरकार खरीदी प्रक्रिया को प्रभावित नहीं होने देगी और हर किसान की फसल खरीदे जाने का प्रयास जारी रहेगा।
    किसानों को भरोसा: सरकार हर हाल में साथ
    मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने किसानों को आश्वस्त करते हुए कहा कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, सरकार उनके हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठा रही है। केंद्र से कोटा बढ़ाने की मांग भी इसी दिशा में एक अहम प्रयास है, जिससे प्रदेश के किसानों को उनका हक मिल सके।
  • एमपी में भीषण गर्मी का दौर जारी, खजुराहो में पारा 43.4 डिग्री पहुंचा, आज 19 जिलों में लू चलने की चेतावनी

    एमपी में भीषण गर्मी का दौर जारी, खजुराहो में पारा 43.4 डिग्री पहुंचा, आज 19 जिलों में लू चलने की चेतावनी

    भोपाल । मध्यप्रदेश में गर्मी का असर लगातार तेज होता जा रहा है। बुधवार को राज्य का प्रमुख पर्यटन स्थल खजुराहो सबसे गर्म शहर रहा, जहां तापमान 43.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके बाद नर्मदापुरम और नौगांव में भी पारा 43 डिग्री के पार पहुंच गया। मौसम विभाग ने गुरुवार को भी तेज गर्मी और लू का असर बने रहने की चेतावनी दी है। ग्वालियर सहित 19 जिलों में लू का अलर्ट जारी किया गया है, जबकि भोपाल, इंदौर, उज्जैन और जबलपुर में भी गर्म हवाएं परेशान करेंगी।

    इन जिलों में लू का अलर्ट जारी
    मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार ग्वालियर, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रायसेन, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, रतलाम, झाबुआ, धार और अलीराजपुर में लू चलने की संभावना है। प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

    प्रदेश के कई शहरों में पारा 40°C से ऊपर
    बुधवार को कई जिलों में तापमान 40 डिग्री से अधिक रिकॉर्ड किया गया। खजुराहो के बाद नर्मदापुरम (43.2°C) और नौगांव (43°C) सबसे गर्म रहे। रायसेन, दतिया, टीकमगढ़, सागर, रीवा, मंडला और अन्य कई जिलों में भी पारा 40 से 42 डिग्री के बीच दर्ज हुआ। बड़े शहरों की बात करें तो जबलपुर 41.6°C, ग्वालियर 41.2°C, भोपाल 40.6°C, इंदौर 40°C और उज्जैन 40.2°C पर रहा।

    रातें भी नहीं दे रहीं राहत, वॉर्म नाइट की स्थिति
    प्रदेश में अब रात का तापमान भी राहत नहीं दे रहा है। कई शहरों में न्यूनतम तापमान 25 से 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति ‘वॉर्म नाइट’ कहलाती है, जब रात का तापमान सामान्य से काफी अधिक रहता है। हालांकि फिलहाल ‘सीवियर वॉर्म नाइट’ की स्थिति दर्ज नहीं की गई है।

    मौसम विभाग की चेतावनी और सलाह
    लगातार बढ़ती गर्मी को देखते हुए मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। दिन में पर्याप्त पानी पीने, धूप से बचने और हल्के सूती कपड़े पहनने की अपील की गई है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत बताई गई है, ताकि हीटवेव के असर से बचा जा सके।

  • MP: ग्वालियर में लाइटर सुलगाने में बुजुर्ग के शर्ट में लगी आग…. झुलसकर मौत

    MP: ग्वालियर में लाइटर सुलगाने में बुजुर्ग के शर्ट में लगी आग…. झुलसकर मौत


    ग्वालियर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के ग्वालियर (Gwalior) के माधौगंज में बीड़ी सुलगाने के दौरान लाइटर जलाना (Lighting lighter) एक बुजुर्ग (Elderly.) की जान ले गया। पान पत्ते गोठ में रहने वाले 70 साल के काशीराम कुशवाह की आग से झुलसने के कारण मौत हो गई। परिजनों के मुताबिक काशीराम की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। हादसे के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया लेकिन इलाज के बाद उन्होंने दम तोड़ दिया। वहीं पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।

    दअरसल माधौगंज थाना क्षेत्र के पान पत्ते की गोठ में रहने वाले गोविंद कुशवाह ने पुलिस को बताया कि उनके पिता काशीराम कुशवाह की उम्र 70 साल थी। वह घर के पास मेवाती बाबा के मंदिर के चबूतरे पर बैठे थे। काशीराम की मानसिक हालत ठीक नहीं रहती थी। इसी दौरान उन्होंने बीड़ी सुलगाने के लिए लाइटर जलाया।

    लाइटर की लौ से अचानक उनकी शर्ट ने आग पकड़ ली। काशीराम खुद आग बुझाने की कोशिश करते रहे लेकिन बुझा नहीं सके। वह मदद के लिए चिल्लाए। चीख सुनकर परिजन और आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। किसी तरह आग बुझाई गई। लेकिन तब तक काशीराम बुरी तरह झुलस चुके थे।

    परिजन उन्हें गंभीर हालत में इलाज के लिए अस्पताल ले गए। डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया लेकिन मंगलवार की रात को काशीराम ने दम तोड़ दिया। घटना का पता चलते ही पुलिस भी अस्पताल पहुंची। जहां पुलिस ने परिजनों से पूछताछ के बाद मृतक के शव को पोस्टमार्टम हाउस के लिए भेज दिया। शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया है। हादसे के बाद इलाके में शोक का माहौल है।फिलहाल पुलिस इस घटना को लेकर जांच कर कार्रवाई में जुट गई है।

  • MP: खंडवा सांसद के छोटे भाई ने किया सुसाइड… कुएं में कूदकर दी जान, खेत में मिली चप्पल

    MP: खंडवा सांसद के छोटे भाई ने किया सुसाइड… कुएं में कूदकर दी जान, खेत में मिली चप्पल


    बुरहानपुर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के खंडवा-बुरहानपुर संसदीय क्षेत्र (Khandwa-Burhanpur parliamentary constituency) से सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल (MP Dnyaneshwar Patil) के छोटे भाई विश्वनाथ उर्फ बाडू पाटिल (58) ने आत्महत्या कर ली. यह घटना बुरहानपुर जिले (Burhanpur district) के गृह ग्राम बोहरडा में सामने आई, जहां उन्होंने अपने ही खेत के कुएं में कूदकर जान दे दी. बताया गया कि बुधवार तड़के वे चुपचाप घर से निकले थे और फिर वापस नहीं लौटे.

    सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस में हड़कंप मच गया. जिले के डीएम और एसपी दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे. इसके बाद गोताखोरों की मदद से कुएं में तलाश शुरू की गई. करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद विश्वनाथ पाटिल का शव कुएं से बाहर निकाला गया।

    पुलिस ने पंचनामा बनाकर शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया. प्रारंभिक जांच में आत्महत्या की आशंका जताई जा रही है, हालांकि घटना का वास्तविक कारण अभी तक सामने नहीं आ सका है.


    घटना के बाद क्षेत्र में शोक की लहर

    इस दुखद घटना के बाद पूरे क्षेत्र और पाटिल परिवार के समर्थकों में शोक की लहर दौड़ गई है. जानकारी के अनुसार, दिवंगत विश्वनाथ पाटिल का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव बोहरडा में किया जाएगा.

    सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल उस समय दिल्ली में थे. घटना की जानकारी मिलते ही वे तुरंत दिल्ली से बुरहानपुर के लिए रवाना हो गए. उधर, सांसद के गृह ग्राम बोहरडा स्थित निवास पर बड़ी संख्या में समर्थक और रिश्तेदार पहुंचने लगे. नेपानगर विधायक मंजू दादू सहित भाजपा और कांग्रेस के कई नेता भी सांसद निवास पहुंचे और शोक संवेदना व्यक्त की. स्थिति को देखते हुए पुलिस बल भी तैनात किया गया।


    पुलिस जांच जारी

    बुरहानपुर एसपी देवेंद्र पाटीदार ने बताया कि पुलिस को पहले विश्वनाथ पाटिल के लापता होने की सूचना मिली थी. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की गई. जांच के दौरान खेत के पास उनकी चप्पल मिली, जिसके बाद कुएं में तलाश की गई और शव बरामद किया गया. पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और मृत्यु के कारणों की जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, लेकिन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है. घटना के बाद पूरे इलाके में गमगीन माहौल बना हुआ है।

  • MP: सतना में भीषण हादसा…. बेकाबू ट्रक डिवाइडर तोड़ नहर में गिरा, 3 लोगों की मौत

    MP: सतना में भीषण हादसा…. बेकाबू ट्रक डिवाइडर तोड़ नहर में गिरा, 3 लोगों की मौत


    सतना।
    एमपी (MP) में सतना जिले (Satna district) के नेशनल हाईवे-39 (National Highway-39) पर बुधवार की सुबह एक भयावह मंजर देखने को मिला है। सतना से रीवा की ओर जा रहा सरिया लदा एक तेज रफ्तार ट्रक नेमुआ मोड़ के पास बेकाबू होकर डिवाइडर लांघते हुए सीधे गहरी नहर में जा गिरा। इस भीषण हादसे में ट्रक के केबिन के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार चालक, क्लीनर व मजदूर की मौके पर ही सांसें थम गईं। मलबे और भारी सरियों के बीच फंसे शवों को निकालने के लिए प्रशासन को करीब 4 घंटे तक कड़ा संघर्ष करना पड़ा।


    कटर मशीन से काटकर निकाली लाश

    हादसा इतना भीषण था कि ट्रक का अगला हिस्सा पूरी तरह पिचक गया था। सूचना पर रामपुर बघेलान थाना प्रभारी संदीप चतुर्वेदी जब पुलिस बल के साथ पहुंचे, तो ट्रक के भीतर शव लोहे के जाल में फंसे हुए थे। पुलिस ने पहले बड़ी क्रेन के जरिए ट्रक को सीधा कराया, लेकिन एक शव ऐसी जगह फंसा था जिसे सामान्य रूप से निकालना नामुमकिन था। इसके बाद मौके पर गैस कटर मशीन बुलाई गई और ट्रक की बॉडी को काटकर शव बाहर निकाले गए।


    मैहर जिले के है दो मृतक

    हादसे का शिकार हुए तीन लोगों में से दो की पहचान मैहर जिले के निवासियों के रूप में हुई है। मृतकों की शिनाख्त पडरी निवासी दिलीप केवट (पिता राजेश केवट) और रामगढ़ निवासी विष्णु केवट (पिता माखनलाल केवट) के रूप में की गई है। तीसरे मृतक की शिनाख्त फिलहाल नहीं हो सकी है, पुलिस उसके परिजनों का पता लगाने का प्रयास कर रही है।


    5 घंटे तक थमा रहा हाईवे का सफर

    सुबह करीब 8 बजे हुए इस हादसे के बाद हाईवे पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मौके पर सैकड़ों ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई, जिससे सतना-रीवा मार्ग पर लंबा जाम लग गया। हालात का जायजा लेने एडिशनल एसपी और तहसीलदार सुजीत नागेश भी पहुंचे। पुलिस ने एम्बुलेंस के जरिए शवों को मरचुरी भिजवाया और क्षतिग्रस्त ट्रक को हटवाने के बाद करीब 5 घंटे बाद यातायात बहाल कराया।


    जांच के घेरे में हादसे की वजह

    पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अंदेशा जताया जा रहा है कि या तो ट्रक की स्टेयरिंग फेल हुई या फिर अलसुबह चालक को झपकी आने के कारण यह भीषण हादसा हुआ। ट्रक में लदे भारी भरकम लोहे के सरियों ने केबिन पर दबाव बनाया, जिससे बचाव का कोई मौका नहीं मिला है।

  • भोजशाला परिसर विवाद पर न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ी, सभी पक्षों को दस्तावेज सौंपने के निर्देश

    भोजशाला परिसर विवाद पर न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ी, सभी पक्षों को दस्तावेज सौंपने के निर्देश


    मध्य प्रदेश/धार: मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर से जुड़े विवाद मामले में इंदौर हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान अदालत ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं, जिनसे मामले की जांच और पारदर्शिता की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को आदेश दिया है कि 98 दिनों तक चले सर्वे की पूरी वीडियोग्राफी संबंधित पक्षों को उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ ही स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी पक्षों को वीडियो रिकॉर्डिंग सौंप दी जाए, ताकि वे अपने तर्क और दावे इन साक्ष्यों के आधार पर प्रस्तुत कर सकें।

    इस मामले में भोजशाला परिसर के अधिकार को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद जारी है और अदालत में इस विषय पर नियमित सुनवाई हो रही है। याचिका मुस्लिम पक्ष की ओर से कमाल मौला वेलफेयर ट्रस्ट द्वारा दायर की गई है, जिस पर डबल बेंच में सुनवाई की जा रही है। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की ओर से अपने कानूनी तर्क और ऐतिहासिक तथ्यों को प्रस्तुत किया जा रहा है, जिसमें विभिन्न न्यायिक निर्णयों और पूर्व मामलों का उल्लेख भी शामिल है।

    सुनवाई के दौरान कानूनी बहस मुख्य रूप से टाइटल विवाद, साक्ष्यों की स्वीकार्यता और याचिका की वैधता जैसे मुद्दों पर केंद्रित रही। मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रस्तुत दलीलों में यह कहा गया कि एएसआई सर्वे की रिपोर्ट और उसकी प्रक्रिया को लेकर पहले भी न्यायालयों द्वारा कुछ मानक निर्धारित किए गए हैं, जिन्हें इस मामले में भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

    मुस्लिम पक्ष की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि सर्वे प्रक्रिया के दौरान कुछ पहलुओं को लेकर आपत्तियां दर्ज की गई थीं। उनका कहना है कि सर्वे के दौरान की गई खुदाई और रिकॉर्डिंग में कुछ अवशेषों को लेकर असमानता देखने को मिली है, जिससे मामले की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। इसके साथ ही यह भी कहा गया कि वीडियोग्राफी से वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी और अदालत के समक्ष सभी पक्षों के दावों का सही मूल्यांकन संभव हो सकेगा।

    दूसरी ओर, पक्षकारों का कहना है कि सर्वे के दौरान विभिन्न धार्मिक और ऐतिहासिक अवशेषों को रिकॉर्ड किया गया है और इन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत प्रस्तुत किया गया है। इस पूरे मामले में दोनों पक्ष अपने अपने दावों को मजबूत करने के लिए उपलब्ध साक्ष्यों और दस्तावेजों पर आधारित दलीलें पेश कर रहे हैं।

    अदालत के इस आदेश के बाद अब सभी पक्षों को 27 अप्रैल तक संबंधित वीडियो क्लिप्स उपलब्ध कराई जाएंगी, जिसके बाद मामले की आगे की सुनवाई में इन साक्ष्यों के आधार पर तर्क प्रस्तुत किए जाएंगे। यह निर्णय मामले की पारदर्शिता और निष्पक्ष सुनवाई की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे आगे की कानूनी प्रक्रिया और स्पष्ट हो सकेगी।

  • BJP विधायक प्रीतम लोधी पर गिरेगी गाज! 3 दिन में जवाब तलब, खंडेलवाल ने भेजा नोटिस

    BJP विधायक प्रीतम लोधी पर गिरेगी गाज! 3 दिन में जवाब तलब, खंडेलवाल ने भेजा नोटिस



    मध्य प्रदेश शिवपुरी मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर संगठनात्मक अनुशासन का मुद्दा सुर्खियों में आ गया है। भारतीय जनता पार्टी ने शिवपुरी जिले के पिछोर से विधायक प्रीतम लोधी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह नोटिस भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की ओर से जारी किया गया है, जिसमें विधायक से तीन दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने को कहा गया है।
    जारी पत्र में पार्टी ने स्पष्ट किया है कि हाल के दिनों में विधायक प्रीतम लोधी का आचरण “अत्यंत आपत्तिजनक” पाया गया है और यह पार्टी की अनुशासनात्मक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं माना जा रहा है। भाजपा ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल जवाब तलब किया है और साफ संकेत दिया है कि यदि निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, तो संगठनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

    यह नोटिस 22 अप्रैल 2026 को जारी किया गया है और इसकी प्रतिलिपि पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को भी भेजी गई है। इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि भाजपा नेतृत्व इस पूरे मामले को केवल औपचारिकता नहीं मान रहा, बल्कि इसे अनुशासन से जुड़ा गंभीर विषय मानकर आगे बढ़ रहा है।
    हालांकि, नोटिस में किसी विशेष बयान या घटना का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे हाल के बयानों और सार्वजनिक गतिविधियों से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व ऐसे मामलों में सख्त रुख अपनाकर संगठन में अनुशासन और एकरूपता बनाए रखना चाहता है।
    भाजपा के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, पार्टी लंबे समय से सार्वजनिक मंचों पर दिए जा रहे विवादित बयानों और अनुशासनहीन गतिविधियों को लेकर सतर्क है। इसी क्रम में यह कार्रवाई एक संदेश के तौर पर भी देखी जा रही है कि पार्टी लाइन से बाहर जाकर बयानबाजी या आचरण को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
    इस नोटिस के बाद प्रदेश की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। विपक्ष भी इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है, जबकि भाजपा के भीतर इसे अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामान्य हिस्सा बताया जा रहा है।
    अब सभी की निगाहें विधायक प्रीतम लोधी के जवाब पर टिकी हैं। उनका स्पष्टीकरण यह तय करेगा कि मामला यहीं समाप्त हो जाता है या आगे किसी बड़ी संगठनात्मक कार्रवाई की दिशा में बढ़ता है।
  • Earth Day 2026: धरती बचाने के लिए Bhopal के लोग कर रहे हैं खास प्रयास, जानिए कैसे मना रहे हैं पृथ्वी दिवस

    Earth Day 2026: धरती बचाने के लिए Bhopal के लोग कर रहे हैं खास प्रयास, जानिए कैसे मना रहे हैं पृथ्वी दिवस


    भोपाल। आज पूरी दुनिया 22 अप्रैल को पृथ्वी दिवस के रूप में मना रही है, जो पर्यावरण संरक्षण और जलवायु संतुलन का सबसे बड़ा वैश्विक प्रतीक बन चुका है। वर्ष 1970 में अमेरिका से शुरू हुआ यह अभियान आज 190 से अधिक देशों तक फैल चुका है और हर साल लाखों लोग इसमें भाग लेकर धरती को बचाने का संकल्प लेते हैं। इस आंदोलन की शुरुआत अमेरिकी सीनेटर गेलॉर्ड नेल्सन ने की थी, जिन्होंने बढ़ते प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के खिलाफ एक जनजागरण की नींव रखी थी।
    पहले ही वर्ष में इस अभियान को अभूतपूर्व समर्थन मिला था, और समय के साथ यह एक वैश्विक आंदोलन बन गया। आज पृथ्वी दिवस केवल एक प्रतीकात्मक आयोजन नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाने का एक सक्रिय मंच है। जलवायु परिवर्तन, प्लास्टिक प्रदूषण, वनों की कटाई और जल संकट जैसे मुद्दों पर अब दुनिया भर में गंभीर चर्चा हो रही है।
    भोपाल में भी पृथ्वी दिवस को लेकर लोगों में खास उत्साह देखने को मिल रहा है। शहर के स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संस्थाओं द्वारा विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कई जगहों पर पौधारोपण अभियान चलाया गया, जिसमें छात्रों और नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। लोगों ने “एक पेड़ मां के नाम” जैसे अभियानों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
    भोपाल के पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि शहर को हरित और स्वच्छ बनाए रखने के लिए छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं। प्लास्टिक का कम उपयोग, जल संरक्षण, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना और अधिक से अधिक पेड़ लगाना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। कई स्वयंसेवी संगठनों ने झीलों और पार्कों की सफाई अभियान भी चलाया, ताकि शहर की प्राकृतिक सुंदरता को बनाए रखा जा सके।
    शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों ने पोस्टर, निबंध प्रतियोगिता और रैली के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। बच्चों ने “धरती बचाओ, जीवन बचाओ” जैसे नारों के साथ लोगों को जागरूक करने की कोशिश की।
    विशेषज्ञों का मानना है कि पृथ्वी दिवस का असली उद्देश्य केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि जीवनशैली में स्थायी बदलाव लाना है। यदि हर व्यक्ति रोजमर्रा के जीवन में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाए, तो जलवायु संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
    आज जब दुनिया जलवायु परिवर्तन की गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है, ऐसे में पृथ्वी दिवस एक बार फिर यह याद दिलाता है कि धरती की सुरक्षा हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। भोपाल समेत पूरे देश में लोग इस संदेश को अपनाकर एक हरित और स्वच्छ भविष्य की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।