रात करीब 9:45 बजे लगी इस आग ने पूरे औद्योगिक क्षेत्र में दहशत फैला दी। केमिकल ड्रमों में लगातार धमाके होते रहे, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई। आग लगने के समय फैक्ट्री में मौजूद करीब 10 मजदूरों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
आग बुझाने के लिए धामनोद, धरमपुरी, धार, पीथमपुर और इंदौर से कुल 12 से अधिक दमकल गाड़ियां और दो रोबोटिक यूनिट्स मौके पर तैनात की गईं। इसके अलावा 200 से ज्यादा पानी के टैंकर और फोम एक्सटिंग्विशर का इस्तेमाल किया गया। प्रशासनिक अधिकारी पूरी रात मौके पर डटे रहे और राहत-बचाव कार्य की निगरानी करते रहे।
इस भीषण आग में जेसीबी और हाइड्रा क्रेन सहित भारी मशीनरी जलकर राख हो गई। साथ ही पास की यूनिट्स स्लीपलूप इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और गलार्ड स्टील लिमिटेड को भी भारी नुकसान पहुंचा है। इन कंपनियों के अनुसार उनकी पूरी प्लांट और मशीनरी नष्ट हो गई, जिससे रेलवे और डिफेंस सेक्टर से जुड़े उत्पादन पर असर पड़ा है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक आग इतनी भीषण थी कि कई किलोमीटर दूर तक धुएं का काला गुबार देखा जा सकता था। हालात को देखते हुए आसपास के कारखानों को खाली कराया गया और एहतियातन पास में रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया।
स्थानीय उद्योगपतियों ने आरोप लगाया कि पिछले चार वर्षों में यह चौथी बार है जब इस क्षेत्र में आग लगी है। बार-बार शिकायतों के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए गए, जिससे ऐसी घटनाएं दोहराई जा रही हैं।
फिलहाल आग लगने के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल पाया है, हालांकि औद्योगिक कचरे और ज्वलनशील पदार्थों के कारण आग भड़कने की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।









