Category: Madhya Pradesh

  • शाजापुर में चलती बस में भीषण आग, 60 से ज्यादा बारातियों ने कूदकर बचाई जान

    शाजापुर में चलती बस में भीषण आग, 60 से ज्यादा बारातियों ने कूदकर बचाई जान


    शाजापुर। जिले के नेशनल हाईवे-52 पर मंगलवार दोपहर एक बड़ा हादसा हो गया, जब इंदौर से शडोरा जा रही एक बारात बस में अचानक आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में पूरी बस जलकर खाक हो गई। बस में सवार करीब 60 से 70 बारातियों ने सूझबूझ दिखाते हुए कूदकर अपनी जान बचाई, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
    चलती बस से उठता धुआं बना खतरे का संकेत
    जानकारी के अनुसार, बस इंदौर से गुना जिले के शडोरा की ओर जा रही थी। इसी दौरान अचानक बस के अंदर से धुआं उठने लगा। चालक कुछ समझ पाता, इससे पहले ही आग ने विकराल रूप ले लिया और पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया।
    बारातियों ने कूदकर बचाई जान, सामान जलकर राख
    आग लगते ही बस में अफरा-तफरी मच गई, लेकिन यात्रियों ने सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत बस से कूदकर अपनी जान बचाई। इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, लेकिन यात्रियों का सारा सामान जलकर नष्ट हो गया।
    5 फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने पाया काबू
    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची। शाजापुर और मक्सी से कुल 5 दमकल गाड़ियां बुलवाई गईं। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया, लेकिन तब तक बस पूरी तरह जल चुकी थी।
    प्रशासन मौके पर पहुंचा, यात्रियों को सुरक्षित ठहराया
    घटना की जानकारी मिलते ही एसपी यशपाल सिंह राजपूत, एसडीएम मनीषा वास्कले और तहसीलदार सुनील पाटिल मौके पर पहुंचे। बाद में कलेक्टर ऋजु बाफना ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। प्रशासन ने सभी यात्रियों को पास के ढाबे पर सुरक्षित ठहराया और उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए दूसरी बस की व्यवस्था की।
    हाईवे पर लगा जाम, यातायात प्रभावित
    आग की घटना के चलते हाईवे के एक हिस्से पर यातायात बाधित हो गया, जिससे कुछ समय के लिए जाम की स्थिति बन गई। यातायात पुलिस ने मौके पर पहुंचकर वाहनों को नियंत्रित किया और बाद में क्रेन की मदद से जली हुई बस को हटाकर यातायात सामान्य कराया गया।
    चालक-परिचालक फरार, जांच जारी
    लालघाटी थाना प्रभारी अर्जुन सिंह मुजाल्दे ने बताया कि आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। घटना के बाद बस चालक और परिचालक मौके से फरार हो गए हैं, जिनकी तलाश की जा रही है।
    फायर सिस्टम पर भी उठे सवाल
    राहत कार्य के दौरान फायर ब्रिगेड की गाड़ियों के पाइप कई जगह से खराब होने के कारण पानी का नुकसान हुआ, जिससे आग बुझाने में दिक्कत आई। नगर पालिका कर्मचारियों ने भी संसाधनों की कमी और खराब स्थिति पर चिंता जताई है।

  • देवास में अनोखी पहल: गोशाला में लगाए गए कूलर, गोवंश को मिली गर्मी से राहत

    देवास में अनोखी पहल: गोशाला में लगाए गए कूलर, गोवंश को मिली गर्मी से राहत


     देवास। जिले में लगातार बढ़ रही भीषण गर्मी के बीच शंकरगढ़ पहाड़ी स्थित गोशाला में गोवंश को राहत देने के लिए सराहनीय पहल की गई है। संस्था अभिरंग ने गर्मी से बेहाल गायों के लिए गोशाला में दो बड़े कूलर लगाए हैं, जिससे वातावरण को ठंडा रखने में मदद मिल रही है।
    43 डिग्री तक पहुंचा तापमान, गोवंश पर बढ़ा असर
    जानकारी के अनुसार, देवास जिले में इन दिनों तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक बना हुआ है, जबकि शंकरगढ़ पहाड़ी क्षेत्र में यह सामान्य से 2 से 3 डिग्री अधिक रहता है। इस कारण गोशाला में गोवंश को अत्यधिक गर्मी और असुविधा का सामना करना पड़ रहा था।
    संस्था अभिरंग की पहल से मिली राहत
    भीषण गर्मी को देखते हुए संस्था अभिरंग के सदस्यों ने आपसी सहयोग से गोशाला में कूलर लगाने की व्यवस्था की। मंगलवार को दो बड़े कूलर लगाए गए, जिनसे गोशाला के अंदर ठंडी हवा पहुंच रही है और गोवंश को राहत मिल रही है।
    गोशाला में बदला माहौल, पशुओं को मिली राहत
    कूलर लगने के बाद गोशाला के वातावरण में काफी सुधार देखा गया है। पहले जहां गर्मी के कारण गायें बेचैन रहती थीं, वहीं अब उन्हें अपेक्षाकृत ठंडा वातावरण मिल रहा है, जिससे उनकी स्थिति में सुधार हुआ है।
    संस्था अध्यक्ष ने बताया उद्देश्य
    संस्था अभिरंग के अध्यक्ष बसंत वर्मा ने बताया कि वर्तमान में तापमान 42 से 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जिसका सीधा असर गोवंश पर पड़ रहा था। इसी को ध्यान में रखते हुए यह पहल की गई है ताकि उन्हें गर्मी से राहत मिल सके और उनकी देखभाल बेहतर तरीके से हो सके।
    पशुसेवा की मिसाल बनी पहल
    स्थानीय लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि भीषण गर्मी में गोवंश की देखभाल के लिए किया गया यह प्रयास एक प्रेरणादायक कदम है, जो पशुसेवा और संवेदनशीलता का उदाहरण पेश करता है।

  • हाईटेक निगरानी में सुरक्षित चीते: वन्यजीव संरक्षण में Madhya Pradesh ने हासिल की अहम उपलब्धि

    हाईटेक निगरानी में सुरक्षित चीते: वन्यजीव संरक्षण में Madhya Pradesh ने हासिल की अहम उपलब्धि

    मंदसौर/नीमच। मध्यप्रदेश के गांधी सागर अभयारण्य से वन्यजीव संरक्षण की एक महत्वपूर्ण और उत्साहजनक उपलब्धि सामने आई है। यहां छोड़े गए दो चीते ‘प्रभास’ और ‘पावक’ ने अपने प्रवास का एक वर्ष सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह उपलब्धि प्रदेश में चल रहे चीता प्रोजेक्ट और जैव विविधता संरक्षण के प्रयासों के लिए एक बड़ा मील का पत्थर मानी जा रही है।

    20 अप्रैल 2025 को हुआ था पुनर्वास, मुख्यमंत्री ने छोड़ा था अभयारण्य में

    इन दोनों चीतों को चीता प्रोजेक्ट के तहत 20 अप्रैल 2025 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा गांधी सागर अभयारण्य में छोड़ा गया था। यह पहल प्रदेश में वन्यजीवों के पुनर्वास और प्राकृतिक संतुलन को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना गया था।

    नए वातावरण में सफलतापूर्वक ढले दोनों चीते

    एक वर्ष के दौरान ‘प्रभास’ और ‘पावक’ ने नए पर्यावरण के साथ खुद को पूरी तरह अनुकूलित कर लिया है। विशेषज्ञों के अनुसार दोनों चीते स्वस्थ हैं और उनकी गतिविधियों में प्राकृतिक व्यवहार स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। यह संकेत इस परियोजना की सफलता को मजबूत करता है।

    हाईटेक सिस्टम से लगातार निगरानी

    वन विभाग द्वारा दोनों चीतों की 24 घंटे सख्त निगरानी की जा रही है। उनके मूवमेंट, स्वास्थ्य और शिकार गतिविधियों पर GPS कॉलर और आधुनिक ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए नजर रखी जा रही है। विशेषज्ञों की टीम लगातार उनकी स्थिति का विश्लेषण कर रही है ताकि उन्हें किसी प्रकार का खतरा न हो।

    वन्यजीव संरक्षण में बड़ी सफलता

    विशेषज्ञों का मानना है कि चीतों का एक वर्ष सफलतापूर्वक पूरा करना मध्यप्रदेश के वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रम के लिए बड़ी उपलब्धि है। यह न केवल जैव विविधता को बढ़ावा देता है, बल्कि भविष्य की वन्यजीव पुनर्वास परियोजनाओं के लिए भी एक मजबूत मॉडल प्रस्तुत करता है

    गांधी सागर बनेगा चीतों का स्थायी आवास

    वन विभाग को उम्मीद है कि आने वाले समय में ‘प्रभास’ और ‘पावक’ गांधी सागर अभयारण्य में स्थायी रूप से बस जाएंगे। इसके साथ ही यह क्षेत्र चीतों के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल प्राकृतिक आवास के रूप में विकसित होगा।

    प्रदेश के लिए गर्व का विषय

    इन दोनों चीतों का एक वर्ष पूरा करना न केवल वन विभाग, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के लिए गर्व का विषय है। यह उपलब्धि राज्य को वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दिला सकती है।

  • लापरवाही पर गिरी गाज: ग्रामीणों द्वारा पकड़कर सौंपने के बावजूद जांच न करने पर कई पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई

    लापरवाही पर गिरी गाज: ग्रामीणों द्वारा पकड़कर सौंपने के बावजूद जांच न करने पर कई पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई


    रतलाम। जिले में पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाले एक मामले में एसपी अमित कुमार ने सख्त कार्रवाई करते हुए माणकचौक थाना प्रभारी (TI) पातीराम डावरे को लाइन अटैच कर दिया है। इसके साथ ही 14 हेड कॉन्स्टेबलों के थानों में भी बदलाव किया गया है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है।
    जांच में लापरवाही पर कार्रवाई
    जानकारी के अनुसार, टीआई पर आरोप है कि एक गंभीर घटना के बाद भी उन्होंने उचित जांच नहीं की और मामले को आगे नहीं बढ़ाया। इसी लापरवाही को देखते हुए एसपी ने उन्हें तत्काल प्रभाव से लाइन अटैच करने के आदेश जारी किए।
    मथुरी तालाब घटना से जुड़ा मामला
    पूरा मामला 15 अप्रैल की रात करमदी के मथुरी तालाब क्षेत्र का है, जहां तीन युवक संदिग्ध हालत में पहुंचे थे। ग्रामीणों ने मोटर चोरी की आशंका में तीनों को पकड़ने की कोशिश की। इस दौरान दो युवक मौके से भाग निकले, जबकि एक को ग्रामीणों ने पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया था।
    पकड़े गए युवक पर सिर्फ शांति भंग की कार्रवाई
    पुलिस ने पकड़े गए युवक के खिलाफ केवल शांति भंग की धाराओं में मामला दर्ज कर उसे जेल भेज दिया था। बाद में वह जमानत पर रिहा भी हो गया। वहीं, फरार हुए दो अन्य युवकों की तलाश में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे मामले की गंभीरता पर सवाल उठे।
    ग्रामीणों की सूचना के बाद भी नहीं हुई जांच
    ग्रामीणों द्वारा संदिग्धों को पकड़कर पुलिस को सौंपे जाने के बावजूद मामले की गंभीरता से जांच नहीं करने और आगे की कार्रवाई न करने को लेकर टीआई की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठे हैं। इसी को आधार बनाकर एसपी ने यह कड़ा कदम उठाया है।
    पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल
    इस कार्रवाई के साथ ही एसपी ने जिले के 14 हेड कॉन्स्टेबलों के भी तबादले कर दिए हैं। इससे पुलिस विभाग में बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिला है।
    नया टीआई अब तक नियुक्त नहीं
    कार्रवाई के बाद माणकचौक थाने में अभी तक किसी नए थाना प्रभारी की नियुक्ति नहीं की गई है, जिससे थाने का अतिरिक्त प्रभार अन्य अधिकारी को दिया गया है।
    एसपी के सख्त संदेश से मचा हड़कंप
    एसपी अमित कुमार की इस कार्रवाई को पुलिस विभाग में अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने के सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। इस कदम के बाद जिले के पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है।

  • कुएं में डूबने से 8 वर्षीय बालक की मौत, बकरियां चराने गया था मासूम

    कुएं में डूबने से 8 वर्षीय बालक की मौत, बकरियां चराने गया था मासूम


    झाबुआ। जिले के पेटलावद थाना क्षेत्र के दाड़िया गांव में मंगलवार को एक हृदयविदारक घटना सामने आई, जहां 8 वर्षीय बालक की कुएं में डूबने से मौत हो गई। इस हादसे के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।

    बकरियां चराने गया था मासूम, दोपहर तक नहीं लौटा

    जानकारी के अनुसार, दिलीप देवदा का पुत्र अरुण सुबह करीब 8 बजे घर से बकरियां चराने के लिए निकला था। रोज की तरह वह गांव के आसपास पशु चराने गया था, लेकिन दोपहर तक जब बकरियां तो घर लौट आईं, मगर अरुण वापस नहीं आया तो परिजनों को चिंता होने लगी।

    तलाश के दौरान कुएं में मिला सुराग

    परिजनों और ग्रामीणों ने बालक की तलाश शुरू की। इसी दौरान गांव के पास स्थित एक कुएं के पास उसकी चप्पल और पानी की बोतल दिखाई दी, जो पानी में तैर रही थी। संदेह होने पर ग्रामीणों ने कुएं में झांककर देखा तो वहां से मासूम का शव बरामद हुआ।

    पुलिस मौके पर पहुंची, शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया

    घटना की सूचना मिलते ही पेटलावद पुलिस मौके पर पहुंची। जितेंद्र सिंह दोहरे के नेतृत्व में पुलिस टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और शव का पंचनामा तैयार किया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भेजा गया।

    गांव में पसरा मातम

    बालक की आकस्मिक मौत से दाड़िया गांव में मातम का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मासूम की मौत ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया है, लोग परिवार को ढांढस बंधाने पहुंच रहे हैं।

    पुलिस कर रही जांच

    पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाया जा रहा है कि बालक कुएं में कैसे गिरा। फिलहाल इसे एक दुखद हादसा माना जा रहा है।

  • मंडी व्यवस्था पर सवाल: Burhanpur में किसानों की भीड़, उप संचालक बोले- व्यवस्था सुधरी

    मंडी व्यवस्था पर सवाल: Burhanpur में किसानों की भीड़, उप संचालक बोले- व्यवस्था सुधरी


     बुरहानपुर। जिले की तुकईथड़ कृषि उपज मंडी में समर्थन मूल्य पर चना बेचने पहुंचे किसानों को मंगलवार को भारी अव्यवस्था का सामना करना पड़ा। कई किसान अपनी उपज लेकर रात से ही ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ मंडी परिसर में पहुंच गए थे, लेकिन मंडी का मुख्य गेट सुबह से दोपहर 12 बजे तक बंद रहने के कारण उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ा।
    रातभर मंडी के बाहर डटे रहे किसान
    जानकारी के अनुसार, बड़ी संख्या में किसान रात में ही मंडी पहुंच गए थे ताकि सुबह जल्दी अपनी उपज की बिक्री कर सकें। लेकिन सुबह होने के बाद भी जब मंडी का गेट नहीं खुला तो किसानों में नाराजगी और असंतोष देखने को मिला। कई किसान खुले आसमान के नीचे पूरी रात अपनी बारी का इंतजार करते रहे।
    गेट बंद रहने से बढ़ी परेशानी
    मंडी गेट पर ताला लगा होने के कारण किसानों को न तो प्रवेश मिल पाया और न ही खरीदी प्रक्रिया शुरू हो सकी। इस दौरान किसानों की भीड़ लगातार बढ़ती गई और मौके पर अफरा-तफरी जैसे हालात बन गए।
    सूचना पर प्रशासन मौके पर पहुंचा
    स्थिति बिगड़ती देख नायब तहसीलदार मौके पर पहुंचीं और पूरी व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से बातचीत कर तत्काल समाधान के निर्देश दिए, जिसके बाद खरीदी प्रक्रिया को शुरू कराने की कवायद तेज हुई।
    दोपहर 12 बजे खुला गेट, शुरू हुई खरीदी
    लगभग दोपहर 12 बजे मंडी का गेट खोला गया और चना खरीदी की प्रक्रिया शुरू की गई। इसके बाद धीरे-धीरे किसानों की भीड़ को नियंत्रित किया गया और उपज की तुलाई व खरीदी कार्य प्रारंभ हुआ।
    अधिकारियों का पक्ष व्यवस्था सामान्य हुई
    उप संचालक कृषि एवं खरीदी प्रभारी एमएस देवके ने बताया कि मंडी मैनेजर के पारिवारिक कारणों से समय पर नहीं पहुंच पाने के कारण देरी हुई। जैसे ही जानकारी मिली, तुरंत वैकल्पिक कर्मचारी भेजकर खरीदी शुरू कराई गई। उन्होंने कहा कि दोपहर तक सभी व्यवस्थाएं सामान्य हो गईं और खरीदी कार्य सुचारू रूप से चलने लगा।
    प्रशासन ने बताया अधिकार क्षेत्र का मामला
    इस पूरे मामले पर एसडीएम भागीरथ वाखला ने कहा कि यह विषय उप संचालक कृषि के अधिकार क्षेत्र में आता है और आगे की व्यवस्था संबंधित विभाग द्वारा देखी जाएगी।
    किसानों में नाराजगी बरकरार
    हालांकि खरीदी शुरू हो गई, लेकिन किसानों ने देर से प्रक्रिया शुरू होने पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि यदि समय पर व्यवस्था होती तो उन्हें रातभर परेशानी नहीं उठानी पड़ती।

  • सामाजिक सुरक्षा नीति की मांग तेज: बड़वानी में मुलायम कर्मियों ने तेज आवाज

    सामाजिक सुरक्षा नीति की मांग तेज: बड़वानी में मुलायम कर्मियों ने तेज आवाज


    बड़वानी। जिले में मंगलवार को भारतीय मजदूर संघ, मध्यप्रदेश के बैनर तले आउटसोर्स एवं ठेका कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम नायब तहसीलदार बाबू सिंह निनामा के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारी रैली के रूप में पहुंचे और अपनी समस्याओं के समाधान की मांग की।
    आउटसोर्स कर्मचारियों की समस्याओं पर ठोस नीति की मांग
    ज्ञापन में प्रदेश के विभिन्न विभागों, उद्योगों और संस्थाओं में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए एक ठोस और स्पष्ट नीति बनाने की मांग की गई है। संघ ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा और स्थायी सुविधाओं का अभाव झेलना पड़ रहा है, जिसे तुरंत दूर किया जाना चाहिए।
    श्रम कानूनों के सख्त पालन की मांग
    संघ ने अपने ज्ञापन में श्रम कानूनों के सख्त पालन पर जोर देते हुए कहा कि कानूनों का उल्लंघन करने वालों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही मांग की गई कि 8 घंटे से अधिक कार्य करने पर अतिरिक्त भुगतान दिया जाए, वेतन हर महीने की 7 तारीख तक सुनिश्चित रूप से मिले और सभी कर्मचारियों को वेतन पर्ची उपलब्ध कराई जाए।
    ईपीएफ, ईएसआई और समान वेतन की मांग
    कर्मचारियों ने मांग की कि सभी आउटसोर्स कर्मियों को ईपीएफ और ईएसआई जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिले। इसके साथ ही समान कार्य के लिए समान वेतन का सिद्धांत लागू करने और बिचौलिया प्रथा को पूरी तरह समाप्त कर सीधे विभाग से भुगतान करने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग भी की गई।
    नौकरी सुरक्षा और सुविधाओं पर जोर
    ज्ञापन में यह भी कहा गया कि बिना जांच के किसी भी कर्मचारी को नौकरी से नहीं हटाया जाए और अनुभव के आधार पर वेतन वृद्धि दी जाए। साथ ही नियमित भर्ती प्रक्रियाओं में आउटसोर्स कर्मचारियों को अवसर देने, सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने और साप्ताहिक अवकाश देने की मांग की गई।
    62 वर्ष तक सेवा और बीमा सुविधा की मांग
    संघ ने यह भी प्रस्ताव रखा कि कर्मचारियों को 62 वर्ष तक सेवा का अवसर दिया जाए। इसके अलावा 20 लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा और कौशल विकास प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की भी मांग रखी गई, ताकि कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित और सशक्त बन सके।
    प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की अपील
    भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश महामंत्री कुलदीप सिंह गुर्जर ने कहा कि आउटसोर्स कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान केवल कर्मचारियों ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के हित में है। उन्होंने सरकार से जल्द ठोस निर्णय लेने की अपील की।

  • खरगोन में किसान ने खेत में जहर पीकर की आत्महत्या, लगाए गंभीर आरोप

    खरगोन में किसान ने खेत में जहर पीकर की आत्महत्या, लगाए गंभीर आरोप


    खरगोन। जिले के रेहगांव में सोमवार को एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां 43 वर्षीय किसान सालकराम मोतीराम यादव ने अपने ही खेत में जहरीली दवा पीकर आत्महत्या कर ली। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। मंगलवार सुबह गोगांवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
    मौत से पहले बनाया वीडियो, लगाए गंभीर आरोप
    आत्महत्या से पहले किसान ने एक वीडियो रिकॉर्ड किया, जिसमें वह भावुक होकर कुछ लोगों के नाम लेते हुए नजर आया। वीडियो में उसने जमीन खरीद-फरोख्त के दौरान धोखाधड़ी, पैसे लेने के बाद भी जमीन न देने और लगातार धमकाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। साथ ही उसने पुलिस से अपने परिवार की सुरक्षा और आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
    45 लाख रुपये के जमीन सौदे में विवाद
    जानकारी के अनुसार, सालकराम यादव ने रेहगांव निवासी राजू गुप्ता, वीरेंद्र गुप्ता और जितेंद्र गुप्ता से 7 एकड़ 52 डिसमिल जमीन का सौदा 45 लाख रुपये में किया था। यह सौदा सुरेश मंशाराम यादव के नाम पर लिखी गई चिट्ठी के आधार पर हुआ था। इसमें एक लाख रुपये बयाना दिया गया था और बाकी राशि पांच महीने में देने की शर्त तय की गई थी।
    पैसे देने के बाद भी मुकरने का आरोप
    मृतक किसान ने वीडियो में आरोप लगाया कि उसने तय राशि में से 45 लाख रुपये दे दिए थे, जिसमें पूरी लिखापढ़ी का खर्च भी शामिल था। इसके बावजूद जमीन मालिकों ने सौदे से मुकरते हुए उसे जमीन नहीं दी। किसान का यह भी दावा है कि उसने राजू और जितेंद्र गुप्ता को 22 लाख 7 हजार 300 रुपये अलग से दिए थे, फिर भी वे अपने वादे से पीछे हट गए।
    धमकी देने के भी लगाए आरोप
    किसान ने अपने वीडियो में बिलखेड़ निवासी श्याम पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उसने कहा कि श्याम उसे खरीदी गई जमीन पर जाने से रोक रहा था और जान से मारने की धमकी दे रहा था। इसके अलावा सुरेश और उसके बेटे कमलेश पर भी धमकाने का आरोप लगाया गया है।
    पोस्टमार्टम के दौरान हंगामा, गिरफ्तारी की मांग
    पोस्टमार्टम के दौरान परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा किया और आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। स्थिति बिगड़ती देख थाना प्रभारी दीपक यादव ने मौके पर पहुंचकर परिजनों को समझाइश दी और उचित कार्रवाई का आश्वासन देकर माहौल शांत कराया।
    पुलिस जांच में जुटी, मर्ग कायम
    गोगांवा पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, परिजनों के बयान और वीडियो साक्ष्य के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
    इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल
    घटना के बाद रेहगांव और आसपास के गांवों में शोक और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर विवाद का समाधान होता तो किसान की जान बच सकती थी।

  • Khandwa में सड़क पर पड़े मुरूम के ढेर से दर्दनाक हादसा, बाइक टकराकर 28 वर्षीय युवक की मौत

    Khandwa में सड़क पर पड़े मुरूम के ढेर से दर्दनाक हादसा, बाइक टकराकर 28 वर्षीय युवक की मौत


    खंडवा। जिले के बीड़ रोड स्थित मूंदी मंडी के पास सोमवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया, जिसमें शादी समारोह से लौट रहे तीन लोगों की बाइक सड़क किनारे पड़े मुरूम (गिट्टी-मिट्टी) के ढेर से टकरा गई। इस हादसे में 28 वर्षीय युवक की मौत हो गई, जबकि उसके दो साथी गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है।
    शादी से लौटते समय हुआ हादसा
    जानकारी के अनुसार, ग्राम दैत निवासी विजय सिंह (28), जो टेलर का काम करता था, अपने साथी राजेंद्र सिंह (35) और 12 वर्षीय सूरज सिंह के साथ ग्राम मांडला में एक शादी समारोह में शामिल होने गया था। देर रात तीनों एक ही बाइक से घर लौट रहे थे, तभी मूंदी मंडी के पास अंधेरे में सड़क किनारे पड़े मुरूम के ढेर से उनकी बाइक अनियंत्रित होकर टकरा गई।
    अस्पताल पहुंचते ही टेलर ने तोड़ा दम
    हादसा इतना भीषण था कि तीनों बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें तुरंत मूंदी के शासकीय अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उपचार के दौरान विजय सिंह ने दम तोड़ दिया। वहीं, डॉक्टर शिखा चंद्रवंशी ने राजेंद्र सिंह और सूरज सिंह की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल खंडवा रेफर कर दिया।
    बिना सुरक्षा संकेत के पड़ा था मुरूम, लापरवाही के आरोप
    प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सड़क किनारे मुरूम का ढेर बिना किसी चेतावनी संकेत या सुरक्षा व्यवस्था के रखा गया था। अंधेरे के कारण बाइक सवार उसे देख नहीं पाए और यह हादसा हो गया। स्थानीय लोगों ने सड़क निर्माण कार्य में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है।
    राजनीतिक दलों ने ठेकेदार पर कार्रवाई की मांग की
    घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश फैल गया है। भाजपा नेता दिग्विजय सिंह तोमर और युवक कांग्रेस के जिला अध्यक्ष अनिल जाधव ने इस मामले में लापरवाह ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। दोनों नेताओं ने इसे प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा बताया है।
    पुलिस जांच में जुटी
    मूंदी पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि सड़क निर्माण और सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही की जांच की जा रही है और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
    गांव में मातम का माहौल
    विजय सिंह की मौत की खबर से उसके गांव दैत में शोक की लहर दौड़ गई है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।

  • स्वास्थ्य निगरानी की नई पहल: Harda जेल में कैदियों की सेहत पर होगी विशेष जांच

    स्वास्थ्य निगरानी की नई पहल: Harda जेल में कैदियों की सेहत पर होगी विशेष जांच

    हरदा। मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देशानुसार जिला जेल हरदा में 25 अप्रैल को विशेष स्वास्थ्य परीक्षण एवं विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया जाएगा। इस शिविर का उद्देश्य जेल में निरुद्ध कैदियों के स्वास्थ्य की नियमित जांच करना और उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।

    प्रधान जिला न्यायाधीश के मार्गदर्शन में होगा आयोजन

    यह विशेष शिविर प्रधान जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण हरदा के अध्यक्ष अरविंद रघुवंशी के मार्गदर्शन में आयोजित किया जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर इसकी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और जेल परिसर में स्वास्थ्य एवं विधिक दोनों ही सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है।

    हर कैदी को मिलेगा हेल्थ कार्ड

    शिविर के दौरान प्रत्येक कैदी का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा और उन्हें एक विशेष हेल्थ कार्ड प्रदान किया जाएगा। इस हेल्थ कार्ड में संबंधित कैदी की बीमारी, वर्तमान उपचार, खान-पान संबंधी सलाह और आवश्यक सावधानियों का विस्तृत विवरण दर्ज रहेगा, जिससे उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर नियमित निगरानी रखी जा सकेगी।

    स्वास्थ्य के साथ विधिक साक्षरता पर भी जोर

    इस शिविर में केवल स्वास्थ्य परीक्षण ही नहीं बल्कि विधिक साक्षरता कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। इसके तहत कैदियों को नालसा (NALSA) और सालसा (SALSA) की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। साथ ही उन्हें उनके लंबित मामलों की स्थिति से अवगत कराया जाएगा और जरूरतमंद कैदियों को मुफ्त विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

    कैदियों के पुनर्वास की दिशा में अहम कदम

    प्रशासन का मानना है कि इस तरह के शिविर न केवल कैदियों के स्वास्थ्य सुधार में मदद करेंगे, बल्कि उन्हें कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक बनाकर उनके पुनर्वास की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

    जेल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त पहल

    इस आयोजन में जेल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त भागीदारी रहेगी। चिकित्सक टीम द्वारा कैदियों की जांच की जाएगी और जरूरत पड़ने पर आगे के उपचार की व्यवस्था भी की जाएगी।