Category: Madhya Pradesh

  • ग्वालियर में रेबीज का कहर: पांच दिन में तीन मौतें, वैक्सीन भी नहीं बचा सकी मासूम

    ग्वालियर में रेबीज का कहर: पांच दिन में तीन मौतें, वैक्सीन भी नहीं बचा सकी मासूम

     
    ग्वालियर । में रेबीज ने हड़कंप मचा दिया है। महज पांच दिनों में तीन लोगों की मौत ने स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही को उजागर कर दिया है। इनमें सबसे चौंकाने वाला मामला दतिया जिले के छह वर्षीय मासूम हंस प्रजापति का है। बच्चे को डॉग बाइट के बाद समय पर एंटी-रेबीज वैक्सीन के तीन डोज लगाए गए थे लेकिन इसके बावजूद वह बीमारी की चपेट में आ गया और उसकी जान चली गई। यह घटना न केवल चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है बल्कि प्रशासन के आवारा कुत्तों को लेकर दावों की भी पोल खोलती है।

    मासूम हंस के पिता अशोक उर्फ कल्लू प्रजापति ने बताया कि जिस दिन उनके बेटे को कुत्ते ने काटा उसी दिन डॉक्टर की सलाह पर इलाज शुरू करवा दिया गया। पहले इंजेक्शन 13 जनवरी को, दूसरा 16 जनवरी को और तीसरा 21 जनवरी को लगाया गया। चौथा डोज 10 फरवरी को लगना था लेकिन बीते शुक्रवार से बच्चे में रेबीज के लक्षण दिखाई देने लगे। बच्चा अचानक चौंकने लगा, हवा और पानी से डरने लगा। परिजन उसे तत्काल कमलाराजा अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद उसे दतिया ले जाया गया जहां शनिवार-रविवार की दरम्यानी रात उसकी मौत हो गई।

    इस मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था और वैक्सीन की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यही है कि जब पीड़ित को डॉक्टरों द्वारा बताई गई तारीखों पर सभी इंजेक्शन लगाए गए, तो फिर रेबीज कैसे हुआ। विशेषज्ञ मानते हैं कि एंटी-रेबीज वैक्सीन के तीन डोज के बाद रेबीज होना बेहद दुर्लभ है। यह घटना rare to rarest category में आती है और इसकी जांच बहुस्तरीय होनी चाहिए।

    ग्वालियर में सामान्य रूप से सड़कों पर घूम रहे आवारा कुत्तों ने पहले ही लोगों को भयभीत किया हुआ है। प्रशासन और स्वास्थ्य तंत्र की नाकामी अब जानलेवा साबित हो रही है। न्यू जयारोग्य चिकित्सालय में बीते पांच दिनों में रेबीज से तीन मरीजों की मौत हो चुकी है। इनमें एक ग्वालियर का, दूसरा टीकमगढ़ का और सबसे गंभीर मामला दतिया जिले के छह वर्षीय हंस प्रजापति का है।

    जयारोग्य चिकित्सालय के वरिष्ठ चिकित्सक और जनसंपर्क अधिकारी डॉ. मनीष चतुर्वेदी ने स्वीकार किया कि बीते पांच दिनों में डॉग बाइट के शिकार तीन लोगों की मौत बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि मासूम बच्चे की मौत को लेकर जांच बहुस्तरीय होगी जिसमें इलाज की प्रक्रिया, देखरेख और वैक्सीन की गुणवत्ता की भी समीक्षा शामिल होगी।

    इस घटना ने लोगों के बीच डर बढ़ा दिया है। हवा, पानी और कुत्तों से लगने वाले जोखिम को लेकर परिजन और आम जनता चिंतित हैं। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन को अब न केवल आवारा कुत्तों की समस्या को गंभीरता से लेना होगा बल्कि रेबीज वैक्सीन की आपूर्ति, गुणवत्ता और समय पर इलाज सुनिश्चित करना होगा।

  • ‘वोकल फॉर लोकल’ का असर: गुना में 50 से अधिक स्टॉलों के साथ हस्तशिल्प प्रदर्शनी का शुभारंभ

    ‘वोकल फॉर लोकल’ का असर: गुना में 50 से अधिक स्टॉलों के साथ हस्तशिल्प प्रदर्शनी का शुभारंभ


    गुना: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान का असर अब जमीन पर साफ नजर आने लगा है। इसका ताजा उदाहरण मध्य प्रदेश के गुना जिले में देखने को मिला, जहां स्थानीय और देशभर के हस्तशिल्पियों के लिए हस्तशिल्प प्रदर्शनी-2026 का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य कारीगरों की आमदनी बढ़ाना और उनके उत्पादों को राष्ट्रीय व वैश्विक पहचान दिलाना है।

    कपड़ा मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से मध्य प्रदेश राज्य सहकारी संघ मर्यादित और विकास आयुक्त हस्तशिल्प द्वारा आयोजित इस प्रदर्शनी का शुभारंभ 9 फरवरी की रात प्रताप छात्रावास, गुना में किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने किया। इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक दुबे, अमित सहारे और सहायक निदेशक, हस्तशिल्प विकास आयुक्त सेवा केंद्र, ग्वालियर भी मौजूद रहे।

    प्रदर्शनी में हैदराबाद, जयपुर, दिल्ली, आगरा, बेंगलुरु, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, गुजरात समेत कई राज्यों से आए हस्तशिल्पियों ने करीब 50 स्टॉल लगाए। यहां जूट बैग, जरी वर्क, एम्ब्रॉयडरी, बांस शिल्प, कलमकारी, बनारसी साड़ी, मीनाकारी, ज्वेलरी, पेंटिंग, क्ले और क्रॉकरी, लेदर आर्ट, तोरण आर्ट, दरी-बेडशीट और लकड़ी के खिलौने सहित पारंपरिक हस्तशिल्प प्रदर्शित किए गए।

    कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने स्टॉलों पर संबंधित कारीगरों और उनके राज्यों के नाम स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से न केवल कारीगरों को बाजार मिलता है, बल्कि आमजन को भी भारत की समृद्ध कला और संस्कृति के करीब जाने का अवसर मिलता है। उन्होंने गुनावासियों से अपील की कि अधिक से अधिक लोग आएं, हस्तशिल्प को देखें, सराहें और पसंद आने पर खरीदारी करें।

    प्रदर्शनी ने कई हस्तशिल्पियों की जिंदगी बदलने की कहानी भी बताई। गुजरात से आए मोनू गुजराती ने कहा कि पहले उनकी स्थिति कठिन थी, लेकिन इस मंच के मिलने से आमदनी में सुधार हुआ। बनारस से आए जलालुद्दीन अंसारी ने बताया कि अब उन्हें ग्राहक तक सीधी पहुंच मिल रही है और बीच का मार्जिन बच रहा है। राजस्थान के जयपुर से आए नीरज कुमार सैनी और नागपुर की शकुन ठाकुर ने भी अपनी आमदनी में बढ़ोतरी की कहानी साझा की।

    पश्चिम बंगाल के बप्पा दास और सेवोसी दे ने बताया कि पहले गांव-गांव जाकर सामान बेचना मुश्किल था, लेकिन अब सीधे बाजार तक पहुंच बन गई है। गुना के स्थानीय लोग भी इस पहल से प्रभावित नजर आए। महेंद्र नायक ने कहा कि हाथों की कलाकारी आम जनता तक पहुंचनी चाहिए। गायत्री शर्मा ने बताया कि कारीगरों को रोजगार मिला है और ग्राहकों को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद।

    उपायुक्त सहकारिता मुकेश जैन ने आमजन से अपील की कि यह प्रदर्शनी 16 फरवरी तक प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से रात 10 बजे तक प्रताप छात्रावास, मेन रोड, गुना में आयोजित रहेगी। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक लोग आएं, हस्तशिल्प का लाभ उठाएं और देश की पारंपरिक कला को प्रोत्साहित करें।

  • मां शारदा मंदिर में शस्त्र पूजा का वीडियो वायरल, प्रशासन और मंदिर सुरक्षा पर दबाव

    मां शारदा मंदिर में शस्त्र पूजा का वीडियो वायरल, प्रशासन और मंदिर सुरक्षा पर दबाव


    मैहर स्थित मां शारदा मंदिर एक बार फिर विवादों में घिर गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में दिख रहा है कि बाहुबली नेता और उत्तर प्रदेश के विधायक राजा भैया ने मंदिर के गर्भगृह में शस्त्र पूजा की। यह घटना मंदिर प्रशासन के नियमों और सुरक्षा प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ाने वाली मानी जा रही है। मंदिर परिसर में अस्त्र-शस्त्र ले जाना पूरी तरह से प्रतिबंधित है और इसे धार्मिक और सुरक्षा दोनों दृष्टियों से संवेदनशील माना जाता है।

    वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि गर्भगृह में विधिपूर्वक पूजा के दौरान राजा भैया ने शस्त्रों के साथ आराधना की। मंदिर प्रशासन के अनुसार श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गर्भगृह में किसी भी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र ले जाने पर सख्त प्रतिबंध है। बावजूद इसके नियमों की अनदेखी की गई। यह मामला प्रशासन, सुरक्षा और धार्मिक नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

    स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का कहना है कि सामान्य भक्तों के लिए जहां सख्त नियम लागू होते हैं वहीं प्रभावशाली नेताओं के लिए अलग मापदंड अपनाए जा रहे हैं। राजा भैया की बाहुबली छवि के कारण उन्हें विशेष अनुमति दी गई और इससे नियमों में भेदभाव का आरोप लग रहा है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर किसी आम भक्त ने ऐसा किया होता तो क्या प्रशासन की कार्रवाई इतनी ढीली होती।

    मां शारदा मंदिर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं और नवरात्र जैसे पर्वों पर यह संख्या लाखों में पहुंच जाती है। ऐसे में गर्भगृह तक शस्त्र ले जाने की घटना सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। श्रद्धालुओं ने चिंता जताई है कि नियमों का इस तरह उल्लंघन होने पर किसी बड़ी अनहोनी की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    बताया जा रहा है कि पूजा पूरी तरह से विधिपूर्वक मंदिर के पुजारी द्वारा कराई गई। हालांकि मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन की ओर से अभी तक इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कई यूजर्स ने इसे नियमों का खुला उल्लंघन बताया है और मामले की जांच की मांग की है।

    मंदिर प्रशासक दिव्या सिंह पटेल और एसडीएम मैहर से संपर्क किया गया लेकिन वे इस मामले पर कोई टिप्पणी देने के लिए तैयार नहीं हैं। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है और लोग प्रशासन की भूमिका और मंदिर सुरक्षा के स्तर पर सवाल उठा रहे हैं। इस घटना ने धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा नियमों के पालन की गंभीरता को एक बार फिर उजागर किया है।

  • रणझी की छोटी विक्टोरिया बनी बड़ी उम्मीद 45 करोड़ का 100 बेड अस्पताल दो लाख लोगों को देगा राहत

    रणझी की छोटी विक्टोरिया बनी बड़ी उम्मीद 45 करोड़ का 100 बेड अस्पताल दो लाख लोगों को देगा राहत


    जबलपुर के उपनगरीय क्षेत्र रणझी में स्थित सिविल अस्पताल जिसे लोग वर्षों से छोटी विक्टोरिया के नाम से जानते हैं अब इतिहास रचने जा रहा है यह वही अस्पताल है जो अब तक केवल रेफरल सेंटर बनकर रह गया था लेकिन अब इसकी पहचान पूरी तरह बदलने वाली है करीब 45 करोड़ रुपये की लागत से तैयार चार मंजिला हाईटेक 100 बिस्तरों वाला नया अस्पताल भवन क्षेत्र के लाखों लोगों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आया है

    इस अस्पताल के शुरू होने के बाद रणझी और आसपास के इलाकों के लगभग दो लाख लोगों को इलाज के लिए शहर की ओर दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी अब तक हार्ट अटैक ब्रेन स्ट्रोक और ब्रेन हेमरेज जैसे गंभीर मामलों में मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल मेडिकल कॉलेज या निजी अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता था इस प्रक्रिया में 20 से 25 मिनट का कीमती समय निकल जाता था जो कई बार मरीज की जान के लिए खतरा बन जाता था

    नए भवन के संचालन में आने के बाद हालात पूरी तरह बदलने की उम्मीद है अस्पताल में आधुनिक जांच मशीनें स्थापित की गई हैं 100 बिस्तरों की सुविधा शुरू होने के साथ ही डॉक्टरों की संख्या बढ़ाई जाएगी साथ ही नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ की भी पर्याप्त तैनाती होगी इससे सामान्य बीमारियों के साथ साथ गंभीर रोगों का इलाज भी यहीं संभव हो सकेगा

    रणझी सिविल अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 300 से 350 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं लेकिन संसाधनों की कमी के कारण अब तक उन्हें सीमित सुविधाएं ही मिल पाती थीं नए अस्पताल भवन के शुरू होने से मरीजों को बेहतर जांच सही समय पर उपचार और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सुविधा मिलेगी

    रणझी के छह वार्डों के अलावा मटामर सोनपुर मानेगांव मोहनिया खमरिया पिपरिया और उमरिया जैसे क्षेत्रों की बड़ी आबादी इसी अस्पताल पर निर्भर है इन इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए यह अस्पताल किसी वरदान से कम नहीं है मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ संजय मिश्रा के अनुसार नए भवन के चालू होने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा काफी बढ़ जाएगा अस्पताल में जरूरी जांच सुविधाएं विशेषज्ञ चिकित्सक और पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध कराया जाएगा जिससे गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मिल सकेगा

    इस चार मंजिला अस्पताल भवन की संरचना भी पूरी तरह आधुनिक है पहली मंजिल पर प्रशासनिक ब्लॉक बनाया गया है दूसरी मंजिल पर पुरुष और महिला वार्ड की सुविधा है तीसरी मंजिल पर अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर बनाए गए हैं भवन में सीढ़ी रैंप और तीन लिफ्ट की सुविधा दी गई है साथ ही बाहर पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था भी की गई है

    अस्पताल में दो आधुनिक ऑपरेशन थिएटर बनाए गए हैं जहां माइनर ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध होगी इसके अलावा एक पैथोलॉजी लैब भी बनाई गई है जिसमें जरूरी जांच की सुविधाएं होंगी नई ओपीडी वार्ड इमरजेंसी वार्ड और अन्य संसाधन भी मरीजों को उपलब्ध कराए जाएंगे कुल मिलाकर छोटी विक्टोरिया के नाम से पहचाने जाने वाले इस अस्पताल का यह नया रूप रणझी और आसपास के इलाकों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं में एक नई शुरुआत साबित होगा जहां समय पर इलाज मिलने से न सिर्फ लोगों की जान बचेगी बल्कि शहर पर स्वास्थ्य सेवाओं का दबाव भी कम होगा

  • जलपक्षियों की राजधानी बना जबलपुर एशियाई वॉटरबर्ड गणना में प्रदेश में नंबर वन

    जलपक्षियों की राजधानी बना जबलपुर एशियाई वॉटरबर्ड गणना में प्रदेश में नंबर वन


    जबलपुर /मध्यप्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर ने एक बार फिर अपनी प्राकृतिक समृद्धि का लोहा मनवाया है। एशियाई वॉटरबर्ड सेंसरस में जबलपुर पूरे प्रदेश में सबसे आगे निकल गया है। जलपक्षियों के लिए जबलपुर अब सबसे सुरक्षित और पसंदीदा ठिकाने के रूप में उभर कर सामने आया है। हाल ही में संपन्न हुई 40वीं एशियाई वॉटरबर्ड गणना के आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि जबलपुर के जलाशय जैव विविधता के लिहाज से बेहद समृद्ध हैं।

    इस वॉटरबर्ड सेंसरस में मध्यप्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व और वन मंडलों को शामिल किया गया था। पहली बार पूरे प्रदेश में स्थानीय और प्रवासी जलपक्षियों की एक साथ वैज्ञानिक तरीके से गणना की गई। इस व्यापक सर्वेक्षण में जबलपुर वन मंडल ने सबसे अधिक जलपक्षियों की मौजूदगी दर्ज कर प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है जबकि राजधानी भोपाल दूसरे नंबर पर रहा।

    जबलपुर वन मंडल के एसडीओ एम एल बरकड़े के अनुसार यह गणना पूरी तरह आधुनिक तकनीक के माध्यम से की गई। ई बर्ड ऐप के जरिए पक्षियों की प्रजातियों और संख्या को डिजिटल रूप से दर्ज किया गया जिससे आंकड़े अधिक सटीक और पारदर्शी बन सके। यह तरीका न केवल विश्वसनीय है बल्कि भविष्य में जल स्रोतों के संरक्षण और प्रबंधन के लिए भी बेहद उपयोगी साबित होगा।

    सर्वेक्षण में जबलपुर के पनागर क्षेत्र स्थित मोहारी तालाब जलपक्षियों का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बनकर सामने आया है। यहां कुल 139 प्रजातियों के देशी और विदेशी जलपक्षी देखे गए। बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों ने इस तालाब को अपना अस्थायी बसेरा बनाया है जो इस क्षेत्र की अनुकूल जलवायु और सुरक्षित पारिस्थितिकी तंत्र को दर्शाता है।

    मोहारी तालाब में इंडियन स्पॉट बिल्ड डक साइबेरियन और यूरेशियन प्रजातियों के पक्षी ग्रेलेग गूज नॉर्दर्न पिंटेल गार्गेनी पर्पल मूरहेन कॉमन कूट ब्लैक विंग्ड स्टिल्ट रेड वॉटल्ड लैपविंग लिटिल ग्रीब इंडियन कॉर्मोरेंट डार्टर ग्रे हेरॉन व्हाइट ब्रेस्टेड किंगफिशर स्टॉर्क बिल्ड किंगफिशर और पाइड किंगफिशर जैसे कई दुर्लभ और आकर्षक पक्षी देखे गए। इन पक्षियों की मौजूदगी यह साबित करती है कि मोहारी तालाब अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रवासी पक्षियों के लिए भी सुरक्षित ठिकाना बन चुका है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि जबलपुर के जलाशयों में पर्याप्त पानी स्वच्छ वातावरण और मानवीय हस्तक्षेप की सीमित मौजूदगी ने इन पक्षियों को आकर्षित किया है। यह उपलब्धि केवल एक आंकड़ा नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में जबलपुर की बड़ी सफलता है। इससे यह संकेत भी मिलता है कि यदि जल स्रोतों का सही तरीके से संरक्षण किया जाए तो जैव विविधता को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

    एशियाई वॉटरबर्ड सेंसरस में मिली यह उपलब्धि जबलपुर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाली है। यह न केवल पर्यटन की संभावनाओं को बढ़ाएगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता को भी मजबूत करेगी। जलपक्षियों की यह बढ़ती संख्या आने वाले समय में जबलपुर को बर्ड वॉचिंग के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित कर सकती है।

  • भोपाल: गांधी मेडिकल कॉलेज की MBBS छात्रा की संदिग्ध मौत, खाली एसिड की बोतल मिली पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

    भोपाल: गांधी मेडिकल कॉलेज की MBBS छात्रा की संदिग्ध मौत, खाली एसिड की बोतल मिली पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार


    भोपाल । भोपाल में एक बार फिर मेडिकल छात्रा की संदिग्ध मौत ने सनसनी फैला दी है। राजधानी के गांधी मेडिकल कॉलेज की MBBS प्रथम वर्ष 2025 बैच की छात्रा कोहेफिजा इलाके के एक प्राइवेट पीजी में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गई। पुलिस सूत्रों के अनुसार छात्रा डे-स्कॉलर थी और कोहेफिजा थाना क्षेत्र में स्थित पीजी में रह रही थी। मंगलवार सुबह उसे उसके कमरे के बाथरूम में बेसुध अवस्था में पाया गया।

    परिजनों और दोस्तों ने कमरे और बाथरूम का दरवाजा तोड़कर छात्रा को बाहर निकाला लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। शव के पास एक खाली एसिड की बोतल बरामद हुई है जिससे मौत की वजह पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रारंभिक जांच में आत्महत्या की आशंका जताई जा रही है लेकिन एसिड की मौजूदगी ने मामले को और जटिल बना दिया है।

    इस घटना ने इलाके में सनसनी फैला दी है और पुलिस के लिए यह स्पष्ट करना बड़ी चुनौती बन गया है कि क्या यह आत्महत्या थी या किसी अन्य साजिश का हिस्सा। अभी तक कोई स्पष्ट सुराग सामने नहीं आया है लेकिन एसिड की बोतल होने के कारण जांच की दिशा और भी गंभीर हो गई है।

    पुलिस ने तुरंत ही मामले की जांच शुरू कर दी है। शव को पोस्टमार्टम के लिए हैमिडिया अस्पताल भेजा गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही यह पता चलेगा कि छात्रा की मौत एसिड के कारण हुई थी या किसी अन्य वजह से।

    कोहेफिजा थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है। पीजी में रहने वाले अन्य छात्रों और आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है। साथ ही छात्रा के मोबाइल बैग और अन्य सामानों को भी कब्जे में लिया गया है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि छात्रा के साथ कोई मानसिक दबाव तो नहीं था या किसी प्रकार का दबाव/हैरानी वाली घटना तो नहीं हुई।

    इस घटना के बाद मेडिकल कॉलेज और आसपास के छात्रों में डर और चिंता का माहौल बना हुआ है। कई छात्रों और परिजनों ने सुरक्षा व्यवस्था और छात्रावास/पीजी में रहने वाली छात्राओं की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं अब पुलिस की नजर पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर है जो इस केस की दिशा तय करेगी। यदि रिपोर्ट में एसिड से संबंधित कारण सामने आते हैं तो मामला और गंभीर हो जाएगा। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि छात्रा ने स्वयं ही आत्महत्या की या किसी ने उसे मारकर मामले को आत्महत्या जैसा दिखाने की कोशिश की।

  • बीजेपी में नकद चंदा बंद, सहयोग निधि अब केवल ऑनलाइन चेक से 15 मार्च तक अभियान

    बीजेपी में नकद चंदा बंद, सहयोग निधि अब केवल ऑनलाइन चेक से 15 मार्च तक अभियान


    भोपाल । मध्यप्रदेश बीजेपी में अब से नकद चंदा बंद किया जा रहा है। पार्टी ने यह निर्णय लिया है कि अब से सहयोग निधि केवल ऑनलाइन और चेक के माध्यम से ही जमा होगी। यह नई व्यवस्था कल से शुरू हो रहे सहयोग निधि अभियान के साथ लागू होगी। बीजेपी के प्रदेश स्तर पर आज बड़ी बैठक हुई, जिसमें क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, संभागीय प्रभारी और जिला प्रभारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में यह तय किया गया कि पार्टी को मिलने वाली सहयोग निधि में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए नकद चंदा पूरी तरह बंद किया जाएगा।

    अभियान कल से शुरू हो रहा है और यह 15 मार्च तक चलेगा। इस दौरान जिला स्तर पर पार्टी के बैंक खाते में कोई राशि जमा नहीं होगी। सभी योगदान सीधे प्रदेश स्तर के खाते में आएंगे और बाद में उन्हें जिलों को भेजा जाएगा। पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया है कि 20,000 रुपए या इससे अधिक की राशि बिना PAN नंबर के स्वीकार नहीं की जाएगी। चेक से चंदा देने वालों की सूची तैयार की जाएगी, जिसमें नाम-पता, बैंक का नाम-पता और चेक-बुक नंबर जैसी जानकारी दर्ज होगी।

    यह अभियान पं. दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि से शुरू हो रहा है। इससे पहले पिछले साल स्व. कुशाभाऊ ठाकरे की शताब्दी वर्ष पर समर्पण निधि का अभियान चलाया गया था, जिसमें करीब 100 करोड़ से अधिक राशि जुटाई गई थी। बीजेपी का यह कदम पार्टी की वित्तीय पारदर्शिता को बढ़ाने और नकदी प्रवाह को नियंत्रित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। साथ ही, इससे फंडिंग के स्रोतों की स्पष्टता और जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।

    केंद्र और प्रदेश स्तर पर पार्टी की गतिविधियों को देखते हुए यह निर्णय समय की मांग माना जा रहा है। साथ ही, चुनावी साल में वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए भी यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।अब यह देखना होगा कि इस अभियान के तहत कितनी सहयोग निधि जुटती है और पार्टी के लिए यह नया तरीका कितना प्रभावी साबित होता है।

  • मऊगंज से बीजेपी विधायक का लंबा सस्पेंस: एक माह से गायब प्रदीप पटेल, ‘गैंग से डर’ की बात पर सियासत गरम, विपक्ष ने कहा शर्मनाक

    मऊगंज से बीजेपी विधायक का लंबा सस्पेंस: एक माह से गायब प्रदीप पटेल, ‘गैंग से डर’ की बात पर सियासत गरम, विपक्ष ने कहा शर्मनाक


    भोपाल । मऊगंज से बीजेपी विधायक प्रदीप पटेल का एक माह से गायब रहना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। इस दौरान उनके न मिलने की वजह के रूप में एक गैंग से डर की बातें सामने आईं। मामले ने सियासी तूल पकड़ लिया है और कांग्रेस ने इसे राज्य की बिगड़ती कानून व्यवस्था और सत्ता की अक्षमता बताया है।

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने इस मामले को गंभीर बताया और कहा कि प्रदेश में पहले लाडली बहन जैसी घटनाएँ हो रही थीं अब बीजेपी के विधायक भी गायब हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदीप पटेल मूसा गैंग से डरकर गायब हुए हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि मध्य प्रदेश में कितनी गैंगें चल रही हैं और माफियाओं का राज है। कांग्रेस ने इसे नया माफिया कहकर सरकार पर हमला किया।

    पीसी शर्मा ने कहा कि सरकार अपने ही विधायक को ढूंढ नहीं पा रही जबकि कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। आम जनता पहले से ही परेशान है और अब विधायक भी सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला विधानसभा में उठाया जाएगा और सड़कों पर भी आवाज़ उठेगी। उनका कहना था कि बीजेपी का विधायक गायब है और सरकार उसे खोज नहीं पा रही इससे शर्मनाक स्थिति और कुछ नहीं हो सकती।

    दूसरी ओर डिप्टी सीएम और विंध्य क्षेत्र के नेता राजेंद्र शुक्ल ने इस खबर को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि प्रदीप पटेल सक्रिय विधायक हैं और जनता की समस्याओं के लिए संघर्ष करते रहते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें इस संबंध में किसी भी तरह की जानकारी नहीं है और गैंग की खबरों में कोई वास्तविकता नहीं है। राजेंद्र शुक्ल ने यह भी कहा कि किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं है और यह सारी बातें अफवाहें हैं। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि विधायक लगातार काम कर रहे हैं और उनकी स्थिति सामान्य है।

    मामले को लेकर सियासत और आरोप-प्रत्यारोप तेज होते जा रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि प्रदेश में कानून व्यवस्था चरमरा गई है और सरकार को अपने ही विधायक की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। वहीं सरकार की ओर से इसे निराधार बताते हुए मामला शांतिपूर्ण रूप से टाला जा रहा है। अब यह देखना बाकी है कि विधायक की असल स्थिति क्या है और प्रशासन इस मामले में कब तक स्पष्टता देगा।

  • MP में 12वीं बोर्ड परीक्षा शुरू, 7 लाख छात्रों ने पहले दिन अंग्रेजी परीक्षा दी 3856 केंद्रों पर सख्त निगरानी

    MP में 12वीं बोर्ड परीक्षा शुरू, 7 लाख छात्रों ने पहले दिन अंग्रेजी परीक्षा दी 3856 केंद्रों पर सख्त निगरानी

    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में 12वीं बोर्ड परीक्षाएं सोमवार से शुरू हो गईं। पहले दिन यानी सोमवार को 12वीं के छात्रों ने अंग्रेजी का पेपर दिया। इस साल लगभग 7 लाख विद्यार्थी 12वीं की फाइनल परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। प्रदेशभर में कुल 3856 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। भोपाल में 104 केंद्रों पर 2600 के करीब छात्र परीक्षा दे चुके हैं। परीक्षा सुबह 9 से 12 बजे तक आयोजित की जा रही है।

    परीक्षा को शांतिपूर्ण नकलमुक्त और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए प्रशासन और शिक्षा विभाग ने महीनों पहले से तैयारियां शुरू कर दी थीं। नकल रोकने के लिए इस बार फ्लाइंग स्क्वॉड सीसीटीवी निगरानी और थानों से प्रश्न-पत्र निकालने तक वीडियोग्राफी की व्यवस्था की गई है।

    परीक्षा खत्म होने के बाद कई विद्यार्थियों ने पेपर को आसान और सामान्य स्तर का बताया। जलज शर्मा ने कहा कि आज का एग्जाम बहुत अच्छा रहा जबकि उन्नति ने बताया कि पेपर वैसा ही आया जैसा उन्होंने सोचा था। वंश ठाकुर ने भी कहा कि पेपर आसान था और उम्मीद के अनुसार ही रहा।

    प्रदेश में इस बार 10वीं और 12वीं की परीक्षा में कुल 16 लाख से ज्यादा छात्र शामिल हो रहे हैं। इनमें 9 लाख 7 हजार विद्यार्थी 10वीं की परीक्षा देंगे जबकि लगभग 7 लाख छात्र 12वीं बोर्ड परीक्षा में बैठ रहे हैं।

    सभी जिलों में चार-चार फ्लाइंग स्क्वॉड गठित किए गए हैं। इनमें से दो स्क्वॉड विकासखंड स्तर पर और दो जिला स्तर पर काम करेंगे। हर स्क्वॉड में तीन सदस्य होंगे जो पुलिस या प्रशासनिक अधिकारी होंगे ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।

    नकल रोकने के लिए संवेदनशील केंद्रों पर तीसरी आंख यानी सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था की गई है। इन कैमरों की निगरानी भोपाल स्थित बोर्ड कार्यालय से सीधे की जाएगी। इसके अलावा प्रश्न-पत्र निकालने के दौरान थानों से वीडियोग्राफी अनिवार्य की गई है और सुरक्षा गार्ड्स की तैनाती भी की गई है।

    माध्यमिक शिक्षा मंडल ने स्कूलों को सख्त निर्देश दिए हैं कि नोटिस बोर्ड मॉर्निंग असेंबली और अभिभावक व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए परीक्षा संबंधी सूचना तुरंत साझा करें। शिक्षकों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं कि कोई भी छात्र पुरानी तारीखों के भरोसे परीक्षा से वंचित न रहे।

    इसके अलावा बोर्ड ने हर जिले में पांच-पांच परीक्षा केंद्रों को विशेष मॉनिटरिंग के लिए चुना है। इन केंद्रों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी सीधे भोपाल स्थित बोर्ड कार्यालय से की जाएगी। औचक निरीक्षण के लिए उड़नदस्ते भी सक्रिय रहेंगे जिनमें शिक्षा विभाग के साथ प्रशासनिक अधिकारी शामिल होंगे।

  • नवग्रह शक्तिपीठ कलश यात्रा में भगदड़, एक महिला की मौत; आयोजन में लापरवाही का आरोप

    नवग्रह शक्तिपीठ कलश यात्रा में भगदड़, एक महिला की मौत; आयोजन में लापरवाही का आरोप


    ग्वालियरडबरा । ग्वालियर के डबरा शहर में नवग्रह शक्तिपीठ प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव की शुरुआत कलश यात्रा के साथ हुई, लेकिन यह भव्य आयोजन एक दुखद हादसे में बदल गया। स्टेडियम ग्राउंड से शुरू हुई कलश यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से गुजर रही थी, जिसमें हजारों महिलाएं एक ही रंग की साड़ियों में शामिल थीं। भीड़भाड़ और उत्साह के बीच अचानक एक संकरे मार्ग या चौराहे पर भारी भीड़ जमा हो गई, जिससे अफरा-तफरी मच गई और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। इस दौरान महिलाओं के बीच धक्का-मुक्की हुई और कई गिर पड़ीं।

    हादसे में एक महिला की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि करीब 5 महिलाएं घायल हो गईं। घायलों को तुरंत सिविल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में लिया। प्रशासन ने भी जांच शुरू कर दी है।

    मृतक महिला के परिजन मौके पर पहुंचकर आयोजकों और पुलिस प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी और भीड़ नियंत्रण के उपाय न के बराबर थे। साथ ही आपातकालीन सुविधाओं की कमी और आयोजन स्थल पर समुचित व्यवस्था न होने का आरोप भी लगाया।

    यह आयोजन पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के नेतृत्व में आयोजक समिति द्वारा किया जा रहा है। 10 से 20 फरवरी तक चलने वाले इस 11 दिवसीय महोत्सव में धीरेंद्र शास्त्री (बागेश्वर धाम), प्रदीप मिश्रा और कुमार विश्वास जैसे संत-कवि शामिल होंगे। आयोजक समिति ने घटना पर दुख जताया है और मृतक के परिवार को सहायता देने की बात कही है।

    कलेक्टर रुचिका चौहान और एसपी धर्मवीर सिंह यादव पहले ही आयोजन की तैयारियों का जायजा ले चुके थे, लेकिन आज की घटना ने सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन ने मामले की जांच के साथ-साथ भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त करने के निर्देश दिए हैं।इस दुखद घटना ने महोत्सव की शुरुआत को ही झकझोर दिया है और लोगों के बीच सुरक्षा के प्रति चिंता बढ़ा दी है।