Category: Madhya Pradesh

  • मध्य प्रदेश में बड़ा हादसा: पटाखा फैक्ट्री विस्फोट में 5 की मौत, यूपी-बिहार के मजदूर थे शिकार

    मध्य प्रदेश में बड़ा हादसा: पटाखा फैक्ट्री विस्फोट में 5 की मौत, यूपी-बिहार के मजदूर थे शिकार


    नई दिल्ली । मध्यप्रदेश के देवास जिले के टोंककलां इलाके में गुरुवार सुबह हुए भीषण पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। सुबह करीब 11:30 बजे हुए इस धमाके में अब तक 5 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 20 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हैं। हादसा इतना भयावह था कि शवों के टुकड़े 20 से 25 फीट दूर तक जा गिरे और फैक्ट्री की दीवारें पूरी तरह धराशायी हो गईं। आसपास के मकानों तक धमाके की कंपन महसूस की गई। मृतक मजदूर उत्तर प्रदेश और बिहार के बताए जा रहे हैं।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ब्लास्ट के बाद फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी मच गई। झुलसे हुए मजदूर बदहवास हालत में बाहर भागते नजर आए। कई लोगों के कपड़े शरीर की त्वचा से चिपक गए थे। फैक्ट्री के बाहर जले हुए अवशेष, बाल और विस्फोटक सामग्री बिखरी पड़ी मिली। हादसे के बाद भी लंबे समय तक पटाखे फूटने की आवाजें आती रहीं।

    प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री में दो केमिकल मिलाकर बारूद तैयार किया जा रहा था। आशंका है कि केमिकल का अनुपात बिगड़ने या मैग्नीशियम पाउडर के पानी के संपर्क में आने से विस्फोट हुआ। श्रम विभाग की शुरुआती रिपोर्ट में यह भी संभावना जताई गई कि बारूद की हैंडलिंग के दौरान स्टैटिक चार्ज बनने से ‘सेल्फ इग्निशन’ हुआ होगा। एफएसएल टीम ने घटनास्थल से केमिकल के सैंपल जुटाए हैं।

    सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि जिस फैक्ट्री में विस्फोट हुआ, उसका निर्माण कार्य अभी पूरा भी नहीं हुआ था। बावजूद इसके वहां बड़े स्तर पर पटाखा निर्माण किया जा रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर निर्माणाधीन यूनिट में ही विस्फोटक सामग्री का उत्पादन शुरू कर दिया गया था। फैक्ट्री के पास विस्फोटक लाइसेंस तो था, लेकिन फैक्ट्री एक्ट के तहत जरूरी पंजीकरण और सुरक्षा अनुमतियां नहीं ली गई थीं।

    पुलिस ने फैक्ट्री संचालक अनिल मालवीय को गिरफ्तार कर लिया है। उसके समेत चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। प्रशासन ने फैक्ट्री को सील कर दिया है। वहीं, उज्जैन संभाग कमिश्नर ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। जांच में फैक्ट्री के लाइसेंस, सुरक्षा इंतजाम और नियमों के पालन की पड़ताल की जाएगी।

    देवास कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने बताया कि घायलों का इलाज देवास, इंदौर के एमवाय, चोइथराम और अमलतास अस्पतालों में चल रहा है। कई मजदूर 80 से 90 प्रतिशत तक झुलस गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घायलों से मुलाकात कर मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता और घायलों के मुफ्त इलाज की घोषणा की है।

    स्थानीय लोगों का आरोप है कि फैक्ट्री में पहले भी मार्च 2026 में विस्फोट हो चुका था, लेकिन प्रशासन ने कोई सख्त कार्रवाई नहीं की। ग्रामीणों के मुताबिक, यहां 400 से 500 मजदूर काम करते थे और रोज करीब 18 लाख रुपए का माल तैयार होता था।

  • देवास ब्लास्ट केस में चौंकाने वाली बातें सामने आईं, सुरक्षा नियमों की अनदेखी बनी वजह

    देवास ब्लास्ट केस में चौंकाने वाली बातें सामने आईं, सुरक्षा नियमों की अनदेखी बनी वजह


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के देवास जिले में टोंककलां स्थित पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट को लेकर श्रम विभाग की शुरुआती जांच रिपोर्ट सामने आ गई है। रिपोर्ट में हादसे की दो बड़ी संभावित वजहों का खुलासा हुआ है, साथ ही फैक्ट्री प्रबंधन की गंभीर लापरवाहियां भी उजागर हुई हैं।

    श्रम मंत्री प्रह्लाद पटेल ने बताया कि तकनीकी जांच के अनुसार हादसे के पीछे मैग्नीशियम पाउडर की केमिकल रिएक्शन मुख्य कारण हो सकती है। आशंका है कि निर्माण प्रक्रिया के दौरान मैग्नीशियम पानी के संपर्क में आ गया, जिससे जोरदार विस्फोट हुआ। दूसरी संभावना यह जताई गई है कि बारूद की हैंडलिंग के दौरान स्टैटिक चार्ज बना और उससे ‘सेल्फ इग्निशन’ यानी स्वतः आग लग गई।

    गुरुवार सुबह करीब 11:30 बजे हुए इस विस्फोट ने पूरे इलाके को दहला दिया था। धमाके के बाद फैक्ट्री से लगातार पटाखे फूटने की आवाजें आती रहीं और कई मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए। हादसे में अब तक 5 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि कई घायल अस्पतालों में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।

    जांच रिपोर्ट में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ है कि फैक्ट्री का निर्माण कार्य अभी पूरा भी नहीं हुआ था, लेकिन वहां पटाखा निर्माण शुरू कर दिया गया था। यानी जिस समय सुरक्षा व्यवस्था और ढांचे की टेस्टिंग होनी चाहिए थी, उस समय बारूद और विस्फोटक सामग्री के बीच मजदूरों से काम कराया जा रहा था।

    रिपोर्ट के अनुसार, फैक्ट्री प्रबंधन के पास जिला कलेक्टर द्वारा जारी विस्फोटक लाइसेंस तो था, लेकिन फैक्ट्री एक्ट के तहत जरूरी पंजीकरण और अन्य वैधानिक मंजूरियां नहीं ली गई थीं। बिना सुरक्षा मानकों और पर्याप्त इंतजामों के इस खतरनाक यूनिट का संचालन किया जा रहा था।

    श्रम विभाग ने फैक्ट्री में कई गंभीर खामियां पाई हैं, जिनमें अग्निशमन व्यवस्था का अभाव, इमरजेंसी प्लान तैयार न करना, श्रमिकों की हाजिरी और रिकॉर्ड न रखना, तथा मजदूरों को केमिकल सुरक्षा संबंधी जानकारी न देना शामिल है।

    इन सभी मामलों में फैक्ट्री प्रबंधन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। कई धाराओं के तहत 2 साल से लेकर 7 साल तक की सजा और लाखों रुपए के जुर्माने का प्रावधान बताया गया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी हादसे को गंभीरता से लेते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सरकार का कहना है कि घायलों के इलाज में कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी और हादसे के जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।

  • देवास फैक्ट्री विस्फोट: साथियों ने कहा- बिलिंग रूम में आखिरी बार दिखे थे दोनों मजदूर

    देवास फैक्ट्री विस्फोट: साथियों ने कहा- बिलिंग रूम में आखिरी बार दिखे थे दोनों मजदूर


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के देवास जिले में टोंककलां स्थित पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट के बाद हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। हादसे में अब तक 5 मजदूरों की मौत हो चुकी है, वहीं अब दो और मजदूरों के लापता होने की खबर सामने आने से परिजनों और साथी मजदूरों की चिंता बढ़ गई है।

    घायल मजदूरों का कहना है कि ब्लास्ट के बाद से उनके साथी राजू और बाबुल का कोई पता नहीं चल पाया है। दोनों बिहार के अरहरिया जिले के रहने वाले बताए जा रहे हैं और कुछ महीने पहले ही रोज़गार की तलाश में देवास आए थे।

    देवास जिला अस्पताल में भर्ती घायल मजदूर शशि कुमार ने बताया कि हादसे से पहले उनकी दोनों साथियों से खाना खाते समय बातचीत हुई थी। इसके बाद वे आखिरी बार फैक्ट्री के बिलिंग रूम के पास दिखाई दिए। धमाके के बाद से दोनों न तो अस्पतालों में मिले और न ही किसी से संपर्क हो पाया।

    साथी मजदूरों को आशंका है कि कहीं दोनों भी हादसे का शिकार तो नहीं हो गए। मजदूर लगातार प्रशासन से घटना स्थल पर जाकर तलाश करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने अस्पतालों, आसपास के इलाकों और रिश्तेदारों से संपर्क कर लिया, लेकिन दोनों का कोई सुराग नहीं मिला।

    इस दर्दनाक हादसे में अब तक जिन मजदूरों की मौत हुई है, उनमें बिहार के सुमित, धीरज, अमर और गुड्डू शामिल हैं, जबकि उत्तर प्रदेश के लखनऊ निवासी सनी की भी जान गई है। मृतकों के शव देर रात परिजनों को सौंप दिए गए।

    वहीं हादसे में घायल कई मजदूरों का इलाज अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है। देवास जिला अस्पताल में 11 लोग भर्ती हैं, जबकि गंभीर घायलों को निजी अस्पतालों में रेफर किया गया है।

    प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए विशेष टीम गठित की है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री पूरी तरह तैयार होने से पहले ही वहां पटाखा निर्माण शुरू कर दिया गया था। श्रम विभाग की रिपोर्ट में यह भी आशंका जताई गई है कि मैग्नीशियम पाउडर के पानी के संपर्क में आने या स्टैटिक चार्ज बनने से विस्फोट हुआ होगा।

    रिपोर्ट में सुरक्षा नियमों की भारी अनदेखी, फैक्ट्री एक्ट के तहत जरूरी लाइसेंस का अभाव, अग्निशमन व्यवस्था में कमी और इमरजेंसी प्लान न होने जैसी गंभीर लापरवाहियां सामने आई हैं। इन मामलों में फैक्ट्री प्रबंधन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

  • शाजापुर में गोदाम से 12 इलेक्ट्रिक पोल चोरी, ठेकेदार ने दर्ज कराई शिकायत

    शाजापुर में गोदाम से 12 इलेक्ट्रिक पोल चोरी, ठेकेदार ने दर्ज कराई शिकायत


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले के लालघाटी क्षेत्र में चोरी की एक अजीबोगरीब घटना सामने आई है, जहां एक इलेक्ट्रिकल कॉन्ट्रैक्टर के गोदाम से 12 लोहे के इलेक्ट्रिक पोल गायब हो गए। पीड़ित हेमकांत शर्मा, जो ग्वालियर के निवासी हैं और वर्तमान में शाजापुर में कार्यरत हैं, ने बताया कि उन्होंने ये सिल्वर रंग के लोहे के पोल निर्माणाधीन प्रोजेक्ट के लिए गोदाम में सुरक्षित रखे थे।
    गुरुवार रात करीब 8 बजे तक सभी पोल मौजूद थे, लेकिन अगले दिन शुक्रवार सुबह 9:30 बजे जब वे गोदाम पहुंचे तो पूरा सामान गायब मिला। घटना के बाद आसपास के क्षेत्र में तलाश की गई, लेकिन कहीं कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने तत्काल पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

    कॉन्ट्रेक्टर ने आशंका जताई है कि यह चोरी किसी योजनाबद्ध तरीके से की गई है, क्योंकि पोल भारी और निर्माण कार्य से जुड़े महत्वपूर्ण सामान थे। उन्होंने यह भी बताया कि संबंधित बिल और दस्तावेज इंजीनियर से लेकर जल्द पुलिस को उपलब्ध कराए जाएंगे।

    पुलिस ने शिकायत के आधार पर अज्ञात चोरों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आसपास के सीसीटीवी फुटेज तथा संदिग्ध गतिविधियों की जांच की जा रही है।

  • गर्मी का प्रचंड वार: शाजापुर में तापमान 45 डिग्री के करीब, लोगों की मुश्किलें बढ़ीं

    गर्मी का प्रचंड वार: शाजापुर में तापमान 45 डिग्री के करीब, लोगों की मुश्किलें बढ़ीं


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले में इन दिनों भीषण गर्मी और लू का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले एक सप्ताह से पड़ रही तेज धूप और गर्म हवाओं ने आम जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। शुक्रवार को हालात और गंभीर हो गए, जब सुबह से ही तेज धूप के साथ लू चलने लगी।

    दोपहर होते-होते शहर के प्रमुख बाजार नई सड़क और चौक बाजार जहां आमतौर पर भीड़ रहती है, वहां पूरी तरह सन्नाटा पसर गया। लोग गर्मी से बचने के लिए घरों में दुबके रहे, जिससे सड़कों पर आवाजाही बेहद कम हो गई।

    तेज गर्मी से राहत पाने के लिए कई दुकानदारों ने अपनी दुकानों के बाहर हरी नेट और अस्थायी शेड लगाए हैं, ताकि थोड़ी ठंडक बनी रहे। वहीं, तेज लू के कारण सबसे ज्यादा परेशानी दोपहिया वाहन चालकों को हो रही है, जो धूप में सफर करने को मजबूर हैं। लोग अब हेलमेट के साथ-साथ टोपी, गमछा और चश्मे का सहारा ले रहे हैं।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने नागरिकों को चेतावनी दी है कि दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें। साथ ही पर्याप्त पानी पीने, हल्का भोजन करने और शरीर को हाइड्रेट रखने की सलाह दी गई है, ताकि लू से होने वाली बीमारियों से बचा जा सके।

    ,शुक्रवार को जिले में अधिकतम तापमान 44 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज होने की संभावना है, जबकि न्यूनतम तापमान करीब 27 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। मौसम विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि अगले दो दिनों तक राहत की कोई संभावना नहीं है और तापमान 45 से 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।

    भीषण गर्मी के चलते प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने की अपील की है।

  • बंधक बनाकर पिटाई और फिरौती का आरोप, परिवार से मांगे 61 हजार रुपये

    बंधक बनाकर पिटाई और फिरौती का आरोप, परिवार से मांगे 61 हजार रुपये


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष दीपक शर्मा के साथ अपहरण, मारपीट और लूट की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। पीड़ित का आरोप है कि 10 मई को भोपाल से लौटते समय उन्हें एक सुनियोजित साजिश के तहत रोका गया और हथियारों के दम पर जंगल में ले जाया गया, जहां उनके साथ घंटों तक बेरहमी से मारपीट की गई।

    दीपक शर्मा के मुताबिक, रास्ते में एक परिचित महिला ने उनकी कार रुकवाई, जिसके बाद 7–8 बदमाशों ने उन्हें घेर लिया। आरोप है कि बदमाश उन्हें जबरन जंगल की ओर ले गए और वहां मोबाइल, नकदी, घड़ी, अंगूठी और अन्य सामान छीन लिया।

    पीड़ित ने बताया कि आरोपियों ने उनसे 20 लाख रुपये की मांग की। जब उन्होंने असमर्थता जताई तो बदमाशों ने उन्हें धमकाकर पत्नी, बेटी और परिचितों से पैसे मंगवाए। डर के माहौल में परिजनों ने करीब 61 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए।

    इतना ही नहीं, आरोप है कि बदमाशों ने उनसे चेक पर हस्ताक्षर भी करवाए और लगातार जान से मारने की धमकी दी। पीड़ित का दावा है कि इस दौरान उनके कपड़े फाड़े गए और अश्लील वीडियो बनाकर उसे वायरल करने की धमकी भी दी गई।

    घटना के बाद किसी तरह आरोपियों के चंगुल से बचकर दीपक शर्मा राजगढ़ पहुंचे और अगले दिन थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जीरो पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और केस को ब्यावरा थाने ट्रांसफर किया गया है।

    पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है और आरोपियों की पहचान व गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।

  • भोजशाला विवाद पर बड़ा फैसला: हाईकोर्ट ने सुनाया आदेश, क्षेत्र में बढ़ी हलचल

    भोजशाला विवाद पर बड़ा फैसला: हाईकोर्ट ने सुनाया आदेश, क्षेत्र में बढ़ी हलचल


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में आज हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने अपने आदेश में भोजशाला को मंदिर स्वरूप स्थल माना है और हिंदू पक्ष की याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया है।

    कोर्ट का अहम फैसला
    हाई कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि उपलब्ध ऐतिहासिक तथ्यों और एएसआई (ASI) रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट होता है कि यह स्थल परमार वंश के राजा भोज से जुड़ा संस्कृत शिक्षा केंद्र और देवी वाग्देवी (सरस्वती) से संबंधित मंदिर रहा है। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस स्थान पर हिंदू पूजा-अर्चना की निरंतरता ऐतिहासिक रूप से बनी रही है।

     फैसले की प्रमुख बातें
    भोजशाला परिसर को मंदिर स्वरूप माना गया
    हिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना का अधिकार दिया गया
    ASI को परिसर का प्रशासनिक नियंत्रण जारी रखने का निर्देश
    केंद्र सरकार और ASI को प्रबंधन और धार्मिक स्वरूप से जुड़े निर्णय लेने होंगे
    विवादित स्थल 1958 अधिनियम के तहत संरक्षित स्मारक बना रहेगा

     ASI रिपोर्ट का हवाल
    कोर्ट ने अपने फैसले की विस्तृत रिपोर्ट को अहम माना, जिसमें कहा गया था कि:

    परिसर में मिले 106 स्तंभ और 82 संरचनात्मक अवशेष प्राचीन मंदिर के प्रतीक हैं
    कई स्तंभों पर देवी-देवताओं की मूर्तियां और आकृतियां पाई गईं
    परमार कालीन शिलालेख और अवशेष मिले हैं
    स्थल का मूल स्वरूप हिंदू मंदिर होने के संकेत देता है

    विवाद की पृष्ठभूम
    यह विवाद वर्षों से हिंदू और मुस्लिम पक्ष के बीच चला आ रहा था। हिंदू पक्ष का दावा था कि यह मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद मानता था। वसंत पंचमी पर पूजा और नमाज को लेकर यहां अक्सर तनाव की स्थिति बनी रहती थी।

    सुरक्षा व्यवस्था
    फैसले से पहले प्रशासन ने धारा 163 लागू कर दी थी और भीड़ जुटाने पर रोक लगाई गई थी। सोशल मीडिया पर निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को भी कड़ा किया गया था।

    हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद भोजशाला विवाद में एक नया मोड़ आ गया है। हालांकि, प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे के निर्देश अभी केंद्र और ASI के फैसलों पर निर्भर करेंगे।

  • सलकनपुर में सनसनी: रोज दंडवत कर दर्शन करने वाले साधु की संदिग्ध मौत

    सलकनपुर में सनसनी: रोज दंडवत कर दर्शन करने वाले साधु की संदिग्ध मौत


    नई दिल्ली । सीहोर जिले के प्रसिद्ध सलकनपुर देवी धाम के जंगल क्षेत्र में एक अज्ञात साधु का क्षत-विक्षत शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई है। शव जंगल में लावारिस अवस्था में मिला था और उसे जंगली जानवरों द्वारा नुकसान पहुंचाया गया था।

    सूचना मिलने पर डायल-112 की टीम मौके पर पहुंची और पुलिस ने आवश्यक पंचनामा कार्रवाई पूरी कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पहचान न होने के कारण बाद में कानूनी प्रक्रिया के तहत अंतिम संस्कार कर दिया गया।

    वर्षों से मंदिर क्षेत्र में रह रहे थे साधु
    स्थानीय लोगों के अनुसार यह साधु लंबे समय से सलकनपुर क्षेत्र में रह रहे थे। वे रोजाना मंदिर मार्ग पर दंडवत करते हुए माता के दर्शन करने जाते थे और दर्शन के बाद आसपास के लोगों से भोजन स्वीकार करते थे।

    व्यापारी दिलीप मालवीय ने बताया कि बाबा ने कभी भी अपने परिवार या मूल निवास के बारे में कोई जानकारी साझा नहीं की। वे पूरी तरह भक्ति और तपस्या में लीन रहते थे।

    पुलिस जांच जारी
    जानकारी के अनुसार, कोरोना लॉकडाउन के बाद से साधु इसी तरह जीवन व्यतीत कर रहे थे। पुलिस अब उनकी पहचान और मौत के कारणों का पता लगाने में जुटी है।

  • सीहोर में ड्रग्स के खिलाफ बड़ी कार्रवाई: 8 किलो गांजा के साथ मां-बेटा गिरफ्तार

    सीहोर में ड्रग्स के खिलाफ बड़ी कार्रवाई: 8 किलो गांजा के साथ मां-बेटा गिरफ्तार


    नई दिल्ली । सीहोर जिले के शाहगंज थाना क्षेत्र में पुलिस ने नशे के अवैध कारोबार पर बड़ी कार्रवाई करते हुए एक महिला और उसके बेटे को गिरफ्तार किया है। दोनों के कब्जे से कुल 8 किलो 459 ग्राम गांजा बरामद किया गया है।

    पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई बुदनी के अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) रवि शर्मा के मार्गदर्शन और शाहगंज थाना प्रभारी दिनेश सिंह चौहान के नेतृत्व में की गई। पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि इंदिरा कॉलोनी निवासी किरण कुचबंदिया अवैध रूप से गांजे की बिक्री कर रही है।

    सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने इलाके में दबिश दी और तलाशी के दौरान भारी मात्रा में गांजा बरामद किया। इसके बाद आरोपी महिला को NDPS एक्ट के तहत गिरफ्तार कर लिया गया।

    जांच के दौरान पुलिस ने महिला के बेटे अजय कुचबंदिया को भी हिरासत में लिया है। दोनों से पूछताछ जारी है और पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह गांजा कहां से लाया जा रहा था और किन क्षेत्रों में इसकी सप्लाई की जा रही थी।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में पूरे नेटवर्क का खुलासा करने के लिए आगे की जांच तेज कर दी गई है।

  • सतना में खसरा का प्रकोप: 15 से अधिक बच्चे संक्रमित, स्वास्थ्यकर्मियों से मांगा जवाब

    सतना में खसरा का प्रकोप: 15 से अधिक बच्चे संक्रमित, स्वास्थ्यकर्मियों से मांगा जवाब


    नई दिल्ली । सतना जिले के नागौद विकासखंड के ग्राम गिंजारा में मीजल्स (खसरा) संक्रमण के कई मामले सामने आने के बावजूद समय पर इसकी सूचना उच्च अधिकारियों तक नहीं पहुंचाने पर स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है।

    मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. मनोज शुक्ला ने उपस्वास्थ्य केंद्र बसुधा की आशा सुपरवाइजर महेश्वरी सिंह, आशा कार्यकर्ता विमला पारासर और एएनएम प्रभा बागरी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। तीनों से तीन दिन के भीतर जवाब मांगा गया है।

    जानकारी के अनुसार, 25 अप्रैल को गिंजारा गांव में एक बच्चे में बुखार और शरीर पर दाने के लक्षण पाए गए थे। बच्चे को सिविल अस्पताल नागौद में भर्ती कराया गया था, जहां मीजल्स की जांच की गई। बाद में विभागीय समीक्षा और आईडीएसपी पोर्टल की रिपोर्ट से पता चला कि मई महीने में गांव में 15 से अधिक बच्चे इस संक्रमण की चपेट में आ चुके थे।

    स्वास्थ्य विभाग ने नोटिस में स्पष्ट कहा है कि यह एक अत्यंत संक्रामक बीमारी है, जो खांसने, छींकने और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से तेजी से फैलती है। ऐसे मामलों में तत्काल सूचना और सक्रिय निगरानी अनिवार्य होती है, लेकिन संबंधित कर्मचारियों ने समय पर रिपोर्टिंग नहीं की।

    विभाग का कहना है कि न केवल सूचना देने में देरी हुई, बल्कि क्षेत्र में संक्रमण नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था भी कमजोर पाई गई। आईडीएसपी और आईएचआईपी पोर्टल पर भी मामलों की एंट्री समय पर नहीं की गई।

    सीएमएचओ ने चेतावनी दी है कि यदि तीन दिन के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

    यह मामला अब जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था और संक्रामक रोगों की रिपोर्टिंग प्रणाली की गंभीरता पर सवाल खड़े कर रहा है।