Category: Madhya Pradesh

  • प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में मध्य प्रदेश बना देश का अग्रणी राज्य

    प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में मध्य प्रदेश बना देश का अग्रणी राज्य


    भोपाल।
    हर जरूरतमंद परिवार को पक्का घर उपलब्ध कराने के संकल्प को साकार करते हुए मध्य प्रदेश ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के क्रियान्वयन में देशभर में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश में 10 लाख से अधिक आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिससे आवास निर्माण एवं हितग्राहियों को आवास उपलब्ध कराने में देश के अग्रणी राज्यों में मध्य प्रदेश ने अपनी मजबूत पहचान बनाई है।

    नगरीय विकास एवं आवास विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे ने शुक्रवार को जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) अंतर्गत मध्य प्रदेश ने आवासों की ग्राउंडिंग में देशभर में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। प्रदेश में 98.04 प्रतिशत आवासों की ग्राउंडिंग पूर्ण हो चुकी है। यह प्रभावी क्रियान्वयन, सतत मॉनिटरिंग एवं समयबद्ध कार्यप्रणाली का परिणाम है। वहीं 9 लाख से अधिक आवार्सी का निर्माण पूर्ण कर पात्र हितग्राहियों को सौंपा जा चुका है। योजना के माध्यम से हजारों परिवारों का अपने पक्के घर का सपना साकार हुआ है, जिससे उनके जीवन स्तर, सामाजिक सुरक्षा एवं सम्मान में सकारात्मक बदलाव आया है।

    उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, निम्न आय वर्ग एवं मध्यम आय वर्ग के शहरी परिवारों को सुरक्षित एवं सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना है। योजना अंतर्गत हितग्राहियों को आवास निर्माण हेतु आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है, जिससे वे मूलभूत सुविधाओं से युक्त पक्के घर में जीवन यापन कर सकें।

    गौरतलब है कि मध्य प्रदेश शासन द्वारा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, सतत मॉनिटरिंग एवं समयबद्ध निर्माण कार्यों के चलते प्रदेश लगातार राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है। नगरीय विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने बताया कि नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि प्रत्येक पात्र शहरी परिवार को आवास योजना का लाभ समय पर प्राप्त हो सके। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के माध्यम से प्रदेश में न केवल आवास निर्माण को गति मिली है, बल्कि शहरी क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विकास, रोजगार सृजन एवं सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिला है। राज्य शासन द्वारा भविष्य में भी योजना के प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन हेतु निरंतर प्रयास किए जाते रहेंगे।

  • मुरैना में मीठी रिश्वत… चॉकलेट लेकर अफसर के पास पहुंचा 6वीं का छात्र, बोला- बिना लेन-देन काम नहीं होता… सिस्टम शर्मसार

    मुरैना में मीठी रिश्वत… चॉकलेट लेकर अफसर के पास पहुंचा 6वीं का छात्र, बोला- बिना लेन-देन काम नहीं होता… सिस्टम शर्मसार


    मुरैना।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के मुरैना जिले (Morena district) की जनसुनवाई में उस वक्त सन्नाटा पसर गया, जब कक्षा 6 के एक छात्र ने भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों पर अपनी मासूमियत से प्रहार किया. संजय कॉलोनी के रहने वाले मानवेंद्र सिंह (Manvendra Singh) ने जिला पंचायत सीईओ (District Panchayat CEO) की मेज पर चार चॉकलेट रखीं और गुहार लगाई कि उसके घर के बाहर बह रहे गंदे सीवर को ठीक करा दिया जाए।

    दरअसल, छात्र मानवेंद्र सिंह पिछले कई दिनों से अपने घर के बाहर सीवर लीकेज की समस्या से जूझ रहा है. छात्र का कहना है कि सीवर के गंदे पानी की वजह से न तो वह बाहर खेल पा रहा है और न ही साइकिल चला पा रहा है. स्कूल आने-जाने में भी उसे काफी गंदगी का सामना करना पड़ता है. परिवार की ओर से 4 बार नगर निगम और संबंधित विभाग को शिकायत की गई, लेकिन अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी.

    गुल्लक तोड़ी और खरीदी ‘चॉकलेट रिश्वत’
    जब शिकायतों का कोई असर नहीं हुआ, तो मासूम मानवेंद्र के मन में यह बात बैठ गई कि ‘बिना लेन-देन के सरकारी काम नहीं होते.’ मानवेंद्र ने अपनी गुल्लक से 20 रुपये निकाले. इन पैसों से उसने 4 चॉकलेट खरीदीं और सीधा जनसुनवाई में जिला पंचायत सीईओ कमलेश भार्गव के पास पहुंच गया।

    प्रतिक्रिया और शर्मिंदगी
    एक छोटे बच्चे के मुंह से ‘बिना लेन-देन के काम नहीं होता’ जैसी बात सुनकर वहां मौजूद अधिकारी और कर्मचारी दंग रह गए. सीईओ कमलेश भार्गव ने बच्चे की बात को गंभीरता से सुना और तत्काल संबंधित अधिकारियों को मौके पर जाकर सीवर दुरुस्त करने के निर्देश दिए।

    भ्रष्टाचार की सामाजिक छवि पर सवाल
    बहरहाल, मध्य प्रदेश की यह घटना सिर्फ एक बच्चे की शिकायत नहीं है, बल्कि उस कड़वी सच्चाई का आइना है जो हमारी भावी पीढ़ी के मन में घर कर रही है. एक 6वीं कक्षा के छात्र का यह सोचना कि उसे अपना हक पाने के लिए भी ‘लेन-देन’ करना पड़ेगा, व्यवस्था के लिए एक बड़ा अलार्म है।

    मानवेंद्र ने बड़े ही आत्मविश्वास के साथ CEO से कहा कि यदि चॉकलेट देने के बाद भी सीवर ठीक नहीं हुआ, तो वह अपनी चॉकलेट वापस ले जाएगा।

  • एमपी में गर्मी ने किया हाल बेहाल, भोपाल में पिघला सड़क का डामर, 12 शहरों का पारा 43 डिग्री के पार

    एमपी में गर्मी ने किया हाल बेहाल, भोपाल में पिघला सड़क का डामर, 12 शहरों का पारा 43 डिग्री के पार



    भोपाल। मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी ने लोगों का हाल बेहाल कर दिया है। शुक्रवार को प्रदेश के 12 शहरों में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। सबसे ज्यादा तापमान खंडवा में 45.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। राजधानी भोपाल में तेज गर्मी के चलते सड़क का डामर तक पिघल गया।

    मौसम विभाग ने शनिवार को प्रदेश के 37 जिलों में हीटवेव का अलर्ट जारी किया है। वहीं इंदौर, उज्जैन और मंडला में वॉर्म नाइट की स्थिति रहेगी, यानी रात के समय भी तापमान सामान्य से अधिक बना रहेगा। IMD के मुताबिक इंदौर, उज्जैन, रतलाम, धार और देवास में तीव्र लू को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

    भोपाल, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, शाजापुर, मंदसौर, नीमच, छतरपुर, सागर, दमोह और मंडला समेत कई जिलों में लू चलने की संभावना जताई गई है। हालांकि जबलपुर, रीवा, सतना, सीधी, कटनी, उमरिया, शहडोल, सिवनी, बालाघाट और बैतूल जैसे जिलों में तेज गर्मी पड़ेगी, लेकिन वहां फिलहाल लू का अलर्ट नहीं है।

     सागर, दमोह, जबलपुर, छिंदवाड़ा, शिवपुरी, रायसेन और पन्ना समेत कई जिलों में भी मौसम बदला रहा।

    तापमान की बात करें तो शाजापुर में 44.6 डिग्री, खरगोन में 44.2 डिग्री और रतलाम-नौगांव में 44 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। बड़े शहरों में भोपाल का तापमान 42.8 डिग्री, इंदौर और जबलपुर में 41.8 डिग्री, उज्जैन में 42.5 डिग्री और ग्वालियर में 40.9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ।

    मौसम विभाग ने लोगों को दोपहर 12 से 3 बजे के बीच विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। कहा है कि अगले चार दिनों तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में भीषण गर्मी का असर बना रहेगा। विभाग ने लोगों को पर्याप्त पानी पीने, धूप में ज्यादा देर तक नहीं रहने और हल्के रंग के सूती कपड़े पहनने की सलाह दी है। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई है।

  • भोजशाला फैसले पर सियासी बयानबाज़ी तेज, ‘न्यायपालिका के जरिए सनातनियों की जीत’ पर गरमाई बहस

    भोजशाला फैसले पर सियासी बयानबाज़ी तेज, ‘न्यायपालिका के जरिए सनातनियों की जीत’ पर गरमाई बहस

    मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर दिए गए फैसले के बाद पूरे क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। अदालत के इस निर्णय के बाद विभिन्न पक्षों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और इसे ऐतिहासिक एवं महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है।

    फैसले के बाद कुछ जनप्रतिनिधियों और नेताओं ने इसे सत्य की विजय बताया और कहा कि लंबे समय से चल रहे विवाद पर अब स्थिति स्पष्ट हुई है। उनके अनुसार, यह निर्णय आस्था और परंपरा से जुड़े मुद्दे पर न्यायपालिका की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है। कुछ नेताओं ने यह भी कहा कि वर्षों से जिस स्थान को लेकर विवाद था, अब उस पर न्यायिक दृष्टिकोण से स्पष्टता आ गई है, जिससे स्थानीय लोगों में संतोष का माहौल देखा जा रहा है।

    इसी क्रम में कुछ जनप्रतिनिधियों ने बयान दिया कि यह निर्णय समाज में आस्था से जुड़े विषयों पर लंबे समय से चल रही अनिश्चितता को समाप्त करता है। उनके अनुसार, धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाले स्थलों को लेकर जो विवाद थे, वे अब न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से एक दिशा में आगे बढ़े हैं। उन्होंने इसे सामाजिक दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण मोड़ बताया।

    वहीं याचिकाकर्ताओं और पक्षकारों ने भी फैसले को ऐतिहासिक बताया और कहा कि इससे उनके लंबे संघर्ष को न्याय मिला है। उन्होंने यह दावा किया कि भोजशाला का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व बहुत पुराना है और इससे जुड़े कई साक्ष्य पहले से मौजूद हैं। उनके अनुसार, अब इस स्थल के संरक्षण और पुनर्स्थापना को लेकर आगे की प्रक्रिया पर ध्यान दिया जाएगा।

    कुछ याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि ऐतिहासिक तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर इस स्थान की वास्तविक पहचान को लेकर उनकी ओर से अदालत में दलीलें पेश की गई थीं। अब फैसले के बाद वे आगे की योजना पर काम करेंगे, जिसमें धार्मिक प्रतीकों और परंपराओं से जुड़े पहलुओं को पुनर्स्थापित करने की बात कही गई है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में चर्चा और बहस का माहौल बना हुआ है। अलग-अलग पक्ष अपने-अपने नजरिए से इस निर्णय की व्याख्या कर रहे हैं। जहां एक ओर इसे न्यायिक प्रक्रिया की जीत बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है।

  • VIP कल्चर से दूरी: 15-20 गाड़ियों की जगह बस से पहुंचे मंत्री और अधिकारी

    VIP कल्चर से दूरी: 15-20 गाड़ियों की जगह बस से पहुंचे मंत्री और अधिकारी


    नई दिल्ली ।Gautam Tetwal ने बड़वानी दौरे के दौरान वीआईपी कारकेड की परंपरा से हटकर अनोखी पहल की। शुक्रवार को वे अफसरों और जनप्रतिनिधियों के साथ एक ही बस में सफर करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। आमतौर पर 15-20 गाड़ियों के लंबे काफिले के साथ चलने वाले मंत्री का यह अंदाज चर्चा का विषय बन गया।

    बस में उनके साथ Narendra Modi की ऊर्जा बचत अपील का संदेश भी नजर आया। यात्रा में भाजपा जिला अध्यक्ष अजय यादव, पानसेमल विधायक श्याम बरड़े, कलेक्टर जयति सिंह और एसडीएम भूपेंद्र सिंह पटेल समेत कई अधिकारी शामिल रहे।

    ऊर्जा बचत और सामूहिक परिवहन पर जोर
    मंत्री डॉ. टेटवाल ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा संकट को देखते हुए ईंधन बचाना समय की जरूरत है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री Mohan Yadav लगातार सामूहिक परिवहन और ईंधन बचत को बढ़ावा देने की अपील कर रहे हैं। इसी सोच के तहत यह पहल की गई।

    पहले लंबा रहता था कारकेड
    आमतौर पर मंत्री और वीआईपी दौरों में कई सरकारी और निजी वाहन शामिल होते हैं, जिससे ईंधन की खपत बढ़ती है। लेकिन इस बार मंत्री ने अपने प्रोटोकॉल वाहनों की संख्या सीमित रखी और सभी अधिकारियों को एक बस में साथ लेकर पहुंचे।

    लोगों में चर्चा का विषय बनी पहल
    मंत्री की यह पहल जिले में चर्चा का विषय बनी रही। स्थानीय लोगों ने इसे सकारात्मक संदेश बताते हुए कहा कि यदि जनप्रतिनिधि और अधिकारी इस तरह सामूहिक परिवहन अपनाएं, तो इससे ईंधन बचत के साथ ट्रैफिक और प्रदूषण भी कम हो सकता है।

  • खंडवा में दर्दनाक हादसा: पुल से 200 फीट गहरी खाई में गिरी बोलेरो, ड्राइवर की मौत

    खंडवा में दर्दनाक हादसा: पुल से 200 फीट गहरी खाई में गिरी बोलेरो, ड्राइवर की मौत


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में शुक्रवार सुबह एक भयावह सड़क हादसा हो गया। खंडवा-भोपाल हाईवे पर स्थित नर्मदानगर ओवरब्रिज से एक बोलेरो वाहन अनियंत्रित होकर लगभग 200 फीट गहरी खाई में गिर गया। हादसा इतना भीषण था कि वाहन पूरी तरह चकनाचूर हो गया और ड्राइवर की मौके पर ही मौत हो गई।

    यह दुर्घटना इंदिरा सागर बांध के बाहरी हिस्से में बने ओवरब्रिज पर हुई। बताया जा रहा है कि भोपाल की ओर से आ रही तेज रफ्तार बोलेरो अचानक अनियंत्रित हो गई और सुरक्षा जाल पार करते हुए नीचे जा गिरी। वाहन ने गिरते समय पावर स्टेशन की रिटेनिंग वॉल को भी तोड़ दिया। अधिकारियों के अनुसार यदि यह दीवार नहीं होती, तो बोलेरो सीधे टरबाइन से निकलने वाले तेज बहाव वाले पानी में समा सकती थी।

    सूचना मिलते ही पुलिस और राहत टीम मौके पर पहुंची। करीब 200 फीट नीचे उतरकर पुलिसकर्मियों ने क्षतिग्रस्त बोलेरो के गेट तोड़े और अंदर फंसे ड्राइवर को बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। मृतक की पहचान अभिषेक नरगावे (26) निवासी ग्राम अंजनिया खुर्द के रूप में हुई है।

    नर्मदानगर थाना प्रभारी के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर और छाती में गंभीर चोटों को मौत का कारण बताया गया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर हादसे की जांच शुरू कर दी है।

    परिजनों ने बताया कि अभिषेक खुद अपनी बोलेरो टैक्सी के रूप में चलाता था। गुरुवार रात वह कुछ यात्रियों को छोड़ने राजगढ़ गया था और लौटते समय यह हादसा हो गया। बताया जा रहा है कि दुर्घटना सुबह करीब 4 बजे हुई। अभिषेक अविवाहित था और परिवार का सहारा माना जाता था।

  • भोजशाला की पहचान अब स्पष्ट': हाईकोर्ट की बड़ी मुहर, हिंदुओं की आस्था की हुई जीत

    भोजशाला की पहचान अब स्पष्ट': हाईकोर्ट की बड़ी मुहर, हिंदुओं की आस्था की हुई जीत


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के चर्चित धार भोजशाला विवाद मामले में शुक्रवार को बड़ा फैसला सामने आया। Madhya Pradesh High Court की इंदौर बेंच ने अपने फैसले में भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर माना और हिंदुओं को वहां पूजा करने का अधिकार दिए जाने की बात कही। अदालत ने कहा कि यह स्थान परमार वंश के राजा भोज के समय संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र और देवी सरस्वती का मंदिर था।

    कोर्ट ने कहा कि पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) की रिपोर्ट और वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया है। अदालत ने यह भी माना कि पुरातत्व एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है और उसके निष्कर्षों पर भरोसा किया जा सकता है।

    कोर्ट ने क्या-क्या कहा?
    हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कई अहम बातें कहीं भोजशाला परिसर एक संरक्षित स्मारक है, यह मूल रूप से हिंदू मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र था, हिंदुओं को पूजा का अधिकार है, ASI परिसर का संरक्षण और प्रबंधन जारी रखेगा, सरकार संस्कृत शिक्षा की व्यवस्था पर भी विचार करे ,श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सुविधाएं और सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, अदालत ने कहा कि ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व वाली संरचनाओं का संरक्षण करना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है।

    नमाज की अनुमति वाला आदेश रद्द
    हाईकोर्ट ने वर्ष 2003 में ASI द्वारा दिए गए उस आदेश को भी निरस्त कर दिया, जिसमें मुस्लिम पक्ष को भोजशाला परिसर में नमाज की अनुमति दी गई थी। हालांकि अदालत ने मुस्लिम पक्ष को यह छूट दी है कि वे नमाज के लिए धार जिले में अलग जमीन उपलब्ध कराने को लेकर सरकार से संपर्क कर सकते हैं।

    ASI सर्वे और वैज्ञानिक अध्ययन पर भरोसा
    कोर्ट ने साफ कहा कि ASI सर्वे और वैज्ञानिक अध्ययन में मिले तथ्यों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जज ने सुनवाई के दौरान सभी वकीलों का आभार जताते हुए कहा कि अदालत ने सभी तथ्यों, ASI एक्ट और संविधान के तहत मिले मौलिक अधिकारों को ध्यान में रखकर फैसला दिया है।

    लंबे समय से चल रहा था विवाद
    धार भोजशाला मामला लंबे समय से विवाद और कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा रहा है। हिंदू पक्ष लगातार इसे देवी सरस्वती का मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र बताता रहा, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे मस्जिद मानता था। अब हाईकोर्ट के इस फैसले को इस मामले में एक बड़ा और अहम निर्णय माना जा रहा है। प्रशासन ने फैसले के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

  • गर्मी से फसलों पर संकट: किसानों ने पपीता बचाने के लिए लगाए क्रॉप कवर

    गर्मी से फसलों पर संकट: किसानों ने पपीता बचाने के लिए लगाए क्रॉप कवर


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में इन दिनों गर्मी अपने चरम पर है। जिले का तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, जबकि दोपहर के समय लगभग 25 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चल रही गर्म हवाएं लोगों को झुलसा रही हैं। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक हीट वेव का अलर्ट जारी किया है, जिससे लोगों के साथ-साथ किसानों की चिंता भी बढ़ गई है।

    भीषण गर्मी का सबसे ज्यादा असर पपीता की खेती पर देखने को मिल रहा है। खेतों का तापमान तेजी से बढ़ने के कारण छोटे पौधों के झुलसने का खतरा पैदा हो गया है। ऐसे में किसान अपनी फसल को बचाने के लिए विशेष इंतजाम कर रहे हैं। कई किसान खेतों में क्रॉप कवर लगा रहे हैं, जबकि कुछ किसान पुराने कपड़े, जालियां और साड़ियों का इस्तेमाल कर पौधों को तेज धूप और लू से बचा रहे हैं।

    विशेषज्ञ किसान विजय यादव के अनुसार, नर्सरी और खुले खेत के तापमान में करीब 15 डिग्री सेल्सियस का अंतर देखा जा रहा है। यही कारण है कि शुरुआती अवस्था में पौधों को अतिरिक्त सुरक्षा देना जरूरी हो गया है। उन्होंने बताया कि जब तक तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास स्थिर नहीं हो जाता, तब तक क्रॉप कवर हटाना जोखिम भरा हो सकता है।

    उद्यानिकी विभाग के अनुसार जिले में करीब 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में पपीता की खेती की गई है। उद्यानिकी उपसंचालक केके गिरवाल ने किसानों को सलाह दी है कि तेज धूप से बचाने के लिए पौधों के चारों ओर घेरा बनाएं और नियमित सिंचाई करते रहें, ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे।

    गर्मी का असर आम जनजीवन पर भी साफ दिखाई दे रहा है। सुबह 11 बजे के बाद से ही सड़कों पर सन्नाटा छाने लगता है और लोग शाम तक घरों में रहने को मजबूर हैं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि राजस्थान और गुजरात की ओर से आ रही शुष्क और गर्म हवाओं के कारण हीट वेव की स्थिति बनी हुई है। अनुमान है कि 20 मई तक इसी तरह भीषण गर्मी और लू का असर जारी रह सकता है।

  • भोजशाला विवाद पर MP हाईकोर्ट की टिप्पणी चर्चा में, नमाज की अनुमति संबंधी मांग खारिज

    भोजशाला विवाद पर MP हाईकोर्ट की टिप्पणी चर्चा में, नमाज की अनुमति संबंधी मांग खारिज


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के भोजशाला को लेकर दशकों से चला आ रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। इंदौर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने हालिया फैसले में भोजशाला को देवी वाग्देवी यानी मां सरस्वती का मंदिर माना है। अदालत ने अपने निर्णय में ऐतिहासिक तथ्यों, पुरातात्विक साक्ष्यों और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की वैज्ञानिक रिपोर्ट को अहम आधार बनाया। फैसले के बाद जहां हिंदू संगठनों में उत्साह का माहौल है, वहीं मुस्लिम पक्ष ने इस पर आपत्ति जताई है।

    करीब 30 वर्षों से भोजशाला विवाद धार्मिक और राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ था। हिंदू पक्ष का दावा रहा कि यह स्थल परमार राजा भोज द्वारा स्थापित मां वाग्देवी का प्राचीन मंदिर और संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र था। दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता रहा। प्रशासन ने वर्षों तक संतुलन बनाए रखने के लिए मंगलवार को हिंदू पूजा और शुक्रवार को मुस्लिम नमाज की व्यवस्था लागू की थी।

    विवाद ने नया मोड़ तब लिया जब वर्ष 2024 में हाईकोर्ट के आदेश पर ASI ने भोजशाला परिसर का 98 दिन तक वैज्ञानिक सर्वे किया। सर्वे के दौरान मिली तस्वीरों और अवशेषों ने पूरे मामले को नई दिशा दे दी। रिपोर्ट में प्राचीन मंदिर स्थापत्य शैली, देवी-देवताओं की आकृतियों वाले स्तंभ, संस्कृत शिलालेख, कमल और हाथी जैसे हिंदू प्रतीक चिन्हों का उल्लेख किया गया। कई स्तंभों पर टूटी मूर्तियों और नक्काशी के प्रमाण भी मिले, जिन्हें हिंदू पक्ष मंदिर के साक्ष्य के रूप में पेश कर रहा है।

    हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ऐतिहासिक साहित्य और पुरातात्विक रिपोर्ट यह दर्शाती है कि विवादित स्थल का संबंध भोजशाला और देवी सरस्वती की आराधना से रहा है। अदालत ने यह भी माना कि यहां हिंदू पूजा की परंपरा पूरी तरह कभी समाप्त नहीं हुई। कोर्ट ने ASI को परिसर का प्रशासन जारी रखने और केंद्र सरकार को प्रबंधन संबंधी निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।

    फैसले के बाद धार में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। संवेदनशील इलाकों में पुलिस और RAF की तैनाती की गई तथा भोजशाला परिसर के बाहर बैरिकेडिंग की गई। हिंदू संगठनों ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे “ऐतिहासिक न्याय” बताया, जबकि मुस्लिम पक्ष ने कहा कि वे कानूनी विकल्पों पर विचार करेंगे।

    यह फैसला केवल एक धार्मिक स्थल का मामला नहीं, बल्कि इतिहास, आस्था और पुरातात्विक साक्ष्यों के बीच लंबे समय से चल रही बहस का महत्वपूर्ण अध्याय बन गया है।

  • भोजशाला मामले में सामने आईं ऐतिहासिक तस्वीरें, हिंदू पक्ष ने बताए मंदिर से जुड़े प्रमाण

    भोजशाला मामले में सामने आईं ऐतिहासिक तस्वीरें, हिंदू पक्ष ने बताए मंदिर से जुड़े प्रमाण


    नई दिल्ली । मध्यप्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर दशकों से चला आ रहा विवाद एक बार फिर राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन गया है। इंदौर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने हालिया फैसले में भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर हिंदू पक्ष के दावों को महत्वपूर्ण आधार दिया है। हिंदू संगठनों का कहना है कि भोजशाला राजा भोज द्वारा स्थापित मां वाग्देवी यानी मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद मानता रहा है।

    यह विवाद 1990 के दशक से लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। पूजा और नमाज के अधिकार को लेकर कई बार तनाव की स्थिति भी बनी। प्रशासन ने हालात को संभालने के लिए अलग-अलग दिनों में पूजा और नमाज की व्यवस्था लागू की थी। मंगलवार को हिंदू पक्ष को पूजा की अनुमति दी जाती थी, जबकि शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष नमाज अदा करता था।

    मामले ने नया मोड़ तब लिया जब वर्ष 2024 में हाईकोर्ट के आदेश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने भोजशाला परिसर का वैज्ञानिक सर्वे कराया। लंबे समय तक चली इस जांच में परिसर से कई ऐसे अवशेष मिले, जिन्हें हिंदू धार्मिक और स्थापत्य परंपरा से जुड़ा बताया गया। रिपोर्ट में देवी-देवताओं की आकृतियां, प्राचीन मूर्तिकला, स्तंभों पर उकेरी गई कलाकृतियां और संस्कृत शिलालेखों का उल्लेख सामने आया।

    हिंदू पक्ष का दावा है कि ये सभी प्रमाण स्पष्ट करते हैं कि भोजशाला मूल रूप से मां वाग्देवी का मंदिर था, जिसे बाद में मस्जिद के रूप में उपयोग किया गया। ASI की रिपोर्ट में परिसर के कई स्तंभों और संरचनाओं को मंदिर वास्तुकला से जुड़ा बताया गया है। यही वजह है कि हाईकोर्ट का फैसला हिंदू पक्ष के लिए बड़ी कानूनी और धार्मिक जीत माना जा रहा है।

    वहीं, मुस्लिम पक्ष ने ASI रिपोर्ट और अदालत में पेश किए गए कई तथ्यों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि भोजशाला लंबे समय से मस्जिद के रूप में उपयोग होती रही है और धार्मिक स्वरूप को लेकर केवल एक पक्ष के दावों के आधार पर निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

    फैसले के बाद धार जिले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रशासन सोशल मीडिया गतिविधियों पर भी नजर बनाए हुए है ताकि किसी प्रकार का तनाव न फैले। संवेदनशील इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

    भोजशाला विवाद केवल धार्मिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक महत्व का विषय बन चुका है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब देशभर में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह मामला और भी बड़े कानूनी और सामाजिक विमर्श का केंद्र बन सकता है।