Category: Madhya Pradesh

  • उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला: लापरवाही से प्रसूता की मौत, अस्पताल को देना होगा मुआवजा

    उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला: लापरवाही से प्रसूता की मौत, अस्पताल को देना होगा मुआवजा


    नई दिल्ली । ग्वालियर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने एक निजी अस्पताल की गंभीर लापरवाही को साबित मानते हुए उस पर आर्थिक दंड लगाया है। मामला न्यू लाइफ लाइन हॉस्पिटल का है, जहां प्रसव के बाद एक महिला की हालत बिगड़ने पर समय पर उचित उपचार नहीं दिया गया, जिससे उसकी मृत्यु हो गई।

    परिजनों के अनुसार महिला को 30 सितंबर 2023 को डिलीवरी के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सिजेरियन डिलीवरी के बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी और ऑक्सीजन स्तर तेजी से गिरकर 80 तक पहुंच गया। इसके बावजूद समय पर न तो उचित ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया और न ही उसे बड़े अस्पताल रेफर किया गया।

    स्थिति गंभीर होने पर मरीज को कमला राजा अस्पताल भेजा गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

    जांच में यह भी सामने आया कि अस्पताल में न तो योग्य विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद थे और न ही वेंटिलेटर, ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम जैसी बुनियादी सुविधाएं थीं। यहां तक कि अस्पताल का रजिस्ट्रेशन और व्यवस्थाएं भी संदिग्ध पाई गईं।

    उपभोक्ता आयोग ने इसे “सेवा में गंभीर कमी” मानते हुए अस्पताल पर कुल ₹3.12 लाख का मुआवजा लगाने का आदेश दिया है। इसमें ₹3 लाख आर्थिक क्षतिपूर्ति, ₹10 हजार मानसिक क्षति और ₹2 हजार कानूनी खर्च शामिल हैं। आदेश के अनुसार यह राशि 45 दिनों के भीतर देनी होगी, अन्यथा 6% वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

    आयोग ने स्पष्ट कहा कि यदि मरीज को समय पर बेहतर अस्पताल रेफर किया जाता तो उसकी जान बचाई जा सकती थी। बिना बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं के अस्पताल चलाना मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ है।

  • ट्रक से छलांग लगाते ही गई जान: होमगार्ड जवान की हाईवे पर दर्दनाक मौत

    ट्रक से छलांग लगाते ही गई जान: होमगार्ड जवान की हाईवे पर दर्दनाक मौत


    नई दिल्ली । ग्वालियर जिले के घाटीगांव क्षेत्र में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां शिवपुरी में पदस्थ 25 वर्षीय होमगार्ड जवान धर्मेन्द्र आदिवासी की चलती पुलिस ट्रक से कूदने के बाद मौत हो गई। यह घटना आगरा-मुंबई नेशनल हाईवे पर सिमरिया मोड़ के पास हुई।

    जानकारी के अनुसार, जवान अपने साथियों के साथ सरकारी कार्य के लिए राइफल जमा करने ग्वालियर आ रहा था। इसी दौरान वह पुलिस के मिनी ट्रक में सवार था। रास्ते में उसके मोबाइल पर घर से एक कॉल आया, जिसके बाद उसका व्यवहार अचानक बदल गया।

    साथी जवानों के मुताबिक, फोन पर लंबी बातचीत के बाद वह तनावग्रस्त और उत्तेजित दिखाई देने लगा। जैसे ही वाहन सिमरिया मोड़ के पास पहुंचा, उसने अचानक चिल्लाते हुए चलती गाड़ी से छलांग लगा दी। सिर के बल गिरने से वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

    साथियों ने तुरंत उसे अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंप दिया।

    पुलिस अब इस मामले की गहन जांच कर रही है और जवान के मोबाइल की कॉल डिटेल्स खंगाली जा रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिरी कॉल में क्या बातचीत हुई थी, जिससे वह मानसिक रूप से विचलित हुआ।

    फिलहाल पुलिस इसे संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत मानकर सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

  • ग्वालियर में बढ़े पेट्रोल-डीजल रेट: लोगों की जेब पर भारी पड़ा असर

    ग्वालियर में बढ़े पेट्रोल-डीजल रेट: लोगों की जेब पर भारी पड़ा असर


    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर अब ग्वालियर में भी साफ दिखाई दे रहा है। तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दामों में करीब ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है, जिसके बाद शहर में पेट्रोल ₹109.74 प्रति लीटर और डीजल ₹94.93 प्रति लीटर तक पहुंच गया है।

    एक दिन पहले तक पेट्रोल ₹106.45 और डीजल ₹91.83 प्रति लीटर बिक रहा था। अचानक हुई इस बढ़ोतरी से आम लोगों के बजट पर सीधा असर पड़ा है। खासकर दैनिक यात्रियों और ट्रांसपोर्ट कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है।

    पेट्रोल पंपों पर इसका असर भी देखने को मिला है। पहले जहां लंबी कतारें लगती थीं, अब वहां भीड़ काफी कम हो गई है। पेट्रोल पंप कर्मचारियों के अनुसार बिक्री में लगभग 40 से 50 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है।

    ग्राहकों का कहना है कि बढ़ती कीमतों के कारण अब वाहन का उपयोग सोच-समझकर करना पड़ेगा। कुछ लोग इलेक्ट्रिक वाहनों को बेहतर विकल्प मान रहे हैं, जबकि कई लोगों ने महंगाई को सीधे आम जनता पर बोझ बताया है।

    विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने से यह बढ़ोतरी हुई है। युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के चलते तेल की कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं, जिसका असर भारत के ईंधन बाजार पर भी पड़ रहा है।

    ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में भी इसका असर दिखने लगा है और आने वाले समय में किराए और वस्तुओं की कीमतों में और बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।

  • इंदौर में रिश्तों को लेकर बढ़े विवाद, पंचायत में सामने आए अहम सामाजिक मुद्दे

    इंदौर में रिश्तों को लेकर बढ़े विवाद, पंचायत में सामने आए अहम सामाजिक मुद्दे


    नई दिल्ली । इंदौर में सिंधी समाज द्वारा शुरू की गई मध्यस्थता पहल लगातार चर्चा में है। समाज की पंचायत ने अब तक 800 से अधिक पारिवारिक और वैवाहिक विवादों को सुलझाया है, जिनमें कई मामले तलाक तक पहुंचने की कगार पर थे। लेकिन बातचीत, काउंसलिंग और आपसी समझ के जरिए कई परिवारों को टूटने से बचा लिया गया।

    एक मामले में एक महिला अपने वैवाहिक जीवन से बेहद असंतुष्ट थी और तलाक चाहती थी। विवाद बढ़ने पर मामला समाज की पंचायत तक पहुंचा, जहां दोनों पक्षों को सुना गया और मेडिकल व काउंसलिंग सहायता भी ली गई। इसके बाद दोनों को साथ रहने के लिए तैयार किया गया।

    पंचायत से जुड़े सदस्यों के अनुसार, अब तक सामने आए कुल मामलों में लगभग 48% विवाद वैवाहिक जीवन से जुड़े हैं। इनमें एक बड़ा हिस्सा निजी और दाम्पत्य जीवन में असंतुष्टि से जुड़ा पाया गया है। इसके अलावा संपत्ति, आर्थिक और पारिवारिक विवाद भी बड़ी संख्या में सामने आए हैं।

    विशेषज्ञों और समाज के डॉक्टरों की मदद से कई मामलों में काउंसलिंग भी कराई जाती है, ताकि समस्याओं को चिकित्सकीय और मानसिक दृष्टिकोण से भी समझा जा सके। पंचायत का दावा है कि हर मामला अलग होता है और उसका समाधान भी व्यक्तिगत परिस्थितियों के अनुसार किया जाता है।

    इसके अलावा समाज ने विवाह योग्य युवाओं का एक सर्वे भी किया है, जिसमें 22 से 29 और 30 से 40 वर्ष के आयु वर्ग में अविवाहित युवक-युवतियों का आंकड़ा भी सामने आया है। यह डेटा सामाजिक बदलाव और विवाह संबंधी प्रवृत्तियों को भी दर्शाता है।

    इस पहल को समाज में परिवारों को जोड़कर रखने की एक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, जो आधुनिक समय में बदलते रिश्तों की जटिलताओं को समझने की दिशा में एक उदाहरण बन रही है।

  • भोजशाला मामले पर हाईकोर्ट का फैसला आज, इंदौर-धार में हाई अलर्ट

    भोजशाला मामले पर हाईकोर्ट का फैसला आज, इंदौर-धार में हाई अलर्ट


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के बहुचर्चित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद पर आज हाईकोर्ट की इंदौर बेंच का अहम फैसला आ सकता है। वर्षों से चल रहे इस संवेदनशील मामले में कोर्ट ने सुनवाई पूरी करने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रखा था, जिसके चलते पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर बढ़ा दिया गया है।

    फैसले को देखते हुए इंदौर और धार जिले में प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। खास बात यह है कि आज शुक्रवार का दिन है और इसी दिन भोजशाला परिसर में जुमे की नमाज अदा की जाती है, जिससे स्थिति की संवेदनशीलता और बढ़ गई है। प्रशासन ने दोनों समुदायों से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह की अफवाहों से दूर रहने की अपील की है।

    धार शहर में करीब 1200 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को 12 लेयर में बांटा गया है, जिसमें रिजर्व पुलिस फोर्स और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) को भी शामिल किया गया है। पुलिस कंट्रोल रूम से लगातार निगरानी की जा रही है और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त बल तैनात है।

    भोजशाला परिसर और आसपास के क्षेत्रों में कलेक्टर और एसपी ने खुद सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण किया है। सोशल मीडिया पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी तरह की भड़काऊ पोस्ट या अफवाह को फैलने से रोका जा सके।

    यह विवाद 2022 में दायर याचिकाओं के बाद और अधिक चर्चा में आया था, जिसमें भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर अदालत में मांगें रखी गई थीं। हिंदू पक्ष ने इसे मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर बताते हुए नियमित पूजा का अधिकार मांगा है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे लंबे समय से उपयोग में रही मस्जिद बताता है।

    भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने भी इस मामले में 98 दिन का वैज्ञानिक सर्वे किया था, जिसकी रिपोर्ट को लेकर दोनों पक्षों में अलग-अलग दावे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पहले कुछ व्यवस्थाओं को लेकर अनुमति दी थी, जिसके बाद यह मामला और संवेदनशील हो गया।

    फिलहाल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था सर्वोपरि है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सभी सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह तैयार हैं।

  • ईंधन हुआ और महंगा: भोपाल-इंदौर में पेट्रोल 109 रुपए पार, MP में नई दरें लागू

    ईंधन हुआ और महंगा: भोपाल-इंदौर में पेट्रोल 109 रुपए पार, MP में नई दरें लागू


    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बाद मध्य प्रदेश में पेट्रोल और डीजल के दाम करीब ₹3 प्रति लीटर बढ़ा दिए गए हैं। नई दरें आज सुबह 6 बजे से लागू हो गई हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं पर खर्च का बोझ बढ़ गया है।

    मध्य प्रदेश में आम जनता को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बाद प्रदेश में पेट्रोल और डीजल के दाम करीब ₹3 प्रति लीटर बढ़ा दिए गए हैं। नई दरें आज सुबह 6 बजे से लागू हो गई हैं, जिससे परिवहन और रोजमर्रा की लागत पर सीधा असर देखने को मिल रहा है।

    राजधानी भोपाल में पेट्रोल का दाम बढ़कर ₹109.71 प्रति लीटर और डीजल ₹94.88 प्रति लीटर हो गया है। वहीं इंदौर में पेट्रोल ₹109.86 प्रति लीटर और डीजल ₹95.06 प्रति लीटर तक पहुंच गया है। इसी तरह उज्जैन, जबलपुर और ग्वालियर जैसे शहरों में भी ईंधन के दाम बढ़े हैं।

    सबसे महंगा पेट्रोल मंडला और पांढुर्णा में दर्ज किया गया है, जहां कीमत ₹111.29 प्रति लीटर तक पहुंच गई है। इसके अलावा कई जिलों में भी पेट्रोल ₹111 के आसपास बिक रहा है, जबकि डीजल की कीमतें भी लगातार बढ़ रही हैं।

    तेल कीमतों में यह उछाल वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल 70 डॉलर से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। इसी दबाव के कारण तेल कंपनियों ने घरेलू स्तर पर कीमतों में संशोधन किया है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह बढ़ोतरी शुरुआती है और अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिति नहीं सुधरी तो आने वाले समय में और इजाफा हो सकता है। हालांकि सरकार और तेल कंपनियां समय-समय पर टैक्स और सब्सिडी के जरिए कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश करती रही हैं।

    देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें लंबे समय से स्थिर थीं, लेकिन वैश्विक घटनाओं के चलते अब इसमें बदलाव देखने को मिल रहा है। इससे ट्रांसपोर्ट, खाद्य सामग्री और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

    प्रधानमंत्री की हालिया अपील में भी पेट्रोलियम उत्पादों के संयमित उपयोग की बात कही गई थी, ताकि आयात पर निर्भरता कम हो और विदेशी मुद्रा की बचत की जा सके।

    कुल मिलाकर ईंधन की बढ़ती कीमतें आम लोगों के बजट पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं और आने वाले दिनों में महंगाई की रफ्तार और तेज होने की आशंका जताई जा रही है।

  • मनमानी बिजली समझौतों पर लगेगी रोक, सरकार ने तय किए नए नियम

    मनमानी बिजली समझौतों पर लगेगी रोक, सरकार ने तय किए नए नियम


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश सरकार ने बिजली क्षेत्र में बड़ा नीति परिवर्तन करते हुए यह निर्णय लिया है कि अब किसी भी नए बिजली खरीद समझौते (Power Purchase Agreement – PPA) या बिजली आपूर्ति समझौते (PSA) को कैबिनेट की मंजूरी के बिना लागू नहीं किया जाएगा। यह फैसला राज्य की ऊर्जा खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और नियंत्रित बनाने के उद्देश्य से लिया गया है।

    राज्य में वर्ष 2003 के बाद बिजली संकट से उबरने के लिए बड़ी संख्या में बिजली उत्पादन कंपनियों के साथ समझौते किए गए थे। इन समझौतों के कारण जहां बिजली आपूर्ति व्यवस्था मजबूत हुई, वहीं कई मामलों में इन अनुबंधों को लेकर विवाद और वित्तीय बोझ की स्थिति भी बनी।

    वर्तमान में प्रदेश में लगभग 1795 बिजली खरीद समझौते (PPA) पहले से मौजूद हैं, जिनकी कुल क्षमता करीब 26,012 मेगावाट बताई जाती है। इन समझौतों के कारण मध्य प्रदेश को अब ऊर्जा सरप्लस राज्य के रूप में देखा जा रहा है।

    सरकार का मानना है कि दीर्घकालिक बिजली समझौते बड़े वित्तीय दायित्व होते हैं, जो लंबे समय तक राज्य की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हैं। इसलिए अब यह जरूरी समझा गया है कि ऐसे सभी नए समझौतों पर शीर्ष स्तर यानी कैबिनेट की मंजूरी ली जाए।

    इसके पीछे एक कारण यह भी है कि ऊर्जा क्षेत्र में सौर, पवन, बायोमास, न्यूक्लियर और बैटरी स्टोरेज जैसी नई तकनीकें तेजी से उभर रही हैं, जिनसे जुड़े अनुबंधों में विशेषज्ञ और वित्तीय मूल्यांकन की आवश्यकता बढ़ गई है।

    अब तक यह निर्णय पॉवर मैनेजमेंट कंपनी के बोर्ड स्तर पर लिया जाता था, लेकिन नई व्यवस्था के तहत पहले ऊर्जा मंत्री की मंजूरी और फिर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट से अंतिम स्वीकृति जरूरी होगी।

    सरकार का दावा है कि यह कदम भविष्य में ऊर्जा खरीद को अधिक संतुलित, पारदर्शी और राज्य हित में बनाएगा।

  • सुरक्षा के कड़े इंतजाम: भोपाल की प्रमुख मस्जिदों पर पुलिस की विशेष निगरानी

    सुरक्षा के कड़े इंतजाम: भोपाल की प्रमुख मस्जिदों पर पुलिस की विशेष निगरानी


    नई दिल्ली । भोपाल में आज जुमे की नमाज को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। शहर के संवेदनशील और अति संवेदनशील इलाकों में सुबह से ही अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। प्रमुख मस्जिदों के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है और पुलिस लगातार निगरानी रख रही है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

    यह कदम हाल ही में सामने आए कुछ घटनाक्रमों और बढ़े हुए तनाव को देखते हुए उठाया गया है। प्रशासन के अनुसार, कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। पुलिस ने साफ किया है कि किसी भी प्रकार की अफवाह या भड़काऊ गतिविधि पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    शहर के विभिन्न समुदायों के धार्मिक नेताओं ने भी शांति बनाए रखने की अपील की है। शहर काजी ने लोगों से संयम रखने और किसी के बहकावे में न आने की बात कही है, जबकि पुलिस कमिश्नर ने भी नागरिकों से शहर में अमन-चैन बनाए रखने का आग्रह किया है।

    प्रमुख मस्जिदों जैसे ताजुल मसाजिद, मोती मस्जिद, जामा मस्जिद, पीरगेट और पुराने भोपाल की अन्य मस्जिदों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस ने बैरिकेडिंग भी की है और भीड़ नियंत्रण के लिए अतिरिक्त बल लगाया गया है।

    नमाज का समय दोपहर के आसपास निर्धारित है, जिसके दौरान पुलिस विशेष रूप से सतर्क रहेगी। प्रशासन का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और शहर में शांति बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

  • पीएम की अपील पर सवाल: 9 BJP नेताओं ने निकाले काफिले, एक पर कार्रवाई से उठा विवाद

    पीएम की अपील पर सवाल: 9 BJP नेताओं ने निकाले काफिले, एक पर कार्रवाई से उठा विवाद


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश में ईंधन के संयमित उपयोग और पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपनाने की अपील के बाद मध्य प्रदेश में सियासी हलचल तेज हो गई है। पीएम ने हाल ही में देशवासियों से कार पूलिंग, मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन के अधिक उपयोग की बात कही थी, ताकि वैश्विक परिस्थितियों में संसाधनों की बचत की जा सके।

    हालांकि, इस अपील के बाद भी राज्य में कई नेताओं के बड़े-बड़े काफिले निकलते नजर आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के अलग-अलग जिलों से ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां दर्जनों से लेकर सैकड़ों वाहनों के काफिले के साथ नेताओं ने शक्ति प्रदर्शन किया।

    कुछ मामलों में पार्टी स्तर पर कार्रवाई भी हुई है। भिंड में किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष को पद से हटा दिया गया, क्योंकि वे लगभग 100 वाहनों के काफिले और बग्घी के साथ कार्यक्रम में पहुंचे थे। वहीं, पाठ्यपुस्तक निगम के अध्यक्ष पर भी कार्रवाई करते हुए उनका अधिकार सीमित कर दिया गया, जब उन्होंने उज्जैन से भोपाल तक करीब 700 वाहनों का काफिला निकाला, जिससे लंबा ट्रैफिक जाम लग गया।

    लेकिन कई अन्य मामलों में अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई है। कुछ विधायकों और मोर्चा पदाधिकारियों पर भी इसी तरह के काफिलों के आरोप लगे हैं, जहां 200 से अधिक गाड़ियों के साथ रैलियां निकाली गईं। इनमें मंदिर दर्शन, स्वागत कार्यक्रम और पार्टी आयोजनों के दौरान शक्ति प्रदर्शन के दृश्य सामने आए हैं।

    वहीं दूसरी ओर कुछ उदाहरण ऐसे भी सामने आए हैं जो अलग संदेश देते हैं, जैसे एक मंत्री द्वारा बस से यात्रा कर आम लोगों के बीच पहुंचना और ईंधन बचत की अपील को समर्थन देना।

    इस पूरे मामले ने राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। विपक्ष का आरोप है कि जहां एक तरफ जनता से संयम की अपील की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ वीआईपी संस्कृति में कोई बदलाव नहीं दिख रहा। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से वायरल हो रहा है और लोग नेताओं के इस दोहरे रवैये पर सवाल उठा रहे हैं।

    अब देखना होगा कि सरकार और पार्टी संगठन इस पर आगे क्या सख्त कदम उठाते हैं, या यह विवाद सिर्फ नोटिस और बयानबाजी तक सीमित रह जाता है।

  • MP: देवास ब्लास्ट में गई 5 की जान, धूल का काम बताकर बिहार से बुलाए गए थे मजदूर

    MP: देवास ब्लास्ट में गई 5 की जान, धूल का काम बताकर बिहार से बुलाए गए थे मजदूर


    देवास।
    आगरा-मुंबई नेशनल हाईवे (Agra-Mumbai National Highway) पर स्थित टोंककला इलाके की एक पटाखा फैक्ट्री (Firecracker factory) गुरुवार सुबह 11 बजे खंडहर में तब्दील हो गई. एक जोरदार धमाके के साथ उठी आग की लपटों ने वहाँ काम कर रहे दर्जनों मजदूरों को अपनी चपेट में ले लिया. हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि फैक्ट्री की छत उड़ गई और घटनास्थल पर मानव अंग बिखरे पड़े मिले।

    शुरुआत में तीन मजदूरों की मौत की खबर आई थी, लेकिन देर रात अमलतास हॉस्पिटल में भर्ती दो और मजदूरों अमर और गुड्डू ने दम तोड़ दिया. दोनों 99% तक झुलस चुके थे. अस्पताल में भर्ती 25 अन्य घायलों का उपचार जारी है, जिनमें से कई की हालत नाजुक बनी हुई है।


    आरोपी पर NSA और 4 के खिलाफ FIR

    जिलाधिकारी ऋतुराज सिंह ने फैक्ट्री संचालक अनिल मालवीय के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए ‘राष्ट्रीय सुरक्षा कानून’ (NSA) लगाया है. पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट के अनुसार, लाइसेंस की शर्तों का घोर उल्लंघन किया गया था. टोंकखुर्द थाना पुलिस ने मामले में कुल 4 आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की है।


    ‘धूल का काम’ बताकर बिहार से लाए गए थे मजदूर

    हादसे में जीवित बचे बिहार के मजदूर नवीन कुमार ने रोंगटे खड़े कर देने वाली आपबीती सुनाई. नवीन ने एक न्यूज एजेंसी को बताया, ”मजदूरों को 14000 रुपये महीने की तनख्वाह पर यह कहकर लाया गया था कि उन्हें केवल धूल से जुड़ा काम करना होगा, लेकिन उन्हें बारूद के साथ 25×25 के छोटे कमरे में झोंक दिया गया।

    नवीन ने धुएं और मलबे के बीच से अपने भाई निरंजन को जलते हुए बाहर निकाला. उन्होंने आरोप लगाया कि फैक्ट्री में आग बुझाने का कोई इंतजाम नहीं था.


    भीषण गर्मी बनी धमाके की वजह?

    मजदूरों का आरोप है कि भीषण गर्मी के बावजूद बारूद वाले कमरे में पानी का छिड़काव नहीं किया गया. गौरतलब है कि देवास समेत पश्चिमी मध्य प्रदेश इस समय ‘हीट ज़ोन’ में है. केंद्रीय संगठन (PESO) और फोरेंसिक टीमें अब इस बात की तकनीकी जांच कर रही हैं कि क्या अत्यधिक तापमान के कारण बारूद में स्वतः स्फोट हुआ।

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मृतकों के परिजनों को 4 लाख रुपये की सहायता और घायलों के मुफ्त इलाज का ऐलान किया है. उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना.


    विपक्ष का हमला

    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने घटनास्थल का दौरा कर सरकार पर ‘बारूद माफिया’ को संरक्षण देने का आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि कृषि गोदामों में अवैध रूप से पटाखे जमा थे और कलेक्टर को निलंबित करने की मांग की।


    लाइसेंस पर सवाल

    जांच में सामने आया कि अनिल मालवीय को दिसंबर 2025 तक के लिए दो लाइसेंस जारी किए गए थे, जिनका हाल ही में 6 मई को नवीनीकरण हुआ था. प्रशासन अब इस बात की जांच कर रहा है कि रिहायशी इलाके के पास इतनी खतरनाक यूनिट को अनुमति कैसे मिली.


    दिल्ली से सीधे इंदौर पहुंचे मुख्यमंत्री

    CM मोहन यादव ने नई दिल्ली से इंदौर पहुंचकर अस्पतालों में इलाज के लिए भर्ती घायलों से भेंट की. मुख्यमंत्री ने सर्वप्रथम एयरपोर्ट से चोइथराम हॉस्पिटल पहुंचकर देवास के हादसे के कारण घायल हुए नागरिकों से मुलाकात की और उनका इलाज कर रहे डॉक्टरों को जरूरी निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने एमवाय अस्पताल में दाखिल घायलों से भी मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य का हालचाल जाना. CM यादव ने सभी घायलों के समुचित उपचार के निर्देश चिकित्सा अधिकारियों को दिए. इस अवसर पर अन्य जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे।

    बता दें कि गुरुवार दोपहर इस हादसे की जानकारी मिलते होते ही सीएम यादव ने देवास जिला प्रशासन को हादसे से प्रभावित नागरिकों की हर संभव सहायता के निर्देश दिए थे. इसके साथ ही CM ने दिवंगत नागरिकों के परिजन को मध्यप्रदेश शासन की ओर से 4-4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता राशि प्रदान करने और घायलों का निःशुल्क इलाज करने का ऐलान किया।