Category: Madhya Pradesh

  • विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर आलोक शर्मा का बयान, विदेशी फंडिंग वाली संस्थाओं की जांच पर दिया जोर

    विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर आलोक शर्मा का बयान, विदेशी फंडिंग वाली संस्थाओं की जांच पर दिया जोर


    भोपाल। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर भोपाल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान बीजेपी सांसद आलोक शर्मा ने देश में काम कर रहे गैर सरकारी संगठनों यानी NGO को मिलने वाली विदेशी आर्थिक मदद को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से होने वाले जनहित के कार्यों का स्वागत किया जाना चाहिए लेकिन विदेशी स्रोतों से मिलने वाली आर्थिक सहायता को लेकर पारदर्शिता भी जरूरी है। उनके मुताबिक किसी संगठन को विदेश से मिलने वाले पैसे का स्रोत क्या है और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए किया जा रहा है इसकी जानकारी स्पष्ट होनी चाहिए। 14 अगस्त को देश में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है और इस दिन 1947 के विभाजन के दौरान प्रभावित लोगों के संघर्ष और पीड़ा को याद किया जाता है।

    आलोक शर्मा ने कहा कि देश में बड़ी संख्या में सामाजिक और गैर सरकारी संस्थाएं शिक्षा स्वास्थ्य राहत और अन्य सामाजिक क्षेत्रों में काम करती हैं। ऐसे संगठनों की भूमिका कई स्तरों पर महत्वपूर्ण हो सकती है। लेकिन जब किसी संस्था को विदेश से आर्थिक मदद मिलती है तो उसके वित्तीय स्रोत और फंड के इस्तेमाल की निगरानी भी जरूरी हो जाती है। उन्होंने इस मुद्दे को राष्ट्रीय हित से जोड़ते हुए कहा कि नियमों का पालन सुनिश्चित होना चाहिए और यदि कोई संस्था निर्धारित नियमों का उल्लंघन करती है तो संबंधित एजेंसियों को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।

    सांसद ने विदेशी फंडिंग के इस्तेमाल को लेकर विशेष रूप से पारदर्शिता पर जोर दिया। उनका कहना था कि किसी भी सामाजिक संगठन को मिलने वाली आर्थिक सहायता का उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए। यदि पैसा किसी विशेष सामाजिक या जनकल्याणकारी काम के लिए प्राप्त हुआ है तो उसका इस्तेमाल उसी उद्देश्य के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देशहित से जुड़े मामलों में किसी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। हालांकि उनके बयान में किसी विशेष NGO पर अनियमितता का आरोप नहीं लगाया गया है। इसलिए इसे विदेशी फंडिंग की सामान्य निगरानी और पारदर्शिता की मांग के तौर पर देखा जाना चाहिए।

    विदेशी आर्थिक सहायता प्राप्त करने वाले संगठनों के लिए भारत में पहले से ही कानूनी और नियामकीय व्यवस्था मौजूद है। विदेशी योगदान से जुड़े मामलों में FCRA यानी Foreign Contribution Regulation Act के तहत नियम लागू होते हैं। इसी व्यवस्था के तहत विदेशी योगदान प्राप्त करने वाले संगठनों से उसके स्रोत और इस्तेमाल से संबंधित जानकारी तथा निर्धारित अनुपालन की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में आलोक शर्मा का बयान इसी व्यापक बहस के बीच सामने आया है कि विदेशी सहायता का इस्तेमाल पूरी पारदर्शिता के साथ और कानून के दायरे में होना चाहिए।

    कार्यक्रम के दौरान आलोक शर्मा ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के महत्व पर भी बात की। उन्होंने 1947 के विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों और विस्थापन का दर्द झेलने वाले परिवारों को याद किया। इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। विभाजन के दौरान बड़े पैमाने पर लोगों को अपने घर और जमीन छोड़कर विस्थापित होना पड़ा था। केंद्र सरकार ने 2021 में 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी।

    आलोक शर्मा भोपाल लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के सांसद हैं और 18वीं लोकसभा के लिए 2024 में निर्वाचित हुए थे। PRS India के अनुसार उनका लोकसभा कार्यकाल जून 2024 से जारी है।

    सांसद के बयान के बाद NGO की विदेशी फंडिंग और उसके नियमन को लेकर चर्चा फिर तेज होने की संभावना है। सामाजिक संस्थाओं के योगदान और विदेशी सहायता के बीच संतुलन बनाते हुए पारदर्शिता सुनिश्चित करना इस बहस का अहम हिस्सा है। सरकार और संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि नियमों का पालन हो और जहां कोई वास्तविक उल्लंघन सामने आए वहां कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाए। वहीं सामाजिक संगठनों के लिए भी जरूरी है कि वे अपने वित्तीय स्रोत और खर्च से जुड़ी जानकारी नियमानुसार स्पष्ट रखें ताकि उनके काम को लेकर जनता का भरोसा कायम रहे।

  • उज्जैन में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने किए महाकालेश्वर के दर्शन, सुख-शांति के लिए की विशेष प्रार्थना

    उज्जैन में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने किए महाकालेश्वर के दर्शन, सुख-शांति के लिए की विशेष प्रार्थना

    मध्य प्रदेश।  विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने शुक्रवार को उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर पहुंचकर भगवान महाकाल के दर्शन किए। उन्होंने मंदिर में विधि-विधान के साथ पूजन-अर्चन किया और मध्य प्रदेश समेत पूरे देश में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना की।

    उज्जैन की धार्मिक पहचान भगवान महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग से जुड़ी हुई है। इसी आस्था के केंद्र में विधानसभा अध्यक्ष के पहुंचने पर मंदिर परिसर में निर्धारित व्यवस्थाओं के अनुसार उनका स्वागत किया गया। मंदिर प्रबंध समिति की ओर से सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल ने उनका स्वागत और सत्कार किया।

    मंदिर पहुंचने के बाद नरेंद्र सिंह तोमर ने भगवान महाकाल के दर्शन किए। उन्होंने पूजा की विभिन्न प्रक्रियाओं में हिस्सा लेते हुए प्रदेश और देशवासियों के कल्याण की कामना की। पूजन के दौरान उन्होंने मध्य प्रदेश में सुख-शांति और समृद्धि बनाए रखने के लिए भगवान महाकाल से प्रार्थना की।

    दर्शन के बाद नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि बाबा महाकाल के दर्शन करने का सौभाग्य उन्हें प्राप्त हुआ है। उन्होंने भगवान से प्रार्थना की कि मध्य प्रदेश और देश में सुख-समृद्धि बनी रहे तथा सभी प्रदेशवासियों का कल्याण हो।

    उन्होंने उज्जैन को आस्था और धार्मिक परंपराओं की महत्वपूर्ण नगरी बताते हुए कहा कि बाबा महाकाल की नगरी में आकर दर्शन करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। मंदिर में दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं में भी उत्साह का माहौल दिखाई दिया।

    नरेंद्र सिंह तोमर का यह दौरा ऐसे समय हुआ जब उज्जैन लगातार धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। महाकालेश्वर मंदिर में देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु नियमित रूप से दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

    विधानसभा अध्यक्ष के मंदिर दौरे को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी सख्त रखी गई थी। मंदिर परिसर और आसपास पुलिस तथा सुरक्षा कर्मचारियों की तैनाती की गई थी। अधिकारियों और कर्मचारियों ने निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत व्यवस्थाओं को संभाला।

    दर्शन और पूजन के दौरान मंदिर की सामान्य व्यवस्थाओं को भी बनाए रखा गया। श्रद्धालुओं की आवाजाही तथा धार्मिक गतिविधियां नियमित रूप से संचालित होती रहीं। मंदिर प्रबंध समिति के अधिकारी और कर्मचारी भी इस दौरान मौजूद रहे।

    पूजन कार्यक्रम पूरा होने के बाद नरेंद्र सिंह तोमर मंदिर परिसर से रवाना हो गए। उनके दौरे के दौरान मुख्य रूप से धार्मिक आस्था और प्रदेश तथा देश की खुशहाली की कामना पर जोर रहा।

    महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के बाद उन्होंने एक बार फिर प्रदेशवासियों के कल्याण और देश में सुख-समृद्धि की कामना दोहराई। उनका यह धार्मिक दौरा उज्जैन की धार्मिक परंपरा और जनप्रतिनिधियों की आस्था से जुड़ा कार्यक्रम रहा।

  • राशन के पैसे के इस्तेमाल पर डिजिटल निगरानी, CBDC आधारित DBT से बदलेगी खाद्य सब्सिडी की व्यवस्था

    राशन के पैसे के इस्तेमाल पर डिजिटल निगरानी, CBDC आधारित DBT से बदलेगी खाद्य सब्सिडी की व्यवस्था


    चंडीगढ़। सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी PDS में खाद्य सब्सिडी की व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को चंडीगढ़ के टैगोर थिएटर में CBDC यानी सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी आधारित डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर व्यवस्था का शुभारंभ किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने की। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी और केंद्रीय राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बंभणिया भी कार्यक्रम में मौजूद रहीं।

    इस नई व्यवस्था को खाद्य सब्सिडी के डिजिटल वितरण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयोग माना जा रहा है। सरकारी योजना के तहत चंडीगढ़ और दादरा एवं नगर हवेली ऐसे पहले केंद्र शासित प्रदेश हैं जहां पात्र लाभार्थियों तक खाद्य सब्सिडी प्रोग्रामेबल CBDC यानी डिजिटल रुपये के रूप में पहुंचाने की व्यवस्था शुरू की जा रही है। इसका मकसद सब्सिडी के वितरण को पारदर्शी और ट्रेसेबल बनाने के साथ यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी सहायता निर्धारित उद्देश्य के लिए ही इस्तेमाल हो।

    CBDC आधारित DBT की सबसे बड़ी खासियत इसका प्रोग्रामेबल होना है। सामान्य बैंक खाते में मिलने वाली नकद राशि का इस्तेमाल लाभार्थी अपनी जरूरत के मुताबिक कर सकता है लेकिन इस व्यवस्था में डिजिटल लाभ को एक निर्धारित उद्देश्य से जोड़ा जा सकता है। खाद्य सब्सिडी के मामले में राशि का इस्तेमाल राशन और जरूरी खाद्य वस्तुओं की खरीद के लिए किया जा सकेगा। इसके लिए अधिकृत या सूचीबद्ध दुकानदारों के माध्यम से डिजिटल भुगतान की व्यवस्था होगी।

    इस व्यवस्था से लाभार्थियों को खाद्य वस्तुओं के चयन में भी अधिक विकल्प मिलने की बात कही गई है। गेहूं और चावल के अलावा दाल या अन्य आवश्यक खाद्य वस्तुओं की खरीद का विकल्प भी उपलब्ध कराया जा सकता है। तकनीकी सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि सब्सिडी की राशि को किसी दूसरे काम में डायवर्ट न किया जा सके। शिवराज सिंह चौहान ने इस पहल को तकनीक और जनकल्याणकारी योजनाओं के बीच बेहतर तालमेल का उदाहरण बताया और इसे विकसित करने वाली विभागीय टीम की सराहना की।

    चंडीगढ़ में शुरू किया गया मॉडल केवल स्थानीय प्रयोग तक सीमित नहीं माना जा रहा है। सरकार इसे भविष्य में अन्य क्षेत्रों में लागू किए जाने वाले मॉडल के रूप में देख रही है। इससे खाद्य सब्सिडी के वितरण में होने वाले लेनदेन का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा और पूरी प्रक्रिया को अधिक ट्रेसेबल बनाया जा सकेगा। इससे सरकारी सहायता के सही लाभार्थी तक पहुंचने और उसके निर्धारित उद्देश्य में इस्तेमाल होने की निगरानी मजबूत होने की उम्मीद है।

    कार्यक्रम के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने किसानों और गरीबों के हितों को सरकार की प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि कृषि नीति और खाद्य सुरक्षा से जुड़े फैसलों में किसान हित और जनहित सर्वोच्च रहेंगे। उन्होंने देश में गेहूं और धान के पर्याप्त भंडार का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत अपनी घरेलू जरूरतें पूरी करने में सक्षम है और जरूरत पड़ने पर खाद्यान्न का निर्यात भी कर सकता है।

    केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को भी गरीब परिवारों के लिए महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा बताया। उनका कहना था कि खाद्य सुरक्षा से परिवारों के खर्च का बोझ कम होता है और बची हुई राशि बच्चों की शिक्षा तथा दूसरी जरूरी जरूरतों पर खर्च की जा सकती है। सरकार का लक्ष्य है कि जरूरतमंद परिवारों तक योजनाओं का लाभ बिना अनावश्यक बाधा के पहुंचे।

    शिवराज सिंह चौहान ने तकनीक आधारित इस पहल को सरकार की उस सोच से जोड़ा जिसमें सरकारी योजनाओं का लाभ कागजों और फाइलों तक सीमित न रहकर सीधे लोगों की जिंदगी में दिखाई देना चाहिए। CBDC आधारित DBT इसी दिशा में एक नया प्रयोग है जिसमें डिजिटल रुपये के जरिए खाद्य सब्सिडी को अधिक उद्देश्यपूर्ण और पारदर्शी तरीके से लाभार्थियों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

  • मुख्यमंत्री कार्यालय में अब हर दिन तय रहेंगे अधिकारी, मंत्रालय और समत्व के लिए जारी हुआ साप्ताहिक रोस्टर

    मुख्यमंत्री कार्यालय में अब हर दिन तय रहेंगे अधिकारी, मंत्रालय और समत्व के लिए जारी हुआ साप्ताहिक रोस्टर


    भोपाल। मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री कार्यालय और मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में अब सप्ताह के सातों दिन अधिकारियों की मौजूदगी और जिम्मेदारियां तय रहेंगी। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से अधिकारियों का साप्ताहिक रोस्टर जारी किया गया है। इसके तहत सोमवार से रविवार तक अलग-अलग अधिकारियों को मंत्रालय और समत्व में जिम्मेदारी सौंपी गई है। अधिकारियों को मुख्यमंत्री के निर्धारित कार्यक्रमों बैठकों और मुलाकातों से जुड़े कार्यों में समन्वय की जिम्मेदारी निभानी होगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के साथ आम नागरिकों से होने वाली मुलाकातों के दौरान भी प्रशासनिक समन्वय सुनिश्चित करना है।

    जारी रोस्टर के अनुसार सोमवार को मंत्रालय में डॉ. सुदाम खाड़े और अरविंद दुबे की ड्यूटी रहेगी। वहीं समत्व में कौशलेंद्र विक्रम सिंह और सुधीर कोचर जिम्मेदारी संभालेंगे। मंगलवार को मंत्रालय में डॉ. सुदाम खाड़े और अरुण परमार मौजूद रहेंगे जबकि समत्व में डॉ. इलेया राजा टी और आदित्य शर्मा को जिम्मेदारी दी गई है। इस तरह सप्ताह की शुरुआत से ही मुख्यमंत्री के सरकारी कार्यक्रमों और निवास कार्यालय से जुड़े कार्यों के लिए अधिकारियों की मौजूदगी सुनिश्चित की गई है।

    बुधवार को मंत्रालय में कौशलेंद्र विक्रम सिंह और सुधीर कोचर की ड्यूटी तय की गई है। इसी दिन समत्व में डॉ. सुदाम खाड़े और अरविंद दुबे जिम्मेदारी संभालेंगे। गुरुवार को मंत्रालय में डॉ. इलेया राजा टी और आदित्य शर्मा मौजूद रहेंगे जबकि समत्व में डॉ. सुदाम खाड़े और अरविंद दुबे की ड्यूटी रहेगी। शुक्रवार को मंत्रालय में कौशलेंद्र विक्रम सिंह और अरुण परमार जिम्मेदारी संभालेंगे। वहीं समत्व में कुमार पुरुषोत्तम और अरुण परमार को तैनात किया गया है।

    शनिवार और रविवार के लिए भी रोस्टर में अलग व्यवस्था की गई है। शनिवार को मंत्रालय में किसी अधिकारी की निर्धारित ड्यूटी नहीं रखी गई है जबकि समत्व में डॉ. इलेया राजा टी और आदित्य शर्मा जिम्मेदारी संभालेंगे। रविवार को भी मंत्रालय में कोई अधिकारी निर्धारित नहीं है। इस दिन समत्व में कौशलेंद्र विक्रम सिंह और सुधीर कोचर जिम्मेदारी संभालेंगे। इससे स्पष्ट है कि सप्ताहांत में मुख्यमंत्री निवास कार्यालय यानी समत्व पर प्रशासनिक समन्वय की व्यवस्था जारी रहेगी।

    रोस्टर में अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल कार्यालय में मौजूद रहने तक सीमित नहीं है। उन्हें मुख्यमंत्री से संबंधित महत्वपूर्ण बैठकों चर्चाओं और कार्यक्रमों में उपस्थित रहकर आवश्यक समन्वय करना होगा। मुख्यमंत्री कार्यालय की कार्यप्रणाली में विभिन्न विभागों और अधिकारियों के बीच तालमेल बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में दिन के हिसाब से जिम्मेदारी तय होने से कार्यक्रमों की तैयारी और उनसे जुड़े प्रशासनिक कार्यों को समय पर पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि रोस्टर में शामिल कोई अधिकारी किसी कारण से अनुपस्थित रहता है तो संबंधित लिंक अधिकारी उसकी जिम्मेदारी संभालेगा। यानी अधिकारी की अनुपस्थिति की स्थिति में भी कामकाज प्रभावित न हो इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था रखी गई है। यह व्यवस्था मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों के दौरान प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    इस साप्ताहिक रोस्टर के जरिए मुख्यमंत्री कार्यालय में कामकाज को अधिक व्यवस्थित करने और जिम्मेदारियों को स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है। खास तौर पर मुख्यमंत्री की बैठकों और आम नागरिकों से मुलाकातों के दौरान अधिकारियों की उपलब्धता सुनिश्चित होने से समन्वय बेहतर होने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री सचिवालय की ओर से पहले भी विभागीय समीक्षा और जनहित से जुड़े मामलों पर समयबद्ध कार्रवाई पर जोर दिया जाता रहा है।

  • MP Board का बड़ा फैसला: माता-पिता दोनों को खो चुके छात्रों की परीक्षा फीस माफ, 2026-27 से मिलेगा लाभ

    MP Board का बड़ा फैसला: माता-पिता दोनों को खो चुके छात्रों की परीक्षा फीस माफ, 2026-27 से मिलेगा लाभ


    मध्य प्रदेशमध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल ने उन विद्यार्थियों के लिए संवेदनशील पहल की है जिन्होंने अपने माता और पिता दोनों को खो दिया है। मंडल के फैसले के अनुसार ऐसे पात्र विद्यार्थियों को अब बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होने के लिए परीक्षा शुल्क और नामांकन शुल्क जमा नहीं करना होगा। यह सुविधा शैक्षणिक सत्र 2026-27 की परीक्षाओं से लागू होगी। इस फैसले का लाभ उन विद्यार्थियों को मिलेगा जो माता-पिता के निधन के बाद किसी रिश्तेदार के सहारे अपनी पढ़ाई जारी रख रहे हैं या शासन द्वारा संचालित अथवा शासन से मान्यता प्राप्त संस्था और अनाथालय में रहकर शिक्षा हासिल कर रहे हैं।

    मंडल का यह निर्णय ऐसे बच्चों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जिनके सामने माता-पिता के निधन के बाद पढ़ाई जारी रखना पहले ही बड़ी चुनौती होती है। कई मामलों में बच्चों की जिम्मेदारी रिश्तेदारों पर आ जाती है जबकि कुछ विद्यार्थी सरकारी या मान्यता प्राप्त संस्थाओं के संरक्षण में शिक्षा पूरी करते हैं। ऐसी स्थिति में स्कूल और बोर्ड की फीस भी उनके लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन सकती है। अब परीक्षा और नामांकन शुल्क से राहत मिलने के बाद इन विद्यार्थियों को बोर्ड परीक्षा की तैयारी पर ज्यादा ध्यान देने का अवसर मिलेगा।

    फीस छूट का लाभ लेने के लिए मंडल ने दस्तावेजों की प्रक्रिया भी निर्धारित की है। परीक्षा फॉर्म भरते समय पात्र विद्यार्थी को माता और पिता दोनों के मृत्यु प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने होंगे। यानी केवल एक अभिभावक की मृत्यु होने की स्थिति में यह विशेष छूट लागू नहीं होगी। मंडल की ओर से तय पात्रता के अनुसार दोनों माता-पिता के निधन का प्रमाण देना जरूरी होगा।

    यदि कोई विद्यार्थी किसी शासन द्वारा संचालित या शासन से मान्यता प्राप्त संस्था में रहकर पढ़ाई कर रहा है तो उसे संस्था की ओर से जारी प्रमाण-पत्र भी देना होगा। इस प्रमाण-पत्र में विद्यार्थी की स्थिति और संबंधित संस्था में उसके आश्रय में रहने की जानकारी स्पष्ट होनी चाहिए। निर्धारित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने पर विद्यार्थी को शुल्क छूट का लाभ नहीं मिल सकेगा। इसलिए स्कूलों और संबंधित संस्थाओं के लिए यह जरूरी होगा कि वे पात्र विद्यार्थियों को परीक्षा फॉर्म भरने से पहले आवश्यक कागजी प्रक्रिया की जानकारी उपलब्ध कराएं।

    मंडल का यह फैसला केवल परीक्षा शुल्क कम करने तक सीमित नहीं है बल्कि इसका उद्देश्य आर्थिक कठिनाइयों के कारण किसी बच्चे की शिक्षा प्रभावित होने से रोकना भी है। माता-पिता दोनों को खो चुके विद्यार्थी कई बार बेहद सीमित संसाधनों में पढ़ाई जारी रखते हैं। ऐसे में बोर्ड परीक्षा में शामिल होने का शुल्क उनके लिए छोटी रकम नहीं होती। फीस माफ होने से उन्हें आर्थिक सहायता के साथ मानसिक राहत भी मिल सकती है।

    मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक यह व्यवस्था सत्र 2026-27 से लागू होगी और पात्र विद्यार्थी मंडल की संबंधित परीक्षाओं में शुल्क छूट का लाभ ले सकेंगे। इस पहल को शिक्षा को अधिक समावेशी बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

    इस फैसले से उन बच्चों को यह भरोसा मिलेगा कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उनकी शिक्षा और परीक्षा का रास्ता आर्थिक परेशानी के कारण नहीं रुकेगा। हालांकि पात्र विद्यार्थियों को समय रहते मृत्यु प्रमाण-पत्र और संस्था से संबंधित जरूरी दस्तावेज तैयार रखने होंगे ताकि परीक्षा फॉर्म भरते समय उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

  • उज्जैन में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ का अनुमान, मांडू में कमरों का टोटा; महेश्वर में लग्जरी रूम का किराया 60 हजार तक

    उज्जैन में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ का अनुमान, मांडू में कमरों का टोटा; महेश्वर में लग्जरी रूम का किराया 60 हजार तक


    मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश में मानसून के साथ पर्यटन का रंग भी गहरा हो गया है। बारिश ने मांडू की पहाड़ियों और ऐतिहासिक इमारतों से लेकर महेश्वर के नर्मदा घाटों तक की खूबसूरती बढ़ा दी है। इसी वजह से वीकेंड पर बड़ी संख्या में पर्यटक इन जगहों का रुख कर रहे हैं। दूसरी तरफ सावन का महीना और धार्मिक आयोजनों ने उज्जैन दतिया और नलखेड़ा जैसे धार्मिक शहरों में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ा दी है। नतीजा यह है कि कई पर्यटन और धार्मिक स्थलों पर होटल और होम स्टे पहले से बुक हो चुके हैं। मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग भी मांडू महेश्वर उज्जैन और दूसरे प्रमुख स्थलों को अपने पर्यटन सर्किट में शामिल करता है।

    सबसे ज्यादा असर मांडू में दिखाई दे रहा है। बारिश के मौसम में मांडू की हरियाली झरने और ऐतिहासिक स्मारक पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। 14 से 16 अगस्त तक यहां कई होटल पूरी तरह बुक बताए जा रहे हैं और नो रूम जैसी स्थिति बन गई है। मांडू में सरकारी और निजी होटलों के साथ धर्मशालाओं में भी ठहरने की सुविधा है। सामान्य कमरों से लेकर बेहतर सुविधाओं वाले कमरों तक किराये में काफी अंतर है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यहां कमरा करीब 500 रुपए से शुरू होकर 10 हजार रुपए तक पहुंच सकता है। बारिश के कारण वीकेंड पर मांग बढ़ने से एडवांस बुकिंग कराने वालों को ज्यादा आसानी हो रही है।

    मांडू सिर्फ प्राकृतिक खूबसूरती के लिए ही नहीं बल्कि अपने ऐतिहासिक वैभव के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां जहाज महल रानी रूपमती महल बाज बहादुर महल अशरफी महल और होशंग शाह का मकबरा जैसे प्रमुख स्थल हैं। बारिश में इन स्मारकों के आसपास का नजारा और भी आकर्षक हो जाता है। यही वजह है कि अगस्त के इस दौर में पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है।

    नर्मदा किनारे बसे महेश्वर की तस्वीर भी कुछ ऐसी ही है लेकिन यहां ठहरने के विकल्प अपेक्षाकृत ज्यादा हैं। महेश्वर में होटल होम स्टे रिजॉर्ट धर्मशाला और पर्यटन निगम के ठहरने के विकल्प मौजूद हैं। यहां सामान्य कमरों का किराया करीब 1200 रुपए से शुरू बताया जा रहा है जबकि हेरिटेज और लग्जरी प्रॉपर्टीज में रॉयल रूम की कीमत 60 हजार रुपए तक पहुंच सकती है। मध्य प्रदेश पर्यटन की आधिकारिक सामग्री में भी महेश्वर के लिए Narmada Retreat जैसे ठहरने के विकल्प सूचीबद्ध हैं।

    महेश्वर आने वाले पर्यटक अक्सर एक ही यात्रा में ओंकारेश्वर मांडू और उज्जैन को भी शामिल करते हैं। अहिल्या बाई होलकर की विरासत होलकर किला नर्मदा के घाट और धार्मिक स्थल यहां के प्रमुख आकर्षण हैं। ऐसे में वीकेंड पर पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ अच्छे कमरों की मांग भी बढ़ जाती है।

    उज्जैन में मामला पर्यटन से ज्यादा धार्मिक भीड़ का है। सावन के दौरान महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती है और सोमवार को भीड़ और ज्यादा रहने की संभावना रहती है। हाल के यात्रियों के अनुभवों में भी सावन के दौरान सोमवार और वीकेंड को सबसे ज्यादा भीड़ से बचने की सलाह दी गई है।

    इसी तरह आगर मालवा के नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर में शनिवार और रविवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। यहां होटल और ठहरने के दूसरे विकल्प पहले से बुक होने लगे हैं। दतिया में मां पीतांबरा पीठ के कारण वीकेंड पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है और उपलब्ध जानकारी के मुताबिक बड़ी संख्या में कमरे पहले ही बुक हो चुके हैं।

    ओरछा में भी राम राजा सरकार के मंदिर के कारण धार्मिक पर्यटन लगातार बना रहता है। यहां छोटे बड़े होटल और होम स्टे उपलब्ध हैं। वहीं खजुराहो में अगस्त के दौरान पर्यटन सीजन अपेक्षाकृत कमजोर रहने के बावजूद वीकेंड पर पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है। बड़े होटलों में किराये की रेंज काफी ऊंची है और फाइव स्टार प्रॉपर्टीज में कमरे 30 से 60 हजार रुपए तक पहुंच सकते हैं।

    ऐसे में अगर इस वीकेंड मध्य प्रदेश के किसी पर्यटन या धार्मिक स्थल पर जाने का प्लान है तो सबसे जरूरी सलाह यही है कि होटल की बुकिंग पहले कर लें। खासकर मांडू और उज्जैन जैसे स्थानों पर मौके पर कमरा मिलने की गारंटी नहीं मानी जा सकती। बारिश का मौसम पर्यटन के लिए बेहद खूबसूरत है लेकिन बढ़ती भीड़ के बीच बेहतर यात्रा के लिए ठहरने और आने जाने की व्यवस्था पहले से तय करना ज्यादा समझदारी होगी।

  • MP में 24 घंटे खुलेंगे बाजार लेकिन 4 दिन की नौकरी का दावा कितना सही? नए कानून के 4 बड़े सवालों का पूरा सच

    MP में 24 घंटे खुलेंगे बाजार लेकिन 4 दिन की नौकरी का दावा कितना सही? नए कानून के 4 बड़े सवालों का पूरा सच


    मध्य प्रदेशमध्य प्रदेश में कार्यस्थल और कारोबार से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। विधानसभा में पारित मध्य प्रदेश कार्यस्थल सशक्तिकरण संहिता 2026 का मकसद कारोबार के संचालन को आसान बनाना और राज्य में नई तरह की नाइट इकॉनमी को बढ़ावा देना बताया गया है। कानून को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे भी तेजी से वायरल हो रहे हैं। इनमें दुकानें 24 घंटे खुलने के साथ कर्मचारियों के लिए चार दिन की नौकरी और एक दिन में 12 घंटे काम करने जैसी बातें कही जा रही हैं। लेकिन इन दावों को समझने के लिए प्रतिष्ठान के संचालन और कर्मचारी के काम के नियमों को अलग अलग देखना जरूरी है। विधानसभा में पेश किए गए विधेयक में कारोबार के संचालन से जुड़ी पाबंदियों को आसान बनाने का प्रावधान रखा गया था।

    सबसे पहला सवाल यही है कि क्या अब मध्य प्रदेश में दुकानें और बाजार 24 घंटे खुले रह सकेंगे। नए कानून का मूल प्रावधान प्रतिष्ठानों के कामकाज के घंटों पर पहले जैसी सामान्य पाबंदी को हटाने से जुड़ा है। इसका मतलब यह है कि दुकान मॉल होटल रेस्टोरेंट और दूसरे पात्र प्रतिष्ठान जरूरत और कारोबारी मॉडल के मुताबिक रात में भी खुले रह सकते हैं। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि हर दुकान को अनिवार्य रूप से 24 घंटे खुला रखना होगा। कारोबारियों को संचालन का विकल्प मिलेगा और सरकार सार्वजनिक व्यवस्था कर्मचारी कल्याण या कुछ विशेष श्रेणियों के लिए अलग नियम बना सकती है। खासतौर पर शराब जैसे कारोबारों को सामान्य दुकानों की तरह नहीं देखा जा सकता।

    अब सबसे ज्यादा चर्चा चार दिन की नौकरी को लेकर है। यहां वायरल दावे को सावधानी से समझना जरूरी है। कानून में कर्मचारी के लिए अनिवार्य चार दिन का वर्क वीक लागू नहीं किया गया है। कर्मचारी से एक सप्ताह में निर्धारित 48 घंटे से ज्यादा काम नहीं कराया जा सकता। लेकिन व्यवस्था में यह लचीलापन रखा गया है कि कर्मचारी की सहमति से साप्ताहिक काम के घंटे कम दिनों में पूरे किए जा सकते हैं। उदाहरण के तौर पर कोई कर्मचारी अपनी इच्छा से चार दिन 12 घंटे काम करके 48 घंटे पूरे कर सकता है। लेकिन यह सामान्य या अनिवार्य व्यवस्था नहीं है। नियोक्ता किसी कर्मचारी को उसकी इच्छा के खिलाफ चार दिन में 48 घंटे काम करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। विधेयक की विधानसभा चर्चा में भी चार दिन में 48 घंटे काम करने की संभावना का उल्लेख किया गया था।

    यानी 12 घंटे काम करने वाली बात भी आधी जानकारी के कारण भ्रम पैदा कर रही है। 12 घंटे की सीमा को हर कर्मचारी की रोजाना अनिवार्य ड्यूटी समझना गलत होगा। व्यवस्था का उद्देश्य कर्मचारी को कुछ परिस्थितियों में अपनी सहमति से काम के घंटे अलग तरह से व्यवस्थित करने की सुविधा देना है। अगर तय साप्ताहिक सीमा से ज्यादा काम कराया जाता है तो ओवरटाइम से जुड़े प्रावधान लागू होंगे।

    दूसरा बड़ा सवाल रात में बाजार खुलने से जुड़ा है। अगर कोई दुकान रातभर खुलती है तो इसका मतलब यह नहीं है कि पुलिस या प्रशासन के अधिकार खत्म हो जाएंगे। कानून व्यवस्था की समस्या हो या आग और सुरक्षा का खतरा हो या किसी दूसरे कानून का उल्लंघन हो रहा हो तो संबंधित विभाग कार्रवाई कर सकते हैं। 24 घंटे कारोबार की अनुमति केवल संचालन के समय से जुड़ी सुविधा है। यह किसी कारोबारी को दूसरे कानूनों से छूट नहीं देती।

    सरकार इस बदलाव के जरिए रात की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना चाहती है। बाजार देर रात तक चलने से होटल रेस्टोरेंट कैब डिलीवरी सुरक्षा पार्किंग और दूसरी सेवाओं में कारोबार बढ़ने की संभावना है। इंदौर जैसे शहरों में सराफा और 56 दुकान क्षेत्र की देर रात तक चलने वाली कारोबारी संस्कृति को इसके उदाहरण के तौर पर देखा जाता है। हालांकि केवल बाजार खोलने की अनुमति से रोजगार अपने आप नहीं बढ़ेगा। रात में ग्राहक और पर्याप्त कारोबारी गतिविधि होने पर ही इसका वास्तविक आर्थिक फायदा सामने आएगा। सरकार ने इस कानून को श्रम नियमों को सरल बनाने और कारोबार में अनावश्यक बाधाएं कम करने की दिशा में भी जोड़ा है।

    महिलाओं की नाइट शिफ्ट को लेकर भी नए प्रावधान महत्वपूर्ण हैं। महिला कर्मचारी की इच्छा के खिलाफ उसे रात की पाली में काम करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। यदि महिला अपनी सहमति से नाइट शिफ्ट करती है तो नियोक्ता पर सुरक्षा और परिवहन जैसे इंतजाम की जिम्मेदारी होगी। यानी रात में काम करने की अनुमति के साथ सुरक्षित कार्यस्थल और आने जाने की व्यवस्था भी जरूरी होगी।

    कुल मिलाकर नए कानून का सीधा मतलब यह नहीं है कि हर दुकान अनिवार्य रूप से 24 घंटे खुलेगी या हर कर्मचारी को चार दिन में 48 घंटे काम करना पड़ेगा। असली बदलाव यह है कि कारोबारियों को संचालन के समय में ज्यादा लचीलापन मिलेगा जबकि कर्मचारियों के साप्ताहिक काम के घंटे और सुरक्षा से जुड़े प्रावधान बने रहेंगे। इसलिए सोशल मीडिया पर चल रहे 24 घंटे बाजार और 4 दिन की नौकरी वाले दावे को एक साथ जोड़कर देखना सही नहीं है।

  • 5 किलो सोने की लूट या कुछ और? रतलाम में व्यापारी की कहानी पर पुलिस को संदेह, दोस्त के पास से 300 ग्राम से ज्यादा सोना बरामद

    5 किलो सोने की लूट या कुछ और? रतलाम में व्यापारी की कहानी पर पुलिस को संदेह, दोस्त के पास से 300 ग्राम से ज्यादा सोना बरामद


    रतलाम रतलाम में सराफा व्यापारी से करीब 5 किलो सोने के गहने लूटने के मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ ही कहानी में नया मोड़ आ गया है। व्यापारी अर्पित चौरड़िया ने पुलिस को शिकायत देकर बताया था कि बस में सफर के दौरान दो बदमाश उसका बैग छीनकर फरार हो गए। व्यापारी के मुताबिक बैग में करीब 7.5 करोड़ रुपए कीमत के सोने के गहने और 3 लाख रुपए नकद थे। शुरुआती शिकायत के बाद पुलिस ने लूट की घटना मानकर बदमाशों की तलाश शुरू की थी लेकिन जांच के दौरान सामने आए कुछ तथ्यों ने पुलिस का शक व्यापारी की ओर भी मोड़ दिया है।

    पुलिस की जांच में सामने आया कि कथित वारदात के बाद व्यापारी ने अपने दोस्त विक्की अग्रवाल को बुलाया था। बताया जा रहा है कि व्यापारी ने उसे एक बैग सौंपा जिसमें करीब 300 से 350 ग्राम सोने के बिस्किट और आभूषण थे। बरामद किए गए इस सोने की कीमत करीब 50 लाख रुपए बताई जा रही है। खास बात यह है कि शिकायत के समय व्यापारी ने पुलिस को इस सोने के बारे में जानकारी नहीं दी थी। पुलिस ने मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर दोस्त तक पहुंचकर उसके पास से सोना बरामद किया।

    अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर व्यापारी के पास मौजूद सोना लुट गया था तो घटना के बाद उसके दोस्त के पास करीब 300 से 350 ग्राम सोना कैसे पहुंचा। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि व्यापारी ने दोस्त को सोना किस स्थिति में सौंपा था और शिकायत दर्ज कराने से पहले उसने किन लोगों से संपर्क किया था। इसी वजह से पुलिस पूरे घटनाक्रम को अलग अलग एंगल से खंगाल रही है।

    व्यापारी ने अपनी शिकायत में बताया था कि वह कारोबार के सिलसिले में बड़नगर गया था और रात करीब 8.15 बजे बस से रतलाम के लिए रवाना हुआ। उसके मुताबिक बड़नगर से कुछ संदिग्ध लोग भी बस में सवार हुए और अलग अलग सीटों पर बैठ गए। रात करीब 9.15 बजे बस रेनमऊ फंटे के आसपास पहुंची। इसी दौरान ड्राइवर के पास बैठे एक व्यक्ति ने बस रुकवाई और व्यापारी के पीछे बैठे दो लोगों ने उसका बैग छीन लिया। इसके बाद आरोपी बस से उतरकर बाइक सवार साथियों के साथ फरार हो गए।

    घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे थे। पुलिस ने डॉग स्क्वॉड की मदद से आसपास के इलाके में तलाश की और बस के रूट के साथ संभावित सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले। शुरुआती जानकारी में पांच संदिग्धों के बस में सवार होने की बात सामने आई थी। अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या वास्तव में बस में मौजूद बदमाशों ने व्यापारी का बैग छीना था या वारदात की कहानी में कोई और कड़ी छिपी हुई है।

    जांच में यह भी सामने आया है कि व्यापारी ने बड़नगर में करीब 10 कारोबारियों के साथ सोने के सौदे किए थे। अलग अलग कारोबारियों को कुछ ग्राम सोना और आभूषण बेचने के बाद वह रतलाम लौट रहा था। पुलिस अब इन सभी लेनदेन और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि व्यापारी के पास वास्तव में कितनी मात्रा में सोना था।

    फिलहाल पुलिस ने व्यापारी के दोस्त से बरामद सोना अपने कब्जे में ले लिया है और व्यापारी तथा उसके दोस्त से पूछताछ जारी है। साथ ही पुलिस लूट की शिकायत में बताए गए सोने की वास्तविक मात्रा का मिलान बिलों और दूसरे दस्तावेजों से कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि कथित लूट में शामिल बदमाश कौन थे और अगर लूट हुई तो वे किस रास्ते से भागे। फिलहाल करोड़ों रुपए की इस कथित लूट में पुलिस की जांच का सबसे अहम सवाल यही है कि वास्तव में कितना सोना लूटा गया और व्यापारी ने पुलिस को पूरी जानकारी क्यों नहीं दी।

  • देशभक्ति या लापरवाही? नर्मदा की तेज धार में बिना लाइफ जैकेट नाव पर निकले विधायक, वीडियो चर्चा में

    देशभक्ति या लापरवाही? नर्मदा की तेज धार में बिना लाइफ जैकेट नाव पर निकले विधायक, वीडियो चर्चा में


    इंदौर। मध्य प्रदेश में स्वतंत्रता दिवस से पहले तिरंगा यात्राओं और राजनीतिक गतिविधियों के बीच कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिन्होंने नेताओं और अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रतलाम में तिरंगा यात्रा के दौरान महापौर कलेक्टर और दूसरे जनप्रतिनिधि तथा अधिकारी हाथों में तिरंगा लेकर करीब डेढ़ किलोमीटर तक पैदल चले। देशभक्ति के इस आयोजन में लोगों की मौजूदगी भी रही लेकिन चर्चा उस समय शुरू हुई जब पैदल चल रहे नेताओं और अधिकारियों के पीछे उनके खाली सरकारी वाहन भी चलते नजर आए। इन वाहनों में ड्राइवर के अलावा कोई सवार नहीं था। ऐसे में सवाल उठने लगा कि जब संबंधित अधिकारी और जनप्रतिनिधि पैदल यात्रा में शामिल थे तो उनके खाली वाहनों को साथ चलाने की क्या जरूरत थी। इससे पेट्रोल और डीजल की खपत को लेकर भी सवाल उठे। यह मामला इसलिए भी चर्चा में आया क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से समय समय पर ईंधन बचाने और ऊर्जा की खपत कम करने की अपील की जाती रही है।

    दूसरी तस्वीर महेश्वर से सामने आई जहां तिरंगा यात्रा के दौरान भाजपा विधायक राजकुमार मेव और टीआई समेत कई नेता तथा अधिकारी नाव में सवार दिखाई दिए। मामला इसलिए ज्यादा गंभीर माना गया क्योंकि इस दौरान नर्मदा नदी उफान पर थी और बारिश के मौसम में नदी का बहाव सामान्य दिनों की तुलना में काफी तेज रहता है। इसके बावजूद नाव में बैठे लोगों ने कथित तौर पर लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी। इस दृश्य के सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था और नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े हुए। आम लोगों को नदी और जलाशयों के आसपास सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है लेकिन जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की ओर से ही सुरक्षा उपकरणों की अनदेखी का आरोप लगे तो सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि पूरे घटनाक्रम में संबंधित प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर क्या निर्देश थे यह अलग जांच का विषय हो सकता है।

    इधर मध्य प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के संभावित उज्जैन दौरे को लेकर भी बयानबाजी शुरू हो गई है। राहुल गांधी सितंबर में मध्य प्रदेश के उज्जैन आने वाले हैं ऐसी चर्चा के बीच प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने उन्हें पहले झारखंड के रांची जाने की सलाह दी है। सारंग ने दिल्ली में हुए प्रदर्शन में राहुल गांधी की मौजूदगी का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि रांची में प्रदर्शन कर रहे छात्र छात्राओं के खिलाफ कार्रवाई के दौरान वे वहां क्यों नहीं पहुंचे। इसी बयान के दौरान मंत्री ने राहुल गांधी को रांची जाने का ऑफर दिया और यहां तक कहा कि वे उनकी दिल्ली से रांची की टिकट भी करा देंगे। हालांकि राहुल गांधी के मध्य प्रदेश दौरे की अंतिम तारीख अभी तय नहीं हुई है। ऐसे में मंत्री का टिकट वाला बयान फिलहाल राजनीतिक तंज के तौर पर ही देखा जा रहा है।

    राजनीतिक बयानबाजी के बीच मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की ई-अटेंडेंस भी परेशानी का कारण बनी। स्वतंत्रता दिवस से दो दिन पहले बड़ी संख्या में शिक्षक स्कूलों में ड्यूटी पूरी करने के बाद आउट-पंच लगाने के लिए परेशान होते रहे। ई-अटेंडेंस पोर्टल में तकनीकी समस्या के कारण शिक्षक समय पर अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कर पा रहे थे। शिक्षकों की चिंता इस बात को लेकर थी कि अगर आउट-पंच नहीं हुआ तो उनकी उपस्थिति प्रभावित हो सकती है और वेतन कटौती का खतरा पैदा हो सकता है। नियमों के अनुसार शिक्षकों को स्कूल के निर्धारित दायरे में रहकर ही ई-अटेंडेंस प्रक्रिया पूरी करनी होती है।

    देर शाम तकनीकी समस्या दूर होने के बाद विभाग की ओर से शिक्षकों को राहत दी गई और उन्हें जहां वे मौजूद थे वहीं से अटेंडेंस लगाने की अनुमति दी गई। हालांकि शिक्षकों के लिए ई-अटेंडेंस की तकनीकी दिक्कत कोई नई समस्या नहीं है। प्रदेश के कई ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में नेटवर्क की परेशानी के कारण भी शिक्षकों को बार बार मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सवाल केवल तकनीकी व्यवस्था का नहीं बल्कि ऐसी प्रणाली तैयार करने का है जो कर्मचारियों के लिए सुविधा बने परेशानी नहीं।

    कुल मिलाकर स्वतंत्रता दिवस से पहले मध्य प्रदेश में सामने आए इन घटनाक्रमों ने राजनीति प्रशासन और सरकारी व्यवस्था से जुड़े कई सवालों को एक साथ चर्चा में ला दिया है। कहीं ईंधन बचाने की जरूरत पर सवाल है तो कहीं नदी में सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर चिंता है। वहीं राजनीतिक बयानबाजी और ई-अटेंडेंस की तकनीकी समस्या ने भी अलग बहस छेड़ दी है।

  • मध्य प्रदेश में बारिश ने फिर बढ़ाई चिंता, पूर्वी हिस्से में तेज बारिश की चेतावनी; सतना में सड़क पर चढ़ा नदी का पानी

    मध्य प्रदेश में बारिश ने फिर बढ़ाई चिंता, पूर्वी हिस्से में तेज बारिश की चेतावनी; सतना में सड़क पर चढ़ा नदी का पानी


    मध्य प्रदेशमध्य प्रदेश में शुक्रवार को बारिश का एक और दौर शुरू हो गया है और प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदला हुआ नजर आ रहा है। पूर्वी मध्य प्रदेश में सक्रिय मजबूत मानसूनी सिस्टम के कारण जबलपुर रीवा शहडोल और सागर संभाग के कई इलाकों में तेज बारिश की संभावना बनी हुई है। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक प्रदेश के 12 जिलों में भारी बारिश हो सकती है और कुछ स्थानों पर 24 घंटे के दौरान करीब 4 इंच या उससे अधिक पानी गिरने की संभावना है। आने वाले दिनों में भी बारिश का यह सिलसिला जारी रहने के आसार हैं।

    जिन जिलों के लिए भारी बारिश का अलर्ट बताया गया है उनमें सागर नर्मदापुरम नरसिंहपुर बालाघाट मंडला डिंडौरी अनूपपुर शहडोल कटनी मऊगंज सीधी और सिंगरौली शामिल हैं। इसके अलावा भोपाल इंदौर उज्जैन ग्वालियर रीवा और सतना समेत कई जिलों में भी कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग के मुताबिक पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश की गतिविधियां ज्यादा प्रभावी रह सकती हैं जबकि प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी मानसून सक्रिय बना रहेगा।

    भारी बारिश का असर कई इलाकों में दिखाई देने लगा है। खरगोन जिले के गोगांवा क्षेत्र में लगातार बारिश के बाद साटक जलाशय पूरी क्षमता से भर गया और ओवरफ्लो हो गया। करीब 18.38 मिलियन क्यूबिक मीटर क्षमता वाला यह जलाशय स्पिलवे के ऊपर से बह रहा है। लंबे अंतराल के बाद जलाशय के इस तरह भरने से आसपास के इलाकों में भी लोगों की नजर जलस्तर पर बनी हुई है। साटक जलाशय इससे पहले भी बारिश के मजबूत दौर के दौरान ओवरफ्लो हो चुका है।

    सतना जिले में भी लगातार रुक रुककर बारिश हो रही है। खासतौर पर तराई क्षेत्र में पहाड़ी इलाकों से तेजी से पानी नीचे आने के कारण हालात प्रभावित हुए हैं। धारकुंडी आश्रम के पास झरना तेज बहाव के साथ बह रहा है और पानी आश्रम परिसर तक पहुंच गया है। कोटर नगर परिषद कार्यालय परिसर और आसपास की दुकानों में भी पानी भरने की स्थिति सामने आई है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के वार्ड में पानी पहुंचने के बाद प्रसूताओं को जिला अस्पताल रेफर करना पड़ा। वहीं बिरसिंहपुर सेमरिया मार्ग पर मऊ नदी का पानी पुल के ऊपर से बहने की जानकारी सामने आई है।

    मौसम में बदलाव की बड़ी वजह बंगाल की खाड़ी में बना सिस्टम भी माना जा रहा है। उपलब्ध मौसम रिपोर्टों के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव क्षेत्र आगे बढ़कर डिप्रेशन में तब्दील हुआ है और इसके प्रभाव से मानसून ट्रफ सक्रिय रहने की संभावना है। इसके चलते मध्य प्रदेश सहित मध्य भारत के कई हिस्सों में आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

    प्रदेश में बारिश का आंकड़ा भी लगातार बढ़ रहा है हालांकि कई हिस्से अभी सामान्य बारिश से पीछे चल रहे हैं। ऐसे में यह नया मानसूनी दौर उन जिलों के लिए राहत लेकर आ सकता है जहां बारिश की कमी बनी हुई है। दूसरी ओर जिन क्षेत्रों में पहले से पर्याप्त बारिश हो चुकी है वहां तेज बारिश से जलभराव नदी नालों के जलस्तर में वृद्धि और यातायात प्रभावित होने जैसी स्थिति बन सकती है।

    मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखते हुए नदी नालों और जलाशयों के आसपास रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। तेज बारिश के दौरान पुलिया या रपटे पर पानी बहने की स्थिति में उसे पार करने से बचना चाहिए। प्रशासन की ओर से भी संवेदनशील क्षेत्रों में जलस्तर और बारिश की स्थिति पर नजर रखना जरूरी होगा। फिलहाल एमपी में मानसून का यह नया दौर आने वाले कुछ दिनों तक मौसम को सक्रिय बनाए रख सकता है।