Category: Madhya Pradesh

  • भोपाल के मास्टर प्लान पर किसानों और व्यापारियों ने उठाए सवाल, कृषि जमीन का लैंडयूज बदलने और 45 मीटर सड़क के प्रस्ताव का विरोध

    भोपाल के मास्टर प्लान पर किसानों और व्यापारियों ने उठाए सवाल, कृषि जमीन का लैंडयूज बदलने और 45 मीटर सड़क के प्रस्ताव का विरोध


    भोपाल । भोपाल मास्टर प्लान 2047 के ड्राफ्ट को लेकर विरोध और आपत्तियों का सिलसिला तेज हो गया है। अब तक योजना के प्रस्तावों पर 5000 से ज्यादा आपत्तियां दर्ज की जा चुकी हैं। इन आपत्तियों की छंटनी करने में करीब 15 दिन लगने का अनुमान है। इसके बाद संबंधित विभाग की ओर से सुनवाई का शेड्यूल जारी किया जाएगा। बड़े तालाब के कैचमेंट एरिया में बदलाव कृषि भूमि के उपयोग में परिवर्तन अवैध निर्माण और चौड़ी सड़कों के प्रस्ताव को लेकर लोगों ने सबसे ज्यादा सवाल उठाए हैं। शनिवार रात 12 बजे तक ऑनलाइन माध्यम से दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की समयसीमा बताई गई है। अंतिम समय में आवेदन करने वाले लोगों को तकनीकी परेशानी या समयसीमा को लेकर असमंजस का सामना न करना पड़े इसे लेकर भी मांग उठाई गई है।

    शाहपुरा स्थित टाउन एंड कंट्री प्लानिंग यानी टीएंडसीपी कार्यालय में पिछले दो दिनों से आपत्तियां दर्ज कराने के लिए लोगों की आवाजाही बढ़ी हुई है। शुक्रवार को भारतीय किसान संघ के साथ व्यापारी और स्थानीय रहवासी भी कार्यालय पहुंचे। लोगों ने मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में प्रस्तावित बदलावों पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। कई लोगों की चिंता निर्माण और जमीन के उपयोग से जुड़े प्रावधानों को लेकर है। किसानों का कहना है कि उनकी कृषि भूमि का उपयोग खेती के लिए सुरक्षित रहना चाहिए जबकि कुछ स्थानीय रहवासी प्रस्तावित चौड़ी सड़कों और अन्य नियोजन प्रावधानों पर सवाल उठा रहे हैं।

    मास्टर प्लान पर आपत्ति और सुझाव देने की समयसीमा को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है। क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक ने संयुक्त संचालक टीएंडसीपी को आवेदन भेजकर अंतिम तारीख और समय को लेकर स्पष्ट जानकारी देने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि विभिन्न संस्थाएं और नागरिक समूह योजना पर आपत्तियां और सुझाव जुटा रहे हैं। ऐसे में अंतिम दिनों में कार्यालय बंद रहने या ऑनलाइन पोर्टल में तकनीकी परेशानी आने से किसी नागरिक की आपत्ति दर्ज होने से छूट सकती है। आवेदन में काउंटर चालू रखने स्टाफ की उपलब्धता और संपर्क अधिकारी की जानकारी वेबसाइट तथा नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित करने की मांग भी की गई है। साथ ही आवेदन की रसीद पर तारीख समय आवक नंबर और जमा किए गए दस्तावेजों का विवरण दर्ज करने का सुझाव दिया गया है।

    क्रेडाई की ओर से भेजे गए आवेदन में मध्य प्रदेश राजपत्र में 25 सितंबर को प्रकाशित ड्राफ्ट के संदर्भ में आपत्ति और सुझाव देने की समयसीमा का उल्लेख किया गया है। आवेदन के मुताबिक प्रकाशन का दिन छोड़कर 30 दिनों की गणना करने पर अंतिम दिन 25 अक्टूबर पड़ता है। इसी कारण विभाग से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि काउंटर ईमेल और ऑनलाइन पोर्टल के जरिए आवेदन किस तारीख और समय तक स्वीकार किए जाएंगे। अंतिम समयसीमा को लेकर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना इसलिए जरूरी है ताकि लोगों को आवेदन जमा करने में परेशानी न हो।

    मास्टर प्लान को लेकर किसानों की सबसे बड़ी चिंता बड़े तालाब के आसपास की कृषि भूमि और उसके भू-उपयोग में प्रस्तावित बदलाव हैं। किसानों का आरोप है कि नए ड्राफ्ट में कुछ कृषि भूमि को दूसरी श्रेणियों में शामिल करने का प्रस्ताव है जिससे भविष्य में खेती और आजीविका प्रभावित हो सकती है। किसान प्रतिनिधि अनोखी सिंह पटेल के मुताबिक खेती ही कई परिवारों की आय का प्रमुख साधन है। इसी वजह से किसान भोजताल संरक्षण जोन एक यानी BIZ-1 और जोन दो यानी BIZ-2 को हटाने तथा कृषि भूमि का लैंडयूज कृषि ही बनाए रखने की मांग कर रहे हैं।

    इसके अलावा बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में बदलाव को लेकर भी आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। स्थानीय लोगों और किसानों का कहना है कि तालाब के जलग्रहण क्षेत्र और आसपास की जमीन के उपयोग से जुड़े फैसलों पर पर्यावरणीय प्रभावों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। वहीं मिसरोद के रहवासियों की ओर से 45 मीटर चौड़ी सड़क के प्रस्ताव को हटाने की मांग भी उठाई गई है। किसानों और स्थानीय नागरिकों की आपत्तियों में कृषि भूमि को रिवरफ्रंट फॉरेस्ट ग्रीन बेल्ट और अन्य आरक्षित श्रेणियों में शामिल किए जाने जैसे मुद्दे भी सामने आए हैं।

    अब विभाग के सामने हजारों आपत्तियों की जांच और उनकी श्रेणीवार छंटनी करने की चुनौती है। छंटनी पूरी होने के बाद सुनवाई का कार्यक्रम जारी किया जाएगा। इसके बाद संबंधित पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिलने की उम्मीद है। भोपाल मास्टर प्लान 2047 शहर के भविष्य के विकास और भूमि उपयोग से जुड़ा महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इसलिए किसानों व्यापारियों और रहवासियों की आपत्तियों पर सुनवाई और प्रस्तावों के प्रभावों का आकलन आने वाले समय में इस पूरी प्रक्रिया का अहम हिस्सा रहेगा।

  • केरवा डैम के FTL और ग्रीन बेल्ट में निर्माण पर उठे सवाल, कहीं रिटेनिंग वॉल तो कहीं पानी में मिट्टी का भराव; NGT को सौंपी जाएगी रिपोर्ट

    केरवा डैम के FTL और ग्रीन बेल्ट में निर्माण पर उठे सवाल, कहीं रिटेनिंग वॉल तो कहीं पानी में मिट्टी का भराव; NGT को सौंपी जाएगी रिपोर्ट


    भोपाल । भोपाल के केरवा डैम के आसपास अतिक्रमण और निर्माण से जुड़े मामलों को लेकर किए गए निरीक्षण में 19 स्थानों पर कथित अतिक्रमण दर्ज किए गए हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी के आदेश के बाद गठित टीम ने डैम के फुल टैंक लेवल यानी FTL बफर जोन और ग्रीन बेल्ट का निरीक्षण किया। रिपोर्ट में निजी निर्माणों के साथ मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम और जल संसाधन विभाग के निर्माणों का भी उल्लेख किया गया है। सूची में पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के बेटे अजय सिंह और पूर्व विधायक जितेंद्र डागा के परिवार से जुड़े निर्माणों का भी जिक्र है। निरीक्षण दल की रिपोर्ट एनजीटी में पेश की जानी है। फिलहाल रिपोर्ट में दर्ज विवरण और आरोपों के आधार पर मामलों की जांच तथा संबंधित निर्माणों की स्थिति महत्वपूर्ण होगी।

    निरीक्षण के दौरान मेंडोरा बरखेड़ी बाज्याफ्त कुशलपुरा मुल्ला जी की टेकरी फतेहपुर डोगरा महुआखेड़ा और मीटूखेड़ी सहित अलग-अलग क्षेत्रों में निर्माण और जमीन के भराव से जुड़ी गतिविधियां दर्ज की गईं। टीम ने GPS लोकेशन और समय के साथ तस्वीरें लीं। निरीक्षण में जलाशय के किनारे मिट्टी और पत्थरों का भराव पानी की ओर जाती रिटेनिंग वॉल सीमेंट कंक्रीट के पिलर और निर्माणाधीन परिसरों जैसी स्थितियां सामने आने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार कुछ जगहों पर डैम की सीमा दर्शाने वाली मुनारें गायब मिलीं जबकि एक स्थान पर सीमा चिह्न खिसकाए जाने की बात दर्ज की गई है। इससे FTL की वास्तविक सीमा निर्धारित करने को लेकर सवाल उठते हैं।

    रिपोर्ट में मेंडोरा गांव में सबसे अधिक 12 अतिक्रमण दर्ज होने की बात कही गई है। इनमें मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम का पिकनिक रेस्टोरेंट और जल संसाधन विभाग का केरवा रेस्ट हाउस भी शामिल बताए गए हैं। पर्यटन निगम के परिसर में ग्रीन बेल्ट और बॉटनिकल गार्डन के लिए आरक्षित भूमि पर निर्माण होने का उल्लेख है। वहीं जल संसाधन विभाग के रेस्ट हाउस के पास FTL क्षेत्र में सीमेंट कंक्रीट के पिलर बनाए जाने और बड़ी संख्या में पेड़ काटे जाने की बात भी निरीक्षण विवरण में दर्ज है। इन मामलों में संबंधित विभागों की स्थिति और निर्माणों की अनुमति से जुड़े दस्तावेज अहम होंगे।

    निजी निर्माणों के संबंध में रिपोर्ट में अजय सिंह से जुड़ी भूमि पर FTL क्षेत्र में रिटेनिंग वॉल और बॉटनिकल गार्डन के लिए आरक्षित जमीन पर पक्के कमरे होने का उल्लेख किया गया है। पूर्व विधायक जितेंद्र डागा की पत्नी निशा डागा से जुड़ी जमीन पर लगभग 0.93 हेक्टेयर क्षेत्र में मिट्टी और पत्थरों का भराव तथा निर्माण कार्य जारी होने की बात कही गई है। इसके अलावा कई अन्य लोगों के नाम भी सूची में शामिल हैं जिन पर FTL में रिटेनिंग वॉल बनाने या ग्रीन बेल्ट में निर्माण करने के आरोप दर्ज हैं। बरखेड़ी बाज्याफ्त क्षेत्र में प्रकाश झा से जुड़े PJP एस्टेट के संबंध में भी आरक्षित भूमि पर रिटेनिंग वॉल और RCC सड़कें होने का उल्लेख है। इन सभी विवरणों को निरीक्षण रिपोर्ट में दर्ज आरोपों के रूप में देखा जाना चाहिए।

    रिपोर्ट में कुशलपुरा क्षेत्र में डैम की सीमा बताने वाली मुनार खिसकाए जाने और FTL के भीतर बाउंड्री बनाकर पानी के बहाव को प्रभावित करने का आरोप भी दर्ज है। कुछ स्थानों पर निजी तालाब और व्यावसायिक गतिविधियां होने की बात कही गई है। मुल्ला जी की टेकरी में FTL के भीतर कई परतों वाली रिटेनिंग वॉल और बफर जोन या ग्रीन बेल्ट में बंगले का निर्माण दर्ज किया गया है। फतेहपुर डोगरा में जमीन के भराव और RCC दीवार के निर्माण का उल्लेख है। निरीक्षण दल ने इन गतिविधियों को तस्वीरों और ड्रोन के माध्यम से दर्ज करने की बात कही है।

    महुआखेड़ा में भी अतिक्रमण का मामला सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार एनजीटी ने 4 फरवरी 2026 के आदेश में वहां का कोपरा यानी मिट्टी और पत्थरों का भराव हटाने का निर्देश दिया था लेकिन निरीक्षण के समय यह मौजूद मिला। वहीं मीटूखेड़ी में केरवा नदी पर बिना अनुमति और वैज्ञानिक अध्ययन के सीमेंट कंक्रीट का पुल बनाए जाने की बात दर्ज की गई है। रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि इससे नदी के प्राकृतिक बहाव पर असर पड़ सकता है और बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है।

    वेटलैंड संरक्षण एवं प्रबंधन नियम 2017 का नियम 4 आर्द्रभूमि में अतिक्रमण भराव और स्थायी निर्माण जैसी गतिविधियों पर प्रतिबंध से संबंधित है। जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम 1974 भी जल स्रोतों को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को नियंत्रित करने का कानूनी आधार प्रदान करता है। अब निरीक्षण रिपोर्ट एनजीटी के सामने रखे जाने के बाद संबंधित निर्माणों की अनुमति नियमों के पालन और कथित अतिक्रमणों पर आगे की कार्रवाई को लेकर निर्णय महत्वपूर्ण होगा।

  • भोपाल निगम परिषद में ऑडिट आपत्तियों पर घमासान, एमआईसी सदस्य और नेता प्रतिपक्ष आमने-सामने; बदहाल सड़कों का मुद्दा एजेंडे से गायब

    भोपाल निगम परिषद में ऑडिट आपत्तियों पर घमासान, एमआईसी सदस्य और नेता प्रतिपक्ष आमने-सामने; बदहाल सड़कों का मुद्दा एजेंडे से गायब


    भोपाल । भोपाल नगर निगम परिषद की बैठक में ऑडिट आपत्तियों के बावजूद भुगतान किए जाने का मुद्दा गरमा गया। प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने वित्तीय मामलों पर सवाल उठाते हुए वर्ष 2024-25 और 2026-27 की ऑडिट आपत्तियों के बावजूद किए गए भुगतानों का हिसाब मांगा। इस पर मेयर इन काउंसिल यानी एमआईसी सदस्य जितेंद्र शुक्ला ने जवाब देते हुए कहा कि भुगतान नियमानुसार किए गए हैं और कोई दस्तावेज नहीं छिपाया गया है। सवाल-जवाब के दौरान दोनों के बीच हल्की नोकझोंक भी हुई। बैठक में बजट और विकास कार्यों से जुड़े कई प्रस्ताव चर्चा के लिए रखे जाने हैं लेकिन शहर की बदहाल सड़कों और गड्ढों जैसे जनहित के मुद्दे एजेंडे में शामिल नहीं होने पर विपक्ष ने नाराजगी जताई।

    नगर निगम परिषद का सम्मेलन आईएसबीटी स्थित मीटिंग हॉल में शुरू हुआ। बैठक के प्रारंभ में परिषद अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने सरकार द्वारा नियुक्त 12 एल्डरमैन और नए निगम कमिश्नर रामप्रकाश अहिरवार का परिचय कराया। अहिरवार ने तीन दिन पहले ही पदभार संभाला है। बैठक में महापौर मालती राय भी मौजूद रहीं। कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने छुट्टी के दिन परिषद का सम्मेलन बुलाए जाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने निगम एक्ट का हवाला देते हुए कहा कि छुट्टी के दिन सदन का संचालन नहीं किया जा सकता। इस पर अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने उन्हें समझाइश दी जिसके बाद सदन की कार्यवाही आगे बढ़ी।

    प्रश्नकाल के दौरान ऑडिट आपत्तियों से जुड़े भुगतानों का मामला उठा। नेता प्रतिपक्ष ने संबंधित वित्तीय मामलों पर सवाल करते हुए जवाब मांगा तो एमआईसी सदस्य जितेंद्र शुक्ला ने कहा कि सभी भुगतान नियमों के अनुसार किए गए हैं और किसी तरह की जानकारी छिपाई नहीं गई है। इसी दौरान वर्ष 2026-27 के प्रावधानिक बजट में प्रस्तावित राशि से तैयार योजना के आय-व्यय पर भी सवाल किया गया। शुक्ला ने प्रश्न में बताई गई 108 करोड़ रुपये की राशि पर आपत्ति जताते हुए कहा कि नगर निगम का प्रावधानिक बजट 3938.45 करोड़ रुपये का है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल हाउसिंग फॉर ऑल योजना का बजट ही लगभग 300 से 400 करोड़ रुपये के बीच है। इसके बाद उन्होंने बजट से संबंधित जानकारी देना शुरू किया।

    बैठक के एजेंडे में नगर निगम के नए मुख्यालय के सर्विस ब्लॉक को 10 साल के लिए देने और इसके बाद अगले 10 साल के लिए नवीनीकरण से जुड़ा प्रस्ताव शामिल है। इसके अलावा गर्ल्स कॉलेज के पास स्थित सोन चिरैया हॉकर्स कॉर्नर के संचालन और अमृत 2.0 योजना के लिए 493.49 करोड़ रुपये का ऋण लेने के प्रस्ताव पर भी चर्चा होनी है। न्यू मार्केट मल्टीलेवल पार्किंग के हॉल को किराए पर देने का प्रस्ताव भी परिषद के सामने रखा गया है। इन प्रस्तावों पर चर्चा के दौरान पार्षदों की ओर से सवाल उठाए जाने की संभावना है।

    दूसरी ओर विपक्ष ने शहर की बदहाल सड़कों और बारिश के बाद खराब हुई अंदरूनी सड़कों का मुद्दा एजेंडे में शामिल नहीं होने पर नाराजगी जताई। विपक्ष का कहना है कि सड़कें और गड्ढे आम लोगों की रोजमर्रा की परेशानी से जुड़े मुद्दे हैं और इन पर परिषद में चर्चा होनी चाहिए। पार्षदों की ओर से शहर में वैध और अवैध होर्डिंग्स सहित अन्य नागरिक समस्याओं पर भी सवाल उठाए जाने की संभावना है। ऐसे में बैठक में वित्तीय प्रस्तावों के साथ शहर की बुनियादी सुविधाओं और जनता से जुड़े मुद्दों पर होने वाली चर्चा भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

  • MP को बड़ी सौगात… रेल मंत्री आज देवेंद्रनगर–चुरहट ट्रेन को दिखाएंगे हरी झंडी… आजादी के बाद पहली बार रेल नेटवर्क से जुड़ेगा सीधी जिला

    MP को बड़ी सौगात… रेल मंत्री आज देवेंद्रनगर–चुरहट ट्रेन को दिखाएंगे हरी झंडी… आजादी के बाद पहली बार रेल नेटवर्क से जुड़ेगा सीधी जिला


    सतना/रीवा।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के विंध्य क्षेत्र में रेल कनेक्टिविटी के विस्तार की दिशा में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है. मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Railway Minister Ashwini Vaishnaw) शनिवार को सतना-देवेंद्रनगर और रीवा-चुरहट नए रेलखंडों का वर्चुअली उद्घाटन करेंगे. इस अहम अवसर पर देवेंद्रनगर-चुरहट ट्रेन सेवा को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा. इस परियोजना के शुरू होने से विंध्य क्षेत्र के विकास को अभूतपूर्व गति मिलने की उम्मीद है।

    इस पूरे रेल विस्तार में सबसे बड़ी उपलब्धि सीधी जिले का रेल नेटवर्क से जुड़ना है. आजादी के बाद यह पहला अवसर है जब सीधी जिला सीधे तौर पर देश के रेल मानचित्र और मुख्य रेल संपर्क से जुड़ रहा है।

    इस ऐतिहासिक बदलाव से जिले के नागरिकों, विद्यार्थियों, नौकरीपेशा कर्मचारियों, व्यापारियों और मरीजों को आवागमन में बहुत बड़ी राहत मिलेगी. अब क्षेत्रीय नागरिकों को बड़े शहरों और प्रमुख बाजारों तक पहुंचने के लिए सुगम और सुरक्षित परिवहन विकल्प उपलब्ध होंगे, जिससे सड़क मार्ग पर निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी।

    सतना-देवेंद्रनगर रेलखंड: इस नवनिर्मित रेलखंड की कुल लंबाई 53 किलोमीटर है. रीवा-चुरहट रेलखंड: इस रेलखंड की कुल लंबाई 65 किलोमीटर है। इन दोनों रेलखंडों के शुरू होने से सतना, देवेंद्रनगर, रीवा, चुरहट और आसपास के तमाम क्षेत्रों के बीच सीधा और तीव्र संपर्क स्थापित हो जाएगा, जिससे यात्रियों के समय और यात्रा लागत दोनों में भारी कमी आएगी।


    उद्योग, व्यापार, पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

    विशेषज्ञों का मानना है कि रेल नेटवर्क का यह चौमुखी विस्तार विंध्य क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक कायाकल्प में मील का पत्थर साबित होगा बेहतर रेल परिवहन से उद्योगों की स्थापना, व्यापारिक गतिविधियों के विस्तार, कृषि उत्पादों की आवाजाही और स्थानीय बाजारों को नया प्रोत्साहन मिलेगा. क्षेत्र के खनिज व कृषि उत्पादों को देश के अन्य हिस्सों तक भेजना आसान होगा।


    पर्यटन और आतिथ्य सत्कार

    इस क्षेत्र के ऐतिहासिक, धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों तक पर्यटकों की पहुंच सुगम होगी. इससे होटल, परिवहन, खान-पान और हस्तशिल्प क्षेत्रों को बढ़ावा मिलेगा. निर्माण, रखरखाव, व्यापार और सेवा क्षेत्र में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार के नए द्वार खुलेंगे, जिससे स्थानीय युवाओं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिलेगा।

  • MP में रात के तापमान में गिरावट शुरू, अमरकंटक सबसे ठंडा, अगले 4 दिन आंधी-बारिश का अलर्ट नहीं

    MP में रात के तापमान में गिरावट शुरू, अमरकंटक सबसे ठंडा, अगले 4 दिन आंधी-बारिश का अलर्ट नहीं


    भोपाल। मध्य प्रदेश में पिछले आठ दिनों से पश्चिमी हिस्से में जारी बारिश का दौर अब थम गया है। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक प्रदेश में कहीं भी आंधी या बारिश का अलर्ट जारी नहीं किया है। हालांकि, रात के तापमान में गिरावट का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। बीती रात अमरकंटक में न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस सीजन में प्रदेश का सबसे कम तापमान रहा।

    मौसम विभाग के मुताबिक, आने वाले दिनों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान में गिरावट हो सकती है। रात के तापमान में 2 से 3 डिग्री तक की कमी आने के आसार हैं। इससे सुबह और रात के समय ठंडक बढ़ेगी।

    अमरकंटक में 13 डिग्री, कई शहरों में गिरा पारा

    अनूपपुर जिले के अमरकंटक में न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। वहीं, कटनी के करौंदी में 13.1 डिग्री, दमोह में 14.5 डिग्री और शाजापुर में 15.6 डिग्री तापमान दर्ज हुआ। नीमच के मरुखेड़ा, रीवा और उमरिया में न्यूनतम तापमान 15.8 डिग्री सेल्सियस रहा।

    दिन के तापमान में भी 1 से 2 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है। खजुराहो, रतलाम, गुना, खरगोन, भोपाल, खंडवा, छतरपुर, ग्वालियर, बालाघाट, राजगढ़, उज्जैन, मंडला और सागर में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा।

    शुक्रवार को कहीं बादल, कहीं हुई बूंदाबांदी

    शुक्रवार को प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का मिला-जुला असर देखने को मिला। चक्रवाती परिसंचरण (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) का प्रभाव इंदौर और उज्जैन संभाग में अधिक रहा। भोपाल और नर्मदापुरम संभाग के कुछ जिलों में तेज बारिश हुई, जबकि कुछ स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी दर्ज की गई। वहीं, जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग में धूप खिली रही।

    इंदौर संभाग के आलीराजपुर, धार, बड़वानी, खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा और बैतूल में भी मौसम में बदलाव देखा गया। इन क्षेत्रों में कहीं बादल छाए रहे तो कहीं हल्की बूंदाबांदी हुई।

    अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में फिर हो सकती है बारिश

    मौसम विभाग के अनुसार, अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश की संभावना है। नए मौसम सिस्टम का असर खासतौर पर प्रदेश के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में दिखाई दे सकता है। इस दौरान रात के तापमान में भी गिरावट होने के आसार हैं। ऐसे में महीने के आखिरी सप्ताह में बारिश के साथ ठंडक का असर भी बढ़ सकता है।

  • इंदौर में जुटेगी सेमीकंडक्टर उद्योग की ताकत, CM मोहन यादव के शुभारंभ से निवेश और तकनीक पर टिकी नजरें

    इंदौर में जुटेगी सेमीकंडक्टर उद्योग की ताकत, CM मोहन यादव के शुभारंभ से निवेश और तकनीक पर टिकी नजरें


    इंदौर । मध्य प्रदेश को सेमीकंडक्टर उद्योग के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में इंदौर में महत्वपूर्ण पहल की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 23 अक्टूबर को ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में मध्य प्रदेश सेमीकंडक्टर समिट 2026 का शुभारंभ किया। दो दिवसीय इस आयोजन का उद्देश्य प्रदेश में सेमीकंडक्टर उद्योग को बढ़ावा देना और देश विदेश की कंपनियों को निवेश के लिए आकर्षित करना है। सरकार की कोशिश है कि मध्य प्रदेश को तकनीक आधारित उद्योगों के बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया जाए और प्रदेश में नए औद्योगिक अवसरों के साथ रोजगार के रास्ते भी खोले जाएं।

    समिट में मध्य प्रदेश को सेमीकंडक्टर हब बनाने की संभावनाओं पर चर्चा की जा रही है। इस आयोजन में देश और विदेश की कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ निवेशक उद्योग विशेषज्ञ शिक्षाविद और स्टार्टअप से जुड़े लोग भाग ले रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 50 से अधिक कंपनियां इस समिट में शामिल हैं। कंपनियां अपनी तकनीक उत्पाद और समाधान प्रदर्शित कर रही हैं। आयोजन के दौरान निवेश की संभावनाओं के साथ तकनीकी सहयोग और औद्योगिक विकास को लेकर भी विचार विमर्श किया जा रहा है। सरकार को उम्मीद है कि इस तरह के आयोजन से प्रदेश में नई परियोजनाओं के लिए अनुकूल माहौल तैयार होगा।

    सेमीकंडक्टर आधुनिक तकनीक की रीढ़ माने जाते हैं। मोबाइल फोन कंप्यूटर इलेक्ट्रिक वाहन औद्योगिक मशीनों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े उपकरणों में इनका व्यापक इस्तेमाल होता है। डिजिटल तकनीक के तेजी से विस्तार के कारण दुनिया भर में चिप निर्माण और उससे जुड़ी तकनीकों की मांग बढ़ रही है। ऐसे में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश मध्य प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। इससे विनिर्माण क्षेत्र को मजबूती मिलने के साथ तकनीकी सेवाओं और सहायक उद्योगों के विस्तार की संभावनाएं भी बन सकती हैं।

    प्रदेश सरकार ने निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए मध्य प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति 2025 को मंजूरी दी है। इस नीति में पात्र निवेशकों के लिए प्रोत्साहन की व्यवस्था की गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसमें 25 प्रतिशत सब्सिडी और दस वर्षों तक दो रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली देने का प्रावधान शामिल है। सरकार की मंशा है कि ऐसी सुविधाओं के माध्यम से निवेशकों को आकर्षित किया जाए और प्रदेश में सेमीकंडक्टर से जुड़ी परियोजनाओं की स्थापना को गति मिले।

    इस क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं के बीच पारस सेमीकंडक्टर्स की ओर से सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग सुविधा स्थापित करने के लिए 6200 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश से जुड़ा समझौता भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि परियोजना निर्धारित योजना के अनुसार आगे बढ़ती है तो इससे प्रदेश में सेमीकंडक्टर उद्योग की आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि प्रस्तावित निवेश और वास्तविक परियोजना के क्रियान्वयन के बीच अंतर होता है इसलिए इसकी प्रगति पर नजर रखना भी जरूरी होगा।

    समिट में उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने तथा युवाओं को आधुनिक तकनीक के लिए प्रशिक्षित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। चिप डिजाइन निर्माण और टेस्टिंग जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल करने वाले युवाओं के लिए भविष्य में नए अवसर पैदा हो सकते हैं। अब इस आयोजन की सफलता इस बात से तय होगी कि कितने निवेश प्रस्ताव वास्तविक परियोजनाओं में बदलते हैं और कितने रोजगार के अवसर तैयार होते हैं। इंदौर में आयोजित यह समिट मध्य प्रदेश को सेमीकंडक्टर उद्योग में आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

  • सीहोर में अवैध शराबखोरी पर पुलिस की दबिश, तीन ढाबों पर जांच में शराब पीते मिले लोग..

    सीहोर में अवैध शराबखोरी पर पुलिस की दबिश, तीन ढाबों पर जांच में शराब पीते मिले लोग..


    मध्य प्रदेश: के सीहोर में ढाबों पर कथित तौर पर अवैध रूप से शराब पिलाए जाने की शिकायतों के बाद कोतवाली पुलिस ने कार्रवाई की है। पुलिस टीम ने शहर के तीन ढाबों पर अचानक दबिश देकर वहां की गतिविधियों की जांच की। इस दौरान कुछ लोग शराब का सेवन करते हुए मिले। पुलिस ने मौके से नियमों के उल्लंघन से जुड़े साक्ष्य जुटाए हैं और संबंधित ढाबा संचालकों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस कार्रवाई का नेतृत्व कोतवाली थाना प्रभारी गिरीश दुबे ने किया।

    पुलिस को पिछले कुछ समय से शिकायतें मिल रही थीं कि शहर के कुछ ढाबों पर नियमों के विरुद्ध ग्राहकों को शराब परोसी जा रही है। शिकायतों में विशेष रूप से रात के समय और बंद कमरों में शराब पिलाए जाने की बात कही गई थी। इसके अलावा, ऐसे स्थानों पर असामाजिक तत्वों के जमावड़े की आशंका भी जताई गई थी। इन सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच की और संबंधित स्थानों पर कार्रवाई की योजना बनाई।

    योजना के तहत कोतवाली पुलिस की टीम ने शहर के तीन प्रमुख ढाबों पर औचक दबिश दी। अचानक पहुंची पुलिस टीम ने वहां मौजूद लोगों और गतिविधियों की पड़ताल की। जांच के दौरान कुछ लोग शराब का सेवन करते पाए गए। पुलिस ने मौके पर मौजूद परिस्थितियों का निरीक्षण किया और कथित अनियमितताओं से संबंधित साक्ष्य एकत्र किए। कार्रवाई का उद्देश्य शिकायतों की वास्तविकता की जांच करना और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कदम उठाना था।

    पुलिस अब संबंधित ढाबा संचालकों के खिलाफ आबकारी अधिनियम और अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि तीनों ढाबों में से प्रत्येक पर किस तरह का उल्लंघन पाया गया। इसी तरह, कितने लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है या किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है, इसकी भी पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर तय होगी।

    कोतवाली थाना प्रभारी गिरीश दुबे ने स्पष्ट किया कि सीहोर जिले और आसपास के क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अभियान जारी रखने की बात कही। पुलिस के अनुसार, इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

    ढाबों पर रात के समय शराब परोसे जाने से संबंधित शिकायतों को देखते हुए पुलिस की यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों में शिकायतों की जांच और कानूनी प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई आवश्यक है। फिलहाल, तीन ढाबों पर हुई दबिश के बाद संचालकों के खिलाफ प्रक्रिया शुरू की गई है। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों से नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है या नहीं। पुलिस ने संकेत दिया है कि अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

  • BHEL के शीर्ष पद पर यतींद्र मोहन की दावेदारी, CMD बनने की दौड़ में शामिल, फरवरी में होगा बड़ा बदलाव

    BHEL के शीर्ष पद पर यतींद्र मोहन की दावेदारी, CMD बनने की दौड़ में शामिल, फरवरी में होगा बड़ा बदलाव


    भोपाल। भारत की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की इंजीनियरिंग कंपनी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड यानी BHEL में शीर्ष नेतृत्व को लेकर हलचल तेज हो गई है। कंपनी के कार्यकारी निदेशक यतींद्र मोहन चेयरमैन-सह-प्रबंध निदेशक यानी CMD पद की दौड़ में शामिल हैं। यह महत्वपूर्ण पद फरवरी 2027 में खाली होने वाला है। ऐसे में कंपनी के अगले प्रमुख को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। यतींद्र मोहन की दावेदारी को BHEL के भावी नेतृत्व के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि उनके चयन और नियुक्ति को लेकर अंतिम निर्णय की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।

    BHEL देश की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की इंजीनियरिंग और विनिर्माण कंपनियों में शामिल है। कंपनी बिजली उत्पादन से जुड़े उपकरणों के निर्माण के साथ औद्योगिक और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। देश की ऊर्जा जरूरतों और औद्योगिक विकास में BHEL का योगदान लंबे समय से रहा है। ऐसे में कंपनी के CMD का पद केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी तक सीमित नहीं है बल्कि इसके साथ रणनीतिक फैसलों और भविष्य की कारोबारी दिशा तय करने की बड़ी जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है।

    यतींद्र मोहन फिलहाल कंपनी में कार्यकारी निदेशक के पद पर कार्यरत हैं। CMD पद की दौड़ में उनका शामिल होना कंपनी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया को लेकर अहम घटनाक्रम है। फरवरी 2027 में मौजूदा पद रिक्त होने की संभावना के बीच नए प्रमुख के चयन की प्रक्रिया पर नजरें टिकी हैं। इस पद पर नियुक्त होने वाले अधिकारी को कंपनी के संचालन और विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लेने होंगे। इसमें उत्पादन क्षमता को मजबूत करना और परियोजनाओं को समय पर पूरा करना जैसी प्राथमिकताएं शामिल हो सकती हैं।

    बदलते औद्योगिक परिदृश्य में BHEL के सामने नई तकनीकों को अपनाने और प्रतिस्पर्धा के बीच अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखने की चुनौती भी है। बिजली क्षेत्र में बदलती जरूरतों के साथ पारंपरिक ऊर्जा परियोजनाओं के अलावा आधुनिक तकनीक और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े क्षेत्रों में भी कंपनियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती जा रही है। ऐसे माहौल में BHEL के भावी प्रमुख से कंपनी की क्षमताओं का बेहतर इस्तेमाल करने और नए अवसरों के अनुरूप रणनीति बनाने की अपेक्षा होगी।

    CMD कंपनी का सर्वोच्च कार्यकारी पद होता है। इस पद पर नियुक्त अधिकारी को व्यावसायिक प्राथमिकताओं के निर्धारण से लेकर प्रशासनिक समन्वय और महत्वपूर्ण परियोजनाओं की निगरानी तक कई जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी होने के कारण BHEL के फैसलों का असर औद्योगिक विकास और सरकारी परियोजनाओं पर भी पड़ सकता है। इसलिए नए CMD का चयन कंपनी के कर्मचारियों निवेशकों और औद्योगिक क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

    फिलहाल यतींद्र मोहन के नाम को लेकर चर्चा का केंद्र CMD पद की दावेदारी है। उनके चयन को लेकर आगे की आधिकारिक जानकारी और नियुक्ति प्रक्रिया के घटनाक्रम महत्वपूर्ण होंगे। फरवरी 2027 में पद खाली होने की संभावना को देखते हुए आने वाले समय में इस मामले पर गतिविधियां तेज हो सकती हैं। अंतिम निर्णय सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि BHEL की कमान किस अधिकारी को सौंपी जाएगी और कंपनी भविष्य की चुनौतियों के लिए किस दिशा में आगे बढ़ेगी।

  • ग्वालियर में 14 साल के बच्चे पर चाकू से नौ वार, बलि देने की धमकी का आरोप, जंगल में छोड़कर भागा पड़ोसी

    ग्वालियर में 14 साल के बच्चे पर चाकू से नौ वार, बलि देने की धमकी का आरोप, जंगल में छोड़कर भागा पड़ोसी


    मध्य प्रदेश: के ग्वालियर जिले में 14 साल के बच्चे पर चाकू से हमला करने का गंभीर मामला सामने आया है। करहिया थाना क्षेत्र के रिठौदन गांव में रहने वाले एक पड़ोसी पर आरोप है कि वह बच्चे को झांकी दिखाने के बहाने बाइक से गोलेश्वर मंदिर की पहाड़ी के पास जंगल में ले गया। वहां उसने बच्चे से कथित तौर पर कहा कि वह उसकी बलि देगा और फिर चाकू से लगातार नौ वार कर दिए। गंभीर रूप से घायल होने के बाद बच्चा जमीन पर गिरकर बेहोश हो गया। आरोपी उसे मृत समझकर जंगल में छोड़कर फरार हो गया।

    पीड़ित बच्चे की पहचान निशांत के रूप में बताई गई है। परिजनों के मुताबिक, आरोपी विक्की गौड़ उनके पड़ोस में रहता है। आरोप है कि वह निशांत को बाइक पर बैठाकर जंगल की ओर ले गया था। बच्चे को शुरुआत में इस बात का अंदाजा नहीं था कि उसके साथ कोई अनहोनी होने वाली है। लेकिन जंगल पहुंचने के बाद आरोपी का व्यवहार बदल गया और घटना ने गंभीर रूप ले लिया।

    निशांत के अनुसार, उसने आरोपी से पूछा कि वह उसे वहां क्यों लेकर आया है। इस पर आरोपी ने कथित तौर पर कहा कि वह उसकी बलि देना चाहता है। इसके बाद उसने चाकू निकालकर बच्चे पर हमला कर दिया। आरोप है कि आरोपी ने निशांत के गले पर चार वार किए। इसके अलावा उसके माथे और शरीर के अन्य हिस्सों पर भी चाकू से हमला किया गया। इस तरह बच्चे पर कुल नौ वार किए गए। हमले के दौरान चाकू टूटने की बात भी सामने आई है। गंभीर चोटों के कारण निशांत वहीं गिर पड़ा और बेहोश हो गया।

    आरोपी को जब लगा कि बच्चा मर चुका है, तो वह उसे जंगल में ही छोड़कर भाग गया। बताया गया है कि निशांत कई घंटे तक घायल अवस्था में जंगल में पड़ा रहा। देर रात उसे होश आया तो वह किसी तरह अपने घर पहुंचा। उसके शरीर पर गंभीर चोटें थीं और वह खून से लथपथ था। बच्चे की हालत देखकर परिजन घबरा गए और उसे तत्काल उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया।

    घटना के बाद पीड़ित परिवार ने पुलिस से शिकायत की। परिजनों का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद शुरुआत में उचित कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद परिवार घायल बच्चे को लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा और अपनी शिकायत दर्ज कराई। निशांत ने आरोप लगाया कि हमले के दौरान आरोपी ने उसे धमकी भी दी थी। बच्चे के मुताबिक, आरोपी ने कहा था कि उसकी बलि देने के बाद वह उसके भाई को भी मार देगा। उसने रामबरन नाम के एक अन्य युवक की बलि देने की बात भी कही थी। इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपी विक्की गौड़ के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है। देहात के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जयराज कुबेर के अनुसार, करहिया थाना पुलिस आरोपी की तलाश कर रही है। घटना के पीछे की वास्तविक वजह और आरोपी की मंशा का पता लगाने के लिए मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। फिलहाल आरोपी फरार बताया गया है।

    पुलिस जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि बच्चे पर हमला किन परिस्थितियों में हुआ और क्या घटना के पीछे वास्तव में बलि देने की मंशा थी। फिलहाल परिवार के आरोप, बच्चे के बयान और घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। आरोपी की गिरफ्तारी और जांच के निष्कर्षों के बाद ही मामले की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • उज्जैन सिंहस्थ 2028 में 40 करोड़ श्रद्धालुओं के भोजन की तैयारी, 15 जिलों में होगी सब्जियों और फूलों की खेती

    उज्जैन सिंहस्थ 2028 में 40 करोड़ श्रद्धालुओं के भोजन की तैयारी, 15 जिलों में होगी सब्जियों और फूलों की खेती


    मध्य प्रदेश: के उज्जैन में वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ महापर्व के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए अभी से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। 60 दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में करीब 40 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के आने से भोजन, सब्जियों और पूजा-पाठ में इस्तेमाल होने वाले फूलों की मांग भी काफी बढ़ने की संभावना है। इस जरूरत को पूरा करने के लिए उद्यानिकी विभाग ने दो साल का रोडमैप तैयार किया है। इसके तहत प्रदेश के 15 जिलों में क्लस्टर मॉडल के माध्यम से सब्जियों और फूलों का अतिरिक्त उत्पादन किया जाएगा।

    योजना के अनुसार, करीब 16 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में खेती विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें 8 हजार हेक्टेयर में सब्जियां और 8 हजार हेक्टेयर में फूल उगाए जाएंगे। इस पहल से लगभग 20 हजार किसानों को जोड़ने की योजना है। इसका उद्देश्य आयोजन के दौरान मांग के अनुरूप उत्पादन सुनिश्चित करना और श्रद्धालुओं की जरूरतों के लिए पर्याप्त कृषि उपज उपलब्ध कराना है।

    क्लस्टर मॉडल के तहत एक क्षेत्र के कई किसान आपसी समन्वय से निर्धारित मांग के अनुसार फसलें उगाएंगे। इससे विभाग को पहले से जानकारी मिल सकेगी कि किस इलाके में कौन-सी फसल कितने क्षेत्र में लगाई गई है और उससे कितनी पैदावार मिलने की संभावना है। सामान्य तौर पर किसान स्थानीय बाजार और अपनी सुविधा के अनुसार फसल चुनते हैं, लेकिन इस योजना में सिंहस्थ के दौरान होने वाली मांग को ध्यान में रखकर उत्पादन पर जोर दिया जाएगा।

    सब्जियों के अतिरिक्त उत्पादन के लिए उज्जैन संभाग के सात जिलों को शामिल किया गया है। इनमें उज्जैन, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, रतलाम, नीमच और मंदसौर शामिल हैं। इन जिलों में दो साल के भीतर 8 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में हाइब्रिड सब्जियों की खेती विकसित करने की योजना है। इसके लिए किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने और उपयुक्त फसल का चयन करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

    फूलों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आठ जिलों में उत्पादन बढ़ाया जाएगा। इनमें उज्जैन, इंदौर, देवास, आगर-मालवा, खंडवा, छतरपुर, मैहर और दतिया शामिल हैं। सिंहस्थ के दौरान मंदिरों, अखाड़ों, आश्रमों और पूजा-पाठ के लिए फूलों की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए इन जिलों में 8 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में फूलों की खेती विकसित की जाएगी।

    उज्जैन में गेंदे और गुलाब की खेती पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। गेंदा उत्पादन के लिए लगभग 4,200 हेक्टेयर क्षेत्र में 25 क्लस्टर बनाने की योजना है, जिनसे 240 गांव जुड़ेंगे। वहीं, गुलाब की खेती का क्षेत्र बढ़ाकर 250 हेक्टेयर से अधिक करने का लक्ष्य है। इसके अलावा उज्जैन में करीब 19 एकड़ जमीन पर फूलों की खेती के लिए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया जाएगा। यहां किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले पौधे, नई तकनीक और प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की योजना है। इससे फूलों के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता और परिवहन खर्च कम करने में मदद मिल सकती है।

    खेती बढ़ाने के साथ खेतों से ताजी सब्जियां समय पर उज्जैन पहुंचाना भी बड़ी चुनौती होगी। सब्जियां जल्दी खराब होती हैं, इसलिए योजना में खेतों के पास संग्रह केंद्र, छंटाई, श्रेणीकरण, पैकिंग और जरूरत के अनुसार शीतगृह विकसित करने पर ध्यान दिया जा रहा है। रोजाना की मांग और आपूर्ति का डिजिटल रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।

    उद्यानिकी विभाग के उपसंचालक के.एस. मंडलोई के अनुसार, आयोजन से दो साल पहले ही किसानों की पहचान कर उन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही 15 जिलों को जोड़कर ऐसी आपूर्ति व्यवस्था तैयार करने की योजना है, जिससे किसी एक क्षेत्र में मौसम, बीमारी या कीट के कारण फसल खराब होने पर दूसरे जिले से आपूर्ति बढ़ाई जा सके। इस तरह सिंहस्थ के दौरान सब्जियों और फूलों की उपलब्धता बनाए रखने के लिए उत्पादन से लेकर परिवहन तक की तैयारी की जा रही है।