Category: Madhya Pradesh

  • वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस पर बरसे CM मोहन यादव, बोले- देशभक्ति के गीत का सम्मान करना चाहिए

    वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस पर बरसे CM मोहन यादव, बोले- देशभक्ति के गीत का सम्मान करना चाहिए


    इंदौर । इंदौर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद पहली बार ऐसा अवसर आया है जब वंदे मातरम् को पूरे देश में व्यापक रूप से सम्मान दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेता इस राष्ट्रीय गीत को लेकर सम्मान का भाव नहीं दिखा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस न इंदौर में वंदे मातरम् गाती है और न ही दिल्ली में उसके नेता इसका सम्मान करते हैं। उन्होंने कांग्रेस नेताओं से अपने रुख को लेकर देश से माफी मांगने की मांग की।

    मुख्यमंत्री इंदौर दौरे के दौरान शहर के चिड़ियाघर भी पहुंचे। यहां उन्होंने तोते उड़ाकर नए 14D थिएटर का शुभारंभ किया। इस थिएटर में दर्शकों को सामान्य फिल्म देखने से अलग तरह का अनुभव देने की व्यवस्था की गई है। थिएटर में करीब 20 मिनट के शो के लिए टिकट दर 70 रुपये निर्धारित किए जाने की जानकारी सामने आई है। (naidunia.com)

    इंदौर में कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं बल्कि देश के स्वतंत्रता संघर्ष और राष्ट्रभक्ति की भावना से जुड़ा हुआ प्रतीक है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इस गीत ने लोगों में देश के प्रति समर्पण और राष्ट्रप्रेम की भावना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ऐसे में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इसे सम्मान मिलना पूरे देश के लिए गर्व की बात है।

    मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व के मौके पर देशभक्ति से जुड़े प्रतीकों का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस नेताओं के कथित बयानों पर आपत्ति जताई और कहा कि यदि किसी नेता ने वंदे मातरम् का अपमान किया है तो उसे देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए। हालांकि मुख्यमंत्री के इस बयान में जिन कांग्रेस नेताओं या बयानों का उल्लेख किया गया है उनकी विस्तृत जानकारी इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।

    मुख्यमंत्री ने अपने इंदौर दौरे के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भी याद किया। उन्होंने कहा कि अटल जी की पुण्यतिथि पर देश उन्हें श्रद्धापूर्वक याद कर रहा है। मुख्यमंत्री ने उनके राजनीतिक जीवन और विपक्ष में लंबे समय तक काम करने का उल्लेख करते हुए कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व में संवाद के जरिए समाधान निकालने और सभी को साथ लेकर चलने की विशेष क्षमता थी।

    मोहन यादव ने अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री कार्यकाल से जुड़े कई प्रसंगों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अटल जी ने पड़ोसी देश के साथ संवाद का रास्ता अपनाया लेकिन जब पाकिस्तान ने इसका सम्मान नहीं किया तो कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना ने दृढ़ता के साथ जवाब दिया। मुख्यमंत्री ने अटल जी के नेतृत्व को राष्ट्रहित और दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति से जोड़ते हुए उनके योगदान को याद किया।

    मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना रानी अवंतीबाई लोधी को भी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि रानी अवंतीबाई ने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष करते हुए देश की स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन बलिदान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को याद करना नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का माध्यम है।

    इंदौर के चिड़ियाघर में 14D थिएटर का शुभारंभ शहर में मनोरंजन और पर्यटन सुविधाओं के विस्तार की दिशा में एक नई पहल के तौर पर देखा जा रहा है। सामान्य थिएटर की तुलना में 14D तकनीक दर्शकों को स्क्रीन पर दिखाई जा रही कहानी के साथ अधिक इमर्सिव अनुभव देने के लिए जानी जाती है। इसमें दृश्य प्रभावों के साथ सीट मूवमेंट और अन्य प्रभावों का इस्तेमाल किया जाता है।

    मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान मछलियां भी छोड़ीं और शहर की पर्यावरणीय तथा मनोरंजन संबंधी गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया। इंदौर लगातार शहरी विकास के साथ पर्यटन और मनोरंजन के नए विकल्प विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

    वंदे मातरम् को लेकर मुख्यमंत्री का बयान ऐसे समय में आया है जब स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रमों में राष्ट्रीय प्रतीकों और देशभक्ति से जुड़े गीतों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। मुख्यमंत्री ने इसे राजनीतिक विवाद से आगे देशभक्ति और राष्ट्रीय सम्मान का विषय बताया। वहीं कांग्रेस की ओर से इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

  • कंप्यूटर ऑपरेटरों के लिए बड़ा आदेश: CPCT के साथ 10 सर्टिफिकेट कोर्स और 50 क्रेडिट अनिवार्य, नहीं तो मानदेय पर संकट

    कंप्यूटर ऑपरेटरों के लिए बड़ा आदेश: CPCT के साथ 10 सर्टिफिकेट कोर्स और 50 क्रेडिट अनिवार्य, नहीं तो मानदेय पर संकट


    भोपाल । मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में काम करने वाले कंप्यूटर ऑपरेटरों के लिए सरकार ने तकनीकी दक्षता और साइबर सुरक्षा को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की ओर से जारी आदेश के मुताबिक नगर पालिक निगम नगरपालिका और नगर परिषद में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों को निर्धारित योग्यता और प्रशिक्षण पूरा करना होगा। इसके लिए 30 दिन की समय सीमा तय की गई है। तय अवधि में जरूरी शर्तें पूरी नहीं करने वाले ऑपरेटरों के नियोजन और मानदेय या वेतन भुगतान को लेकर कार्रवाई की जा सकती है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब नगरीय निकायों का काम तेजी से ऑनलाइन पोर्टल और डिजिटल सिस्टम पर निर्भर हो रहा है।

    विभाग के अनुसार नगरीय निकायों की अलग अलग शाखाओं में कंप्यूटर ऑपरेटर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालते हैं। जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र से लेकर संपत्ति कर जलकर राजस्व प्रधानमंत्री आवास योजना और दूसरी नागरिक सेवाओं से जुड़े ऑनलाइन काम इनके माध्यम से किए जाते हैं। ऐसे में ऑपरेटरों की कंप्यूटर दक्षता के साथ सरकारी डेटा की सुरक्षा और साइबर खतरों की समझ भी जरूरी मानी जा रही है। मध्य प्रदेश में CPCT पहले से ही कई कंप्यूटर आधारित सरकारी पदों के लिए महत्वपूर्ण योग्यता परीक्षा रही है। सरकारी विभागों में कंप्यूटर दक्षता से जुड़े पदों पर CPCT की अनिवार्यता के उदाहरण पहले भी सामने आते रहे हैं।

    नए निर्देशों के तहत कंप्यूटर ऑपरेटरों के लिए तीन प्रमुख शर्तें रखी गई हैं। पहली शर्त CPCT परीक्षा पास करने से जुड़ी है। यानी संबंधित ऑपरेटर के पास निर्धारित कंप्यूटर दक्षता का प्रमाण होना जरूरी होगा। दूसरी शर्त भारत सरकार के मिशन कर्मयोगी यानी iGOT Karmayogi पोर्टल पर उपलब्ध साइबर सिक्योरिटी और आईटी से संबंधित सर्टिफिकेट कोर्स पूरा करने की है। तीसरी शर्त इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से कम से कम 50 क्रेडिट पॉइंट हासिल करने की है। मिशन कर्मयोगी का व्यापक उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों की क्षमता और कार्य दक्षता बढ़ाना है।

    आदेश के साथ प्रशिक्षण के लिए जरूरी पाठ्यक्रमों की सूची भी बताई गई है। इनमें बेसिक कंप्यूटर से जुड़े पाठ्यक्रमों के अलावा माइक्रोसॉफ्ट वर्ड और एक्सेल जैसे सॉफ्टवेयर से जुड़े प्रशिक्षण शामिल हैं। डेटा एंट्री और सरकारी रिकॉर्ड तैयार करने वाले काम में इनकी उपयोगिता बताई गई है। इसके साथ साइबर सिक्योरिटी बेसिक्स और डिजिटल सेफ्टी जैसे पाठ्यक्रमों के जरिए सरकारी कंप्यूटर सिस्टम और पासवर्ड सहित महत्वपूर्ण डिजिटल जानकारी को सुरक्षित रखने की जानकारी दी जाएगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा आधारित निर्णय लेने से जुड़े प्रशिक्षण भी ऑपरेटरों की डिजिटल क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से शामिल किए गए हैं।

    सरकार की इस व्यवस्था का सबसे बड़ा असर उन कंप्यूटर ऑपरेटरों पर पड़ सकता है जिन्होंने अभी तक निर्धारित तकनीकी योग्यता या प्रशिक्षण पूरा नहीं किया है। आदेश के मुताबिक 30 दिनों की समय सीमा में जरूरी शर्तें पूरी नहीं होने पर संबंधित ऑपरेटर को आगे नियोजन में रखने या हटाने और नियमानुसार मानदेय या वेतन भुगतान को लेकर कार्रवाई की जा सकती है। यानी यह सिर्फ प्रशिक्षण पूरा करने का निर्देश नहीं है बल्कि इसके साथ सेवा और भुगतान पर भी असर जुड़ा हुआ है।

    नगरीय निकायों में कंप्यूटर ऑपरेटरों की संख्या एक समान नहीं होती। बड़े नगर निगमों में कई जोनल कार्यालय और अलग अलग शाखाएं होने के कारण ऑपरेटरों की जरूरत ज्यादा होती है। वहीं नगरपालिकाओं में राजस्व स्थापना लेखा और नागरिक सेवाओं से जुड़े काउंटरों पर ऑपरेटर काम करते हैं। नगर परिषदों में अपेक्षाकृत कम संख्या में कर्मचारी डिजिटल सेवाओं और प्रशासनिक कामकाज को संभालते हैं।

    सरकार के इस कदम का उद्देश्य डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने के साथ सरकारी डेटा को साइबर खतरों से सुरक्षित रखना भी बताया जा रहा है। नगरीय निकायों में नागरिकों से जुड़ी बड़ी मात्रा में व्यक्तिगत और प्रशासनिक जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध रहती है। ऐसे में कंप्यूटर सिस्टम चलाने वाले कर्मचारियों को साइबर सुरक्षा के बुनियादी नियमों की जानकारी होना जरूरी है। बढ़ते साइबर अपराधों के बीच सरकारी संस्थानों में डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मध्य प्रदेश में साइबर ठगी के मामलों को देखते हुए पुलिस और साइबर विशेषज्ञ लगातार अनजान लिंक ओटीपी और संदिग्ध डिजिटल गतिविधियों से सावधानी बरतने की सलाह देते रहे हैं।

    इस आदेश के बाद अब नगरीय निकायों में काम करने वाले कंप्यूटर ऑपरेटरों के सामने 30 दिन में अपनी तकनीकी योग्यता और प्रशिक्षण पूरा करने की चुनौती है। विभाग की मंशा साफ है कि डिजिटल शासन व्यवस्था में काम करने वाले कर्मचारियों की क्षमता केवल कंप्यूटर चलाने तक सीमित न रहे बल्कि उन्हें साइबर सुरक्षा डेटा प्रबंधन और आधुनिक तकनीक की भी पर्याप्त समझ हो। आने वाले दिनों में नगरीय निकायों में इन निर्देशों के पालन और ऑपरेटरों की योग्यता की स्थिति पर निगरानी बढ़ने की संभावना है।

  • भोपाल में राजा भोज सेलिंग चैंपियनशिप का शानदार समापन, NSS भोपाल बना विजेता; CM बोले- खेलों में लगातार आगे बढ़ रहा MP

    भोपाल में राजा भोज सेलिंग चैंपियनशिप का शानदार समापन, NSS भोपाल बना विजेता; CM बोले- खेलों में लगातार आगे बढ़ रहा MP


    भोपाल । भोपाल के बड़े तालाब पर छह दिनों तक चली राजा भोज मल्टी क्लास नेशनल सेलिंग चैंपियनशिप के तीसरे संस्करण का रविवार को भव्य समापन हुआ। बोट क्लब पर आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शामिल हुए और विजेता खिलाड़ियों को सम्मानित किया। प्रतियोगिता में नेशनल सेलिंग स्कूल भोपाल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल किया जबकि नेवी यूथ स्पोर्ट्स क्लब गोवा दूसरे और सिकंदराबाद तीसरे स्थान पर रहा। प्रतियोगिता में 12 क्लबों के 87 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया और अलग अलग वर्गों में कुल 110 रेस के जरिए अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। भोपाल में बड़े तालाब की लहरों पर आयोजित इस प्रतियोगिता ने शहर को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर के वाटर स्पोर्ट्स केंद्र के रूप में पहचान दिलाई। भोपाल में इससे पहले भी राजा भोज सेलिंग चैंपियनशिप में देशभर के 100 से अधिक खिलाड़ी हिस्सा ले चुके हैं।
    समापन समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश खेलों के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों में एक एक स्टेडियम विकसित किया जाए। इन स्टेडियमों के साथ अलग अलग खेलों के लिए आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध कराने की योजना है ताकि गांव और छोटे शहरों में मौजूद प्रतिभाओं को बेहतर प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं का अवसर मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल विभाग का बजट बढ़ाना उनके लिए संतोष और खुशी की बात है। उन्होंने खिलाड़ियों की मेहनत को प्रदेश की बढ़ती खेल उपलब्धियों का महत्वपूर्ण आधार बताया।

    मुख्यमंत्री के मुताबिक कुछ वर्ष पहले तक राष्ट्रीय स्तर पर खेलों में मध्यप्रदेश की स्थिति 16वें या 17वें स्थान के आसपास थी लेकिन अब प्रदेश तीसरे स्थान तक पहुंच चुका है। उन्होंने इस बदलाव का श्रेय खिलाड़ियों की मेहनत और खेल सुविधाओं के विस्तार को दिया। उनका कहना था कि ओलंपिक और कॉमनवेल्थ गेम्स जैसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत की उपलब्धियों में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों की भूमिका भी लगातार बढ़ रही है।

    डॉ. मोहन यादव ने बताया कि प्रदेश में फिलहाल 18 खेलों के लिए 11 खेल अकादमियां संचालित की जा रही हैं। सरकार का जोर केवल खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने तक सीमित नहीं है बल्कि उनके प्रशिक्षण शिक्षा और भविष्य के अवसरों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कोचों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि खिलाड़ियों के साथ प्रशिक्षकों के करियर और भविष्य की चिंता करना भी जरूरी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत खेलों को शिक्षा से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

    प्रतियोगिता के दौरान बड़े तालाब की लहरों पर खिलाड़ियों ने संतुलन गति और तकनीक का शानदार प्रदर्शन किया। अलग अलग वर्गों में खिलाड़ियों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। राष्ट्रीय रैंकिंग से जुड़ी इस प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन खिलाड़ियों के लिए आगे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवसर मजबूत करने में मददगार माना जा रहा है।

    NSS भोपाल की विजेता टीम में वायु चंद्रवंशी माही वर्मा तुलसी पटले एकलव्य वायम वंशिका शिकारवार आर्यन पाटीदार प्रार्थना मोई अंकित सिसोदिया समर पंचेश्वर और सिद्धि टंडन शामिल रहे। वहीं NYSC गोवा की उपविजेता टीम में शशांक जाधव हृदय जोशी मोह रिजवान शिवम वाल्मीकि और हेमंत पपौला शामिल रहे। NSS भोपाल के मुख्य प्रशिक्षक जीएल यादव के साथ राम मिलन नरेंद्र एस राजपूत और अनिल शर्मा ने खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया।

    खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि भोपाल का बड़ा तालाब प्राकृतिक रूप से बेहद खूबसूरत है और सरकार इसका उपयोग खेल के साथ पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भी कर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से भोपाल में खेल संग्रहालय विकसित करने का आग्रह किया ताकि मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों और उनकी उपलब्धियों को एक स्थान पर प्रदर्शित किया जा सके। उन्होंने बड़े तालाब में शिकारा संचालन को भी पर्यटन विकास से जोड़ने की बात कही।

    समारोह में मुख्यमंत्री ने जूडो में कॉमनवेल्थ गेम्स की रजत पदक विजेता यामिनी मौर्य समेत विभिन्न खेलों के खिलाड़ियों को सम्मानित किया। शॉटपुट खिलाड़ी समरदीप सिंह गिल पोल वॉल्ट खिलाड़ी देव कुमार मीणा कुलदीप कुमार और फेंसिंग खिलाड़ी खुशी दाबोड़े को भी सम्मान मिला। जूनियर हॉकी चैंपियनशिप में रजत पदक जीतने वाली मध्यप्रदेश हॉकी अकादमी की टीम के खिलाड़ियों का भी सम्मान किया गया।

    मध्यप्रदेश में वाटर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने में भोपाल की झीलों की अहम भूमिका है। राज्य जल क्रीड़ा अकादमी की स्थापना 2007 में हुई थी जहां सेलिंग रोइंग कयाकिंग केनोइंग और स्लालम जैसी विधाओं का प्रशिक्षण दिया जाता है। राजा भोज सेलिंग चैंपियनशिप जैसे आयोजन इस बुनियादी ढांचे और खिलाड़ियों को राष्ट्रीय मंच देने की दिशा में महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो रहे हैं। राज्य सरकार की ओर से विधानसभा स्तर तक खेल सुविधाएं बढ़ाने की योजना पर जोर दिए जाने से आने वाले समय में प्रदेश के छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों से भी नई खेल प्रतिभाओं के सामने आने की उम्मीद है।

  • टीकाकरण के बाद मासूम की मौत पर परिजनों का ओवरडोज का आरोप, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेगा राज

    टीकाकरण के बाद मासूम की मौत पर परिजनों का ओवरडोज का आरोप, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेगा राज


    भोपाल । भोपाल के छोला मंदिर थाना क्षेत्र की नवजीवन कॉलोनी में दो माह की मासूम बच्ची की इलाज के दौरान मौत के बाद हड़कंप मच गया है। बच्ची के परिजनों ने आरोप लगाया है कि 14 अगस्त को आंगनवाड़ी केंद्र में टीकाकरण और पोलियो की दवा पिलाए जाने के बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी थी। परिवार का दावा है कि बच्ची को पोलियो की सात बूंद दवा पिलाने के साथ तीन इंजेक्शन भी लगाए गए थे। इसके बाद उसकी हालत खराब होने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां रविवार सुबह इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मामले में पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक फिलहाल टीकाकरण और बच्ची की मौत के बीच सीधा संबंध स्थापित नहीं हुआ है। मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम और जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    मृत बच्ची की पहचान लक्ष्मी के रूप में हुई है। वह नवजीवन कॉलोनी छोला क्षेत्र में अपने परिवार के साथ रहती थी। परिवार मूल रूप से सिरोंज का रहने वाला बताया जा रहा है। परिजनों के मुताबिक लक्ष्मी परिवार की इकलौती बेटी थी और उसका एक बड़ा भाई है। बच्ची की मौत के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है और परिजन पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

    परिवार के अनुसार 14 अगस्त को लक्ष्मी को नियमित स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत आंगनवाड़ी केंद्र ले जाया गया था। वहां उसे पोलियो की दवा पिलाई गई और टीकाकरण किया गया। परिजनों का दावा है कि इसी दौरान बच्ची को तीन इंजेक्शन भी लगाए गए। घर लौटने के बाद बच्ची की तबीयत बिगड़ने लगी। उसकी हालत को देखते हुए परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे जहां डॉक्टरों ने उपचार शुरू किया। इलाज के दौरान उसकी हालत गंभीर बनी रही और रविवार सुबह उसने दम तोड़ दिया।

    बच्ची के पिता हलके राम ने आरोप लगाया है कि दो माह की मासूम को सात बूंद पोलियो दवा पिलाने के अलावा तीन इंजेक्शन लगाए गए थे। उनका कहना है कि दवा या इंजेक्शन की अधिक मात्रा के कारण बच्ची की तबीयत बिगड़ी और बाद में उसकी मौत हो गई। हालांकि यह परिवार का आरोप है और इसकी अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस ने भी मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं की जांच शुरू कर दी है।

    छोला मंदिर थाना प्रभारी सरस्वती तिवारी के मुताबिक परिजनों के बयान में टीकाकरण के बाद बच्ची की तबीयत बिगड़ने की बात सामने आई है। पुलिस ने मर्ग कायम किया है और मामले की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बच्ची को केंद्र पर कौन से टीके लगाए गए थे और उसे कौन सी दवा दी गई थी। संबंधित स्वास्थ्य कर्मियों से जानकारी लेने के साथ रिकॉर्ड की भी जांच की जा सकती है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

    स्वास्थ्य कार्यक्रमों में बच्चों को टीके और पोलियो की दवा देना नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है। मध्यप्रदेश में पल्स पोलियो अभियान के दौरान पांच वर्ष तक के बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई जाती रही है। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक इसका उद्देश्य बच्चों को पोलियो से सुरक्षित रखना है। ऐसे में इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि बच्ची की मौत की वास्तविक वजह क्या थी और क्या उसकी तबीयत बिगड़ने के पीछे टीकाकरण से जुड़ी कोई प्रतिकूल प्रतिक्रिया थी या कोई अन्य चिकित्सकीय कारण। इसका जवाब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विस्तृत जांच के बाद ही सामने आएगा।

    फिलहाल पुलिस मामले की पड़ताल कर रही है। परिवार की ओर से लगाए गए ओवरडोज और लापरवाही के आरोपों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बच्ची की मौत किन परिस्थितियों में हुई। जांच रिपोर्ट सामने आने तक टीकाकरण को मौत का कारण बताना जल्दबाजी होगी।

  • लाल किले से मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों का नाम न लेने पर आरिफ मसूद ने जताई नाराजगी, PM मोदी से माफी की मांग

    लाल किले से मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों का नाम न लेने पर आरिफ मसूद ने जताई नाराजगी, PM मोदी से माफी की मांग


    भोपाल । स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए महात्मा गांधी और देश की आजादी के लिए बलिदान देने वाले स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद भोपाल से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने प्रधानमंत्री के भाषण पर ऐतराज जताते हुए मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान का मुद्दा उठाया है। मसूद ने आरोप लगाया कि आजादी के संघर्ष की चर्चा के दौरान मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों का उल्लेख नहीं किया गया। उन्होंने इसे दुखद बताते हुए प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा है। प्रधानमंत्री के भाषण में स्वतंत्रता सेनानियों को व्यापक रूप से श्रद्धांजलि दी गई थी और इसके साथ ही देश के विकास तथा राष्ट्र निर्माण के कई मुद्दों पर जोर दिया गया।

    आरिफ मसूद का कहना है कि भारत की आजादी किसी एक समुदाय की लड़ाई नहीं थी बल्कि इसमें देश के अलग अलग वर्गों और समुदायों के लोगों ने योगदान दिया था। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी शासन से देश को मुक्त कराने के संघर्ष में अनेक लोगों ने अपना जीवन और सर्वस्व कुर्बान किया। ऐसे में स्वतंत्रता संग्राम की चर्चा करते समय मुस्लिम सेनानियों के योगदान को भी सामने रखना जरूरी है। मसूद ने अपने ज्ञापन में कहा है कि इतिहास के अलग अलग दौर में मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों और उलेमा ने भी अंग्रेजी सत्ता के खिलाफ संघर्ष किया था।

    मसूद ने अपने तर्क के समर्थन में देश के कई ऐतिहासिक स्थलों का उल्लेख किया है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री यदि नेशनल वॉर मेमोरियल और अंडमान निकोबार की सेलुलर जेल जैसे स्थानों पर दर्ज नामों को देखें तो वहां विभिन्न समुदायों के स्वतंत्रता सेनानियों की मौजूदगी दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन का इतिहास व्यापक है और इसे किसी एक वर्ग या समुदाय तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए।

    कांग्रेस विधायक ने अपने ज्ञापन में 18वीं और 19वीं सदी के कई आंदोलनों का उल्लेख भी किया है। उन्होंने बंकिमचंद्र चटर्जी के उपन्यास आनंदमठ में वर्णित फकीर और संन्यासी विद्रोह का उदाहरण देते हुए मजनू शाह फकीर और उनके साथियों का नाम लिया। मसूद के मुताबिक मजनू शाह के बाद मूसा शाह चिराग अली और नूरुल मोहम्मद जैसे लोगों ने भी इस संघर्ष को आगे बढ़ाया। उन्होंने 1857 के विद्रोह में अहमदुल्ला शाह मदरासी की भूमिका का भी उल्लेख किया और दावा किया कि उन्होंने कई इलाकों में अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन को आगे बढ़ाने का काम किया।

    मसूद ने 1857 के विद्रोह के दौरान अंग्रेजों की कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि उस दौर में बड़ी संख्या में लोगों को कठोर दमन का सामना करना पड़ा और मुस्लिम उलेमा समेत कई लोगों ने भी बलिदान दिया। ज्ञापन में उन्होंने विभिन्न ऐतिहासिक पुस्तकों और लेखों का हवाला देते हुए अंग्रेजी शासन के दौरान हुई कार्रवाई का जिक्र किया है। हालांकि ज्ञापन में बताए गए कुछ आंकड़ों और ऐतिहासिक दावों की स्वतंत्र पुष्टि अलग से आवश्यक है।

    भोपाल में विधायक ने स्वतंत्रता सेनानियों की तस्वीरों वाला पोस्टर भी लगाया। उनका कहना है कि आजादी के संघर्ष की पूरी तस्वीर देश के सामने रखी जानी चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियां यह समझ सकें कि भारत की स्वतंत्रता अनेक लोगों के संघर्ष और बलिदान का परिणाम थी। मसूद ने प्रधानमंत्री से मांग की है कि स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को सभी समुदायों के योगदान के साथ देखा जाए।

    मसूद ने अपने ज्ञापन के अंत में कहा कि देश के महान स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री के भाषण में मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों का उल्लेख नहीं होने को लेकर आपत्ति दर्ज कराई और इस पर देश से माफी मांगने की मांग की। इस मुद्दे के सामने आने के बाद स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अलग अलग समुदायों की भूमिका और राजनीतिक दलों के बीच इतिहास की व्याख्या को लेकर बहस तेज होने की संभावना है।

  • कहीं कीचड़ में बच्चों की प्रस्तुति तो कहीं भाजपा नेता की पार्टी में SI का गाना, MP में आजादी के जश्न पर उठे सवाल

    कहीं कीचड़ में बच्चों की प्रस्तुति तो कहीं भाजपा नेता की पार्टी में SI का गाना, MP में आजादी के जश्न पर उठे सवाल


    भोपाल । मध्य प्रदेश में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जहां देशभक्ति और तिरंगे के रंग में पूरा प्रदेश रंगा नजर आया वहीं अलग अलग जिलों से कुछ ऐसी तस्वीरें भी सामने आईं जिन्होंने व्यवस्थाओं और प्रशासनिक तौर तरीकों पर सवाल खड़े कर दिए। रतलाम में कलेक्टर के भाषण के दौरान स्वतंत्रता दिवस समारोह के मैदान में कुत्तों के पहुंचने का मामला चर्चा में रहा तो नर्मदापुरम में बारिश के बाद कीचड़ से भरे मैदान में स्कूली बच्चों को प्रस्तुति देनी पड़ी। मंदसौर के गरोठ में महिला सरपंच का घूंघट में तिरंगा फहराने का वीडियो भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना। वहीं मंदसौर में भाजपा नेता की बर्थडे पार्टी में एक सब इंस्पेक्टर के गाना गाने का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस विभाग में भी मामला सुर्खियों में रहा।

    रतलाम में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान उस समय अजीब स्थिति बन गई जब आयोजन स्थल पर कुत्ते खुलेआम घूमते दिखाई दिए। बताया गया कि यह घटना उस समय हुई जब कलेक्टर का भाषण चल रहा था। कुत्ते काफी देर तक मैदान में घूमते रहे और बाद में एक पुलिसकर्मी ने उन्हें बाहर निकाला। पूरे घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग व्यवस्थाओं को लेकर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं देते नजर आए। लोगों ने तंज कसते हुए कहा कि जब पूरा देश आजादी का जश्न मना रहा है तो कुत्ते भी आजादी के जश्न में शामिल होने पहुंच गए। हालांकि इस घटना ने नगर निगम और आयोजन स्थल की सुरक्षा तथा साफ सफाई व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े कर दिए।

    नर्मदापुरम से आई तस्वीर भी कम चौंकाने वाली नहीं रही। बारिश के कारण स्वतंत्रता दिवस समारोह का मैदान कीचड़ से भर गया था। इसके बावजूद स्कूली बच्चों को उसी मैदान में अपनी प्रस्तुति देनी पड़ी। दूसरी ओर मैदान के एक हिस्से में गिट्टी की चूरी डालकर उसे पुलिस परेड के लिए तैयार किया गया था। इसी अंतर को लेकर लोगों ने सवाल उठाया कि जब पुलिसकर्मियों की परेड के लिए मैदान को व्यवस्थित किया जा सकता था तो बच्चों के कार्यक्रम के लिए ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं की गई। बच्चों को कीचड़ में खड़े होकर प्रस्तुति देने की स्थिति को लेकर व्यवस्थापकों पर सवाल उठे।

    मंदसौर के गरोठ क्षेत्र से सामने आया घूंघट वाला मामला भी चर्चा में रहा। मेलखेड़ा पंचायत में महिला सरपंच ने घूंघट में तिरंगा फहराया। वीडियो में उनका चेहरा पूरी तरह घूंघट से ढका दिखाई दिया। समारोह में स्कूली बच्चों और ग्रामीणों के साथ पंचायत के अन्य प्रतिनिधि भी मौजूद थे। इस तस्वीर को लेकर महिला सशक्तिकरण और स्थानीय स्तर पर महिलाओं की वास्तविक भागीदारी को लेकर सवाल उठाए गए। हालांकि किसी महिला का घूंघट करना अपने आप में किसी नियम का उल्लंघन नहीं है लेकिन सार्वजनिक पद पर निर्वाचित महिला प्रतिनिधि की सार्वजनिक भूमिका और सामाजिक परंपराओं के बीच संतुलन को लेकर बहस जरूर छिड़ गई।

    मंदसौर में ही भाजपा नेता की बर्थडे पार्टी में कचनारा पुलिस चौकी प्रभारी सब इंस्पेक्टर भीम सिंह के पहुंचने और उनके लिए गाना गाने का वीडियो चर्चा में आया। वीडियो में एसआई भाजपा नेता की बर्थडे पार्टी में गाना गाते नजर आए। गाने के बोल भी दोस्ती को लेकर थे जिसके बाद सोशल मीडिया पर पुलिस और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच नजदीकी को लेकर सवाल उठने लगे। मामले की जानकारी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक पहुंचने के बाद एसआई को कारण बताओ नोटिस दिए जाने की बात सामने आई है। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि केवल किसी कार्यक्रम में शामिल होने या गाना गाने से किसी राजनीतिक पक्षधरता का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। लेकिन पुलिसकर्मी और राजनीतिक दलों के नेताओं के सार्वजनिक मेलजोल को लेकर उठने वाले सवालों के कारण यह मामला चर्चा में जरूर आ गया।

    अंदर की बात पर भी सियासी नजर

    दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजे के बाद भाजपा संगठन में समीक्षा और संभावित कार्रवाई को लेकर भी चर्चा तेज रही। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने परिणामों की समीक्षा की बात कही थी। बाद में मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई और हार के कारणों की समीक्षा के लिए दो सदस्यीय समिति गठित की गई। समिति को चुनाव से जुड़े पदाधिकारियों और वरिष्ठ नेताओं से चर्चा कर रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष को सौंपने की जिम्मेदारी दी गई। इससे साफ है कि दतिया के नतीजे को पार्टी ने गंभीरता से लिया है।

    कुल मिलाकर स्वतंत्रता दिवस के उत्सव के बीच सामने आई ये तस्वीरें मध्य प्रदेश में व्यवस्था प्रशासन राजनीति और सामाजिक परंपराओं से जुड़े अलग अलग सवालों को सामने लाती हैं। कहीं लापरवाही पर सवाल है तो कहीं समान व्यवस्था की मांग उठ रही है और कहीं सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों के आचरण को लेकर बहस छिड़ी है। यही वजह है कि आजादी के जश्न के साथ इन घटनाओं ने भी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा।

  • एमपी में दिव्यांग कार्ड के लिए 253 दिन का इंतजार! 12,213 UDID आवेदन 6 महीने से ज्यादा समय से अटके

    एमपी में दिव्यांग कार्ड के लिए 253 दिन का इंतजार! 12,213 UDID आवेदन 6 महीने से ज्यादा समय से अटके


    भोपाल । मध्य प्रदेश में दिव्यांगों को सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ दिलाने के लिए बनाए जाने वाले UDID यानी विशिष्ट दिव्यांगता पहचान कार्ड की प्रक्रिया की धीमी रफ्तार चिंता का कारण बन गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में दिव्यांग व्यक्ति को UDID कार्ड या दिव्यांगता प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए औसतन 253 दिन यानी करीब साढ़े आठ महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है। यह स्थिति उन लोगों के लिए बड़ी परेशानी पैदा कर रही है जिन्हें पेंशन शिक्षा रोजगार या दूसरी सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने के लिए दिव्यांगता से जुड़े दस्तावेजों की जरूरत होती है। केंद्र सरकार के आधिकारिक आंकड़े भी बताते हैं कि UDID कार्ड के प्रसंस्करण का समय राज्यों में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध मानव संसाधन और दिव्यांग आबादी के आधार पर अलग-अलग रहता है।

    रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश में 12 हजार 213 आवेदन ऐसे हैं जो छह महीने से भी ज्यादा समय से लंबित हैं। वहीं तीन महीने से अधिक समय से लंबित आवेदनों की संख्या 14 हजार 288 बताई गई है। कुल मिलाकर पोर्टल पर 18 हजार 510 आवेदन अलग-अलग चरणों में लंबित बताए गए हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि दिव्यांग हितों से जुड़ी इतनी महत्वपूर्ण पहचान व्यवस्था में आवेदन निपटाने की प्रक्रिया इतनी धीमी क्यों है।

    वर्ष 2021 से 5 अगस्त 2026 तक मध्य प्रदेश से कुल 4 लाख 58 हजार 156 UDID कार्ड के आवेदन प्राप्त होने की जानकारी दी गई है। इनमें से 4 लाख 2 हजार 819 कार्ड बनाए जा चुके हैं जबकि 16 हजार 396 आवेदनों को खारिज किया गया। इसके बावजूद हजारों आवेदन लंबे समय से प्रक्रिया में अटके हुए हैं। UDID कार्ड का उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों को एक ऐसी डिजिटल पहचान उपलब्ध कराना है जिसका इस्तेमाल विभिन्न सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ लेने के लिए किया जा सके।

    इस पूरी प्रक्रिया में जिला मेडिकल बोर्ड की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण होती है। दिव्यांगता का आकलन और प्रमाणन मेडिकल जांच के बाद किया जाता है। ऐसे में डॉक्टरों की उपलब्धता और मेडिकल बोर्ड की बैठकें सीधे तौर पर आवेदन के निपटारे की गति को प्रभावित कर सकती हैं। केंद्र सरकार ने संसद में बताया है कि जिला चिकित्सा बोर्ड की बैठकों का समय और उनकी आवृत्ति राज्यों तथा संबंधित अस्पतालों की स्थानीय जरूरतों और डॉक्टरों की उपलब्धता पर निर्भर करती है। पूरे देश के लिए बोर्ड बैठकों की कोई एक समान अनिवार्य आवृत्ति तय नहीं की गई है।

    मध्य प्रदेश में यह समस्या इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि राज्य सरकार के अपने रिकॉर्ड में भी UDID व्यवस्था को लेकर बड़ी संख्या में आवेदन और मैपिंग से जुड़ा काम सामने आया है। अगस्त 2025 के राज्य स्तरीय रिकॉर्ड में 9 लाख 56 हजार से अधिक दिव्यांगों की पहचान और 9 लाख 61 हजार से ज्यादा UDID जनरेशन दर्ज था जबकि UDID मैपिंग का आंकड़ा करीब 5 लाख 71 हजार था। इससे पता चलता है कि कार्ड बनने के बाद भी डिजिटल रिकॉर्ड को पूरी तरह अपडेट और मैप करने की चुनौती बनी हुई है।

    केंद्र सरकार की ओर से UDID पोर्टल को अपग्रेड करने डेटाबेस को आधार से जोड़ने और मेडिकल बोर्ड में काम करने वाले डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण देने जैसे कदमों की जानकारी दी गई है। राष्ट्रीय स्तर पर भी लंबित आवेदनों की संख्या बड़ी है। आधिकारिक दस्तावेज में मार्च 2026 तक देश का औसत UDID प्रसंस्करण समय 214 दिन बताया गया था।

    दिव्यांगों के लिए UDID कार्ड सिर्फ एक पहचान पत्र नहीं बल्कि कई सरकारी सुविधाओं तक पहुंच का महत्वपूर्ण दस्तावेज है। ऐसे में मध्य प्रदेश में आवेदन निपटाने की गति बढ़ाना जरूरी है ताकि पात्र लोगों को महीनों तक अपनी पहचान और अधिकारों से जुड़े दस्तावेज के लिए इंतजार न करना पड़े। अब जरूरत इस बात की है कि लंबित आवेदनों की जिला स्तर पर समीक्षा हो और मेडिकल बोर्ड तथा संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय के जरिए प्रक्रिया को समयबद्ध बनाया जाए।

  • भोपाल में TB मरीजों की सेवा करने वाले DOTS प्रोवाइडर्स खुद बेहाल, डेढ़ साल से मानदेय का इंतजार

    भोपाल में TB मरीजों की सेवा करने वाले DOTS प्रोवाइडर्स खुद बेहाल, डेढ़ साल से मानदेय का इंतजार


    भोपाल । भोपाल में टीबी मरीजों के इलाज और फॉलोअप की जिम्मेदारी निभाने वाले DOTS प्रोवाइडर्स इन दिनों खुद आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। मरीजों को समय पर दवा उपलब्ध कराने से लेकर उनके घर जाकर फॉलोअप करने और परिवार के सदस्यों की जांच कराने तक की जिम्मेदारी संभालने वाले इन प्रोवाइडर्स का लंबे समय से मानदेय और प्रोत्साहन राशि का भुगतान लंबित बताया जा रहा है। कुछ प्रोवाइडर्स का कहना है कि उन्हें करीब 10 महीने से भुगतान नहीं मिला है जबकि कुछ मार्च 2025 से अपनी राशि का इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि बार बार अधिकारियों से संपर्क करने पर बजट उपलब्ध नहीं होने का हवाला दिया जाता है और जल्द भुगतान का भरोसा दिया जाता है।

    DOTS प्रोवाइडर्स टीबी नियंत्रण व्यवस्था में जमीनी स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे मरीजों के घर पहुंचकर उन्हें निर्धारित समय पर दवा लेने में मदद करते हैं और इलाज के दौरान फॉलोअप बनाए रखते हैं। जरूरत पड़ने पर मरीजों की जांच से जुड़े नमूने भी अस्पताल या जांच केंद्र तक पहुंचाने में सहयोग करते हैं। इसके अलावा मरीज के परिवार के सदस्यों की जांच कराने और स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी जरूरी जानकारी अपडेट करने जैसे काम भी उनकी जिम्मेदारी में शामिल हैं। केंद्र सरकार के टीबी कार्यक्रम में भी DOTS प्रोवाइडर्स को उपचार के दौरान मरीजों को सहयोग देने के लिए प्रोत्साहन राशि का प्रावधान रहा है।

    कोलार सीएससी से जुड़ी पुष्पा सिंह बघेल के अनुसार वह वर्ष 2023 से DOTS प्रोवाइडर के तौर पर काम कर रही हैं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्होंने यह काम शुरू किया था लेकिन मार्च 2025 से उन्हें भुगतान नहीं मिला है। पुष्पा का कहना है कि जब भी लंबित भुगतान को लेकर जानकारी ली जाती है तो बजट की कमी बताकर जल्द राशि जारी होने की बात कही जाती है। लंबे समय से भुगतान नहीं मिलने के कारण अब घरेलू खर्च संभालना मुश्किल हो गया है।

    एक अन्य महिला DOTS प्रोवाइडर ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि बच्चों की फीस भरने में भी परेशानी हो रही है। घर का खर्च चलाने के लिए उधार लेना पड़ रहा है। उनका कहना है कि मरीजों की सेवा में किसी तरह की कमी नहीं की गई है लेकिन भुगतान नहीं मिलने से परिवार पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।

    अशोका गार्डन क्षेत्र की पंजाबी बाग डिस्पेंसरी से जुड़ी दिव्या भी आर्थिक परेशानियों का सामना कर रही हैं। वह पढ़ाई के साथ DOTS प्रोवाइडर के तौर पर काम कर रही हैं। उनके मुताबिक करीब एक साल से भुगतान नहीं मिला है। भोपाल जैसे शहर में किराए का कमरा लेकर पढ़ाई करना और रोजमर्रा के खर्च संभालना पहले ही चुनौतीपूर्ण है। इसके साथ मरीजों के घर जाकर लगातार सेवा देने के बावजूद भुगतान नहीं मिलने से स्थिति और कठिन हो गई है।

    DOTS प्रोवाइडर्स का कहना है कि गर्मी हो या बारिश उन्होंने मरीजों की सेवा बंद नहीं की। वे घर घर जाकर दवाएं पहुंचाते रहे और मरीजों के इलाज का फॉलोअप करते रहे। उनका कहना है कि यदि कोई मरीज अस्पताल तक नहीं पहुंच पाता है तो उसके घर से जरूरी नमूना लेकर जांच के लिए जमा कराने जैसे काम भी किए जाते हैं।

    लंबित भुगतान को लेकर DOTS प्रोवाइडर्स ने 3 अगस्त 2026 को राज्य क्षय अधिकारी और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मध्यप्रदेश को पत्र देकर प्रोत्साहन राशि जारी करने की मांग की है। पत्र में करीब 10 से 11 महीने की राशि लंबित होने का उल्लेख किया गया है। प्रोवाइडर्स का कहना है कि वे मुख्यमंत्री कार्यालय और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तक भी अपनी समस्या पहुंचा चुके हैं।

    मध्यप्रदेश में टीबी उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और केंद्रीय टीबी डिवीजन के माध्यम से कार्यक्रम संचालित है। केंद्रीय टीबी डिवीजन की मध्यप्रदेश संबंधी आधिकारिक वेबसाइट पर भी राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम से जुड़े दिशा निर्देश और संसाधन उपलब्ध हैं। अब DOTS प्रोवाइडर्स को उम्मीद है कि सरकार उनकी लंबित राशि का जल्द भुगतान करेगी ताकि मरीजों की सेवा करने वाले इन जमीनी कार्यकर्ताओं को भी आर्थिक राहत मिल सके।

  • भोपाल की झील में देशभर के सेलिंग सितारों का दमखम, NSS भोपाल विजेता और NYSC गोवा उपविजेता

    भोपाल की झील में देशभर के सेलिंग सितारों का दमखम, NSS भोपाल विजेता और NYSC गोवा उपविजेता


    भोपाल  भोपाल की पहचान बड़े तालाब और उसकी खूबसूरत लहरों से भी जुड़ी है और अब यही झील देश के उभरते हुए सेलिंग खिलाड़ियों के लिए बड़े मंच के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रही है। राजा भोज मल्टीक्लास नेशनल रैंकिंग सेलिंग चैंपियनशिप के तीसरे संस्करण का समापन रविवार को भोपाल के बोट क्लब में होगा। सुबह 11 बजे आयोजित होने वाले समापन और पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और सहकारिता खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग शामिल होंगे। प्रतियोगिता में अलग-अलग वर्गों में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित किया जाएगा।

    11 से 16 अगस्त तक आयोजित इस राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में देश के अलग-अलग राज्यों से 100 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के सेलिंग खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता की रेस के दौरान खिलाड़ियों के प्रदर्शन के आधार पर उनकी राष्ट्रीय रैंकिंग तय की जाएगी। यह रैंकिंग खिलाड़ियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि बेहतर रैंकिंग के आधार पर उन्हें आगे राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व करने के अवसर मिल सकते हैं।

    चैंपियनशिप में नेशनल सेलिंग स्कूल भोपाल यानी NSS ने शानदार प्रदर्शन करते हुए विजेता का खिताब अपने नाम किया। NSS भोपाल की विजेता टीम में वायु चंद्रवंशी माही वर्मा तुलसी पटले एकलव्य वायम वंशिका शिकारवार आर्यन पाटीदार प्रार्थना मोई अंकित सिसोदिया समर पंचेश्वर और सिद्धि टंडन शामिल रहे। वहीं NYSC गोवा की टीम उपविजेता रही। गोवा की टीम में शशांक जाधव हृदय जोशी मोह रिजवान शिवम वाल्मीकि और हेमंत पपौला ने हिस्सा लिया। NSS भोपाल के खिलाड़ियों को मुख्य प्रशिक्षक जीएल यादव के साथ राम मिलन नरेंद्र एस राजपूत और अनिल शर्मा का मार्गदर्शन मिला।

    प्रतियोगिता के दौरान अपर लेक की लहरों पर खिलाड़ियों के बीच रोमांचक मुकाबले देखने को मिले। अलग-अलग वर्गों में नाविकों ने हवा की दिशा और गति के साथ तालमेल बैठाते हुए अपनी तकनीक और संतुलन का प्रदर्शन किया। सेलिंग में केवल गति ही निर्णायक नहीं होती बल्कि हवा को समझना नाव को सही दिशा में मोड़ना और बदलती परिस्थितियों के बीच संतुलन बनाए रखना भी खिलाड़ी की सफलता में अहम भूमिका निभाता है। यही वजह रही कि प्रतियोगिता के दौरान खिलाड़ियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। भोपाल में राष्ट्रीय स्तर की सेलिंग प्रतियोगिताओं का आयोजन पहले भी होता रहा है और बड़े तालाब को इस खेल के लिए अनुकूल माना जाता है।

    भोपाल धीरे-धीरे वाटर स्पोर्ट्स के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। शहर की प्राकृतिक झीलें सेलिंग के साथ रोइंग कयाकिंग और केनोइंग जैसे खेलों के लिए भी अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराती हैं। मध्यप्रदेश राज्य जल क्रीड़ा अकादमी की स्थापना 2007 में की गई थी। यहां सेलिंग रोइंग कयाकिंग केनोइंग और स्लालम जैसी विधाओं के लिए प्रशिक्षण की सुविधाएं उपलब्ध हैं।

    अकादमी से प्रशिक्षण लेकर कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन किया है। अब तक अकादमी के खिलाड़ियों द्वारा 28 अंतरराष्ट्रीय और 69 राष्ट्रीय पदक जीतने का दावा किया गया है। खिलाड़ी 37 अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत और मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व भी कर चुके हैं। ऐसे में राजा भोज सेलिंग चैंपियनशिप सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं बल्कि प्रदेश में वाटर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने और नई प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच देने की दिशा में महत्वपूर्ण आयोजन बनकर सामने आई है।

    समापन समारोह में विजेता और उपविजेता खिलाड़ियों के सम्मान के साथ प्रतियोगिता की उपलब्धियों को रेखांकित किया जाएगा। इसके साथ ही भोपाल की झीलों को वाटर स्पोर्ट्स और स्पोर्ट्स टूरिज्म के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाओं को भी नई मजबूती मिल सकती है। देशभर से आए खिलाड़ियों की भागीदारी ने एक बार फिर यह दिखाया है कि भोपाल की झीलें सिर्फ शहर की खूबसूरती नहीं बल्कि खेल प्रतिभाओं को उड़ान देने वाला मजबूत मैदान भी बन सकती हैं।

  • MP के 18 जिलों में हैवी रेन का अलर्ट, जबलपुर-रीवा-शहडोल संभाग में स्ट्रॉन्ग सिस्टम, अगले 3 दिन भारी बारिश

    MP के 18 जिलों में हैवी रेन का अलर्ट, जबलपुर-रीवा-शहडोल संभाग में स्ट्रॉन्ग सिस्टम, अगले 3 दिन भारी बारिश


    भोपाल। लो प्रेशर एरिया और मानसून टर्फ के असर से मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बारिश का स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव है। इसके चलते जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग में अगले 3 दिन भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। रविवार को जबलपुर, सागर, नरसिंहपुर, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, कटनी, पन्ना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, रायसेन और नर्मदापुरम में तेज बारिश होगी। मौसम केंद्र के अनुसार, अगले 24 घंटे में इन जिलों में 4 इंच या इससे ज्यादा बारिश हो सकती है।

    भोपाल, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, अलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सतना, मैहर, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश जारी रहने का अनुमान है।

    भोपाल-ग्वालियर-चंबल में भी असर
    मौसम विभाग के मुताबिक, सिस्टम का असर भोपाल, ग्वालियर और चंबल संभाग में भी रहेगा। 16, 17 और 18 अगस्त को इन संभागों के कुछ जिलों में तेज बारिश का अलर्ट है।

    प्रदेश में अब तक 21.4 इंच बारिश
    मौसम केंद्र के अनुसार, मध्य प्रदेश में अब तक 544.4 मिमी यानी 21.4 इंच बारिश हो चुकी है। यह सामान्य बारिश 24.4 इंच (618.8 मिमी) से करीब 3 इंच कम है। प्रदेश में अब तक 12% कम बारिश हुई है। पूर्वी हिस्से में सामान्य से 18% और पश्चिमी हिस्से में 6% कम बारिश दर्ज की गई है।

    43 जिलों में 2% से 54% तक कम बारिश
    पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश 19% तक कम हुई है। बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़ और उमरिया में सामान्य से 2% से 54% तक कम बारिश हुई है।

    पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, अलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 1% से 48% तक कम बारिश हुई है।

    इन 12 जिलों में औसत से ज्यादा बारिश
    भोपाल, गुना, सीहोर, राजगढ़, ग्वालियर, अनूपपुर, भिंड, बुरहानपुर, देवास, बड़वानी, खंडवा और खरगोन में ही अब तक सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।