Category: Madhya Pradesh

  • MP में कोचिंग सेंटरों पर नई नियमावली लागू करने की तैयारी, फीस से लेकर टीचर की योग्यता तक वेबसाइट पर देनी होगी पूरी जानकारी

    MP में कोचिंग सेंटरों पर नई नियमावली लागू करने की तैयारी, फीस से लेकर टीचर की योग्यता तक वेबसाइट पर देनी होगी पूरी जानकारी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में कोचिंग सेंटरों के संचालन को व्यवस्थित बनाने और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने नए नियमों का प्रारूप जारी किया है। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से मध्यप्रदेश कोचिंग केंद्र पंजीयन एवं विनियमन नियम 2026 का नोटिफिकेशन जारी किया गया है। इसके तहत कोचिंग संस्थानों के पंजीयन से लेकर शिक्षकों की योग्यता सुरक्षा व्यवस्था फीस की जानकारी और विद्यार्थियों की शिकायतों के समाधान तक कई महत्वपूर्ण प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं। इन नियमों का उद्देश्य कोचिंग संस्थानों की जवाबदेही बढ़ाना और विद्यार्थियों को सुरक्षित तथा बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराना है।

    प्रस्तावित नियमों के अनुसार हर कोचिंग सेंटर को अपनी वेबसाइट बनाकर विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए जरूरी जानकारियां सार्वजनिक करनी होंगी। इसमें कोचिंग की फीस का पूरा विवरण शिक्षकों की योग्यता उपलब्ध सुविधाएं और शिकायत निवारण व्यवस्था शामिल होगी। संस्थान को यह भी बताना होगा कि वहां किन परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है। इससे दाखिला लेने से पहले विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को कोचिंग सेंटर की व्यवस्था और खर्च की जानकारी मिल सकेगी। फीस और सुविधाओं को लेकर पारदर्शिता बढ़ाना इन प्रावधानों का प्रमुख उद्देश्य है।

    पंजीयन व्यवस्था के तहत कोचिंग संचालकों को निर्धारित समय सीमा में आवेदन करना होगा। प्रारूप के मुताबिक संस्थानों को नियम लागू होने के बाद 90 दिनों के भीतर पंजीयन के लिए आवेदन करना होगा। पंजीयन की अवधि तीन साल निर्धारित की गई है जिसके बाद उसका नवीनीकरण कराना जरूरी होगा। पंजीयन किसी दूसरे व्यक्ति या संस्थान को हस्तांतरित नहीं किया जा सकेगा। यदि किसी कोचिंग सेंटर की एक से अधिक शाखाएं हैं तो हर शाखा को अलग कोचिंग सेंटर माना जाएगा। इससे प्रत्येक शाखा की सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था की अलग निगरानी की जा सकेगी।

    विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए कोचिंग परिसरों में निर्धारित उपयुक्त स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना जरूरी होगा। हालांकि निगरानी के नाम पर विद्यार्थियों की निजता से समझौता नहीं किया जा सकेगा। शौचालयों चेंजिंग रूम और परामर्श कक्ष जैसे संवेदनशील स्थानों पर रिकॉर्डिंग की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा संस्थानों को पर्याप्त बैठने की व्यवस्था स्वच्छ पेयजल साफ-सफाई प्राथमिक उपचार और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के इंतजाम करने होंगे। आगंतुकों का रिकॉर्ड रखने और सुरक्षा प्रोटोकॉल की नियमित समीक्षा करने पर भी जोर दिया गया है।

    शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर भी प्रावधान किए गए हैं। प्रारूप के अनुसार ट्यूटर बनने के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता स्नातक निर्धारित की गई है। संस्थानों को प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मचारियों और मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए योग्य परामर्शदाताओं की व्यवस्था भी करनी होगी। विद्यार्थियों को परीक्षा और प्रतियोगिता के दबाव से निपटने में मदद देने के लिए मानसिक स्वास्थ्य और करियर काउंसलिंग पर विशेष जोर दिया गया है। नियमित परामर्श सत्र आयोजित करने और अभिभावकों के साथ संवाद बनाए रखने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।

    नियमों में प्रवेश और पढ़ाई के दौरान धर्म मूलवंश जाति लिंग जन्मस्थान या अन्य आधारों पर किसी विद्यार्थी के साथ भेदभाव नहीं करने का प्रावधान है। इन आधारों पर विद्यार्थियों का अलग बैच बनाने पर भी रोक लगाने की बात कही गई है। विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों के लिए परिसर को दिव्यांग-अनुकूल बनाने और शिक्षकों को उनके प्रति संवेदनशील रखने पर जोर दिया गया है।

    पंजीयन या नवीनीकरण का आवेदन अस्वीकार होने अथवा पंजीयन रद्द या निलंबित किए जाने की स्थिति में अपील का अधिकार भी दिया गया है। संबंधित आदेश की सूचना मिलने के 30 दिनों के भीतर संभागायुक्त के समक्ष अपील की जा सकेगी। प्रारूप में सुनवाई के बाद 45 दिनों के भीतर अपील का निपटारा करने का उल्लेख है।

    इन प्रस्तावित नियमों से विद्यार्थियों और अभिभावकों को कोचिंग चुनने से पहले फीस शिक्षकों की योग्यता सुविधाओं और सुरक्षा इंतजामों की जानकारी मिल सकेगी। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य सहायता और शिकायतों के समाधान की औपचारिक व्यवस्था विकसित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी से ही यह स्पष्ट होगा कि कोचिंग संस्थानों में पारदर्शिता और विद्यार्थियों की सुरक्षा को कितना मजबूत बनाया जा सकेगा।

  • विदिशा में मौत बनकर दौड़ी 11 हजार वोल्ट की बिजली बुजुर्ग हाईटेंशन तार से चिपके और मौके पर तोड़ा दम

    विदिशा में मौत बनकर दौड़ी 11 हजार वोल्ट की बिजली बुजुर्ग हाईटेंशन तार से चिपके और मौके पर तोड़ा दम


    विदिशा। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में बिजली विभाग की कथित लापरवाही के बीच एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। गंजबासौदा में तीसरी मंजिल के छज्जे पर खड़े होकर गुटखा थूकने के दौरान 65 वर्षीय बुजुर्ग 11 केवी की हाईटेंशन बिजली लाइन की चपेट में आ गए। करंट का झटका इतना तेज था कि वह बुरी तरह झुलस गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद इलाके में अफरा तफरी मच गई और स्थानीय लोगों में बिजली विभाग के प्रति नाराजगी देखने को मिली। लोगों का आरोप है कि खतरनाक बिजली लाइन को हटाने के लिए कई बार शिकायत की गई थी लेकिन समय रहते कार्रवाई नहीं हुई।

    यह घटना शुक्रवार दोपहर करीब एक बजे गंजबासौदा शहर के वार्ड नंबर 6 स्थित गायत्री नगर में हुई। जानकारी के मुताबिक 65 वर्षीय प्रभुलाल गुप्ता मकान की तीसरी मंजिल के छज्जे पर खड़े थे। इसी दौरान उन्होंने गुटखा थूकने की कोशिश की और पास से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गए। बिजली का करंट लगने से वह बुरी तरह झुलस गए। हादसे के बाद उनका शरीर मकान के छज्जे की संरचना में फंसकर लटक गया। घटना इतनी भयावह थी कि आसपास मौजूद लोग कुछ देर के लिए सहम गए। बुजुर्ग की मौके पर ही मौत हो गई।

    हादसे की सूचना मिलते ही आसपास के लोगों की भीड़ जमा हो गई। स्थानीय लोगों ने बिजली विभाग को जानकारी दी जिसके बाद हाईटेंशन लाइन की बिजली बंद कराई गई। सूचना मिलने पर डायल 112 की टीम और गंजबासौदा शहर थाना पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रभुलाल गुप्ता मूल रूप से छतरपुर जिले के रहने वाले थे और पिछले करीब दस वर्षों से गंजबासौदा में किराए के मकान में रह रहे थे। उनकी मौत की खबर सामने आने के बाद इलाके में शोक का माहौल बन गया।

    घटना के बाद बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। मकान मालकिन पदमा चिढ़ार ने बताया कि मकान के पास से गुजर रही हाईटेंशन लाइन को हटाने के लिए संबंधित अधिकारियों से कई बार मांग की गई थी। उनके मुताबिक अधिकारियों ने लाइन हटाने का आश्वासन दिया था लेकिन इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। स्थानीय लोगों का कहना है कि रिहायशी इलाके में घरों के बेहद करीब से गुजर रही हाईटेंशन लाइन लोगों की जान के लिए खतरा बनी हुई है।

    वार्ड पार्षद मनीष विश्वकर्मा ने भी बिजली विभाग पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र में बिजली के खंभों तारों और डीपी के रखरखाव पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कई मकानों के नजदीक से 11 केवी की लाइन गुजर रही है। कुछ स्थानों पर निर्माणाधीन मकानों के ऊपर से भी बिजली की लाइन बेहद करीब से निकल रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक इस समस्या को लेकर पहले भी कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकला।
    वार्ड पार्षद मनीष विश्वकर्मा ने भी बिजली विभाग पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र में बिजली के खंभों तारों और डीपी के रखरखाव पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कई मकानों के नजदीक से 11 केवी की लाइन गुजर रही है। कुछ स्थानों पर निर्माणाधीन मकानों के ऊपर से भी बिजली की लाइन बेहद करीब से निकल रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक इस समस्या को लेकर पहले भी कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकला।

    इस दर्दनाक हादसे ने रिहायशी इलाकों में बिजली की खतरनाक लाइनों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि स्थानीय लोगों की शिकायतों के बावजूद लाइन हटाने या सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम करने में देरी हुई है तो इसकी जिम्मेदारी तय करना जरूरी होगा। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने मांग की है कि क्षेत्र में गुजर रही हाईटेंशन लाइनों का निरीक्षण कराया जाए और जहां भी खतरा है वहां तत्काल सुरक्षा के उपाय किए जाएं ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।

  • MP: धार-झाबुआ जिले को बड़ी सौगात…. 260 गांवों के 72 हजार किसानों के खेतों में नर्मदा के पानी से होगी सिंचाई

    MP: धार-झाबुआ जिले को बड़ी सौगात…. 260 गांवों के 72 हजार किसानों के खेतों में नर्मदा के पानी से होगी सिंचाई


    धार।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने धार और झाबुआ (Dhar and Jhabua) जिले के किसानों को बड़ी सौगात दी. उन्होंने 2387.60 करोड़ रुपये की लागत वाली नर्मदा-झाबुआ-पेटलावद-थांदला-सरदारपुर माइक्रो लिफ्ट सिंचाई परियोजना (Narmada-Jhabua-Petlawad-Thandla-Sardarpur Micro Lift Irrigation Project) का उद्घाटन किया. इस परियोजना से दोनों जिलों के 260 गांवों में 57 हजार 422 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई होगी. इससे करीब 72 हजार किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

    मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान परियोजना के रूट मैप की समीक्षा की और शिलान्यास किया. इसके साथ ही 188 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत लाभार्थियों के खातों में 317.86 करोड़ रुपये भी ट्रांसफर किए गए।


    72 हजार किसानों को मिलेगा फायदा

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में सरदार सरोवर बांध के बाद धार-झाबुआ क्षेत्र को विभिन्न परियोजनाओं के जरिए नर्मदा का पानी मिल रहा है. इसी कड़ी में माइक्रो लिफ्ट सिंचाई परियोजना किसानों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी. उन्होंने कहा कि सूखे खेतों को पानी मिलने से फसलों की पैदावार और किसानों की समृद्धि बढ़ेगी. राज्य सरकार का लक्ष्य कृषि और उद्योग सहित हर क्षेत्र में विकास करना है.


    मध्य प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़ाने का लक्ष्य

    मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2002-03 तक मध्य प्रदेश में केवल 7.5 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती थी. उनके मुताबिक, भाजपा सरकार बनने के बाद वर्ष 2023 तक यह क्षेत्र बढ़कर 40 लाख हेक्टेयर हो गया. उन्होंने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में राज्य में सिंचाई का रकबा बढ़ाकर 60 लाख हेक्टेयर किया गया है. अब सरकार इसे 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर काम कर रही है।


    पीएम मित्र पार्क से 6 लाख कपास किसानों को फायदा

    मुख्यमंत्री ने धार में प्रस्तावित पीएम मित्र पार्क का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इस परियोजना से निमाड़-मालवा क्षेत्र के करीब 6 लाख कपास उत्पादक किसानों को लाभ मिलेगा. पीएम मित्र पार्क में एक ही जगह कपास से धागा, धागे से कपड़ा और कपड़े से रेडीमेड गारमेंट्स बनाने की व्यवस्था विकसित की जाएगी. मुख्यमंत्री के मुताबिक, इससे 3 लाख लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे. उन्होंने कहा कि इससे धार और झाबुआ के युवाओं, किसानों और महिलाओं को रोजगार के लिए पलायन करने की मजबूरी कम करने में मदद मिलेगी।


    धार को मिली सड़क, पुल और स्वास्थ्य सुविधाओं की सौगात

    मुख्यमंत्री ने बताया कि धार जिले में करीब 2,400 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात दी गई है. इनमें माइक्रो लिफ्ट सिंचाई परियोजना, 25 करोड़ रुपये की लागत वाले चार पुल, 15 करोड़ रुपये की स्कूल इमारत और 50 बिस्तरों वाला अस्पताल शामिल हैं. इसके अलावा 188 करोड़ रुपये की लागत वाली 35 नई परियोजनाओं का शिलान्यास भी किया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि धार को जल्द ही मेडिकल कॉलेज की सुविधा भी मिलेगी. उन्होंने यह भी कहा कि जिले में सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी का विस्तार हो रहा है।


    अमका-झमका माता स्थल को तीर्थ के रूप में विकसित करने की तैयारी

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने धार जिले के अमका-झमका माता स्थल का भी उल्लेख किया. मान्यता है कि भगवान कृष्ण ने इसी स्थान पर रुक्मिणी से विवाह किया था. मुख्यमंत्री ने बताया कि इस स्थल को श्री कृष्ण पाथेय योजना में शामिल कर तीर्थ स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है।


    किसानों को मिलेंगी साल में तीन फसलें: कैलाश विजयवर्गीय

    शहरी विकास एवं आवास मंत्री और धार जिले के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि मुख्यमंत्री ने राज्य में 100 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई का लक्ष्य तय किया है. उन्होंने दावा किया कि माइक्रो लिफ्ट सिंचाई परियोजना से क्षेत्र के किसान नर्मदा और माही नदियों के पानी का इस्तेमाल कर साल में एक के बजाय तीन फसलें ले सकेंगे।

    केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश सरकार महिला सशक्तिकरण और युवाओं के कौशल विकास सहित तमाम क्षेत्रों में काम कर रही है।

    महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने बताया कि परियोजना के माध्यम से झाबुआ, पेटलावद, थांदला और सरदारपुर में नर्मदा का पानी उपलब्ध कराया जाएगा. उन्होंने कहा कि कुछ इलाके अभी परियोजना से छूट गए हैं, जिन्हें जल्द ही इसमें शामिल किया जाएगा।

  • MP में 28 अक्टूबर को भारी बारिश की चेतावनी, शहडोल समेत 5 जिलों में आसार

    MP में 28 अक्टूबर को भारी बारिश की चेतावनी, शहडोल समेत 5 जिलों में आसार


    भोपाल। मध्य प्रदेश में दिवाली से पहले मौसम एक बार फिर करवट लेने वाला है। मौसम विभाग ने 28 अक्टूबर को प्रदेश के पूर्वी हिस्से में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय निम्न दबाव क्षेत्र के मजबूत होकर डिप्रेशन में बदलने की संभावना है, जिसका असर मध्य प्रदेश में भी दिखाई देगा। इस बीच बारिश का दौर थमने से रात में ठंडक बढ़ गई है। कटनी के करौंदी में न्यूनतम तापमान 12.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    मौसम विभाग के मुताबिक, अगले तीन दिन प्रदेश में बारिश की संभावना नहीं है। इसके बाद 28 अक्टूबर को मौसम बदलेगा और प्रदेश के करीब आधे हिस्से में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है। शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट में भारी बारिश के आसार हैं।

    5 जिलों में भारी बारिश, कई जगह गरज-चमक की संभावना

    28 अक्टूबर को प्रदेश के पूर्वी और उत्तरी हिस्सों के कई जिलों में मौसम का असर देखने को मिल सकता है। ग्वालियर, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना और अशोकनगर में बादल छाने के साथ गरज-चमक और बूंदाबांदी की संभावना है।

    इसके अलावा जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, उमरिया, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में भी मौसम बदल सकता है। इन जिलों में बादल छाने, गरज-चमक और हल्की बारिश के आसार हैं।

    वहीं, भोपाल, इंदौर, नर्मदापुरम और उज्जैन संभाग में मौसम साफ रहने का अनुमान है। इन क्षेत्रों में दिन के समय धूप खिल सकती है।

    बंगाल की खाड़ी में सक्रिय सिस्टम से बदलेगा मौसम

    मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक निम्न दबाव क्षेत्र सक्रिय है। इसके आने वाले दिनों में मजबूत होकर डिप्रेशन में बदलने की संभावना है। इसी सिस्टम के प्रभाव से 28 अक्टूबर को मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश हो सकती है।

    अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में बारिश के साथ रात के तापमान में गिरावट का असर भी बने रहने का अनुमान है। ऐसे में दिवाली से पहले प्रदेश के कुछ इलाकों में बारिश और ठंडक दोनों महसूस हो सकती हैं।

    रात में बढ़ी ठंड, करौंदी में पारा 12.1 डिग्री

    प्रदेश में बारिश थमने के बाद रात के तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है। बीती रात कटनी जिले के करौंदी में न्यूनतम तापमान 12.1 डिग्री सेल्सियस रहा, जो प्रदेश में सबसे कम दर्ज किया गया।

    इंदौर में न्यूनतम तापमान 13.4 डिग्री, अमरकंटक में 13.6 डिग्री, दमोह और पचमढ़ी में 14 डिग्री तथा शाजापुर और बैतूल में 14.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

    दिन में भी गिरा पारा, कई शहरों में तापमान 30 डिग्री से नीचे

    रात के साथ दिन के तापमान में भी गिरावट देखने को मिल रही है। प्रदेश के ज्यादातर शहरों में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से नीचे बना हुआ है।

    अमरकंटक, मलाजखंड, शिवपुरी, बैतूल और पचमढ़ी में अधिकतम तापमान 27.4 से 29.4 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया। मौसम में इस बदलाव से दिन की गर्मी से भी राहत मिल रही है।

    मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में नए मौसम सिस्टम का असर प्रदेश के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। इसके चलते बारिश की संभावना के साथ रात के तापमान में भी गिरावट हो सकती है।

  • मध्य प्रदेश एफडीए ने पतंजलि के गाय घी के एक बैच को असुरक्षित बताया, बाजार से वापस मंगाने का आदेश

    मध्य प्रदेश एफडीए ने पतंजलि के गाय घी के एक बैच को असुरक्षित बताया, बाजार से वापस मंगाने का आदेश

    मध्य प्रदेश: खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने पतंजलि फूड्स लिमिटेड के गाय के घी के एक विशेष बैच को असुरक्षित बताते हुए बाजार से वापस मंगाने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप नमूना नहीं पाए जाने के बाद की गई। कंपनी ने इस संबंध में जानकारी देते हुए कहा है कि वह नियामक के आदेश के खिलाफ अपील दायर करेगी। मामले में कार्रवाई बुरहानपुर जिले में संबंधित बैच को लेकर की गई है।

    कंपनी के अनुसार, मध्य प्रदेश एफडीए ने गाय के घी के संबंधित बैच का नमूना लेकर जांच कराई थी। जांच में नमूना खाद्य सुरक्षा एवं मानक नियमों के तहत निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरा। इसके बाद नियामक ने संबंधित उत्पाद को वापस मंगाने का निर्देश जारी किया। यह मामला खाद्य सुरक्षा एवं मानक विनियम, 2011 के तहत निर्धारित प्रावधानों से जुड़ा है। इन नियमों में खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा से संबंधित मानक तय किए गए हैं।

    पतंजलि फूड्स ने स्पष्ट किया है कि वह मध्य प्रदेश एफडीए के नामित अधिकारी द्वारा जारी आदेश को चुनौती देने के लिए अपील दायर कर रही है। कंपनी का कहना है कि इस कार्रवाई से उसके वित्तीय और परिचालन कारोबार पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की आशंका नहीं है। उसके मुताबिक, संभावित प्रभाव संबंधित गाय के घी के बैच के मूल्य तक सीमित रहेगा। हालांकि, नियामक की कार्रवाई के बाद संबंधित बैच को बाजार से वापस मंगाने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है।

    इस घटनाक्रम के बीच कंपनी के शेयर में भी गिरावट दर्ज की गई। उपलब्ध शेयर बाजार आंकड़ों के मुताबिक, शुक्रवार को पतंजलि फूड्स का शेयर बीएसई पर एक प्रतिशत से अधिक गिरावट के साथ 351 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 52 सप्ताह के दौरान शेयर ने 613.95 रुपये का उच्चतम और 328.05 रुपये का न्यूनतम स्तर दर्ज किया। एक साल की अवधि में कंपनी के शेयर में करीब 41 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि तीन वर्षों में इसमें लगभग 16 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। हालांकि, पांच साल की अवधि में शेयर ने करीब पांच प्रतिशत का सकारात्मक रिटर्न दिया है।

    पतंजलि फूड्स इससे पहले भी खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर नियामकीय कार्रवाई का सामना कर चुकी है। जून में कंपनी के ज्वार के आटे के एक विशेष बैच को लेकर विवाद सामने आया था। उस समय केरल के कन्नूर जिले के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने जांच में कीटनाशक अवशेष निर्धारित सीमा से अधिक पाए जाने के बाद संबंधित बैच की बिक्री पर रोक लगा दी थी।

    उस मामले में भी कंपनी ने नियामकीय जानकारी साझा करते हुए बताया था कि उसे कन्नूर जिला खाद्य सुरक्षा कार्यालय से ज्वार के आटे के एक विशेष बैच की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने संबंधी आदेश मिला है। मौजूदा मामले में भी कार्रवाई किसी खास बैच तक सीमित बताई गई है। इसलिए उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे कंपनी के सभी गाय के घी उत्पादों पर लागू कार्रवाई नहीं माना जा सकता।

    मध्य प्रदेश में हुई इस कार्रवाई के बाद संबंधित बैच की वापसी और कंपनी की प्रस्तावित अपील पर आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल कंपनी ने वित्तीय और परिचालन प्रभाव को सीमित बताया है, जबकि नियामक की जांच में संबंधित घी के नमूने का निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरना कार्रवाई का आधार बना है।

  • भोपाल में भूमिगत गैस लाइन में आग से मचा हड़कंप: छोला इलाके में ब्रिज के पास उठीं ऊंची लपटें; पुलिस ने भीड़ हटाई और फायर टीम ने पाया काबू

    भोपाल में भूमिगत गैस लाइन में आग से मचा हड़कंप: छोला इलाके में ब्रिज के पास उठीं ऊंची लपटें; पुलिस ने भीड़ हटाई और फायर टीम ने पाया काबू


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के छोला इलाके में शनिवार दोपहर थिंक गैस की भूमिगत पाइपलाइन में आग लगने से हड़कंप मच गया। घटना छोला ब्रिज के पास हुई जहां मेट्रो निर्माण का काम चल रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक जेसीबी से खुदाई के दौरान गैस पाइपलाइन में लीकेज हुआ और इसके बाद आग की लपटें उठने लगीं। बताया गया कि आग की लपटें करीब 10 फीट तक पहुंच रही थीं। अचानक लगी आग को देखकर आसपास मौजूद लोग घबरा गए और ब्रिज के पास लोगों की भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलने के बाद पुलिस और दमकल की टीम मौके पर पहुंची। दमकलकर्मियों ने आग बुझाने का प्रयास किया और संबंधित गैस कंपनी से पाइपलाइन की सप्लाई बंद कराई गई। गैस की आपूर्ति बंद होने के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया जा सका। घटना के बाद इलाके के लोगों ने राहत की सांस ली।
    दोपहर साढ़े 12 बजे के आसपास हुई घटना
    जानकारी के अनुसार घटना शनिवार दोपहर करीब साढ़े 12 बजे की है। छोला ब्रिज के पास से थिंक गैस की भूमिगत पीएनजी पाइपलाइन गुजरती है। इसी क्षेत्र में मेट्रो निर्माण से जुड़ा काम किया जा रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि खुदाई के दौरान जेसीबी से पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हुई और गैस का रिसाव शुरू हो गया। इसके बाद आग लग गई और लपटें तेजी से ऊपर उठने लगीं। हालांकि पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने के कारणों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। घटना के दौरान आग की ऊंची लपटें देखकर आसपास मौजूद लोग सतर्क हो गए और मौके पर अफरा तफरी का माहौल बन गया।
    पुलिस ने मौके पर पहुंचकर लोगों को हटाया
    गैस लाइन में आग लगने की सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची। ब्रिज के पास आग देखने के लिए लोगों की भीड़ जमा हो गई थी। स्थिति को देखते हुए पुलिसकर्मियों ने लोगों को घटनास्थल से दूर किया ताकि बचाव कार्य में किसी तरह की बाधा न आए। छोला फायर टीम के फायर फाइटर पंकज यादव सहित अन्य कर्मचारियों ने आग बुझाने का मोर्चा संभाला। दमकलकर्मियों ने पानी की मदद से आग पर काबू पाने का प्रयास किया। लेकिन गैस लाइन से रिसाव जारी रहने की स्थिति में आग को पूरी तरह बुझाना चुनौतीपूर्ण हो सकता था। ऐसे में गैस कंपनी से संपर्क कर लाइन बंद कराई गई।
    गैस सप्लाई बंद होने के बाद बुझी आग
    जानकारी के मुताबिक थिंक गैस कंपनी से पाइपलाइन की सप्लाई बंद कराई गई। इसके बाद दमकल टीम आग पर पूरी तरह काबू पाने में सफल रही। आग बुझने के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने राहत महसूस की। घटना में किसी के हताहत होने या घायल होने की जानकारी खबर में नहीं दी गई है। हालांकि इस तरह की घटनाओं में गैस रिसाव के कारण आग दोबारा भड़कने का खतरा बना रह सकता है इसलिए पाइपलाइन की जांच और सुरक्षा व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जाती है।
    पहले भी सामने आ चुका है गैस लाइन लीकेज का मामला
    भोपाल में गैस पाइपलाइन लीकेज की यह पहली घटना नहीं है। खबर के अनुसार कुछ महीने पहले शाहपुरा थाने के सामने भी गैस लाइन में लीकेज हुआ था। छोला ब्रिज के पास हुई ताजा घटना ने निर्माण कार्य के दौरान भूमिगत पाइपलाइन की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं। मेट्रो और अन्य निर्माण परियोजनाओं के दौरान जमीन के नीचे मौजूद गैस तथा दूसरी उपयोगी सेवाओं की पाइपलाइन को नुकसान से बचाना जरूरी है। ऐसे मामलों में खुदाई से पहले संबंधित लाइनों की सही पहचान और सुरक्षा संबंधी सावधानियां बरतना महत्वपूर्ण होता है। फिलहाल छोला ब्रिज के पास लगी आग पर काबू पा लिया गया है और घटना के कारणों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

  • इंस्टाग्राम पर दोस्ती फिर ब्लैकमेलिंग का आरोप: ग्वालियर में नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के मामले में FIR दर्ज; आरोपी की तलाश में जुटी पुलिस

    इंस्टाग्राम पर दोस्ती फिर ब्लैकमेलिंग का आरोप: ग्वालियर में नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के मामले में FIR दर्ज; आरोपी की तलाश में जुटी पुलिस


    ग्वालियर  मध्य प्रदेश के ग्वालियर में नीट की तैयारी कर रही 17 वर्षीय छात्रा के साथ दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि इंस्टाग्राम पर दोस्ती करने वाले युवक ने छात्रा को होटल में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया और इस दौरान उसके निजी वीडियो बना लिए। इसके बाद आरोपी वीडियो इंटरनेट पर वायरल करने की धमकी देकर छात्रा को डराता रहा और उसका शोषण करता रहा। मामला तब सामने आया जब आरोपी ने छात्रा के निजी वीडियो उसके रिश्तेदारों के इंस्टाग्राम अकाउंट पर भेज दिए। घटना के बाद से छात्रा मानसिक रूप से परेशान है और बदनामी के डर से उसने कोचिंग जाना भी बंद कर दिया है। पीड़िता की शिकायत पर गोला का मंदिर थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।

    इंस्टाग्राम पर हुई थी युवक से पहचान

    पुलिस के मुताबिक गोला का मंदिर थाना क्षेत्र में रहने वाली 17 वर्षीय किशोरी 12वीं कक्षा की छात्रा है और नीट की परीक्षा की तैयारी कर रही है। छात्रा ने पुलिस को बताया कि करीब एक साल पहले इंस्टाग्राम के माध्यम से उसकी पहचान आरुष मिश्रा नाम के युवक से हुई थी। बातचीत बढ़ने के साथ दोनों के बीच दोस्ती हो गई। आरोप है कि 11 फरवरी 2026 को छात्रा रोज की तरह कोचिंग जाने के लिए घर से निकली थी। कॉलोनी के बाहर उसे आरुष मिला और घूमने के बहाने अपने साथ ग्वालियर किले ले गया। वहां से लौटने के दौरान छात्रा ने उसे कोचिंग छोड़ने के लिए कहा लेकिन आरोपी उसे टंकी तिराहे के पास स्थित दीप होटल ले गया।

    होटल में दुष्कर्म और वीडियो बनाने का आरोप

    शिकायत के अनुसार होटल में आरोपी ने छात्रा को जान से मारने की धमकी दी और उसके साथ दुष्कर्म किया। आरोप है कि इसी दौरान उसने छात्रा के निजी वीडियो भी बना लिए। घटना के बाद आरोपी ने वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी देकर छात्रा पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। छात्रा को डराया गया कि यदि उसने किसी को घटना के बारे में बताया या आरोपी से मिलने से इनकार किया तो वीडियो इंटरनेट पर वायरल कर दिए जाएंगे। इसी डर के चलते छात्रा ने काफी समय तक किसी को कुछ नहीं बताया। आरोप है कि आरोपी वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उसका लगातार शोषण करता रहा। शिकायत में यह भी बताया गया है कि एफआईआर दर्ज होने से करीब सात दिन पहले आरोपी ने छात्रा को दोबारा होटल बुलाया और उसके साथ दुष्कर्म किया।

    रिश्तेदारों को वीडियो भेजने के बाद खुला मामला

    बताया गया है कि तीन से चार दिन पहले आरोपी ने छात्रा के मामा और चाचा के इंस्टाग्राम अकाउंट पर उसके निजी वीडियो भेज दिए। रिश्तेदारों ने इसकी जानकारी छात्रा के पिता को दी। इसके बाद परिजनों ने छात्रा से बात की तो उसने रोते हुए पूरी घटना बताई। परिवार को मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। घटना के बाद छात्रा काफी डरी हुई है और उसने कोचिंग जाना बंद कर दिया है। परिजन उसे संभालने और मानसिक रूप से सहारा देने की कोशिश कर रहे हैं।

    POCSO और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज

    गोला का मंदिर थाना प्रभारी धर्मेंद्र यादव के अनुसार नाबालिग छात्रा की शिकायत पर आरोपी आरुष मिश्रा के खिलाफ दुष्कर्म पॉक्सो एक्ट और आईटी एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस की टीमें आरोपी की तलाश में दबिश दे रही हैं और उसे जल्द गिरफ्तार करने का प्रयास किया जा रहा है। मामले में पुलिस की जांच जारी है।

  • इंदौर में गर्मी से पहले जलसंकट से निपटने का मेगा प्लान, 6000 ट्यूबवेल सुधारेगा निगम; 100 नए टैंकर खरीदने की तैयारी

    इंदौर में गर्मी से पहले जलसंकट से निपटने का मेगा प्लान, 6000 ट्यूबवेल सुधारेगा निगम; 100 नए टैंकर खरीदने की तैयारी


    इंदौर । इंदौर में इस साल कम बारिश के कारण आगामी गर्मी में जलसंकट की आशंका बढ़ गई है। अप्रैल मई और जून के दौरान पानी की मांग में होने वाली बढ़ोतरी को देखते हुए नगर निगम ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। शहर में जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए करीब 6000 बोरिंग की सर्विसिंग कराई जाएगी और खराब मोटरों को बदला जाएगा। इसके साथ ही जरूरत पड़ने पर प्रभावित क्षेत्रों तक पानी पहुंचाने के लिए 100 नए टैंकर खरीदने की तैयारी है। निगम की योजना मालवा गंभीर और नर्मदा की लाइन से पानी लाकर नवंबर और दिसंबर में यशवंत सागर को भरने की भी है। इसके अलावा चार नई पानी की टंकियां चालू करने और जिन बस्तियों तक टैंकर नहीं पहुंच पाते वहां बोरिंग से जोड़कर नई वितरण लाइनें बिछाने की योजना बनाई गई है।

    नगर निगम का मानना है कि गर्मी शुरू होने से पहले मौजूदा जल स्रोतों को दुरुस्त करना जरूरी है ताकि नर्मदा जलप्रदाय पर दबाव बढ़ने की स्थिति में भी लोगों को स्थानीय स्तर पर पानी उपलब्ध कराया जा सके। इसके लिए शहर में संचालित करीब 6000 बोरिंग की जांच और सर्विसिंग कराई जाएगी। जिन बोरिंग में मोटरें पुरानी हो चुकी हैं या खराब हैं उन्हें बदलने की योजना है। इससे मौजूदा संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा और उन इलाकों में वैकल्पिक जलापूर्ति का सहारा मिलेगा जहां गर्मियों में पानी की मांग ज्यादा रहती है।

    जलकार्य प्रभारी अभिषेक शर्मा बबलू के मुताबिक निगम का ध्यान केवल पानी की उपलब्धता बढ़ाने पर ही नहीं बल्कि वितरण व्यवस्था को मजबूत बनाने पर भी है। गर्मी के दौरान जिन क्षेत्रों में पानी की समस्या अधिक होती है वहां वैकल्पिक इंतजाम तैयार किए जाएंगे। इसके लिए बोरिंग की मरम्मत के साथ टैंकरों और नई वितरण लाइनों की व्यवस्था पर काम किया जा रहा है ताकि जरूरत पड़ने पर प्रभावित बस्तियों तक पानी पहुंचाया जा सके।

    कम बारिश का असर यशवंत सागर में जमा पानी पर भी पड़ा है। इस बार जलाशय में उसकी क्षमता के मुकाबले कम पानी जमा होने से एरोड्रम रोड और आसपास के क्षेत्रों में गर्मियों के दौरान जलापूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। इसे देखते हुए नगर निगम नवंबर और दिसंबर में मालवा गंभीर तथा नर्मदा की लाइन के जरिए पानी लाकर यशवंत सागर को भरने का प्रयास करेगा। इसका उद्देश्य मई और जून में पानी की मांग बढ़ने से पहले जलाशय में पर्याप्त पानी उपलब्ध रखने की तैयारी करना है।

    पानी की आपूर्ति के लिए निगम करीब 100 नए टैंकर खरीदने की योजना पर भी काम कर रहा है। गर्मी में जिन क्षेत्रों में नियमित जलप्रदाय प्रभावित होगा वहां जरूरत के अनुसार टैंकरों से पानी पहुंचाया जा सकेगा। वहीं ऐसी बस्तियां जहां संकरी गलियों या अन्य कारणों से टैंकर नहीं पहुंच पाते वहां बोरिंग को जोड़कर नई वितरण लाइनें बिछाने की योजना है। इससे स्थानीय स्तर पर पानी पहुंचाने के विकल्प बढ़ेंगे और लोगों की परेशानी कम करने में मदद मिल सकती है।

    जल वितरण नेटवर्क को मजबूत करने के लिए गोंदवले धाम आजाद नगर नवलखा और यूनिवर्सिटी कैंपस की चार नई पानी की टंकियों को चालू करने की भी तैयारी है। इनके शुरू होने से संबंधित क्षेत्रों में जल वितरण व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है। इसके अलावा फलबाग में 30 एमएलडी क्षमता का सम्पवेल बनाया जा रहा है जिसे जनवरी तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तैयार होने से बीआरटीएस कॉरिडोर से गुजरने वाली 1700 एमएम की मुख्य लाइन और महिला पॉलिटेक्निक क्षेत्र के जल वितरण नेटवर्क को लाभ मिलने की उम्मीद है।

    नगर निगम की इन तैयारियों का मुख्य उद्देश्य गर्मी शुरू होने से पहले जलप्रदाय से जुड़े संसाधनों को दुरुस्त करना और पानी की बढ़ती मांग के अनुरूप व्यवस्था तैयार करना है। हालांकि योजनाओं का वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि मरम्मत टंकियों का संचालन और अन्य कार्य समय पर पूरे हो पाते हैं या नहीं। ऐसे में आने वाले महीनों में इन तैयारियों की प्रगति इंदौर की जलापूर्ति व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी।

  • पीथमपुर में नाबालिग किशोरी को बहला-फुसलाकर ले जाने का आरोप, पुलिस ने तलाश कर परिवार को सौंपा; पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज

    पीथमपुर में नाबालिग किशोरी को बहला-फुसलाकर ले जाने का आरोप, पुलिस ने तलाश कर परिवार को सौंपा; पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज


    इंदौर । धार जिले के पीथमपुर में लापता हुई 16 वर्षीय किशोरी को पुलिस ने तलाश कर उसके परिवार के पास पहुंचा दिया है। मामले में एक अन्य नाबालिग पर किशोरी को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाने और दुष्कर्म करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने किशोरी के बयान के आधार पर पॉक्सो एक्ट सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपी को पकड़ लिया है। इसके बाद उसे झाबुआ स्थित बाल संप्रेषण गृह भेज दिया गया। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

    पुलिस के मुताबिक किशोरी 12 अक्टूबर 2026 को लापता हुई थी। इस संबंध में जानकारी मिलने के बाद पीथमपुर के सेक्टर-1 थाना पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर टीम गठित की गई। टीम ने किशोरी का पता लगाने के लिए प्रयास किए और आखिरकार उसे खोज लिया। इसके बाद पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई पूरी करते हुए किशोरी को उसके परिवार के सुपुर्द कर दिया।

    सेक्टर-1 थाने के उपनिरीक्षक सुशील यदुवंशी ने बताया कि आरोपी नाबालिग पर 12 अक्टूबर को किशोरी को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाने का आरोप है। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने तलाश अभियान चलाया। किशोरी के मिलने पर उसके बयान दर्ज किए गए। इन्हीं बयानों के आधार पर दुष्कर्म के आरोप और पॉक्सो एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया गया।

    पुलिस ने मामले में आरोपित नाबालिग को भी पकड़ लिया है। चूंकि आरोपी नाबालिग है इसलिए उसे झाबुआ के बाल संप्रेषण गृह भेजा गया है। पुलिस अब मामले से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों की जांच कर रही है। अधिकारियों के अनुसार जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

    इस मामले में किशोरी की सुरक्षित बरामदगी पुलिस के लिए महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि घटना से जुड़े आरोपों की पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होगी। पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है और मामले के सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। नाबालिग से जुड़े मामले में पीड़िता की पहचान और उसकी निजता सुरक्षित रखना भी आवश्यक है।

  • इंदौर में सड़क निर्माण से सफाई तक महापौर का एक्शन, मनीषपुरी रोड पर काम पूरा करने के लिए 30 दिन का समय; लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी

    इंदौर में सड़क निर्माण से सफाई तक महापौर का एक्शन, मनीषपुरी रोड पर काम पूरा करने के लिए 30 दिन का समय; लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी


    इंदौर । इंदौर में सड़क निर्माण की धीमी रफ्तार और सफाई व्यवस्था में लापरवाही को लेकर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने सख्त रुख अपनाया है। शनिवार को मनीषपुरी क्षेत्र के निरीक्षण के दौरान उन्होंने मनीषपुरी रोड का काम तय समय पर पूरा नहीं होने पर नाराजगी जताई और अधिकारियों को शेष निर्माण कार्य 30 दिन के भीतर पूरा करने का अल्टीमेटम दिया। महापौर ने स्पष्ट किया कि निर्धारित समयसीमा में काम पूरा नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाया जाएगा। उन्होंने दीपावली के बाद सड़क के लोकार्पण की तारीख तय करने और उससे पहले सभी जरूरी काम पूरे करने के निर्देश भी दिए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने डामरीकरण पेचवर्क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और क्षेत्र की सफाई व्यवस्था का जायजा लिया।

    महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मनीषपुरी रोड के निर्माण कार्यों की स्थिति जानने के लिए अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर से जानकारी ली। उन्होंने कहा कि अधिकारी केवल दफ्तरों में बैठकर काम की समीक्षा न करें बल्कि निर्माण स्थलों पर पहुंचकर नियमित निगरानी करें। सड़क निर्माण में गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्य का उद्देश्य केवल औपचारिकता पूरी करना नहीं बल्कि लोगों को टिकाऊ और बेहतर सड़क उपलब्ध कराना होना चाहिए।

    निरीक्षण के दौरान महापौर ने कनेक्टिंग सड़कों पर बनाए जा रहे रैंप की व्यवस्था पर भी ध्यान देने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि रैंप इस तरह तैयार किए जाएं जिससे बारिश के दौरान पानी जमा न हो और स्थानीय रहवासियों को आवागमन में परेशानी का सामना न करना पड़े। सड़क निर्माण के साथ जल निकासी की व्यवस्था को भी जरूरी बताते हुए उन्होंने अधिकारियों को काम की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।

    शहर में डामरीकरण और पेचवर्क की धीमी गति पर भी महापौर ने असंतोष जताया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि गड्ढों और खराब सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त किया जाए ताकि लोगों को आवागमन में राहत मिल सके। पेचवर्क की गुणवत्ता का निरीक्षण करते हुए उन्होंने खराब काम पर नाराजगी जताई और संबंधित इंजीनियरों तथा निगरानी अधिकारियों को नियमित जांच करने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि सड़कों की मरम्मत इस तरह होनी चाहिए कि कुछ ही समय बाद दोबारा गड्ढों की समस्या सामने न आए।

    मनीषपुरी में सफाई व्यवस्था को लेकर स्थानीय पार्षद मुद्रा शास्त्री ने भी महापौर के सामने समस्याएं रखीं। उन्होंने बताया कि पुराने दरोगा को हटाकर नए दरोगा की तैनाती किए जाने के बाद क्षेत्र की सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है। नए कर्मचारी को इलाके और कामकाज की व्यवस्था समझने में समय लग रहा है। इसके अलावा कुछ कर्मचारियों के समय पर नहीं पहुंचने और संसाधनों की कमी के कारण भी सफाई कार्य प्रभावित होने की शिकायत की गई।

    इस पर महापौर ने अपर आयुक्त प्रखर सिंह से फोन पर चर्चा की और तत्काल सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रहवासी नियमित सफाई नहीं होने की शिकायत कर रहे हैं और मनीषपुरी जैसे क्षेत्र में भी व्यवस्था प्रभावित होना गंभीर विषय है। उन्होंने संबंधित सीएसआई और दरोगा के खिलाफ कार्रवाई करने के साथ सफाई व्यवस्था की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा।

    निरीक्षण के दौरान महापौर ने जल संरक्षण पर भी जोर दिया। उन्होंने रहवासियों को पानी की बर्बादी रोकने की समझाइश दी और उन्हें जल संरक्षण की शपथ दिलाई। उन्होंने नागरिकों से पानी का अनावश्यक उपयोग नहीं करने और उपलब्ध जल संसाधनों का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने की अपील की। साथ ही नगर निगम के उन कर्मचारियों की सराहना की जो चुनौतीपूर्ण कार्यों को कम समय में पूरा कर रहे हैं। महापौर के इस निरीक्षण के बाद अब मनीषपुरी रोड के निर्माण और सफाई व्यवस्था में निर्धारित समय के भीतर सुधार लाने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों पर होगी।