Category: Madhya Pradesh

  • लापता महिलाओं और बच्चों की तलाश पर हाई कोर्ट का बड़ा सवाल: कितने केस लंबित, पुलिस ने अब तक क्या किया?

    लापता महिलाओं और बच्चों की तलाश पर हाई कोर्ट का बड़ा सवाल: कितने केस लंबित, पुलिस ने अब तक क्या किया?


    इंदौर। इंदौर जिले में महिलाओं और बच्चों के लापता होने के मामलों को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने वर्ष 2021 से अब तक लापता हुई महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों का विस्तृत रिकॉर्ड राज्य सरकार से मांगा है। डबल बेंच ने सरकार और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए यह बताने को कहा है कि इस अवधि में कितने लोग लापता हुए हैं। इनमें से कितनों को पुलिस बरामद कर चुकी है और कितने मामले अभी भी लंबित हैं। अदालत ने उन मामलों की वर्तमान स्थिति की जानकारी भी मांगी है जिनमें अब तक लापता महिलाओं और बच्चों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

    यह मामला एक जनहित याचिका से जुड़ा है जिसमें इंदौर जिले में महिलाओं और बच्चों के लगातार लापता होने तथा उनकी तलाश में देरी का मुद्दा उठाया गया है। याचिका में कहा गया है कि सिर्फ लापता होने के मामलों की संख्या सामने रखना पर्याप्त नहीं है बल्कि यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि पुलिस और प्रशासन ने उनकी तलाश के लिए अब तक क्या कार्रवाई की है। खासतौर पर लंबे समय से लंबित मामलों में जांच किस स्तर पर पहुंची है और संबंधित अधिकारियों ने उन्हें सुलझाने के लिए क्या प्रयास किए हैं इसकी जानकारी भी सामने आनी चाहिए। अदालत के निर्देश के बाद अब सरकार को इन सभी पहलुओं पर जवाब देना होगा।

    याचिकाकर्ता की ओर से लापता महिलाओं और बच्चों के मामलों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग भी की गई है। याचिका में तर्क दिया गया है कि ऐसे मामलों की नियमित और स्वतंत्र समीक्षा जरूरी है ताकि यह पता चल सके कि पुलिस की कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ रही है और किन मामलों में अतिरिक्त प्रयास की जरूरत है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के स्तर पर इन प्रकरणों की समय समय पर समीक्षा करने की मांग भी रखी गई है। साथ ही एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को अधिक प्रभावी बनाने और पुलिस प्रशासन तथा दूसरे संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताई गई है।

    मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि लापता महिलाओं और बच्चों की तलाश केवल एक सामान्य पुलिस प्रक्रिया नहीं बल्कि उनकी सुरक्षा और गरिमा से जुड़ा संवेदनशील विषय है। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और गरिमा के अधिकार का भी उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि किसी महिला या बच्चे के लापता होने के बाद शुरुआती समय में तेजी से कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण होती है। लंबे समय तक मामला लंबित रहने पर परिवार की चिंता बढ़ने के साथ तलाश की प्रक्रिया भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

    इस मामले में विशेषज्ञ समिति बनाने के साथ केंद्र सरकार की ओर से जारी दिशा निर्देशों के प्रभावी पालन की मांग भी की गई है। अदालत से यह आग्रह किया गया है कि लापता महिलाओं और बच्चों के मामलों की निगरानी के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए और जिलेवार आंकड़ों को नियमित रूप से सामने लाया जाए। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार याचिका में सरकारी आंकड़ों की उपलब्धता और उन्हें सार्वजनिक किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

    अब हाई कोर्ट के नोटिस के बाद राज्य सरकार और संबंधित विभागों को वर्ष 2021 से अब तक के मामलों का विस्तृत ब्यौरा अदालत के सामने रखना होगा। इसमें लापता महिलाओं और बच्चों की संख्या बरामदगी की स्थिति लंबित मामलों की संख्या और उनकी तलाश के लिए की गई कार्रवाई शामिल हो सकती है। आगामी सुनवाई में इन आंकड़ों के सामने आने के बाद यह तस्वीर और स्पष्ट होगी कि इंदौर जिले में लापता महिलाओं और बच्चों के मामलों में पुलिस की कार्रवाई किस स्थिति में है और लंबे समय से लंबित मामलों को लेकर आगे क्या कदम उठाए जा सकते हैं।

  • इंदौर नगर निगम ARO के दो ठिकानों पर लोकायुक्त का छापा, 31 साल की नौकरी में 80 लाख वेतन के मुकाबले मिली 2.53 करोड़ संपत्ति

    इंदौर नगर निगम ARO के दो ठिकानों पर लोकायुक्त का छापा, 31 साल की नौकरी में 80 लाख वेतन के मुकाबले मिली 2.53 करोड़ संपत्ति

    मध्य प्रदेश। के इंदौर में लोकायुक्त पुलिस ने नगर पालिक निगम के सहायक राजस्व अधिकारी जितेंद्र कुमार पांडेय के दो ठिकानों पर एक साथ छापेमार कार्रवाई की है। कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों से जुड़ी है। जांच के दौरान अधिकारी के 31 वर्ष के सेवाकाल में प्राप्त अनुमानित वेतन और सामने आए कुल व्यय के बीच बड़ा अंतर पाया गया है।

    लोकायुक्त के अनुसार जितेंद्र कुमार पांडेय को पूरे सेवाकाल में करीब 80 लाख रुपये का अनुमानित वेतन प्राप्त हुआ। इसके मुकाबले जांच में करीब 2.53 करोड़ रुपये की संपत्ति और व्यय का पता चलने की बात सामने आई है। प्रारंभिक गणना के अनुसार यह राशि उनकी वैध आय से करीब 1.73 करोड़ रुपये अधिक बताई गई है।

    जांच एजेंसी के मुताबिक यह अंतर अनुमानित वैध आय की तुलना में 216.35 प्रतिशत अधिक है। इसी आधार पर अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। कार्रवाई के दौरान संपत्तियों और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

    लोकायुक्त की टीम ने इंदौर में अधिकारी से जुड़े दो ठिकानों पर एक साथ तलाशी शुरू की। जांच में सामने आया कि अधिकारी की पत्नी भावना पांडेय के नाम पर आनंद नगर एक्सटेंशन, नवलखा चितावद और गजाधर नगर क्षेत्र में संपत्तियां होने की जानकारी मिली है।

    एक संपत्ति पर जी प्लस तीन मंजिला भवन का निर्माण किए जाने की बात सामने आई है। यह भवन 40 बाय 50 आकार के भूखंड पर बनाया गया है। जांच के अनुसार इस निर्माण पर करीब 1.20 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का अनुमान लगाया गया है। लोकायुक्त टीम अब निर्माण लागत और संपत्ति के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है।

    इसी तरह गजाधर नगर, चितावद क्षेत्र में गुलमोहर का बगीचा इलाके में एक अन्य भूखंड पर जी प्लस दो मंजिला भवन का निर्माण पाया गया है। इस भवन में छात्रावास संचालित किए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच के मुताबिक इस निर्माण पर करीब 91.50 लाख रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है।

    लोकायुक्त की प्रारंभिक जांच में अधिकारी की पत्नी, पुत्र और पुत्री के नाम से चार पहिया और दो पहिया वाहन खरीदे जाने तथा अन्य खर्चों की जानकारी भी सामने आई है। इन मदों में करीब 14 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है।

    अधिकारी की संपत्तियों और खर्चों का आकलन करने के बाद लोकायुक्त टीम ने आय और व्यय के बीच अंतर को गंभीरता से लिया है। जांच अधिकारियों का कहना है कि तलाशी की कार्रवाई अभी जारी है और दस्तावेजों तथा अन्य संपत्तियों की विस्तृत जांच के बाद वास्तविक स्थिति और स्पष्ट होगी।

    कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर की गई। इंदौर लोकायुक्त पुलिस की टीम में उप पुलिस अधीक्षक सुनील तालान, उप पुलिस अधीक्षक आनंद चौहान, निरीक्षक आशुतोष मिठास और निरीक्षक सचिन पटेरिया सहित अन्य अधिकारी शामिल हैं। टीम दोनों ठिकानों पर दस्तावेजों, संपत्तियों और संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है।

    मामले में आगे की जांच के दौरान यह भी निर्धारित किया जाएगा कि सामने आई संपत्तियों और खर्चों का भुगतान किन माध्यमों से किया गया तथा उनकी वैध आय से उनका क्या संबंध है। तलाशी पूरी होने और दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही अनुपातहीन संपत्ति की अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल लोकायुक्त पुलिस की कार्रवाई जारी है और मामले में आगे कानूनी प्रक्रिया जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे बढ़ेगी।

  • हाथ में नहीं ठेले पर तिरंगा और साथ में सफाई का जज्बा, 70 साल के भोला ने पेश की देशभक्ति की मिसाल

    हाथ में नहीं ठेले पर तिरंगा और साथ में सफाई का जज्बा, 70 साल के भोला ने पेश की देशभक्ति की मिसाल


    इंदौर। इंदौर में गुरुवार को निकली राष्ट्रपथ तिरंगा यात्रा में हजारों लोग देशभक्ति के रंग में नजर आए। हाथों में तिरंगा लेकर लोग देशभक्ति के गीतों पर आगे बढ़ रहे थे। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के तक्षशिला परिसर से शुरू हुई यह यात्रा भंवरकुआं से राजीव गांधी चौराहे की ओर बढ़ रही थी। सड़कों पर जगह जगह तिरंगे दिखाई दे रहे थे और पूरा माहौल देशभक्ति से सराबोर था। लेकिन इस विशाल यात्रा के पीछे चल रहे एक बुजुर्ग ने अपने अलग अंदाज से लोगों का ध्यान खींच लिया।

    यात्रा का आखिरी हिस्सा भंवरकुआं चौराहा पार कर चुका था। इसी दौरान 70 साल से अधिक उम्र के भोला बाबूलाल शिंदे अपना ठेला लेकर धीरे धीरे यात्रा के पीछे चलते दिखाई दिए। उनके ठेले पर तिरंगा लगा हुआ था। एक हाथ ठेले के हत्थे पर था और उनकी नजर लगातार सड़क पर पड़ी खाली प्लास्टिक की बोतलों पर थी। जहां भी उन्हें बोतल दिखाई देती वे ठेला रोकते और झुककर उसे उठाकर ठेले में रख लेते। इसके बाद वे फिर आगे बढ़ जाते।

    तिरंगा यात्रा में शामिल लोगों के लिए रास्ते में जगह जगह पानी और जीरू की छोटी बोतलों की व्यवस्था की गई थी। लोग पानी और जीरू पीकर आगे बढ़ते गए लेकिन कई खाली बोतलें सड़क पर ही छूट गईं। भोला इन बोतलों को एक एक करके उठाते रहे। यात्रा आगे बढ़ती रही और उनके पीछे पीछे ठेला भी चलता रहा। ठेले पर लगा तिरंगा और उसमें जमा होती प्लास्टिक की बोतलें एक साथ आगे बढ़ती रहीं।

    भोला किसी संस्था की ओर से सफाई करने नहीं निकले थे और न ही किसी ने उन्हें ऐसा करने की जिम्मेदारी दी थी। उन्होंने सड़क पर गंदगी देखी तो खुद ही बोतलें उठाना शुरू कर दिया। भंडारी ब्रिज इलाके में रहने वाले भोला बाबूलाल शिंदे भंगार बीनने और उसे बेचने का काम करते हैं। लोगों ने जब उन्हें इस तरह बोतलें बटोरते देखा तो उनसे बातचीत की। उन्होंने बताया कि वे यात्रा के पीछे पीछे राजीव गांधी चौराहे तक जाएंगे और रास्ते में सड़क पर पड़ी बोतलें उठाते रहेंगे।

    जब उनसे पूछा गया कि वह ऐसा क्यों कर रहे हैं तो उन्होंने बेहद सहज अंदाज में कहा कि अपने देश में सफाई अच्छी होना चाहिए इसलिए सफाई कर रहा हूं। उनकी यह बात वहां मौजूद लोगों को भी प्रभावित कर गई। हजारों लोग तिरंगा लेकर देशभक्ति का संदेश दे रहे थे और यात्रा के सबसे पीछे एक बुजुर्ग अपने काम से स्वच्छता का संदेश दे रहे थे।

    भोला के लिए सड़क से उठाई जा रही ये बोतलें केवल कचरा नहीं थीं। इनमें उनकी रोजी रोटी भी छिपी थी। जब उनसे पूछा गया कि इन बोतलों का क्या करेंगे तो उन्होंने बताया कि इन्हें दुकानदार को बेच देंगे और उससे मिलने वाले पैसे से रोटी का इंतजाम करेंगे। यानी जिस कचरे को लोग सड़क पर छोड़कर आगे बढ़ गए थे वही भोला के लिए मेहनत और कमाई का जरिया भी था।

    इस पूरे दृश्य में देशभक्ति का एक अलग रूप दिखाई दिया। तिरंगा यात्रा में शामिल हजारों लोग राष्ट्रप्रेम का उत्सव मना रहे थे जबकि भोला अपने छोटे से ठेले के साथ उसी भावना को सफाई और मेहनत से जोड़ रहे थे। उनके ठेले पर लगा तिरंगा और सड़क से उठाई जा रही प्लास्टिक की बोतलें यह संदेश देती नजर आईं कि देश के प्रति जिम्मेदारी केवल नारों और आयोजनों तक सीमित नहीं है। अपने आसपास की जगह को साफ रखना और ईमानदारी से मेहनत करना भी देश के प्रति सम्मान का एक तरीका हो सकता है।

  • बस में सवार बदमाशों ने चालाकी से वारदात को अंजाम देकर व्यापारी का पांच किलो सोने से भरा बैग छीना।

    बस में सवार बदमाशों ने चालाकी से वारदात को अंजाम देकर व्यापारी का पांच किलो सोने से भरा बैग छीना।

    मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में महू-नीमच हाईवे पर एक भीषण और सनसनीखेज लूट की वारदात सामने आई है। बड़नगर से रतलाम लौट रहे एक सराफा व्यापारी को निशाना बनाते हुए अज्ञात बदमाशों ने चलती बस के भीतर से लगभग पांच किलोग्राम सोने के जेवरों से भरा बैग लूट लिया। लूटे गए आभूषणों की अनुमानित कीमत साढ़े सात करोड़ रुपये बताई जा रही है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, रतलाम के जैन कॉलोनी निवासी सराफा व्यवसायी अर्पित चौरड़िया आसपास के क्षेत्रों में स्वर्ण आभूषणों का व्यापार करते हैं। वे गुरुवार शाम बड़नगर क्षेत्र में व्यापारियों को जेवर दिखाने और व्यापारिक सिलसिले में गए थे। काम निपटाने के बाद वे रात करीब आठ बजे बड़नगर से रतलाम जाने वाली एक निजी बस में सवार हुए थे।

    व्यापारी के साथ ही बड़नगर से चार-पांच संदिग्ध यात्री भी उसी बस में सवार हुए थे। रात करीब सवा नौ बजे जब बस बिलपांक थाना क्षेत्र के अंतर्गत रेन-मऊ फंटे के पास पहुंची, तब एक यात्री ने उतरने के बहाने चालक से बस रुकवाई। बस के रुकते ही भीतर मौजूद दो अन्य बदमाशों ने झपट्टा मारकर व्यापारी से जेवरों का बैग छीन लिया और बाहर खड़े अपने अन्य साथियों के साथ अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए।

    घटना के तुरंत बाद पीड़ित व्यापारी ने धराड़ पुलिस चौकी पहुंचकर अधिकारियों को मामले की सूचना दी। साढ़े सात करोड़ रुपये मूल्य के पांच किलो सोने की लूट की खबर मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही बिलपांक थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और पूरे इलाके की घेराबंदी शुरू कर दी।

    वारदात की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस अधीक्षक अमित कुमार तथा अपर पुलिस अधीक्षक सहित वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में त्वरित कार्रवाई करते हुए जिले की सभी सीमाओं पर सख्त नाकाबंदी लागू कर दी गई है और संदिग्ध वाहनों की तलाशी ली जा रही है।

    मध्य प्रदेश के मालवा अंचल में हाईवे पर हुई इस बड़ी आपराधिक वारदात के बाद व्यापारिक जगत और स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश और असुरक्षा का माहौल है। रतलाम और उज्जैन संभाग के सराफा व्यापारियों ने पुलिस प्रशासन से आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने और लूटे गए आभूषणों को बरामद करने की मांग की है।

    जांच प्रक्रिया को गति देने के लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञों और डॉग स्क्वाड की टीमों को मौके पर बुलाया गया है। पुलिस द्वारा बड़नगर से लेकर बिलपांक टोल नाके और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। प्राथमिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि बदमाशों ने व्यापारी की रेकी की थी और योजनाबद्ध तरीके से बस में सवार होकर वारदात को अंजाम दिया।

    फिलहाल बिलपांक थाना पुलिस ने व्यापारी के बयानों के आधार पर अज्ञात बदमाशों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस की विशेष टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं और दावा किया जा रहा है कि जल्द ही इस बड़ी लूट की गुत्थी सुलझा ली जाएगी।

  • PWD इंजीनियर आरती यादव की मौत मामले में बड़ा मोड़, पति निलेश यादव पर प्रताड़ना का केस दर्ज

    PWD इंजीनियर आरती यादव की मौत मामले में बड़ा मोड़, पति निलेश यादव पर प्रताड़ना का केस दर्ज


    इंदौर। इंदौर के पलासिया इलाके में PWD की महिला इंजीनियर आरती यादव की मौत के मामले में पुलिस ने करीब 20 दिन बाद उनके पति निलेश यादव के खिलाफ प्रताड़ना से जुड़ी धाराओं में FIR दर्ज की है। आरती की मौत के बाद मायके पक्ष ने पति और ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने जांच के लिए SIT का गठन किया था। जांच के बाद पलासिया पुलिस ने गुरुवार देर रात पति के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया। पुलिस अब FIR में लगाए गए आरोपों और सामने आए साक्ष्यों के आधार पर आगे की जांच कर रही है।

    आरती यादव PWD में वरिष्ठ इंजीनियर के पद पर पदस्थ थीं। उनके पति निलेश यादव भी लोक निर्माण विभाग में कार्यरत हैं। दोनों की शादी करीब 10 साल पहले हुई थी और दंपती की दो बेटियां हैं। आरती का मायका इंदौर के सुखलिया इलाके में बताया गया है जबकि उनका ससुराल झाबुआ में है। घटना के बाद मायके पक्ष ने आरोप लगाया था कि पति पत्नी के बीच लंबे समय से तनाव चल रहा था और इसी वजह से आरती मानसिक दबाव में थीं।

    पुलिस के मुताबिक आरती ने पलासिया स्थित अपने सरकारी क्वार्टर में फांसी लगाकर आत्महत्या का प्रयास किया था। इसके बाद उनके पति निलेश उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे थे। अस्पताल में उपचार के दौरान अगले दिन आरती की मौत हो गई। घटना के बाद मामला पहले मर्ग के तौर पर जांच में लिया गया था। लेकिन मायके पक्ष की शिकायत और लगाए गए आरोपों के बाद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया।

    जांच के लिए गठित SIT ने मामले से जुड़े अलग-अलग पहलुओं को खंगाला। पुलिस ने आरती के मायके पक्ष के लोगों के बयान दर्ज किए। इसके अलावा पति और पत्नी के संबंधों तथा घटना से पहले की परिस्थितियों को समझने के लिए अन्य संबंधित लोगों से भी पूछताछ की गई। दंपती की दोनों बेटियों के बयान भी जांच का हिस्सा रहे। पुलिस ने इन बयानों के साथ उपलब्ध परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को भी जांच में शामिल किया।

    इससे पहले आरती के भाई उपेन्द्र ने दोनों के बीच लंबे समय से तनाव होने की बात कही थी। मायके पक्ष ने पुलिस से पूरे मामले की गहराई से जांच करने और यदि प्रताड़ना के आरोप सही पाए जाएं तो कानूनी कार्रवाई करने की मांग की थी। हालांकि मामले में लगाए गए आरोपों को लेकर अंतिम निष्कर्ष पुलिस की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएगा।

    आरती की मौत से जुड़े मामले में सामने आए कुछ अन्य दावों की भी अलग-अलग रिपोर्टों में चर्चा हुई थी। मायके पक्ष ने पति और ससुराल वालों पर गंभीर आरोप लगाए थे और घटना की परिस्थितियों पर सवाल उठाए थे। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि होना अभी बाकी है। पुलिस सभी तथ्यों को जांच का हिस्सा बनाकर आगे बढ़ रही है।

    अब पति निलेश यादव के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद मामले में कानूनी जांच का नया चरण शुरू हो गया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि आरती को कथित तौर पर किस तरह की प्रताड़ना का सामना करना पड़ा था और उसका उनकी मौत से कोई संबंध था या नहीं। जांच में सामने आने वाले बयान और अन्य साक्ष्य आगे की कार्रवाई की दिशा तय करेंगे।

    फिलहाल पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। ऐसे संवेदनशील मामले में आरोपों और प्रमाणित तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है। आरती की मौत के वास्तविक कारणों और पति के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

  • इंदौर में फिर बदलेगा मौसम का मिजाज! घने बादलों के बीच तेज बारिश का अनुमान, सीजन में 18 इंच बरसा पानी

    इंदौर में फिर बदलेगा मौसम का मिजाज! घने बादलों के बीच तेज बारिश का अनुमान, सीजन में 18 इंच बरसा पानी


    इंदौर। इंदौर में शुक्रवार सुबह से मौसम ने करवट ली और शहर के आसमान पर घने बादल छा गए। कई इलाकों में हल्की बूंदाबांदी भी देखने को मिली। लंबे समय से रुक रुककर हो रही बारिश के बीच अब मौसम विशेषज्ञों ने आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना जताई है। बंगाल की खाड़ी में बने मौसम सिस्टम के कारण मध्य प्रदेश में मानसून के सक्रिय होने के संकेत मिल रहे हैं। मौजूदा मौसम पूर्वानुमान में भी इंदौर के लिए आने वाले दिनों में बादल और बारिश का दौर बने रहने के संकेत हैं।

    इस मानसून सीजन में इंदौर में अब तक करीब 18 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है। हालांकि अगस्त की शुरुआत से अब तक बारिश का जोर बहुत ज्यादा नहीं रहा है। शहर में कई दिनों से कभी बूंदाबांदी तो कभी हल्की बारिश का सिलसिला जारी है लेकिन किसी दिन भी बारिश ने लंबा और तेज दौर नहीं बनाया। ऐसे में मौसम के जानकारों की नजर अब मानसून के बचे करीब डेढ़ महीने पर है। अगर आने वाले दिनों में सक्रिय सिस्टम बनते रहे तो इंदौर में बारिश का आंकड़ा सामान्य से ऊपर जाने की संभावना बन सकती है।

    मौसम में बदलाव की बड़ी वजह बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव का क्षेत्र है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक 12 अगस्त को उत्तर बंगाल की खाड़ी और पश्चिम बंगाल बांग्लादेश के तटवर्ती इलाकों के पास निम्न दबाव का क्षेत्र बना था। इसके बाद यह सिस्टम और सक्रिय हुआ। इसके प्रभाव से मध्य भारत में बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी की संभावना बनी है।

    इस मौसम सिस्टम का असर मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में ज्यादा दिखाई दे सकता है। कुछ इलाकों में भारी बारिश की संभावना भी जताई गई है। वहीं पश्चिमी मध्य प्रदेश के जिलों में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। इंदौर में इसका असर बादल छाने और बारिश के दौर के रूप में देखने को मिल सकता है। मौजूदा पूर्वानुमान में इंदौर में 14 अगस्त से आगे भी बादल और बारिश की संभावना बनी हुई है।

    अगस्त का महीना इंदौर के लिए बारिश के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। शहर में इस महीने औसतन करीब 10 से 11 इंच बारिश होती है और कई दिनों तक बारिश का दौर देखने को मिलता है। इतिहास में अगस्त के दौरान इससे कहीं ज्यादा बारिश भी दर्ज हो चुकी है। वर्ष 1944 में अगस्त महीने में करीब 28 इंच बारिश का रिकॉर्ड बताया जाता है। वहीं 22 अगस्त 2020 को 24 घंटे के दौरान करीब साढ़े 10 इंच बारिश दर्ज की गई थी।

    इस लिहाज से अगस्त के बाकी दिनों में बनने वाले मौसम सिस्टम इंदौर के लिए काफी अहम रहेंगे। यदि बंगाल की खाड़ी से लगातार सिस्टम बनते रहे और मानसून ट्रफ सक्रिय रही तो शहर में बारिश का जोर बढ़ सकता है। इससे न केवल मौजूदा बारिश के आंकड़े में सुधार होगा बल्कि पूरे सीजन की कुल बारिश भी औसत के आसपास या उससे ऊपर पहुंच सकती है।

    फिलहाल शुक्रवार सुबह घने बादलों और बूंदाबांदी ने शहरवासियों को एक बार फिर तेज बारिश की उम्मीद दी है। हालांकि किसी एक दिन के मौसम को देखकर पूरे सीजन की स्थिति तय नहीं की जा सकती। आने वाले दिनों में सिस्टम की दिशा और उसकी सक्रियता यह तय करेगी कि इंदौर में बारिश कितनी तेज और कितने लंबे दौर तक होती है। फिलहाल मौसम का बदला मिजाज मानसून के लिए राहत भरे संकेत जरूर दे रहा है।

  • 7 दिन बाद भी इंदौर के अद्वैत का सुराग नहीं, 'स्पाइडर मैन' ने संभाला मोर्चा; ChatGPT सर्च से गहराया रहस्य

    7 दिन बाद भी इंदौर के अद्वैत का सुराग नहीं, 'स्पाइडर मैन' ने संभाला मोर्चा; ChatGPT सर्च से गहराया रहस्य


    नई दिल्ली। कर्नाटक के बेंगलुरु ग्रामीण इलाके की शिवगंगे पहाड़ियों से लापता हुए इंदौर के 31 वर्षीय अद्वैत उपाध्याय की तलाश सातवें दिन भी जारी रही। करीब 4500 फीट ऊंची इस पहाड़ी का दुर्गम इलाका लगातार चल रहे सर्च ऑपरेशन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। खड़ी चट्टानों के साथ गहरी ढलान घना इलाका और बारिश के कारण रेस्क्यू टीमों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। अद्वैत की तलाश में अब कर्नाटक के चर्चित पर्वतारोही ज्योति राज को भी शामिल किया गया है।

    ज्योति राज को कर्नाटक में ‘स्पाइडर मैन’ और ‘मंकी मैन’ के नाम से भी जाना जाता है। बेहद खड़ी चट्टानों पर चढ़ने की अपनी क्षमता के कारण वह पहले भी कई मुश्किल रेस्क्यू अभियानों में मदद कर चुके हैं। अद्वैत की तलाश के दौरान उन्होंने शांताला ड्रॉप और आसपास की खतरनाक ढलानों पर रस्सियों की मदद से सर्च किया। इन इलाकों में सामान्य टीमों के लिए पहुंचना मुश्किल है। इसलिए ज्योति राज की मदद को सर्च ऑपरेशन में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    अद्वैत 7 अगस्त की सुबह मोटरसाइकिल से शिवगंगे पहुंचा था। पुलिस को मिले CCTV फुटेज में उसके पहाड़ी की तरफ जाते और चढ़ाई शुरू करने के संकेत मिले हैं। उसकी किराए की बाइक पहाड़ी की तलहटी में मिली थी। इसके बाद जब वह तय समय तक वापस नहीं लौटा तो उसकी तलाश शुरू की गई। ऑपरेशन में NDRF और SDRF के साथ पुलिस तथा वन विभाग के जवान भी जुटे हैं। करीब 100 कर्मियों की टीमें अलग-अलग हिस्सों में तलाश कर रही हैं और कठिन इलाकों की निगरानी के लिए ड्रोन का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

    जांच में उस समय नया मोड़ आया जब अद्वैत का मोबाइल और ड्रोन शांताला ड्रॉप के पास मिले। इससे पहले आसपास उसका बैग और स्वेटर भी मिलने की जानकारी सामने आई थी। पुलिस अब इन सभी सामानों के मिलने की जगह को जोड़कर अद्वैत की आखिरी गतिविधियों की टाइमलाइन तैयार कर रही है। मोबाइल की लोकेशन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड समेत डिजिटल गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।

    पुलिस ने अद्वैत के अन्य संभावित मोबाइल नंबर और SIM कार्ड की जानकारी भी जुटानी शुरू की है। जांच अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि उसके नाम पर कोई दूसरा SIM तो जारी नहीं हुआ था। इसके साथ ही 6 और 7 अगस्त को उसने किन लोगों से बात की और उसके लापता होने के बाद किन लोगों ने उससे संपर्क करने की कोशिश की थी इसकी भी पड़ताल की जा रही है। उसकी मंगेतर और अन्य परिचितों से जुड़े संपर्कों को भी जांच के तकनीकी पहलू के तौर पर देखा जा रहा है। फिलहाल पुलिस ने किसी व्यक्ति को आरोपी या संदिग्ध नहीं बताया है।

    इस मामले में अद्वैत की ऑनलाइन सर्च हिस्ट्री भी जांच का अहम हिस्सा बन गई है। पुलिस के अनुसार उसके लैपटॉप में शिवगंगे की ऊंचाई और ट्रैकिंग रूट से जुड़ी जानकारी खोजे जाने के संकेत मिले हैं। इसके अलावा आत्महत्या से जुड़े स्थानों और पहाड़ी से गिरने के संभावित परिणामों को लेकर ऑनलाइन जानकारी खोजे जाने की बात भी सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस इसी आधार पर आत्महत्या के एंगल की भी जांच कर रही है। हालांकि केवल इंटरनेट या ChatGPT पर की गई सर्च के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। पुलिस इसे अन्य डिजिटल और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के साथ जोड़कर देख रही है।

    जांच में 4 अगस्त को भी अद्वैत की शिवगंगे से जुड़ी गतिविधियों के संकेत मिलने की बात सामने आई है। ऐसे में पुलिस यह समझने की कोशिश कर रही है कि अगर वह 4 अगस्त को भी इस इलाके में गया था तो 7 अगस्त को दोबारा वहां जाने की वजह क्या थी। इसी के साथ उसके ड्रोन की खरीद और आखिरी उड़ान की जानकारी भी जुटाई जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में लगी है कि ड्रोन में कोई फोटो वीडियो या अन्य डिजिटल डेटा मौजूद है या नहीं।

    फिलहाल सात दिन बीतने के बाद भी अद्वैत का कोई पुख्ता सुराग नहीं मिला है। सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है और दुर्गम चट्टानों वाले इलाकों में विशेषज्ञों की मदद से तलाश को और व्यापक बनाया जा रहा है। अद्वैत के परिवार और करीबी लोगों की उम्मीदें अब भी रेस्क्यू टीमों से जुड़ी हुई हैं।

  • पत्नी के नाम G+3 और G+2 बिल्डिंग समेत करोड़ों की संपत्ति! इंदौर निगम अधिकारी के घर लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई

    पत्नी के नाम G+3 और G+2 बिल्डिंग समेत करोड़ों की संपत्ति! इंदौर निगम अधिकारी के घर लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई


    इंदौर  इंदौर नगर निगम के सहायक राजस्व अधिकारी जितेंद्र कुमार पांडेय के ठिकानों पर लोकायुक्त ने शुक्रवार सुबह बड़ी कार्रवाई की। आय से अधिक संपत्ति की शिकायत और प्रारंभिक जांच के आधार पर लोकायुक्त की करीब 20 सदस्यीय टीम ने सुबह लगभग 6 बजे उनके घर और उनकी पत्नी भावना पांडेय के नाम दर्ज हॉस्टल समेत दो ठिकानों पर एक साथ छापा मारा। कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड खंगालना शुरू किया। लोकायुक्त की प्रारंभिक जांच में अधिकारी की वैध आय और सामने आई संपत्ति के बीच बड़ा अंतर होने की बात कही गई है।

    लोकायुक्त एसपी राजेश सहाय के मुताबिक जितेंद्र कुमार पांडेय नगर निगम में करीब 31 साल से नौकरी कर रहे हैं। उनके पूरे सेवाकाल में करीब 80 लाख रुपये वेतन के रूप में मिलने का अनुमान लगाया गया है। दूसरी तरफ प्रारंभिक जांच में करीब 2.53 करोड़ रुपये की संपत्ति और खर्च से जुड़े आंकड़े सामने आए हैं। अधिकारियों के अनुसार इन दोनों आंकड़ों के बीच करीब 1.73 करोड़ रुपये का अंतर है। प्रारंभिक गणना में इसे करीब 216.35 प्रतिशत अनुपातहीन संपत्ति बताया गया है। हालांकि लोकायुक्त ने साफ किया है कि अभी यह आंकड़ा अंतिम नहीं है। दस्तावेजों और संपत्तियों के विस्तृत सत्यापन के बाद ही आय से अधिक संपत्ति की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।

    कार्रवाई के दौरान लोकायुक्त की टीम ने पांडेय की संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू की। टीम में डीएसपी सुनील तालान आनंद चौहान और निरीक्षक आशुतोष मिठास तथा सचिन पटेरिया समेत अन्य अधिकारी शामिल रहे। जांच का मुख्य फोकस अधिकारी की आय के स्रोत और उनके परिवार के नाम खरीदी गई संपत्तियों के बीच तालमेल पर है।

    प्रारंभिक जांच में पांडेय की पत्नी भावना पांडेय के नाम दो इमारतें सामने आने की बात कही गई है। पहली इमारत आनंद नगर एक्सटेंशन में बताई गई है। नवलखा-चितावद क्षेत्र में 40×50 फीट के प्लॉट पर इस भवन का निर्माण हुआ है। यह G+3 इमारत है और इसके निर्माण पर करीब 1.20 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है। लोकायुक्त की टीम अब यह पता लगा रही है कि इस संपत्ति के निर्माण और खरीद के लिए रकम का स्रोत क्या था।

    दूसरी इमारत गजाधर नगर चितावद के गुलमोहर का बगीचा इलाके में भावना पांडेय के नाम बताई गई है। यह G+2 बिल्डिंग है और इसमें हॉस्टल संचालित होने की जानकारी सामने आई है। इसके निर्माण पर करीब 91.50 लाख रुपये खर्च होने का प्रारंभिक अनुमान लगाया गया है। दोनों संपत्तियों के दस्तावेजों की जांच के साथ उनके निर्माण की लागत और मौजूदा मूल्य का भी सत्यापन किया जा रहा है।

    लोकायुक्त की जांच में पांडेय के परिवार के नाम कई वाहन खरीदे जाने की जानकारी भी सामने आई है। पत्नी बेटे और बेटी के नाम चार पहिया और दोपहिया वाहन होने की बात कही गई है। इन वाहनों पर करीब 14 लाख रुपये खर्च होने का प्रारंभिक आकलन है। अब जांच एजेंसी यह देख रही है कि इन संपत्तियों और वाहनों की खरीद के लिए इस्तेमाल रकम का स्रोत क्या रहा।

    अधिकारियों का कहना है कि छापे के दौरान मिले दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच पूरी होने के बाद ही अनुपातहीन संपत्ति का अंतिम आंकड़ा तय किया जाएगा। यानी फिलहाल सामने आए आंकड़ों को प्रारंभिक माना जा रहा है और जांच आगे बढ़ने के साथ संपत्ति का कुल मूल्य बढ़ या घट सकता है।

    इंदौर की इस कार्रवाई के बीच जबलपुर लोकायुक्त की एक अन्य कार्रवाई भी चर्चा में है। सिवनी में पदस्थ बाबू सुभाष शर्मा के जबलपुर और सिवनी स्थित पांच ठिकानों पर छापे में करोड़ों रुपये की जमीन प्लॉट फार्महाउस और मकानों से जुड़े दस्तावेज मिलने की जानकारी सामने आई थी। इससे मध्य प्रदेश में लोकायुक्त की आय से अधिक संपत्ति के मामलों में लगातार चल रही कार्रवाई एक बार फिर चर्चा में आ गई है।

  • MP में सियासत से सिस्टम तक सवाल ही सवाल! मंत्री ने राहुल गांधी को दिया रांची का टिकट ऑफर, उफनती नर्मदा में विधायक का स्टंट

    MP में सियासत से सिस्टम तक सवाल ही सवाल! मंत्री ने राहुल गांधी को दिया रांची का टिकट ऑफर, उफनती नर्मदा में विधायक का स्टंट


    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासन से जुड़ी घटनाएं इन दिनों कई सवाल खड़े कर रही हैं। कहीं देशभक्ति के नाम पर निकाली गई तिरंगा यात्रा में नेता और अधिकारी पैदल चलते नजर आए तो उनके पीछे खाली सरकारी और निजी वाहनों का काफिला चलता रहा। कहीं उफनती नर्मदा की लहरों के बीच भाजपा विधायक और अधिकारी बिना लाइफ जैकेट नाव में सवार दिखाई दिए। वहीं राहुल गांधी के मध्य प्रदेश दौरे से पहले मंत्री विश्वास सारंग ने उन्हें झारखंड के रांची जाने की सलाह देते हुए टिकट तक कराने का ऑफर दे दिया। इन घटनाओं ने राजनीतिक बयानबाजी से लेकर प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों तक कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    रतलाम में तिरंगा यात्रा के दौरान महापौर कलेक्टर और अन्य नेता अधिकारी करीब डेढ़ किलोमीटर तक हाथों में तिरंगा लेकर पैदल चले। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पेट्रोल और डीजल बचाने की अपील के बीच इस यात्रा की एक तस्वीर चर्चा का विषय बन गई। वजह थी पैदल चल रहे नेताओं और अधिकारियों के पीछे चलता खाली वाहनों का काफिला। इन गाड़ियों में ड्राइवरों के अलावा कोई सवार नहीं था। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब अधिकारी और जनप्रतिनिधि खुद पैदल यात्रा कर रहे थे तो उनके खाली वाहनों को साथ चलाने की जरूरत क्यों पड़ी। लोगों का सवाल है कि क्या इस तरह ईंधन की खपत को कम किया जा सकता था।

    महेश्वर में तिरंगा यात्रा के दौरान सुरक्षा से जुड़ा मामला और ज्यादा गंभीर नजर आया। बारिश के मौसम में नर्मदा नदी उफान पर है और नदी की धार तेज होने के बावजूद भाजपा विधायक राजकुमार मेव टीआई समेत अन्य नेता और अधिकारी नाव में सवार हो गए। तस्वीरों के मुताबिक नाव पर सवार लोगों ने लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब आम लोगों को नदी और जलाशयों में सुरक्षा नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है तो जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के लिए इन नियमों का पालन कितना जरूरी है। देशभक्ति का उत्साह अपनी जगह है लेकिन उफनती नदी में सुरक्षा से समझौता किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।

    इधर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के सितंबर में उज्जैन आने की संभावित चर्चा के बीच मध्य प्रदेश के मंत्री विश्वास सारंग ने उन पर राजनीतिक तंज कसा है। सारंग ने राहुल गांधी को मध्य प्रदेश आने से पहले रांची जाने की सलाह दी। उनका कहना है कि राहुल गांधी दिल्ली में जेन-जी के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए लेकिन झारखंड की राजधानी रांची में प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं के खिलाफ कार्रवाई के दौरान वहां नहीं पहुंचे। इसी मुद्दे को लेकर मंत्री ने राहुल गांधी से पहले रांची जाने को कहा और यहां तक कहा कि वह उनकी दिल्ली से रांची की टिकट करा देंगे। हालांकि राहुल गांधी के मध्य प्रदेश दौरे की तारीख अभी तय नहीं हुई है। ऐसे में टिकट वाला बयान फिलहाल सियासी तंज के तौर पर ही देखा जा रहा है।

    अब बात प्रशासनिक व्यवस्था की। स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले मध्य प्रदेश के लाखों शिक्षक ई-अटेंडेंस की तकनीकी परेशानी से जूझते रहे। दिनभर स्कूल में ड्यूटी करने के बाद शिक्षकों को आउट-पंच करना था लेकिन ई-अटेंडेंस पोर्टल में तकनीकी समस्या के कारण पंच नहीं हो पा रहा था। शिक्षकों की चिंता इसलिए बढ़ गई क्योंकि अटेंडेंस दर्ज नहीं होने पर वेतन कटने का डर था। नियम के मुताबिक शिक्षकों को स्कूल के 200 मीटर के दायरे में रहकर अटेंडेंस लगानी होती है। लिहाजा कई शिक्षक घंटों तक स्कूल में बैठकर पोर्टल ठीक होने का इंतजार करते रहे।

    देर शाम जब पोर्टल की समस्या दूर हुई तो विभाग की ओर से शिक्षकों को संदेश भेजकर राहत दी गई कि वे जहां हैं वहीं से अटेंडेंस लगा सकते हैं। हालांकि शिक्षकों के लिए यह समस्या नई नहीं है। प्रदेश के कई हिस्सों में नेटवर्क और तकनीकी दिक्कतों के कारण ई-अटेंडेंस व्यवस्था को लेकर लगातार परेशानी सामने आती रही है। ऐसे में सवाल सिर्फ पोर्टल के कुछ घंटों तक ठप रहने का नहीं बल्कि ऐसी व्यवस्था का है जिसमें तकनीकी खामी का खामियाजा कर्मचारियों को भुगतने का डर बना रहता है।

    कुल मिलाकर तिरंगा यात्रा से लेकर नर्मदा की लहरों और ई-अटेंडेंस की तकनीकी दिक्कत तक मध्य प्रदेश की इन घटनाओं ने अलग-अलग मुद्दों पर बहस छेड़ दी है। कहीं ईंधन बचाने की जरूरत पर सवाल है तो कहीं सुरक्षा नियमों के पालन पर। वहीं राजनीतिक बयानबाजी ने राहुल गांधी के संभावित मध्य प्रदेश दौरे को भी सियासी रंग दे दिया है।

  • मध्य प्रदेश में स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव! 12 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, भोपाल-इंदौर समेत कई शहरों में भी बरसेंगे बादल

    मध्य प्रदेश में स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव! 12 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, भोपाल-इंदौर समेत कई शहरों में भी बरसेंगे बादल


    भोपाल मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बारिश का स्ट्रॉन्ग सिस्टम बनने से शुक्रवार को जबलपुर रीवा शहडोल और सागर संभाग में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले 24 घंटे में प्रदेश के 12 जिलों में 4 इंच या उससे ज्यादा बारिश होने की संभावना है। वहीं भोपाल इंदौर समेत कई अन्य जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है। लगातार कुछ दिनों तक बारिश से दूरी बनी रहने के बाद गुरुवार को प्रदेश के कई हिस्सों में पानी गिरा जिससे उमस से परेशान लोगों को राहत मिली।

    मौसम विभाग के अनुसार सागर नर्मदापुरम नरसिंहपुर बालाघाट मंडला डिंडौरी अनूपपुर शहडोल कटनी मऊगंज सीधी और सिंगरौली में अगले 24 घंटे के दौरान भारी बारिश हो सकती है। इन जिलों में कुछ स्थानों पर 4 इंच से अधिक पानी गिरने का अनुमान है। इसके अलावा भोपाल रायसेन सीहोर राजगढ़ विदिशा इंदौर धार अलीराजपुर बड़वानी खंडवा खरगोन उज्जैन देवास रतलाम ग्वालियर रीवा सतना छिंदवाड़ा सिवनी पन्ना दमोह छतरपुर टीकमगढ़ समेत कई जिलों में भी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार बंगाल की खाड़ी में 12 अगस्त की सुबह निम्न दबाव का क्षेत्र सक्रिय हुआ था जो 13 अगस्त की सुबह डिप्रेशन में बदल गया। यह सिस्टम उत्तर पश्चिम दिशा में पश्चिम बंगाल और झारखंड की ओर बढ़ रहा है। इसके प्रभाव से मानसून ट्रफ के सक्रिय रहने की संभावना है। यही वजह है कि मध्य प्रदेश में आने वाले दिनों में बारिश का दौर जारी रह सकता है। पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश की स्थिति भी बन सकती है।

    गुरुवार को करीब सात दिन बाद प्रदेश के कई इलाकों में बारिश हुई। इससे लंबे समय से उमस और गर्मी से परेशान लोगों को राहत मिली। हालांकि बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश अभी भी सामान्य से पीछे चल रहा है। मौसम केंद्र के मुताबिक मध्य प्रदेश में अब तक करीब 524.8 मिलीमीटर यानी 20.7 इंच बारिश दर्ज हुई है। सामान्य तौर पर इस अवधि तक करीब 597 मिलीमीटर यानी 23.5 इंच बारिश होनी चाहिए थी। इस लिहाज से प्रदेश में बारिश करीब 12 प्रतिशत कम है।

    पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश की कमी ज्यादा है। जबलपुर रीवा सागर और शहडोल संभाग में सामान्य से करीब 19 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है। बालाघाट छतरपुर छिंदवाड़ा दमोह डिंडौरी जबलपुर कटनी मैहर मंडला नरसिंहपुर पन्ना रीवा सागर सतना सिवनी शहडोल सीधी सिंगरौली टीकमगढ़ और उमरिया समेत कई जिलों में सामान्य से कम पानी गिरा है। पश्चिमी हिस्से में भी कई जिले बारिश की कमी से जूझ रहे हैं। हालांकि भोपाल गुना सीहोर राजगढ़ ग्वालियर अनूपपुर भिंड बुरहानपुर देवास बड़वानी खंडवा और खरगोन में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

    इस मानसून सीजन में जून के दौरान प्रदेश में बारिश करीब 14 प्रतिशत कम रही थी। जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश से स्थिति कुछ सुधरी लेकिन इसके बाद मानसून ने दो बार ब्रेक लिया। कई दिनों तक बारिश नहीं होने से आंकड़ा फिर सामान्य से नीचे चला गया। जुलाई में बारिश का कोटा पूरा होने के बावजूद जून की कमी पूरी नहीं हो सकी। अब अगस्त में सक्रिय हुए सिस्टम से उम्मीद है कि प्रदेश में बारिश की कमी कुछ हद तक दूर होगी।

    राजधानी भोपाल में अगस्त महीने में भारी बारिश का इतिहास रहा है। अगस्त 2006 में करीब 35 इंच बारिश दर्ज हुई थी। 14 अगस्त 2006 को 24 घंटे में करीब 12 इंच बारिश होने का रिकॉर्ड भी रहा है। इंदौर में अगस्त महीने में सर्वाधिक करीब 28 इंच बारिश का रिकॉर्ड 1944 में दर्ज हुआ था। ग्वालियर में 24 घंटे में करीब साढ़े 8 इंच बारिश का रिकॉर्ड 1927 का है। जबलपुर में अगस्त 1923 में करीब 44 इंच बारिश दर्ज होने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड है। उज्जैन में भी अगस्त 2006 में करीब 35 इंच बारिश दर्ज की गई थी।

    फिलहाल मौसम का रुख देखते हुए पूर्वी मध्य प्रदेश के लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। भारी बारिश के दौरान नदी नालों और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है। ऐसे में मौसम विभाग की चेतावनी पर नजर रखना और अनावश्यक रूप से जलभराव वाले रास्तों पर जाने से बचना बेहतर रहेगा।