Category: Madhya Pradesh

  • उज्जैन में 48 दिनों से टेंट में विराजमान खड़े हनुमान जी, 450 आवेदन मिलने के बाद अब 25 अक्टूबर की बैठक पर नजर

    उज्जैन में 48 दिनों से टेंट में विराजमान खड़े हनुमान जी, 450 आवेदन मिलने के बाद अब 25 अक्टूबर की बैठक पर नजर

    मध्य प्रदेश: के उज्जैन में खड़े हनुमान मंदिर का विवाद अब तक सुलझ नहीं पाया है। छत्री चौक क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण के दौरान प्राचीन मंदिर को हटाए जाने के बाद हनुमान जी की प्रतिमा पिछले 48 दिनों से टेंट में विराजमान है। श्रद्धालु लगातार मांग कर रहे हैं कि प्रतिमा को मंदिर में स्थापित किया जाए। इस मामले में विश्व हिंदू परिषद का कहना है कि प्रशासन की ओर से अब तक कोई प्रस्ताव नहीं आया है। अब 25 अक्टूबर के आसपास प्रशासन और संबंधित कमेटी के बीच संभावित बैठक पर सबकी नजरें टिकी हैं।

    उज्जैन में कंठल चौराहे से छत्री चौक तक सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। इसी दौरान खड़े हनुमान जी के प्राचीन मंदिर को हटाया गया था, लेकिन प्रतिमा अब भी उसी स्थान पर टेंट के नीचे रखी हुई है। रोजाना श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। मंदिर को लेकर भक्तों की मांग है कि प्रतिमा को उचित स्थान और मंदिर में स्थापित किया जाए, ताकि पूजा-अर्चना पहले की तरह हो सके।

    इस मुद्दे को लेकर श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं भी जुड़ी हुई हैं। भक्तों का कहना है कि भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर में विराजमान होने के बाद उनके परम भक्त हनुमान जी को भी मंदिर में स्थान मिलना चाहिए। उनका मानना है कि प्रतिमा का लंबे समय तक टेंट में रहना उनकी आस्था को प्रभावित कर रहा है। इसी मांग को लेकर क्षेत्र में हवन, यज्ञ और सुंदरकांड जैसे धार्मिक आयोजन भी किए गए। इनमें श्रद्धालुओं के साथ साधु-संत और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। आयोजनों के दौरान प्रतिमा को मौजूदा स्थान पर ही बनाए रखने की मांग उठाई गई।

    विश्व हिंदू परिषद के उज्जैन जिलाध्यक्ष राजेश आंजना के मुताबिक, मामले की स्थिति अब भी पहले दिन जैसी बनी हुई है। उनका कहना है कि प्रशासन की तरफ से अब तक कोई प्रस्ताव नहीं मिला है। संगठन को इस मुद्दे पर अब तक 450 आवेदन प्राप्त हुए हैं। आंजना के अनुसार, इन आवेदनों के साथ करीब 45 हजार हस्ताक्षर होने की बात कही गई है। इसके अलावा 150 पंचायतों, व्यापारियों और 50 समाजों की ओर से भी प्रतिमा को उसी स्थान पर रखने की मांग की गई है। ये आंकड़े संगठन की ओर से बताए गए हैं।

    मंदिर के आकार और निर्माण को लेकर भी चर्चा हो रही है। आंजना ने कहा कि शासन-प्रशासन को मंदिर के लिए स्पष्ट मापदंड तय करने चाहिए। उन्होंने मंदिर के लिए उपलब्ध जगह और उसके निर्माण से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई। हालांकि, अब तक प्रशासन की ओर से किसी प्रस्ताव या अंतिम निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई है।

    इस बीच खड़े हनुमान जी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का पहुंचना जारी है। पुजारी महेश बैरागी के अनुसार, रोजाना लगभग पांच से दस हजार लोग दर्शन करने आते हैं। उनके मुताबिक, इस सप्ताह झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, मिजोरम और पड़ोसी देश नेपाल से भी श्रद्धालु पहुंचे हैं। इस तरह मंदिर से जुड़ा मामला स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहा और दूर-दराज से लोग दर्शन के लिए उज्जैन आ रहे हैं।

    अब 25 अक्टूबर के आसपास प्रशासन और कमेटी के बीच संभावित बैठक को अहम माना जा रहा है। विश्व हिंदू परिषद इस मामले में प्रशासन से बातचीत कर समाधान चाहता है। फिलहाल प्रतिमा टेंट में ही विराजमान है और श्रद्धालुओं की प्रमुख मांग यही है कि खड़े हनुमान जी को उनके स्थान पर मंदिर में स्थापित किया जाए। बैठक में कोई सहमति बनती है या नहीं, इस पर आगे की स्थिति निर्भर करेगी।

  • भिंड में पशुशाला में सो रहे युवक की धारदार हथियार से हत्या, परिजनों ने हाईवे पर शव रखकर किया चक्काजाम

    भिंड में पशुशाला में सो रहे युवक की धारदार हथियार से हत्या, परिजनों ने हाईवे पर शव रखकर किया चक्काजाम


    भिंड । मध्‍य प्रदेश के भिंड जिले के मिहोना थाना क्षेत्र के चांदौख गांव में 35 वर्षीय युवक की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई। युवक बुधवार रात गांव के पास स्थित पशुशाला में सोने गया था। शुक्रवार सुबह परिजनों को उसका शव चारपाई पर मिला। उसकी गर्दन पर धारदार हथियार से वार के निशान थे। शुरुआती तौर पर कुल्हाड़ी से हमला किए जाने की आशंका जताई जा रही है। परिजनों ने संदेहियों के खिलाफ नामजद एफआईआर की मांग को लेकर हाइवे पर चक्काजाम कर दिया।

    पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान विश्व प्रताप सिंह राजावत उर्फ वीपी सिंह (35), निवासी चांदौख गांव के रूप में हुई है। वह गुरुवार रात करीब 10 बजे खाना खाने के बाद गांव के पास बनी पशुशाला में सोने गया था। शुक्रवार सुबह परिजन मवेशियों की देखभाल के लिए वहां पहुंचे तो वीपी सिंह चारपाई पर मृत मिला। उसकी गर्दन पर धारदार हथियार से हमले के निशान दिखाई दिए। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने घटनास्थल का जायजा लेकर शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। शुरुआती जानकारी के आधार पर हत्या में कुल्हाड़ी जैसे धारदार हथियार के इस्तेमाल की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, वारदात में इस्तेमाल हथियार और हत्या के कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    परिजनों ने परिवार के कुछ नजदीकी लोगों पर हत्या में शामिल होने का संदेह जताया है। उनका कहना है कि संबंधित लोगों के साथ पुरानी बातों को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। दो-तीन दिन पहले भी दोनों पक्षों के बीच झगड़ा हुआ था। परिजनों को आशंका है कि इसी रंजिश के चलते वीपी सिंह की हत्या की गई है। हालांकि, परिजनों की ओर से जताई गई आशंका और आरोपों की अभी पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
    परिजनों ने परिवार के कुछ नजदीकी लोगों पर हत्या में शामिल होने का संदेह जताया है। उनका कहना है कि संबंधित लोगों के साथ पुरानी बातों को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। दो-तीन दिन पहले भी दोनों पक्षों के बीच झगड़ा हुआ था। परिजनों को आशंका है कि इसी रंजिश के चलते वीपी सिंह की हत्या की गई है। हालांकि, परिजनों की ओर से जताई गई आशंका और आरोपों की अभी पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    पोस्टमार्टम के बाद परिजन शव लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग-552 पर पहुंचे और सड़क पर रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। उनकी मांग थी कि जिन लोगों पर उन्हें हत्या का संदेह है, उनके खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की जाए। परिजनों ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच किए जाने की बात पर आपत्ति जताई। इस दौरान मौके पर हंगामे की स्थिति बन गई और हाईवे पर आवागमन प्रभावित हुआ। जिसके बाद मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों की ओर से मामले की जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद चक्काजाम समाप्त हुआ।

    मामले में एसडीओपी प्रवीण त्रिपाठी ने बताया कि वीपी सिंह की हत्या की जांच की जा रही है। परिजनों की बात सुनी गई है और पुलिस सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • शिवपुरी के भदैया कुंड पर महिला और उसके दोस्त की बेल्ट से पिटाई, पति पर मामला दर्ज..

    शिवपुरी के भदैया कुंड पर महिला और उसके दोस्त की बेल्ट से पिटाई, पति पर मामला दर्ज..


    शिवपुरी जिले: में प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भदैया कुंड पर एक महिला और उसके दोस्त के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। आरोप है कि महिला के पति गोविंद ने अपने चचेरे भाई के साथ मिलकर दोनों की बेल्ट से पिटाई की। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसके बाद मामला चर्चा में आ गया। महिला की शिकायत पर पुलिस ने उसके पति के खिलाफ मारपीट की धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है।

    जानकारी के अनुसार, महिला मंगलवार दोपहर अपने दोस्त के साथ भदैया कुंड घूमने पहुंची थी। इसी दौरान उसका पति गोविंद भी वहां पहुंच गया। पत्नी को दूसरे युवक के साथ देखकर वह नाराज हो गया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हो गया। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर गोविंद ने अपने चचेरे भाई के साथ मिलकर महिला और उसके दोस्त पर बेल्ट से हमला कर दिया।

    मारपीट के दौरान महिला के दोस्त के पैर बांधने का भी आरोप लगाया गया है। बताया गया है कि युवक के पैर बांधने के बाद दोनों की बेल्टों से पिटाई की गई। घटना से जुड़ा वीडियो सामने आने के बाद यह मामला लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। हालांकि, घटना के सभी पहलुओं और आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच के आधार पर ही हो सकेगी।

    घटना की सूचना मिलने पर डायल 112 पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस संबंधित लोगों को थाने ले गई, जहां मामले से जुड़ी कार्रवाई की गई। महिला की शिकायत के आधार पर उसके पति गोविंद के खिलाफ मारपीट की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। उपलब्ध जानकारी में पति के चचेरे भाई के खिलाफ दर्ज कार्रवाई का स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है।

    बताया गया है कि महिला और उसके पति के बीच पहले से विवाद चल रहा था। इसी कारण महिला पिछले कुछ दिनों से अपने मायके में रह रही थी। मंगलवार को भदैया कुंड पर दोनों का आमना-सामना हुआ। इसके बाद विवाद बढ़ा और कथित तौर पर महिला तथा उसके दोस्त के साथ मारपीट हुई। पुलिस इस मामले में सामने आए आरोपों की जांच कर रही है।

    भदैया कुंड शिवपुरी का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है, जहां लोग घूमने और समय बिताने के लिए पहुंचते हैं। ऐसे स्थान पर महिला और उसके दोस्त के साथ कथित मारपीट की घटना सामने आने से मामला सुर्खियों में है। घटना के वीडियो के प्रसार के बाद पुलिस की कार्रवाई और जांच पर ध्यान केंद्रित है।

    फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के अनुसार महिला की शिकायत पर उसके पति के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। मारपीट की परिस्थितियों, इसमें शामिल लोगों की भूमिका और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। आरोपों को अंतिम निष्कर्ष मानने के बजाय पुलिस की जांच और सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही मामले की स्थिति स्पष्ट होगी।

  • ग्वालियर शीतला माता मंदिर हादसे में 16 मौतों के बाद बड़ा फैसला, हर मृतक के परिवार के एक सदस्य को मिलेगी नगर निगम में नौकरी

    ग्वालियर शीतला माता मंदिर हादसे में 16 मौतों के बाद बड़ा फैसला, हर मृतक के परिवार के एक सदस्य को मिलेगी नगर निगम में नौकरी


    ग्वालियर । ग्वालियर के शीतला माता मंदिर के पास हुए दर्दनाक ट्रक हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को अब रोजगार केGwalior Accident, Sheetla Mata Temple, Municipal Corporation Job, Madhya Pradesh News, Road Safety Investigation जरिए सहारा देने की तैयारी है। ग्वालियर नगर निगम परिषद ने निर्णय लिया है कि हादसे में मारे गए प्रत्येक व्यक्ति के परिवार के एक सदस्य को नगर निगम में आउटसोर्सिंग के माध्यम से नौकरी दी जाएगी। इसके साथ ही हादसे में घायल हुए लोगों की मदद करने पर भी सहमति बनी है। नगर निगम परिषद में इस मुद्दे पर शोक प्रस्ताव के दौरान चर्चा हुई और भारतीय जनता पार्टी तथा कांग्रेस के पार्षद पीड़ित परिवारों की सहायता के फैसले पर एकमत नजर आए।

    18 अक्टूबर की देर रात शीतला माता मंदिर के मुख्य द्वार के पास हुए हादसे ने पूरे शहर को झकझोर दिया था। चीनौर रोड पर मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालु सड़क किनारे कतार में खड़े थे। इसी दौरान चीनौर की ओर से आ रहा धान से भरा ट्रक ढलान पर अनियंत्रित हो गया और लोगों को अपनी चपेट में लेता चला गया। इस दर्दनाक घटना में 16 लोगों की मौत हो गई जबकि 42 लोग घायल हुए। मृतकों में पुरुषों के साथ महिला और बच्चे भी शामिल थे। हादसे के बाद प्रभावित परिवारों के सामने अपनों को खोने के दुख के साथ आर्थिक और पारिवारिक मुश्किलें भी खड़ी हो गईं।

    नगर निगम परिषद में पीड़ित परिवारों की स्थिति को देखते हुए रोजगार उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया। हर मृतक के परिवार के एक सदस्य को आउटसोर्सिंग पर नौकरी देने का उद्देश्य परिवार को नियमित आय का सहारा उपलब्ध कराना है। हादसे के कारण जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है उनके लिए यह सहायता महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि नौकरी की प्रक्रिया कब शुरू होगी और पात्र परिवारों के सदस्यों का चयन किस तरह किया जाएगा इस बारे में विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

    नगर निगम सभापति मनोज सिंह तोमर ने पीड़ित परिवारों को हरसंभव मदद का भरोसा दिया है। परिषद के फैसले को हादसे से प्रभावित लोगों के साथ खड़े होने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। घायलों को भी सहायता देने की बात कही गई है। हादसे के बाद कई परिवार इलाज और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में आर्थिक मदद और रोजगार संबंधी सहायता उन्हें आगे की जिंदगी संभालने में सहारा दे सकती है।

    दूसरी ओर महापौर डॉ. शोभा सिकरवार ने हादसे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि जब मंदिर तक दोपहिया और चारपहिया वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित थी तो धान से भरा ट्रक वहां तक कैसे पहुंच गया। उन्होंने सुरक्षा में संभावित चूक की जांच कराने की मांग की ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो। हादसे के समय ट्रक पुलिस चेकपोस्ट को तोड़ते हुए श्रद्धालुओं को कुचलकर मंदिर की बाहरी दीवार और प्रवेश द्वार से टकरा गया था। टक्कर के कारण दीवार ढह गई और कुछ लोग मलबे में दब गए।

    घटना के बाद घायलों को जयारोग्य अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों ने पुलिस व्यवस्था पर लापरवाही के आरोप भी लगाए। पुलिस ने ट्रक चालक और मालिक को गिरफ्तार किया था। चालक ने पूछताछ में ट्रक के ब्रेक फेल होने की बात कही थी। हादसे के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई हुई और सिटी एसपी को हटाने के साथ आठ पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित किया गया था। अब नगर निगम के रोजगार संबंधी फैसले से पीड़ित परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है जबकि सुरक्षा में चूक और हादसे के वास्तविक कारणों की जांच भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।

  • पूर्व डीएसपी की पुत्रवधु ने ससुराल पक्ष पर प्रताड़ना और संपत्ति हड़पने के आरोप लगाए, छह लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

    पूर्व डीएसपी की पुत्रवधु ने ससुराल पक्ष पर प्रताड़ना और संपत्ति हड़पने के आरोप लगाए, छह लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

    मध्य प्रदेश: के शिवपुरी में पूर्व ट्रैफिक डीएसपी हरिवंश कन्हौआ के परिवार से जुड़ा विवाद पुलिस अधीक्षक कार्यालय तक पहुंच गया है। उनकी पुत्रवधु प्रियांशु शर्मा ने ससुराल पक्ष के छह सदस्यों के खिलाफ शिकायत देकर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना, संपत्ति हड़पने की कोशिश तथा जान से मारने की धमकी देने जैसे आरोप लगाए हैं। प्रियांशु ने पुलिस से मामले में कार्रवाई करने और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। फिलहाल ये आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं। मामले में पुलिस की जांच और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    प्रियांशु शर्मा ने अपने आवेदन में बताया कि उनकी शादी जनवरी 2022 में आकाश कन्हौआ के साथ हुई थी। शिकायत के मुताबिक, 23 दिसंबर 2025 को आकाश 14 लाख रुपये की व्यवस्था करने के लिए घर से निकले थे। इसके अगले दिन प्रियांशु को जबलपुर में उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने की सूचना मिली। पति की मौत के हालात को लेकर शिकायत में चिंता जताई गई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में उनकी मौत के कारणों और उससे संबंधित जांच के अंतिम निष्कर्ष का उल्लेख नहीं है।

    प्रियांशु का आरोप है कि पति की मौत के लगभग सवा महीने बाद भोपाल स्थित मकान से 23 लाख रुपये की चोरी के मामले में उन पर आरोप लगाया गया। उन्होंने दावा किया कि इस संबंध में पुलिस जांच और फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला यानी एफएसएल की जांच में उनके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिला। इस मामले में जांच से संबंधित दस्तावेजों और निष्कर्षों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।

    शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि सास-ससुर और जेठ की ओर से उन पर दूसरी शादी करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। उनके अनुसार, बेटी सान्वी को अपने पास से छोड़ने के लिए भी दबाव बनाया गया। प्रियांशु ने दावा किया कि पति के नाम पर मौजूद संपत्ति अपने नाम कराने के लिए भी उनसे लगातार दबावपूर्वक बातचीत की जाती रही। इन आरोपों के संबंध में दूसरे पक्ष का बयान उपलब्ध नहीं है।

    प्रियांशु ने अपनी शिकायत में यह भी कहा कि उन्हें इंदौर में नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर किया गया। उनका आरोप है कि अक्टूबर 2026 में अपने पिता के साथ बातचीत के दौरान उनसे जबरन समझौते से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें घर से निकालने की बात कही गई। शिकायतकर्ता के मुताबिक, इन परिस्थितियों के कारण उन्हें मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा और अब उन्हें अपनी सुरक्षा की चिंता है।

    प्रियांशु शर्मा ने जिन छह लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, उनमें उनके ससुर हरिवंश कन्हौआ, सास सरोज कन्हौआ, जेठ विकास कन्हौआ, जेठानी भावना कन्हौआ, ननद ऋतु अवस्थी और नंदोई सौरभ अवस्थी के नाम शामिल हैं। उन्होंने पुलिस से शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच करने, संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने और सुरक्षा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।

    मामले में अब पुलिस की जांच महत्वपूर्ण होगी। पति की संदिग्ध मौत, चोरी के आरोप, संपत्ति को लेकर विवाद और कथित प्रताड़ना से जुड़े पहलुओं की वास्तविक स्थिति संबंधित दस्तावेजों, बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों को सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। पुलिस की कार्रवाई और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही मामले की आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

  • से पहले ग्वालियर में सफाई व्यवस्था सुधारने की तैयारी, ट्रांसफर स्टेशन देर रात तक खुलेंगे, 286 वाहनों से होगा कचरा संग्रहण

    से पहले ग्वालियर में सफाई व्यवस्था सुधारने की तैयारी, ट्रांसफर स्टेशन देर रात तक खुलेंगे, 286 वाहनों से होगा कचरा संग्रहण


    ग्वालियर । दीपावली के त्योहार पर ग्वालियर शहर में घरों और दुकानों से निकलने वाले कचरे का समय पर उठाव सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम ने विशेष तैयारी शुरू कर दी है। त्योहार के दौरान बाजारों और रिहायशी इलाकों में कचरे की मात्रा बढ़ने की संभावना को देखते हुए कचरा ट्रांसफर स्टेशन देर रात तक चालू रखने के निर्देश दिए गए हैं। टिपर वाहनों से रात में भी कचरा उठाया जाएगा और जरूरत के अनुसार प्रत्येक वाहन के दो से तीन फेरे लगवाए जाएंगे। नगर निगम का उद्देश्य है कि त्योहार के दौरान किसी भी वार्ड में कचरा जमा न हो और शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित न होने पाए।

    अपर आयुक्त टी. प्रतीक राव ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और डिपो प्रभारियों के साथ सफाई व्यवस्था की समीक्षा करते हुए जरूरी निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि कचरा ट्रांसफर स्टेशन देर रात तक चालू रखे जाएं ताकि टिपर वाहनों को कचरा खाली करने के लिए इंतजार न करना पड़े। जरूरत के अनुसार अतिरिक्त ड्राइवरों की व्यवस्था भी की जाएगी। इससे रात में कचरा संग्रहण का काम जारी रखने और वाहनों के अतिरिक्त फेरे लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है। निगम ने कचरा संग्रहण वाहनों को ग्रीन नेट से ढककर ले जाने के निर्देश भी दिए हैं।

    सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नगर निगम 29 नए टिपर वाहन अपने बेड़े में शामिल करने की तैयारी कर रहा है। इन वाहनों के जुड़ने के बाद सक्रिय वाहनों की संख्या बढ़कर 286 होने की बात कही गई है। अतिरिक्त वाहनों से कचरा संग्रहण की क्षमता बढ़ सकती है और अलग-अलग वार्डों में सफाई कार्य को गति मिल सकती है। हालांकि केवल वाहनों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। इसके साथ नियमित फेरे लगाना और कचरे को समय पर ट्रांसफर स्टेशन तक पहुंचाना भी जरूरी रहेगा।

    नगर निगम ने कचरा संग्रहण में लापरवाही रोकने के लिए वाहनों के वजन की जांच करने की व्यवस्था पर भी जोर दिया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि टिपर वाहन कम कचरा लेकर ट्रांसफर स्टेशन न पहुंचें। इसके लिए कचरा संग्रहण के बाद वाहन का वजन कराया जाएगा और ट्रांसफर स्टेशन पहुंचने पर दोबारा वजन जांचने की व्यवस्था की जाएगी। यदि दोनों वजन में अंतर पाया जाता है तो संबंधित ड्राइवर हेल्पर और स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य कचरा संग्रहण की निगरानी करना और जिम्मेदारी तय करना है।

    दीपावली के दौरान बाजारों में खरीदारी और घरों की सफाई के कारण सामान्य दिनों की तुलना में अधिक कचरा निकल सकता है। ऐसे में समय पर कचरा नहीं उठने से सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी बढ़ने की आशंका रहती है। नगर निगम ने इसी चुनौती को देखते हुए रात में भी सफाई कार्य जारी रखने की योजना बनाई है। अतिरिक्त फेरे और देर रात तक खुले रहने वाले ट्रांसफर स्टेशन इस व्यवस्था का अहम हिस्सा होंगे।

    हालांकि शहर के कई इलाकों में पहले से कचरे के ढेर लगे होने और सड़कों पर गंदगी फैलने की शिकायतों के बीच निगम की तैयारियों की प्रभावशीलता पर भी नजर रहेगी। नई व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निर्देशों का पालन कितना नियमित रूप से होता है और प्रत्येक वार्ड में कचरे का उठाव समय पर हो पाता है या नहीं। दीपावली से पहले नगर निगम के सामने सफाई व्यवस्था सुधारने और त्योहार के दौरान शहर को साफ रखने की चुनौती है।

  • 16 मौतों से प्रभावित परिवारों के लिए बड़ा सहारा, सातऊं समिति उठाएगी 40 परिवारों की बेटियों की शादी का पूरा खर्च

    16 मौतों से प्रभावित परिवारों के लिए बड़ा सहारा, सातऊं समिति उठाएगी 40 परिवारों की बेटियों की शादी का पूरा खर्च


    ग्वालियर । ग्वालियर के शीतला माता मंदिर के मुख्य द्वार पर हुए दर्दनाक हादसे से प्रभावित परिवारों की मदद के लिए ग्राम सातऊं शीतला माता कल्याण समिति आगे आई है। समिति ने मृतकों के परिजनों और घायलों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही हादसे से प्रभावित 40 परिवारों की बेटियों की शादी का पूरा खर्च उठाने की भी घोषणा की गई है। इस फैसले से उन परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है जो हादसे के बाद आर्थिक और पारिवारिक संकट का सामना कर रहे हैं।

    18 अक्टूबर की रात करीब एक से डेढ़ बजे के बीच हुए इस हादसे में 16 लोगों की मौत हो गई थी। घटना के बाद कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया जबकि घायल लोगों और उनके परिजनों के सामने इलाज तथा रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी चुनौतियां खड़ी हो गईं। पीड़ित परिवारों की स्थिति और उनकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए समिति ने सहायता देने की योजना तैयार की है। इसके लिए अध्यक्ष राजेंद्र सिंह गुर्जर की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई जिसमें सदस्यों ने सर्वसम्मति से राहत संबंधी निर्णय लिए।

    समिति के फैसले के अनुसार हादसे में जान गंवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के परिवार को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। वहीं हादसे में घायल हुए लोगों के परिवारों को 10 हजार रुपये की मदद देने का निर्णय लिया गया है। इस सहायता का उद्देश्य प्रभावित परिवारों को तत्काल आर्थिक सहारा देना है। किसी परिवार के लिए अचानक अपने कमाने वाले सदस्य या प्रियजन को खो देना बेहद कठिन परिस्थिति होती है। ऐसे समय में सामाजिक संगठनों की ओर से मिलने वाली सहायता उन्हें कुछ राहत दे सकती है।

    समिति ने प्रभावित परिवारों की बेटियों की शादी का पूरा खर्च उठाने का भी निर्णय लिया है। इस योजना के तहत 40 प्रभावित परिवारों को लाभ देने की बात कही गई है। शादी जैसे महत्वपूर्ण पारिवारिक आयोजन का खर्च उठाना कई परिवारों के लिए बड़ी जिम्मेदारी होती है। हादसे के बाद जिन परिवारों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई है उनके लिए यह सहायता महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। हालांकि सहायता प्राप्त करने वाले परिवारों की पहचान और खर्च से जुड़ी प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

    इस संबंध में आयोजित बैठक में समिति अध्यक्ष राजेंद्र सिंह गुर्जर के साथ मजबूत सिंह गजराज सिंह जितेंद्र सिंह और कृष्णकांत सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे। बैठक में हादसे से प्रभावित परिवारों की परिस्थितियों पर चर्चा की गई और उनकी मदद के लिए सामूहिक रूप से काम करने का संकल्प लिया गया। समिति के सदस्यों ने सहायता संबंधी निर्णय सर्वसम्मति से लिए ताकि पीड़ित परिवारों को राहत पहुंचाई जा सके।

    शीतला माता मंदिर हादसे ने ग्वालियर में कई परिवारों को गहरे दुख और कठिनाइयों में डाल दिया है। ऐसे में आर्थिक मदद के साथ बेटियों की शादी का खर्च उठाने का फैसला प्रभावित परिवारों के लिए सामाजिक सहयोग का उदाहरण है। अब सहायता किस प्रक्रिया के तहत और कब तक परिवारों तक पहुंचाई जाएगी इस पर नजर रहेगी। फिलहाल समिति के इस निर्णय से हादसे के पीड़ितों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है। 

  • ग्वालियर मंदिर हादसे की जांच तेज, प्रशासन ने मांगे दस्तावेज और सबूत, 16 लोगों की मौत के कारणों का होगा खुलासा

    ग्वालियर मंदिर हादसे की जांच तेज, प्रशासन ने मांगे दस्तावेज और सबूत, 16 लोगों की मौत के कारणों का होगा खुलासा


    ग्वालियर । ग्वालियर के ऐतिहासिक शीतला माता मंदिर के मुख्य द्वार पर हुए दर्दनाक ट्रक हादसे की मजिस्ट्रियल जांच शुरू हो गई है। हादसे में 16 लोगों की मौत के बाद अब प्रशासन घटना के कारणों और संभावित लापरवाही का पता लगाने में जुट गया है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी रुचिका चौहान ने जांच की जिम्मेदारी अपर जिला दंडाधिकारी यानी ADM सीबी प्रसाद को सौंपी है। प्रशासन ने आम लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों से अपील की है कि वे घटना से जुड़ी जानकारी दस्तावेज और अन्य साक्ष्य उपलब्ध कराएं ताकि जांच में सभी महत्वपूर्ण तथ्यों को शामिल किया जा सके।

    यह हादसा 18 अक्टूबर की रात करीब एक से डेढ़ बजे के बीच हुआ था। जानकारी के अनुसार मंदिर के मुख्य द्वार के पास तेज रफ्तार और अनियंत्रित ट्रक की चपेट में आने से 16 लोगों की जान चली गई थी। घटना के बाद से ही हादसे की परिस्थितियों और संभावित चूक को लेकर सवाल उठ रहे थे। अब मजिस्ट्रियल जांच के माध्यम से यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे कौन से कारण जिम्मेदार रहे। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही घटना से जुड़े तथ्यों और जिम्मेदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    प्रशासन ने हादसे से जुड़े साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए 26 से 28 अक्टूबर तक तीन दिन निर्धारित किए हैं। जांच अधिकारी ADM सीबी प्रसाद के अनुसार ऐसे व्यक्ति जिनका मामले से कोई व्यक्तिगत हित या विवाद नहीं है वे घटना से संबंधित जानकारी और साक्ष्य दे सकते हैं। इसके लिए प्रत्यक्षदर्शी और अन्य संबंधित लोग 26 27 और 28 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक ADM न्यायालय कक्ष क्रमांक 201 ग्वालियर में उपस्थित होकर अपना पक्ष रख सकेंगे। प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य घटना से जुड़े अलग-अलग पहलुओं की जानकारी एकत्र करना है।

    जांच में प्रत्यक्षदर्शियों के बयान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हादसे के समय मंदिर के आसपास मौजूद लोगों के पास घटना से पहले और बाद की परिस्थितियों से जुड़ी जानकारी हो सकती है। इसके अलावा उपलब्ध दस्तावेज तस्वीरें और वीडियो भी जांच के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। खबर में लाइव वीडियो को भी जांच का संभावित आधार बताया गया है। ऐसे दृश्य उपलब्ध होने पर उनसे हादसे के समय ट्रक की स्थिति घटनास्थल की परिस्थितियों और घटनाक्रम को समझने में मदद मिल सकती है। हालांकि किसी भी वीडियो या अन्य सामग्री की प्रामाणिकता और उपयोगिता जांच के दौरान परखी जाएगी।

    मजिस्ट्रियल जांच का उद्देश्य केवल हादसे की परिस्थितियों का पता लगाना ही नहीं बल्कि संभावित लापरवाही और सुरक्षा से जुड़े सवालों की पड़ताल करना भी है। मंदिर जैसे धार्मिक स्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है इसलिए प्रवेश द्वार के आसपास सुरक्षा व्यवस्था और वाहनों की आवाजाही जैसे पहलू भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। जांच अधिकारी उपलब्ध साक्ष्यों और बयानों के आधार पर मामले की कड़ियों को जोड़ेंगे। प्रशासन की अपील है कि जिन लोगों के पास घटना से जुड़ी विश्वसनीय जानकारी है वे निर्धारित तारीख और समय पर अपने साक्ष्य प्रस्तुत करें।

    शीतला माता मंदिर हादसे ने शहर में सुरक्षा व्यवस्था और श्रद्धालुओं की आवाजाही को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब लोगों की नजर मजिस्ट्रियल जांच पर रहेगी कि हादसे के वास्तविक कारण क्या सामने आते हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम सुझाए जाते हैं। फिलहाल जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष सामने आने तक किसी संभावित कारण या जिम्मेदारी को निश्चित मानना उचित नहीं होगा।

  • शिवपुरी में आशुतोष ओज के कहानी संग्रह ‘प्रेमपाश’ का विमोचन, वक्ताओं ने कहानियों को संस्कार और सामाजिक बदलाव का माध्यम बताया

    शिवपुरी में आशुतोष ओज के कहानी संग्रह ‘प्रेमपाश’ का विमोचन, वक्ताओं ने कहानियों को संस्कार और सामाजिक बदलाव का माध्यम बताया

    मध्य प्रदेश: के शिवपुरी शहर में 22 अक्टूबर 2026 को कहानीकार आशुतोष ओज के कहानी संग्रह ‘प्रेमपाश’ का विमोचन किया गया। इस अवसर पर साहित्य, सामाजिक जीवन और संस्कारों में कहानियों की भूमिका पर विचार रखे गए। कार्यक्रम में मौजूद वक्ताओं ने कहा कि कहानी केवल घटनाओं का वर्णन नहीं होती, बल्कि समाज को दिशा देने, जीवन मूल्यों को मजबूत करने और लोगों को अपने आसपास की समस्याओं के प्रति जागरूक बनाने का माध्यम भी है।

    कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ प्रचारक श्रीधर पराड़कर ने कहा कि कहानियों के माध्यम से समाज को दिशा और संस्कार मिलते हैं। हर व्यक्ति के जीवन की अपनी कहानी होती है और उसे शब्दों के माध्यम से प्रस्तुत करने वाला कहानीकार कहलाता है। उन्होंने कहा कि गीता और रामचरितमानस में निहित जीवन मूल्यों को अलग-अलग समय में परिवार के बुजुर्गों ने कहानियों के जरिए बच्चों तक पहुंचाया। दादा-दादी और नाना-नानी द्वारा सुनाई जाने वाली कहानियां बचपन से ही संस्कार देने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा रही हैं।

    श्रीधर पराड़कर ने कहा कि आशुतोष ओज की कहानियां रोजमर्रा के जीवन में घटने वाली घटनाओं और अनुभवों से जुड़ी हैं। उनके अनुसार, भावनाओं को व्यक्त करने के लिए कहानी एक सशक्त माध्यम है। इसके जरिए सामान्य जीवन की परिस्थितियों और सामाजिक अनुभवों को प्रभावी ढंग से सामने रखा जा सकता है। उन्होंने कहानी लेखन की उपयोगिता को रेखांकित करते हुए कहा कि यह विधा जीवन और समाज को समझने में मदद करती है।

    विद्या भारती के अखिल भारतीय सह संगठन मंत्री और वरिष्ठ प्रचारक राम अरावकर ने संग्रह के विमोचन को व्यक्तिगत प्रसन्नता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि आशुतोष को बचपन से देखते आए हैं और अब उनका कहानी लेखन के क्षेत्र में प्रवेश करना खुशी की बात है। उन्होंने बताया कि ‘प्रेमपाश’ में राष्ट्रीयता के भावों से जुड़ी कहानियां शामिल हैं। उनके अनुसार, कहानी केवल घटनाओं को दर्ज करने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि समाज में आदर्श स्थापित करने और लोगों को लोभ-लालच से दूर रहने की प्रेरणा देने का काम भी करती है।

    राम अरावकर ने परिवारों में कहानी सुनाने की पुरानी परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले घरों में बुजुर्ग बच्चों को कहानियां सुनाकर जीवन मूल्यों और संस्कारों से परिचित कराते थे। समय के साथ परिवारों के बिखराव, कुटुंब व्यवस्था में बदलाव और तकनीक के बढ़ते प्रभाव ने इस परंपरा को प्रभावित किया है। ऐसे में साहित्य और कहानी लेखन के माध्यम से संस्कारों तथा सामाजिक मूल्यों को आगे बढ़ाने की जरूरत है।

    कार्यक्रम के सारस्वत अतिथि भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल के उप महानिरीक्षक राजीव लोचन शुक्ला ने कहा कि सामाजिक समस्याओं के बढ़ने का एक कारण लोगों का चुपचाप तमाशा देखते रहना भी है। उन्होंने कहा कि जिन समस्याओं को समाज अपने आसपास देखता है, उनके बारे में मुखर होकर बोलना और लिखना समय की मांग है। प्रत्येक नागरिक को इस दिशा में अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए, ताकि समस्याओं को बढ़ने से रोका जा सके।

    राजीव लोचन शुक्ला ने आशुतोष ओज के लेखन की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपने आसपास मौजूद समस्याओं को कहानी संग्रह के माध्यम से प्रस्तुत किया है। सरल भाषा में आम लोगों के जीवन से जुड़ी कहानियों को सामने लाना महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने इसके लिए कहानीकार को बधाई दी।

    इस अवसर पर सौम्या उपाध्याय और डॉ. आकांक्षा गौड़ ने कहानी संग्रह की समीक्षा प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन हेमलता चौधरी ने किया। समारोह में विद्यापीठ के पूर्व छात्र और भोपाल के अपर सत्र न्यायाधीश संजय अग्रवाल का अभिनंदन भी किया गया। मंच पर डॉ. कुमार संजीव, पुरुषोत्तम गौतम और प्रमोद भार्गव सहित अन्य अतिथि उपस्थित रहे। समारोह में विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों ने अतिथियों का स्वागत किया। अंत में आशुतोष शर्मा ओज ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।

  • ग्वालियर में ऑनलाइन जॉब के नाम पर साइबर फ्रॉड, पैसे वापस मांगे तो तंजानिया की छात्रा को किया ब्लॉक, FIR दर्ज

    ग्वालियर में ऑनलाइन जॉब के नाम पर साइबर फ्रॉड, पैसे वापस मांगे तो तंजानिया की छात्रा को किया ब्लॉक, FIR दर्ज


    ग्वालियर । ग्वालियर में ऑनलाइन पार्ट टाइम नौकरी के नाम पर साइबर ठगी का मामला सामने आया है। यहां पढ़ाई कर रही तंजानिया की 22 वर्षीय छात्रा को घर बैठे कमाई का झांसा देकर कथित तौर पर 50 हजार रुपये ठग लिए गए। आरोपियों ने रजिस्ट्रेशन फीस फाइल चार्ज और वेरिफिकेशन सहित अलग-अलग प्रक्रियाओं के नाम पर छात्रा से पैसे ट्रांसफर कराए। 15 और 16 अक्टूबर 2026 के दौरान Paytm UPI के जरिए कुल 13 बार में रकम भेजी गई। जब छात्रा को न नौकरी मिली और न ही उसके पैसे वापस किए गए तो उसे ठगी का अहसास हुआ। रकम वापस मांगने पर आरोपियों ने उसे ब्लॉक कर दिया। शिकायत के बाद सिरोल थाना पुलिस ने ई-जीरो FIR दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के मुताबिक तंजानिया की रहने वाली हेरियथ जस्टीना ग्वालियर के एक विश्वविद्यालय में स्टूडेंट वीजा पर पढ़ाई कर रही हैं। वह सिरोल थाना क्षेत्र की एमके सिटी टाउनशिप में अपने भाई के साथ रहती हैं। पढ़ाई का खर्च उठाने में मदद के लिए वह इंटरनेट पर पार्ट टाइम और वर्क फ्रॉम होम नौकरी तलाश रही थीं। इसी दौरान 15 अक्टूबर को उन्हें घर बैठे काम करने और अच्छी कमाई का ऑफर देने वाला संदेश मिला। छात्रा ने इसे नौकरी का वास्तविक अवसर समझा और आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी।

    आरोप है कि नौकरी देने के नाम पर उनसे अलग-अलग बहाने बनाकर भुगतान मांगा जाने लगा। कभी फाइल चार्ज तो कभी वेरिफिकेशन फीस और कभी अन्य औपचारिकताओं के लिए पैसे जमा करने को कहा गया। नौकरी मिलने की उम्मीद में छात्रा ने आरोपियों के बताए तरीके से Paytm UPI के माध्यम से भुगतान किया। 15 और 16 अक्टूबर के बीच 13 अलग-अलग ट्रांजैक्शन में कुल 50 हजार रुपये ट्रांसफर हो गए। लगातार रकम मांगने के बावजूद जब नौकरी शुरू नहीं हुई तो छात्रा को संदेह होने लगा।

    इसके बाद छात्रा ने अपने पैसे वापस मांगने की कोशिश की। आरोप है कि रकम लौटाने के बजाय उससे और पैसे मांगे जाने लगे। जब उसने आगे भुगतान करने से इनकार किया और अपनी रकम वापस मांगी तो आरोपियों ने उसे ब्लॉक कर दिया। इस तरह नौकरी पाने की उम्मीद में भेजी गई रकम वापस नहीं मिल सकी। इसके बाद छात्रा ने साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले में कार्रवाई शुरू की।

    सिरोल थाना पुलिस ने शुक्रवार को भारतीय न्याय संहिता के तहत ई-जीरो FIR दर्ज की है। अब पुलिस छात्रा के Paytm ट्रांजैक्शन और आरोपियों के साथ हुई बातचीत की चैट हिस्ट्री खंगाल रही है। जिन बैंक खातों में रकम भेजी गई है उनके खाताधारकों की जानकारी जुटाने के साथ आरोपियों की पहचान करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। डिजिटल भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश होगी कि रकम किन खातों में पहुंची और ठगी में कौन लोग शामिल हैं।

    डीएसपी साइबर मनीष यादव के मुताबिक छात्रा ने हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत की थी जिसके बाद सिरोल थाने में मामला दर्ज किया गया। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। यह घटना एक बार फिर ऑनलाइन नौकरी के नाम पर होने वाली ठगी के खतरे को सामने लाती है। नौकरी देने से पहले रजिस्ट्रेशन या वेरिफिकेशन के नाम पर बार-बार पैसे मांगने वाले ऑफर से सतर्क रहना जरूरी है। किसी भी अनजान व्यक्ति या कंपनी को भुगतान करने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच करनी चाहिए। फिलहाल पुलिस की जांच के बाद ही आरोपियों की पहचान और ठगी से जुड़े बाकी तथ्यों का खुलासा हो सकेगा।