यह हादसा एक बार फिर शहर में ट्रांसपोर्ट और लोडिंग अनलोडिंग के दौरान सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि जांच पूरी होने के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसे हादसे रोके जा सकें।
Category: Madhya Pradesh
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इंदौर हादसा: भारी पार्सल गिरा, सफाईकर्मी घायल-प्रशासन ने गोदाम किया सील
नई दिल्ली । इंदौर के राजमोहल्ला इलाके में रविवार सुबह एक बड़ा हादसा हो गया, जिसने पूरे क्षेत्र को हिला दिया। नगर निगम की सफाईकर्मी सुनीता बाली, जो वार्ड क्रमांक 69 में नियमित सफाई कार्य कर रही थीं, उस समय गंभीर रूप से घायल हो गईं जब उनके ऊपर लगभग 1 क्विंटल वजन का भारी पार्सल गिर गया।यह हादसा उस समय हुआ जब हंसचाल ट्रेवल्स की बस पर सामान चढ़ाया जा रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस की छत पर रखा भारी लगेज चढ़ाते समय एक व्यक्ति के हाथ से फिसल गया और सीधे नीचे काम कर रही सफाईकर्मी पर गिर पड़ा। अचानक हुए इस हादसे में सुनीता बाली गंभीर रूप से घायल हो गईं और मौके पर अफरा-तफरी मच गई।स्थानीय लोगों ने तुरंत मदद करते हुए घायल महिला को उठाया और वर्मा यूनियन अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद कंधे और पसली में फ्रैक्चर की पुष्टि की है। फिलहाल महिला का इलाज जारी है और उनकी हालत पर डॉक्टर लगातार नजर बनाए हुए हैं।हादसे के बाद इलाके में मौजूद लोगों में आक्रोश भी देखने को मिला। स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि बसों पर सामान लोड करने के दौरान सुरक्षा नियमों की अनदेखी की जाती है, जिसकी वजह से इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं।घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की गई। शुरुआती जांच में सामने आया कि इंडियन ट्रांसपोर्ट के गोदाम से यह पार्सल बस पर लोड किया जा रहा था। लापरवाही सामने आने के बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए संबंधित गोदाम को सील कर दिया है।नगर निगम अधिकारियों ने भी इस घटना की पुष्टि की है। अधिकारियों के अनुसार, प्रातःकालीन सफाई अभियान के दौरान यह हादसा हुआ है। एआरओ स्तर के अधिकारी को मौके पर भेजा गया और पूरी स्थिति का निरीक्षण किया गया। साथ ही सुरक्षा मानकों की जांच के निर्देश दिए गए हैं।फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर इतनी भारी वस्तु को बिना उचित सुरक्षा उपायों के कैसे लोड किया जा रहा था। जिम्मेदार लोगों की पहचान कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
यह हादसा एक बार फिर शहर में ट्रांसपोर्ट और लोडिंग अनलोडिंग के दौरान सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि जांच पूरी होने के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसे हादसे रोके जा सकें। -

भोपाल में सनसनी: छात्रा की मौत के बाद मकान मालिक की आत्महत्या, जांच पर उठे सवाल
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के कोहेफिजा इलाके से एक रूह कपा देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ न्याय और जांच के चक्रव्यूह में फंसकर एक और जिंदगी खत्म हो गई। गांधी मेडिकल कॉलेज की 19 वर्षीय एमबीबीएस छात्रा रोशनी की आत्महत्या के करीब तीन महीने बाद, उसी मकान के मालिक विजय राठौर ने शनिवार देर रात अपने घर में खुदकुशी कर ली। इस घटना ने न केवल इलाके में सनसनी फैला दी है, बल्कि पुलिसिया कार्यप्रणाली और सामाजिक दबाव पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।विजय राठौर की मौत के बाद उनकी पत्नी करुणा राठौर ने व्यवस्था और छात्रा के परिवार पर तीखे प्रहार किए हैं। करुणा का आरोप है कि उनके पति पूरी तरह बेकसूर थे, लेकिन छात्रा की मौत के बाद से ही उन्हें ‘अपराधी’ की तरह प्रताड़ित किया जा रहा था। पत्नी के मुताबिक, छात्रा के परिजन लगातार उनके घर आकर हत्या के झूठे केस में फंसाने की धमकियां देते थे। इतना ही नहीं, पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि बयानों के नाम पर विजय को थाने बुलाकर घंटों बैठाया जाता था, जिससे वे गहरे मानसिक अवसाद (डिप्रेशन) में चले गए थे।
पढ़ाई का दबाव बना काल, पर संदेह ने ली दूसरी जान
घटना की जड़ें फरवरी माह से जुड़ी हैं, जब छात्रा रोशनी का शव बाथरूम में संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था। उस समय छात्रा के परिजनों और साथी मेडिकल छात्रों ने इसे हत्या करार देते हुए थाने का घेराव किया था। हालांकि, बाद में पुलिस जांच और मोबाइल की फॉरेंसिक रिपोर्ट में एक सुसाइड नोट बरामद हुआ था। रोशनी ने मरने से पहले खुद को व्हाट्सएप किए गए मैसेज में लिखा था “सॉरी मम्मी-पापा, नीट निकालना आसान है, लेकिन एमबीबीएस करना उससे भी कठिन है।” स्पष्ट था कि छात्रा पढ़ाई के दबाव के कारण जान दे रही थी, लेकिन इस सच्चाई के बावजूद मकान मालिक पर शक की सुई और दबाव कम नहीं हुआ।पत्नी की न्याय की गुहार
विजय राठौर की पत्नी ने मांग की है कि उनके पति को आत्महत्या के लिए उकसाने वाले छात्रा के परिजनों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने बताया कि विजय बार-बार कहते थे कि पुलिस और छात्रा का परिवार उन्हें जीने नहीं देगा। शनिवार रात इसी प्रताड़ना से हारकर उन्होंने मौत को गले लगा लिया।वर्तमान में कोहेफिजा पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। विजय की बेटी बेंगलुरु में रहती है, जिसके आने के बाद शव का पोस्टमार्टम किया जाएगा। थाना प्रभारी केजी शुक्ला का कहना है कि परिजनों के बयानों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। एक छात्रा के करियर के दबाव ने पहले एक घर का चिराग बुझाया, और अब जांच के दबाव ने दूसरे हंसते-खेलते परिवार के मुखिया को छीन लिया है।
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MP के वन विभाग ने रचा इतिहास… भोपाल से उड़ा गिद्ध 3000KM का सफर कर पहुंचा उज्बेकिस्तान
भोपाल। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) का वन विभाग (Forest Department) अब सिर्फ बाघों (Tigers) के ही नहीं, बल्कि गिद्धों (Vultures) के संरक्षण में भी दुनिया के लिए मिसाल पेश कर रहा है. हाल ही में राज्य के गिद्ध संरक्षण प्रजनन केंद्र (VCBC) केरवा में इलाज पाकर ठीक हुए दो सिनेरियस गिद्धों (Two Cinereous Vultures) ने अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पार कर वैज्ञानिक जगत को हैरान कर दिया है.दरअसल, दिसंबर 2025 में विदिशा के सिरोंज से एक घायल सिनेरियस गिद्ध को बचाया गया था. भोपााल के वन विहार में और BNHS संचालित VCBC में इलाज के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे 23 फरवरी को हलाली बांध क्षेत्र में आजाद किया।
WWF-India के सहयोग से इस पर GPS लगाया गया था. डेटा के अनुसार, 10 अप्रैल को इसने उड़ान भरी और राजस्थान, पाकिस्तान और अफगानिस्तान को पार करते हुए 4 मई को उज्बेकिस्तान पहुंच गया. विदिशा से उज्बेकिस्तान तक गिद्ध का 3000 किमी का सफर देख हर कोई हैरान है।
पाकिस्तान में फंसी मादा गिद्ध का रेस्क्यू
एक अन्य मामला शाजापुर के सुसनेर से रेस्क्यू की गई मादा सिनेरियस गिद्ध का है. 25 मार्च को रिहा होने के बाद यह गिद्ध पाकिस्तान पहुंच गई. 7 अप्रैल को वहां आए भीषण ओलावृष्टि तूफान के कारण यह उड़ने में असमर्थ हो गई और जमीन पर गिर पड़ी।
इंटरनेशनल कॉर्डिनेशन
सिग्नल गायब होने पर WWF-India ने तुरंत WWF-पाकिस्तान से संपर्क किया. पाकिस्तानी अधिकारियों ने इसे पंजाब प्रांत के खानेवाल जिले से सुरक्षित बरामद कर लिया. फिलहाल वह स्थानीय वल्चर सेंटर में स्वस्थ हो रही है।
GPS से रीयल-टाइम निगरानी
अधिकारियों का कहना है कि यह लंबी यात्राएं गिद्धों की अद्भुत दिशा-ज्ञान क्षमता और सहनशक्ति का प्रमाण हैं. माइक्रोचिप और GPS-GSM टेलीमेट्री डिवाइस की मदद से वन विभाग इनकी रीयल-टाइम निगरानी कर पा रहा है. इससे पहले साल 2025 में भी एक यूरेशियन ग्रिफॉन गिद्ध कजाकिस्तान तक 4300 किमी की यात्रा कर वापस भारत लौटा था.
गिद्धों का महत्व
सिनेरियस गिद्ध एशिया और यूरोप की सबसे बड़ी पक्षी प्रजातियों में से एक है. ये वन ईकोसिस्टम की सफाई में अहम भूमिका निभाते हैं। -

MP में 100 साल पहले विलुप्त हुए जंगली भैसों का कुनबा बढ़ा… काजीरंगा से कान्हा आए 4 नए भैंसे
मंडला। मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) अब जंगली भैंसों (Wild Buffaloes) को दोबारा बसाने को लेकर एक नया कीर्तिमान रच रहा है. असम के काजीरंगा नेशनल पार्क (Kaziranga National Park, Assam) से लाए गए 4 और जंगली भैंसों को शुक्रवार को कान्हा टाइगर रिजर्व (Kanha Tiger Reserve.-KTR) के सुपखर रेंज में विशेष रूप से तैयार किए गए बाड़े में छोड़ दिया गया।मध्यप्रदेश के जंगलों से जंगली भैंस लगभग 100 साल पहले ही विलुप्त हो गए थे. सुपखर क्षेत्र, जहां इन भैंसों को छोड़ा गया है, ऐतिहासिक रूप से इनका प्राकृतिक आवास रहा है. इस पुनर्वास कार्यक्रम का उद्देश्य इस अहम प्रजाति को एक बार फिर मध्यप्रदेश के ईकोसिस्टम का हिस्सा बनाना है।
72 घंटे का चुनौतीपूर्ण सफर
इन जंगली भैंसों को काजीरंगा से कान्हा तक लाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था. करीब 2220 किमी की लंबी यात्रा को विशेष वाहनों में इस सफर को पूरा करने में 72 घंटे लगे. यात्रा के दौरान दो विशेषज्ञ वन्यजीव पशु चिकित्सकों की टीम ने इन पशुओं के स्वास्थ्य की पल-पल निगरानी की।
कान्हा में बढ़ा कुनबा
इससे पहले, 28 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पहले चरण के तहत चार जंगली भैंसों (1 नर और 3 मादा) को बाड़े में छोड़ा था. अब चार नए सदस्यों के आने के बाद कान्हा में इनकी कुल संख्या 8 हो गई है. अधिकारियों के मुताबिक, आने वाले समय में और भी भैंसों को यहां लाया जाएगा.ईकोसिस्टम के लिए क्यों हैं अहम?
जंगली भैंस भारतीय वन्यजीव विरासत का गौरव हैं. वन अधिकारियों के अनुसार, वन पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बनाए रखने में इनकी भूमिका बेहद अहम है.प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) समिता राजोरा और अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक एल. कृष्णमूर्ति ने इस अभियान को मध्यप्रदेश की वन्यजीव संरक्षण पहलों में एक और मील का पत्थर बताया है। इस अवसर पर KTR के निदेशक रविंद्र मणि त्रिपाठी और उप निदेशकों सहित अन्य सीनियर अधिकारी भी मौजूद रहे।
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मंदसौर में नशे के नेटवर्क पर बड़ा प्रहार, खेतों के बीच छिपी अवैध ड्रग्स लैब का खुलासा..
मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में नशे के खिलाफ चल रहे अभियान के दौरान एक बड़ी सफलता सामने आई है, जहां खेतों के बीच छिपाकर संचालित की जा रही एक अवैध सिंथेटिक ड्रग्स निर्माण इकाई का पर्दाफाश हुआ है। यह कार्रवाई उस समय सामने आई जब लंबे समय से संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी के बाद एक विशेष टीम ने गुप्त रूप से तैयार की गई इस लैब पर छापा मारा। सामान्य रूप से दिखने वाले एक ग्रामीण इलाके में इस तरह का नेटवर्क संचालित होना जांच एजेंसियों के लिए भी चौंकाने वाला रहा।
जांच के दौरान यह सामने आया कि यह पूरी गतिविधि बेहद सुनियोजित तरीके से चलाई जा रही थी, जहां एक कमरे और उसके आसपास के हिस्से को प्रयोगशाला में बदलकर मेफेड्रोन जैसे खतरनाक सिंथेटिक नशीले पदार्थों का निर्माण किया जा रहा था। तकनीकी निगरानी और खुफिया इनपुट के आधार पर की गई इस कार्रवाई में यह स्पष्ट हुआ कि यह केवल एक छोटा संचालन नहीं बल्कि एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।
छापेमारी के दौरान टीम ने जब पूरे स्थान की तलाशी ली तो वहां से बड़ी मात्रा में तैयार और निर्माणाधीन मादक पदार्थ बरामद हुए। इसके साथ ही कई प्रकार के रसायन और प्रयोगशाला उपकरण भी मिले, जिनका उपयोग अवैध ड्रग्स बनाने में किया जा रहा था। प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि इस नेटवर्क के पीछे सप्लाई चैन और वितरण व्यवस्था भी सक्रिय हो सकती है, जिसकी जांच अब आगे बढ़ाई जा रही है।
इस कार्रवाई में मौके से दो व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया, जिन्हें बाद में संबंधित कानून के तहत गिरफ्तार कर लिया गया। अधिकारियों का मानना है कि यह मामला केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार राज्य के बाहर तक जुड़े होने की संभावना भी हो सकती है। इसी कारण अब पूरे नेटवर्क के वित्तीय लेन-देन, केमिकल सप्लाई स्रोत और संभावित सहयोगियों की गहन जांच की जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार इस तरह की गुप्त लैब का खुलासा नशे के खिलाफ चल रही लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम है। सिंथेटिक ड्रग्स का उत्पादन न केवल अवैध है बल्कि यह समाज के लिए गंभीर खतरा भी पैदा करता है, खासकर युवाओं पर इसका प्रभाव अत्यधिक हानिकारक होता है। इसी कारण इस तरह के नेटवर्क को पूरी तरह समाप्त करना प्रशासन की प्राथमिकता में शामिल है।
इस घटना ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि अवैध नशा कारोबार अब केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में भी अपनी जड़ें फैलाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में लगातार निगरानी और समय पर कार्रवाई बेहद जरूरी हो जाती है, ताकि इस तरह के नेटवर्क को बढ़ने से पहले ही रोका जा सके।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नशे के खिलाफ अभियान आगे भी इसी तरह सख्ती के साथ जारी रहेगा और किसी भी संदिग्ध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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MP: इंदौर में BJP नेता को थप्पड़ मारना महिला पुलिस अधिकारी को पड़ा महंगा, हंगामे के बाद 3 सस्पेंड
इंदौर। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के इंदौर (Indore) में शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) के कार्यकर्ताओं ने एक व्यस्त चौराहे को जाम कर दिया. यह विरोध प्रदर्शन तब हुआ जब एक महिला ट्रैफिक पुलिस अधिकारी (Female Traffic Police Officer) ने कथित तौर पर पार्टी के एक नेता को थप्पड़ मार दिया था. इस घटना के बाद पुलिस बल के तीन कर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।BJP नेता वीरेंद्र शेंडगे ने पत्रकारों को बताया कि यह घटना तब हुई जब वह अपने दोपहिया वाहन पर थे और महू नाका चौराहे पर ट्रैफिक सिग्नल के हरे से लाल होने से पहले उसे पार करने की कोशिश कर रहे थे। शेंडगे ने दावा किया कि एक महिला पुलिस अधिकारी ने उन पर गाड़ी चलाते समय मोबाइल फोन पर बात करने का आरोप लगाते हुए उन्हें थप्पड़ मार दिया।
शेंडगे, जो यहां BJP के विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 4 के प्रभारी हैं, ने कहा, “मैं अपने मोबाइल फोन पर बात नहीं कर रहा था. जब मैंने अपनी बात रखने की कोशिश की और थप्पड़ मारे जाने पर आपत्ति जताई, तो ट्रैफिक पुलिस कर्मियों ने मेरे साथ दुर्व्यवहार किया.” बाद में, BJP कार्यकर्ताओं ने शेंडगे के समर्थन में विरोध प्रदर्शन किया और पुलिस के खिलाफ नारे लगाए, जिसमें उन्होंने पुलिस पर मनमानी करने का आरोप लगाया. कुछ पार्टी कार्यकर्ताओं को सड़क जाम करने के लिए पुलिस बैरिकेड्स का इस्तेमाल करते हुए भी देखा गया।
सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) सुप्रिया चौधरी ने बताया कि ट्रैफिक पुलिस थाने की प्रभारी राधा यादव को कथित लापरवाही के आरोप में फील्ड ड्यूटी से हटाकर पुलिस उपायुक्त (DCP) कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है, जबकि सूबेदार (सब-इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी) लक्ष्मी धार्वे और कांस्टेबल शेखर गावड़े को निलंबित कर दिया गया है। ACP शिवेंदु जोशी ने बताया कि घटना के संबंध में CCTV फुटेज की जांच की जा रही है और विस्तृत जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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MP: धार की ऐतिहासिक भोजशाला में हिन्दुओं को मिले पूजा का अधिकार…. HC में हिन्दू पक्ष ने रखे तर्क
इंदौर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (Madhya Pradesh High Court) की इंदौर पीठ (Indore Bench) के सामने शुक्रवार को धार की ऐतिहासिक भोजशाला (Historical Bhojshala) को लेकर एक अहम दलील पेश की गई. हिंदू याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को इस परिसर के मूल धार्मिक स्वरूप को बहाल करने का निर्देश दिया जाए और वहां केवल हिंदुओं को पूजा की अनुमति मिले।‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ के वकील विष्णु शंकर जैन ने जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच के सामने ASI के 7 अप्रैल 2003 के आदेश को कानून का उल्लंघन बताया।
अभी हिंदुओं को मंगलवार को पूजा और मुस्लिमों को शुक्रवार को नमाज की अनुमति है. जैन ने कहा कि ‘प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम 1958’ के तहत किसी भी स्मारक का उपयोग उसके मूल स्वरूप के विपरीत नहीं किया जा सकता. उनके अनुसार, यह व्यवस्था हिंदुओं के मौलिक अधिकारों का हनन है।
मंदिर बनाम मस्जिद
याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी के वकील मनीष गुप्ता ने परिसर की बनावट पर बड़े सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि इस ढांचे में न तो कोई मीनार है और न ही वजूखाना, जो एक पारंपरिक मस्जिद की पहचान होते हैं. उन्होंने इस दावे को भी खारिज कर दिया कि भोजशाला एक जैन मंदिर था; उन्होंने कहा कि यह स्मारक असल में एक सरस्वती मंदिर है, जिसकी स्थापना 1034 ईस्वी में परमार वंश के राजा भोज ने की थी।
मुस्लिम पक्ष और 1991 के कानून की दलील
मुस्लिम पक्ष ने अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए ‘पूजा स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम 1991’ का सहारा लिया. 15 अगस्त 1947 को यह परिसर एक मस्जिद के रूप में अस्तित्व में था, इसलिए कानूनन इसके स्वरूप में बदलाव नहीं किया जा सकता। विष्णु शंकर जैन ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि भोजशाला एक ASI संरक्षित स्मारक है, इसलिए 1991 का अधिनियम इस पर लागू नहीं होता।हाई कोर्ट इस परिसर के धार्मिक स्वरूप से जुड़ी कुल पांच याचिकाओं और एक रिट अपील पर एक साथ सुनवाई कर रहा है. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 11 मई की तारीख तय की है।
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एमपी में आज 13 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट, दो सिस्टम एक्टिव, रविवार से फिर बढ़ेगी गर्मी
भोपाल। मध्यप्रदेश में मौसम का मिजाज लगातार बदला हुआ है। प्रदेश के बीच से दो ट्रफ लाइन गुजर रही हैं, जबकि ऊपरी हिस्से में साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय बना हुआ है। इसी के असर से कई जिलों में आंधी और बारिश का दौर जारी है। शुक्रवार को 20 से अधिक जिलों में मौसम बदला रहा, वहीं शनिवार के लिए 13 जिलों में तेज आंधी और बारिश की चेतावनी जारी की गई है।मौसम विभाग के अनुसार शनिवार को नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, उमरिया, शहडोल, सीधी और सिंगरौली जिलों में मौसम का असर ज्यादा देखने को मिल सकता है।
शुक्रवार को भी प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम के अलग रंग दिखाई दिए। कहीं तेज गर्मी रही तो कहीं आंधी और हल्की बारिश दर्ज की गई। सिवनी, छिंदवाड़ा, रायसेन, सागर, दमोह, बालाघाट, भोपाल, देवास, खरगोन, राजगढ़, विदिशा, टीकमगढ़, अशोकनगर, शिवपुरी, बैतूल, नरसिंहपुर, मंडला, पांढुर्णा, डिंडौरी और अनूपपुर समेत कई जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश हुई।
दूसरी ओर कई शहरों में गर्मी का असर भी बना रहा। रतलाम प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां तापमान 43.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। शाजापुर में पारा 42.6 डिग्री तक पहुंचा। बड़े शहरों की बात करें तो उज्जैन में 42.4 डिग्री, भोपाल और इंदौर में 41.2 डिग्री, जबलपुर में 38.8 डिग्री तथा ग्वालियर में 37.5 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ।
मौसम केंद्र भोपाल के मुताबिक, मई की शुरुआत से ही प्रदेश में मौसम सामान्य नहीं रहा है। आमतौर पर इस समय भीषण गर्मी पड़ती है, लेकिन इस बार आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का दौर बना हुआ है। इसके पीछे चक्रवात, ट्रफ लाइन और वेस्टर्न डिस्टरबेंस को प्रमुख वजह बताया गया है। हालांकि मौसम विभाग का कहना है कि शनिवार के बाद बारिश की गतिविधियों में कमी आएगी और तापमान में तेजी से बढ़ोतरी होगी। रविवार से अधिकांश जिलों में पारे में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है।
मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विभाग के अनुसार आंधी और बिजली चमकने के दौरान खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचें। खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थान या पक्के मकान में शरण लेने की सलाह दी गई है। वहीं, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान होने की आशंका भी जताई गई है।
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इंदौर के द्वारकापुरी में रोड विवाद ने लिया हिंसक रूप, दो पक्षों में जमकर मारपीट
नई दिल्ली। इंदौर के द्वारकापुरी क्षेत्र की गणेश मंदिर वाली गली में शुक्रवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई जब रोड चौड़ीकरण और अतिक्रमण को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए। शुरुआत में हुई कहासुनी धीरे-धीरे इतनी बढ़ गई कि मामला हिंसक झड़प में बदल गया।स्थानीय लोगों के अनुसार, विवाद उस समय शुरू हुआ जब एक पक्ष ने सड़क चौड़ीकरण का समर्थन करते हुए दूसरे पक्ष से सहयोग की बात कही। हालांकि, दूसरे पक्ष ने इस पर सहमति नहीं जताई, जिसके बाद दोनों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद ने उग्र रूप ले लिया और लोग डंडे व पाइप लेकर एक-दूसरे पर टूट पड़े।घटना के वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि दोनों पक्षों के लोग सड़क पर हंगामा करते हुए एक-दूसरे पर हमला कर रहे हैं। इस दौरान लात-घूंसे भी चले और कुछ लोगों के बीच झूमाझटकी की स्थिति भी बनी रही। बताया जा रहा है कि मारपीट के दौरान एक व्यक्ति का गला पकड़ने की कोशिश भी की गई। इस झड़प में दोनों पक्षों के लोग घायल हो गए।घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर जमा हो गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।पुलिस के अनुसार, मामले में दोनों पक्षों की शिकायत पर क्रॉस एफआईआर दर्ज की गई है। इसमें लक्की बिंजवा की शिकायत पर धीरज और गिरीश के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, जबकि धीरज बिंजवा की शिकायत पर सुनील, लक्की और अभिषेक के खिलाफ कार्रवाई की गई है। कुछ लोगों को राउंडअप भी किया गया है और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जा रही है।पुलिस अधिकारियों ने बताया कि विवाद की जड़ सड़क चौड़ीकरण और कथित अतिक्रमण से जुड़ी हुई है। एक पक्ष सड़क को चौड़ा करने के पक्ष में था, जबकि दूसरे पक्ष पर निर्माण कर अतिक्रमण करने के आरोप लगाए गए हैं। इसी मुद्दे पर दोनों के बीच तनाव बढ़ता गया और मामला मारपीट तक पहुंच गया।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए निगरानी बढ़ा दी गई है। स्थानीय प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि आगे किसी तरह की अप्रिय घटना न हो। -

एमपी में शादी के दौरान रेबीज वैक्सीनेशन कैंप, बारातियों को बुलाकर लगाया गया इंजेक्शन, उठे सवाल
नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक शादी समारोह के दौरान शामिल हुए बारातियों को बाद में घर-घर बुलाकर रेबीज के इंजेक्शन लगाए गए। यह पूरा मामला भैंसादंड गांव का है, जिसने पूरे इलाके में चिंता और अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया है।जानकारी के अनुसार, शादी समारोह में मेहमानों को जो मट्ठा (छाछ) परोसा गया था, वह एक ऐसी गाय के दूध से बनाया गया था, जिसमें रेबीज जैसे गंभीर लक्षण पाए गए थे। बाद में जांच में सामने आया कि संबंधित गाय को कुछ दिन पहले एक कुत्ते ने काट लिया था और उसी के बाद उसकी तबीयत बिगड़ती चली गई।
मंगलवार को जब गाय की हालत अचानक गंभीर हुई, तब गांव में यह जानकारी फैली कि उसी दूध से बने मट्ठे का उपयोग शादी में किया गया था। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग तुरंत हरकत में आया और संभावित संक्रमण के खतरे को देखते हुए एहतियाती कदम उठाए गए।
स्वास्थ्य विभाग ने उप स्वास्थ्य केंद्र भैंसादंड में तत्काल कैंप लगाकर टीकाकरण अभियान शुरू किया। अब तक करीब 200 से 250 लोगों को रेबीज के एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगाए जा चुके हैं। विभाग की टीम लगातार लोगों की पहचान कर उन्हें बुला रही है और टीकाकरण सुनिश्चित कर रही है।
अधिकारियों के अनुसार, यह कदम पूरी तरह सावधानी के तौर पर उठाया गया है, ताकि किसी भी संभावित संक्रमण या जोखिम से बचा जा सके। क्योंकि रेबीज एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है, जो संक्रमित जानवरों के संपर्क या उनके दूध/लार से फैलने की आशंका में भी जोखिम पैदा कर सकती है।
गांव में स्वास्थ्य टीम की तैनाती की गई है और सभी बारातियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। जिन लोगों ने शादी में भोजन और पेय पदार्थों का सेवन किया था, उन्हें विशेष निगरानी में रखा गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शादी समारोह में बड़ी संख्या में मेहमान शामिल हुए थे, इसलिए अब सभी को ट्रैक कर टीकाकरण किया जा रहा है। अचानक हुई इस कार्रवाई से लोग पहले तो घबरा गए, लेकिन बाद में स्वास्थ्य विभाग की समझाइश के बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया।
फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है कि क्या वास्तव में दूध या मट्ठे से किसी प्रकार का संक्रमण फैलने का खतरा था या यह पूरी तरह एहतियाती कदम है।
यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में पशु स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा को लेकर जागरूकता की आवश्यकता को भी उजागर करती है, ताकि भविष्य में ऐसे हालात से बचा जा सके।