Category: Madhya Pradesh

  • उज्जैन में मटन दुकानों को लेकर फिर गरमाई राजनीति: हिंदू संगठनों ने महापौर को दी चुनौती, बोले- हटीं दुकानें तो दूध से कराएंगे स्नान

    उज्जैन में मटन दुकानों को लेकर फिर गरमाई राजनीति: हिंदू संगठनों ने महापौर को दी चुनौती, बोले- हटीं दुकानें तो दूध से कराएंगे स्नान


    मध्य प्रदेश। उज्जैन में मांस-मटन और मछली की दुकानों को नगर निगम सीमा से बाहर स्थानांतरित करने का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन गया है। धार्मिक नगरी के स्वरूप और महाकाल मंदिर क्षेत्र की गरिमा का हवाला देते हुए लंबे समय से इस मांग को उठाया जा रहा है। हाल ही में इस विषय ने तब नया मोड़ ले लिया जब नगर निगम की एमआईसी बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किया जा सका, जबकि पहले इसके लिए घोषणा की जा चुकी थी।

    दरअसल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशों के बाद उज्जैन नगर निगम सीमा से शराब की दुकानों को बाहर किए जाने की कार्रवाई पहले ही हो चुकी है। इसके बाद विभिन्न सामाजिक और हिंदू संगठनों की ओर से शहर में संचालित मांस-मटन और मछली की दुकानों को भी नगर सीमा से बाहर स्थानांतरित करने की मांग लगातार उठाई जा रही है। इसी क्रम में उज्जैन के महापौर मुकेश टटवाल ने कुछ समय पहले घोषणा की थी कि इस विषय पर एमआईसी बैठक में प्रस्ताव लाया जाएगा।

    शहर में यह माना जा रहा था कि प्रस्ताव पारित होने के बाद दुकानों को नगर निगम सीमा से बाहर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। हालांकि हाल ही में आयोजित एमआईसी बैठक में यह प्रस्ताव प्रस्तुत ही नहीं किया गया, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया। महापौर मुकेश टटवाल ने बताया कि प्रस्ताव नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा को भेजा गया था, लेकिन बैठक के एजेंडे में इसे शामिल नहीं किया गया। इसके कारण इस विषय पर कोई निर्णय नहीं हो सका।

    एमआईसी बैठक में प्रस्ताव नहीं आने के बाद हिंदू जागरण मंच समेत कई हिंदूवादी संगठनों ने नाराजगी व्यक्त की है। संगठन के पदाधिकारियों अर्जुन भदौरिया और रितेश माहेश्वरी ने आरोप लगाया कि इससे पहले भी शहर में मटन दुकानों को हटाने के दावे किए गए थे, लेकिन धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि दो वर्ष पहले भी नगर निगम परिषद में इस मुद्दे को लेकर विरोध दर्ज कराया गया था और महाकाल मंदिर मार्ग से मांस की दुकानों को हटाने की बात कही गई थी, लेकिन स्थिति आज भी जस की तस बनी हुई है।

    अर्जुन भदौरिया ने दावा किया कि उन्हें इस बार भी दुकानों के स्थानांतरण को लेकर भरोसा नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि महापौर अपने दावे के अनुरूप शहर से मांस-मटन की दुकानों को हटाने में सफल होते हैं तो हिंदूवादी संगठन उनका दूध से स्नान कर सम्मान करेंगे। यह बयान अब राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।

    जानकारी के अनुसार महाकाल मंदिर पहुंच मार्ग और उससे जुड़े कई प्रमुख क्षेत्रों में वर्तमान में मांस-मटन की दुकानें संचालित हो रही हैं। इनमें हरिफाटक, बेगमबाग, मालीपुरा, तोपखाना, सब्जी मंडी, छत्री चौक, पटनी बाजार, महाकाल मार्ग, तेलीवाड़ा और खारकुआं जैसे इलाके शामिल हैं। स्थानीय स्तर पर यह दावा किया जा रहा है कि पूरे शहर में 150 से अधिक मांस, मटन और मछली की दुकानें संचालित हो रही हैं।

    फिलहाल इस विषय पर अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है, लेकिन प्रस्ताव को लेकर शुरू हुआ विवाद यह संकेत दे रहा है कि आने वाले दिनों में उज्जैन की स्थानीय राजनीति में यह मुद्दा और अधिक प्रमुखता से उभर सकता है।

  • भोपाल-ग्वालियर के बीच बनेगा नया ग्रीनफील्ड कॉरिडोर: 80 किमी तक घटेगी दूरी, साढ़े 5 घंटे में पूरा होगा सफर

    भोपाल-ग्वालियर के बीच बनेगा नया ग्रीनफील्ड कॉरिडोर: 80 किमी तक घटेगी दूरी, साढ़े 5 घंटे में पूरा होगा सफर


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में सड़क संपर्क को और अधिक तेज, सुरक्षित और आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण परियोजना आकार लेने जा रही है। राज्य सरकार और मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) भोपाल और ग्वालियर के बीच नया 4-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर विकसित करने की तैयारी कर रहे हैं। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने हेतु इसी महीने टेंडर जारी किए जाने की योजना है।

    प्रस्तावित ग्रीनफील्ड कॉरिडोर बनने के बाद भोपाल और ग्वालियर के बीच की दूरी में लगभग 70 से 80 किलोमीटर तक की कमी आएगी। वर्तमान में दोनों शहरों के बीच सड़क मार्ग से दूरी लगभग 425 किलोमीटर है, जो नए मार्ग के निर्माण के बाद घटकर करीब 340 से 350 किलोमीटर रह जाएगी। दूरी कम होने का सीधा लाभ यात्रा समय पर भी पड़ेगा। अभी जहां भोपाल से ग्वालियर पहुंचने में 7 से 8 घंटे तक का समय लगता है, वहीं नए कॉरिडोर के चालू होने के बाद यह सफर लगभग साढ़े पांच घंटे में पूरा किया जा सकेगा।

    जानकारी के अनुसार, इस परियोजना को बीओटी (बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर) मॉडल पर विकसित किया जाएगा। एमपीआरडीसी की योजना अगले तीन वर्षों के भीतर इस परियोजना को पूरा करने की है। सड़क विशेषज्ञों का मानना है कि यह कॉरिडोर प्रदेश के उत्तर और मध्य हिस्सों के बीच यातायात को अधिक सुगम बनाएगा तथा औद्योगिक, व्यापारिक और पर्यटन गतिविधियों को भी गति देगा।

    सूत्रों के मुताबिक महाराष्ट्र में विकसित आधुनिक सड़क परियोजनाओं के अध्ययन के बाद मध्य प्रदेश में ग्रीनफील्ड सड़क नेटवर्क को तेजी से विस्तार देने पर सहमति बनी है। इसी रणनीति के तहत भोपाल-ग्वालियर कॉरिडोर को प्राथमिकता दी गई है। इससे पहले भोपाल-इंदौर, भोपाल-मंदसौर, सागर-सतना, सागर-जबलपुर और जबलपुर-आशापुर जैसे ग्रीनफील्ड कॉरिडोर प्रोजेक्ट भी विभिन्न चरणों में आगे बढ़ रहे हैं।

    एमपीआरडीसी के प्रबंध संचालक भरत यादव के अनुसार, प्रदेश में ऐसे मार्गों को प्राथमिकता दी जा रही है जहां यातायात का दबाव अधिक है और यात्रा समय कम करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। ग्रीनफील्ड कॉरिडोर न केवल तेज आवागमन सुनिश्चित करेंगे बल्कि ईंधन की बचत, परिवहन लागत में कमी और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार में भी मददगार साबित होंगे।

    प्रदेश में प्रस्तावित अन्य प्रमुख ग्रीनफील्ड परियोजनाओं में भोपाल-मंदसौर कॉरिडोर शामिल है, जिसकी लंबाई 256 किलोमीटर और अनुमानित लागत 11,550 करोड़ रुपए है। इसी तरह सागर-सतना कॉरिडोर लगभग 218 किलोमीटर लंबा होगा और इसके निर्माण से यात्रा समय लगभग आधा रह जाएगा। वहीं जबलपुर-आशापुर कॉरिडोर भी प्रदेश की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल है।

    बीओटी मॉडल के तहत विकसित होने वाली इन परियोजनाओं में कुल लागत का एक हिस्सा केंद्र और राज्य सरकार वहन करती हैं, जबकि शेष निवेश निर्माण एजेंसी द्वारा किया जाता है। इसके बदले एजेंसी को निर्धारित अवधि तक टोल वसूली का अधिकार दिया जाता है। एमपीआरडीसी भविष्य में भी अधिक यातायात वाले मार्गों पर इसी मॉडल के तहत सड़क परियोजनाएं विकसित करने की योजना बना रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भोपाल-ग्वालियर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर प्रदेश के सड़क नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा और इससे क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी।

  • रिटायर्ड IAS नियाज खान के बयान पर छिड़ा विवाद: जनसंख्या नियंत्रण पर की कड़ी टिप्पणी, राजनीतिक व्यवस्था पर भी उठाए सवाल

    रिटायर्ड IAS नियाज खान के बयान पर छिड़ा विवाद: जनसंख्या नियंत्रण पर की कड़ी टिप्पणी, राजनीतिक व्यवस्था पर भी उठाए सवाल


    मध्य प्रदेश। मध्यप्रदेश कैडर के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी और चर्चित लेखक नियाज खान एक बार फिर अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में आ गए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए उनके हालिया पोस्टों ने जनसंख्या नियंत्रण, भ्रष्टाचार और देश की राजनीतिक व्यवस्था को लेकर नई बहस को जन्म दे दिया है। खान ने अपनी पोस्ट में बढ़ती आबादी पर चिंता जताते हुए सरकार से कड़े कदम उठाने की मांग की है, जबकि अन्य पोस्टों में उन्होंने भ्रष्टाचार और राजनीतिक विचारधाराओं के बदलते स्वरूप पर भी टिप्पणी की है।

    शुक्रवार को किए गए एक पोस्ट में नियाज खान ने देश की बढ़ती जनसंख्या को गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि इस विषय पर सख्त नीति बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने दावा किया कि देश की आबादी तेजी से बढ़ रही है और इससे भविष्य में संसाधनों तथा विकास पर दबाव बढ़ सकता है। इसी संदर्भ में उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण को लेकर कठोर उपायों की आवश्यकता बताई। अपने पोस्ट में उन्होंने विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय का उल्लेख करते हुए दावा किया कि इस समुदाय में अधिक बच्चे पैदा होते हैं और सरकार को इस दिशा में सख्ती से कदम उठाने चाहिए।

    नियाज खान के इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने इसे जनसंख्या नियंत्रण पर बहस का विषय बताया, जबकि अन्य लोगों ने उनके बयान की आलोचना करते हुए इसे एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने वाला बताया। हालांकि इस मुद्दे पर किसी सरकारी एजेंसी या संबंधित पक्ष की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    इसी दिन किए गए एक अन्य पोस्ट में नियाज खान ने देश में भ्रष्टाचार की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने दावा किया कि भ्रष्टाचार देश को भीतर से कमजोर कर रहा है, लेकिन इसके बावजूद आम लोग इस मुद्दे पर गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। अपने पोस्ट में उन्होंने कहा कि मतदाता भ्रष्ट छवि वाले नेताओं को भी चुनावों में जीत दिलाते हैं और समाज में नैतिक मूल्यों का ह्रास दिखाई देता है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि ऐसी परिस्थितियों में भारत को विश्व शक्ति बनाने के दावे कितने व्यवहारिक हैं।

    इससे पहले गुरुवार को किए गए एक पोस्ट में नियाज खान ने देश की राजनीति में वैचारिक संकट का मुद्दा उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता प्राप्त करने के लिए कई नेता अपनी विचारधारा बदल लेते हैं। उनके अनुसार राजनीतिक दलों और नेताओं की वैचारिक प्रतिबद्धता कमजोर होती जा रही है और परिस्थितियों के अनुसार विचारधाराएं बदलने का चलन बढ़ा है। खान ने यह भी कहा कि आम जनता अक्सर इन बदलावों को केवल दर्शक बनकर देखती रहती है।

    गौरतलब है कि नियाज खान प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद भी सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक विषयों पर अपनी स्पष्ट राय रखने के लिए जाने जाते हैं। वे समय-समय पर सोशल मीडिया के माध्यम से विभिन्न मुद्दों पर टिप्पणी करते रहे हैं, जिसके कारण उनके बयान अक्सर चर्चा और विवाद का विषय बन जाते हैं।

    फिलहाल उनके हालिया पोस्टों को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में बहस जारी है। समर्थक जहां उनके बयानों को बेबाक राय के रूप में देख रहे हैं, वहीं आलोचक उनके कुछ दावों और टिप्पणियों पर सवाल उठा रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।

  • TET अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का बड़ा आंदोलन: 18 जून को प्रदेशभर में सौंपेंगे ज्ञापन, 20 लाख शिक्षकों पर असर का दावा

    TET अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का बड़ा आंदोलन: 18 जून को प्रदेशभर में सौंपेंगे ज्ञापन, 20 लाख शिक्षकों पर असर का दावा


    मध्य प्रदेश। मध्यप्रदेश में टीईटी (टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट) अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद प्रदेश के शिक्षक संगठनों ने इस मुद्दे को लेकर आंदोलन का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया है। मध्यप्रदेश शिक्षक संघ ने घोषणा की है कि 18 जून को प्रदेश के सभी जिलों में कलेक्टरों के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के नाम ज्ञापन सौंपे जाएंगे।

    संघ का कहना है कि वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता लागू करना न केवल अव्यावहारिक है, बल्कि यह प्राकृतिक न्याय और कानूनी निश्चितता के सिद्धांतों के भी विपरीत है। संगठन के पदाधिकारियों का तर्क है कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति उस समय की नियमावली और चयन प्रक्रिया के तहत हुई थी, उन्हें बाद में बने मानकों के आधार पर प्रभावित करना उचित नहीं माना जा सकता।

    मध्यप्रदेश शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. क्षत्रवीर सिंह राठौर और प्रदेश महामंत्री राकेश गुप्ता के अनुसार, 29 मई 2026 को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रदेश सहित देशभर के लाखों शिक्षकों में असमंजस और चिंता का माहौल है। फैसले में कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण होना आवश्यक माना गया है। इसके बाद से शिक्षक संगठनों में भविष्य को लेकर आशंकाएं बढ़ गई हैं।

    संघ का कहना है कि 23 अगस्त 2010 को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने टीईटी को शिक्षक नियुक्ति के लिए न्यूनतम योग्यता घोषित किया था। इससे पहले विभिन्न राज्यों में नियुक्त हुए शिक्षकों ने उस समय लागू पात्रता और चयन प्रक्रिया के आधार पर नौकरी प्राप्त की थी। ऐसे शिक्षक पिछले डेढ़ से दो दशकों से शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बने हुए हैं और विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के साथ सामाजिक जागरूकता तथा राष्ट्र निर्माण में भी योगदान दे रहे हैं।

    शिक्षक संघ का मानना है कि यदि नए नियमों को पूर्व प्रभाव से लागू किया गया तो इससे हजारों नहीं, बल्कि लाखों शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और भविष्य पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो सकता है। इसी कारण संगठन केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग कर रहा है।

    संघ ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों की सेवाओं को वैध मानते हुए संसद के आगामी मानसून सत्र में आवश्यक विधायी संशोधन किया जाए। साथ ही एनसीटीई की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना में भी आवश्यक बदलाव किए जाएं, ताकि पूर्व में नियुक्त शिक्षकों को राहत मिल सके। संगठन का कहना है कि न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हुए भी नीति निर्माण और कानून संशोधन का अधिकार विधायिका के पास है और व्यापक जनहित को देखते हुए सरकार को सकारात्मक कदम उठाने चाहिए।

    मध्यप्रदेश शिक्षक संघ के अनुसार, इस मुद्दे से केवल प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश के शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं। संगठन का दावा है कि मध्यप्रदेश के लगभग डेढ़ लाख और देशभर के 20 लाख से अधिक शिक्षक इस निर्णय के प्रभाव क्षेत्र में आ सकते हैं। ऐसे में 18 जून को होने वाला ज्ञापन अभियान शिक्षकों की मांगों को सरकार तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

    अब सभी की नजर केंद्र सरकार और संबंधित संस्थाओं की प्रतिक्रिया पर टिकी है, क्योंकि इस मुद्दे का सीधा संबंध लाखों शिक्षकों के रोजगार, सेवा सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा हुआ है।

  • कांग्रेस में फिर दिखी अंदरूनी कलह! मंच पर दिग्विजय-हरीश चौधरी की कथित तकरार, राज्यसभा विवाद पर गरमाई सियासत

    कांग्रेस में फिर दिखी अंदरूनी कलह! मंच पर दिग्विजय-हरीश चौधरी की कथित तकरार, राज्यसभा विवाद पर गरमाई सियासत


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश की राजनीति इन दिनों राज्यसभा चुनाव को लेकर काफी गरमाई हुई है। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद जहां पार्टी लगातार विरोध दर्ज करा रही है, वहीं इस पूरे घटनाक्रम के बीच कांग्रेस के भीतर की कथित खींचतान भी चर्चा में आ गई है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी के बीच कथित असहजता नजर आती है।

    वीडियो में दिखाई देता है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिग्विजय सिंह, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की ओर संकेत करते हुए कांग्रेस नेता जेपी धनोपिया को अपनी बात रखने के लिए कहते हैं। इसी दौरान हरीश चौधरी उन्हें रोकते हुए कुछ कहते नजर आते हैं। इसके बाद दिग्विजय सिंह हाथ जोड़कर उनका अभिवादन करते हैं, धन्यवाद कहते हैं और फिर शांत होकर बैठ जाते हैं। हालांकि वीडियो में दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत स्पष्ट रूप से सुनाई नहीं देती, लेकिन उनके हाव-भाव को लेकर राजनीतिक विश्लेषण शुरू हो गया है।

    इसके बाद जीतू पटवारी कई बार दिग्विजय सिंह से अपनी बात रखने का आग्रह करते दिखाई देते हैं, लेकिन दिग्विजय सिंह ‘हो गया’ कहकर मना कर देते हैं। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक पर्यवेक्षक अलग-अलग राय व्यक्त कर रहे हैं। कुछ इसे कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेद का संकेत मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे पार्टी की आंतरिक राजनीति और गुटबाजी से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि कांग्रेस की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है।

    इधर राज्यसभा चुनाव में भाजपा के तीन उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने के बावजूद पार्टी कार्यालय में जश्न का माहौल नहीं दिखाई दिया। प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बाद नवनिर्वाचित सांसद सीधे पार्टी नेतृत्व से मिलने पहुंचे, लेकिन प्रदेश कार्यालय में सामान्य चुनावी जीत की तरह न तो ढोल-नगाड़े बजे और न ही सार्वजनिक उत्सव देखने को मिला। राजनीतिक हलकों में इसे लेकर भी चर्चाओं का दौर जारी है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा की तीसरी सीट को लेकर चल रहा कानूनी विवाद इसका एक कारण हो सकता है। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के मामले में न्यायिक प्रक्रिया जारी है और मामला उच्चतम न्यायालय तक पहुंच चुका है। ऐसे में भाजपा की ओर से संयमित रवैया अपनाए जाने की चर्चा हो रही है, हालांकि पार्टी ने इस विषय पर कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया है।

    इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने नामांकन निरस्त होने के मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के साथ अन्याय हुआ है और पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं रही। दिग्विजय सिंह ने दावा किया कि इस मामले में कई संस्थाओं की भूमिका सवालों के घेरे में है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी याचिका पर समय रहते सुनवाई नहीं होने से कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ा। उनके इन आरोपों पर भाजपा ने कड़ा विरोध जताते हुए इसे न्यायपालिका की गरिमा पर सवाल खड़ा करने वाला बयान बताया है। भाजपा नेताओं ने कहा है कि न्यायालय के संबंध में की गई ऐसी टिप्पणियां अनुचित हैं और मामले पर उचित संज्ञान लिया जाना चाहिए।

    राज्यसभा चुनाव का यह विवाद अब केवल चुनावी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसके राजनीतिक और संगठनात्मक प्रभाव भी सामने आने लगे हैं। आने वाले दिनों में न्यायालय की सुनवाई और राजनीतिक दलों की अगली रणनीति पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।

  • भोपाल में महिला की संदिग्ध मौत से सनसनी: पिता ने पति पर लगाया हत्या का आरोप, पुलिस जांच में जुटी

    भोपाल में महिला की संदिग्ध मौत से सनसनी: पिता ने पति पर लगाया हत्या का आरोप, पुलिस जांच में जुटी


    मध्य प्रदेश। राजधानी भोपाल के कोलार थाना क्षेत्र स्थित बंजारा बस्ती में एक महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने इलाके में सनसनी फैला दी है। मृतका के परिजनों ने महिला के पति पर हत्या का आरोप लगाया है, जबकि पुलिस का कहना है कि मामले की सभी पहलुओं से जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।

    मृतका की पहचान 30 वर्षीय बबीता अहिरवार के रूप में हुई है। घटना गुरुवार रात की बताई जा रही है। परिजनों के अनुसार रात करीब आठ बजे बबीता का सात वर्षीय बेटा समर्थ अपने नाना के घर पहुंचा और उसने परिवार को बताया कि उसकी मां के साथ कुछ अनहोनी हो गई है। बच्चे की सूचना मिलने के बाद परिवार के सदस्य तत्काल बबीता के घर पहुंचे, जहां वह जमीन पर पड़ी हुई मिली।

    मृतका के पिता हरनाम सिंह का आरोप है कि उनकी बेटी की हत्या की गई है। उनका कहना है कि जब वे मौके पर पहुंचे तो बबीता की चूड़ियां टूटी हुई थीं और उसके शरीर पर चोट के निशान दिखाई दे रहे थे। परिजनों का दावा है कि गले पर भी ऐसे निशान थे जो किसी प्रकार के दबाव या संघर्ष की ओर संकेत करते हैं। इसी आधार पर उन्होंने बबीता के पति सुनील अहिरवार पर गला दबाकर हत्या करने का आरोप लगाया है।

    परिजनों के मुताबिक सुनील अहिरवार वेल्डिंग का काम करता है और उसे शराब पीने की आदत है। परिवार का आरोप है कि वह अक्सर नशे की हालत में घर लौटता था, जिससे पति-पत्नी के बीच विवाद होता रहता था। घटना वाली रात भी दोनों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी होने की बात सामने आई है। हालांकि पुलिस अभी इन दावों की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है और किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है।

    जानकारी के अनुसार बबीता और सुनील की शादी करीब नौ वर्ष पहले हुई थी। उनके दो बच्चे हैं, जिनमें सात वर्षीय बेटा और चार वर्षीय बेटी शामिल हैं। बबीता गृहिणी थी और परिवार की देखभाल करती थी। उसकी अचानक हुई मौत के बाद बच्चों और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

    मामले की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया, जिसके बाद उसे परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस ने घटनास्थल से आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए हैं और आसपास के लोगों से भी पूछताछ की जा रही है।

    कोलार थाना प्रभारी ने बताया कि महिला की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है। फिलहाल मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के निष्कर्ष इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।

    जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि घटना के समय घर के भीतर वास्तव में क्या हुआ था। चूंकि उस समय बच्चे भी घर में मौजूद थे, इसलिए उनके बयान भी जांच के लिए अहम माने जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों सहित सभी संभावित पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जाएगी और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले की सच्चाई पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेगी।

  • भोपाल में टैक्सी ड्राइवरों का अनोखा प्रदर्शन: कटोरा लेकर मांगी भीख, बोले- ओला-उबर की नीतियों ने बदहाल किया

    भोपाल में टैक्सी ड्राइवरों का अनोखा प्रदर्शन: कटोरा लेकर मांगी भीख, बोले- ओला-उबर की नीतियों ने बदहाल किया


    मध्य प्रदेश। राजधानी भोपाल में शुक्रवार को ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं से जुड़े ड्राइवरों का एक अनोखा और भावनात्मक प्रदर्शन देखने को मिला। भोपाल टैक्सी चालक संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में ड्राइवर बोर्ड ऑफिस चौराहे पर एकत्र हुए और अपनी आर्थिक परेशानियों को उजागर करने के लिए फटे कपड़े पहनकर तथा हाथों में कटोरा लेकर प्रतीकात्मक भीख मांगते नजर आए। प्रदर्शन का उद्देश्य सरकार, प्रशासन और टैक्सी सेवा संचालित करने वाली कंपनियों का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित करना था।

    प्रदर्शन के दौरान ड्राइवरों ने ओला, उबर और रेपिडो जैसी ऐप आधारित टैक्सी कंपनियों के खिलाफ नारेबाजी की। उनका आरोप था कि कंपनियों की मौजूदा नीतियों और कम किराया दरों ने उन्हें आर्थिक संकट में धकेल दिया है। कई ड्राइवरों ने कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई, ईंधन की कीमतों और वाहन रखरखाव के खर्चों के बीच उन्हें मिलने वाला किराया बेहद कम है, जिससे परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है।

    प्रदर्शन में शामिल एक चालक ने भावुक होकर कहा कि उनकी आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि वे अपने लिए नए कपड़े तक नहीं खरीद पा रहे हैं। उनका कहना था कि किराए की दरें इतनी कम हैं कि वाहन चलाने के बाद भी पर्याप्त आय नहीं हो पाती। ऐसे में परिवार का भरण-पोषण और वाहन की किस्तों का भुगतान एक साथ करना कठिन हो गया है।

    भोपाल टैक्सी चालक संघ के कार्यवाहक अध्यक्ष श्रवण कुमार शर्मा ने दावा किया कि वर्तमान समय में ड्राइवरों को औसतन करीब नौ रुपये प्रति किलोमीटर की दर से किराया मिल रहा है, जबकि डीजल, पेट्रोल और सीएनजी की बढ़ती कीमतों के कारण वाहन संचालन का खर्च लगभग ग्यारह रुपये प्रति किलोमीटर तक पहुंच गया है। उनके अनुसार, इस अंतर के कारण ड्राइवरों को प्रतिदिन आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

    संघ के महामंत्री राजेश कुमार नागले ने आरोप लगाया कि परिवहन विभाग और आरटीओ द्वारा निर्धारित किराया दरों का पालन कंपनियां नहीं कर रही हैं। उनका कहना है कि जब इन कंपनियों ने भोपाल में अपनी सेवाएं शुरू की थीं, तब निर्धारित नियमों और दिशानिर्देशों का पालन किया जाता था, लेकिन समय के साथ कंपनियों ने अपने स्तर पर किराया संरचना में बदलाव करना शुरू कर दिया। इसके चलते ड्राइवरों की आमदनी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

    प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर सरकार और संबंधित अधिकारियों के समक्ष आवाज उठा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। उनका आरोप है कि हर बार केवल आश्वासन देकर मामला टाल दिया जाता है, जबकि जमीनी स्तर पर समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।

    टैक्सी चालक संघ ने स्पष्ट किया कि उनकी प्रमुख मांग सरकार द्वारा निर्धारित किराया दरों को सख्ती से लागू कराना है। संघ का कहना है कि यदि कंपनियां निर्धारित मानकों के अनुरूप भुगतान करें तो ड्राइवरों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकता है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

    प्रदर्शन के अंत में संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि बढ़ती लागत और घटती आय के बीच टैक्सी चालकों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। उनका मानना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो भोपाल में टैक्सी और ऑटो सेवाओं पर भी इसका असर पड़ सकता है।

  • MP: रीवा में वाहन से 5 क्विंटल अवैध विस्फोटक बरामद…. चालक गिरफ्तार

    MP: रीवा में वाहन से 5 क्विंटल अवैध विस्फोटक बरामद…. चालक गिरफ्तार


    रीवा।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के रीवा जिले (Rewa district) में अवैध विस्फोटक (Illegal explosives) बरामद किया गया है। घटना रायपुर कर्चुलियान थाना क्षेत्र की है। पुलिस ने अवैध विस्फोटकों के परिवहन पर एक बड़ी कार्रवाई करते हुए, गश्त के दौरान भारी मात्रा में अवैध विस्फोटक सामग्री ले जा रही एक गाड़ी को पकड़ा है। यह विस्फोटक करीब 5 क्विंटल है, जिसमे जिलेटिंन सहित अन्य विस्फोटक सामग्री शामिल है। यह विस्फोटक मानिकवार क्षेत्र से बेला की ओर ले जाया जा रहा था। यह क्रेशर या माइनिंग में उपयोग किया जाता है। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को भी गिरफ्तार किया है, जिससे पूछताछ की जा रही है।

    इस पूरे मामले की जानकारी देते हुए डीएसपी उदित मिश्रा ने बताया- पुलिस टीम रूटीन गश्त पर थी। तभी मुखबिर से एक संदिग्ध वाहन के बारे में सूचना मिली, जब पुलिस ने घेराबंदी कर गाड़ी को रोका और उसकी तलाशी ली, तो उसमें अवैध विस्फोटक भरा हुआ पाया गया। पुलिस द्वारा वाहन चालक से जब इस विस्फोटक के संबंध में वैध दस्तावेज और लाइसेंस मांगे गए, तो वह कोई भी कागजात पेश नहीं कर सका। शुरुआती पूछताछ में यह बात सामने आई है कि इन विस्फोटकों का इस्तेमाल क्रशर्स और माइनिंग में ब्लास्टिंग के लिए किया जाना था।

    पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए चालक को हिरासत में ले लिया है। और विस्फोटक अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है। विस्फोटकों की तीव्रता और खतरे का आकलन करने के लिए, बम डिस्पोजल स्क्वाड की टीम को भी मौके पर बुलाया गया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस गाड़ी का असली मालिक कौन है। यह विस्फोटक मऊगंज के पास से कहां ले जाया जा रहा था, और क्या इससे पहले भी इस तरह की अवैध सप्लाई की गई है। सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन को भी सूचित कर दिया गया है ताकि इन विस्फोटकों का सुरक्षित तरीके से डिस्पोजल किया जा सके।

  • MP: इंदौर में गंभीर नदी को पुनर्जीवित करने की तैयारी, 10 हजार ट्रेंच के साथ होगा महा-वृक्षारोपण

    MP: इंदौर में गंभीर नदी को पुनर्जीवित करने की तैयारी, 10 हजार ट्रेंच के साथ होगा महा-वृक्षारोपण


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के इंदौर संभाग (Indore Division) के महू क्षेत्र (Mhow region) में गंभीर नदी (Gambhir River) को नया जीवन देने और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नदी के जलागम क्षेत्र को सुरक्षित करने और भू-जल स्तर को बढ़ाने के उद्देश्य से भमती और रिछा पहाड़ियों के सीमांकन का कार्य आधिकारिक रूप से शुरू कर दिया गया है। इस अभियान को गति देने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों की एक संयुक्त टीम ने प्रभावित क्षेत्रों का जमीनी निरीक्षण किया।


    पहाड़ियों का सीमांकन और विस्तृत कार्ययोजना पर मंथन

    निरीक्षण दल में शामिल अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) महू राकेश परमार, जनपद पंचायत डॉ. अंबेडकर नगर महू के मुख्य कार्यपालन अधिकारी गिरीराज दुबे और तहसीलदार महू विवेक सोनी ने भमती एवं रिछा पहाड़ी क्षेत्र का बारीकी से जायजा लिया। इस दौरान अधिकारियों ने गंभीर नदी के जलागम क्षेत्र में मिट्टी और जल संरक्षण के लिए बनाई गई प्रस्तावित कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की। योजना के तहत इस पहाड़ी क्षेत्र में लगभग 10 हजार सतत कंटूर ट्रेंच (सीसीटी) का निर्माण किया जाना तय हुआ है।


    जल संवर्धन और वृक्षारोपण से बदलेगी तस्वीर

    प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार सतत कंटूर ट्रेंच के निर्माण के साथ-साथ इस पूरे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पौधारोपण अभियान भी चलाया जाएगा। इस दोहरी रणनीति से वर्षा के जल को बहने से रोका जा सकेगा और वह अधिकतम मात्रा में जमीन के भीतर समाहित होगा। इस प्रक्रिया से न केवल क्षेत्र के भू-जल स्तर में सुधार होगा, बल्कि मिट्टी के कटाव पर भी प्रभावी रोक लगेगी। यह पूरा प्रयास गंभीर नदी के प्राकृतिक जल प्रवाह को दीर्घकालिक मजबूती प्रदान करेगा।


    मुख्यमंत्री के संकल्प को धरातल पर उतारने का प्रयास

    यह पूरा अभियान मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (Chief Minister Dr. Mohan Yadav) के जल संरक्षण संबंधी संकल्पों के अनुरूप संचालित किया जा रहा है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भमती और रिछा पहाड़ियां गंभीर नदी के लिए मुख्य जल स्रोत (जलागम क्षेत्र) का कार्य करती हैं, इसलिए यहां किए जा रहे संरक्षण कार्य नदी के पुनर्जीवन में सबसे निर्णायक और महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

    जनभागीदारी से अभियान को सफल बनाने की अपील
    जनपद पंचायत डॉ. अंबेडकर नगर महू ने इस महत्वाकांक्षी अभियान को पूरी तरह सफल बनाने के लिए सामुदायिक सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया है। प्रशासन की ओर से स्थानीय जनप्रतिनिधियों, ग्राम पंचायतों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से इस कार्य में सक्रिय रूप से जुड़ने की अपील की गई है। सरकार का मुख्य लक्ष्य आम जनता के सहयोग से गंभीर नदी को एक बार फिर से अविरल, निर्मल और जीवनदायिनी बनाना है।

  • भोपाल में ‘लीडकॉन 2026’ का सफल आयोजन, छात्रों को मिला करियर और नेतृत्व का मार्गदर्शन

    भोपाल में ‘लीडकॉन 2026’ का सफल आयोजन, छात्रों को मिला करियर और नेतृत्व का मार्गदर्शन


    भोपाल। जय नारायण कॉलेज भोपाल में ‘लीडकॉन 2026’ का सफल आयोजन, छात्रों को मिला करियर और नेतृत्व का मार्गदर्शन
    ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट (जेएनसीबीएम), भोपाल में भोपाल मैनेजमेंट एसोसिएशन (बीएमए) के सहयोग से दो दिवसीय “लीडकॉन 2026” कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन एवं मार्गदर्शन प्राचार्य डॉ. नेहा शर्मा के नेतृत्व में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को करियर निर्माण, नेतृत्व विकास तथा उद्योग जगत की वर्तमान आवश्यकताओं से अवगत कराना था।

    बीएमए के वरिष्‍ठ समन्‍वयक अधिकारी एडवोकेट जीके छिब्‍बर ने शुक्रवार को बताया कि आगे भी हमारी इस तरह की गतिविधियों को बड़ी योजना है जिस पर कार्य चल रहा है। उन्‍होंने बताया कि कार्यक्रम में चार प्रतिष्ठित मानव संसाधन (एचआर) विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा करते हुए छात्रों का मार्गदर्शन किया। इनमें अमेरिका स्थित नेटलिंक सॉफ्टवेयर ग्रुप की एचआर प्रोफेशनल मोनिका सांगवानी, आदित्य बिड़ला रियल एस्टेट के एचआर एवं औद्योगिक संबंध (आईआर) विशेषज्ञ अनिल दुबे, जीआरआई एचआर सॉल्यूशंस के एचआर सलाहकार विजय जी. जैन तथा ल्यूपिन लिमिटेड की पूर्व एचआर प्रमुख विंसी सेबेस्टियन शामिल थीं।

    विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को रोजगार की तैयारी, साक्षात्कार में सफलता, व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व क्षमता, संचार कौशल तथा कॉर्पोरेट जगत की अपेक्षाओं के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए अपने प्रश्नों के उत्तर प्राप्त किए।

    समापन समारोह में मुख्य अतिथि प्रो. आर. जी. चौकसे (पूर्व अधिष्ठाता, अकादमिक एवं छात्र कल्याण, एनआईटीटीटीआर, भोपाल) तथा भोपाल मैनेजमेंट एसोसिएशन (बीएमए) के प्रतिनिधि श्री आमिर खान, प्रबंधक, बीएमए विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस अवसर पर प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए तथा महाविद्यालय के वार्षिक समाचार-पत्र (न्यूजलेटर) का विमोचन किया गया। समाचार-पत्र में विद्यार्थियों की उपलब्धियों, शैक्षणिक गतिविधियों एवं संस्थान की प्रमुख उपलब्धियों को स्थान दिया गया है।

    कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गोविंद भार्गव, कुलसचिव डॉ. मोहित पंड्या, निदेशक डॉ. रविशंकर मिश्रा, अधिष्ठाता (शैक्षणिक) डॉ. मीतू सिंह, प्रवेश निदेशक अरुण पटेल एवं प्राचार्य डॉ. नेहा शर्मा सहित अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

    सभी वक्ताओं एवं अतिथियों ने विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने, निरंतर सीखने तथा अपने कौशल का सतत विकास करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को उद्योग जगत की अपेक्षाओं को समझने तथा अपने करियर को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    लगभग 250 विद्यार्थियों की सहभागिता वाला यह दो दिवसीय कार्यक्रम अत्यंत ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक एवं उपयोगी रहा। कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए महाविद्यालय प्रबंधन, भोपाल मैनेजमेंट एसोसिएशन, आयोजन समिति एवं सभी प्रतिभागियों की सराहना की गई। लीडकॉन 2026 विद्यार्थियों के लिए भविष्य की दिशा निर्धारित करने वाला एक महत्वपूर्ण एवं प्रभावशाली आयोजन सिद्ध हुआ।