Category: Madhya Pradesh

  • एमपी में आंधी-बारिश का मजबूत सिस्टम सक्रिय, आज भी 27 जिलों में अलर्ट, 8 अप्रैल तक रहेगा ऐसा ही मौसम

    एमपी में आंधी-बारिश का मजबूत सिस्टम सक्रिय, आज भी 27 जिलों में अलर्ट, 8 अप्रैल तक रहेगा ऐसा ही मौसम


    भोपाल। मध्य प्रदेश में ओले, बारिश और तेज आंधी का मजबूत सिस्टम सक्रिय हो गया है। शनिवार को बैतूल, श्योपुर और मुरैना सहित 8 से 10 जिलों में ओलावृष्टि हुई, जिससे कई इलाकों में कश्मीर जैसा नजारा दिखा। वहीं, 20 से अधिक जिलों में तेज आंधी और बारिश दर्ज की गई। रविवार को भी मौसम का यही रुख बने रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने ग्वालियर सहित 27 जिलों में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है।

    अगले 24 घंटों में जिन जिलों में मौसम प्रभावित रहेगा, उनमें ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, निवाड़ी, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, खंडवा, बुरहानपुर और पांढुर्णा शामिल हैं। इन क्षेत्रों में दोपहर के बाद मौसम बदल सकता है और 30 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने का अनुमान है।

    सुबह से सक्रिय रहा मौसम सिस्टम
    शनिवार को प्रदेश में चक्रवाती परिसंचरण (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) के चलते सुबह से ही कई जिलों में बारिश शुरू हो गई थी। दोपहर बाद इसका असर और बढ़ा। बैतूल, श्योपुर और मुरैना में भारी ओलावृष्टि से सड़कों पर सफेद परत जम गई। वहीं, भोपाल में रात के समय मौसम बदला। सीहोर, विदिशा, रतलाम और रायसेन सहित करीब 20 जिलों में बारिश और कहीं-कहीं तेज आंधी भी चली।

    तेज आंधी का अलर्ट
    मौसम विभाग के अनुसार, अगले चार दिन यानी 8 अप्रैल तक प्रदेश में तेज हवाएं चलेंगी। कुछ जिलों में हवा की गति 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जबकि अन्य इलाकों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार रहने की संभावना है।

    10-11 अप्रैल तक असर रहेगा
    प्रदेश में फिलहाल सक्रिय मौसम सिस्टम के साथ 7 अप्रैल से एक नया पश्चिमी विक्षोभ भी प्रभाव डालेगा। इसके चलते 10-11 अप्रैल तक कहीं आंधी तो कहीं बारिश की स्थिति बनी रह सकती है।

    इसके बाद यह सिस्टम कमजोर होगा और तापमान में तेजी से वृद्धि शुरू होगी। अप्रैल के दूसरे सप्ताह से ही गर्मी तेज होने लगेगी। महीने के अंतिम सप्ताह में ग्वालियर, धार, खरगोन, बड़वानी और नौगांव-खजुराहो में अधिकतम तापमान 44 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। दतिया, मुरैना, श्योपुर, बड़वानी, खरगोन और धार जैसे जिलों में तापमान में और बढ़ोतरी होगी। दरअसल, अप्रैल में प्रदेश के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों में गर्म हवाएं चलती हैं, जिससे इन इलाकों में भीषण गर्मी का असर देखने को मिलता है।

  • MP: ग्वालियर में दोपहर बाद जमकर गिरे ओले…सड़कों पर बिछी सफेद चादर… कारों के शीशे टूटे

    MP: ग्वालियर में दोपहर बाद जमकर गिरे ओले…सड़कों पर बिछी सफेद चादर… कारों के शीशे टूटे


    ग्वालियर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के ग्वालियर (Gwalior) में शनिवार का सूरज तीखे तेवर लेकर निकला था, लेकिन दोपहर होते-होते कुदरत ने अपना रौद्र रूप दिखा दिया. अचानक आए घने बादलों के बाद ऐसी भयानक ओलावृष्टि (Terrible Hailstorm) हुई कि शहर के पॉश इलाके सिटी सेंटर की सड़कें सफेद चादर (Roads Covered White sheets) से ढक गईं. यह नजारा देखने में जितना सुंदर था, शहर के लिए उतना ही नुकसानदेह साबित हुआ.

    ओलों का आकार इतना बड़ा था कि ग्वालियर की शान महाराजा बाड़ा स्थित म्यूजियम के ऊपर लगी ऐतिहासिक घड़ी ओलों की चोट से टूट गई है. शहर के एक निजी अस्पताल की बाउंड्री वॉल गिरने से उसके नीचे खड़ी कई कारें दब गईं. यही नहीं, ओलों के सीधे प्रहार से सड़कों के किनारे और पार्किंग में खड़े बाइक और कारों के शीशे तक चकनाचूर हो गए।

    हालात कुछ ऐसे हो गए कि शहर के मुरार, आनंद नगर, बहोड़ापुर, विनय नगर समेत सिटी सेंटर इलाकों में इतनी अधिक ओलावृष्टि हुई कि वहां सफेद चादर पसर गई. कश्मीर जैसा मंजर दिखाई देने लगा। एक तरफ शहरवासियों को गर्मी से राहत मिली, तो दूसरी तरफ अन्नदाता के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गईं. खेतों में गेहूं की फसल पककर तैयार खड़ी थी, जिसे इस ओलावृष्टि ने जमीन पर बिछा दिया है. फसल खराब होने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान की आशंका है।


    सटीक निकली IMD की चेतावनी

    भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शुक्रवार को ही पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की चेतावनी दी थी. मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, भूमध्य सागर से उठी इन हवाओं ने जेट स्ट्रीम के सहारे भारत पहुंचकर मध्य प्रदेश और राजस्थान में असर दिखाना शुरू कर दिया है। विभाग ने अलर्ट जारी किया है कि 7 अप्रैल तक गरज-चमक और ओलावृष्टि का यह सिलसिला जारी रह सकता है. इस साल मार्च में सामान्य से कहीं अधिक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय रहे, जिसका असर अब अप्रैल की शुरुआत में भी दिख रहा है. पश्चिमी विक्षोभ आमतौर पर सर्दियों के महीनों यानी दिसंबर से मार्च के दौरान सबसे ज्यादा सक्रिय होते हैं।

  • ऐसे फंसती हैं हिंदू बेटियां…. हर्षा रिछारिया ने शेयर किए ईमेल….'लव जिहाद'-'ब्रेनवॉश' का दावा!

    ऐसे फंसती हैं हिंदू बेटियां…. हर्षा रिछारिया ने शेयर किए ईमेल….'लव जिहाद'-'ब्रेनवॉश' का दावा!


    उज्जैन।
    महाकुंभ (Mahakumbh) से चर्चा बटोरने वाली मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की हर्षा रिछारिया (Harsha Richharia) ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर कर नई बहस छेड़ दी है. वीडियो में हर्षा खुद को मुस्लिम शख्स (Muslim man.) के भेजे ईमेल्स को लेकर कथित ‘लव जिहाद’ या ‘ब्रेनवॉश’ का दावा करती नजर आईं।

    हर्षा रिछारिया ने वीडियो में कहा, ”मैं एक बात बताती हूं. आज हो सकता है बहुत से लोगों को मिर्ची लगे. मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता. मुझे एक व्यक्ति के कुछ मेल मिले. पिछले कुछ दिनों में जिसने बराबर मुझसे ये पूछा कि तुम कैसी हो, कहां हो? कोई खबर नहीं तुम्हारी, तुम्हारी हेल्थ ठीक है कि नहीं है? तुम कोई पोस्ट क्यों नहीं डाल रही हो?

    देखो हर्षा ये सब चीजें फेम के लिए और फॉलोवर्स बढ़ाने के लिए तो ठीक हैं, लेकिन आखिर में इससे घर नहीं चलता. इससे इनकम नहीं होती. उसके लिए तुम्हारा क्या फ्यूचर प्लान है? तुम मुझसे शेयर कर सकती हो।

    साध्वी हर्षा के मुताबिक, मेल भेजने वाले शख्स ने बराबर मुझे कई मेल्स किए. उसने बाकियों की तरह मुझे ‘फेक’, ‘पाखंडी’ जैसा कुछ भी नहीं बोला. उसने मुझे मेल करके पूछा. अब मैं आपको बताती हूं कि आपकी बेटियां ‘लव जिहाद’ में कैसे फसती हैं।

    महाकुंभ में वायरल हुई साध्वी हर्षा रिछारिया ने आगे कहा, ”हमारे खुद के धर्म में यह कमी है कि जब हमें अपने धर्म के लोगों की जरूरत होती है, हमें अपने क्लोज्ड ओन्स की जरूरत होती है तब वो हमारा मजाक उड़ाने में व्यस्त होते हैं।

    हमें फेक, पाखंडी, झूठा, मक्कार, फरेबी पता नहीं क्या क्या कहने में व्यस्त होते हैं. तब वो ये सोचने में यह बोलने में व्यस्त होते हैं कि अरे वो तो ये सब दिखावा कर रही है. तब जब आप उस इंसान को मानिसिक और भावानात्मक तौर पर बुर तरह तोड़ देते हैं।

    तब वो कमी दूसरे धर्म के लोग नोटिस करते हैं. और तब उन्हें समझ में आ जाता है कि ये लड़की टूटी हुई है, ये लड़की परेशान है, इसे कंधे की जरूरत है. इसे साथ की जरूरत है. तब वो वो साथ बन के आते हैं। तब वो ये यकीन दिलाते हैं कि देखो, मैंने तुम्हे तब समझा जब कोई और तुम्हें सुनने तक को राजी नहीं था।

    तब उस लड़की को लगता है कि हां, इससे अच्छा मेरे लिए कौन हो सकता है. मेरे धर्म के लोग मुझे नहीं समझ रहे, मेरे धर्म के लोग मुझे नहीं सुन रहे हैं. मेरे अपने मुझे नहीं सुन रहे हैं, तो ये इंसान तो मेरी जिंदगी में फरिश्ता बनकर आया। तब वो उस लड़के के कंधे पर सिर रख के रोने लगती है… और तब यहां से शुरुआत होती है ‘ब्रेनवॉश’ और ‘लव जिहाद’ की।

    हर्षा रिछारिया ने अंत में यह स्पष्ट किया कि इस पूरी प्रक्रिया में सबसे बड़ी कमी हमारे खुद के धर्म और समाज की है, जो अपने लोगों को सहारा देने के बजाय उन्हें नीचा दिखाने में व्यस्त रहता है. उन्होंने इसे ‘कड़वी हकीकत’ बताते हुए “जय श्री राम” के साथ अपनी बात खत्म की।

  • MP: गुना में युवक की पीट-पीटकर हत्या… पूर्व प्रेमिका से मिलने पहुंचा था…

    MP: गुना में युवक की पीट-पीटकर हत्या… पूर्व प्रेमिका से मिलने पहुंचा था…


    गुना।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के गुना (Guna) के चांचौड़ा क्षेत्र में एक दर्दनाक घटना घटी जहां एक शादीशुदा युवक (Married Young Man.) अपनी विवाहित प्रेमिका (Married Girlfriend) से मिलने उसके गांव गया था। वहां उसको महिला के ससुराल वालों ने देख लिया और बुरी तरह पीटना शुरू कर दिया। इससे युवक बुरी तरह जख्मी हो गया। उसको गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने 4 लोगों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया है। आरोपी फरार हैं और पुलिस उनकी तलाश कर रही है।


    पूर्व जनपद अध्यक्ष के भतीजे की पीट-पीटकर हत्या

    गुना के चांचौड़ा थाना क्षेत्र के कोन्याकला गांव में पूर्व जनपद अध्यक्ष के भतीजे की पीट-पीटकर हत्या किए जाने का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, फरियादी कृष्णगोपाल मीना निवासी तुलसीखेड़ी ने शिकायत में बताया है कि वह अपने दोस्त गिरीश मीना (32) के साथ अल्टो कार से कोन्याकला गांव पहुंचे थे। गिरीश अपनी एक महिला परिचित से मिलने स्कूल के पास गया था। इस दौरान कृष्णगोपाल कार में ही बैठा रहा।


    पीड़ित की इलाज के दौरान मौत

    इसी बीच गांव के कुछ लोग मौके पर पहुंचे और गिरीश को पकड़कर गालियां देते हुए मारपीट शुरू कर दी। मारपीट में गिरीश गंभीर रूप से जख्मी हो गया। पीड़ित किसी तरह अपनी जान बचाकर मौके से निकल गया और परिजनों को घटना की सूचना दी। कुछ देर बाद गिरीश को गंभीर हालत में अस्पताल ले जहां उसका इलाज शुरू किया गया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।


    पुलिस ने दर्ज किया केस

    डेडबॉडी को पोस्टमार्टम के लिए रखवा लिया गया है। पुलिस ने कृष्णगोपाल मीणा की रिपोर्ट पर आरोपी चंदू, रामविलास, मनीष और गोविंद मीणा के खिलाफ धारा 103(1), 296(ए) और बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर लिया है।


    दोनों शादीशुदा

    गिरीश की शादी हो चुकी है। वह जिस महिला से मिलने गया था। वह भी शादीशुदा है। दोनों स्कूल के पास मिल रहे थे तभी महिला के ससुराल वालों ने देख लिया। शादी से पहले से दोनों की पहचान थी। इंचार्ज थाना प्रभारी SI अरविन्द गौड़ ने बताया कि युवक की हत्या का मामला सामने आया है।पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोपी गांव से फरार हो गए हैं। उनकी तलाश में पुलिस लगी हुई है।


    घर में बांधकर हत्या का आरोप

    थाना प्रभारी ने बताया है कि जांच में सामने आया है कि युवक और युवती एक दूसरे को जानते थे। पीड़ित कई बार मिलने के लिए आ चुका था। मृतक युवक अपने दोस्त के साथ महिला से मिलने पहुंचा था। इस वारदात को लेकर मामला दर्ज कर लिया गया है। टीम में गठित करके आरोपियों की तलाश की जा रही है। मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि आरोपियों ने उसे घर में बांधकर पीट-पीटकर उसकी हत्या की है। आरोपी पहले भी कई बार मृतक को धमकी दे चुके थे।

  • ग्वालियर के 87 स्कूलों का रिजल्ट जीरो, नौनिहालों के भविष्य पर बड़ा सवाल

    ग्वालियर के 87 स्कूलों का रिजल्ट जीरो, नौनिहालों के भविष्य पर बड़ा सवाल

    ग्वालियर । मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले में कक्षा 5वीं और 8वीं के हालिया परीक्षा परिणामों ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के 87 स्कूल ऐसे सामने आए हैं, जहां एक भी छात्र पास नहीं हो पाया। यह स्थिति न केवल चिंताजनक है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि प्राथमिक शिक्षा की नींव कहीं न कहीं कमजोर हो रही है।

    इन 87 स्कूलों में 39 सरकारी और 48 निजी स्कूल शामिल हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 17 स्कूल ऐसे हैं, जहां केवल एक-एक छात्र था और वह भी परीक्षा में असफल हो गया। यह स्थिति बताती है कि समस्या केवल संसाधनों या ढांचे की नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता और निगरानी में भी कमी हो सकती है।

    जानकारी के अनुसार, जिन स्कूलों का परिणाम शून्य रहा है, वहां इंफ्रास्ट्रक्चर या शिक्षकों की कमी जैसी कोई स्पष्ट समस्या सामने नहीं आई है। इसके बावजूद एक भी छात्र का पास न होना शिक्षा प्रणाली की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि छात्रों की नियमित उपस्थिति, शिक्षकों की जवाबदेही और पढ़ाई के प्रति गंभीरता जैसे पहलुओं पर ध्यान देने की जरूरत है।

    इस पूरे मामले पर ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि कक्षा 5वीं और 8वीं जैसे आधारभूत स्तर पर इस तरह का परिणाम आना बेहद गंभीर विषय है। प्रशासन द्वारा अब इस पूरे मामले की गहन समीक्षा की जा रही है।

    कलेक्टर के अनुसार, स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था, छात्रों की उपस्थिति, शिक्षकों की नियमितता और पढ़ाने के तरीके सहित कई पहलुओं की जांच की जा रही है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि आखिर किन कारणों से इतने बड़े पैमाने पर छात्र असफल हुए।

    प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में इस दिशा में सख्त कदम उठाए जाएंगे। शिक्षकों की जवाबदेही तय करने के साथ ही स्कूलों की नियमित मॉनिटरिंग बढ़ाई जाएगी। इसके अलावा, शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए विशेष योजनाएं और बैठकों का आयोजन भी किया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह के परिणामों से बचा जा सके।

    यह मामला न केवल ग्वालियर बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक चेतावनी है कि अगर प्राथमिक स्तर पर शिक्षा मजबूत नहीं होगी, तो आगे की पढ़ाई और करियर पर भी इसका असर पड़ेगा। नौनिहालों का भविष्य सुरक्षित करने के लिए जरूरी है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जिम्मेदारी और गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन द्वारा लिए जाने वाले निर्णय कितने प्रभावी साबित होते हैं और क्या आने वाले वर्षों में इन स्कूलों के परिणामों में सुधार हो पाता है या नहीं।

  • दूषित पानी और GBS सिंड्रोम को मात देकर 67 वर्षीय महिला घर लौटी

    दूषित पानी और GBS सिंड्रोम को मात देकर 67 वर्षीय महिला घर लौटी


    इंदौर । इंदौर भागीरथपुरा की 67 वर्षीय पार्वती कोंडला ने एक ऐसा संघर्ष जीता जिसे देखकर डॉक्टर और परिजन दोनों हैरान हैं। दूषित पानी से फैलने वाले बैक्टीरिया के कारण उनके शरीर में गिलियन-बैरे सिंड्रोम  उत्पन्न हो गया जिसने उनकी नसों को प्रभावित कर लकवा पैदा कर दिया। इस दौरान 36 लोगों की मौत हुई लेकिन पार्वती ने 72 दिनों तक अस्पताल में जिंदगी के लिए जंग लड़ी और अंततः जीत हासिल की।

    28 दिसंबर को पार्वती के पति भेरूलाल कोंडला को उल्टी-दस्त की शिकायत हुई। शुरू में मामूली संक्रमण का अंदेशा था लेकिन जल्द ही दूषित पानी में मौजूद कैम्पीलोबैक्टर जेजुनी बैक्टीरिया ने उनके नर्वस सिस्टम पर हमला कर दिया। उसी दिन पार्वती को स्कीम 78 स्थित विवेक मेमोरियल अस्पताल में भर्ती किया गया। हालत बिगड़ने पर उन्हें आईसीयू में रेफर किया गया और फिर 2 जनवरी को बॉम्बे हॉस्पिटल में भर्ती किया गया।

    GBS सिंड्रोम में शरीर का इम्यून सिस्टम अपनी ही नसों को खत्म कर देता है। देखते ही देखते पार्वती का शरीर लकवाग्रस्त हो गया और किडनियों ने काम करना बंद कर दिया। डॉक्टरों ने शुरुआती तौर पर बचने की संभावना केवल 3-4 प्रतिशत बताई। इसके बाद उन्हें 16 दिन वेंटिलेटर और 22 दिन ICU में रखा गया। जब फेफड़ों ने साथ छोड़ दिया तो ट्रेकोस्टोमी कर गले में छेद बनाकर सांस लेने का रास्ता बनाया गया। 18 दिन तक पार्वती पूरी तरह बेहोश रहीं।

    भागीरथपुरा का यह मामला शासन की निगरानी में था। केंद्रीय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय कई बार अस्पताल पहुंचे और परिवार को ढांढस बंधाया कि वे किसी की बात की चिंता न करें। 72 दिनों के इलाज का खर्च लगभग 19.50 लाख रुपए शासन द्वारा कवर किया गया।

    48 दिन बाद पार्वती को HDU में रेफर किया गया और धीरे-धीरे स्वास्थ्य में सुधार हुआ। 6 मार्च को उनका ट्रेकोस्टोमी सिस्टम बंद किया गया और धीरे-धीरे लिक्विड डाइट शुरू की गई। 9 मार्च को उन्हें डिस्चार्ज किया गया। अब CMHO डॉ. माधव हसानी की टीम उनकी मॉनिटरिंग कर रही है।

    घर लौटने के बाद भी पार्वती की लड़ाई खत्म नहीं हुई। बेटे प्रदीप के अनुसार फिजियोथेरेपिस्ट केयर टेकर और दवाओं का खर्च महीने का 60-70 हजार रुपए आ रहा है। उन्हें दिन में 9 बार लिक्विड डाइट दी जाती है जिसमें 6 बार दूध और प्रोटीन और 3 बार अन्य लिक्विड ट्यूब के जरिए दिए जाते हैं।

    हालांकि घर आने के बाद उन्होंने हाथ उठाना और परिजनों को पहचान कर जवाब देना शुरू कर दिया है पर उनकी रिकवरी अभी भी चल रही है। प्रदीप ने कहा कि डॉक्टरों की मेहनत परिवार की श्रद्धा और मां की इच्छाशक्ति ने उन्हें मौत से वापस लौटाया।

    पार्वती की यह कहानी न सिर्फ जिंदगी की जंग जीतने का उदाहरण है बल्कि लोगों के लिए प्रेरणा भी है कि संकट और मुश्किलें कितनी भी बड़ी हों सही समय पर इलाज परिवार का सहयोग और मजबूत इच्छाशक्ति से हर चुनौती को पार किया जा सकता है।

  • भोपाल स्कूल में भय का माहौल, 600 से ज्यादा छात्र छोड़ चुके स्कूल

    भोपाल स्कूल में भय का माहौल, 600 से ज्यादा छात्र छोड़ चुके स्कूल


    भोपाल ।
    पंचशील नगर स्थित शासकीय नूतन सुभाष उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में छात्राओं और छात्रों के लिए सुरक्षा गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है। सालों से प्रतिष्ठित यह स्कूल अब असुरक्षा और भय के माहौल में संघर्ष कर रहा है। पहले यहां करीब 800 छात्र पढ़ते थे, लेकिन अब संख्या घटकर लगभग 200 रह गई है।

    स्कूल के आसपास नशाखोरों और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। छात्राएं और स्थानीय लोग बताते हैं कि रोजाना नशे में धुत लोग गेट के पास फब्तियां कसते हैं, आवाजें लगाते हैं और छेड़छाड़ करते हैं। छात्रा अनन्या ने बताया कि रास्ते में नशाखोरों की वजह से हर दिन डर के साए में गुजरता है। छात्रा निशा ने भी बताया कि कभी-कभी लड़के कमेंट पास करते हैं और एक बार तो बदतमीजी की कोशिश भी हुई, लेकिन शिक्षिका के आने पर वे भाग गए।

    छात्र शुभम ने बताया कि स्कूल में लगभग 40 दृष्टिहीन छात्र पढ़ते हैं, जो रोजाना 1 से 1.5 किमी पैदल आते हैं और कई बार बदसलूकी का सामना करते हैं। ऐसे माहौल में पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो गया है।

    स्कूल परिसर में भी सुरक्षा गंभीर समस्या बनी हुई है। प्रिंसिपल डॉ. अभिषेक बैस ने बताया कि एक साल पहले कुछ लोग स्कूल में घुसे और बाथरूम में एक व्यक्ति की हत्या कर शव जला दिया। यहां तलवार और महिलाओं के कपड़े भी मिल चुके हैं। कई बार स्कूल के गेट के ताले तोड़ दिए गए, बेंच उठाई या तोड़ी गईं, और छात्रों से चाकू दिखाकर पैसे लूटे गए।

    स्कूल के बाहर का माहौल भी भयावह है। मीट शॉप्स, बार्बर शॉप्स और शराब पीने वाले लोग स्कूल के पास जमा रहते हैं। केवल 100 मीटर के दायरे में पूरा क्षेत्र नशाखोरी का केंद्र बन चुका है। छात्राएं और महिलाएं स्वयं को असुरक्षित महसूस करती हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि अतिक्रमण और असामाजिक गतिविधियों के कारण स्कूल परिसर तक सुरक्षा की गंभीर कमी है।

    इस भयावह माहौल के कारण पिछले दो साल में 600 से ज्यादा छात्र-छात्राएं स्कूल छोड़ चुके हैं। छात्राओं की संख्या घटकर महज 12–15 रह गई है। जो बच्चे आते हैं, उनका ध्यान पढ़ाई पर कम और सुरक्षा पर ज्यादा रहता है।

    पुलिस ने कहा है कि क्षेत्र स्लम है और यहां असामाजिक गतिविधियां होती रहती हैं। टीटी नगर थाना प्रभारी गौरव सिंह ने बताया कि पेट्रोलिंग बढ़ाई गई है और स्कूल प्रबंधन को संपर्क नंबर दिए गए हैं। हालांकि, अभिभावक और शिक्षक मानते हैं कि मौखिक शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

    प्रिंसिपल बैस का कहना है कि कभी प्रतिष्ठित रहा यह स्कूल अब अपनी पहचान बचाने की लड़ाई लड़ रहा है। शराबी और असामाजिक तत्व दिन और रात परिसर में घुस आते हैं। शिकायतें विधायक, कलेक्टर और मुख्यमंत्री तक पहुंच चुकी हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।

    यह स्थिति स्कूल के अस्तित्व और छात्रों की सुरक्षा पर सीधा असर डाल रही है। अभिभावक डरते हैं कि यदि उन्होंने स्कूल की स्थिति उजागर की तो बच्चों को स्कूल से हटवा दिया जाएगा। ऐसे में पढ़ाई और सुरक्षित शिक्षा का अधिकार गंभीर संकट में है।

  • महाकाल के दरबार पहुंची एक्ट्रेस कावेरी प्रियम, भस्म आरती में शामिल हुईं, बोलीं- यहां की ऊर्जा है अलौकिक

    महाकाल के दरबार पहुंची एक्ट्रेस कावेरी प्रियम, भस्म आरती में शामिल हुईं, बोलीं- यहां की ऊर्जा है अलौकिक


    उज्जैन। उज्‍जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के भस्म आरती के दौरान टीवी और फिल्म एक्ट्रेस कावेरी प्रियम भगवान महाकाल के दर्शन करने पहुंचीं। सुबह करीब 4 बजे उन्होंने आरती में भाग लिया और नंदी हॉल में बैठकर इस दिव्य अनुष्ठान का अनुभव किया। आरती के बाद उन्होंने मंदिर की देहरी से भगवान महाकाल को जल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

    ‘भस्म आरती में मिलती है अद्भुत ऊर्जा’


    दर्शन के बाद कावेरी प्रियम ने अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा कि बाबा महाकाल के दरबार की शक्ति को शब्दों में व्यक्त करना आसान नहीं है। उन्होंने बताया, “मैं पिछले तीन वर्षों से यहां लगातार आ रही हूं। भस्म आरती के समय जो ऊर्जा महसूस होती है, वह सच में अद्भुत और अलौकिक है।”

    टीवी से फिल्मों तक बनाया खास मुकाम


    कावेरी प्रियम ने अपने करियर की शुरुआत टीवी शो नागिन 2 में बीके के किरदार से की थी। इसके बाद उन्होंने ये रिश्ते हैं प्यार के में कुहू माहेश्वरी राजवंश और जिद्दी दिल माने ना में डॉ. मोनामी महाजन की भूमिका निभाकर दर्शकों के बीच पहचान बनाई। फिल्मों में उन्होंने तिश्नगी से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की।
  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने माखनलाल चतुर्वेदी की जयंती पर किया पुण्य स्मरण

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने माखनलाल चतुर्वेदी की जयंती पर किया पुण्य स्मरण


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के गौरव पत्रकारिता जगत के नक्षत्र माखनलाल चतुर्वेदी की जयंती पर उन्हें नमन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि माखनलाल चतुर्वेदी की कृतियां आज भी समाज और राष्ट्र के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उनके लेखन और चिंतन ने न केवल पत्रकारिता की दुनिया में नया मार्ग प्रशस्त किया बल्कि समाज के नवनिर्माण और लोक कल्याण के संदेश भी दिए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विशेष रूप से यह कहा कि माखनलाल चतुर्वेदी के प्रखर विचार और गहन चिंतन उनके समय के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए भी मार्गदर्शक सिद्ध होंगे। उनके योगदान और राष्ट्रसेवा का प्रभाव अनंतकाल तक अविस्मरणीय रहेगा।

    माखनलाल चतुर्वेदी जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में क्रांतिकारी माना जाता है ने अपने लेखन और समाजसेवा के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रनिर्माण में अमूल्य योगदान दिया। उनके विचार और दृष्टिकोण आज भी पत्रकारिता साहित्य और समाज सेवा के क्षेत्र में आदर्श माने जाते हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अवसर पर सभी नागरिकों को प्रेरणा लेनी चाहिए कि वे समाज और राष्ट्र की भलाई के लिए अपने कर्तव्यों का पालन करें। माखनलाल चतुर्वेदी का जीवन यह दिखाता है कि साहसिक विचार और समाजहित में समर्पण किसी भी समय प्रासंगिक और प्रभावशाली हो सकता है।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पत्रकारिता जगत और आम नागरिकों से अपील की कि वे उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करें। उनके विचारों और लेखों का अध्ययन कर आने वाली पीढ़ी न केवल पत्रकारिता की उत्कृष्टता सीख सकती है बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी समझ सकती है।

    इस प्रकार माखनलाल चतुर्वेदी की जयंती पर मुख्यमंत्री द्वारा किया गया पुण्य स्मरण न केवल उनके योगदान को याद करने का अवसर है बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा स्रोत भी है। उनके आदर्श और समाज के प्रति समर्पण आज भी लोगों को सामाजिक चेतना और राष्ट्रसेवा की ओर अग्रसरित करते हैं।

  • बैंक घोटाले पर कसा शिकंजा सोनी इस्पात लिमिटेड डायरेक्टर गिरफ्तार दो आरोपी फरार

    बैंक घोटाले पर कसा शिकंजा सोनी इस्पात लिमिटेड डायरेक्टर गिरफ्तार दो आरोपी फरार

    जबलपुर । मध्यप्रदेश के जबलपुर में केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने करोड़ों रुपए के बैंक घोटाले के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए सोनी इस्पात लिमिटेड के डायरेक्टर राजीव लोचन सोनी को गिरफ्तार कर लिया है आरोपी को इंदौर से पकड़ा गया जहां वह जांच एजेंसी की नजर में था इस गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर बैंकिंग सिस्टम में फर्जीवाड़े और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं

    जांच एजेंसियों के अनुसार राजीव लोचन सोनी ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए भारतीय स्टेट बैंक से करीब 13 करोड़ रुपए का लोन हासिल किया था यह लोन वर्ष 2006 से 2011 के बीच कंपनी के नाम पर लिया गया था आरोप है कि लोन लेने के दौरान दस्तावेजों में गलत जानकारी दी गई और नियमों का उल्लंघन किया गया बाद में यह लोन खाता एनपीए घोषित हो गया जिससे बैंक को भारी आर्थिक नुकसान हुआ

    मामले की शुरुआत तब हुई जब बैंक ने अपने स्तर पर खाते की समीक्षा की और अनियमितताएं सामने आईं इसके बाद वर्ष 2022 में एसबीआई के क्षेत्रीय प्रबंधक ने इस पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई जिसके आधार पर सीबीआई ने केस दर्ज कर जांच शुरू की जांच के दौरान कई अहम तथ्य सामने आए जिनसे यह स्पष्ट हुआ कि लोन प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी की गई थी

    सीबीआई ने इस मामले में राजीव लोचन सोनी के अलावा विजय सोनी और जगदीश चन्द्र सारंग को भी आरोपी बनाया है हालांकि फिलहाल राजीव लोचन की गिरफ्तारी हो चुकी है जबकि अन्य दोनों आरोपी अभी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है जांच एजेंसी संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा

    गिरफ्तारी के बाद राजीव लोचन सोनी से पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस घोटाले में और कौन लोग शामिल थे और किस स्तर पर मिलीभगत हुई थी ऐसे मामलों में अक्सर कई स्तरों पर साजिश और सहयोग की परतें सामने आती हैं इसलिए जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना है

    यह मामला सिर्फ एक कंपनी या व्यक्ति तक सीमित नहीं है बल्कि यह पूरे वित्तीय तंत्र के लिए चेतावनी है कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे बड़े लोन हासिल करना और फिर उसे चुकाए बिना छोड़ देना किस तरह बैंकिंग व्यवस्था को नुकसान पहुंचाता है ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई ही भविष्य में इस तरह के अपराधों पर रोक लगा सकती है

    सीबीआई की यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत देती है कि आर्थिक अपराधों के खिलाफ एजेंसियां सक्रिय हैं और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं जो इस घोटाले की परतें और खोल सकते हैं