Category: Madhya Pradesh

  • राज्य सरकार हर घड़ी किसानों के साथ, तय वक्त पर प्रारंभ होगी गेहूं खरीदी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    राज्य सरकार हर घड़ी किसानों के साथ, तय वक्त पर प्रारंभ होगी गेहूं खरीदी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश के किसानों का हर तरह से कल्याण हमारी प्रतिबद्धता है। हमारी सरकार हर घड़ी किसानों के साथ है। प्रदेश में तय वक्त पर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी प्रारंभ कर दी जाएगी। उपार्जन पोर्टल पर पंजीयन कराने वाले सभी किसानों का गेहूं खरीदा जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार देर शाम अपने निवास स्थित समत्व भवन में गेहूं उपार्जन कार्य के संबंध में सरकार द्वारा गठित मंत्री समूह के सदस्य एवं कृषक प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उपार्जन प्रक्रिया में पहले छोटे किसानों का गेहूं खरीदा जाएगा। इसके बाद मध्यम एवं बड़े किसानों के गेहूं की खरीदी की जाएगी। स्लॉट बुकिंग वाले सभी किसानों का गेहूं चरणबद्ध रूप से खरीदा जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बारदाने की कोई कमी नहीं है। सरकार सभी व्यवस्थाएं कर रही हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए विशेष रूप से संवेदनशील है। गेहूं उपार्जन में बारदान की उपलब्धता निरंतर बनाए रखने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश में गेहूं खरीदी में किसानों को किसी भी प्रकार से बारदाने की समस्या नहीं आने दी जाएगी। केन्द्र सरकार, जूट कमिश्नर सहित अन्य बारदान प्रदाय एजेंसियों से बारदान आपूर्ति के लिए राज्य सरकार लगातार सम्पर्क बनाए हुए है।


    उपार्जन शुरू होने से पहले कराएं तौल केन्द्रों का निरीक्षण

    मुख्यमंत्री ने कहा कि गेहूं उपार्जन व्यवस्था को सरल, सहज और सुविधाजनक बनाया जाये। किसानों को उपार्जन केन्द्र तक आने और गेहूं बेचने में किसी भी तरह की कठिनाई न होने पाये। उन्होंने उपार्जन व्यवस्था पर नियमित रूप से निगरानी के लिए एक राज्य स्तरीय एवं कृषि उपज मंडियों में भी कंट्रोल रूम बनाने के निर्देश खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को दिए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गेहूं उपार्जन के दृष्टिगत प्रदेश के सभी तौल केंद्रों का 10 अप्रैल से पहले गहन निरीक्षण करा लिया जाए, जिससे किसानों में किसी भी तरह का संशय न रहे। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सभी कृषि उपज मंडियों के वर्तमान ढांचे में क्रमबद्ध सुधार किया जाये। सभी मंडियों को वैश्विक जरुरतों के मुताबिक अपग्रेड कर इन्हें वर्ल्ड क्लास मंडी की तरह तैयार किया जाये।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि गेहूं उपार्जन केंद्रों में आने वाले किसानों को सभी प्रकार की बुनियादी सुविधाएं जैसे बिजली, पीने का पानी, बैठक, छाया, प्रसाधन एवं पार्किंग सुविधा उपलब्ध कराई जाये। किसी को भी किसी भी प्रकार की प्रक्रियागत या व्यवस्थागत असुविधा का सामना न करना पड़े। किसी भी केन्द्र में किसानों/ट्रेक्टर-ट्राली की लंबी-लंबी कतारें न लगें, सभी किसानों का सहजता से गेहूं तुल जाये, ऐसी व्यवस्थाएं की जाएं। जिन किसानों से गेहूं खरीदा जाये, कम से कम समय में उनके खातों में भुगतान कर देने की व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की जाएं।


    10 अप्रैल से प्रारंभ हो जाएगी गेहूं खरीदी

    खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की अपर मुख्य सचिव रश्मि अरुण शमी ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। प्रदेश में इंदौर, उज्जैन, भोपाल एवं नर्मदापुरम संभाग में 10 अप्रैल से एवं अन्य सभी संभागों में 15 अप्रैल से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं का उपार्जन प्रारंभ होने जा रहा है।

    उन्होंने बताया कि जिन संभागों में 10 अप्रैल से गेहूं खरीदी शुरू होनी है, उनके लिए आगामी मंगलवार, 7 अप्रैल से पंजीकृत किसानों की स्लॉट बुकिंग प्रारंभ हो जायेगी। शुक्रवार, 10 अप्रैल से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी प्रारंभ कर दी जाएगी। उपार्जन वर्ष 2026-27 में गेहूं उपार्जन के लिए प्रदेश के 19 लाख 4 हजार 644 किसानों ने अपना पंजीयन कराया है। गेहूं उपार्जन के लिए इस वर्ष प्रदेश में कुल 3627 उपार्जन केंद्र बनाये गये हैं। बीते उपार्जन वर्ष 2025-26 में 15 लाख 44 हजार 55 किसानों ने गेहूं उपार्जन के लिए पंजीयन कराया था। इस उपार्जन वर्ष के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,625 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। राज्य सरकार प्रदेश के किसानों को गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य के अतिरिक्त 40 रूपए प्रति क्विंटल बोनस का लाभ भी इस वर्ष देने जा रही है।

    अपर मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेश में 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन होना अनुमानित है। इसके लिए 3 लाख 12 हजार गठान बारदानों की आवश्यकता होगी। प्रदेश में गेहूं खरीदी आरंभ करने के लिए आवश्यक बारदान का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। केन्द्र सरकार की ओर से लिमिट भी तय कर दी गई है। राज्य सरकार को केन्द्र से हर जरूरी सहयोग भी मिल रहा है। जूट कमिश्नर कार्यालय सहित अन्य बारदाना प्रदायकर्ताओं से भी बारदान सामग्री प्राप्त की जा रही है। इसके साथ ही गेहूं उपार्जन के लिए गठित मंत्री-मंडलीय समिति के निर्देश पर अतिरिक्त बारदान खरीदने की प्रक्रिया भी तेजी से जारी है।

    बैठक में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा, कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना, खाद्य मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत, पशुपालन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित कृषक प्रतिनिधि और खाद्य, सहकारिता एवं अन्य विभागीय अधिकारी भी उपस्थित थे।

  • काशी की पावन धरा पर सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का हुआ भव्य समापन

    काशी की पावन धरा पर सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का हुआ भव्य समापन


    भोपाल।
    धर्म, संस्कृति और ज्ञान की अविनाशी नगरी काशी के बीएलडब्ल्यू मैदान में पिछले तीन दिनों से चल रहे सांस्कृतिक महाकुंभ (सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य) का रविवार की शाम गौरवमयी समापन हुआ। महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य के मंचन के अंतिम दिन बाबा विश्वनाथ के हजारों भक्तों, कला रसिकों, कला प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों ने भरपूर आनंद लिया।

    मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार के विशेष सहयोग से आयोजित महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ के अंतिम दिन वाराणसी की जनता का उत्साह अपने चरम पर रहा। समापन समारोह में उत्तर प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए।


    विक्रमादित्य नायक जन-जन के हृदय में लोकमान्य

    उत्तर प्रदेश के मंत्री सुरेश कुमार ने कहा कि भारत की माटी में भगवान श्रीराम और युगावतार श्रीकृष्ण के बाद यदि कोई नायक जन-जन के हृदय में लोकमान्य हुआ है, तो वे उज्जैन के अधिपति सम्राट विक्रमादित्य ही थे। उन्होंने कहा कि “इतिहास के पन्नों में सम्राट विक्रमादित्य ने दुर्दांत विदेशी आक्रांताओं को भारत की सीमाओं से खदेड़कर निर्णायक विजय प्राप्त की थी, जिसके उपलक्ष्य में गौरवशाली ‘विक्रम सम्वत्’ का प्रवर्तन हुआ।” उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सरकारें मिलकर अपनी गौरवशाली विरासत को विकास की मुख्यधारा से जोड़ रही हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थापित उज्जैन की ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ इसी सांस्कृतिक सेतु का जीवंत प्रमाण है।


    महानाट्य का सजीव मंचन: आँखों के सामने जीवंत हुआ इतिहास

    समापन की संध्या पर ‘विशाला’ संस्था उज्जैन के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। भव्य त्रि-आयामी मंच पर जब सैकड़ों कलाकारों ने एक साथ सम्राट के पराक्रम और उनके सुशासन को जीवंत किया, तो पूरा मैदान ‘जय श्री महाकाल’ के जयघोष से गूँज उठा।

    नाटक के निर्देशक संजीव मालवीय के कुशल निर्देशन में सम्राट की न्यायप्रियता, ‘सिंहासन बत्तीसी’ के प्रसंग और विदेशी शत्रुओं के दमन के दृश्यों को जिस भव्यता के साथ प्रस्तुत किया गया, उसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पार्श्व संगीत, युद्ध के सजीव दृश्य और प्रभावशाली संवादों ने यह सिद्ध कर दिया कि हमारी गौरवशाली संस्कृति आज भी जन-मानस के हृदय में धड़कती है।


    अभूतपूर्व प्रदर्शनी: सम्राट विक्रमादित्य और अयोध्या का अटूट संबंध

    मंचन के साथ-साथ आयोजन स्थल पर मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा ‘भारतीय ज्ञान परंपरा’ पर केंद्रित एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई। इस प्रदर्शनी ने वाराणसी के विद्वानों और आमजन को एक चौंकाने वाले ऐतिहासिक तथ्य से परिचित कराया कि अयोध्या में प्रभु श्रीराम के मंदिर का प्राचीन निर्माण सम्राट विक्रमादित्य द्वारा ही संपन्न कराया गया था। प्रदर्शनी में भारतीय ऋषि और विज्ञान, शिव पुराण और मध्य प्रदेश के पवित्र स्थलों की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रदर्शनी देखने आए विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने इसे ‘ज्ञान का खजाना’ बताया। कक्षा दसवीं की छात्रा रोहिणी यादव ने साझा किया कि उसे पहली बार अपनी समृद्ध वैज्ञानिक परंपरा और विक्रमादित्य के अयोध्या दर्शन के बारे में इतनी गहराई से पता चला।


    ‘माँ गंगा से नर्मदा तक’: पर्यटन और संस्कृति का ऐतिहासिक एमओयू

    इस आयोजन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच हुआ एमओयू रहा, जिसकी थीम माँ गंगा से नर्मदा तक” रखी गई। इसके माध्यम से काशी विश्वनाथ (वाराणसी) और महाकालेश्वर (उज्जैन) के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है। मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड के स्टॉल्स पर काशीवासियों को ‘लघु मध्य प्रदेश’ का अनुभव हुआ। व्हीआर बॉक्स के माध्यम से लोगों ने काशी में बैठे-बैठे ही ओरछा, सांची और खजुराहो की गलियों की यात्रा की। वहीं ‘माँ की रसोई’ में परोसे गए मालवा की प्रसिद्ध थाली, इंदौरी पोहा-जलेबी और कुल्हड़ चाय का स्वाद चखने के लिए लोगों का तांता लगा रहा।


    लोक कलाओं का मनोहारी संगम

    महानाट्य के मुख्य मंचन से पूर्व मध्य प्रदेश के लोक कलाकारों ने अपनी अद्भुत कला से काशी को सराबोर कर दिया। मालवा का मटकी नृत्य, निमाड़ का गणगौर, डिंडोरी का गुदम्बबाजा और उज्जैन के डमरू दल की गूँज ने दोनों राज्यों के साझा सांस्कृतिक डीएनए को प्रदर्शित किया।

    कार्यक्रम के अंत में अतिथियों का सम्मान विक्रम पंचांग और अंगवस्त्र भेंट कर किया गया। इस अवसर पर पंडित नरेश शर्मा, डॉ. राजेश कुशवाहा और राजा भोज शोध प्रभाग के निदेशक संजय यादव ने इस आयोजन को भारतीय गौरव को विश्व पटल पर लाने का एक ‘सांस्कृतिक अनुष्ठान’ बताया। जय महाकाल और जय बाबा विश्वनाथ के नारों के साथ इस ऐतिहासिक त्रिवार्षिक उत्सव का समापन हुआ, जिसने काशी और उज्जैन के बीच के सदियों पुराने आध्यात्मिक संबंधों को और भी प्रगाढ़ कर दिया।

  • MP: उज्जैन में महाकाल : द मास्टर ऑफ टाइम अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का समापन

    MP: उज्जैन में महाकाल : द मास्टर ऑफ टाइम अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का समापन


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में स्थित तारामंडल में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘महाकाल : द मास्टर ऑफ टाइम’ का रविवार देर शाम आयोजित पैनल चर्चा ‘वे फॉरवर्ड’ सत्र के साथ समापन हुआ। इस सत्र में देश के प्रमुख वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों ने अंतरिक्ष अनुसंधान, खगोल विज्ञान, स्वदेशी तकनीक, स्टार्टअप्स और भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका पर अपने विचार रखे।


    मानव संसाधन और स्टार्टअप की भूमिका रही महत्वपूर्ण

    पीआरएल, डीओएस अहमदाबाद के निदेशक प्रो. अनिल भारद्वाज ने सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रमों की सफलता के लिए कुशल मानव संसाधन सबसे महत्वपूर्ण आधार है। चंद्रमा पर मानव मिशन जैसे लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए भौतिकी, रसायन विज्ञान, गणित, जीव विज्ञान, चिकित्सा और इंजीनियरिंग जैसे विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की आवश्यकता होगी। उन्होंने अंतरिक्ष चिकित्सा, जैव विज्ञान और खाद्य प्रौद्योगिकी जैसे उभरते क्षेत्रों के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने शिक्षा संस्थानों और अनुसंधान संगठनों के बीच बेहतर समन्वय और सूचना के आदान-प्रदान को आवश्यक बताते हुए कहा कि देश में विकसित हो रहे स्टार्टअप अंतरिक्ष क्षेत्र की जटिल चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।


    स्वदेशी तकनीक और उद्योग सहभागिता पर जोर

    एनसीआरए-टीआईएफआर, एसपीपी परिसर पुणे के निदेशक प्रो. यशवंत गुप्ता ने खगोल विज्ञान की बड़ी परियोजनाओं में तकनीकी आत्मनिर्भरता और उद्योगों की भागीदारी को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि पहले कई तकनीकों के लिए भारत को विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन जीएमआरटी जैसे प्रोजेक्ट्स ने देश की तकनीकी क्षमता को साबित किया है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक परियोजनाओं में विकसित तकनीकों का साझा उपयोग किया जा सकता है, जिससे लागत कम होगी और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने अनुसंधान संस्थानों और उद्योगों के बीच मजबूत तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की आवश्यकता बताई।


    स्पेस साइंस की शिक्षा का विस्तार आवश्यक

    आईआईएसटी के कुलपति प्रो. दीपांकर बनर्जी ने बतायाकि पिछले कुछ वर्षों में स्पेस साइंस क्षेत्र में 300 से अधिक स्टार्टअप सामने आए हैं, जो इस क्षेत्र की बढ़ती संभावनाओं को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में एस्ट्रोनॉमी और एस्ट्रोफिजिक्स की शिक्षा सीमित संस्थानों तक ही केंद्रित है, इसलिए इस ज्ञान को व्यापक स्तर पर पहुंचाने की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि स्पेस साइंस और एस्ट्रोनॉमी जैसे विषयों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ा जाना चाहिए, जिससे विद्यार्थी प्रारंभ से ही इस क्षेत्र के प्रति प्रेरित हो सकें। प्रो. बनर्जी शिक्षा, उद्योग, तकनीक और अनुसंधान संस्थानों के संयुक्त प्रयासों को भविष्य के लिए आवश्यक बताया।


    भारतीय ज्ञान परंपरा और इतिहास के पुनर्पाठ पर बल

    इंडोलॉजिस्ट एवं चिंतक, पद्मश्री डॉ. भगवती लाल राजपुरोहित ने भारतीय इतिहास और ज्ञान परंपरा के प्रमाण आधारित अध्ययन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने उज्जैन और मालवा क्षेत्र की कालगणना एवं खगोल विज्ञान की समृद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि इतिहास को तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर पुनः समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि उज्जैन प्राचीन काल से समय गणना और खगोल अध्ययन का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है और इस विरासत को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पुनः स्थापित करने की आवश्यकता है।

    युवाओं के लिए अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में अपार अवसर
    पैनल विशेषज्ञों ने कहा कि भारत का अंतरिक्ष और खगोल विज्ञान क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है और इसमें युवाओं के लिए रोजगार और अनुसंधान की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। यदि शिक्षा, अनुसंधान संस्थानों और उद्योगों के बीच समन्वित प्रयास किए जाएं, तो भारत इस क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ सकता है। सम्मेलन ने उज्जैन की प्राचीन कालगणना परंपरा को आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान से जोड़ते हुए विज्ञान, इतिहास और भारतीय ज्ञान प्रणाली के समन्वय का एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।

  • MP: ग्वालियर के गांधी उद्यान में सफेद बाघिन मीरा ने दिए 3 शावकों को जन्म

    MP: ग्वालियर के गांधी उद्यान में सफेद बाघिन मीरा ने दिए 3 शावकों को जन्म


    ग्वालियर।
    मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित गांधी प्राणी उद्यान (चिड़ियाघर) में रविवार को सफेद बाघिन मीरा ने तीन शावकों को जन्म दिया है। इनमें दो रॉयल बंगाल और एक सफेद टाइगर शावक शामिल हैं। इस जन्म के साथ ही चिड़ियाघर में बाघों की कुल संख्या 10 हो गई है।

    चिड़ियाघर के प्रभारी डॉ. उपेंद्र यादव ने बताया कि रविवार दोपहर करीब दो बजे बाघिन मीरा ने तीन शावकों को जन्म दिया। सभी शावक स्वस्थ हैं और उनकी मां मीरा भी सुरक्षित है। उन्होंने पुष्टि की कि जन्मे शावकों में दो रॉयल बंगाल (पीले) और एक सफेद टाइगर है। प्रसव के बाद से मीरा और उसके शावकों की लगातार निगरानी की जा रही है।

    गांधी उद्यान के क्यूरेटर गौरव परिहार ने बताया कि नवजात शावकों को सुरक्षा और स्वास्थ्य कारणों से आइसोलेशन में रखा गया है। उन्हें बाहरी संपर्क से दूर रखा जाएगा और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम नियमित रूप से उनके स्वास्थ्य की जांच कर रही है। मीरा को भी बेहतर रिकवरी के लिए हल्का और पौष्टिक आहार दिया जा रहा है। तीन नए शावकों के जन्म के बाद गांधी प्राणी उद्यान में बाघों की कुल संख्या 10 हो गई है। इनमें चार सफेद और छह रॉयल बंगाल टाइगर शामिल हैं। कुल संख्या में 4 नर, 3 मादा और 3 नवजात शावक हैं।

    ग्वालियर नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय के निर्देश पर चिड़ियाघर प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतने के लिए कहा गया है। नवजात शावकों की देखभाल के लिए अतिरिक्त व्यवस्थाएं की गई हैं और सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण द्वारा निर्धारित स्वास्थ्य और सुरक्षा मानकों का भी कड़ाई से पालन किया जा रहा है।

  • MP के 126 अस्पतालों की आयुष्मान मान्यता खत्म: मुफ्त इलाज पर रोक, मरीजों की परेशानी बढ़ी

    MP के 126 अस्पतालों की आयुष्मान मान्यता खत्म: मुफ्त इलाज पर रोक, मरीजों की परेशानी बढ़ी


    भोपाल। मध्यप्रदेश में आयुष्मान योजना के तहत मुफ्त इलाज कराने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। प्रदेश के 126 अस्पतालों की आयुष्मान मान्यता खत्म हो गई है। इसमें राजधानी भोपाल के 51, इंदौर के 30, ग्वालियर के 33 और जबलपुर के 12 अस्पताल शामिल हैं। कुल मिलाकर चार प्रमुख शहरों में 398 में से 126 अस्पताल प्रभावित हुए हैं।

    जानकारी के अनुसार, NABH सर्टिफिकेट न मिलने के कारण इन अस्पतालों में अब मुफ्त इलाज उपलब्ध नहीं होगा। वहीं, फुल NABH प्रमाणित अस्पताल “डीम्ड इंपैनलमेंट” का लाभ प्राप्त करेंगे और अस्पतालों को उनकी गुणवत्ता के आधार पर भुगतान किया जाएगा। एंट्री लेवल NABH अस्पतालों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त भुगतान मिलेगा। साथ ही मरीजों के फीडबैक से अस्पतालों की निगरानी भी की जाएगी।

    NABH सर्टिफिकेट अस्पतालों की गुणवत्ता और सुरक्षा का प्रमाण होता है। इसमें 600 से अधिक मानकों पर अस्पतालों की जांच की जाती है। ये मानक मरीजों की सुरक्षा, साफ-सफाई, दवाओं की उपलब्धता, नर्सिंग स्टाफ, इमरजेंसी सेवाएं और सर्जरी प्रक्रियाओं से जुड़े होते हैं। सरकार का मानना है कि NABH प्रमाणपत्र मरीजों को सुरक्षित और भरोसेमंद इलाज की गारंटी देता है।

    इस फैसले के बाद प्रभावित अस्पतालों के मरीजों को अब मुफ्त इलाज के विकल्प सीमित होंगे। मरीजों को अब अपने नजदीकी फुल NABH प्रमाणित अस्पतालों में इलाज कराने की आवश्यकता होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से मरीजों की सुरक्षा बढ़ेगी, लेकिन अल्पकाल में लोग असुविधा और परेशानियों का सामना कर सकते हैं।

    मंत्रालय ने बताया कि आगामी दिनों में अस्पतालों को NABH मानकों के अनुरूप तैयार करने के लिए मार्गदर्शन दिया जाएगा। वहीं, मरीजों से फीडबैक लेकर अस्पतालों की सेवाओं की निगरानी की जाएगी ताकि स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।

    इस बदलाव से मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार और मरीजों की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, हालांकि फिलहाल लोगों को अस्पतालों के चयन में अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी।

  • अनूपपुर बिल्डिंग हादसा: तीन की मौत, CM डॉ मोहन यादव ने दुख जताया और पीड़ितों को मुआवजे का ऐलान किया

    अनूपपुर बिल्डिंग हादसा: तीन की मौत, CM डॉ मोहन यादव ने दुख जताया और पीड़ितों को मुआवजे का ऐलान किया


    भोपाल। अनूपपुर के कोतमा बस स्टैंड के पास शनिवार को अग्रवाल लॉज की तीन मंजिला इमारत भरभराकर गिर गई, जिससे तीन लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए। हादसे के समय इमारत के बगल में निर्माण कार्य भी चल रहा था, जिससे यह घटना होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने का ऐलान किया। मृतकों के परिजनों को मुख्यमंत्री स्वेच्छा अनुदान और संबल योजना के तहत चार-चार लाख रुपये दिए जाएंगे। इसके अलावा, रेड क्रॉस से एक-एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। घायलों को मुख्यमंत्री स्वेच्छा अनुदान से दो-दो लाख और रेड क्रॉस से पचास-पचास हजार रुपये की राशि दी जाएगी।

    सीएम डॉ मोहन यादव ने लिखा कि राज्य सरकार प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है और ईश्वर से दिवंगतों की आत्मा की शांति एवं घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करता है। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिजनों को तत्काल आर्थिक सहायता दी जा रही है ताकि उन्हें राहत मिले और स्थिति संभाली जा सके।

    हादसे की सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीम, कोतमा पुलिस, नगर पालिका और एसईसीएल की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और बचाव कार्य शुरू किया। मलबे के नीचे दबे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं प्रशासन ने घटना की जांच शुरू कर दी है।

    इस घटना ने शहर और राज्य में इमारतों की सुरक्षा और निर्माण मानकों के पालन की आवश्यकता को फिर से उजागर किया है। सरकार ने प्रभावित परिवारों और घायलों के साथ खड़े रहने का भरोसा दिया है और कहा है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी से बचा जा सके।

  • विधायक बनाम न्यायपालिका: एमपी में 5 मामले जहां सजा और सदस्यता बनी मुद्दा

    विधायक बनाम न्यायपालिका: एमपी में 5 मामले जहां सजा और सदस्यता बनी मुद्दा


    भोपाल । मध्य प्रदेश में विधायकों को आपराधिक मामलों में सजा मिलने और सदस्यता समाप्त होने के पांच प्रमुख मामले हाल ही में सुर्खियों में रहे। इनमें न्यायालय ने कुछ मामलों में सजा सुनाई, विधानसभा सचिवालय ने सीट रिक्त घोषित की, लेकिन उच्च अदालतों ने कुछ विधायकों को राहत दी जिससे उनकी विधायकी बच गई।

    सबसे पहला मामला बिजावर सीट की भाजपा विधायक आशा रानी सिंह का है। वर्ष 2011 में छतरपुर जिले की बिजावर सीट से विधायक आशा रानी सिंह को अपनी नौकरानी तिजिया बाई को आत्महत्या के लिए उकसाने के जुर्म में दस साल की सजा सुनाई गई। उनके पति पर भी इसी मामले में आरोप था। सजा के बाद विधानसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता समाप्त कर दी और सीट को रिक्त घोषित कर चुनाव आयोग को सूचना भेजी। हाई कोर्ट में अपील करने के बावजूद उन्हें राहत नहीं मिली और 31 अक्टूबर 2013 को उनकी विधायकी समाप्त हो गई।

    दूसरा मामला पवई सीट के भाजपा विधायक प्रहलाद लोधी का है। 2014 में अवैध रेत उत्खनन के दौरान तहसीलदार के साथ मारपीट के मामले में 31 अक्टूबर 2019 को भोपाल की विशेष अदालत ने उन्हें दो साल की सजा सुनाई। विधानसभा सचिवालय ने सदस्यता रद्द की अधिसूचना जारी की, लेकिन प्रहलाद लोधी ने हाई कोर्ट में अपील की और सात नवंबर 2019 को कोर्ट ने उनकी सजा पर स्टे दे दी। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेशों के बाद उनकी सदस्यता बहाल हुई और वे विधायक बने रहे।

    तीसरा मामला खरगापुर विधानसभा सीट के राहुल सिंह लोधी का है। 2018 में उनके खिलाफ कांग्रेस प्रत्याशी ने चुनाव याचिका दायर की। हाई कोर्ट ने नामांकन पत्र में महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने के आधार पर उनके निर्वाचन को शून्य घोषित कर दिया। विधानसभा सचिवालय ने सदस्यता समाप्त कर दी और सीट रिक्त घोषित की। राहुल सिंह लोधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की और दिसंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम स्टे दे कर सदस्यता बहाल की। लेकिन उन्हें वोटिंग और कुछ भत्तों का अधिकार नहीं मिला।

    चौथा मामला विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा का है। उन्हें नामांकन पत्र में आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाने का आरोप लगा और मार्च 2026 में हाई कोर्ट ने उनके चुनाव को शून्य घोषित कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें विधायक के तौर पर काम करने की अनुमति दी लेकिन वे वेतन, भत्तों और वोटिंग में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। उनकी सुनवाई 23 जुलाई को होगी।

    पांचवां और वर्तमान में चर्चित मामला दतिया सीट के कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती का है। 2 अप्रैल 2026 को दिल्ली की विशेष अदालत ने उन्हें साल 1998 के बैंक धोखाधड़ी मामले में दोषी पाया और तीन साल की जेल की सजा सुनाई। सदस्यता समाप्त करने और सीट रिक्त घोषित करने की अधिसूचना विधानसभा सचिवालय ने चुनाव आयोग को भेज दी। राजेंद्र भारती ने जमानत तो पा ली है लेकिन सजा पर कनविक्शन स्टे नहीं मिला है। वे सुप्रीम कोर्ट में अपील करने जा रहे हैं।

    राजेन्द्र कुमार सिंह ने इस घटनाक्रम पर कहा कि न्यायालय का काम अलग है, लेकिन रात में विधानसभा खोलकर गजट नोटिफिकेशन जारी करना संसदीय प्रक्रिया में पहले कभी नहीं हुआ। कई मामलों में हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद सदस्यता बहाल की जाती है। इन घटनाओं ने मध्य प्रदेश विधानसभा की राजनीति और न्यायिक प्रक्रिया के बीच संवेदनशील संतुलन को उजागर किया है।

  • जबलपुर: साइबर ठगी का पर्दाफाश 3 करोड़ की ठगी में एक और आरोपी पुलिस के हत्थे

    जबलपुर: साइबर ठगी का पर्दाफाश 3 करोड़ की ठगी में एक और आरोपी पुलिस के हत्थे


    जबलपुर । जबलपुर में शेयर बाजार में मुनाफे के झांसे में फंसाकर डॉक्टर से तीन करोड़ रुपये की ठगी करने वाले आरोपी मोहित पटेल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इस गिरफ्तारी के बाद अब तक कुल तीन आरोपियों को पकड़ने में सफलता मिली है। साइबर सेल और क्राइम ब्रांच की संयुक्त कार्रवाई ने इस मामले को उजागर किया है और आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

    पूर्व में गिरफ्तार आरोपियों संस्कार केशरवानी और सौरभ विश्वकर्मा की पूछताछ में मोहित पटेल का नाम सामने आया था। जांच में पता चला कि आरोपियों ने शेयर बाजार में निवेश के नाम पर 500 प्रतिशत तक मुनाफे का झांसा दिया और डॉक्टर के साथ 3 करोड़ रुपये की ठगी की। आरोपी ने यस बैंक में करेंट अकाउंट खोलकर साइबर ठगों को मोटे कमीशन पर पैसे ट्रांसफर किए।

    मोहित पटेल पेशे से गुमास्ता और एमएसएमई के दस्तावेज तैयार करने का काम करता है। इसके साथ ही वह इनकम टैक्स के दस्तावेज बनाने में भी संलिप्त रहा है। पुलिस के अनुसार आरोपी पर पहले भी धोखाधड़ी का मामला दर्ज है। वर्तमान में क्राइम ब्रांच और साइबर सेल आरोपी से पूछताछ कर मामले की गहनता से जांच कर रही है।

    इस मामले ने यह साफ कर दिया है कि शेयर बाजार में अवास्तविक मुनाफे का लालच लोगों को गंभीर वित्तीय नुकसान पहुंचा सकता है। पुलिस का कहना है कि इस प्रकार की ठगी की घटनाओं में निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए और किसी भी अनजान या संदिग्ध व्यक्ति पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। इस गिरफ्तारी से अन्य संभावित आरोपियों तक पुलिस की पकड़ मजबूत हुई है और मामले की जांच जारी है।

  • हर हर महादेव के जयकारों से गूंजा महाकाल मंदिर भस्म आरती में दिव्य श्रृंगार के दर्शन

    हर हर महादेव के जयकारों से गूंजा महाकाल मंदिर भस्म आरती में दिव्य श्रृंगार के दर्शन


    उज्जैन । उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि रविवार तड़के भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला जब प्रातः लगभग 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए और परंपरानुसार भस्म आरती का आयोजन किया गया। इस विशेष अवसर पर भगवान महाकालेश्वर का दिव्य और मनमोहक श्रृंगार किया गया जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

    मंदिर के पट खुलते ही पुजारियों ने गर्भगृह में विराजमान सभी देवी देवताओं का विधिवत पूजन किया और इसके बाद भगवान महाकाल का पवित्र जलाभिषेक आरंभ हुआ। श्रद्धा और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जल के साथ दूध दही घी शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। इसके पश्चात भगवान के मस्तक पर चांदी का बेलपत्र चंद्र और आकर्षक आभूषण अर्पित कर उन्हें राजा स्वरूप में सजाया गया जो अत्यंत दिव्य प्रतीत हो रहा था।

    भस्म आरती की प्रक्रिया अत्यंत विधिपूर्वक संपन्न हुई जिसमें भस्म अर्पण से पहले प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया और मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढांककर पवित्र भस्म अर्पित की गई जो इस आरती की सबसे महत्वपूर्ण और विशिष्ट परंपरा मानी जाती है। इसके बाद भगवान को शेषनाग का रजत मुकुट रजत की मुण्डमाल रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों की मालाओं से अलंकृत किया गया जिससे उनका स्वरूप और भी आकर्षक और दिव्य हो गया।

    असुबह आयोजित इस भस्म आरती में सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे जिन्होंने बाबा महाकाल के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। मंदिर परिसर हर हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन कर उनके कान में अपनी मनोकामनाएं कही और जीवन में सुख समृद्धि की कामना की।

    महाकाल की यह भस्म आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि आस्था विश्वास और सनातन परंपरा की जीवंत झलक है जो हर दिन हजारों भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करती है। बाबा महाकाल का यह दिव्य श्रृंगार और भस्म आरती का दृश्य श्रद्धालुओं के मन में अद्भुत शांति और ऊर्जा का संचार करता है और उन्हें आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाता है।

  • उज्जैन के डोंगला से उठी ब्रह्मांड की नई दृष्टि महाकाल सम्मेलन में विज्ञान और परंपरा का संगम

    उज्जैन के डोंगला से उठी ब्रह्मांड की नई दृष्टि महाकाल सम्मेलन में विज्ञान और परंपरा का संगम

    उज्जैन । उज्जैन जिले के महिदपुर तहसील स्थित डोंगला गांव में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन महाकाल द मास्टर ऑफ टाइम के दूसरे दिन विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। इस महत्वपूर्ण आयोजन में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने सहभागिता की और खगोल विज्ञान तथा अंतरिक्ष अनुसंधान पर आयोजित सत्र में शामिल होकर वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियां केवल तकनीकी सफलता नहीं हैं बल्कि यह देश की वैज्ञानिक क्षमता और आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रतीक हैं जो विश्व पटल पर भारत की बढ़ती ताकत को दर्शाती हैं।

    मुख्यमंत्री के डोंगला पहुंचने पर प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल सहित जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। सम्मेलन के दौरान आयोजित गतिविधियों ने इसे केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि ज्ञान और नवाचार के उत्सव में बदल दिया। दूसरे दिन विद्यार्थियों के लिए आरसी प्लेन कार्यशाला आयोजित की गई जिसमें उन्हें एयरोमॉडलिंग और उड़ान तकनीक की बारीकियों से परिचित कराया गया। इसके साथ ही ग्रहों और डीप स्काई ऑब्जर्वेशन कार्यक्रम ने प्रतिभागियों को ब्रह्मांड के रहस्यों को करीब से देखने का अवसर दिया।

    कार्यक्रम स्थल पर लगी प्रदर्शनी विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है जिसमें आमजन और विद्यार्थियों को काल गणना अंतरिक्ष विज्ञान और ब्रह्मांड से जुड़ी भारतीय ज्ञान परंपरा के साथ आधुनिक वैज्ञानिक उपलब्धियों की जानकारी दी जा रही है। इस प्रदर्शनी में शिक्षा मंत्रालय के भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ सीएसआईआर इसरो टीआईएफआर एमपीसीएसटी आईआईटी इंदौर डीआरडीओ और ब्रह्मोस एयरोस्पेस जैसे प्रतिष्ठित संस्थान अपनी उपलब्धियों और शोध कार्यों को प्रदर्शित कर रहे हैं। इसके अलावा कालगणना और प्राचीन भारतीय विज्ञान से संबंधित पुस्तकों की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी भी लोगों को आकर्षित कर रही है।

    तीन दिवसीय इस सम्मेलन में मुख्य वक्तव्य उच्च स्तरीय पैनल चर्चा तकनीकी सत्र ओपन सेशन टेक्नोलॉजी एक्सपो और स्टार्टअप कॉन्फ्रेंस जैसी विविध गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। प्रतिभागियों को डोंगला स्थित वराहमिहिर खगोलीय वेधशाला का भ्रमण भी कराया जा रहा है जहां वे खगोलीय उपकरणों और अनुसंधान प्रक्रियाओं को समझ रहे हैं। साथ ही यूएवी ड्रोन आरसी और सैटेलाइट निर्माण से जुड़ी कार्यशालाएं युवाओं के बीच विज्ञान और तकनीक के प्रति रुचि बढ़ाने का माध्यम बन रही हैं।

    कर्क रेखा पर स्थित डोंगला गांव खगोल विज्ञान के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। इसी महत्व को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2013 में यहां आधुनिक खगोलीय वेधशाला की स्थापना की गई थी जो आज वैज्ञानिक अध्ययन और अनुसंधान का प्रमुख केंद्र बन चुकी है। यह सम्मेलन न केवल भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित करने का प्रयास है बल्कि इसे आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़कर वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही उज्जैन और डोंगला को वैश्विक मेरिडियन के रूप में स्थापित करने की पहल भी इस आयोजन के माध्यम से मजबूत होती दिखाई दे रही है।

    गौरतलब है कि इससे पहले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2025 को भी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव डोंगला पहुंचे थे जहां शून्य छाया जैसी दुर्लभ खगोलीय घटना का अवलोकन किया गया था। उनके नेतृत्व में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में देशभर के सैकड़ों प्रतिभागियों ने भाग लिया था। इस बार के सम्मेलन में भी देश के प्रमुख वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की उपस्थिति ने इसे और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। यह आयोजन न केवल विज्ञान के क्षेत्र में नई संभावनाओं को उजागर कर रहा है बल्कि युवाओं को नवाचार और अनुसंधान के लिए प्रेरित करने का सशक्त मंच भी प्रदान कर रहा है।