Category: Madhya Pradesh
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इंदौर में ज़हरीला पानी: भागीरथपुरा कांड के बाद भी नहीं थमा संकट, देवगुराड़िया में हालात भयावह
नई दिल्ली। इंदौर में भागीरथपुरा जलकांड की भयावह यादें अभी ताज़ा ही हैं, लेकिन इसके बावजूद शहर के कई हिस्सों में दूषित पानी का संकट थमने का नाम नहीं ले रहा। अब देवगुराड़िया पंचायत क्षेत्र में हालात बेहद चिंताजनक हो गए हैं, जहां भीषण गर्मी के बीच लोगों को न सिर्फ पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि जो पानी उपलब्ध है वह भी स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो रहा है।स्थानीय लोगों के अनुसार, क्षेत्र के ट्रेंचिंग ग्राउंड और सीएनजी प्लांट से निकलने वाला गंदा पानी जमीन में रिसकर भूजल को प्रदूषित कर रहा है। नतीजा यह है कि बोरिंग से निकलने वाला पानी बदबूदार, पीले रंग का और डीजल जैसी परत वाला हो गया है। यह पानी न तो पीने योग्य है और न ही दैनिक उपयोग के लिए सुरक्षित। कई घरों में तो इस पानी से बर्तन तक पीले पड़ रहे हैं और उनमें मोटी परत जम रही है।स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोग अब त्वचा रोगों और बाल झड़ने जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। महिलाओं का कहना है कि उनके बाल तेजी से गिर रहे हैं, जबकि पुरुषों में भी यही समस्या देखी जा रही है। बच्चों में खुजली, चकत्ते और एलर्जी जैसी शिकायतें बढ़ रही हैं। डॉक्टरों का मानना है कि पानी में टीडीएस (घुले ठोस पदार्थ) की मात्रा अत्यधिक होने के कारण यह समस्याएं हो रही हैं।स्थानीय निवासी अनिल चौधरी बताते हैं कि घरों में लगे आरओ फिल्टर भी दो-तीन महीने में खराब हो जा रहे हैं। वहीं, कई लोगों का कहना है कि पानी गर्म करने पर बर्तनों में मोटी परत जम जाती है और दाल तक ठीक से नहीं पकती। कुछ मामलों में तो बोरिंग के पानी में ड्रेनेज का पानी मिलने की शिकायत भी सामने आई है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है।पानी की इस गंभीर समस्या के बीच टैंकरों पर निर्भरता बढ़ गई है। लेकिन टैंकर भी नियमित रूप से उपलब्ध नहीं हो रहे, जिससे लोगों को 600 से 700 रुपये तक खर्च कर पानी मंगवाना पड़ रहा है। यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गया है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि ट्रेंचिंग ग्राउंड पर कचरा जलाने और गंदे अपशिष्ट के गलत निपटान से यह स्थिति उत्पन्न हुई है। मवेशियों की मौत और पर्यावरण प्रदूषण भी चिंता का विषय बन चुके हैं। कई इलाकों देवगुराड़िया, पत्थर मुंडला, मानसरोवर और श्रीजी वैली में पानी की गुणवत्ता लगातार गिरती जा रही है।हालात से नाराज़ लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो वे जन आंदोलन करेंगे और सड़क जाम जैसे कदम उठाने पर मजबूर होंगे। वहीं, पंचायत और प्रशासन के बीच जिम्मेदारी तय करने को लेकर भी असमंजस बना हुआ है।विशेषज्ञों के अनुसार, हार्ड वाटर में मौजूद खनिज त्वचा और बालों के लिए बेहद नुकसानदायक होते हैं। इससे त्वचा में जलन, रूखापन, एलर्जी और बालों की कमजोरी जैसी समस्याएं बढ़ती हैं। फिलहाल लोगों को अस्थायी राहत के तौर पर पानी को शुद्ध करने या फिटकरी के उपयोग की सलाह दी जा रही है, लेकिन स्थायी समाधान अभी भी दूर नजर आ रहा है। -

हाईटेक सिस्टम फेल? शहडोल में खुलेआम बिजली चोरी, ईमानदार उपभोक्ता परेशान..
मध्य प्रदेश /शहडोल जिले में बिजली व्यवस्था को आधुनिक और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए स्मार्ट मीटर लगाए जाने की प्रक्रिया को एक बड़ा कदम माना जा रहा था, लेकिन जमीनी स्तर पर तस्वीर कुछ और ही दिखाई दे रही है। हाईटेक सिस्टम की मौजूदगी के बावजूद ग्रामीण इलाकों में बिजली चोरी का पुराना तरीका ‘कटिया कनेक्शन’ आज भी खुलेआम जारी है, जिससे बिजली विभाग की चुनौती और भी बढ़ गई है।जिले के कई ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में लोग मीटर बायपास कर सीधे लाइन से बिजली का उपयोग कर रहे हैं। यह अवैध तरीका अब आम होता जा रहा है, जहां घरेलू उपयोग से लेकर भारी उपकरणों तक को बिना किसी रोक-टोक के चलाया जा रहा है। इस स्थिति ने न केवल बिजली आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावित किया है, बल्कि पूरे नेटवर्क पर अतिरिक्त दबाव भी डाल दिया है।
बिजली चोरी का सबसे बड़ा असर ट्रांसफार्मरों और सप्लाई सिस्टम पर देखने को मिल रहा है। ओवरलोडिंग के कारण बार-बार बिजली गुल होना, लो वोल्टेज और तकनीकी खराबी जैसी समस्याएं अब सामान्य हो चुकी हैं। इसका सीधा असर उन उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है, जो नियमित रूप से बिल का भुगतान कर रहे हैं और नियमों का पालन कर रहे हैं। छोटे व्यापारी और आम परिवार इस असंतुलित व्यवस्था से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों के बीच यह भी चर्चा का विषय है कि इस तरह की गतिविधियां लंबे समय से चल रही हैं, लेकिन सख्त कार्रवाई अपेक्षाकृत कम दिखाई देती है। कई जगहों पर खुलेआम तारों में हुक लगाकर बिजली लेने की घटनाएं देखी जा सकती हैं, जिससे विभागीय निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
दूसरी ओर बिजली विभाग का कहना है कि समय-समय पर जांच अभियान चलाए जाते हैं और अवैध कनेक्शन हटाने की कार्रवाई भी की जाती है। साथ ही स्मार्ट मीटर को इस समस्या के समाधान के रूप में देखा जा रहा है, जिससे भविष्य में बिजली चोरी पर नियंत्रण पाया जा सकेगा।
हालांकि जमीनी स्थिति और दावों के बीच बड़ा अंतर साफ नजर आता है। आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के बावजूद बिजली चोरी की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी है। इससे यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या तकनीक अकेले इस समस्या को हल कर सकती है या इसके लिए सख्त प्रशासनिक कार्रवाई और सामाजिक जागरूकता भी जरूरी है।
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कम खर्च, बड़ा असर,पचमढ़ी में सफाई की नई क्रांति: अब एक हाई-टेक गाड़ी करेगी 20 मजदूरों का काम
मध्यप्रदेश/नर्मदापुरम। के पचमढ़ी में स्वच्छता को लेकर एक ऐसा बदलाव शुरू हुआ है, जिसने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में काम करने के तरीके को ही बदल दिया है। पहाड़ों और संकरे रास्तों के बीच जहां कचरा प्रबंधन लंबे समय से एक बड़ी चुनौती बना हुआ था, वहीं अब एक नई तकनीकी पहल ने इस समस्या का प्रभावी समाधान पेश किया है।यह बदलाव एक विशेष रूप से तैयार की गई 4×4 कचरा गाड़ी के जरिए संभव हुआ है। इस गाड़ी को ऐसे इलाकों के लिए डिजाइन किया गया है, जहां सामान्य वाहन पहुंचने में असमर्थ रहते हैं। पचमढ़ी के ऊंचे-नीचे रास्ते, पथरीली जमीन और संकरी गलियां अब इस गाड़ी के लिए बाधा नहीं रहीं। यह वाहन उन स्थानों तक आसानी से पहुंच जाता है, जहां पहले सफाई करना बेहद कठिन होता था।
इस गाड़ी की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसका हाइड्रोलिक सिस्टम है। इसकी मदद से कचरे को उठाना और खाली करना बेहद आसान हो गया है। पहले जहां सफाई कर्मियों को भारी मात्रा में कचरा अपने हाथों से उठाकर दूर तक ले जाना पड़ता था, वहीं अब यह प्रक्रिया काफी हद तक मशीन पर निर्भर हो गई है। इससे न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि श्रमिकों को शारीरिक मेहनत से भी राहत मिल रही है।
पचमढ़ी जैसे पर्यटन और धार्मिक महत्व वाले स्थान पर बड़े आयोजनों के दौरान सफाई एक गंभीर चुनौती बन जाती थी। नागद्वारी जैसे मेलों में हजारों लोग जुटते हैं, जिससे भारी मात्रा में कचरा इकट्ठा हो जाता है। पहले सफाई कर्मियों को कई किलोमीटर दूर से कचरा ढोकर लाना पड़ता था, जो बेहद कठिन और समय लेने वाला काम था। लेकिन अब यह नई गाड़ी एक ही चक्कर में बड़ी मात्रा में कचरा उठाकर ले जाने में सक्षम है।
बताया जा रहा है कि यह गाड़ी अकेले ही 15 से 20 लोगों के काम के बराबर कार्य कर सकती है। इससे सफाई व्यवस्था में तेजी आई है और काम अधिक व्यवस्थित तरीके से होने लगा है। सबसे अहम बात यह है कि इससे सफाई कर्मियों का बोझ काफी कम हो गया है, जिससे उनकी कार्यक्षमता भी बढ़ी है।
इस पहल की एक और खासियत इसकी लागत है। सीमित बजट में तैयार की गई यह गाड़ी यह दर्शाती है कि बड़े बदलाव के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती। सही योजना और नवाचार के जरिए कम लागत में भी प्रभावी समाधान निकाले जा सकते हैं।
अब पचमढ़ी में यह गाड़ी केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि एक मॉडल बन गई है, जिसे अन्य दुर्गम क्षेत्रों में भी अपनाया जा सकता है। यह पहल दिखाती है कि तकनीक का सही उपयोग न केवल समस्याओं को हल कर सकता है, बल्कि काम करने के तरीके को भी पूरी तरह बदल सकता है।
इस तरह पचमढ़ी ने यह साबित कर दिया है कि इच्छाशक्ति और नवाचार के साथ किसी भी चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है, और स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में भी नई दिशा दी जा सकती है।
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नरसिंहपुर में रहस्य गहराया, छोटे भाई के खेत में मिला बड़े भाई का शव, हत्या की आशंका से हड़कंप
मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले के करेली थाना क्षेत्र के खैरुआ गांव में एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। गांव के एक किसान का शव उसके ही छोटे भाई के खेत से मिलने के बाद मामला गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। मृतक की पहचान 45 वर्षीय नरेंद्र पटेल के रूप में की गई है।घटना की जानकारी मिलते ही गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। लोग बड़ी संख्या में घटनास्थल पर पहुंचने लगे और देखते ही देखते वहां भीड़ जमा हो गई। शुरुआती जांच में यह मामला एक दुर्घटना जैसा प्रतीत हुआ, लेकिन जैसे ही परिजनों ने सवाल उठाने शुरू किए, स्थिति संदिग्ध हो गई।
परिजनों का कहना है कि यह मौत केवल एक हादसा नहीं हो सकती। उनका आरोप है कि नरेंद्र पटेल की मौत किसी अन्य स्थान पर हुई है और बाद में उनके शव को जानबूझकर खेत में लाकर रखा गया, ताकि इसे सामान्य दुर्घटना का रूप दिया जा सके। परिवार का यह भी दावा है कि क्षेत्र में जंगली जानवरों से फसल की सुरक्षा के लिए कई जगहों पर बिजली का करंट लगाया जाता है और संभव है कि इसी वजह से यह घटना हुई हो।
हालांकि परिजन इस बात को स्वीकार नहीं कर रहे कि यह केवल एक लापरवाही का परिणाम है। उनका मानना है कि शव को खेत में मौजूद ट्रांसफार्मर के पास रखा गया, ताकि घटना को बिजली हादसे के रूप में दिखाया जा सके और असली कारण छिपाया जा सके। इसी आधार पर परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
दूसरी ओर पुलिस ने प्रारंभिक जांच के आधार पर इसे करंट लगने से हुई दुर्घटनात्मक मौत बताया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, घटनास्थल की स्थिति और शुरुआती साक्ष्यों को देखते हुए यह मामला फिलहाल एक हादसा प्रतीत होता है, लेकिन किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि खेत में बिजली की व्यवस्था कैसे की गई थी और क्या इसमें किसी प्रकार की लापरवाही या नियमों का उल्लंघन हुआ है।
इस घटना के बाद गांव में तनाव और चर्चाओं का माहौल बना हुआ है। लोग अलग-अलग तरह की बातें कर रहे हैं और हर कोई यह जानने की कोशिश में है कि यह वास्तव में एक दुखद हादसा था या इसके पीछे कोई गहरी साजिश छिपी हुई है।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए हर संभावित पहलू की जांच कर रही है। यह मामला अब केवल एक सामान्य मौत नहीं रहा, बल्कि एक ऐसा रहस्य बन गया है जिसका सच सामने आना बाकी है और जिस पर पूरे गांव की नजर टिकी हुई है।
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ट्रैक्टर ठगी का बड़ा खुलासा, किसानों को लालच देकर वाहन हड़पने वाला आरोपी गिरफ्तार
मध्य प्रदेश /उज्जैन जिले में किसानों के साथ ट्रैक्टरों की ठगी करने वाले एक शातिर व्यक्ति को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला लंबे समय से इलाके में चिंता का विषय बना हुआ था, जहां आरोपी लगातार किसानों को निशाना बनाकर उनके ट्रैक्टर हड़प रहा था। उसकी गिरफ्तारी के बाद इस पूरे नेटवर्क को लेकर कई अहम जानकारियां सामने आने की संभावना जताई जा रही है।आरोपी किसानों को यह विश्वास दिलाता था कि उनके ट्रैक्टर को वह अधिक किराए पर चलवाएगा, जिससे उन्हें अच्छा मुनाफा मिलेगा। इसी लालच में आकर किसान अपने ट्रैक्टर उसे सौंप देते थे। शुरुआत में सब कुछ सामान्य लगता था, लेकिन बाद में न तो उन्हें तय किया गया किराया मिलता था और न ही उनका वाहन वापस किया जाता था।
जांच में सामने आया है कि आरोपी ट्रैक्टरों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाकर या तो बेच देता था या फिर उन्हें गिरवी रखकर पैसे हासिल करता था। इस तरह वह कई किसानों को आर्थिक नुकसान पहुंचा चुका था। सबसे बड़ी समस्या यह थी कि वह अपनी पहचान छिपाने के लिए बार-बार अपने मोबाइल नंबर और ठिकाने बदलता रहता था, जिससे उसे पकड़ना बेहद मुश्किल हो गया था।
पीड़ित किसानों की शिकायतों के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। इसके बाद तकनीकी जानकारी और स्थानीय स्तर पर मिली सूचनाओं के आधार पर आरोपी की तलाश तेज की गई। लगातार प्रयासों के बाद पुलिस को सफलता मिली और आरोपी को पकड़ लिया गया।
गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे पुलिस रिमांड पर लिया गया है। पुलिस अब उससे गहन पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस धोखाधड़ी में और कौन लोग शामिल हैं और उसने अब तक कितने लोगों को निशाना बनाया है।
पुलिस को शक है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हो सकता और इसके पीछे कोई संगठित तरीका भी हो सकता है। इसी वजह से पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है और अन्य संभावित आरोपियों की तलाश भी की जा रही है।
इस घटना के बाद अधिकारियों ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्हें बताया गया है कि किसी भी प्रकार के अनजान व्यक्ति या आकर्षक ऑफर पर बिना जांच-पड़ताल किए अपने उपकरण या वाहन न सौंपें।
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मध्यप्रदेश के कटनी में दावा: जमीन से प्रकट हुई हनुमान प्रतिमा, पूरे इलाके में भक्ति का माहौल
मध्य प्रदेश /कटनी जिले के बहोरीबंद क्षेत्र में इन दिनों एक ऐसी घटना की चर्चा है, जिसने पूरे इलाके को आस्था और आश्चर्य के माहौल में बदल दिया है। रूपनाथ क्षेत्र के पास एक खेत में खुदाई के दौरान कथित तौर पर पवनपुत्र हनुमान की एक प्रतिमा मिलने का दावा सामने आया है। जैसे ही यह बात फैली, आसपास के गांवों में हलचल मच गई और लोग बड़ी संख्या में उस स्थान की ओर पहुंचने लगे।यह घटना उस समय हुई जब ग्राम सजहरी मोहनिया के कुछ किसान अपने खेत में सामान्य खुदाई का कार्य कर रहे थे। बताया जाता है कि मिट्टी हटाने के दौरान अचानक जमीन के भीतर एक पत्थरनुमा आकृति दिखाई दी। धीरे-धीरे जब खुदाई आगे बढ़ी, तो वहां मौजूद लोगों के अनुसार एक प्रतिमा जैसी संरचना स्पष्ट होने लगी, जिसे उन्होंने बजरंगबली की मूर्ति बताया।
यह स्थान पहले से ही धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यहां एक गऊ समाधि भी स्थित है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में पहले से ही श्रद्धा और आस्था का वातावरण रहा है, लेकिन इस घटना के बाद इसकी धार्मिक मान्यता और भी गहरी हो गई है। ग्रामीण इसे एक सामान्य घटना नहीं बल्कि आस्था से जुड़ा एक विशेष संकेत मान रहे हैं।
जैसे ही यह खबर आसपास के गांवों तक पहुंची, लोग बिना देर किए उस स्थान पर पहुंचने लगे। कुछ ही घंटों में वहां श्रद्धालुओं की भीड़ जमा हो गई। लोग प्रतिमा के दर्शन कर पूजा-अर्चना करने लगे और पूरा वातावरण भक्ति भाव से भर गया। कई जगहों पर जयकारों की गूंज सुनाई देने लगी और माहौल पूरी तरह धार्मिक ऊर्जा से भर गया।
स्थानीय लोगों ने इस घटना को लेकर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि जब उन्होंने खुद मिट्टी हटाई, तो उन्हें पहले समझ नहीं आया कि यह क्या है, लेकिन जैसे-जैसे प्रतिमा सामने आती गई, सभी लोग आश्चर्य में पड़ गए। कई ग्रामीणों ने इसे अपने जीवन का एक अनोखा अनुभव बताया और इसे ईश्वर की कृपा से जोड़कर देखा।
हालांकि इस पूरे मामले को लेकर अभी तक किसी आधिकारिक स्तर पर कोई पुष्टि नहीं की गई है। न ही यह स्पष्ट हो पाया है कि यह प्रतिमा कितनी पुरानी है या इसका ऐतिहासिक महत्व क्या हो सकता है। इसके बावजूद लोगों की आस्था लगातार बढ़ती जा रही है और श्रद्धालु दूर-दूर से दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
यह स्थान अब केवल एक खेत नहीं रह गया है, बल्कि आस्था और उत्सुकता का केंद्र बन चुका है। कोई इसे चमत्कार मान रहा है, तो कोई इसे पुरातात्विक जांच का विषय बता रहा है। लेकिन फिलहाल वहां का माहौल पूरी तरह श्रद्धा, विश्वास और भावनाओं से भरा हुआ है।
कटनी की यह घटना एक बार फिर यह दिखाती है कि ग्रामीण भारत में आस्था कितनी गहराई से लोगों के जीवन से जुड़ी हुई है, जहां एक छोटी सी घटना भी पूरे समाज के लिए बड़े धार्मिक अनुभव में बदल जाती है।
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एमपी में आज 21 जिलों में आंधी-बारिश और ओलों की चेतावनी, 30 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं
भोपाल। मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच पिछले दो दिनों से प्रदेश के आधे से अधिक जिले आंधी, बारिश और ओलावृष्टि की चपेट में हैं। मौसम विभाग ने शनिवार को ग्वालियर सहित 21 जिलों में बारिश और तेज आंधी की चेतावनी जारी की है। इस दौरान 30 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है।पिछले दो दिनों में प्रदेश के करीब 35 जिलों में कहीं न कहीं बारिश, आंधी या ओले गिर चुके हैं, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। शुक्रवार को भी कई जिलों में मौसम खराब रहा। आज जिन जिलों में मौसम का असर देखने को मिल सकता है, उनमें ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, मैहर, जबलपुर, सिवनी, मंडला, बालाघाट, डिंडौरी, अनूपपुर, गुना, अशोकनगर, नीमच और मंदसौर शामिल हैं।
वहीं दूसरी ओर भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, अलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, रतलाम, सागर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, कटनी, उमरिया, शहडोल, रीवा, मऊगंज, सीधी, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा और सिंगरौली में गर्मी का असर बना रहेगा। हालांकि कुछ इलाकों में दोपहर बाद मौसम बदल सकता है, खासकर भोपाल, नर्मदापुरम, रीवा और शहडोल संभाग में।
शुक्रवार को जबलपुर और दमोह में बारिश दर्ज की गई। वहीं खंडवा प्रदेश का सबसे गर्म जिला रहा, जहां तापमान 43.1 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। नरसिंहपुर में 42.2 डिग्री, रतलाम में 41.2 डिग्री, टीकमगढ़ में 41 डिग्री, बैतूल में 40.8 डिग्री, गुना में 40.4 डिग्री, जबकि शाजापुर, दमोह और सागर में 40.2 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया। श्योपुर में पारा 40 डिग्री दर्ज हुआ। अगर बड़े शहरों की बात करें तो उज्जैन में तापमान 40.5 डिग्री के साथ सबसे अधिक रहा। भोपाल में 39.8 डिग्री, इंदौर में 39.4 डिग्री, ग्वालियर में 37.4 डिग्री और जबलपुर में 38 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया।
आमतौर पर मई महीने की शुरुआत तेज गर्मी के साथ होती है, लेकिन इस बार मौसम का रुख बदला हुआ है और महीने की शुरुआत आंधी-बारिश से हुई है। मौसम विभाग के अनुसार, यह स्थिति 5 मई तक बनी रह सकती है। मौसम में इस बदलाव की वजह साइक्लोनिक सर्कुलेशन और हिमालयी क्षेत्र में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ है। इन सिस्टम्स के चलते प्रदेश में आगे भी आंधी और बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।
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MP: मऊगंज में अश्लील वीडियो बनाकर पूर्व जनपद उपाध्यक्ष से मांगे 5 लाख…आरोपी दंपति गिरफ्तार
मऊगंज। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मऊगंज जिले (Mauganj district) में पूर्व जनपद उपाध्यक्ष विनोद मिश्रा का अश्लील वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल (Blackmail) करने वाले पति और पत्नी को पुलिस ने ओडिशा (Odisha) से गिरफ्तार कर लिया है। पीड़ित की शिकायत के बाद पुलिस हनी ट्रैप का मामला दर्ज करते हुए साइबर सेल की मदद से उनके ठिकाने तक पहुंची, और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। महिला और उसका पति मऊगंज में रेस्टोरेंट और कैफे चलाते थे। यहां पर उन्होंने पूर्व जनपद उपाध्यक्ष को अपना शिकार बनाया था, फिर उन्हें ब्लैकमेल कर 5 लाख रुपए की मांग कर रहे थे।आरोपी रुची और उसका पति मऊगंज में रुचि रेस्टोरेंट और कैफे चलाते थे। पुलिस के मुताबिक पूर्व जनपद उपाध्यक्ष विनोद मिश्रा को, पहले चाय पर बुलाकर नशीला चीज पिलाई गई, और फिर स्पाई कैमरे से अश्लील वीडियो रिकॉर्ड कर लिया गया। उसके बाद उन्हें ब्लैकमेल किया जाने लगा, और उनसे 5 लाख रुपए की मांग की गई। जब उन्होंने पैसे नहीं दिए तो वीडियो सोशल मीडिया में वायरल कर दिया गया।
हनीट्रैप का केस
मामला सामने आने के बाद पुलिस ने हनी ट्रैप का मामला दर्ज कर लिया। वीडियो वायरल होने के बाद मामले को तूल पकड़ता देख दोनों पति पत्नी, मऊगंज से फरार हो गए थे। पुलिस से बचने के लिए दोनों अपने ठिकाने बदल रहे थे। पुलिस साइबर सेल की मदद से दोनों आरोपियों को, ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले से गिरफ्तार कर मऊगंज ले आई है।गिरफ्तारी के बाद आरोपियों के मोबाइल से शुरुआती जांच में कई चैट के साथ फोटो और वीडियो भी मिले हैं। पुलिस अब इस पूरे मामले की गहराई से जांच में जुटी हुई है, और दोनों से पूछताछ कर पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस तरह से और कितने लोगों को इन्होंने अपना शिकार बनाया है। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया है, जहां से उनकी रिमांड लेने का पुलिस प्रयास कर रही है, जिससे आरोपियों से अच्छे से पूछताछ हो सके।
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सीहोर के बाबरी घाट पर जान जोखिम में: ओवरलोड नावों में ट्रैक्टर-कार तक ढोए जा रहे, सुरक्षा नियमों की अनदेखी
नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के बाबरी घाट पर नाव संचालन में गंभीर लापरवाही सामने आई है, जहां सुरक्षा नियमों को दरकिनार कर ओवरलोड नावों में यात्रियों के साथ-साथ ट्रैक्टर, कार और मोटरसाइकिल तक को नदी पार कराया जा रहा है।स्थानीय लोगों के अनुसार नावों में तय क्षमता से कई गुना अधिक यात्री बैठाए जा रहे हैं, लेकिन न तो लाइफ जैकेट उपलब्ध हैं और न ही आपात स्थिति के लिए कोई गोताखोर तैनात हैं। इससे हादसे की आशंका लगातार बनी हुई है।हाल ही में जबलपुर के बरगी डैम क्रूज हादसे के बाद भी यहां हालात में कोई सुधार नहीं देखा गया है। नियमों के मुताबिक मोटर चालित नावों में फायर एक्सटिंगुइशर, चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा उपकरण अनिवार्य हैं, लेकिन बाबरी घाट पर ये सभी व्यवस्थाएं नदारद हैं।नाव यात्री राजीव पटेल ने बताया कि ओवरलोड नावों में यात्रा करना बेहद जोखिम भरा है, लेकिन मजबूरी में लोगों को ऐसा करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ठेकेदार की मनमानी और प्रशासनिक ढिलाई के कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।स्थिति को देखते हुए भेरुंदा एसडीएम सुधीर कुशवाह ने घाट का निरीक्षण किया और ठेकेदार को सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी यात्रियों के लिए लाइफ जैकेट अनिवार्य होंगे और नावों की नियमित तकनीकी जांच की जाएगी। केवल प्रशिक्षित नाविकों को ही संचालन की अनुमति दी जाएगी।
एसडीएम ने यह भी निर्देश दिए कि घाट पर चेतावनी संकेतक, सुरक्षा बैरिकेडिंग और सूचना पट्ट लगाए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नियमों का पालन नहीं किया गया तो संबंधित ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
