Category: Madhya Pradesh

  • जमीन को लेकर खूनी संघर्ष: हरदा में वृद्ध की हत्या, परिजनों में हिंसक झड़प और छह घायल

    जमीन को लेकर खूनी संघर्ष: हरदा में वृद्ध की हत्या, परिजनों में हिंसक झड़प और छह घायल


    हरदा । हरदा जिले के सिराली थाना क्षेत्र के दीपगांव कला में बुधवार सुबह एक पुराना जमीनी विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया। जानकारी के अनुसार यह झगड़ा मामा-बुआ के परिवारों के बीच लंबे समय से चला आ रहा था, जो अचानक उग्र रूप ले लिया।

    इस घटना में 65 वर्षीय अमरसिंह कलम की मौके पर ही मौत हो गई। संघर्ष के दौरान दोनों पक्षों ने लाठी-डंडों और पत्थरों का इस्तेमाल किया। इस झड़प में मृतक के भाई सूरत सिंह सहित रामभरोस, आनंद सिंह, हरिसिंह, सतीश राजपूत और दूसरे पक्ष के नारायण राजपूत भी घायल हो गए।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और स्थिति को काबू में किया। घायल लोगों को सिराली के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से तीन गंभीर रूप से घायल लोगों को जिला अस्पताल हरदा रेफर किया गया।

    पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में यह साफ हो गया है कि जमीनी विवाद इस खूनी झड़प का मुख्य कारण था। स्थानीय लोग और परिवार वाले अब भी इस घटना को लेकर तनाव में हैं और प्रशासन ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी है।

  • MP में गेहूं खरीदी फिर टली: बारदाने की कमी से 10 अप्रैल तक बढ़ी तारीख, किसानों की बढ़ी चिंता

    MP में गेहूं खरीदी फिर टली: बारदाने की कमी से 10 अप्रैल तक बढ़ी तारीख, किसानों की बढ़ी चिंता


    भोपाल। मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी एक बार फिर टाल दी गई है, जिससे किसानों की परेशानियां बढ़ गई हैं। पहले 16 मार्च से शुरू होने वाली खरीदी को 1 अप्रैल तक बढ़ाया गया था, लेकिन अब इसे आगे बढ़ाकर 10 अप्रैल कर दिया गया है। इस देरी के पीछे सबसे बड़ी वजह बारदाने (पीपी और एचडीपीपी बैग) की भारी कमी बताई जा रही है। ये बैग पेट्रोलियम उत्पादों से तैयार होते हैं और गेहूं के भंडारण के लिए बेहद जरूरी होते हैं।

    जानकारी के अनुसार, ईरान में चल रहे संघर्ष के कारण पेट्रोलियम सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे इन बैग्स का उत्पादन और आपूर्ति बाधित हो गई है। इसका सीधा असर गेहूं खरीदी प्रक्रिया पर पड़ा है। सीहोर जिले के किसान, जो अपने शरबती गेहूं के लिए प्रसिद्ध हैं, इस स्थिति से सबसे अधिक प्रभावित हैं। रफीकगंज के किसान अवध नारायण का कहना है कि उन्होंने 20 एकड़ में गेहूं की खेती की है। पिछले साल इस समय तक खरीदी और भुगतान दोनों हो चुके थे, लेकिन इस बार फसल कटने के बाद भी खेतों में पड़ी है, जिससे भंडारण की समस्या बढ़ रही है। वहीं किसान नरेश परमार बताते हैं कि फसल कटे करीब एक महीना हो चुका है, लेकिन खरीदी में देरी के कारण उन्हें रोज खेतों की निगरानी करनी पड़ रही है।

    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस साल गेहूं खरीदी के लिए करीब 15.60 करोड़ बारदानों की जरूरत है, जबकि अभी केवल 5.50 करोड़ बारदाने ही उपलब्ध हैं। यानी लगभग 10 करोड़ से ज्यादा की कमी बनी हुई है। वेयरहाउस संचालकों के अनुसार, इस बार जूट और पीपी दोनों तरह के बैग समय पर नहीं मिल पाए, जिससे पूरी व्यवस्था प्रभावित हो गई है।

    हालांकि सरकार ने बारदाने की आपूर्ति के लिए टेंडर जारी कर दिए हैं और जल्द स्थिति सामान्य होने का भरोसा दिलाया है। दूसरी ओर, विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए तैयारी में लापरवाही का आरोप लगाया है। कांग्रेस नेता कुणाल चौधरी ने सवाल उठाया कि जब हर साल मार्च में खरीदी होती है, तो पहले से पर्याप्त तैयारी क्यों नहीं की गई। इस पूरी स्थिति का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ रहा है, जिन्होंने कर्ज लेकर फसल तैयार की है और अब बिक्री में देरी के चलते आर्थिक दबाव झेल रहे हैं।

  • एमपी में 15 अप्रैल के बाद पड़ेगी तेज गर्मी, शुरुआती दिनों में आंधी-बारिश का अलर्ट

    एमपी में 15 अप्रैल के बाद पड़ेगी तेज गर्मी, शुरुआती दिनों में आंधी-बारिश का अलर्ट

    भोपाल। मध्य प्रदेश में मौसम का मिजाज तेजी से बदलने वाला है। जहां अप्रैल की शुरुआत आंधी और बारिश के साथ होगी, वहीं 15 अप्रैल के बाद भीषण गर्मी का दौर शुरू हो जाएगा। खासतौर पर ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में सबसे ज्यादा तापमान बढ़ने की संभावना है। इसके अलावा इंदौर, भोपाल, उज्जैन और सागर संभाग भी गर्मी की चपेट में रहेंगे।

    मौसम विभाग ने 1 से 4 अप्रैल तक प्रदेश के करीब आधे हिस्से में आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया है। बुधवार को इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर समेत 29 जिलों में मौसम बिगड़ने की चेतावनी दी गई है। अगले 24 घंटों में ग्वालियर, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर, आगर-मालवा, राजगढ़, शाजापुर, सीहोर, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, इंदौर, उज्जैन, रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर, धार और बड़वानी जिलों में मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।

    पिछले दो दिनों से पूरे प्रदेश में मौसम का असर बना हुआ है। 12 जिलों में ओलावृष्टि हुई, जबकि 41 से अधिक जिलों में आंधी और बारिश दर्ज की गई। मंगलवार को धार जिले के कुक्षी और मनावर में ओले गिरे, वहीं रात के समय भी कई इलाकों में मौसम बदला रहा। हालांकि इन सबके बीच गर्मी का असर भी लगातार बना हुआ है। नर्मदापुरम में तापमान 40.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। खजुराहो में 39.2 डिग्री, रतलाम और नौगांव में 39 डिग्री, दमोह में 39.1 डिग्री और खरगोन, रायसेन व उमरिया में 38 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। प्रदेश के प्रमुख शहरों की बात करें तो भोपाल और जबलपुर में 37 डिग्री, इंदौर और ग्वालियर में 36.6 डिग्री तथा उज्जैन में 36 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, वर्तमान में प्रदेश में साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ सक्रिय हैं। इसके साथ ही 2 अप्रैल से वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर भी देखने को मिलेगा, जिससे 4 अप्रैल तक कहीं आंधी तो कहीं बारिश होने की संभावना है। इसके बाद मौसम साफ होते ही गर्मी तेजी से बढ़ेगी। अप्रैल के दूसरे सप्ताह से तापमान में तेज उछाल आएगा, जबकि महीने के आखिरी सप्ताह में ग्वालियर, धार, खरगोन, बड़वानी और नौगांव-खजुराहो जैसे क्षेत्रों में तापमान 44 से 45 डिग्री तक पहुंच सकता है। दतिया, मुरैना, श्योपुर, बड़वानी, खरगोन और धार में भी तापमान में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। आमतौर पर अप्रैल में प्रदेश के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों में गर्म हवाएं चलती हैं, जो भीषण गर्मी का कारण बनती हैं।

  • आईपीएल की तर्ज पर एमपीएल की नीलामी, सबसे महंगे 15 लाख में बिके आशुतोष शर्मा

    आईपीएल की तर्ज पर एमपीएल की नीलामी, सबसे महंगे 15 लाख में बिके आशुतोष शर्मा


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश प्रीमियर लीग (एमपीएल) के आगामी सीजन के लिए मंगलवार को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में खिलाड़ियों की नीलामी हुई। आईपीएल की दर्ज पर हुई इस नीलामी में आशुतोष शर्मा सबसे महंगे खिलाड़ी रहे। उन्हें मालवा स्टेलियंस ने 15 लाख रुपये में खरीदा है।

    वहीं, दूसरे नंबर पर अक्षत रघुवंशी हैं, जिन्हें रीवा जगुआर ने 13.80 लाख रुपये कीमत पर अपनी टीम में शामिल किया। तीसरी सबसे बड़ी बोली अनिकेत वर्मा को मिली। अनिकेत को भोपाल लेपर्ड्स ने 13 लाख 20 हजार रुपये में खरीदा। शिवांग कुमार को बुंदेलखंड बुल्स ने 13 लाख कीमत देकर अपनी टीम में शामिल किया है। वहीं, आवेश खान को चंबल घड़ियाल ने 8.20 लाख और शिवम शुक्ला को इंदौर पिंक पैंथर ने 6.60 लाख रुपये में खरीदा है।

    इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में ऑक्शनियर चारू शर्मा ने नीलामी की प्रक्रिया शुरू की। नीलामी में मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष महानआर्यमान सिंधिया भी मौजूद रहे। इस नीलामी में सबसे पहले फ्रेंचाइजी टीमों की जानकारी दी गई। बताया गया कि पिछले संस्करण की सात टीमों ने अपने एक-एक आईकॉन खिलाड़ी को रिटेन किया है। इनमें सबसे महंगे वेंकटेश अय्यर हैं, जिन्हें पिंक पैंथर्स टीम ने 12 लाख 50 हजार रुपये में रिटेन किया। वे आरसीबी में रजत पाटीदार की कप्तानी में खेलते हैं, लेकिन रजत को ग्वालियर चीताज ने सात लाख रुपये में रिटेन किया है। उनसे महंगे अरशद खान हैं, जिन्हें भोपाल लेपर्ड्स ने आठ लाख रुपये में रिटेन किया है।

    नीलामी में कुमार कार्तिकेय को 10.20 लाख रुपये में रॉयल निमाड़ ईगल्स, मंगेश यादव को 12 लाख रुपये में ग्वालियर चीताज, उज्जैन फाल्कन ने माधव तिवारी को 10.60 लाख, रॉयल निमाड़ ईगल्स ने सारांश जैन को 9.60 लाख और रीवा के कुलदीप सेन को 7 लाख में बुंदेलखंड बुल्स ने खरीदा।


    हर फ्रेंचाइजी को 50 लाख रुपए का पर्स

    एमपीएल की इस नीलामी में शामिल सभी फ्रेंचाइजी को खिलाड़ियों की खरीद के लिए 50 लाख रुपए का पर्स आवंटित किया गया था। इस नीलामी प्रक्रिया में कुल 244 खिलाड़ियों ने अपनी किस्मत आजमाई। टूर्नामेंट के शेड्यूल की बात करें तो जून 2026 में इसके मुकाबले इंदौर और ग्वालियर के मैदानों पर खेले जाएंगे। क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह टूर्नामेंट प्रदेश के बेहतरीन टेलेंट को देखने का एक बड़ा मंच साबित होगा।


    उम्र सीमा के लिए बीसीसीआई ने बनाई नीति

    इस बार एमपीएल में खिलाड़ियों की उम्र को लेकर एक महत्वपूर्ण नियम लागू किया गया है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए, 19 वर्ष से कम उम्र के खिलाड़ियों को इस टी-20 टूर्नामेंट में खेलने की अनुमति नहीं दी गई है। बोर्ड की नीति के अनुसार, छोटी उम्र के खिलाड़ियों के लिए टी-20 प्रारूप को हतोत्साहित किया जाता है ताकि वे रेड बॉल क्रिकेट यानी टेस्ट और प्रथम श्रेणी मैचों जैसे लंबे प्रारूपों के प्रति अधिक गंभीर और केंद्रित रह सकें।

  • मप्रः मुख्यमंत्री डॉ. यादव की घोषणा का 24 घंटे में हुआ पालन

    मप्रः मुख्यमंत्री डॉ. यादव की घोषणा का 24 घंटे में हुआ पालन


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की एक दिन पूर्व की गई घोषणा का 24 घंटे में पालन हुआ है। वित्त विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई 375 करोड़ रुपये की राशि मंगलवार को ही एमएसएमई विभाग ने 600 से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम इकाइयों के खातों में प्रोत्साहन तथा अनुदान राशि अंतरित भी कर दी है।

    उल्लेखनीय है कि सोमवार को मुख्यमंत्री आवास में संपन्न हुए कार्यक्रम में 250 इकाइयों को 169 करोड़ 57 लाख की राशि अंतरित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ यादव ने शेष इकाइयों से वायदा किया था कि उन्हें भी जल्दी ही मदद की जाएगी। एमएसएमई मंत्री चेतन्य कुमार काश्यप ने विभाग और उद्यमियों की ओर से मुख्यमंत्री की सहृदयता के लिए आभार व्यक्त किया है।

    उल्लेखनीय है कि सर्वाधिक रोजगार सृजन के सशक्त माध्यम एमएसएमई के लिए मुख्यमंत्री डॉ यादव द्वारा प्रदेश में निवेश एवं उद्यम का जाल बिछाने की संभावनाओं में वृद्धि करने के उद्देश्य से एमएसएमई विकास नीति 2025 लागू की है। नीति में निवेशकों को विभिन्न सुविधाओं का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने तय किया है कि निवेशकों को स्वीकृत सुविधाओं का समयावधि में वितरण हर हाल में सुनिश्चित किया जाए।

    उद्योग आयुक्त दिलीप कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ यादव के निर्देश एवं विशेष प्रयासों से वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन इकाइयों की लंबित देयताओं के भुगतान के लिए वित्त विभाग द्वारा समुचित बजट आवंटन विभाग को उपलब्ध कराया गया। एमएसएमई इकाइयों को स्वीकृत सुविधाओं के वितरण की निरंतरता में 31 मार्च मंगलवार को 600 से अधिक इकाइयों को राशि रु. 375 करोड़ से अधिक की राशि वितरित की गयी। वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन इतनी बड़ी मात्रा में अनुदान राशि वितरण होने पर निवेशकों में उत्साह एवं प्रदेश की नीतियों के प्रति विश्वास और प्रबल हुआ है।

    एमएसएमई मंत्री चेतन्य काश्यप ने एमएसएमई इकाइयों को उनकी स्वीकृत सुविधाओं के समयावधि में वितरण के लिए मुख्यमंत्री का का आभार व्यक्त किया है। एमएसएमई जगत के उद्यमियों एवं संघो द्वारा भी उक्त पहल पर हर्ष व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त किया गया है। उन्होंने कहा है कि शासन की इस पहल से न केवल स्थापित एमएसएमई इकाई निरंतर प्रगति कर रही हैं अपितु देश एवं विदेश के निवेशक भी प्रदेश में नए निवेश के लिए आकर्षित हो रहे हैं।

  • एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन ने दोनों राज्यों के साझा विकास व सांस्कृतिक समन्वय को दी नई दिशा :मोहन यादव

    एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन ने दोनों राज्यों के साझा विकास व सांस्कृतिक समन्वय को दी नई दिशा :मोहन यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि काशी विश्वनाथ की पावन नगरी वाराणसी में एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन का मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के लिए सौभाग्य का विषय है। इस आयोजन ने निर्यात सहयोग, सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक पर्यटन को नई दी है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को सम्मेलन के बाद वाराणसी में मीडिया से संवाद कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन मुख्यतः एक जिला-एक उत्पाद, जीआई टैग उत्पादों, निर्यात योग्य उत्पादों, पारंपरिक शिल्प और क्षेत्रीय विशेषताओं को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने पर केंद्रित रहा। दोनों राज्यों के विशिष्ट उत्पादों को प्रोत्साहन देते हुए उनके ब्रांडिंग, विपणन एवं निर्यात को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया। औद्योगिक सहयोग, निवेश संवर्धन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान एवं पर्यटन विकास को नई गति प्रदान करने के उद्देश्य से विचार-विमर्श हुआ।

    उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों ने परस्पर समन्वय और सहयोग से समृद्धि और विकास की दिशा में लंबी छलांग लगाने का संकल्प लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस सम्मेलन की सफलता के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार माना तथा उत्तर प्रदेश के मंत्रीद्वय नंद गोपाल गुप्ता “नंदी” तथा राकेश सचान को धन्यवाद दिया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण का दोनों राज्यों से अटूट संबंध है। भगवान श्रीराम ने अवतार के बाद जहां वनवास का लंबा समय मध्य प्रदेश के क्षेत्रों में गुजारा। भगवान भी मथुरा के बाद श्रीकृष्ण शिक्षा ग्रहण करने उज्जैन पधारे। इसके साथ ही मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा पर धार्मिक आस्था के कई केन्द्र विद्यमान हैं। धार्मिक आस्था की इस समानता को देखते हुए दोनों राज्यों के बीच धार्मिक सर्किट विकसित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा।


    विभिन्न औद्योगिक संगठनों एवं व्यापारिक संस्थाओं की रही सहभागिता

    उन्होंने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य ओडीओपी, जीआई टैग, शिल्प, कृषि एवं फूड उत्पादकों, उद्योग जगत, निवेशकों, शिल्पकारों एवं नीति-निर्माताओं को एक वृहद एवं साझा मंच प्रदान करना था। कार्यक्रम में कुल लगभग 400 प्रतिभागियों की उपस्थिति रही। विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिभागियों की व्यापक सहभागिता ने कार्यक्रम को संवाद, सहयोग एवं अनुभवों की साझेदारी का एक सशक्त एवं प्रभावी मंच बनाया।

    सम्मेलन में कारीगरों, उद्यमियों और निर्यातकों को प्रत्यक्ष संवाद का मिला अवसर
    मुख्यमंत्री ने कहा विशुद्ध रूप से ओडीओपी उत्पादों के एक्सचेंज और आपसी सीख (Exchange & Learning Platform) के लिए अभिकल्पित किया गया था, जहां दोनों राज्यों के कारीगरों, उद्यमियों और निर्यातकों को प्रत्यक्ष संवाद का अवसर मिला। कार्यक्रम ओडीओपी एक्सचेंज आधारित प्रदर्शनी, राज्यों के बीच सहयोग, साझा ब्रांडिंग, संयुक्त निर्यात और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभरा।


    महत्वपूर्ण एमओयू हुए हस्ताक्षरित

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि सम्मेलन में मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश सरकार के बीच दो महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर हुए। पहला एमओयू श्री काशी विश्वनाथ विशिष्ट क्षेत्र विकास प्राधिकरण एवं श्री महाकाल मंदिर प्रबंधन समिति के मध्य हुआ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के अंतर्गत वाराणसी और उज्जैन में हुए विकास कार्यों से दोनों स्थानों पर धार्मिक पर्यटन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। इसके परिणामस्वरूप दोनों शहरों की अर्थव्यवस्था में बदलाव आया है। इन समानताओं को देखते हुए बाबा विश्वनाथ और महाकाल मंदिर के प्रबंधन से संबंधित अनुभवों को साझा करने के उद्देश्य से यह एमओयू किया गया है। दूसरा एमओयू वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट की पहल को मजबूत करने, स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने तथा अंतर्राज्यीय सहयोग के माध्यम से आर्थिक विकास को गति प्रदान करने के उद्देश्य से किया गया।


    विशेष प्रदर्शनी का आयोजन

    मुख्यमंत्री ने बताया कि सम्मेलन में ओडीओपी उत्पादों पर एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया। प्रदर्शनी में मध्य प्रदेश के 14 और उत्तर प्रदेश के 07 जिलों के वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP)” उत्पादों का प्रदर्शन किया। प्रदर्शनी में दोनों राज्यों के प्रदर्शकों द्वारा हस्तशिल्प, वस्त्र, खाय उत्पाद, जीआई टैग उत्पाद एवं अन्य स्थानीय विशिष्ट उत्पाद प्रदर्शित किए गए।


    सम्मेलन में दो समानांतर सत्रों का आयोजन

    उन्होंने बताया कि सम्मेलन में दो समानांतर सत्रों का आयोजन भी किया गया। जॉइंट आर्टिजन वर्कशॉप सम्मेलन में मध्य प्रदेश के चंदेरी एवं महेश्वरी ब्रांड के कारीगरों ने उत्तर प्रदेश के बनारसी सिल्क कारीगरों के साथ प्रत्यक्ष संवाद किया। पारंपरिक बुनकरी तकनीकों, डिज़ाइन नवाचारों साझा ब्रांडिंग रणनीतियों और संयुक्त खरीदार पहुंच, उन्नत पैकेजिंग, गुणवत्ता मानकों एवं निर्यात-उन्मुख उत्पाद विकास पर विचार-विमर्श किया गया। दूसरा समानांतर सत्र टूरिज्म राउंड टेबल सम्मेलन रहा। इसमें उत्तर प्रदेश एवं मध्यप्रदेश के पर्यटन विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, प्रमुख दूर ऑपरेटर्स तथा आईआरसीटीसी के प्रतिनिधियों ने सक्रिय सहभागिता की। यह पहल दोनों राज्यों में धार्मिक पर्यटन को संगठित करने, पर्यटक अनुभव को बेहतर बनाने तथा स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को सशक्त करने की दिशा में प्रभावी सिद्ध हुई।


    काशी विश्वनाथ धाम में महानाट्य विक्रमादित्य का 3, 4 और 5 अप्रैल को मंचन

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग और विक्रमादित्य शोध संस्थान का प्रयास है कि सम्राट विक्रमादित्य के जीवन से जुड़े विविध पहलु तथा उनका विराट व्यक्तित्व पूरे देश के लोगों के सामने आए। इस उद्देश्य से काशी विश्वनाथ धाम में महानाट्य विक्रमादित्य का 3, 4 और 5 अप्रैल को मंचन किया जा रहा है। इस नाट्य से विक्रमादित्य की न्यायप्रियता, दयालुता, सुशासन और लोकतंत्र के प्रति उनकी गहरी आस्था बेहतर तरीके से सबके सामने आएगी। नाटक में हाथी, घोड़े, ऊंट और पालकी शामिल होंगी। इस नाटक में 300 से 400 कलाकार सम्राट विक्रमादित्य के तत्कालीन समय को जीवंत करेंगे। इस आयोजन में उत्तर प्रदेश सरकार का पूर्ण सहयोग हमें प्राप्त हो रहा है।

    दोनों राज्य सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी संयुक्त रूप से कार्य करने की ओर अग्रसर
    मुख्यमंत्री ने कहा कि केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना दोनों राज्यों में सिंचाई, पेयजल और औद्योगिक गतिविधियों को जल उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी संयुक्त रूप से कार्य करने की ओर अग्रसर हैं।


    सम्मेलन सांस्कृतिक समन्वय का एक प्रभावशाली मंच बना

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन दोनों राज्यों के लिए विकास और सांस्कृतिक समन्वय का एक प्रभावशाली मंच बना। इस सम्मेलन ने मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच आपसी सहयोग को सुदृढ़ किया। इस पहल ने निवेश आकर्षण, रोजगार के नए अवसरों के सृजन, पारंपरिक शिल्पों के संरक्षण, निर्यात संवर्धन और पर्यटन विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश क्षेत्रीय संतुलित विकास को सशक्त करते हुए आर्थिक प्रगति के नए आयाम स्थापित करने की ओर अग्रसर होंगे।


    महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ की तैयारियों का निरीक्षण

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वाराणसी स्थित बीएलडब्ल्यू मैदान पहुँचकर आगामी 3 से 5 अप्रैल तक आयोजित होने वाले भव्य महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ की तैयारियों का सूक्ष्म निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने आयोजन स्थल की व्यवस्थाओं, मंच सज्जा और दर्शकों की सुविधाओं का जायजा लेते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। न्याय और शौर्य के प्रतीक महाराजा विक्रमादित्य के कालजयी इतिहास को जीवंत करने वाला यह आयोजन न केवल कला का उत्कृष्ट संगम है, बल्कि हमारी गौरवशाली विरासत के पुनरुद्धार का एक सशक्त माध्यम भी है।

  • कृषि बजट में 90 हजार करोड़ का प्रावधान, किसानों के कल्याण के लिए समर्पित है सरकार : उप मुख्यमंत्री देवड़ा

    कृषि बजट में 90 हजार करोड़ का प्रावधान, किसानों के कल्याण के लिए समर्पित है सरकार : उप मुख्यमंत्री देवड़ा


    भोपाल ।
    मध्य प्रदेश में वर्ष 2026 को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाते हुए राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में कृषि क्षेत्र के लिए 90 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जो किसानों के कल्याण और कृषि विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

    उपमुख्यमंत्री देवड़ा मंगलवार को नीमच जिले के जावद में मंडी प्रांगण में आयोजित चार दिवसीय जहर मुक्त जीरो बजट कृषि प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार पूरे वर्ष कृषि और किसानों से जुड़े कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को आधुनिक तकनीकों और नई पद्धतियों से जोड़ने का प्रयास कर रही है।उपमुख्यमंत्रीदेवड़ा ने किसानों से आह्वान किया कि प्रशिक्षण शिविर में उन्होंने जो भी नई तकनीकें और अनुभव प्राप्त किए हैं, उन्हें अपनी खेती में लागू करें ताकि उत्पादन बढ़ाने के साथ लागत को कम किया जा सके। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक और कम लागत वाली खेती की दिशा में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं।

    उपमुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार किसानों के हित में अनेक योजनाएं संचालित कर रही हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि आयुष्मान भारत के माध्यम से गरीब परिवारों को 5 लाख रुपये तक के नि:शुल्क उपचार की सुविधा मिल रही है, वहीं प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के जरिए किसानों के खातों में सीधे आर्थिक सहायता पहुंचाई जा रही है।

    देवड़ा ने कहा कि यदि हर व्यक्ति अपने-अपने क्षेत्र में पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करे तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का वर्ष 2047 तक विकसित भारत का सपना अवश्य साकार होगा। उन्होंने प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल आयोजन की सराहना करते हुए किसानों को आधुनिक तकनीक और ज्ञान के साथ खेती को और अधिक समृद्ध बनाने का संदेश दिया। समारोह में बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। इस अवसर पर विधायक ओमप्रकाश सखलेचा, दिलीप सिंह परिहार, अनिरूद्ध मारू सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

  • मप्र विस अध्यक्ष ने 2047 के विकसित भारत के लिए युवा विधायकों को दिलाए पांच संकल्प

    मप्र विस अध्यक्ष ने 2047 के विकसित भारत के लिए युवा विधायकों को दिलाए पांच संकल्प


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश विधान सभा के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि विकसित भारत 2047 का सपना तभी साकार हो सकता है, जब हमारे युवा विधायक अपने कर्तव्यों का निष्ठा और दूरदर्शिता के साथ पालन करें। इस तथ्य को रेखांकित करते हुए मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के दो दिवसीय युवा विधायक सम्मेलन (राष्ट्रकुल संसदीय संघ भारत क्षेत्र जोन-6) के अंतिम सत्र में मंगलवार को विस अध्यक्ष ने युवा विधायकों को पांच संकल्प दिलाए।

    विधान सभा अध्यक्ष तोमर ने युवा विधायकों को संकल्प दिलाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विकसित भारत 2047 का विजन केवल सरकार का नहीं बल्कि 140 करोड़ भारतीयों का संकल्प है। इस संकल्प को पूरा करने के लिए नागरिकों की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। सम्मेलन में लोकतंत्र में नागरिकों की भागीदारी एवं विकसित भारत 2047 में विधायकों की भूमिका पर विचार व्यक्त किये गये। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 की परिकल्पना को साकार करने के लिए युवा विधायकों को समसामयिक परिस्थितियों में देश के प्रति समर्पण भाव से कार्य करना होगा। नेतृत्व विकास के लिए सकारात्मक सोच और अनुशासन से कार्य करना होगा।

    उन्होंने कहा कि युवा विधायक चुनौतियों का समाधान कर अपनी नेतृत्व क्षमता का नवाचार में उपयोग करें। युवा नेतृत्व समाज की सोच में परिवर्तन ला सकता है। सुशासन के क्षेत्र में प्रयास हों और विकास को जनआंदोलन बनाया जाये। लोकतंत्र की मजबूती के लिए नागरिकों का जागरूक होना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि युवा विधायकों ने टेक्नोलॉजी, स्वच्छता, सोलर एनर्जी, शिक्षा गुणवत्ता, अधोसंरचना, जनसंवाद और जनकल्याण पर विचार व्यक्त किए हैं। उन्होंने युवा विधायकों को सीख दी कि अध्ययन का विशेष महत्व होता है और विद्यार्थी भाव सदैव बना रहना चाहिए।


    युवा विधायकों के पांच संकल्प

    संकल्प–1: हम, युवा विधायक सम्मेलन में यह दृढ संकल्प लेते है कि लोकतंत्र की सशक्तता का मूल आधार नागरिकों की सक्रिय भागीदारी है। अत: एक मजबूत और समावेशी लोकतंत्र के निर्माण में हम युवा विधायक महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करेंगे।

    संकल्प–2: हम, युवा विधायक समाज की नई ऊर्जा, नवाचार और परिवर्तन की सोच का प्रतिनिधित्व करते हुये नागरिकों और शासन के बीच सेतु का कार्य करेगे, हम जनसरोकारों को समझकर आम जनता की समस्याओं को विधानसभा तक पहुँचायेंगे तथा पारदर्शी, जवाबदेह और जनहितकारी नीतियों के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभायेंगे ताकि लोकतांत्रिक संस्थायें जनता के प्रति उत्तरदायी हो सके।

    संकल्प–3: हम, नागरिकों को जागरूक और सशक्त बनाने हेतु सतत्/सार्थक प्रयास करेंगे ताकि वे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भाग लें. तकनीक और नवाचार का उपयोग कर शासन को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और पर्यावरण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में दीर्घकालिक नीतियाँ बनाने एवं युवाओं, महिलाओं और वंचित वर्गों की आवाज़ को सशक्त बनाने हेतु सक्रिय भूमिका निभायेंगे जिससे जनता और उनकी विधायिकाओं के बीच प्रभावी संपर्क स्थापित हो सके तथा सार्थक सहभागी शासन सुनिश्चित किया जा सके।

    संकल्प–4: हम युवा विधायक, राजनीतिक दबाव, संसाधनों की कमी, सामाजिक असमानताएँ और बदलती वैश्विक परिस्थितियों का सामना करते हुये ईमानदारी, प्रतिबद्धता और दूरदर्शिता के साथ कार्य करने के लिये दृढ संकल्पित रहेंगे, ताकि हमारे राष्ट्र की लोकतांत्रिक परम्परायें और मूल्य और अधिक गहरे तथा सशक्त बन सके।

    संकल्प–5: हम यह भी संकल्प लेते हैं कि हम स्वयं भी एक जागरूक नागरिक बनेंगे, विधायिकाओं में होने वाली बहसों और चर्चाओं में जनप्रतिनिधियों की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु शोध एवं अनुसंधान सहायता को सुदृढ करेंगे. लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सक्रिय भागीदारी निभाएँगे और ऐसे नेतृत्व का समर्थन करेंगे जो देश को विकसित भारत 2047 की दिशा में आगे बढ़ाए।

  • जनता की समस्याओं पर त्वरित कार्रवाई: कलेक्टर बोले- लापरवाही बर्दाश्त नहीं

    जनता की समस्याओं पर त्वरित कार्रवाई: कलेक्टर बोले- लापरवाही बर्दाश्त नहीं


    बैतूल । मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया कि आम जनता से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि शिकायतों के निराकरण में ढिलाई पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें निलंबन जैसे कदम भी शामिल हैं।

    मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित इस जनसुनवाई में बड़ी संख्या में नागरिक अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। कलेक्टर ने स्वयं सभी आवेदनों को गंभीरता से सुना और कई मामलों का मौके पर ही समाधान कराया। जिन प्रकरणों का तत्काल निराकरण संभव नहीं था, उनके लिए स्पष्ट समय-सीमा तय की गई, ताकि शिकायतों का जल्द निपटारा हो सके।

    इस जनसुनवाई में कुल 83 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें सबसे अधिक मामले राजस्व, अतिक्रमण, रास्ते के विवाद और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़े थे। कलेक्टर ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे प्राथमिकता के आधार पर इन मामलों का समाधान सुनिश्चित करें और लंबित प्रकरणों की नियमित समीक्षा करें।

    जनसुनवाई के दौरान कुछ मामलों में लापरवाही सामने आने पर कलेक्टर ने नाराजगी जाहिर की और संबंधित पटवारी के निलंबन के निर्देश भी दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता की समस्याओं को नजरअंदाज करना गंभीर लापरवाही है और ऐसे मामलों में किसी भी स्तर पर ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।

    कलेक्टर ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि वे क्षेत्र में सक्रिय रहकर समस्याओं का समाधान करें, ताकि लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। उन्होंने कहा कि जनसुनवाई केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं के समाधान का प्रभावी माध्यम है। कुल मिलाकर, बैतूल में आयोजित इस जनसुनवाई ने प्रशासन की जवाबदेही और पारदर्शिता को मजबूत करने का संदेश दिया है, जहां लापरवाही पर सख्ती और त्वरित समाधान को प्राथमिकता दी जा रही है।

  • युवा विधायक सम्मेलन में गरजे हेमंत कटारे: खाते में पैसे डालना नहीं, रोजगार देना ही सशक्तिकरण

    युवा विधायक सम्मेलन में गरजे हेमंत कटारे: खाते में पैसे डालना नहीं, रोजगार देना ही सशक्तिकरण


    भोपाल । भोपाल में आयोजित युवा विधायक सम्मेलन के दौरान मध्यप्रदेश विधानसभा में उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने फ्रीबीज यानी मुफ्त योजनाओं को लेकर बड़ा और विवादित बयान दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि महिलाओं के खातों में सीधे पैसे डालना सशक्तिकरण नहीं है बल्कि यह विकसित भारत के लक्ष्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

    कटारे ने मंच से कहा कि आज जनप्रतिनिधि सच बोलने से डरते हैं। वे इस बात को लेकर चिंतित रहते हैं कि उनके बयान से कोई वर्ग नाराज न हो जाए लेकिन इस डर के कारण देशहित के मुद्दों पर खुलकर चर्चा नहीं हो पाती। उन्होंने कहा कि अगर हम नाराजगी के डर से ही घबराते रहेंगे तो देश की सेवा कैसे करेंगे।

    महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि केवल खातों में 10 हजार रुपये डाल देने से महिलाएं सशक्त नहीं हो जातीं। हर महिला में अपनी क्षमता और कौशल होता है जिसे विकसित कर उसे आत्मनिर्भर बनाया जाना चाहिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यदि युवाओं को सशक्त बनाना है तो उन्हें रोजगार देना होगा न कि मुफ्त पैसा।

    कटारे ने अपने तर्क को आगे बढ़ाते हुए कहा कि जब लोगों की जरूरतें बिना काम किए ही पूरी होने लगती हैं तो उनके अंदर काम करने की प्रेरणा कम हो जाती है। उन्होंने कहा कि आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है लेकिन यदि आवश्यकताएं ही समाप्त कर दी जाएं तो नवाचार और कौशल विकास कैसे होगा।

    सरकारों को सुझाव देते हुए उन्होंने कहा कि यदि आर्थिक सहायता देनी ही है तो उसे शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में दिया जाना चाहिए। गरीबों के बच्चों को मुफ्त शिक्षा और जरूरतमंदों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराना ज्यादा प्रभावी कदम होगा बजाय इसके कि सीधे नकद राशि बांटी जाए।

    इस दौरान हेमंत कटारे ने अफसरशाही और न्यायपालिका की जवाबदेही का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि देश में ब्यूरोक्रेसी की जवाबदेही तय नहीं है जबकि जनप्रतिनिधियों को हर पांच साल में जनता के सामने जवाब देना पड़ता है। उन्होंने मांग की कि अधिकारियों और न्यायपालिका की भी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

    अपने संबोधन के अंत में उन्होंने युवा विधायकों को नसीहत देते हुए कहा कि कोई भी बयान देने से पहले यह जरूर सोचें कि वह देश और जनता के हित में है या नहीं। उन्होंने कहा कि जनता ने जनप्रतिनिधियों को जिम्मेदारी दी है इसलिए उनके हर फैसले और बयान में जनहित सर्वोपरि होना चाहिए।

    कुल मिलाकर हेमंत कटारे का यह बयान फ्रीबीज और कल्याणकारी योजनाओं को लेकर चल रही राष्ट्रीय बहस को और तेज कर सकता है जिसमें विकास और सामाजिक सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर अलग-अलग विचार सामने आ रहे हैं।