Category: Madhya Pradesh

  • 1 से 30 मई तक बीजेपी का मेगा प्रशिक्षण अभियान ,नई कार्यसमिति जल्द राम नगरी ओरछा में होगी अहम बैठक

    1 से 30 मई तक बीजेपी का मेगा प्रशिक्षण अभियान ,नई कार्यसमिति जल्द राम नगरी ओरछा में होगी अहम बैठक


    भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है जहां भारतीय जनता पार्टी ने संगठन को और मजबूत बनाने के लिए बड़ा रोडमैप तैयार किया है। राजधानी भोपाल स्थित पार्टी कार्यालय में हुई अहम बैठक में आने वाले दिनों की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। इस बैठक में प्रदेश स्तर के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए और संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने पर जोर दिया गया।

    इस दौरान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में 1 मई से 30 मई तक व्यापक स्तर पर प्रशिक्षण वर्ग आयोजित किए जाएंगे। इन प्रशिक्षण सत्रों में पार्टी कार्यकर्ताओं को कुल 11 अलग-अलग विषयों पर प्रशिक्षित किया जाएगा। उनका कहना था कि भाजपा की कार्यप्रणाली में नियमित प्रशिक्षण का विशेष महत्व है और इसी के माध्यम से कार्यकर्ताओं को विचारधारा संगठनात्मक कौशल और जनसंपर्क के तरीकों में दक्ष बनाया जाता है।

    बैठक में डॉ. मोहन यादव सहित कई प्रमुख नेता मौजूद रहे जिन्होंने इस अभियान को सफल बनाने के लिए अपने सुझाव भी दिए। इसके अलावा राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश प्रदेश प्रभारी डॉ महेन्द्र सिंह और क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल समेत अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी प्रशिक्षण महाअभियान की रूपरेखा को अंतिम रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    इस पूरी प्रक्रिया के बीच सबसे महत्वपूर्ण घोषणा प्रदेश कार्यसमिति को लेकर सामने आई। हेमंत खंडेलवाल ने स्पष्ट संकेत दिए कि नई प्रदेश कार्यसमिति की सूची जल्द जारी की जाएगी। यह कार्यसमिति आगामी समय में पार्टी के संगठनात्मक फैसलों और राजनीतिक रणनीति का केंद्र होगी। कार्यसमिति के गठन को लेकर कार्यकर्ताओं और नेताओं में उत्सुकता भी बढ़ गई है क्योंकि इसमें शामिल नाम भविष्य की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।

    खास बात यह है कि नई कार्यसमिति के गठन के बाद उसकी पहली बैठक ऐतिहासिक स्थल ओरछा में आयोजित की जाएगी। यह बैठक भगवान राम के दरबार में आयोजित करने की योजना है जिससे इसे सांस्कृतिक और वैचारिक महत्व भी दिया जा रहा है। पार्टी इसे केवल एक संगठनात्मक बैठक नहीं बल्कि एक प्रतीकात्मक और प्रेरणादायक शुरुआत के रूप में देख रही है।

    निगम मंडलों में नियुक्तियों को लेकर भी प्रदेश अध्यक्ष ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कई बार सभी की सहमति एक नाम पर नहीं बन पाती इसलिए प्रक्रिया में समय लगता है लेकिन सरकार और संगठन योग्य और काबिल लोगों को ही जिम्मेदारी देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि विरोध और मतभेद हर युग में रहे हैं और लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह स्वाभाविक प्रक्रिया का हिस्सा है।

    कुल मिलाकर देखा जाए तो भाजपा ने मध्यप्रदेश में संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की है। मई का महीना पार्टी के लिए बेहद अहम रहने वाला है जिसमें प्रशिक्षण अभियान के साथ-साथ नई कार्यसमिति का गठन और उसकी पहली बैठक राजनीतिक रूप से कई संकेत देने वाली होगी।

  • हाईकोर्ट सुनवाई से पहले सरकार का मास्टरस्ट्रोक ,विशेष अधिवक्ताओं को हटाया अब दिग्गज वकील संभालेंगे मोर्चा

    हाईकोर्ट सुनवाई से पहले सरकार का मास्टरस्ट्रोक ,विशेष अधिवक्ताओं को हटाया अब दिग्गज वकील संभालेंगे मोर्चा


    जबलपुर । मध्यप्रदेश में लंबे समय से सुर्खियों में बना ओबीसी 27 प्रतिशत आरक्षण मामला एक बार फिर नए मोड़ पर आ खड़ा हुआ है। हाईकोर्ट में प्रस्तावित सुनवाई से ठीक पहले राज्य सरकार ने अपनी कानूनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए दो विशेष अधिवक्ताओं को मामले से अलग कर दिया है। इस फैसले ने न सिर्फ कानूनी हलकों में हलचल मचा दी है बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

    जानकारी के मुताबिक राज्यपाल की मंजूरी से पहले नियुक्त किए गए विशेष अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर और विनायक प्रसाद शाह अब इस मामले में सरकार का पक्ष नहीं रखेंगे। सरकार की ओर से जारी नई अधिसूचना में साफ कर दिया गया है कि इन दोनों को इस जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब मामला अपने निर्णायक चरण की ओर बढ़ रहा है और हाईकोर्ट में इसकी सुनवाई बेहद अहम मानी जा रही है।

    इस घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर चलती प्रक्रिया के बीच यह बदलाव क्यों किया गया। क्या सरकार अपनी कानूनी तैयारी को और मजबूत करना चाहती है या फिर अब तक की रणनीति से संतुष्ट नहीं थी। हालांकि आधिकारिक तौर पर इस बदलाव के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं की गई है लेकिन संकेत यही मिल रहे हैं कि सरकार इस मामले को लेकर कोई भी जोखिम लेने के मूड में नहीं है।

    अब इस केस में सरकार की ओर से देश के वरिष्ठ और अनुभवी कानून अधिकारी पैरवी करते नजर आएंगे। हाईकोर्ट में सरकार का पक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज और मध्यप्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह रखेंगे। इन दिग्गज नामों की एंट्री से साफ है कि सरकार ने इस केस को पूरी ताकत के साथ लड़ने का मन बना लिया है और वह अदालत में हर पहलू को मजबूती से प्रस्तुत करना चाहती है।

    गौरतलब है कि ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का मुद्दा लंबे समय से न्यायालय में लंबित है और इसका सीधा असर प्रदेश की भर्ती प्रक्रियाओं पर पड़ रहा है। हजारों अभ्यर्थी इस फैसले का इंतजार कर रहे हैं क्योंकि यह मामला उनके भविष्य से जुड़ा हुआ है। ऐसे में सरकार की ओर से किया गया यह बड़ा बदलाव आने वाले फैसले की दिशा पर भी असर डाल सकता है।

    कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुनवाई से पहले वकीलों की टीम बदलना एक रणनीतिक कदम हो सकता है जिससे सरकार अपने पक्ष को अधिक प्रभावी तरीके से रख सके। वहीं विपक्ष और कुछ विश्लेषक इसे सवालों के घेरे में भी देख रहे हैं और इसे सरकार की पिछली रणनीति पर अविश्वास के तौर पर पेश कर रहे हैं।

    अब सभी की नजरें हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं जहां यह तय होगा कि यह नया दांव सरकार के लिए कितना कारगर साबित होता है। आने वाले दिनों में यह मामला न सिर्फ कानूनी बल्कि राजनीतिक रूप से भी और ज्यादा गर्माने वाला है।

  • उज्जैन यूनिवर्सिटी में दहशत का साया नई बिल्डिंग पर लिखी धमकी ने बढ़ाई चिंता सुरक्षा पर उठे सवाल

    उज्जैन यूनिवर्सिटी में दहशत का साया नई बिल्डिंग पर लिखी धमकी ने बढ़ाई चिंता सुरक्षा पर उठे सवाल


    उज्जैन । मध्यप्रदेश के उज्जैन में स्थित सम्राट विक्रम विश्वविद्यालय एक अजीब और चिंताजनक घटना के बाद सुर्खियों में आ गया है जहां शिक्षा के माहौल के बीच अचानक दहशत का साया छा गया है विश्वविद्यालय की कृषि अध्ययनशाला की नई बिल्डिंग में अज्ञात शरारती तत्वों की हरकत ने छात्रों और स्टाफ दोनों को भयभीत कर दिया है

    करीब 17 करोड़ की लागत से तैयार इस नई इमारत को हाल ही में शैक्षणिक गतिविधियों के लिए शुरू किया गया था लेकिन अब यह बिल्डिंग एक सनसनीखेज घटना की वजह से चर्चा में है बताया जा रहा है कि सुबह जब लोग परिसर पहुंचे तो मुख्य द्वार पर लाल रंग से लिखे शब्दों ने सभी को हैरान कर दिया गेट पर बड़े अक्षरों में तुम सब मरोगे लिखा हुआ था जिसे देखकर मौके पर मौजूद लोगों के बीच हड़कंप मच गया

    सिर्फ यही नहीं बल्कि गेट के पास कुछ संदिग्ध सामान भी रखा हुआ मिला जिसमें एक मटकी लाल कपड़ा और अन्य वस्तुएं शामिल थीं इन चीजों को देखकर कई लोगों ने तंत्र क्रिया जैसी आशंका जताई हालांकि इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन इस तरह का दृश्य देखकर छात्रों और कर्मचारियों में डर का माहौल बनना स्वाभाविक था

    घटना की जानकारी मिलते ही विश्वविद्यालय प्रशासन तुरंत सक्रिय हुआ और सबसे पहले मौके से उस संदिग्ध सामान को हटाया गया साथ ही दीवार पर लिखे धमकी भरे शब्दों को भी मिटा दिया गया विभागाध्यक्ष ने इस पूरी घटना को असामाजिक तत्वों की शरारत बताया है और उच्च अधिकारियों को इसकी सूचना दे दी गई है

    इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहा है क्योंकि जिस स्थान पर यह घटना हुई वहां सीसीटीवी कैमरे तक नहीं लगे हैं ऐसे में यह पता लगाना मुश्किल हो गया है कि यह हरकत किसने और कब की छात्रों का कहना है कि अगर परिसर में पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम होते तो शायद ऐसी घटना को रोका जा सकता था

    करीब 1100 छात्रों और स्टाफ के बीच इस घटना के बाद भय का माहौल है कई छात्र अब अकेले उस बिल्डिंग की ओर जाने से भी हिचकिचा रहे हैं शिक्षा का माहौल जहां सुरक्षित और सकारात्मक होना चाहिए वहां इस तरह की घटनाएं चिंता बढ़ाने वाली हैं

    प्रशासन अब पूरे मामले की जांच में जुट गया है और यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि इसके पीछे कौन लोग हैं और उनका उद्देश्य क्या था साथ ही सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर भी विचार किया जा रहा है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो

    यह घटना सिर्फ एक शरारत नहीं बल्कि एक गंभीर चेतावनी भी हो सकती है जो यह संकेत देती है कि शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा को लेकर और अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत है फिलहाल सभी की नजरें जांच के नतीजों पर टिकी हैं और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस रहस्य से पर्दा उठेगा

  • दिल दहला देने वाली सुबह: रात तक हंसी-ठिठोली, सुबह फंदे पर झूलता मिला पति-पत्नी का शव

    दिल दहला देने वाली सुबह: रात तक हंसी-ठिठोली, सुबह फंदे पर झूलता मिला पति-पत्नी का शव


    सागर । मध्यप्रदेश के सागर जिले से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है जहां एक पति और पत्नी ने एक साथ अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली इस घटना ने न केवल परिवार बल्कि पूरे मोहल्ले को गहरे सदमे में डाल दिया है मामला शाहगढ़ थाना क्षेत्र के नगर परिषद के वाल्मीकि वार्ड का है जहां रहने वाले 45 वर्षीय उत्तम अहिरवार और उनकी 42 वर्षीय पत्नी हरिबाई का शव उनके ही घर में फांसी के फंदे पर लटका हुआ मिला

    हैरानी की बात यह है कि जिस दंपती ने यह खौफनाक कदम उठाया वह कुछ घंटों पहले तक पूरी तरह सामान्य नजर आ रहे थे बताया जा रहा है कि घटना वाली रात दोनों अपने घर के बाहर पड़ोसियों के साथ बैठे थे बातचीत कर रहे थे और माहौल पूरी तरह सामान्य था किसी को भी इस बात का अंदेशा नहीं था कि यह उनकी जिंदगी की आखिरी रात साबित होगी

    सुबह जब घर के अंदर से कोई हलचल नहीं हुई तो परिजनों और आसपास के लोगों को शक हुआ दरवाजा खोलकर देखा गया तो अंदर का दृश्य रोंगटे खड़े कर देने वाला था पति और पत्नी दोनों फंदे पर झूल रहे थे यह दृश्य देखते ही पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई

    घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दी गई जिसके बाद शाहगढ़ थाना पुलिस मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों शवों को नीचे उतारकर पंचनामा कार्रवाई की और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया प्रारंभिक जांच में किसी तरह का स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है जिससे यह घटना और भी ज्यादा रहस्यमयी बन गई है

    मृतक दंपती के भतीजे ने पुलिस को घटना की जानकारी दी वहीं उनके बेटे को भी सूचना दी गई जो उस समय सागर में मौजूद था परिवार के लोग इस घटना से पूरी तरह टूट चुके हैं और किसी को समझ नहीं आ रहा कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि दोनों ने एक साथ इतना बड़ा कदम उठा लिया

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है आत्महत्या के पीछे की वजह जानने के लिए परिजनों और आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि कहीं कोई मानसिक दबाव या पारिवारिक विवाद तो इसकी वजह नहीं बना

    इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि हमारे आसपास रहने वाले लोग कितनी चुपचाप अपने अंदर संघर्ष झेल रहे होते हैं और हमें इसकी भनक तक नहीं लगती एक सामान्य दिखने वाली जिंदगी के पीछे छिपे दर्द का अंदाजा लगाना अक्सर मुश्किल हो जाता है फिलहाल पूरे मामले का सच पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही सामने आ पाएगा लेकिन इस दर्दनाक घटना ने इलाके में गहरा सन्नाटा जरूर छोड़ दिया है

  • पन्ना में स्वास्थ्य व्यवस्था फेल प्रसव पीड़ा में तड़पती महिला को अस्पताल में मिला ताला

    पन्ना में स्वास्थ्य व्यवस्था फेल प्रसव पीड़ा में तड़पती महिला को अस्पताल में मिला ताला

    पन्ना । मध्यप्रदेश के पन्ना जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही का चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा के दौरान बंद अस्पताल के कारण भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। यह घटना न केवल सिस्टम की कमजोरी को उजागर करती है बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की हकीकत भी सामने लाती है।

    जानकारी के अनुसार घटना कल्दा क्षेत्र की है जहां ग्राम सकतरा निवासी वंदना वर्मा को सोमवार रात अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने तुरंत 108 एम्बुलेंस को सूचना दी और भारी बारिश व तेज हवाओं के बीच महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कल्दा पहुंचाया गया। लेकिन वहां पहुंचने के बाद जो दृश्य सामने आया उसने सभी को हैरान कर दिया।

    अस्पताल के मुख्य द्वार पर ताला लटका हुआ था और वहां कोई डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी मौजूद नहीं था। तेज बारिश और असहनीय दर्द के बीच परिजन अस्पताल के बाहर खड़े होकर मदद की गुहार लगाते रहे। उन्होंने बार बार डॉक्टरों और स्टाफ को फोन किया लेकिन किसी ने कॉल उठाना तक जरूरी नहीं समझा।

    इस बीच महिला की हालत बिगड़ती जा रही थी और हर मिनट की देरी जोखिम बढ़ा रही थी। ऐसे में मजबूरी में परिजनों को बड़ा फैसला लेना पड़ा और गर्भवती महिला को करीब 27 किलोमीटर दूर सलेहा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। गनीमत रही कि एम्बुलेंस समय रहते वहां पहुंच गई और महिला को इलाज मिल सका।

    पीड़िता के परिजनों ने इस घटना पर गहरा आक्रोश जताया है। उनका कहना है कि वे अस्पताल इस उम्मीद से पहुंचे थे कि समय पर इलाज मिलेगा लेकिन वहां ताला लटका मिला जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई। उनका कहना है कि अगर समय पर दूसरे अस्पताल नहीं ले जाते तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था।

    यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है खासकर उन क्षेत्रों में जहां लोगों की निर्भरता पूरी तरह सरकारी अस्पतालों पर होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी लापरवाही न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि यह सीधे तौर पर लोगों की जान से जुड़ा मामला है। अब देखना यह होगा कि इस मामले में जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं।

  • कोतवाली क्षेत्र में पुलिस कमिश्नर की सख्ती रॉन्ग साइड एंट्री बंद करने के निर्देश

    कोतवाली क्षेत्र में पुलिस कमिश्नर की सख्ती रॉन्ग साइड एंट्री बंद करने के निर्देश


    भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में कानून व्यवस्था और यातायात सुधार को लेकर पुलिस प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। इसी क्रम में पुलिस कमिश्नर संजय कुमार इमामी ने कोतवाली थाना क्षेत्र में नागरिकों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया और उनकी समस्याएं सुनीं। इस जनसंवाद कार्यक्रम का उद्देश्य शहर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और जनता की भागीदारी बढ़ाना रहा।

    जनसंवाद के दौरान पुलिस कमिश्नर ने साफ तौर पर निर्देश दिए कि दुकानों के सामने होने वाली अवैध पार्किंग को तत्काल हटाया जाए क्योंकि इससे न केवल ट्रैफिक बाधित होता है बल्कि दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इस तरह की गतिविधियों पर सख्त निगरानी रखी जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाए।

    इसके साथ ही हमीदिया अस्पताल के आसपास रॉन्ग साइड एंट्री को लेकर भी सख्त रुख अपनाया गया। कमिश्नर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि इस क्षेत्र में गलत दिशा से आने वाले वाहनों पर पूरी तरह रोक लगाई जाए ताकि यातायात व्यवस्था सुचारु बनी रहे और किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके।

    कार्यक्रम के दौरान नागरिकों को सुरक्षा के प्रति जागरूक करते हुए कहा गया कि यदि कहीं भी कोई संदिग्ध या अवैध गतिविधि नजर आए तो तुरंत डायल 112 पर सूचना दें। पुलिस ने भरोसा दिलाया कि हर सूचना पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी और शिकायतों का जल्द समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।

    जनसंवाद में ट्रैफिक नियमों को लेकर भी लोगों को जागरूक किया गया और उन्हें नियमों का पालन करने की शपथ दिलाई गई। साथ ही साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों को देखते हुए साइबर सुरक्षा के प्रति भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई।

    पुलिस कमिश्नर ने मादक पदार्थों और अवैध हथियारों के खिलाफ भी लोगों से सहयोग मांगा और अपील की कि ऐसी किसी भी जानकारी को तुरंत पुलिस तक पहुंचाएं ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

    इस पहल के जरिए पुलिस और जनता के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की कोशिश की जा रही है जिससे शहर को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जा सके। पुलिस का मानना है कि आम नागरिकों की भागीदारी के बिना सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह प्रभावी बनाना संभव नहीं है।

  • दिल दहला देने वाली घटना सागर में दंपती ने एक साथ दी जान कारण बना रहस्य

    दिल दहला देने वाली घटना सागर में दंपती ने एक साथ दी जान कारण बना रहस्य


    सागर । मध्यप्रदेश के सागर जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है जहां एक दंपती ने एक साथ आत्महत्या कर ली जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। मामला शाहगढ़ थाना क्षेत्र के वाल्मीकि वार्ड का है जहां पति और पत्नी अपने ही घर में फांसी के फंदे पर लटके हुए मिले।

    जानकारी के अनुसार मृतकों की पहचान उत्तम अहिरवार उम्र करीब 45 वर्ष और उनकी पत्नी हरिबाई उम्र 42 वर्ष के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि दोनों पति पत्नी रात तक अपने घर के बाहर पड़ोसियों के साथ सामान्य बातचीत करते हुए बैठे थे और किसी तरह की परेशानी के संकेत भी नहीं मिले थे। लेकिन सुबह जब परिवार और आसपास के लोगों ने दरवाजा खोला तो दोनों को कमरे के अंदर फंदे पर लटका देख सभी के होश उड़ गए।

    घटना की सूचना मिलते ही मध्य प्रदेश पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की गई। पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई करते हुए दोनों शवों को फंदे से उतारा और पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। बाद में शवों को परिजनों को सौंप दिया गया।

    प्रारंभिक जांच में आत्महत्या के पीछे का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है। पुलिस का कहना है कि फिलहाल सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है और परिजनों तथा आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है ताकि इस घटना के पीछे की असली वजह सामने आ सके।

    इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। पड़ोसियों और परिचितों का कहना है कि दंपती का व्यवहार सामान्य था और उन्होंने कभी किसी बड़ी परेशानी का जिक्र नहीं किया था। ऐसे में दोनों का एक साथ यह कदम उठाना कई सवाल खड़े कर रहा है। परिवार के लोगों के लिए यह घटना गहरे सदमे से कम नहीं है। वहीं पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आखिर किन परिस्थितियों ने इस दंपती को इतना बड़ा कदम उठाने पर मजबूर किया।

  • सिंगरौली में ब्लास्टिंग का कहर पहाड़ों से गिर रहे पत्थर ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी

    सिंगरौली में ब्लास्टिंग का कहर पहाड़ों से गिर रहे पत्थर ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी


    सिंगरौली । मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले के चितरंगी क्षेत्र में इन दिनों ब्लास्टिंग को लेकर हालात बेहद चिंताजनक बन गए हैं जहां विकास कार्यों के नाम पर हो रही गतिविधियां अब ग्रामीणों के लिए खतरे का कारण बनती जा रही हैं। मिसिरगवा आयरन ब्लॉक में टेस्टिंग के नाम पर लगातार की जा रही ब्लास्टिंग से आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है और लोग अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठा रहे हैं।

    जानकारी के अनुसार चितरंगी के केकराव चितावल शिवपुरवा और मिसिरगवा गांवों में इन दिनों तेज धमाकों के साथ ब्लास्टिंग की जा रही है। इन धमाकों के कारण पहाड़ियों से बड़े बड़े पत्थर टूटकर नीचे गिर रहे हैं जिससे न सिर्फ ग्रामीणों के मकानों को नुकसान पहुंच रहा है बल्कि राहगीरों की जान भी हर समय खतरे में बनी हुई है। कई घरों में दरारें पड़ चुकी हैं और कुछ मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए हैं।

    स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि चितरंगी लमसरई मुख्य मार्ग पर भी पत्थर गिरने की घटनाएं सामने आ रही हैं जिससे आवागमन करने वाले लोगों में डर का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो बड़ा हादसा हो सकता है।

    इसी मुद्दे को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ गया है। युवा नेता लक्ष्मण सिंह बैस के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीण सड़कों पर उतर आए और प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपते हुए साफ शब्दों में कहा कि या तो ब्लास्टिंग के दौरान पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए या फिर इस काम को तत्काल बंद किया जाए।

    ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में क्षतिग्रस्त मकानों का तुरंत मुआवजा सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कंपनी और प्रशासन के बीच खुली बैठक और लोगों की जान जोखिम में डालने वाले कार्यों पर रोक शामिल है। उनका कहना है कि विकास के नाम पर उनकी जिंदगी से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    हालांकि तहसीलदार ने मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया है लेकिन अब भी बड़ा सवाल यही है कि अब तक ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए। लगातार हो रही घटनाओं के बावजूद प्रशासन की धीमी कार्रवाई पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

    ग्रामीणों ने दो टूक चेतावनी दी है कि अगर एक सप्ताह के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो वे उग्र आंदोलन करेंगे और प्रशासनिक कार्यालयों का घेराव किया जाएगा। ऐसे में अब सबकी नजर प्रशासन पर टिकी है कि वह समय रहते कदम उठाता है या किसी बड़े हादसे के बाद ही कार्रवाई होती है।

  • अब नहीं छूटेगा साल 5वीं 8वीं के फेल और अनुपस्थित छात्रों के लिए जून में फिर परीक्षा

    अब नहीं छूटेगा साल 5वीं 8वीं के फेल और अनुपस्थित छात्रों के लिए जून में फिर परीक्षा


    भोपाल । मध्यप्रदेश के भोपाल सहित पूरे प्रदेश में कक्षा 5वीं और 8वीं के छात्रों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है जहां फेल और अनुपस्थित विद्यार्थियों को एक और मौका दिया जा रहा है। राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार अब ये छात्र 1 जून से 6 जून 2026 के बीच आयोजित होने वाली पुन परीक्षा में शामिल हो सकेंगे जिससे उनका एक शैक्षणिक वर्ष बच सकता है।

    शिक्षण सत्र 2025 26 की मुख्य परीक्षा में असफल या अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थियों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। इस पुन परीक्षा में सरकारी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों अनुदान प्राप्त संस्थानों और पंजीकृत मदरसों में पढ़ने वाले छात्र भी शामिल होंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी छात्र की पढ़ाई केवल एक परीक्षा के कारण बाधित न हो।

    परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थियों के लिए प्रवेश पत्र 25 मई तक उपलब्ध करा दिए जाएंगे। छात्र अपना एडमिट कार्ड राज्य शिक्षा केंद्र के आधिकारिक पोर्टल www.rskmp.in से डाउनलोड कर सकेंगे। इसके लिए शाला प्रमुख जनशिक्षा केंद्र प्रभारी और संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है कि सभी छात्रों तक समय पर प्रवेश पत्र पहुंचाया जाए।

    पुन परीक्षा की तैयारी को लेकर भी खास व्यवस्था की गई है। परीक्षा से पहले शाला स्तर पर विषयवार अतिरिक्त कक्षाएं संचालित की जाएंगी ताकि छात्र बेहतर तरीके से तैयारी कर सकें। जिन छात्रों ने पहले प्रोजेक्ट कार्य पूरा नहीं किया था या जिनके अंक कम थे उन्हें दोबारा प्रोजेक्ट पूरा करने और मूल्यांकन का अवसर भी दिया जाएगा।

    इस बार परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था भी अलग तरीके से की गई है। सभी परीक्षा केंद्र जनशिक्षा केंद्र स्तर पर बनाए जाएंगे ताकि परीक्षा प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी रहे। यदि किसी केंद्र पर 500 से अधिक छात्र होते हैं तो राज्य शिक्षा केंद्र की अनुमति से अतिरिक्त केंद्र भी बनाए जा सकेंगे।

    परीक्षा की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रश्न पत्रों की ऑन द स्पॉट प्रिंटिंग की जाएगी। यानी प्रश्न पत्र सीधे परीक्षा केंद्र पर ही डाउनलोड और प्रिंट किए जाएंगे जिससे लीक जैसी समस्याओं की संभावना कम होगी।

    गर्मी के मौसम को देखते हुए छात्रों की सुरक्षा के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। हर परीक्षा केंद्र पर पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था रहेगी। साथ ही बच्चों को नियमित अंतराल पर पानी पिलाने लू और डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए ORS उपलब्ध कराने और जरूरत पड़ने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।

    कुल मिलाकर यह पहल उन छात्रों के लिए एक बड़ी राहत है जो किसी कारणवश मुख्य परीक्षा में सफल नहीं हो पाए थे। अब उनके पास अपनी मेहनत से खुद को साबित करने और अगली कक्षा में आगे बढ़ने का एक और सुनहरा अवसर है।

  • नियम तोड़े तो नहीं मिलेगी राहत इंदौर में अवैध बिल्डिंग पर निगम की सख्त कार्रवाई

    नियम तोड़े तो नहीं मिलेगी राहत इंदौर में अवैध बिल्डिंग पर निगम की सख्त कार्रवाई


    इंदौर । मध्यप्रदेश के इंदौर में अवैध निर्माण के खिलाफ नगर निगम का सख्त रुख लगातार देखने को मिल रहा है। शहर के साउथ तोड़ा इलाके में निगम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक निर्माणाधीन भवन के अवैध हिस्सों पर बुलडोजर चला दिया जिससे इलाके में हड़कंप मच गया और अन्य निर्माणकर्ताओं के बीच भी संदेश साफ पहुंच गया कि नियमों के उल्लंघन पर अब कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।

    जानकारी के मुताबिक साउथ तोड़ा क्षेत्र में करीब तीन हजार स्क्वेयर फीट में एक भवन का निर्माण किया जा रहा था लेकिन जांच में पाया गया कि इस निर्माण में कई हिस्से स्वीकृत नक्शे के विपरीत बनाए जा रहे थे। जैसे ही इसकी सूचना नगर निगम को मिली टीम तुरंत मौके पर पहुंची और बिना देरी किए कार्रवाई शुरू कर दी गई।

    नगर निगम के अधिकारियों ने जेसीबी मशीन की मदद से अवैध हिस्सों को तोड़ दिया। यह कार्रवाई मोहम्मद शरीफ के निर्माणाधीन भवन पर की गई जहां नियमों का खुला उल्लंघन सामने आया था। कार्रवाई के दौरान मौके पर पुलिस बल भी मौजूद रहा ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो।

    निगम अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शहर में अवैध निर्माण को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा और जहां भी नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा वहां सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    इस कार्रवाई के बाद आसपास के क्षेत्रों में भी निर्माण कार्य कर रहे लोगों में हलचल देखी गई है। कई लोगों ने अपने निर्माण की वैधता को लेकर दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है ताकि किसी भी तरह की कार्रवाई से बचा जा सके।

    नगर निगम की इस सख्ती को शहर में व्यवस्थित विकास और कानून व्यवस्था बनाए रखने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि शहर के मास्टर प्लान और बिल्डिंग बायलॉज का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या दुर्घटना की स्थिति न बने। इंदौर में लगातार हो रही इस तरह की कार्रवाइयों से यह साफ संकेत मिल रहा है कि अवैध निर्माण करने वालों के लिए अब मुश्किलें बढ़ने वाली हैं और नियमों का पालन ही एकमात्र रास्ता बचा है।