Category: Madhya Pradesh

  • बोरवेल चलाते समय किसान की करंट लगने से मौत, सिंचाई के दौरान हुआ दर्दनाक हादसा

    बोरवेल चलाते समय किसान की करंट लगने से मौत, सिंचाई के दौरान हुआ दर्दनाक हादसा


    शिवपुरी। शिवपुरी जिले के मणिखेड़ा गांव में शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया। खेत में सिंचाई करने पहुंचे एक किसान की बोरवेल की विद्युत व्यवस्था में उतरे करंट की चपेट में आने से मौत हो गई। रोज की तरह खेती का काम करने निकले किसान को यह अंदाजा भी नहीं था कि खेत में लगाया गया बोरवेल उसकी जिंदगी की आखिरी मंजिल बन जाएगा। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया जबकि गांव में शोक का माहौल है।

    जानकारी के अनुसार मणिखेड़ा गांव निवासी 40 वर्षीय माथुर जाटव पुत्र भरोसा जाटव शुक्रवार सुबह अपने खेत में सिंचाई करने के लिए पहुंचे थे। खेत में लगी बोरवेल से पानी निकालकर फसल की सिंचाई की तैयारी चल रही थी। इसी दौरान अचानक बोरवेल की विद्युत व्यवस्था में करंट दौड़ गया और माथुर जाटव उसकी चपेट में आ गए। तेज करंट लगने से वह मौके पर ही बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े। खेत में मौजूद लोगों को जब घटना का पता चला तो तुरंत परिजनों और आसपास के ग्रामीणों को सूचना दी गई।

    घटना की खबर मिलते ही परिवार के सदस्य और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। सभी ने मिलकर किसान को तत्काल शिवपुरी मेडिकल कॉलेज पहुंचाया लेकिन वहां चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के अनुसार अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी। किसान की असमय मौत की खबर मिलते ही अस्पताल में मौजूद परिजनों का रो रोकर बुरा हाल हो गया।

    माथुर जाटव खेती कर अपने परिवार का पालन पोषण करते थे। उनकी अचानक हुई मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। ग्रामीणों ने बताया कि वह मेहनती और सरल स्वभाव के किसान थे तथा रोज की तरह खेत में सिंचाई करने गए थे लेकिन विद्युत करंट ने उनकी जान ले ली। गांव के लोगों का कहना है कि खेतों में लगे बोरवेल और बिजली कनेक्शनों की नियमित जांच नहीं होने से इस तरह के हादसे लगातार सामने आते रहते हैं। उनका कहना है कि समय रहते विद्युत उपकरणों की जांच और रखरखाव किया जाए तो ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

    घटना की सूचना मिलने के बाद मेडिकल कॉलेज चौकी पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में किसान की मौत का कारण करंट लगना माना गया है लेकिन पुलिस यह भी पता लगा रही है कि विद्युत व्यवस्था में करंट किस वजह से आया और कहीं किसी प्रकार की तकनीकी लापरवाही तो इस हादसे का कारण नहीं बनी।

    इस हादसे ने एक बार फिर खेतों में उपयोग होने वाली विद्युत व्यवस्थाओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों को सिंचाई के दौरान बिजली से जुड़े उपकरणों का उपयोग पूरी सावधानी के साथ करना चाहिए और समय समय पर वायरिंग मोटर तथा बोरवेल कनेक्शन की जांच करानी चाहिए ताकि ऐसे दर्दनाक हादसों से बचा जा सके।

  • सीमांकन के बाद फिर जोती जमीन, विरोध करने पहुंचे पिता-पुत्र पर हमला, 10-12 लोगों पर मारपीट का आरोप

    सीमांकन के बाद फिर जोती जमीन, विरोध करने पहुंचे पिता-पुत्र पर हमला, 10-12 लोगों पर मारपीट का आरोप


    शिवपुरी। जिले के तेंदुआ थाना क्षेत्र के लाड़करन गांव में कृषि भूमि के विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। सीमांकन के बाद दोबारा खेत जोतने का विरोध करने पहुंचे पिता-पुत्र पर कथित तौर पर 10 से 12 लोगों ने लाठी-डंडों और अन्य हथियारों से हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल दोनों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है।

    जिला अस्पताल में भर्ती 32 वर्षीय संजीव परिहार ने बताया कि उनकी आठ बीघा कृषि भूमि पर खेरौना गांव के भरत रावत और हजारी रावत ने पहले कब्जा कर रखा था। करीब दो माह पहले राजस्व विभाग ने सीमांकन कराकर जमीन से कब्जा हटवाया था और उन्हें खेत का कब्जा दिलाया गया था।

    संजीव के मुताबिक तीन दिन पहले उन्होंने अपनी जमीन की जुताई कराई थी। गुरुवार शाम सूचना मिली कि भरत रावत और हजारी रावत दोबारा ट्रैक्टर से उनकी जमीन जोत रहे हैं। जानकारी मिलते ही वह अपने पिता राम सिंह परिहार के साथ खेत पहुंचे और इसका विरोध किया।

    आरोप है कि खेत पर पहले से मौजूद भरत रावत, हजारी रावत, राजेश रावत, बुद्धा, टिल्लू, बलवीर रावत समेत 10 से 12 लोगों ने एकजुट होकर दोनों पर हमला कर दिया। हमलावरों ने लाठी-डंडों और अन्य हथियारों से पिता-पुत्र की बेरहमी से पिटाई की और उन्हें घायल अवस्था में छोड़कर मौके से फरार हो गए।

    घटना के बाद परिजन दोनों घायलों को तत्काल जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उनका इलाज जारी है। चिकित्सकों की निगरानी में दोनों की हालत पर नजर रखी जा रही है।

    तेंदुआ थाना प्रभारी नीतू सिंह धाकड़ ने बताया कि घायलों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। जांच पूरी होने और बयानों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।

  • 6 वर्षीय बच्चे पर कुल्हाड़ी से हमले का आरोप, कार्रवाई की मांग को लेकर एसपी कार्यालय पहुंचे परिजन

    6 वर्षीय बच्चे पर कुल्हाड़ी से हमले का आरोप, कार्रवाई की मांग को लेकर एसपी कार्यालय पहुंचे परिजन

    शिवपुरी। जिले के बदरवास थाना क्षेत्र में छह वर्षीय मासूम के साथ कथित बर्बरता का मामला सामने आया है। बच्चे के पिता ने पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर आरोप लगाया है कि पुरानी रंजिश के चलते गांव के दो लोगों ने उनके बेटे के बाएं हाथ का अंगूठा और एक उंगली कुल्हाड़ी से काट दी। मामले में मारपीट, जान से मारने की धमकी और झूठा केस दर्ज कराने के भी आरोप लगाए गए हैं। फिलहाल पुलिस ने जांच के बाद कार्रवाई की बात कही है।

    शिकायत के अनुसार बदरवास थाना क्षेत्र के ग्राम मदनपुर निवासी रामवीर गुर्जर का छह वर्षीय बेटा सचिन बुधवार शाम करीब चार बजे घर के पास खेल रहा था। आरोप है कि गांव के आनंद गुर्जर और उदयभान गुर्जर उसे अपने घर ले गए, जहां पुरानी रंजिश के चलते कुल्हाड़ी से उसके बाएं हाथ का अंगूठा और एक उंगली काट दी गई। हमले में उसकी तीसरी उंगली भी गंभीर रूप से घायल हो गई।

    घायल बच्चा किसी तरह रोते-बिलखते घर पहुंचा और परिजनों को पूरी घटना की जानकारी दी। शिकायतकर्ता का कहना है कि घटना के प्रत्यक्षदर्शी भी मौजूद हैं। जब परिवार ने आरोपियों से इस बारे में विरोध जताया तो उन्होंने गाली-गलौज करते हुए पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी दी।

    रामवीर गुर्जर का कहना है कि गांव के कुछ लोगों ने समझौते का भरोसा देकर उन्हें तत्काल पुलिस में शिकायत करने से रोक दिया। बाद में जब परिवार इलाज और बातचीत के लिए आरोपियों के घर पहुंचा तो आरोपित पक्ष के कई लोग लाठी-डंडे लेकर उनके घर आ गए और मारपीट की। इस दौरान उनके सिर पर लाठी मारकर घायल करने का भी आरोप लगाया गया है।

    शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरोपित पक्ष ने खुद अपनी मां को चोट पहुंचाकर उनके परिवार के खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी उनके पास मौजूद है।

    पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि डायल-112 पर सूचना देने के बावजूद पुलिस मौके पर नहीं पहुंची। उनका यह भी कहना है कि बदरवास थाने में उनकी शिकायत दर्ज नहीं की गई, जबकि दूसरे पक्ष की शिकायत पर तत्काल कार्रवाई कर दी गई।

    पुलिस अधीक्षक को दिए आवेदन में रामवीर गुर्जर ने बच्चे का मेडिकल परीक्षण कराने, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने तथा परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

    वहीं बदरवास थाना प्रभारी नवीन यादव ने बताया कि दोनों पक्षों को थाने बुलाया गया था। उनके अनुसार शिकायतकर्ता बच्चे को साथ लेकर नहीं आया था। पुलिस ने बच्चे के साथ दोबारा थाने आने के लिए कहा है। उन्होंने बताया कि मेडिकल परीक्षण, पूछताछ और जांच के बाद दोनों पक्षों के तथ्यों के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • बारिश में टपकने लगा जिला अस्पताल का ICU, मरीजों के बेड तक पहुंचा पानी, बढ़ी संक्रमण और शॉर्ट सर्किट की आशंका

    बारिश में टपकने लगा जिला अस्पताल का ICU, मरीजों के बेड तक पहुंचा पानी, बढ़ी संक्रमण और शॉर्ट सर्किट की आशंका


    सीहोर। मूसलाधार बारिश ने सीहोर जिला अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। अस्पताल के सबसे संवेदनशील आईसीयू वार्ड में एसी और छत से पानी टपकने लगा, जिससे गंभीर मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि जिन मरीजों को अत्याधुनिक उपचार और सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए, उनके बेड तक बारिश का पानी पहुंच रहा है।

    जानकारी के अनुसार आईसीयू में लगा एयर कंडीशनर पूरी तरह फेल हो गया है। ठंडी हवा देने की बजाय उससे लगातार पानी रिस रहा है। छत और पाइपलाइन से भी पानी टपकने के कारण वार्ड में जगह-जगह सीलन और जलभराव की स्थिति बन गई है। आईसीयू में वेंटिलेटर और अन्य लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर भर्ती मरीजों के लिए यह स्थिति गंभीर चिंता का विषय बन गई है।

    मरीजों के परिजनों का आरोप है कि कई बार अस्पताल प्रबंधन और ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारियों को इस समस्या की जानकारी दी गई, लेकिन किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। पानी लगातार बेड के आसपास टपकता रहा और मरीजों को असुविधा झेलनी पड़ी।

    विशेषज्ञों के अनुसार आईसीयू जैसे वार्ड में नमी और पानी का रिसाव संक्रमण का खतरा बढ़ा सकता है। इसके अलावा वार्ड में लगी जीवन रक्षक मशीनें और अन्य चिकित्सा उपकरण बिजली से संचालित होते हैं। ऐसे में लगातार पानी टपकने से शॉर्ट सर्किट या किसी बड़े विद्युत हादसे की आशंका भी बनी हुई है।

    करोड़ों रुपये के बजट और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों के बीच जिला अस्पताल की यह स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रही है। मरीजों और उनके परिजनों ने आईसीयू की तत्काल मरम्मत, एसी सिस्टम को दुरुस्त करने और सुरक्षित उपचार व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।

    स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मामले की जानकारी मिलने के बाद नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वहीं मरीजों के परिजन उम्मीद जता रहे हैं कि आईसीयू जैसे अति संवेदनशील वार्ड की खामियों को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाएगा, ताकि भविष्य में किसी मरीज की जान जोखिम में न पड़े।

  • रंजिश बनी हत्या की वजह, रेहटी पुलिस ने चार आरोपियों को किया गिरफ्तार

    रंजिश बनी हत्या की वजह, रेहटी पुलिस ने चार आरोपियों को किया गिरफ्तार


    सीहोर। जिले के रेहटी थाना पुलिस ने युवक की हत्या के सनसनीखेज मामले का खुलासा करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। बुदनी एसडीओपी रवि शर्मा के निर्देशन में गठित पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए हत्या के आरोपियों को पकड़ लिया। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने पुरानी रंजिश के चलते वारदात को अंजाम देने की बात स्वीकार की है।

    पुलिस के अनुसार 2 जुलाई को महागांवजदीद निवासी रमाबाई ने रेहटी थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि संदीप, विनीत और उनके दो साथियों ने उनके भाई सुनील यदुवंशी के साथ डंडों से बेरहमी से मारपीट की, जिससे उसकी मौत हो गई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

    जांच के दौरान पुलिस ने मुख्य आरोपी संदीप यदुवंशी और विनीत यदुवंशी को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उनका सुनील यदुवंशी से लंबे समय से विवाद और आपसी रंजिश चल रही थी।

    आरोपियों के अनुसार 1 जुलाई की रात संदीप अपने चचेरे भाई विनीत यदुवंशी तथा दोस्तों मोहित धनवारे और प्रदीप यदुवंशी के साथ कार से महागांवजदीद जा रहा था। विनीत को उसके घर छोड़ने के दौरान संदीप के घर के सामने सड़क पर एक स्कूटी खड़ी थी। रास्ता साफ कराने के लिए विनीत ने कार का हॉर्न बजाया।

    हॉर्न की आवाज सुनकर सुनील यदुवंशी घर से बाहर आया और दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। विवाद बढ़ने पर संदीप, विनीत, मोहित धनवारे और प्रदीप कार से उतर गए और अपने पास मौजूद डंडों से सुनील पर हमला कर दिया। हमले में सुनील गंभीर रूप से घायल हो गया।

    सुनील को बचाने के लिए उसकी बहन रमाबाई और जीजा सबर सिंह बीच-बचाव करने पहुंचे, लेकिन आरोपियों ने उन पर भी हमला कर दिया। आरोप है कि संदीप ने डंडे से सबर सिंह के सिर पर वार किया। गांव के पूनम यदुवंशी ने भी बीच-बचाव का प्रयास किया, लेकिन आरोपियों ने उसके साथ भी मारपीट कर उसे वहां से भगा दिया।

    वारदात को अंजाम देने के बाद चारों आरोपी नीले रंग की कार से मौके से फरार हो गए। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में आगे की जांच जारी है और पुलिस अन्य पहलुओं की भी पड़ताल कर रही है।

  • जमीन कब्जे के विवाद में बवाल: देवास में तीन लोगों पर जानलेवा हमला, सिर में आई गंभीर चोटें

    जमीन कब्जे के विवाद में बवाल: देवास में तीन लोगों पर जानलेवा हमला, सिर में आई गंभीर चोटें


    मध्यप्रदेश । देवास जिले के सोनकच्छ थाना क्षेत्र के देवगुराड़िया गांव में जमीन विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच खूनी संघर्ष हो गया। खेत बखरने के दौरान हुए इस विवाद में डंडों और धारदार हथियारों से हमला किए जाने से तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों का जिला अस्पताल में उपचार चल रहा है।

    घायलों की पहचान निर्भय गुर्जर, जितेंद्र गुर्जर और शांतिलाल गुर्जर के रूप में हुई है। पीड़ितों के अनुसार वे अपने खेत में बखरने का कार्य कर रहे थे, तभी कुछ लोग वहां पहुंचे और उन पर डंडों तथा धारदार हथियारों से हमला कर दिया।

    घायलों ने आरोप लगाया कि आरोपी उनकी जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं और इसी विवाद के चलते हमला किया गया। शांतिलाल गुर्जर का कहना है कि वह विवाद शांत कराने के लिए मौके पर पहुंचे थे, लेकिन हमलावरों ने उन्हें भी नहीं छोड़ा और मारपीट कर घायल कर दिया।

    हमले में तीनों के सिर पर गंभीर चोटें आई हैं। इनमें एक घायल के सिर पर 20 से अधिक टांके लगाने पड़े। पीड़ितों ने यह भी आरोप लगाया कि हमलावरों ने खेत में खड़े ट्रैक्टर में तोड़फोड़ कर उसे क्षतिग्रस्त कर दिया।

    घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि दोनों पक्षों के बयान और साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

  • कोचिंग सेंटरों में मिली बड़ी लापरवाही: बंद मिले एग्जिट, फायर ऑडिट नहीं; नगर निगम का 2 दिन का अल्टीमेटम

    कोचिंग सेंटरों में मिली बड़ी लापरवाही: बंद मिले एग्जिट, फायर ऑडिट नहीं; नगर निगम का 2 दिन का अल्टीमेटम


    मध्यप्रदेश । देशभर में कोचिंग संस्थानों में हुई दुर्घटनाओं के बाद देवास नगर निगम ने शहर के कोचिंग सेंटरों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच शुरू कर दी है। निरीक्षण के दौरान कई संस्थानों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी सामने आने पर नगर निगम ने संचालकों को दो दिन के भीतर सभी कमियां दूर करने का अंतिम अल्टीमेटम दिया है। तय समय सीमा में सुधार नहीं होने पर संबंधित संस्थानों को सील करने की कार्रवाई की जाएगी।

    शुक्रवार को नगर निगम की टीम ने शहर के विद्या कोचिंग, पार्थ कोचिंग और वर्मा कोचिंग क्लासेस का निरीक्षण किया। जांच में कई गंभीर खामियां सामने आईं। कई संस्थानों में फायर सेफ्टी और इलेक्ट्रिकल ऑडिट नहीं कराया गया था, जबकि आपातकालीन निकासी की व्यवस्था भी मानकों के अनुरूप नहीं मिली।

    निरीक्षण के दौरान सबसे गंभीर लापरवाही आपातकालीन निकासी मार्गों को लेकर सामने आई। कई स्थानों पर एग्जिट के रास्ते बंद पाए गए और उनमें कबाड़ रखा हुआ था। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी आपात स्थिति में यह छात्रों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है।

    जांच में यह भी पाया गया कि कुछ कोचिंग संस्थानों में पर्याप्त सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए गए थे। इसके अलावा भवन की क्षमता और विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में अग्निशमन उपकरण भी पर्याप्त नहीं थे।

    विद्या कोचिंग के संचालक ने अधिकारियों को बताया कि संस्थान में अभी कक्षाएं शुरू नहीं हुई हैं और जल्द ही एग्जिट व्यवस्था, फायर सेफ्टी सहित सभी आवश्यक सुरक्षा मानकों को पूरा कर लिया जाएगा।

    वहीं पार्थ कोचिंग में केवल एक निकासी मार्ग चालू मिला, जबकि दो अन्य रास्ते बंद थे और उनमें कबाड़ रखा हुआ था। यहां फायर और इलेक्ट्रिकल ऑडिट भी नहीं कराया गया था। नगर निगम की टीम ने तत्काल सुधार करने, बंद एग्जिट खोलने और अग्निशमन उपकरणों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए।

    नगर निगम ने सभी कोचिंग संचालकों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि दो दिन के भीतर सभी सुरक्षा संबंधी कमियां दूर की जाएं। यदि निर्धारित समय में आवश्यक सुधार नहीं किए गए तो संबंधित संस्थानों के खिलाफ सीलिंग सहित सख्त कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण के दौरान नगर निगम के फायर अधिकारी जितेंद्र सिसोदिया, प्रतीक शर्मा, उमेश चतुर्वेदी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

  • आईआईएम इंदौर IPM में शहर के 6 छात्रों का चयन, आरव माले ने हासिल की देशभर में दूसरी रैंक

    आईआईएम इंदौर IPM में शहर के 6 छात्रों का चयन, आरव माले ने हासिल की देशभर में दूसरी रैंक


    इंदौर । भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) इंदौर के प्रतिष्ठित इंटीग्रेटेड प्रोग्राम इन मैनेजमेंट (IPM) की अंतिम चयन सूची में इंदौर के विद्यार्थियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। देशभर के करीब 28 हजार अभ्यर्थियों के बीच हुई कड़ी प्रतिस्पर्धा में शहर के छह छात्रों ने अंतिम चयन सूची में जगह बनाई। इनमें आरव माले ने ऑल इंडिया रैंक-2 हासिल कर न केवल इंदौर बल्कि पूरे मध्य प्रदेश का नाम रोशन किया है।

    आईपीमैट देश की सबसे कठिन मैनेजमेंट प्रवेश परीक्षाओं में गिनी जाती है। इस वर्ष करीब 28 हजार छात्रों ने परीक्षा दी थी। इनमें से लगभग 830 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए चुना गया और अंततः केवल 150 विद्यार्थियों का चयन हुआ। चयनित छात्रों में इंदौर के आरव माले के अलावा अथर्व हार्डिया (एआईआर-8), अकमल बंगलोवाला (एआईआर-33), देवांश अग्रवाल (एआईआर-42), दिव्य लुणावत (एआईआर-51) सहित कुल छह छात्रों ने सफलता हासिल की।

    ऑल इंडिया रैंक-2 प्राप्त करने वाले आरव माले ने अपनी सफलता का श्रेय समयबद्ध तैयारी और लगातार अभ्यास को दिया। उन्होंने 11वीं कक्षा से ही आईपीमैट की तैयारी शुरू कर दी थी। बोर्ड परीक्षाओं के बाद उन्होंने रोजाना कई घंटे पढ़ाई की और 40 से अधिक मॉक टेस्ट देकर अपनी रणनीति को मजबूत बनाया। इंटरव्यू में बिजनेस स्टडीज और गणित से जुड़े सवाल पूछे गए, जिनका उन्होंने आत्मविश्वास के साथ जवाब दिया। यही निरंतर अभ्यास उनकी सफलता की सबसे बड़ी वजह बना।

    अथर्व हार्डिया ने भी बोर्ड परीक्षा और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी साथ-साथ की। उनका कहना है कि नियमित अभ्यास और मॉक इंटरव्यू ने आत्मविश्वास बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं अकमल बंगलोवाला पिछले दो वर्षों से आईपीमैट की तैयारी कर रहे थे। उनका लक्ष्य भविष्य में अपना खुद का व्यवसाय स्थापित करना है। देवांश अग्रवाल ने बुनियादी अवधारणाओं को मजबूत करने के साथ कई मॉक टेस्ट दिए और अब वे वित्तीय परामर्श के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं।

    दिव्य लुणावत ने भी लगातार दो वर्षों तक योजनाबद्ध तैयारी की। पढ़ाई के साथ उन्होंने समसामयिक घटनाओं पर विशेष ध्यान दिया और नियमित रूप से समाचार पत्र पढ़कर सामान्य ज्ञान मजबूत किया। इंटरव्यू में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों से जुड़े सवालों का उन्होंने प्रभावी ढंग से जवाब दिया।

    आईपीमैट विशेषज्ञ अजय बंसल और मन गोयल का कहना है कि अब इस परीक्षा में केवल कॉमर्स पृष्ठभूमि के छात्र ही नहीं, बल्कि साइंस और इंजीनियरिंग की तैयारी करने वाले विद्यार्थी भी बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं। आईआईएम से सीधे पांच वर्षीय मैनेजमेंट प्रोग्राम में प्रवेश का अवसर युवाओं को आकर्षित कर रहा है। उनका मानना है कि जो छात्र 11वीं कक्षा से ही व्यवस्थित तैयारी शुरू करते हैं, नियमित मॉक टेस्ट देते हैं और इंटरव्यू की तैयारी पर बराबर ध्यान देते हैं, उनके चयन की संभावना काफी अधिक रहती है।

    इंदौर के इन विद्यार्थियों की सफलता यह साबित करती है कि सही रणनीति, निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर राष्ट्रीय स्तर की कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया जा सकता है। इन छात्रों की उपलब्धि आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनकर सामने आई है।

  • बारिश ने खोली विकास कार्यों की पोल, इंदौर में जलभराव से जनजीवन बेहाल; 4 दिन भारी बारिश का अलर्ट

    बारिश ने खोली विकास कार्यों की पोल, इंदौर में जलभराव से जनजीवन बेहाल; 4 दिन भारी बारिश का अलर्ट


    इंदौर । इंदौर में मानसून ने जुलाई की शुरुआत से ही जोरदार दस्तक दी है। पिछले दो दिनों में शहर में करीब पांच इंच बारिश दर्ज की गई है, जिससे कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई। बुधवार को करीब ढाई इंच बारिश के बाद गुरुवार रात फिर तेज बारिश हुई और शुक्रवार सुबह तक शहर के अधिकांश हिस्सों में पानी भरा रहा। लगातार हो रही बारिश के बीच अधूरे सड़क और ड्रेनेज निर्माण कार्यों ने लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है, जिससे प्रशासन की चिंता भी बढ़ गई है।

    बारिश के बाद एमबी रोड, रिंग रोड, नेहरू नगर, अटल द्वार, निपानिया, स्टार चौराहा और द्वारकापुरी समेत कई इलाकों में सड़कों पर पानी भर गया। कई स्थानों पर ड्रेनेज लाइन, स्टॉर्म वॉटर लाइन और पेयजल पाइपलाइन बिछाने के लिए की गई खुदाई के बाद सड़कें समय पर दुरुस्त नहीं की गईं। कहीं केवल मिट्टी और गिट्टी डालकर काम छोड़ दिया गया, जो बारिश में दलदल में बदल गई। इससे वाहन चालकों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    सत्यसांई चौराहे के पास तेज बारिश के दौरान एक बड़ा पेड़ का हिस्सा सड़क पर गिर गया। हालांकि इस हादसे में एक व्यक्ति बाल-बाल बच गया। वहीं कई स्थानों पर दोपहिया वाहन चालक गड्ढों और फिसलन के कारण गिरकर घायल हो गए। बारिश के पानी में गड्ढे दिखाई नहीं देने से दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है।

    एमआर-11 मार्ग पर निर्माण कार्य के चलते बनाए गए डायवर्शन मार्ग भी बारिश में खतरनाक साबित हो रहे हैं। देवास नाका और निपानिया चौराहे के आसपास खुदाई के बाद सड़क की ठीक से मरम्मत नहीं होने के कारण जगह-जगह बड़े गड्ढे बन गए हैं। मानसरोवर क्षेत्र में हाल ही में बनी सड़क पहली ही बारिश में उखड़ने लगी है, जबकि महालक्ष्मी नगर से निपानिया तक की सीमेंटेड सड़क भी कई जगह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। सड़क किनारे पक्के फुटपाथ नहीं होने से पूरा इलाका कीचड़ और दलदल में बदल गया है।

    हाल ही में बनाई गई स्टॉर्म वॉटर लाइन भी बारिश का दबाव नहीं झेल सकी। स्टार चौराहे पर घंटों तक पानी जमा रहा। वहीं जंजीरवाला चौराहे और रॉयल पार्क क्षेत्र में अधूरे निर्माण कार्यों के कारण हर बारिश में जलभराव की समस्या सामने आ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा आम नागरिक भुगत रहे हैं।

    मेट्रो प्रोजेक्ट के तहत रेडिसन चौराहे से रोबोट चौराहे तक चल रहे निर्माण कार्य ने भी ट्रैफिक और सड़क व्यवस्था को प्रभावित किया है। मुख्य सड़क संकरी होने और सर्विस रोड की खराब स्थिति के कारण बारिश के दौरान आवागमन और मुश्किल हो गया है। वहीं द्वारकापुरी क्षेत्र में वर्षों से चली आ रही जलभराव की समस्या अब भी जस की तस बनी हुई है। कई परिवारों ने घरों में पानी घुसने से रोकने के लिए मुख्य दरवाजों के सामने सीमेंट की छोटी दीवारें तक बना ली हैं।

    मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में 6 जुलाई तक भारी से अति भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने, जलभराव वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतने और मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने की अपील की है। लगातार हो रही बारिश ने एक बार फिर शहर की अधूरी परियोजनाओं और कमजोर आधारभूत ढांचे की पोल खोल दी है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखी सोनम रघुवंशी की जमानत, कहा- रिहा न हुई होती तो बेल पर रोक लगा देते

    सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखी सोनम रघुवंशी की जमानत, कहा- रिहा न हुई होती तो बेल पर रोक लगा देते


    इंदौर । इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है। शुक्रवार को सर्वोच्च न्यायालय ने उसकी जमानत पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि कोर्ट ने साफ कहा कि हाईकोर्ट द्वारा जमानत देने के आधार पर उसे गंभीर आपत्ति है। न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि यदि सोनम जेल से रिहा नहीं हुई होती तो उसकी जमानत पर रोक लगाने में कोई हिचकिचाहट नहीं होती। साथ ही मेघालय सरकार की उस याचिका पर नोटिस जारी कर दिया गया जिसमें हाईकोर्ट के जमानत आदेश को चुनौती दी गई है।

    जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की अवकाशकालीन पीठ ने मामले की सुनवाई की। मेघालय सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि यह सुनियोजित हत्या का मामला है। उनके अनुसार सोनम ने अपने चार साथियों के साथ मिलकर पति राजा रघुवंशी की हत्या की और शव को गहरी खाई में फेंक दिया। घटना के बाद वह फरार हो गई थी और बाद में उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार की गई।

    सुनवाई के दौरान सरकार ने हाईकोर्ट के जमानत आदेश पर सवाल उठाते हुए कहा कि गिरफ्तारी संबंधी दस्तावेजों में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) की जगह गलती से धारा 403(1) दर्ज हो गई थी। यह केवल टाइपिंग की त्रुटि थी, लेकिन हाईकोर्ट ने इसी तकनीकी आधार को जमानत का कारण मान लिया। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि आरोपी को गिरफ्तारी के समय सभी आधार बताए गए थे और मजिस्ट्रेट के रिकॉर्ड में भी इसका उल्लेख है। पहले भी सोनम की जमानत याचिका मेरिट के आधार पर खारिज हो चुकी थी, इसलिए केवल लिपिकीय गलती के आधार पर राहत देना उचित नहीं था।

    इस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी सवाल उठाया कि जब गिरफ्तारी के आधार पहले ही बताए जा चुके थे और शुरुआती जमानत याचिकाओं में इस मुद्दे का जिक्र नहीं किया गया था तो बाद में केवल गलत धारा लिखे जाने को आधार बनाकर जमानत कैसे मिल गई। सोनम की ओर से पेश वकील ने दावा किया कि गिरफ्तारी के कारण उसे बताए ही नहीं गए थे, लेकिन कोर्ट ने पूछा कि यदि ऐसा था तो यह आपत्ति पहले क्यों नहीं उठाई गई।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश पर उसे कुछ आपत्तियां हैं, लेकिन चूंकि सोनम पहले ही रिहा हो चुकी है इसलिए इस स्तर पर उसकी जमानत पर रोक नहीं लगाई जाएगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कानून के अनुसार आगे कोई कार्रवाई आवश्यक हो तो राज्य सरकार ऐसा करने के लिए स्वतंत्र है।

    यह मामला मई 2025 में सामने आया था। इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की शादी 11 मई को सोनम रघुवंशी से हुई थी। शादी के कुछ दिन बाद दोनों हनीमून के लिए मेघालय गए, जहां 23 मई को दोनों लापता हो गए। 3 जून को राजा का शव एक गहरी खाई से बरामद हुआ। जांच में हत्या की साजिश का खुलासा हुआ और पुलिस ने कई आरोपियों के साथ सोनम रघुवंशी को भी मुख्य साजिशकर्ता बताते हुए गिरफ्तार किया था। फिलहाल वह जमानत पर बाहर है, जबकि मामले की सुनवाई जारी है।