Category: Madhya Pradesh

  • MP के 1 लाख 22 हजार विद्यार्थियों को कल मिलेंगे 25-25 हजार रुपये

    MP के 1 लाख 22 हजार विद्यार्थियों को कल मिलेंगे 25-25 हजार रुपये


    भोपाल। कक्षा 12वीं में प्रथम प्रयास में 75 प्रतिशत या अधिक अंक पाने वाले प्रदेश के मेधावी विद्यार्थियों का आधुनिक तकनीक से जुड़ने का सपना जल्द ही पूरा होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश के लगभग 1 लाख 22 हजार विद्यार्थियों को लैपटॉप खरीदने के लिए 25-25 हजार रुपये की राशि का अंतरण करेंगे। विद्यार्थियों को यह राशि 1 सितंबर को कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर
    , भोपाल में आयोजित लैपटॉप क्रय के लिये राशि वितरण कार्यक्रम के दौरान प्रदान की जाएगी।

    प्रदेश सरकार द्वारा विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने और उन्हें डिजिटल तकनीक से जोड़ने के उद्देश्य से स्कूल शिक्षा विभाग के माध्यम से प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना चलाई जा रही है। इसके अंतर्गत कक्षा 12वीं की परीक्षा में पहले ही प्रयास में 75 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले प्रत्येक पात्र विद्यार्थी को लैपटॉप खरीदने के लिए 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है।

    प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा का संबल

    प्रदेश सरकार द्वारा योजना के अंतर्गत इस वर्ष प्रदेश के लगभग 1 लाख 22 हजार विद्यार्थियों को लाभान्वित किया जा रहा है। प्रत्येक विद्यार्थी के खाते में 25 हजार रुपये की राशि अंतरित की जाएगी। इस प्रकार विद्यार्थियों को कुल 304 करोड़ 98 लाख 50 हजार रुपये से अधिक की राशि का अंतरण किया जाएगा।

    उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार की यह पहल प्रदेश के मेधावी विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए आवश्यक डिजिटल संसाधन उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। लैपटॉप के माध्यम से विद्यार्थी ऑनलाइन अध्ययन, डिजिटल पाठ्य सामग्री, ई-लर्निंग और अन्य तकनीकी संसाधनों का उपयोग कर अपनी शिक्षा को और बेहतर बना सकेंगे।

  • चित्रकूट में लगातार बारिश से मंदाकिनी खतरे के निशान से ऊपर, रामघाट पर जाने पर रोक, 2 दिन स्कूल बंद

    चित्रकूट में लगातार बारिश से मंदाकिनी खतरे के निशान से ऊपर, रामघाट पर जाने पर रोक, 2 दिन स्कूल बंद

    मध्‍य प्रदेश। चित्रकूट में लगातार बारिश के चलते मंदाकिनी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। सोमवार को रामघाट पर नदी खतरे के निशान से करीब दो मीटर ऊपर बहती रही। सतना के पहाड़ी इलाकों और चित्रकूट में हुई बारिश का असर नदी के जलस्तर पर पड़ा। बाढ़ का पानी रामघाट के आसपास स्थित मठ-मंदिरों तक पहुंच गया। भरत मंदिर परिसर में भी पानी घुसने से फर्श पर मलबा जमा हो गया है।

    बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने रामघाट पर बैरिकेडिंग कर लोगों को नदी और घाट क्षेत्र की ओर जाने से रोक दिया है। कई मठ-मंदिरों के निचले हिस्से पानी में डूब गए हैं। पानी कम होने के बाद मंदिरों और घाट क्षेत्र में जमा मलबे की सफाई शुरू करा दी गई है।

    भरत मंदिर में घुसा पानी, मलबे की सफाई शुरू
    मंदाकिनी का पानी भरत मंदिर परिसर में भी पहुंच गया। पानी के साथ बहकर आया मलबा मंदिर के अंदर फर्श पर जमा हो गया। जलस्तर कम होने के बाद मंदिर परिसर में सफाई का काम शुरू कराया गया। आसपास के मठ-मंदिरों में भी पानी और मलबे के कारण सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। प्रशासन की ओर से रामघाट और आसपास के संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है। लोगों को नदी के बढ़े जलस्तर से दूर रहने की हिदायत दी जा रही है।

    सड़क-रास्ते जलमग्न, प्री-प्राइमरी से कक्षा 8 तक स्कूल बंद
    लगातार बारिश और बाढ़ के कारण जिले के कई इलाकों में सड़क और रास्ते जलमग्न हो गए हैं। नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने से आवागमन भी प्रभावित हुआ है। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए डीएम पुलकित गर्ग के आदेश पर 31 अगस्त और 1 सितंबर को जिले के सभी सरकारी और गैर-सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी से कक्षा 8 तक के विद्यार्थियों का अवकाश घोषित किया गया है।

    जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रंजना शुक्ला ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। प्रशासन के अनुसार जलभराव और तेज बहाव के बीच छोटे बच्चों का स्कूल आना जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए दो दिन के लिए अवकाश किया गया है।

    छात्रों की छुट्टी, शिक्षक पहुंचेंगे स्कूल
    बीएसए रंजना शुक्ला के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अवकाश केवल छात्र-छात्राओं के लिए है। स्कूलों में पदस्थ शिक्षक और शिक्षिकाएं निर्धारित समय पर विद्यालय पहुंचेंगे और विभागीय एवं अन्य आवश्यक सरकारी कार्य करेंगे। सभी विद्यालय प्रबंधनों को आदेश का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    प्रशासन ने अभिभावकों से भी अपील की है कि बारिश और अवकाश के दौरान बच्चों को जलभराव वाले इलाकों, नदी-नालों और तेज बहाव वाले पानी के पास न जाने दें।

    फिलहाल प्रशासन की नजर मंदाकिनी के जलस्तर और बारिश की स्थिति पर बनी हुई है। रामघाट पर बैरिकेडिंग के साथ संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई है। पानी उतरने के बाद घाट और मंदिर क्षेत्रों में जमा मलबे की सफाई कर स्थिति सामान्य करने का प्रयास किया जा रहा है।

  • 3200 करोड़ की निवेश ठगी के आरोपी लविश चौधरी को दुबई से लाने की तैयारी तेज! MP STF ने तैयार किए 200 दस्तावेज

    3200 करोड़ की निवेश ठगी के आरोपी लविश चौधरी को दुबई से लाने की तैयारी तेज! MP STF ने तैयार किए 200 दस्तावेज


    भोपाल । निवेश के नाम पर देशभर में करीब 3200 करोड़ रुपए की ठगी के आरोपी लविश उर्फ लविश चौधरी को दुबई से भारत लाने के लिए मध्य प्रदेश एसटीएफ ने प्रत्यर्पण की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली है। विदेश में छिपे किसी आरोपी को वापस भारत लाने के लिए मध्य प्रदेश की किसी जांच एजेंसी की ओर से की जा रही यह पहली बड़ी प्रत्यर्पण कवायद बताई जा रही है। लविश के खिलाफ पहले ब्लू नोटिस और उसके बाद रेड नोटिस जारी कराया जा चुका है। ब्लू नोटिस के जरिए एसटीएफ को उसके दुबई में होने और उसकी लोकेशन की पुष्टि करने में मदद मिली। अब जांच एजेंसी का अगला लक्ष्य आरोपी को दुबई से भारत लाकर भारतीय न्यायिक प्रक्रिया के सामने पेश करना है।

    एसटीएफ ने प्रत्यर्पण की कार्रवाई के लिए केस से जुड़े करीब 200 दस्तावेज अरबी भाषा में तैयार कराए हैं। इन दस्तावेजों को सत्यापन के लिए इंदौर जिला एवं सत्र न्यायालय भेजा गया है। कानूनी प्रक्रिया के तहत उस अदालत से दस्तावेजों का सत्यापन जरूरी है जहां आरोपी के खिलाफ चालान पेश किया गया है। एसटीएफ के डीआईजी राहुल लोढ़ा के मुताबिक अदालत से सत्यापन और मंजूरी मिलने के बाद अगले 15 दिनों में पूरी फाइल दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय भेजी जाएगी। इसके बाद दस्तावेज राज्य स्तरीय प्रक्रिया से गुजरते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय तक पहुंचेंगे और इन्हीं माध्यमों से प्रत्यर्पण का अनुरोध संयुक्त अरब अमीरात के संबंधित प्राधिकरण या अदालत के सामने रखा जाएगा।

    भारत और यूएई के बीच वर्ष 1999 से प्रत्यर्पण संधि लागू है। इसी संधि के तहत तय शर्तों और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार किसी आरोपी के प्रत्यर्पण के अनुरोध पर कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में लविश को भारत लाने की प्रक्रिया अब अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंचने वाली है। इस मामले में एसटीएफ अब तक करीब 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच एजेंसी का फोकस अब विदेश में मौजूद मुख्य आरोपी तक पहुंचने पर है।

    प्रत्यर्पण के लिए तैयार की गई फाइल में आरोपी के खिलाफ दर्ज एफआईआर केस डायरी जांच के दौरान सामने आए साक्ष्य अदालत से जुड़े दस्तावेज और अन्य जरूरी रिकॉर्ड शामिल किए गए हैं। एसटीएफ के अनुसार मूल केस डायरी और ज्यादातर रिकॉर्ड हिंदी में हैं। यूएई की कानूनी प्रक्रिया में दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए इनका अरबी भाषा में अनुवाद कराया गया है। इसके साथ ही अंग्रेजी भाषा की कॉपी भी तैयार की गई है। इस तरह भारतीय जांच से जुड़े दस्तावेजों को यूएई की कानूनी व्यवस्था के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।

    लविश की तलाश में एसटीएफ ने सबसे पहले ब्लू नोटिस का सहारा लिया था। जांच एजेंसी के मुताबिक ब्लू नोटिस के जरिए किसी व्यक्ति की पहचान उसकी लोकेशन या उसकी गतिविधियों से जुड़ी जानकारी हासिल करने में मदद मिलती है। इसी प्रक्रिया के दौरान एसटीएफ को इनपुट मिला कि लविश अपने पासपोर्ट के जरिए दुबई पहुंचा था और इसके बाद उसके बाहर निकलने का कोई रिकॉर्ड सामने नहीं आया। इस जानकारी के आधार पर उसके दुबई में मौजूद होने की पुष्टि की गई।

    इसके बाद एसटीएफ ने उसके खिलाफ रेड नोटिस जारी कराया। रेड नोटिस किसी वांछित व्यक्ति की तलाश और प्रत्यर्पण या इसी तरह की कानूनी कार्रवाई के लिए अस्थायी गिरफ्तारी का अनुरोध होता है। हालांकि रेड नोटिस अपने आप में अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट नहीं होता और जिस देश में आरोपी मौजूद है वहां की कानून व्यवस्था के मुताबिक ही आगे की कार्रवाई होती है।

    अब लविश के मामले में एसटीएफ ने लोकेशन की पुष्टि से आगे बढ़ते हुए प्रत्यर्पण की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। अदालत से दस्तावेजों के सत्यापन के बाद फाइल सीबीआई मुख्यालय पहुंचेगी और फिर केंद्रीय गृह मंत्रालय तथा विदेश मंत्रालय के जरिए यूएई के संबंधित प्राधिकरण तक मामला पहुंचेगा। इसके बाद दुबई में आरोपी के प्रत्यर्पण को लेकर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

  • 3 हजार से 4-5 हजार रुपए तक ही अटका वेतन: 23 साल बाद भी नियमितीकरण नहीं, 7 सितंबर को BJP ऑफिस पहुंचकर कर्मचारी मांगेंगे हक

    3 हजार से 4-5 हजार रुपए तक ही अटका वेतन: 23 साल बाद भी नियमितीकरण नहीं, 7 सितंबर को BJP ऑफिस पहुंचकर कर्मचारी मांगेंगे हक


    भोपाल । मध्य प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में वर्षों से काम कर रहे अस्थायी और अंशकालीन कर्मचारियों ने अब अपनी मांगों को लेकर सरकार और भाजपा संगठन के सामने मोर्चा खोलने की तैयारी कर ली है। स्कूलों छात्रावासों पंचायतों अस्पतालों और नगरीय निकायों समेत अलग अलग विभागों में सेवाएं दे रहे सैकड़ों कर्मचारी 7 सितंबर को भोपाल स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंचेंगे। कर्मचारी संगठन का कहना है कि वे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को वर्ष 2003 में किए गए उस वादे की याद दिलाएंगे जिसमें अस्थायी कर्मचारियों को नियमित कर शासकीय सेवक का दर्जा देने की बात कही गई थी। संगठन ने चेतावनी दी है कि मांगों पर ठोस निर्णय नहीं हुआ तो पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा के सामने धरना प्रदर्शन शुरू किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर आंदोलन को अनिश्चितकालीन धरना अनशन में बदला जा सकता है।

    अस्थायी आउटसोर्स कर्मचारी मोर्चा की ओर से भाजपा संगठन को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि वर्ष 2003 का विधानसभा चुनाव अस्थायी कर्मचारियों के मुद्दे पर लड़ा गया था। संगठन के मुताबिक उस समय तत्कालीन भाजपा नेता उमा भारती ने कर्मचारियों की मांगों के समर्थन में वल्लभ भवन के सामने अनिश्चितकालीन धरना दिया था। प्रदेशभर में यात्राएं कर अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने और उन्हें शासकीय सेवक का दर्जा देने का वादा भी किया गया था। कर्मचारियों का कहना है कि उस समय से अब तक करीब 23 साल बीत चुके हैं लेकिन उनकी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।

    कर्मचारी नेताओं के मुताबिक सरकारी विभागों के नियमित कर्मचारियों की तरह ही अस्थायी और अंशकालीन कर्मचारी भी लंबे समय से महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। स्कूलों और छात्रावासों में सफाई खाना बनाने और भृत्य के काम से लेकर पंचायतों में चौकीदारी नल जल व्यवस्था अस्पतालों में विभिन्न सेवाओं नगरीय निकायों में सफाई और टैक्स वसूली जैसे काम भी इन कर्मचारियों से कराए जा रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें बेहद कम मानदेय या वेतन मिलने का आरोप संगठन ने लगाया है।

    मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा का कहना है कि 2003 में अंशकालीन कर्मचारियों को करीब 3 हजार रुपए मिलते थे जबकि आज भी कई कर्मचारियों को महज 4 से 5 हजार रुपए ही मिल रहे हैं। इसी तरह पंचायतों के चौकीदार और नल जल कर्मचारी उस समय करीब 2 हजार रुपए पाते थे और वर्तमान में भी कई कर्मचारियों का भुगतान 2 से 3 हजार रुपए के आसपास होने का दावा किया गया है। संगठन का कहना है कि 23 साल में महंगाई कई गुना बढ़ गई लेकिन हजारों कर्मचारियों की आय में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई।

    कर्मचारी नेताओं ने वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की ओर से अस्थायी कर्मचारियों का वेतन दोगुना करने की घोषणा का भी उल्लेख किया है। उनका आरोप है कि यह घोषणा भी पूरी तरह लागू नहीं हो सकी। अब संगठन सरकार द्वारा निर्धारित 12,425 रुपए न्यूनतम वेतन दिए जाने की मांग कर रहा है।

    कर्मचारी संगठन ने आंदोलन को दो चरणों में रखने की जानकारी दी है। स्कूलों छात्रावासों और विभिन्न विभागों में काम करने वाले अंशकालीन कर्मचारी 7 सितंबर को भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंचकर अपनी मांग रखेंगे जबकि ग्राम पंचायतों के चौकीदार नल जल चालक और अन्य कर्मचारी 8 सितंबर को संगठन के सामने अपनी बात रखेंगे। कर्मचारियों ने सरकार के 1.62 लाख रुपए प्रति व्यक्ति वार्षिक आय के दावे पर भी सवाल उठाते हुए कहा है कि जब बड़ी संख्या में कर्मचारी बेहद कम मासिक आय में काम कर रहे हैं तो उनके जीवन यापन और आर्थिक सुरक्षा पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

    अब कर्मचारियों की नजर 7 और 8 सितंबर को होने वाले प्रदर्शन पर है। संगठन का कहना है कि वह सरकार से केवल आश्वासन नहीं बल्कि न्यूनतम वेतन और स्थायीकरण को लेकर स्पष्ट निर्णय चाहता है। मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो भाजपा कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना अनशन शुरू करने की चेतावनी दी गई है।

  • आतंकवादियों की बहन बयान पर विजय शाह को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: अभियोजन मंजूरी का फैसला राज्यपाल के पास, कोर्ट ने कहा रिपोर्ट पेश करें

    आतंकवादियों की बहन बयान पर विजय शाह को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: अभियोजन मंजूरी का फैसला राज्यपाल के पास, कोर्ट ने कहा रिपोर्ट पेश करें


    भोपाल । मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह से जुड़े विवादित बयान के मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए बयान के बाद दर्ज FIR को चुनौती देने वाले मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जांच और अभियोजन मंजूरी की स्थिति पर जानकारी ली। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के सामने सरकार की ओर से बताया गया कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और जांच रिपोर्ट फिलहाल सीलबंद है। अब चार्जशीट या क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने से पहले सक्षम प्राधिकारी से अभियोजन की मंजूरी लेना जरूरी है। सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि इस मामले में कैबिनेट स्तर पर विचार हो चुका है और फाइल अंतिम निर्णय के लिए राज्यपाल के पास भेजी गई है।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच की स्थिति को लेकर स्पष्ट सवाल किया कि जब जांच रिपोर्ट पूरी तरह तैयार है तो क्या अब केवल सरकार की मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है। सरकार की ओर से इसकी पुष्टि की गई। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज ने बताया कि कैबिनेट इस विषय पर विचार कर चुकी है और फाइल राज्यपाल के पास भेजी गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही इस पर अंतिम निर्णय हो जाएगा। सरकार की ओर से मंत्री के माफीनामे का भी हवाला दिया गया। अदालत से अनुरोध किया गया कि सक्षम प्राधिकारी जब मामले पर विचार करे तो विजय शाह की ओर से घटना के अगले दिन सार्वजनिक रूप से मांगी गई माफी को भी ध्यान में रखा जाए।

    विजय शाह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने भी अदालत के सामने यही बात रखी कि मंत्री ने बयान के बाद माफी मांग ली थी और इस तथ्य को रिकॉर्ड पर लिया जाना चाहिए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मामले के गुण दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की। अदालत ने कहा कि जांच पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट सीलबंद है। अभियोजन मंजूरी का विषय फिलहाल सक्षम प्राधिकारी के सामने लंबित है। मंजूरी मिलने के बाद सीलबंद रिपोर्ट को संबंधित सक्षम अदालत के सामने पेश किया जाएगा।

    सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जांच अधिकारी और DIG इंटेलिजेंस डी कल्याण चक्रवर्ती की भूमिका को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। अदालत ने कहा कि जांच अधिकारी अपना काम पूरा कर चुके हैं इसलिए उन्हें बार बार व्यक्तिगत रूप से अदालत में आने की जरूरत नहीं है। अब सक्षम प्राधिकारी के फैसले के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि अभियोजन की मंजूरी नहीं मिलती है तो क्लोजर रिपोर्ट दाखिल किए जाने की बात भी अदालत के सामने रखी गई।

    मामला मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह की उस टिप्पणी से जुड़ा है जो उन्होंने 11 मई 2025 को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में हलमा कार्यक्रम के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर की थी। ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में दिए गए बयान में उन्होंने कर्नल सोफिया को आतंकवादियों की बहन कहकर टिप्पणी की थी। बयान सामने आने के बाद इस पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया हुई थी। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मामले का स्वत संज्ञान लिया था और बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया गया।

    इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले भी मध्य प्रदेश सरकार के रुख पर नाराजगी जता चुका है। अभियोजन की मंजूरी में देरी को लेकर अदालत ने सरकार को सख्त चेतावनी दी थी और कहा था कि उसके निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए। पिछली सुनवाई में मंत्री की ओर से कई बार माफी मांगे जाने की दलील भी दी गई थी लेकिन अदालत ने इसे पर्याप्त नहीं माना था।

    अब पूरा मामला अभियोजन की मंजूरी पर टिक गया है। मध्य प्रदेश कैबिनेट ने मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी नहीं देने का प्रस्ताव राज्यपाल को भेजा है। राज्यपाल के निर्णय के बाद ही यह तय होगा कि सीलबंद जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे अभियोजन की कार्रवाई होगी या मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की जाएगी।

  • बैरसिया रोड पर तेज रफ्तार ट्रक ने ली मैकेनिक की जान, पीछे से टक्कर के बाद दो ट्रकों के बीच फंसे प्यारे मियां

    बैरसिया रोड पर तेज रफ्तार ट्रक ने ली मैकेनिक की जान, पीछे से टक्कर के बाद दो ट्रकों के बीच फंसे प्यारे मियां


    भोपाल । भोपाल के ईंटखेड़ी इलाके में रविवार रात एक दर्दनाक सड़क हादसे में 54 वर्षीय फोर व्हील मैकेनिक की मौत हो गई। प्यारे मियां रोज की तरह अपने परिवार के साथ लांबाखेड़ा स्थित घर पर थे और रात करीब 8 बजे दूध लेने के लिए चौरसिया ढाबे की तरफ निकले थे। उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि घर से कुछ दूरी पर हुआ एक सड़क हादसा उनकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा। ढाबे के पास पहुंचते ही पीछे से तेज रफ्तार में आ रहे एक ट्रक ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि वे संभल भी नहीं सके और ट्रक के आगे बढ़ने के साथ ही सामने खड़े दूसरे ट्रक की चपेट में आ गए।

    बताया जा रहा है कि सड़क पर पहले से एक ट्रक खड़ा हुआ था। पीछे से आ रहे ट्रक ने प्यारे मियां को टक्कर मारने के बाद आगे खड़े ट्रक को भी टक्कर मार दी। इस दौरान प्यारे मियां दोनों भारी वाहनों के बीच फंस गए। हादसा इतना भीषण था कि उन्हें बचने का मौका तक नहीं मिला और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों में अफरा तफरी मच गई। हादसे की जानकारी तत्काल पुलिस को दी गई।

    सूचना मिलते ही ईंटखेड़ी थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का जायजा लिया और शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। सोमवार को पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। हादसे के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है। प्यारे मियां के अचानक चले जाने से परिजन सदमे में हैं।

    पुलिस के मुताबिक हादसे के बाद ट्रक चालक मौके पर वाहन छोड़कर फरार हो गया। पुलिस अब ट्रक को कब्जे में लेकर चालक की तलाश कर रही है। घटनास्थल के आसपास मौजूद लोगों से पूछताछ के साथ हादसे की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ट्रक की रफ्तार कितनी थी और सड़क पर खड़े दूसरे ट्रक की स्थिति क्या थी।

    बैरसिया रोड और आसपास के इलाकों में भारी वाहनों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। ऐसे में सड़क पर खड़े वाहनों और तेज रफ्तार ट्रकों के कारण हादसों का खतरा बढ़ जाता है। इस घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और भारी वाहनों की रफ्तार को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। रात के समय सड़क पर पर्याप्त सावधानी नहीं बरतने और वाहनों के बीच सुरक्षित दूरी नहीं होने की स्थिति कितनी खतरनाक हो सकती है इसका दर्दनाक उदाहरण यह हादसा बन गया है।

    फिलहाल ईंटखेड़ी थाना पुलिस फरार ट्रक चालक की तलाश में जुटी है। पुलिस हादसे से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। वहीं पोस्टमार्टम के बाद प्यारे मियां का शव परिजनों को सौंप दिया गया है। परिवार के लिए यह हादसा अचानक आई ऐसी त्रासदी है जिसने कुछ ही देर में एक सामान्य रात को मातम में बदल दिया।

  • भोपाल में ईद मिलादुन्नबी के महिला अखाड़े पर विवाद तेज, शहर मुफ्ती के बयान पर विरोध; कमेटी बोली- आत्मरक्षा के हुनर को डांस न कहें

    भोपाल में ईद मिलादुन्नबी के महिला अखाड़े पर विवाद तेज, शहर मुफ्ती के बयान पर विरोध; कमेटी बोली- आत्मरक्षा के हुनर को डांस न कहें


    भोपाल । भोपाल में ईद मिलादुन्नबी के पारंपरिक जुलूस के दौरान महिला अखाड़े के प्रदर्शन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। 26 अगस्त को मंगलवारा चौराहे से निकले जुलूस में महिला प्रतिभागियों के तलवारबाजी और अखाड़े के करतब दिखाने का वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद शहर मुफ्ती अबुल कलाम की टिप्पणी पर मुस्लिम त्योहार कमेटी ने कड़ी आपत्ति जताई है। शहर मुफ्ती ने इस प्रदर्शन को डांस बताते हुए सवाल उठाया था कि यह अखाड़ा था या डांस। उनके इसी बयान को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के जिला अध्यक्ष ओसाफ अली ने नाराजगी जताई और शहर मुफ्ती के इस्तीफे की मांग कर दी। विवाद के बीच हाफिज अहमद शाहमीरी खुर्रम ने भी वीडियो जारी कर शहर मुफ्ती के बयान पर सवाल खड़े किए हैं।

    दरअसल ईद मिलादुन्नबी के मौके पर निकले पारंपरिक जुलूस में महिला अखाड़े की प्रतिभागियों ने हाथों में तलवारें लेकर करतब दिखाए थे। सामने आई तस्वीरों में बुर्का पहने महिलाएं अखाड़े के प्रदर्शन में हिस्सा लेती दिखाई दे रही हैं। कुछ प्रतिभागियों के हाथों में घुमावदार तलवारें भी नजर आ रही हैं। आसपास बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे और कई लोग मोबाइल फोन से इस प्रदर्शन का वीडियो बनाते नजर आए। इसी प्रदर्शन को लेकर शहर मुफ्ती अबुल कलाम ने सवाल उठाते हुए इसे डांस बताया और जुलूस की धार्मिक गरिमा को लेकर आपत्ति जताई।

    मुस्लिम त्योहार कमेटी ने शहर मुफ्ती की इस टिप्पणी को गलत करार दिया है। जिला अध्यक्ष ओसाफ अली का कहना है कि प्रदर्शन को पूरी जानकारी लिए बिना डांस कहना उचित नहीं है। उनके मुताबिक जुलूस में शामिल बच्चियां और महिलाएं किसी मनोरंजन के लिए डांस नहीं कर रही थीं बल्कि अखाड़े की पारंपरिक कला और आत्मरक्षा से जुड़े हुनर का प्रदर्शन कर रही थीं। उनका कहना है कि ऐसे प्रदर्शन से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ता है और इसे प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

    हाफिज अहमद शाहमीरी खुर्रम ने भी वीडियो जारी कर कहा कि शहर मुफ्ती को प्रदर्शन पर टिप्पणी करने से पहले पूरा संदर्भ समझना चाहिए था। उन्होंने दावा किया कि वीडियो को ध्यान से देखने पर साफ होता है कि बच्चियां डांस नहीं बल्कि अखाड़े के करतब और सेल्फ डिफेंस का प्रदर्शन कर रही थीं। उन्होंने धार्मिक और ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए आत्मरक्षा के लिए हथियार चलाने की कला को केवल डांस के रूप में देखने पर सवाल उठाया।

    विवाद के दौरान उन्होंने शहर मुफ्ती से यह भी अपील की कि यदि किसी सामाजिक या धार्मिक गतिविधि पर प्रतिक्रिया देनी है तो सभी मामलों में समान मापदंड अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने यूसीसी और एनआरसी जैसे मुद्दों तथा मसाजिद कमेटी से जुड़े कुछ मामलों का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि कुछ गतिविधियों पर प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी गई जबकि महिला अखाड़े के प्रदर्शन पर टिप्पणी की गई।

    ओसाफ अली ने शहर मुफ्ती के पद की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह पद समाज का मार्गदर्शन करने और लोगों को जोड़ने का है। उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक पद पर रहते हुए राजनीतिक बयानबाजी से बचना चाहिए। उन्होंने काज़ियात कैंपस में पूर्व में हुए कुछ कार्यक्रमों का भी जिक्र किया और दावा किया कि वहां ढोल नगाड़े बजने तथा राजनीतिक कार्यक्रमों के वीडियो सामने आए थे। उनका सवाल है कि यदि उन गतिविधियों पर आपत्ति नहीं जताई गई तो महिला अखाड़े के पारंपरिक प्रदर्शन पर सवाल क्यों उठाया गया।

    कमेटी ने साफ किया कि उसका उद्देश्य किसी धार्मिक व्यक्ति का अपमान करना नहीं है बल्कि धार्मिक पद की गरिमा और निष्पक्षता को लेकर जवाब मांगना है। ओसाफ अली ने शहर मुफ्ती अब्दुल कलाम के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि जिम्मेदारी ऐसे व्यक्ति को दी जानी चाहिए जो योग्य होने के साथ निष्पक्ष रूप से समाज का मार्गदर्शन कर सके। फिलहाल महिला अखाड़े के प्रदर्शन को लेकर शुरू हुआ यह विवाद धार्मिक परंपरा आत्मरक्षा की कला और धार्मिक नेतृत्व की भूमिका को लेकर बहस का विषय बन गया है।

  • MP में बारिश का रौद्र रूप जारी, रीवा-शहडोल समेत कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट; अगले 3 दिन अति भारी बारिश की आशंका

    MP में बारिश का रौद्र रूप जारी, रीवा-शहडोल समेत कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट; अगले 3 दिन अति भारी बारिश की आशंका


    भोपाल । मध्यप्रदेश में मानसून एक बार फिर जोर पकड़ता नजर आ रहा है। प्रदेश के पूर्वी हिस्से में स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव होने के बाद कई जिलों में भारी बारिश का दौर जारी है। शहडोल के बाणसागर डैम में तेजी से पानी की आवक बढ़ने के बाद इसके 6 गेट खोल दिए गए हैं। वहीं सतना और चित्रकूट में बाढ़ जैसे हालात ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। लगातार बारिश को देखते हुए सतना में 31 अगस्त से 1 सितंबर तक स्कूलों में छुट्टी घोषित की गई है जबकि मैहर में भी सोमवार को स्कूल बंद रखने का फैसला लिया गया है। मौसम विभाग ने सोमवार को रीवा मऊगंज मैहर सीधी उमरिया शहडोल डिंडौरी अनूपपुर मंडला सिवनी और बालाघाट में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।

    भोपाल समेत प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है। राजधानी भोपाल में बड़ा तालाब लगभग भरने की स्थिति में पहुंच गया है। तालाब का जलस्तर 1666.50 फीट तक पहुंच चुका है और अब यह फुल टैंक लेवल से महज 0.30 फीट नीचे है। इसके पूरी तरह भरने के बाद भदभदा डैम के गेट खोले जाने की संभावना है। इससे कलियासोत डैम में भी पानी की आवक बढ़ सकती है। लगातार बारिश के कारण प्रदेश के अधिकांश जलाशयों में पानी का स्तर तेजी से सुधरा है और कई बांधों में 70 प्रतिशत से ज्यादा पानी पहुंच चुका है।

    पूर्वी मध्यप्रदेश में बारिश ने कई इलाकों में मुश्किलें भी खड़ी कर दी हैं। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी करीब 30 फीट तक उफान पर पहुंच गई थी। गोरगी बांध फूटने के बाद कई इलाकों में पानी भर गया। तेज बहाव के कारण रामघाट का बड़ा पुल भी बह गया। बाढ़ का पानी उतरने के बाद सड़कों और घरों में मिट्टी कीचड़ और मलबा जमा है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने चित्रकूट पहुंचकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया और राहत शिविर में प्रभावित लोगों से मुलाकात की। उन्होंने अतिक्रमण को भी बाढ़ की संभावित वजहों में शामिल बताया।

    शहडोल के बाणसागर डैम में भी पानी की आवक अचानक बढ़ी। डैम में पानी की आवक 808.64 क्यूमेक्स से बढ़कर 12 घंटे में 2677.29 क्यूमेक्स हो गई। इसके बाद दोपहर में डैम के 6 गेट खोल दिए गए। निचले इलाकों में प्रशासन की ओर से अलर्ट जारी किया गया है। सिंगरौली मंडला सतना और अन्य जिलों में भी भारी बारिश के कारण नदी नाले उफान पर रहे।

    मौसम विभाग ने सितंबर की शुरुआत के अगले तीन दिनों में भी कई जिलों में अति भारी बारिश की आशंका जताई है। सीधी उमरिया मंडला निवाड़ी छतरपुर पन्ना दमोह नरसिंहपुर और नर्मदापुरम समेत कई क्षेत्रों में 4 से 8 इंच तक बारिश हो सकती है। ऐसे में नदी नालों और निचले इलाकों के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।

    प्रदेश में अब तक करीब 700 मिलीमीटर यानी 27.2 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है। यह सामान्य औसत 30.4 इंच से करीब 3.2 इंच कम है। कुल मिलाकर प्रदेश में सामान्य से 9 प्रतिशत कम बारिश हुई है। पूर्वी हिस्से में करीब 5 प्रतिशत जबकि पश्चिमी हिस्से में 12 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि अनूपपुर निवाड़ी सतना शहडोल सीधी सिंगरौली उमरिया समेत कुछ जिलों में औसत से ज्यादा बारिश हुई है। लगातार सक्रिय मौसम प्रणाली के कारण आने वाले दिनों में बारिश का आंकड़ा और बढ़ने की संभावना है।

  • राहुल गांधी पर FIR से एमपी कांग्रेस में उबाल, पटवारी बोले दलित विरोधी है BJP, कमलनाथ ने कहा चोरी और सीनाजोरी

    राहुल गांधी पर FIR से एमपी कांग्रेस में उबाल, पटवारी बोले दलित विरोधी है BJP, कमलनाथ ने कहा चोरी और सीनाजोरी

    भोपाल । उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद कथित शुद्धिकरण यज्ञ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब मध्य प्रदेश की सियासत में भी जोर पकड़ चुका है। राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने बीजेपी और आरएसएस पर तीखा हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे दलितों के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया है। दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि जिस मामले में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के अपमान का आरोप लगाया जा रहा है उसमें दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय राहुल गांधी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।

    जीतू पटवारी ने बीजेपी की विचारधारा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद सभा स्थल का शुद्धिकरण कराया गया। पटवारी के मुताबिक जब राहुल गांधी ने इस कथित घटना और छुआछूत के मुद्दे को सार्वजनिक तौर पर उठाया तो उनके खिलाफ ही FIR दर्ज करा दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी के सिस्टम में दलितों के लिए जगह नहीं है और आवाज उठाने वालों को दबाने की कोशिश की जा रही है। पटवारी ने इस पूरे घटनाक्रम को बीजेपी और आरएसएस की दलित विरोधी सोच से जोड़ते हुए सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए।

    पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी इस मामले में बीजेपी पर हमला बोला। उन्होंने कार्रवाई को चोरी और सीनाजोरी करार देते हुए कहा कि पहले दलित नेता के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला कदम उठाया गया और जब उसका विरोध किया गया तो विरोध करने वाले नेता के खिलाफ ही गंभीर धाराओं में FIR दर्ज कर दी गई। कमलनाथ ने कहा कि कांग्रेस पार्टी मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने दावा किया कि इस घटनाक्रम को लेकर दलित समाज में नाराजगी पैदा हुई है और आने वाले समय में इसका राजनीतिक असर देखने को मिल सकता है।

    दरअसल विवाद उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित रामलीला मैदान से जुड़ा है। यहां कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा आयोजित हुई थी। आरोप है कि रैली समाप्त होने के कुछ दिन बाद श्री राम सेना नाम के संगठन से जुड़े लोगों ने मैदान में शुद्धिकरण यज्ञ और हवन किया। कांग्रेस ने इस घटना को जातिगत भेदभाव और छुआछूत की मानसिकता से जोड़ते हुए विरोध जताया। कांग्रेस की ओर से यह सवाल उठाया गया कि क्या किसी दलित नेता के कार्यक्रम के बाद सार्वजनिक स्थान को शुद्ध करने की जरूरत पड़ती है।

    मामले ने तब और राजनीतिक रंग ले लिया जब राहुल गांधी ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि देश में छुआछूत जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ सख्त रुख जरूरी है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तराखंड सरकार से कथित शुद्धिकरण के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। उन्होंने इस घटना को छुआछूत से जोड़ते हुए इसे संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ बताया।
    मामले ने तब और राजनीतिक रंग ले लिया जब राहुल गांधी ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि देश में छुआछूत जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ सख्त रुख जरूरी है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तराखंड सरकार से कथित शुद्धिकरण के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। उन्होंने इस घटना को छुआछूत से जोड़ते हुए इसे संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ बताया।

    राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के अगले दिन हल्द्वानी में उनके खिलाफ FIR दर्ज होने से विवाद और गहरा गया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यह मामला वाल्मीकि समाज से जुड़े अमित कुमार की शिकायत पर दर्ज किया गया। शिकायत में दावा किया गया कि मैदान में केवल साफ सफाई अभियान और धार्मिक अनुष्ठान हुआ था तथा इसका किसी जाति या मल्लिकार्जुन खड़गे से संबंध नहीं था। शिकायतकर्ता ने राहुल गांधी पर धार्मिक आयोजन को छुआछूत से जोड़कर जातिगत तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया।

    पुलिस ने राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 और धारा 299 के साथ SC-ST अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। FIR के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस का विरोध सामने आने से यह विवाद अब उत्तराखंड तक सीमित नहीं रहा है। बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप प्रत्यारोप तेज होने के साथ मामला राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।

  • स्कूल ऑडिट की बैठक में घुसे युवाओं ने किया विरोध, CJP से तीखे सवाल और नारेबाजी, माइक छीनने की कोशिश के आरोप पर पहुंची पुलिस

    स्कूल ऑडिट की बैठक में घुसे युवाओं ने किया विरोध, CJP से तीखे सवाल और नारेबाजी, माइक छीनने की कोशिश के आरोप पर पहुंची पुलिस


    भोपाल । भोपाल में सरकारी स्कूलों के ऑडिट को लेकर रविवार शाम गांधी भवन में आयोजित CJP की बैठक उस समय हंगामे में बदल गई जब कुछ छात्र और युवा बैठक के दौरान पहुंच गए। अभियान से जुड़े लोगों की बात सुनने के बाद युवाओं ने स्कूल ऑडिट और CJP की गतिविधियों को लेकर सवाल उठाने शुरू किए। बातचीत के दौरान मामला इतना बढ़ गया कि नारेबाजी होने लगी और बैठक का माहौल तनावपूर्ण हो गया। छात्रों ने यह दिल्ली नहीं भोपाल है कॉकरोच पार्टी मुर्दाबाद और तानाशाही नहीं चलेगी जैसे नारे लगाए। हंगामे की सूचना मिलने के बाद पुलिस बल गांधी भवन पहुंचा और युवाओं को समझाइश देकर वहां से रवाना किया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बैठक के दौरान छात्रों का एक समूह अंदर पहुंचा था। इनमें कुछ युवक काली टीशर्ट पहने हुए थे। उन्होंने CJP के प्रतिनिधियों से सरकारी स्कूलों के ऑडिट को लेकर सवाल किए। युवाओं ने दिल्ली में हुए पिछले प्रदर्शनों और संगठन की गतिविधियों को लेकर भी जवाब मांगा। छात्र अंश पुरोहित ने कहा कि उनका किसी समुदाय या राजनीतिक दल के खिलाफ विरोध नहीं है। उन्होंने पुलिस और सेना के सम्मान की बात कहते हुए किसी भी तरह की हिंसा का समर्थन नहीं करने की बात कही।

    छात्रों का कहना था कि वे बैठक में विरोध करने के इरादे से नहीं पहुंचे थे बल्कि चर्चा सुनना और अपने सवालों के जवाब लेना चाहते थे। उनका सवाल था कि दिल्ली में हुए विवादों के बाद भोपाल में अभियान चलाते समय ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। छात्रों ने कुछ गतिविधियों को एंटीनेशनल बताते हुए CJP से अभियान के उद्देश्य और उसकी कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल किए।

    विवाद उस समय और बढ़ गया जब छात्रों ने आरोप लगाया कि उनके हाथ से माइक लेने की कोशिश की गई। अंश पुरोहित के मुताबिक माइक लेने की कोशिश कई बार हुई। इसके बाद वहां मौजूद कुछ छात्र भावुक हो गए और नारेबाजी शुरू हो गई। हंगामे के बीच CJP की एक महिला प्रतिनिधि ने छात्रों को समझाने का प्रयास किया और पहले पूरी बात सुनने की बात कही। इस पर छात्रों ने सवाल किया कि अगर उनकी पूरी बात नहीं सुनी जाएगी तो वे अपने सवाल कैसे पूछ पाएंगे। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी रही। हालांकि माइक छीनने के आरोपों पर CJP की ओर से कोई अलग आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

    CJP की अभियान कोऑर्डिनेटर माया विश्वकर्मा ने बैठक को लेकर बताया कि स्कूल ठीक करो अभियान के तहत मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों की जमीनी स्थिति का नागरिक स्तर पर ऑडिट किया जाना है। उनके मुताबिक ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में कई बार अधिकारी नियमित रूप से नहीं पहुंच पाते। ऐसे में नागरिकों की भागीदारी के जरिए स्कूलों की वास्तविक स्थिति का डेटा तैयार करने की योजना है।

    इस ऑडिट में स्कूलों में पानी शौचालय बिजली कक्षाओं की स्थिति शिक्षक और विद्यार्थियों का अनुपात विद्यार्थियों की उपस्थिति पाठ्यपुस्तक यूनिफॉर्म छात्रवृत्ति और मिडडे मील जैसी सुविधाओं को देखा जाएगा। इसके अलावा स्कूल भवन की सुरक्षा फर्स्टएड अग्निशामक यंत्र दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए सुविधाएं पुस्तकालय और कंप्यूटर की उपलब्धता की भी जानकारी जुटाई जाएगी।

    माया विश्वकर्मा के अनुसार अभियान की शुरुआत 15 अगस्त से की गई थी। भोपाल की बैठक के बाद नरसिंहपुर जिले के साईंखेड़ा ब्लॉक में एक स्कूल का ऑडिट किया जाना है। इसके बाद भोपाल सहित प्रदेश के अन्य इलाकों में भी सर्वे किया जाएगा। अभियान की शुरुआत फिलहाल स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं से की जा रही है और आगे बच्चों के पाठ्यक्रम शिक्षकों तथा अन्य शैक्षणिक समस्याओं को भी इसमें शामिल किया जाएगा। बैठक में हुआ हंगामा भले ही खत्म हो गया हो लेकिन इस घटनाक्रम ने CJP के अभियान और उसके उद्देश्य को लेकर अलग अलग पक्षों के सवालों को जरूर सामने ला दिया है।