Category: Madhya Pradesh

  • महिला के पैर पकड़कर बचाई जान इंदौर में जर्जर मकान खाली कराने निगम अधिकारी का मानवीय चेहरा फिर चला बुलडोजर

    महिला के पैर पकड़कर बचाई जान इंदौर में जर्जर मकान खाली कराने निगम अधिकारी का मानवीय चेहरा फिर चला बुलडोजर


    इंदौर  लगातार हो रही बारिश के बीच इंदौर नगर निगम की एक कार्रवाई ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। शहर के परदेशीपुरा क्षेत्र में एक जर्जर मकान को गिराने पहुंची निगम की टीम को परिवार के विरोध का सामना करना पड़ा लेकिन कार्रवाई के दौरान जो दृश्य सामने आया उसने हर किसी को भावुक कर दिया। परिवार को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए नगर निगम के रिमूवल प्रभारी ने एक महिला के पैर पकड़ लिए और हाथ जोड़कर मकान खाली करने की अपील की। आखिरकार समझाइश सफल रही और परिवार के बाहर आने के बाद जर्जर मकान को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया।

    नगर निगम की टीम वर्मा नर्सिंग होम के पास स्थित रतिराम खटके के पुराने और जर्जर मकान को हटाने पहुंची थी। अधिकारियों के अनुसार इस भवन को वर्ष 2021 से कई बार नोटिस जारी किए जा चुके थे। हाल ही में हुए निरीक्षण में भवन की नींव कमजोर और पूरी संरचना अत्यंत खतरनाक पाई गई थी। लगातार बारिश के कारण मकान कभी भी गिर सकता था जिससे बड़ा हादसा होने की आशंका थी।

    कार्रवाई के दौरान मकान में रहने वाली महिला ने घर खाली करने से इनकार करते हुए अपने घरेलू सामान की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। उसने कहा कि सामान रखने की व्यवस्था होने के बाद ही वह मकान खाली करेगी। इसके बाद रिमूवल प्रभारी बबलू कल्याणे स्वयं मकान के अंदर गए और पूरा सामान देखा। उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि उनका सामान पास की सुरक्षित जगह पर रखवा दिया जाएगा और किसी भी वस्तु को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।

    काफी देर तक समझाने के बावजूद जब महिला तैयार नहीं हुई तो स्थिति भावुक हो गई। परिवार की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अधिकारी बबलू कल्याणे ने महिला के पैर पकड़ लिए और आग्रह किया कि वह अपनी और अपने परिवार की जान बचाने के लिए मकान खाली कर दे। अधिकारी का यह मानवीय व्यवहार देखकर वहां मौजूद लोग भी भावुक हो गए। अंततः महिला और उसके परिवार ने अधिकारियों की बात मान ली और सुरक्षित बाहर आ गए।

    परिवार के बाहर निकलने के बाद पुलिस की मौजूदगी में नगर निगम ने करीब दो हजार वर्गफीट क्षेत्र में बने जर्जर मकान को बुलडोजर की मदद से गिरा दिया। इस भवन में अलग अलग परिवार रह रहे थे जिन्हें पहले ही सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया था। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई किसी प्रकार की सख्ती दिखाने के लिए नहीं बल्कि संभावित जनहानि को रोकने के उद्देश्य से की गई।

    नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि बारिश के मौसम में शहर के सभी चिन्हित जर्जर भवनों का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। जिन भवनों से लोगों की जान को खतरा है उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी। प्रशासन का कहना है कि लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि है और किसी भी संभावित हादसे से पहले ऐसे भवनों को हटाना जरूरी है।

    इंदौर की यह घटना केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं बल्कि संवेदनशीलता और मानवीय जिम्मेदारी का उदाहरण भी बन गई है। एक अधिकारी ने नियमों के साथ इंसानियत को भी प्राथमिकता दी और समय रहते एक संभावित बड़े हादसे को टालने में अहम भूमिका निभाई।

  • ग्रेनाइट खदान बनी काल 40 फीट ऊंचाई से गिरी चट्टान ट्रैक्टर के हुए टुकड़े मध्य प्रदेश के 5 मजदूरों सहित 7 की मौत

    ग्रेनाइट खदान बनी काल 40 फीट ऊंचाई से गिरी चट्टान ट्रैक्टर के हुए टुकड़े मध्य प्रदेश के 5 मजदूरों सहित 7 की मौत


    मध्यप्रदेश । कर्नाटक के बेंगलुरु के निकट स्थित मदापट्टना की एक ग्रेनाइट खदान में गुरुवार को हुए भीषण हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। करीब 40 फीट ऊंचाई से विशाल चट्टान गिरने से मध्य प्रदेश के पांच मजदूरों समेत सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि पांच अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा इतना भयावह था कि चट्टान की चपेट में आने से ट्रैक्टर और लोडिंग वाहन पूरी तरह टूटकर कई हिस्सों में बिखर गए। खदान में काम कर रहे मजदूरों के बीच अफरा तफरी मच गई और हर तरफ चीख पुकार सुनाई देने लगी।

    हादसे के समय खदान में करीब 16 मजदूर पत्थर निकालने का काम कर रहे थे। शुरुआती जानकारी के अनुसार ऊपरी हिस्से में ड्रिलिंग का कार्य चल रहा था तभी अचानक विशाल ग्रेनाइट चट्टान खिसककर नीचे आ गिरी। नीचे काम कर रहे मजदूरों को संभलने का मौका भी नहीं मिला और कई लोग भारी मलबे के नीचे दब गए। राहत एवं बचाव दल ने कई घंटे तक अभियान चलाकर घायलों और मृतकों को बाहर निकाला। गंभीर रूप से घायल मजदूरों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया जहां उनका इलाज जारी है।

    इस हादसे में जान गंवाने वाले पांचों मजदूर मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के जैतहरी क्षेत्र के रहने वाले थे। मृतकों की पहचान भुवनेश्वर सिंह गौंड राजपाल सिंह रामअवतार सिंह और राजेश प्रसाद चौधरी के रूप में हुई है जबकि एक अन्य मृतक की पहचान की प्रक्रिया जारी है। वहीं गुलाब सिंह राजपाल सिंह और छोटू लाल सहित कई मजदूर घायल हुए हैं। बताया जा रहा है कि अधिकांश मजदूर बेहतर रोजगार और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए कर्नाटक में काम करने गए थे।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार चट्टान का वजन इतना अधिक था कि उसकी चपेट में आते ही ट्रैक्टर और अन्य मशीनें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। कई मजदूरों के सिर हाथ और पैरों में गंभीर चोटें आईं। अस्पताल और खदान परिसर में मौजूद परिजनों का रो रोकर बुरा हाल था। एक मृतक के परिवार ने बताया कि वह बेटियों की शादी के बाद हुए कर्ज को चुकाने के लिए मजदूरी करने गया था लेकिन अब परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य भी नहीं रहा।

    हादसे के बाद कर्नाटक सरकार ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि प्रारंभिक जांच में ब्लास्टिंग की बजाय चट्टान खिसकने या मिट्टी धंसने की आशंका सामने आई है। विस्तृत जांच रिपोर्ट के आधार पर वास्तविक कारण स्पष्ट होगा और भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए नए सुरक्षा मानक लागू किए जाएंगे। उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर ने खदान की अनुमति देने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कराने के निर्देश दिए हैं।

    मध्य प्रदेश के श्रम मंत्री प्रहलाद पटेल ने बताया कि राज्य सरकार लगातार कर्नाटक प्रशासन के संपर्क में है और मृतकों तथा घायलों से जुड़ी पूरी जानकारी जुटाई जा रही है। खदान मालिक ने मृतकों के परिजनों को दस दस लाख रुपए तथा घायलों को पांच पांच लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। यह दर्दनाक हादसा एक बार फिर खनन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

  • मध्य प्रदेश की सियासत में नए संकेत सीएम के मंच पर कांग्रेस विधायक कैलाश के बदले तेवर और साउथ में छाए शिवराज

    मध्य प्रदेश की सियासत में नए संकेत सीएम के मंच पर कांग्रेस विधायक कैलाश के बदले तेवर और साउथ में छाए शिवराज


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर ऐसे घटनाक्रम देखने को मिले जिन्होंने सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। कहीं मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में कांग्रेस विधायक की सक्रिय मौजूदगी चर्चा का विषय बनी तो कहीं मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का बदला हुआ अंदाज लोगों की नजरों में रहा। वहीं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का लोकप्रिय मामा वाला अंदाज अब दक्षिण भारत तक पहुंचता दिखाई दिया। इन घटनाओं ने प्रदेश की राजनीति में नए राजनीतिक संकेतों को लेकर अटकलों का दौर तेज कर दिया है।

    सिवनी में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस विधायक ठाकुर रजनीश सिंह पूरे समय मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के आसपास सक्रिय दिखाई दिए। कार्यक्रम में विधायक कभी मुख्यमंत्री के पीछे तो कभी उनके आगे चलते नजर आए। मंच पर भी उन्होंने मुख्यमंत्री से बातचीत करने की कोशिश की लेकिन मुख्यमंत्री अपना संबोधन समाप्त कर आगे बढ़ गए। यह दृश्य इसलिए भी खास माना गया क्योंकि कार्यक्रम शुरू होने से पहले यही विधायक मुख्यमंत्री की नीतियों के विरोध में सड़क पर प्रदर्शन करते नजर आए थे। विरोध के बाद उसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के साथ उनकी सहज मौजूदगी ने राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया। राजनीतिक जानकार इसे बदलते राजनीतिक समीकरणों और व्यावहारिक राजनीति का उदाहरण मान रहे हैं।

    दूसरी ओर मुख्यमंत्री को पत्र लिखने के विवाद के बाद नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का बदला हुआ अंदाज भी चर्चा में रहा। भाजपा प्रदेश कार्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने लगभग हर सवाल का जवाब मुस्कुराते हुए दिया। मुख्यमंत्री को लिखी चिट्ठी पर उन्होंने कहा कि अब यह अध्याय समाप्त हो चुका है। इंदौर में मुख्यमंत्री की बैठक रद्द होने के सवाल पर उन्होंने जिम्मेदारी बैठक तय करने वालों पर डाल दी। मंत्रिमंडल विस्तार और अन्य राजनीतिक मुद्दों पर भी उन्होंने हल्के अंदाज में जवाब दिए लेकिन पूरे समय उनके चेहरे पर मुस्कान बनी रही। राजनीतिक विश्लेषक इसे संयमित रणनीति और विवादों से दूरी बनाने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।

    उधर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का लोकप्रिय मामा वाला अंदाज अब मध्य प्रदेश की सीमाओं से बाहर भी लोगों के बीच पहचान बना रहा है। आंध्र प्रदेश के तिरुपति में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जैसे ही लोग उन्हें देखने पहुंचे भीड़ से मामा मामा के नारे गूंजने लगे। लोगों के उत्साह को देखते हुए शिवराज सिंह चौहान भी सीधे उनके बीच पहुंचे और सभी का अभिवादन स्वीकार किया। उनका सहज और आत्मीय व्यवहार एक बार फिर लोगों का ध्यान खींचने में सफल रहा। भाजपा नेताओं का मानना है कि शिवराज की यही जनसंपर्क शैली उन्हें देशभर में अलग पहचान दिला रही है।

    इसी बीच प्रदेश की नौकरशाही में भी एक रोचक चर्चा सामने आई। राज्य पुलिस सेवा के एक अधिकारी को कुछ दिनों तक आईपीएस बनने की बधाइयां मिलती रहीं लेकिन बाद में स्पष्ट हुआ कि उनका नाम अंतिम सूची में शामिल ही नहीं था। इसके बाद यह मामला भी प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया।

    प्रदेश की राजनीति में लगातार सामने आ रहे ऐसे घटनाक्रम यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले समय में राजनीतिक गतिविधियां और भी तेज होने वाली हैं। नेताओं की सक्रियता बदलते व्यवहार और नए राजनीतिक संदेश अब सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए अहम मायने रखने लगे हैं।

  • बारिश बनी आफत मध्य प्रदेश के कई जिले जलमग्न शिप्रा उफान पर मकान बहे खेत डूबे अगले 24 घंटे बेहद भारी

    बारिश बनी आफत मध्य प्रदेश के कई जिले जलमग्न शिप्रा उफान पर मकान बहे खेत डूबे अगले 24 घंटे बेहद भारी


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और लगातार हो रही तेज बारिश ने कई जिलों में जनजीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है। उज्जैन से लेकर पांढुर्णा खरगोन बालाघाट और ग्वालियर तक बारिश ने तबाही का मंजर खड़ा कर दिया है। नदियां उफान पर हैं सड़कें जलमग्न हो गई हैं खेतों में पानी भर गया है और कई इलाकों में लोगों का आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है। मौसम विभाग ने अगले चौबीस घंटे को बेहद संवेदनशील बताते हुए कई जिलों के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

    उज्जैन में लगातार हुई मूसलाधार बारिश के कारण शिप्रा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। नदी किनारे बने कई मंदिर पानी में डूब गए जिससे श्रद्धालुओं की आवाजाही भी प्रभावित हुई। इसी दौरान गांवड़ी लोढ़ा क्षेत्र में एक सहायक सचिव बाइक सहित तेज बहाव में बह गए जिनकी तलाश के लिए राहत और बचाव दल लगातार अभियान चला रहा है। एक अन्य घटना में पुलिया पार करते समय एक युवक मोटरसाइकिल सहित तेज धारा में बह गया लेकिन उसने पेड़ की टहनियों का सहारा लेकर अपनी जान बचा ली। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है जिसने लोगों को झकझोर दिया।

    इंदौर में भी बारिश का असर गंभीर रहा जहां दो दिन पहले पानी में बहे एक व्यक्ति का शव काफी तलाश के बाद बरामद किया गया। पांढुर्णा जिले में नदी के किनारे बने कई कच्चे मकान तेज बहाव में ढह गए जबकि घरेलू सामान और पशु भी पानी में बह गए। खरगोन के कसरावद क्षेत्र में कुछ घंटों की तेज बारिश ने खेतों और सड़कों को जलमग्न कर दिया। बालाघाट के कई वार्डों में जलभराव के कारण लोगों को घरों से निकलना मुश्किल हो गया। ग्वालियर रतलाम और अन्य जिलों में भी लगातार बारिश का दौर जारी है।

    मौसम विभाग के अनुसार खंडवा और हरदा में अति भारी बारिश की संभावना को देखते हुए रेड अलर्ट जारी किया गया है। धार बड़वानी खरगोन देवास बुरहानपुर और बैतूल सहित कई जिलों में भी अत्यधिक वर्षा होने का अनुमान है। वहीं उज्जैन रतलाम राजगढ़ रायसेन नर्मदापुरम सागर छिंदवाड़ा बालाघाट डिंडौरी और अनूपपुर सहित अनेक जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। विभाग का कहना है कि कुछ स्थानों पर चार से आठ इंच तक बारिश दर्ज हो सकती है जिससे नदियों और जलाशयों का जलस्तर और बढ़ सकता है।

    प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी नालों और पुलियाओं को पार करने का प्रयास न करें तथा मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करें। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। राहत और बचाव दल लगातार संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके।

    मानसून की यह सक्रियता कृषि के लिए राहत लेकर आई है लेकिन कई क्षेत्रों में यह बारिश अब संकट का रूप ले चुकी है। यदि अगले कुछ दिनों तक वर्षा का यही सिलसिला जारी रहा तो बाढ़ और जलभराव की स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे में नागरिकों की सतर्कता और प्रशासन की सक्रियता ही संभावित नुकसान को कम करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएगी।

  • मध्यप्रदेश में UCC लागू करने की तैयारी तेज शादी लिव इन और तलाक के लिए बनेंगे एक समान कानून गुजरात मॉडल पर तैयार ड्राफ्ट

    मध्यप्रदेश में UCC लागू करने की तैयारी तेज शादी लिव इन और तलाक के लिए बनेंगे एक समान कानून गुजरात मॉडल पर तैयार ड्राफ्ट


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम बढ़ा दिया है। राज्य के लिए यूसीसी का प्रारूप तैयार हो चुका है और इसे मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के समक्ष प्रस्तुत भी किया गया है। मुख्यमंत्री की ओर से दिए गए सुझावों को शामिल करने के बाद समिति अंतिम ड्राफ्ट सरकार को सौंपेगी। माना जा रहा है कि यह कानून लागू होने के बाद शादी तलाक लिव इन रिलेशनशिप उत्तराधिकार और वसीयत जैसे पारिवारिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करेगा।

    सूत्रों के अनुसार मध्यप्रदेश का प्रस्तावित यूसीसी काफी हद तक गुजरात में लागू समान नागरिक संहिता के मॉडल पर आधारित है। बताया जा रहा है कि ड्राफ्ट के अधिकांश प्रावधान गुजरात कानून से प्रेरित हैं। सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव यह है कि धर्म परिवर्तन कर चुके आदिवासी भी इस कानून के दायरे में आएंगे जबकि अपनी पारंपरिक जनजातीय रीति रिवाजों का पालन करने वाले आदिवासियों को इससे बाहर रखा जाएगा।

    प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार धार्मिक परंपराओं में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। सभी समुदाय अपनी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार विवाह कर सकेंगे। हिंदू विवाह के फेरे मुस्लिम निकाह सिख आनंद कारज ईसाई चर्च विवाह और अन्य मान्य पद्धतियां पहले की तरह जारी रहेंगी। अंतर केवल इतना होगा कि विवाह से जुड़े कानूनी अधिकार और जिम्मेदारियां सभी नागरिकों के लिए समान होंगी।

    ड्राफ्ट में प्रत्येक विवाह का पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रावधान रखा गया है। विवाह होने के 60 दिन के भीतर उसका रजिस्ट्रेशन कराना होगा। यदि निर्धारित समय में पंजीकरण नहीं हो पाता है तो बाद में तय प्रक्रिया के तहत इसे कराया जा सकेगा। हालांकि केवल रजिस्ट्रेशन न होने से विवाह अमान्य नहीं माना जाएगा लेकिन नियमों का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई संभव होगी। नई शादियों के साथ पहले से हुए विवाह और तलाक का भी सरकारी रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा ताकि भविष्य में दस्तावेजों और कानूनी विवादों में पारदर्शिता बनी रहे।

    यूसीसी के तहत पति पत्नी और बच्चों के अधिकारों को लेकर भी समान नियम प्रस्तावित किए गए हैं। भरण पोषण की परिभाषा केवल भोजन और आवास तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि शिक्षा स्वास्थ्य वस्त्र और अन्य आवश्यक जरूरतें भी इसमें शामिल होंगी। अदालत परिस्थितियों के अनुसार स्थायी गुजारा भत्ता तय कर सकेगी। बच्चों की अभिरक्षा और देखभाल से जुड़े मामलों में भी समान कानूनी प्रावधान लागू होंगे।

    संपत्ति और उत्तराधिकार के मामलों में भी एक समान नियम लागू करने की तैयारी है। यदि कोई व्यक्ति बिना वसीयत के निधन करता है तो उसकी संपत्ति का बंटवारा तय कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होगा। गर्भ में पल रहे बच्चे के अधिकारों को भी मान्यता दी जाएगी। वहीं यदि कोई व्यक्ति मृतक की हत्या का दोषी पाया जाता है तो उसे संपत्ति में हिस्सा नहीं मिलेगा। बीमारी या शारीरिक दिव्यांगता के आधार पर किसी भी उत्तराधिकारी के अधिकार समाप्त नहीं किए जा सकेंगे।

    ड्राफ्ट में वसीयत तैयार करने उसे संशोधित करने या निरस्त करने की प्रक्रिया भी स्पष्ट की गई है। यदि किसी वसीयत के पीछे दबाव धोखाधड़ी या जबरदस्ती साबित होती है तो उसे अमान्य माना जाएगा। संपत्ति विवाद की स्थिति में अदालत संपत्ति की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठा सकेगी और जरूरत पड़ने पर संरक्षक नियुक्त कर सकेगी।

    प्रस्तावित कानून के तहत शादी तलाक और अन्य पारिवारिक मामलों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इसके लिए रजिस्ट्रार जनरल और रजिस्ट्रार की नियुक्ति होगी। यदि किसी व्यक्ति का आवेदन अस्वीकार किया जाता है तो उसे अपील का अधिकार भी मिलेगा। रिकॉर्ड में छेड़छाड़ झूठी जानकारी देने या फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने पर दंड का प्रावधान भी रखा गया है। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से पारिवारिक मामलों में पारदर्शिता बढ़ेगी और सभी नागरिकों को समान कानूनी संरक्षण मिल सकेगा।

  • मार्क्स नहीं हुनर बनाएगा सफल पेरेंट्स को डॉ संजीव अग्रवाल की सीख बच्चों को दें सीखने की आजादी

    मार्क्स नहीं हुनर बनाएगा सफल पेरेंट्स को डॉ संजीव अग्रवाल की सीख बच्चों को दें सीखने की आजादी


    मध्‍य प्रदेश आज के समय में शिक्षा केवल परीक्षा में अधिक अंक लाने तक सीमित नहीं रह गई है बल्कि बदलते दौर में सफलता का असली आधार ज्ञान के साथ कौशल और व्यक्तित्व विकास बन चुका है। ऐसे समय में सेज यूनिवर्सिटी के चांसलर और सेज ग्रुप के सीएमडी डॉ संजीव अग्रवाल ने अभिभावकों को महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा है कि बच्चों को केवल नंबरों की दौड़ में उलझाने के बजाय उनकी प्रतिभा और स्किल्स को विकसित करने पर जोर देना चाहिए। उनका मानना है कि भविष्य में वही युवा सबसे आगे होंगे जिनके पास व्यावहारिक ज्ञान नई सोच और चुनौतियों का सामना करने की क्षमता होगी।

    डॉ संजीव अग्रवाल का कहना है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री दिलाना नहीं बल्कि ऐसे युवाओं का निर्माण करना होना चाहिए जो आत्मनिर्भर बनने के साथ दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर तैयार करें। उनका मानना है कि विश्वविद्यालयों को ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करनी चाहिए जहां छात्र सिर्फ नौकरी पाने की तैयारी न करें बल्कि नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से जॉब क्रिएटर बनकर समाज और देश के विकास में योगदान दें।

    उन्होंने बताया कि सेज यूनिवर्सिटी में विद्यार्थियों के समग्र विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है। यदि कोई छात्र नियमित रूप से कक्षा में उपस्थित नहीं होता तो केवल सूचना देकर जिम्मेदारी पूरी नहीं की जाती बल्कि शिक्षक स्वयं उसके घर तक पहुंचते हैं और उसकी पढ़ाई से जुड़ी समस्याओं को समझने का प्रयास करते हैं। संस्थान का उद्देश्य हर छात्र को शिक्षा से जोड़कर रखना और उसकी क्षमता को सही दिशा देना है।

    डॉ अग्रवाल के अनुसार आज की शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रह सकती। इसलिए विश्वविद्यालय में स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रमों के साथ उद्योग जगत के विशेषज्ञों को भी छात्रों से संवाद के लिए बुलाया जाता है। कैंपस में स्टार्टअप कॉन्क्लेव करियर डे और विभिन्न व्यावसायिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं ताकि विद्यार्थी वास्तविक दुनिया की चुनौतियों को समझ सकें और अपने करियर की बेहतर तैयारी कर सकें। उनका कहना है कि विद्यार्थियों को प्रकृति के करीब रहने व्यावहारिक सोच विकसित करने और नई परिस्थितियों में स्वयं निर्णय लेने का अवसर भी मिलना चाहिए।

    अपने छात्र जीवन को याद करते हुए उन्होंने कहा कि पहले शिक्षा का स्वरूप काफी अलग था। उस समय शिक्षक केवल किताबों तक सीमित ज्ञान देते थे लेकिन अब समय बदल चुका है। आज सफल होने के लिए कम्युनिकेशन स्किल्स लीडरशिप टीमवर्क और तकनीकी दक्षता जैसी क्षमताएं भी उतनी ही जरूरी हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि उनके समय में भी कम अंक आने का डर रहता था लेकिन आज कई अभिभावक बच्चों पर जरूरत से ज्यादा दबाव डाल देते हैं जिससे उनका आत्मविश्वास प्रभावित होता है और वे अपनी वास्तविक प्रतिभा का प्रदर्शन नहीं कर पाते।

    युवाओं के लिए उनका संदेश भी स्पष्ट है कि सफलता मेहनत धैर्य और निरंतर सीखने की प्रक्रिया से मिलती है। यदि किसी प्रयास में तुरंत सफलता न मिले तो निराश होने की जरूरत नहीं बल्कि उसे अनुभव मानकर आगे बढ़ना चाहिए। उनका विश्वास है कि लगातार मेहनत करने वाले लोगों के लिए अवसर जरूर बनते हैं और ईमानदारी के साथ किया गया प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता।

    डॉ संजीव अग्रवाल का मानना है कि भारत का भविष्य ऐसी शिक्षा व्यवस्था में छिपा है जो बच्चों को केवल अच्छे अंक नहीं बल्कि बेहतर इंसान जिम्मेदार नागरिक और सफल पेशेवर बनने की प्रेरणा दे। जब शिक्षा में स्किल्स नवाचार और नैतिक मूल्यों को बराबर महत्व मिलेगा तभी देश की युवा शक्ति वास्तव में राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी ताकत बन सकेगी।

  • सरकारी नौकरी का सुनहरा मौका मध्यप्रदेश में 2784 कृषि विस्तार अधिकारी पदों पर निकली भर्ती जानें योग्यता आवेदन और परीक्षा की पूरी जानकारी

    सरकारी नौकरी का सुनहरा मौका मध्यप्रदेश में 2784 कृषि विस्तार अधिकारी पदों पर निकली भर्ती जानें योग्यता आवेदन और परीक्षा की पूरी जानकारी


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल ने किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग में कृषि विस्तार अधिकारी यानी एग्रीकल्चर एक्सटेंशन ऑफिसर के 2784 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। इच्छुक और योग्य अभ्यर्थी आज से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 17 जुलाई निर्धारित की गई है जबकि भर्ती परीक्षा 2 अगस्त से आयोजित होगी। यह भर्ती समूह 2 उप समूह 1 के अंतर्गत आयोजित की जा रही है और प्रदेश के हजारों युवाओं के लिए सरकारी सेवा में प्रवेश का महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही है।

    आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे। उम्मीदवार कर्मचारी चयन मंडल की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन भर सकते हैं। आवेदन करते समय सभी आवश्यक दस्तावेज सही तरीके से अपलोड करना जरूरी होगा ताकि बाद में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। समय सीमा समाप्त होने के बाद किसी भी प्रकार का आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा इसलिए अभ्यर्थियों को अंतिम तिथि का इंतजार करने के बजाय जल्द आवेदन करने की सलाह दी गई है।

    भर्ती प्रक्रिया में राज्य सरकार की आरक्षण नीति लागू रहेगी। अनुसूचित जाति वर्ग को 20 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति वर्ग को 16 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा। कुल 73 प्रतिशत आरक्षण व्यवस्था के अनुसार परिणाम घोषित किए जाएंगे। हालांकि ओबीसी आरक्षण न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा।

    कृषि विस्तार अधिकारी भर्ती परीक्षा 2 अगस्त को दो पालियों में आयोजित की जाएगी। परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों को निर्धारित रिपोर्टिंग समय से पहले पहुंचना अनिवार्य होगा। रिपोर्टिंग समय समाप्त होने के बाद किसी भी अभ्यर्थी को परीक्षा केंद्र में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसलिए उम्मीदवारों को समय का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है।

    परीक्षा में आधार आधारित पहचान सत्यापन अनिवार्य किया गया है। अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र के साथ आधार कार्ड या अन्य वैध फोटो पहचान पत्र लेकर परीक्षा केंद्र पहुंचना होगा। पहचान संबंधी दस्तावेज नहीं होने पर परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं मिलेगी। परीक्षा को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए कर्मचारी चयन मंडल ने कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं।

    परीक्षा केंद्रों में मोबाइल फोन स्मार्ट वॉच कैलकुलेटर ब्लूटूथ डिवाइस या किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। परीक्षा शुरू होने के बाद किसी भी उम्मीदवार को परीक्षा कक्ष से बाहर जाने की अनुमति नहीं होगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले अभ्यर्थियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

    भर्ती के लिए कुछ महत्वपूर्ण पात्रता शर्तें भी निर्धारित की गई हैं। जिन अभ्यर्थियों की 26 जनवरी 2001 या उसके बाद दो से अधिक संतान हैं वे आवेदन के पात्र नहीं होंगे। इसके अलावा जिन पुरुष अभ्यर्थियों का विवाह 21 वर्ष की आयु से पहले और महिला अभ्यर्थियों का विवाह 18 वर्ष की आयु से पहले हुआ है उन्हें भी आवेदन की अनुमति नहीं होगी। महिलाओं के विरुद्ध अपराध में दोषी ठहराए गए पुरुष अभ्यर्थी भी इस भर्ती प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकेंगे।

    सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए यह भर्ती सुनहरा अवसर है। समय पर आवेदन करने के साथ परीक्षा की तैयारी को अंतिम रूप देना ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी साबित हो सकता है।

  • दतिया की चुनावी बिसात पर जातियों का गणित किसके पक्ष में जाएगा ब्राह्मण जाटव और ओबीसी वोटरों पर टिकी सभी दलों की नजर

    दतिया की चुनावी बिसात पर जातियों का गणित किसके पक्ष में जाएगा ब्राह्मण जाटव और ओबीसी वोटरों पर टिकी सभी दलों की नजर


    मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव ने प्रदेश की राजनीति को फिर गर्मा दिया है। 30 जुलाई को होने वाले मतदान और 3 अगस्त को मतगणना से पहले सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं। इस बार चुनाव का सबसे बड़ा आधार जातीय समीकरण माना जा रहा है क्योंकि यहां किसी एक वर्ग के भरोसे जीत हासिल करना आसान नहीं माना जा रहा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ओबीसी ब्राह्मण अनुसूचित जाति और मुस्लिम मतदाताओं का रुख ही चुनावी परिणाम तय करेगा।

    दतिया विधानसभा क्षेत्र में सबसे बड़ा वोट बैंक अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी का है। अनुमानित तौर पर करीब 95 हजार ओबीसी मतदाता हैं जो कुल वोटरों का लगभग 53 प्रतिशत हिस्सा माने जाते हैं। इस वर्ग में यादव कुशवाहा काछी लोधी बघेल पाल समेत कई प्रभावशाली समुदाय शामिल हैं। यही वजह है कि सभी दल इस वर्ग को साधने की रणनीति पर सबसे अधिक जोर दे रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि ओबीसी मतदाता किसी एक दल के पक्ष में एकजुट हो जाते हैं तो मुकाबले की दिशा पूरी तरह बदल सकती है।

    जातीय समीकरणों में ब्राह्मण और अहिरवार समाज भी सबसे प्रभावशाली माने जा रहे हैं। दोनों समुदायों की अनुमानित संख्या करीब 33 33 हजार बताई जाती है। परंपरागत रूप से ब्राह्मण मतदाताओं का झुकाव भाजपा की ओर माना जाता है जबकि अनुसूचित जाति विशेषकर अहिरवार समाज में कांग्रेस का प्रभाव मजबूत रहा है। ऐसे में इन दोनों वर्गों का रुझान इस उपचुनाव का सबसे अहम फैक्टर बन सकता है।

    सामान्य वर्ग के मतदाताओं की संख्या भी लगभग 60 हजार बताई जा रही है। इसमें ब्राह्मणों के अलावा बनिया राजपूत कायस्थ और सिंधी समाज की अच्छी भागीदारी है। यदि सामान्य वर्ग किसी एक दल के समर्थन में एकजुट होता है तो चुनाव का परिणाम एकतरफा भी हो सकता है। दूसरी ओर अनुसूचित जाति के करीब 58 हजार मतदाता भी निर्णायक भूमिका निभाएंगे। खटीक वाल्मीकि कोरी और जाटव समाज कई बूथों पर जीत हार का अंतर तय करने की क्षमता रखते हैं। मुस्लिम मतदाताओं की संख्या भले लगभग आठ हजार है लेकिन करीबी मुकाबले में उनका समर्थन भी बेहद अहम साबित हो सकता है।

    कांग्रेस में उम्मीदवार चयन को लेकर सबसे ज्यादा हलचल दिखाई दे रही है। पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद उपचुनाव की स्थिति बनी है और अब वह अपने बेटे अनुज भारती को टिकट दिलाने के लिए सक्रिय हैं। वहीं वर्ष 2023 में भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आए अवधेश नायक भी टिकट के मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। उनका तर्क है कि पिछली बार उन्होंने पार्टी के लिए त्याग किया था इसलिए इस बार उन्हें मौका मिलना चाहिए। पूर्व विधायक घनश्याम सिंह का नाम भी संभावित उम्मीदवारों की सूची में शामिल है जिससे कांग्रेस में मुकाबला और रोचक हो गया है।

    दूसरी ओर भाजपा की ओर से पूर्व गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा का चुनाव लड़ना लगभग तय माना जा रहा है जबकि आजाद समाज पार्टी की ओर से दामोदर यादव प्रमुख चेहरा बनकर सामने आए हैं। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को 7742 मतों से हराया था इसलिए इस बार का उपचुनाव भी बेहद कांटे का माना जा रहा है। सभी दल जातीय संतुलन संगठनात्मक मजबूती और स्थानीय मुद्दों के सहारे चुनावी जीत का समीकरण तैयार करने में जुटे हैं।

  • ई रिक्शा चालकों के लिए नई मुसीबत मोबाइल ऐप से हो रहा सिस्टम लॉक सवारियां बीच रास्ते उतरने को मजबूर

    ई रिक्शा चालकों के लिए नई मुसीबत मोबाइल ऐप से हो रहा सिस्टम लॉक सवारियां बीच रास्ते उतरने को मजबूर


    भोपाल  भोपाल में ई रिक्शा चालकों के सामने एक नई और गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। शहर के कई इलाकों से ऐसी शिकायतें सामने आई हैं कि मोबाइल ऐप के जरिए ई रिक्शों के बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम यानी बीएमएस से छेड़छाड़ की जा रही है जिसके कारण चलते वाहन अचानक बीच सड़क पर बंद हो रहे हैं। इससे न केवल चालकों की रोजी रोटी पर संकट गहरा गया है बल्कि यात्रियों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई मामलों में सवारियों को बीच रास्ते उतरना पड़ा जबकि चालकों को वाहन धक्का देकर ले जाना पड़ा।

    बुधवारा निवासी ई रिक्शा चालक तनवीर मोहम्मद खान ने बताया कि वीआईपी रोड पर बच्चों को लेकर जा रहे थे तभी उनका वाहन अचानक बंद हो गया। काफी कोशिशों के बाद भी रिक्शा चालू नहीं हुआ और आखिरकार उसे धक्का देकर ले जाना पड़ा। बाद में सिस्टम अनलॉक कराने के लिए उनसे 200 रुपए भी लिए गए। तनवीर का कहना है कि एक ही दिन में उनका ई रिक्शा चार बार बंद हुआ जिससे पूरे दिन की कमाई लगभग खत्म हो गई। उनका कहना है कि हर महीने लगभग आठ हजार रुपए की बैंक किस्त भरनी होती है लेकिन जब वाहन ही नहीं चलेगा तो किस्त कैसे चुकाई जाएगी।

    इसी तरह रेतघाट क्षेत्र के चालक फरान मोहम्मद खान ने भी बताया कि सवारी छोड़ने के बाद उनका ई रिक्शा अचानक बंद हो गया। उन्होंने मुख्य एमसीबी बंद कर दोबारा चालू करने की कोशिश की जिससे कुछ समय के लिए वाहन चल पड़ा लेकिन थोड़ी देर बाद फिर बंद हो गया। बाद में तकनीकी सहायता मिलने के बाद ही वाहन दोबारा चालू हो सका। फरान के अनुसार दिन में कई बार और रात के समय भी यह समस्या सामने आ रही है जिससे काम करना बेहद मुश्किल हो गया है।

    चालकों का दावा है कि यह समस्या केवल कुछ वाहनों तक सीमित नहीं है बल्कि शहर में बड़ी संख्या में ई रिक्शा प्रभावित हुए हैं। मैकेनिकों की दुकानों पर वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं। जिन लोगों को तकनीकी जानकारी है वे किसी तरह सिस्टम को अनलॉक कर लेते हैं जबकि बाकी चालक घंटों तक परेशान होते रहते हैं। इससे उनकी आय पर सीधा असर पड़ रहा है और कई लोगों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

    जानकारी के अनुसार गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध BAT BMS नाम का एक ऐप ब्लूटूथ के माध्यम से आसपास मौजूद कुछ ई रिक्शों के बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम को खोज सकता है। यदि किसी वाहन का सिस्टम पर्याप्त सुरक्षा या पासवर्ड से सुरक्षित नहीं है तो उससे जुड़े कुछ नियंत्रण विकल्प सामने आ सकते हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि सभी मामलों में इसी ऐप का दुरुपयोग हुआ है या नहीं लेकिन इस संभावना को गंभीरता से जांचा जा रहा है।

    पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञ अब पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि संबंधित ई रिक्शा मॉडलों में सुरक्षा संबंधी कौन सी तकनीकी कमजोरियां मौजूद थीं और उनका किस तरह गलत इस्तेमाल किया गया। यदि यह आशंका सही साबित होती है तो यह केवल भोपाल ही नहीं बल्कि देशभर में ई रिक्शा सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि वाहन निर्माताओं को मजबूत साइबर सुरक्षा और सुरक्षित बीएमएस सिस्टम विकसित करने की दिशा में तत्काल कदम उठाने होंगे ताकि चालकों की आजीविका और यात्रियों की सुरक्षा दोनों सुनिश्चित की जा सके।

  • Weather Update 3 July बारिश और बादलों का डबल अटैक कई राज्यों में ऑरेंज अलर्ट जारी मौसम विभाग ने दी सतर्क रहने की सलाह

    Weather Update 3 July बारिश और बादलों का डबल अटैक कई राज्यों में ऑरेंज अलर्ट जारी मौसम विभाग ने दी सतर्क रहने की सलाह


    नई दिल्ली । देशभर में 3 जुलाई शुक्रवार को मौसम का मिजाज तेजी से बदलता नजर आएगा। दक्षिण पश्चिम मानसून अब देश के अधिकांश हिस्सों में सक्रिय हो चुका है और इसका असर उत्तर भारत मध्य भारत पश्चिमी तटीय राज्यों तथा पूर्वोत्तर भारत में साफ दिखाई देगा। मौसम विभाग के अनुसार कई राज्यों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना है। वहीं कुछ इलाकों में तेज धूप और उमस लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है। ऐसे में मौसम को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने और यात्रा से पहले स्थानीय मौसम की जानकारी लेने की सलाह दी गई है।

    दिल्ली एनसीआर में दिनभर बादलों की आवाजाही बनी रह सकती है। कई क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं जिससे तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी। सुबह और शाम के समय मौसम अपेक्षाकृत सुहावना रहने की संभावना है।

    उत्तर प्रदेश बिहार झारखंड और उत्तराखंड में गरज चमक के साथ बारिश होने का अनुमान है। पूर्वी उत्तर प्रदेश और तराई क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर भारी वर्षा हो सकती है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में भूस्खलन और तेज बहाव वाले नालों के पास जाने से बचने की सलाह दी गई है।

    मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ और पूर्वी राजस्थान में मानसून सक्रिय रहेगा। कई जिलों में अच्छी बारिश होने की संभावना है जिससे किसानों को राहत मिलेगी और खरीफ फसलों की बुआई को गति मिलेगी। हालांकि पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों में गर्मी और उमस का असर अभी भी बना रह सकता है।

    महाराष्ट्र गोवा कर्नाटक और केरल के तटीय इलाकों में लगातार बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा हो सकती है जिससे जलभराव और यातायात प्रभावित होने की आशंका है। लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और प्रशासन की सलाह का पालन करने की जरूरत है।

    पूर्वोत्तर भारत के असम मेघालय अरुणाचल प्रदेश नागालैंड मणिपुर मिजोरम और त्रिपुरा में भी तेज बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। कई नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है और निचले क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बन सकती है। स्थानीय प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी है।

    दक्षिण भारत के तमिलनाडु तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। कुछ स्थानों पर बादलों के बीच धूप निकलने से उमस बनी रह सकती है। किसानों को मौसम के अनुसार कृषि कार्यों की योजना बनाने की सलाह दी गई है।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक मानसून की सक्रियता बनी रहेगी। ऐसे में जिन क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना है वहां लोगों को जलभराव बिजली गिरने और तेज हवा जैसी परिस्थितियों से सावधान रहने की जरूरत है। घर से बाहर निकलते समय छाता या रेनकोट साथ रखें और मौसम विभाग द्वारा जारी ताजा अपडेट पर लगातार नजर बनाए रखें। मानसून की यह सक्रियता एक ओर जहां गर्मी से राहत दे रही है वहीं दूसरी ओर कई इलाकों में सावधानी बरतना भी बेहद जरूरी हो गया है।