Category: Madhya Pradesh

  • तूफान 'अर्नब' के चलते MP में बदला मौसम, आज 27 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी

    तूफान 'अर्नब' के चलते MP में बदला मौसम, आज 27 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी


    भोपाल। चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ कमजोर होकर कम दबाव के क्षेत्र में बदल गया है, लेकिन इसके असर से मध्य प्रदेश में आंधी और बारिश का सिलसिला जारी है। पिछले तीन दिनों से प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में रुक-रुककर बारिश हो रही है। शुक्रवार को भी कई जिलों में पानी गिरा। मौसम विभाग ने शनिवार को ग्वालियर-जबलपुर समेत 27 जिलों में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं, भोपाल और इंदौर सहित कई जिलों में मौसम साफ रहने और धूप निकलने की संभावना है।

    मौसम केंद्र भोपाल के मुताबिक, शनिवार को ग्वालियर, शिवपुरी, दतिया, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में आंधी-बारिश की संभावना है।

    दूसरी ओर भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, गुना, अशोकनगर, सागर, दमोह, नरसिंहपुर और हरदा में धूप निकलने के आसार हैं।

    2 नवंबर तक बना रहेगा बदला मौसम
    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, प्रदेश में अगले चार दिन तक मौसम का यही मिजाज बना रह सकता है। इस दौरान कुछ इलाकों में तेज धूप निकलेगी, जबकि दक्षिणी और पूर्वी मध्य प्रदेश में मौसमी सिस्टम का असर अधिक रहने से आंधी और बारिश की गतिविधियां जारी रहेंगी।

    38 जिलों के 155 शहरों-कस्बों में हुई बारिश
    इससे पहले प्रदेश के 38 जिलों के करीब 155 शहरों और कस्बों में बारिश दर्ज की गई। इनमें भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, शाजापुर, नर्मदापुरम, ग्वालियर, श्योपुर, दतिया, शिवपुरी, गुना, मुरैना और भिंड शामिल हैं।

    इसके अलावा जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में भी बारिश हुई। अनूपपुर शहर में सबसे ज्यादा तीन इंच से अधिक पानी गिरा। अमरकंटक में सवा दो इंच और सिंगरौली में दो इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। अनूपपुर में आंधी की रफ्तार 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई।

    पांढुर्णा में हजारों क्विंटल मक्का खराब होने की आशंका
    बेमौसम बारिश का असर खेती और मंडियों में रखी उपज पर भी पड़ा है। जिन जिलों में धान की फसल खेतों में खड़ी है, वहां किसानों को नुकसान की चिंता सता रही है। वहीं, मंडियों में खुले में रखे अनाज के भीगने से भी परेशानी बढ़ गई है। पांढुर्णा में बारिश के कारण हजारों क्विंटल मक्का खराब होने की आशंका है।

    दिन के तापमान में 3 डिग्री तक गिरावट
    आंधी और बारिश के चलते गुरुवार के बाद शुक्रवार को भी प्रदेश के कई हिस्सों में दिन के समय ठंडक महसूस की गई। बादलों और बारिश के कारण दिन के तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई। कुछ शहरों में रात के तापमान में भी कमी आई है।

  • मध्य प्रदेश स्थापना दिवस पर किस जिले में पहुंचेंगे कौन मंत्री, शासन ने जारी की सूची….

    मध्य प्रदेश स्थापना दिवस पर किस जिले में पहुंचेंगे कौन मंत्री, शासन ने जारी की सूची….

    मध्य प्रदेश: के स्थापना दिवस के अवसर पर 1 नवंबर 2026 को प्रदेशभर में जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए राज्य शासन ने मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों के जिलों का निर्धारण कर दिया है। जारी व्यवस्था के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे, जबकि विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को ग्वालियर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके साथ ही प्रदेश के अन्य मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों को भी अलग-अलग जिलों में आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए नामांकित किया गया है।

    राज्य शासन की ओर से जारी नामांकन के तहत उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा जबलपुर में स्थापना दिवस कार्यक्रम में शामिल होंगे। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला रीवा में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेंगे। वहीं हेमंत खंडेलवाल को बैतूल में कार्यक्रम की जिम्मेदारी दी गई है। इन नामांकनों के माध्यम से जिला स्तर पर होने वाले समारोहों में प्रदेश सरकार का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा।

    मंत्री कुमार विजय शाह खंडवा में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे, जबकि कैलाश विजयवर्गीय इंदौर में स्थापना दिवस समारोह में भाग लेंगे। प्रहलाद सिंह पटेल को नरसिंहपुर और तुलसीराम सिलावट को देवास में होने वाले कार्यक्रम के लिए नामांकित किया गया है। इस तरह प्रमुख जिलों में कार्यक्रमों के लिए अलग-अलग जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति तय की गई है।

    मध्य प्रदेश का स्थापना दिवस हर वर्ष 1 नवंबर को मनाया जाता है। इसी दिन वर्ष 1956 में राज्य का गठन हुआ था। स्थापना दिवस के मौके पर प्रदेश के सभी जिलों में स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन आयोजनों के जरिए राज्य के गठन, विकास यात्रा और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े पहलुओं को सामने रखा जाता है।

    इस वर्ष भी जिला स्तरीय आयोजनों में मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी के लिए शासन ने पहले से जिम्मेदारियां निर्धारित की हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की भोपाल में उपस्थिति के साथ राजधानी में मुख्य आयोजन होगा, जबकि अन्य जिलों में नामांकित प्रतिनिधि कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इससे विभिन्न जिलों में आयोजित समारोहों में शासन की ओर से प्रतिनिधित्व रहेगा।

    जारी जानकारी में कुछ प्रमुख जिलों के लिए नामांकन का उल्लेख किया गया है। हालांकि उपलब्ध विवरण में सभी जिलों और मंत्रियों की पूरी सूची शामिल नहीं है। इसलिए शेष जिलों में किस मंत्री को भेजा गया है, इसकी जानकारी इस सूची से स्पष्ट नहीं होती। फिलहाल भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, बैतूल, खंडवा, इंदौर, नरसिंहपुर और देवास के लिए नामांकित प्रतिनिधियों के नाम सामने आए हैं।

    स्थापना दिवस कार्यक्रमों को लेकर जिला स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। एक नवंबर को होने वाले समारोहों में संबंधित जिलों के नामांकित मंत्री और जनप्रतिनिधि भाग लेंगे। शासन के इस निर्णय के बाद अब इन जिलों में कार्यक्रमों के दौरान संबंधित प्रतिनिधियों की मौजूदगी रहेगी।
  • सागर के इंजीनियरिंग कॉलेज हॉस्टल में छात्र का शव फंदे पर मिला, GATE परीक्षा की कर रहा था तैयारी

    सागर के इंजीनियरिंग कॉलेज हॉस्टल में छात्र का शव फंदे पर मिला, GATE परीक्षा की कर रहा था तैयारी

    मध्य प्रदेश: के सागर जिले में बहेरिया स्थित इंदिरा गांधी इंजीनियरिंग कॉलेज (IGEC) के हॉस्टल में एक इंजीनियरिंग छात्र की मौत का मामला सामने आया है। कॉलेज के फाइनल ईयर में पढ़ने वाले छात्र विक्रमादित्य सिंह बघेल का शव हॉस्टल के स्टोर रूम में फंदे से लटका मिला। घटना की जानकारी मिलने के बाद कॉलेज और हॉस्टल परिसर में हलचल मच गई। मृतक मूल रूप से रीवा का निवासी था और इंजीनियरिंग की अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रहा था। वह ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग (GATE) परीक्षा की तैयारी भी कर रहा था।

    जानकारी के मुताबिक, छात्र का शव हॉस्टल परिसर में बने स्टोर रूम में मिला। घटना सामने आने के बाद वहां मौजूद छात्रों और कॉलेज परिसर में चर्चा शुरू हो गई। छात्र की मौत से उसके साथी और परिचित स्तब्ध हैं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में घटना के कारणों की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि छात्र किन परिस्थितियों से गुजर रहा था और उसकी मौत के पीछे क्या वजह रही।

    विक्रमादित्य के रूममेट आकाश खरोले ने उसके पिछले कुछ दिनों के व्यवहार के बारे में जानकारी दी। आकाश के अनुसार, विक्रमादित्य पहले की तुलना में काफी शांत और गुमसुम रहने लगा था। वह कमरे में भी कम समय बिताता था। उसके व्यवहार में आए इस बदलाव को उसके साथी महसूस कर रहे थे। रूममेट ने बताया कि वह अपने करियर और भविष्य को लेकर तनाव में रहता था।

    आकाश के मुताबिक, विक्रमादित्य पढ़ाई में अच्छा था और GATE परीक्षा की तैयारी के लिए लगातार मेहनत कर रहा था। वह इस परीक्षा को लेकर गंभीर था और अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे रहा था। इंजीनियरिंग की अंतिम वर्ष की पढ़ाई के साथ प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी भी उसके समय का महत्वपूर्ण हिस्सा थी। हालांकि, उसके रूममेट की ओर से बताई गई मानसिक स्थिति के आधार पर मौत का कारण तय नहीं किया जा सकता।

    छात्र की मौत की खबर सामने आने के बाद हॉस्टल में रहने वाले अन्य विद्यार्थियों के बीच भी चिंता का माहौल है। कॉलेज में पढ़ने वाले विद्यार्थी अपने साथी की मौत से दुखी हैं। विक्रमादित्य रीवा का रहने वाला था, इसलिए उसके परिवार और परिचितों के लिए भी यह घटना गहरा झटका है।

    इस घटना ने छात्र जीवन में पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षाओं और भविष्य को लेकर बनने वाले दबाव के मुद्दे को भी सामने रखा है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के अंतिम वर्ष में विद्यार्थी अक्सर आगे की पढ़ाई, नौकरी और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को लेकर कई तरह की चुनौतियों का सामना करते हैं। हालांकि, इस मामले में विक्रमादित्य की व्यक्तिगत परिस्थितियों के बारे में सीमित जानकारी ही सामने आई है। उसके रूममेट ने केवल इतना बताया है कि वह कुछ दिनों से शांत रहता था और करियर को लेकर तनाव में था।

    फिलहाल घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जानकारी सामने आना बाकी है। छात्र की मौत के वास्तविक कारणों को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। हॉस्टल के स्टोर रूम में शव मिलने की घटना के बाद अब यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि उस दिन क्या परिस्थितियां बनी थीं और छात्र की मौत से जुड़े अन्य तथ्य क्या हैं।

  • शिवपुरी से लापता 17 वर्षीय किशोरी उज्जैन में मिली, अपहरण के आरोपी अनस खान पर दुष्कर्म का मामला दर्ज

    शिवपुरी से लापता 17 वर्षीय किशोरी उज्जैन में मिली, अपहरण के आरोपी अनस खान पर दुष्कर्म का मामला दर्ज

    शिवपुरी जिले: में अपहरण के मामले की जांच के दौरान पुलिस ने 17 वर्षीय किशोरी को उज्जैन से सुरक्षित बरामद किया है। इस मामले में फरार चल रहे आरोपी अनस खान को भी गिरफ्तार किया गया है। किशोरी के बयान और परिजनों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज किया है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।

    पुलिस के अनुसार, मामला पुरानी शिवपुरी क्षेत्र का है। यहां राधारमण मंदिर के पास रहने वाली किशोरी के परिजनों ने 24 अक्टूबर को देहात थाना पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि 17 वर्षीय किशोरी को अनस खान बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया है। परिजनों की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू की थी।

    मामले की जांच के दौरान पुलिस ने किशोरी और आरोपी की तलाश के लिए मोबाइल लोकेशन की मदद ली। तकनीकी जानकारी के आधार पर पुलिस को दोनों के उज्जैन में होने का पता चला। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उज्जैन से किशोरी को सुरक्षित बरामद कर लिया और आरोपी अनस खान को गिरफ्तार कर लिया।

    किशोरी की बरामदगी के बाद पुलिस ने उसके बयान दर्ज किए। इसके साथ ही परिजनों से मिली जानकारी के आधार पर मामले की आगे जांच की गई। पुलिस के मुताबिक, बयान और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म की धाराएं भी जोड़ी गईं। इसके बाद मामले की विवेचना आगे बढ़ाई गई है।

    पुलिस ने बरामद किशोरी को उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया है। वहीं, आरोपी को कानूनी प्रक्रिया के तहत न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय से आदेश मिलने के बाद उसे जेल भेज दिया गया। इस तरह किशोरी की बरामदगी और आरोपी की गिरफ्तारी के साथ मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू हो गई है।

    यह मामला 24 अक्टूबर को दर्ज हुई अपहरण की शिकायत से शुरू हुआ था। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने आरोपी की तलाश की और मोबाइल लोकेशन के आधार पर उज्जैन तक पहुंची। किशोरी की बरामदगी के बाद उसके बयानों के आधार पर मामले में दुष्कर्म से संबंधित कार्रवाई भी की गई।

    फिलहाल पुलिस मामले की विवेचना कर रही है। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और दर्ज बयानों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। नाबालिग से जुड़े मामले में उसकी पहचान और निजी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

  • नरवर किले को ASI के अधीन करने की पहल, रणथंभौर-कूनो से खजुराहो तक पर्यटन सर्किट बनाने का प्रस्ताव

    नरवर किले को ASI के अधीन करने की पहल, रणथंभौर-कूनो से खजुराहो तक पर्यटन सर्किट बनाने का प्रस्ताव

    मध्य प्रदेश: के शिवपुरी जिले में स्थित ऐतिहासिक नरवर किले के संरक्षण और पर्यटन विकास की दिशा में पहल की गई है। शिवपुरी-गुना क्षेत्र के सांसद और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किले को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधीन करने, यहां तक पहुंचने के लिए बेहतर सड़क बनाने और इसे प्रमुख पर्यटन स्थलों से जोड़ने के प्रस्ताव पर कार्रवाई की अनुशंसा की है। इस संबंध में उन्होंने केंद्रीय संस्कृति मंत्री जी. किशन रेड्डी और मध्य प्रदेश की पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर को अर्धशासकीय पत्र भेजे हैं। यह पहल भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य संदीप माहेश्वरी और नगर परिषद अध्यक्ष पद्मा संदीप माहेश्वरी की ओर से उठाई गई मांगों के बाद सामने आई है।

    नरवर का किला अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक मान्यताओं के कारण क्षेत्र की महत्वपूर्ण धरोहर माना जाता है। इससे राजा नल और रानी दमयंती की कथाएं, प्राचीन राजवंशों का इतिहास और ढोला-मारू की प्रेमकथा जैसी लोकपरंपराएं जुड़ी हुई हैं। किले को लेकर प्रचलित मान्यताओं में इसे राजा नल की राजधानी नलपुर से भी जोड़ा जाता है। यहां पसरा देवी और लोढ़ी माता से संबंधित धार्मिक आस्थाएं भी स्थानीय परंपरा का हिस्सा हैं। इन ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पहलुओं के चलते किले के संरक्षण और व्यवस्थित पर्यटन विकास की मांग लंबे समय से उठती रही है।

    नरवर किले का इतिहास अलग-अलग राजवंशों और शासकों से जुड़ा रहा है। प्राचीन काल में इस क्षेत्र पर नाग राजाओं का शासन होने के उल्लेख मिलते हैं। बाद के दौर में कछवाह राजपूतों ने किले का पुनर्निर्माण कराया। इसके बाद यहां परिहार और तोमर राजपूतों का अधिकार रहा। 16वीं शताब्दी की शुरुआत में सिकंदर लोदी ने किले पर कब्जा किया। आगे चलकर मुगल सम्राट अकबर के शासनकाल में यह मालवा सूबे के प्रशासनिक ढांचे का हिस्सा बना। 19वीं शताब्दी की शुरुआत में मराठा सिंधिया राजवंश ने इस पर अधिकार कर लिया। किले के ऐतिहासिक भवनों में कचहरी महल भी शामिल है, जिसके जीर्णोद्धार का उल्लेख वर्ष 1925 में महाराजा माधवराव सिंधिया के समय से जुड़ा है।

    किला विंध्याचल पर्वत श्रृंखला की एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। कस्बे से इसकी खड़ी ऊंचाई लगभग 500 फीट बताई जाती है, जबकि समुद्र तल से इसकी ऊंचाई करीब 1,600 फीट है। इसकी भौगोलिक स्थिति और प्राचीन संरचना इसे विशेष पहचान देती है, लेकिन ऊंचाई पर स्थित होने के कारण पर्यटकों के लिए पहुंच आसान बनाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बेहतर पहुंच मार्ग, नियमित रखरखाव और आवश्यक पर्यटक सुविधाओं की कमी लंबे समय से स्थानीय स्तर पर चिंता का विषय रही है। किले तक सड़क बनाने के लिए वन विभाग और लोक निर्माण विभाग के समन्वय की जरूरत भी उठाई जाती रही है।

    किले को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन करने का प्रस्ताव संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसका उद्देश्य ऐतिहासिक संरचनाओं का व्यवस्थित रखरखाव करना और पुरातात्विक महत्व के अनुरूप उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हालांकि, प्रस्ताव पर संबंधित विभागों की नियमानुसार कार्रवाई और निर्णय के बाद ही इसके क्रियान्वयन की स्थिति स्पष्ट होगी।

    पर्यटन विकास के लिए रणथंभौर, कूनो, शिवपुरी, नरवर, ओरछा और खजुराहो को जोड़कर एक सर्किट विकसित करने का सुझाव दिया गया है। इन स्थलों को एक मार्ग से जोड़ने पर पर्यटकों को वन्यजीव पर्यटन, ऐतिहासिक धरोहरों और सांस्कृतिक स्थलों को एक ही यात्रा में देखने का अवसर मिल सकता है। इससे नरवर को भी व्यापक पर्यटन मानचित्र पर पहचान मिलने की संभावना है।

    पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ पहुंच सकता है। गाइड सेवा, होटल, होम-स्टे, परिवहन, खानपान और अन्य पर्यटन सुविधाओं से जुड़े रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। स्थानीय दुकानदारों और छोटे कारोबारियों को भी इसका फायदा मिल सकता है। फिलहाल, किले के संरक्षण, पहुंच मार्ग और पर्यटन सर्किट से जोड़ने के प्रस्तावों पर संबंधित स्तरों पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

  • शिवपुरी में बीआरसीसी और एपीसी की नियुक्तियों पर फिर लगी रोक, राज्य शिक्षा केंद्र ने जारी किए नए निर्देश

    शिवपुरी में बीआरसीसी और एपीसी की नियुक्तियों पर फिर लगी रोक, राज्य शिक्षा केंद्र ने जारी किए नए निर्देश

    मध्य प्रदेश । के शिवपुरी जिले में बीआरसीसी और एपीसी पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया एक बार फिर अटक गई है। 30 अक्टूबर को जिला पंचायत सभागार में प्रस्तावित काउंसलिंग के जरिए 12 रिक्त पदों पर नियुक्तियां की जानी थीं, लेकिन राज्य शिक्षा केंद्र से मिले नए निर्देशों के बाद फिलहाल इस प्रक्रिया पर रोक लग गई है। निर्देशों के अनुसार, संबंधित न्यायालयीन प्रकरणों का निराकरण होने तक नियुक्ति की आगे की कार्रवाई नहीं की जाएगी। इससे नियुक्ति की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को फिलहाल इंतजार करना पड़ेगा।

    जिला परियोजना समन्वयक दफेदार सिंह सिकरवार के अनुसार, शिवपुरी में नियुक्ति प्रक्रिया के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। निर्धारित कार्यक्रम के तहत 30 अक्टूबर को जिला पंचायत सभागार में काउंसलिंग होनी थी। इसके बाद परीक्षा के परिणाम के आधार पर रिक्त पदों पर चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी थी। हालांकि, राज्य स्तर से मिले नए दिशा-निर्देशों के कारण तय कार्यक्रम को रोकना पड़ा है।

    यह मामला सहायक परियोजना समन्वयक यानी एपीसी और बीआरसीसी पदों पर नियोजन से जुड़ा है। राज्य शिक्षा केंद्र, भोपाल ने न्यायालय के निर्णय और उसके अनुपालन को लेकर कलेक्टर को पत्र जारी किया है। इसमें उच्च प्रभार और कूलिंग पीरियड से संबंधित प्रावधानों के तहत आवेदकों को परीक्षा में शामिल करने के न्यायालयीन निर्देशों का उल्लेख किया गया है।

    इन निर्देशों के अनुपालन में शिवपुरी जिले में 16 याचिकाकर्ताओं को परीक्षा में शामिल किया गया था। योजना के अनुसार, परीक्षा परिणाम के आधार पर 30 अक्टूबर को होने वाली काउंसलिंग के बाद नियुक्ति से संबंधित अगली प्रक्रिया पूरी की जानी थी। लेकिन नियुक्तियों से जुड़े न्यायालयीन मामलों के चलते अब पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो गई है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि काउंसलिंग की अगली तारीख कब निर्धारित की जाएगी।

    राज्य शिक्षा केंद्र ने अपने नए निर्देशों में न्यायालयीन प्रकरणों से निपटने के लिए जिला स्तर पर जिम्मेदारी तय करने को कहा है। जिन जिलों में नियुक्ति से जुड़े मामले न्यायालय में लंबित हैं, वहां संबंधित याचिका के अनुसार एक प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया जाना है। इस अधिकारी को प्रकरण से जुड़े तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर न्यायालय में जवाबदावा प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी दी जाएगी।

    निर्देशों में यह भी कहा गया है कि जवाबदावा तत्काल प्रस्तुत किया जाए और न्यायालय से मामले की शीघ्र सुनवाई का अनुरोध किया जाए। इसका उद्देश्य लंबित प्रकरणों में न्यायालय के समक्ष संबंधित पक्ष का जवाब समय पर प्रस्तुत करना है। राज्य शिक्षा केंद्र ने उन जिलों के लिए भी स्थिति स्पष्ट की है, जहां इस प्रकार के न्यायालयीन प्रकरण नहीं हैं। ऐसे जिलों में 2 सितंबर 2026 को जारी पूर्व पत्र के अनुरूप आगे की कार्रवाई की जानी है।

    ये निर्देश राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक हरजिंदर सिंह की ओर से 29 अक्टूबर को जारी किए गए। इसके बाद शिवपुरी में नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के बजाय न्यायालयीन मामलों से संबंधित निर्देशों के पालन की तैयारी शुरू कर दी गई है।

    दफेदार सिंह सिकरवार ने बताया कि नए आदेश के बाद नियुक्ति प्रक्रिया कब शुरू हो सकेगी, इसका पता आगे की स्थिति स्पष्ट होने पर ही चलेगा। फिलहाल जिला स्तर पर प्रभारी अधिकारी नियुक्त करने और निर्देशों के अनुपालन की तैयारी की जा रही है। ऐसे में 12 पदों पर चयन की प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों को काउंसलिंग और नियुक्ति के लिए नई तारीख घोषित होने तक इंतजार करना होगा।

  • एमपी के रोजगार सहायकों के लिए राहत भरी खबर, 6 महीने में ट्रांसफर भत्ते और HRA की नीति बनाएगी सरकार

    एमपी के रोजगार सहायकों के लिए राहत भरी खबर, 6 महीने में ट्रांसफर भत्ते और HRA की नीति बनाएगी सरकार


    जबलपुर । मध्य प्रदेश की ग्राम पंचायतों में काम करने वाले करीब 23 हजार ग्राम रोजगार सहायकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। जबलपुर हाईकोर्ट ने उनके तबादले से जुड़े आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार यदि किसी ग्राम रोजगार सहायक का तबादला करती है तो उसे नियमानुसार अनिवार्य यात्रा भत्ता सहित यात्रा भत्ता और घरेलू भत्ता देना होगा। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को रोजगार सहायकों के लिए छह महीने के भीतर भत्तों से संबंधित नीति तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले से प्रदेशभर के रोजगार सहायकों को भविष्य में आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

    पांच रोजगार सहायकों ने दायर की थी याचिका

    इस मामले में सिंगरौली के अमित कुमार मिश्रा और शहडोल के शिवाकांत मिश्रा व राजेश कुमार सहित सागर के रानू राजपूत तथा टीकमगढ़ के अभिषेक पटेरिया ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। पांचों याचिकाकर्ताओं ने 18 जुलाई 2025 को याचिका दायर कर तबादले से जुड़ी समस्याओं और आर्थिक नुकसान का मुद्दा उठाया था। मामले की सुनवाई जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ में हुई। अदालत ने 14 अक्टूबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब इस पर आदेश जारी कर दिया गया है।

    याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता गोपेश यश तिवारी ने पक्ष रखा। मामले में रोजगार सहायकों के वेतन और तबादले के बाद होने वाले अतिरिक्त खर्च का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया। ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले रोजगार सहायकों को सीमित वेतन में अपने परिवार और दूसरी जरूरतों का खर्च उठाना पड़ता है। ऐसे में यदि किसी कर्मचारी को मौजूदा कार्यस्थल से काफी दूर भेज दिया जाता है तो उसके सामने आवागमन और रहने की व्यवस्था से जुड़ी आर्थिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

    18 हजार रुपये वेतन में दूर तबादला बन सकता है परेशानी

    याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता के अनुसार ग्राम रोजगार सहायकों को लगभग 18 हजार रुपये मासिक वेतन मिलता है। ऐसी स्थिति में यदि किसी कर्मचारी का तबादला 100 किलोमीटर दूर कर दिया जाता है तो उसे आने जाने और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है। सीमित आय के कारण यह खर्च कर्मचारी के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।

    इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने सरकार को यात्रा भत्ते और हाउस रेंट अलाउंस यानी एचआरए से संबंधित नीति बनाने के निर्देश दिए हैं। आदेश के अनुसार राज्य रोजगार गारंटी परिषद के आयुक्त को छह महीने के भीतर इस संबंध में नीति तैयार करनी होगी। नीति तैयार होने से यह तय करने में मदद मिलेगी कि तबादले की स्थिति में रोजगार सहायकों को किस प्रकार के भत्ते और आर्थिक सुविधाएं दी जाएंगी।

    तबादले पर रोक नहीं लेकिन भत्तों पर बनानी होगी नीति

    हाईकोर्ट के आदेश में यह भी महत्वपूर्ण है कि रोजगार सहायकों की तबादले नहीं किए जाने की मांग को स्वीकार नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि राज्य सरकार प्रशासनिक जरूरतों के अनुसार रोजगार सहायकों का तबादला कर सकेगी। हालांकि तबादले के कारण कर्मचारियों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को देखते हुए भत्तों के संबंध में नीति तैयार करनी होगी।

    प्रदेश में करीब 23 हजार ग्राम रोजगार सहायक ग्राम पंचायतों में विभिन्न कार्यों से जुड़े हैं। ऐसे में इस फैसले का असर बड़ी संख्या में कर्मचारियों पर पड़ सकता है। अब सभी की नजर राज्य सरकार और राज्य रोजगार गारंटी परिषद की ओर से तैयार की जाने वाली नीति पर रहेगी। छह महीने की समयसीमा में बनने वाली यह नीति तय करेगी कि तबादले की स्थिति में कर्मचारियों को किन शर्तों पर आर्थिक लाभ मिलेगा।

  • तकनीक और आस्था का अद्भुत संगम, मैग्नेटिक रामायण में छूते ही सुनाई देती हैं रामचरितमानस की चौपाइयां

    तकनीक और आस्था का अद्भुत संगम, मैग्नेटिक रामायण में छूते ही सुनाई देती हैं रामचरितमानस की चौपाइयां


    ग्वालियर । ग्वालियर के स्वदेशी मेले में इस बार धार्मिक आस्था और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। मेले में रखी गई मैग्नेटिक रामायण लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इस खास पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें लिखी रामचरितमानस की चौपाइयों और श्रीमद्भागवत के श्लोकों को छूते ही उनका पाठ सुनाई देने लगता है। इससे श्रद्धालुओं को धार्मिक ग्रंथों को पढ़ने के साथ साथ सुनने का अवसर भी मिल रहा है। पारंपरिक धार्मिक साहित्य को तकनीक की मदद से लोगों तक पहुंचाने का यह प्रयास खास तौर पर बच्चों और बुजुर्गों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

    छूते ही सुनाई देने लगता है चौपाइयों का पाठ

    बोलने वाली रामायण की खासियत के बारे में वंदना भदौरिया ने बताया कि इसमें रामचरितमानस की चौपाइयां और श्रीमद्भागवत के श्लोक मुद्रित हैं। पुस्तक में विशेष तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसके माध्यम से पाठक किसी चौपाई या श्लोक को छूते हैं तो उससे संबंधित पाठ सुनाई देने लगता है। इस सुविधा के कारण लोगों को धार्मिक ग्रंथों का पाठ सुनने के लिए किसी दूसरे व्यक्ति पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। वे अपनी पसंद की चौपाई या श्लोक चुनकर उसका पाठ सुन सकते हैं।

    धार्मिक ग्रंथों में कई बार शब्दों के सही उच्चारण और उनके भाव को समझना लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। पाठ सुनने से लोगों को शब्दों का उच्चारण समझने और धार्मिक साहित्य से जुड़ने में मदद मिलती है। जो लोग नियमित रूप से रामचरितमानस या श्रीमद्भागवत का पाठ करना चाहते हैं उनके लिए भी यह पुस्तक एक अलग अनुभव प्रदान करती है।

    बच्चों और बुजुर्गों के लिए खास सुविधा

    मैग्नेटिक रामायण की यह तकनीक अलग अलग उम्र के लोगों के लिए उपयोगी है। छोटे बच्चों को धार्मिक चौपाइयों और श्लोकों से परिचित कराने में यह तरीका मददगार हो सकता है। बच्चे पुस्तक में लिखे पाठ को देखकर और उसे सुनकर धार्मिक साहित्य के प्रति रुचि विकसित कर सकते हैं। वहीं बुजुर्गों और उन लोगों के लिए भी यह सुविधा लाभकारी है जिन्हें धार्मिक ग्रंथ पढ़ने में कठिनाई होती है।

    पुस्तक को छूकर पाठ सुनने की सुविधा धार्मिक साहित्य को अधिक सहज और सरल बनाती है। इसमें पाठक अपनी पसंद के हिस्से को सुन सकते हैं और अपनी सुविधा के अनुसार समय दे सकते हैं। इस तरह पढ़ने और सुनने का मेल धार्मिक ग्रंथों को समझने का एक नया तरीका प्रस्तुत करता है।

    परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास

    आमतौर पर धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन पढ़कर या किसी व्यक्ति से पाठ सुनकर किया जाता है। लेकिन मैग्नेटिक रामायण इस अनुभव को तकनीक के माध्यम से अलग रूप देती है। इसमें धार्मिक ग्रंथों की पारंपरिक सामग्री के साथ ऐसी सुविधा जोड़ी गई है जिससे पाठक सीधे चौपाइयों और श्लोकों का पाठ सुन सकते हैं।

    स्वदेशी मेले में इस पुस्तक को देखने और इसकी कार्यप्रणाली समझने के लिए लोग पहुंच रहे हैं। यह पहल दिखाती है कि आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए भी किया जा सकता है। मैग्नेटिक रामायण केवल एक पुस्तक के रूप में ही नहीं बल्कि पढ़ने और सुनने को जोड़ने वाले माध्यम के रूप में भी लोगों का ध्यान खींच रही है।

  • पति की मौत के बाद महिला को फिर करने लगा परेशान, अश्लील तस्वीरें भेजने और वायरल करने की धमकी का केस दर्ज

    पति की मौत के बाद महिला को फिर करने लगा परेशान, अश्लील तस्वीरें भेजने और वायरल करने की धमकी का केस दर्ज


    ग्वालियर । ग्वालियर में तीन बच्चों की परवरिश कर रही एक महिला को परेशान करने और उस पर शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डालने का मामला सामने आया है। आरोप है कि महिला के इनकार करने पर उसका पुराना परिचित उसे अश्लील मैसेज और आपत्तिजनक तस्वीरें भेजने लगा। इतना ही नहीं उसने तस्वीरों को सोशल मीडिया पर वायरल कर महिला को बदनाम करने की धमकी भी दी। लगातार मिल रही धमकियों से परेशान होकर महिला ने पुलिस से शिकायत की। माधौगंज थाना पुलिस ने गुरुवार रात आरोपी बलदेव शर्मा उर्फ गोलू के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के मुताबिक पीड़िता 36 वर्षीय महिला मूल रूप से उत्तर प्रदेश के इटावा की रहने वाली है। वह ग्वालियर के माधौगंज इलाके में किराए के मकान में अपने तीन बच्चों के साथ रहती है। महिला ने पुलिस को बताया कि कुछ साल पहले एक शादी समारोह के दौरान उसकी पहचान बलदेव शर्मा उर्फ गोलू से हुई थी। शुरुआत में दोनों के बीच सामान्य बातचीत होती थी। धीरे धीरे परिचय बढ़ा और बातचीत का सिलसिला जारी रहा। हालांकि जब महिला के पति को इस दोस्ती के बारे में पता चला तो उन्होंने इसका विरोध किया। इसके बाद महिला ने आरोपी से दूरी बना ली और बातचीत बंद कर दी।

    महिला के पति का 18 जनवरी 2025 को बीमारी के कारण निधन हो गया था। पति की मौत के बाद तीनों बच्चों की जिम्मेदारी महिला के कंधों पर आ गई। वह अपने बच्चों की परवरिश और परिवार की जरूरतों को पूरा करने में जुटी थी। शिकायत के मुताबिक 28 जून 2026 से आरोपी ने एक बार फिर महिला से संपर्क करना शुरू कर दिया। वह फोन करके बातचीत करने और अकेले मिलने का दबाव बनाने लगा। महिला का आरोप है कि आरोपी उस पर शारीरिक संबंध बनाने के लिए भी दबाव डाल रहा था।

    महिला ने जब उसकी मांगों को मानने से इनकार कर दिया तो आरोपी का व्यवहार और परेशान करने वाला हो गया। शिकायत के अनुसार वह महिला को अश्लील संदेश और आपत्तिजनक तस्वीरें भेजने लगा। महिला ने इसका विरोध किया तो आरोपी ने तस्वीरों को सोशल मीडिया पर वायरल करने और उसे समाज में बदनाम करने की धमकी दी। इस तरह की धमकियों से महिला परेशान हो गई और उसने पुलिस की मदद लेने का फैसला किया।

    पीड़िता माधौगंज थाने पहुंची और आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर बलदेव शर्मा उर्फ गोलू के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है। पुलिस अब महिला के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच कर रही है। डिजिटल संदेशों और तस्वीरों से संबंधित तथ्यों की पड़ताल भी जांच का अहम हिस्सा हो सकती है।

    माधौगंज थाना प्रभारी दिव्या तिवारी के मुताबिक महिला की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है और आरोपी की तलाश की जा रही है। पुलिस का कहना है कि आरोपी को पकड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की जांच जारी है। पुलिस की जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई से ही पूरे घटनाक्रम के सभी पहलू स्पष्ट हो सकेंगे।

  • बिछिया किसने दी? इसी सवाल पर भड़का पति, करवाचौथ के अगले दिन पत्नी की हत्या कर खुद पुलिस को बुलाया

    बिछिया किसने दी? इसी सवाल पर भड़का पति, करवाचौथ के अगले दिन पत्नी की हत्या कर खुद पुलिस को बुलाया


    ग्वालियर । ग्वालियर के मुरार थाना क्षेत्र में करवाचौथ के दिन एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। त्यागी नगर में रहने वाले आनंद श्रीवास्तव ने अपनी पत्नी मधु श्रीवास्तव की हत्या कर दी। पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसे पत्नी के चरित्र पर शक था। करवाचौथ पर मधु को किसी ने बिछिया उपहार में दी थी। आनंद को संदेह था कि ये बिछिया उसके बड़े भाई ने दी हैं। इसी बात को लेकर पति पत्नी के बीच विवाद हुआ था। गुरुवार सुबह पत्नी के सिरहाने बिछिया देखकर उसका गुस्सा फिर भड़क गया। आरोप है कि इसके बाद उसने बिस्तर पर लेटी मधु के सिर और चेहरे पर मूसल से 17 बार वार किए। घटना के बाद आरोपी ने खुद पुलिस हेल्पलाइन 112 पर फोन कर हत्या की जानकारी दी। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है।

    पुलिस के मुताबिक आनंद और मधु ने वर्ष 2010 में प्रेम विवाह किया था। दोनों के एक बेटा और एक बेटी हैं। परिवार में करवाचौथ की तैयारियां चल रही थीं। घटना से एक रात पहले मधु ने अपने पति के नाम की मेहंदी लगाई थी और देर रात तक जागती रही थी। सुबह उठने के बाद उसने घर की सफाई की। बेटे के अनुसार मां ने कहा था कि आज उसका उपवास है और काम करने से प्यास लगेगी इसलिए वह फिलहाल काम नहीं करेगी। इसके बाद आनंद ने पोहा बनाया और खुद खाने के साथ बेटे को भी खिलाया। कुछ समय बाद घर में हुई घटना ने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया।

    बेटे ने पुलिस को बताया कि सुबह करीब 10 बजे घर में शोर सुनकर उसकी नींद खुली। बाहर पुलिसकर्मी मौजूद थे। जब वह कमरे में पहुंचा तो मां का शव कंबल से ढका हुआ था। बेटे ने बताया कि उसे जानकारी नहीं है कि रात या सुबह माता पिता के बीच कोई झगड़ा हुआ था या नहीं। घटना के बाद दोनों बच्चे गहरे सदमे में हैं। परिवार के अन्य सदस्य भी इस घटना से टूट गए हैं।

    पुलिस पूछताछ में आनंद ने बिछिया को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उसके मुताबिक करवाचौथ की शाम मधु नई बिछिया लेकर आई थी। उसने पत्नी से कई बार पूछा कि बिछिया किसने दी हैं लेकिन मधु ने केवल इतना बताया कि किसी ने उपहार में दी हैं। आनंद को शक था कि ये बिछिया उसके बड़े भाई ने दी हैं। पुलिस के अनुसार आरोपी को यह संदेह भी था कि पत्नी परिवार के दूसरे सदस्यों के साथ मिलकर संपत्ति हड़पने की योजना बना रही है। उसे पत्नी के अन्य लोगों से बातचीत करने पर भी शक था। हालांकि परिजनों ने बताया कि मधु के पास मोबाइल फोन तक नहीं था। इन आरोपों और संदेहों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

    मधु की बेटी ने भी पिता के व्यवहार को लेकर गंभीर बातें बताई हैं। उसके मुताबिक पिता उसे पीटते थे और पढ़ाई करने से रोकते थे। इसी वजह से वह पिता के पास जाने से बचती थी और अपने ताऊ ताई के साथ रहती थी। घटना के बाद परिवार के दोनों बच्चे अपने बुजुर्ग दादा को संभालते दिखाई दिए। घर में पसरे मातम के बीच बच्चों को भी इस दुखद घटना का सामना करना पड़ रहा है।

    सिटी एसपी संदीप बांगरे के मुताबिक पुलिस को सुबह 112 पर कॉल मिला था। फोन करने वाले आनंद श्रीवास्तव ने अपनी पत्नी की हत्या करने की जानकारी दी थी। सूचना मिलते ही मुरार थाना पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल किया गया मूसल भी जब्त किया है। आरोपी ने पूछताछ में पत्नी के प्रति नफरत होने की बात कही और हत्या पर पछतावा नहीं होने का दावा किया।

    पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है। आरोपी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने की बात भी सामने आई है लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच के जरिए मौत से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जा रही है। पुलिस अब पारिवारिक विवाद और घटना की परिस्थितियों से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करेगी।