Category: Madhya Pradesh

  • दमोह में कलेक्टर ने वृद्धाश्रम पहुंचकर लिया आशीर्वाद, बुजुर्गों को बांटे फल

    दमोह में कलेक्टर ने वृद्धाश्रम पहुंचकर लिया आशीर्वाद, बुजुर्गों को बांटे फल


    दमोहदमोह के नवागत कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने गुरुवार को पदभार संभालने के बाद वृद्धाश्रम का दौरा कर मानवीय पहल का संदेश दिया। इस दौरान उन्होंने वृद्धजनों से मुलाकात की, उनका हालचाल जाना और उन्हें फल वितरित किए।

    वृद्धों से मिलकर लिया आशीर्वाद

    कलेक्टर ने वृद्धाश्रम पहुंचकर सभी बुजुर्गों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया, जिससे वहां मौजूद बुजुर्ग भावुक और प्रसन्न नजर आए। उन्होंने प्रत्येक वृद्ध महिला और पुरुष से व्यक्तिगत रूप से बातचीत कर उनकी समस्याओं को समझने की कोशिश की।

    समस्याओं के समाधान के दिए निर्देश

    निरीक्षण के दौरान एक बुजुर्ग ने पारिवारिक समस्या बताते हुए कहा कि उनकी बहू ने उनके मकान पर कब्जा कर लिया है। इस पर कलेक्टर ने तुरंत एसडीएम को मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा कि वृद्धजनों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो।

    वृद्धाश्रम में सुविधाओं की ली जानकारी

    कलेक्टर ने वृद्धाश्रम में उपलब्ध सुविधाओं की भी जानकारी ली और यह जानने का प्रयास किया कि बुजुर्गों को किसी प्रकार की असुविधा तो नहीं हो रही है। उन्होंने बताया कि शासन की ओर से दी जा रही सुविधाओं का लाभ सभी को समय पर मिलना चाहिए।

    लगभग एक घंटे चला दौरा

    कलेक्टर करीब एक घंटे तक वृद्धाश्रम में रहे। इस दौरान एसडीएम सौरव गंधर्व और सामाजिक न्याय विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे। वर्तमान में वृद्धाश्रम में लगभग 30 बुजुर्ग रह रहे हैं, जिन्हें शासन और सामाजिक संस्थाओं की मदद से आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

    कलेक्टर का यह दौरा केवल औपचारिक निरीक्षण नहीं बल्कि एक संवेदनशील प्रशासनिक पहल के रूप में देखा जा रहा है, जिसने बुजुर्गों में भरोसा और सुरक्षा की भावना को मजबूत किया है।

  • नगरीय सुधार की नई दिशा भोपाल में कार्यशाला शुरू रोजगार और राजस्व बढ़ाने पर फोकस

    नगरीय सुधार की नई दिशा भोपाल में कार्यशाला शुरू रोजगार और राजस्व बढ़ाने पर फोकस


    भोपाल । मध्यप्रदेश में नगरीय विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से राजधानी भोपाल में सुंदरलाल पटवा राष्ट्रीय नगर प्रबंधन संस्थान में शहरी सुधार कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि प्रदेश के सभी नगरीय निकायों को अब स्वावलंबी और विकास केंद्र के रूप में स्थापित करना होगा।

    कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ जिसके बाद मंत्री ने अधिकारियों से दूरदर्शी सोच और कर्मठता के साथ शहरों के समग्र विकास के लिए काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रशासन केवल नियमों से नहीं बल्कि व्यवहार और संवेदनशीलता से चलता है। जनसेवा को सर्वोपरि रखते हुए ही एक अधिकारी अपनी वास्तविक पहचान बना सकता है।

    कैलाश विजयवर्गीय ने अधिकारियों को प्रेरित करते हुए कहा कि उन्हें हमेशा विद्यार्थी भाव के साथ सीखते रहना चाहिए। यही दृष्टिकोण उन्हें व्यक्तिगत और प्रशासनिक दोनों स्तर पर उत्कृष्ट बनाएगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि नगरीय निकायों को भी इसी दिशा में आगे बढ़ाना होगा ताकि शहर केवल प्रशासनिक इकाई न रहकर विकास के केंद्र बन सकें।

    मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि अब शहरी विकास को केवल सड़क और जल आपूर्ति तक सीमित नहीं रखा जा सकता। शहरों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए रोजगार सृजन और राजस्व वृद्धि पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे नवाचार अपनाएं और शहरों में नई संभावनाओं को तलाशें ताकि स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां बढ़ सकें।

    नगरीय निकायों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए भूमि मुद्रीकरण और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन पर भी जोर दिया गया। मंत्री ने कहा कि पारदर्शिता और जनभागीदारी के साथ किए गए कार्यों में जनता का विश्वास बढ़ता है और ऐसे में कर वृद्धि जैसे निर्णयों में भी सहयोग मिलता है। उन्होंने अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों के साथ बेहतर समन्वय बनाकर कार्य करने की सलाह दी ताकि विकास कार्यों में गति लाई जा सके।

    कार्यशाला में अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने इसके उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह प्रशिक्षण अधिकारियों को नई कार्ययोजना बनाने और शहरी विकास को सुव्यवस्थित करने में मदद करेगा। वहीं नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने कहा कि विभाग एक परिवार की तरह काम कर रहा है और इस कार्यशाला का उद्देश्य नागरिक संतुष्टि को केंद्र में रखकर कार्यप्रणाली को और बेहतर बनाना है।

    दो दिवसीय इस कार्यशाला में प्रदेश के सभी नगर निगमों और नगरीय निकायों के अधिकारी शामिल हुए हैं जहां सुधार समीक्षा और संवाद के माध्यम से शहरों को आधुनिक और सुविधायुक्त बनाने की दिशा में ठोस रणनीति तैयार की जाएगी। यह पहल प्रदेश के शहरी विकास को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

  • डिजिटल जनगणना की शुरुआत, एमपी में 16 से 30 अप्रैल तक स्व गणना अभियान शुरू

    डिजिटल जनगणना की शुरुआत, एमपी में 16 से 30 अप्रैल तक स्व गणना अभियान शुरू


    भोपाल । मध्यप्रदेश में जनगणना 2027 की प्रक्रिया का औपचारिक शुभारंभ हो गया है जहां मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे राष्ट्र और प्रदेश के विकास की नींव बताते हुए नागरिकों से इसमें सक्रिय भागीदारी की अपील की है। राजधानी भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने ऑनलाइन स्व गणना प्रक्रिया की शुरुआत की और स्वयं पोर्टल पर पंजीकरण कर इस अभियान का शुभारंभ किया।

    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि जनगणना केवल आंकड़ों को इकट्ठा करने की प्रक्रिया नहीं है बल्कि यह देश के भविष्य को दिशा देने वाला एक महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा कि किसी भी योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसके पीछे उपलब्ध आंकड़े कितने सटीक और व्यापक हैं। ऐसे में जनगणना देश की रीढ़ के समान है जो विकास की पूरी संरचना को मजबूती प्रदान करती है।

    प्रदेश में 16 अप्रैल से 30 अप्रैल तक ऑनलाइन स्व गणना का कार्य किया जाएगा जिसमें नागरिक स्वयं अपनी जानकारी डिजिटल माध्यम से दर्ज कर सकेंगे। इसके बाद 1 मई से 30 मई तक मकान सूचीकरण की प्रक्रिया चलेगी जो पूरी तरह आधुनिक तकनीक के माध्यम से संचालित होगी। इस बार की जनगणना को विशेष रूप से डिजिटल और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया है ताकि आंकड़ों की शुद्धता और विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके।

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि यह जनगणना आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित और बेहतर बनाने का आधार बनेगी। इसके जरिए यह समझा जा सकेगा कि विकास की योजनाएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक कितनी प्रभावी तरीके से पहुंच रही हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे इस प्रक्रिया में पूरी ईमानदारी और सटीकता के साथ अपनी जानकारी दर्ज करें ताकि सही आंकड़ों के आधार पर योजनाएं तैयार की जा सकें।

    उन्होंने जनगणना कार्य में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि वे राष्ट्र निर्माण का एक पवित्र दायित्व निभा रहे हैं। उनका परिश्रम और सटीक कार्य देश के विकास को नई दिशा देगा। कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति भी रही जिन्होंने इस अभियान को सफल बनाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताई।

    डिजिटल तकनीक के इस व्यापक उपयोग के साथ मध्यप्रदेश में जनगणना की यह प्रक्रिया न केवल प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाएगी बल्कि नागरिकों की भागीदारी को भी आसान बनाएगी। अब यह देखना अहम होगा कि प्रदेश के लोग इस पहल में कितनी सक्रियता से हिस्सा लेते हैं और इसे कितना सफल बनाते हैं।

  • पन्ना टाइगर रिजर्व से निकला बाघ गांव में घुसा, दो मवेशियों का किया शिकार

    पन्ना टाइगर रिजर्व से निकला बाघ गांव में घुसा, दो मवेशियों का किया शिकार


    पन्ना पन्ना टाइगर रिजर्व (PTR) से सटे विक्रमपुर गांव में गुरुवार सुबह उस समय दहशत फैल गई जब एक बाघ रिहायशी इलाके में घुस आया और बाड़े में बंधे दो मवेशियों का शिकार कर लिया। घटना के बाद पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई और लोग घरों में दुबक गए।

    सुबह-सुबह गांव में दिखा बाघ, मचा हड़कंप

    जानकारी के अनुसार, एक राहगीर ने सबसे पहले बाघ को गांव के पास देखा, जिसके बाद यह खबर तेजी से फैल गई। कुछ ही देर में ग्रामीणों ने वन विभाग और पन्ना टाइगर रिजर्व (PTR) की टीम को सूचना दी। बाघ की मौजूदगी से पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया।

    दो मवेशियों का किया शिकार

    ग्रामीणों के मुताबिक, बाघ ने गांव के किनारे स्थित एक बाड़े में घुसकर दो मवेशियों को अपना शिकार बना लिया। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें बाघ की चहलकदमी देखी जा सकती है।

    रेस्क्यू के लिए उतरी PTR टीम, हाथियों की मदद ली गई

    सूचना मिलते ही PTR की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया। बाघ को सुरक्षित रूप से जंगल की ओर वापस खदेड़ने के लिए हाथियों की भी मदद ली जा रही है। वन विभाग ने पूरे इलाके में अलर्ट जारी करते हुए ग्रामीणों को घरों में रहने और सतर्क रहने की सलाह दी है।

    बाघों की बढ़ती संख्या बनी चुनौती

    पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती संख्या अब आसपास के गांवों के लिए चुनौती बनती जा रही है। जंगल क्षेत्र में जगह कम पड़ने के कारण बाघ कई बार रिहायशी इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं। इससे पहले भी आसपास के क्षेत्रों में बाघ की मौजूदगी देखी जा चुकी है।

    वन विभाग की अपील

    PTR के डिप्टी डायरेक्टर बी.के. पटेल ने पुष्टि की है कि रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंच चुकी है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है। वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे जंगल के आसपास न जाएं और किसी भी स्थिति में बाघ को परेशान न करें।

  • टीकमगढ़ में अवैध नलकूप खनन पर बड़ी कार्रवाई, बोरिंग मशीन जब्त

    टीकमगढ़ में अवैध नलकूप खनन पर बड़ी कार्रवाई, बोरिंग मशीन जब्त


    नई दिल्ली। टीकमगढ़ में भू-जल संरक्षण नियमों के उल्लंघन को लेकर प्रशासन ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। बड़ागांव थाना क्षेत्र के हैदरपुर गांव में अवैध नलकूप खनन के खिलाफ एसडीएम संस्कृति लिटोरिया ने बुधवार देर रात छापेमारी कर बोरिंग मशीन जब्त कर ली।

    रात में चल रहा था अवैध खनन

    जानकारी के अनुसार, प्रशासन को मुखबिर से सूचना मिली थी कि गांव में रात के अंधेरे में बिना अनुमति के नलकूप खनन किया जा रहा है। सूचना मिलते ही एसडीएम मौके पर पहुंचीं, जहां मशीन से बोरिंग का काम चलता पाया गया। जब टीम ने खनन की अनुमति मांगी तो मौके पर मौजूद लोगों के पास कोई वैध दस्तावेज नहीं मिले। इसके बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बोरिंग मशीन को जब्त कर बड़ागांव थाना परिसर में रखवा दिया।

    जिले में पहले से लागू है प्रतिबंध

    गौरतलब है कि जिले में गिरते भू-जल स्तर को देखते हुए कलेक्टर विवेक श्रोतिय ने नलकूप खनन पर पहले ही प्रतिबंध लगा दिया है, जो 15 जून तक लागू रहेगा। इसके बावजूद नियमों का उल्लंघन कर अवैध खनन किए जाने पर प्रशासन लगातार कार्रवाई कर रहा है।

    प्रशासन का सख्त संदेश

    एसडीएम संस्कृति लिटोरिया ने स्पष्ट कहा कि जल संकट को देखते हुए भू-जल संरक्षण बेहद जरूरी है। बिना अनुमति नलकूप खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि केवल विशेष परिस्थितियों में ही एसडीएम और पीएचई विभाग की अनुमति से खनन की अनुमति दी जा सकती है।

  • लोकसभा में बोले PM मोदी, 'परिसीमन में किसी राज्य के साथ भेदभाव नहीं, ये मेरी गारंटी', विपक्ष ने उठाए कई सवाल

    लोकसभा में बोले PM मोदी, 'परिसीमन में किसी राज्य के साथ भेदभाव नहीं, ये मेरी गारंटी', विपक्ष ने उठाए कई सवाल


    नई दिल्ली। संसद के विशेष सत्र की शुरुआत गुरुवार को जोरदार हंगामे और तीखी बहस के साथ हुई। जैसे ही सरकार की ओर से संबंधित विधेयक सदन में पेश किए गए विपक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि सरकार संवैधानिक व्यवस्था के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश कर रही है। वहीं सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे देश के भविष्य और महिलाओं की भागीदारी से जुड़ा ऐतिहासिक कदम बताया।

    महिला शक्ति को लेकर नीयत पर जोर

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान कहा कि इस मुद्दे को राजनीतिक नजरिए से देखने के बजाय राष्ट्रीय दृष्टिकोण से समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं केवल फैसलों को ही नहीं बल्कि सरकार की नीयत को भी परखेंगी। अगर नीयत में खोट होगी तो देश की नारी शक्ति उसे कभी स्वीकार नहीं करेगी। प्रधानमंत्री ने सभी दलों से अपील की कि वे इस पहल का समर्थन करें और विकसित भारत के निर्माण में योगदान दें।

    विपक्ष को पीएम की चेतावनी
    प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग इस मुद्दे में राजनीति तलाश रहे हैं उन्हें इतिहास से सबक लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब जब महिलाओं को अधिकार देने के प्रयासों का विरोध हुआ है उसका खामियाजा विरोध करने वालों को उठाना पड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर सभी दल मिलकर आगे बढ़ते हैं तो इसका लाभ पूरे लोकतंत्र को मिलेगा न कि किसी एक पार्टी को। प्रधानमंत्री मोदी ने साफ कहा कि परिसीमन प्रक्रिया में किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा “यह मेरी गारंटी है मेरा वादा है कि हर राज्य को न्याय मिलेगा।” साथ ही उन्होंने विपक्ष से अपील की कि इस मुद्दे को राजनीतिक नजरिए से न देखें और देशहित में सहयोग करें।

    निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी जरूरी

    अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश की आधी आबादी अब निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल होने के लिए तैयार है। उन्होंने याद दिलाया कि पंचायत स्तर पर महिलाओं को आरक्षण पहले ही दिया जा चुका है और अब समय आ गया है कि उन्हें संसद और विधानसभाओं में भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिले। उन्होंने कहा कि लाखों महिलाएं जमीनी स्तर पर काम कर चुकी हैं और अब वे नीति निर्धारण में अपनी भूमिका चाहती हैं।

    विकसित भारत की परिभाषा में महिला भागीदारी अहम

    प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि विकसित भारत केवल बुनियादी ढांचे या आर्थिक आंकड़ों से नहीं बनेगा बल्कि इसमें महिलाओं की बराबर भागीदारी भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि देश इस दिशा में पहले ही काफी देर कर चुका है और अब और देरी करना उचित नहीं होगा। उन्होंने सांसदों से आग्रह किया कि वे इस अवसर को गंवाएं नहीं।

    देश की दिशा तय करने वाला कदम

    पीएम मोदी ने इस विधेयक को देश के भविष्य के लिए निर्णायक बताते हुए कहा कि यह केवल एक कानून नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण की दिशा तय करने वाला कदम है। उन्होंने कहा कि यह प्रयास शासन व्यवस्था को अधिक संवेदनशील बनाएगा और इससे निकला परिणाम देश की राजनीति को नई दिशा देगा।

    विपक्ष ने उठाए गंभीर सवाल

    समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में है लेकिन इसे लागू करने के तरीके पर आपत्ति है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर जनगणना और परिसीमन को इससे जोड़कर इसे लागू करने में देरी कर रही है। उनका कहना था कि अगर जातीय जनगणना के आंकड़े सामने आएंगे तो आरक्षण की मांग और बढ़ेगी जिससे सरकार बचना चाहती है।

    महिला प्रतिनिधित्व पर भाजपा से जवाब मांग

    अखिलेश यादव ने भाजपा पर हमला करते हुए पूछा कि जिन राज्यों में उनकी सरकारें हैं वहां कितनी महिला मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने यह भी कहा कि देश में महिलाओं की वास्तविक भागीदारी अभी भी सीमित है और भाजपा को पहले अपने संगठन में महिलाओं को पर्याप्त स्थान देना चाहिए।

    मुस्लिम महिलाओं के आरक्षण पर विवाद

    सदन में मुस्लिम महिलाओं के आरक्षण को लेकर भी तीखी बहस हुई। सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि अगर मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण नहीं दिया जाएगा तो यह अधूरा कदम होगा। इस पर गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना संविधान के खिलाफ है। उन्होंने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा कि वे अपनी पार्टी में मुस्लिम महिलाओं को टिकट दे सकते हैं सरकार को इससे कोई आपत्ति नहीं है।

    परिसीमन को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप

    भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह परिसीमन को लेकर खासकर दक्षिण भारत में भ्रम फैला रहा है। उन्होंने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया संविधान के तहत हो रही है और इससे किसी राज्य का नुकसान नहीं होगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि परिसीमन के बाद कुछ राज्यों में सीटों की संख्या बढ़ सकती है जिससे उनका प्रतिनिधित्व और मजबूत होगा।

    सरकार का दावा किसी राज्य को नुकसान नहीं

    केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सदन को बताया कि प्रस्तावित बदलावों से लोकसभा की कुल सीटों में वृद्धि होगी और महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण मिलेगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि किसी भी राज्य की वर्तमान स्थिति को नुकसान नहीं होगा और सभी को समान रूप से लाभ मिलेगा।

    महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग करने की मांग

    कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण का समर्थन करती है लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ना सही नहीं है। उनका सुझाव था कि इस कानून को तुरंत लागू किया जाना चाहिए ताकि महिलाओं को जल्द से जल्द इसका लाभ मिल सके।

    तीनों विधेयकों पर आगे की प्रक्रिया

    लोकसभा में इन विधेयकों पर चर्चा शुरू हो चुकी है और मतदान 17 अप्रैल को शाम 4 बजे कराया जाएगा। सरकार ने इस पर विस्तृत चर्चा के लिए पर्याप्त समय निर्धारित किया है। शुरुआती वोटिंग में विधेयकों को पेश करने के पक्ष में बहुमत मिला जिससे आगे की प्रक्रिया का रास्ता साफ हो गया।

    हंगामे के बीच जारी रही कार्यवाही


    सदन में पूरे दिन हंगामे का माहौल बना रहा। विपक्ष ने जहां सरकार पर गंभीर आरोप लगाए वहीं सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे ऐतिहासिक सुधार बताया। अब सभी की नजरें आगामी मतदान पर टिकी हैं जो इस पूरे मुद्दे की दिशा तय करेगा।

  • मुरैना में भीषण सड़क हादसा दो बसों की आमने सामने टक्कर 15 से अधिक यात्री घायल

    मुरैना में भीषण सड़क हादसा दो बसों की आमने सामने टक्कर 15 से अधिक यात्री घायल

    मुरैना । मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में गुरुवार को एक भीषण सड़क हादसे ने यात्रियों में अफरा तफरी मचा दी जब दो निजी बसों के बीच आमने सामने जोरदार टक्कर हो गई। इस दुर्घटना में महिलाओं और बच्चों सहित करीब 15 से अधिक यात्री घायल हो गए जिन्हें तुरंत इलाज के लिए मुरैना के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

    जानकारी के अनुसार हादसा दिमनी थाना क्षेत्र के अंतर्गत मुरैना अंबाह मार्ग पर ग्राम रत्तीराम के पूरा के पास हुआ। बताया जा रहा है कि एक बस अंबाह से मुरैना की ओर आ रही थी जबकि दूसरी बस मुरैना से अंबाह की दिशा में जा रही थी। इसी दौरान दोनों बसें आमने सामने आ गईं और तेज रफ्तार के कारण टक्कर इतनी जोरदार थी कि बसों में बैठे यात्रियों के बीच चीख पुकार मच गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टक्कर के बाद कुछ समय के लिए स्थिति बेहद भयावह हो गई थी। बसों में बैठे लोग घबराकर बाहर निकलने की कोशिश करने लगे जबकि कई यात्री सीटों पर ही घायल अवस्था में फंसे रहे। आसपास मौजूद ग्रामीणों ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया और घायलों को बसों से बाहर निकालने में मदद की।

    सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और घायलों को एंबुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद कुछ घायलों की हालत सामान्य बताई जा रही है जबकि कुछ को गंभीर चोटें आई हैं जिनका इलाज जारी है। पुलिस ने हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि दुर्घटना तेज रफ्तार लापरवाही या सड़क की स्थिति के कारण हुई।

    यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। खासतौर पर हाईवे और मुख्य मार्गों पर बस चालकों द्वारा तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं जो यात्रियों की जान के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही हैं। प्रशासन द्वारा बार बार चेतावनी और नियमों के बावजूद इस तरह की दुर्घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है और दोनों बस चालकों से भी पूछताछ की जा रही है। हादसे के बाद मार्ग पर कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा जिसे बाद में सामान्य किया गया।

  • छतरपुर स्टेशन पर दर्दनाक हादसा, ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच फंसा युवक

    छतरपुर स्टेशन पर दर्दनाक हादसा, ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच फंसा युवक


    छतरपुर छतरपुर रेलवे स्टेशन पर गुरुवार सुबह एक बड़ा हादसा उस समय हो गया जब जम्मू से लौट रहे 19 वर्षीय युवक रामप्रसाद अहिरवार ट्रेन से उतरते समय प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच फंस गया। यह घटना कुरुक्षेत्र ट्रेन के रुकने के दौरान करीब सुबह 6:30 से 7 बजे के बीच हुई, जिससे स्टेशन पर अफरा-तफरी मच गई।

    ट्रेन से उतरते समय बिगड़ा संतुलन

    जानकारी के अनुसार, ग्राम पाली निवासी रामप्रसाद अहिरवार जैसे ही ट्रेन प्लेटफॉर्म पर रुकी, नीचे उतरने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान उसका पैर फिसल गया और वह सीधे ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच की खाली जगह में जा गिरा। युवक अचानक फंस गया, जिससे मौके पर मौजूद यात्रियों में हड़कंप मच गया।

    समय रहते रोकी गई ट्रेन, टला बड़ा हादसा

    घटना के तुरंत बाद यात्रियों और रेलवे स्टाफ ने शोर मचाकर लोको पायलट को सूचना दी। समय रहते ट्रेन को रोक दिया गया, जिससे एक बड़ा हादसा होने से बच गया। अगर ट्रेन थोड़ा भी आगे बढ़ जाती तो स्थिति जानलेवा हो सकती थी।

    15–20 मिनट चला रेस्क्यू ऑपरेशन

    घटना के बाद रेलवे कर्मचारी और स्थानीय लोगों ने मिलकर राहत कार्य शुरू किया। करीब 15 से 20 मिनट तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन में सब्बल और अन्य उपकरणों की मदद से प्लेटफॉर्म के किनारे का हिस्सा तोड़ा गया, जिसके बाद युवक को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका। इस दौरान मौके पर मौजूद लोगों की सांसें थमी रहीं।

    गंभीर चोटों के साथ अस्पताल में भर्ती

    हादसे में रामप्रसाद को जांघ और कमर में गंभीर चोटें आई हैं। तत्काल एंबुलेंस की मदद से उसे जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका इलाज जारी है। ड्यूटी डॉक्टर के अनुसार फिलहाल उसकी हालत स्थिर है, लेकिन चोटें गंभीर होने के कारण उसे निगरानी में रखा गया है।

    रेलवे सुरक्षा पर उठे सवाल

    इस घटना के बाद रेलवे स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। यात्रियों का कहना है कि कई स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं होते, जिससे ऐसे हादसे होने का खतरा बना रहता है। वहीं रेलवे प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने की बात कही है।

    यह घटना एक बार फिर ट्रेन से उतरते समय सावधानी बरतने की जरूरत और रेलवे सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की आवश्यकता को उजागर करती है।

  • श्योपुर में गर्मी का कहर, पारा 40°C के पार, जनजीवन प्रभावित

    श्योपुर में गर्मी का कहर, पारा 40°C के पार, जनजीवन प्रभावित


    मध्यप्रदेश श्योपुर  मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में अप्रैल के मध्य में ही भीषण गर्मी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। पिछले एक सप्ताह से लगातार बढ़ते तापमान के कारण आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है और दिन के समय सड़कों पर सन्नाटा नजर आने लगा है।

    40 डिग्री तक पहुंचा तापमान

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, जबकि न्यूनतम तापमान 25 डिग्री के आसपास बना हुआ है। लगातार बढ़ते तापमान ने गर्मी को और अधिक असहनीय बना दिया है।

    पिछले कुछ दिनों के रिकॉर्ड देखें तो 11 अप्रैल को भी तापमान 40 डिग्री तक पहुंचा था, जबकि 10 अप्रैल को यह 34 डिग्री था। इसके बाद लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है, जो तेज गर्मी का स्पष्ट संकेत है।

    दोपहर में सड़कों पर सन्नाटा

    तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण दोपहर के समय शहर की सड़कों पर आवाजाही काफी कम हो गई है। लोग केवल जरूरी कामों के लिए ही घर से बाहर निकल रहे हैं और सिर व चेहरे को कपड़े से ढककर खुद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

    घरों में बढ़ा कूलर और AC का उपयोग

    गर्मी बढ़ने के साथ ही अब घरों में कूलर और एयर कंडीशनर का उपयोग भी बढ़ गया है। वहीं बाजारों में ठंडे पेय पदार्थ, जूस और आइसक्रीम की मांग में तेजी देखी जा रही है।

    मौसम विभाग की चेतावनी

    मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ने की संभावना जताई है। यदि यही स्थिति बनी रहती है तो अप्रैल के अंत तक भीषण गर्मी और अधिक गंभीर रूप ले सकती है।

    सावधानी बरतने की अपील

    प्रशासन ने लोगों को सलाह दी है कि दोपहर के समय धूप से बचें, पर्याप्त पानी पिएं और आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलें।

  • प्रियंक मिश्रा ने संभाली भोपाल की कमान विकास और बेहतर प्रशासन का दिया भरोसा

    प्रियंक मिश्रा ने संभाली भोपाल की कमान विकास और बेहतर प्रशासन का दिया भरोसा


    भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल को नया प्रशासनिक नेतृत्व मिल गया है जहां प्रियंक मिश्रा ने 35वें कलेक्टर के रूप में अपना कार्यभार संभाल लिया है। पदभार ग्रहण करते ही उन्होंने राजधानी को देश की सर्वश्रेष्ठ राजधानी बनाने का संकल्प व्यक्त किया और स्पष्ट किया कि उनका पूरा फोकस विकास, बेहतर प्रशासन और जनसेवा पर रहेगा।

    कार्यभार संभालने के बाद प्रियंक मिश्रा ने अपने पहले बयान में ही अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दीं। उन्होंने कहा कि भोपाल केवल मध्यप्रदेश की राजधानी ही नहीं बल्कि विकसित भारत के सपने को साकार करने में एक महत्वपूर्ण केंद्र भी है। ऐसे में राजधानी की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है और इसी दृष्टिकोण के साथ वे काम करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि विकसित भारत के निर्माण में मध्यप्रदेश की अहम भूमिका है और उस लक्ष्य को हासिल करने में भोपाल की भागीदारी निर्णायक होगी।

    प्रियंक मिश्रा ने अपने संबोधन में यह स्वीकार किया कि भोपाल में पहले भी अच्छा काम हुआ है और प्रशासन ने कई क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश रहेगी कि उसी परंपरा को आगे बढ़ाया जाए और जो काम पहले से हो रहे हैं उन्हें और अधिक प्रभावी बनाया जाए। साथ ही जहां सुधार की जरूरत है वहां नई रणनीति और नवाचार के जरिए बदलाव लाया जाएगा।

    उन्होंने यह भी संकेत दिए कि शहर के बुनियादी ढांचे, यातायात व्यवस्था, साफ सफाई और नागरिक सुविधाओं को और बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। राजधानी होने के कारण भोपाल की छवि पूरे प्रदेश और देश के सामने एक मॉडल के रूप में प्रस्तुत होती है इसलिए इसे हर क्षेत्र में उत्कृष्ट बनाना उनकी प्राथमिकता रहेगी।

    नए कलेक्टर के इस विजन से प्रशासनिक अमले में भी नई ऊर्जा देखने को मिल रही है। अधिकारियों और कर्मचारियों से समन्वय बनाकर काम करने की बात करते हुए उन्होंने कहा कि टीमवर्क के जरिए ही बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान और पारदर्शी व्यवस्था पर भी उन्होंने जोर दिया।

    भोपाल के नागरिकों के लिए भी यह एक उम्मीद भरा संदेश है कि शहर को नई दिशा देने के लिए प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है। अब देखना होगा कि प्रियंक मिश्रा अपने इस विजन को जमीन पर किस तरह उतारते हैं और भोपाल को वास्तव में देश की सबसे बेहतर राजधानी बनाने की दिशा में कितनी तेजी से कदम बढ़ाते हैं।