Category: Madhya Pradesh

  • बांधवगढ़ में बाघ शावक की दर्दनाक मौत जंगल के भीतर संघर्ष की आशंका ने बढ़ाई चिंता

    बांधवगढ़ में बाघ शावक की दर्दनाक मौत जंगल के भीतर संघर्ष की आशंका ने बढ़ाई चिंता


    उमरिया । मध्य प्रदेश के उमरिया स्थित बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से एक बार फिर चिंताजनक खबर सामने आई है जहां पनपथा कोर क्षेत्र की बीट बघडो में एक बाघ शावक का शव मिलने से वन महकमे में हलचल मच गई है। यह घटना न केवल वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों पर सवाल खड़े करती है बल्कि बाघों के बीच बढ़ते संघर्ष की ओर भी संकेत करती है।

    वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार मृत शावक का शव अत्यंत क्षतविक्षत अवस्था में पाया गया जिससे यह स्पष्ट होता है कि उसकी मौत सामान्य परिस्थितियों में नहीं हुई। प्रारंभिक जांच में यह संभावना जताई जा रही है कि शावक की मौत किसी अन्य बाघ के साथ हुए आपसी संघर्ष के कारण हुई है जिसे वैज्ञानिक भाषा में इंट्रास्पेसिफिक फाइट कहा जाता है। जंगल के भीतर क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर बाघों के बीच इस प्रकार के संघर्ष असामान्य नहीं माने जाते लेकिन हाल के समय में ऐसी घटनाओं की बढ़ती संख्या ने चिंता जरूर बढ़ा दी है।

    घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और पूरे क्षेत्र को घेरकर गहन जांच शुरू की गई। डाग स्क्वाड और मेटल डिटेक्टर की मदद से हर संभावित पहलू की बारीकी से जांच की गई ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस घटना में किसी प्रकार का मानवीय हस्तक्षेप या शिकार शामिल नहीं है। जांच के दौरान ऐसे कोई संकेत नहीं मिले जिससे यह प्रतीत हो कि शावक की मौत के पीछे अवैध शिकार या बाहरी गतिविधि जिम्मेदार है।

    नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी की गाइडलाइंस का पालन करते हुए शावक के शव का मौके पर ही दाह संस्कार कर दिया गया ताकि किसी भी प्रकार के संक्रमण या अन्य खतरे से बचा जा सके। वन विभाग ने इस पूरी प्रक्रिया को निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत अंजाम दिया और सभी आवश्यक दस्तावेजीकरण भी किया गया है।

    घटना के बाद वन विभाग ने इलाके में सर्चिंग अभियान तेज कर दिया है। विभागीय हाथियों की मदद से आसपास के घने जंगलों में व्यापक तलाशी अभियान चलाया जा रहा है ताकि अन्य बाघों और शावकों की स्थिति का पता लगाया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि वे हर संभावित खतरे पर नजर बनाए हुए हैं और किसी भी असामान्य गतिविधि को गंभीरता से लिया जा रहा है।

    बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व देश के प्रमुख टाइगर रिजर्व में से एक है जहां बाघों की अच्छी खासी आबादी पाई जाती है। हालांकि हाल के वर्षों में शावकों की मौत की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं जो वन्यजीव प्रबंधन के लिए एक चुनौती बनती जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती आबादी के कारण क्षेत्रीय संघर्ष की घटनाएं बढ़ सकती हैं जिससे कमजोर शावक अधिक प्रभावित होते हैं।

    वन विभाग पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रहा है और इसकी रिपोर्ट जल्द ही नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी को भेजी जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर जंगल के भीतर की जटिल वास्तविकताओं को उजागर कर दिया है जहां जीवन और संघर्ष साथ साथ चलते हैं और संरक्षण के प्रयासों के बीच कई अनदेखी चुनौतियां सामने आती रहती हैं।

  • रायसेन में गैस सिलेंडर संकट, उपभोक्ताओं ने किया चक्काजाम

    रायसेन में गैस सिलेंडर संकट, उपभोक्ताओं ने किया चक्काजाम


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के रायसेन में गुरुवार सुबह गैस सिलेंडर की कमी को लेकर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। सांची रोड स्थित गैस एजेंसी पर सिलेंडर नहीं मिलने से नाराज उपभोक्ताओं ने सड़क पर उतरकर चक्का जाम कर दिया।

    सड़क पर सिलेंडर रखकर प्रदर्शन

    गुस्साए लोगों ने रायसेन-विदिशा रोड पर गैस सिलेंडर रखकर जाम लगा दिया। करीब 10 से 12 मिनट तक यातायात पूरी तरह प्रभावित रहा। इससे राहगीरों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    घंटों लाइन में लगे, फिर भी नहीं मिला सिलेंडर

    उपभोक्ताओं का कहना है कि वे सुबह से ही एजेंसी के बाहर लंबी कतार में खड़े थे, लेकिन स्टॉक खत्म होने के कारण उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ती गई और आखिरकार उन्होंने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

    घरों में शादी-ब्याह, बढ़ी परेशानी

    कई उपभोक्ताओं ने बताया कि उनके घरों में शादी और अन्य कार्यक्रम हैं, ऐसे में गैस सिलेंडर न मिलने से उन्हें भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। समय पर सिलेंडर न मिलने से रोजमर्रा का काम भी प्रभावित हो रहा है।

    एजेंसी ने बताया- ऊपर से नहीं आया स्टॉक

    गैस एजेंसी संचालक ने सफाई देते हुए कहा कि उन्हें सप्लाई ही नहीं मिली है। एजेंसी और गोदाम दोनों जगह सिलेंडर खत्म हो चुके हैं, इसलिए वितरण नहीं किया जा सका।

    पुलिस और प्रशासन ने संभाला मोर्चा

    सूचना मिलते ही थाना प्रभारी नरेंद्र गोयल और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। लोगों को समझाइश देकर जाम खुलवाया गया। साथ ही एसडीएम ने जल्द समस्या का समाधान करने का आश्वासन दिया।

    सप्लाई सिस्टम पर उठे सवाल

    इस घटना ने गैस वितरण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय पर सप्लाई सुनिश्चित की जाए, तो ऐसी स्थिति से बचा जा सकता है।

  • आजीविका मिशन में भ्रष्टाचार का खुलासा, मैनेजर ने मांगी 75% मानदेय की रकम

    आजीविका मिशन में भ्रष्टाचार का खुलासा, मैनेजर ने मांगी 75% मानदेय की रकम


    नर्मदापुरम  मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से जुड़ा बड़ा घोटाला सामने आया है। यहां ब्लॉक मैनेजर पर महिला सखी से मानदेय के बदले 75% तक रिश्वत मांगने के गंभीर आरोप लगे हैं। प्रारंभिक जांच में शिकायत सही पाई गई है, जिससे विभाग में हड़कंप मच गया है।

    75% तक कमीशन मांगने का आरोप

    बनखेड़ी की एक महिला बैंक सखी ने आरोप लगाया कि ब्लॉक मैनेजर दुर्गेश अहिरवार ने उसके मानदेय भुगतान के बदले 75 फीसदी रकम मांगी। इतना ही नहीं, पैसे नहीं देने पर उसे काम से हटाने की धमकी भी दी गई।

     जांच में मिले सबूत

    शिकायत के बाद मामले की जांच के लिए जिला पंचायत सीईओ हिमांशु जैन ने दो सदस्यीय टीम गठित की। जांच में प्राथमिक तौर पर रिश्वत मांगने के साक्ष्य मिले हैं। रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी गई है और जल्द कार्रवाई की बात कही जा रही है।

    एक हफ्ते में दूसरा मामला

    यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले केसला में लोकायुक्त पुलिस ने 20 हजार रुपए की रिश्वत लेते तीन लोगों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।

    इस कार्रवाई में:

    सहायक विकासखंड प्रबंधक धर्मेंद्र गुप्ता
    क्लस्टर मैनेजर
    चपरासी
    को गिरफ्तार किया गया था।

    ऐसे बिछाया गया जाल

    ग्राम पाण्डुखेड़ी की महिला सुनैया बरकड़े से 25 हजार रुपए की मांग की गई थी, जो बाद में 20 हजार में तय हुई। महिला ने लोकायुक्त में शिकायत की, जिसके बाद टीम ने ट्रैप लगाकर तीनों को रिश्वत लेते पकड़ लिया।

    पूरे सिस्टम पर उठे सवाल

    लगातार सामने आ रहे मामलों से यह साफ है कि जिले में आजीविका मिशन के तहत मानदेय भुगतान प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं। शक जताया जा रहा है कि कहीं फर्जी बिल बनाकर भी भुगतान तो नहीं किया जा रहा।

    प्रशासन सख्त

    सीईओ हिमांशु जैन ने साफ कहा है कि अगर और अधिकारियों की संलिप्तता सामने आती है, तो नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • चंबल पुल पर भीषण भिड़ंत, एग्जाम देने जा रहे युवक की मौत

    चंबल पुल पर भीषण भिड़ंत, एग्जाम देने जा रहे युवक की मौत


    कोटा राजस्थान के कोटा जिले में दर्दनाक सड़क हादसे ने दो परिवारों की खुशियां छीन लीं। चंबल नदी के पुल पर दो बाइकों की आमने-सामने टक्कर में घायल दूसरे युवक ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। यह हादसा बुधवार सुबह हुआ था, जिसमें पहले ही एक युवक की मौके पर मौत हो चुकी थी।

    आमने-सामने भिड़ीं बाइक, तीन युवक गंभीर

    पुलिस के अनुसार, स्टेट हाईवे 120 पर सुबह करीब 7:30 बजे दो बाइकों में जोरदार टक्कर हो गई। हादसा इतना भीषण था कि तीनों युवक उछलकर करीब 10-12 फीट दूर पुल की रेलिंग से जा टकराए।

    मौके पर एक की मौत, दूसरे ने अस्पताल में तोड़ा दम

    इस हादसे में कोटा खुर्द निवासी शिवम मीना की मौके पर ही मौत हो गई थी। वहीं, गंभीर रूप से घायल अक्षय मीना और भीमसिंह गुर्जर को इलाज के लिए कोटा रेफर किया गया।
    इलाज के दौरान अक्षय मीना ने भी दम तोड़ दिया, जबकि तीसरे युवक का इलाज जारी है।

     एग्जाम देने जा रहा था अक्षय

    मृतक अक्षय मीना इटावा के किशनवास गांव का रहने वाला था और वह टोंक में बीएड का पेपर देने जा रहा था। लेकिन रास्ते में ही यह हादसा हो गया, जिससे उसका सपना अधूरा रह गया।

     पुलिस जांच में जुटी

    पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। दोनों वाहनों की टक्कर कैसे हुई, इसकी पड़ताल जारी है।

     हादसे की गंभीरता ने चौंकाया

    टक्कर इतनी तेज थी कि तीनों युवक बाइक से उछलकर पुल की रेलिंग से जा टकराए। यह हादसा सड़क सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े करता है।

  • 132 केवी टावर पर चढ़े युवक से मचा हड़कंप, पुलिस और बिजली विभाग मौके पर

    132 केवी टावर पर चढ़े युवक से मचा हड़कंप, पुलिस और बिजली विभाग मौके पर


    शहडोल । मध्य प्रदेश के शहडोल और अनूपपुर जिले की सीमा पर बुधवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक युवक 132 केवी हाई वोल्टेज ट्रांसमिशन टावर पर चढ़ गया। ग्राम बटुरा के पास हुई इस घटना ने ग्रामीणों को दहशत में डाल दिया और प्रशासन को तुरंत हरकत में आना पड़ा।
     35 मीटर ऊंचाई पर घंटों चला ड्रामा

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार युवक करीब 25 से 35 मीटर ऊंचे टावर पर चढ़ गया था। भीषण गर्मी के बावजूद वह टावर पर ऊपर-नीचे होता रहा। उसकी हरकतें बेहद खतरनाक थीं, जिससे नीचे खड़े लोगों की सांसें थम गईं।

     बिजली सप्लाई तुरंत की गई बंद

    घटना की गंभीरता को देखते हुए बिजली विभाग ने तुरंत टावर से गुजर रही हाई वोल्टेज लाइन की सप्लाई बंद कर दी। यदि ऐसा नहीं किया जाता, तो करंट लगने से बड़ा हादसा हो सकता था।

    पुलिस और रेस्क्यू टीम मौके पर

    सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। टावर के नीचे बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। रेस्क्यू टीम युवक को समझाने और सुरक्षित नीचे उतारने के प्रयास में जुटी रही।

    मानसिक स्थिति पर उठे सवाल

    ग्रामीणों के अनुसार युवक की मानसिक स्थिति सामान्य नहीं लग रही थी। वह बार-बार खतरनाक हरकतें कर रहा था और टावर के शीर्ष तक पहुंच गया था। इसी कारण उसे नीचे उतारना रेस्क्यू टीम के लिए चुनौतीपूर्ण बना रहा।

     जांच जारी

    फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि युवक कौन है और किन कारणों से उसने यह कदम उठाया। साथ ही उसकी सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उसे सुरक्षित नीचे उतारने की कोशिशें जारी रहीं।

  • रीवा में फर्जी रिपोर्ट का खुलासा, दूसरी जांच में भी नहीं सुधरी गलती

    रीवा में फर्जी रिपोर्ट का खुलासा, दूसरी जांच में भी नहीं सुधरी गलती


    मध्य प्रदेश रीवा मध्य प्रदेश के रीवा जिले में सरकारी रिकॉर्ड में फर्जीवाड़े का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक पटवारी ने तालाब और खाली जमीन को भी गेहूं की फसल बता दिया। मामला सामने आते ही प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए संबंधित पटवारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

    तालाब और खाली जमीन पर दिखा दी फसल

    त्योंथर तहसील के ग्राम चन्दई में पटवारी शारदा प्रसाद तिवारी ने करीब 3000 वर्ग फीट के तालाब और खाली पड़ी जमीन को गेहूं की फसल के रूप में दर्ज कर दिया। यह गड़बड़ी तब सामने आई जब विभाग को शिकायत मिली और जांच शुरू की गई।

    मौके पर जाकर भी दी गलत रिपोर्ट

    जांच में यह बात सामने आई कि पटवारी ने मौके पर जाकर ही रिपोर्ट तैयार की थी, इसके बावजूद गलत जानकारी दर्ज की गई। इसे गंभीर लापरवाही और कदाचार माना गया। यही वजह रही कि प्रशासन ने बिना देरी किए सख्त कदम उठाया।

    दोबारा जांच में भी नहीं सुधारी गलती

    शिकायत के बाद अधिकारियों ने दोबारा सत्यापन कराया, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि पटवारी ने अपनी रिपोर्ट में कोई सुधार नहीं किया। इससे यह साफ हो गया कि गड़बड़ी जानबूझकर की गई थी।

    फायदा होने से पहले ही पकड़ा गया मामला

    प्रशासन की सतर्कता के चलते यह फर्जीवाड़ा समय रहते पकड़ में आ गया। अगर यह मामला आगे बढ़ता, तो सरकारी योजनाओं के तहत आर्थिक लाभ उठाया जा सकता था।

    कलेक्टर के निर्देश पर सख्त कार्रवाई

    जिले के कलेक्टर सोमवंशी के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई। अधिकारियों ने साफ किया कि भ्रष्टाचार और लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

     नियमों के तहत निलंबन

    पटवारी पर मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत कार्रवाई की गई है। निलंबन के दौरान उनका मुख्यालय त्योंथर तहसील रहेगा और उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा।

     प्रशासन का सख्त संदेश

    इस कार्रवाई से साफ संकेत है कि अब सरकारी रिकॉर्ड में किसी भी तरह की हेराफेरी पर तुरंत सख्त कदम उठाए जाएंगे।

  • सागर विधायक निवास की गौशाला में घुसा सांप, बोरीयों के बीच छिपा मिला

    सागर विधायक निवास की गौशाला में घुसा सांप, बोरीयों के बीच छिपा मिला


    सागर मध्य प्रदेश के सागर में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब विधायक शैलेंद्र जैन के निवास स्थित गौशाला में अचानक एक सांप घुस आया। गौशाला में काम कर रहे कर्मचारियों ने जैसे ही सांप को देखा, वे घबरा गए और तुरंत बाहर निकलकर मदद के लिए कॉल किया।

    बोरियों के बीच छिपा बैठा था सांप

    घटना बुधवार की है, जब सांप गौशाला में रखी बोरियों के बीच छिपा हुआ मिला। कर्मचारियों को पहले लगा कि यह खतरनाक कोबरा है, जिससे दहशत और बढ़ गई। सूचना मिलने पर स्नेक कैचर बबलू पवार मौके पर पहुंचे और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।

    ऐसे किया गया सुरक्षित रेस्क्यू

    स्नेक कैचर ने कर्मचारियों की मदद से धीरे-धीरे बोरियों को हटाया। कुछ देर की मशक्कत के बाद सांप को सुरक्षित पकड़ लिया गया। पूरे ऑपरेशन के दौरान सावधानी बरती गई ताकि किसी को नुकसान न पहुंचे।

    रेड स्नेक निकला, नहीं था खतरनाक

    रेस्क्यू के बाद पता चला कि यह सांप रेड स्नेक प्रजाति का है, जिसकी लंबाई करीब ढाई फीट थी। यह जहरीला नहीं था, लेकिन अज्ञानता के कारण लोग इसे कोबरा समझकर डर गए थे।

    गर्मी से बचने आया था गौशाला

    विशेषज्ञों के अनुसार, तेज गर्मी के चलते सांप अक्सर ठंडी और सुरक्षित जगहों की तलाश में घरों या गौशालाओं में घुस आते हैं। यही कारण है कि यह सांप भी ठंडक पाने के लिए वहां पहुंच गया।

    जंगल में छोड़ा जाएगा

    स्नेक कैचर ने बताया कि सांप को सुरक्षित पकड़ने के बाद उसे प्राकृतिक वातावरण यानी जंगल में छोड़ दिया जाएगा, ताकि वह अपने प्राकृतिक आवास में वापस जा सके।

  • हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 5 लाख से ज्यादा संविदा कर्मियों को मिलेगा न्यूनतम वेतन

    हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 5 लाख से ज्यादा संविदा कर्मियों को मिलेगा न्यूनतम वेतन


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में वर्षों से काम कर रहे संविदा, आउटसोर्स और अंशकालिक कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर आई है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि लंबे समय से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन और स्थाई कर्मचारियों जैसी सुविधाओं से वंचित नहीं रखा जा सकता। कोर्ट के इस आदेश से प्रदेश के 5 लाख से अधिक कर्मचारियों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।

     10 साल से ज्यादा सेवा वालों को मिलेगा लाभ

    कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जो कर्मचारी 10 साल या उससे अधिक समय से लगातार सेवाएं दे रहे हैं, उन्हें स्थाई श्रेणी के लाभ से वंचित करने का कोई ठोस कारण नहीं है। ऐसे कर्मचारियों को वर्गीकरण (classification) और उससे जुड़े लाभ मिलना चाहिए।

    न्यूनतम वेतन देना जरूरी

    हाईकोर्ट ने कहा कि आउटसोर्स और संविदा कर्मचारियों को कम वेतन देना अनुचित है। वर्तमान में कई आउटसोर्स कर्मचारियों को सिर्फ 8 से 10 हजार रुपए तक वेतन मिल रहा है, जबकि उसी पद पर नियमित कर्मचारियों को इससे दोगुना या ज्यादा वेतन मिलता है। कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि सभी श्रेणियों के कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन सुनिश्चित किया जाए।

     कितने कर्मचारी होंगे प्रभावित

    प्रदेश में करीब:

    2.5 लाख संविदा कर्मचारी
    1.5 लाख बिजली कंपनियों में आउटसोर्स कर्मचारी
    1 लाख अन्य विभागों में आउटसोर्स कर्मचारी
    12 हजार अंशकालिक कर्मचारी

    यानी कुल मिलाकर 5 लाख से ज्यादा कर्मचारी इस फैसले से प्रभावित होंगे।

    सरकार को भी दी नसीहत

    कोर्ट ने यह भी माना कि सरकार हर साल इन कर्मचारियों की सेवाएं जारी रखती है, जिससे साफ है कि उनकी जरूरत बनी हुई है। ऐसे में उन्हें आर्थिक न्याय, सम्मानजनक जीवन और पर्याप्त वेतन देना जरूरी है।

    नर्सिंग भर्ती पर भी अहम टिप्पणी

    सुनवाई के दौरान नर्सिंग ऑफिसर भर्ती में 100% महिला आरक्षण पर भी सवाल उठे। कोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए पुरुष अभ्यर्थियों को भी आवेदन करने की अनुमति दे दी है। हालांकि उनका अंतिम चयन कोर्ट के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा।

     आगे क्या होगा?

    अब राज्य सरकार को कोर्ट के निर्देशों के अनुसार नीति में बदलाव करना होगा। इससे कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ-साथ सरकारी व्यवस्था में भी स्थिरता आने की उम्मीद है।

  • एक की लाश मिली, दो ने की आत्महत्या? परिवार ने जांच पर उठाए गंभीर आरोप

    एक की लाश मिली, दो ने की आत्महत्या? परिवार ने जांच पर उठाए गंभीर आरोप


    ग्वालियर  मध्य प्रदेश के ग्वालियर से एक बेहद हृदयविदारक मामला सामने आया है, जहां एक ही परिवार ने 8 महीनों के भीतर अपने तीन जवान बेटों को खो दिया। एक की संदिग्ध हालात में मौत हुई, जबकि दो बेटों ने अलग-अलग समय पर फांसी लगाकर जान दे दी। इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।

     पहली घटना: छोटे बेटे की संदिग्ध मौत

    परिवार के सबसे छोटे बेटे धर्मेंद्र (25) 29 जुलाई 2025 को फोन पर बात करते हुए घर से निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे। 1 अगस्त को लक्ष्मीगंज क्षेत्र में उनका शव मिला।

    परिवार के मुताबिक, उनके शरीर पर किसी तरह के चोट के निशान नहीं थे और घटना स्थल पर कोई स्पष्ट वजह भी सामने नहीं आई। आरोप है कि पुलिस ने इस मामले में न तो ठीक से जांच की और न ही सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए।

     दूसरी घटना: बड़े बेटे ने लगाई फांसी

    करीब 7 महीने बाद 19 मार्च 2026 को बड़े बेटे अमर सिंह (38) ने रायरू स्थित घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के वक्त उनकी पत्नी और बच्चा घर पर नहीं थे। परिवार का कहना है कि आत्महत्या के पीछे का कारण अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है।

    तीसरी घटना: मंझले बेटे ने भी दी जान

    त्रासदी यहीं नहीं रुकी। 12 अप्रैल 2026 को मंझले बेटे नीरज धानुक (27) ने भी घर में फांसी लगा ली। बताया जा रहा है कि वह बाजार से लौटकर खाना खाकर कमरे में गया और कुछ देर बाद छत पर फंदे से लटका मिला। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

    पिता का आरोप: पुलिस ने नहीं की सही जांच

    पीड़ित पिता मोहन धानुक ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पहले बेटे धर्मेंद्र की मौत की न तो सही जांच हुई, न सीसीटीवी देखे गए और न ही पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट दी गई।

    उनका आरोप है कि अगर समय रहते सच्चाई सामने आती, तो शायद आगे की घटनाओं को रोका जा सकता था।

    आर्थिक संकट और मानसिक आघात

    तीनों बेटों की मौत के बाद परिवार पूरी तरह टूट चुका है। घर में अब बुजुर्ग माता-पिता और एक बेटा ही बचा है। परिवार की आर्थिक स्थिति भी बेहद कमजोर हो गई है, क्योंकि कमाने वाले सदस्य नहीं रहे। पिता ने सरकार से आर्थिक सहायता और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

     पुलिस का बयान

    पड़ाव थाना पुलिस का कहना है कि दोनों आत्महत्या के मामलों में मर्ग कायम कर जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • छुट्टियां मनाने आए बच्चों पर कहर, गेहूं बचाने की दवा बनी जानलेवा

    छुट्टियां मनाने आए बच्चों पर कहर, गेहूं बचाने की दवा बनी जानलेवा


    उज्जैन  मध्य प्रदेश के उज्जैन से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है, जहां छुट्टियां मनाने नानी के घर आए बच्चों पर जहरीली गैस कहर बनकर टूटी। गेहूं को सुरक्षित रखने के लिए डाली गई कीटनाशक दवा की गैस से दो मासूमों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य बच्चों की हालत गंभीर बनी हुई है।

    नानी के घर खुशियां बदली मातम में

    हादसा इंदौर रोड स्थित त्रिवेणी हिल्स क्षेत्र में लालचंद प्रजापत के घर हुआ। जानकारी के मुताबिक, उनकी बेटियां अपने बच्चों के साथ गर्मी की छुट्टियां बिताने मायके आई थीं।

    सोमवार रात सभी लोग एक ही कमरे में सोए, जहां करीब चार क्विंटल गेहूं भी रखा था। गेहूं को कीड़ों से बचाने के लिए उसमें कीटनाशक दवा डाली गई थी, जिससे रातभर जहरीली गैस बनती रही।

    सुबह बिगड़ी तबीयत, दो मासूमों ने तोड़ा दम

    मंगलवार सुबह करीब 9 बजे बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। डेढ़ माह की त्रिशा के मुंह से झाग निकलने लगा, जिसके बाद सभी को तुरंत अस्पताल ले जाया गया।

    इलाज के दौरान त्रिशा ने दम तोड़ दिया, जबकि बुधवार सुबह 4 साल की अनिका उर्फ अन्नू की भी मौत हो गई।

    वहीं, जेनिशा की हालत गंभीर होने पर उसे इंदौर रेफर किया गया है, जबकि रेहान और येशु का इलाज उज्जैन में जारी है।

     सल्फास से बनी जहरीली गैस बनी मौत की वजह

    डॉक्टरों के अनुसार, गेहूं में डालने वाली सल्फास (कीटनाशक) से जहरीली गैस निकलती है। यदि कमरा बंद हो और वेंटिलेशन न हो, तो यह गैस जानलेवा साबित हो सकती है।

    छोटे बच्चों में इसका असर और तेजी से होता है, जिससे दम घुटने और मौत का खतरा बढ़ जाता है।

    जांच में जुटी पुलिस और FSL टीम

    मामले की सूचना मिलते ही पुलिस और फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी है।

    पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के असली कारणों की पुष्टि हो सकेगी।

    नानी ने खुद को ठहराया जिम्मेदार

    इस हादसे के बाद बच्चों की नानी गहरे सदमे में हैं। उन्होंने रोते हुए बताया कि हर साल की तरह इस बार भी गेहूं में दवा डाली थी, लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि यह इतना घातक साबित होगा।

    जरूरी सावधानी

    विशेषज्ञों का कहना है कि कीटनाशक दवाओं का उपयोग करते समय कमरे को पूरी तरह हवादार रखना चाहिए और जहां दवा रखी हो, वहां सोना बेहद खतरनाक हो सकता है।