Category: Madhya Pradesh

  • मोहन कैबिनेट का बड़ा फैसला: 46 लाख प्रॉपर्टियों की फ्री रजिस्ट्री, युवाओं के लिए नई योजना, किसानों को सौगात, पेट्रोलियम निगरानी के निर्देश

    मोहन कैबिनेट का बड़ा फैसला: 46 लाख प्रॉपर्टियों की फ्री रजिस्ट्री, युवाओं के लिए नई योजना, किसानों को सौगात, पेट्रोलियम निगरानी के निर्देश


    भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मध्यप्रदेश कैबिनेट की अहम बैठक संपन्न हुई। बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए जिनका असर सीधे प्रदेश के नागरिकों और युवाओं पर पड़ने वाला है। सबसे बड़ा फैसला स्वामित्व योजना के तहत 46 लाख प्रॉपर्टियों की फ्री रजिस्ट्री का है। इस योजना में उन परिवारों को शामिल किया गया है जिनके पास अपने स्वामित्व के दस्तावेज नहीं हैं। राज्य सरकार ने यह भी तय किया कि इन रजिस्ट्री का स्टांप शुल्क माफ रहेगा जिससे आम नागरिकों को काफी राहत मिलेगी।

    कैबिनेट बैठक में युवाओं के लिए नई पहल मुख्यमंत्री यंग इंटर्न्स फॉर गुड गवर्नेंस प्रोग्राम की शुरुआत की घोषणा भी हुई। इसके तहत 4 865 युवाओं को मासिक 10 हजार रुपये मानदेय दिया जाएगा। यह योजना अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन संस्थान के माध्यम से संचालित होगी। हर ब्लॉक में 15 युवा इस योजना से जुड़े रहेंगे। ये युवा सरकार की योजनाओं का जमीन स्तर पर इम्पैक्ट और उनकी चुनौतियों की जानकारी जुटाएंगे। यह तीन वर्षों तक संचालित होगी और डिजिटल माध्यम से आंकड़े एकत्र करने का कार्य भी करेगी।

    किसानों के हित में भी कैबिनेट ने कई अहम फैसले लिए। गेंहू उपार्जन का समर्थन मूल्य 2 625 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है जिसमें केंद्र सरकार का 2 585 रुपये और प्रदेश सरकार का 40 रुपये प्रति क्विंटल शामिल है। इसके अलावा उड़द पर 600 रुपये प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य भी तय किया गया।

    मंत्रि परिषद ने सात विभागों की योजनाओं को अगले पांच वर्षों तक सतत जारी रखने की स्वीकृति दी है। यह योजना कुल 33 240 करोड़ रुपये की है। इनमें ऊर्जा विभाग की RDSS योजना वित्त विभाग के पब्लिक फंडिंग प्रोजेक्ट्स पंचायत और ग्रामीण विकास के परिसंपत्ति मरम्मत प्रोजेक्ट समेत अन्य योजनाएं शामिल हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में भी बड़ा कदम उठाया गया है। मैहर कैमूर और निमरानी के अस्पतालों में 51 नए स्टाफ पदों को मंजूरी दी गई जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और उपलब्धता बढ़ेगी।

    कैबिनेट ने प्रदेश में कमर्शियल सिलेंडर की डिलीवरी पर रोक को जारी रखने का भी निर्णय लिया। केंद्र सरकार के युद्ध के हालातों के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री ने पेट्रोलियम पदार्थों की सतत निगरानी के निर्देश दिए ताकि आपूर्ति और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सके। कैबिनेट मंत्री चेतन्य कश्यप ने कहा कि मध्यप्रदेश में पेट्रोलियम की पर्याप्त उपलब्धता है और युद्ध से राज्य पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

    इस तरह कैबिनेट की बैठक ने नागरिकों युवाओं और किसानों के लिए कई राहतकारी फैसले लिए हैं। मुफ्त रजिस्ट्री युवा इंटर्न योजना और समर्थन मूल्य बढ़ाने जैसे कदमों से शासन की पारदर्शिता और जनता के हित में काम करने की प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है।

  • जबलपुर हाईकोर्ट में पिता भ्रूण लेकर पहुंचा, बोला न्याय नहीं मिला तो इच्छा मृत्यु की इजाजत दें, पूरे परिवार की जान खतरे में

    जबलपुर हाईकोर्ट में पिता भ्रूण लेकर पहुंचा, बोला न्याय नहीं मिला तो इच्छा मृत्यु की इजाजत दें, पूरे परिवार की जान खतरे में


    जबलपुर। मध्यप्रदेश के जबलपुर हाईकोर्ट में एक संवेदनशील और हैरतअंगेज मामला सामने आया है। रीवा जिले के निवासी दयाशंकर पांडे जो वर्ष 2024 में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव में भी भाग ले चुके हैं न्याय की मांग लेकर कोर्ट पहुंचे और हाथ में भ्रूण लेकर कहा कि यदि न्याय नहीं मिला तो उन्हें इच्छा मृत्यु की इजाजत दी जाए। पांडे ने कोर्ट में यह भी दावा किया कि उनके पूरे परिवार की जान खतरे में है।

    पांडे ने कोर्ट में आरोप लगाया कि एक कारोबारी ने उन पर जानलेवा हमला किया जिसके कारण उनकी पत्नी का गर्भपात हो गया। उन्होंने बताया कि मिसकैरेज के बाद वे भ्रूण लेकर हाईकोर्ट पहुंचे हैं। फरियादी ने यह भी दलील दी कि चुनाव लड़ने और सच बोलने के कारण उन पर लगातार हमले किए जा रहे हैं और स्थानीय पुलिस ने शिकायत के बावजूद उचित कार्रवाई नहीं की।

    उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि यह पहली बार नहीं है जब उन पर हमला हुआ है। चुनावी रंजिश और राजनीतिक मतभेदों के चलते वर्ष 2024 से लेकर अब तक कई बार उन पर हमला हो चुका है। पांडे का कहना है कि अब वे अपने परिवार की सुरक्षा के लिए और न्याय पाने के लिए न्यायालय के पास पहुंचे हैं।

    कोर्ट में पेश की गई दलीलों में यह सामने आया कि पांडे लगातार धमकियों और हमलों का सामना कर रहे हैं और उन्हें लगता है कि पुलिस और प्रशासन पर्याप्त सुरक्षा नहीं दे पा रहे हैं। उन्होंने न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की और कहा कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे इच्छा मृत्यु का विकल्प चुनने के लिए बाध्य होंगे।

    वकीलों और कोर्ट अधिकारियों ने इस मामले को गंभीरता से लिया और उच्च न्यायालय के रजिस्ट्री ने मामले की सुनवाई की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। कोर्ट ने फिलहाल सुरक्षा और मामले की त्वरित जांच के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है।

    यह मामला राज्य में राजनीतिक रंजिश चुनावी हिंसा और कानून व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। न्यायिक विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में पीड़ित की सुरक्षा संवेदनशीलता और कानूनी सहायता बेहद जरूरी होती है। हाईकोर्ट अब इस मामले में सुरक्षा उपायों आरोपों की जांच और पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए त्वरित कार्रवाई कर रहा है।

    पांडे की यह अपील न केवल व्यक्तिगत न्याय की मांग है बल्कि यह स्थानीय प्रशासन और कानून व्यवस्था की भी परीक्षा है कि वे संवेदनशील मामलों में कितनी तत्परता और जवाबदेही दिखा पाते हैं। अब राज्य प्रशासन और हाईकोर्ट की निगाह इस मामले की निष्पक्ष और त्वरित सुनवाई पर है ताकि पीड़ित और उनके परिवार को सुरक्षित और न्यायपूर्ण समाधान मिल सके।

  • STSF की बड़ी कार्रवाई: 9 साल से फरार तारकनाथ घोष यूपी से गिरफ्तार, वन्यजीव तस्करी गिरोह को बड़ा झटका

    STSF की बड़ी कार्रवाई: 9 साल से फरार तारकनाथ घोष यूपी से गिरफ्तार, वन्यजीव तस्करी गिरोह को बड़ा झटका


    भोपाल । मध्यप्रदेश की स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स ने वन्यजीव तस्करी के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विशेष निर्देशों के बाद सक्रिय फोर्स ने अंतरराष्ट्रीय कुख्यात तस्कर तारकनाथ घोष को उत्तर प्रदेश के कानपुर से गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी एक ऐसे आरोपी की थी जो पिछले 9 वर्षों से फरार चल रहा था और जिसके खिलाफ राज्य में कछुओं और घड़ियालों की अंतरराष्ट्रीय तस्करी से जुड़े तीन गंभीर मामले दर्ज थे।

    जानकारी के अनुसार तारकनाथ घोष के खिलाफ ये मामले 5 मई 2017 को CBI को सुपुर्द किए गए थे। तस्करी का यह जाल केवल मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं था बल्कि यह भारत के कई राज्यों और बांग्लादेश व थाईलैंड तक फैला हुआ था। STSF ने लंबे समय से इस पर नजर रखी थी और आरोपी को पकड़ने के लिए 10 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया था।

    गिरफ्तारी एक संयुक्त अभियान का हिस्सा थी जिसमें वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो रेलवे पुलिस और अन्य स्थानीय इकाइयों ने सहयोग किया। इस संयुक्त अभियान में STSF ने बड़े पैमाने पर खुफिया जानकारी और जमीन पर निगरानी का इस्तेमाल किया। कानपुर में किए गए ऑपरेशन के दौरान तारकनाथ घोष को घेराबंदी कर पकड़ा गया। गिरफ्तार आरोपी को विशेष न्यायालय शिवपुरी में पेश किया गया जहां से उसे रिमांड पर लिया गया है।

    STSF की टीम फिलहाल आरोपी से पूछताछ कर रही है ताकि उसके पूरे तस्करी नेटवर्क का पता लगाया जा सके और अन्य शामिल व्यक्तियों तक पहुंचा जा सके। अधिकारियों का कहना है कि यह गिरफ्तारी संगठित वन्यजीव तस्करी गिरोहों के लिए बड़ा झटका है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस सफलता पर STSF और अन्य सहयोगी टीमों की प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में वन्यजीव संरक्षण को लेकर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जा रही है और अवैध तस्करी पर किसी प्रकार की सहनशीलता नहीं दिखाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह की कार्रवाइयां न केवल तस्करों के लिए चेतावनी हैं बल्कि वन्यजीवों के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।

    वन्यजीव अधिकारियों ने बताया कि इस गिरफ्तारी से प्रदेश में कछुओं घड़ियालों और अन्य संकटग्रस्त प्रजातियों की तस्करी पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही आरोपी के पूछताछ के आधार पर पूरे तस्करी नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद है। इस कार्रवाई को वन्यजीव संरक्षण में ऐतिहासिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

    इस अभियान से यह भी स्पष्ट हो गया है कि मध्यप्रदेश सरकार और STSF वन्यजीव तस्करी को जड़ से खत्म करने के लिए लगातार सक्रिय हैं। अब अधिकारियों की नजर इस नेटवर्क के अन्य सक्रिय सदस्य और अंतरराष्ट्रीय लिंक पर है ताकि भविष्य में इस तरह की तस्करी को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जा सकें।

  • मध्य प्रदेश राजनीति ताजा: विजयपुर फैसला, सूचना आयोग और गैस संकट पर विपक्ष-सत्तापक्ष आमने-सामने

    मध्य प्रदेश राजनीति ताजा: विजयपुर फैसला, सूचना आयोग और गैस संकट पर विपक्ष-सत्तापक्ष आमने-सामने


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा के निर्वाचन शून्य घोषित होने के फैसले को लेकर राजनीति गरमाई हुई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार पर तीखे हमले किए। पटवारी ने कहा कि कांग्रेस इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी और न्यायपालिका का सम्मान करते हुए विश्वास जताया कि वहां न्याय मिलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इस मामले में दबाव बनाकर निर्णय करवाना चाहती है, क्योंकि उन्हें यह स्वीकार नहीं है कि एक आदिवासी नेता चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंच गया।

    पटवारी ने भाजपा को चुनौती देते हुए विधायक निर्मला सप्रे के मामले का भी जिक्र किया और कहा कि अगर सरकार में हिम्मत है तो इस मामले में भी निर्णय कराए। वहीं, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य में सूचना आयोग के खाली पदों पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सूचना आयुक्तों की नियुक्ति लंबे समय से लंबित है और सरकार इस मामले में बेहद धीमी गति से काम कर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से बातचीत कर दो सूचना आयुक्तों की नियुक्ति की मांग भी की।

    सिंघार ने पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा से जुड़े मामले और गैस सिलेंडर की कमी एवं महंगाई को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उनका कहना था कि भाजपा हर मामले में देर से निर्णय लेती है और जनता को राहत देने के बजाय केवल खजाना भरने में लगी है।

    वहीं, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कांग्रेस नेताओं के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें उच्च न्यायालय के निर्णय का स्वागत करना चाहिए और अनावश्यक टिप्पणियों से उनकी अज्ञानता उजागर होती है।

    यह राजनीतिक वार्ता मध्य प्रदेश में आगामी चुनाव और राज्यसभा सीटों को लेकर बढ़ते तनाव की झलक देती है। विपक्ष और सरकार के बीच जारी इस बहस पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिक गई हैं।

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  • मध्यप्रदेश स्टेट बार काउंसिल चुनाव का ऐलान: 12 मई को मतदान, 93 हजार अधिवक्ता चुनेंगे 26 सदस्य

    मध्यप्रदेश स्टेट बार काउंसिल चुनाव का ऐलान: 12 मई को मतदान, 93 हजार अधिवक्ता चुनेंगे 26 सदस्य


    भोपाल । मध्यप्रदेश स्टेट बार काउंसिल के चुनाव को लेकर लंबे समय से चल रहा इंतजार अब खत्म हो गया है। चुनाव कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है जिसके तहत 12 मई 2026 को मतदान कराया जाएगा जबकि मतगणना की प्रक्रिया 16 जून से शुरू होगी। इस चुनाव में प्रदेशभर के करीब 93 हजार अधिवक्ता भाग लेंगे और वे 26 सदस्यों के चयन के लिए मतदान करेंगे। चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित उच्चाधिकार प्राप्त चुनाव समिति ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस एस. के. पालो को रिटर्निंग ऑफिसर नियुक्त किया है।

    जारी किए गए चुनाव कार्यक्रम के अनुसार सबसे पहले 16 मार्च को प्रोविजनल मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद अधिवक्ताओं को 24 मार्च तक मतदाता सूची में अपने दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर दिया जाएगा। प्राप्त आपत्तियों के निराकरण के बाद 1 अप्रैल 2026 को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी। अंतिम सूची जारी होने के बाद उम्मीदवारों के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी। नामांकन फॉर्म जमा करने की प्रक्रिया 8 अप्रैल से 10 अप्रैल तक चलेगी जिसमें इच्छुक अधिवक्ता अपने नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे।

    नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 15 और 16 अप्रैल को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। इस दौरान चुनाव अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी उम्मीदवारों के दस्तावेज और पात्रता नियमों के अनुरूप हैं या नहीं। इसके बाद जिन उम्मीदवारों को चुनाव नहीं लड़ना होगा वे 20 से 22 अप्रैल तक अपना नाम वापस ले सकेंगे। नाम वापसी की अंतिम तिथि के बाद 22 अप्रैल को शाम 5 बजे तक उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी कर दी जाएगी। इसी सूची के आधार पर 12 मई को प्रदेशभर में मतदान कराया जाएगा।

    इस चुनाव की खास बात यह है कि इसमें महिला अधिवक्ताओं को प्रतिनिधित्व देने के लिए आरक्षण का प्रावधान भी किया गया है। मध्यप्रदेश स्टेट बार काउंसिल में कुल 25 सदस्यों का चुनाव होता है जबकि एक सदस्य नामित किया जाता है जिससे कुल संख्या 26 हो जाती है। इस बार सात पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। हालांकि इनमें से पांच पदों के लिए ही चुनाव कराया जाएगा जबकि शेष दो पदों पर मनोनयन के माध्यम से महिला प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा।

    गौरतलब है कि मध्यप्रदेश स्टेट बार काउंसिल का कार्यकाल अक्टूबर 2025 में समाप्त हो चुका था और तब से परिषद एक्सटेंशन पर काम कर रही है। इस मामले को लेकर अदालत में सुनवाई भी हुई थी। 4 फरवरी को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि बार काउंसिल के चुनाव जल्द से जल्द कराए जाएं। अदालत के निर्देश के बाद अब चुनाव कार्यक्रम जारी कर दिया गया है।

    बार काउंसिल के इस चुनाव को प्रदेश के अधिवक्ताओं के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि परिषद अधिवक्ताओं से जुड़े विभिन्न प्रशासनिक पेशेवर और अनुशासनात्मक मामलों में अहम भूमिका निभाती है। ऐसे में प्रदेशभर के अधिवक्ताओं की नजर अब आगामी चुनाव प्रक्रिया पर टिकी हुई है।

  • नवजातों के लिए पहला टीका बनेगा मां का दूध सेंट्रल इंडिया में भोपाल अकेला शहर जहां 3 सरकारी ह्यूमन मिल्क बैंक हमीदिया अस्पताल में इसी महीने शुरू

    नवजातों के लिए पहला टीका बनेगा मां का दूध सेंट्रल इंडिया में भोपाल अकेला शहर जहां 3 सरकारी ह्यूमन मिल्क बैंक हमीदिया अस्पताल में इसी महीने शुरू


    नई दिल्ली। नवजात शिशु के लिए मां का दूध किसी अमृत से कम नहीं माना जाता। इसमें मौजूद पोषक तत्व और एंटीबॉडी बच्चे को शुरुआती संक्रमणों से बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। लेकिन कई बार बीमारी या अन्य कारणों से मां अपने नवजात को स्तनपान नहीं करा पाती।

    ऐसे में बच्चों को वैकल्पिक दूध देना पड़ता है। इसी समस्या को देखते हुए राजधानी भोपाल में ह्यूमन मिल्क बैंक की सुविधा को विस्तार दिया जा रहा है। एम्स और जेपी अस्पताल के बाद अब हमीदिया अस्पताल में भी ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू होने जा रहा है।ऐसे में बच्चों को वैकल्पिक दूध देना पड़ता है। इसी समस्या को देखते हुए राजधानी भोपाल में ह्यूमन मिल्क बैंक की सुविधा को विस्तार दिया जा रहा है। एम्स और जेपी अस्पताल के बाद अब हमीदिया अस्पताल में भी ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू होने जा रहा है।

    हमीदिया अस्पताल में यह नई सुविधा शुरू करने की टेंटेटिव डेट 17 मार्च तय की गई है। इसके अनुसार ही तैयारियां चल रहीं हैं। इसके शुरू होते ही भोपाल देश के उन चुनिंदा शहरों में शामिल होगा जहां तीन सरकारी ह्यूमन मिल्क बैंक उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही सेंट्रल इंडिया का अकेला शहर होगा, जहां तीन सरकारी ह्यूमन मिल्क बैंक होंगे।

    हमीदिया अस्पताल में जल्द शुरू होगी नई सुविधा
    राजधानी भोपाल के हमीदिया अस्पताल में ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू करने की तैयारी अंतिम चरण में है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार यहां सिविल वर्क तेजी से चल रहा है और अगले लगभग 10 दिनों में इसके पूरा होने की संभावना है। इसके बाद आवश्यक मशीनें और उपकरण स्थापित कर मिल्क बैंक को शुरू कर दिया जाएगा।
    अधिकारियों के मुताबिक मार्च माह के भीतर इस सुविधा को शुरू करने की योजना है, जिससे नवजात शिशुओं को समय पर मां के दूध का लाभ मिल सकेगा।


    भोपाल में होंगे तीन सरकारी ह्यूमन मिल्क बैंक
    राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत 2018 में भोपाल और इंदौर में ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू करने की योजना बनाई गई थी। हालांकि शुरुआत केवल भोपाल के जेपी अस्पताल में ही हो सकी।

    इसके बाद एम्स भोपाल में भी यह सुविधा शुरू की गई। अब हमीदिया अस्पताल में मिल्क बैंक शुरू होने के साथ राजधानी भोपाल देश का ऐसा शहर बन जाएगा जहां तीन सरकारी अस्पतालों में ह्यूमन मिल्क बैंक की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे नवजातों की देखभाल और पोषण व्यवस्था और मजबूत होगी।

    सुलतानियां अस्पताल के शिफ्ट होने के बाद बनी योजना
    दरअसल, सुलतानियां अस्पताल को हमीदिया परिसर में स्थानांतरित किए जाने के बाद यहां नवजात और मातृत्व सेवाओं का विस्तार किया गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए हमीदिया अस्पताल में ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू करने का प्रस्ताव तैयार किया गया था।

    यह प्रस्ताव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग को भेजा गया था, जिसे स्वीकृति मिलने के बाद अब इसे जमीन पर उतारा जा रहा है। इसके साथ ही हमीदिया अस्पताल में आईवीएफ यानी टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर शुरू करने की भी योजना है।

    ऐसे काम करता है ह्यूमन मिल्क बैंक

    ह्यूमन मिल्क बैंक में माताओं द्वारा दान किए गए दूध को सुरक्षित तरीके से संग्रहित किया जाता है। इसके लिए विशेष डीप फ्रीजर का उपयोग किया जाता है, जिसमें दूध को लगभग -30 डिग्री सेल्सियस तापमान पर सुरक्षित रखा जाता है।

    एक मिल्क बैंक में करीब 50 से 60 लीटर तक दूध संरक्षित किया जा सकता है। यहां मेकेनाइज्ड ब्रेस्ट पम्प, मिल्क स्टोरेज यूनिट और आधुनिक स्टरलाइजेशन सिस्टम जैसी सुविधाएं उपलब्ध होती हैं। इस बैंक में महिलाएं स्वेच्छा से अपना दूध दान कर सकती हैं, जिससे जरूरतमंद नवजात शिशुओं को पोषण मिल सके।

    किन बच्चों को दिया जाता है यह दूध

    ह्यूमन मिल्क बैंक में संग्रहित दूध उन नवजात शिशुओं को दिया जाता है, जिन्हें किसी कारण से अपनी मां का दूध नहीं मिल पाता। यह दूध विशेष रूप से उन बच्चों के लिए उपयोगी होता है जो समय से पहले यानी प्री-मेच्योर पैदा होते हैं। इसके अलावा एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट) में भर्ती बच्चों को भी यह दूध दिया जाता है। यदि किसी मां को गंभीर बीमारी के कारण आईसीयू में रखना पड़े और वह अपने बच्चे को स्तनपान नहीं करा सके, तब भी मिल्क बैंक का दूध नवजात के लिए जीवनदायी साबित होता है।

    मां का दूध नवजात के लिए सबसे जरूरी

    विशेषज्ञों के अनुसार मां के दूध में प्राकृतिक एंटीबॉडी और पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। यही कारण है कि इसे नवजात शिशु का पहला टीका भी कहा जाता है। मां का दूध बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है और उसे कई संक्रमणों से बचाता है। इसके अलावा यह बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए भी बेहद जरूरी माना जाता है।
    हर अस्पताल में नहीं खुल सकता मिल्क बैंक

    हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक डॉ. सुनीत टंडन के अनुसार किसी भी अस्पताल में ह्यूमन मिल्क बैंक तभी खोला जा सकता है, जब उस अस्पताल में हर साल कम से कम 10 हजार से अधिक डिलीवरी होती हों। इसके लिए केंद्र स्तर से अनुमति मिलती है और अस्पताल के डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाता है। उन्होंने बताया कि हमीदिया अस्पताल में इन सभी प्रक्रियाओं को पूरा कर लिया गया है, इसलिए जल्द ही यहां मिल्क बैंक की सुविधा शुरू कर दी जाएगी।

    नवजातों के लिए बनेगा जीवनदायी सहारा

    ह्यूमन मिल्क बैंक की सुविधा शुरू होने से उन नवजात शिशुओं को बड़ा लाभ मिलेगा, जिन्हें किसी कारण से अपनी मां का दूध नहीं मिल पाता। विशेषज्ञों का मानना है कि इस सुविधा से नवजात मृत्यु दर को कम करने में भी मदद मिल सकती है। राजधानी में तीन सरकारी मिल्क बैंक शुरू होने से भोपाल नवजात स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर उभर सकता है।

  • भोपाल: 'ईरानी डेरे' से 'सेक्स रैकेट' तक अमरीन-आफरीन की खौफनाक दास्तां; स्पा सेंटर की आड़ में चल रहा था धर्मांतरण और ड्रग्स का खेल

    भोपाल: 'ईरानी डेरे' से 'सेक्स रैकेट' तक अमरीन-आफरीन की खौफनाक दास्तां; स्पा सेंटर की आड़ में चल रहा था धर्मांतरण और ड्रग्स का खेल


    भोपाल।  राजधानी पुलिस की गिरफ्त में आई शातिर बहनें अमरीन और आफरीन के अतीत ने जांच अधिकारियों को भी चौंका दिया है। पुलिस जांच में यह साफ हुआ है कि 20 साल पहले लखनऊ के एक ‘ईरानी कबीले’ से भोपाल आया यह परिवार, पिता की मौत के बाद अपराध की दुनिया में उतर गया। कभी अभावों में जीने वाली इन बहनों ने स्पा सेंटरों के जरिए हाई-प्रोफाइल नेटवर्क बनाया और फिर शुरू हुआ मासूम लड़कियों को नर्क में धकेलने का सिलसिला।

    मोड्स ऑपरेंडी: बच्चा संभालने की नौकरी और फिर ‘हवस’ का जाल
    इन बहनों का गिरोह लड़कियों को फंसाने के लिए एक तय ‘पैटर्न’ पर काम करता था:

    पहले लड़कियों को बच्चा संभालने के नाम पर घर में नौकरी देतीं और उन्हें परिवार के सदस्य की तरह रखतीं।लड़कियों को शराब और MD ड्रग्स की लत लगाई जाती। फिर मौका पाकर इनके साथी चंदन, बिलाल और चानू लड़कियों के साथ रेप करते।

    ब्लैकमेलिंग और सौदा: बदनामी का डर दिखाकर इन लड़कियों को अहमदाबाद के यासिर के पास भेज दिया जाता, जहाँ उनसे जबरन देह व्यापार कराया जाता।

    धर्मांतरण का दबाव: ‘इस्लाम की अच्छाइयां’ और शादी का झांसा
    पीड़िताओं ने खुलासा किया है कि ये बहनें गिरोह में शामिल चंदन यादव (जो अब प्रिंस बन चुका है) की तरह ही अन्य लड़कियों का भी धर्म परिवर्तन कराना चाहती थीं। वे लगातार इस्लाम की पांच अच्छाइयां बताकर लड़कियों को कन्वर्ट होने और किसी अमीर जगह निकाह कराने का प्रलोभन देती थीं।

    पुलिस जांच: मोबाइल चैट और संदिग्ध वॉट्सएप ग्रुप
    गिरफ्तार आरोपी अमरीन और चंदन के मोबाइल पुलिस के लिए सबूतों का खजाना साबित हो रहे हैंअमरीन के मोबाइल में कई ऐसे वॉट्सएप ग्रुप मिले हैं जिनमें दर्जनों लड़कियों के फोटो और सौदेबाजी की बातें हैं।पुलिस की दो टीमें अब बिलाल (मौसेरा भाई), चानू उर्फ हाशिम और अहमदाबाद के यासिर की तलाश में मुंबई और गुजरात में दबिश दे रही हैं।छोटी बहन आफरीन ने अब तक अपना मोबाइल पुलिस को नहीं सौंपा है और वह लगातार जांच टीम को गुमराह कर रही है।

    ड्रग्स और तस्करी का कनेक्शन
    पीड़िताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि यह गिरोह केवल देह व्यापार ही नहीं, बल्कि एमडी (MD) ड्रग्स की तस्करी में भी शामिल है। भोपाल और छत्तीसगढ़ की दो युवतियों की इंस्टाग्राम पर हुई पहचान ने इस पूरे सिंडिकेट को बेनकाब करने में बड़ी भूमिका निभाई।

    अमरीन और आफरीन की यह कहानी केवल एक अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह की साजिश है जो धर्म और नशे का सहारा लेकर जिंदगियां तबाह कर रहा था। पुलिस की मुस्तैदी ने इस ‘ईरानी कनेक्शन’ वाले रैकेट को तोड़ तो दिया है, लेकिन फरार आरोपियों की गिरफ्तारी इस केस की अंतिम कड़ी होगी

  • भोपाल मासूम कांड: फांसी के फंदे और दोषी के बीच आया सुप्रीम कोर्ट; 'तिहरी मौत' की सजा पर फिलहाल लगी रोक

    भोपाल मासूम कांड: फांसी के फंदे और दोषी के बीच आया सुप्रीम कोर्ट; 'तिहरी मौत' की सजा पर फिलहाल लगी रोक



    भोपाल। राजधानी के शाहजहांनाबाद इलाके में 5 साल की मासूम से दरिंदगी और फिर उसकी हत्या करने वाले दोषी अतुल निहाले की फांसी की सजा पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने अतुल की याचिका को स्वीकार करते हुए निचली अदालतों द्वारा दिए गए ‘डेथ सेंटेंस’ के क्रियान्वयन (अमल) पर स्टे दे दिया है। अब न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की तीन सदस्यीय बेंच इस जघन्य मामले में दोषसिद्धि के तमाम कानूनी पहलुओं पर विस्तार से सुनवाई करेगी।

    स्पेशल कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: एक नहीं, तीन बार फांसी
    यह मामला कानून के इतिहास में इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भोपाल की विशेष पॉक्सो कोर्ट ने 18 मार्च 2025 को अतुल निहाले को तीन अलग-अलग धाराओं में फांसी की सजा सुनाई थी। नए कानून (BNS) के लागू होने के बाद मध्य प्रदेश में यह पहला ऐसा मामला था, जहाँ किसी दोषी को ‘तिहरी फांसी’ और साथ में दो बार उम्रकैद की सजा मिली थी। अदालत ने इसे ‘दुर्लभतम से दुर्लभ’ (Rarest of Rare) मामला करार देते हुए कहा था कि यदि मौत से भी बड़ी कोई सजा होती, तो आरोपी उसका भी पात्र होता।

    हाईकोर्ट की टिप्पणी: ‘कल्पना ही रूह कंपा देने वाली है’
    जबलपुर हाईकोर्ट ने भी इस सजा को बरकरार रखते हुए बेहद सख्त टिप्पणी की थी। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने कहा था कि 5 साल की मासूम ने जिस अमानवीय पीड़ा को सहा, उसकी कल्पना मात्र से ही रूह कांप जाती है। कोर्ट ने माना था कि समाज में बच्चों की सुरक्षा के लिए ऐसे दरिंदों को जीने का कोई हक नहीं है।

    खौफनाक वारदात: पानी की टंकी में मिला था मासूम का शव
    यह खौफनाक वारदात 24 सितंबर 2024 को हुई थी। आरोपी अतुल ने घर से किताबें लेने नीचे आई मासूम को अगवा किया, उसके साथ दुष्कर्म किया और फिर चाकू से वार कर उसकी हत्या कर दी। हैवानियत की हद तो तब पार हो गई जब उसने बच्ची के शव को तीन दिनों तक अपने घर के बाथरूम के ऊपर रखी पानी की टंकी में छिपाकर रखा। दुर्गंध आने पर जब पुलिस ने तलाशी ली, तब इस काले सच का खुलासा हुआ।

    अब आगे क्या? सुप्रीम कोर्ट का रुख
    सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल फांसी पर रोक लगाते हुए मामले का पूरा रिकॉर्ड तलब किया है। कोर्ट अब यह परखेगा कि क्या सजा के निर्धारण में किसी कानूनी प्रक्रिया की अनदेखी हुई है या नहीं। केस में 22 गवाह, डीएनए रिपोर्ट और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट जैसे पुख्ता सबूत हैं।इस मामले में आरोपी की मां बसंती और बहन चंचल को भी सबूत छिपाने और आरोपी की मदद करने के जुर्म में दो-दो साल की सजा सुनाई जा चुकी है।

  • गादेर घाटी में बड़ा हादसा टला: LPG टैंकर कंटेनर से टकराया, गैस रिसाव से मची अफरा-तफरी, पुलिस-फायर टीम ने संभाली स्थिति

    गादेर घाटी में बड़ा हादसा टला: LPG टैंकर कंटेनर से टकराया, गैस रिसाव से मची अफरा-तफरी, पुलिस-फायर टीम ने संभाली स्थिति


    गुना । मध्यप्रदेश के गुना जिले की गादेर घाटी में मंगलवार को एक बड़ा हादसा होते होते टल गया जब एलपीजी गैस से भरा एक टैंकर कंटेनर से टकरा गया और टक्कर के बाद टैंकर से गैस रिसाव शुरू हो गया। घटना के बाद इलाके में अफरा तफरी का माहौल बन गया क्योंकि चलती गाड़ी से गैस लीक होने की सूचना मिलते ही लोगों में दहशत फैल गई। हालांकि समय रहते पुलिस और फायर फाइटर्स की तत्परता और सूझबूझ से स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया जिससे संभावित बड़ा हादसा टल गया।

    जानकारी के अनुसार एलपीजी गैस से भरा टैंकर गुना के विजयपुर क्षेत्र की ओर से बनारस की तरफ जा रहा था। इसी दौरान गादेर घाटी क्षेत्र में किसी कारणवश टैंकर सामने चल रहे कंटेनर से टकरा गया। टक्कर इतनी तेज थी कि टैंकर में लगे वाल्व और पाइपलाइन के हिस्से से गैस का रिसाव शुरू हो गया। जैसे ही आसपास के लोगों और राहगीरों को गैस की तेज गंध का एहसास हुआ इलाके में हड़कंप मच गया। लोगों ने तुरंत इस घटना की सूचना पुलिस और आपातकालीन सेवाओं को दी।

    सूचना मिलते ही डायल 112 की पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने सबसे पहले सुरक्षा के मद्देनजर आसपास के क्षेत्र को खाली करवाया और लोगों को सुरक्षित दूरी पर रहने की सलाह दी। साथ ही एहतियात के तौर पर कुछ समय के लिए यातायात को भी नियंत्रित कर दिया गया ताकि किसी प्रकार की चिंगारी या दुर्घटना की संभावना को टाला जा सके। इसके साथ ही फायर ब्रिगेड और संबंधित विभागों को भी तुरंत सूचना देकर मौके पर बुलाया गया।

    फायर फाइटर्स की टीम मौके पर पहुंचते ही सक्रिय हो गई और गैस रिसाव को नियंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू की। टीम ने सावधानीपूर्वक टैंकर की जांच की और रिसाव को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक तकनीकी उपाय किए। इस दौरान पूरे क्षेत्र में सुरक्षा घेरा बनाए रखा गया ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। पुलिस और फायर विभाग के कर्मचारियों ने पूरी सतर्कता के साथ काम करते हुए हालात पर लगातार नजर बनाए रखी।

    प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और फायर फाइटर्स की सूझबूझ के चलते गैस रिसाव की स्थिति पर समय रहते काबू पा लिया गया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि या बड़ा नुकसान नहीं हुआ। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यदि समय रहते स्थिति को नियंत्रित नहीं किया जाता तो यह घटना एक बड़े हादसे में बदल सकती थी।

    घटना के बाद पुलिस ने पूरे क्षेत्र में कुछ समय तक निगरानी रखी और यह सुनिश्चित किया कि गैस का रिसाव पूरी तरह बंद हो चुका है। अधिकारियों ने बताया कि प्राथमिक तौर पर यह दुर्घटना टक्कर के कारण हुई है हालांकि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और यातायात भी सामान्य कर दिया गया है। समय पर की गई कार्रवाई और प्रशासन की मुस्तैदी के कारण एक संभावित बड़ा हादसा टल गया।

  • नरसिंहपुर में सनसनी: किराए के मकान में फंदे से झूलती मिली 14 वर्षीय मासूम की लाश, सुसाइड की गुत्थी सुलझाने में जुटी पुलिस

    नरसिंहपुर में सनसनी: किराए के मकान में फंदे से झूलती मिली 14 वर्षीय मासूम की लाश, सुसाइड की गुत्थी सुलझाने में जुटी पुलिस


    नरसिंहपुर । मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। जिले के तेंदूखेड़ा थाना क्षेत्र में एक 14 वर्षीय नाबालिग बच्ची का शव उसके अपने ही घर में फांसी के फंदे पर लटका हुआ मिला। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद से पूरे इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है और मृतक बच्ची के परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है। खुशियों से भरे घर में अचानक मातम छा गया है और हर कोई इस बात से हैरान है कि इतनी कम उम्र की बच्ची ने आखिर मौत को गले क्यों लगाया।

    मिली जानकारी के अनुसार मृतक नाबालिग बच्ची अपने पिता के साथ तेंदूखेड़ा में एक किराए के मकान में रहती थी। घटना वाले दिन जब परिजनों ने बच्ची को फंदे से झूलते देखा तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। चीख पुकार सुनकर आसपास के लोग इकट्ठा हो गए और तत्काल मामले की सूचना स्थानीय पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही तेंदूखेड़ा थाना पुलिस की टीम हरकत में आई और मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पंचनामा तैयार किया और उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

    तेंदूखेड़ा थाना प्रभारी बी.एल. त्यागी ने इस दुखद मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई की थी। शुरुआती जांच में यह मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है लेकिन पुलिस हर संभावित पहलू पर नजर रख रही है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि बच्ची ने यह आत्मघाती कदम किस दबाव या परेशानी में उठाया। पुलिस घटनास्थल से साक्ष्य जुटा रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या घर में कोई सुसाइड नोट मिला है या पिछले कुछ दिनों से बच्ची के व्यवहार में कोई बदलाव देखा गया था।

    इस घटना ने स्थानीय लोगों को गहरे सदमे में डाल दिया है। पड़ोसियों का कहना है कि परिवार किराए के मकान में रहकर अपनी गुजर बसर कर रहा था और किसी को अंदेशा भी नहीं था कि इतनी बड़ी त्रासदी हो जाएगी। पुलिस ने आसपास के लोगों और सहपाठियों से भी पूछताछ शुरू कर दी है ताकि मौत के पीछे के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। थाना प्रभारी का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सटीक समय और तकनीकी कारणों का खुलासा हो पाएगा।

    फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और विस्तृत विवेचना जारी है। यह घटना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और उनकी गतिविधियों पर नजर रखना कितना अनिवार्य है। पुलिस की जांच रिपोर्ट आने तक पूरे क्षेत्र में तरह तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं लेकिन आधिकारिक रूप से अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।