Category: Madhya Pradesh

  • सैलरी और शोषण के आरोपों से गरमाया पीथमपुर 500 मजदूरों ने कंपनी के खिलाफ खोला मोर्चा

    सैलरी और शोषण के आरोपों से गरमाया पीथमपुर 500 मजदूरों ने कंपनी के खिलाफ खोला मोर्चा


    पीथमपुर । मध्यप्रदेश के धार जिले के औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर में श्रमिक असंतोष अब खुलकर सामने आ गया है। हाल ही में दिल्ली एनसीआर में वेतन वृद्धि और न्यूनतम मजदूरी को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद अब इसका असर मध्यप्रदेश के औद्योगिक इलाकों में भी दिखने लगा है। पीथमपुर स्थित सेक्टर 3 में मदरसन कंपनी की यूनिट 1 के बाहर लगभग 500 महिला और पुरुष कर्मचारियों ने काम बंद कर हड़ताल शुरू कर दी है जिससे पूरे औद्योगिक क्षेत्र में हलचल मच गई है।

    कर्मचारियों का आरोप है कि कंपनी प्रबंधन लंबे समय से आर्थिक शोषण कर रहा है और काम के निर्धारित घंटे लागू नहीं किए गए हैं। उनका कहना है कि उनसे आठ घंटे से अधिक काम कराया जाता है लेकिन इसके बदले में उचित वेतन नहीं दिया जाता जिससे बढ़ती महंगाई के दौर में जीवनयापन मुश्किल होता जा रहा है।

    हड़ताल में शामिल कर्मचारियों का यह भी आरोप है कि विरोध प्रदर्शन में शामिल कुछ कर्मचारियों को हाल ही में नौकरी से निकाल दिया गया है। इस कार्रवाई को कर्मचारियों ने दबाव बनाने और डराने की रणनीति बताया है। इससे अन्य कर्मचारियों में भी आक्रोश बढ़ गया है और वे सामूहिक रूप से विरोध में उतर आए हैं।

    प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों में शामिल रश्मि नामक कर्मचारी ने बताया कि कंपनी में न तो काम के घंटे तय हैं और न ही महिलाओं के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को छुट्टी नहीं दी जाती और किसी भी प्रकार की मेडिकल इमरजेंसी सुविधा या डॉक्टर की व्यवस्था भी कंपनी परिसर में मौजूद नहीं है।

    कर्मचारियों की मुख्य मांगों में निकाले गए साथियों की तत्काल बहाली वेतन में वृद्धि और काम के घंटे तय करना शामिल है। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं तब तक हड़ताल जारी रहेगी। इस आंदोलन का असर अब अन्य औद्योगिक इकाइयों में भी देखने को मिल रहा है जहां कर्मचारी एकजुट होकर समर्थन जता रहे हैं। कंपनी गेट पर लगातार नारेबाजी और प्रदर्शन जारी है जिससे औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।

    स्थिति को देखते हुए पुलिस और स्थानीय प्रशासन मौके पर निगरानी बनाए हुए हैं ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। प्रशासनिक स्तर पर बातचीत की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं ताकि मामला शांतिपूर्ण तरीके से हल किया जा सके। यह घटना एक बार फिर औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिक अधिकारों और कार्यस्थल की स्थितियों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

  • मध्य प्रदेश में पूरे उत्साह से मनाई जा रही अंबेडकर जयंती, गूंजा 'जय भीम' का नारा, महू में मुख्य आयोजन

    मध्य प्रदेश में पूरे उत्साह से मनाई जा रही अंबेडकर जयंती, गूंजा 'जय भीम' का नारा, महू में मुख्य आयोजन


    भोपाल। भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती मंगलवार को मध्यप्रदेश में पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई गई। इंदौर जिले के डॉ. अंबेडकर नगर (महू), जो उनकी जन्मस्थली है, वहां मुख्य राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित हुआ। यहां देशभर से श्रद्धालु, सामाजिक संगठन और बौद्ध भिक्षु बड़ी संख्या में पहुंचे। कार्यक्रम के दौरान ‘जय भीम’ के नारों से पूरा माहौल गूंज उठा और डॉ. अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। राज्यभर में माल्यार्पण, रैलियों और सभाओं का आयोजन किया गया।

    संविधान ने मजबूत की लोकतंत्र की नींव- मुख्यमंत्री यादव


    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने संविधान निर्माण के जरिए देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत आधार दिया और उनका सामाजिक समरसता व समानता का संदेश आज भी प्रासंगिक है।

    महू में मुख्य आयोजन, बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे
    महू में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में देशभर से आए लोगों ने बाबा साहेब को नमन किया। यहां बौद्ध भिक्षुओं की मौजूदगी भी रही और पूरा क्षेत्र श्रद्धा और उत्साह के माहौल में नजर आया।

    प्रदेश के अन्य शहरों में भी आयोजन
    भोपाल में अंबेडकर चौक पर माल्यार्पण के साथ सभा आयोजित की गई। ग्वालियर के फूलबाग अंबेडकर पार्क में सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और रैलियों का समापन वहीं हुआ। जबलपुर में विभिन्न संगठनों ने माल्यार्पण कर सामाजिक समरसता का संदेश दिया। रतलाम में कैबिनेट मंत्री और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने प्रतिमा पर श्रद्धांजलि दी और लोगों को छाछ वितरित की गई।

    बैतूल में अंबेडकर चौक पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। उन्होंने अंबेडकर के योगदान को महान बताते हुए उनके विचारों को प्रेरक बताया। नरसिंहपुर में डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती पर पंचायत एवं श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने बेलहाई अंबेडकर पार्क में प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।

    उज्जैन में अखिल भारतीय बैरवा महासंघ ने अंबेडकर जयंती पर प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और प्रभात फेरी निकाली, जिसमें बाबा साहब के योगदान को याद किया गया। नर्मदापुरम में भाजपा कार्यालय के सामने स्थित प्रतिमा स्थल कार्यक्रम आयोजित हुआ अधिकारियों ने माल्यार्पण किया और भीम आर्मी ने बाइक रैली निकाली। बैतूल, नरसिंहपुर, उज्जैन और नर्मदापुरम में भी विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए बाबा साहेब को याद किया गया। कई स्थानों पर प्रभात फेरी, बाइक रैली और सामूहिक माल्यार्पण का आयोजन हुआ।

    बता दें कि पूरे मध्य प्रदेश में अंबेडकर जयंती के अवसर पर सामाजिक न्याय, समानता और संविधान के मूल्यों को लेकर कार्यक्रम आयोजित किए गए। विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने बाबा साहेब के विचारों को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।

  • देवदूत बने जवान मैहर में ट्रेन हादसा टला, महिला को प्लेटफॉर्म के नीचे जाने से बचाया गया

    देवदूत बने जवान मैहर में ट्रेन हादसा टला, महिला को प्लेटफॉर्म के नीचे जाने से बचाया गया


    मैहर । मध्यप्रदेश के मैहर रेलवे स्टेशन पर उस समय बड़ा हादसा टल गया जब चलती ट्रेन में चढ़ने का प्रयास कर रही एक महिला अचानक संतुलन खो बैठी और प्लेटफॉर्म के किनारे से नीचे गिरने लगी। यह पूरा घटनाक्रम कुछ ही सेकेंड में हुआ लेकिन मौके पर मौजूद GRP और RPF जवानों की तत्परता ने एक बड़ी दुर्घटना को होने से रोक दिया। उनकी सूझबूझ और तेजी से लिए गए निर्णय ने महिला की जान बचा ली।

    यह घटना ट्रेन संख्या 11754 रीवा–इतवारी एक्सप्रेस के जनरल कोच के पास हुई। जानकारी के अनुसार योगिता श्रीवास उम्र 38 वर्ष अपने पति के साथ यात्रा कर रही थीं और ट्रेन में चढ़ने का प्रयास कर रही थीं। इसी दौरान उनका पैर फिसल गया और वह असंतुलित होकर प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच खतरनाक स्थिति में पहुंच गईं। कुछ ही पल में स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी।

    इसी दौरान ड्यूटी पर तैनात GRP आरक्षक 104 दिनेश कुमार पटेल और RPF आरक्षक प्रमोद मिश्रा ने स्थिति को देखते ही बिना देरी किए कार्रवाई की। दोनों जवानों ने तेजी से दौड़कर महिला को पकड़ लिया और खींचकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। अगर कुछ सेकेंड की भी देरी होती तो यह घटना जानलेवा साबित हो सकती थी। लेकिन उनकी तत्परता से एक बड़ा हादसा टल गया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यह घटना बेहद डरावनी थी और आसपास मौजूद यात्री भी कुछ समय के लिए स्तब्ध रह गए थे। लेकिन जवानों की बहादुरी के बाद सभी ने राहत की सांस ली और उनकी सराहना की।

    यह घटना एक बार फिर रेलवे सुरक्षा और यात्रियों की लापरवाही की ओर ध्यान खींचती है। अक्सर देखा जाता है कि यात्री चलती ट्रेन में चढ़ने या उतरने की कोशिश करते हैं जो बेहद खतरनाक होता है और कई बार जानलेवा साबित हो सकता है।

    रेलवे प्रशासन लगातार यात्रियों से अपील करता है कि ट्रेन पूरी तरह रुकने के बाद ही उसमें चढ़ें या उतरें। थोड़ी सी लापरवाही बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। मैहर की यह घटना इस बात का उदाहरण है कि सतर्कता और समय पर की गई कार्रवाई से जान बचाई जा सकती है।

  • दिग्विजय के बाद खाली सीट पर बढ़ी खींचतान कांग्रेस में जातीय समीकरण बने सिरदर्द

    दिग्विजय के बाद खाली सीट पर बढ़ी खींचतान कांग्रेस में जातीय समीकरण बने सिरदर्द


    भोपाल । मध्यप्रदेश में राज्यसभा की एक सीट को लेकर कांग्रेस के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का कार्यकाल समाप्त होने के बाद खाली हुई इस सीट ने पार्टी के अंदर नई खींचतान को जन्म दे दिया है। खास बात यह है कि यह विवाद अब केवल राजनीतिक नहीं रहा बल्कि जातीय समीकरणों के इर्दगिर्द घूमता नजर आ रहा है जहां अलग अलग वर्ग अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं।

    शुरुआत में अनुसूचित जाति वर्ग की ओर से मांग उठी थी कि इस बार राज्यसभा में दलित नेता को मौका दिया जाए। इस मांग को कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने प्रमुखता से उठाया और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा जैसे नेताओं का भी समर्थन मिला। इसके बाद विंध्य क्षेत्र के ब्राह्मण नेताओं ने भी सक्रियता दिखाई और उन्होंने पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी दावेदारी रखी।

    हाल ही में विंध्य क्षेत्र के प्रतिनिधिमंडल ने जीतू पटवारी और उमंग सिंघार से मुलाकात कर यह तर्क दिया कि क्षेत्र में ब्राह्मण समाज का प्रभाव काफी अधिक है और उन्हें राज्यसभा में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। इस मुलाकात के बाद यह स्पष्ट हो गया कि पार्टी के भीतर जातीय संतुलन का मुद्दा अब और गहराता जा रहा है।

    इसी बीच अब सिंधी समाज की एंट्री ने इस पूरी प्रक्रिया को और दिलचस्प बना दिया है। रीवा शहर कांग्रेस कमेटी के महामंत्री दिलीप ठारवानी ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को पत्र लिखकर सिंधी समाज से प्रतिनिधि भेजने की मांग की है। उन्होंने मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी को संबोधित पत्र में अपने लंबे राजनीतिक अनुभव और पार्टी के प्रति समर्पण का उल्लेख करते हुए खुद को एक योग्य दावेदार बताया है।

    ठारवानी का कहना है कि सिंधी समाज का कांग्रेस के प्रति वर्षों से जुड़ाव रहा है और पार्टी को इस वर्ग को भी प्रतिनिधित्व देने पर विचार करना चाहिए। उनका मानना है कि यदि उन्हें मौका मिलता है तो वे संसद में पार्टी की विचारधारा और जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाएंगे और प्रदेशभर में संगठन को और मजबूत करेंगे।

    इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस के भीतर जातीय समीकरणों को त्रिकोणीय बना दिया है जहां दलित ब्राह्मण और सिंधी समाज तीनों अपनी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती संतुलन बनाने की होगी ताकि किसी भी वर्ग की नाराजगी सामने न आए।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा जैसी अहम सीट पर उम्मीदवार का चयन केवल योग्यता के आधार पर नहीं बल्कि सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखकर किया जाता है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस हाईकमान किस वर्ग को प्राथमिकता देता है और किस तरह इस आंतरिक दबाव को संतुलित करता है।

    फिलहाल यह स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश में राज्यसभा की यह एक सीट कांग्रेस के लिए केवल एक राजनीतिक अवसर नहीं बल्कि संगठनात्मक संतुलन की परीक्षा भी बन चुकी है। आने वाले दिनों में इस पर फैसला पार्टी की रणनीति और भविष्य की राजनीति दोनों को प्रभावित कर सकता है।

  • दिग्विजय के बाद खाली सीट पर बढ़ी खींचतान कांग्रेस में जातीय समीकरण बने सिरदर्द

    दिग्विजय के बाद खाली सीट पर बढ़ी खींचतान कांग्रेस में जातीय समीकरण बने सिरदर्द


    भोपाल । मध्यप्रदेश में राज्यसभा की एक सीट को लेकर कांग्रेस के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का कार्यकाल समाप्त होने के बाद खाली हुई इस सीट ने पार्टी के अंदर नई खींचतान को जन्म दे दिया है। खास बात यह है कि यह विवाद अब केवल राजनीतिक नहीं रहा बल्कि जातीय समीकरणों के इर्दगिर्द घूमता नजर आ रहा है जहां अलग अलग वर्ग अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं।

    शुरुआत में अनुसूचित जाति वर्ग की ओर से मांग उठी थी कि इस बार राज्यसभा में दलित नेता को मौका दिया जाए। इस मांग को कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने प्रमुखता से उठाया और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा जैसे नेताओं का भी समर्थन मिला। इसके बाद विंध्य क्षेत्र के ब्राह्मण नेताओं ने भी सक्रियता दिखाई और उन्होंने पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी दावेदारी रखी।

    हाल ही में विंध्य क्षेत्र के प्रतिनिधिमंडल ने जीतू पटवारी और उमंग सिंघार से मुलाकात कर यह तर्क दिया कि क्षेत्र में ब्राह्मण समाज का प्रभाव काफी अधिक है और उन्हें राज्यसभा में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। इस मुलाकात के बाद यह स्पष्ट हो गया कि पार्टी के भीतर जातीय संतुलन का मुद्दा अब और गहराता जा रहा है।

    इसी बीच अब सिंधी समाज की एंट्री ने इस पूरी प्रक्रिया को और दिलचस्प बना दिया है। रीवा शहर कांग्रेस कमेटी के महामंत्री दिलीप ठारवानी ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को पत्र लिखकर सिंधी समाज से प्रतिनिधि भेजने की मांग की है। उन्होंने मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी को संबोधित पत्र में अपने लंबे राजनीतिक अनुभव और पार्टी के प्रति समर्पण का उल्लेख करते हुए खुद को एक योग्य दावेदार बताया है।

    ठारवानी का कहना है कि सिंधी समाज का कांग्रेस के प्रति वर्षों से जुड़ाव रहा है और पार्टी को इस वर्ग को भी प्रतिनिधित्व देने पर विचार करना चाहिए। उनका मानना है कि यदि उन्हें मौका मिलता है तो वे संसद में पार्टी की विचारधारा और जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाएंगे और प्रदेशभर में संगठन को और मजबूत करेंगे।

    इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस के भीतर जातीय समीकरणों को त्रिकोणीय बना दिया है जहां दलित ब्राह्मण और सिंधी समाज तीनों अपनी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती संतुलन बनाने की होगी ताकि किसी भी वर्ग की नाराजगी सामने न आए।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा जैसी अहम सीट पर उम्मीदवार का चयन केवल योग्यता के आधार पर नहीं बल्कि सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखकर किया जाता है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस हाईकमान किस वर्ग को प्राथमिकता देता है और किस तरह इस आंतरिक दबाव को संतुलित करता है।

    फिलहाल यह स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश में राज्यसभा की यह एक सीट कांग्रेस के लिए केवल एक राजनीतिक अवसर नहीं बल्कि संगठनात्मक संतुलन की परीक्षा भी बन चुकी है। आने वाले दिनों में इस पर फैसला पार्टी की रणनीति और भविष्य की राजनीति दोनों को प्रभावित कर सकता है।

  • TET परीक्षा पर नए आदेश जल्द, कौन शिक्षक देंगे एग्जाम तय करेगा विभाग

    TET परीक्षा पर नए आदेश जल्द, कौन शिक्षक देंगे एग्जाम तय करेगा विभाग


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) को लेकर बड़ा फैसला जल्द सामने आ सकता है। स्कूल शिक्षा विभाग नए सिरे से आदेश जारी करने की तैयारी में है, जिसमें यह स्पष्ट किया जाएगा कि किन शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य होगा और किन्हें छूट या सरलीकरण मिलेगा। इस संबंध में लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं।

    नए आदेश में तय होगी अनिवार्यता और छूट
    आयुक्त ने कहा कि प्रस्तावित आदेश में यह बिंदु स्पष्ट रूप से शामिल किया जाएगा कि किन श्रेणी के शिक्षकों को परीक्षा देना जरूरी होगा। साथ ही नियमों के तहत कुछ शिक्षकों को राहत देने के प्रावधानों को भी परिभाषित किया जाएगा, जिससे भ्रम की स्थिति खत्म हो सके।

    सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका की तैयारी
    मामले को लेकर विभाग शासकीय अधिवक्ता से कानूनी राय ले रहा है। राय मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने पर निर्णय लिया जाएगा। इससे पहले कोर्ट ने सख्त निर्देश देते हुए सेवा में बने रहने और प्रमोशन के लिए TET पास करना अनिवार्य कर दिया था।

    बैठक में कई अहम प्रशासनिक निर्णय
    सोमवार को आयोजित बैठक में शिक्षक संगठनों और अधिकारियों के साथ चर्चा के दौरान कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इनमें लंबित वेतनवृद्धि और समयमान वेतनमान से जुड़े मामलों को जल्द निपटाने पर सहमति बनी।

    प्रशिक्षण और मार्गदर्शन कार्यक्रम की तैयारी
    यदि न्यायालय के निर्देश यथावत रहते हैं, तो TET में शामिल होने वाले शिक्षकों के लिए तहसील और विकासखंड स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसमें सिलेबस आधारित मार्गदर्शन दिया जाएगा ताकि शिक्षक परीक्षा की बेहतर तैयारी कर सकें।

    DPI स्तर पर परामर्श बैठक का निर्णय
    लंबित समस्याओं के समाधान के लिए डीपीआई स्तर पर एक परामर्शदात्री बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें विभिन्न शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसका उद्देश्य सभी पक्षों को साथ लेकर समाधान निकालना है।

    शिक्षक संगठनों में असंतोष
    हालांकि इस बैठक को लेकर कुछ शिक्षक संगठनों ने असंतोष जताया है। उनका कहना है कि सभी प्रभावित संगठनों को शामिल नहीं किया गया, जिससे लिए गए निर्णयों की वैधता पर सवाल उठते हैं। कुछ संगठनों ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे अधिकृत प्रतिनिधिमंडल के साथ ही चर्चा को मान्यता देंगे।

    क्या है TET परीक्षा?
    TET यानी Teacher Eligibility Test एक राष्ट्रीय स्तर की पात्रता परीक्षा है, जिसे राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद द्वारा 2010 में अनिवार्य किया गया था। यह परीक्षा कक्षा 1 से 8 तक के शिक्षकों की योग्यता निर्धारित करती है और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत इसकी वैधानिकता तय की गई है।

    सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
    1 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि जिन शिक्षकों की सेवा अवधि 5 वर्ष से अधिक शेष है, उन्हें TET पास करना अनिवार्य होगा। अन्यथा उन्हें सेवा छोड़नी पड़ सकती है या अनिवार्य सेवानिवृत्ति का सामना करना पड़ सकता है।

  • बिना काम के मिलता रहा वेतन: नगर निगम में फर्जी उपस्थिति पर जांच शुरू

    बिना काम के मिलता रहा वेतन: नगर निगम में फर्जी उपस्थिति पर जांच शुरू


    नई दिल्ली। ग्वालियर नगर निगम में सफाई व्यवस्था से जुड़ी बड़ी अनियमितता सामने आई है। बिना उपस्थिति दर्ज किए एक कर्मचारी को वेतन भुगतान किए जाने के मामले में निगमायुक्त संघप्रिय ने कड़ा रुख अपनाते हुए नोटिस, स्थानांतरण और जांच के आदेश जारी किए हैं।

    लंबे समय से अनुपस्थित कर्मचारी को मिलता रहा वेतन
    मामला वार्ड क्रमांक-65 का है, जहां पदस्थ सफाई संरक्षक शीला लंबे समय से ड्यूटी पर उपस्थित नहीं थीं। इसके बावजूद उनकी हाजिरी ऑफलाइन दर्ज कर वेतन जारी किया जाता रहा। इस खुलासे के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया।

    पोर्टल पर नाम नहीं, फिर भी दर्ज होती रही उपस्थिति
    जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित कर्मचारी का नगर निगम के ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीयन तक नहीं था, फिर भी नियमित रूप से उनकी उपस्थिति दर्ज की जाती रही। यह गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।

    दो अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस
    निगमायुक्त ने वार्ड हेल्थ ऑफिसर रवि चिंडालिया को कारण बताओ नोटिस जारी कर 20 अप्रैल शाम 6 बजे तक जवाब देने के निर्देश दिए हैं। वहीं जोन क्रमांक-25 के प्रभारी जोनल हेल्थ ऑफिसर अर्जुन दास को भी नोटिस थमाया गया है। उन पर फर्जी हाजिरी दर्ज कराने के लिए दबाव बनाने और भ्रामक शिकायत करने के आरोप हैं।

    तत्काल स्थानांतरण, नई जिम्मेदारी सौंपी गई
    कार्रवाई के तहत रवि चिंडालिया का तत्काल प्रभाव से स्थानांतरण कर दिया गया है। उन्हें वार्ड 39 में उनके मूल पद विनियमित सफाई कर्मी के रूप में पदस्थ किया गया है। वहीं वार्ड 65 का अतिरिक्त प्रभार अस्थायी रूप से दिनेश गौहर को सौंपा गया है।

    तीन दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश
    पूरे मामले की प्राथमिक जांच स्वच्छता अधिकारी दीपेन्द्र सेंगर को सौंपी गई है। उन्हें तीन दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जिम्मेदारों के खिलाफ आगे की कार्रवाई तय की जा सके।

    भ्रष्टाचार पर सख्त रुख, प्रशासन का संदेश
    नगर निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि लापरवाही और भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर बख्शा नहीं जाएगा। यह कार्रवाई अन्य कर्मचारियों के लिए भी एक सख्त संदेश के रूप में देखी जा रही है।

  • आस्था या खतरा नर्मदा में 11 हजार लीटर दूध से बढ़ा प्रदूषण जलीय जीवन पर संकट

    आस्था या खतरा नर्मदा में 11 हजार लीटर दूध से बढ़ा प्रदूषण जलीय जीवन पर संकट


    भोपाल । मध्यप्रदेश के सीहोर जिले में नर्मदा नदी में 11 हजार लीटर दूध प्रवाहित करने की घटना अब गंभीर पर्यावरणीय चिंता का विषय बन गई है। धार्मिक आस्था के तहत किए गए इस आयोजन के बाद विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इसका असर केवल तत्काल नहीं बल्कि लंबे समय तक देखने को मिलेगा। विशेष रूप से इसका दूसरा चरण जिसे सेकेंड फेज कहा जा रहा है वह और भी खतरनाक साबित हो सकता है।

    पर्यावरण विशेषज्ञ सुभाष सी पांडे के अनुसार इतनी बड़ी मात्रा में दूध नदी में जाने से पानी का संतुलन तेजी से बिगड़ जाता है। शुरुआत में सबसे बड़ा असर घुलित ऑक्सीजन के स्तर पर पड़ता है। सामान्य परिस्थितियों में पानी में ऑक्सीजन का स्तर 6 से 8 mg प्रति लीटर होता है लेकिन दूध के मिश्रण के बाद यह घटकर 1 से 3 mg प्रति लीटर तक पहुंच सकता है। इससे मछलियों और अन्य जलीय जीवों के लिए जीवन संकट खड़ा हो जाता है और उनकी मौत शुरू हो सकती है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी मात्रा में दूध को वैज्ञानिक दृष्टि से डेयरी वेस्ट माना जाता है जो सामान्य सीवेज से भी अधिक खतरनाक होता है। दूध में मौजूद कार्बनिक तत्व पानी में घुलकर तेजी से बैक्टीरिया की वृद्धि को बढ़ावा देते हैं जिससे प्रदूषण का स्तर कई गुना बढ़ जाता है। यही कारण है कि बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड यानी बीओडी का स्तर सामान्य 3 mg प्रति लीटर से बढ़कर 1000 से 1300 mg प्रति लीटर तक पहुंच सकता है जो बेहद खतरनाक स्थिति है।

    इस पूरे घटनाक्रम का सबसे गंभीर पहलू सेकेंड फेज में सामने आता है। पहले चरण में जहां ऑक्सीजन की कमी से जलीय जीव मरते हैं वहीं दूसरे चरण में उनके सड़ने से पानी में बैक्टीरिया और फंगस की मात्रा तेजी से बढ़ती है। यह एक चेन रिएक्शन की तरह काम करता है जिसमें पानी की गुणवत्ता लगातार गिरती जाती है और प्रदूषण लंबे समय तक बना रहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर महीनों तक देखा जा सकता है।

    इसका प्रभाव केवल एक स्थान तक सीमित नहीं रहता बल्कि जहां दूध प्रवाहित किया गया वहां से कई किलोमीटर डाउनस्ट्रीम तक पानी पीने योग्य नहीं रहता। इससे आसपास के गांवों और लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। नर्मदा का पानी सामान्यतः क्षारीय प्रकृति का होता है लेकिन दूध के अम्लीय गुण इसके संतुलन को बिगाड़ सकते हैं जिससे जलीय पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होता है।

    विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया है कि नदियों के प्रदूषण का मुख्य कारण मानव गतिविधियां ही हैं चाहे वे धार्मिक हों या सामाजिक। पूजा सामग्री फल फूल और अन्य वस्तुओं का विसर्जन भी नदी की सेहत को लगातार नुकसान पहुंचा रहा है। कानूनी रूप से भी इस तरह की गतिविधियों पर रोक है। जल निवारण एवं प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम 1974, राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम 2010 और जैविक विविधता अधिनियम 2002 के तहत जल संसाधनों को व्यवस्थित करना दंडनीय है लेकिन जमीनी स्तर पर सख्ती की कमी के कारण ऐसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या का समाधान केवल कानून से नहीं बल्कि जागरूकता और जिम्मेदारी से संभव है। आस्था और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना बेहद जरूरी है ताकि धार्मिक परंपराएं भी निभें और प्रकृति को नुकसान भी न पहुंचे। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में नर्मदा जैसी महत्वपूर्ण नदी की स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।

  • डॉ. अंबेडकर जयंती पर बड़ा फैसला: उम्रकैद काट रहे 9 बंदी हुए रिहा

    डॉ. अंबेडकर जयंती पर बड़ा फैसला: उम्रकैद काट रहे 9 बंदी हुए रिहा


    नई दिल्ली। ग्वालियर की सेंट्रल जेल में अंबेडकर जयंती के अवसर पर एक अहम मानवीय निर्णय लिया गया। इस मौके पर आजीवन कारावास की सजा काट रहे 9 बंदियों को रिहा किया गया, जिनमें एक महिला बंदी भी शामिल है। शासन द्वारा यह निर्णय उनके अच्छे आचरण और सुधारात्मक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी को देखते हुए लिया गया।

    14 साल से अधिक सजा काट चुके थे सभी बंदी
    रिहा किए गए सभी बंदी हत्या जैसे गंभीर अपराधों में दोषी पाए गए थे और 14 साल से अधिक समय तक जेल में सजा काट चुके थे। वे एक ही प्रकरण से जुड़े थे और लंबे समय से उनके व्यवहार और सुधार को लगातार परखा जा रहा था।

    शासन की मंजूरी के बाद पूरी हुई प्रक्रिया
    जेल प्रशासन ने इन बंदियों के नाम और आचरण से संबंधित रिपोर्ट शासन को भेजी थी। प्रस्ताव पर स्वीकृति मिलने के बाद उनकी रिहाई की औपचारिकताएं पूरी की गईं। जेल अधीक्षक विदित सरवईया के अनुसार, सभी बंदियों का आचरण संतोषजनक रहा, जिसके आधार पर उनकी शेष सजा माफ की गई।

    परिजनों से मिलकर भावुक हुए बंदी
    जेल से बाहर आते ही बंदियों ने अपने परिवारजनों से मुलाकात की। लंबे समय बाद मिलन के इस भावुक क्षण में कई बंदी और उनके परिजन भावुक नजर आए और एक-दूसरे को गले लगाकर खुशी जताई।

    सम्मान के साथ दी गई विदाई
    रिहाई से पहले जेल प्रशासन द्वारा सभी बंदियों को शॉल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। इस दौरान जेल अधिकारी और सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे, जिन्होंने इस पहल को पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

    अब अन्य अवसरों पर भी मिल रही राहत
    पहले केवल गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर ही इस तरह की सजा माफी दी जाती थी, लेकिन पिछले दो वर्षों से अंबेडकर जयंती और गांधी जयंती जैसे अवसरों पर भी यह प्रक्रिया अपनाई जा रही है, जिससे सुधार की दिशा में बंदियों को प्रोत्साहन मिल रहा है।

    रिहा हुए बंदियों के नाम
    रिहा किए गए बंदियों में सुरेश उर्फ सज्जन, पंचम जाटव, आशीष शर्मा, जमुना अहिरवार, छोटे और छोटया माली, अजय तोमर, मोहर सिंह, महेंद्र सिंह और लीलाबाई शामिल हैं।

  • परंपरा और राजनीति का संगम, बैतूल में बैलगाड़ी पर पहुंचे ,भाजपा प्रदेश अध्यक्ष

    परंपरा और राजनीति का संगम, बैतूल में बैलगाड़ी पर पहुंचे ,भाजपा प्रदेश अध्यक्ष


    बैतूल । मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में राजनीतिक गतिविधियों के बीच एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली जब भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल ने ‘गांव बस्ती चलो अभियान’ के तहत ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा किया। इस दौरान उनका अंदाज पारंपरिक और सादगी से भरा रहा जिसने न केवल स्थानीय लोगों का ध्यान खींचा बल्कि पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय भी बन गया।

    घोड़ाडोंगरी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम चिरापाटला में जब वे पहुंचे तो उन्होंने आधुनिक वाहनों की बजाय बैलगाड़ी का सहारा लिया। बैलगाड़ी पर सवार होकर गांव में प्रवेश करते ही ग्रामीणों में उत्साह का माहौल बन गया। लोगों ने इस पहल को जमीन से जुड़े नेता की पहचान के रूप में देखा और उनका स्वागत भी गर्मजोशी से किया।

    यह दृश्य केवल एक प्रतीकात्मक कदम नहीं था बल्कि इसके जरिए ग्रामीण जीवन से जुड़ाव और परंपराओं के प्रति सम्मान का संदेश देने की कोशिश भी साफ नजर आई। अक्सर राजनीतिक दौरों में दिखने वाली औपचारिकता से हटकर यह अंदाज लोगों को ज्यादा करीब और वास्तविक लगा। ग्रामीणों ने इसे अपनी संस्कृति और जीवनशैली के प्रति सम्मान के रूप में लिया जिससे जनसंपर्क अभियान को और मजबूती मिली।

    इस दौरे का उद्देश्य केवल लोगों से मिलना जुलना ही नहीं बल्कि उनकी समस्याओं को समझना और सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाना भी था। अभियान के तहत उन्होंने गांव के लोगों से सीधा संवाद किया उनकी समस्याएं सुनी और समाधान के लिए भरोसा दिलाया।

    राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में इस तरह के प्रयास चुनावी रणनीति का भी हिस्सा होते हैं जहां नेता सीधे जनता के बीच जाकर विश्वास बनाने की कोशिश करते हैं। हालांकि आम लोगों के लिए यह पहल इसलिए खास बन जाती है क्योंकि इससे उन्हें यह महसूस होता है कि उनका प्रतिनिधि उनकी जिंदगी और समस्याओं को करीब से समझता है।

    गांव बस्ती चलो अभियान के माध्यम से पार्टी ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने के प्रयास में है और इस तरह के प्रतीकात्मक कदम उस रणनीति को और प्रभावी बना रहे हैं। बैलगाड़ी पर सवार होकर गांव पहुंचना एक ऐसा दृश्य रहा जिसने यह संदेश दिया कि राजनीति केवल मंच और भाषण तक सीमित नहीं है बल्कि जनता के बीच जाकर उनकी भाषा और जीवनशैली को समझना भी उतना ही जरूरी है।

    बैतूल में इस दौरे ने यह साफ कर दिया कि जमीनी स्तर पर जुड़ाव बनाने के लिए सादगी और प्रतीकात्मकता दोनों ही अहम भूमिका निभाते हैं। आने वाले समय में इस अभियान का असर कितना व्यापक होता है यह देखना दिलचस्प होगा लेकिन फिलहाल यह पहल लोगों के बीच चर्चा और आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।