Category: Madhya Pradesh

  • सतना में नदी बनी मौत का कारण: युवक की डूबने से दर्दनाक मौत

    सतना में नदी बनी मौत का कारण: युवक की डूबने से दर्दनाक मौत


    सतना । सतना जिले के कोलगवां थाना क्षेत्र में रविवार को एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। दोस्तों के साथ नदी में नहाने गया एक 21 वर्षीय युवक देखते ही देखते गहरे पानी में समा गया और उसकी जान चली गई। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। दोस्तों ने अपनी जान जोखिम में डालकर उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन तेज बहाव और गहराई के कारण सफलता नहीं मिल सकी। करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद ग्रामीण गोताखोरों ने युवक को बाहर निकाला, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

    जानकारी के मुताबिक, सरिया टोला माधवगढ़ निवासी अर्चित सिंह रविवार सुबह अपने पांच दोस्तों के साथ माधवगढ़ स्थित नदी के एनीकेट पर नहाने गया था। भीषण गर्मी के बीच सभी दोस्त नदी में मस्ती कर रहे थे। लगभग डेढ़ घंटे तक नहाने के बाद एक-एक कर सभी युवक पानी से बाहर निकलने लगे। इसी दौरान अर्चित का संतुलन बिगड़ गया और उसका पैर फिसल गया। देखते ही देखते वह गहरे पानी में चला गया।

    अर्चित को डूबता देख दोस्तों में अफरा-तफरी मच गई। दोस्तों ने तुरंत नदी में छलांग लगाई और उसे खोजने की कोशिश शुरू की, लेकिन पानी ज्यादा गहरा होने के कारण उसका कोई पता नहीं चल सका। दोस्तों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे। सूचना मिलते ही स्थानीय गोताखोर भी नदी किनारे पहुंच गए और युवक की तलाश शुरू की गई।

    करीब आधे घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद गोताखोरों ने अर्चित को पानी से बाहर निकाला। युवक की हालत गंभीर थी। परिजन और दोस्त उसे तुरंत शहर के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। युवक की मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम पसर गया। माता-पिता और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

    घटना की सूचना मिलते ही कोलगवां थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में हादसा पैर फिसलने के कारण होना बताया जा रहा है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि गर्मी के मौसम में बड़ी संख्या में युवक नदी और एनीकेट में नहाने पहुंचते हैं, लेकिन सुरक्षा के इंतजाम नहीं होने से अक्सर हादसे हो जाते हैं। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि खतरनाक जलाशयों के आसपास चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

  • परिवार के बाहर जाते ही सूना घर बना निशाना, गहने और नकदी लेकर फरार चोर

    परिवार के बाहर जाते ही सूना घर बना निशाना, गहने और नकदी लेकर फरार चोर


    सतना । सतना शहर में चोरों के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं। कोलगवां थाना क्षेत्र में शनिवार और रविवार की दरमियानी रात अज्ञात बदमाशों ने दो सूने घरों को निशाना बनाते हुए लाखों रुपए की चोरी की बड़ी वारदात को अंजाम दिया। दोनों घटनाओं के बाद इलाके में दहशत का माहौल है, जबकि पुलिस अब आरोपियों की तलाश में जुट गई है।

    पहली घटना शुक्ला बर्दाडीह इलाके में रहने वाले एक ऑटोमोबाइल कंपनी के मैनेजर शैलेंद्र सिंह बघेल के घर हुई। घटना के समय शैलेंद्र सिंह जबलपुर गए हुए थे, जबकि उनकी पत्नी और बच्चे मायके में थे। घर पूरी तरह सूना होने का फायदा उठाकर बदमाश रात के अंधेरे में पहुंचे और मुख्य दरवाजे का ताला तोड़कर अंदर घुस गए। इसके बाद चोरों ने घर के कमरों को खंगालते हुए अलमारी का लॉक तोड़ा और उसमें रखे सोने-चांदी के जेवर, नगदी और अन्य कीमती सामान समेटकर फरार हो गए।

    सुबह पड़ोसियों को घर का ताला टूटा दिखाई दिया तो उन्होंने तुरंत शैलेंद्र सिंह को सूचना दी। खबर मिलते ही वे जबलपुर से सतना पहुंचे और पुलिस को घटना की जानकारी दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है।

    इसी रात दूसरी वारदात भी शुक्ला बर्दाडीह इलाके में तलैया के पास रहने वाली शिवकली त्रिपाठी के घर में हुई। शिवकली अपने मायके कुआं गांव गई हुई थीं, जबकि उनके दोनों बेटे भोपाल में रहते हैं। सूने मकान का फायदा उठाते हुए चोर घर में घुस गए और अलमारी का ताला तोड़कर उसमें रखे करीब 75 हजार रुपए नकद और लगभग 3 लाख रुपए कीमत के सोने-चांदी के आभूषण चोरी कर लिए।

    रविवार सुबह जब शिवकली घर लौटीं तो घर का सामान बिखरा देखकर उनके होश उड़ गए। उन्होंने तुरंत डायल-112 पर सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का मुआयना किया।

    एक ही रात में दो बड़ी चोरियों की घटना ने पुलिस की गश्त व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में रात के समय सुरक्षा व्यवस्था कमजोर रहती है, जिसका फायदा बदमाश उठा रहे हैं।

    फिलहाल पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है और संदिग्धों की तलाश की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपियों को पकड़ लिया जाएगा।

  • बच्चों पर मंडराया खतरा: सतना में मीजल्स के 7 केस, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

    बच्चों पर मंडराया खतरा: सतना में मीजल्स के 7 केस, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट


    मध्यप्रदेश।  सतना जिले में मीजल्स यानी खसरे का संक्रमण एक बार फिर चिंता का कारण बन गया है। पहले नागौद ब्लॉक के गिंजारा गांव में मामला सामने आने के बाद अब शहरी क्षेत्र में भी इसके नए केस दर्ज किए गए हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग की चुनौती और बढ़ गई है।

    ताजा जानकारी के अनुसार सतना अर्बन क्षेत्र के राजेंद्र नगर गली नंबर-16 समेत अलग-अलग इलाकों में कुल 7 नए मीजल्स केस सामने आए हैं। इनमें से 4 मामले अकेले राजेंद्र नगर से हैं। सभी संक्रमित बच्चे 5 वर्ष से कम उम्र के हैं और फिलहाल उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।

    स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, मई माह में संदिग्ध लक्षण दिखने पर 22 बच्चों के सैंपल जांच के लिए आईसीएमआर लैब, जबलपुर भेजे गए थे। इनकी रिपोर्ट 23 मई को प्राप्त हुई, जिसमें 8 बच्चों में मीजल्स संक्रमण की पुष्टि हुई, जिनमें एक मामला नागौद ब्लॉक से संबंधित था।

    संक्रमित बच्चों में अधिकांश बच्चियां शामिल हैं, जो हनुमान नगर, नई बस्ती, बजरहा टोला, राजेंद्र नगर और गिंजारा जैसे क्षेत्रों से हैं। इस साल अब तक सतना और मैहर मिलाकर लगभग 40 मीजल्स केस दर्ज किए जा चुके हैं, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं।

    इससे पहले गिंजारा गांव में मीजल्स के कारण एक 2 वर्षीय मासूम बच्ची की मौत भी हो चुकी है। बच्ची को शुरुआत में बुखार और शरीर पर दाने निकले थे, लेकिन समय पर सही इलाज न मिलने और झाड़-फूंक पर भरोसा करने के कारण उसकी हालत बिगड़ती चली गई और अंततः उसकी मौत हो गई।

    अब उसी परिवार में बड़ी बहन की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है, हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अनुसार वह अब खतरे से बाहर है। संक्रमित बच्ची को भी बहन से संक्रमण फैलने की आशंका जताई जा रही है।

    स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे अभियान तेज कर दिया है। जिला टीकाकरण अधिकारी के अनुसार, जहां-जहां केस सामने आए हैं, वहां बच्चों को एमआर वैक्सीन की अतिरिक्त डोज और विटामिन-ए सिरप देने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

    सीएमएचओ डॉ. मनोज शुक्ला ने बताया कि स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है, लेकिन निगरानी बढ़ा दी गई है। संदिग्ध बच्चों की जांच, टीकाकरण और सर्वे कार्य लगातार जारी रहेगा ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।

  • सतना एयरपोर्ट पर अव्यवस्था: वेटिंग हॉल का AC ट्रिप, यात्रियों को गर्मी में राहत

    सतना एयरपोर्ट पर अव्यवस्था: वेटिंग हॉल का AC ट्रिप, यात्रियों को गर्मी में राहत


    मध्यप्रदेश। सतना एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दौरे के दौरान तैयारियों और व्यवस्थाओं की गंभीर खामियां सामने आ गईं। 31 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एयरपोर्ट पर उस समय अव्यवस्था का माहौल बन गया जब वेटिंग हॉल में क्षमता से तीन गुना अधिक भीड़ जमा हो गई।

    जानकारी के अनुसार, एयरपोर्ट के वेटिंग हॉल की क्षमता लगभग 50 लोगों की है, लेकिन मुख्यमंत्री की अगवानी के दौरान करीब 150 लोग वहां पहुंच गए। बाहर तापमान 43 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने और अंदर अत्यधिक भीड़ के कारण सेंट्रल एसी सिस्टम पर दबाव बढ़ गया और वह बार-बार ट्रिप होने लगा, जिससे कूलिंग पूरी तरह ठप हो गई।

    भीषण गर्मी और उमस के बीच यात्रियों और मौजूद लोगों को राहत देने के लिए एयरपोर्ट प्रबंधन को आनन-फानन में चार जंबो कूलर लगाने पड़े। इसके बावजूद स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी।

    यह घटना केवल तकनीकी खराबी तक सीमित नहीं रही, बल्कि एयरपोर्ट की तैयारियों और मूलभूत सुविधाओं पर भी सवाल खड़े कर गई। बताया जा रहा है कि यह एयरपोर्ट अभी तक पूरी तरह विकसित नहीं हो पाया है और यहां तक कि 6 सीटर छोटे विमान भी सुरक्षित रूप से नहीं उतर पा रहे हैं।

    इसी वजह से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को भोपाल से विमान द्वारा रीवा पहुंचना पड़ा और वहां से हेलीकॉप्टर के जरिए सतना आना पड़ा। यह स्थिति एयरपोर्ट की कार्यक्षमता पर गंभीर सवाल उठाती है।

    गौरतलब है कि पिछले वर्ष 31 मई को इस एयरपोर्ट का ऑनलाइन लोकार्पण किया गया था, लेकिन जमीनी हकीकत में अभी भी कई सुविधाएं अधूरी हैं। बड़े-बड़े दावों के बावजूद एयरपोर्ट पर मूलभूत व्यवस्थाएं अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाई हैं।

  • गोलीकांड में नया खुलासा: महिला और नाबालिग समेत 5 आरोपी गिरफ्त में

    गोलीकांड में नया खुलासा: महिला और नाबालिग समेत 5 आरोपी गिरफ्त में


    मध्यप्रदेश। सागर जिले के मोतीनगर थाना क्षेत्र स्थित गौंड बब्बा चबूतरा इलाके में हुए सनसनीखेज गोलीकांड में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक नाबालिग भी शामिल है। इसके साथ ही इस हत्याकांड में पकड़े गए आरोपियों की कुल संख्या बढ़कर पांच हो गई है, जबकि मुख्य आरोपी यश अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।

    यह घटना 21 मई की रात करीब 10:30 बजे की है, जब पुरानी रंजिश के चलते आरोपियों ने फरियादी ओम साहू और उसके भाई मयंक साहू के साथ विवाद शुरू कर दिया था। विवाद के दौरान गाली-गलौज और मारपीट के बाद स्थिति इतनी बिगड़ गई कि एक आरोपी ने अवैध हथियार से फायर कर दिया। गोली लगने से मयंक साहू गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इसी दौरान हमले में ओम साहू पर चाकू से वार भी किया गया था।

    घटना के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज की और साइबर सेल व मुखबिर तंत्र की मदद से आरोपियों की लोकेशन ट्रेस करना शुरू किया। शनिवार को इसी कार्रवाई के तहत पुलिस ने तुत्तू उर्फ शैलेंद्र रैकवार (22 वर्ष, निवासी तिरुपतिपुरम) और एक नाबालिग को गिरफ्तार कर लिया।

    इससे पहले शुक्रवार को भी पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिनमें 18 वर्षीय आर्यन आठिया, एक 16 वर्षीय नाबालिग और एक 60 वर्षीय महिला शामिल थी। इस तरह अब तक कुल पांच आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आ चुके हैं।

    मोतीनगर थाना प्रभारी जसवंत सिंह के अनुसार, इस हत्याकांड में कुल छह आरोपी नामजद हैं, जिनमें से एक मुख्य आरोपी यश अभी फरार चल रहा है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं।

    पुलिस का कहना है कि सभी साक्ष्यों के आधार पर मामले की गहन जांच जारी है और जल्द ही फरार आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

  • सागर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: देसी पिस्टल और कारतूस के साथ 59 वर्षीय आरोपी गिरफ्तार

    सागर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: देसी पिस्टल और कारतूस के साथ 59 वर्षीय आरोपी गिरफ्तार


    मध्यप्रदेश। सागर शहर में उस समय पुलिस को बड़ी सफलता मिली जब मोतीनगर थाना क्षेत्र की टीम ने एक 59 वर्षीय व्यक्ति को अवैध देसी पिस्टल और जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई मुखबिर से मिली पुख्ता सूचना के आधार पर की गई, जिसमें बताया गया था कि आरोपी न्यू भोपाल बस स्टैंड के पीछे भगतसिंह वार्ड क्षेत्र में संदिग्ध हालत में घूम रहा है।

    सूचना मिलते ही पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची। पुलिस को देखते ही आरोपी वहां से भागने की कोशिश करने लगा, लेकिन टीम में शामिल आरक्षकों ने उसका पीछा कर उसे दबोच लिया। गिरफ्तारी के बाद जब आरोपी की तलाशी ली गई तो उसके पास से एक देसी मैगजीन युक्त पिस्टल और उसकी जेब से एक जिंदा कारतूस बरामद हुआ।

    पकड़े गए आरोपी की पहचान मोहन उर्फ बबलू (59 वर्ष), निवासी राजीवनगर वार्ड के रूप में हुई है। पुलिस ने दोनों हथियारों को जब्त कर आरोपी को हिरासत में ले लिया है।

    मोतीनगर थाना प्रभारी जसवंत सिंह ने बताया कि आरोपी के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और उससे पूछताछ जारी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने यह अवैध हथियार कहां से प्राप्त किया और वह किस उद्देश्य से इसे लेकर घूम रहा था।

    प्रारंभिक जांच में यह भी आशंका जताई जा रही है कि आरोपी किसी वारदात को अंजाम देने की फिराक में था, हालांकि पुलिस सभी पहलुओं पर गंभीरता से जांच कर रही है।

  • सड़क पर मातम: जैन साध्वियों को कार ने कुचला, VIDEO सामने आने के बाद हड़कंप

    सड़क पर मातम: जैन साध्वियों को कार ने कुचला, VIDEO सामने आने के बाद हड़कंप


    मध्यप्रदेश। रीवा शहर में उस समय हड़कंप मच गया जब कलेक्ट्रेट के सामने तेज रफ्तार कार ने सड़क किनारे शांतिपूर्वक पैदल विहार कर रही तीन जैन साध्वियों को जोरदार टक्कर मार दी। यह पूरा हादसा 20 मई की दोपहर का बताया जा रहा है, जिसका सीसीटीवी फुटेज अब सामने आया है और जिसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

    वीडियो में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है कि साध्वियां नियम अनुसार सड़क किनारे पैदल चल रही थीं, तभी पीछे से आ रही तेज रफ्तार अनियंत्रित कार ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि मौके पर ही अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोग तुरंत बचाव में जुट गए।

    हादसे में पूज्य श्रुति मति माता की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उपसमिति माता ने इलाज के दौरान संजय गांधी अस्पताल में दम तोड़ दिया। वहीं तीसरी साध्वी आर्यिका माता की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है और उनका इलाज जारी है।

    घटना के तुरंत बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन दो साध्वियों की जान नहीं बचाई जा सकी। हादसे के बाद बुधवार को एक साध्वी का अंतिम संस्कार रीवा में ही किया गया, जिससे माहौल बेहद भावुक हो गया।

    हादसे को अंजाम देने के बाद कार चालक रशीद आबाद अली शाह मौके से फरार हो गया था। पुलिस की जांच में पता चला कि वह घटना के बाद करीब 270 किलोमीटर दूर जबलपुर तक भाग गया था, जहां बरगी पुलिस ने घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया।

    घटना के बाद जैन समाज में भारी आक्रोश है और इसे केवल दुर्घटना नहीं बल्कि गंभीर लापरवाही या संभावित साजिश के रूप में देखा जा रहा है। समाज ने मांग की है कि मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए और सभी डिजिटल व सीसीटीवी साक्ष्य सुरक्षित रखे जाएं।

    जैन समाज ने यह भी मांग की है कि देशभर में पैदल विहार करने वाले साधु-संतों की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर संत सुरक्षा नीति बनाई जाए। साथ ही दोषी को कठोर से कठोर सजा देने की अपील की गई है।

    इस घटना के विरोध में 25 मई को देशभर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का ऐलान किया गया है, जिसमें जैन समाज मौन रैली निकालकर अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाएगा।

  • धमकी और दबाव के आरोप से गरमाया मामला: शिक्षक गंभीर, पुलिस जांच में सवाल

    धमकी और दबाव के आरोप से गरमाया मामला: शिक्षक गंभीर, पुलिस जांच में सवाल


    मध्यप्रदेश।  रीवा के संजय गांधी अस्पताल में एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां सरकारी शिक्षक अनिल कुमार तिवारी जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर उनका परिवार अस्पताल के बाहर पिछले 48 घंटों से भीषण गर्मी में अन्न-जल त्यागकर न्याय की मांग पर डटा हुआ है।

    परिवार का आरोप है कि घटना के 72 घंटे बीत जाने के बाद भी न तो संबंधित आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और न ही किसी प्रकार की गिरफ्तारी हुई है। इस देरी को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    मामला उस समय और गंभीर हो गया जब शिक्षक ने आत्महत्या का प्रयास किया। बताया जा रहा है कि उन्होंने पहले अपनी कलाई की नस काटी और बाद में जहरीला पदार्थ खा लिया, जिसके बाद उनकी हालत अत्यंत नाजुक हो गई। डॉक्टरों के अनुसार जहर पूरे शरीर में फैल चुका है और उनका इलाज आईसीयू में चल रहा है।

    घटना से आहत उनकी पत्नी ने अस्पताल के बाहर पानी तक छोड़ दिया है और रोते हुए कहा कि यदि उनके पति को न्याय नहीं मिला तो वह भी जीवन समाप्त कर देंगी। वहीं बेटी ने भी साफ कहा है कि पूरा परिवार न्याय न मिलने पर सामूहिक आत्महत्या जैसा कठोर कदम उठाने को मजबूर होगा।

    परिजनों के अनुसार विवाद की शुरुआत एक पेड़ कटाई के मामले से हुई थी, जिसके बाद मामला थाने तक पहुंचा और वहीं से तनाव बढ़ता गया। आरोप है कि शिक्षक को झूठे केस में फंसाया गया और थाने में मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।

    शिक्षक द्वारा लिखे गए सुसाइड नोट में विश्वविद्यालय थाना प्रभारी और एक पत्रकार पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। सुसाइड नोट में उन्होंने लिखा कि उन्हें बिना किसी अपराध के फंसाया गया और उनकी 28 साल की सेवा को बर्बाद कर दिया गया।

    परिवार का यह भी आरोप है कि पत्रकार ने पुलिस और प्रशासन में अपनी ऊंची पहुंच का हवाला देकर उन्हें धमकाया और अपमानित किया। वहीं, शिक्षक ने अपने नोट में उच्च स्तरीय जांच या सीबीआई जांच की मांग भी की है।

    घटना के बाद 72 घंटे बीत जाने के बावजूद किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी न होने से आक्रोश बढ़ता जा रहा है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और सभी पहलुओं की समीक्षा की जा रही है। यह पूरा मामला अब प्रशासन, पुलिस और न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है।

  • रोशनी से डरती जिंदगी: रीवा के चार बच्चे दुर्लभ बीमारी से अंधेरे में जीने को मजबूर

    रोशनी से डरती जिंदगी: रीवा के चार बच्चे दुर्लभ बीमारी से अंधेरे में जीने को मजबूर


    मध्यप्रदेश। रीवा जिले के जवा तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत देवखर (कोरियान टोला) से एक बेहद दर्दनाक और भावुक कर देने वाली कहानी सामने आई है, जहां एक ही परिवार के चार मासूम बच्चे ऐसी दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे हैं, जिसने उनकी पूरी जिंदगी को अंधेरे में धकेल दिया है। इस बीमारी के कारण सूरज की रोशनी उनके लिए राहत नहीं बल्कि सजा बन गई है।

    सुग्रीव कोरी के परिवार के चार बच्चे अनामिका (5 वर्ष), रिया (9 वर्ष), प्रियांशु (13 वर्ष) और पुष्पेंद्र (10 वर्ष)—जन्म से ही एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी एल्बिनिज्म से पीड़ित हैं। इस बीमारी में शरीर में मेलानिन नामक तत्व नहीं बन पाता, जिसके कारण बच्चों की त्वचा, बाल और आंखों का रंग पूरी तरह सफेद है और उनकी दृष्टि भी बेहद कमजोर है।

    इन बच्चों की हालत इतनी गंभीर है कि तेज धूप या रोशनी में उनकी आंखों में तेज जलन और चुभन होती है। बाहर निकलते ही उनकी आंखें बंद हो जाती हैं और संतुलन बिगड़ने से वे गिर जाते हैं। यही कारण है कि ये मासूम बच्चे अधिकांश समय अंधेरे कमरों में रहने को मजबूर हैं।

    सबसे दुखद पहलू यह है कि उनकी शारीरिक स्थिति के कारण उन्हें समाज में भी उपहास का सामना करना पड़ता है। गांव के कुछ लोग और बच्चे उन्हें ‘अंग्रेज’ कहकर चिढ़ाते हैं, जिससे वे मानसिक रूप से और अधिक आहत हो गए हैं। धीरे-धीरे उन्होंने घर से बाहर निकलना भी कम कर दिया है।

    परिवार की आर्थिक स्थिति भी बेहद कमजोर है। माता-पिता मजदूरी कर किसी तरह घर चला रहे हैं। ऐसे में बच्चों का इलाज बड़े अस्पतालों में कराना उनके लिए संभव नहीं है। मां माया कोरी और मंजू कोरी ने भावुक होकर बताया कि बच्चे पढ़ना चाहते हैं, लेकिन धुंधली दृष्टि के कारण उन्हें अक्षर भी स्पष्ट दिखाई नहीं देते।

    इस बीच एक और गंभीर समस्या सामने आई है कि बच्चों के बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट और रेटिना स्कैन मशीन में मैच नहीं हो पा रहे हैं, जिससे उनका सरकारी राशन कार्ड और अन्य दस्तावेज सक्रिय नहीं हो पा रहे हैं। इसके कारण परिवार को सरकारी राशन और योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है।

    इसके अलावा अब तक बच्चों का दिव्यांग प्रमाण पत्र भी नहीं बन सका है, जिससे वे पेंशन, छात्रवृत्ति और अन्य सरकारी सहायता से वंचित हैं। यह स्थिति परिवार की मुश्किलों को और बढ़ा रही है।

    स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि यह मामला आनुवंशिक बीमारी का प्रतीत होता है और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम से जांच कराकर उचित इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं जिला प्रशासन ने भी इस मामले को गंभीर मानते हुए स्वास्थ्य टीम को गांव भेजने और आवश्यक सहायता देने की बात कही है। यह कहानी न केवल एक चिकित्सा चुनौती को दर्शाती है, बल्कि समाज और सिस्टम की जिम्मेदारी पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है।

  • रजत मुकुट और त्रिशूल के साथ महाकाल का दिव्य स्वरूप, रविवार की भस्म आरती में उमड़ा सैलाब

    रजत मुकुट और त्रिशूल के साथ महाकाल का दिव्य स्वरूप, रविवार की भस्म आरती में उमड़ा सैलाब


    मध्यप्रदेश। उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में रविवार तड़के भस्म आरती के दौरान भव्य और दिव्य दृश्य देखने को मिला, जब सुबह चार बजे मंदिर के पट खुलते ही संपूर्ण गर्भगृह भक्तिभाव और वैदिक मंत्रोच्चार से गूंज उठा।

    पट खुलने के बाद पंडे-पुजारियों ने सर्वप्रथम गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का विधिवत पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और पंचामृत दूध, दही, घी, शक्कर तथा फलों के रस से उनका अभिषेक कर विशेष पूजन-अर्चन संपन्न हुआ।

    इसके पश्चात भगवान महाकाल को भांग, त्रिशूल, त्रिपुंड और डमरू अर्पित कर उनका दिव्य श्रृंगार किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढककर पारंपरिक रूप से भस्म रमाई गई, जो भस्म आरती की सबसे महत्वपूर्ण परंपरा मानी जाती है।

    भस्म अर्पित होने के बाद बाबा महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाला और रुद्राक्ष की माला धारण कराई गई। साथ ही मोगरा और गुलाब के सुगंधित पुष्पों से बनी आकर्षक मालाओं से उनका श्रृंगार किया गया। इसके बाद फल और मिष्ठान का भोग अर्पित कर राजा स्वरूप दर्शन को पूर्ण किया गया।

    इस अद्भुत भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और उन्होंने बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे मंदिर परिसर में “हर हर महादेव” के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा।

    मान्यता के अनुसार, भस्म आरती के दौरान जब भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की जाती है, तो वे निराकार स्वरूप से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं, जिसे अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है।

    महानिर्वाणी अखाड़ा की ओर से भस्म अर्पण की परंपरा निभाई गई, जिससे यह आरती और भी विशेष और आध्यात्मिक महत्व की बन गई।