Category: Madhya Pradesh

  • जबलपुर में अंधविश्वास का 'खूनी' खेल: जादू-टोना के शक में सगे भांजे ने कुल्हाड़ी से अलग किया मामा का सिर

    जबलपुर में अंधविश्वास का 'खूनी' खेल: जादू-टोना के शक में सगे भांजे ने कुल्हाड़ी से अलग किया मामा का सिर


    जबलपुर । रिश्तों की मर्यादा और मानवीय संवेदनाओं को ताक पर रखकर जबलपुर के ग्राम बिसनपुरा में एक ऐसा हत्याकांड हुआ, जिसने मध्य प्रदेश को स्तब्ध कर दिया है। 50 वर्षीय भूरालाल यादव की महज इसलिए हत्या कर दी गई क्योंकि उनके सगे भांजे को शक था कि मामा ‘जादू-टोना’ कर उसके परिवार को बर्बाद कर रहे हैं। बदमाशों ने कुल्हाड़ी से वार कर भूरालाल का सिर धड़ से अलग कर दिया और लाश को जंगल में फेंक दिया।

    लापता होने से ‘सरकटी लाश’ मिलने तक का सफर
    घटना की शुरुआत 4 मार्च 2026 को हुई, जब भूरालाल दोपहर का खाना खाकर घर से निकले थे। वे पेशे से खेती के साथ-साथ झाड़-फूंक का काम भी करते थे। जब वे शाम तक नहीं लौटे, तो परिजनों ने तलाश शुरू की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।

    6 मार्च की शाम गांव के बाहर टहलने निकले ग्रामीणों की नजर एक क्षत-विक्षत शव पर पड़ी। मौके का मंजर भयावह था; मृतक का सिर धड़ से कई फीट दूर पड़ा था।सूचना मिलते ही कुंडम थाना प्रभारी सतीश अंधवान टीम के साथ पहुँचे और शव की शिनाख्त भूरालाल के रूप में की गई।

    वजह: ‘मामा का जादू और भांजे का प्रतिशोध’
    पुलिस जांच और मृतक के भाई नन्हेंलाल के बयानों ने हत्या की कड़ियों को जोड़ दिया भूरालाल का सगा भांजा पिट्टी उर्फ संत कुमार लंबे समय से अपने परिवार की बीमारियों और घरेलू कलह के लिए मामा के ‘जादू-टोना’ को जिम्मेदार मानता था।4 मार्च की शाम को संत कुमार और उसके साथी मधु शाह का भूरालाल से विवाद हुआ था।जब भूरालाल अपना सामान लेकर दूसरे गांव जा रहे थे, तभी रास्ते में घात लगाकर बैठे आरोपियों ने कुल्हाड़ी से उनके गले पर दो जोरदार वार किए। हमला इतना घातक था कि एक झटके में सिर अलग हो गया।

    पुलिस की त्वरित कार्रवाई: बांध के पास से दबोचे गए हत्यारे
    जबलपुर पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी साक्ष्य जुटाए और शनिवार सुबह घेराबंदी कर दोनों मुख्य आरोपियों संत कुमार और मधु शाह को एक बांध (डेम) के पास से गिरफ्तार कर लिया।आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल करते हुए बताया कि उन्हें यकीन था कि भूरालाल की झाड़-फूंक की वजह से ही उनका घर बर्बाद हो रहा है, इसलिए उन्होंने ‘खेल खत्म’ करने का फैसला किया।

  • सोशल मीडिया से ब्लैकमेलिंग का खेल: कंटेंट क्रिएटर बनकर अधिकारी-नेताओं से मांगता था लाखों की रंगदारी

    सोशल मीडिया से ब्लैकमेलिंग का खेल: कंटेंट क्रिएटर बनकर अधिकारी-नेताओं से मांगता था लाखों की रंगदारी


    मुरैना मुरैना जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां खुद को कंटेंट क्रिएटर बताने वाले युवक पर सरकारी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को सोशल मीडिया के जरिए ब्लैकमेल कर लाखों रुपये की रंगदारी मांगने के गंभीर आरोप लगे हैं। परिवहन अधिकारी अर्चना परिहार और सबलगढ़ नगर पालिका अध्यक्ष सोनाराम धाकड़ की शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी सपन जादौन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। वहीं उसके कुछ साथी अभी फरार बताए जा रहे हैं और पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई है।

    परिवहन अधिकारी अर्चना परिहार ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि आरोपी सपन जादौन ने उनके फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर उन्हें भ्रष्ट अधिकारी बताते हुए बदनाम करने की कोशिश की। इसके साथ ही भ्रष्टाचार का कथित खुलासा करने की धमकी देकर पैसों की मांग की जाने लगी। अर्चना परिहार के मुताबिक, पिछले तीन महीने उनके जीवन के सबसे तनावपूर्ण रहे। उन्होंने बताया कि वह गर्भावस्था के अंतिम चरण में हैं और इस दौरान लगातार मिल रही धमकियों और मानसिक दबाव ने उन्हें काफी परेशान कर दिया।

    अर्चना परिहार का आरोप है कि आरोपी और उसके साथी उनकी गतिविधियों पर नजर रखते थे और उनकी लोकेशन तक की जानकारी देते थे। कई बार ऑफिस में आकर कर्मचारियों से पूछा जाता था कि मैडम कहां गई हैं और कब लौटेंगी। उन्होंने बताया कि एक बार उन्हें संदेश भेजकर कहा गया कि अगर चार लाख रुपये दे दिए जाएं और बाबू की तरफ से दो लाख रुपये मिल जाएं तो मामला खत्म कर दिया जाएगा। लगातार मिल रही धमकियों के बाद उन्होंने पुलिस अधीक्षक से शिकायत की, जिसके बाद मामला दर्ज किया गया।

    इसी तरह सबलगढ़ नगर पालिका अध्यक्ष सोनाराम धाकड़ ने भी आरोपी के खिलाफ रंगदारी मांगने का केस दर्ज कराया है। धाकड़ का कहना है कि सपन जादौन ने सोशल मीडिया पर उन्हें भ्रष्टाचार में लिप्त बताते हुए कई पोस्ट डालीं और उनकी छवि खराब करने की कोशिश की। इसके बाद उनके बेटे के मोबाइल नंबर पर एक लिंक और क्यूआर कोड भेजकर 10 लाख रुपये की मांग की गई। जांच के लिए बेटे ने 10 हजार रुपये ट्रांसफर भी किए, लेकिन इसके बाद भी दबाव बनाया जाता रहा।

    पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी और उसके साथियों का तरीका लगभग एक जैसा था। वे पहले किसी अधिकारी या नेता को टारगेट बनाते, फिर उसके फोटो और अधूरी जानकारी के आधार पर सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर दबाव बनाते थे। इसके बाद संपर्क कर पैसों की मांग की जाती थी और पैसे नहीं देने पर भ्रष्टाचार का खुलासा करने की धमकी दी जाती थी।

    पुलिस के अनुसार, आरोपी सपन जादौन मुरैना के कोलिया गांव का रहने वाला है और जयपुर में मार्बल का काम करता था। सोशल मीडिया के जरिए उसकी पहचान कुछ अन्य लोगों से हुई और उन्होंने मिलकर एक ग्रुप बना लिया। इस ग्रुप का मकसद कथित तौर पर सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर लोगों को ब्लैकमेल कर पैसा कमाना था।

    मुरैना पुलिस ने आरोपी को जयपुर से गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब उसके सोशल मीडिया अकाउंट, मोबाइल कॉल डिटेल और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। साथ ही फरार आरोपियों की तलाश भी जारी है। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • CM ने 'क्वींस ऑन द व्हील्स' को दिखाई हरी झंडी: 25 महिला सुपर बाइकर्स सात दिन में 1,400km का रोमांचक सफर करेंगी

    CM ने 'क्वींस ऑन द व्हील्स' को दिखाई हरी झंडी: 25 महिला सुपर बाइकर्स सात दिन में 1,400km का रोमांचक सफर करेंगी


    भोपाल। शनिवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री निवास से ‘क्वींस ऑन द व्हील्स’ के तीसरे संस्करण को हरी झंडी दिखाकर फ्लैग ऑफ किया। इस कार्यक्रम के तहत देशभर से आए 25 महिला सुपर बाइकर्स मध्य प्रदेश के समृद्ध और ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों की सात दिवसीय यात्रा पर रवाना हुईं।

    यह यात्रा केवल बाइकिंग का रोमांच नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, स्वतंत्रता और प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का उत्सव है। महिलाओं की इस अनूठी ट्रेल में भोपाल से खजुराहो तक लगभग 1,400 किलोमीटर का सफर शामिल है, जिसमें सांची, उदयगिरि, चंदेरी, शिवपुरी, कूनो, ग्वालियर, दतिया, ओरछा और खजुराहो जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल शामिल हैं।

    मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड के एमडी डॉ. इलैया राजा टी ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य प्रदेश को एक सुरक्षित, रोमांचक और विश्वस्तरीय पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करना है। इसके साथ ही यह अभियान कम-ज्ञात पर्यटन स्थलों और ग्रामीण टूरिज्म सर्किट्स को प्रमुखता देगा और रिस्पॉन्सिबल ट्रैवल को बढ़ावा देगा।

    यात्रा का समापन 13 मार्च को भोपाल में होगा, जहां महिला राइडर्स अपनी साहसिक यात्रा का फाइनल उत्सव मनाएंगी।

    सफर में शामिल महिला बाइकर्स:
    महाराष्ट्र की कविता जाधव, डॉ. प्रियंका, हेतल उपाध्याय, रुकमणी, माधुरी नायक, मधु हेलचेल, कल्याणी पोटकर, डॉ. नीता, तनुप्रिया, रिद्धी, रुचिका मेघे, मैथीली सिंह, एकता खाटे, पल्लवी देशमुख, उत्तरप्रदेश से डॉ. सुमित, मध्यप्रदेश की राज नंदनी, दिव्या रमन, मयूरी सोनी, दीक्षा राकेसिया, उन्नति चौरसिया, सेजल कुशवाहा, महक बाथम, शबनम बानो, सारा खान, कर्नाटक की सोना प्रियदर्शनी, पश्चिम बंगाल की शांति घोस।

    इस तरह के आयोजन से न सिर्फ महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर देश-दुनिया में पहचान पाएगी।

  • भोपाल में भव्य ध्वज महोत्सव: श्रद्धालुओं ने किया अभिषेक और ध्वज वरघोड़ा में भक्ति का झूमता उत्सव

    भोपाल में भव्य ध्वज महोत्सव: श्रद्धालुओं ने किया अभिषेक और ध्वज वरघोड़ा में भक्ति का झूमता उत्सव


    भोपाल भोपाल के एयरपोर्ट रोड स्थित श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ श्वेतांबर जैन मंदिर में शनिवार को ध्वजा महोत्सव का आयोजन भव्य रूप से हुआ। मंदिर परिसर में धार्मिक उल्लास और भक्ति का माहौल नजर आया।

    मंदिर समिति के अध्यक्ष आई.एल. मेहता ने बताया कि आचार्य मुक्ति सागर सूरीश्वर महाराज और आचार्य अचल मुक्ति सागर महाराज के सानिध्य में मूलनायक शंखेश्वर पार्श्वनाथ जिन प्रतिमाओं का विधिपूर्वक अभिषेक और पूजन किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में भाग लेकर नमोकार मंत्र का सामूहिक जाप किया और धार्मिक लाभ प्राप्त किया।

    पूजन के बाद भव्य ध्वज वरघोड़ा निकाला गया। इस दौरान श्रद्धालु प्रभु भक्ति में झूमते और नृत्य करते हुए आगे बढ़े, जिससे पूरे इलाके में धार्मिक उत्साह और सांस्कृतिक उल्लास का माहौल बन गया।

    कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गईं, जिसमें भक्तिमय गीत और जैन धर्म से जुड़ी कथाएं प्रस्तुत की गईं। मंदिर समिति ने पूरे आयोजन को आकर्षक साज-सज्जा और सुरक्षा इंतजाम के साथ संपन्न कराया।

    इस अवसर पर चेंबर ऑफ कॉमर्स के महामंत्री ललित तातेड, श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ के अध्यक्ष राजेश तातेड, श्री आदिनाथ संघ तुलसी नगर के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र कोठारी, महिला मंडल की शिल्पा कोठारी सहित समाज के अनेक सदस्य उपस्थित रहे।

    महोत्सव में शामिल श्रद्धालुओं ने कहा कि ऐसे आयोजन धर्म, संस्कृति और भक्ति को जीवंत रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, और यह नए युवाओं को धार्मिक मूल्यों और सामाजिक एकता से जोड़ते हैं।

  • मध्य प्रदेश की लाड़ली लक्ष्मी योजना में बड़ा ड्रॉप आउट, केवल 20% बेटियां ही बन पाएंगी लखपति

    मध्य प्रदेश की लाड़ली लक्ष्मी योजना में बड़ा ड्रॉप आउट, केवल 20% बेटियां ही बन पाएंगी लखपति


    भोपाल । मध्य प्रदेश में बेटियों के सशक्तिकरण और लिंगानुपात सुधारने के उद्देश्य से वर्ष 2007 में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा शुरू की गई लाड़ली लक्ष्मी योजना अब गंभीर समीक्षा के दौर में है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि योजना में शामिल बेटियों का सफर आधे रास्ते में ही रुक जाता है।

    कक्षा 5वीं उत्तीर्ण करने के बाद लगभग 52% बेटियां पढ़ाई छोड़ देती हैं। कक्षा 6वीं में छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाली कुल 13 67 897 बालिकाओं में से कक्षा 9वीं तक पहुंचने पर संख्या घटकर 7 06 123 रह जाती है। यानी करीब 48% बेटियां मध्य विद्यालय में ही सिस्टम से बाहर हो जाती हैं। यह गिरावट हायर सेकेंडरी में और तेज हो जाती है। कक्षा 11वीं में केवल 2 72 443 और 12वीं में 1 56 378 बेटियां ही छात्रवृत्ति की पात्र बचती हैं।

    स्नातक स्तर तक पहुंचने वाली बेटियों की संख्या और भी कम है। कुल पंजीकृत लाड़लियों में से केवल 22 022 छात्राएं कॉलेज तक पहुंच पाई हैं और यही वो संख्या है जिन्हें योजना के तहत निर्धारित 1 लाख 43 हजार रुपए की पूरी राशि मिलने की संभावना है। यानी लगभग 80% बेटियां लखपति बनने की दौड़ में पीछे रह जाती हैं।

    पढ़ाई छोड़ने का मुख्य कारण योजना की पात्रता नियमों में बताया गया है। विभाग के अनुसार केवल वही बालिकाएं छात्रवृत्ति की पात्र होती हैं जो कक्षा 5वीं पास कर कक्षा 6वीं में प्रवेश लेती हैं और अन्य सभी शर्तें पूरी करती हैं। वर्तमान स्थिति के अनुसार दिसंबर 2025 तक योजना के तहत कुल 813.20 करोड़ रुपए वितरित किए जा चुके हैं। इसके अलावा उन लाड़लियों का डेटा भी विभाग एकत्रित कर रहा है जिन्हें पंजीकरण के बावजूद छात्रवृत्ति नहीं मिली।

    योजना के तहत आर्थिक सहायता इस प्रकार दी जाती है: कक्षा 6वीं में प्रवेश पर 2 000 रुपए कक्षा 9वीं में 4 000 रुपए कक्षा 11वीं में 6 000 रुपए कक्षा 12वीं में 6 000 रुपए और ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन/व्यावसायिक पाठ्यक्रम में प्रवेश पर 25 000 रुपए। इसके अलावा बालिका की उम्र 21 वर्ष पूरी होने 12वीं उत्तीर्ण करने और निर्धारित आयु में विवाह होने पर 1 लाख रुपए की अंतिम किश्त सरकार द्वारा दी जाती है।

    योजना के इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि शुरुआती उत्साह के बावजूद बेटियों का लखपति बनने का सपना आधे रास्ते में ही टूट रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि dropout रोकने के लिए स्कूल स्तर पर निरंतर निगरानी परिवारों को जागरूक करना और समय पर छात्रवृत्ति वितरण जरूरी है ताकि लाड़लियों का शिक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण सुनिश्चित किया जा सके।

  • MP में स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट के संकेत: स्टाइपेंड को लेकर जूनियर डॉक्टरों का आंदोलन तेज, जस्टिस मार्च

    MP में स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट के संकेत: स्टाइपेंड को लेकर जूनियर डॉक्टरों का आंदोलन तेज, जस्टिस मार्च


    भोपाल ।मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका के बीच सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत जूनियर डॉक्टरों का आंदोलन तेज हो गया है। स्टाइपेंड में बढ़ोतरी और लंबित भुगतान को लेकर नाराज रेजिडेंट डॉक्टरों ने विरोध का नया चरण शुरू कर दिया है। प्रदेश के कई मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टर काली पट्टी बांधकर ड्यूटी कर रहे हैं और अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं। इस आंदोलन का नेतृत्व Junior Doctors Association जूडा कर रही है जिसने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो सोमवार से नॉन इमरजेंसी सेवाओं का बहिष्कार किया जाएगा।

    आंदोलन का सबसे बड़ा केंद्र प्रदेश की राजधानी Bhopal सहित अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेज बन गए हैं। जूडा के पदाधिकारियों का कहना है कि राज्य सरकार के 7 जून 2021 के आदेश के अनुसार 1 अप्रैल 2025 से CPE के आधार पर स्टाइपेंड में बढ़ोतरी लागू होनी थी और साथ ही लंबित एरियर का भुगतान भी किया जाना था। लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी इस संबंध में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। डॉक्टरों का आरोप है कि बार बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद भुगतान और संशोधन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही है।

    जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि स्टाइपेंड में देरी केवल आर्थिक समस्या नहीं है बल्कि इसका असर उनके मानसिक और पेशेवर मनोबल पर भी पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेजों में लंबे समय तक ड्यूटी करने और मरीजों की जिम्मेदारी संभालने के बावजूद उन्हें अपने अधिकारों के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है। इसी वजह से अब उन्होंने चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति अपनाई है।

    जूडा के अनुसार विरोध की शुरुआत काली पट्टी बांधकर काम करने से की गई है ताकि मरीजों की सेवा भी जारी रहे और सरकार तक उनकी आवाज भी पहुंचे। इसके बाद रविवार को डॉक्टर जस्टिस मार्च निकालेंगे जिसमें बड़ी संख्या में रेजिडेंट डॉक्टर शांतिपूर्ण तरीके से शामिल होंगे और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करेंगे। इस मार्च का उद्देश्य शासन और प्रशासन को यह संदेश देना है कि उनकी मांगें लंबे समय से लंबित हैं और अब इस पर तुरंत निर्णय लिया जाना चाहिए।

    डॉक्टरों ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि इसके बाद भी उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो सोमवार से नॉन इमरजेंसी सेवाओं का बहिष्कार किया जाएगा। इसमें ओपीडी रूटीन चेकअप और सामान्य चिकित्सा सेवाएं शामिल होंगी। हालांकि जूडा ने भरोसा दिलाया है कि इमरजेंसी सेवाएं पहले की तरह जारी रहेंगी ताकि गंभीर मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो।

    गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों में भी जूनियर डॉक्टर इसी मुद्दे को लेकर विरोध जता चुके हैं लेकिन स्टाइपेंड संशोधन का मामला अब भी अटका हुआ है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल एजुकेशन विभाग की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यापक असर पड़ सकता है।

  • पुलिया से 20 फीट नीचे गिरी गर्भवती महिला, अस्पताल पहुंचते ही दिया बच्ची को जन्म; हादसे के बाद भी मां-बेटी सुरक्षित

    पुलिया से 20 फीट नीचे गिरी गर्भवती महिला, अस्पताल पहुंचते ही दिया बच्ची को जन्म; हादसे के बाद भी मां-बेटी सुरक्षित


    खरगोन । मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक गंभीर सड़क हादसे के बाद भी मां और नवजात की जान सुरक्षित बच गई। जिले के भगवानपुरा क्षेत्र में स्थित सिरवेल के पास शुक्रवार को एक पुलिया पर बड़ा हादसा हो गया। एक अज्ञात बाइक की टक्कर के बाद बाइक सवार दंपती पुलिया से करीब 20 फीट नीचे जा गिरे। हादसे में गर्भवती महिला गंभीर रूप से घायल हो गई, लेकिन अस्पताल पहुंचते ही उसने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया।

    मिली जानकारी के अनुसार दंपती बाइक से अस्पताल की ओर जा रहे थे। बताया जा रहा है कि महिला गर्भवती थी और उसकी तबीयत ठीक नहीं लग रही थी, इसलिए परिवार के सदस्य उसे अस्पताल लेकर जा रहे थे। इसी दौरान रास्ते में सिरवेल के पास बनी पुलिया पर सामने से आ रही एक तेज रफ्तार बाइक ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक का संतुलन बिगड़ गया और दंपती सीधे पुलिया से नीचे जा गिरे।

    करीब 20 फीट नीचे गिरने के कारण दोनों को चोटें आईं, वहीं गर्भवती महिला की हालत को लेकर आसपास मौजूद लोगों में चिंता बढ़ गई। हादसे की आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और घायल दंपती की मदद की। स्थानीय लोगों ने बिना समय गंवाए महिला को उठाकर तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया।

    अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने महिला का प्राथमिक उपचार शुरू किया। इसी दौरान महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ ने तुरंत जरूरी इंतजाम किए और कुछ ही देर में महिला ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। यह खबर सुनते ही वहां मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली, क्योंकि हादसे की गंभीरता को देखते हुए सभी को मां और बच्चे की सुरक्षा को लेकर चिंता थी।

    डॉक्टरों के अनुसार हादसे के बावजूद मां और नवजात दोनों सुरक्षित हैं। फिलहाल महिला का अस्पताल में उपचार चल रहा है और डॉक्टर उसकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। परिवार के सदस्यों ने भी राहत जताई है कि इतने बड़े हादसे के बाद भी मां और बच्ची दोनों स्वस्थ हैं।

    इस घटना के बाद पूरा मामला इलाके में चर्चा का विषय बन गया है। स्थानीय लोग इसे किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहे हैं कि इतनी ऊंचाई से गिरने के बावजूद महिला ने सुरक्षित बच्ची को जन्म दिया। वहीं पुलिस अज्ञात बाइक चालक की तलाश में जुटी हुई है और मामले की जांच की जा रही है।

  • ईरान-इजराइल युद्ध का असर रसोई तक: LPG सिलेंडर 60 रुपये महंगा, कमर्शियल गैस में भी बड़ी बढ़ोतरी

    ईरान-इजराइल युद्ध का असर रसोई तक: LPG सिलेंडर 60 रुपये महंगा, कमर्शियल गैस में भी बड़ी बढ़ोतरी


    जबलपुर । मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और Iran–Israel conflict का असर अब आम लोगों की रसोई तक पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय हालात और कच्चे तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव के बीच देश में रसोई गैस के दामों में बढ़ोतरी कर दी गई है। तेल कंपनियों ने घरेलू Liquefied Petroleum Gas (LPG) cylinder की कीमतों में 60 रुपये का इजाफा किया है, जबकि कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम 115 रुपये तक बढ़ा दिए गए हैं। नई कीमतें तुरंत प्रभाव से लागू कर दी गई हैं और तेल कंपनियों की आधिकारिक वेबसाइट पर भी अपडेट कर दी गई हैं।

    इस बढ़ोतरी के बाद आम उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर पड़ना तय माना जा रहा है। खासकर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए यह बढ़ोतरी बड़ी चिंता बन सकती है, क्योंकि रसोई गैस पहले ही घरेलू बजट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने से घरों का मासिक खर्च बढ़ना तय है।

    मध्यप्रदेश की बात करें तो यहां गैस सिलेंडर की कीमतें देश के कई बड़े शहरों से ज्यादा हो गई हैं। प्रदेश के शहरों में घरेलू गैस सिलेंडर के दाम में 60 रुपये की बढ़ोतरी के बाद अब इसकी कीमत करीब 920 रुपये तक पहुंच गई है। वहीं कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में 114 रुपये का इजाफा हुआ है, जिसके बाद इसकी कीमत 2100 रुपये से भी ज्यादा हो गई है।

    दिलचस्प बात यह है कि कई मामलों में मध्यप्रदेश के उपभोक्ताओं को देश के बड़े महानगरों से भी ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है। उदाहरण के तौर पर New Delhi और Mumbai जैसे महानगरों की तुलना में मध्यप्रदेश के कई शहरों में गैस सिलेंडर महंगा मिल रहा है। परिवहन लागत और टैक्स संरचना के कारण अक्सर राज्यों में गैस के दामों में अंतर देखने को मिलता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है। यदि हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे तो आने वाले समय में ईंधन और ऊर्जा से जुड़ी अन्य चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं। इसका असर परिवहन, खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की जरूरतों पर भी देखने को मिल सकता है।

    कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ने का असर होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यवसायों पर भी पड़ने की संभावना है। इससे खाने पीने की चीजों की कीमतों में भी धीरे धीरे बढ़ोतरी हो सकती है। यानी गैस सिलेंडर की कीमतों में हुई यह बढ़ोतरी सिर्फ घर की रसोई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बाजार में भी महंगाई का दबाव बढ़ा सकती है।

    फिलहाल नई दरें लागू हो चुकी हैं और उपभोक्ताओं को अब बढ़ी हुई कीमतों पर ही गैस सिलेंडर खरीदना होगा। ऐसे में मिडिल ईस्ट की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है, क्योंकि वहां के हालात का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है।

  • एक महीने के लिए एकांतवास में जाएंगे बागेश्वर बाबा

    एक महीने के लिए एकांतवास में जाएंगे बागेश्वर बाबा


    छतरपुर। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री एक महीने के लिए सार्वजनिक जीवन से पूरी तरह दूर रहने वाले हैं। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर ने खुद बताया है कि वे गुरु आज्ञा से देवभूमि उत्तराखंड में स्थित बद्रीनाथ की पहाड़ियों में एक महीने का एकांतवास करेंगे, जहां वे तप और साधना में लीन रहेंगे।
    इस दौरान वे मोबाइल फोन, टीवी, इंटरव्यू, कथा और अपने प्रसिद्ध दिव्य दरबार से भी पूरी तरह दूर रहेंगे। यानी पूरे महीने तक वे किसी भी तरह के सार्वजनिक कार्यक्रम या संपर्क में नहीं रहेंगे।

    गुरु आज्ञा से करेंगे साधना

    धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एक कार्यक्रम के दौरान बताया कि उन्हें गुरु की आज्ञा मिली है, इसलिए वे बद्रीनाथ की बर्फीली पहाड़ियों में तपस्या करने जा रहे हैं। उनके मुताबिक जिस मुकाम पर वे आज खड़े हैं, वहां खुद को साधना और आत्मसंयम बनाए रखना बेहद जरूरी है।

    मोबाइल, टीवी और कथा से रहेंगे दूर

    बागेश्वर बाबा ने कहा कि मई महीने में वे पूरी तरह एकांत में रहेंगे। इस दौरान वे मोबाइल फोन, टीवी, इंटरव्यू, कथा कार्यक्रम और लोगों से मुलाकात—सब कुछ त्याग देंगे, ताकि पूरी तरह भक्ति और साधना पर ध्यान दे सकें।

    साधना के बाद लौटेंगे नई ऊर्जा के साथ

    उन्होंने कहा कि यह साधना उनके लिए आत्ममंथन और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त करने का समय होगा। एक महीने बाद जब वे लौटेंगे तो नई ऊर्जा, नए विचार और नई तैयारी के साथ समाज और सनातन के लिए फिर से काम शुरू करेंगे।

    धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि जो कुछ अब तक हासिल किया है, उसे बनाए रखने और सही दिशा में आगे बढ़ाने के लिए साधना जरूरी है, इसलिए वे कुछ समय के लिए दुनिया से दूर रहकर तप करना चाहते हैं।

  • मध्य प्रदेश की जेलें ओवरलोड: 30,764 की क्षमता के मुकाबले 42,119 कैदी, आधे से ज्यादा अंडर ट्रायल

    मध्य प्रदेश की जेलें ओवरलोड: 30,764 की क्षमता के मुकाबले 42,119 कैदी, आधे से ज्यादा अंडर ट्रायल

    भोपाल। मध्य प्रदेश की जेलें हाल ही में कैदियों की बढ़ती संख्या के दबाव में हैं। विधानसभा में पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी सामने आई कि प्रदेश की 133 जेलों में कुल 30,764 कैदियों की क्षमता होने के बावजूद वर्तमान में 42,119 कैदी बंद हैं। इसका मतलब है कि करीब 12 हजार कैदी अतिरिक्त हैं और जेलें अपनी क्षमता से लगभग 35 प्रतिशत अधिक लदी हुई हैं।

    जेलों में भीड़ का आंकड़ा
    बड़ी जेलों में भीड़ सबसे ज्यादा देखने को मिल रही है। रीवा सेंट्रल जेल की क्षमता केवल 886 है, लेकिन यहां 2,282 कैदी बंद हैं, यानी 1,396 कैदी अतिरिक्त हैं। इंदौर सेंट्रल जेल में 1,280 की क्षमता के मुकाबले 2,191 कैदी हैं, जबकि भोपाल सेंट्रल जेल में 2,641 की क्षमता के लिए 3,454 कैदी बंद हैं। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि मध्य प्रदेश की जेलों में भीड़ का स्तर खतरनाक सीमा पर है।

    अंडर ट्रायल कैदियों की संख्या
    प्रदेश की जेलों में बंद लगभग आधे कैदी अंडर ट्रायल हैं, यानी उन्हें अभी तक अदालत से सजा नहीं मिली। कुल 42,119 कैदियों में से 22,261 विचाराधीन हैं, यानी 52.85 प्रतिशत। इन अंडर ट्रायल कैदियों में 21,410 पुरुष और 851 महिला शामिल हैं। जिला जेलों में यह संख्या और भी अधिक है, जहां 10,002 पुरुष और 516 महिला कैदी विचाराधीन हैं। इन आंकड़ों से यह साफ है कि मध्य प्रदेश की जेल प्रणाली पर अत्यधिक दबाव है और ओवरलोडिंग की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है।