Category: Madhya Pradesh

  • नर्मदा उफान पर, घाट-मंदिर जलमग्न; छोटे पुल-रपटे डूबे, जोहिला बांध के पांच गेट खुले

    नर्मदा उफान पर, घाट-मंदिर जलमग्न; छोटे पुल-रपटे डूबे, जोहिला बांध के पांच गेट खुले


    उमरिया।
    मंडला जिले में पिछले 24 घंटे से हो रही तेज बारिश के चलते नर्मदा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। जलस्तर बढ़ने से नर्मदा किनारे स्थित मंदिर और घाट जलमग्न हो गए हैं। मंडला शहर का छोटा रपटा पुल भी पूरी तरह डूब गया है और पानी पुल के ऊपर से बह रहा है।

    नर्मदा में बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव को देखते हुए प्रशासन ने नदी किनारे सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। माहिष्मती घाट, सहस्रधारा सहित प्रमुख घाटों पर पुलिस बल तैनात किया गया है। लोगों को नदी के पास जाने, नहाने और जलमग्न पुल-पुलियों को पार करने से रोका जा रहा है।

    पांच-छह छोटे पुल और रपटे जलमग्न

    लगातार बारिश के कारण जिले के करीब पांच-छह छोटे पुल और रपटे भी जलमग्न होने की सूचना है। प्रशासन ने ऐसे स्थानों पर बैरिकेडिंग कर आवागमन बंद कराया है। चौकीदारों की तैनाती के साथ पुलिस और होमगार्ड की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं।

    जोहिला बांध के पांच गेट खुले

    उमरिया जिले में पिछले कई दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश के कारण जोहिला बांध का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है। पानी की बढ़ती आवक को देखते हुए बांध प्रबंधन ने रविवार को इस मानसून में पहली बार एक साथ पांच गेट खोलकर पानी की निकासी शुरू की। गेट खुलने के बाद तेज बहाव के साथ पानी बाहर निकल रहा है।

    बांध प्रबंधन के अनुसार गेट क्रमांक दो को दो मीटर, तीन को तीन मीटर, चार को तीन मीटर, पांच को दो मीटर और छह को दो मीटर तक खोला गया है। पांचों गेट से कुल 12 मीटर पानी की निकासी की जा रही है। इससे करीब 50 हजार क्यूसेक पानी प्रति सेकंड की दर से बाहर निकल रहा है।

    बांध देखने पहुंच रहे लोग

    जोहिला बांध के पांच गेट एक साथ खोले जाने की सूचना के बाद आसपास के लोग बांध का नजारा देखने पहुंचने लगे हैं। पाली निवासी शिवम गुप्ता ने बताया कि इससे पहले एक और दो गेट खुले थे, लेकिन पांच गेटों से एक साथ पानी निकलते देखना अलग अनुभव है।

    माला गुप्ता ने बताया कि तेज बहाव के साथ बांध से निकलते पानी का दृश्य आकर्षक है। एक साथ पांच गेट खुलना आम तौर पर देखने को नहीं मिलता। हालांकि, बांध पर सुरक्षा कर्मी तैनात हैं और लोगों को पानी के तेज बहाव वाले क्षेत्र से दूर रहने की हिदायत दी जा रही है।

    सुरक्षा को लेकर प्रशासन सतर्क

    बांध के गेट खुलने के बाद लोगों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। लोगों को पानी के नजदीक जाने से रोका जा रहा है। प्रशासन और बांध प्रबंधन ने लोगों से तेज बहाव वाले क्षेत्रों में नहीं जाने और सावधानी बरतने की अपील की है।

    प्रशासन ने नर्मदा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए भी लोगों से नदी और जलमग्न पुल-पुलियों से दूरी बनाए रखने को कहा है। संबंधित विभागों को स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

  • जेल पहुंचने के 48 घंटे बाद बंदी ने तोड़ा दम, शरीर पर मिले चोट के निशान; पुलिस पर गंभीर आरोप

    जेल पहुंचने के 48 घंटे बाद बंदी ने तोड़ा दम, शरीर पर मिले चोट के निशान; पुलिस पर गंभीर आरोप


    भोपाल भोपाल सेंट्रल जेल में बंद 35 वर्षीय बंदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। मृतक की पहचान नीरज धाकड़ पुत्र केसर सिंह धाकड़ निवासी देवरी गांव तहसील गौहरगंज जिला रायसेन के रूप में हुई है। नीरज को सूखी सेवनिया पुलिस ने 7 अगस्त को सीमेंट चोरी के मामले में गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उसे मेडिकल परीक्षण कराया गया और नियमानुसार कार्रवाई करते हुए भोपाल सेंट्रल जेल भेज दिया गया। जेल पहुंचने के महज दो दिन बाद उसकी तबीयत बिगड़ी और उपचार के दौरान रविवार सुबह हमीदिया अस्पताल में उसकी मौत हो गई। घटना के बाद मृतक के परिजन ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजन का दावा है कि गिरफ्तारी के दौरान नीरज के साथ मारपीट की गई थी और उसके शरीर पर चोटों के निशान थे। उनका आरोप है कि पुलिस की कथित मारपीट के बाद उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई और समय पर उचित इलाज नहीं मिलने के कारण उसकी जान चली गई। हालांकि जेल प्रशासन ने इन आरोपों से अलग जानकारी दी है।

    सूखी सेवनिया थाने के प्रभारी अरुण शर्मा के अनुसार नीरज को सीमेंट चोरी के मामले में 7 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारी के बाद आरोपी का नियमानुसार मेडिकल परीक्षण कराया गया था और इसके बाद उसे भोपाल सेंट्रल जेल भेज दिया गया। दूसरी ओर नीरज की पत्नी पूजा ने आरोप लगाया है कि पति के शरीर पर चोट के निशान थे। उनका कहना है कि गिरफ्तारी के बाद से ही नीरज की तबीयत खराब थी और जेल पहुंचने के बाद उसकी हालत और बिगड़ गई। परिजन ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

    वहीं भोपाल सेंट्रल जेल के सुपरिंटेंडेंट मानवेंद्र सिंह परिहार ने बताया कि नीरज को सीने में दर्द और घबराहट की शिकायत हुई थी। उसकी स्थिति को देखते हुए जेल प्रशासन ने उसे तत्काल उपचार के लिए हमीदिया अस्पताल भेजा था। अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज चल रहा था लेकिन रविवार सुबह उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। जेल प्रशासन का कहना है कि बंदी को उसकी तबीयत बिगड़ने के बाद समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई थी।

    बंदी की मौत के बाद मामले में न्यायिक जांच शुरू कर दी गई है। जांच के दौरान नीरज की गिरफ्तारी से लेकर थाने में रखे जाने की अवधि मेडिकल परीक्षण जेल में दाखिले और अस्पताल में उपचार तक की पूरी प्रक्रिया की पड़ताल की जाएगी। इसके साथ ही परिजन की ओर से पुलिस पर लगाए गए मारपीट के आरोपों की भी जांच होगी। पुलिस ने फिलहाल मर्ग कायम किया है। नीरज की मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट और न्यायिक जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। ऐसे में अब जांच रिपोर्ट इस पूरे मामले में अहम साबित होगी और यह साफ हो सकेगा कि बंदी की मौत किन परिस्थितियों में हुई।

  • मशहूर टीवी शो में काम करने का ऐसा चढ़ा जुनून, छिंदवाड़ा से 900 किमी दूर मुंबई फिल्म सिटी पहुंचा नाबालिग

    मशहूर टीवी शो में काम करने का ऐसा चढ़ा जुनून, छिंदवाड़ा से 900 किमी दूर मुंबई फिल्म सिटी पहुंचा नाबालिग

    मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले का निवासी एक 16 वर्षीय नाबालिग लड़का अभिनय क्षेत्र में अपना करियर बनाने और एक प्रसिद्ध टेलीविजन धारावाहिक में काम करने की चाहत में बिना बताए घर से निकलकर मुंबई पहुंच गया। लगभग 900 किलोमीटर की दूरी तय करके पहुंचे इस किशोर को मुंबई की गोरेगांव स्थित फिल्म सिटी परिसर में पुलिस की सतर्कता से सकुशल बरामद कर लिया गया है।

    प्राप्त विवरण के अनुसार, आरे पुलिस स्टेशन की गश्ती टीम को गोरेगांव स्थित फिल्म सिटी के पास एक नाबालिग अकेले घूमता हुआ दिखाई दिया। संदिग्ध स्थिति में घूम रहे लड़के को सुरक्षाकर्मियों और पुलिसकर्मियों ने रोककर पूछताछ की। शुरुआती पूछताछ के बाद उसे आरे पुलिस स्टेशन लाया गया, जहां उसने अपने घर से भागकर मुंबई आने की पूरी जानकारी पुलिस अधिकारियों के सामने साझा की।

    नाबालिग ने बताया कि वह गुरुवार दोपहर को अपने घर से स्कूल जाने का बहाना बनाकर निकला था, लेकिन वह स्कूल न जाकर सीधे छिंदवाड़ा रेलवे स्टेशन पहुंच गया। वहां से उसने ट्रेन पकड़कर पहले नागपुर का सफर किया और फिर नागपुर से कनेक्टिंग ट्रेन लेकर मुंबई के लिए रवाना हो गया। अगले दिन सुबह गोरेगांव रेलवे स्टेशन उतरने के बाद वह पैदल ही फिल्म सिटी परिसर तक पहुंच गया।

    पूछताछ में लड़के ने स्वीकार किया कि वह देश के लोकप्रिय कॉमेडी टेलीविजन धारावाहिक ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ से अत्यधिक प्रभावित था और उसमें अभिनय का अवसर प्राप्त करना चाहता था। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा से अभिनय के जुनून में आए इस लड़के के संदर्भ में जब मुंबई पुलिस ने स्थानीय पुलिस और परिजनों से संपर्क किया, तो पता चला कि परिजनों ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा रखी थी।

    मुंबई पुलिस ने बालक के परिजनों को उसके सुरक्षित मिलने की जानकारी दे दी है। फिलहाल नाबालिग को आरे पुलिस स्टेशन में सुरक्षा और देखरेख में रखा गया है। सूचना मिलने के बाद उसके पिता छिंदवाड़ा से मुंबई के लिए रवाना हो चुके हैं, ताकि कानूनी औपचारिकताओं को पूरा कर अपने पुत्र को सकुशल घर वापस ले जा सकें।

  • MP में आज 3 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी, भोपाल-इंदौर में बूंदाबांदी की संभावना

    MP में आज 3 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी, भोपाल-इंदौर में बूंदाबांदी की संभावना


    भोपाल। मध्य प्रदेश के ऊपर से मानसून ट्रफ गुजर रही है, जिसके चलते रविवार को प्रदेश के तीन जिलों दतिया, रीवा और सीधी में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक, इन जिलों में अगले 24 घंटे के दौरान 4 इंच तक बारिश हो सकती है। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर समेत अन्य जिलों में हल्की बारिश या बूंदाबांदी होने की संभावना है।

    मौसम केंद्र के अनुसार, 8 अगस्त से पश्चिमी बंगाल और आसपास के राज्यों में बने चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से लो प्रेशर एरिया बन गया है। इसके आने वाले दिनों में और मजबूत होने की संभावना है। इसके प्रभाव से प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

    शनिवार को नरसिंहपुर में सबसे ज्यादा बारिश
    शनिवार को भी प्रदेश के कई जिलों में तेज बारिश हुई। नरसिंहपुर में 3 इंच, श्योपुर में 2.8 इंच और रीवा में 2.2 इंच बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा शिवपुरी, सीधी, नर्मदापुरम, बालाघाट, छतरपुर, सागर, गुना, रायसेन, मंडला, ग्वालियर, दतिया, टीकमगढ़, उमरिया, छिंदवाड़ा, जबलपुर, सतना और शाजापुर समेत कई जिलों में बारिश हुई।

    शिवपुरी में उफान पर नदी-नाले, कई गांवों में घुसा पानी
    शिवपुरी जिले में शुक्रवार रात हुई तेज बारिश के बाद नदी-नाले उफान पर आ गए। पिछोर क्षेत्र में रात 1 से 3 बजे के बीच हुई भारी बारिश से महुअर नदी का जलस्तर बढ़ गया। इसके चलते खोड़-पिछोर मार्ग बंद हो गया और गुरुकुदवाया समेत कई गांवों में पानी घुस गया। खेतों में पानी भरने से फसलों को भी नुकसान पहुंचा है।

    रविवार को इन जिलों में हल्की बारिश के आसार
    भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, अलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, सतना, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में हल्की बारिश की संभावना है। इनके अलावा दतिया, रीवा और सीधी में ही रविवार को भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।

    MP में अब तक 20% कम बारिश
    मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में अब तक 17.2 इंच बारिश हुई है, जबकि औसत बारिश 21.5 इंच होनी चाहिए थी। इस तरह प्रदेश में अब तक 4.3 इंच यानी 20% कम बारिश दर्ज की गई है। क्षेत्रवार आंकड़ों के मुताबिक, पूर्वी मध्य प्रदेश में औसत से 23% और पश्चिमी हिस्से में 18% कम बारिश हुई है।

    50 जिलों में बारिश का आंकड़ा औसत से नीचे
    पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में कई जिलों में 5% से 49% तक कम बारिश दर्ज की गई है। इनमें अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़ और उमरिया शामिल हैं।

    पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, भोपाल, दतिया, धार, गुना, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन, बड़वानी और विदिशा में भी औसत से कम बारिश हुई है।

    सिर्फ 5 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
    मौसम विभाग के मुताबिक, पश्चिमी मध्य प्रदेश के ग्वालियर, भिंड, बुरहानपुर, देवास और खरगोन में ही अब तक औसत से अधिक बारिश दर्ज की गई है।

  • टैक्सी किराया बढ़ाने की मांग पर आर-पार की तैयारी, भोपाल में आज जुटेंगे चालक; कंपनियों के खिलाफ मोर्चा

    टैक्सी किराया बढ़ाने की मांग पर आर-पार की तैयारी, भोपाल में आज जुटेंगे चालक; कंपनियों के खिलाफ मोर्चा


    भोपाल । भोपाल में ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं को लेकर विवाद अब बड़े आंदोलन की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। एग्रीगेटर कंपनियों की किराया व्यवस्था से नाराज टैक्सी चालकों ने शनिवार को दोपहर 12 बजे लिंक रोड नंबर-1 स्थित चेनार पार्क में महाबैठक बुलाई है। भोपाल टैक्सी चालक संघ भारतीय मजदूर संघ के नेतृत्व में होने वाली इस बैठक में शहरभर के ड्राइवर शामिल होंगे और उनकी समस्याओं व सुझावों के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। संघ का कहना है कि यदि सरकार और एग्रीगेटर कंपनियों ने किराया व्यवस्था में सुधार नहीं किया तो आंदोलन को पूरे मध्य प्रदेश में फैलाया जा सकता है और अनिश्चितकालीन हड़ताल का फैसला भी लिया जा सकता है।

    टैक्सी चालक संघ के मुताबिक 23 से 25 जून तक एयरपोर्ट राइड के बहिष्कार के दौरान कंपनियों पर दबाव बना था और कुछ राइड के किराए में करीब 5 से 10 प्रतिशत तक सुधार किया गया था। हालांकि आंदोलन खत्म होने के बाद दोबारा पुराने किराए लागू कर दिए गए। ड्राइवरों का आरोप है कि अब कई छोटी राइड के लिए उन्हें महज 30 से 40 रुपये तक मिल रहे हैं जबकि पहले इसी तरह की बुकिंग पर 50 से 60 रुपये तक का भुगतान होता था। चालकों का कहना है कि ईंधन की बढ़ती लागत वाहन की सर्विसिंग बीमा परमिट और दूसरे खर्चों के बीच इतनी कम कमाई में परिवार चलाना मुश्किल होता जा रहा है।

    संघ के महामंत्री राजेश कुमार नागले के अनुसार शनिवार की बैठक में सभी ड्राइवरों को अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा। संगठन का कहना है कि यह बैठक केवल किराया बढ़ाने तक सीमित नहीं है बल्कि पूरी किराया प्रणाली में बदलाव की मांग को लेकर है। संघ के मुताबिक सरकार को ऐसी स्पष्ट नीति बनानी चाहिए जिसमें प्रत्येक राइड के लिए 50 से 60 रुपये का बेस फेयर तय हो। इसके साथ यात्रा के समय के आधार पर 1 से 1.50 रुपये प्रति मिनट टाइम चार्ज और वाहन की श्रेणी के अनुसार 22 से 30 रुपये प्रति किलोमीटर की दर लागू की जानी चाहिए।

    ड्राइवरों का कहना है कि केवल प्रतिशत के आधार पर किराया बढ़ाने से उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। उनके मुताबिक वर्ष 2014 में एग्रीगेटर कंपनियों की किराया व्यवस्था में बेस फेयर टाइम चार्ज और दूरी के हिसाब से भुगतान शामिल था लेकिन अब कई मामलों में केवल तय दूरी के आधार पर किराया दिया जाता है। इससे ट्रैफिक में फंसने या यात्री का इंतजार करने के दौरान ड्राइवर को अतिरिक्त समय का भुगतान नहीं मिलता।

    संघ के प्रस्तावित किराया मॉडल के अनुसार अरेरा हिल्स से राजा भोज एयरपोर्ट तक मौजूदा 246 से 282 रुपये का किराया बढ़कर करीब 416 से 552 रुपये तक हो सकता है। इसी तरह न्यू मार्केट से रेलवे स्टेशन का किराया 95 से 108 रुपये की जगह करीब 205 से 270 रुपये तक पहुंच सकता है। लालघाटी से एमपी नगर का किराया 152 से 167 रुपये से बढ़कर 302 से 401 रुपये और रातीबड़ थाना से भोपाल रेलवे स्टेशन का किराया 274 से 314 रुपये से बढ़कर 474 से 638 रुपये तक हो सकता है।

    टैक्सी चालकों की मांगों में निर्धारित किराया नीति लागू करने के अलावा एग्रीगेटर कंपनियों की मनमानी पर रोक निजी नंबर वाले वाहनों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर कार्रवाई अवैध बाइक टैक्सी संचालन पर रोक और ड्राइवरों के लिए सामाजिक सुरक्षा की व्यवस्था शामिल है। इससे पहले भी ड्राइवरों ने फटे कपड़े पहनकर और हाथों में कटोरा लेकर प्रदर्शन कर अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर नाराजगी जाहिर की थी।

    अब शनिवार की महाबैठक को आंदोलन की दिशा तय करने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। संघ का कहना है कि अगर सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाया तो भोपाल से शुरू हुआ यह आंदोलन प्रदेशव्यापी रूप ले सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में टैक्सी सेवाओं पर इसका सीधा असर पड़ने की संभावना है।

  • ब्यूटी पार्लर से किराना और कोचिंग तक पर निगम की नजर, भोपाल में 1 लाख प्रॉपर्टी की होगी जांच; कार्रवाई की तैयारी तेज

    ब्यूटी पार्लर से किराना और कोचिंग तक पर निगम की नजर, भोपाल में 1 लाख प्रॉपर्टी की होगी जांच; कार्रवाई की तैयारी तेज


    भोपाल भोपाल में अपने घर से कारोबार करने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। यदि किसी रिहाइशी मकान में ब्यूटी पार्लर सैलून किराना दुकान कोचिंग सेंटर बुटीक क्लिनिक या किसी अन्य तरह की व्यावसायिक गतिविधि संचालित हो रही है तो अब वह नगर निगम की जांच के दायरे में आ सकती है। भोपाल नगर निगम ने ऐसे भवनों की पहचान के लिए पूरे शहर में व्यापक सर्वे की तैयारी शुरू कर दी है। शुरुआती अनुमान के मुताबिक राजधानी में करीब एक लाख ऐसी प्रॉपर्टी हो सकती हैं जहां आवासीय भवनों का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। सर्वे के दौरान यदि भवन उपयोग और संबंधित नियमों का उल्लंघन पाया गया तो संपत्ति मालिकों को नोटिस दिया जाएगा और नियमों का पालन नहीं करने की स्थिति में सीलिंग जैसी कार्रवाई भी हो सकती है।

    नगर निगम ने शहर को 21 जोन में बांटकर विशेष सर्वे टीमों का गठन किया है। ये टीमें छोटे मोहल्लों से लेकर बड़ी कॉलोनियों और प्रमुख इलाकों तक रिहाइशी भवनों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों की जानकारी जुटाएंगी। जांच के दौरान संपत्ति कर रिकॉर्ड भवन के वास्तविक उपयोग सड़क की चौड़ाई और उपलब्ध दस्तावेजों का मिलान किया जाएगा। इसके अलावा वाटर बॉडी और ग्रीन बेल्ट जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी भवनों के इस्तेमाल की स्थिति देखी जाएगी। निगम का लक्ष्य करीब 10 से 15 दिनों में सर्वे पूरा करने का है और जहां नियमों का उल्लंघन सामने आएगा वहां मौके पर ही नोटिस देने की तैयारी है।

    नगर निगम के रिकॉर्ड में करीब 65 हजार व्यावसायिक संपत्तियां दर्ज हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में ऐसे मकान बताए जा रहे हैं जहां कारोबार तो चल रहा है लेकिन व्यावसायिक उपयोग के लिए जरूरी अनुमति या निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है। यही वजह है कि निगम अब रिकॉर्ड और जमीनी स्थिति के बीच अंतर को भी जांचने जा रहा है।

    इस पूरी कार्रवाई के पीछे सुप्रीम कोर्ट के निर्देश भी अहम हैं। 5 अगस्त की सुनवाई में अदालत ने अवैध निर्माण और रिहाइशी भवनों के व्यावसायिक उपयोग से जुड़े मामलों में कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए। इसके बाद नगर निगम ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। निगम को 15 सितंबर तक कार्रवाई से संबंधित रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करनी है। ऐसे में सर्वे को समयसीमा के भीतर पूरा करने की तैयारी की जा रही है।

    हालांकि व्यापारिक संगठनों का कहना है कि अचानक बड़े पैमाने पर सीलिंग की कार्रवाई से छोटे कारोबारियों के सामने रोजगार का संकट पैदा हो सकता है। व्यापारियों का सुझाव है कि ब्यूटी पार्लर सैलून कोचिंग किराना जैसी छोटी गतिविधियों को राहत दी जाए और प्रमुख सड़कों पर मिक्स लैंड यूज की व्यवस्था लागू की जाए। इसके तहत तय शर्तों के साथ एक ही क्षेत्र में आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति दी जा सकती है। पार्किंग ट्रैफिक प्रबंधन और नागरिक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए चौड़ी सड़कों पर नियंत्रित व्यावसायिक उपयोग की व्यवस्था को भी समाधान के तौर पर देखा जा रहा है।

    भोपाल में लंबे समय से मास्टर प्लान लागू नहीं होने को भी मौजूदा स्थिति की बड़ी वजह बताया जा रहा है। भोपाल की विकास योजना का अंतिम प्रकाशन वर्ष 2005 में हुआ था और इसके बाद नया मास्टर प्लान लागू नहीं हो सका। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि शहर के विस्तार और बढ़ती कारोबारी जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त व्यावसायिक भूखंड उपलब्ध नहीं होने के कारण कई लोगों ने आवासीय क्षेत्रों में ही कारोबार शुरू कर दिया।

    व्यापारियों का दावा है कि इन गतिविधियों से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है और कई कारोबारी व्यावसायिक दर से संपत्ति कर तथा अन्य शुल्क भी जमा करते हैं। अनुमान है कि व्यापक कार्रवाई होने पर करीब पांच लाख लोगों का रोजगार प्रभावित हो सकता है। ऐसे में अब नगर निगम के सर्वे पर शहर के हजारों कारोबारियों और मकान मालिकों की नजर है। आने वाले दिनों में सर्वे के बाद सामने आने वाली रिपोर्ट से साफ होगा कि कितनी संपत्तियां नियमों के दायरे में आती हैं और कितनों पर कार्रवाई की स्थिति बनती है।

  • MP Weather Update: भोपाल में बारिश का दौर जारी, गरज-चमक के साथ बरसेंगे बादल, मौसम विभाग ने किया अलर्ट

    MP Weather Update: भोपाल में बारिश का दौर जारी, गरज-चमक के साथ बरसेंगे बादल, मौसम विभाग ने किया अलर्ट


    भोपाल ।  भोपाल में शनिवार 8 अगस्त को मौसम का मिजाज एक बार फिर बदलता नजर आ सकता है। मानसून की सक्रियता के बीच राजधानी में बादल छाए रहने और बारिश होने की संभावना बनी हुई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के भोपाल केंद्र ने पश्चिमी मध्य प्रदेश के लिए 8 अगस्त को गरज-चमक और आकाशीय बिजली की संभावना जताई है। ऐसे में भोपाल और आसपास के इलाकों में लोगों को मौसम में अचानक बदलाव देखने को मिल सकता है। शुक्रवार को भी राजधानी में मौसम नम रहा और वातावरण में नमी बनी रही। मौसम विभाग के अनुसार भोपाल क्षेत्र में बादलों की आवाजाही के बीच तापमान में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी की संभावना नहीं है।

    8 अगस्त को भोपाल में सुबह से ही आसमान में बादल छाए रह सकते हैं। दिन के दौरान कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश देखने को मिल सकती है जबकि कहीं कहीं गरज चमक के साथ तेज बौछारें भी पड़ सकती हैं। मानसून के दौरान स्थानीय स्तर पर बनने वाले बादल कई बार कुछ ही समय में मौसम का रुख बदल देते हैं। यही वजह है कि शहर के एक हिस्से में बारिश हो सकती है जबकि दूसरे हिस्से में कुछ समय तक केवल बादल छाए रह सकते हैं। राजधानी के निचले इलाकों में बारिश के बाद जलभराव की स्थिति बनने की संभावना को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत होगी।

    मौसम विभाग की चेतावनी केवल 8 अगस्त तक सीमित नहीं है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 9 अगस्त को भी गरज चमक और आकाशीय बिजली की संभावना जताई गई है जबकि 10 और 11 अगस्त को भारी बारिश के साथ गरज चमक को लेकर चेतावनी जारी की गई है। इसका असर भोपाल सहित आसपास के क्षेत्रों के मौसम पर भी पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में बारिश का दौर और सक्रिय होने की संभावना बनी हुई है।

    बारिश के कारण भोपाल के तापमान में भी राहत बनी रह सकती है। राजधानी में इन दिनों उमस और बादलों के बीच मौसम का असर लगातार बदल रहा है। शुक्रवार को भोपाल के अरेरा हिल्स क्षेत्र में तापमान 26 डिग्री के आसपास दर्ज किया गया जबकि हवा की रफ्तार और नमी भी बनी रही। मौसम में नमी अधिक होने के कारण बारिश के बाद वातावरण ठंडा और सुहाना महसूस हो सकता है। हालांकि बारिश रुकने के बाद उमस बढ़ने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

    शनिवार को घर से बाहर निकलने वाले लोगों को मौसम पर नजर रखने की सलाह दी जाती है। खासकर गरज चमक के दौरान खुले मैदानों पेड़ के नीचे और बिजली के खंभों के आसपास खड़े होने से बचना चाहिए। दोपहिया वाहन चालकों को भी बारिश के दौरान सड़क पर अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी क्योंकि तेज बारिश के बाद सड़कों पर फिसलन बढ़ सकती है। वहीं बारिश के कारण यातायात की रफ्तार भी प्रभावित हो सकती है।

    कुल मिलाकर 8 अगस्त को भोपाल में मौसम सुहाना रहने के साथ बारिश के आसार हैं। बादलों की आवाजाही और गरज चमक राजधानी के मौसम को प्रभावित कर सकती है। मौसम विभाग की अगले कुछ दिनों की चेतावनी को देखते हुए यह साफ है कि भोपाल में मानसून अभी पूरी तरह सक्रिय बना हुआ है और आने वाले दिनों में बारिश का दौर जारी रह सकता है।

  • BRICS संस्कृति मंत्रियों की बैठक से सजेगा भोपाल, CM के साथ लंच और संस्कृति पर बड़ा मंथन

    BRICS संस्कृति मंत्रियों की बैठक से सजेगा भोपाल, CM के साथ लंच और संस्कृति पर बड़ा मंथन

     
    भोपाल । भोपाल शनिवार को ब्रिक्स देशों के संस्कृति मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक का गवाह बनेगा। ब्रिक्स सांस्कृतिक सम्मेलन 2026 के तहत आयोजित इस बैठक में सदस्य देशों के संस्कृति मंत्री और प्रतिनिधिमंडल सांस्कृतिक विरासत से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार विमर्श करेंगे। बैठक का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग को और मजबूत करना तथा साझा विरासत और रचनात्मक क्षेत्रों में नए अवसर तलाशना है।

    बैठक में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण संग्रहालयों के विकास रचनात्मक अर्थव्यवस्था सांस्कृतिक आदान प्रदान क्षमता निर्माण और लोगों के बीच आपसी जुड़ाव जैसे विषयों पर चर्चा होगी। इसके साथ ही सदस्य देशों के बीच संस्कृति के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए भविष्य की संभावनाओं पर भी विचार किया जाएगा। बैठक का समापन ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की घोषणा को अपनाने के साथ होगा। इस घोषणा के जरिए ब्रिक्स देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग के लिए साझा दृष्टिकोण और आगे की दिशा तय की जाएगी।

    ब्रिक्स सांस्कृतिक सम्मेलन की शुरुआत 5 अगस्त से हुई थी। सम्मेलन के दौरान अलग अलग देशों के प्रतिनिधियों ने सांस्कृतिक गतिविधियों में हिस्सा लिया और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को करीब से समझने का अवसर प्राप्त किया। शुक्रवार को ब्रिक्स देशों के संस्कृति मंत्री और प्रतिनिधिमंडल भोपाल पहुंचे। एयरपोर्ट पर उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया।

    बैठक के बाद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव विदेशी मेहमानों और प्रतिनिधिमंडलों के लिए दोपहर के भोजन का आयोजन करेंगे। इस दौरान मेहमानों को मध्य प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद भी चखाया जाएगा। लंच और डिनर के मेन्यू में प्रदेश की स्थानीय खानपान परंपरा को विशेष स्थान दिया गया है। दाल बाफले निमोना रिकमच गुइया की सब्जी चंबल का थोपा चंदिया बड़ा और मिलेट्स से तैयार कोदो तथा कुटकी जैसे व्यंजन मेहमानों को परोसे जाएंगे। अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की पसंद को ध्यान में रखते हुए वेस्टर्न और ओरिएंटल व्यंजनों की व्यवस्था भी की गई है।

    बैठक और लंच के बाद विदेशी मंत्री और प्रतिनिधिमंडल मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक और बौद्ध विरासत को करीब से देखने के लिए सांची की यात्रा करेंगे। सांची को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में विशेष पहचान मिली हुई है। प्रतिनिधि बुद्ध जंबूदीप परिसर का भ्रमण करने के साथ ही विश्व प्रसिद्ध सांची स्तूप का विशेष गाइडेड टूर करेंगे।

    सांची यात्रा के दौरान प्रतिनिधिमंडल चेतियागिरी मंदिर में दर्शन करेगा। इसके साथ ही योग और ध्यान सत्र में भी हिस्सा लिया जाएगा। शाम के समय बौद्ध इतिहास और कला पर आधारित 3D प्रोजेक्शन मैपिंग तथा लाइट एंड साउंड शो के जरिए मेहमानों को भारतीय बौद्ध विरासत की कहानी से परिचित कराया जाएगा।

    ब्रिक्स सांस्कृतिक सम्मेलन का एक और महत्वपूर्ण आकर्षण मध्य प्रदेश की प्रागैतिहासिक विरासत से प्रतिनिधियों को परिचित कराना है। विदेशी प्रतिनिधियों के लिए भीमबेटका शैलाश्रय का वैकल्पिक भ्रमण भी रखा गया है। यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल भीमबेटका अपनी प्राचीन शैल चित्रकला और प्रागैतिहासिक सांस्कृतिक विरासत के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।

    इस सम्मेलन के जरिए भोपाल और मध्य प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक मंच पर अपनी विरासत और परंपराओं को प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर मिला है। ब्रिक्स देशों के बीच संस्कृति के माध्यम से बढ़ता संवाद आने वाले समय में पर्यटन संग्रहालय कला रचनात्मक उद्योग और सांस्कृतिक आदान प्रदान के नए रास्ते खोल सकता है। सम्मेलन के बाद विदेशी मेहमानों की रवानगी होगी और भोपाल में आयोजित यह अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक आयोजन मध्य प्रदेश की वैश्विक सांस्कृतिक पहचान को एक नई मजबूती देगा।

  • 1813 में भोपाल पर टूटा था सबसे बड़ा संकट, 9 महीने की घेराबंदी के बाद भी नहीं झुका शहर

    1813 में भोपाल पर टूटा था सबसे बड़ा संकट, 9 महीने की घेराबंदी के बाद भी नहीं झुका शहर


    भोपाल भोपाल का इतिहास सिर्फ महलों किलों और शासकों की कहानियों से नहीं बना है बल्कि इस शहर की पहचान उन लोगों के साहस और एकजुटता से भी जुड़ी है जिन्होंने कठिन से कठिन परिस्थितियों में अपने शहर की रक्षा के लिए डटकर मुकाबला किया। इतिहास के पन्नों में भोपाल के सामने ऐसा दौर भी आया जब दुश्मन सेनाओं ने कई महीनों तक शहर को चारों तरफ से घेर रखा था। संसाधन सीमित थे हालात बेहद मुश्किल थे और रियासत का अस्तित्व खतरे में नजर आ रहा था। इसके बावजूद भोपाल के लोगों ने हिम्मत नहीं छोड़ी और करीब नौ महीने तक चले संघर्ष के बाद हमलावर सेना को वापस लौटना पड़ा।

    यह घटना नवंबर 1813 की बताई जाती है जब ग्वालियर के शासक दौलतराव सिंधिया के सेनापति जीन बैप्टिस्ट और जसवंत राव भाव ने नागपुर के भोंसले की सेना के साथ मिलकर भोपाल की घेराबंदी शुरू की। हमलावर सेनाओं ने इस्लामनगर और इस्लामगढ़ में अपने ठिकाने बनाए और भोपाल पर दबाव बढ़ाने लगे। उस समय भोपाल की रक्षा की जिम्मेदारी वजीर नवाब मोहम्मद खान ने संभाली। उन्होंने परिस्थितियों की गंभीरता को देखते हुए पीछे हटने के बजाय मुकाबला करने का फैसला किया और शहर के लोगों का मनोबल बनाए रखा।

    धीरे धीरे यह संघर्ष केवल सैनिकों तक सीमित नहीं रहा बल्कि पूरे भोपाल के अस्तित्व की लड़ाई बन गया। शहर के लोग अपनी क्षमता के अनुसार रक्षा व्यवस्था में जुट गए। कोई किले की दीवारों को मजबूत करने में लगा था तो कोई सैनिकों तक रसद पहुंचा रहा था। कई लोग मोर्चों पर सैनिकों का साथ दे रहे थे। दुश्मन लगातार शहर की सुरक्षा व्यवस्था को तोड़ने की कोशिश कर रहा था लेकिन भोपाल के भीतर प्रतिरोध कमजोर नहीं पड़ा।

    इस संघर्ष का सबसे उल्लेखनीय पहलू महिलाओं की भागीदारी रही। जब हमलावर सेना ने शहर की दीवारों को नुकसान पहुंचाकर भीतर घुसने की कोशिश की तो वजीर मोहम्मद खान के आह्वान पर कुलीन परिवारों की पर्दानशीन महिलाएं भी किले की बुर्जों तक पहुंचीं। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार उन्होंने बारूद से भरे घड़ों में आग लगाकर दुश्मन की ओर फेंककर प्रतिरोध में योगदान दिया। यह घटना भोपाल के सामूहिक साहस और संकट के समय लोगों की एकजुटता का प्रतीक बन गई।

    करीब नौ महीने तक घेराबंदी जारी रही। हमलावर सेना संख्या और संसाधनों के लिहाज से मजबूत थी लेकिन लंबे संघर्ष के बावजूद भोपाल का हौसला नहीं तोड़ सकी। आखिरकार जुलाई 1814 में हमलावर सेना को घेराबंदी हटाकर वापस लौटना पड़ा। इस तरह भोपाल ने अपने अस्तित्व की रक्षा केवल किले की मजबूती से नहीं बल्कि शहर के लोगों के साहस धैर्य और एकता से की।

    इस ऐतिहासिक संघर्ष में फतेहगढ़ किले की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। मजबूत दीवारों और विशाल बुर्जों से घिरा यह किला उस समय भोपाल की प्रमुख सुरक्षा व्यवस्था का केंद्र था। सिंधिया सेना के हमलों के दौरान किले ने भारी तोपखाने का सामना किया और लंबे समय तक मजबूती से खड़ा रहा। किले के परिसर में दोस्त मोहम्मद खान द्वारा निर्मित ढाई सीढ़ी की मस्जिद भी मौजूद थी जिसे भोपाल की ऐतिहासिक धरोहरों में विशेष स्थान प्राप्त है।

    समय के साथ भोपाल का स्वरूप बदलता गया और फतेहगढ़ किले का मूल ढांचा भी आधुनिक निर्माण के बीच काफी हद तक गायब हो गया। आज इसके क्षेत्र में हमीदिया अस्पताल और गांधी मेडिकल कॉलेज का परिसर मौजूद है। आधुनिक बहुमंजिला इमारतों के कारण किले की आंतरिक संरचना पहले जैसी दिखाई नहीं देती लेकिन वीआईपी रोड की ओर इसकी बाहरी प्राचीरों के कुछ हिस्से आज भी उस दौर की याद दिलाते हैं।

    भोपाल की यह कहानी बताती है कि किसी शहर की असली ताकत केवल उसकी ऊंची दीवारों और मजबूत किलों में नहीं होती। संकट के समय उसके लोगों का साहस एकजुटता और अपने शहर के लिए खड़े रहने का जज्बा ही उसे मजबूत बनाता है। नौ महीने की घेराबंदी के सामने भोपाल का न झुकना इसी जनशक्ति की ऐसी ऐतिहासिक मिसाल है जो आज भी शहर की पहचान का अहम हिस्सा है।

  • MP में आज 3 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी, भोपाल-इंदौर समेत 52 जिलों में बूंदाबांदी के आसार

    MP में आज 3 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी, भोपाल-इंदौर समेत 52 जिलों में बूंदाबांदी के आसार


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की बेरुखी के बीच शनिवार को पन्ना, सतना और रीवा में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक, इन तीनों जिलों में अगले 24 घंटे के दौरान करीब 4 इंच तक बारिश हो सकती है। वहीं, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर समेत प्रदेश के 52 जिलों में हल्की बारिश या बूंदाबांदी होने का अनुमान है।

    IMD के अनुसार, प्रदेश में अब तक औसतन 16.8 इंच (426.6 मिमी) बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि तक 21 इंच (533.6 मिमी) पानी गिरना चाहिए था। इस तरह प्रदेश में 4.2 इंच यानी 20% बारिश कम हुई है। सीजन में अब तक हुई बारिश सामान्य कोटे की आधी भी नहीं है। प्रदेश में सामान्य मानसूनी बारिश का आंकड़ा 37.3 इंच है।

    दतिया में 24 घंटे में 3.5 इंच बारिश
    शुक्रवार को दतिया में बारिश ने जोरदार दस्तक दी। यहां सुबह महज 4 घंटे में करीब 1.57 इंच (40 मिमी) बारिश रिकॉर्ड हुई, जबकि 24 घंटे में कुल 3.5 इंच पानी बरसा। तेज बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव हो गया, जिसके बाद स्कूलों में छुट्टी घोषित करनी पड़ी।

    भांडेर और सेवढ़ा ब्लॉक में कक्षा 8वीं से ऊपर के स्कूलों को लेकर फैसला स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर संस्था प्रमुखों पर छोड़ दिया गया है। रायसेन में भी शुक्रवार सुबह करीब 15 मिनट तेज बारिश हुई। इसके बाद रुक-रुककर बारिश का दौर जारी रहा, जिससे कई सड़कों पर पानी भर गया।

    सीधी में सोन नदी के पुल पर पानी, 40 गांवों का संपर्क प्रभावित
    सीधी जिले के भंवरसेन घाट पर शुक्रवार सुबह हुई तेज बारिश के बाद सोन नदी के पुल पर पानी भर गया। सुरक्षा के मद्देनजर पुल को बंद कर दिया गया, जिससे करीब 40 गांवों का मुख्यालय से संपर्क कट गया।

    भंवरसेन पहाड़ी से मिट्टी और पत्थर भी खिसककर सड़क पर आ रहे हैं। इससे मार्ग पर हादसे का खतरा बना हुआ है। इसके अलावा खरगोन, सतना, उज्जैन, ग्वालियर, रीवा और रायसेन समेत कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई।

    पूर्वी MP में 23% कम बारिश
    मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश के पूर्वी हिस्से के जबलपुर, शहडोल, रीवा और सागर संभाग में अब तक 23% कम बारिश हुई है। इन संभागों का कोई भी जिला औसत से आगे नहीं है।

    अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़ और उमरिया में सामान्य से 5% से 48% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    पश्चिमी हिस्से में भी बारिश का आंकड़ा माइनस में
    भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल संभाग वाले पश्चिमी हिस्से में भी औसत से 17% कम बारिश हुई है। आगर-मालवा, अलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, भोपाल, दतिया, धार, गुना, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन, बड़वानी और विदिशा में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है।

    इन 6 जिलों में औसत से ज्यादा बारिश
    मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी हिस्से के सिर्फ ग्वालियर, भिंड, बुरहानपुर, देवास, खंडवा और खरगोन में अब तक औसत से ज्यादा बारिश हुई है। बाकी अधिकांश जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे बना हुआ है।