Category: Madhya Pradesh

  • टीआई और ड्राइवर ने पीटा, सिर फोड़ा और वर्दी फाड़ी, हवलदार का आरोप, शिकायत के बाद भी ASP ने किया सस्पेंड, जांच शुरू

    टीआई और ड्राइवर ने पीटा, सिर फोड़ा और वर्दी फाड़ी, हवलदार का आरोप, शिकायत के बाद भी ASP ने किया सस्पेंड, जांच शुरू


    जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर में नो-एंट्री पॉइंट पर ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों के बीच विवाद का मामला सामने आया है। शहपुरा थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक लखन निषाद ने थाना प्रभारी प्रवीण कुमार धुर्वे उनके ड्राइवर और अन्य पुलिसकर्मियों पर मारपीट करने का आरोप लगाया है। हवलदार का दावा है कि विवाद के दौरान उनका सिर और नाक घायल हो गए एक दांत टूट गया चश्मा क्षतिग्रस्त हो गया और वर्दी भी फाड़ दी गई। दूसरी ओर पुलिस अधिकारियों ने प्रधान आरक्षक को अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित कर दिया है। मामले की जांच एसडीओपी पाटन को सौंपी गई है।

    जानकारी के अनुसार रविवार देर रात शहपुरा के बाहर नो-एंट्री पॉइंट पर बैरिकेड लगाकर भारी वाहनों की चेकिंग की जा रही थी। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश थे कि रात एक बजे से पहले भारी वाहनों को प्रवेश नहीं दिया जाए। रात करीब साढ़े बारह बजे तक सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई थी। इसी दौरान भोपाल की ओर जा रहे एक ट्रक चालक ने जल्द आगे जाने की अनुमति देने का आग्रह किया। प्रधान आरक्षक लखन निषाद के अनुसार उन्होंने चालक को थाना प्रभारी प्रवीण कुमार धुर्वे का मोबाइल नंबर दिया और कहा कि यदि अधिकारी अनुमति देते हैं तो वाहन को आगे जाने दिया जा सकता है।

    बताया जा रहा है कि ट्रक चालक ने जब थाना प्रभारी को फोन किया और बताया कि नंबर हवलदार ने दिया है तो इस बात पर टीआई नाराज हो गए। इसके बाद फोन पर ही थाना प्रभारी और प्रधान आरक्षक के बीच तीखी बहस हो गई। लखन निषाद का आरोप है कि कुछ देर बाद टीआई अपने ड्राइवर राहुल गुप्ता और आरक्षक विकास कुमार के साथ मौके पर पहुंचे। वहां उनके साथ गाली गलौज की गई और विरोध करने पर मारपीट शुरू कर दी गई। प्रधान आरक्षक का दावा है कि इस दौरान उनके हाथ पकड़े गए और उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई।

    लखन निषाद के मुताबिक मारपीट में उनका एक दांत टूट गया चश्मा क्षतिग्रस्त हो गया और सिर तथा नाक पर चोटें आईं। उन्होंने वर्दी फाड़ने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि घटना के बाद जब वे अपनी गाड़ी लेने थाने पहुंचे तो उन्हें अंदर जाने नहीं दिया गया। गंभीर चोटों और हाथ में फ्रैक्चर की आशंका के चलते उन्हें जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किए जाने की जानकारी सामने आई है। सोमवार को वे अपनी शिकायत लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय भी पहुंचे।

    हालांकि थाना प्रभारी प्रवीण कुमार धुर्वे ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि ग्वालियर में हुए मंदिर हादसे के बाद नो-एंट्री व्यवस्था को सख्ती से लागू करने के निर्देश थे। उनके अनुसार हवलदार वाहनों को जल्दी छोड़ने की बात कह रहे थे और उन्हें केवल समझाइश दी गई थी। टीआई ने किसी तरह के विवाद या मारपीट से इनकार किया है। इस तरह दोनों पक्षों के बयान अलग-अलग हैं और घटना की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अंजना तिवारी के अनुसार अमन ढाबा के पास वाहनों को रोकने के दौरान प्रधान आरक्षक लखन निषाद ने थाना प्रभारी के साथ अनुशासनहीनता की थी। इसी आधार पर उन्हें निलंबित किया गया है। उन्होंने बताया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच एसडीओपी पाटन को सौंपी गई है। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि नो-एंट्री पॉइंट पर विवाद किस वजह से बढ़ा और मारपीट के आरोपों में कितनी सच्चाई है। पुलिसकर्मी द्वारा लगाए गए आरोपों और अधिकारियों के पक्ष को देखते हुए जांच रिपोर्ट इस मामले में अहम होगी।

  • जबलपुर में दशहरे पर दिखा परंपरा और अनुशासन का संगम, पुलिस लाइन में शस्त्र पूजन, अधिकारियों और जवानों ने की सुख-समृद्धि की प्रार्थना

    जबलपुर में दशहरे पर दिखा परंपरा और अनुशासन का संगम, पुलिस लाइन में शस्त्र पूजन, अधिकारियों और जवानों ने की सुख-समृद्धि की प्रार्थना


    जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर में विजयादशमी का पर्व पारंपरिक उत्साह और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। इस अवसर पर पुलिस लाइन में शस्त्र पूजन का आयोजन किया गया जिसमें पुलिस विभाग के अधिकारियों और जवानों ने विधि-विधान से अपने हथियारों की पूजा की। कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। आयोजन के दौरान परंपरा के निर्वहन के साथ पुलिस बल के अनुशासन सुरक्षा और कर्तव्य के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी दिया गया।

    पुलिस लाइन में आयोजित शस्त्र पूजन कार्यक्रम में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौजूद रहे। विजयादशमी पर शस्त्र पूजन की परंपरा का विशेष महत्व माना जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और इसी अवसर पर पुलिस तथा सुरक्षा बल अपने हथियारों का पूजन कर अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पण व्यक्त करते हैं। कार्यक्रम में धार्मिक मान्यताओं और विभागीय अनुशासन का संगम देखने को मिला।

    पूजन के दौरान हथियारों की साफ-सफाई रखरखाव और सुरक्षित उपयोग के महत्व पर भी जोर दिया गया। पुलिस बल के लिए हथियार केवल सुरक्षा का साधन नहीं बल्कि कानून व्यवस्था बनाए रखने और नागरिकों की रक्षा करने की जिम्मेदारी का प्रतीक भी हैं। ऐसे आयोजनों के जरिए जवानों को अपने उपकरणों की देखभाल के प्रति सजग रहने और निर्धारित सुरक्षा नियमों का पालन करने का संदेश दिया जाता है।

    कार्यक्रम में शामिल मंत्री राकेश सिंह और पुलिस अधिकारियों ने धार्मिक परंपरा के अनुसार पूजन में हिस्सा लिया। इस अवसर पर पुलिस विभाग की टीम और प्रदेशवासियों के लिए सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना की गई। आयोजन का उद्देश्य विजयादशमी की सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ पुलिस बल में कर्तव्यनिष्ठा और एकजुटता की भावना को मजबूत करना भी रहा।

    विजयादशमी पर शस्त्र पूजन देश के कई हिस्सों में लंबे समय से चली आ रही परंपरा है। पुलिस और अन्य सुरक्षा बल इस दिन अपने हथियारों तथा उपकरणों का पूजन करते हैं। यह आयोजन उन्हें अपनी जिम्मेदारियों की याद दिलाने और सुरक्षा व्यवस्था के प्रति सतर्कता बनाए रखने का अवसर भी देता है। जबलपुर पुलिस लाइन में हुए कार्यक्रम में भी धार्मिक आस्था और पुलिस अनुशासन दोनों का महत्व सामने आया। अधिकारियों और जवानों ने इस अवसर पर सुरक्षित वातावरण बनाए रखने और अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करने का संकल्प दोहराया।

  • ग्वालियर हादसे में ट्रक कैसे पहुंचा श्रद्धालुओं की कतार तक, ब्रेक फेल या ड्राइवर की गलती या साजिश, जांच में खुलेंगे सुरक्षा व्यवस्था के राज

    ग्वालियर हादसे में ट्रक कैसे पहुंचा श्रद्धालुओं की कतार तक, ब्रेक फेल या ड्राइवर की गलती या साजिश, जांच में खुलेंगे सुरक्षा व्यवस्था के राज


    ग्वालियर । ग्वालियर के शीतला माता मंदिर में हुए भीषण ट्रक हादसे के बाद दुर्घटना की वजह और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। शनिवार रात करीब डेढ़ बजे धान से भरा ट्रक दर्शन के लिए कतार में खड़े श्रद्धालुओं पर चढ़ गया। इस हादसे में 15 लोगों की मौत हुई जबकि 40 से अधिक लोग घायल हुए। मंदिर समिति ने घटना में आतंकी साजिश की आशंका जताते हुए विशेष जांच दल से जांच कराने की मांग की है। दूसरी ओर पुलिस की शुरुआती जांच में ब्रेक फेल होने और रास्ते की जानकारी नहीं होने जैसी संभावनाओं पर ध्यान दिया जा रहा है। फिलहाल साजिश के आरोपों की पुष्टि करने वाला कोई ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं हुआ है।

    हादसे को लेकर पहली थ्योरी ट्रक के ब्रेक फेल होने की है। ड्राइवर ने पुलिस को बताया कि वाहन के ब्रेक ने काम करना बंद कर दिया था। पुलिस भी शुरुआती स्तर पर इस संभावना की जांच कर रही है। भारी वाहनों में एयर ब्रेक का इस्तेमाल होता है और लंबी ढलान पर लगातार ब्रेक लगाने से उनकी कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। ट्रक में तकनीकी खराबी थी या नहीं इसकी पुष्टि क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय की जांच से हो सकेगी। वाहन के ब्रेक टायर गियर और उसमें लदे धान के वास्तविक वजन की जांच भी महत्वपूर्ण होगी।

    दूसरी थ्योरी ड्राइवरों की गलती और रास्ते को लेकर भ्रम की है। पुलिस की शुरुआती जानकारी के मुताबिक दोनों ट्रक चालक रास्ते से अनजान थे और गूगल मैप की मदद से आगे बढ़ रहे थे। एक रिपोर्ट के अनुसार टोल टैक्स बचाने के लिए शॉर्टकट तलाशने की बात भी सामने आई है। अमरोल गांव के कुछ लोगों ने दावा किया कि उन्होंने ड्राइवरों को आगे रास्ता बंद होने की जानकारी दी थी लेकिन वे गूगल मैप पर रास्ता खुला होने की बात कह रहे थे। ग्रामीणों ने ड्राइवरों के मुंह से शराब की गंध आने का दावा भी किया है। इसकी पुष्टि के लिए मेडिकल जांच और ब्लड रिपोर्ट जरूरी होगी।

    तीसरी थ्योरी मंदिर समिति की ओर से उठाई गई साजिश की आशंका है। समिति के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह गुर्जर ने धार्मिक आयोजन को जानबूझकर निशाना बनाए जाने की संभावना जताते हुए एसआईटी जांच की मांग की है। हालांकि अब तक पुलिस या प्रशासन ने आतंकी हमले की पुष्टि नहीं की है। ट्रक का चेकिंग पॉइंट पार करना और बैरिकेड तोड़ते हुए मंदिर की ओर बढ़ना जांच के अहम बिंदु हैं। वहीं ट्रक मालिक का कहना है कि वाहन रास्ता तलाशते हुए आगे बढ़ा था। हादसे के बाद ड्राइवर और मालिक के भागने की घटना भी जांच का हिस्सा है लेकिन केवल इससे साजिश साबित नहीं होती।

    जांच में ट्रक की तकनीकी स्थिति के साथ ड्राइवरों की मेडिकल रिपोर्ट मोबाइल लोकेशन गूगल मैप का रिकॉर्ड माल से जुड़े दस्तावेज और रास्ते में लगे सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल की जा सकती है। ग्रामीणों पुलिसकर्मियों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी घटना की कड़ियां जोड़ने में मदद करेंगे। यदि लापरवाही साबित होती है तो भारतीय न्याय संहिता के तहत कार्रवाई हो सकती है। वहीं गैर इरादतन हत्या या आतंकी कृत्य जैसे गंभीर आरोपों के लिए संबंधित कानूनी तत्वों और पर्याप्त सबूतों का होना जरूरी है।

    हादसे ने मेले की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। सामान्य तौर पर मंदिर समिति भीड़ की जानकारी देने और व्यवस्थाओं में सहयोग करती है जबकि पुलिस यातायात नियंत्रण और कानून व्यवस्था संभालती है। जिला प्रशासन विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी निभाता है। रिपोर्टों के मुताबिक मंदिर से करीब एक किलोमीटर दूर पार्किंग बनाई गई थी और रात में 50 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात थे। इसके बावजूद भारी ट्रक प्रतिबंधित क्षेत्र तक कैसे पहुंच गए यह जांच का अहम सवाल है। चेकिंग पॉइंट पर ट्रक रोकने को लेकर पुलिस के बयान और ग्राउंड रिपोर्ट में अंतर भी सामने आया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर झांसी रोड के सीएसपी रवि भदौरिया को हटाया गया और तीन थाना प्रभारियों समेत आठ पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया। कलेक्टर रुचिका चौहान ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं और सात दिन में रिपोर्ट देने को कहा गया है। हालांकि चेकिंग पॉइंट की जिम्मेदारी और कार्रवाई के दायरे को लेकर सवाल बने हुए हैं। सरकार ने मृतकों के परिजनों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है जबकि पीड़ित परिवार अधिक मुआवजे और सरकारी नौकरी की मांग कर रहे हैं। अब जांच से यह स्पष्ट होना बाकी है कि हादसा तकनीकी खराबी या मानवीय लापरवाही का नतीजा था अथवा इसके पीछे कोई दूसरी वजह थी। साथ ही यह भी तय करना होगा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा में हुई चूक के लिए किस स्तर पर जवाबदेही बनती है।

  • जबलपुर नगर निगम आयुक्त के ट्रांसफर पर सियासी घमासान, भाजपा विधायक ने राम से की तुलना, कांग्रेस ने जताई आपत्ति

    जबलपुर नगर निगम आयुक्त के ट्रांसफर पर सियासी घमासान, भाजपा विधायक ने राम से की तुलना, कांग्रेस ने जताई आपत्ति


    जबलपुर । जबलपुर में नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार के तबादले को लेकर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। पाटन से भाजपा विधायक अजय विश्नोई की सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा में आ गई जिसमें उन्होंने दशहरे के दिन जबलपुर से राम का हरण हो जाने की बात लिखी। पोस्ट सामने आने के बाद कांग्रेस नेताओं ने इस पर आपत्ति जताई। विवाद बढ़ने के बीच विधायक ने अपनी पोस्ट हटा दी लेकिन तबादले को लेकर राजनीतिक चर्चा जारी है।

    राज्य शासन की ओर से दो दिन पहले अधिकारियों के तबादले का आदेश जारी किया गया था। इसके तहत जबलपुर नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार को भोपाल नगर निगम आयुक्त बनाया गया है। इस प्रशासनिक बदलाव के बाद विधायक अजय विश्नोई ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए लिखा कि दशहरे के दिन जबलपुर से राम का हरण हो गया। पोस्ट में रामप्रकाश अहिरवार के नाम में राम शब्द को लेकर भगवान श्रीराम से तुलना किए जाने का अर्थ निकाला गया। इसके बाद सोशल मीडिया पर इस टिप्पणी को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।

    पोस्ट वायरल होने के बाद कांग्रेस नेताओं ने भी सवाल उठाए। युवा कांग्रेस नेता दृगपाल सिंह लोदी ने आपत्ति जताते हुए पूछा कि रामप्रकाश अहिरवार की तुलना भगवान श्रीराम से क्यों की गई। इस टिप्पणी को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई। हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार विधायक विश्नोई ने बाद में अपनी पोस्ट हटा दी। इसके बावजूद यह मामला शहर के राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

    इस घटनाक्रम में नगर निगम आयुक्त का तबादला और उस पर की गई राजनीतिक टिप्पणी दोनों चर्चा के केंद्र में हैं। अहिरवार को भोपाल नगर निगम आयुक्त बनाए जाने के बाद जबलपुर में नए प्रशासनिक नेतृत्व को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं। वहीं विधायक की पोस्ट ने धार्मिक प्रतीकों के राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर बहस छेड़ दी है। कांग्रेस नेताओं ने टिप्पणी पर आपत्ति जताई जबकि पोस्ट हटाए जाने के बाद विवाद की चर्चा सोशल मीडिया पर जारी रही।

    इस मामले में एक तथ्यात्मक गलती भी सामने आई। युवा कांग्रेस नेता दृगपाल सिंह लोदी ने अपनी पोस्ट में अजय विश्नोई को कांग्रेस का विधायक बता दिया जबकि विश्नोई भाजपा के नेता हैं और पाटन विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में विवाद के बीच राजनीतिक पहचान को लेकर भी गलत जानकारी साझा होने का मामला सामने आया।

    फिलहाल उपलब्ध जानकारी में विधायक अजय विश्नोई की पोस्ट हटाए जाने और कांग्रेस नेताओं की आपत्ति की बात सामने आई है। नगर निगम आयुक्त का तबादला शासन के आदेश के तहत हुआ है जबकि पोस्ट को लेकर उठे सवाल राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक फेरबदल के साथ दशहरे के धार्मिक संदर्भ को जोड़कर नई बहस पैदा कर दी है।

  • ग्वालियर हादसे में 15 मौतों के बाद पीड़ित परिवारों का दर्द, सीएम से 3 से 7 मिनट की मुलाकात, घायलों ने इलाज पर उठाए सवाल

    ग्वालियर हादसे में 15 मौतों के बाद पीड़ित परिवारों का दर्द, सीएम से 3 से 7 मिनट की मुलाकात, घायलों ने इलाज पर उठाए सवाल


    ग्वालियर । ग्वालियर के शीतला माता मंदिर के प्रवेश द्वार पर हुए भीषण हादसे में 15 लोगों की मौत के बाद पीड़ित परिवारों में नाराजगी बनी हुई है। हादसे में अपनों को खोने वाले परिजन प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ग्वालियर दौरे से पहले पुलिस और प्रशासन के अधिकारी सक्रिय हो गए। जिला प्रशासन पुलिस और नगर निगम के अधिकारियों ने अस्पताल से लेकर पीड़ित परिवारों के घरों तक व्यवस्थाओं का जायजा लिया। कलेक्टर रुचिका चौहान और एसपी धर्मवीर सिंह यादव भी मुख्यमंत्री के पहुंचने से पहले संबंधित स्थानों पर पहुंचे और तैयारियों की जानकारी ली।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट के साथ पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे। हालांकि कई परिवारों के साथ उनकी मुलाकात तीन से सात मिनट तक ही रही। इस दौरान परिजनों ने नौकरी आवास और आर्थिक सहायता की मांग रखी। लेकिन श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच ट्रक मंदिर तक कैसे पहुंचा और सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई जैसे सवाल इन मुलाकातों में प्रमुखता से सामने नहीं आए।

    मुख्यमंत्री के ट्रॉमा सेंटर पहुंचने के दौरान बाहर मौजूद कुछ घायलों और उनके परिजनों ने इलाज को लेकर नाराजगी जताई। शिवम ने आरोप लगाया कि ट्रॉमा सेंटर में उचित इलाज नहीं मिलने के कारण उन्हें निजी अस्पताल जाना पड़ा जहां 15 हजार रुपये खर्च हुए। उनका कहना था कि प्रशासन मुफ्त इलाज की बात कर रहा है लेकिन खर्च की गई रकम वापस नहीं मिली। वहीं कोमल ने शिकायत की कि घायल कल्पना परिहार को 24 घंटे तक जरूरी पट्टा नहीं मिला और उन्हें बाजार से 15 हजार रुपये में खरीदना पड़ा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री से मुलाकात कराने का भरोसा दिया गया था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। शैलेंद्र शर्मा ने दावा किया कि मुख्यमंत्री के आने से पहले अस्पताल में पंखे लगाए गए जाले हटाए गए और बेडशीट बदली गईं। उन्होंने मुख्यमंत्री से नहीं मिल पाने की भी शिकायत की।

    महेशपुरा में मुख्यमंत्री शाम करीब 4 बजकर 57 मिनट पर पहुंचे। इससे पहले स्थानीय नेता वीरेंद्र गुर्जर मृतक दिव्यांश कुशवाह के भाई शुभम को समझाते नजर आए। मुख्यमंत्री के काफिले के आने की सूचना मिलने पर उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। इसके बाद मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने दिव्यांश के पिता अशोक कुशवाह और उनके बेटे शुभम को सांत्वना दी। बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने परिवार के मकान और आवास योजना के बारे में पूछा। अशोक कुशवाह ने बताया कि उनका एक कमरे का अपना मकान है और उन्होंने शुभम के लिए नौकरी की मांग रखी। करीब तीन मिनट में यह मुलाकात समाप्त हो गई।

    इसके बाद मुख्यमंत्री महलगांव में मृतक सतेंद्र गुर्जर के घर पहुंचे। वहां उनके पिता जगदीश गुर्जर भावुक हो गए। सतेंद्र के ताऊ रामचित्र ने परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग रखी। पार्षद गिर्राज कंसाना के अनुसार मुख्यमंत्री ने जरूरी दस्तावेज भेजने को कहा और आर्थिक सहायता का चेक देकर आगे बढ़ गए। गल्ला कोठार में मुख्यमंत्री ने मृतक प्रिंस और निकेश के परिवारों से मुलाकात की। परिजनों ने कमाने वाले बेटों की मौत से आजीविका पर आए संकट की जानकारी दी और नौकरी तथा आवास की मांग रखी।

    गदाईपुरा के शिवनगर में मुख्यमंत्री ने मृतक हेमंत राठौर पवन राठौर और लव अमन तथा अशोक त्यागी के परिजनों से भी मुलाकात की। यहां कांग्रेस नेता सुनील शर्मा और स्थानीय लोगों ने ज्ञापन सौंपकर मृतकों के परिवारों को 25-25 लाख रुपये घायलों को 10-10 लाख रुपये और प्रत्येक प्रभावित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की। हादसे के बाद परिवारों के सामने आर्थिक सुरक्षा और भविष्य की चिंता बनी हुई है। वहीं ट्रक मंदिर परिसर तक कैसे पहुंचा और सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी थी इन सवालों का जवाब हादसे की जांच के लिहाज से अहम बना हुआ है।

  • ग्वालियर के हजार बिस्तर अस्पताल में बड़ी लापरवाही, फायर हाइड्रेंट के उपकरण गायब, ICU और नवजातों की सुरक्षा पर सवाल

    ग्वालियर के हजार बिस्तर अस्पताल में बड़ी लापरवाही, फायर हाइड्रेंट के उपकरण गायब, ICU और नवजातों की सुरक्षा पर सवाल


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के ग्वालियर में करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से बने हजार बिस्तर अस्पताल की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल में आग बुझाने के लिए लगाए गए फायर हाइड्रेंट सिस्टम के कई जरूरी उपकरण गायब मिले हैं। इनमें पाइप नोजल और होज रील कपलिंग जैसे सामान शामिल हैं। हैरानी की बात यह है कि इन उपकरणों के गायब होने की जानकारी अस्पताल प्रबंधन को सिस्टम की जांच के दौरान मिली। जिस अस्पताल में रोजाना सैकड़ों मरीज भर्ती रहते हैं वहां आग जैसी आपात स्थिति से निपटने की तैयारी पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

    हजार बिस्तर अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 200 से 300 मरीज भर्ती रहते हैं। इनमें आईसीयू में उपचार करा रहे गंभीर मरीज नवजात शिशु उनकी माताएं और बुजुर्ग भी शामिल हैं। ऐसे मरीजों को आग लगने की स्थिति में सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना आसान नहीं होता। बहुमंजिला अस्पताल में मरीजों को बाहर निकालने के लिए पर्याप्त समय और प्रशिक्षित कर्मचारियों के साथ काम करने वाली अग्निशमन व्यवस्था जरूरी होती है। ऐसे में फायर हाइड्रेंट सिस्टम के अहम उपकरणों का गायब होना मरीजों और उनके परिजनों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाता है।

    अस्पताल प्रबंधन के अनुसार नई बिल्डिंग हैंडओवर होने के बाद फायर सेफ्टी के कुछ उपकरण चोरी होने की बात सामने आई है। हालांकि उपकरण कब चोरी हुए और कुल कितने सामान गायब हैं इसकी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। इस मामले ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और नियमित निगरानी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर फायर सिस्टम के उपकरण लंबे समय से गायब थे तो समय रहते उनकी कमी का पता क्यों नहीं चला यह भी जांच का विषय है। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर सुरक्षा उपकरणों का नियमित भौतिक सत्यापन बेहद जरूरी है ताकि किसी भी कमी को आपात स्थिति आने से पहले दूर किया जा सके।

    मौके पर लगे फायर बॉक्स की हालत भी चिंता बढ़ाने वाली बताई गई है। इसके अलावा अस्पताल में लगे कुछ अग्निशमन सिलेंडरों पर एक्सपायरी डेट स्पष्ट रूप से नहीं मिली। ऐसे में केवल उपकरणों की मौजूदगी ही पर्याप्त नहीं है बल्कि उनका सही हालत में होना और जरूरत पड़ने पर काम करना भी जरूरी है। आग लगने की स्थिति में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यदि जरूरी पाइप और नोजल उपलब्ध नहीं हों तो आग पर शुरुआती स्तर पर काबू पाने में परेशानी हो सकती है। इससे मरीजों को सुरक्षित निकालने और आग को फैलने से रोकने की चुनौती बढ़ सकती है।

    हजार बिस्तर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. सुधीर सक्सेना ने बताया कि अज्ञात चोर फायर सेफ्टी के उपकरण चुरा ले गए हैं। नए उपकरण खरीदने के लिए वरिष्ठ कार्यालय को प्रस्ताव भेजा गया है। उन्होंने कहा कि आग लगने की स्थिति से निपटने के लिए सिस्टम दुरुस्त है। उपकरणों की जांच के लिए निजी एजेंसियों से बातचीत चल रही है और जल्द ही मॉक ड्रिल भी कराई जाएगी। हालांकि फायर हाइड्रेंट के कुछ जरूरी उपकरणों के गायब मिलने के बाद पूरी व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का परीक्षण महत्वपूर्ण हो गया है।

    इस घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। अस्पताल में सुरक्षा गार्ड और जिम्मेदार अधिकारी तैनात होने के बावजूद उपकरण कैसे गायब हुए और नियमित जांच में इसका पता क्यों नहीं चला इस पर जवाबदेही तय करना जरूरी है। नए उपकरण खरीदने का प्रस्ताव भेजना एक कदम हो सकता है लेकिन इसके साथ पूरे फायर सिस्टम का निरीक्षण करना सभी उपकरणों की कार्यक्षमता जांचना और कर्मचारियों को आपात स्थिति से निपटने का प्रशिक्षण देना भी आवश्यक है। अस्पताल में भर्ती मरीज अपनी सुरक्षा के लिए व्यवस्था पर निर्भर रहते हैं। इसलिए अग्नि सुरक्षा में किसी भी कमी को जल्द दूर करना और भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए निगरानी मजबूत करना बेहद जरूरी है।

  • ग्वालियर में दशहरे पर इन रास्तों से बचकर निकलें, जुलूस के लिए रूट डायवर्ट, रावण दहन के लिए पार्किंग की व्यवस्था

    ग्वालियर में दशहरे पर इन रास्तों से बचकर निकलें, जुलूस के लिए रूट डायवर्ट, रावण दहन के लिए पार्किंग की व्यवस्था


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के ग्वालियर में विजयादशमी के अवसर पर दशहरा जुलूस रावण दहन और नवदुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन को देखते हुए यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया है। मंगलवार को शहर में धार्मिक आयोजनों के दौरान लोगों की भीड़ बढ़ने की संभावना को देखते हुए पुलिस ने कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करने और कुछ रास्तों को बंद रखने की व्यवस्था की है। ऐसे में घर से निकलने वाले वाहन चालकों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले निर्धारित मार्गों की जानकारी जरूर लें और जरूरत के अनुसार वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करें।

    दशहरा जुलूस अचलेश्वर मंदिर से शुरू होकर फूलबाग मैदान तक पहुंचेगा। जुलूस के निर्धारित मार्ग में दाल बाजार लोहिया बाजार ऊंट पुल पाटनकर चौराहा दौलतगंज महाराज बाड़ा सराफा बाजार गश्त का ताजिया राम मंदिर छप्परवाला पुल शिंदे की छावनी और गुरुद्वारा शामिल हैं। इन रास्तों से जुलूस गुजरने के दौरान यातायात नियंत्रित रहेगा। इस वजह से संबंधित क्षेत्रों में वाहन चालकों को इंतजार करना पड़ सकता है या उन्हें दूसरे रास्तों से जाना पड़ सकता है। खासकर बाजार और प्रमुख चौराहों के आसपास निकलने वाले लोगों को अतिरिक्त समय लेकर घर से निकलना चाहिए।

    यातायात व्यवस्था के तहत जलालपुर से सागरताल होते हुए बहोड़ापुर जाने वाले मार्ग पर वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी। इस मार्ग का इस्तेमाल करने वाले वाहन चालकों को रितुराज होटल और मोतीझील वाले रास्ते से जाने की सलाह दी गई है। इसके अलावा चार शहर का नाका से सागरताल रोड और ट्रांसपोर्ट नगर से सागरताल की ओर जाने वाले मार्ग पर भी वाहनों की आवाजाही बंद रहेगी। इन बदलावों का उद्देश्य धार्मिक आयोजनों के दौरान भीड़ वाले इलाकों में यातायात को व्यवस्थित रखना और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

    दशहरे पर रावण दहन देखने के लिए बड़ी संख्या में लोगों के फूलबाग मैदान पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए मैदान के आसपास पार्किंग की व्यवस्था की गई है। जानकारी के मुताबिक रावण दहन में शामिल होने वाले लोगों के लिए मैदान नंबर दो और चिड़ियाघर के सामने पार्किंग की सुविधा रखी गई है। वाहन चालकों को कोशिश करनी चाहिए कि वे निर्धारित पार्किंग स्थलों पर ही वाहन खड़े करें ताकि आयोजन स्थल के आसपास अनावश्यक जाम न लगे और पैदल आने जाने वाले लोगों को परेशानी न हो।

    शहर में दशहरा जुलूस के साथ नवदुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के चलते भी कुछ मार्गों पर यातायात प्रभावित हो सकता है। ऐसे में वाहन चालकों को पुलिस के निर्देशों का पालन करना चाहिए और बैरिकेडिंग वाले रास्तों में जबरन प्रवेश करने से बचना चाहिए। जिन लोगों को महाराज बाड़ा दाल बाजार फूलबाग या सागरताल क्षेत्र की ओर जाना है उन्हें अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्ग पहले से तय कर लेना चाहिए। आपात स्थिति में पुलिसकर्मियों के निर्देशों के अनुसार रास्ता बदलना भी जरूरी होगा।

    दशहरा शहर में धार्मिक उत्साह और सामूहिक आयोजन का अवसर है लेकिन बड़ी भीड़ के कारण यातायात व्यवस्था बनाए रखना भी चुनौतीपूर्ण रहता है। ऐसे में लोगों की सावधानी और प्रशासन के निर्देशों का पालन जाम और अव्यवस्था को कम करने में मदद कर सकता है। घर से निकलने से पहले ट्रैफिक रूट की जानकारी लेना और निर्धारित पार्किंग का इस्तेमाल करना ही बेहतर रहेगा।

  • 15 मौतों के बाद शीतला माता मेले से गायब हुए श्रद्धालु, लाखों का सामान लेकर लौटे व्यापारी, कोरोना के बाद पहली बार ऐसे हालात

    15 मौतों के बाद शीतला माता मेले से गायब हुए श्रद्धालु, लाखों का सामान लेकर लौटे व्यापारी, कोरोना के बाद पहली बार ऐसे हालात


    भोपाल। मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित सातऊ गांव के शीतला माता मंदिर में हर साल अष्टमी और नवमी के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। नौ दिनों तक चलने वाले मेले में खिलौनों प्रसाद झूलों और घरेलू सामान की दुकानों पर जमकर खरीदारी होती है। इसी उम्मीद के साथ दूरदराज के जिलों और दूसरे राज्यों से व्यापारी यहां दुकानें लगाने पहुंचते हैं। लेकिन इस बार मेले की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। 17 अक्टूबर की रात मंदिर के पास हुए दर्दनाक ट्रक हादसे के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में भारी गिरावट आई है। हादसे में 15 लोगों की मौत की खबर से लोग दुखी हैं और इसका सीधा असर मेले के कारोबार पर पड़ा है। व्यापारियों के मुताबिक दो दिनों में 50 लाख रुपये से अधिक का कारोबार प्रभावित हुआ है और नवमी से पहले ही करीब 80 प्रतिशत दुकानदार अपनी दुकानें समेटकर लौटने लगे।

    सोमवार को दुर्गा नवमी के दिन मेले का नजारा सामान्य वर्षों से बिल्कुल अलग दिखाई दिया। जिन रास्तों पर श्रद्धालुओं की भीड़ और दुकानों पर ग्राहकों की चहल पहल रहती थी वहां सन्नाटा पसरा था। कई दुकानदार सामान पैक करते नजर आए तो कुछ आखिरी समय तक ग्राहकों का इंतजार करते रहे। व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने नौ दिनों तक चलने वाले मेले के लिए पहले से सामान खरीदा था और दुकान लगाने के लिए किराया तथा परिवहन पर भी खर्च किया था। लेकिन हादसे के बाद लोगों के नहीं पहुंचने से उनकी कमाई की उम्मीद टूट गई। कुछ व्यापारियों के लिए तो दुकान तक सामान लाने का भाड़ा निकालना भी मुश्किल हो गया है। उनका कहना है कि कोरोना महामारी के बाद भी मेले में कारोबार की ऐसी स्थिति नहीं देखी थी।

    हर साल अष्टमी और नवमी पर शीतला माता मंदिर में करीब एक से डेढ़ लाख श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसी अनुमान के आधार पर छोटे और बड़े व्यापारी अपनी तैयारियां करते हैं। इस बार भी दुकानदारों को अच्छी बिक्री की उम्मीद थी लेकिन हादसे के बाद मेले में आने वालों की संख्या बेहद कम रह गई। छतरपुर से परिवार के साथ आईं दर्पण पिछले पांच साल से यहां खिलौनों की दुकान लगाती हैं। उन्हें इस बार भी अच्छी कमाई की उम्मीद थी लेकिन ग्राहकों की कमी ने उन्हें निराश कर दिया। वहीं दतिया से पहली बार दुकान लगाने आईं दामिनी को भी बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। उनका कहना है कि कारोबार नहीं होने से उनका पूरा हिसाब बिगड़ गया है।

    ग्वालियर की मंजिता देवी के मुताबिक उन्होंने करीब एक लाख रुपये का सामान बिक्री के लिए रखा था लेकिन ग्राहकों की कमी के कारण सामान नहीं बिक सका। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मंदिर मार्ग पर बाइक तक जाने में रोक लगाई जाती है तो भारी ट्रक वहां तक कैसे पहुंच गया। भितरवार की 80 वर्षीय कस्तूरी देवी भी नुकसान से परेशान हैं। वे हर सोमवार को शीतला माता मंदिर आती हैं और उनके मुताबिक सामान्य सोमवार को भी इस बार की तुलना में ज्यादा भीड़ रहती है। उन्होंने बताया कि उन पर करीब 50 हजार रुपये का कर्ज है और अब कारोबार ठप होने से इसकी भरपाई को लेकर चिंता बढ़ गई है।

    मंदिर के महंत कमल सिंह भगत ने भी हादसे पर दुख जताया। उनका कहना है कि मंदिर के सैकड़ों साल के इतिहास में ऐसी घटना पहले कभी नहीं हुई। उनके मुताबिक नवमी पर इस बार सामान्य दिनों की तुलना में बेहद कम श्रद्धालु पहुंचे। उन्होंने कहा कि मंदिर का मजबूत प्रवेश द्वार पहले भी कई लोगों की जान बचाने में मददगार रहा है। भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए मंदिर प्रबंधन प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से चर्चा कर बेहतर सुरक्षा व्यवस्था की मांग करेगा।

    इस बीच कुछ दुकानदारों ने स्थानीय लोगों पर दुकान लगाने की जगह के लिए 500 रुपये और बिजली के लिए प्रतिदिन 200 रुपये मांगने के आरोप भी लगाए हैं। कुछ ने धमकी और मारपीट की शिकायतें भी बताई हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। हादसे के बाद मेले में पसरे सन्नाटे ने व्यापारियों की आर्थिक मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब उनके सामने बचा हुआ सामान वापस ले जाने और हुए नुकसान की भरपाई करने की चुनौती है। वहीं श्रद्धालुओं की सुरक्षा और मंदिर मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

  • ग्वालियर में बेकाबू ट्रक का कहर, मंदिर में दर्शन करने पहुंचे 57 श्रद्धालु चपेट में आए, 16 की मौत और 41 घायल

    ग्वालियर में बेकाबू ट्रक का कहर, मंदिर में दर्शन करने पहुंचे 57 श्रद्धालु चपेट में आए, 16 की मौत और 41 घायल


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास हुए भीषण सड़क हादसे ने एक और परिवार को गहरे दुख में डुबो दिया है। हादसे में गंभीर रूप से घायल 78 वर्षीय मोतीराम प्रजापति ने मंगलवार सुबह इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। करीब 52 घंटे तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद उनकी मौत हो गई। इसके साथ ही इस दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है। शनिवार और रविवार की दरमियानी रात हुए इस हादसे में एक बेकाबू ट्रक ने दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं और आसपास मौजूद लोगों को अपनी चपेट में ले लिया था। हादसे में कुल 57 लोग प्रभावित हुए थे जिनमें 15 लोगों की मौत पहले ही हो चुकी थी जबकि 41 लोग घायल बताए गए हैं।

    मोतीराम प्रजापति मंदिर परिसर के प्रवेश द्वार के पास प्रसाद की दुकान लगाते थे। इसी दुकान से होने वाली कमाई के सहारे वे अपने परिवार का भरण पोषण करते थे। हादसे की रात वे भी ट्रक की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। परिजन उन्हें इलाज के लिए लिंक हॉस्पिटल लेकर पहुंचे जहां डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही थी। चिकित्सकों के मुताबिक हादसे में लगी चोट के कारण उनकी खून की नली में थक्का जम गया था। इस स्थिति को सुपरफिशियल फीमोरल थ्रोम्बोसिस बताया गया। मोतीराम को वर्ष 2024 में हार्ट अटैक भी आया था जिसके बाद उनके दिल में स्टेंट डाला गया था। तमाम प्रयासों के बावजूद मंगलवार सुबह उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। उनकी मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया और सातऊ गांव में शोक की लहर फैल गई।

    हादसे में गंभीर रूप से घायल संजय शर्मा और 19 वर्षीय कल्पना परिहार को बेहतर उपचार के लिए भोपाल एम्स भेजा गया है। संजय को सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात एयर एम्बुलेंस से शिफ्ट किया गया जबकि कल्पना को मंगलवार सुबह एयर एम्बुलेंस के जरिए भोपाल पहुंचाया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इससे पहले घायलों के उपचार की जानकारी ली थी और अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि इलाज में किसी तरह की कमी नहीं होनी चाहिए।

    संजय शर्मा अपने परिवार के साथ शीतला माता मंदिर में दर्शन करने पहुंचे थे। वे श्योपुर के निवासी हैं और शनिवार को परिवार के साथ एक तेरहवीं कार्यक्रम में शामिल होने के बाद अपने भाइयों से मिलने सहसराम गांव गए थे। वहां से वे अपने बड़े भाई महेश को साथ लेकर ग्वालियर आए थे। संजय यहां मकान बनवा रहे थे और चाहते थे कि महेश निर्माण कार्य की देखरेख करें। रात करीब डेढ़ बजे हुए हादसे में उनके भाई महेश और मासूम शौर्य की मौत हो गई जबकि संजय गंभीर रूप से घायल हो गए।

    प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक धान से भरे दो ओवरलोड ट्रक नो एंट्री वाले रास्ते में करीब सात किलोमीटर तक अंदर आ गए थे। मंदिर के पास संकरे रास्ते और ढलान पर पहुंचने के बाद एक ट्रक रुक गया जबकि दूसरा ट्रक बेकाबू होकर नीचे की ओर बढ़ने लगा। रास्ते में उसने दुकानों और श्रद्धालुओं को अपनी चपेट में ले लिया। आखिरकार मंदिर का करीब 200 साल पुराना सीमेंट कंक्रीट का प्रवेश द्वार ट्रक के सामने आ गया और उससे टकराने के बाद वाहन रुक गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक यदि ट्रक गेट से नहीं टकराता तो आगे कतार में खड़े अन्य श्रद्धालु भी उसकी चपेट में आ सकते थे।

    हादसे के बाद मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था और नो एंट्री मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक मंदिर में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए तीन शिफ्ट में पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई जाती है और 150 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात बताए गए थे। हादसे से करीब 15 मिनट पहले ग्वालियर के एसएसपी धर्मवीर सिंह भी मंदिर परिसर में भीड़ नियंत्रित करते दिखाई दिए थे। इसके कुछ ही समय बाद ट्रक के श्रद्धालुओं को कुचलने की सूचना मिली। अब इस दर्दनाक घटना के बाद घायलों के उपचार के साथ यह सवाल भी अहम है कि प्रतिबंधित मार्ग पर ओवरलोड ट्रक कैसे पहुंचा और ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

  • सिंधिया के अपनी तो जैसे तैसे डांस की चर्चा, विजयवर्गीय के भजन पर सियासी तंज, गड्ढों के झटकों से हिल गए BJP प्रदेश अध्यक्ष

    सिंधिया के अपनी तो जैसे तैसे डांस की चर्चा, विजयवर्गीय के भजन पर सियासी तंज, गड्ढों के झटकों से हिल गए BJP प्रदेश अध्यक्ष


    भोपाल। मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों नेताओं के भाषणों के साथ उनके डांस और भजन की प्रस्तुतियां भी चर्चा का विषय बन रही हैं। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से लेकर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और पूर्व मंत्री कमल पटेल तक के वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की एक रील सड़क की बदहाली को लेकर चर्चा में आ गई है। इन वीडियो में कहीं मनोरंजन नजर आ रहा है तो कहीं लोग गाने और भजन के बोल के आधार पर सियासी मायने निकाल रहे हैं।

    केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अशोक नगर में युवाओं के साथ संवाद कार्यक्रम के दौरान एक गाने पर थिरकते नजर आए। उन्होंने अपनी तो जैसे तैसे कोई ऐसे या वैसे कट जाएगी आपका क्या होगा जनाब ए आली गाने पर डांस किया। उनकी इस प्रस्तुति की चर्चा होने लगी। लोगों ने उनके अंदाज को पसंद किया लेकिन गाने के बोल ने भी सियासी गलियारों में चुटकी लेने का मौका दे दिया। अब इस बात पर कयास लगाए जा रहे हैं कि आखिर इस गाने को लेकर लोग क्या संदेश तलाश रहे हैं। हालांकि सिंधिया की ओर से किसी खास राजनीतिक संदेश की बात सामने नहीं आई है।

    दूसरी ओर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का भजन भी चर्चा में है। एक गरबा आयोजन के दौरान वे महाकाल डमरू वाले तू न संभाले तो हमें कौन संभाले भजन गाते नजर आए। विजयवर्गीय के भजन गाने का यह पहला मौका नहीं है लेकिन इस बार इसके बोल को लेकर राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गईं। प्रदेश की राजनीति में उनकी भूमिका और सत्ता संगठन में कथित उपेक्षा को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच लोग इसे अपने अपने अंदाज में देख रहे हैं। हालांकि इसे उनकी निजी आस्था और भक्ति की प्रस्तुति के रूप में भी देखा जा सकता है। इसी बीच उनके पुराने मित्र और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने चुटकी लेते हुए उन्हें इंदौर के पितृ पर्वत स्थित हनुमान मंदिर में बैठने की सलाह दी। उनकी टिप्पणी ने इस पूरे मामले को और दिलचस्प बना दिया।

    पूर्व मंत्री कमल पटेल का एक वीडियो भी चर्चा में है। हरदा में आयोजित भजन संध्या के दौरान तुम अगर साथ देने का वादा करो मैं यूं ही मस्त नगमे लुटाता रहूं गाना बजा तो वे खुद को थिरकने से रोक नहीं पाए। कमल पटेल पिछला विधानसभा चुनाव हार चुके हैं और अब उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं होती रहती हैं। ऐसे में उनके डांस को लेकर भी लोग मजाकिया अंदाज में राजनीतिक संकेत तलाश रहे हैं। कुछ लोग इसे जनता का साथ पाने की इच्छा से जोड़कर देख रहे हैं लेकिन यह लोगों की अपनी व्याख्या है।

    इधर मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की कार में भजन सुनते हुए बनाई गई रील भी चर्चा में आ गई। वे कार में बैठकर माता के भजन सुन रहे थे। इसी दौरान वाहन सड़क पर बने गड्ढों से गुजरा तो कार हिचकोले खाने लगी और अध्यक्ष भी झटकों से हिलते नजर आए। इस वीडियो को लेकर लोगों ने सड़क की हालत पर सवाल उठाए। भले ही वीडियो बनाने का उद्देश्य भक्ति का आनंद लेना रहा हो लेकिन उसमें दिखाई देने वाले गड्ढों ने सड़क की बदहाली को भी सामने ला दिया।

    इसी राजनीतिक हलचल के बीच सरकारी विभाग में अनुकंपा नियुक्तियों को लेकर एक मामला भी सामने आया है। खबर के मुताबिक एक विभाग के सचिव स्तर के अधिकारी ने 25 लोगों की सूची तैयार कर वरिष्ठ अधिकारी को भेजी थी। जांच में पता चला कि सूची में शामिल 15 लोगों को पहले ही अनुकंपा नियुक्ति मिल चुकी थी और वे नौकरी कर रहे थे। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारी ने सूची तैयार करने वाले अधिकारी को फटकार लगाई। अब बाकी 10 लोगों की नियुक्ति को लेकर आगे क्या निर्णय होता है इस पर नजर रहेगी। इस तरह मध्य प्रदेश में नेताओं के वीडियो से लेकर प्रशासनिक कामकाज तक कई मुद्दे चर्चा में हैं।