Category: Madhya Pradesh

  • 1813 में भोपाल पर टूटा था सबसे बड़ा संकट, 9 महीने की घेराबंदी के बाद भी नहीं झुका शहर

    1813 में भोपाल पर टूटा था सबसे बड़ा संकट, 9 महीने की घेराबंदी के बाद भी नहीं झुका शहर


    भोपाल भोपाल का इतिहास सिर्फ महलों किलों और शासकों की कहानियों से नहीं बना है बल्कि इस शहर की पहचान उन लोगों के साहस और एकजुटता से भी जुड़ी है जिन्होंने कठिन से कठिन परिस्थितियों में अपने शहर की रक्षा के लिए डटकर मुकाबला किया। इतिहास के पन्नों में भोपाल के सामने ऐसा दौर भी आया जब दुश्मन सेनाओं ने कई महीनों तक शहर को चारों तरफ से घेर रखा था। संसाधन सीमित थे हालात बेहद मुश्किल थे और रियासत का अस्तित्व खतरे में नजर आ रहा था। इसके बावजूद भोपाल के लोगों ने हिम्मत नहीं छोड़ी और करीब नौ महीने तक चले संघर्ष के बाद हमलावर सेना को वापस लौटना पड़ा।

    यह घटना नवंबर 1813 की बताई जाती है जब ग्वालियर के शासक दौलतराव सिंधिया के सेनापति जीन बैप्टिस्ट और जसवंत राव भाव ने नागपुर के भोंसले की सेना के साथ मिलकर भोपाल की घेराबंदी शुरू की। हमलावर सेनाओं ने इस्लामनगर और इस्लामगढ़ में अपने ठिकाने बनाए और भोपाल पर दबाव बढ़ाने लगे। उस समय भोपाल की रक्षा की जिम्मेदारी वजीर नवाब मोहम्मद खान ने संभाली। उन्होंने परिस्थितियों की गंभीरता को देखते हुए पीछे हटने के बजाय मुकाबला करने का फैसला किया और शहर के लोगों का मनोबल बनाए रखा।

    धीरे धीरे यह संघर्ष केवल सैनिकों तक सीमित नहीं रहा बल्कि पूरे भोपाल के अस्तित्व की लड़ाई बन गया। शहर के लोग अपनी क्षमता के अनुसार रक्षा व्यवस्था में जुट गए। कोई किले की दीवारों को मजबूत करने में लगा था तो कोई सैनिकों तक रसद पहुंचा रहा था। कई लोग मोर्चों पर सैनिकों का साथ दे रहे थे। दुश्मन लगातार शहर की सुरक्षा व्यवस्था को तोड़ने की कोशिश कर रहा था लेकिन भोपाल के भीतर प्रतिरोध कमजोर नहीं पड़ा।

    इस संघर्ष का सबसे उल्लेखनीय पहलू महिलाओं की भागीदारी रही। जब हमलावर सेना ने शहर की दीवारों को नुकसान पहुंचाकर भीतर घुसने की कोशिश की तो वजीर मोहम्मद खान के आह्वान पर कुलीन परिवारों की पर्दानशीन महिलाएं भी किले की बुर्जों तक पहुंचीं। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार उन्होंने बारूद से भरे घड़ों में आग लगाकर दुश्मन की ओर फेंककर प्रतिरोध में योगदान दिया। यह घटना भोपाल के सामूहिक साहस और संकट के समय लोगों की एकजुटता का प्रतीक बन गई।

    करीब नौ महीने तक घेराबंदी जारी रही। हमलावर सेना संख्या और संसाधनों के लिहाज से मजबूत थी लेकिन लंबे संघर्ष के बावजूद भोपाल का हौसला नहीं तोड़ सकी। आखिरकार जुलाई 1814 में हमलावर सेना को घेराबंदी हटाकर वापस लौटना पड़ा। इस तरह भोपाल ने अपने अस्तित्व की रक्षा केवल किले की मजबूती से नहीं बल्कि शहर के लोगों के साहस धैर्य और एकता से की।

    इस ऐतिहासिक संघर्ष में फतेहगढ़ किले की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। मजबूत दीवारों और विशाल बुर्जों से घिरा यह किला उस समय भोपाल की प्रमुख सुरक्षा व्यवस्था का केंद्र था। सिंधिया सेना के हमलों के दौरान किले ने भारी तोपखाने का सामना किया और लंबे समय तक मजबूती से खड़ा रहा। किले के परिसर में दोस्त मोहम्मद खान द्वारा निर्मित ढाई सीढ़ी की मस्जिद भी मौजूद थी जिसे भोपाल की ऐतिहासिक धरोहरों में विशेष स्थान प्राप्त है।

    समय के साथ भोपाल का स्वरूप बदलता गया और फतेहगढ़ किले का मूल ढांचा भी आधुनिक निर्माण के बीच काफी हद तक गायब हो गया। आज इसके क्षेत्र में हमीदिया अस्पताल और गांधी मेडिकल कॉलेज का परिसर मौजूद है। आधुनिक बहुमंजिला इमारतों के कारण किले की आंतरिक संरचना पहले जैसी दिखाई नहीं देती लेकिन वीआईपी रोड की ओर इसकी बाहरी प्राचीरों के कुछ हिस्से आज भी उस दौर की याद दिलाते हैं।

    भोपाल की यह कहानी बताती है कि किसी शहर की असली ताकत केवल उसकी ऊंची दीवारों और मजबूत किलों में नहीं होती। संकट के समय उसके लोगों का साहस एकजुटता और अपने शहर के लिए खड़े रहने का जज्बा ही उसे मजबूत बनाता है। नौ महीने की घेराबंदी के सामने भोपाल का न झुकना इसी जनशक्ति की ऐसी ऐतिहासिक मिसाल है जो आज भी शहर की पहचान का अहम हिस्सा है।

  • MP में आज 3 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी, भोपाल-इंदौर समेत 52 जिलों में बूंदाबांदी के आसार

    MP में आज 3 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी, भोपाल-इंदौर समेत 52 जिलों में बूंदाबांदी के आसार


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की बेरुखी के बीच शनिवार को पन्ना, सतना और रीवा में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक, इन तीनों जिलों में अगले 24 घंटे के दौरान करीब 4 इंच तक बारिश हो सकती है। वहीं, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर समेत प्रदेश के 52 जिलों में हल्की बारिश या बूंदाबांदी होने का अनुमान है।

    IMD के अनुसार, प्रदेश में अब तक औसतन 16.8 इंच (426.6 मिमी) बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि तक 21 इंच (533.6 मिमी) पानी गिरना चाहिए था। इस तरह प्रदेश में 4.2 इंच यानी 20% बारिश कम हुई है। सीजन में अब तक हुई बारिश सामान्य कोटे की आधी भी नहीं है। प्रदेश में सामान्य मानसूनी बारिश का आंकड़ा 37.3 इंच है।

    दतिया में 24 घंटे में 3.5 इंच बारिश
    शुक्रवार को दतिया में बारिश ने जोरदार दस्तक दी। यहां सुबह महज 4 घंटे में करीब 1.57 इंच (40 मिमी) बारिश रिकॉर्ड हुई, जबकि 24 घंटे में कुल 3.5 इंच पानी बरसा। तेज बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव हो गया, जिसके बाद स्कूलों में छुट्टी घोषित करनी पड़ी।

    भांडेर और सेवढ़ा ब्लॉक में कक्षा 8वीं से ऊपर के स्कूलों को लेकर फैसला स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर संस्था प्रमुखों पर छोड़ दिया गया है। रायसेन में भी शुक्रवार सुबह करीब 15 मिनट तेज बारिश हुई। इसके बाद रुक-रुककर बारिश का दौर जारी रहा, जिससे कई सड़कों पर पानी भर गया।

    सीधी में सोन नदी के पुल पर पानी, 40 गांवों का संपर्क प्रभावित
    सीधी जिले के भंवरसेन घाट पर शुक्रवार सुबह हुई तेज बारिश के बाद सोन नदी के पुल पर पानी भर गया। सुरक्षा के मद्देनजर पुल को बंद कर दिया गया, जिससे करीब 40 गांवों का मुख्यालय से संपर्क कट गया।

    भंवरसेन पहाड़ी से मिट्टी और पत्थर भी खिसककर सड़क पर आ रहे हैं। इससे मार्ग पर हादसे का खतरा बना हुआ है। इसके अलावा खरगोन, सतना, उज्जैन, ग्वालियर, रीवा और रायसेन समेत कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई।

    पूर्वी MP में 23% कम बारिश
    मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश के पूर्वी हिस्से के जबलपुर, शहडोल, रीवा और सागर संभाग में अब तक 23% कम बारिश हुई है। इन संभागों का कोई भी जिला औसत से आगे नहीं है।

    अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़ और उमरिया में सामान्य से 5% से 48% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    पश्चिमी हिस्से में भी बारिश का आंकड़ा माइनस में
    भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल संभाग वाले पश्चिमी हिस्से में भी औसत से 17% कम बारिश हुई है। आगर-मालवा, अलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, भोपाल, दतिया, धार, गुना, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन, बड़वानी और विदिशा में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है।

    इन 6 जिलों में औसत से ज्यादा बारिश
    मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी हिस्से के सिर्फ ग्वालियर, भिंड, बुरहानपुर, देवास, खंडवा और खरगोन में अब तक औसत से ज्यादा बारिश हुई है। बाकी अधिकांश जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे बना हुआ है।

  • ब्रिक्स सम्मेलन में दिखेगा मध्य प्रदेश का सांस्कृतिक वैभव: 125 कलाकार देंगे ‘अमृतस्य मध्य प्रदेश’ की भव्य प्रस्तुति

    ब्रिक्स सम्मेलन में दिखेगा मध्य प्रदेश का सांस्कृतिक वैभव: 125 कलाकार देंगे ‘अमृतस्य मध्य प्रदेश’ की भव्य प्रस्तुति


    भोपाल भोपाल में चल रहा ब्रिक्स सांस्कृतिक सम्मेलन 2026 अब अपने तीसरे दिन में प्रवेश कर चुका है और शुक्रवार को राजधानी में संस्कृति और कला का अंतरराष्ट्रीय संगम देखने को मिलेगा। ब्रिक्स सदस्य और भागीदार देशों के संस्कृति मंत्री भोपाल पहुंच रहे हैं जहां उनका पारंपरिक अंदाज में स्वागत किया जा रहा है। सम्मेलन के तीसरे दिन का सबसे बड़ा आकर्षण शाम को आयोजित होने वाला ब्रिक्स सांस्कृतिक महोत्सव 2026 होगा। इस विशेष आयोजन में भारत के साथ ब्रिक्स सदस्य और भागीदार देशों के प्रख्यात संगीतकार और कलाकार एक मंच पर नजर आएंगे। कार्यक्रम की शुरुआत सर्वे भवन्तु सुखिनः के मंगल आह्वान से होगी जिसके बाद कलर्स ऑफ इंडियन म्यूजिक के जरिए हिंदुस्तानी और कर्नाटक शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा को प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद ब्रिक्स पीस सॉन्ग पीस इज द लैंग्वेज ऑफ द लैंड के जरिए अलग अलग देशों की संगीत परंपराओं को एक सूत्र में पिरोया जाएगा।

    इस सांस्कृतिक महोत्सव में बेलारूस ब्राजील चीन मिस्र इथियोपिया इंडोनेशिया ईरान रूस सऊदी अरब दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात की संगीत विरासत की झलक देखने को मिलेगी। आर्केस्ट्रा की प्रस्तुतियों में पीस टू ऑल हार्मनी टू ऑल और क्रेस्केंडो ऑफ यूनिटी जैसे कार्यक्रम विशेष आकर्षण होंगे। इन प्रस्तुतियों का उद्देश्य अलग अलग संस्कृतियों को संगीत के माध्यम से एक दूसरे से जोड़ना और शांति तथा आपसी सहयोग का संदेश देना है। कार्यक्रम कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर मिंटो हॉल में आयोजित किया जाएगा जहां अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के साथ कला प्रेमियों को भी भारतीय और वैश्विक सांस्कृतिक विविधता का अनुभव मिलेगा।

    शाम के कार्यक्रम का एक और बड़ा आकर्षण मध्य प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग की विशेष प्रस्तुति अमृतस्य मध्य प्रदेश एक अलौकिक सांस्कृतिक महायात्रा होगी। प्रसिद्ध कोरियोग्राफर मैत्रेयी पहाड़ी के निर्देशन में 125 से अधिक कलाकार मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक आध्यात्मिक और लोक परंपराओं को नृत्य और संगीत के माध्यम से मंच पर जीवंत करेंगे। प्रस्तुति की शुरुआत ॐ की अनादि ध्वनि से होगी और इसके जरिए भीमबेटका सांची और खजुराहो जैसे विश्व धरोहर स्थलों से लेकर चित्रकूट के राम पथ गमन और उज्जैन के संदीपनि आश्रम की कृष्ण लीला तक की सांस्कृतिक यात्रा कराई जाएगी। ग्वालियर ओरछा और मांडू के ऐतिहासिक किलों की गाथा के साथ महेश्वरी और चंदेरी के वस्त्र शिल्प तथा बैगा मटकी और बधाई जैसे लोक नृत्यों को भी प्रस्तुति में शामिल किया गया है।

    भोपाल की झीलों उज्जैन के बाबा महाकाल ओंकारेश्वर के अध्यात्म और मां नर्मदा की महाआरती के जरिए मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को विदेशी मेहमानों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। इसी प्रस्तुति के माध्यम से अतिथियों को सिंहस्थ कुंभ 2028 का आध्यात्मिक निमंत्रण भी दिया जाएगा। कार्यक्रम के बाद मध्य प्रदेश सरकार की ओर से रात्रिभोज का आयोजन होगा जिसमें मेहमानों को प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद भी चखाया जाएगा। लंच और डिनर के मेन्यू में दाल बाफले निमोना रिकमच गुइया की सब्जी चंबल का थोपा चंदिया बड़ा तथा कोदो और कुटकी जैसे मिलेट आधारित व्यंजन शामिल किए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय मेहमानों की पसंद को ध्यान में रखते हुए पश्चिमी और ओरिएंटल व्यंजन भी परोसे जाएंगे।

    8 अगस्त को भारत की अध्यक्षता में तीसरी ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक होगी जिसमें सांस्कृतिक विरासत संग्रहालय रचनात्मक अर्थव्यवस्था सांस्कृतिक आदान प्रदान क्षमता निर्माण और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। बैठक के अंत में ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की घोषणा को अपनाया जाएगा जो भविष्य में सांस्कृतिक सहयोग के लिए साझा रोडमैप तैयार करेगी। इसके बाद विदेशी प्रतिनिधिमंडल सांची जाएगा जहां वे सांची स्तूप और बौद्ध विरासत का अवलोकन करेंगे। चेतियागिरी मंदिर में दर्शन के साथ योग और ध्यान सत्र भी होगा तथा शाम को 3D प्रोजेक्शन मैपिंग और लाइट एंड साउंड शो के जरिए बौद्ध इतिहास और कला को प्रदर्शित किया जाएगा। 9 अगस्त को इच्छुक विदेशी प्रतिनिधियों के लिए भीमबेटका शैलाश्रय के भ्रमण की व्यवस्था की गई है। इस तरह भोपाल में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन केवल कूटनीतिक संवाद का मंच नहीं बल्कि भारत और विशेष रूप से मध्य प्रदेश की समृद्ध संस्कृति को दुनिया के सामने रखने का बड़ा अवसर बन गया है।

  • पटवारियों की मांगों पर सरकार झुकी, आंदोलन स्थगित; 2026 में विभागीय परीक्षा, FIR से पहले होगी जांच

    पटवारियों की मांगों पर सरकार झुकी, आंदोलन स्थगित; 2026 में विभागीय परीक्षा, FIR से पहले होगी जांच

    भोपाल। मध्यप्रदेश में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे पटवारियों ने शासन की ओर से मिले आश्वासन के बाद फिलहाल अपनी हड़ताल स्थगित कर दी है। राजस्व विभाग की ओर से पटवारियों की प्रमुख मांगों पर कार्रवाई शुरू किए जाने के बाद मध्यप्रदेश पटवारी संघ ने राज्य स्तरीय बैठक में आंदोलन को रोकने का फैसला लिया। शासन ने पटवारियों की पदोन्नति से जुड़ी विभागीय नायब तहसीलदार परीक्षा कराने के साथ ही लंबित भुगतान जल्द जारी करने और शिकायतों के मामलों में सीधे कार्रवाई के बजाय पहले प्रारंभिक जांच करने के निर्देश दिए हैं। इससे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे पटवारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

    पटवारियों की पदोन्नति से जुड़ी विभागीय परीक्षा को लेकर भी स्थिति स्पष्ट हो गई है। कर्मचारी चयन मंडल ESB की ओर से वर्ष 2026 में होने वाली विभागीय नायब तहसीलदार परीक्षा की प्रक्रिया तय की गई है। इससे विभाग में काम कर रहे पात्र पटवारियों के लिए पदोन्नति का रास्ता खुल सकेगा। संघ की ओर से लंबे समय से विभागीय परीक्षा कराने की मांग उठाई जा रही थी। शासन की ओर से इस दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ाए जाने को आंदोलन स्थगित करने के प्रमुख कारणों में माना जा रहा है।

    पटवारियों के खिलाफ शिकायतों और FIR को लेकर भी राजस्व विभाग ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अब किसी पटवारी के खिलाफ शिकायत मिलने पर सीधे कानूनी कार्रवाई करने के बजाय पहले प्रारंभिक जांच की जाएगी। जांच में यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों के तथ्य सही पाए जाते हैं तभी आगे की कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना तथ्यों की पुष्टि किए किसी कर्मचारी के खिलाफ सीधे कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। इस फैसले को पटवारियों की लंबे समय से चली आ रही मांगों में एक महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है।
    पटवारियों के खिलाफ शिकायतों और FIR को लेकर भी राजस्व विभाग ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अब किसी पटवारी के खिलाफ शिकायत मिलने पर सीधे कानूनी कार्रवाई करने के बजाय पहले प्रारंभिक जांच की जाएगी। जांच में यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों के तथ्य सही पाए जाते हैं तभी आगे की कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना तथ्यों की पुष्टि किए किसी कर्मचारी के खिलाफ सीधे कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। इस फैसले को पटवारियों की लंबे समय से चली आ रही मांगों में एक महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है।

    इसके अलावा पटवारियों और राजस्व विभाग के मैदानी कर्मचारियों के लंबित भुगतान को लेकर भी सरकार ने कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं। प्रमुख सचिव राजस्व डॉ. ई. रमेश कुमार ने सभी जिला कलेक्टरों को संबंधित विभागों से समन्वय कर लंबित भुगतान जल्द कराने को कहा है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग और किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग से समन्वय कर अलग अलग योजनाओं में किए गए कार्यों के भुगतान की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

    लंबित भुगतान में स्वामित्व योजना से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य भी शामिल हैं। आबादी भूमि के सर्वे से लेकर अधिकार अभिलेख तैयार करने प्रारंभिक और अंतिम प्रकाशन दावा आपत्ति प्रक्रिया प्रिंटिंग और स्टेशनरी जैसे कामों के लिए लंबित राशि का भुगतान कराया जाना है। इसके अलावा 11वीं कृषि संगणना 2020-21 और छठी लघु सिंचाई गणना 2017-18 से जुड़े कार्यों के लिए भारत सरकार द्वारा निर्धारित मानदेय का भुगतान भी संबंधित गाइडलाइन के अनुसार कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    पटवारियों के स्थानांतरण से जुड़े लंबित मामलों का भी प्राथमिकता के आधार पर निराकरण करने का आश्वासन दिया गया है। शासन ने अन्य मांगों पर भी निर्धारित समय सीमा में निर्णय लेने की बात कही है। सरकार की ओर से मांगों पर कार्रवाई शुरू होने के बाद पटवारी संघ ने आंदोलन को फिलहाल स्थगित कर दिया है। अब पटवारियों की नजर शासन की ओर से किए गए आश्वासनों को जमीन पर लागू किए जाने पर रहेगी। यदि तय समय सीमा में मांगों पर कार्रवाई होती है तो इससे प्रदेश के हजारों पटवारियों को राहत मिल सकती है और राजस्व विभाग से जुड़ी सेवाओं पर भी इसका सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है।

  • MP में रजिस्ट्री सिस्टम में बड़ा बदलाव, अधिकारी खाली नहीं तो दूसरे जिले में जाएगी फाइल; घर बैठे दस्तावेज पंजीयन से घटेगा इंतजार

    MP में रजिस्ट्री सिस्टम में बड़ा बदलाव, अधिकारी खाली नहीं तो दूसरे जिले में जाएगी फाइल; घर बैठे दस्तावेज पंजीयन से घटेगा इंतजार


    मध्य प्रदेश  मध्य प्रदेश में प्रॉपर्टी और अन्य दस्तावेजों की रजिस्ट्री कराने वालों के लिए बड़ी राहत की खबर है। सरकार ने फेसलेस रजिस्ट्री व्यवस्था को अधिक तेज और प्रभावी बनाने के लिए नियमों में बदलाव किया है। अब प्रदेश का कोई भी सब रजिस्ट्रार किसी भी जिले की फेसलेस रजिस्ट्री और अन्य फेसलेस दस्तावेजों का पंजीयन कर सकेगा। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि किसी एक जिले में अधिकारी पर काम का दबाव अधिक होने के कारण रजिस्ट्री अटकने की स्थिति कम होगी। सिस्टम जरूरत के अनुसार दस्तावेज को ऐसे सब रजिस्ट्रार के पास भेज सकेगा जहां काम का भार अपेक्षाकृत कम हो। इससे लंबित मामलों का निपटारा तेजी से होने और आम लोगों का इंतजार कम होने की उम्मीद है।

    रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1908 की धारा 6 के तहत किए गए संशोधन के बाद पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग के क्षेत्रीय अधिकारियों का अधिकार क्षेत्र प्रदेश के सभी उपजिलों तक बढ़ा दिया गया है। हालांकि यह सुविधा केवल फेसलेस रजिस्ट्री और अन्य फेसलेस दस्तावेजों के पंजीयन के लिए लागू होगी। फरवरी 2026 में शुरू किए गए साइबर सब रजिस्ट्रार कार्यालय के माध्यम से अब तक प्रदेश में 10 हजार से अधिक दस्तावेजों का फेसलेस पंजीयन किया जा चुका है। नई व्यवस्था के बाद इस प्रक्रिया को और गति मिलने की उम्मीद है।

    इस व्यवस्था में लोगों को सबसे बड़ा फायदा यह मिलेगा कि रजिस्ट्री के लिए बार बार कार्यालय जाने की जरूरत कम होगी। किसी जिले में काम अधिक होने पर संबंधित दस्तावेज दूसरे उपलब्ध सब रजिस्ट्रार को भेजा जा सकेगा। यानी अधिकारी की अनुपलब्धता या अधिक कार्यभार के कारण फाइल के लंबे समय तक अटके रहने की समस्या कम होगी। इससे रजिस्ट्री प्रक्रिया तेज होने के साथ सरकारी संसाधनों का भी बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा।

    फेसलेस व्यवस्था के तहत रजिस्टर्ड लीज पट्टा विलेख प्रॉपर्टी एग्रीमेंट प्रशासन बंध पत्र शपथ पत्र दत्तक ग्रहण से जुड़े दस्तावेज बैंक गारंटी का नवीनीकरण विक्रय प्रमाण पत्र वसीयत से जुड़े दस्तावेज तलाक विलेख क्षतिपूर्ति बंध पत्र और शेयर आवंटन पत्र सहित करीब 75 प्रकार के दस्तावेजों का पंजीयन किया जा सकेगा। खास बात यह है कि इस प्रक्रिया के माध्यम से देश के किसी दूसरे जिले में बैठकर और विदेश से भी दस्तावेज पंजीकृत कराने की सुविधा उपलब्ध हो सकती है।

    फेसलेस रजिस्ट्री के लिए सुरक्षा और पहचान सत्यापन की प्रक्रिया भी अनिवार्य रखी गई है। पक्षकारों को आधार नंबर देना होगा और वर्चुअल प्रक्रिया के दौरान एआई सिस्टम के जरिए वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी। इसमें व्यक्ति को सिर दाएं बाएं और ऊपर नीचे घुमाने के निर्देश दिए जाएंगे। इसके बाद वोटर आईडी पासपोर्ट पैन कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस जैसे पहचान पत्रों में से किसी एक की जानकारी ली जाएगी। एआई सिस्टम वीडियो आधार फोटो और पहचान पत्र की तस्वीर का मिलान करेगा। सभी जानकारी सही पाए जाने के बाद ही साइबर रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

    इसके अलावा पक्षकार को यह घोषणा भी करनी होगी कि वह किसी दबाव में नहीं है और अपनी इच्छा से इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों के जरिए पंजीयन करा रहा है। इसके लिए ई केवाईसी और ई साइन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से रजिस्ट्री कार्यालयों में भीड़ घटेगी और आम नागरिकों को ज्यादा तेज पारदर्शी और सुविधाजनक सेवा मिल सकेगी। प्रॉपर्टी लेनदेन बढ़ने के बीच संपदा 2.0 पोर्टल में किए गए बदलावों से रजिस्ट्री प्रक्रिया को डिजिटल बनाने की दिशा में भी इसे अहम कदम माना जा रहा है।

  • BRICS सम्मेलन में दिखेगी मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, 125 कलाकार देंगे गौरवगाथा की शानदार प्रस्तुति

    BRICS सम्मेलन में दिखेगी मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, 125 कलाकार देंगे गौरवगाथा की शानदार प्रस्तुति


    भोपाल भोपाल में आयोजित हो रहा BRICS सांस्कृतिक सम्मेलन 2026 अब अपने महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच गया है। सम्मेलन के तीसरे दिन शुक्रवार को BRICS सदस्य और भागीदार देशों के संस्कृति मंत्रियों का भोपाल आगमन होगा। इस दौरान राजधानी में संस्कृति और कला का ऐसा संगम देखने को मिलेगा जिसमें भारत के साथ विभिन्न BRICS देशों की संगीत परंपराएं एक ही मंच पर नजर आएंगी। शाम को कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर मिंटो हॉल में BRICS सांस्कृतिक महोत्सव 2026 का भव्य आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम विभिन्न देशों के कलाकारों और संगीतकारों को एक साझा मंच पर लाकर सांस्कृतिक सहयोग और आपसी जुड़ाव का संदेश देगा।

    कार्यक्रम की शुरुआत सर्वे भवन्तु सुखिनः के मंगल आह्वान से होगी। इसके बाद कलर्स ऑफ इंडियन म्यूजिक के माध्यम से हिंदुस्तानी और कर्नाटक शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा प्रस्तुत की जाएगी। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण BRICS पीस सॉन्ग पीस इज द लैंग्वेज ऑफ द लैंड रहेगा। इसके जरिए विभिन्न BRICS देशों की संगीत विरासत और शांति के साझा संदेश को सुरों के माध्यम से सामने रखा जाएगा। बेलारूस ब्राजील चीन मिस्र इथियोपिया इंडोनेशिया ईरान रूस सऊदी अरब दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात की संगीत परंपराओं को भी इस आयोजन में स्थान मिलेगा। पीस टू ऑल हार्मनी टू ऑल और क्रेस्केंडो ऑफ यूनिटी जैसी आर्केस्ट्रा प्रस्तुतियां कार्यक्रम को और खास बनाएंगी।

    शाम का दूसरा बड़ा आकर्षण मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को समर्पित अमृतस्य मध्य प्रदेश एक अलौकिक सांस्कृतिक महायात्रा होगी। प्रसिद्ध कोरियोग्राफर मैत्रेयी पहाड़ी के निर्देशन में 125 से अधिक कलाकार इस भव्य प्रस्तुति के जरिए प्रदेश की ऐतिहासिक आध्यात्मिक और लोक परंपराओं को मंच पर जीवंत करेंगे। प्रस्तुति की शुरुआत ॐ की अनादि ध्वनि से होगी और इसके बाद भीमबेटका सांची और खजुराहो की विश्व धरोहर से लेकर चित्रकूट के राम पथ गमन और उज्जैन की कृष्ण लीला तक मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक यात्रा दिखाई जाएगी।

    ग्वालियर ओरछा और मांडू के ऐतिहासिक किलों की गाथा के साथ महेश्वरी और चंदेरी के प्रसिद्ध वस्त्र शिल्प तथा बैगा मटकी और बधाई जैसे लोक नृत्यों की झलक भी देखने को मिलेगी। भोपाल की झीलों उज्जैन के बाबा महाकाल ओंकारेश्वर और मां नर्मदा की महाआरती के जरिए प्रदेश की आध्यात्मिक विरासत को भी प्रस्तुत किया जाएगा। इसी दौरान अतिथियों को सिंहस्थ कुंभ 2028 के लिए सांस्कृतिक और आध्यात्मिक निमंत्रण भी दिया जाएगा। कार्यक्रम के बाद मध्य प्रदेश सरकार की ओर से रात्रिभोज का आयोजन होगा जिसमें मेहमानों को प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद भी मिलेगा।

    8 अगस्त को भारत की अध्यक्षता में तीसरी BRICS संस्कृति मंत्रियों की बैठक आयोजित होगी। इसमें सांस्कृतिक विरासत संग्रहालय रचनात्मक अर्थव्यवस्था सांस्कृतिक आदान प्रदान क्षमता निर्माण और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे विषयों पर चर्चा होगी। बैठक के अंत में BRICS संस्कृति मंत्रियों की घोषणा अपनाई जाएगी जिसमें भविष्य के सांस्कृतिक सहयोग का रोडमैप तय होगा।

    इसके बाद विदेशी प्रतिनिधिमंडल सांची पहुंचेगा जहां विश्व प्रसिद्ध सांची स्तूप और बौद्ध विरासत का अवलोकन किया जाएगा। प्रतिनिधियों के लिए चेतियागिरी मंदिर दर्शन योग और ध्यान सत्र के साथ 3D प्रोजेक्शन मैपिंग और लाइट एंड साउंड शो भी आयोजित किया जाएगा। 9 अगस्त को इच्छुक विदेशी प्रतिनिधियों के लिए भीमबेटका शैलाश्रय का वैकल्पिक भ्रमण रखा गया है। इस तरह भोपाल का BRICS सम्मेलन केवल बैठकों तक सीमित न रहकर भारत और मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का बड़ा अवसर बन रहा है।

  • MP के 48 जिलों में सूखे जैसे हालात, 46% तक कम बारिश, जबलपुर में धान के खेतों में पड़ी दरारें

    MP के 48 जिलों में सूखे जैसे हालात, 46% तक कम बारिश, जबलपुर में धान के खेतों में पड़ी दरारें


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसूनी सीजन में कम बारिश होने से किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। प्रदेश के 55 में से 48 जिलों में सूखे जैसे हालात बने हुए हैं। इन जिलों में सामान्य से 1 से 46 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है। बारिश की कमी का असर जलस्रोतों के साथ-साथ खरीफ फसलों पर भी दिखाई देने लगा है। जबलपुर में धान के खेतों में दरारें पड़ गई हैं, जबकि उज्जैन संभाग में सोयाबीन की फसल पर इल्ली का असर देखा जा रहा है।

    हालांकि, मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों में प्रदेश के कुछ हिस्सों में तेज बारिश की संभावना जताई है। इससे बारिश की कमी कुछ हद तक दूर होने की उम्मीद है।

    पूर्वी MP में 23% कम बारिश
    मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश के पूर्वी हिस्से के जबलपुर, शहडोल, रीवा और सागर संभाग में सामान्य से 23 प्रतिशत कम बारिश हुई है। अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़ और उमरिया में बारिश की कमी 1 से 46 प्रतिशत तक है।

    वहीं, पश्चिमी मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल संभाग में औसत से 16 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, भोपाल, दतिया, धार, गुना, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में भी बारिश सामान्य से कम रही है।

    सिर्फ 7 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
    प्रदेश में केवल बड़वानी, ग्वालियर, भिंड, बुरहानपुर, देवास, खंडवा और खरगोन ऐसे जिले हैं, जहां सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। प्रदेश में सामान्य बारिश का आंकड़ा 37.3 इंच है। वहीं भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में सामान्य बारिश करीब 39 इंच तक मानी जाती है।

    धान और सोयाबीन की फसल पर असर
    कम बारिश वाले क्षेत्रों में खरीफ सीजन की प्रमुख फसल सोयाबीन, धान और मक्का है। सब्जियों की खेती भी होती है, लेकिन बारिश की कमी से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

    जबलपुर के पाटन क्षेत्र में धान के खेतों में नमी की कमी के कारण दरारें पड़ने लगी हैं। यहां अब तक करीब 16.3 इंच बारिश हुई है, जबकि इस अवधि तक 23.6 इंच बारिश होनी चाहिए थी।

    उज्जैन संभाग में भी सोयाबीन की फसल पर इल्ली का असर सामने आने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। कम बारिश के बीच फसल में कीट प्रकोप ने परेशानी और बढ़ा दी है।

    अगले 3 दिन बारिश की उम्मीद
    मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों में प्रदेश के उत्तरी हिस्से के कुछ जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई है। शुक्रवार को श्योपुर, मुरैना, शिवपुरी, गुना, टीकमगढ़, छतरपुर और सागर में भारी बारिश का अलर्ट है।

    इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, अलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, दतिया, अशोकनगर, भिंड, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, पन्ना, दमोह और निवाड़ी में हल्की बारिश होने की संभावना है।

    अब तक 19% बारिश कम
    मौसम विभाग के अनुसार, मध्य प्रदेश में अब तक औसतन 16.3 इंच (419.5 मिमी) बारिश हुई है, जबकि इस अवधि तक 20.5 इंच (519.8 मिमी) पानी गिरना चाहिए था। इस लिहाज से प्रदेश में करीब 4.2 इंच यानी 19 प्रतिशत बारिश कम हुई है। बारिश की यह कमी अब जलस्रोतों के साथ खेती पर भी साफ दिखाई देने लगी है।

  • स्थानीय निकायों को आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी, जनता से सुझाव लेने के लिए जल्द शुरू होगा पोर्टल

    स्थानीय निकायों को आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी, जनता से सुझाव लेने के लिए जल्द शुरू होगा पोर्टल

    उज्जैन। मध्यप्रदेश के पंचायत और नगरीय निकायों को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। छठे मध्यप्रदेश वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया ने बताया कि जल्द ही एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया जाएगा, जिसके माध्यम से आम नागरिक भी स्थानीय निकायों के विकास और वित्तीय मजबूती के लिए अपने सुझाव दे सकेंगे। फिलहाल आयोग संभाग स्तर पर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से सुझाव जुटा रहा है।

    उज्जैन प्रवास के दौरान सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत करते हुए पवैया ने बताया कि आयोग अब तक छह संभागों का दौरा कर चुका है। पहले चरण में सांसदों, विधायकों, नगरीय निकायों और पंचायतों के प्रतिनिधियों तथा प्रशासनिक अधिकारियों से सुझाव लिए जा रहे हैं। सभी नौ संभागों से प्राप्त सुझावों के आधार पर आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा, जिसे राज्यपाल को सौंपा जाएगा। इसी रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार स्थानीय निकायों को वित्तीय आवंटन करेगी।

    उन्होंने बताया कि अब तक कई उपयोगी सुझाव मिले हैं। इनमें प्रत्येक पंचायत और नगरीय निकाय में सोलर एनर्जी प्लांट स्थापित करने का सुझाव विशेष रूप से प्रभावी माना गया है। उनका कहना है कि वर्तमान में स्थानीय निकायों की बड़ी राशि स्ट्रीट लाइट और नल-जल योजनाओं के बिजली बिल पर खर्च होती है। यदि निकाय स्वयं बिजली उत्पादन करें तो न केवल उनका खर्च कम होगा, बल्कि अतिरिक्त बिजली बेचकर आय भी अर्जित कर सकेंगे। उन्होंने इंदौर नगर निगम का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां सोलर ऊर्जा और कचरे से बायोगैस बनाकर आय बढ़ाने की दिशा में सफल प्रयास किए जा रहे हैं।

    केंद्रीय वित्त आयोग की अनुदान राशि में कटौती के सवाल पर पवैया ने स्पष्ट किया कि फंड में कमी नहीं की गई है। बल्कि पहले की तुलना में अधिक राशि उपलब्ध कराई जा रही है। हालांकि अब अनुदान प्राप्त करने के लिए निकायों के कार्यों की वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट अनिवार्य कर दी गई है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।

    उन्होंने बताया कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से सुझाव लेने के बाद पंचायत और जनपद स्तर पर भी संवाद किया जाएगा। इसके बाद आम नागरिकों के सुझाव प्राप्त करने के लिए पोर्टल शुरू किया जाएगा। साथ ही आर्थिक विशेषज्ञों से भी परामर्श लिया जाएगा, ताकि स्थानीय निकायों को आत्मनिर्भर बनाने और विकास कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने वाली प्रभावी सिफारिशें तैयार की जा सकें।

    बैठक के दौरान कई अन्य सुझाव भी सामने आए। नागदा-खाचरौद विधायक डॉ. तेजबहादुर सिंह चौहान ने ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश के दौरान आवश्यक कच्चे कार्यों, जैसे मुरम और चूरी डालने की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा। वहीं कांग्रेस विधायक दिनेश जैन बोस और महेश परमार ने भी आयोग के समक्ष अपने सुझाव प्रस्तुत किए।

  • प्रमोशन में आरक्षण पर नई बहस, सरकार के डेटा को कोर्ट में चुनौती दे सकता है सामान्‍य वर्ग

    प्रमोशन में आरक्षण पर नई बहस, सरकार के डेटा को कोर्ट में चुनौती दे सकता है सामान्‍य वर्ग

    जबलपुर। मध्य प्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण का मामला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। फिलहाल हाईकोर्ट की विशेष खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले की स्थिति साफ होने के बाद ही आगे सुनवाई होगी। अदालत ने सरकार और सभी पक्षों को शीर्ष अदालत में शीघ्र सुनवाई का आग्रह करने की सलाह दी है।

    हालांकि न्यायिक प्रक्रिया फिलहाल रुकी हुई है, लेकिन दोनों पक्ष अपनी कानूनी तैयारियों में जुटे हैं। जानकारी के अनुसार, अगली सुनवाई में सरकार द्वारा प्रस्तुत क्वांटिफिएबल डेटा सबसे बड़ा विवाद का विषय बन सकता है।

    सरकार के आंकड़ों पर उठेंगे सवाल
    सामान्य वर्ग की ओर से अदालत में यह तर्क रखा जाएगा कि कई सरकारी विभागों में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) का प्रतिनिधित्व पहले से पर्याप्त है। ऐसे में पदोन्नति में आरक्षण जारी रखने का आधार क्या है, इस पर सरकार से जवाब मांगा जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, सामान्य वर्ग विभिन्न विभागों के आंकड़ों के जरिए यह साबित करने की तैयारी में है कि जहां पर्याप्त प्रतिनिधित्व मौजूद है, वहां भी आरक्षण का लाभ जारी रखा गया।

    X और Y फैक्टर पर रहेगा फोकस
    मामले में सबसे अहम मुद्दा सरकार द्वारा तय किए गए X और Y फैक्टर हैं, जिनके आधार पर प्रमोशन में आरक्षण का प्रतिशत निर्धारित किया गया है।

    SC वर्ग के लिए: कुल पद × (16 × X) ÷ 100
    ST वर्ग के लिए: कुल पद × (20 × Y) ÷ 100

    यदि X या Y का मान 1 रखा जाता है तो पूरा आरक्षण लागू होता है, जबकि कम मान होने पर आरक्षण का प्रतिशत भी घट जाता है। सामान्य वर्ग का आरोप है कि कई विभागों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व होने के बावजूद X और Y का मान कम नहीं किया गया, जिससे आरक्षण का प्रतिशत अधिक बना रहा।

    प्रक्रिया पर भी उठेंगे सवाल
    याचिकाकर्ताओं का कहना है कि X और Y तय करने के लिए कोई स्पष्ट और समान मानक नहीं अपनाया गया। समान परिस्थितियों वाले विभागों में अलग-अलग मान निर्धारित किए गए, जिससे पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।

    प्रशासनिक दक्षता भी बनेगी मुद्दा

    अगली सुनवाई में प्रशासनिक दक्षता का मुद्दा भी प्रमुख रहेगा। सामान्य वर्ग का पक्ष है कि केवल एसीआर (वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट) के आधार पर दक्षता का आकलन पर्याप्त नहीं माना जा सकता। उनका तर्क है कि संविधान के अनुच्छेद-335 के अनुरूप कार्यक्षमता का व्यापक मूल्यांकन होना चाहिए।

    पांच साल तक एक ही फॉर्मूले पर आपत्ति

    सरकार द्वारा X और Y फैक्टर को पांच वर्ष तक लागू रखने के प्रावधान पर भी सवाल उठाए जाएंगे। सामान्य वर्ग का कहना है कि प्रतिनिधित्व की स्थिति समय के साथ बदलती रहती है, इसलिए पुराने आंकड़ों के आधार पर लंबे समय तक एक ही व्यवस्था लागू रखना उचित नहीं है।

    सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी नजर
    फिलहाल पूरे मामले की दिशा सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर निर्भर है। हाईकोर्ट ने भी संकेत दिया है कि शीर्ष अदालत की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। हालांकि, माना जा रहा है कि अगली सुनवाई में सरकार के डेटा, X-Y फैक्टर और प्रशासनिक दक्षता जैसे मुद्दों पर विस्तृत और अहम बहस देखने को मिल सकती है, जिसका असर हजारों सरकारी कर्मचारियों पर पड़ सकता है।

  • भोपाल के कलियासोत में पौधारोपण अभियान पर उठे गंभीर सवाल, नए पौधे लगाने के चक्कर में उजड़े पुराने पेड़

    भोपाल के कलियासोत में पौधारोपण अभियान पर उठे गंभीर सवाल, नए पौधे लगाने के चक्कर में उजड़े पुराने पेड़

    मध्य प्रदेश।  की राजधानी भोपाल में हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए चलाए जा रहे पौधारोपण अभियान पर एक बड़ी लापरवाही ने सवालिया निशान लगा दिए हैं। भोपाल के कलियासोत क्षेत्र में नए पौधे रोपने की आड़ में वर्षों पुराने और फलदायी हरे-भरे पेड़ों को काटे जाने का गंभीर मामला प्रकाश में आया है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कार्य योजना के तहत केवल सूखी झाड़ियों को साफ किया जाना था, परंतु लापरवाही बरतते हुए विकसित पेड़ों पर भी आरी चला दी गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय नागरिकों के अनुसार, पौधारोपण स्थल पर नीम, शीशम और गूलर जैसे पर्यावरण के लिए बेहद उपयोगी और घने पेड़ पहले से मौजूद थे। कटाई के बाद वहां केवल कटे हुए पेड़ों के ठूंठ ही दिखाई दे रहे हैं, जबकि बेशकीमती लकड़ियों को रातों-रात हटा दिया गया। इस मनमानी से आक्रोशित क्षेत्रवासियों ने पर्यावरण संरक्षण के नाम पर हो रहे इस नुकसान का जमकर विरोध किया और प्रशासनिक अधिकारियों से दोषियों पर सख्त कदम उठाने की मांग की।

    मामला गरमाने के बाद भोपाल नगर निगम प्रशासन ने त्वरित संज्ञान लेते हुए मौके की जांच कराई। शुरुआती जांच में संबंधित कार्य एजेंसी और ठेकेदार की घोर लापरवाही उजागर हुई, जिसके बाद ठेकेदार पर साढ़े तीन लाख रुपये का भारी जुर्माना आयद किया गया है। इसके अतिरिक्त, इस बात की भी गहनता से पड़ताल की जा रही है कि कार्य स्थल पर तैनात अधिकारियों द्वारा पर्यवेक्षण में कोई ढिलाई बरती गई थी या नहीं।

    पर्यावरण विशेषज्ञों ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि नए पौधे लगाने के उत्साह में पुराने और छायादार पेड़ों को नष्ट करना किसी भी दृष्टि से तर्कसंगत नहीं है। एक परिपक्व पेड़ स्थानीय जैव विविधता, पक्षियों के आवास और क्षेत्र में ऑक्सीजन के स्तर को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे विकसित पेड़ों को काटकर नए छोटे पौधे लगाना पर्यावरण संतुलन को लंबे समय के लिए प्रभावित कर सकता है।

    नागरिकों ने मांग उठाई है कि मध्य प्रदेश के शहरी इलाकों में किसी भी पौधारोपण परियोजना को शुरू करने से पहले विशेषज्ञों द्वारा भू-मूल्यांकन अनिवार्य किया जाए। स्थानीय प्रशासन को स्पष्ट गाइडलाइन जारी करनी चाहिए ताकि केवल बाधक झाड़ियों को ही हटाया जाए और प्राकृतिक संपदा को कोई क्षति न पहुंचे। लोगों का मानना है कि केवल आंकड़े पूरे करने के लिए की जाने वाली ऐसी कार्रवाइयों से पर्यावरण को लाभ मिलने के बजाय भारी नुकसान पहुंचता है।

    फिलहाल नगर निगम की इस दंडात्मक कार्रवाई के बाद पूरे प्रदेश में यह विषय चर्चा का केंद्र बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि विभागीय जांच पूरी होने के बाद इसमें जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या गाज गिरती है। वहीं, स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि इस घटना से सबक लेते हुए भविष्य में पौधारोपण अभियानों के दौरान कड़ी निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।