Category: Madhya Pradesh

  • MP में दशहरे पर शस्त्र पूजन की परंपरा, भोपाल पुलिस लाइन में जुटे जनप्रतिनिधि और पुलिस अधिकारी, सत्य-धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश

    MP में दशहरे पर शस्त्र पूजन की परंपरा, भोपाल पुलिस लाइन में जुटे जनप्रतिनिधि और पुलिस अधिकारी, सत्य-धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश


    भोपाल । विजयादशमी के अवसर पर मध्य प्रदेश में मंगलवार को शस्त्र पूजन के आयोजन किए गए। राजधानी भोपाल में नेहरू नगर स्थित पुलिस लाइन ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री विश्वास सारंग और सांसद आलोक शर्मा सहित कई जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल हुए। इस दौरान पारंपरिक विधि-विधान से शस्त्रों का पूजन किया गया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने सुख-समृद्धि शांति और उन्नति की कामना की। विजयादशमी पर आयोजित इस कार्यक्रम में सनातन परंपराओं और शस्त्र पूजन के महत्व पर भी जोर दिया गया।

    भोपाल पुलिस लाइन में आयोजित कार्यक्रम में महापौर मालती राय विधायक भगवानदास सबनानी कमिश्नर कर्मवीर शर्मा पुलिस कमिश्नर संजय कुमार और संयुक्त पुलिस कमिश्नर शैलेंद्र सिंह चौहान भी मौजूद रहे। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने पूजा में भाग लिया। विजयादशमी पर शस्त्र पूजन की परंपरा को शक्ति साहस और सुरक्षा के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। इसी परंपरा के तहत भोपाल में भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने समाज और प्रदेश में शांति तथा समृद्धि बनाए रखने की कामना की।

    मंत्री विश्वास सारंग ने विजयादशमी को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक पर्व बताया। उन्होंने कहा कि यह त्योहार पूरे विश्व में उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। उनके मुताबिक विजयादशमी लोगों को सत्य धर्म और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। उन्होंने शस्त्रों को शक्ति साहस और राष्ट्र की सुरक्षा का प्रतीक बताते हुए कहा कि भारतीय परंपराओं में शस्त्र पूजन का विशेष महत्व है। यह परंपरा लोगों को अपनी संस्कृति और मूल्यों से जुड़े रहने का संदेश देती है।

    सारंग ने कहा कि सनातन परंपराएं केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं हैं बल्कि वे लोगों को अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का भी बोध कराती हैं। विजयादशमी के अवसर पर शस्त्रों की पूजा इसी सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इस दिन लोग बुराई पर अच्छाई की जीत का संकल्प लेते हैं और समाज में सकारात्मकता तथा सद्भाव बनाए रखने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं।

    भोपाल के अलावा मध्य प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी विजयादशमी पर शस्त्र पूजन के कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन आयोजनों में पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना की गई। शस्त्र पूजन की परंपरा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसमें शक्ति के साथ जिम्मेदारी और सुरक्षा के भाव को भी जोड़ा जाता है। पुलिस लाइन में आयोजित कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मौजूदगी ने आयोजन को औपचारिक स्वरूप दिया।

    विजयादशमी का पर्व देशभर में अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है। कहीं रावण दहन के जरिए बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है तो कहीं शस्त्र पूजन के माध्यम से शक्ति और कर्तव्य के महत्व को याद किया जाता है। भोपाल में आयोजित कार्यक्रम भी इसी परंपरा का हिस्सा रहा। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने प्रदेश में सुख-समृद्धि शांति और उन्नति की कामना की।

  • राम मंदिर के चंदे पर दिग्विजय की पदयात्रा को लेकर हर्षा का बयान, पूछा- पहले मंदिर निर्माण पर उत्साह क्यों नहीं दिखाया

    राम मंदिर के चंदे पर दिग्विजय की पदयात्रा को लेकर हर्षा का बयान, पूछा- पहले मंदिर निर्माण पर उत्साह क्यों नहीं दिखाया


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मॉडल से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की उज्जैन से अयोध्या तक प्रस्तावित सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा पर सवाल उठाए हैं। हर्षा ने दिग्विजय सिंह का सीधे नाम लिए बिना उन पर निशाना साधते हुए कहा कि जब अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हुआ था तब वैसा उत्साह और खुशी दिखाई नहीं दी जैसी अब मंदिर के चंदे को लेकर सवाल उठाने में नजर आ रही है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि चुनाव नजदीक आने पर ही भगवान राम की याद क्यों आ रही है और अब उन्हें इंसाफ दिलाने की बात क्यों की जा रही है।

    दशहरे से पहले दिए गए अपने बयान में हर्षा रिछारिया ने कहा कि एक ओर देशभर में विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जा रहा है वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश के एक पूर्व मुख्यमंत्री उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा निकालने की तैयारी कर रहे हैं। हर्षा के मुताबिक इस यात्रा का उद्देश्य राम मंदिर के निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाना है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब संबंधित नेता भगवान राम को इंसाफ दिलाने का संकल्प लेकर यात्रा पर निकल रहे हैं।

    हर्षा ने राम मंदिर निर्माण से जुड़ी लंबी कानूनी लड़ाई का जिक्र करते हुए विपक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण के फैसले के समय विरोध किया गया था और अतीत में भगवान राम के अस्तित्व तथा रामसेतु को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। हर्षा का कहना है कि जब राम मंदिर का निर्माण हुआ तब वैसी खुशी और उत्साह दिखाई नहीं दिया जैसा अब मंदिर के चंदे से जुड़े आरोपों को लेकर दिखाया जा रहा है। हालांकि मंदिर निर्माण और उससे जुड़े राजनीतिक विवादों पर अलग-अलग दलों और नेताओं के अपने-अपने विचार रहे हैं।

    अपने बयान में हर्षा ने यात्रा के समय और उसके पीछे की मंशा को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि राम मंदिर बनने के बाद अब अचानक भगवान राम की शरण में जाने की जरूरत क्यों महसूस हो रही है। उन्होंने चुनाव नजदीक होने या किसी व्यक्ति को पद दिलाने जैसी संभावनाओं का उल्लेख करते हुए यात्रा के उद्देश्य पर सवाल उठाया। ये हर्षा के राजनीतिक आरोप और उनकी व्यक्तिगत व्याख्या हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यात्रा निकालने वाले की मंशा पूरी होगी या नहीं यह उन्हें नहीं पता लेकिन देश के लिए जो उचित होगा वही होना चाहिए।

    बयान के आखिर में हर्षा रिछारिया ने दिग्विजय सिंह को यात्रा के लिए शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने कहा कि प्रयास करना चाहिए और अंत में हर व्यक्ति राम की शरण में जाता है। उनके इस बयान के बाद दिग्विजय सिंह की प्रस्तावित पदयात्रा को लेकर राजनीतिक और धार्मिक मुद्दों पर चर्चा तेज हो गई है।

    दिग्विजय सिंह ने उज्जैन से अयोध्या तक करीब 950 से 1000 किलोमीटर की पदयात्रा का ऐलान किया है। यात्रा का उद्देश्य राम मंदिर के लिए जुटाए गए चंदे में कथित अनियमितताओं के मुद्दे को उठाना बताया गया है। प्रस्तावित यात्रा में विभिन्न स्थानों पर लोगों और सामाजिक संगठनों के जुड़ने की संभावना है। हर्षा रिछारिया के बयान ने इस यात्रा को लेकर राजनीतिक बहस को एक नया मोड़ दिया है। अब इस मुद्दे पर संबंधित नेताओं की प्रतिक्रियाओं और यात्रा के दौरान उठाए जाने वाले सवालों पर नजर रहेगी।

  • नरवर में माता विसर्जन जुलूस के दौरान अचानक शुरू हुई मारपीट, मोटे महादेव मंदिर के पास हंगामा, अब तक शिकायत नहीं

    नरवर में माता विसर्जन जुलूस के दौरान अचानक शुरू हुई मारपीट, मोटे महादेव मंदिर के पास हंगामा, अब तक शिकायत नहीं


    शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के नरवर कस्बे में माता की प्रतिमाओं के विसर्जन जुलूस के दौरान दो गुटों के बीच विवाद हो गया। मंगलवार को हुए इस घटनाक्रम में दोनों पक्षों के युवकों के बीच जमकर लात-घूंसे चले। विवाद बढ़ने से मौके पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। हालात को नियंत्रित करने के लिए वहां मौजूद पुलिसकर्मियों को हस्तक्षेप करना पड़ा। स्थिति संभालने के दौरान पुलिस ने लाठियां चलाकर दोनों पक्षों को अलग किया और झगड़ा शांत कराया। घटना मोटे महादेव मंदिर के पास पेट्रोल पंप के सामने की बताई जा रही है।

    जानकारी के अनुसार नरवर में नवरात्र के अवसर पर स्थापित माता की प्रतिमाओं को नवमी की शाम नगर भ्रमण कराया जा रहा था। इसके बाद प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए लखना तालाब ले जाया जा रहा था। जुलूस में श्रद्धालु शामिल थे और प्रतिमाओं को विसर्जन स्थल तक ले जाने की तैयारी चल रही थी। इसी दौरान जुलूस में शामिल दो पक्षों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी शुरू हो गई। शुरुआत में हुआ विवाद देखते ही देखते बढ़ गया और दोनों पक्षों के युवक आमने-सामने आ गए।

    कुछ ही देर में विवाद ने मारपीट का रूप ले लिया। दोनों ओर से युवकों के बीच लात-घूंसे चलने लगे। जुलूस के दौरान अचानक हुए इस घटनाक्रम से वहां मौजूद लोगों में हलचल मच गई। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप किया। पुलिसकर्मियों ने दोनों पक्षों को अलग करने और भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास किया। विवाद बढ़ने पर पुलिस को लाठियां चलानी पड़ीं। इसके बाद झगड़े को शांत कराया गया और मौके पर स्थिति को संभाला गया।

    माता की प्रतिमाओं का विसर्जन धार्मिक आस्था से जुड़ा आयोजन होता है जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। ऐसे में जुलूस के बीच मारपीट की घटना से आयोजन के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर सवाल उठे हैं। हालांकि विवाद किस बात को लेकर शुरू हुआ और इसमें शामिल लोगों के बीच पहले से कोई रंजिश थी या नहीं इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार दोनों पक्षों के बीच कहासुनी के बाद मारपीट शुरू हुई थी। घटना के पीछे की वास्तविक वजह पुलिस जांच या संबंधित पक्षों के बयान सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    नरवर थाना प्रभारी अरुण प्रताप सिंह ने बताया कि घटना के संबंध में अब तक किसी भी पक्ष की ओर से थाने में शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। शिकायत नहीं मिलने के कारण फिलहाल मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। पुलिस की मौजूदगी में विवाद शांत करा दिया गया था। यदि किसी पक्ष की ओर से शिकायत दी जाती है तो उसके आधार पर मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।

    फिलहाल घटना में शामिल युवकों की पहचान और विवाद की वजह को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। माता विसर्जन जुलूस के दौरान हुई इस मारपीट ने धार्मिक आयोजन के बीच तनाव की स्थिति पैदा कर दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर हालात नियंत्रित किए और जुलूस के दौरान व्यवस्था संभाली। अब तक किसी पक्ष की शिकायत दर्ज नहीं होने के कारण मामले में अगला कदम शिकायत और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर तय होगा।

  • खेत से घर लौट रहा किसान आग की चपेट में आया, बिजली के तारों से सुलगी मक्के की करप, लाखों के नुकसान की आशंका

    खेत से घर लौट रहा किसान आग की चपेट में आया, बिजली के तारों से सुलगी मक्के की करप, लाखों के नुकसान की आशंका


    शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में मंगलवार सुबह एक हादसे में किसान की मक्के की पूरी करप जलकर राख हो गई। घटना इंदार थाना क्षेत्र के बामौर खुर्द गांव की है। यहां खेत से मक्के की करप ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर घर ले जा रहे किसान मोहन सिंह कुशवाह की ट्रॉली बिजली के तारों के संपर्क में आ गई। तार छूते ही सूखी मक्के की करप में आग लग गई और देखते ही देखते लपटें तेज हो गईं। हालांकि समय रहते ग्रामीणों ने मोर्चा संभाल लिया और जलती हुई करप को ट्रॉली से नीचे गिराना शुरू कर दिया। इससे आग ट्रैक्टर तक नहीं पहुंच सकी और चालक की जान बच गई।

    जानकारी के अनुसार किसान मोहन सिंह कुशवाह अपने खेत से मक्के की करप ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर घर लौट रहे थे। रास्ते में बिजली के खंभों पर लटके पंप लाइन के तार ट्रॉली में भरी करप से टकरा गए। तारों के संपर्क में आते ही सूखी फसल ने आग पकड़ ली। कुछ ही देर में ट्रॉली में भरी करप जलने लगी। अचानक आग भड़कने से मौके पर अफरा तफरी मच गई। किसान के सामने एक ओर उसकी मेहनत से जुटाई गई फसल जलने का खतरा था तो दूसरी ओर आग के ट्रैक्टर तक पहुंचने की आशंका भी बनी हुई थी।

    घटना के दौरान आसपास मौजूद ग्रामीण तुरंत मदद के लिए आगे आए। उन्होंने लाठियों की मदद से ट्रॉली में जल रही करप को नीचे गिराना शुरू किया। ग्रामीणों ने तेजी से एक के बाद एक जलती हुई फसल को नीचे गिराया ताकि आग ट्रैक्टर और ट्रॉली के दूसरे हिस्सों तक न फैल सके। उनकी तत्परता से आग को वाहन तक पहुंचने से रोकने में मदद मिली। इससे ट्रैक्टर-ट्रॉली जलने से बच गए और चालक भी सुरक्षित रहा। यदि आग वाहन तक पहुंच जाती तो बड़ा हादसा हो सकता था।

    हालांकि इस प्रयास के बावजूद किसान की मक्के की पूरी करप जलकर राख हो गई। फसल के नष्ट होने से किसान को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। मक्के की करप पशुओं के चारे सहित खेती से जुड़े अन्य कामों में उपयोग की जाती है। ऐसे में पूरी करप का जल जाना किसान के लिए परेशानी बढ़ाने वाला है। नुकसान की वास्तविक कीमत कितनी है इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।

    इस घटना ने गांवों में खेतों से फसल और चारा ले जाते समय बिजली की लाइनों से होने वाले खतरे को भी उजागर किया है। ट्रैक्टर-ट्रॉली में ऊंचाई तक भरी सूखी फसल बिजली के तारों के संपर्क में आ जाए तो आग लगने का जोखिम बढ़ जाता है। खासकर पंप लाइन के तार यदि नीचे लटक रहे हों तो किसानों और ग्रामीणों के लिए खतरा पैदा हो सकता है। ऐसे में बिजली लाइनों की उचित ऊंचाई और रखरखाव पर ध्यान देना जरूरी है। फिलहाल इस हादसे में राहत की बात यह रही कि किसान की जान बच गई और ट्रैक्टर-ट्रॉली सुरक्षित रहे लेकिन उसकी पूरी मक्के की करप जलने से बड़ा नुकसान हुआ।

  • शिवपुरी में नवजात की मौत से मचा हड़कंप, नाले में मिला महज 775 ग्राम वजन का बालक, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

    शिवपुरी में नवजात की मौत से मचा हड़कंप, नाले में मिला महज 775 ग्राम वजन का बालक, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार


    शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी में मंगलवार को जिला अस्पताल के पिछले गेट के पास नाले में नवजात बालक का शव मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। घटना की जानकारी मिलते ही कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और नवजात के शव को नाले से बाहर निकलवाकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक नवजात की नाभि पर कॉर्ड क्लैंप लगा हुआ था। इससे उसके अस्पताल में जन्म लेने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि बालक का जन्म शिवपुरी जिला अस्पताल में हुआ था या किसी दूसरे अस्पताल में। पुलिस इस संबंध में जानकारी जुटा रही है और नवजात के माता-पिता की पहचान करने का प्रयास कर रही है।

    जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल के पिछले गेट के पास स्थित नाले में नवजात का शव दिखाई देने के बाद पुलिस को सूचना दी गई थी। मौके पर पहुंची पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव को बाहर निकलवाया। जांच के दौरान नवजात का वजन केवल 775 ग्राम पाया गया। इतना कम वजन होने के कारण उसके जन्म के समय की स्थिति और मौत से जुड़ी परिस्थितियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि मौत कब और किन परिस्थितियों में हुई यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।

    जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. आरपी सिंह के मुताबिक नवजात का वजन बेहद कम था। इतने कम वजन वाले शिशु के जीवित रहने की संभावना कम होती है। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले दो दिनों के दौरान जिला अस्पताल में कोलारस सिरसौद और पिछोर क्षेत्र से जुड़े तीन नवजात की मौत हुई थी। इन बच्चों के परिजन उनके शव अपने साथ ले गए थे। अब यह पता लगाया जा रहा है कि नाले में मिले नवजात का उन घटनाओं से कोई संबंध है या नहीं। फिलहाल दोनों मामलों के बीच संबंध होने की पुष्टि नहीं हुई है।

    पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि नवजात को नाले में कैसे और किन परिस्थितियों में छोड़ा गया। नाभि पर कॉर्ड क्लैंप मिलने के कारण उसके अस्पताल में जन्म लेने की संभावना पर ध्यान दिया जा रहा है। जांच के तहत आसपास के अस्पतालों में जन्म और नवजात से संबंधित रिकॉर्ड की जानकारी जुटाई जा सकती है। इसके साथ ही घटनास्थल के आसपास की परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर भी जानकारी जुटाने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस का उद्देश्य नवजात की पहचान और उसके परिवार तक पहुंचना है।

    कोतवाली थाने के एसआई सुमित शर्मा ने बताया कि मामले में मर्ग कायम कर शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। फिलहाल पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि नवजात का जन्म कहां हुआ था और उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई। घटना ने अस्पताल परिसर के आसपास सुरक्षा और नवजात की पहचान से जुड़े सवाल खड़े किए हैं। हालांकि जांच पूरी होने और रिपोर्ट सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • उज्जैन में विजयादशमी पर संघ का पथ संचलन, बैंड और लाठी के साथ कदमताल करते निकले स्वयंसेवक, 25 अक्टूबर तक होंगे आयोजन

    उज्जैन में विजयादशमी पर संघ का पथ संचलन, बैंड और लाठी के साथ कदमताल करते निकले स्वयंसेवक, 25 अक्टूबर तक होंगे आयोजन


    उज्जैन। विजयादशमी के अवसर पर मंगलवार को उज्जैन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS का पथ संचलन निकाला गया। शहर की 65 बस्तियों से स्वयंसेवक पारंपरिक वेशभूषा में अनुशासित तरीके से कदमताल करते हुए विभिन्न मार्गों से गुजरे। इस दौरान शहर में कई जगह उत्साह का माहौल देखने को मिला। स्थानीय रहवासियों ने रंगोली बनाकर स्वयंसेवकों का स्वागत किया। कई स्थानों पर लोगों ने फूल बरसाए और सड़क के दोनों ओर खड़े होकर संचलन में शामिल स्वयंसेवकों का अभिवादन किया। विजयादशमी पर आयोजित इस कार्यक्रम में अनुशासन और सामूहिक सहभागिता प्रमुख रूप से दिखाई दी।

    पथ संचलन की शुरुआत से पहले संबंधित बस्तियों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें संघ के गीत अमृत वचन बौद्धिक और प्रार्थना शामिल रहे। इन कार्यक्रमों के बाद स्वयंसेवक निर्धारित मार्गों पर संचलन के लिए निकले। सभी स्वयंसेवक एक साथ कदमताल करते हुए आगे बढ़े। उनके साथ बैंड भी शामिल रहा और कई स्वयंसेवक हाथों में लाठी लेकर चलते दिखाई दिए। संचलन के दौरान स्वयंसेवकों ने अनुशासन बनाए रखा और निर्धारित मार्ग से होते हुए कार्यक्रम पूरा किया। इसके बाद सभी अपने अपने क्षेत्रों की बस्तियों में लौट गए।

    उज्जैन में दशहरे के अवसर पर संघ की ओर से अलग-अलग बस्तियों में पथ संचलन निकालने की परंपरा रही है। इस आयोजन के माध्यम से स्वयंसेवक एकजुट होकर निर्धारित कार्यक्रम में भाग लेते हैं। इस बार भी शहर की 65 बस्तियों में विजयादशमी के दिन संचलन आयोजित किए गए। मार्गों पर स्थानीय लोगों की मौजूदगी और स्वागत की तैयारियों ने आयोजन को खास बनाया। कई स्थानों पर रंगोली के जरिए रास्तों को सजाया गया। लोगों ने फूल बरसाकर स्वयंसेवकों का स्वागत किया और उनके गुजरने के दौरान अभिवादन किया।

    संघ की ओर से पथ संचलन के आयोजन केवल विजयादशमी तक सीमित नहीं रहेंगे। जानकारी के अनुसार 20 अक्टूबर से 25 अक्टूबर तक शहर की अलग-अलग बस्तियों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के तहत संबंधित क्षेत्रों में स्वयंसेवक एकत्र होंगे और तय कार्यक्रम के अनुसार संचलन निकालेंगे। आयोजन की व्यवस्था स्थानीय स्तर पर की जा रही है। इससे शहर की विभिन्न बस्तियों में अलग-अलग दिनों पर संघ के कार्यक्रम देखने को मिलेंगे।

    विजयादशमी पर निकले पथ संचलन के दौरान पारंपरिक वेशभूषा बैंड की धुन और एक साथ कदमताल करते स्वयंसेवक आकर्षण का केंद्र रहे। स्वागत के लिए बनाई गई रंगोलियों और फूलों की वर्षा से कई मार्गों पर उत्सवी माहौल दिखाई दिया। अब 25 अक्टूबर तक उज्जैन की अन्य बस्तियों में भी पथ संचलन और संबंधित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों के जरिए संघ की स्थानीय इकाइयां अपने तय कार्यक्रमों को आगे बढ़ाएंगी।

  • दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा पर रोजाना 30 से 50 हजार खर्च का अनुमान, बोले कौन भंडारा करा रहा मुझे नहीं पता

    दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा पर रोजाना 30 से 50 हजार खर्च का अनुमान, बोले कौन भंडारा करा रहा मुझे नहीं पता


    उज्जैन। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने 20 अक्टूबर को उज्जैन से अपनी सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा की शुरुआत की। उज्जैन से अयोध्या तक करीब 950 किलोमीटर की इस पदयात्रा को लगभग 70 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यात्रा शुरू होने से पहले दिग्विजय सिंह ने अपनी पत्नी अमृता सिंह के साथ पार्थिव शिवलिंग का पूजन किया। इसके बाद उन्होंने भगवान महाकाल के दर्शन कर यात्रा की शुरुआत की। इस पदयात्रा में साधु संतों सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों कांग्रेस कार्यकर्ताओं विधायकों और महिला प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। आयोजकों के मुताबिक पहले दिन करीब तीन हजार लोगों के पहुंचने का अनुमान है जबकि आगे के पड़ावों पर रोजाना एक हजार से पंद्रह सौ लोग यात्रा से जुड़ सकते हैं।

    दिग्विजय सिंह ने यह यात्रा मंदिरों में चढ़ावे और धार्मिक स्थलों की व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर शुरू की है। उनका कहना है कि यात्रा के दौरान भोजन नाश्ते चाय और ठहरने की व्यवस्था में अलग-अलग स्थानों पर लोग स्वेच्छा से सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि कौन व्यक्ति किस स्थान पर भंडारा करा रहा है। दिग्विजय सिंह ने अपनी नर्मदा परिक्रमा का उदाहरण देते हुए बताया कि उस दौरान भी कई लोग अपने भंडारे की व्यवस्था यात्रा में शामिल कराने के लिए आग्रह करते थे। उनके अनुसार इस बार भी लोग खुद आगे आकर यात्रियों के भोजन और अन्य जरूरतों का इंतजाम कर रहे हैं।

    यात्रा की व्यवस्थाओं पर प्रतिदिन करीब 30 से 50 हजार रुपये खर्च होने का अनुमान है। कांग्रेस विधायक महेश परमार के मुताबिक छोटे ग्रामीण पड़ावों पर खर्च लगभग 20 से 30 हजार रुपये तक रह सकता है जबकि बड़े पड़ावों पर यह राशि 50 से 60 हजार रुपये तक पहुंच सकती है। करीब 70 दिन की यात्रा के लिए कुल 30 से 40 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान बताया गया है। शुरुआती पड़ावों पर यात्रियों के रुकने भोजन चाय और नाश्ते की व्यवस्था स्थानीय लोगों के सहयोग से की गई है। आयोजकों के मुताबिक रास्ते में लगभग हर तीन किलोमीटर पर चाय और सुबह के नाश्ते के साथ दोनों समय भोजन की व्यवस्था करने के लिए लोग आगे आए हैं।

    यात्रा के दौरान प्रतिदिन लगभग 15 किलोमीटर पैदल चलने की योजना है। इसकी तैयारी के लिए दिग्विजय सिंह रोज करीब आठ किलोमीटर पैदल चलने का अभ्यास कर रहे थे। उज्जैन से निकलने के बाद यात्रा तराना और कनासिया होते हुए शाजापुर जिले की ओर बढ़ेगी। इसके बाद यह सारंगपुर खुजनेर राजगढ़ चाचौड़ा आरोन अशोकनगर और चंदेरी सहित कई क्षेत्रों से गुजरेगी। मध्य प्रदेश के बाद यात्रा उत्तर प्रदेश में प्रवेश करेगी और तालबेहट जेरोन ओरछा चिरगांव उरई कालपी कानपुर देहात लखनऊ देहात और बाराबंकी के रास्ते अयोध्या पहुंचेगी। यात्रा का अंतिम पड़ाव राम मंदिर निर्धारित किया गया है।

    इस पदयात्रा के साथ एक विशेष रथ भी चल रहा है। इसमें भगवान राम लक्ष्मण माता सीता और हनुमान की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। रथ में गंगा यमुना शिप्रा कावेरी और नर्मदा नदियों के जल से भरे कलश भी रखे गए हैं। आयोजकों के अनुसार कई संतों ने यात्रा को समर्थन और आशीर्वाद दिया है। महामंडलेश्वर कंप्यूटर बाबा सहित अन्य धार्मिक हस्तियों के इसमें शामिल होने की बात कही गई है। ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती का भी समर्थन मिलने की जानकारी आयोजकों ने दी है।

    यात्रा में शामिल होने पहुंचीं फराह खान ने कहा कि वह अपनी इच्छा से इस पदयात्रा में शामिल हुई हैं। उन्होंने मंदिरों से सोने की चोरी और धार्मिक स्थलों की व्यवस्था में पारदर्शिता जैसे मुद्दों को महत्वपूर्ण बताया। फराह खान के मुताबिक वह शुरुआती पांच से छह दिन यात्रा में रहेंगी और पारिवारिक कार्यक्रम के बाद दोबारा इसमें शामिल होंगी। आयोजकों का कहना है कि रास्ते में अलग-अलग स्थानों पर लोग यात्रा से जुड़ेंगे। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि करीब 950 किलोमीटर लंबी यह पदयात्रा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कब अयोध्या पहुंचती है और मंदिरों की व्यवस्था में पारदर्शिता का मुद्दा किस तरह आगे बढ़ता है।

  • टीआई और ड्राइवर ने पीटा, सिर फोड़ा और वर्दी फाड़ी, हवलदार का आरोप, शिकायत के बाद भी ASP ने किया सस्पेंड, जांच शुरू

    टीआई और ड्राइवर ने पीटा, सिर फोड़ा और वर्दी फाड़ी, हवलदार का आरोप, शिकायत के बाद भी ASP ने किया सस्पेंड, जांच शुरू


    जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर में नो-एंट्री पॉइंट पर ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों के बीच विवाद का मामला सामने आया है। शहपुरा थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक लखन निषाद ने थाना प्रभारी प्रवीण कुमार धुर्वे उनके ड्राइवर और अन्य पुलिसकर्मियों पर मारपीट करने का आरोप लगाया है। हवलदार का दावा है कि विवाद के दौरान उनका सिर और नाक घायल हो गए एक दांत टूट गया चश्मा क्षतिग्रस्त हो गया और वर्दी भी फाड़ दी गई। दूसरी ओर पुलिस अधिकारियों ने प्रधान आरक्षक को अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित कर दिया है। मामले की जांच एसडीओपी पाटन को सौंपी गई है।

    जानकारी के अनुसार रविवार देर रात शहपुरा के बाहर नो-एंट्री पॉइंट पर बैरिकेड लगाकर भारी वाहनों की चेकिंग की जा रही थी। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश थे कि रात एक बजे से पहले भारी वाहनों को प्रवेश नहीं दिया जाए। रात करीब साढ़े बारह बजे तक सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई थी। इसी दौरान भोपाल की ओर जा रहे एक ट्रक चालक ने जल्द आगे जाने की अनुमति देने का आग्रह किया। प्रधान आरक्षक लखन निषाद के अनुसार उन्होंने चालक को थाना प्रभारी प्रवीण कुमार धुर्वे का मोबाइल नंबर दिया और कहा कि यदि अधिकारी अनुमति देते हैं तो वाहन को आगे जाने दिया जा सकता है।

    बताया जा रहा है कि ट्रक चालक ने जब थाना प्रभारी को फोन किया और बताया कि नंबर हवलदार ने दिया है तो इस बात पर टीआई नाराज हो गए। इसके बाद फोन पर ही थाना प्रभारी और प्रधान आरक्षक के बीच तीखी बहस हो गई। लखन निषाद का आरोप है कि कुछ देर बाद टीआई अपने ड्राइवर राहुल गुप्ता और आरक्षक विकास कुमार के साथ मौके पर पहुंचे। वहां उनके साथ गाली गलौज की गई और विरोध करने पर मारपीट शुरू कर दी गई। प्रधान आरक्षक का दावा है कि इस दौरान उनके हाथ पकड़े गए और उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई।

    लखन निषाद के मुताबिक मारपीट में उनका एक दांत टूट गया चश्मा क्षतिग्रस्त हो गया और सिर तथा नाक पर चोटें आईं। उन्होंने वर्दी फाड़ने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि घटना के बाद जब वे अपनी गाड़ी लेने थाने पहुंचे तो उन्हें अंदर जाने नहीं दिया गया। गंभीर चोटों और हाथ में फ्रैक्चर की आशंका के चलते उन्हें जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किए जाने की जानकारी सामने आई है। सोमवार को वे अपनी शिकायत लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय भी पहुंचे।

    हालांकि थाना प्रभारी प्रवीण कुमार धुर्वे ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि ग्वालियर में हुए मंदिर हादसे के बाद नो-एंट्री व्यवस्था को सख्ती से लागू करने के निर्देश थे। उनके अनुसार हवलदार वाहनों को जल्दी छोड़ने की बात कह रहे थे और उन्हें केवल समझाइश दी गई थी। टीआई ने किसी तरह के विवाद या मारपीट से इनकार किया है। इस तरह दोनों पक्षों के बयान अलग-अलग हैं और घटना की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अंजना तिवारी के अनुसार अमन ढाबा के पास वाहनों को रोकने के दौरान प्रधान आरक्षक लखन निषाद ने थाना प्रभारी के साथ अनुशासनहीनता की थी। इसी आधार पर उन्हें निलंबित किया गया है। उन्होंने बताया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच एसडीओपी पाटन को सौंपी गई है। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि नो-एंट्री पॉइंट पर विवाद किस वजह से बढ़ा और मारपीट के आरोपों में कितनी सच्चाई है। पुलिसकर्मी द्वारा लगाए गए आरोपों और अधिकारियों के पक्ष को देखते हुए जांच रिपोर्ट इस मामले में अहम होगी।

  • जबलपुर में दशहरे पर दिखा परंपरा और अनुशासन का संगम, पुलिस लाइन में शस्त्र पूजन, अधिकारियों और जवानों ने की सुख-समृद्धि की प्रार्थना

    जबलपुर में दशहरे पर दिखा परंपरा और अनुशासन का संगम, पुलिस लाइन में शस्त्र पूजन, अधिकारियों और जवानों ने की सुख-समृद्धि की प्रार्थना


    जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर में विजयादशमी का पर्व पारंपरिक उत्साह और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। इस अवसर पर पुलिस लाइन में शस्त्र पूजन का आयोजन किया गया जिसमें पुलिस विभाग के अधिकारियों और जवानों ने विधि-विधान से अपने हथियारों की पूजा की। कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। आयोजन के दौरान परंपरा के निर्वहन के साथ पुलिस बल के अनुशासन सुरक्षा और कर्तव्य के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी दिया गया।

    पुलिस लाइन में आयोजित शस्त्र पूजन कार्यक्रम में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौजूद रहे। विजयादशमी पर शस्त्र पूजन की परंपरा का विशेष महत्व माना जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और इसी अवसर पर पुलिस तथा सुरक्षा बल अपने हथियारों का पूजन कर अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पण व्यक्त करते हैं। कार्यक्रम में धार्मिक मान्यताओं और विभागीय अनुशासन का संगम देखने को मिला।

    पूजन के दौरान हथियारों की साफ-सफाई रखरखाव और सुरक्षित उपयोग के महत्व पर भी जोर दिया गया। पुलिस बल के लिए हथियार केवल सुरक्षा का साधन नहीं बल्कि कानून व्यवस्था बनाए रखने और नागरिकों की रक्षा करने की जिम्मेदारी का प्रतीक भी हैं। ऐसे आयोजनों के जरिए जवानों को अपने उपकरणों की देखभाल के प्रति सजग रहने और निर्धारित सुरक्षा नियमों का पालन करने का संदेश दिया जाता है।

    कार्यक्रम में शामिल मंत्री राकेश सिंह और पुलिस अधिकारियों ने धार्मिक परंपरा के अनुसार पूजन में हिस्सा लिया। इस अवसर पर पुलिस विभाग की टीम और प्रदेशवासियों के लिए सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना की गई। आयोजन का उद्देश्य विजयादशमी की सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ पुलिस बल में कर्तव्यनिष्ठा और एकजुटता की भावना को मजबूत करना भी रहा।

    विजयादशमी पर शस्त्र पूजन देश के कई हिस्सों में लंबे समय से चली आ रही परंपरा है। पुलिस और अन्य सुरक्षा बल इस दिन अपने हथियारों तथा उपकरणों का पूजन करते हैं। यह आयोजन उन्हें अपनी जिम्मेदारियों की याद दिलाने और सुरक्षा व्यवस्था के प्रति सतर्कता बनाए रखने का अवसर भी देता है। जबलपुर पुलिस लाइन में हुए कार्यक्रम में भी धार्मिक आस्था और पुलिस अनुशासन दोनों का महत्व सामने आया। अधिकारियों और जवानों ने इस अवसर पर सुरक्षित वातावरण बनाए रखने और अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करने का संकल्प दोहराया।

  • ग्वालियर हादसे में ट्रक कैसे पहुंचा श्रद्धालुओं की कतार तक, ब्रेक फेल या ड्राइवर की गलती या साजिश, जांच में खुलेंगे सुरक्षा व्यवस्था के राज

    ग्वालियर हादसे में ट्रक कैसे पहुंचा श्रद्धालुओं की कतार तक, ब्रेक फेल या ड्राइवर की गलती या साजिश, जांच में खुलेंगे सुरक्षा व्यवस्था के राज


    ग्वालियर । ग्वालियर के शीतला माता मंदिर में हुए भीषण ट्रक हादसे के बाद दुर्घटना की वजह और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। शनिवार रात करीब डेढ़ बजे धान से भरा ट्रक दर्शन के लिए कतार में खड़े श्रद्धालुओं पर चढ़ गया। इस हादसे में 15 लोगों की मौत हुई जबकि 40 से अधिक लोग घायल हुए। मंदिर समिति ने घटना में आतंकी साजिश की आशंका जताते हुए विशेष जांच दल से जांच कराने की मांग की है। दूसरी ओर पुलिस की शुरुआती जांच में ब्रेक फेल होने और रास्ते की जानकारी नहीं होने जैसी संभावनाओं पर ध्यान दिया जा रहा है। फिलहाल साजिश के आरोपों की पुष्टि करने वाला कोई ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं हुआ है।

    हादसे को लेकर पहली थ्योरी ट्रक के ब्रेक फेल होने की है। ड्राइवर ने पुलिस को बताया कि वाहन के ब्रेक ने काम करना बंद कर दिया था। पुलिस भी शुरुआती स्तर पर इस संभावना की जांच कर रही है। भारी वाहनों में एयर ब्रेक का इस्तेमाल होता है और लंबी ढलान पर लगातार ब्रेक लगाने से उनकी कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। ट्रक में तकनीकी खराबी थी या नहीं इसकी पुष्टि क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय की जांच से हो सकेगी। वाहन के ब्रेक टायर गियर और उसमें लदे धान के वास्तविक वजन की जांच भी महत्वपूर्ण होगी।

    दूसरी थ्योरी ड्राइवरों की गलती और रास्ते को लेकर भ्रम की है। पुलिस की शुरुआती जानकारी के मुताबिक दोनों ट्रक चालक रास्ते से अनजान थे और गूगल मैप की मदद से आगे बढ़ रहे थे। एक रिपोर्ट के अनुसार टोल टैक्स बचाने के लिए शॉर्टकट तलाशने की बात भी सामने आई है। अमरोल गांव के कुछ लोगों ने दावा किया कि उन्होंने ड्राइवरों को आगे रास्ता बंद होने की जानकारी दी थी लेकिन वे गूगल मैप पर रास्ता खुला होने की बात कह रहे थे। ग्रामीणों ने ड्राइवरों के मुंह से शराब की गंध आने का दावा भी किया है। इसकी पुष्टि के लिए मेडिकल जांच और ब्लड रिपोर्ट जरूरी होगी।

    तीसरी थ्योरी मंदिर समिति की ओर से उठाई गई साजिश की आशंका है। समिति के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह गुर्जर ने धार्मिक आयोजन को जानबूझकर निशाना बनाए जाने की संभावना जताते हुए एसआईटी जांच की मांग की है। हालांकि अब तक पुलिस या प्रशासन ने आतंकी हमले की पुष्टि नहीं की है। ट्रक का चेकिंग पॉइंट पार करना और बैरिकेड तोड़ते हुए मंदिर की ओर बढ़ना जांच के अहम बिंदु हैं। वहीं ट्रक मालिक का कहना है कि वाहन रास्ता तलाशते हुए आगे बढ़ा था। हादसे के बाद ड्राइवर और मालिक के भागने की घटना भी जांच का हिस्सा है लेकिन केवल इससे साजिश साबित नहीं होती।

    जांच में ट्रक की तकनीकी स्थिति के साथ ड्राइवरों की मेडिकल रिपोर्ट मोबाइल लोकेशन गूगल मैप का रिकॉर्ड माल से जुड़े दस्तावेज और रास्ते में लगे सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल की जा सकती है। ग्रामीणों पुलिसकर्मियों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी घटना की कड़ियां जोड़ने में मदद करेंगे। यदि लापरवाही साबित होती है तो भारतीय न्याय संहिता के तहत कार्रवाई हो सकती है। वहीं गैर इरादतन हत्या या आतंकी कृत्य जैसे गंभीर आरोपों के लिए संबंधित कानूनी तत्वों और पर्याप्त सबूतों का होना जरूरी है।

    हादसे ने मेले की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। सामान्य तौर पर मंदिर समिति भीड़ की जानकारी देने और व्यवस्थाओं में सहयोग करती है जबकि पुलिस यातायात नियंत्रण और कानून व्यवस्था संभालती है। जिला प्रशासन विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी निभाता है। रिपोर्टों के मुताबिक मंदिर से करीब एक किलोमीटर दूर पार्किंग बनाई गई थी और रात में 50 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात थे। इसके बावजूद भारी ट्रक प्रतिबंधित क्षेत्र तक कैसे पहुंच गए यह जांच का अहम सवाल है। चेकिंग पॉइंट पर ट्रक रोकने को लेकर पुलिस के बयान और ग्राउंड रिपोर्ट में अंतर भी सामने आया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर झांसी रोड के सीएसपी रवि भदौरिया को हटाया गया और तीन थाना प्रभारियों समेत आठ पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया। कलेक्टर रुचिका चौहान ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं और सात दिन में रिपोर्ट देने को कहा गया है। हालांकि चेकिंग पॉइंट की जिम्मेदारी और कार्रवाई के दायरे को लेकर सवाल बने हुए हैं। सरकार ने मृतकों के परिजनों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है जबकि पीड़ित परिवार अधिक मुआवजे और सरकारी नौकरी की मांग कर रहे हैं। अब जांच से यह स्पष्ट होना बाकी है कि हादसा तकनीकी खराबी या मानवीय लापरवाही का नतीजा था अथवा इसके पीछे कोई दूसरी वजह थी। साथ ही यह भी तय करना होगा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा में हुई चूक के लिए किस स्तर पर जवाबदेही बनती है।