Category: Madhya Pradesh

  • उज्जैन में पंच-परमेश्वर का भव्य नगर प्रवेश: संतों ने 200 साल पुरानी परंपरा के तहत होली उत्सव की तैयारियां शुरू कीं

    उज्जैन में पंच-परमेश्वर का भव्य नगर प्रवेश: संतों ने 200 साल पुरानी परंपरा के तहत होली उत्सव की तैयारियां शुरू कीं



    नई दिल्ली। उज्जैन की पवित्र नगरी में होली के अवसर पर शुक्रवार को श्री पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा में पंच-परमेश्वर का भव्य नगर प्रवेश हुआ। करीब 10 साल बाद आयोजित इस पेशवाई में देशभर से आए संतों का ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के बीच जोरदार स्वागत किया गया। यह आयोजन 200 वर्षों से निरंतर निभाई जा रही परंपरा का हिस्सा है और इसे वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ मेले की तैयारियों से जोड़ा गया है।

    देशभर के प्रमुख अखाड़ों के पंच-परमेश्वर संतों के रूप में उज्जैन पहुंचे। भ्रमणशील मंडल के महंत दुर्गादास, महंत अद्वैतानंद, महंत राम नौमी दास, सचिव हंस मुनि, महंत कोठारी सत्यानंद, मुकामी राम मुनि और मुकामी देवी दास सहित निर्वाण संतों ने अखाड़े में प्रवेश किया। महंत सत्यानंद ने बताया कि आने वाले दिनों में और अधिक संत उज्जैन पहुंचेंगे, जो शहर और मेले की व्यवस्थाओं की जानकारी लेंगे।

    नगर प्रवेश के दौरान संतों ने सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार और देशभर में सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण का संदेश दिया। पेशवाई में शामिल साधु-संत और महंत पारंपरिक पोशाक और धार्मिक वाद्ययंत्रों के साथ नगर में यात्रा करते हुए दर्शकों का मन मोहते नजर आए। शहरवासियों ने अपने उत्साह और श्रद्धा के साथ संतों का स्वागत किया।

    उज्जैन में 4 मार्च को पंच-परमेश्वर और अन्य साधु-संतों के लिए होली उत्सव का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक चलेगा, जिसमें सभी संत पारंपरिक ढंग से हर्बल गुलाल और फूलों से होली खेलेंगे। इस दौरान भक्तजन भी मंदिर परिसर में उपस्थित रहकर होली का आनंद लेंगे।

    पंच-परमेश्वर परंपरा के अनुसार, अखाड़ों के सदस्य उन स्थलों का दौरा करते हैं, जहां कुंभ मेला आयोजित होने वाला होता है। उज्जैन में 2028 में सिंहस्थ मेला आयोजित होने के मद्देनजर संत आठ दिन तक यहां रहेंगे और साधु-संतों के लिए की जाने वाली व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे। उज्जैन का कार्य पूर्ण होने के बाद वे नासिक रवाना होंगे, जहां भी कुंभ मेला आयोजित होगा।

    इस भव्य नगर प्रवेश से उज्जैन की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को और मजबूती मिली है। शहरवासियों में संतों के आगमन और होली उत्सव को लेकर उत्साह साफ देखा जा सकता है। पंच-परमेश्वर का यह नगर प्रवेश ना सिर्फ धार्मिक उत्सव है, बल्कि आने वाले सिंहस्थ मेले के सफल आयोजन की रूपरेखा तैयार करने का भी अवसर है।

    उज्जैन में पंच-परमेश्वर का भव्य स्वागत और होली उत्सव इस बात का प्रमाण है कि सनातन संस्कृति और धार्मिक परंपराएं आज भी देशभर में जीवित हैं। संतों के मार्गदर्शन में आगामी मेले की तैयारियों से श्रद्धालु और नगरवासी समान रूप से लाभान्वित होंगे।

  • जबलपुर में बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा फैसला: एलपीजी संचालित वाहनों में स्कूल बच्चों का सफर प्रतिबंधित

    जबलपुर में बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा फैसला: एलपीजी संचालित वाहनों में स्कूल बच्चों का सफर प्रतिबंधित



    नई दिल्ली। जबलपुर प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि 1 अप्रैल 2026 से जिले में किसी भी एलपीजी से संचालित वाहन में स्कूली बच्चे सफर नहीं कर सकेंगे। इस आदेश का उद्देश्य स्कूल बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और संभावित दुर्घटनाओं को रोकना है।

    कलेक्टर ने स्कूल प्रबंधन और वाहन मालिकों को निर्देश दिए हैं कि वे 1 अप्रैल से पहले अपने वाहनों की व्यवस्था वैकल्पिक और कानूनी रूप से मान्य वाहनों के माध्यम से करें। यदि तय समय के बाद भी कोई एलपीजी वाहन बच्चों को स्कूल ले जाने के लिए इस्तेमाल किया गया, तो प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके तहत वाहन मालिक, स्कूल प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

    जिला प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों को सख्त निगरानी और पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO) को आदेशित किया गया है कि वे स्कूल वाहनों का सत्यापन करें और एलपीजी वाहन संचालन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें। इसके साथ ही सभी एसडीएमों को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि जिले में कोई भी एलपीजी वाहन बच्चों को ले जाने के लिए इस्तेमाल न हो।

    पुलिस अधिकारियों को स्कूल समय के दौरान आकस्मिक निरीक्षण करने और किसी भी उल्लंघन की स्थिति में तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और प्रशासन इसकी अनदेखी नहीं करेगा।

    जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) के माध्यम से सभी स्कूल प्रबंधन को इस आदेश की जानकारी दी जाएगी। स्कूल संचालकों से कहा गया है कि वे इस आदेश का पालन सुनिश्चित करें और अपने वाहन संचालन की व्यवस्था तुरंत बदलें। डीईओ को यह भी निर्देशित किया गया है कि वे स्कूलों में इस नियम के पालन की निगरानी करें और किसी भी तरह की लापरवाही की स्थिति में कड़ी कार्रवाई करें।

    विशेषज्ञों का कहना है कि एलपीजी वाहन में बच्चों का सफर जोखिम भरा हो सकता है क्योंकि गैस लीक, आग और तकनीकी खामियों के कारण हादसों की संभावना बढ़ जाती है। इस आदेश के माध्यम से प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए हर संभव उपाय किए जाएं।

    कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने कहा, “हमारा उद्देश्य सिर्फ नियम बनाना नहीं है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना है। सभी स्कूल प्रबंधन और वाहन मालिक 1 अप्रैल तक वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करें, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।”

    इस आदेश से जबलपुर जिले के स्कूल परिवहन में एक बड़ा बदलाव आएगा और यह बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए राहत का संदेश लेकर आएगा। जिले में सभी अधिकारियों और स्कूल प्रबंधन के सहयोग से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि एलपीजी वाहन में बच्चों का सफर पूरी तरह प्रतिबंधित रहे।

  • बम की अफवाह से थमी भोपाल की रफ्तार: एम्स से लेकर पासपोर्ट दफ्तर तक पुलिस का घेरा, 15 दिनों में दूसरी बार दहशत का साया

    बम की अफवाह से थमी भोपाल की रफ्तार: एम्स से लेकर पासपोर्ट दफ्तर तक पुलिस का घेरा, 15 दिनों में दूसरी बार दहशत का साया


    भोपालराजधानी भोपाल में सोमवार का दिन भारी अफरा-तफरी और दहशत के बीच गुजरा। सुबह उस वक्त पुलिस प्रशासन और आम जनता के हाथ-पांव फूल गए, जब शहर के चार अति-संवेदनशील संस्थानों-एम्स AIIMS, क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, रॉयल मार्केट स्थित जीपीओ GPO और निशातपुरा की एक यूनिवर्सिटी को बम से उड़ाने की धमकी भरा ईमेल मिला। इस धमकी ने सुरक्षा व्यवस्था की कड़ी परीक्षा ली, क्योंकि ईमेल भेजने वाले ने न केवल दोपहर 12:15 बजे ब्लास्ट होने का दावा किया था, बल्कि यह भी डरावनी चेतावनी दी थी कि परिसरों में ‘साइनाइड गैस’ वाले दो आईईडी IED रखे गए हैं। सूचना मिलते ही निशातपुरा, बागसेवनिया, कोतवाली और एमपी नगर पुलिस ने मोर्चा संभाला और आनन-फानन में हजारों लोगों से भरी इन इमारतों को खाली कराया गया।

    सुरक्षा के लिहाज से पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी और बाहरी लोगों के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया। बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वॉड BDDS और डॉग स्क्वॉड की टीमों ने सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक इमारतों के चप्पे-चप्पे की तलाशी ली। लगभग चार घंटे चले इस गहन तलाशी अभियान के बाद जब कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली, तब जाकर पुलिस ने इसे एक ‘होक्स’ अफवाह घोषित किया और राहत की सांस ली। गौर करने वाली बात यह है कि निशातपुरा स्थित यूनिवर्सिटी को पिछले 15 दिनों में दूसरी बार इस तरह की धमकी मिली है; इससे पहले 19 फरवरी को भी संस्थान को निशाना बनाया गया था।

    पुलिस कमिश्नर संजय कुमार के अनुसार, सभी संस्थानों को भेजे गए ईमेल का कंटेंट और भाषा एक जैसी थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस शरारत के पीछे किसी एक व्यक्ति या गिरोह का हाथ है। जांच में यह भी सामने आया है कि देश के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के मिलते-जुलते ईमेल भेजे गए हैं। फिलहाल, साइबर क्राइम ब्रांच उस आईपी IP एड्रेस और ईमेल आईडी को ट्रैक करने में जुटी है जिससे ये मैसेज भेजे गए थे। हालांकि यह बम की धमकी महज एक अफवाह निकली, लेकिन इसने भोपाल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई चिंताएं जरूर पैदा कर दी हैं।

  • पूर्व MLA संजय शुक्ला समेत फंसे यात्री यूएई से लौटे, इजराइल-ईरान युद्ध के बीच राहत की खबर

    पूर्व MLA संजय शुक्ला समेत फंसे यात्री यूएई से लौटे, इजराइल-ईरान युद्ध के बीच राहत की खबर


    नई दिल्ली। यूएई में इजराइल-ईरान युद्ध के बीच फंसे इंदौर के पूर्व MLA संजय शुक्ला समेत कई भारतीय यात्री अब सुरक्षित भारत लौट आए हैं। दुबई और शारजाह में जारी तनाव के कारण सैकड़ों यात्रियों की वापसी रुक गई थी और वे कई दिन होटल में मजबूरी में ठहरे रहे। इस सूची में पूर्व विधायक विशाल पटेल, प्रवीण कक्कड़, उद्योगपति मनीष शाहरा, मनीष अग्रवाल, पिंटू छाबड़ा, गोलू पाटनी, उत्पल गोयल, आदित्य शर्मा सहित अन्य लोग शामिल थे। सभी यात्री अब सुरक्षित अपने घर पहुंचे हैं, जिससे उनके परिवारों में राहत की लहर दौड़ गई।

    यूएई में हालात बिगड़ने के कारण एयर इंडिया एक्सप्रेस की शारजाह-इंदौर फ्लाइट IX-256 28 फरवरी से लगातार कैंसिल हो रही थी। 3 मार्च को भी यह उड़ान नहीं हुई थी, जिससे इंदौर, भोपाल और मध्य प्रदेश के अन्य जिलों से आए सैकड़ों यात्री वहां फंसे रहे। मिसाइल अलर्ट और युद्ध के खतरे ने उन्हें मानसिक तनाव में डाल दिया। कई यात्रियों ने बताया कि धमाकों और सुरक्षा अलर्ट के दौरान वे काफी डर गए थे।

    2 मार्च की शाम से दुबई एयरपोर्ट पर कुछ उड़ानें फिर से शुरू हुईं। फंसे हुए यात्री पहले मुंबई पहुंचे और वहां से दूसरी फ्लाइट लेकर इंदौर आए। हालांकि शारजाह-इंदौर की सीधी उड़ान अभी भी शुरू नहीं हुई है। सरकार और एयरलाइन कंपनियां लगातार स्थिति पर नजर रख रही हैं। इस बीच, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने दिल्ली में संबंधित मंत्रालयों से बातचीत कर फंसे लोगों की सुरक्षित वापसी की पहल की। वहीं, कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप की मांग की थी।

    पूर्व MLA संजय शुक्ला और अन्य यात्रियों की वापसी से उनके परिवारों ने राहत की सांस ली। अबू धाबी एयरपोर्ट पर फंसे भारतीयों ने भी बताया कि उनके होटल के पास धमाके हुए और तनावपूर्ण माहौल रहा। भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए सरकार ने सभी राज्यों में भड़काऊ भाषणों और अशांति के मामलों के लिए अलर्ट जारी किया है।

    इसी बीच, इंडिगो एयरलाइन ने सऊदी अरब के जेद्दा से हैदराबाद, मुंबई, दिल्ली और अहमदाबाद के लिए 10 स्पेशल फ्लाइट्स संचालित करने का निर्णय लिया है ताकि वहां फंसे भारतीय यात्री जल्द से जल्द स्वदेश लौट सकें। इस दौरान यूएई में फंसे लोगों की मदद के लिए भारत सरकार ने विशेष टीम और काउंसलर सहायता भी उपलब्ध कराई।

    इजराइल-ईरान युद्ध के चलते यह संकट चौथे दिन में प्रवेश कर चुका है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी तनाव ने पूरे क्षेत्र की हवाई यात्रा को प्रभावित किया। दुबई, शारजाह और अबू धाबी एयरपोर्ट पर कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द हुईं, जिससे विदेशी और भारतीय यात्री दोनों ही फंसे। अब हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं और भारत लौटे सभी यात्री सुरक्षित हैं।

    इस बीच, मध्य प्रदेश के नागरिकों के लिए यह राहत की खबर है कि पूर्व MLA संजय शुक्ला और अन्य यात्री सुरक्षित लौट आए हैं। उनकी वापसी ने उन परिवारों के दिलों को शांति दी है, जो दिनों से उनके लिए चिंतित थे।

  • भोपाल के बड़े तालाब में महिला को गोताखोरों ने बचाया, निगम कर्मी बने असली देवदूत

    भोपाल के बड़े तालाब में महिला को गोताखोरों ने बचाया, निगम कर्मी बने असली देवदूत


    भोपाल का बड़ा तालाब आज अचानक हड़कंप का केंद्र बन गया जब एक महिला ने तालाब में छलांग लगा दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महिला ने अचानक और चुपचाप तालाब के किनारे से कूद लगाई, जिससे वहां मौजूद लोग स्तब्ध रह गए। मौके पर मौजूद निगम के गोताखोरों ने तुरंत अपनी मुस्तैदी दिखाई और समय रहते महिला को बचाया।

    तालाब के किनारे मौजूद लोग स्थिति को देख सकते ही रह गए थे। जैसे ही महिला पानी में डूबने लगी, नगर निगम की रेस्क्यू टीम सक्रिय हो गई। गोताखोर मोहम्मद मदर फेस खान और शेख आसिफ खान ने अपनी जान जोखिम में डालकर पानी में छलांग लगाई और बेहद कम समय में महिला तक पहुंच बनाई। उन्होंने महिला को सुरक्षित बाहर निकाला और प्राथमिक उपचार दिलाया। इस बहादुरी और तत्परता के लिए वहां मौजूद जनता ने उनका जमकर अभिनंदन किया।

    बड़ा तालाब और वीआईपी रोड सुरक्षा के लिए मशहूर हैं। बावजूद इसके ऐसी घटनाएं लगातार सामने आती रहती हैं। आज की यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि नगर निगम के कर्मचारी न केवल प्रशिक्षित हैं बल्कि किसी भी स्थिति में अपने कर्तव्य के प्रति समर्पित और निस्वार्थ हैं। यह रेस्क्यू ऑपरेशन इस बात का प्रमाण है कि संकट के समय ये कर्मचारी किसी देवदूत से कम नहीं।

    महिला ने आत्मघाती कदम क्यों उठाया, इसका कारण फिलहाल सामने नहीं आया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और महिला के परिजनों से संपर्क साधने का प्रयास किया जा रहा है। इस घटना ने वीआईपी रोड पर सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा करने की मांग को भी हवा दे दी है। भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपायों की आवश्यकता स्पष्ट हो गई है।

    बड़ा तालाब सिर्फ भोपाल के ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों के लिए भी एक प्रमुख पर्यटन स्थल और मनोरंजन केंद्र है। यहां हमेशा सैलानियों की भीड़ रहती है। इसके बावजूद कुछ लोग यहां आत्मघाती कदम उठाने का जोखिम लेते हैं। ऐसे समय में गोताखोरों और निगम कर्मचारियों की तत्परता ही किसी की जान बचा सकती है।

    इस घटना ने यह संदेश दिया कि चाहे कितनी भी सुरक्षा व्यवस्था क्यों न हो, मानव जीवन की रक्षा के लिए बहादुरी और तत्परता अपरिहार्य है। बड़े तालाब में पूर्व में भी ऐसी घटनाएं घट चुकी हैं, लेकिन हर बार गोताखोरों की तत्परता ही लोगों की जान बचा पाती है।

    नगर निगम के इस बहादुर प्रयास ने लोगों को यह याद दिलाया कि संकट के समय प्रशिक्षित और समर्पित कर्मचारी किसी देवदूत से कम नहीं होते। महिला को सुरक्षित बाहर निकालने के तुरंत बाद प्राथमिक उपचार और पुलिस को सूचित किया गया। पुलिस इस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और महिला के मानसिक और पारिवारिक हालात को समझने का प्रयास कर रही है।

    भोपाल का बड़ा तालाब, वीआईपी रोड और आसपास के इलाके में सुरक्षा उपायों को और मजबूत करना अब प्राथमिकता बन गई है। यह घटना न केवल नगर निगम कर्मचारियों की बहादुरी का प्रमाण है बल्कि शहरवासियों और सैलानियों के लिए चेतावनी भी है कि सुरक्षा और सतर्कता हमेशा आवश्यक है।

  • उज्जैन महाकाल में भव्य होली 2026: हर्बल गुलाल, पंचामृत भस्मारती और चंद्र ग्रहण के बीच खुले पट, श्रद्धालुओं ने किया अनोखा अनुभव

    उज्जैन महाकाल में भव्य होली 2026: हर्बल गुलाल, पंचामृत भस्मारती और चंद्र ग्रहण के बीच खुले पट, श्रद्धालुओं ने किया अनोखा अनुभव


    उज्जैन। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार को होली का पर्व भव्य और अनोखे अंदाज में मनाया गया। सुबह 4 बजे भस्मारती के समय पुजारी-पुरोहितों ने बाबा महाकाल के साथ हर्बल गुलाल से रंग खेला। इस अवसर पर भगवान शिव के परिवार माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय को भी गुलाल अर्पित किया गया। भगवान महाकाल का हरि ओम जल से अभिषेक किया गया, उसके बाद दूध, दही, घी, शकर, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से पूजा संपन्न हुई। नंदी जी का स्नान, ध्यान और पूजा भी विधिपूर्वक किया गया। भगवान महाकाल ने शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाला, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों की माला धारण की।

    इस साल 3 मार्च को 14 मिनट का खग्रास चंद्र ग्रहण सुबह 6:32 से शाम 6:46 तक रहेगा। ग्रहण के कारण मंदिर में सुबह की दद्योदक और भोग आरती में भगवान महाकाल को केवल शक्कर का भोग अर्पित किया गया। इस दौरान श्रद्धालु और पुजारी भगवान को स्पर्श नहीं करेंगे। ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिर का शुद्धिकरण होगा, उसके बाद भगवान का जलाभिषेक और संध्या आरती के साथ भोग अर्पित किया जाएगा।

    महाकाल मंदिर में साल में दो बार भगवान की दिनचर्या बदलती है। कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से ठंड के अनुसार और चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से गर्मी के अनुसार आरती का समय तय होता है। इस साल 4 मार्च से चैत्र कृष्ण प्रतिपदा शुरू होने से भगवान महाकाल को ठंडे जल से स्नान कराया जाएगा। इस अवधि में प्रतिदिन होने वाली पांच आरतियों में से तीन में समय का बदलाव किया जाएगा।

    मंदिर के पुजारी महेश शर्मा के अनुसार, भगवान महाकाल कालों के काल हैं और दक्षिण की ओर मुख करके बैठे हैं। इसलिए ग्रहण या किसी भी नक्षत्र का उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। ग्रहण के दौरान मंदिर की व्यवस्थाएं सामान्य रहेंगी, पुजारी मंत्रोच्चार करेंगे और भक्त सुरक्षित दर्शन कर सकेंगे।

    भक्तों और स्थानीय लोगों के लिए यह आयोजन अत्यंत दर्शनीय रहा। पारंपरिक विधियों, भस्मारती और हर्बल गुलाल के संगम ने होली को भव्य बना दिया। इस अवसर पर धार्मिक अनुशासन और ग्रहण के नियमों का पालन करते हुए भगवान महाकाल की भव्य पूजा-अर्चना संपन्न हुई, जो श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक आनंद और भक्ति का अनुभव लेकर आई।

  • जबलपुर के चार परिवार दुबई में फंसे, युद्ध और रद्द उड़ानों ने बढ़ाई मुश्किलें, केंद्र सरकार से सुरक्षा वापसी की अपील

    जबलपुर के चार परिवार दुबई में फंसे, युद्ध और रद्द उड़ानों ने बढ़ाई मुश्किलें, केंद्र सरकार से सुरक्षा वापसी की अपील



    नई दिल्ली। जबलपुर के चार व्यापारी परिवार दुबई में फंस गए हैं। शैलेश जैन, प्रशांत विश्वकर्मा, संजय सिंघई और प्रवीण जैन अपने परिवारों के साथ 21 फरवरी को दुबई घूमने गए थे और 28 फरवरी को लौटने वाले थे, लेकिन ईरान-इजराइल तनाव और मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के कारण उनकी वापसी अनिश्चित हो गई।

    व्यापारियों ने वीडियो संदेश जारी कर बताया कि फिलहाल वे सुरक्षित हैं, लेकिन एयरपोर्ट का संचालन और उड़ानों का समय तय नहीं होने से तनाव बना हुआ है। होटल्स ने किराया तीन गुना तक बढ़ा दिया, जिससे आर्थिक दबाव और बढ़ गया। बच्चों और बुजुर्गों के साथ यात्रा करने की वजह से मानसिक चिंता भी अधिक है।

    व्यापारियों ने केंद्र सरकार से विशेष विमान या सुरक्षित व्यवस्था के माध्यम से जल्दी स्वदेश लौटने की गुहार लगाई। इंदौर के पूर्व विधायक संजय शुक्ला सहित कई यात्री अब लौटने लगे हैं, लेकिन एयर इंडिया एक्सप्रेस की शारजाह-इंदौर उड़ान IX-256 लगातार कैंसिल हो रही है, जिससे स्थिति और जटिल बनी हुई है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों में फंसे नागरिकों के लिए सरकार को त्वरित राहत, आर्थिक मदद और सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करनी चाहिए। व्यापारियों ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार जल्द ही उनके परिवार सहित सुरक्षित लौटने का इंतजाम करेगी।

  • जबलपुर मेडिकल कॉलेज में बायोमेडिकल कचरे में भीषण आग, डीन ने लापरवाही की जांच के निर्देश दिए

    जबलपुर मेडिकल कॉलेज में बायोमेडिकल कचरे में भीषण आग, डीन ने लापरवाही की जांच के निर्देश दिए


    नई दिल्ली। जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के बाहर सोमवार रात को बायोमेडिकल कचरे के ढेर में अचानक आग लग गई। अस्पताल के पिछले हिस्से में सड़क किनारे जमा कचरे से उठी लपटें देखते ही देखते फैल गईं, जिससे परिसर में हड़कंप मच गया। सूचना पाते ही दमकल की टीम मौके पर पहुंची और कई घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।

    सौभाग्य रहा कि आग और धुआं अस्पताल की मुख्य इमारतों तक नहीं पहुँचा, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आग लगते समय शीशियों के टूटने और पटाखों जैसी आवाजों से अंदाजा लगाया जा रहा था कि सामान्य कचरे के साथ बायोमेडिकल वेस्ट भी वहां मिला हुआ था।

    विशेषज्ञों का कहना है कि बायोमेडिकल वेस्ट को अलग रंग के बैग (पीला, लाल, सफेद, नीला) में संग्रहित करना और अधिकृत एजेंसी के माध्यम से ही नष्ट करना जरूरी है। खुले में पड़ा संक्रमित कचरा संक्रमण फैलाने का बड़ा खतरा बन सकता है, खासकर अस्पताल जैसे संवेदनशील परिसर में जहां रोजाना हजारों मरीज और परिजन आते हैं।

    डीन डॉ. नवनीत सक्सेना ने आग को गंभीर मामले के रूप में लिया और सभी संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन कर्मचारियों की लापरवाही से कचरा खुले में पड़ा रहा, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही मेडिकल अधीक्षक को कहा गया कि भविष्य में बायोमेडिकल कचरे का निपटान नियमों के अनुसार ही सुनिश्चित किया जाए।

    आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, आग लगने के समय किसी मरीज या कर्मचारी को चोट नहीं आई। डीन ने मामले की पूरी जांच के निर्देश देते हुए बताया कि अस्पताल परिसर में सुरक्षा मानकों का उल्लंघन किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    इस घटना ने प्रशासन और अस्पताल अधिकारियों की सतर्कता की चुनौती सामने ला दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते आग पर नियंत्रण नहीं पाया गया होता, तो यह न केवल संपत्ति के नुकसान बल्कि स्वास्थ्य जोखिम के लिए भी गंभीर साबित हो सकता था।

    मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने कहा कि भविष्य में सभी बायोमेडिकल कचरे का समय पर निपटान और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए विशेष निगरानी और नियमित ऑडिट की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

  • कृषि कैबिनेट बैठक में दूरी दिखी, विजयवर्गीय इंदौर में त्रिपुरा सीएम से मिले, प्रहलाद भोपाल में रहे

    कृषि कैबिनेट बैठक में दूरी दिखी, विजयवर्गीय इंदौर में त्रिपुरा सीएम से मिले, प्रहलाद भोपाल में रहे


    नई दिल्ली। बड़वानी में आयोजित मध्य प्रदेश की कृषि कैबिनेट बैठक में मंत्रियों की अनुपस्थिति ने राजनीतिक चर्चा को जन्म दिया। नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल बैठक में शामिल नहीं हुए। इस दौरान प्रहलाद पटेल दिनभर भोपाल में मौजूद रहे, जबकि कैलाश विजयवर्गीय आलीराजपुर के भगोरिया मेले में भाग लेने के बाद इंदौर में पहुंचे और वहां त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा से मुलाकात की।

    सोमवार को बड़वानी में कैबिनेट बैठक आयोजित की गई, लेकिन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने शारीरिक रूप से बैठक में हिस्सा नहीं लिया। वे सुबह आलीराजपुर में भगोरिया उत्सव में मौजूद रहे, जहां उन्होंने नागर सिंह चौहान और सांसद अनीता चौहान के साथ आदिवासी परंपराओं का सम्मान किया। दोपहर में इंदौर पहुंचे विजयवर्गीय ने त्रिपुरा के सीएम माणिक साहा से मुलाकात की और रात को इंदौर के फाग उत्सव में भाग लिया।

    वहीं, मंत्री प्रहलाद पटेल भोपाल में रहे और वहां बीजेपी किसान मोर्चा के नए प्रदेश महामंत्री कप्तान सिंह यादव से मिले। इस दौरान कप्तान सिंह ने पटेल से आशीर्वाद लिया और फोटो सोशल मीडिया पर साझा की। प्रहलाद पटेल ने दमोह की जरारूधाम गौ अभ्यारण्य के कोषाध्यक्ष सुशील गुप्ता से भी मुलाकात की और शाम को विदिशा के लिए रवाना हुए।

    शनिवार को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल ने अलग-अलग मुलाकातें की थीं। माना जा रहा है कि विधानसभा बजट सत्र के दौरान विजयवर्गीय के बयानों से मंत्री और मुख्यमंत्री के बीच अंदरूनी खींचतान चल रही है।

    सोमवार को आलीराजपुर भगोरिया मेले में विधानसभा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और कैलाश विजयवर्गीय के बीच वाक विवाद भी देखने को मिला। सिंघार ने “औकात” वाले बयान को लेकर विजयवर्गीय से सवाल किए, जबकि विजयवर्गीय ने कहा कि वे राजनीति करने नहीं, बल्कि भगोरिया उत्सव और आदिवासी समाज को सम्मान देने आए हैं। उन्होंने दावा किया कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से हर आदिवासी परिवार को सालाना 30–50 हजार रुपए का लाभ मिल रहा है।

    इससे स्पष्ट है कि कृषि कैबिनेट की बैठक के दौरान मंत्री दोनों अलग-अलग कार्यों और स्थानों में व्यस्त रहे, जिससे राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से दूरी का संदेश गया। वहीं, भगोरिया मेले और त्रिपुरा सीएम से मुलाकात से विजयवर्गीय की सक्रियता और संपर्क भी दिखा।

  • ग्वालियर में चंद्र ग्रहण: मंदिर बंद, सुबह 6:20 से शाम 6:46 तक सूतक काल, दर्शन और पूजा वर्जित

    ग्वालियर में चंद्र ग्रहण: मंदिर बंद, सुबह 6:20 से शाम 6:46 तक सूतक काल, दर्शन और पूजा वर्जित


    ग्वालियर। ग्वालियर में पहला खग्रास चंद्र ग्रहण 2026: मंदिर बंद, दर्शन वर्जित, सूतक काल जारी
    ग्वालियर में 3 मार्च 2026 को साल का पहला खग्रास चंद्र ग्रहण देखने को मिलेगा। ग्रहण दोपहर 3:20 बजे शुरू होकर शाम 6:46 बजे समाप्त होगा। ग्रहण के प्रभाव से जुड़े सूतक काल की शुरुआत सुबह 6:20 बजे से हो चुकी है, जिसके दौरान धार्मिक मान्यता के अनुसार पूजा, आरती और मूर्तियों का स्पर्श वर्जित माना गया है। इस अवधि में मंदिरों के पट बंद रहेंगे और श्रद्धालु केवल घर पर या सुरक्षित स्थानों से मंत्र जाप कर सकते हैं।

    ग्वालियर के प्रमुख मंदिरों जैसे राम मंदिर फालका बाजार, अचलेश्वर मंदिर, लक्ष्मीनारायण मंदिर, सनातन धर्म मंदिर, गुरुद्वारा महादेव और संकट मोचन हनुमान मंदिर में सुबह की आरती के बाद पट बंद कर दिए गए। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह ग्रहण सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में होगा और लगभग 28 मिनट तक दिखाई देगा। इस दौरान गर्भवती महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और रोगी विशेष सावधानी बरतें और नुकीली या धारदार वस्तुओं का प्रयोग न करें।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार, ग्रहण के दौरान खाना बनाना और भोजन करना वर्जित होता है क्योंकि इस समय भोजन के दूषित होने की संभावना मानी जाती है। लोग पहले से बना भोजन तुलसी के पत्तों के साथ सुरक्षित रखते हैं। ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिरों में विधिपूर्वक शुद्धिकरण किया जाएगा। गंगाजल से साफ-सफाई के बाद आरती और भोग का आयोजन किया जाएगा। इस समय स्नान, दान और मंत्र जाप करने का विशेष महत्व है।

    वैज्ञानिक दृष्टि से चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है। खग्रास स्थिति में चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में आ जाता है, जिससे वह लालिमा लिए दिखाई देता है। इस समय सूर्य की किरणें पृथ्वी द्वारा रोकी जाती हैं और चंद्रमा के सतह पर केवल पृथ्वी की छाया पड़ती है।

    ग्वालियर में इस ग्रहण को लेकर प्रशासन और मंदिर समिति ने भी श्रद्धालुओं को सतर्क किया है। लोगों से कहा गया है कि वे ग्रहण काल में मंदिरों में जाने से बचें और घर पर रहकर सुरक्षित पूजा-अर्चना करें। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि ग्रहण के दौरान संयम और सावधानी बनाए रखने से नकारात्मक प्रभाव कम होता है।

    इस प्रकार, ग्वालियर में 12 घंटे तक चलने वाला सूतक काल और खग्रास चंद्र ग्रहण श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण है। ग्रहण के बाद शुद्धिकरण, दान, मंत्र जाप और स्नान के माध्यम से पुण्य और सकारात्मक ऊर्जा अर्जित करने की परंपरा है।