Category: Madhya Pradesh

  • इंदौर की राजनीति में जुबानी जंग चरम पर, भाजपा ने कांग्रेस को घेरा, अंदरूनी विवाद और नेतृत्व पर उठाए सवाल

    इंदौर की राजनीति में जुबानी जंग चरम पर, भाजपा ने कांग्रेस को घेरा, अंदरूनी विवाद और नेतृत्व पर उठाए सवाल


    इंदौर । इंदौर की राजनीति में बयानबाजी का दौर लगातार तेज होता जा रहा है। भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए उसके शहर और प्रदेश नेतृत्व पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान अब सार्वजनिक हो चुकी है और पार्टी का संगठन आंतरिक विवादों में उलझा हुआ है। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कुछ नेताओं का व्यवहार राजनीतिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है और पार्टी का नेतृत्व अपने ही नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच बढ़ते विवादों पर कार्रवाई करने में विफल रहा है।

    मीडिया से बातचीत के दौरान सुमित मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस के भीतर नेताओं के बीच चल रहे विवाद अब शहरभर में चर्चा का विषय बन चुके हैं। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि पार्टी के अलग-अलग नेताओं के बीच लगातार टकराव हो रहा है और कई बार वरिष्ठ नेताओं को बीच-बचाव तक करना पड़ रहा है। भाजपा नेता का कहना था कि कांग्रेस संगठन में अनुशासन की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है।

    उन्होंने शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उनका व्यवहार किसी जिम्मेदार राजनीतिक पदाधिकारी जैसा नहीं बल्कि गुंडा प्रवृत्ति वाले व्यक्ति जैसा दिखाई देता है। मिश्रा ने दावा किया कि कभी पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं के साथ विवाद होता है तो कभी वरिष्ठ नेताओं के प्रति अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और कांग्रेस की ओर से इन पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।

    भाजपा नगर अध्यक्ष ने हाल ही में कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के घर पर कथित रूप से हुए विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां पार्टी नेताओं के बीच मारपीट और धमकी जैसी घटनाएं हुईं। उनका कहना था कि मामला प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व से जुड़ा होने के बावजूद पार्टी ने अब तक कोई ठोस अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की है। उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस अपने ही नेताओं और कार्यकर्ताओं के सम्मान की रक्षा क्यों नहीं कर पा रही है।

    सुमित मिश्रा ने प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व पर भी निशाना साधते हुए गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश और शहर कांग्रेस में ऐसे लोगों का प्रभाव बढ़ रहा है जिनकी वजह से पार्टी की छवि प्रभावित हो रही है। इसी दौरान उन्होंने शहर कांग्रेस अध्यक्ष पर स्टेरॉयड लेने का आरोप भी लगाया और कहा कि इसी कारण उनका व्यवहार आक्रामक रहता है। हालांकि इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने कोई सार्वजनिक साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया।

    भाजपा नेता के इन बयानों के बाद इंदौर की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावी गतिविधियों से पहले दोनों प्रमुख दलों के बीच बयानबाजी और अधिक तीखी हो सकती है। फिलहाल कांग्रेस की ओर से भाजपा के इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

  • क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई, फरार हथियार तस्कर संजय मराठा दबोचा गया, सप्लायर और नेटवर्क की तलाश तेज

    क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई, फरार हथियार तस्कर संजय मराठा दबोचा गया, सप्लायर और नेटवर्क की तलाश तेज


    इंदौर । इंदौर क्राइम ब्रांच ने अवैध हथियार तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत बड़ी सफलता हासिल करते हुए लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी संजय उर्फ संजू मराठा को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ पहले से 17 आपराधिक मामले दर्ज हैं और पुलिस को आशंका है कि वह लंबे समय से अवैध हथियारों की सप्लाई के नेटवर्क से जुड़ा हुआ था। अब उससे पूछताछ कर हथियारों के स्रोत, सप्लायर और इस पूरे गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है।

    क्राइम ब्रांच के अनुसार गिरफ्तार आरोपी संजय मराठा गुमास्ता नगर का रहने वाला है। वह प्रॉपर्टी ब्रोकिंग के साथ ई-रिक्शा किराये पर देने का कारोबार करता था। पुलिस का मानना है कि वह अपने अन्य व्यवसायों की आड़ में अवैध गतिविधियों को भी अंजाम देता था। मामले की जांच के दौरान उसका नाम सामने आने के बाद से वह लगातार फरार चल रहा था।

    इस प्रकरण में इससे पहले पुलिस परसराम उर्फ परसिया श्रीवास्तव और सोहेल उर्फ बलबली पटेल को गिरफ्तार कर चुकी है। दोनों आरोपियों के कब्जे से चार देसी पिस्टल, चार मैगजीन, चार जिंदा कारतूस, एक मारुति स्विफ्ट कार और तीन मोबाइल फोन बरामद किए गए थे। जब्त किए गए सामान की कुल कीमत करीब छह लाख रुपए आंकी गई थी। इन गिरफ्तारियों के बाद हुई पूछताछ में संजय मराठा की भूमिका सामने आई थी।

    क्राइम ब्रांच ने आरोपी की तलाश के लिए लगातार तकनीकी निगरानी और मुखबिर तंत्र का सहारा लिया। आखिरकार पुख्ता सूचना मिलने पर टीम ने कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी कितने समय से हथियारों की तस्करी में शामिल था और उसका नेटवर्क किन राज्यों या जिलों तक फैला हुआ है।

    एडिशनल डीसीपी क्राइम ब्रांच राजेश दंडोतिया के अनुसार संजय मराठा आदतन अपराधी है। उसके खिलाफ वर्ष 2005 से 2020 के बीच कुल 17 आपराधिक मामले दर्ज हो चुके हैं। इनमें आर्म्स एक्ट, आबकारी एक्ट, मारपीट, धमकी, अवैध वसूली और अन्य गंभीर अपराधों से जुड़े प्रकरण शामिल हैं। पुलिस अब उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड को भी वर्तमान जांच से जोड़कर पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है।

    जांच एजेंसियों का फोकस अब इस बात पर है कि आरोपी अवैध हथियार कहां से हासिल करता था और उन्हें किन लोगों तक पहुंचाता था। पूछताछ के दौरान मिले सुरागों के आधार पर पुलिस संभावित सप्लायरों और खरीदारों की पहचान करने में जुटी है। संभावना जताई जा रही है कि इस मामले में आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

    क्राइम ब्रांच का कहना है कि शहर में अवैध हथियारों की तस्करी पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। ऐसे मामलों में शामिल प्रत्येक आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का मानना है कि इस गिरफ्तारी से अवैध हथियारों के नेटवर्क से जुड़े कई महत्वपूर्ण खुलासे होने की उम्मीद है, जिससे शहर में अपराध पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में मदद मिलेगी।

  • इंदौर में विशालकाय कोबरा से दहशत, घर में छिपे 12 से 14 साल पुराने जहरीले सांप का सुरक्षित रेस्क्यू

    इंदौर में विशालकाय कोबरा से दहशत, घर में छिपे 12 से 14 साल पुराने जहरीले सांप का सुरक्षित रेस्क्यू


    इंदौर । इंदौर के श्रीयंत्र नगर में एक घर के भीतर पांच फीट लंबा विशाल कोबरा निकल आने से इलाके में दहशत फैल गई। परिवार के सदस्यों ने जैसे ही जहरीले सांप को देखा उनके होश उड़ गए। हालांकि घबराने के बजाय उन्होंने सूझबूझ दिखाई और तुरंत सर्पमित्र को सूचना दी। मौके पर पहुंचे सर्पमित्र ने महज पांच मिनट में कोबरा का सुरक्षित रेस्क्यू कर उसे पकड़ लिया। बाद में सांप को प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ दिया गया।

    जानकारी के अनुसार घटना सोमवार देर रात श्रीयंत्र नगर की है। परिवार के लोगों ने घर के भीतर एक बड़े आकार के कोबरा को देखा जो लोहे की चादर के नीचे छिपकर बैठा हुआ था। सांप का आकार और उसकी फुंफकार देखकर परिवार के सदस्य घबरा गए लेकिन किसी ने उसे छेड़ने की कोशिश नहीं की। सभी लोग सुरक्षित दूरी बनाकर लगातार सांप पर नजर रखते रहे ताकि उसके स्थान की जानकारी बनी रहे।

    सूचना मिलने पर सर्पमित्र महेंद्र श्रीवास्तव तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले घर के लोगों को शांत रहने और सांप से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी। इसके बाद सावधानीपूर्वक लोहे की चादर हटाई गई जहां कोबरा छिपा बैठा था। कुछ ही मिनटों की मशक्कत के बाद सांप को सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया गया। पूरी रेस्क्यू प्रक्रिया करीब पांच मिनट में पूरी हो गई।

    महेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि कोबरा का आकार सामान्य से काफी बड़ा था। उसकी लंबाई करीब पांच फीट थी और शरीर की मोटाई भी अन्य कोबरा सांपों की तुलना में अधिक दिखाई दे रही थी। उनके अनुभव के अनुसार यह कोबरा लगभग 12 से 14 वर्ष की उम्र का हो सकता है। इतना बड़ा और परिपक्व कोबरा रिहायशी इलाके में दिखाई देना असामान्य माना जाता है।

    उन्होंने बताया कि मकान के आसपास खुला क्षेत्र होने के कारण संभावना है कि सांप वहीं से घर के भीतर पहुंच गया होगा। बरसात के मौसम में बिलों में पानी भरने या भोजन की तलाश में सांप अक्सर रिहायशी इलाकों की ओर आ जाते हैं। ऐसे समय लोगों को विशेष सतर्क रहने की जरूरत होती है।

    महेंद्र ने यह भी बताया कि इसी परिवार के लोगों ने लगभग एक महीने पहले भी घर के आसपास एक कोबरा देखा था। संभव है कि वही सांप आसपास के क्षेत्र में रह रहा हो और दोबारा भोजन या सुरक्षित स्थान की तलाश में घर के अंदर पहुंच गया हो।

    रेस्क्यू के बाद सांप को सुरक्षित कंटेनर में रखा गया और मंगलवार को उसे जंगल में प्राकृतिक वातावरण के बीच छोड़ दिया गया। सर्पमित्र ने लोगों से अपील की कि यदि घर या आसपास कहीं भी सांप दिखाई दे तो उसे मारने या पकड़ने का प्रयास न करें। तुरंत वन विभाग या प्रशिक्षित सर्पमित्र को सूचना दें क्योंकि अधिकांश मामलों में सांप बिना किसी नुकसान के सुरक्षित रेस्क्यू किए जा सकते हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि बरसात के मौसम में सांप निकलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में घर के आसपास झाड़ियां साफ रखें खुले स्थानों पर कबाड़ जमा न होने दें और बच्चों को ऐसे स्थानों से दूर रखें। किसी भी जहरीले सांप के दिखाई देने पर घबराने के बजाय सतर्कता और समय पर सूचना देना ही सबसे सुरक्षित उपाय है।

  • उल्टियों से शुरू हुई परेशानी बनी मौत की वजह, इंदौर में 6 वर्षीय बच्चे की संदिग्ध मौत, पुलिस जांच में जुटी

    उल्टियों से शुरू हुई परेशानी बनी मौत की वजह, इंदौर में 6 वर्षीय बच्चे की संदिग्ध मौत, पुलिस जांच में जुटी


    इंदौर । इंदौर के कनाड़िया क्षेत्र में रहने वाले एक मजदूर परिवार पर उस समय दुखों का पहाड़ टूट पड़ा जब उनके छह वर्षीय बेटे की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मंगलवार शाम अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद बच्चे को पहले स्थानीय क्लीनिक फिर निजी अस्पताल और आखिर में एमवाय अस्पताल ले जाया गया लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं सके। फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है जिससे मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सके।

    पुलिस के अनुसार कनाड़िया क्षेत्र निवासी छह वर्षीय मनीष की तबीयत मंगलवार शाम अचानक खराब हो गई। बच्चे को लगातार उल्टियां होने लगीं जिससे परिजन घबरा गए। सबसे पहले उसे पास के एक क्लीनिक में दिखाया गया जहां डॉक्टर ने प्राथमिक उपचार के साथ कुछ खिलाकर दवा देने की सलाह दी। परिवार को उम्मीद थी कि दवा लेने के बाद बच्चे की तबीयत में सुधार हो जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

    घर लौटते समय मनीष की हालत तेजी से बिगड़ने लगी। उसे घबराहट और बेचैनी महसूस होने लगी जिससे परिवार के लोग और अधिक चिंतित हो गए। समय गंवाए बिना परिजन उसे तुरंत पास के एक अन्य अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां मौजूद डॉक्टरों ने बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल एमवाय अस्पताल रेफर कर दिया ताकि बेहतर इलाज मिल सके।

    देर रात परिजन मनीष को एमवाय अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। अचानक हुई इस घटना से परिवार सदमे में है और अस्पताल परिसर में परिजनों का रो रोकर बुरा हाल हो गया। पुलिस को घटना की सूचना मिलने के बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई।

    कनाड़िया थाना पुलिस ने बताया कि मामले में मर्ग कायम कर लिया गया है। प्रारंभिक तौर पर मौत के कारण स्पष्ट नहीं हो सके हैं इसलिए शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि बच्चे की मौत किसी बीमारी विषाक्तता या अन्य कारण से हुई है। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है।

    मृतक बच्चे के पिता कनसिंह ने बताया कि वह मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण करते हैं। उनका परिवार मूल रूप से खरगोन जिले के नागलवाड़ी क्षेत्र का रहने वाला है लेकिन रोजगार की तलाश में इंदौर के कनाड़िया इलाके में रह रहा है। मनीष परिवार का सबसे बड़ा बेटा था। उसके बाद एक छोटा भाई और एक बहन हैं। बेटे की अचानक मौत से पूरे परिवार पर गहरा दुख छा गया है।

    स्थानीय लोगों ने भी इस घटना पर दुख जताया और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। पड़ोसियों का कहना है कि मनीष सामान्य रूप से खेलकूद करने वाला स्वस्थ बच्चा था और उसकी अचानक मौत ने सभी को स्तब्ध कर दिया है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और चिकित्सकीय जांच के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि की जाएगी। यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही या अन्य संदिग्ध तथ्य सामने आते हैं तो उसके अनुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरा मामला जांच के दायरे में है और पुलिस हर पहलू की बारीकी से पड़ताल कर रही है।

  • इंदौर में साइबर ब्लैकमेलिंग का सनसनीखेज मामला, छात्रा ने फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट से सहेली को किया परेशान, जांच में खुली पोल

    इंदौर में साइबर ब्लैकमेलिंग का सनसनीखेज मामला, छात्रा ने फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट से सहेली को किया परेशान, जांच में खुली पोल


    इंदौर । इंदौर में सोशल मीडिया के जरिए ब्लैकमेलिंग और साइबर उत्पीड़न का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। खजराना थाना पुलिस ने फर्जी इंस्टाग्राम आईडी बनाकर अपनी ही पूर्व सहेली को बदनाम करने और लगातार धमकाने के आरोप में एक छात्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। साइबर पुलिस की तकनीकी जांच में खुलासा हुआ कि अश्लील संदेश भेजने और आवाज बदलकर धमकियां देने के पीछे पीड़िता की पूर्व क्लासमेट ही थी। पुलिस अब पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है।

    पुलिस के अनुसार पीड़िता और आरोपी छात्रा रिया लगभग तीन वर्षों तक एक ही स्कूल में साथ पढ़ चुकी थीं। पढ़ाई पूरी होने के बाद दोनों अलग हो गईं लेकिन कुछ महीने पहले पीड़िता की सगाई होने के बाद घटनाओं का सिलसिला शुरू हुआ। पीड़िता के इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक फर्जी प्रोफाइल से लगातार अश्लील और आपत्तिजनक संदेश आने लगे। शुरुआत में उसने इन संदेशों को नजरअंदाज किया और किसी अनजान व्यक्ति की हरकत समझकर प्रतिक्रिया नहीं दी।

    कुछ समय बाद मामला और गंभीर हो गया। फर्जी अकाउंट से केवल पीड़िता ही नहीं बल्कि उसकी मां और होने वाली सास के बारे में भी आपत्तिजनक टिप्पणियां और अशोभनीय संदेश भेजे जाने लगे। लगातार मिल रहे इन संदेशों से पीड़िता मानसिक रूप से परेशान हो गई और उसे संदेह हुआ कि यह काम कोई ऐसा व्यक्ति कर रहा है जो उसकी निजी जिंदगी के बारे में अच्छी तरह जानता है।

    इसी बीच उसी फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट से पीड़िता को ऑडियो कॉल भी आने लगे। कॉल करने वाला युवक की आवाज निकालकर बात करता था और उसे डराने धमकाने की कोशिश करता था। बार बार मिल रही धमकियों और अभद्र संदेशों के कारण पीड़िता ने आखिरकार साइबर पुलिस से शिकायत दर्ज कराई।

    साइबर पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की और इंस्टाग्राम अकाउंट की डिजिटल गतिविधियों की पड़ताल की। जांच के दौरान सामने आया कि फर्जी अकाउंट बनाकर संदेश भेजने और ऑडियो कॉल करने वाली कोई अज्ञात व्यक्ति नहीं बल्कि पीड़िता की पूर्व क्लासमेट रिया थी। डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की पहचान होने के बाद पूरी रिपोर्ट खजराना पुलिस को सौंपी गई।

    पुलिस के अनुसार जब पीड़िता ने आरोपी छात्रा से इस संबंध में बात की और फर्जी अकाउंट के बारे में पूछा तो उसने कथित रूप से माफी मांगने के बजाय उसे और धमकाया। आरोपी ने कहा कि वह उसका कुछ भी नहीं बिगाड़ सकती। इस कथित धमकी के बाद पीड़िता ने कानूनी कार्रवाई की मांग की।

    साइबर जांच रिपोर्ट मिलने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर खजराना पुलिस ने आरोपी छात्रा के खिलाफ ब्लैकमेलिंग आपराधिक धमकी और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब आरोपी से पूछताछ करने के साथ डिजिटल उपकरणों और सोशल मीडिया गतिविधियों की भी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि फर्जी अकाउंट का इस्तेमाल कब से किया जा रहा था और कहीं अन्य लोगों को भी इसी तरह निशाना तो नहीं बनाया गया।

    यह मामला एक बार फिर यह बताता है कि सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल किसी की निजी जिंदगी और मानसिक स्थिति पर गंभीर असर डाल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट से धमकियां या अश्लील संदेश मिलते हैं तो उन्हें नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखकर साइबर पुलिस से संपर्क करना चाहिए ताकि समय रहते दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जा सके।

  • इंदौर मेट्रो के अंडरग्राउंड सफर की शुरुआत, थाईलैंड की हाईटेक TBM बनाएगी मजबूत सुरंग, 24 घंटे चलेगा काम

    इंदौर मेट्रो के अंडरग्राउंड सफर की शुरुआत, थाईलैंड की हाईटेक TBM बनाएगी मजबूत सुरंग, 24 घंटे चलेगा काम


    इंदौर  इंदौर मेट्रो परियोजना के अंडरग्राउंड चरण ने अब नई रफ्तार पकड़ ली है। शहर में पहली बार अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीन यानी टीबीएम की मदद से भूमिगत सुरंग निर्माण का काम शुरू होने जा रहा है। थाईलैंड से लाई गई करीब 1000 टन वजनी इस हाईटेक मशीन की असेंबलिंग का काम शुरू हो चुका है और अगले एक महीने में इसे जमीन के करीब 20 मीटर नीचे उतार दिया जाएगा। इसके बाद यह मशीन चौबीसों घंटे लगातार काम करते हुए प्रतिदिन लगभग 20 मीटर लंबी सुरंग तैयार करेगी।

    इंदौर मेट्रो परियोजना का यह चरण तकनीकी दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि टीबीएम केवल सुरंग की खुदाई नहीं करेगी बल्कि उसी समय सुरंग की मजबूत कंक्रीट दीवारें भी तैयार करती चलेगी। इससे निर्माण कार्य की गति बढ़ेगी और सुरंग की मजबूती तथा सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। आधुनिक तकनीक से लैस यह मशीन भूमिगत निर्माण को पहले की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित और तेज बनाएगी।

    अधिकारियों के अनुसार मशीन का पहला ऑपरेशन एयरपोर्ट क्षेत्र से शुरू होगा। यहां से कालानी नगर तक पहले चरण की अंडरग्राउंड सुरंग तैयार की जाएगी। इसके बाद अगले चरण में आगे का निर्माण कार्य शुरू होगा। इंदौर मेट्रो परियोजना के तहत कुल 12 किलोमीटर लंबा अंडरग्राउंड कॉरिडोर बनाया जाना है जिसे पूरा होने में लगभग चार से पांच वर्ष का समय लग सकता है।

    टनल बोरिंग मशीन को भूमिगत इंजीनियरिंग का चलता फिरता कारखाना कहा जाता है। इसके सबसे आगे लगा विशाल गोलाकार कटर हेड लगातार घूमते हुए मिट्टी और चट्टानों को काटता है। करीब साढ़े छह मीटर व्यास वाले इस कटर हेड में लगे मजबूत स्टील ब्लेड कठिन से कठिन चट्टानों को भी आसानी से काट सकते हैं। मशीन जैसे जैसे आगे बढ़ती है वैसे वैसे उसके पीछे सुरंग का निर्माण पूरा होता जाता है।

    खुदाई के दौरान निकलने वाली मिट्टी और पत्थरों को मशीन के अंदर लगे विशेष कन्वेयर सिस्टम के माध्यम से पीछे की ओर भेजा जाता है। वहां से इस मलबे को बाहर निकाला जाता है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान सुरंग के भीतर मलबा जमा नहीं होता और मशीन बिना किसी रुकावट के लगातार आगे बढ़ती रहती है।

    टीबीएम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि खुदाई के साथ ही सुरंग की स्थायी कंक्रीट लाइनिंग भी तैयार हो जाती है। मशीन के भीतर लगे हाइड्रोलिक सिस्टम पहले से तैयार कंक्रीट रिंग को एक के बाद एक जोड़ते चलते हैं। ये सभी रिंग मिलकर सुरंग की मजबूत गोलाकार दीवार का निर्माण करती हैं। इससे मिट्टी धंसने या सुरंग कमजोर होने की संभावना काफी कम हो जाती है और निर्माण कार्य भी तेजी से पूरा होता है।

    इस हाईटेक मशीन में मैकेनिकल हाइड्रोलिक इलेक्ट्रिकल और ऑटोमेटिक कंट्रोल सिस्टम का समन्वय किया गया है। शक्तिशाली मोटर गियर और सेंसर लगातार मशीन की गति दिशा और दबाव पर नजर रखते हैं ताकि सुरंग निर्माण पूरी सटीकता और सुरक्षा के साथ किया जा सके। यही वजह है कि दुनिया के अधिकांश बड़े मेट्रो और रेलवे प्रोजेक्ट में इसी तकनीक का उपयोग किया जाता है।

    इंदौर मेट्रो के अंडरग्राउंड सेक्शन में दो समानांतर सुरंगों का निर्माण किया जाएगा। एक सुरंग से मेट्रो ट्रेन शहर की ओर जाएगी जबकि दूसरी सुरंग से वापसी करेगी। इस दोहरी सुरंग व्यवस्था से दोनों दिशाओं में ट्रेन संचालन सुचारू रूप से किया जा सकेगा और यात्रियों को तेज सुरक्षित तथा आधुनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी।

    टीबीएम के मैदान में उतरने के साथ ही इंदौर मेट्रो परियोजना का सबसे चुनौतीपूर्ण चरण शुरू होने जा रहा है। आधुनिक तकनीक और तेज निर्माण गति के कारण यह परियोजना शहर के सार्वजनिक परिवहन को नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

  • इंदौर में EOW की बड़ी कार्रवाई, MY अस्पताल के फार्मासिस्ट के ठिकानों से करोड़ों की संपत्ति के दस्तावेज मिले

    इंदौर में EOW की बड़ी कार्रवाई, MY अस्पताल के फार्मासिस्ट के ठिकानों से करोड़ों की संपत्ति के दस्तावेज मिले


    नई दिल्ली। इंदौर के महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से जुड़े एमवाय अस्पताल में पदस्थ फार्मासिस्ट राकेश गोरखे के खिलाफ आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उनके ठिकानों पर छापेमारी की है। आय से अधिक संपत्ति के मामले में हुई इस कार्रवाई के दौरान प्रारंभिक जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार आरोपी ने सरकारी सेवा के दौरान कथित रूप से सरकारी दवाओं के स्टॉक में गड़बड़ी कर अपनी वैध आय से लगभग 108 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित की है। इसके अलावा बिना विभागीय अनुमति विदेश यात्रा करने का मामला भी जांच के दायरे में आ गया है।

    आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ की टीम ने मंगलवार सुबह करीब आठ बजे इंदौर स्थित विभिन्न ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई शुरू की। कई घंटे तक चली तलाशी के दौरान संपत्ति से जुड़े दस्तावेज बैंक रिकॉर्ड पासपोर्ट और नकदी जब्त की गई। अधिकारियों के मुताबिक जांच अभी जारी है और दस्तावेजों का विस्तृत परीक्षण किया जा रहा है।

    जांच में सामने आया कि राकेश गोरखे की नियुक्ति वर्ष 2007 में फार्मासिस्ट के पद पर हुई थी। वर्ष 2015 में उनका मासिक वेतन लगभग 18711 रुपए था जो वर्ष 2025 तक बढ़कर 54664 रुपए हो गया। उनकी पत्नी कीर्ति गोरखे वर्ष 2010 से शासकीय दंत चिकित्सालय में लाइब्रेरियन के पद पर कार्यरत हैं और वर्तमान में उनका मासिक वेतन 42402 रुपए है। दोनों की संयुक्त वैध आय का आकलन करने पर जांच अवधि में कुल आय लगभग 1 करोड़ 11 लाख 31 हजार रुपए पाई गई।

    इसके विपरीत जांच एजेंसी को दंपती के पास 2 करोड़ 13 लाख 85 हजार रुपए से अधिक मूल्य की चल और अचल संपत्तियों की जानकारी मिली है। यह उनकी घोषित वैध आय से करीब 108 प्रतिशत अधिक बताई जा रही है। इसी आधार पर EOW ने आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की है।

    तलाशी के दौरान इंदौर के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित छह संपत्तियों का पता चला। इनमें स्कीम नंबर 140 स्थित वृंदावन गार्डन का दो मंजिला मकान साकार एनआरआई सिटी में बड़ा प्लॉट साहिल इंद्रांचल होम्स संघवी रेजीडेंसी और सद्गुरु नंदी विहार में प्लॉट शामिल हैं। इसके अलावा ओमेक्स डेवलपर्स की परियोजना में प्लॉट बुकिंग के लिए लगभग 6 लाख 70 हजार रुपए का भुगतान किए जाने के दस्तावेज भी मिले हैं।

    जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण खुलासा हुआ है। जब्त किए गए पासपोर्ट से पता चला कि राकेश गोरखे अक्टूबर 2023 में बिना विभागीय अनुमति थाईलैंड की यात्रा पर गए थे। अब EOW इस विदेश यात्रा पर हुए पूरे खर्च का आकलन कर रही है और इसे भी आरोपी के कुल व्यय और संपत्ति के मूल्यांकन में शामिल किया जाएगा। यदि यात्रा का खर्च वैध आय से मेल नहीं खाता है तो यह जांच को और मजबूत आधार दे सकता है।

    कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने करीब 1 लाख 51 हजार रुपए नकद भी बरामद किए हैं। साथ ही कई बैंक पासबुक संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए हैं। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने कई संपत्तियों की जानकारी अपने विभाग को नहीं दी थी जबकि शासकीय कर्मचारियों के लिए ऐसी संपत्तियों की जानकारी विभाग को देना अनिवार्य होता है।

    आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ अब जब्त किए गए सभी दस्तावेजों का सत्यापन कर रहा है। जांच पूरी होने के बाद यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला सरकारी विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

  • रेसीडेंशियल भवनों में कमर्शियल गतिविधियों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज, भोपाल में बढ़ी हलचल

    रेसीडेंशियल भवनों में कमर्शियल गतिविधियों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज, भोपाल में बढ़ी हलचल


    भोपाल । भोपाल में आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण का मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। बुधवार को इस महत्वपूर्ण प्रकरण पर सुनवाई होनी है जिसमें याचिकाकर्ता रेसीडेंशियल भूखंडों पर किए गए अवैध निर्माण और उनके व्यावसायिक उपयोग को लेकर अपना पक्ष रखेंगे। मंगलवार को इस मामले में सुनवाई प्रस्तावित थी लेकिन भोपाल से जुड़ी याचिका पर कोई फैसला नहीं हो सका। अब आज होने वाली सुनवाई पर व्यापारियों रहवासियों और प्रशासन की नजरें टिकी हुई हैं।

    याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी के अनुसार मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने देश की विभिन्न राजधानियों के नगर निगम अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर नाराजगी जताई। अदालत ने अवैध निर्माण के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं करने वाले राज्यों को कड़ी फटकार लगाई और कई राज्यों को स्पष्ट चेतावनी भी दी। हालांकि भोपाल से संबंधित याचिका पर विस्तृत सुनवाई नहीं हो सकी थी इसलिए अब बुधवार को इस मामले पर सुनवाई होने की संभावना है।

    भोपाल में यह पूरा विवाद तब तेज हुआ जब सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद नगर निगम ने आवासीय भवनों में संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। कई दुकानों और प्रतिष्ठानों को सील किया गया जबकि अनेक व्यापारियों ने कार्रवाई के डर से स्वयं अपने प्रतिष्ठान बंद कर दिए थे। शहर के कई प्रमुख इलाकों में इस कार्रवाई का व्यापक असर देखने को मिला।

    हालांकि बाद में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद सरकार ने व्यापारियों को अंतरिम राहत देने का निर्णय लिया। बैठक में मंत्रियों जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने पूरे मामले की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का विस्तृत अध्ययन करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की एक समिति गठित की जाए। यह समिति पूरे प्रकरण की जांच कर अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी। तब तक व्यापारियों को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किया जाएगा। सरकार के इस निर्णय के बाद शहर के कई इलाकों में बंद दुकानें दोबारा खुल गईं।

    दूसरी ओर इस फैसले का शहर के कई रहवासी संगठनों ने विरोध किया है। अरेरा कॉलोनी रोहित नगर बावड़ियाकलां और अन्य क्षेत्रों के लोगों का कहना है कि आवासीय इलाकों में लगातार बढ़ रही व्यावसायिक गतिविधियों से ट्रैफिक पार्किंग शोर और सुरक्षा जैसी समस्याएं गंभीर होती जा रही हैं। संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति के नेतृत्व में लोगों ने पैदल मार्च निकालकर नगर निगम की कार्रवाई को अधूरा बताते हुए अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की थी।

    याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी का कहना है कि नगर निगम ने जिन प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए थे उनके खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई पूरी नहीं की गई और बाद में कई प्रतिष्ठान फिर से खुल गए जो सुप्रीम कोर्ट की भावना के अनुरूप नहीं है। उनका मानना है कि नियमों का समान रूप से पालन होना चाहिए और अवैध निर्माण पर किसी भी तरह की ढील नहीं दी जानी चाहिए।

    वहीं भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज व्यापारियों के पक्ष में खड़ा है। संगठन का कहना है कि वर्ष 2005 के बाद नया मास्टर प्लान लागू नहीं होने के कारण व्यापारियों के सामने व्यावसायिक भूखंडों की भारी कमी है। ऐसे में कई लोग मजबूरी में आवासीय परिसरों से व्यवसाय संचालित कर रहे हैं। चैंबर ने सरकार से मिक्स लैंड यूज नीति लागू करने और व्यापारियों के लिए स्थायी समाधान निकालने की मांग की है।

    अब सुप्रीम कोर्ट की आज होने वाली सुनवाई से यह तय होगा कि भोपाल में आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों और अवैध निर्माण के मामले में आगे की दिशा क्या होगी। अदालत के फैसले का असर हजारों व्यापारियों रहवासियों और प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ना तय माना जा रहा है।

  • MP में मानसून पड़ा सुस्‍त, औसत से 18% कम बरसा पानी, 43 जिले पिछड़े, आज 5 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

    MP में मानसून पड़ा सुस्‍त, औसत से 18% कम बरसा पानी, 43 जिले पिछड़े, आज 5 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने से बारिश का आंकड़ा लगातार गिर रहा है। प्रदेश में अब तक सामान्य से 18 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है और 55 में से 43 जिले औसत से पीछे चल रहे हैं। पिछले पांच दिनों से कहीं भी भारी बारिश रिकॉर्ड नहीं हुई है। हालांकि मौसम विभाग ने नए पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के बाद मौसम में बदलाव की संभावना जताई है। बुधवार को पांच जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

    मौसम विभाग के अनुसार, पिछले तीन-चार दिनों से प्रदेश के ऊपर मौसम संबंधी सिस्टम सक्रिय तो रहे, लेकिन पर्याप्त मजबूत नहीं होने के कारण व्यापक और तेज बारिश नहीं हो सकी। इसके चलते बारिश का कुल आंकड़ा लगातार घटता गया। फिलहाल प्रदेश के उत्तरी हिस्से में दो चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय हैं, जिनके प्रभाव से ग्वालियर-चंबल, सागर और रीवा संभाग के कुछ क्षेत्रों में बारिश हुई है।

    मौसम वैज्ञानिक शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हुआ है, जिसका असर अगले कुछ दिनों में प्रदेशभर में दिखाई देगा। इसके प्रभाव से कई इलाकों में तेज बारिश का दौर शुरू होने की संभावना है।

    इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
    बुधवार को दतिया, भिंड, छतरपुर, पन्ना और सतना में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, अलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, अशोकनगर, मुरैना, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, दमोह, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश होने की संभावना है।

    कोटे से 3.5 इंच कम बारिश
    मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में अब तक औसतन 407.2 मिमी (16 इंच) बारिश हुई है, जबकि इस समय तक 495.2 मिमी (19.5 इंच) बारिश हो जानी चाहिए थी। यानी प्रदेश में अब तक करीब 3.5 इंच (18 प्रतिशत) बारिश की कमी दर्ज की गई है।

    पूर्वी हिस्से की स्थिति सबसे खराब
    पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, शहडोल, रीवा और सागर संभाग में औसतन 22 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इन संभागों का कोई भी जिला सामान्य बारिश के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाया है। अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़ और उमरिया में सामान्य से 1 से 42 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    वहीं पश्चिमी मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल संभाग में औसतन 15 प्रतिशत कम बारिश हुई है। भोपाल, दतिया, धार, गुना, ग्वालियर, हरदा, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा समेत कई जिले अभी भी औसत से पीछे हैं। अब तक बड़वानी, भिंड, बुरहानपुर, देवास, इंदौर, खंडवा और खरगोन ऐसे जिले हैं, जहां सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई है।

  • ग्वालियर टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन के लिए मुम्बई में प्राप्त हुए 1550 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव

    ग्वालियर टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन के लिए मुम्बई में प्राप्त हुए 1550 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव


    भोपाल।
    केन्द्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में मंगलवार को मुम्बई में आयोजित राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस में ग्वालियर टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन के लिए 1550 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें एमवी इलेक्ट्रोसिस्टम्स ने 700 करोड़, अनंत सिस्टम्स ने 400 करोड़, स्टरलाइट टेक्नोलॉजीज़ लिमिटेड ने 200 करोड़, वीएनटी ने 150 करोड़ और टेसकॉम ने 100 करोड़ के निवेस का प्रस्ताव दिया है।

    यह जानकारी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए दी। यह कॉन्फ्रेंस ग्वालियर टेलीकॉम मैन्युफेक्चरिंग जोन में उद्योगपति और निवेशकों को आमंत्रित करने के लिए आयोजित की थी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार और प्रदेश सरकार ने मिलकर ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्यूफैक्चरिंग जोन स्थापित किया है। गत ढाई वर्ष में राज्य सरकार की उद्योग अनुकूल नीतियों- नियमों के कारण मध्य प्रदेश में लगभग हर क्षेत्र में अभूतपूर्व निवेश प्राप्त हुआ है। यह क्रम निरंतर जारी है। पिछले ढाई वर्षों में राज्य सरकार ने उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिये अनेक निवेश अनुकूल और आकर्षक नीतियां लागू की हैं। इन नीतियों से मध्य प्रदेश को देश-विदेश के निवेशकों का अभूतपूर्व विश्वास प्राप्त हुआ है और बड़े पैमाने पर निवेश प्रस्ताव मिले हैं।

    उन्होंने कहा कि उद्योग जगत का यह विश्वास प्रदेश की पारदर्शी नीतियों और सुशासन का सबसे बड़ा प्रमाण है। मध्य प्रदेश सभी सेक्टर्स में तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है। देश-दुनिया के निवेशकों का भरोसा हमारे साथ है। भारत और दुनिया की सबसे सस्ती बिजली मध्य प्रदेश में मिलती है। औद्योगिक क्षेत्र के विकास के लिए कौशल युक्त श्रमिक मध्य प्रदेश में उपलब्ध हैं। अगर रोजगार आधारित उद्योग शुरू किये जाएं तो सरकार 5 से 10 वर्ष तक वेतन में भी सहयोग प्रदान करती है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘मेक इन एमपी’ और ‘फेथ इन एमपी’ के विश्वास पर पिछले दिनों दिल्ली में हुई पहली राउंड टेबल मीटिंग में 3 हजार 500 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले, जिसके फलस्वरूप 14 हजार लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। यह केंद्र और राज्य सरकार के साथ पहली इन्वेस्टर राउंड टेबल मिटिंग थी, जिसमें अभूतपूर्व सफलता मिली। मध्य प्रदेश सरकार ने देश के अलग-अलग शहरों में निवेश आकर्षित करने के लिए रोड-शो आयोजित किए हैं। मध्य प्रदेश सभी औद्योगिक घरानों और निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। एक बार जो यहां आकर व्यापार-व्यवसाय करता है, यहां की निवेश उन्मुख सुविधाओं और शासन-प्रशासन की सुविधाओं से प्रभावित होकर मध्य प्रदेश का ही बनकर रह जाता है।

    उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश देश का दिल है, पूर्व-पश्चिम-उत्तर-दक्षिण कोई किसी भी दिशा में जाएं, मध्य प्रदेश से जरूर गुजरता है। मध्य प्रदेश की कानून व्यवस्था सबसे बेहतर है। यहां श्रमिकों की समस्या नहीं है। भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की सफलता के बाद अगले वर्ष फिर जीआईएस-2027 का आयोजन होने जा रहा है। नर्मदापुरम जिले में बाबई-मोहासा में इलेक्ट्रिकल उपकरण पार्क में भूमि-पूजन के दिन ही 1000 एकड़ क्षेत्र में भूखंड आवंटित हो गए। धार जिले में विकसित हो रहा पीएम मित्र पार्क, टेक्सटाइल सेक्टर का देश का सबसे बड़ा क्लस्टर है। यहां भी भूमि-पूजन के होते ही सभी भूखंड आवंटित हो गए। लगभग 170 एकड़ क्षेत्र में प्लग एंड प्ले मॉडल पर विकसित किये जाना वाला टेलीकॉम मैन्यूफैक्चरिंग जोन देश का पहला इंटीग्रेटेड टेलीकॉम टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम बनकर उभरेगा। यह महत्वाकांक्षी परियोजना दूरसंचार विनिर्माण, अनुसंधान, डिजाइन, टेस्टिंग एवं इनोवेशन को एक ही परिसर में विकसित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्यूफैक्चरिंग जोन एक नई और विशेष सौगात है, जो नई दिल्ली-एनसीआर से ज्यादा दूर नहीं है। ग्वालियर शहर को सिंधिया राजघराने का भी सहयोग मिलता रहा है। बदलते दौर में राज्यों के बीच सौहार्द्रपूर्ण संबंध बनाते हुए मध्य प्रदेश ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। तीन राज्यों के साथ नदी जोड़ो परियोजना के अनुबंध करके जल प्रबंधन के कार्य किए जा रहे हैं। राजस्थान के साथ करीब 40 साल पुराने जल बंटवारे के विवाद को आपसी सहमति से हल करते हुए पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना पर हम आगे बढ़ रहे हैं। मध्य प्रदेश सरकार सभी क्षेत्रों में भारत सरकार के सहयोग से कार्य करते हुए प्रदेश के तीव्र विकास के लिए कार्य कर रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज मध्य प्रदेश में एमएसएमई, विनिर्माण, इंजीनियरिंग, रक्षा उत्पादन, टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स सहित अनेक क्षेत्रों में तेज़ी से निवेश बढ़ रहा है। ‘मेक इन एमपी’ और ‘मेड इन एमपी’ जैसे अभियान उद्योग जगत का व्यापक विश्वास अर्जित करने में सफल रहे हैं। दिल्ली में आयोजित पहले राउंड टेबल मीटिंग सहित विभिन्न निवेशक बैठकों और रोड-शो के माध्यम से प्रदेश को बड़े पैमाने पर निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिससे बड़ी संख्या में रोजगार सृजन की संभावनाएं बनी हैं।

    उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी विशेषता केवल उसकी भौगोलिक स्थिति नहीं, बल्कि निवेशकों के प्रति सरकार की साझेदारी की भावना है। राज्य सरकार उद्योगों को केवल स्थापित नहीं कराती, बल्कि उनके दीर्घकालिक विकास और विस्तार में भी सहभागी बनती है। यही कारण है कि प्रदेश के औद्योगिक पार्कों और क्लस्टर्स को निवेशकों का लगातार उत्कृष्ट प्रतिसाद मिल रहा है। साथ ही भूमि आवंटन और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में उल्लेखनीय गति आई है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्वालियर टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन दूरसंचार उद्योग के लिए आधुनिक अधोसंरचना, बेहतर आपूर्ति श्रृंखला और वैश्विक स्तर की विनिर्माण सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। इससे निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा भारत की डिजिटल और औद्योगिक प्रगति को नई गति मिलेगी।

    उन्होंने उद्योगपतियों से आग्रह किया कि वे मध्य प्रदेश को अपने उद्योगों के विस्तार का विश्वसनीय भागीदार बनाएं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मध्य प्रदेश में निवेश करने का यही सबसे उपयुक्त समय है। मध्य प्रदेश आइए, हमारे विकास के सहभागी बनिए और विकसित भारत के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाइए।