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  • MP: इंदौर में MYH के डॉक्टरों का कमाल….1 साल के बच्चे के गले में फंसी जिंदा मछली, सर्जरी कर बचाई जान

    MP: इंदौर में MYH के डॉक्टरों का कमाल….1 साल के बच्चे के गले में फंसी जिंदा मछली, सर्जरी कर बचाई जान


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश के इंदौर (Indore) के एमवाय अस्पताल (MY Hospital) में एक बेहद हैरान कर देने वाला मामला सामने आया, जहां खेलते-खेलते एक साल के मासूम (One Year old Innocent) की जिंदगी पर संकट आ गया। बच्चे के गले में जिंदा मछली फंस (Live Fish Stuck Child’s Throat) गई, जिससे उसकी हालत गंभीर हो गई। डॉक्टरों की तत्परता और जटिल सर्जरी के बाद आखिरकार बच्चे की जान बचाई जा सकी।


    सफाई के दौरान मछलियों को बाहर निकालकर रखा

    परिजनों के अनुसार, घर में एक्वेरियम की सफाई के दौरान मछलियों को बाहर निकालकर रखा गया था। इसी दौरान पास में खेल रहे बच्चों में से एक ने मछली को हाथ में उठा लिया। यह देख एक वर्षीय बच्चा जोर-जोर से हंसने लगा। तभी हाथ में छटपटा रही मछली फिसलकर सीधे बच्चे के मुंह में चली गई और गले के अंदर जाकर फंस गई।


    बच्चे को होने लगी सांस लेने में तकलीफ

    घटना के बाद बच्चे को सांस लेने में तकलीफ होने लगी थी। वह बेचैनी और घबराहट से जूझने लगा। उसके मुंह से खून भी निकलने लगा, जिससे परिजन घबरा गए और तुरंत उसे एमवाय अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने जांच में पाया कि मछली गले के पिछले हिस्से में फंसी हुई है और जिंदा होने के कारण लगातार हलचल कर रही है, जिससे अंदरूनी अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचने का खतरा था।


    सबसे बड़ी चुनौती, मछली जीवित

    ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. यामिनी गुप्ता के नेतृत्व में तुरंत आपातकालीन टीम गठित की गई और बिना देर किए सर्जरी का निर्णय लिया गया। ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि मछली जीवित थी और उसके पंख व गलफड़े हिल रहे थे, जिससे स्वर-यंत्र और भोजन नली को नुकसान पहुंचने का खतरा बना हुआ था। करीब तीन इंच लंबी और डेढ़ इंच चौड़ी गोरामी मछली को सावधानीपूर्वक बाहर निकाला गया। सर्जरी सफल रही और उपचार के बाद बच्चे की सांस सामान्य हो गई। फिलहाल उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।


    मामला बेहद दुर्लभ

    विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी कम उम्र में इस तरह का मामला बेहद दुर्लभ है और मध्य भारत में यह पहला मामला माना जा रहा है। समय पर इलाज मिलने से एक बड़ी अनहोनी टल गई। डॉक्टरों ने अभिभावकों से अपील की है कि छोटे बच्चों को हमेशा निगरानी में रखें और उन्हें छोटी या जीवित वस्तुओं से दूर रखें, क्योंकि इस तरह की लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।

  • इश्क साजिश और कत्ल: 1 लाख की सुपारी देकर पति को मरवाने वाली पत्नी गिरफ्तार

    इश्क साजिश और कत्ल: 1 लाख की सुपारी देकर पति को मरवाने वाली पत्नी गिरफ्तार

    धार। मध्यप्रदेश के धार जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है जहां पति-पत्नी के रिश्ते को तार-तार करते हुए एक महिला ने अपने प्रेम संबंधों के चलते पति की हत्या की साजिश रच डाली। इस सनसनीखेज मामले में पुलिस ने खुलासा किया कि मिर्च व्यापारी देवकृष्ण पुरोहित की हत्या किसी लूटपाट का परिणाम नहीं बल्कि एक सुनियोजित साजिश थी जिसकी मास्टरमाइंड उसकी पत्नी प्रियंका ही निकली।

    घटना सरदारपुर थाना क्षेत्र की है जहां सोमवार रात व्यापारी की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। शुरुआती जांच में इसे लूट की वारदात बताया जा रहा था लेकिन पुलिस को घटनास्थल और परिस्थितियों में कई ऐसे सुराग मिले जिन्होंने पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया। जब पुलिस ने गहराई से जांच शुरू की और मृतक की पत्नी प्रियंका से पूछताछ की तो कहानी का चौंकाने वाला सच सामने आया।

    पूछताछ में खुलासा हुआ कि प्रियंका ने अपने प्रेमी कमलेश के साथ मिलकर इस हत्या की पूरी साजिश रची थी। दोनों के बीच लंबे समय से संबंध थे और इसी रिश्ते को आगे बढ़ाने के लिए प्रियंका अपने पति को रास्ते से हटाना चाहती थी। इसके लिए उसने करीब 1 लाख रुपये की सुपारी देकर अपने परिचितों के जरिए हत्या करवाने का प्लान बनाया।

    घटना की रात प्रियंका ने आरोपियों को घर की पूरी जानकारी दी और यह भी बताया कि उस समय घर में सिर्फ वही और उसका पति मौजूद हैं। योजना के मुताबिक आरोपी घर में घुसे पहले पत्नी को अलग करने का नाटक किया और फिर व्यापारी पर हमला कर उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद पूरे घर का सामान अस्त-व्यस्त कर दिया गया ताकि यह मामला डकैती जैसा लगे।

    इतना ही नहीं खुद को निर्दोष साबित करने के लिए प्रियंका ने अपने हाथ-पैर बंधवाकर एक झूठी कहानी भी गढ़ी। आरोपियों ने उसे शोर मचाने के लिए कहा ताकि घटना वास्तविक लगे। लेकिन पुलिस की सख्त जांच और तकनीकी साक्ष्यों ने इस झूठ की परतें खोल दीं।

    आरोपी कमलेश ने पूछताछ में बताया कि प्रियंका अपने पति से परेशान थी और इसी वजह से उसने उसे खत्म करने की योजना बनाई। हत्या के बाद प्रियंका ने आरोपियों को कुछ जेवर और 30 से 40 हजार रुपये नकद भी दिए थे।

    धार पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि यह एक सुनियोजित हत्या थी जिसे लूट का रूप देने की कोशिश की गई थी। पुलिस ने 12 घंटे के भीतर मामले का खुलासा कर आरोपी पत्नी और उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया है।

    यह घटना न केवल एक जघन्य अपराध को उजागर करती है बल्कि यह भी दिखाती है कि अवैध संबंध किस तरह एक परिवार को तबाह कर सकते हैं। रिश्तों में विश्वास की जगह जब साजिश ले लेती है तो परिणाम कितना भयावह हो सकता है इसका यह मामला एक कड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है।

  • एससी विद्यार्थियों के लिए बड़ी सौगात, छात्रगृह योजना में अब हर महीने मिलेंगे 10 हजार रुपये

    एससी विद्यार्थियों के लिए बड़ी सौगात, छात्रगृह योजना में अब हर महीने मिलेंगे 10 हजार रुपये


    भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण और राहत भरा फैसला लिया है, जिससे उनकी उच्च शिक्षा का रास्ता और आसान हो सकेगा। अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान ने जानकारी देते हुए बताया कि छात्रगृह योजना में संशोधन कर अब पात्र विद्यार्थियों को प्रतिमाह 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।

    यह निर्णय विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है जो दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययन कर रहे हैं या वहां प्रवेश लेने की तैयारी कर रहे हैं। महंगे शहरों में रहने और पढ़ाई के खर्च को देखते हुए यह सहायता उनके लिए काफी मददगार साबित होगी।

    मंत्री नागर सिंह चौहान ने बताया कि इस योजना के तहत हर साल कुल 100 विद्यार्थियों को लाभ दिया जाएगा। इसमें 50 विद्यार्थी स्नातक स्तर के होंगे और 50 विद्यार्थी स्नातकोत्तर स्तर के होंगे। इसके अलावा जो विद्यार्थी पहले से इस योजना के अंतर्गत अध्ययन कर रहे हैं, उन्हें भी इसका लाभ मिलता रहेगा।

    इस पहल का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों को देश के प्रमुख शिक्षण संस्थानों तक पहुंच दिलाना भी है। अक्सर देखा जाता है कि प्रतिभाशाली विद्यार्थी आर्थिक तंगी के कारण बड़े शहरों में जाकर पढ़ाई नहीं कर पाते, जिससे उनके करियर की संभावनाएं सीमित हो जाती हैं। ऐसे में यह योजना उनके लिए नई उम्मीद लेकर आई है।

    सरकार का मानना है कि जब विद्यार्थियों को बेहतर संसाधन और अवसर मिलेंगे, तो वे न केवल अपनी पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन करेंगे, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं में भी सफलता हासिल कर सकेंगे। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे समाज में अपनी एक मजबूत पहचान बना पाएंगे।

    मंत्री नागर सिंह चौहान ने कहा कि यह कदम सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। समाज के कमजोर वर्गों को मुख्यधारा में लाने और उन्हें समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए ऐसी योजनाएं बेहद जरूरी हैं। इससे शिक्षा के क्षेत्र में असमानता को कम करने में मदद मिलेगी।

    विशेषज्ञों का भी मानना है कि इस तरह की योजनाएं न केवल व्यक्तिगत स्तर पर बदलाव लाती हैं, बल्कि समाज के समग्र विकास में भी योगदान देती हैं। जब अधिक से अधिक विद्यार्थी उच्च शिक्षा प्राप्त करेंगे, तो इससे प्रदेश की मानव संसाधन क्षमता मजबूत होगी और आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।

    कुल मिलाकर, यह निर्णय अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों के लिए एक बड़ी राहत और अवसर के रूप में देखा जा रहा है। इससे उन्हें न केवल बेहतर शिक्षा मिलेगी, बल्कि अपने सपनों को साकार करने के लिए एक मजबूत आधार भी मिलेगा।

  • 9 से 23 अप्रैल तक प्रदेश में 8वां पोषण पखवाड़ा, बच्चों के मस्तिष्क विकास पर खास जोर

    9 से 23 अप्रैल तक प्रदेश में 8वां पोषण पखवाड़ा, बच्चों के मस्तिष्क विकास पर खास जोर

    भोपाल। मध्यप्रदेश में 9 अप्रैल से 23 अप्रैल 2026 तक 8वां पोषण पखवाड़ा मनाया जाएगा जिसमें इस वर्ष बच्चों के मस्तिष्क विकास को केंद्र में रखते हुए व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इस बार पखवाड़े की थीम जीवन के पहले छह वर्षों में मस्तिष्क का अधिकतम विकास निर्धारित की गई है जो बाल विकास के सबसे महत्वपूर्ण चरण को रेखांकित करती है।

    पोषण पखवाड़े का शुभारंभ 9 अप्रैल को प्रदेशभर के आंगनवाड़ी केन्द्रों और समुदाय स्तर पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में किया जाएगा। इस दौरान “पोषण पर चर्चा” कार्यक्रम आयोजित कर आम लोगों को मातृ एवं शिशु पोषण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी जाएगी। अभियान का उद्देश्य परिवार और समाज को बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के प्रति जागरूक बनाना है।

    इस पखवाड़े में गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। जन्म से तीन वर्ष तक के बच्चों के मस्तिष्क विकास के लिए प्रारंभिक प्रोत्साहन गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा जबकि तीन से छह वर्ष तक के बच्चों के लिए खेल आधारित शिक्षा को प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही परिवारों को बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करने और उनके समग्र विकास में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

    विशेषज्ञों के अनुसार मानव मस्तिष्क का लगभग 85 प्रतिशत विकास जीवन के पहले छह वर्षों में ही हो जाता है। इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए इस अभियान में ऐसे व्यवहारों और गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा जो बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास को मजबूत बनाते हैं।

    पोषण पखवाड़े के दौरान विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे जिनमें स्वास्थ्य शिविर पोषण संबंधी कहानी वाचन दादी-नानी के अनुभव साझा कार्यक्रम स्थानीय खाद्य सामग्री से पौष्टिक व्यंजन प्रतियोगिता और जंक फूड के दुष्प्रभावों पर जागरूकता रैली शामिल हैं। इसके अलावा बच्चों के विकासात्मक मील के पत्थरों की पहचान माता-पिता के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल सत्र और आंगनवाड़ी केन्द्रों को सशक्त बनाने के प्रयास भी किए जाएंगे।

    22 अप्रैल को पंखुड़ी पोर्टल के माध्यम से आंगनवाड़ी केन्द्रों के लिए सामुदायिक सहयोग और दान अभियान चलाया जाएगा जबकि 23 अप्रैल को पोषण मेला आयोजित कर जनप्रतिनिधियों और समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

    प्रदेश के सभी जिलों में इस अभियान के तहत रैलियां पोषण वाटिका निर्माण प्रश्नोत्तरी पोस्टर और नारा लेखन प्रतियोगिता तथा सोशल मीडिया अभियान चलाए जाएंगे। साथ ही इन गतिविधियों की जानकारी पोषण अभियान के जन-आंदोलन डैशबोर्ड पर दर्ज की जाएगी जिससे इसकी निगरानी और प्रभाव का आकलन किया जा सके।

    इस अभियान को सफल बनाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ-साथ स्वास्थ्य पंचायत जनजातीय कार्य नगरीय प्रशासन और स्कूल शिक्षा विभाग मिलकर काम करेंगे। यह समन्वित प्रयास सुनिश्चित करेगा कि पोषण पखवाड़ा केवल एक कार्यक्रम न होकर एक जन-आंदोलन के रूप में सामने आए।

    कुल मिलाकर यह पहल प्रदेश में बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और स्वस्थ समाज की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है जिसमें परिवार समाज और प्रशासन की संयुक्त भागीदारी से सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया जाएगा।

  • एमपी में भ्रष्टाचार पर लोकायुक्त का बड़ा एक्शन, इंदौर में 2 इंजीनियर और नरसिंहपुर में बाबू गिरफ्तार

    एमपी में भ्रष्टाचार पर लोकायुक्त का बड़ा एक्शन, इंदौर में 2 इंजीनियर और नरसिंहपुर में बाबू गिरफ्तार


    नरसिंहपुर इंदौर। मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार के मामलों पर लगाम लगती नजर नहीं आ रही है। आए दिन सरकारी अधिकारी और कर्मचारी रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े जा रहे हैं जिससे शासन-प्रशासन की छवि पर सवाल उठ रहे हैं। ताजा मामले इंदौर और नरसिंहपुर से सामने आए हैं जहां लोकायुक्त पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

    इंदौर में लोकायुक्त टीम ने लोक निर्माण विभाग के दो इंजीनियरों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा है। जानकारी के अनुसार बालकुमार जैन और धीरेंद्र नीमा नामक इंजीनियरों ने एक भुगतान के बदले 6 प्रतिशत कमीशन की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त ने योजना बनाकर दोनों को 90 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए ट्रैप किया। कार्रवाई के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच शुरू कर दी गई है।

    वहीं नरसिंहपुर में भी जबलपुर लोकायुक्त पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नगर पालिका में पदस्थ बाबू संजय तिवारी को 25 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि बाबू ने पेवर ब्लॉक लगाने वाले एक ठेकेदार से बिल भुगतान के एवज में 38 हजार रुपये की मांग की थी। शिकायत के आधार पर लोकायुक्त टीम ने जाल बिछाया और आरोपी को रंगे हाथों पकड़ लिया।

    दोनों मामलों में लोकायुक्त पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए कार्रवाई की है और आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

    प्रदेश में लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों से यह साफ होता है कि भ्रष्टाचार की समस्या अभी भी गंभीर बनी हुई है। आम नागरिकों और ठेकेदारों को अपने काम के लिए रिश्वत देने पर मजबूर होना पड़ता है जिससे सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठते हैं। हालांकि लोकायुक्त की सक्रियता से ऐसे मामलों का खुलासा हो रहा है लेकिन इन घटनाओं की पुनरावृत्ति प्रशासन के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए केवल कार्रवाई ही नहीं बल्कि सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही भी जरूरी है। डिजिटल प्रक्रियाओं को बढ़ावा देकर और भुगतान व्यवस्था को पूरी तरह ऑनलाइन बनाकर इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    फिलहाल इंदौर और नरसिंहपुर में हुई इन कार्रवाइयों ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती जारी है लेकिन इसे जड़ से खत्म करने के लिए लगातार निगरानी और सख्त कदम उठाने की जरूरत है। लोकायुक्त की यह कार्रवाई आम लोगों के लिए राहत की खबर जरूर है लेकिन साथ ही यह भी दर्शाती है कि अभी इस दिशा में लंबा रास्ता तय करना बाकी है।

  • एमपी बोर्ड का बड़ा फैसला, अब फेल ही नहीं पास छात्र भी सुधार सकेंगे अंक, ‘द्वितीय परीक्षा’ से मिलेगा दूसरा मौका

    एमपी बोर्ड का बड़ा फैसला, अब फेल ही नहीं पास छात्र भी सुधार सकेंगे अंक, ‘द्वितीय परीक्षा’ से मिलेगा दूसरा मौका


    नई दिल्ली/भोपाल। माध्यमिक शिक्षा मंडल म.प्र. भोपाल ने इस वर्ष से परीक्षा प्रणाली में अहम बदलाव करते हुए पारंपरिक पूरक परीक्षा व्यवस्था को समाप्त कर दिया है। इसके स्थान पर अब द्वितीय परीक्षा शुरू की जा रही है जिसमें फेल और पास दोनों ही प्रकार के छात्र शामिल हो सकेंगे। यह परीक्षा 7 मई 2026 से आयोजित होगी।

    नई व्यवस्था के तहत छात्र केवल अनुत्तीर्ण विषयों के लिए ही नहीं बल्कि अपने अंक सुधारने के उद्देश्य से भी किसी विषय में दोबारा परीक्षा दे सकेंगे। बोर्ड का मानना है कि इस पहल से विद्यार्थियों को अपने परिणाम बेहतर करने का अधिक अवसर मिलेगा।

    पहले की व्यवस्था में हाईस्कूल 10वीं में अधिकतम दो विषय और हायर सेकेंडरी 12वीं में एक विषय में फेल छात्र ही पूरक परीक्षा दे सकते थे। लेकिन अब इस नई द्वितीय परीक्षा प्रणाली में सभी छात्रों को समान अवसर प्रदान किया गया है।

    नियमों के अनुसार जो छात्र किसी विषय में फेल हैं उनके लिए उस विषय की परीक्षा देना अनिवार्य होगा। वहीं पास छात्र अपनी इच्छा से किसी भी विषय में शामिल होकर अपने अंक सुधार सकते हैं। इसे छात्रों के लिए राहतभरा कदम माना जा रहा है।

    जारी टाइमटेबल के मुताबिक 12वीं की द्वितीय परीक्षा 7 मई से 25 मई 2026 तक आयोजित होगी जबकि 10वीं की परीक्षा 7 मई से 19 मई 2026 के बीच होगी। सभी परीक्षाएं निर्धारित केंद्रों पर कराई जाएंगी।

    बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि द्वितीय परीक्षा के बाद जारी अंकसूची मुख्य परीक्षा के समान ही होगी। छात्र के दोनों परिणामों में से जो बेहतर होगा वही अंतिम रूप से मान्य किया जाएगा जिससे उन्हें सीधे तौर पर फायदा मिलेगा।

    द्वितीय परीक्षा में शामिल होने के लिए छात्रों को मुख्य परीक्षा का परिणाम घोषित होने के सात दिनों के भीतर आवेदन करना होगा। आवेदन प्रक्रिया एमपी ऑनलाइन कियोस्क के माध्यम से पूरी की जाएगी। इसके लिए छात्र बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट www.mpbse.nic.in पर जाकर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

  • बड़वानी के मोहिपुरा में महसूस किए गए भूकंप के झटके, 3.4 तीव्रता दर्ज, घरों से बाहर निकले लोग

    बड़वानी के मोहिपुरा में महसूस किए गए भूकंप के झटके, 3.4 तीव्रता दर्ज, घरों से बाहर निकले लोग


    बड़वानी । बड़वानी जिले के अंजड़ थाना क्षेत्र स्थित ग्राम मोहिपुरा में बुधवार दोपहर 12 बजकर 48 मिनट पर भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 3.4 दर्ज की गई। बताया जा रहा है कि करीब दो मिनट तक धरती में कंपन होता रहा, जिससे ग्रामीणों में घबराहट फैल गई और लोग तुरंत अपने घरों से बाहर निकल आए।

    गांव के निवासी लोकेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि वे दोपहर में अपने घर पर सो रहे थे, तभी अचानक तेज झटका महसूस हुआ। समय देखा तो 12:48 बजे थे। इसके बाद वे तुरंत बाहर आए और आसपास के लोगों से पूछताछ की, तब पता चला कि यह भूकंप के झटके थे। उन्होंने कहा कि इस तरह का अनुभव गांव में पहली बार हुआ है।

    भूकंप के दौरान ग्रामीणों ने अपने घरों में रखे बर्तन, फर्नीचर और पंखों को हिलते हुए देखा। इंदिरा सागर पावर स्टेशन की भूकंप वेधशाला और राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र की वेबसाइट पर भी इसी समय भूकंप दर्ज किया गया है।

    जिला मुख्यालय पर संचालित भूकंप केंद्र की सिस्मोमीटर मशीन में भी इस हलचल को 3.4 रिक्टर स्केल पर रिकॉर्ड किया गया। केंद्र के ऑपरेटर हुकुम कुमार के अनुसार, एमईक्यू माइक्रोअर्थक्विक मशीन 24 घंटे सक्रिय रहती है और नर्मदा नगर पुनासा, खंडवा स्थित सेंटर से प्रतिदिन सुबह रिपोर्ट जारी की जाती है।

    उन्होंने बताया कि बुधवार दोपहर अंजड़ क्षेत्र में दर्ज इस भूकंपीय हलचल की तीव्रता 3.4 रही, जिसे एमईक्यू मशीन ने रिकॉर्ड किया। यह मशीन लगभग 40 से 50 किलोमीटर के दायरे में जमीन की हलचल को मापने में सक्षम है।

  • आग बुझाने गया किसान खुद बन गया शिकार, सतना में 80 वर्षीय बुजुर्ग की मौत

    आग बुझाने गया किसान खुद बन गया शिकार, सतना में 80 वर्षीय बुजुर्ग की मौत


    सतना । सतना जिले में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया जहां अरहर के खेत में लगी आग बुझाने के प्रयास में एक वृद्ध किसान की झुलसकर मौत हो गई। यह घटना बरौंधा थाना क्षेत्र के बकोटा गांव की है जहां मंगलवार दोपहर अचानक खेत में आग भड़क उठी और देखते ही देखते उसने विकराल रूप ले लिया।

    पुलिस सूत्रों के अनुसार बकोटा गांव निवासी 80 वर्षीय मुरलिया यादव अपने खेत में लगी आग को बुझाने के लिए मौके पर पहुंचे थे। आग तेजी से फैल रही थी और आसपास की फसलों को भी अपनी चपेट में ले रही थी। ऐसे में मुरलिया यादव ने बिना अपनी सुरक्षा की परवाह किए आग बुझाने का प्रयास शुरू किया लेकिन इसी दौरान वे लपटों में घिर गए और गंभीर रूप से झुलस गए।

    ग्रामीणों ने घटना को देख तुरंत मौके पर पहुंचकर आग बुझाने का प्रयास किया और मुरलिया यादव को बाहर निकालने की कोशिश की लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि उन्हें गंभीर रूप से जलने से बचाया नहीं जा सका। घटना के बाद गांव में शोक का माहौल छा गया और हर कोई इस हादसे से स्तब्ध नजर आया।

    सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि खेत में आग अचानक लगी हालांकि आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

    ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी के मौसम में खेतों में सूखी फसल और तेज हवाओं के कारण आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में थोड़ी सी चिंगारी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे मामलों में जागरूकता अभियान चलाया जाए और किसानों को सुरक्षा उपायों के बारे में जानकारी दी जाए।

    यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि खेतों में आग लगने की स्थिति में बिना सुरक्षा के उसे बुझाने का प्रयास कितना खतरनाक हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आग लगने पर तुरंत फायर ब्रिगेड या संबंधित अधिकारियों को सूचना देना चाहिए और खुद जोखिम उठाने से बचना चाहिए।

    मुरलिया यादव का यह बलिदान गांव के लोगों के लिए एक बड़ी क्षति है। वे अपने परिवार और समुदाय के लिए समर्पित किसान थे। इस दुखद घटना ने न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है।

    प्रशासन और पुलिस अब इस घटना की जांच कर रहे हैं और आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं ग्रामीणों को भी सतर्क रहने और भविष्य में ऐसे हादसों से बचने के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।

  • भिण्ड में बदलते मौसम ने गेहूँ की फसल को किया प्रभावित, किसानों में बढ़ी चिंता

    भिण्ड में बदलते मौसम ने गेहूँ की फसल को किया प्रभावित, किसानों में बढ़ी चिंता

    भिण्ड । भिण्ड जिले में मौसम का अचानक बदलता मिजाज किसानों की चिंता का कारण बन गया है। पिछले एक सप्ताह से सुबह तेज धूप और शाम को बारिश का सिलसिला लगातार जारी है। इस बदलते मौसम से खेतों में खड़ी और कटाई के लिए तैयार गेहूँ की फसल पर नकारात्मक असर पड़ा है। किसानों का कहना है कि यह अचानक बदलते मौसम ने फसल की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता दोनों को प्रभावित किया है।

    कल देर शाम तेज हवाओं के साथ बादल घिर आए और रात में बूंदाबांदी शुरू हो गई। जिले के कुछ क्षेत्रों में अच्छी बारिश दर्ज की गई, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई। हालांकि देर रात मौसम साफ होने से लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन खेतों में फसल पर इसका असर स्पष्ट दिखाई दे रहा है। कई जगह गेहूँ के बाल कमजोर हुए और जमीन पर गिर गए हैं, जिससे उनका नुकसान होने की संभावना है।

    किसानों का कहना है कि गेहूँ की कटाई का समय करीब है और ऐसी बारिश फसल के बर्बाद होने का जोखिम बढ़ा रही है। उन्होंने प्रशासन से अनुरोध किया है कि वे मौसम के अनुसार आवश्यक कदम उठाएं और किसानों को समय पर जानकारी प्रदान करें ताकि वे अपनी फसल की रक्षा कर सकें। इसके अलावा किसानों ने सुझाव दिया है कि मौसम के अनुकूल तकनीकी सहायता और उपकरण उपलब्ध कराए जाएं, जिससे कटाई के दौरान नुकसान को कम किया जा सके।

    मौसम विभाग ने भी भिण्ड जिले में अगले कुछ दिनों के लिए बारिश की संभावना जताई है। किसानों को सतर्क रहने और खेतों में सुरक्षा उपाय अपनाने की सलाह दी गई है। किसानों का कहना है कि तेज हवाओं और बारिश के चलते फसल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ेगा।

    भिण्ड जिले में गेहूँ किसानों की मुख्य फसल है और यह क्षेत्रिक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में मौसम की अनिश्चितता से किसान परेशान हैं और वे अपने फसल के सही मूल्य और उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त प्रयास कर रहे हैं। किसान संगठन और स्थानीय प्रशासन भी इस स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं और किसानों को सलाह और मदद प्रदान करने में जुटे हैं।

    कुल मिलाकर भिण्ड जिले में बदलते मौसम और लगातार बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। गेहूँ की फसल पर पड़ने वाले असर को देखते हुए किसानों ने प्रशासन से मदद और समय पर जानकारी की मांग की है। विशेषज्ञ भी सुझाव दे रहे हैं कि किसानों को अपने खेतों में आवश्यक सुरक्षा उपाय करना चाहिए ताकि फसल की बर्बादी कम से कम हो। ऐसे में आगामी दिनों में मौसम की स्थिति और प्रशासन की मदद दोनों ही किसानों की चिंता को कम करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

  • किसान कल्याण वर्ष 2026: उपार्जन केंद्रों पर सुविधाओं और कंट्रोल रूम से होगी निगरानी

    किसान कल्याण वर्ष 2026: उपार्जन केंद्रों पर सुविधाओं और कंट्रोल रूम से होगी निगरानी


    भोपाल । भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में 9 अप्रैल से शुरू होने वाली गेहूँ खरीदी को लेकर सभी उपार्जन केंद्रों पर किसानों के लिए सहज और सुगम व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उपार्जन केंद्रों पर किसानों के लिए पेयजल और छायादार स्थान की विशेष व्यवस्था की जाएगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने किसान और स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों से वर्चुअल संवाद भी किया और उन्हें प्रदेश की गेहूँ खरीदी प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए आमंत्रित किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों की आय बढ़ाने और उनकी फसल का उचित मूल्य सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि गेहूँ की प्रति क्विंटल कीमत को वर्तमान स्तर तक लाना एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन इसे 2700 रुपये प्रति क्विंटल तक ले जाने का प्रयास किया जाएगा। इसका उद्देश्य किसानों को उनकी मेहनत का पूरा लाभ दिलाना और कृषि क्षेत्र को प्रोत्साहित करना है।

    उपार्जन केंद्रों पर हेल्प डेस्क स्थापित किए जा रहे हैं ताकि किसानों को तुरंत सहायता मिल सके। इसके साथ ही जिला स्तर पर कंट्रोल रूम बनाए गए हैं, और मुख्यमंत्री कार्यालय में स्थापित कंट्रोल रूम से संपूर्ण प्रक्रिया पर निरंतर निगरानी रखी जाएगी। केंद्रों पर पंपलेट और होर्डिंग के माध्यम से किसानों को खरीदी प्रक्रिया, दस्तावेज़ और अन्य सुविधाओं के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

    मुख्यमंत्री ने सामाजिक और सेवाभावी संस्थाओं से भी सहयोग की अपील की है। उन्होंने कहा कि ऐसे संगठन उपार्जन केंद्रों पर आकर व्यवस्था में मदद कर सकते हैं, किसानों को मार्गदर्शन दे सकते हैं और प्रशासन के साथ मिलकर कार्य कर सकते हैं। इस वर्ष 2026 को प्रदेश में किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है, और इस दौरान किसानों को उनकी फसल, आय और कल्याण से जुड़े सरकारी कार्यक्रमों की जानकारी भी दी जाएगी।

    डॉ. यादव ने बारदाने की पर्याप्त उपलब्धता और खरीदी केंद्रों में व्यवस्थाओं को लेकर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हित और कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है और हर संभव प्रयास कर रही है कि उपार्जन प्रक्रिया बिना किसी बाधा के संपन्न हो। किसानों के कल्याण के लिए यह सुनिश्चित किया गया है कि उन्हें सही मूल्य, उचित सुविधाएं और सरल प्रक्रिया के माध्यम से गेहूँ बेचने का अवसर मिले।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान कल्याण और कृषि क्षेत्र के सशक्तिकरण के लिए इस प्रक्रिया में प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं का सहयोग अनिवार्य है। कंट्रोल रूम से निरंतर निगरानी, हेल्प डेस्क पर सहायता, पंपलेट और होर्डिंग के माध्यम से जानकारी उपलब्ध कराना तथा किसानों की सुविधाओं को प्राथमिकता देना इस प्रक्रिया की सफलता की कुंजी होगी।

    इस प्रकार प्रदेश में गेहूँ उपार्जन की प्रक्रिया किसानों के हित और सुविधा के अनुरूप पूरी तरह व्यवस्थित की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल से किसान कल्याण वर्ष 2026 में उपार्जन केंद्रों पर किसानों की संतुष्टि और कृषि क्षेत्र की उत्पादकता को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही सामाजिक संस्थाओं और प्रशासन के सहयोग से यह प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी और सहज होगी।