Category: Madhya Pradesh

  • ब्रिज निर्माण में देरी पर सख्ती: संभागायुक्त ने लगाया 5 लाख का जुर्माना

    ब्रिज निर्माण में देरी पर सख्ती: संभागायुक्त ने लगाया 5 लाख का जुर्माना


    उज्जैन । उज्जैन में सिंहस्थ 2028 महापर्व को देखते हुए शिप्रा नदी के तट पर भीड़ नियंत्रण और सुगम यातायात व्यवस्था के लिए नए ब्रिजों का निर्माण किया जा रहा है। संत महात्माओं और करोड़ों श्रद्धालुओं के स्नान को ध्यान में रखते हुए यह कार्य तेजी से कराया जा रहा है।

    संभागायुक्त और कलेक्टर ने किया निरीक्षण
    बुधवार को संभाग आयुक्त और सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह तथा कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने शिप्रा तट पर चल रहे ब्रिज निर्माण की प्रगति की जानकारी ली।

    अंगारेश्वर–सिद्धवट ब्रिज पर नाराजगी
    श्री अंगारेश्वर मंदिर से सिद्धवट मंदिर को जोड़ने वाले ब्रिज निर्माण की गति धीमी पाए जाने पर संभागायुक्त ने नाराजगी जताई। उन्होंने निर्माण एजेंसी पर 5 लाख रुपये की पेनल्टी लगाने के निर्देश दिए।

    क्वालिटी कंट्रोल लैब का निरीक्षण
    निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने निर्माण स्थल पर मौजूद क्वालिटी कंट्रोल लैब का भी निरीक्षण किया। अधिकारियों ने निर्देश दिए कि निर्माण सामग्री की जांच कर रिपोर्ट नियमित रूप से रजिस्टर में दर्ज की जाए।

    अन्य निर्माण कार्यों की समीक्षा
    कलेक्टर और मेला अधिकारी ने इंदौर रोड स्थित डी मार्ट के सामने रोड निर्माण और त्रिवेणी हिल्स से सिकंदरी के बीच शिप्रा तट पर चल रहे ब्रिज निर्माण कार्य का भी निरीक्षण किया। अधिकारियों ने सभी कार्यों को समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।

  • सिंहस्थ 2028 से पहले बड़ी तैयारी: गढ़कालिका मंदिर में बढ़ेंगी श्रद्धालु सुविधाएं

    सिंहस्थ 2028 से पहले बड़ी तैयारी: गढ़कालिका मंदिर में बढ़ेंगी श्रद्धालु सुविधाएं


    नई दिल्ली । धार्मिक नगरी उज्जैन में स्थित ऐतिहासिक गढ़कालिका मंदिर के विकास और सौंदर्यीकरण के लिए 15.50 करोड़ रुपए की विस्तृत परियोजना तैयार की गई है। इस योजना का उद्देश्य सिंहस्थ 2028 से पहले मंदिर परिसर को आधुनिक सुविधाओं से लैस करना और बढ़ती श्रद्धालु भीड़ को बेहतर तरीके से संभालना है। उज्जैन स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत इस कार्य के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और जल्द ही चयनित एजेंसी को काम सौंपा जाएगा।

    गढ़कालिका मंदिर को उज्जैन की उत्तरी सीमा का रक्षक और एक प्रमुख शक्तिपीठ माना जाता है। यहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। नई परियोजना के तहत मंदिर परिसर की क्षमता को मौजूदा 3 से 5 हजार श्रद्धालुओं से बढ़ाकर 10 से 12 हजार श्रद्धालुओं तक किया जाएगा। वहीं सिंहस्थ 2028 के दौरान लगभग 50 हजार लोगों की भीड़ को संभालने की व्यवस्था की जाएगी।

    आधुनिक सुविधाओं से सजेगा मंदिर परिसर
    परियोजना के अंतर्गत मंदिर के शिखर और संरचना की मजबूती पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। पुराने चूना प्लास्टर का नवीनीकरण किया जाएगा और मंदिर के अग्रभाग को आकर्षक स्वरूप दिया जाएगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए छायादार प्रतीक्षालय, पेयजल व्यवस्था, स्वच्छ शौचालय और आधुनिक कतार प्रबंधन प्रणाली विकसित की जाएगी।

    प्रवेश-निकास और पार्किंग व्यवस्था में सुधार
    मंदिर परिसर में भीड़ नियंत्रण के लिए अलग-अलग प्रवेश और निकास द्वार बनाए जाएंगे, जिससे दर्शन व्यवस्था अधिक सुचारु हो सके। इसके साथ ही लगभग 50 वाहनों की पार्किंग सुविधा विकसित की जाएगी। दिव्यांगजनों के लिए रैंप और विशेष पत्थर मार्ग भी बनाए जाएंगे ताकि सभी श्रद्धालुओं को आसानी से दर्शन का लाभ मिल सके।

    रोशनी और सौंदर्यीकरण पर भी जोर
    मंदिर परिसर को रात के समय आकर्षक बनाने के लिए “वॉर्म एम्बर” थीम आधारित लाइटिंग की जाएगी, जिससे गढ़कालिका मंदिर की धार्मिक और सांस्कृतिक भव्यता और अधिक निखरेगी।

    एक साल में पूरा होगा प्रोजेक्ट
    उज्जैन कलेक्टर रौशन कुमार सिंह के अनुसार, चयनित एजेंसी को एक वर्ष के भीतर परियोजना पूरा करने का लक्ष्य दिया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि इस विकास कार्य के बाद गढ़कालिका मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र बनेगा, बल्कि उज्जैन के पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी। `

  • झुलसाती गर्मी से हाहाकार: 22 शहरों में 44 डिग्री पार, वॉर्म नाइट की चेतावनी

    झुलसाती गर्मी से हाहाकार: 22 शहरों में 44 डिग्री पार, वॉर्म नाइट की चेतावनी


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश इस समय भीषण गर्मी और लू की चपेट में है। मंगलवार को छतरपुर जिले के नौगांव में तापमान रिकॉर्ड 47 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस सीजन का अब तक का सबसे अधिक तापमान है। वहीं खजुराहो में पारा 46.4 डिग्री तक पहुंच गया। मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगले 4 दिन प्रदेश में भीषण हीटवेव यानी लू का असर जारी रहेगा और हालात और गंभीर हो सकते हैं।
    22 शहरों में 44 डिग्री से ऊपर तापमान
    प्रदेश के 22 से अधिक शहरों में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के पार दर्ज किया गया। दतिया 45.8 डिग्री के साथ तीसरा सबसे गर्म शहर रहा। इसके अलावा राजगढ़, दमोह, शाजापुर, टीकमगढ़, गुना, सागर, सतना और श्योपुर जैसे जिलों में भी पारा 45 डिग्री के आसपास रहा। ग्वालियर में पहली बार तापमान 45 डिग्री तक पहुंचा, जबकि भोपाल में 44.2 डिग्री, इंदौर में 43.7 डिग्री, उज्जैन में 43.8 डिग्री और जबलपुर में 44.6 डिग्री दर्ज किया गया।

    वॉर्म नाइट से बढ़ेगी परेशानी
    इस बार केवल दिन ही नहीं, बल्कि रातें भी राहत नहीं दे रही हैं। भोपाल में रात का तापमान 30 डिग्री तक दर्ज किया गया, जिसे मौसम वैज्ञानिकों ने वॉर्म नाइट बताया है। इससे लोगों को दिन के बाद रात में भी गर्मी से राहत नहीं मिल पा रही है।

    हीटवेव और ऑरेंज अलर्ट जारी
    मौसम विभाग ने प्रदेश के उत्तरी हिस्सों सहित कई जिलों—भिंड, दतिया, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, सागर और दमोह में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर सहित अधिकांश जिलों में लू चलने की संभावना जताई गई है।

    स्वास्थ्य को लेकर चेतावनी
    मौसम विभाग ने लोगों को दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच बाहर न निकलने की सलाह दी है। विशेषज्ञों के अनुसार इस समय लू का असर सबसे अधिक होता है और हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

    मध्यप्रदेश में अगले चार दिन मौसम और भी कठिन रहने वाले हैं। लगातार बढ़ता तापमान, वॉर्म नाइट और तेज लू लोगों की दिनचर्या पर असर डाल रहे हैं। ऐसे में सतर्कता और सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।

  • रेल कनेक्टिविटी पर जोर: CAIT ने रेल मंत्री से की अतिरिक्त ट्रेन चलाने की अपील

    रेल कनेक्टिविटी पर जोर: CAIT ने रेल मंत्री से की अतिरिक्त ट्रेन चलाने की अपील


    नई दिल्ली । मंगलवार को कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के प्रतिनिधियों ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात की। इस बैठक में देशभर के व्यापारिक प्रतिनिधि शामिल हुए और रेलवे सेवाओं से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। मध्यप्रदेश से राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर और महिला संगठन की प्रतिनिधि सीमा सिंह चौहान ने बैठक में भाग लिया और जबलपुर से जुड़ी रेल समस्याओं को प्रमुखता से उठाया।

    जबलपुर-दिल्ली अतिरिक्त ट्रेन की मांग
    सीमा सिंह चौहान ने रेल मंत्री को बताया कि जबलपुर से दिल्ली के बीच व्यापारिक आवागमन लगातार बढ़ रहा है, लेकिन मौजूदा ट्रेनों की उपलब्धता पर्याप्त नहीं है। उन्होंने विशेष रूप से देर शाम एक अतिरिक्त ट्रेन शुरू करने की मांग की, जिससे व्यापारियों और यात्रियों को अधिक सुविधा मिल सके। उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल यात्रा को आसान बनाएगा, बल्कि व्यापारिक गतिविधियों को भी गति देगा।

    लॉजिस्टिक्स सुधार और डेमरेज शुल्क पर राहत की मांग
    बैठक में रेल इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कई अन्य मुद्दे भी उठाए गए। प्रतिनिधियों ने साइडिंग सिस्टम को बेहतर बनाने, माल ढुलाई प्रक्रिया को सरल करने और व्यापारियों पर लगाए जाने वाले अनुचित डेमरेज शुल्क में राहत देने की मांग की। व्यापारियों का कहना था कि मौजूदा व्यवस्था में कई जगह देरी और अतिरिक्त लागत का सामना करना पड़ता है, जिससे कारोबार प्रभावित होता है।

    रेल मंत्री ने दिए सकारात्मक संकेत
    रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सभी सुझावों को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। बैठक में मौजूद प्रतिनिधियों ने कहा कि मंत्री का रवैया सकारात्मक रहा और उम्मीद है कि जबलपुर के रेल कनेक्टिविटी मुद्दों पर जल्द निर्णय लिया जाएगा।

    यह बैठक जबलपुर के व्यापारिक समुदाय के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि अतिरिक्त ट्रेन और लॉजिस्टिक्स सुधार की मांगें स्वीकार होती हैं, तो क्षेत्र के व्यापार और यात्रियों दोनों को बड़ा लाभ मिल सकता है।

  • ग्रामीणों का फूटा गुस्सा: विकास नहीं, भ्रष्टाचार के आरोप, चार तहसीलदार हटाए गए

    ग्रामीणों का फूटा गुस्सा: विकास नहीं, भ्रष्टाचार के आरोप, चार तहसीलदार हटाए गए


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के अंतर्गत आने वाले पलवा गांव में मंगलवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई जब जिले के कलेक्टर राघवेंद्र सिंह, एसडीएम और तहसीलदारों का काफिला निरीक्षण के लिए गांव पहुंचा। जैसे ही अधिकारी गांव की बदहाल सड़कों और जलभराव वाले इलाकों में पहुंचे, ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा।

    ग्रामीणों ने मौके पर ही प्रशासनिक अमले को घेर लिया और विकास कार्यों में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाया। लोगों का कहना था कि गांव में सड़कें, नालियां और जल निकासी की व्यवस्था सिर्फ कागजों में पूरी दिखाई जाती है, जबकि जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विकास कार्यों के नाम पर लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद गांव की हालत बदतर बनी हुई है। जगह-जगह कीचड़, गंदा पानी और टूटी सड़कों ने आम जनजीवन को मुश्किल में डाल दिया है।

    कीचड़ में फंसी अफसरों की गाड़ियां, बढ़ा गुस्सा
    निरीक्षण के दौरान स्थिति तब और बिगड़ गई जब अधिकारियों के वाहन दलदल जैसी सड़कों में फंस गए। काफी मशक्कत के बाद गाड़ियों को बाहर निकाला गया, लेकिन यह दृश्य ग्रामीणों के गुस्से को और भड़का गया। लोगों ने सवाल उठाया कि जब प्रशासनिक अधिकारियों की गाड़ियां गांव में सुरक्षित नहीं चल पा रहीं, तो बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों की हालत कितनी खराब होगी। ग्रामीणों ने कहा कि बारिश के मौसम में स्थिति और भयावह हो जाती है, लेकिन अब तक कोई ठोस सुधार नहीं हुआ।

    भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, उच्चस्तरीय जांच की मांग
    ग्रामीणों ने सरपंच और सहायक सचिव सहित स्थानीय अधिकारियों पर विकास कार्यों में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। उनका कहना था कि नालियों का निर्माण बेहद घटिया गुणवत्ता का हुआ है, जिससे पानी सड़कों पर भर जाता है। ग्रामीणों ने मांग की कि पूरे विकास कार्यों की उच्चस्तरीय वित्तीय जांच कराई जाए और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।

    कलेक्टर ने लिया एक्शन, 4 तहसीलदारों के तबादले
    घटना के बाद प्रशासन ने तुरंत सख्त कदम उठाए। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने रात में ही चार तहसीलदारों के स्थानांतरण आदेश जारी कर दिए। इसमें शहपुरा तहसील से जुड़े अधिकारियों के पदस्थापना परिवर्तन शामिल हैं। प्रशासन का कहना है कि क्षेत्र में विकास कार्यों की समीक्षा की जा रही है और लापरवाही पाए जाने पर आगे भी कार्रवाई होगी।

    पलवा गांव की यह घटना एक बार फिर ग्रामीण विकास योजनाओं की जमीनी सच्चाई को उजागर करती है। जहां एक ओर कागजों में विकास दिखता है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

  • दवा संकट की आशंका: जबलपुर में मेडिकल स्टोर्स बंद, प्रशासन ने की वैकल्पिक व्यवस्था

    दवा संकट की आशंका: जबलपुर में मेडिकल स्टोर्स बंद, प्रशासन ने की वैकल्पिक व्यवस्था


    नई दिल्ली । ऑनलाइन दवा बिक्री और ई-फार्मेसी के बढ़ते चलन के विरोध में ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) ने बुधवार को देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया। इस हड़ताल का असर पूरे देश में देखने को मिला, जहां करीब 12 लाख से अधिक मेडिकल स्टोर बंद रहे। मध्यप्रदेश के कई जिलों के साथ-साथ जबलपुर में भी इसका व्यापक असर पड़ा, जहां लगभग 2000 मेडिकल स्टोरों ने अपने शटर गिरा दिए।

    जबलपुर में दवा बाजार पर असर, दुकानें बंद
    जबलपुर शहर में सुबह से ही मेडिकल स्टोर बंद नजर आए। दवा खरीदने पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि अस्पतालों के अंदर स्थित मेडिकल स्टोर्स को हड़ताल से बाहर रखा गया है, ताकि गंभीर मरीजों को दवा मिलती रहे।

    केमिस्ट संगठनों का आरोप स्वास्थ्य के लिए खतरा
    केमिस्ट संगठनों का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बिना उचित जांच के दवाएं उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे गलत दवा सेवन और दुरुपयोग की आशंका बढ़ रही है। उनका तर्क है कि ऑफलाइन मेडिकल स्टोर्स में दवाएं देने से पहले डॉक्टर की पर्ची और जांच की प्रक्रिया सख्ती से अपनाई जाती है। संगठन का मानना है कि ई-फार्मेसी के बढ़ते प्रभाव से स्थानीय दुकानदारों का व्यवसाय भी प्रभावित हो रहा है।

    प्रशासन ने की वैकल्पिक व्यवस्था
    हड़ताल को देखते हुए जिला प्रशासन ने मरीजों की सुविधा के लिए वैकल्पिक व्यवस्था लागू की है। सरकारी अस्पतालों, जन औषधि केंद्रों और अमृत फार्मेसी को चालू रखा गया है ताकि मरीजों को जरूरी दवाएं मिल सकें।

    हेल्पलाइन और आपात व्यवस्था जारी
    आपात स्थिति में दवा उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं। जरूरत पड़ने पर मरीज या परिजन औषधि निरीक्षकों से सीधे संपर्क कर सकते हैं।

    देवेंद्र कुमार जैन: 88199 04545
    प्रवीण पटेल: 95899 07750
    कंट्रोल रूम (भोपाल): 0755-2665385

  • होटल में जानलेवा हमला: ग्वालियर में बदमाश ने की फायरिंग, आरोपी पुलिस की गिरफ्त में

    होटल में जानलेवा हमला: ग्वालियर में बदमाश ने की फायरिंग, आरोपी पुलिस की गिरफ्त में


    नई दिल्ली ।  ग्वालियर के हजीरा चौराहा स्थित होटल करिश्मा में उस समय हड़कंप मच गया जब सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात करीब 1:30 बजे कुछ बदमाशों ने फायरिंग कर दी। बताया जा रहा है कि पूरी घटना सिर्फ इसलिए हुई क्योंकि आरोपियों को देर रात खाना नहीं मिला था। होटल संचालक रवि सिंह उर्फ सोनू जब शटर बंद कर रहे थे, तभी दो बाइक पर चार युवक वहां पहुंचे और खाना मांगने लगे। होटल बंद होने और तंदूर ठंडा होने की बात कहने पर विवाद शुरू हो गया।

    गाली-गलौज से लेकर ताबड़तोड़ फायरिंग तक
    विवाद बढ़ते ही मामला हिंसक हो गया। आरोपियों ने पहले गाली-गलौज की और फिर दहशत फैलाने के लिए फायरिंग शुरू कर दी। सीसीटीवी फुटेज में साफ दिख रहा है कि आरोपी सूरज गौड़ अपने साथी को उकसाते हुए “मार दे इनको आज” कह रहा है। इसी दौरान करण बाथम ने कट्टा निकालकर होटल संचालक पर गोली चला दी, लेकिन निशाना चूकने से उनकी जान बच गई।

    होटल में तोड़फोड़, मौके से फरार हुए आरोपी
    फायरिंग के बाद आरोपियों ने होटल के शटर और काउंटर में तोड़फोड़ भी की और मौके से फरार हो गए। अचानक हुई इस घटना से इलाके में दहशत फैल गई और स्थानीय लोग मौके पर इकट्ठा हो गए।

    एक आरोपी गिरफ्तार, बाकी की तलाश जारी
    पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी सूरज गौड़ को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, अन्य आरोपियों की पहचान कर ली गई है और उनकी तलाश में पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं। एसएसपी ग्वालियर के अनुसार, यह मामला गंभीर आपराधिक प्रवृत्ति का है और बाकी फरार आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

    CCTV बना सबसे बड़ा सबूत
    घटना की पूरी वारदात होटल में लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई है, जिससे पुलिस को आरोपियों की पहचान और कार्रवाई में मदद मिली है।

  • भोजशाला की प्रतिमा की कहानी: 26 कलाकारों ने 35 दिन में तैयार की थी वाग्देवी मूर्ति

    भोजशाला की प्रतिमा की कहानी: 26 कलाकारों ने 35 दिन में तैयार की थी वाग्देवी मूर्ति


    नई दिल्ली । मध्यप्रदेश के ग्वालियर में एक ऐसी ऐतिहासिक और भावनात्मक कहानी छिपी है, जो धार की भोजशाला से जुड़ी है। यहां रखी हुई मां वाग्देवी (सरस्वती) की अष्टधातु प्रतिमा पिछले 15 वर्षों से एक घर में सुरक्षित रखी गई है, जिसका निर्माण 2011 में मात्र 35 से 40 दिनों में 26 कलाकारों ने मिलकर किया था।

    यह प्रतिमा मूल रूप से धार स्थित भोजशाला के गर्भगृह में स्थापित की जानी थी, लेकिन उस समय उपजे धार्मिक और प्रशासनिक विवाद के कारण इसे वहां नहीं ले जाया जा सका और ग्वालियर में ही रोक दिया गया।

    लंदन म्यूजियम वाली प्रतिमा की हूबहू कॉपी
    इस प्रतिमा की सबसे खास बात यह है कि इसे लंदन म्यूजियम में रखी मूल मां वाग्देवी की मूर्ति के समान आकार और डिज़ाइन में बनाया गया है।
    यह प्रतिमा अष्टधातु (आठ धातुओं के मिश्रण) से बनी है
    ऊंचाई लगभग साढ़े 3 फीट और वजन 250 किलो से अधिक है
    2011 में इसकी लागत लगभग 2.5 से 3 लाख रुपये आई थी
    इसे पूरी तरह पारंपरिक शिल्प और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तैयार किया गया

    विवाद के कारण रुक गई प्राण-प्रतिष्ठा
    मूर्तिकार प्रभात राय के परिवार के अनुसार, जब 2011 में बसंत पंचमी पर प्रतिमा की स्थापना की तैयारी थी, तभी भोजशाला को लेकर विवाद भड़क गया। सुरक्षा कारणों से प्रशासन ने प्रतिमा को धार भेजने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद कई वर्षों तक हर बसंत पंचमी पर पुलिस सुरक्षा में प्रतिमा को कुछ दिनों के लिए प्रदर्शित किया जाता रहा, लेकिन स्थायी स्थापना कभी नहीं हो सकी।

    15 साल से ग्वालियर में सुरक्षा के साये में
    इस प्रतिमा को लेकर स्थिति बेहद संवेदनशील रही। शुरुआती वर्षों में मूर्तिकार के घर पर पुलिस सुरक्षा तक तैनात रही। प्रतिमा को आज भी ग्वालियर में सुरक्षित रखा गया है और इसकी देखरेख परिवार कर रहा है। मूर्तिकार परिवार का कहना है कि यह केवल एक मूर्ति नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है।

    कोर्ट फैसले के बाद फिर जगी उम्मीद
    हाल ही में भोजशाला को लेकर आए कोर्ट के फैसले के बाद इस प्रतिमा को लेकर फिर चर्चा तेज हो गई है। हिंदू पक्ष का कहना है कि मूल प्रतिमा को वापस लाकर भोजशाला में स्थापित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। हालांकि, फिलहाल इस पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है और प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

    “अगर कोई नहीं ले गया तो मैं इसे रखूंगा” – मूर्तिकार का बयान
    मूर्तिकार प्रभात राय के बेटे अनुज राय ने भावुक होकर कहा कि यदि भविष्य में प्रतिमा को भोजशाला ले जाने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती, तो वे इसे अपने पास ही गर्व से सुरक्षित रखेंगे। उनके अनुसार, यह प्रतिमा केवल एक कलाकृति नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है।

    लंदन में रखी मूल प्रतिमा पर भी चर्चा
    इधर, धार की मूल मां वाग्देवी प्रतिमा के लंदन म्यूजियम में होने को लेकर भी मांगें उठ रही हैं कि उसे भारत लाकर भोजशाला में पुनः स्थापित किया जाए। हिंदू पक्ष का दावा है कि यह प्रतिमा खंडित अवस्था में है, लेकिन धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

  • बदनामी के डर से खामोशी: हनीट्रैप मामले में कई पीड़ित नहीं आ रहे सामने

    बदनामी के डर से खामोशी: हनीट्रैप मामले में कई पीड़ित नहीं आ रहे सामने


    नई दिल्ली ।  मध्य प्रदेश के इंदौर और भोपाल में सामने आए हाईप्रोफाइल हनीट्रैप केस ने पूरे सिस्टम को हिला दिया है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि इस पूरे गैंग की शुरुआत जेल के अंदर हुई थी, जहां श्वेता विजय जैन और अलका दीक्षित की दोस्ती बनी थी। यहीं से “फंसाओ और वसूली करो” की खतरनाक साजिश का बीज पड़ा। जेल से बाहर आने के बाद दोनों ने मिलकर एक ऐसा नेटवर्क तैयार किया, जो नेताओं, कारोबारियों और प्रभावशाली लोगों को निशाना बनाकर उन्हें हनीट्रैप में फंसाता और फिर वीडियो-फोटो के जरिए मोटी रकम की मांग करता था।

    कैसे चलता था पूरा हनीट्रैप सिस्टम?
    पुलिस के अनुसार गैंग बेहद संगठित तरीके से काम करता था। पहले किसी महिला के जरिए टारगेट से नजदीकी बढ़ाई जाती थी। फिर निजी मुलाकातों में आपत्तिजनक फोटो और वीडियो रिकॉर्ड किए जाते थे। इसके बाद धमकी देकर लाखों-करोड़ों की वसूली शुरू हो जाती थी। गैंग के सदस्य खुद को कभी कारोबारी, कभी राजनीतिक संपर्क वाला व्यक्ति बताकर भरोसा जीतते थे। कई मामलों में फर्जी पहचान और सोशल मीडिया नेटवर्क का भी इस्तेमाल किया गया।

    हाईप्रोफाइल नामों तक पहुंचने की कोशिश
    जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह ने सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि दिल्ली तक के नेताओं को टारगेट करने की कोशिश की थी। पुलिस को शक है कि गैंग के पास कई प्रभावशाली लोगों के निजी वीडियो और डाटा मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल दबाव बनाने में किया जा रहा था।

    पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 40 अफसरों की टीम एक्टिव
    मामले की गंभीरता को देखते हुए क्राइम ब्रांच ने 40 से अधिक पुलिसकर्मियों की 7 टीमें बनाकर इंदौर और भोपाल में एक साथ छापेमारी की। पांच मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और कई मोबाइल, लैपटॉप और डिजिटल सबूत जब्त किए गए हैं। पुलिस को यह भी शक है कि कुछ वीडियो एआई (AI) तकनीक से तैयार किए गए हो सकते हैं, जिसकी जांच की जा रही है।

    ड्रग्स और हथियार नेटवर्क से भी जुड़े तार
    जांच में सामने आया है कि इस गैंग के कुछ सदस्य ड्रग्स और अवैध हथियार तस्करी नेटवर्क से भी जुड़े हो सकते हैं। पुलिस अब बैंक ट्रांजैक्शन, कॉल डिटेल्स और सोशल मीडिया चैट्स की गहन जांच कर रही है।

    बदनामी के डर से कई पीड़ित सामने नहीं आए
    पुलिस का मानना है कि इस गिरोह ने कई बड़े कारोबारियों और नेताओं को पहले भी निशाना बनाया है, लेकिन सामाजिक बदनामी के डर से कई लोग शिकायत दर्ज नहीं करा रहे।

    उज्जैन से शुरू हुआ विवाद, बना बड़ा रैकेट
    सूत्रों के मुताबिक अलका दीक्षित का उज्जैन में एक जमीन विवाद था, जिसके बाद उसने हनीट्रैप का रास्ता अपनाया। धीरे-धीरे यह नेटवर्क भोपाल, इंदौर और आसपास के जिलों तक फैल गया।

    पुलिस का बयान
    डीसीपी क्राइम ब्रांच के अनुसार जांच अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में कई बड़े और चौंकाने वाले नाम सामने आ सकते हैं।
  • #JusticeForTwisha ट्रेंड में: सोशल मीडिया पर इंसाफ की मांग तेज

    #JusticeForTwisha ट्रेंड में: सोशल मीडिया पर इंसाफ की मांग तेज


    नई दिल्ली । भोपाल की दिवंगत अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की मौत के बाद सोशल मीडिया पर #JusticeForTwisha अभियान तेजी से वायरल हो गया है। इंस्टाग्राम, X (ट्विटर) और व्हाट्सऐप पर लोग लगातार उनके लिए न्याय की मांग कर रहे हैं। शुरुआत उनके परिवार और दोस्तों द्वारा पोस्ट और वीडियो शेयर करने से हुई, जिसके बाद यह मुद्दा धीरे-धीरे बड़े सोशल मीडिया मूवमेंट में बदल गया।

    हजारों पोस्ट और तेजी से बढ़ता ट्रेंड
    रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक 6,000 से ज्यादा पोस्ट X पर और लगभग 4,000 से ज्यादा पोस्ट इंस्टाग्राम पर #JusticeForTwisha के साथ किए जा चुके हैं। जैसे-जैसे यह हैशटैग बढ़ा, सोशल मीडिया एल्गोरिदम ने इसे ट्रेंडिंग में शामिल कर दिया, जिससे यह और ज्यादा लोगों तक पहुंचने लगा।

    सोशल मीडिया अभियान कैसे बनता है ट्रेंड?
    विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे अभियान अक्सर तीन चरणों में फैलते हैं:
    परिवार या करीबी लोगों की भावनात्मक पोस्ट से शुरुआत
    सोशल मीडिया यूजर्स और क्रिएटर्स का जुड़ाव
    एल्गोरिदम द्वारा हैशटैग को ट्रेंड में प्रमोट करना
    जब किसी हैशटैग पर कम समय में ज्यादा लाइक, शेयर और कमेंट आते हैं, तो वह तेजी से वायरल हो जाता है।

    क्या इसके पीछे कोई बड़ी टीम होती है?
    ऐसे अभियानों के पीछे हमेशा संगठित टीम हो, यह जरूरी नहीं है। कई बार यह पूरी तरह ऑर्गेनिक होता है, जहां लोग भावनात्मक रूप से जुड़कर पोस्ट करते हैं। हालांकि, कुछ मामलों में डिजिटल मार्केटिंग, इन्फ्लुएंसर्स और सोशल मीडिया नेटवर्क भी इन अभियानों को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाते हैं। पिछले बड़े मामलों जैसे सुशांत सिंह राजपूत केस में भी इसी तरह के हैशटैग ट्रेंड हुए थे, जहां लाखों यूजर्स एक साथ जुड़ गए थे।

    क्या ऐसे कैंपेन में पैसा भी लगता है?
    डिजिटल मार्केटिंग विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ अभियानों में सोशल मीडिया प्रमोशन और कंटेंट पुश करने के लिए पैसे भी खर्च किए जाते हैं। हालांकि, हर ट्रेंड पेड नहीं होता। कई बार यह पूरी तरह यूजर्स की भावनाओं से प्रेरित होता है।

    फेक अकाउंट और डिजिटल पॉलिटिक्स का पहलू
    कुछ मामलों में ऐसे ट्रेंड्स को बढ़ाने के लिए फेक अकाउंट्स और संगठित डिजिटल नेटवर्क का भी इस्तेमाल होने के आरोप लगते रहे हैं। मुंबई पुलिस जैसी जांचों में पहले यह भी सामने आया था कि हजारों फेक अकाउंट्स से हैशटैग ट्रेंड करवाए गए थे।

    #JusticeForTwisha जैसे अभियान यह दिखाते हैं कि सोशल मीडिया आज सिर्फ बातचीत का नहीं, बल्कि न्याय की मांग का भी बड़ा मंच बन चुका है। लेकिन इसके साथ यह भी जरूरी है कि जानकारी और तथ्यों की जांच के बाद ही किसी ट्रेंड को आगे बढ़ाया जाए।