Category: Madhya Pradesh

  • दवा बिक्री को लेकर बड़ा विरोध: भोपाल-छतरपुर में केमिस्टों की नारेबाजी

    दवा बिक्री को लेकर बड़ा विरोध: भोपाल-छतरपुर में केमिस्टों की नारेबाजी


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश में बुधवार को दवा व्यापारियों की बड़ी हड़ताल देखने को मिली। प्रदेशभर में लगभग 41 हजार मेडिकल स्टोर्स बंद रहे, जबकि अकेले भोपाल में ही 3 हजार से ज्यादा दुकानों ने कामकाज रोक दिया। यह बंद ऑनलाइन दवा बिक्री के बढ़ते प्रभाव और नियमों की कमी के विरोध में बुलाया गया था। इस दौरान केवल अस्पतालों के अंदर संचालित मेडिकल स्टोर्स को ही छूट दी गई, ताकि इमरजेंसी मरीजों को दवा मिल सके।

    केमिस्टों का आरोप: ऑनलाइन दवाएं बन रही खतरा
    केमिस्ट संगठनों का कहना है कि बिना सख्त नियमों के ऑनलाइन दवाओं की बिक्री बढ़ रही है, जिससे कई गंभीर समस्याएं पैदा हो रही हैं। उनका आरोप है कि:
    नकली या गलत दवाओं की संभावना बढ़ रही है
    पर्चियों की सत्यता की सही जांच नहीं हो रही
    छोटे स्थानीय मेडिकल स्टोर्स को भारी नुकसान हो रहा है
    भारी डिस्काउंट के कारण बाजार असंतुलित हो रहा है
    इस मुद्दे को लेकर ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स ने पूरे देश में विरोध दर्ज कराया है।

    मरीजों की परेशानी, अस्पताल स्टोर्स पर बढ़ी भीड़
    दवा दुकानों के बंद रहने से आम मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई जगहों पर लोग जरूरी दवाइयों के लिए सरकारी अस्पतालों की ओर दौड़ते नजर आए, जिससे वहां भीड़ बढ़ गई। इमरजेंसी सेवाओं को ध्यान में रखते हुए जिला स्तर पर टास्क फोर्स बनाई गई है, जो जरूरतमंद मरीजों तक दवाएं पहुंचाने का काम कर रही है।

    भोपाल, छतरपुर और अन्य जिलों में प्रदर्शन
    भोपाल में थोक दवा बाजार में केमिस्टों ने एकत्र होकर नारेबाजी की और कलेक्टोरेट पहुंचकर ज्ञापन सौंपने की तैयारी की। छतरपुर और अन्य जिलों में भी इसी तरह विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। कई जगह केमिस्टों ने बाइक रैलियां निकालीं और प्रशासन को अपनी मांगें सौंपीं।

    केमिस्टों की प्रमुख मांगें
    हड़ताल कर रहे व्यापारियों की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
    ई-फार्मेसी पर सख्त और स्पष्ट नियम लागू किए जाएं
    ऑनलाइन दवा बिक्री पर नियंत्रण लगाया जाए
    भारी डिस्काउंट वाली ऑनलाइन बिक्री पर रोक लगे
    नकली और बिना निगरानी वाली दवाओं पर सख्त कार्रवाई हो

    कोविड के दौरान मिली थी छू
    कोविड-19 महामारी के दौरान ऑनलाइन दवा बिक्री को सरकार ने आवश्यक सेवा के तहत अनुमति दी थी, ताकि लोगों को घर बैठे दवाएं मिल सकें। इसी छूट का उपयोग अब केमिस्ट संगठन नियमों की कमी के रूप में बता रहे हैं।

    यह विरोध सिर्फ व्यापार का नहीं बल्कि स्वास्थ्य सुरक्षा का मुद्दा बन गया है। एक तरफ ऑनलाइन दवा बिक्री की सुविधा है, तो दूसरी तरफ केमिस्ट संगठन इसे जोखिम भरा बता रहे हैं। आने वाले समय में इस पर सरकार की नीति और नियमों की भूमिका बेहद अहम होगी।

  • मध्य प्रदेश में भीषण लू का कहर: पारा 45°C के पार, कई जिलों में जनजीवन प्रभावित

    मध्य प्रदेश में भीषण लू का कहर: पारा 45°C के पार, कई जिलों में जनजीवन प्रभावित

    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश इन दिनों भीषण गर्मी और तपती लू की चपेट में है। प्रदेश के कई जिलों में तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है और हालात ऐसे बन गए हैं कि दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसर जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, राज्य के कई हिस्सों में पारा 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

    राज्य के ग्वालियर, भिंड, मुरैना, रतलाम, खंडवा, खरगोन और आसपास के इलाकों में गर्म हवाओं का असर सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है। सुबह से ही तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण लोग घरों से निकलने से बच रहे हैं। दोपहर के समय स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जब लू के थपेड़े शरीर को झुलसा देने वाले हो जाते हैं।

    मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों तक राहत मिलने की संभावना कम है। अनुमान लगाया जा रहा है कि यह भीषण लू 20 मई तक जारी रह सकती है। इसके बाद ही मौसम में हल्का बदलाव देखने को मिल सकता है। विभाग ने यह भी चेतावनी दी है कि बुजुर्गों, बच्चों और बीमार व्यक्तियों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

    गर्मी का असर सिर्फ तापमान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। अस्पतालों में हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और कमजोरी के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि लोग दिन के सबसे गर्म समय यानी 12 बजे से 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें और पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थों का सेवन करें।

    स्थानीय प्रशासन ने भी लोगों से अपील की है कि वे धूप में अनावश्यक यात्रा से बचें और हल्के, ढीले व सूती कपड़े पहनें। साथ ही, सिर को ढककर बाहर निकलने और छायादार स्थानों में रहने की सलाह दी गई है।

    गांवों और कस्बों में स्थिति और अधिक कठिन हो गई है, जहां बिजली कटौती और पानी की कमी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। किसान वर्ग भी इस गर्मी से प्रभावित हो रहा है, क्योंकि खेतों में काम करना दिन के समय लगभग असंभव हो गया है।

    कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश में गर्मी का यह दौर लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण बन गया है। मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए आने वाले दिनों में सतर्क रहने की आवश्यकता और भी बढ़ गई है। फिलहाल लोगों को राहत का इंतजार है, लेकिन आसमान से बरसती आग अभी थमती नजर नहीं आ रही है।

  • MP में भीषण गर्मी का कहर, नौगांव में पारा 47 डिग्री पहुंचा, 4 दिन लू का अलर्ट

    MP में भीषण गर्मी का कहर, नौगांव में पारा 47 डिग्री पहुंचा, 4 दिन लू का अलर्ट

    भोपाल। मध्य प्रदेश इन दिनों भीषण गर्मी और लू की चपेट में है। प्रदेश में सूरज आग बरसा रहा है और दिन के साथ रातें भी तपने लगी हैं। मंगलवार को छतरपुर जिले के नौगांव में सीजन का सबसे अधिक 47 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, जबकि खजुराहो में पारा 46.4 डिग्री तक पहुंच गया। इस सीजन में पहली बार तापमान 47 डिग्री के आंकड़े तक पहुंचा है।

    मौसम विभाग (IMD) ने प्रदेश में अगले चार दिनों तक हीटवेव यानी लू चलने का अलर्ट जारी किया है। मंगलवार को राज्य के 22 शहरों में अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। नौगांव और खजुराहो के बाद दतिया तीसरा सबसे गर्म शहर रहा, जहां तापमान 45.8 डिग्री रिकॉर्ड किया गया।

    इसके अलावा राजगढ़ में 45.6 डिग्री, दमोह में 45.5 डिग्री, शाजापुर, टीकमगढ़, गुना और सागर में 45.2 डिग्री, सतना में 45.1 डिग्री तथा मुरैना, शहडोल, रायसेन, रीवा और श्योपुर में 45 डिग्री तापमान दर्ज हुआ। मंडला में 44.6 डिग्री, उमरिया में 44.5 डिग्री, खरगोन में 44.4 डिग्री, रतलाम में 44.2 डिग्री और खंडवा में 44.1 डिग्री तापमान रहा।

    प्रदेश के बड़े शहरों में भी गर्मी ने रिकॉर्ड तोड़े। ग्वालियर में इस सीजन में पहली बार तापमान 45 डिग्री पहुंचा। भोपाल में 44.2 डिग्री, इंदौर में 43.7 डिग्री, उज्जैन में 43.8 डिग्री और जबलपुर में 44.6 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। भोपाल में यह सीजन का सबसे गर्म दिन रहा। एयरपोर्ट ऑब्जर्वेटरी में तापमान 44.2 डिग्री रिकॉर्ड हुआ, जबकि अरेरा हिल्स स्थित ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन में पारा 46 डिग्री तक पहुंच गया। नए भोपाल में सीजन की पहली लू भी चली और रात का तापमान पहली बार 30 डिग्री दर्ज हुआ।

    मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन दिन प्रदेश में तीखी गर्मी बनी रहेगी। पूरे राज्य में लू का असर देखने को मिलेगा। मंगलवार को सतना और टीकमगढ़ में तेज गर्मी के बीच दो लोगों की मौत हो गई। आशंका जताई जा रही है कि दोनों की मौत हीट स्ट्रोक यानी लू लगने से हुई।

    बुधवार के लिए मौसम विभाग ने भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, सागर, दमोह, रायसेन और रतलाम जिलों में तेज लू का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

    वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, श्योपुर, मुरैना, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, नीमच, मंदसौर, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बड़वानी, आगर-मालवा, खरगोन, शाजापुर, देवास, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, सीहोर, विदिशा, नर्मदापुरम, नरसिंहपुर, मंडला, शहडोल और मैहर में लू चलने की संभावना जताई गई है।

    इसके अलावा राजगढ़, रायसेन, कटनी, उमरिया, डिंडौरी, बालाघाट और छिंदवाड़ा में वॉर्म नाइट की चेतावनी जारी की गई है, यानी रात का तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है। बैतूल, पांढुर्णा, सिवनी और अनूपपुर में भी गर्मी का असर बना रहेगा।

    मौसम विभाग ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। विभाग के अनुसार दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच गर्मी और लू का प्रभाव सबसे ज्यादा रहेगा। जरूरी काम होने पर ही घर से बाहर निकलने और पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी गई है।

  • कांग्रेस और भीम आर्मी का विरोध: शिवपुरी में नशे के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग

    कांग्रेस और भीम आर्मी का विरोध: शिवपुरी में नशे के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग


    मध्य प्रदेश। शिवपुरी में मंगलवार को IPL सट्टा और स्मैक जैसे नशे के बढ़ते कारोबार के खिलाफ बड़ा जनआंदोलन देखने को मिला। कांग्रेस नेताओं, भीम आर्मी, सामाजिक संगठनों और रावत समाज के लोगों ने संयुक्त रूप से रैली निकालकर पुलिस कंट्रोल रूम का घेराव किया और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा।

    प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि जिले में IPL मैचों के दौरान सट्टेबाजी का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है, जिससे कई परिवार आर्थिक संकट में फंस चुके हैं। वहीं स्मैक जैसे नशीले पदार्थों का कारोबार युवाओं को बर्बादी की ओर धकेल रहा है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति अब सामाजिक और आर्थिक दोनों स्तर पर गंभीर संकट बन चुकी है।

    ज्ञापन में कई मामलों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि सट्टा कारोबार के दबाव और कर्ज के कारण कुछ लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत या आत्महत्या तक की घटनाएं सामने आई हैं। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की कि IPL सट्टा रैकेट पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए और स्मैक कारोबारियों के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर सख्त कार्रवाई की जाए।

    कांग्रेस विधायक कैलाश कुशवाह ने इस दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि कार्रवाई अक्सर छोटे स्तर के लोगों तक सीमित रह जाती है, जबकि असली संचालक नेटवर्क के बड़े खिलाड़ी खुलेआम बच जाते हैं। उन्होंने पुलिस से अपील की कि चेन सिस्टम के जरिए मुख्य आरोपियों तक पहुंचा जाए।

    रावत समाज की ओर से यशपाल रावत ने भी सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि समाज के कुछ युवा नशे के कारोबार में शामिल पाए जा रहे हैं, जिनका सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा। साथ ही ऐसे लोगों की सूची बनाकर पुलिस को सौंपी जाएगी ताकि कार्रवाई तेज की जा सके।

    वहीं पुलिस अधीक्षक यांगचेन डोलकर भूटिया ने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया कि जिले में सट्टा और नशे के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस अभियान में पुलिस के साथ-साथ आम जनता और सामाजिक संगठनों का सहयोग भी जरूरी होगा।

    कुल मिलाकर शिवपुरी में बढ़ते नशे और सट्टे के खिलाफ यह प्रदर्शन प्रशासन पर सख्त कार्रवाई का दबाव बढ़ाता है, जबकि पुलिस ने जल्द बड़े अभियान की बात कहकर स्थिति को नियंत्रित करने का भरोसा दिया है।

  • ट्रांसफर पॉलिसी को मंजूरी की तैयारी: कल कैबिनेट में होगा अहम फैसला

    ट्रांसफर पॉलिसी को मंजूरी की तैयारी: कल कैबिनेट में होगा अहम फैसला


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के तबादलों को लेकर लंबे समय से प्रतीक्षित नई तबादला नीति 2026 को अब अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में इस नीति को मंजूरी मिलने की पूरी संभावना जताई जा रही है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने इसका ड्राफ्ट तैयार कर मुख्यमंत्री सचिवालय को भेज दिया है, जिसके बाद इसे कैबिनेट के सामने रखा जाएगा।

    प्रस्तावित नीति में सबसे बड़ा बदलाव स्वैच्छिक और प्रशासनिक तबादलों को अलग-अलग श्रेणी में रखने का है। अब तक दोनों प्रकार के तबादले एक ही कोटे के अंतर्गत आते थे, जिसके कारण प्रशासनिक जरूरतों के अनुसार फेरबदल में बाधा आती थी। नई व्यवस्था में प्रशासनिक तबादलों के लिए अधिक स्वतंत्रता मिलने की संभावना है।

    सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट में इस बात पर भी चर्चा होगी कि तबादलों की सीमा तय की जाए या नहीं। पहले कुल कार्यरत कर्मचारियों के 10 से 15 प्रतिशत तक ही तबादलों की अनुमति दी जाती थी, लेकिन नई नीति में इस सीमा को लेकर लचीलापन अपनाया जा सकता है।

    11 मई की पिछली कैबिनेट बैठक में मंत्री विजय शाह ने स्वैच्छिक तबादलों पर किसी तरह की सीमा न रखने का सुझाव दिया था, जिस पर मुख्यमंत्री ने विचार का आश्वासन दिया था। अब इसी सुझाव के आधार पर नीति में संशोधन की संभावना है।

    नई तबादला नीति में यह भी प्रस्ताव है कि सभी विभाग ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से ट्रांसफर आवेदन स्वीकार करेंगे। इसके साथ ही स्कूल शिक्षा विभाग की नीति हर साल की तरह अलग रहेगी, जबकि राजस्व, ऊर्जा और जनजातीय कार्य जैसे विभाग अपनी अलग नीति जारी कर सकते हैं, लेकिन वे सामान्य प्रशासन विभाग के मूल नियमों से बाहर नहीं जा सकेंगे।

    प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि नई व्यवस्था में जिलों के भीतर तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के तबादलों का अधिकार प्रभारी मंत्री और कलेक्टर को दिया जा सकता है। वहीं, उच्च स्तर के अधिकारियों के ट्रांसफर के लिए मुख्यमंत्री की मंजूरी अनिवार्य रहेगी।

    यह भी प्रस्तावित है कि किसी कर्मचारी का एक बार तबादला होने के बाद उसे कम से कम एक वर्ष तक दोबारा ट्रांसफर नहीं किया जाएगा, जिससे स्थिरता बनी रहे।

    कैबिनेट बैठक में तबादला नीति के अलावा राज्यमंत्री स्वेच्छानुदान बढ़ाने के फैसले पर भी औपचारिक आदेश जारी होने की संभावना है। इसे 16 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दिया गया है।

    कुल मिलाकर, बुधवार की कैबिनेट बैठक मध्य प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। तबादला नीति में बदलाव से न केवल कर्मचारियों की कार्यप्रणाली प्रभावित होगी, बल्कि प्रशासनिक संतुलन पर भी इसका व्यापक असर देखने को मिलेगा।

  • डेडबॉडी पर मल्टीपल चोटों का दावा: परिवार ने रिपोर्ट पर जताई आपत्ति

    डेडबॉडी पर मल्टीपल चोटों का दावा: परिवार ने रिपोर्ट पर जताई आपत्ति


    मध्य प्रदेश। भोपाल की एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। अब AIIMS भोपाल की शॉर्ट पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में शरीर पर कई चोटों के निशान मिलने का उल्लेख सामने आया है, जिसके बाद यह मामला और भी संवेदनशील हो गया है। परिजन पहले से ही इसे हत्या का मामला बता रहे हैं, जबकि ससुराल पक्ष ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    ट्विशा के ससुराल पक्ष की ओर से पूर्व जज गिरीबाला सिंह और उनके वकील ने आरोप लगाया है कि रिपोर्ट में चोटों का उल्लेख तो है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि चोटें कहां और कितनी गंभीर थीं। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट को सनसनी फैलाने के उद्देश्य से पेश किया गया प्रतीत होता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि दोबारा पोस्टमॉर्टम या किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच होती है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है और वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे।

    इस मामले में एक और बड़ा विवाद उस समय सामने आया जब यह खुलासा हुआ कि कथित फांसी में इस्तेमाल की गई बेल्ट को पोस्टमॉर्टम के समय जांच के लिए उपलब्ध नहीं कराया गया था। बाद में बेल्ट जांच के लिए दी गई, लेकिन तब तक वैज्ञानिक परीक्षण नहीं हो सका। इसी कारण गर्दन पर मिले निशानों का सही विश्लेषण अधूरा रह गया, जिससे जांच प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं।

    परिजनों का आरोप है कि जांच में गंभीर लापरवाही हुई है और उन्होंने मामले को मध्य प्रदेश से बाहर किसी स्वतंत्र एजेंसी या दिल्ली AIIMS में दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने की मांग की है। परिजन यह भी दावा कर रहे हैं कि देरी से FIR दर्ज हुई और कई अहम सबूतों को ठीक से सुरक्षित नहीं किया गया।

    वहीं दूसरी ओर ससुराल पक्ष का कहना है कि आरोप पूरी तरह से एकतरफा हैं। उनका दावा है कि ट्विशा मानसिक तनाव में थीं और कई व्यक्तिगत कारणों से परेशान थीं। सास गिरीबाला सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ट्विशा ने स्वयं गर्भपात कराया था, जिसके बाद वह डिप्रेशन में चली गई थीं। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार ने हमेशा उसे संभालने की कोशिश की।

    इस पूरे मामले में पुलिस ने बताया है कि आरोपी समर्थ सिंह की तलाश के लिए 6 टीमें बनाई गई हैं और उस पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट की जाएगी।

    इस बीच राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी मामला गर्मा गया है। भोपाल में सीएम हाउस के बाहर परिजनों ने प्रदर्शन कर न्याय की मांग की। दूसरी ओर ससुराल पक्ष ने भी खुद को निर्दोष बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

    फिलहाल ट्विशा की मौत का रहस्य और गहराता जा रहा है। एक तरफ परिजन इसे सुनियोजित हत्या बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ ससुराल पक्ष इसे मानसिक तनाव और व्यक्तिगत परिस्थितियों का परिणाम बता रहा है। जांच एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती सच को सामने लाने की है।

  • दवा की ऑनलाइन बिक्री के विरोध में हड़ताल: कल बंद रहेंगे मेडिकल स्टोर्स

    दवा की ऑनलाइन बिक्री के विरोध में हड़ताल: कल बंद रहेंगे मेडिकल स्टोर्स


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल सहित पूरे राज्य में मंगलवार, 20 मई को मेडिकल स्टोर्स बंद रहने वाले हैं। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के आह्वान पर यह राज्यव्यापी हड़ताल की जा रही है। इस बंद का सीधा असर भोपाल के करीब 3 हजार से अधिक मेडिकल स्टोर्स पर पड़ेगा, जो एक दिन के लिए पूरी तरह से बंद रहेंगे।

    इस हड़ताल का मुख्य कारण ऑनलाइन दवा बिक्री का बढ़ता विस्तार है। केमिस्ट एसोसिएशन का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए दवाओं की बिक्री पर पर्याप्त निगरानी और नियंत्रण व्यवस्था नहीं है, जिससे नकली, एक्सपायरी या गलत दवाओं के मरीजों तक पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। संगठन का आरोप है कि इससे आम लोगों की सेहत सीधे तौर पर जोखिम में पड़ रही है।

    भोपाल केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र धाकड़ ने बताया कि जिले के सभी रिटेल और थोक दवा व्यवसायी इस बंद का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल व्यापार का नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय है। एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि ऑनलाइन दवा बिक्री पर सख्त नियंत्रण लगाया जाए और एक मजबूत निगरानी तंत्र तैयार किया जाए।

    हालांकि इस बंद से मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है, खासकर उन लोगों के लिए जो रोजाना दवाओं पर निर्भर हैं। इसे देखते हुए एसोसिएशन ने नागरिकों से अपील की है कि वे 19 मई तक ही अपनी आवश्यक दवाएं खरीद लें ताकि 20 मई को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

    विशेष रूप से बुजुर्गों, हृदय रोगियों, डायबिटीज और ब्लड प्रेशर के मरीजों को पहले से दवाओं का स्टॉक रखने की सलाह दी गई है। एसोसिएशन ने यह भी स्पष्ट किया है कि अस्पतालों के अंदर संचालित मेडिकल स्टोर्स इस हड़ताल से बाहर रहेंगे, ताकि गंभीर मरीजों को जरूरी दवाएं मिलती रहें।

    हड़ताल के दौरान कॉरपोरेट कंपनियों द्वारा दी जा रही भारी छूट, बिना निगरानी दवा वितरण और ऑनलाइन बिक्री पर नियंत्रण की कमी को लेकर विरोध जताया जाएगा। संगठन का कहना है कि जब तक सरकार ठोस नियम लागू नहीं करती, तब तक विरोध जारी रह सकता है।

    कुल मिलाकर, 20 मई का दिन मध्य प्रदेश में दवा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण रहने वाला है। जहां एक ओर केमिस्ट संगठन अपने अधिकारों और नियमों की मांग को लेकर एकजुट है, वहीं दूसरी ओर आम जनता को अस्थायी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।

  • जिला अस्पताल पर उठे सवाल: मासूम की मौत के बाद परिजनों का हंगामा

    जिला अस्पताल पर उठे सवाल: मासूम की मौत के बाद परिजनों का हंगामा

    मध्य प्रदेश।  अशोकनगर  जिले के महुअन गांव में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया। पलंग से गिरकर घायल हुए छह माह के मासूम आदर्श चंदेल की मंगलवार सुबह इलाज के दौरान मौत हो गई। मासूम की मौत के बाद जिला अस्पताल परिसर में चीख-पुकार मच गई और परिजनों ने डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगाए।

    जानकारी के मुताबिक, महुअन गांव निवासी विकास चंदेल का छह माह का बेटा आदर्श रविवार शाम घर में पलंग पर खेल रहा था। उसी दौरान उसकी मां रवि चंदेल घर से बाहर पानी भरने चली गई थीं। घर लौटने पर उन्होंने देखा कि मासूम पलंग से नीचे फर्श पर गिरा पड़ा है। बच्चे के सिर और शरीर में गंभीर चोटें आई थीं। परिवार के लोग तुरंत उसे इलाज के लिए ईसागढ़ के एक निजी क्लिनिक लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार किया गया।

    परिजनों का कहना है कि सोमवार शाम तक बच्चे की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ, बल्कि उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई। इसके बाद उसे तत्काल जिला अस्पताल रेफर किया गया। अस्पताल में भर्ती कराने के बाद परिवार को उम्मीद थी कि मासूम की हालत में सुधार होगा, लेकिन मंगलवार सुबह इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।

    बच्चे की मौत के बाद अस्पताल परिसर में मातम का माहौल बन गया। परिजनों ने आरोप लगाया कि डॉक्टरों ने समय पर सही उपचार नहीं किया और बार-बार पूछने के बावजूद बच्चे की हालत के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। परिवार का कहना है कि यदि समय रहते बेहतर इलाज मिलता, तो शायद मासूम की जान बचाई जा सकती थी।

    मासूम आदर्श की मौत के बाद पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया। घटना के बाद गांव में भी शोक की लहर फैल गई। पड़ोसियों और रिश्तेदारों का कहना है कि परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

    यह हादसा एक बार फिर छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे बच्चों को कभी भी पलंग या ऊंची जगह पर अकेला नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। वहीं, परिजन जिला अस्पताल के डॉक्टरों की भूमिका की जांच कर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

  • अशोकनगर में बिजली कटौती पर फूटा गुस्सा: विधायक संग पावर हाउस पहुंचे ग्रामीण

    अशोकनगर में बिजली कटौती पर फूटा गुस्सा: विधायक संग पावर हाउस पहुंचे ग्रामीण


    मध्य प्रदेश। भीषण गर्मी के बीच Ashoknagar जिले में अघोषित बिजली कटौती को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। मंगलवार को कई गांवों के लोग कोलवा रोड स्थित पावर हाउस पहुंचे और बिजली विभाग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में स्थानीय विधायक Hari Babu Rai भी शामिल हुए।

    ग्रामीणों ने बताया कि रात के समय अचानक बिजली काट दी जाती है, जिससे गर्मी में छोटे बच्चों और बुजुर्गों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। लोगों का कहना है कि लगातार बिजली जाने से बच्चों की तबीयत खराब हो रही है।

    विधायक हरी बाबू राय ने कहा कि पूरे क्षेत्र में रात के समय लगातार बिजली कटौती की जा रही है। विभाग से पूछने पर “भोपाल से लोड सेटिंग” का हवाला दिया जाता है। उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में बिजली कटौती से लोगों की परेशानी बढ़ गई है और अस्पतालों में मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है।

    ग्रामीणों ने ट्रांसफार्मर खराब होने के बाद समय पर बदलाव नहीं होने और बिजली बिलों में अनियमितता की शिकायत भी की। उनका कहना है कि महीनों तक ट्रांसफार्मर नहीं बदले जाते, जबकि बिल एक साथ आने से भुगतान करना मुश्किल हो जाता है।

    विधायक ने कहा कि वे इस मुद्दे को लेकर संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखेंगे और अघोषित बिजली कटौती बंद करने की मांग करेंगे।

  • शादी में जाने के लिए गाड़ी मांगने पर हुआ विवाद, बेटे ने ले ली पिता की जान

    शादी में जाने के लिए गाड़ी मांगने पर हुआ विवाद, बेटे ने ले ली पिता की जान


    गुना। गुना जिले के म्याना थाना क्षेत्र में पिता की हत्या के सनसनीखेज मामले में आरोपी बेटे को कोर्ट से राहत नहीं मिली है। बाइक की चाबी मांगने को लेकर हुए विवाद में अपने ही पिता की गैंती मारकर हत्या करने वाले आरोपी विकास जाटव की जमानत याचिका अदालत ने खारिज कर दी है। आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में जेल में बंद है।

    यह दिल दहला देने वाली घटना 24 अप्रैल को सगोरिया गांव में हुई थी। जानकारी के मुताबिक मृतक रमेश जाटव (40) पेशे से मकान निर्माण का ठेका लेने का काम करते थे। परिवार में उनके दो बेटे और एक बेटी हैं। घटना वाले दिन शाम करीब 6 बजे रमेश अपने छोटे बेटे विवेक के साथ उमरी गांव में एक शादी समारोह में शामिल होने जाने की तैयारी कर रहे थे।

    घर से निकलने से पहले रमेश ने अपने बड़े बेटे विकास जाटव से बाइक की चाबी मांगी और उसे घर पर रुकने के लिए कहा। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया। छोटे बेटे विवेक ने पुलिस को बताया कि विकास ने चाबी देने से इनकार करते हुए कहा कि उसने एक दिन पहले ही बाइक में पेट्रोल भरवाया है और पहले वह पेट्रोल निकाल लेगा, उसके बाद ही चाबी देगा।

    पिता रमेश ने बेटे की बात मानते हुए उससे कहा कि वह पेट्रोल निकाल ले और चाबी दे दे। इसके बाद विकास घर के अंदर गया, लेकिन चाबी लेकर लौटने के बजाय वह गैंती लेकर बाहर आया। आरोप है कि उसने अचानक अपने पिता के सिर पर गैंती से जोरदार हमला कर दिया। वार इतना गंभीर था कि रमेश मौके पर ही गिर पड़े और लहूलुहान हो गए।

    घटना के तुरंत बाद आरोपी बेटा मौके से फरार हो गया। परिजन गंभीर हालत में रमेश को लेकर म्याना अस्पताल के लिए निकले। रास्ते में उन्हें डायल-112 वाहन मिला, जिसके पुलिसकर्मियों की सलाह पर एंबुलेंस के जरिए रमेश को सीधे गुना जिला अस्पताल पहुंचाया गया। यहां इलाज के दौरान रात करीब 3 बजे उनकी मौत हो गई।

    पुलिस ने मामले में हत्या का प्रकरण दर्ज कर उसी दिन आरोपी विकास जाटव को गिरफ्तार कर लिया था। मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष की ओर से जमानत की मांग की गई, लेकिन कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी।

    घटना के बाद गांव और परिवार में शोक का माहौल है। स्थानीय लोग भी इस बात से स्तब्ध हैं कि मामूली विवाद ने पिता-पुत्र के रिश्ते को खून से रंग दिया।