Category: Madhya Pradesh

  • 15 मौतों के बाद शीतला माता मेले से गायब हुए श्रद्धालु, लाखों का सामान लेकर लौटे व्यापारी, कोरोना के बाद पहली बार ऐसे हालात

    15 मौतों के बाद शीतला माता मेले से गायब हुए श्रद्धालु, लाखों का सामान लेकर लौटे व्यापारी, कोरोना के बाद पहली बार ऐसे हालात


    भोपाल। मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित सातऊ गांव के शीतला माता मंदिर में हर साल अष्टमी और नवमी के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। नौ दिनों तक चलने वाले मेले में खिलौनों प्रसाद झूलों और घरेलू सामान की दुकानों पर जमकर खरीदारी होती है। इसी उम्मीद के साथ दूरदराज के जिलों और दूसरे राज्यों से व्यापारी यहां दुकानें लगाने पहुंचते हैं। लेकिन इस बार मेले की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। 17 अक्टूबर की रात मंदिर के पास हुए दर्दनाक ट्रक हादसे के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में भारी गिरावट आई है। हादसे में 15 लोगों की मौत की खबर से लोग दुखी हैं और इसका सीधा असर मेले के कारोबार पर पड़ा है। व्यापारियों के मुताबिक दो दिनों में 50 लाख रुपये से अधिक का कारोबार प्रभावित हुआ है और नवमी से पहले ही करीब 80 प्रतिशत दुकानदार अपनी दुकानें समेटकर लौटने लगे।

    सोमवार को दुर्गा नवमी के दिन मेले का नजारा सामान्य वर्षों से बिल्कुल अलग दिखाई दिया। जिन रास्तों पर श्रद्धालुओं की भीड़ और दुकानों पर ग्राहकों की चहल पहल रहती थी वहां सन्नाटा पसरा था। कई दुकानदार सामान पैक करते नजर आए तो कुछ आखिरी समय तक ग्राहकों का इंतजार करते रहे। व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने नौ दिनों तक चलने वाले मेले के लिए पहले से सामान खरीदा था और दुकान लगाने के लिए किराया तथा परिवहन पर भी खर्च किया था। लेकिन हादसे के बाद लोगों के नहीं पहुंचने से उनकी कमाई की उम्मीद टूट गई। कुछ व्यापारियों के लिए तो दुकान तक सामान लाने का भाड़ा निकालना भी मुश्किल हो गया है। उनका कहना है कि कोरोना महामारी के बाद भी मेले में कारोबार की ऐसी स्थिति नहीं देखी थी।

    हर साल अष्टमी और नवमी पर शीतला माता मंदिर में करीब एक से डेढ़ लाख श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसी अनुमान के आधार पर छोटे और बड़े व्यापारी अपनी तैयारियां करते हैं। इस बार भी दुकानदारों को अच्छी बिक्री की उम्मीद थी लेकिन हादसे के बाद मेले में आने वालों की संख्या बेहद कम रह गई। छतरपुर से परिवार के साथ आईं दर्पण पिछले पांच साल से यहां खिलौनों की दुकान लगाती हैं। उन्हें इस बार भी अच्छी कमाई की उम्मीद थी लेकिन ग्राहकों की कमी ने उन्हें निराश कर दिया। वहीं दतिया से पहली बार दुकान लगाने आईं दामिनी को भी बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। उनका कहना है कि कारोबार नहीं होने से उनका पूरा हिसाब बिगड़ गया है।

    ग्वालियर की मंजिता देवी के मुताबिक उन्होंने करीब एक लाख रुपये का सामान बिक्री के लिए रखा था लेकिन ग्राहकों की कमी के कारण सामान नहीं बिक सका। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मंदिर मार्ग पर बाइक तक जाने में रोक लगाई जाती है तो भारी ट्रक वहां तक कैसे पहुंच गया। भितरवार की 80 वर्षीय कस्तूरी देवी भी नुकसान से परेशान हैं। वे हर सोमवार को शीतला माता मंदिर आती हैं और उनके मुताबिक सामान्य सोमवार को भी इस बार की तुलना में ज्यादा भीड़ रहती है। उन्होंने बताया कि उन पर करीब 50 हजार रुपये का कर्ज है और अब कारोबार ठप होने से इसकी भरपाई को लेकर चिंता बढ़ गई है।

    मंदिर के महंत कमल सिंह भगत ने भी हादसे पर दुख जताया। उनका कहना है कि मंदिर के सैकड़ों साल के इतिहास में ऐसी घटना पहले कभी नहीं हुई। उनके मुताबिक नवमी पर इस बार सामान्य दिनों की तुलना में बेहद कम श्रद्धालु पहुंचे। उन्होंने कहा कि मंदिर का मजबूत प्रवेश द्वार पहले भी कई लोगों की जान बचाने में मददगार रहा है। भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए मंदिर प्रबंधन प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से चर्चा कर बेहतर सुरक्षा व्यवस्था की मांग करेगा।

    इस बीच कुछ दुकानदारों ने स्थानीय लोगों पर दुकान लगाने की जगह के लिए 500 रुपये और बिजली के लिए प्रतिदिन 200 रुपये मांगने के आरोप भी लगाए हैं। कुछ ने धमकी और मारपीट की शिकायतें भी बताई हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। हादसे के बाद मेले में पसरे सन्नाटे ने व्यापारियों की आर्थिक मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब उनके सामने बचा हुआ सामान वापस ले जाने और हुए नुकसान की भरपाई करने की चुनौती है। वहीं श्रद्धालुओं की सुरक्षा और मंदिर मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

  • ग्वालियर में बेकाबू ट्रक का कहर, मंदिर में दर्शन करने पहुंचे 57 श्रद्धालु चपेट में आए, 16 की मौत और 41 घायल

    ग्वालियर में बेकाबू ट्रक का कहर, मंदिर में दर्शन करने पहुंचे 57 श्रद्धालु चपेट में आए, 16 की मौत और 41 घायल


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास हुए भीषण सड़क हादसे ने एक और परिवार को गहरे दुख में डुबो दिया है। हादसे में गंभीर रूप से घायल 78 वर्षीय मोतीराम प्रजापति ने मंगलवार सुबह इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। करीब 52 घंटे तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद उनकी मौत हो गई। इसके साथ ही इस दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है। शनिवार और रविवार की दरमियानी रात हुए इस हादसे में एक बेकाबू ट्रक ने दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं और आसपास मौजूद लोगों को अपनी चपेट में ले लिया था। हादसे में कुल 57 लोग प्रभावित हुए थे जिनमें 15 लोगों की मौत पहले ही हो चुकी थी जबकि 41 लोग घायल बताए गए हैं।

    मोतीराम प्रजापति मंदिर परिसर के प्रवेश द्वार के पास प्रसाद की दुकान लगाते थे। इसी दुकान से होने वाली कमाई के सहारे वे अपने परिवार का भरण पोषण करते थे। हादसे की रात वे भी ट्रक की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। परिजन उन्हें इलाज के लिए लिंक हॉस्पिटल लेकर पहुंचे जहां डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही थी। चिकित्सकों के मुताबिक हादसे में लगी चोट के कारण उनकी खून की नली में थक्का जम गया था। इस स्थिति को सुपरफिशियल फीमोरल थ्रोम्बोसिस बताया गया। मोतीराम को वर्ष 2024 में हार्ट अटैक भी आया था जिसके बाद उनके दिल में स्टेंट डाला गया था। तमाम प्रयासों के बावजूद मंगलवार सुबह उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। उनकी मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया और सातऊ गांव में शोक की लहर फैल गई।

    हादसे में गंभीर रूप से घायल संजय शर्मा और 19 वर्षीय कल्पना परिहार को बेहतर उपचार के लिए भोपाल एम्स भेजा गया है। संजय को सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात एयर एम्बुलेंस से शिफ्ट किया गया जबकि कल्पना को मंगलवार सुबह एयर एम्बुलेंस के जरिए भोपाल पहुंचाया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इससे पहले घायलों के उपचार की जानकारी ली थी और अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि इलाज में किसी तरह की कमी नहीं होनी चाहिए।

    संजय शर्मा अपने परिवार के साथ शीतला माता मंदिर में दर्शन करने पहुंचे थे। वे श्योपुर के निवासी हैं और शनिवार को परिवार के साथ एक तेरहवीं कार्यक्रम में शामिल होने के बाद अपने भाइयों से मिलने सहसराम गांव गए थे। वहां से वे अपने बड़े भाई महेश को साथ लेकर ग्वालियर आए थे। संजय यहां मकान बनवा रहे थे और चाहते थे कि महेश निर्माण कार्य की देखरेख करें। रात करीब डेढ़ बजे हुए हादसे में उनके भाई महेश और मासूम शौर्य की मौत हो गई जबकि संजय गंभीर रूप से घायल हो गए।

    प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक धान से भरे दो ओवरलोड ट्रक नो एंट्री वाले रास्ते में करीब सात किलोमीटर तक अंदर आ गए थे। मंदिर के पास संकरे रास्ते और ढलान पर पहुंचने के बाद एक ट्रक रुक गया जबकि दूसरा ट्रक बेकाबू होकर नीचे की ओर बढ़ने लगा। रास्ते में उसने दुकानों और श्रद्धालुओं को अपनी चपेट में ले लिया। आखिरकार मंदिर का करीब 200 साल पुराना सीमेंट कंक्रीट का प्रवेश द्वार ट्रक के सामने आ गया और उससे टकराने के बाद वाहन रुक गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक यदि ट्रक गेट से नहीं टकराता तो आगे कतार में खड़े अन्य श्रद्धालु भी उसकी चपेट में आ सकते थे।

    हादसे के बाद मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था और नो एंट्री मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक मंदिर में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए तीन शिफ्ट में पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई जाती है और 150 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात बताए गए थे। हादसे से करीब 15 मिनट पहले ग्वालियर के एसएसपी धर्मवीर सिंह भी मंदिर परिसर में भीड़ नियंत्रित करते दिखाई दिए थे। इसके कुछ ही समय बाद ट्रक के श्रद्धालुओं को कुचलने की सूचना मिली। अब इस दर्दनाक घटना के बाद घायलों के उपचार के साथ यह सवाल भी अहम है कि प्रतिबंधित मार्ग पर ओवरलोड ट्रक कैसे पहुंचा और ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

  • सिंधिया के अपनी तो जैसे तैसे डांस की चर्चा, विजयवर्गीय के भजन पर सियासी तंज, गड्ढों के झटकों से हिल गए BJP प्रदेश अध्यक्ष

    सिंधिया के अपनी तो जैसे तैसे डांस की चर्चा, विजयवर्गीय के भजन पर सियासी तंज, गड्ढों के झटकों से हिल गए BJP प्रदेश अध्यक्ष


    भोपाल। मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों नेताओं के भाषणों के साथ उनके डांस और भजन की प्रस्तुतियां भी चर्चा का विषय बन रही हैं। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से लेकर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और पूर्व मंत्री कमल पटेल तक के वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की एक रील सड़क की बदहाली को लेकर चर्चा में आ गई है। इन वीडियो में कहीं मनोरंजन नजर आ रहा है तो कहीं लोग गाने और भजन के बोल के आधार पर सियासी मायने निकाल रहे हैं।

    केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अशोक नगर में युवाओं के साथ संवाद कार्यक्रम के दौरान एक गाने पर थिरकते नजर आए। उन्होंने अपनी तो जैसे तैसे कोई ऐसे या वैसे कट जाएगी आपका क्या होगा जनाब ए आली गाने पर डांस किया। उनकी इस प्रस्तुति की चर्चा होने लगी। लोगों ने उनके अंदाज को पसंद किया लेकिन गाने के बोल ने भी सियासी गलियारों में चुटकी लेने का मौका दे दिया। अब इस बात पर कयास लगाए जा रहे हैं कि आखिर इस गाने को लेकर लोग क्या संदेश तलाश रहे हैं। हालांकि सिंधिया की ओर से किसी खास राजनीतिक संदेश की बात सामने नहीं आई है।

    दूसरी ओर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का भजन भी चर्चा में है। एक गरबा आयोजन के दौरान वे महाकाल डमरू वाले तू न संभाले तो हमें कौन संभाले भजन गाते नजर आए। विजयवर्गीय के भजन गाने का यह पहला मौका नहीं है लेकिन इस बार इसके बोल को लेकर राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गईं। प्रदेश की राजनीति में उनकी भूमिका और सत्ता संगठन में कथित उपेक्षा को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच लोग इसे अपने अपने अंदाज में देख रहे हैं। हालांकि इसे उनकी निजी आस्था और भक्ति की प्रस्तुति के रूप में भी देखा जा सकता है। इसी बीच उनके पुराने मित्र और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने चुटकी लेते हुए उन्हें इंदौर के पितृ पर्वत स्थित हनुमान मंदिर में बैठने की सलाह दी। उनकी टिप्पणी ने इस पूरे मामले को और दिलचस्प बना दिया।

    पूर्व मंत्री कमल पटेल का एक वीडियो भी चर्चा में है। हरदा में आयोजित भजन संध्या के दौरान तुम अगर साथ देने का वादा करो मैं यूं ही मस्त नगमे लुटाता रहूं गाना बजा तो वे खुद को थिरकने से रोक नहीं पाए। कमल पटेल पिछला विधानसभा चुनाव हार चुके हैं और अब उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं होती रहती हैं। ऐसे में उनके डांस को लेकर भी लोग मजाकिया अंदाज में राजनीतिक संकेत तलाश रहे हैं। कुछ लोग इसे जनता का साथ पाने की इच्छा से जोड़कर देख रहे हैं लेकिन यह लोगों की अपनी व्याख्या है।

    इधर मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की कार में भजन सुनते हुए बनाई गई रील भी चर्चा में आ गई। वे कार में बैठकर माता के भजन सुन रहे थे। इसी दौरान वाहन सड़क पर बने गड्ढों से गुजरा तो कार हिचकोले खाने लगी और अध्यक्ष भी झटकों से हिलते नजर आए। इस वीडियो को लेकर लोगों ने सड़क की हालत पर सवाल उठाए। भले ही वीडियो बनाने का उद्देश्य भक्ति का आनंद लेना रहा हो लेकिन उसमें दिखाई देने वाले गड्ढों ने सड़क की बदहाली को भी सामने ला दिया।

    इसी राजनीतिक हलचल के बीच सरकारी विभाग में अनुकंपा नियुक्तियों को लेकर एक मामला भी सामने आया है। खबर के मुताबिक एक विभाग के सचिव स्तर के अधिकारी ने 25 लोगों की सूची तैयार कर वरिष्ठ अधिकारी को भेजी थी। जांच में पता चला कि सूची में शामिल 15 लोगों को पहले ही अनुकंपा नियुक्ति मिल चुकी थी और वे नौकरी कर रहे थे। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारी ने सूची तैयार करने वाले अधिकारी को फटकार लगाई। अब बाकी 10 लोगों की नियुक्ति को लेकर आगे क्या निर्णय होता है इस पर नजर रहेगी। इस तरह मध्य प्रदेश में नेताओं के वीडियो से लेकर प्रशासनिक कामकाज तक कई मुद्दे चर्चा में हैं।

  • MP में दशहरे पर कांग्रेस का अनोखा विरोध, ज्ञानेश कुमार के पुतले जलाने की तैयारी, गांव-गांव बांटे जाएंगे वोट चोरी के पर्चे

    MP में दशहरे पर कांग्रेस का अनोखा विरोध, ज्ञानेश कुमार के पुतले जलाने की तैयारी, गांव-गांव बांटे जाएंगे वोट चोरी के पर्चे


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी और वोट चोरी के आरोपों को लेकर कांग्रेस ने अपने आंदोलन को तेज करने की तैयारी कर ली है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी यानी AICC के दो महीने के वोट बचाओ देश बचाओ अभियान के तहत प्रदेश से लेकर जिला और ब्लॉक स्तर तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पार्टी ने दशहरे से लेकर नवंबर के आखिरी सप्ताह तक विरोध प्रदर्शन जनसंपर्क पदयात्रा और चौपालों का कार्यक्रम तय किया है। इसके जरिए कांग्रेस मतदाता सूची से जुड़े अपने आरोपों को जनता तक पहुंचाने और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता का मुद्दा उठाने की कोशिश करेगी।

    कांग्रेस की योजना के मुताबिक दशहरे के अवसर पर मध्य प्रदेश के सभी जिलों में विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। पार्टी कार्यकर्ता सार्वजनिक सभाओं और जनसंपर्क कार्यक्रमों के दौरान वोट चोरी के आरोपों से संबंधित जानकारी वाले पर्चे बांटेंगे। इसके बाद ब्लॉक स्तर पर पदयात्रा साइकिल रैली और बाइक रैलियां निकाली जाएंगी। इन कार्यक्रमों के जरिए पार्टी स्थानीय प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाएगी। हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार AICC के परिपत्र में दशहरे पर रावण की जगह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला जलाने का स्पष्ट निर्देश नहीं है। पुतला दहन को ब्लॉक स्तर पर आयोजित मार्च के समापन कार्यक्रम से जोड़ा गया है।

    आंदोलन के अगले चरण में ब्लॉक कांग्रेस कमेटियां महात्मा गांधी या डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा से एसडीएम कार्यालय अथवा स्थानीय प्रशासनिक मुख्यालय तक मार्च निकालेंगी। कार्यक्रम के समापन पर संविधान के अनुच्छेद 326 का पाठ किया जाएगा और राष्ट्रगान गाकर विरोध दर्ज कराया जाएगा। कांग्रेस इन गतिविधियों के माध्यम से मताधिकार और मतदाता सूची की विश्वसनीयता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाना चाहती है।

    पार्टी 25 अक्टूबर से 25 नवंबर तक वोट बचाओ देश बचाओ चौपाल अभियान भी चलाएगी। इसकी शुरुआत प्रदेश और जिला मुख्यालयों पर वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं तथा जिला अध्यक्षों की प्रेस कॉन्फ्रेंस से होगी। इसके बाद जिला स्तर पर समन्वय बैठकें और ब्लॉक स्तर पर बूथ लेवल एजेंट यानी BLA के साथ बैठकें आयोजित की जाएंगी। इन बैठकों में मतदाता सूचियों की जांच और सत्यापन पर जोर रहेगा।

    अभियान के तहत बूथ लेवल एजेंट उन मतदाताओं की जानकारी जुटाएंगे जिनके नाम कथित तौर पर मतदाता सूची से हटाए गए हैं या जिनकी प्रविष्टियों में गड़बड़ी की आशंका है। सत्यापन के बाद संबंधित रिकॉर्ड और मतदाता डोजियर ब्लॉक कांग्रेस कार्यालयों में जमा किए जाएंगे। इसके बाद गांव-गांव में चौपाल लगाकर स्थानीय लोगों के साथ चर्चा की जाएगी। इन चौपालों में प्रभावित बताए जा रहे मतदाताओं बुजुर्गों पंचायत प्रतिनिधियों और अन्य नागरिकों को शामिल करने की योजना है। कांग्रेस कार्यकर्ता पर्चे बांटकर मतदाता सूची से जुड़े मामलों की जानकारी भी साझा करेंगे।

    इस आंदोलन का एक बड़ा चरण 1 नवंबर को प्रस्तावित है। कांग्रेस के कार्यक्रम के मुताबिक नई दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन के सहयोगी दलों के समन्वय से राष्ट्रीय रैली आयोजित की जाएगी। इसमें सांसदों विधायकों प्रदेश और जिला स्तर के पदाधिकारियों फ्रंटल संगठनों तथा जमीनी कार्यकर्ताओं की भागीदारी का आह्वान किया गया है। इस रैली के जरिए पार्टी मतदाता सूची और कथित वोट चोरी के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना चाहती है।

    नवंबर के अंतिम सप्ताह में कांग्रेस दिल्ली कूच की तैयारी भी कर रही है। 25 और 26 नवंबर को संविधान दिवस के अवसर पर दिल्ली चलो कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। तय रोडमैप के अनुसार मध्य प्रदेश के कार्यकर्ता 25 नवंबर को ग्वालियर में एकत्र होंगे और अगले दिन वाहनों से दिल्ली रवाना होंगे। अन्य राज्यों से भी अलग-अलग मार्गों के जरिए यात्राओं को दिल्ली पहुंचाने की योजना बनाई गई है।

    आंदोलन के सभी चरणों के लिए प्रदेश जिला और ब्लॉक इकाइयों को वाहनों यात्रियों तथा रूट कैप्टन की जानकारी केंद्रीय नियंत्रण कक्ष को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। AICC कनेक्ट सेंटर और केंद्रीय नियंत्रण कक्ष अभियान की निगरानी तथा समीक्षा करेंगे। अब देखना होगा कि कांग्रेस का यह अभियान प्रदेश में कितना व्यापक होता है और मतदाता सूची से जुड़े आरोपों पर आगे क्या राजनीतिक तथा प्रशासनिक प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं।

  • मध्य प्रदेश में दशहरे का भव्य उत्सव, 18 मैदानों में जलेगा रावण, 1 लाख वर्गफीट में रंगोली और ड्रोन से होगी पुष्पवर्षा

    मध्य प्रदेश में दशहरे का भव्य उत्सव, 18 मैदानों में जलेगा रावण, 1 लाख वर्गफीट में रंगोली और ड्रोन से होगी पुष्पवर्षा


    भोपाल । मध्य प्रदेश में दशहरे का पर्व आज पूरे उत्साह और भव्यता के साथ मनाया जाएगा। प्रदेश के अलग-अलग शहरों में रावण दहन के लिए विशेष तैयारियां की गई हैं। इंदौर में 121 फीट भोपाल में 105 फीट और उज्जैन में 101 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। कई शहरों में विशाल पुतलों के साथ आकर्षक आतिशबाजी शोभायात्रा और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे। हालांकि प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश की संभावना को देखते हुए आयोजकों ने पुतलों को सुरक्षित रखने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं।

    भोपाल में दशहरे के अवसर पर 18 प्रमुख मैदानों में रावण दहन के कार्यक्रम आयोजित होंगे। कोलार हिंदू उत्सव समिति की ओर से 105 फीट ऊंचा रावण जलाया जाएगा। इस पुतले को जयपुर के कलाकारों ने तैयार किया है। रावण मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले बनाने में करीब 20 लाख रुपये खर्च हुए हैं। इसके अलावा जंबूरी मैदान में 101 फीट और कलियासोत ग्राउंड में 90 फीट ऊंचे रावण का दहन होगा। टीटी नगर दशहरा मैदान में 55 फीट और बिट्टन मार्केट में 53 फीट ऊंचा पुतला जलाया जाएगा। कोलार और छोला में आयोजित कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के शामिल होने की भी संभावना है।

    छोला दशहरा मैदान में रावण दहन से पहले मारवाड़ी रोड स्थित बांके बिहारी मंदिर से पारंपरिक चल समारोह निकाला जाएगा। इसमें करीब 10 झांकियां बैंड शहनाई पुलिस बैंड दुल-दुल घोड़ी और आदिवासी टोली आकर्षण का केंद्र रहेंगी। चल समारोह विभिन्न रास्तों से होते हुए घोड़ा नक्कास के मार्ग से मैदान पहुंचेगा। यहां रात करीब 9 बजे रावण दहन का कार्यक्रम प्रस्तावित है। दूसरी ओर राजेंद्र नगर में श्रीराम जानकी हिंदू उत्सव समिति की ओर से 70 फीट ऊंचे रावण का दहन किया जाएगा। यहां रामलीला सांस्कृतिक कार्यक्रम और मेले का आयोजन भी होगा। समिति ने रावण दहन के वीडियो पर सबसे ज्यादा व्यूज और लाइक्स लाने वाले इन्फ्लुएंसर को 11 हजार रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की है।

    इंदौर में उषागंज छावनी में 121 फीट ऊंचे रावण का दहन किया जाएगा। आयोजन के लिए 250 फीट लंबी लंका भी तैयार की गई है। शोभायात्रा के मैदान पहुंचने के बाद रावण दहन होगा और करीब डेढ़ घंटे तक आतिशबाजी की जाएगी। उज्जैन में दशहरा मैदान पर 101 फीट ऊंचा रावण जलाया जाएगा। इसके लिए देवास और ग्वालियर से कलाकार बुलाए गए हैं जो करीब 45 मिनट तक आतिशबाजी करेंगे। शहर के कार्तिक मैदान उन्हेल चौराहे और हीरा मिल मैदान में भी रावण दहन के आयोजन होंगे।

    दशहरे पर उज्जैन में बाबा महाकाल की सवारी भी विशेष आकर्षण रहेगी। चांदी की पालकी में सवार होकर बाबा महाकाल दशहरा मैदान पहुंचेंगे जहां शमी वृक्ष का पूजन किया जाएगा। सवारी मार्ग पर करीब एक लाख वर्गफीट क्षेत्र में रंगोली बनाने की तैयारी है। आयोजन के दौरान ड्रोन के माध्यम से पालकी पर पांच क्विंटल फूल बरसाने की योजना है। इस आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है और प्रशासन की ओर से भी व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

    प्रदेश के दूसरे शहरों में भी बड़े स्तर पर रावण दहन की तैयारी है। ग्वालियर के फूलबाग मैदान में 65 फीट ऊंचे रावण का दहन होगा। यहां राम जुलूस और रामलीला के समापन का कार्यक्रम भी रखा गया है। जबलपुर के ग्वारीघाट में 75 फीट ऊंचा रावण जलाया जाएगा जहां शिवकाशी से आए कलाकार आतिशबाजी करेंगे। मंदसौर में 80 फीट ऊंचे पुतले की खासियत यह होगी कि उसकी आंखें झपकेंगी गर्दन घूमेगी और तलवार वाला हाथ भी चलेगा। रायसेन में 35 फीट छिंदवाड़ा और सागर में 51 फीट तथा गुना में 31 फीट ऊंचे रावण का दहन किया जाएगा।

    इसके अलावा देवास आगर-मालवा बैतूल दमोह सेंधवा शाजापुर श्योपुर और आलीराजपुर सहित कई जिलों में भी रावण दहन के कार्यक्रम होंगे। सेंधवा में पहली बार रावण के साथ कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले भी जलाए जाएंगे। शाजापुर में 71 फीट ऊंचे रावण के साथ 25-25 फीट के कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले तैयार किए गए हैं। दशहरे पर पुलिस लाइन मंदिरों सामाजिक संगठनों और अखाड़ों में शस्त्र पूजन भी किया जाएगा। करणी सेना सहित कई संस्थाएं शौर्य प्रदर्शन और पारंपरिक कार्यक्रम आयोजित करेंगी।

    इसी बीच कांग्रेस ने भी दशहरे पर अलग कार्यक्रम की घोषणा की है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अनुसार मध्य प्रदेश के सभी जिलों में रावण के स्थान पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला जलाया जाएगा। इस तरह प्रदेश में दशहरा धार्मिक आयोजनों के साथ राजनीतिक गतिविधियों के कारण भी चर्चा में रहेगा। बारिश की आशंका के बीच अब आयोजकों की नजर मौसम पर है ताकि रावण दहन और अन्य कार्यक्रम निर्धारित समय पर संपन्न हो सकें।

  • 2 से 20 फीट तक के रावण, कहीं कुंभकरण तो कहीं मेघनाथ, भोपाल में दशहरे के लिए सजा खास बाजार, महंगे हुए पुतले

    2 से 20 फीट तक के रावण, कहीं कुंभकरण तो कहीं मेघनाथ, भोपाल में दशहरे के लिए सजा खास बाजार, महंगे हुए पुतले


    भोपाल । दशहरे के पर्व को लेकर भोपाल में तैयारियां तेज हो गई हैं। शहर में इन दिनों एक अनोखा बाजार लोगों का ध्यान खींच रहा है। यहां कपड़े या घरेलू सामान नहीं बल्कि रावण कुंभकरण और मेघनाथ के रंग-बिरंगे पुतले बिक रहे हैं। लिंक रोड नंबर-2 के आसपास कई जगहों पर सजे इस बाजार में लोग परिवार के साथ पुतले खरीदने पहुंच रहे हैं। बाजार में 2 फीट से लेकर 20 फीट तक ऊंचे पुतले उपलब्ध हैं। वहीं विशेष ऑर्डर पर 40 फीट या उससे अधिक ऊंचाई के पुतले भी तैयार किए जा रहे हैं। इनकी कीमत आकार और बनावट के अनुसार 800 रुपये से लेकर 40 हजार रुपये तक बताई जा रही है।

    भोपाल में दशहरे के अवसर पर बड़े स्तर पर रावण दहन के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। शहर में 18 से अधिक स्थानों पर प्रमुख आयोजन होंगे। इसके अलावा गली-मोहल्लों और कॉलोनियों में भी बड़ी संख्या में रावण दहन किया जाएगा। अनुमान है कि शहर में 7 हजार से ज्यादा जगहों पर पुतले जलाए जाएंगे। इसी मांग को देखते हुए तुलसीनगर लिंक रोड नंबर-2 सेकंड स्टॉफ बांसखेड़ी ईंटखेड़ी और पंचशील नगर सहित कई इलाकों में कारीगर पिछले डेढ़ से दो महीने से पुतले बनाने में जुटे हुए हैं। इस काम में 300 से अधिक कारीगर लगे हैं।

    कारीगरों ने अब तैयार पुतलों को सड़क किनारे बिक्री के लिए सजा दिया है। सोमवार को बाजार में खरीदारों की अच्छी भीड़ दिखाई दी। कई लोगों ने पहले ही अपनी जरूरत के हिसाब से पुतलों की बुकिंग करा दी थी। मंगलवार शाम तक खरीदारी जारी रहने की उम्मीद है। बड़े पुतलों को बनाने में खास मेहनत और समय लगता है। कारीगरों के मुताबिक एक बड़े पुतले को तैयार करने में करीब एक सप्ताह तक लग सकता है। इसके लिए बांस का ढांचा तैयार किया जाता है और फिर उस पर कपड़ा कागज तथा अन्य सजावटी सामग्री लगाई जाती है।

    इस बार पुतलों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। पुतले बनाने में इस्तेमाल होने वाले बांस सूत और कागज के दाम बढ़ने से लागत पर असर पड़ा है। कारीगर राखी पटेल के मुताबिक पहले जो बांस 150 रुपये में मिलता था उसकी कीमत बढ़कर 200 रुपये हो गई है। इसी तरह सूत के दाम 120 रुपये से बढ़कर 180 रुपये तक पहुंच गए हैं। कागज की कीमत भी 60 रुपये से बढ़कर 80 रुपये बताई गई है। सामग्री महंगी होने के कारण ग्राहकों को भी पहले की तुलना में अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।

    करोंद से खरीदारी करने पहुंचे अजय सोनी ने बताया कि इस बार पुतलों की कीमतों में करीब 500 से 1000 रुपये तक का अंतर देखने को मिल रहा है। उन्होंने वॉटरप्रूफ पुतला खरीदने की कोशिश की लेकिन उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें कागज वाला पुतला लेना पड़ा। बारिश की आशंका के चलते इस बार कुछ कारीगरों ने पानी से बचाव के लिए विशेष पुतले भी तैयार किए हैं। हालांकि हर आकार और हर कीमत में ऐसे पुतले उपलब्ध हों यह जरूरी नहीं है।

    रावण के पुतलों के साथ मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले भी खरीदारों को मिल रहे हैं। इनमें आकर्षक वेशभूषा और हथियारों के जरिए इन्हें खास रूप दिया जाता है। सामान्य तौर पर पुतले बिना पटाखों के बनाए जाते हैं। यदि खरीदार पटाखे लगवाना चाहते हैं तो लागत और कीमत बढ़ जाती है। बड़े पुतलों में बांस कपड़ा धागा और कागज अधिक मात्रा में इस्तेमाल होता है। इन्हें बनाने में तीन से चार कारीगरों की मेहनत भी लगती है।

    इस बार कारीगरों के सामने सबसे बड़ी चिंता मौसम को लेकर है। मंगलवार को बारिश की संभावना जताई गई है। इससे पुतलों के भीगने और बिक्री प्रभावित होने का डर बना हुआ है। वर्ष 2022 में दशहरे के दौरान तेज बारिश के कारण कई जगह पुतले भीग गए थे और आयोजनों में परेशानी आई थी। बांसखेड़ी क्षेत्र में कुछ कारीगरों को पुतले बस स्टॉप में रखकर बचाने पड़े थे जिससे नुकसान भी हुआ था। अब तीन साल बाद फिर बारिश की आशंका ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में कारीगरों को उम्मीद है कि मौसम साथ देगा और दशहरे से पहले अधिक से अधिक पुतलों की बिक्री हो सकेगी।

  • MP: सिंहस्थ-2028 की तैयारी के बीच दो दिन के लिए ओंकारेश्वर बंद…. ऑटो-नाव तक थमे

    MP: सिंहस्थ-2028 की तैयारी के बीच दो दिन के लिए ओंकारेश्वर बंद…. ऑटो-नाव तक थमे


    खंडवा।
    ओंकारेश्वर (Omkareshwar) में सिंहस्थ 2028 (Simhastha 2028) की तैयारियों के तहत बनने वाले प्रोजेक्ट्स से प्रभावित हो रहे स्थानीय लोग अब लामबंद हो गए हैं. जिला प्रशासन से अपनी मांगों पर सहमति नहीं बनने के विरोध में नगरवासियों ने दो दिन ओंकारेश्वर बंद रखने का फैसला किया है।

    19 अक्टूबर से बंद के पहले दिन ओंकारेश्वर में लगभग सभी व्यावसायिक गतिविधियां बंद रहीं. यहां तक कि फुटपाथ पर फूल-माला, प्रसाद आदि बेचने वाले छोटे दुकानदारों ने भी अपना कारोबार बंद (Business Closed) रखा. इधर, प्रशासन ने कहा है कि स्थानीय लोगों से बातचीत चल रही है और उनकी लगभग सभी मांगों पर सहमति बन चुकी है।

    ओंकारेश्वर में सिंहस्थ 2028 को लेकर बड़े बदलाव किए जा रहे हैं. बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए निर्माण कार्य किए जा रहे हैं. इस विस्तारीकरण योजना के तहत सड़कों और रास्तों के किनारे दुकानें, मकान एवं अन्य गतिविधियां संचालित करने वालों को विस्थापित किया जा रहा है. इसके लिए पूरी कार्ययोजना बनाई गई है.


    प्रशासन के सामने 19 मांगे रखी

    स्थानीय लोगों की समिति ने पिछले महीने जिला प्रशासन के सामने अपनी 19 मांगें रखी थीं. उनका कहना है कि जिला प्रशासन ने उनकी मांगें नहीं मानीं, इसलिए दो दिन ओंकारेश्वर बंद रखने का निर्णय लिया गया है. स्थानीय लोगों की मांग है कि जिनकी दुकानें, मकान एवं रोजगार से जुड़ी गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं, उन्हें इसके बदले बेहतर पुनर्वास और मुआवजा दिया जाए।

    ओंकारेश्वर बंद को स्थानीय लोगों के साथ साधु-संतों का भी समर्थन मिला. उनका कहना है कि पिछले साल भी जिला प्रशासन ने आश्वासन दिया था, लेकिन कुछ नहीं हुआ. अब वे पक्का और भरोसेमंद आश्वासन चाहते हैं.


    छोटी-बड़ी सभी दुकानें बंद

    ओंकारेश्वर बंद के दौरान छोटी-बड़ी सभी दुकानें बंद रहीं. यहां तक कि होटल और स्थानीय परिवहन सेवाएं भी बंद रहीं. इस कारण बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को खासी परेशानी हुई. श्रद्धालुओं का भी कहना है कि स्थानीय लोगों के रोजगार और आजीविका का ध्यान रखते हुए कोई बीच का रास्ता निकालना चाहिए।

    इधर, जिला प्रशासन ने कहा कि स्थानीय लोगों से लगातार बातचीत जारी है. उनकी ओर से रखी गई मांगों पर गंभीरता से विचार किया गया है और 19 में से 17 मांगें मानी जा चुकी हैं. पुनर्वास के लिए स्थान तय करने को लेकर थोड़ी दिक्कत आ रही है, जिसे भी जल्द सुलझा लिया जाएगा. जिला प्रशासन का प्रयास है कि स्थानीय लोगों का बेहतर पुनर्वास किया जाए, ताकि उनकी आजीविका पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़े।

  • दशहरे पर MP के 25 जिलों में बारिश-आंधी का अलर्ट, 50 किमी की रफ्तार से चल सकती हैं हवाएं

    दशहरे पर MP के 25 जिलों में बारिश-आंधी का अलर्ट, 50 किमी की रफ्तार से चल सकती हैं हवाएं


    भोपाल। मध्यप्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी बारिश का दौर थम नहीं रहा है। दशहरे के दिन मंगलवार को प्रदेश के आधे हिस्से में आंधी और बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के मुताबिक, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, नर्मदापुरम और सागर संभाग के 25 जिलों में बारिश हो सकती है। मौसम के इस मिजाज से दशहरा आयोजनों पर भी असर पड़ने की आशंका है।

    बारिश की संभावना को देखते हुए भोपाल में कलाकारों ने रावण के पुतलों को बरसाती से ढक दिया है। इससे पहले 2022 में बारिश के कारण रावण के पुतले ठीक से नहीं जल पाए थे। उस समय उन्हें जलाने के लिए केरोसिन और पेट्रोल का इस्तेमाल करना पड़ा था। इस बार आयोजक पहले से ही एहतियात बरत रहे हैं।

    इन 25 जिलों में बारिश की संभावना

    मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के दौरान भोपाल, इंदौर, उज्जैन, आलीराजपुर, धार, बड़वानी, खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, बैतूल, देवास, शाजापुर, आगर-मालवा, राजगढ़, रायसेन, सागर, विदिशा, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में बारिश का अनुमान जताया है।

    मौसम में बदलाव की वजह चक्रवाती परिसंचरण (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) और ट्रफ को बताया गया है। इनके प्रभाव से प्रदेश में अगले चार दिन, यानी 23 अक्टूबर तक, कहीं-कहीं बारिश का दौर जारी रह सकता है। इस दौरान 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की भी संभावना है।

    दूसरी ओर, प्रदेश के पूर्वी हिस्से में मौसम अपेक्षाकृत साफ रह सकता है। जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग के जिलों में धूप निकलने के आसार हैं।

    कई जिलों में रात का तापमान 20 डिग्री से नीचे

    बारिश के बीच प्रदेश के कई इलाकों में रात का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे बना हुआ है। बीती रात छिंदवाड़ा में न्यूनतम तापमान 17.4 डिग्री, कटनी के करौंदी में 17.8 डिग्री, आलीराजपुर और गुना में 18 डिग्री, अमरकंटक में 18.4 डिग्री तथा नीमच के मरुखेड़ा में 18.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    वहीं, दिन में कुछ जिलों में गर्मी का असर बना हुआ है। खंडवा, उज्जैन, खरगोन, रतलाम, राजगढ़ और रायसेन में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया।

    गुना में एक दिन में साढ़े चार इंच बारिश

    प्रदेश में पिछले चार दिनों से आंधी और बारिश का सिलसिला जारी है। गुना में एक ही दिन में करीब साढ़े चार इंच बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा इंदौर, शाजापुर, सीहोर, मंदसौर, उज्जैन, आगर-मालवा, अशोकनगर, शिवपुरी, श्योपुर, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, बैतूल और छिंदवाड़ा में भी बारिश हुई।

    इंदौर में सोमवार को दिनभर रुक-रुककर पानी गिरता रहा। प्रदेश के दूसरे जिलों में भी इसी तरह का मौसम बना रहा। बीते सप्ताह पूर्वी और पश्चिमी मध्यप्रदेश के कई हिस्सों में आंधी-बारिश का असर देखा गया, जबकि पिछले चार दिनों में कुछ इलाकों में तेज बारिश भी हुई।

    3 अक्टूबर को लौट चुका है मानसून, फिर भी जारी बारिश


    मध्यप्रदेश से मानसून की विदाई 3 अक्टूबर को ही हो चुकी है। इस बार एक ही दिन में पूरे प्रदेश से मानसून लौट गया था। इसके बावजूद चक्रवाती परिसंचरण और ट्रफ जैसे मौसमी सिस्टम सक्रिय होने के कारण बारिश जारी है।

  • जबलपुर की पारले-जी बिस्कुट फैक्ट्री में भीषण आग, आठ से ज्यादा दमकल गाड़ियां मौके पर, कारणों की जांच शुरू

    जबलपुर की पारले-जी बिस्कुट फैक्ट्री में भीषण आग, आठ से ज्यादा दमकल गाड़ियां मौके पर, कारणों की जांच शुरू


    मध्य प्रदेश: के जबलपुर स्थित रिछाई औद्योगिक क्षेत्र में सोमवार दोपहर पारले-जी बिस्कुट फैक्ट्री में भीषण आग लग गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंच गईं। आग पर काबू पाने के लिए आठ से अधिक दमकल गाड़ियों को लगाया गया है। घटनास्थल पर आग बुझाने के साथ बचाव अभियान भी चलाया जा रहा है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, फिलहाल किसी की मौत या गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है।

    यह घटना आधारताल थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले रिछाई औद्योगिक क्षेत्र में हुई। फैक्ट्री में आग लगने की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। दमकलकर्मी लगातार आग बुझाने के प्रयास में जुटे हैं। आग की स्थिति को देखते हुए बचाव अभियान भी जारी रखा गया है। फिलहाल आग पर पूरी तरह काबू पाने और घटनास्थल की स्थिति सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

    पुलिस के मुताबिक, आग लगने का वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। घटनास्थल पर मौजूद लोगों से मिली शुरुआती जानकारी में शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई गई है। हालांकि, इसे आग लगने की पुष्ट वजह नहीं माना गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वास्तविक कारणों का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा।

    अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मनीष भारद्वाज ने बताया कि फिलहाल घटना में किसी की मौत या गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने नहीं आई है। आग लगने की वजह की पुष्टि के लिए जांच जरूरी है। इसके लिए फॉरेंसिक साइंस लैब यानी एफएसएल की टीम की जांच और आकलन महत्वपूर्ण होगा। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आग किन परिस्थितियों में लगी और इसके पीछे क्या कारण रहे।

    फैक्ट्री में आग लगने की घटना के बाद वहां हुए नुकसान का आकलन भी किया जाना बाकी है। आग से भवन, मशीनों, कच्चे माल और तैयार उत्पादों को कितना नुकसान पहुंचा है, इसकी विस्तृत जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है। दमकलकर्मियों के आग पर पूरी तरह काबू पाने के बाद ही नुकसान की स्थिति का सही आकलन किया जा सकेगा।

    औद्योगिक क्षेत्र में हुई इस घटना के बाद फिलहाल प्राथमिकता आग बुझाने और बचाव कार्य पूरा करने की है। पुलिस और दमकल की टीमें मौके पर मौजूद हैं। आग के कारणों की जांच के साथ यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि घटना किस तरह शुरू हुई और किन परिस्थितियों में फैली। शुरुआती स्तर पर शॉर्ट सर्किट की आशंका सामने आई है, लेकिन जांच से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना संभव नहीं है।

    फिलहाल, जबलपुर की पारले-जी बिस्कुट फैक्ट्री में आग बुझाने का अभियान जारी है। पुलिस के अनुसार, अभी तक किसी की मौत या गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं मिली है। आग पर पूरी तरह नियंत्रण, संभावित नुकसान और घटना के वास्तविक कारणों को लेकर स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

  • इंदौर में नशे के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई, एमडी ड्रग्स और ब्राउन शुगर के साथ दो आरोपी गिरफ्तार

    इंदौर में नशे के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई, एमडी ड्रग्स और ब्राउन शुगर के साथ दो आरोपी गिरफ्तार

    मध्य प्रदेश: के इंदौर में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ पुलिस ने दो अलग-अलग कार्रवाइयां करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन कार्रवाइयों में पुलिस ने कुल 11 ग्राम एमडी ड्रग्स और 8.8 ग्राम ब्राउन शुगर बरामद की है। दोनों आरोपियों के खिलाफ स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम (एनडीपीएस एक्ट) के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस अब नशीले पदार्थों की खरीद-फरोख्त और उनकी आपूर्ति से जुड़े नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है।

    पहली कार्रवाई इंदौर क्राइम ब्रांच ने की। पुलिस ने एमआर-10 ब्रिज के नीचे मेट्रो के पिलर नंबर 409 के पास से अनस खान को पकड़ा। वह खरगोन जिले का निवासी बताया गया है। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से 11 ग्राम एमडी ड्रग्स बरामद हुई। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया।

    पुलिस अब अनस खान से पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बरामद नशीला पदार्थ कहां से लाया गया था। इसके अलावा, यह भी जांच की जा रही है कि वह इसे किसी अन्य व्यक्ति तक पहुंचाने वाला था या इसके पीछे कोई संगठित आपूर्ति नेटवर्क सक्रिय है। मामले में नशीले पदार्थों की खरीद और बिक्री से जुड़े संभावित संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है।

    दूसरी कार्रवाई राजेंद्र नगर थाना पुलिस ने की। पुलिस ने पानी की टंकी के पास से 23 वर्षीय आयुष ठाकुर को गिरफ्तार किया। तलाशी के दौरान उसके पास से 8.8 ग्राम ब्राउन शुगर बरामद की गई। पुलिस ने इस मामले में भी एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया है। दोनों कार्रवाइयां अलग-अलग स्थानों पर की गईं और दोनों आरोपियों के कब्जे से अलग-अलग प्रकार के नशीले पदार्थ मिलने की जानकारी सामने आई है।

    पुलिस के अनुसार, आयुष ठाकुर के खिलाफ पहले भी जुआ, लूट और मादक पदार्थों से संबंधित मामले दर्ज होने की जानकारी है। हालांकि, उसके पुराने मामलों की वर्तमान स्थिति और उनसे जुड़े विस्तृत तथ्यों की पुष्टि जांच के दौरान की जानी है। फिलहाल, ताजा मामले में बरामद ब्राउन शुगर के स्रोत और उससे जुड़े संभावित संपर्कों की पड़ताल की जा रही है।

    दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस का ध्यान नशीले पदार्थों की आपूर्ति के स्रोत तक पहुंचने पर है। जांच के तहत यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आरोपियों को मादक पदार्थ किसने उपलब्ध कराए और वे किन लोगों के संपर्क में थे। इसके साथ ही शहर में नशीले पदार्थों की खरीद-फरोख्त के संभावित तरीकों और आपूर्ति से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।

    इंदौर में की गई इन कार्रवाइयों के बाद पुलिस दोनों मामलों में साक्ष्य और अन्य जरूरी जानकारी जुटा रही है। बरामद पदार्थों की मात्रा, आरोपियों के संपर्कों और संभावित आपूर्ति नेटवर्क से जुड़े पहलुओं की पड़ताल आगे की जांच का हिस्सा है। फिलहाल, अनस खान और आयुष ठाकुर के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामले दर्ज हैं और पुलिस की जांच जारी है।