Category: Madhya Pradesh

  • राज्यसभा चुनाव: मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त करने के मामले में हाई कोर्ट ने मांगा जवाब

    राज्यसभा चुनाव: मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त करने के मामले में हाई कोर्ट ने मांगा जवाब

    जबलपुर। मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस नेत्री मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किए जाने के मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया है।

    मंगलवार को न्यायमूर्ति बी.पी. शर्मा की एकलपीठ ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद निर्वाचित राज्यसभा सदस्य तरुण चुघ, रजनीश कुमार अग्रवाल और महेश केवट सहित प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचन अधिकारी, मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव तथा भारत के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी।

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय गुप्ता तथा अधिवक्ता आर्यन गुप्ता ने पक्ष रखा। याचिका में कहा गया है कि मीनाक्षी नटराजन ने राज्यसभा निर्वाचन के लिए नियमानुसार नामांकन पत्र प्रस्तुत किया था, लेकिन जांच के दौरान प्राप्त एक आपत्ति के आधार पर निर्वाचन अधिकारी ने उनका नामांकन निरस्त कर दिया।

    याचिका के अनुसार नामांकन निरस्त करने का निर्णय चुनावी नियमों तथा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत जल्दबाजी में लिया गया और याचिकाकर्ता को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर भी नहीं दिया गया। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि नामांकन निरस्त करने का आधार तेलंगाना की एक अदालत में लंबित एक व्यक्तिगत परिवाद को बनाया गया।

    उक्त परिवाद में एक महिला की शिकायत पर मीनाक्षी नटराजन को प्रतिवादी बनाया गया था, जबकि अदालत ने केवल उनका पक्ष जानने के उद्देश्य से नोटिस जारी किया था। याचिका में कहा गया है कि उनके विरुद्ध न तो कोई आपराधिक प्रकरण दर्ज था और न ही किसी न्यायालय में ऐसा कोई आपराधिक मामला लंबित था, जिसमें उनके खिलाफ आरोप तय किए गए हों।

    याचिका में यह भी कहा गया है कि संबंधित परिवाद में उन्हें केवल औपचारिक रूप से अनावेदक बनाया गया था और उनके विरुद्ध किसी प्रकार के आपराधिक आरोप का उल्लेख नहीं था। इसके बावजूद निर्वाचन अधिकारी ने यह मानते हुए कि उन्होंने न्यायालय में लंबित प्रकरण की जानकारी नामांकन पत्र में छिपाई है, उनका नामांकन निरस्त कर दिया।

    याचिकाकर्ता का कहना है कि निर्वाचन अधिकारी का आदेश विधिक प्रावधानों की गलत व्याख्या पर आधारित है, जिससे उनके संवैधानिक एवं वैधानिक अधिकार प्रभावित हुए हैं। याचिका में हाई कोर्ट से निर्वाचन अधिकारी के आदेश को निरस्त करने तथा नामांकन खारिज किए जाने की कार्रवाई को अवैध घोषित करने का अनुरोध किया गया है।

  • किशोर कुमार केवल गायक नहीं, सम्पूर्ण कला संस्थान थे : राज्य मंत्री लोधी

    किशोर कुमार केवल गायक नहीं, सम्पूर्ण कला संस्थान थे : राज्य मंत्री लोधी


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश की यह पुण्यधरा अनेक महान विभूतियों की जन्म एवं कर्मस्थली रही है। हमें गर्व है कि इसी माटी ने भारतीय सिनेमा को एक ऐसा अनुपम कलाकार दिया, जिसकी प्रतिभा का कोई एक परिचय पर्याप्त नहीं हो सकता। किशोर कुमार केवल एक पार्श्वगायक नहीं थे, वे अपने आप में एक संपूर्ण कला संस्थान थे। उनकी आवाज में भावों की ऐसी अद्भुत विविधता थी, जो प्रेम, विरह, हास्य, करुणा, उत्साह और जीवन-दर्शन को सहजता से अभिव्यक्त कर देती थी।

    यह विचार मध्य प्रदेश के संस्कृति एवं पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी ने व्यक्त किए। राज्य मंत्री लोधी मंगलवार की शाम भोपाल के रवीन्द्र भवन मे हरफनमौला कलाकार स्वर्गीय किशोर कुमार की स्मृति में आयोजित संगीत संध्या ‘ये शाम मस्तानी’ को संबोधित कर रहे थे।

    उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की सांस्कृतिक चेतना तभी जीवंत रहती है, जब वह अपने महापुरुषों और महान कलाकारों के अतुलनीय योगदान को नई पीढ़ी तक निरंतर पहुँचाए। इसी विचार को आत्मसात करते हुए संस्कृति विभाग द्वारा भारतीय सिनेमा के शिखर पुरुष स्वर्गीय किशोर कुमार की जन्मस्मृति में लगातार दस वर्षों से संगीत संध्या का गरिमामय आयोजन किया जा रहा है।

    राज्य मंत्री लोधी ने कहा कि यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय फिल्म संगीत की उस अमूल्य विरासत को नमन है, जिसने दशकों से करोड़ों श्रोताओं को स्वर और संवेदना से बांधे रखा है।

    राज्य मंत्री लोधी के साथ संस्कृति संचालक एन.पी. नामदेव और उप संचालक डॉ. पूजा शुक्ला ने दीप प्रज्ज्वलित कर संगीत संध्या का शुभारंभ किया। इस अवसर पर राज्य मंत्री लोधी ने अंतर-महाविद्यालयीन संगीत प्रतियोगिता के विजेता एलएनसीटी ग्रुप के ‘आगाज़ बैंड’ और सेज यूनिवर्सिटी के बैंड के प्रतिभावान युवाओं को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित भी किया गया।

    सुविख्यात संगीत निर्देशक व गायक अनु मलिक तथा ‘के फॉर किशोर’ के विजेता सुप्रसिद्ध गायक अनिल श्रीवास्तव का श्रोताओं ने आत्मीय स्वागत किया। गीत-संगीत की इस सुरमयी शाम की शुरुआत विख्यात संगीतकार अनु मलिक ने की। उन्होंने भोपाल को तहज़ीब का शहर बताते हुए संस्कृति विभाग का आभार जताया और किशोर दा को स्मरण करते हुए अपने लोकप्रिय गीत “ये काली-काली आँखें…” से गायन की शुरुआत की। उन्होंने “एक गरम चाय की प्याली हो”, “जवानी फिर न आए” और “ऊंची है बिल्डिंग” जैसे उत्साही गीतों से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।

    इसके पश्चात् गायक अनिल श्रीवास्तव ने मंच संभालते हुए कार्यक्रम के शीर्षक गीत “ये शाम मस्तानी…” से समां बांधा। उन्होंने “रिमझिम गिरे सावन”, “एक अजनबी हसीना से”, “मेरे सामने वाली खिड़की में”, “ये जो मोहब्बत है” और “सलाम-ए-इश्क़” जैसे सदाबहार नगमे प्रस्तुत कर भोपाल के संगीत प्रेमियों को भावविभोर कर दिया।

    इस संगीत संध्या की विशेष उपलब्धि युवा प्रतिभाओं की ऊर्जावान सहभागिता रही। संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित अंतर-महाविद्यालयीन संगीत प्रतियोगिता के माध्यम से भोपाल की युवा प्रतिभाओं को यह प्रतिष्ठित मंच प्रदान किया गया। सेज यूनिवर्सिटी बैंड ने “हाल क्या है दिलों का”, “हमें तुमसे प्यार कितना”, “ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे” और “ओम शांति ओम” को नवीन अंदाज़ में पेश किया। वहीं एलएनसीटी के ‘आगाज़ बैंड’ ने “बचना ए हसीनों”, “नीले-नीले अंबर पर”, “मेरे सपनों की रानी” और “ओ मेरे दिल के चैन” जैसे कालजयी गीतों की धमाकेदार प्रस्तुतियां देकर खूब तालियां बटोरीं। देर रात तक चले इस सांस्कृतिक उत्सव में बड़ी संख्या में उपस्थित संगीत रसिकों ने किशोर दा के गीतों का भरपूर रसास्वादन किया।

  • दतिया उपचुनाव में हार के बाद बीजेपी का बड़ा एक्शन, पूरी जिला इकाई भंग

    दतिया उपचुनाव में हार के बाद बीजेपी का बड़ा एक्शन, पूरी जिला इकाई भंग


    दतिया।
    उपचुनाव में मिली करारी हार के बाद भारतीय जनता पार्टी ने दतिया संगठन में बड़ा फेरबदल किया है। पार्टी ने जिले की मौजूदा संगठन इकाई को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। जिलाध्यक्ष से लेकर जिला पदाधिकारी, जिला कार्यसमिति, मंडल, मोर्चा, प्रकोष्ठ, प्रकल्प और विभागों में जिम्मेदारी संभाल रहे सभी पदाधिकारियों को पदमुक्त कर दिया गया है।

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक हेमंत खंडेलवाल के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई है। पार्टी के इस फैसले को उपचुनाव में हार के बाद सामने आए भीतरघात के आरोपों और संगठनात्मक समीक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है।

    समीक्षा रिपोर्ट के बाद लिया गया फैसला

    दतिया उपचुनाव में बीजेपी की हार के कारणों की पड़ताल के लिए पार्टी ने दो सदस्यीय समीक्षा कमेटी गठित की थी। कमेटी ने चुनाव परिणाम और संगठन की भूमिका से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा करने के बाद अपनी रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष को सौंप दी थी।

    बताया जा रहा है कि रिपोर्ट मिलने के बाद ही प्रदेश संगठन ने दतिया की पूरी जिला इकाई को भंग करने का फैसला लिया।

    भाजपा की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि दतिया जिले की वर्तमान संगठन इकाई तत्काल प्रभाव से भंग की जाती है। इसके साथ ही जिला अध्यक्ष रघुबीर सिंह कुशवाह को भी पद से हटा दिया गया है।

    टिकट बदलने के बाद शुरू हुआ था विवाद

    दतिया उपचुनाव में बीजेपी ने टिकट को लेकर बड़ा बदलाव किया था। पार्टी ने पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया था। टिकट घोषित होने के बाद नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों में नाराजगी देखने को मिली थी।

    समर्थकों ने हाईवे जाम कर विरोध प्रदर्शन किया था और पूरी रात सड़क पर डटे रहे थे। उस समय दतिया की पूरी जिला कार्यकारिणी ने नरोत्तम मिश्रा के समर्थन में इस्तीफा देने की पेशकश भी की थी। हालांकि बाद में पार्टी नेताओं ने उन्हें समझाकर संगठन में बनाए रखा।

    नरोत्तम मिश्रा खुद भी चुनाव प्रचार में उतरे थे। इसके बावजूद चुनाव के बाद बीजेपी के भीतर भीतरघात के आरोप सामने आए।

    कांग्रेस ने लगाए थे गंभीर आरोप

    कांग्रेस नेता राजेंद्र भारती ने आरोप लगाया था कि नरोत्तम मिश्रा के समर्थक बीजेपी उम्मीदवार के बजाय कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह के लिए काम कर रहे थे। हालांकि, ये राजनीतिक आरोप थे और इनके आधार पर किसी व्यक्ति की भूमिका को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं माना जा सकता।

    अब बीजेपी की समीक्षा कमेटी की रिपोर्ट के बाद पूरी जिला इकाई को भंग किए जाने से संगठन के भीतर की चुनावी गतिविधियों और प्रबंधन पर पार्टी की नाराजगी के संकेत मिल रहे हैं।

    6,016 वोट से हारी बीजेपी

    दतिया उपचुनाव में कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने बीजेपी के आशुतोष तिवारी को 6,016 वोटों से हराया था।

    • घनश्याम सिंह (कांग्रेस): 66,757 वोट
    • आशुतोष तिवारी (बीजेपी): 60,741 वोट
    • दामोदर यादव (आजाद समाज पार्टी): 22,527 वोट

    बीजेपी की हार में आजाद समाज पार्टी के उम्मीदवार दामोदर यादव को मिले वोटों को भी महत्वपूर्ण माना गया। उनके खाते में 22,527 वोट आए, जिससे बीजेपी के

    परंपरागत वोट बैंक में सेंध लगने की चर्चा रही।

    अब दतिया की पूरी जिला इकाई भंग होने के बाद पार्टी जल्द ही नए संगठनात्मक ढांचे का गठन कर सकती है। नई टीम में किन नेताओं को जिम्मेदारी मिलती है, इस पर सभी की नजरें रहेंगी।

  • दतिया हार के बाद भाजपा में समीक्षा शुरू, सीएम आवास पर हुई बड़ी बैठक, भीतरघात की होगी जांच

    दतिया हार के बाद भाजपा में समीक्षा शुरू, सीएम आवास पर हुई बड़ी बैठक, भीतरघात की होगी जांच


    भोपाल। मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में मिली हार के बाद भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक समीक्षा तेज कर दी है। मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के भोपाल स्थित आवास पर हुई उच्चस्तरीय बैठक में चुनावी नतीजों, भीतरघात की शिकायतों और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। पार्टी ने पूरे मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय समिति का भी गठन किया है।

    सोमवार को आए उपचुनाव परिणामों में कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को 6,016 मतों से पराजित किया था। इसके बाद मुख्यमंत्री आवास पर हुई बैठक में प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, चुनाव प्रभारी भारत सिंह कुशवाह, मंत्री राव उदय प्रताप सिंह सहित करीब दो दर्जन वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी ने भी बैठक में पहुंचकर कथित भीतरघात से जुड़े ऑडियो साक्ष्य संगठन के समक्ष रखे।

    भीतरघात और फर्जी प्रचार की होगी जांच
    सूत्रों के मुताबिक, शहरी क्षेत्रों में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं होने के कारण कुछ स्थानीय पार्षदों और संगठन पदाधिकारियों की भूमिका की समीक्षा की जा रही है। चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हुए कथित भ्रामक पोस्ट और फर्जी पत्रों की भी जांच होगी। ऐसे मामलों में शामिल लोगों की सूची तैयार कर उनके राजनीतिक संबंधों की पड़ताल की जाएगी।

    उल्लेखनीय है कि पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने टिकट नहीं मिलने के बावजूद भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में सक्रिय प्रचार किया था, लेकिन इसके बावजूद पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।

    दो सदस्यीय जांच समिति गठित
    प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने चुनावी हार के कारणों की विस्तृत समीक्षा के लिए प्रदेश महामंत्री गौरव रणदीवे और वरिष्ठ नेता अंबाराम कराड़ा की दो सदस्यीय समिति बनाई है। समिति जमीनी स्तर पर पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से चर्चा कर अपनी रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व को सौंपेगी।

    खंडेलवाल ने स्पष्ट कहा कि भाजपा में अनुशासन सर्वोपरि है और संगठन के नियमों के विरुद्ध कार्य करने वाले किसी भी कार्यकर्ता या पदाधिकारी के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

    पार्टी के भीतर भी उठे सवाल
    चुनाव परिणाम के बाद भाजपा के भीतर से भी आत्ममंथन की आवाजें सामने आई हैं। पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने सोशल मीडिया पर “आत्ममंथन का समय…” लिखकर संगठन को संकेत दिया, जबकि टीकमगढ़ जिला पंचायत अध्यक्ष उमिता राहुल सिंह ने अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब कार्यकर्ताओं की जगह अधिकारी प्रभावी होने लगते हैं तो चुनावी परिणाम प्रभावित होते हैं।

    जनादेश स्वीकार, भविष्य की तैयारी
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि लोकतंत्र में जनता का निर्णय सर्वोपरि होता है और भाजपा जनादेश का सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि पार्टी अपनी कमियों का आकलन करेगी और भविष्य में अधिक मजबूती के साथ जनता के बीच जाएगी।

    दतिया उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह को 66,757 (42.39%) और भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को 60,741 (38.57%) मत मिले। हार के बाद भाजपा ने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने और चुनावी रणनीति की समीक्षा का अभियान शुरू कर दिया है।

  • राजबाड़ा बाजार में अचानक बिगड़ी तबीयत, देवास से खरीदारी करने आए व्यक्ति ने अस्पताल में तोड़ा दम

    राजबाड़ा बाजार में अचानक बिगड़ी तबीयत, देवास से खरीदारी करने आए व्यक्ति ने अस्पताल में तोड़ा दम


    इंदौर ।  इंदौर के व्यस्त राजबाड़ा बाजार में उस समय अफरा तफरी का माहौल बन गया जब देवास जिले के बागली से खरीदारी करने आए 50 वर्षीय व्यक्ति की अचानक तबीयत बिगड़ गई और कुछ ही देर बाद उनकी मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार डॉक्टरों ने हार्ट अटैक की आशंका जताई है जबकि मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद होगी। इस घटना ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि हृदय संबंधी समस्याएं बिना किसी बड़े संकेत के भी अचानक सामने आ सकती हैं।

    मृतक की पहचान विक्रम पुत्र नाथूलाल चौहान निवासी बागली जिला देवास के रूप में हुई है। बताया गया कि वह अपने एक रिश्तेदार के साथ घरेलू खरीदारी के लिए इंदौर आए थे। दोनों राजबाड़ा क्षेत्र में अलग अलग दुकानों पर सामान खरीद रहे थे। इसी दौरान विक्रम एक दुकान पर बैठे हुए थे तभी उन्हें अचानक घबराहट महसूस हुई। आसपास मौजूद लोगों के अनुसार कुछ ही क्षणों में उनकी तबीयत और बिगड़ गई और वह बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े।

    घटना होते ही वहां मौजूद लोगों ने तुरंत मानवता का परिचय दिया और बिना समय गंवाए उन्हें ऑटो की मदद से महाराजा यशवंतराव अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में डॉक्टरों ने तत्काल जांच की लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शुरुआती जांच में मौत की वजह हार्ट अटैक मानी जा रही है हालांकि पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने तक अंतिम कारण पर कुछ भी कहने से इनकार किया है।

    घटना की सूचना मिलते ही सराफा थाना पुलिस अस्पताल पहुंची और आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद ही मौत के कारणों की आधिकारिक पुष्टि की जाएगी। यदि किसी अन्य चिकित्सकीय कारण का पता चलता है तो उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    परिजनों के अनुसार विक्रम सामाजिक कार्यों से जुड़े हुए थे और बागली क्षेत्र में एक गैर सरकारी संस्था के साथ काम करते थे। उनका व्यवहार मिलनसार था और समाज सेवा में उनकी सक्रिय भूमिका रही थी। परिवार में पत्नी चार बच्चे और अन्य सदस्य हैं। अचानक हुई इस घटना से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। जैसे ही मौत की खबर गांव पहुंची परिवार और परिचितों में शोक की लहर दौड़ गई।

    चिकित्सकों का कहना है कि लगातार बढ़ती भागदौड़ तनाव अनियमित दिनचर्या और हृदय रोगों के प्रति लापरवाही के कारण इस तरह की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। यदि किसी व्यक्ति को अचानक सीने में दर्द घबराहट सांस लेने में तकलीफ अत्यधिक पसीना या बेहोशी जैसे लक्षण महसूस हों तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना बेहद जरूरी है। समय पर इलाज मिलने से कई मामलों में मरीज की जान बचाई जा सकती है।

    यह दुखद घटना एक बार फिर स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की जरूरत को रेखांकित करती है। नियमित स्वास्थ्य जांच संतुलित जीवनशैली और समय पर चिकित्सा सलाह हृदय संबंधी गंभीर जोखिमों को काफी हद तक कम कर सकती है। वहीं सार्वजनिक स्थानों पर मौजूद लोगों की तत्परता भी आपातकालीन परिस्थितियों में किसी की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • प्रतियोगी परीक्षा का दबाव या मानसिक तनाव इंदौर में 18 वर्षीय छात्र ने उठाया खौफनाक कदम

    प्रतियोगी परीक्षा का दबाव या मानसिक तनाव इंदौर में 18 वर्षीय छात्र ने उठाया खौफनाक कदम


    इंदौर  प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए इंदौर आए एक 18 वर्षीय छात्र की आत्महत्या की घटना ने एक बार फिर छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव और अकेलेपन की समस्या को उजागर कर दिया है। भंवरकुआ थाना क्षेत्र में किराए के कमरे में रह रहे छात्र ने सोमवार रात फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। घटना की जानकारी तब मिली जब उसके दोस्त कोचिंग से लौटे और कमरे का दरवाजा खोलने पर उसे फंदे से लटका पाया। आनन फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया लेकिन चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

    पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान प्रियांश पुत्र अजीत कौरव निवासी इंद्रपुरी कॉलोनी जिला नरसिंहगढ़ गाडरवाड़ा के रूप में हुई है। प्रियांश एसएससी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने के उद्देश्य से करीब पंद्रह दिन पहले ही इंदौर आया था। वह भंवरकुआ क्षेत्र में अपने तीन दोस्तों के साथ किराए के कमरे में रहकर कोचिंग कर रहा था और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में जुटा हुआ था।

    मृतक के दोस्त शिवम ने बताया कि सोमवार शाम वह और एक अन्य साथी नियमित कोचिंग के लिए गए थे। इससे कुछ समय पहले उनका तीसरा दोस्त भी किसी परिचित से मिलने बाहर चला गया था। उस समय प्रियांश कमरे में अकेला था। जब दोनों दोस्त कोचिंग से वापस लौटे तो उन्होंने देखा कि प्रियांश फंदे पर लटका हुआ है। दोस्तों ने तुरंत उसे नीचे उतारकर नजदीकी अस्पताल पहुंचाया जहां प्राथमिक जांच के बाद उसे एमवाय अस्पताल रेफर किया गया। हालांकि वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

    दोस्तों ने पुलिस को बताया कि इंदौर आने के बाद से ही प्रियांश का पढ़ाई में मन नहीं लग रहा था। वह एसएससी परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग में डेमो क्लास कर रहा था लेकिन नए माहौल और पढ़ाई के दबाव के कारण वह सहज महसूस नहीं कर पा रहा था। उसने कुछ दिन पहले अपने माता पिता से फोन पर बातचीत करते हुए घर लौटने की इच्छा भी जताई थी। परिजनों ने उसे वापस आने के लिए कह दिया था लेकिन उससे पहले ही उसने यह आत्मघाती कदम उठा लिया।

    प्रियांश एक किसान परिवार से था। परिवार में माता पिता के अलावा उसका एक बड़ा भाई है जो भोपाल में बीटेक की पढ़ाई कर रहा है। बेटे की मौत की खबर मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। परिजन देर रात इंदौर पहुंचे जहां पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के बाद शव उन्हें सौंपा जाएगा।

    भंवरकुआ थाना पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने कमरे की तलाशी ली लेकिन वहां से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ। फिलहाल पुलिस दोस्तों और परिजनों के बयान दर्ज कर आत्महत्या के कारणों की जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में किसी तरह की आपराधिक आशंका सामने नहीं आई है लेकिन सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है।

    यह घटना प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के सामने मौजूद मानसिक तनाव और भावनात्मक चुनौतियों की ओर भी गंभीर संकेत देती है। विशेषज्ञों का मानना है कि नए शहर में अकेलापन पढ़ाई का दबाव और भविष्य की चिंता कई बार छात्रों पर गहरा मानसिक प्रभाव डालती है। ऐसे में परिवार मित्रों और संस्थानों को छात्रों की भावनात्मक स्थिति पर भी बराबर ध्यान देने की जरूरत है ताकि समय रहते उन्हें आवश्यक सहयोग और मार्गदर्शन मिल सके।

  • वृद्धाश्रम टूटा तो टूट गया मां-बेटे का साथ, इंदौर में ममता से दूर मासूम की दर्दभरी कहानी आई सामने

    वृद्धाश्रम टूटा तो टूट गया मां-बेटे का साथ, इंदौर में ममता से दूर मासूम की दर्दभरी कहानी आई सामने


    इंदौर । इंदौर के प्रेमाश्रय वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के साथ मारपीट का मामला सामने आने के बाद प्रशासन की कार्रवाई ने जहां पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींचा वहीं इस कार्रवाई के बीच एक ऐसी मानवीय कहानी सामने आई जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। वृद्धाश्रम को खाली कराए जाने और बाद में उसे ध्वस्त किए जाने की प्रक्रिया में एक साल का मासूम अपनी मां से बिछड़ गया। पिछले तीन दिनों से वह मां की गोद के लिए तड़प रहा है जबकि उसकी मां भी दूसरे आश्रय गृह में भेज दी गई है। यह घटना प्रशासनिक कार्रवाई के बीच मानवीय संवेदनाओं और छोटे बच्चे की जरूरतों को लेकर कई सवाल खड़े कर रही है।

    जानकारी के अनुसार करीब 30 वर्षीय मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला को 21 जून 2025 को लसूडिया पुलिस ने रेलवे ट्रैक के पास लावारिस हालत में रेस्क्यू किया था। उस समय वह गर्भवती थी और उसकी पहचान या परिजनों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी थी। ऐसे में प्रशासन ने उसे संरक्षण देते हुए प्रेमाश्रय वृद्धाश्रम में रहने की व्यवस्था की थी ताकि उसकी देखभाल सुरक्षित माहौल में हो सके।

    कुछ ही समय बाद जुलाई 2025 में महिला ने एक बेटे को जन्म दिया। बच्चे के जन्म के बाद मां और बेटा दोनों प्रेमाश्रय में ही साथ रह रहे थे। आश्रय गृह में मौजूद लोग बताते हैं कि मां अपने बेटे की देखभाल करती थी और बच्चा भी पूरी तरह उसी पर निर्भर था। दोनों का जीवन सीमित संसाधनों के बावजूद एक-दूसरे के सहारे चल रहा था।

    लेकिन प्रेमाश्रय वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के साथ मारपीट का वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पूरे आश्रय गृह को खाली कराने का फैसला लिया। इस दौरान वहां रह रहे सभी बुजुर्गों और आश्रितों को अलग-अलग आश्रय गृहों तथा अस्पतालों में स्थानांतरित कर दिया गया। इसी प्रक्रिया में मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला को दूसरे आश्रय गृह भेज दिया गया जबकि उसका एक साल का बेटा प्रेमाश्रय में ही रह गया। इस तरह प्रशासनिक कार्रवाई के बीच मां और बेटा एक-दूसरे से अलग हो गए।

    वृद्धाश्रम में मौजूद लोगों का कहना है कि बच्चे को समय पर दूध और अन्य आवश्यक भोजन दिया जा रहा है तथा उसकी देखभाल में कोई कमी नहीं रखी जा रही। इसके बावजूद जब भी उसे मां की गोद नहीं मिलती वह रोने लगता है और काफी देर तक बेचैन रहता है। उसे चुप कराने और बहलाने की कोशिश की जाती है लेकिन मां का स्नेह और स्पर्श किसी भी व्यवस्था से पूरा नहीं हो पा रहा। उसकी मासूम आंखें हर पल अपनी मां को तलाशती दिखाई देती हैं।

    इस घटना ने सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों को भी भावुक कर दिया है। उनका कहना है कि एक वर्ष की उम्र में बच्चा पूरी तरह मां के स्नेह और देखभाल पर निर्भर होता है। ऐसे में लंबे समय तक दोनों का अलग रहना बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। इसलिए प्रशासन को जल्द से जल्द ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे मां और बेटे को फिर से एक साथ रखा जा सके।

    यह मामला केवल प्रशासनिक कार्रवाई का नहीं बल्कि संवेदनशील मानवीय पहलू का भी है। जहां एक ओर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है वहीं दूसरी ओर ऐसे मासूम बच्चों और असहाय महिलाओं की भावनात्मक जरूरतों का ध्यान रखना भी उतना ही आवश्यक है। अब सभी की नजर प्रशासन पर है कि वह इस मां और बेटे को दोबारा मिलाने के लिए कितनी जल्दी और क्या कदम उठाता है।

  • दतिया के जनादेश का राजनीतिक असर, कांग्रेस ने जीत का जश्न मनाया; भाजपा में जवाबदेही तय करने की तैयारी

    दतिया के जनादेश का राजनीतिक असर, कांग्रेस ने जीत का जश्न मनाया; भाजपा में जवाबदेही तय करने की तैयारी


    भोपाल। दतिया उपचुनाव के नतीजों ने मध्य प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। कांग्रेस ने इस सीट पर जीत दर्ज कर न केवल अपना कब्जा बरकरार रखा बल्कि लंबे समय बाद कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भी भर दिया। जीत का जश्न भी कांग्रेस ने अनोखे अंदाज में मनाया। नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मिठाई की जगह मेलोडी टॉफी बांटकर जीत की खुशियां साझा कीं और राजनीतिक संदेश देने की भी कोशिश की। दतिया से लेकर भोपाल तक कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे और जीत का उत्सव मनाया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस जनादेश को मध्य प्रदेश की राजनीति में बदलाव का संकेत बताते हुए इसे जनता की सकारात्मक सोच की जीत बताया और दतिया की जनता का आभार व्यक्त किया।

    दूसरी ओर भाजपा के लिए यह परिणाम आत्ममंथन का विषय बन गया है। चुनाव प्रचार के दौरान जीत का भरोसा जताने वाले नेताओं के सुर नतीजे आने के बाद बदल गए। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि दतिया पहले भी कांग्रेस की सीट थी और अब भी कांग्रेस के पास ही है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव की तुलना में भाजपा को इस बार करीब सत्रह सौ वोट अधिक मिले हैं। वहीं नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने स्वीकार किया कि उपचुनाव भले ही आम चुनाव जितने महत्वपूर्ण नहीं होते लेकिन हार को हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी पूरे परिणाम की गंभीर समीक्षा करेगी ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।

    उपचुनाव के नतीजों के बाद पूर्व मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा भी चर्चा के केंद्र में आ गए। चुनाव प्रचार के दौरान उनका भावुक होना काफी चर्चा में रहा था। हार के बाद विपक्ष ने भीतरघात के आरोप लगाए और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि टिकट नहीं मिलने की नाराजगी का असर चुनाव परिणाम पर पड़ा। हालांकि नरोत्तम मिश्रा ने इन तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए साफ कहा कि उन्हें किसी पद की इच्छा नहीं है। उन्होंने कहा कि वे पहले भी पार्टी के कार्यकर्ता थे और आगे भी कार्यकर्ता ही रहेंगे। उनकी केवल एक अभिलाषा है कि पार्टी उन्हें जो भी जिम्मेदारी दे उसे पूरी निष्ठा से निभाने का अवसर मिले। अब राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि भाजपा नेतृत्व भविष्य में उन्हें कौन सी भूमिका सौंपता है।

    भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने हार स्वीकार करते हुए जनादेश का सम्मान किया। मीडिया से बातचीत के दौरान वे भावुक भी नजर आए। भीतरघात से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि यदि किसी ने पार्टी के खिलाफ काम किया है तो उसे आत्ममंथन करना चाहिए क्योंकि भाजपा को मां मानने वाले कार्यकर्ता से ऐसी उम्मीद नहीं की जाती। उन्होंने कहा कि पार्टी की पहचान अनुशासन और सेवा भाव से है इसलिए व्यक्तिगत नाराजगी को संगठन से ऊपर नहीं रखा जाना चाहिए। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी स्पष्ट किया कि पार्टी पूरे चुनाव की समीक्षा करेगी और यदि कोई कार्यकर्ता अनुशासनहीनता या भीतरघात का दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    **सूत्रों के अनुसार भाजपा ने चुनाव के दौरान हुई गतिविधियों से जुड़े डिजिटल साक्ष्य भी जुटाए हैं और उन्हें संगठन के वरिष्ठ नेतृत्व तक भेजा गया है। माना जा रहा है कि समीक्षा पूरी होने के बाद दतिया से ही अनुशासनात्मक कार्रवाई की शुरुआत हो सकती है। ऐसे में दतिया उपचुनाव का परिणाम केवल एक सीट का फैसला नहीं बल्कि प्रदेश की राजनीति में नए समीकरणों और रणनीतियों की शुरुआत माना जा रहा है। कांग्रेस जहां इस जीत से उत्साहित होकर इसे आगामी राजनीतिक लड़ाइयों का आधार बना रही है वहीं भाजपा हार के कारणों का विश्लेषण कर संगठन को और मजबूत बनाने की तैयारी में जुट गई है। दोनों दलों के लिए यह परिणाम आने वाले चुनावों की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

  • दतिया की हार से भाजपा सतर्क, कैलाश विजयवर्गीय बोले- भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, करेंगे मंथन

    दतिया की हार से भाजपा सतर्क, कैलाश विजयवर्गीय बोले- भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, करेंगे मंथन


    इंदौर  मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी को मिली हार के बाद पार्टी के भीतर आत्ममंथन का दौर शुरू हो गया है। प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने चुनाव परिणाम पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट कहा कि उपचुनाव का महत्व भले ही आम चुनाव जितना न हो, लेकिन हार को कभी हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी इस परिणाम की गंभीर समीक्षा करेगी और यह पता लगाएगी कि किन कारणों से पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।

    इंदौर में मीडिया से बातचीत के दौरान कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि चुनावी हार हमेशा सीख देने वाली होती है। उन्होंने कहा कि पार्टी का संगठन हर चुनाव के बाद उसकी समीक्षा करता है और दतिया उपचुनाव के परिणामों का भी गहराई से विश्लेषण किया जाएगा। उनका कहना था कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि संगठन इस हार पर गंभीरता से विचार करेगा और भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

    विजयवर्गीय ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर चुनाव महत्वपूर्ण होता है। जीत से कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ता है, जबकि हार संगठन को आत्मविश्लेषण का अवसर देती है। इसलिए पार्टी इस परिणाम को नजरअंदाज नहीं करेगी, बल्कि सभी पहलुओं पर विचार करते हुए संगठनात्मक और राजनीतिक स्तर पर सुधार की दिशा में काम करेगी।

    मीडिया ने जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के प्रभाव वाले क्षेत्र में आए चुनाव परिणाम को लेकर सवाल किया तो विजयवर्गीय ने कहा कि वे स्वयं चुनाव प्रचार के लिए वहां गए थे। उन्होंने माना कि यह काफी हद तक व्यक्ति आधारित सीट थी और जिस नेता का उस क्षेत्र में व्यक्तिगत प्रभाव था, उनके चुनाव नहीं लड़ने का असर भी परिणामों पर देखने को मिला। उन्होंने कहा कि कई बार स्थानीय समीकरण और उम्मीदवार की व्यक्तिगत स्वीकार्यता चुनाव परिणामों को प्रभावित करती है। ऐसे मामलों में राजनीतिक परिस्थितियां सामान्य चुनावों से अलग होती हैं।

    उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पार्टी केवल संगठनात्मक समीक्षा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं की भूमिका, जनसंपर्क अभियान, चुनावी रणनीति और क्षेत्रीय समीकरणों का भी विस्तृत आकलन किया जाएगा। भाजपा का प्रयास रहेगा कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियां दोबारा उत्पन्न न हों और संगठन पहले से अधिक मजबूती के साथ चुनावी मैदान में उतरे।

    दतिया उपचुनाव के परिणाम ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है। कांग्रेस इस जीत को जनता का भाजपा सरकार के खिलाफ संदेश बता रही है, जबकि भाजपा इसे स्थानीय परिस्थितियों और उम्मीदवार आधारित चुनाव मानते हुए आगे की रणनीति बनाने में जुट गई है। पार्टी नेतृत्व लगातार यह संदेश देने का प्रयास कर रहा है कि एक उपचुनाव का परिणाम उसके व्यापक जनाधार को प्रभावित नहीं करता, लेकिन इससे मिलने वाले संकेतों को गंभीरता से लेना आवश्यक है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए भाजपा संगठन अब जमीनी स्तर पर अपनी रणनीति को और मजबूत करने की दिशा में काम करेगा। वहीं कैलाश विजयवर्गीय के बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि पार्टी इस हार को केवल औपचारिक घटना मानकर नहीं छोड़ेगी, बल्कि इसके कारणों की विस्तृत समीक्षा कर संगठन को और अधिक प्रभावी बनाने की कोशिश करेगी।

  • दतिया उपचुनाव में हार के कारण तलाशेगी भाजपा, प्रदेश नेतृत्व ने गठित की दो सदस्यीय समीक्षा समिति

    दतिया उपचुनाव में हार के कारण तलाशेगी भाजपा, प्रदेश नेतृत्व ने गठित की दो सदस्यीय समीक्षा समिति

    मध्य प्रदेश । दतिया विधानसभा उपचुनाव में मिली हार के बाद भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक स्तर पर समीक्षा प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रदेश नेतृत्व ने चुनाव परिणामों का विस्तृत विश्लेषण करने और हार के कारणों का पता लगाने के लिए दो सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति चुनाव से जुड़े पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ नेताओं से चर्चा कर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी, जिसके आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

    प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने समीक्षा समिति के गठन की घोषणा की है। समिति में प्रदेश महामंत्री गौरव रणदीवे और वरिष्ठ नेता अंबाराम कराड़ा को शामिल किया गया है। पार्टी का कहना है कि समिति उपचुनाव के दौरान संगठन की भूमिका, चुनावी प्रबंधन, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और मतदान से जुड़े विभिन्न पहलुओं का गहन अध्ययन करेगी। इसके बाद तैयार रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व को सौंपी जाएगी।

    भाजपा के अनुसार समिति यह भी आकलन करेगी कि चुनाव में अपेक्षित प्रदर्शन क्यों नहीं हो सका और किन कारणों से पार्टी सीट जीतने में असफल रही। समीक्षा रिपोर्ट में संगठनात्मक सुधार, चुनावी रणनीति और भविष्य की तैयारियों से जुड़े सुझाव भी शामिल किए जा सकते हैं। माना जा रहा है कि रिपोर्ट के आधार पर पार्टी आगामी चुनावों के लिए अपनी कार्ययोजना में आवश्यक बदलाव कर सकती है।

    दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद कराया गया था। इसके बाद रिक्त हुई सीट पर 30 जुलाई को मतदान हुआ। कांग्रेस ने एक बार फिर घनश्याम सिंह को उम्मीदवार बनाया, जबकि भाजपा ने इस बार पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को चुनाव मैदान में उतारा। पार्टी को नए चेहरे से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन परिणाम उसके पक्ष में नहीं आया।

    चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव और वरिष्ठ भाजपा नेता नरोत्तम मिश्रा ने भी पार्टी उम्मीदवार के समर्थन में व्यापक प्रचार किया था। इसके बावजूद भाजपा सीट अपने नाम नहीं कर सकी। इस नतीजे के बाद पार्टी के भीतर चुनावी रणनीति, उम्मीदवार चयन और संगठनात्मक समन्वय को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    राजनीतिक हलकों में सबसे अधिक चर्चा उम्मीदवार बदलने के फैसले को लेकर हो रही है। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने नरोत्तम मिश्रा को पराजित किया था। उपचुनाव में भाजपा ने नया उम्मीदवार उतारकर चुनावी समीकरण बदलने की कोशिश की, लेकिन यह रणनीति सफल नहीं हो सकी। अब इस निर्णय को भी समीक्षा के महत्वपूर्ण बिंदुओं में शामिल माना जा रहा है।

    उपचुनाव के नतीजों के बाद बूथवार मतदान के आंकड़ों ने भी राजनीतिक चर्चा को नई दिशा दी है। नरोत्तम मिश्रा के बूथ नंबर 121 पर भी भाजपा कांग्रेस से पीछे रही। इस बूथ पर कांग्रेस को भाजपा से अधिक मत मिले, जिससे स्थानीय संगठन की सक्रियता और परंपरागत वोट बैंक को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं। इसके बाद पार्टी के भीतर समन्वय और संभावित भीतरघात को लेकर भी चर्चाएं सामने आई हैं।

    भाजपा नेतृत्व का मानना है कि चुनावी हार की निष्पक्ष समीक्षा से भविष्य में संगठन को मजबूत बनाने और चुनावी रणनीति को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। अब सभी की नजर समिति की रिपोर्ट पर है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि दतिया उपचुनाव में हार के पीछे कौन-कौन से प्रमुख कारण रहे और पार्टी आगे किन सुधारों पर जोर देगी।