Category: Madhya Pradesh

  • मप्र में कलेक्टर्स की अनदेखी के चलते 20 जिलों में 77 करोड़ की 33 सरकारी संपत्तियों पर वक्फ बोर्ड का कब्जा

    मप्र में कलेक्टर्स की अनदेखी के चलते 20 जिलों में 77 करोड़ की 33 सरकारी संपत्तियों पर वक्फ बोर्ड का कब्जा

    भोपाल। मध्य प्रदेश के 20 जिलों में 77 करोड़ रुपये की 33 सरकारी संपत्तियों का मालिक वक्फ बोर्ड है। वक्फ बोर्ड के नाम पर ये संपत्तियां जिला कलेक्टरों की अनदेखी और लापरवाही की वजह से हुई हैं।

    इसके अलावा लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने रायसेन जिले में साढ़े चार किलोमीटर लंबी सड़क ऐसी जगह बना दी, जो कुछ दिन बाद डूब क्षेत्र में आने वाला था। साथ ही विदिशा और नर्मदापुरम जिले में स्वीकृति से ज्यादा लंबी सड़क बनाकर सरकार को 15 करोड़ रुपये का चूना लगा दिया। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की निष्क्रियता की वजह से प्रदेश में अवैध कॉलोनियां पनप गईं, तो दूसरी तरफ इंदौर, भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर नगर निगम आश्रय शुल्क के रूप में जमा 260 करोड़ रुपये का हिसाब ही नहीं दे पाए।

    यह खुलासा कैग (नियंत्रक महालेखा परीक्षक) की रिपोर्ट में हुआ है। इस रिपोर्ट को एक दिन पहले विधानसभा में पेश किया गया था, जिसमें 2018 से 2023 के बीच सरकार के 14 विभागों के कामकाज और योजनाओं की पड़ताल करने के बाद उक्त गड़बड़ियों का खुलासा किया है।

    कैग की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली को लेकर भी ऑडिट किया। वक्फ की 81 संपत्तियों की जांच में पाया कि 20 जिलों की 33( 41 फीसदी) संपत्तियां जो दस्तावेजों में सरकारी संपत्ति के रूप में दर्ज थीं। उन्हें वक्फ की संपत्ति के रूप में रजिस्टर्ड किया गया। कैग ने रिपोर्ट में लिखा है कि इन 20 जिलों के कलेक्टरों ने संपत्तियों की रजिस्ट्री की प्रक्रिया को निरस्त करने करने के लिए कोई दिशा निर्देश जारी नहीं किए। सरकारी विभागों के इस रवैये की वजह से वक्फ एक्ट का दुरुपयोग हुआ बल्कि सरकारी जमीनों पर कब्जा हो गया।

    हालांकि, सरकार ने अपने जवाब में बताया कि ये टेक्निकल मिस्टेक है। ये भी कहा कि वक्फ एक्ट में जिला प्रशासन से एनओसी लेने का कोई प्रोविजन नहीं है। जिला प्रशासन को हर संपत्ति के बारे में पता था। जब राजस्व रिकॉर्ड का कंप्यूटरीकरण किया गया तो उस दौरान स्वामित्व के कॉलम में सरकारी संपत्ति दर्ज हुई।

    कैग ने सरकार के इस उत्तर को खारिज कर दिया और लिखा कि जिन संपत्तियों का परीक्षण किया उनमें से कुछ एक या दो साल पहले ही रजिस्टर्ड हुई हैं। साथ ही ये भी लिखा कि दो संपत्तियों पर कलेक्टरों की तरफ से आपत्ति दर्ज की गई थी इसके बाद भी वक्फ बोर्ड ने उन्हें बतौर वक्फ की संपत्ति दर्ज किया। जिन संपत्तियों को वक्फ ने अपना समझ लिया वो सामुदायिक प्रयोजन के लिए रिजर्व की गई थी।

    कैग ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (नगर तथा ग्राम निवेश) के लेखा परीक्षा के दौरान पांच बड़े शहरों में हुए प्लान्ड डेवलपमेंट को लेकर ऑडिट किया। ये ऑडिट 2018 से 2023 के बीच भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन नगर निगम में किया गया। इस दौरान 10 अहम बातें सामने आईं। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग शहरों के व्यवस्थित विकास की प्लानिंग करने में ही नाकाम रहा है। कैग ने लिखा- टीएंडसीपी ने बीना पेट्रोकेमिकल्स और औद्योगिक प्रदेश के अलावा कोई भी प्रादेशिक योजना तैयार नहीं की।

    भोपाल का मास्टर प्लान प्रकाशित नहीं कर पाया। भोपाल में अभी भी साल 2005 का मास्टरप्लान ही लागू है। विकास योजनाओं की तैयारी के लिए टीएंडसीपी उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर और इंदौर ने हितधारकों से इनपुट कलेक्शन नहीं किया। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन नगर निगम ने स्थानीय क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और सुविधाओं के विकास के लिए जोन स्तर पर प्लान तैयार नहीं किए, जिससे अवैध कॉलोनियों और स्लम एरिया में बढ़ोतरी हुई। अवैध मैरिज गार्डन की 126 शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई करने में टीएंडसीपी नाकाम रहा। इसके अलावा नालों का अतिक्रमण और नालों के लिए जमीन छोड़ने के नियमों का पालन भी नहीं करा पाया। कॉलोनाइजर्स ने जो अधूरी कॉलोनियां विकसित कीं, उनके पूरी होने से पहले ही कॉलोनी के बंधक रखे प्लॉट्स को मुक्त कर दिया।

    नगर निगमों ने सुपरविजन फीस पर जीएसटी नहीं वसूला, जिसके चलते सरकार को 96 लाख रुपए का नुकसान हुआ। नगर निगम के अफसरों ने कॉलोनी डेवलपमेंट और बिल्डिंग परमिशन जारी करने के बाद विकास कार्य की मॉनिटरिंग नहीं की। रिपोर्ट के अनुसार, 142 बिल्डिंग और 43 कॉलोनियों के भौतिक सत्यापन के दौरान पाया गया कि मिनिमम ओपन स्पेस, तलघर, सरकारी जमीन पर अतिक्रमण, वाटर हार्वेस्टिंग यूनिट नहीं बनाई गई। ऑडिट के दौरान पाया गया कि टीएंडसीपी से परमिशन लिए बगैर कॉलेज, रिसॉर्ट और आईटी पार्क बन गए।

    मप्र में जीएसटी लागू होने के बाद गड़बड़ियां देखकर भी आंखे मूंदे रहे अफसर, कई शहरों में मिली खामियां

    कैग की रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि जीएसटी लागू होने के बाद शुरुआती दौरान में मध्य प्रदेश में व्यापारियों की गड़बड़ियां देखकर भी जीएसटी विभाग के अफसर आंखें मूंदे रहे और उन पर ठोस कार्रवाई नहीं की, जिसके चलते कई शहरों में भारी अनियमितताएं सामने आई हैं। इसमें पाया गया कि कई मामलों में जीएसटी विभाग के अफसरों ने ब्याज की राशि के अंतर और ई-वे बिल का कम भुगतान को भी नजरअंदाज किया। गौरतलब है कि 1 जुलाई 2017 को जीएसटी लागू हुआ था। इसके बाद अधिकारी व व्यापारियों को नियमों को समझने में काफी मशक्कत करना पड़ी थी।

    इंदौर और भिंड में करोड़ों की कर चोरी के मामले

    कैग की रिपोर्ट के मुताबिक भिंड वृत में वर्ष 2018-19 से 2020-21 के बीच एक प्रकरण में 63 से 162 दिनों की देरी से जीएसटी का भुगतान किया गया। इस प्रकरण में 24 करोड़ रुपये का भुगतान ही नहीं किया गया। वहीं इंदौर के एक ई-वे बिल सत्यापन के प्रकरण में कैग ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। इंदौर के एक करदाता के प्रकरण में वर्ष 2018-19 व 2020-21 के दौरान 137.17 करोड़ की देनदारी के ई-वे बिल जारी किए गए लेकिन तीन साल के दौरान फर्म द्वारा 0.15 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। इस तरह 137.02 करोड़ कर राशि का कम भुगतान किया गया। इतना ही नहीं, इंदौर में आइटीसी इनपुट सेवा वितरक (आईएसडी) क्रेडिट का गलत लाभ उठाकर 4.15 करोड़ रुपये की राशि मिसमैच होने का मामला भी सामने आया।

    भोपाल में टर्नओवर और पीथमपुर में टीडीएस की गड़बड़ी

    भोपाल में जीएसटी वार्षिक रिटर्न के मामले में वर्ष 2020-21 के दौरान लेखापरीक्षित वार्षिक वित्तीय विवरण व जीएसटीआर-9 के बीच 2166.46 कराेड़ का टर्नओवर असमायोजित मिला। कैग द्वारा यह जानकारी शासन को दिए जाने के बाद राज्य शासन ने सितंबर 2024 में करदाता को डीआरसी-01 जारी किया। पीथमपुर के एक प्रकरण में टीडीएस रिटर्न में कम राशि बताई गई। इस प्रकरण में लेखा परीक्षा ने पाया कि जीएसटी के मुताबिक कटौती की गई कर राशि 2.53 करोड़ और कर योग्य मूल्य 126.65 करोड़ था, जबकि इस मामले में 95.42 करोड़ के कर की राशि को छुपाया गया।

    1895 स्कूलों में टीचर्स ही नहीं, 435 स्कूलों में शिक्षक तो हैं, पर बच्चे नहीं

    कैग की रिपोर्ट ने मध्य प्रदेश की स्कूल शिक्षा व्यवस्था को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 1895 स्कूल ऐसे हैं, जहां छात्र तो हैं. लेकिन एक भी शिक्षक यहां पदस्थ नहीं है, वहीं, दूसरी ओर 435 स्कूल ऐसे पाए गए, जहां एक भी विद्यार्थी का नामांकन नहीं है, इसके बावजूद यहां शिक्षकों की नियुक्ति की गई है।

    कैग रिपोर्ट के अनुसार अगस्त 2023 तक प्रदेश के 66 हजार 814 स्कूलों की समीक्षा में यह विसंगतियां सामने आईं हैं. 435 शून्य नामांकन वाले स्कूलों में से 105 स्कूलों में एक वर्ष से, 38 स्कूलों में दो वर्षों से, 33 स्कूलों में तीन वर्षों से और 259 स्कूलों में चार वर्षों से किसी छात्र का नामांकन नहीं हुआ है। इनमें से 320 स्कूलों में शिक्षकों के लिए पद स्वीकृत ही नहीं थे, फिर भी वहां शिक्षक पदस्थ पाए गए। कैग ने विभाग के जवाब को अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि बंद करने या तबादले की प्रक्रिया के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया।

    छात्र-शिक्षक अनुपात में भारी गड़बड़ी

    शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत प्राइमरी स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात 30:1, मिडिल में 35:1 व सेकंडरी और हायर सेकंडरी में 30:1 होना चाहिए। हालांकि, प्राइमरी स्तर पर औसत स्थिति सामान्य बताई गई है, लेकिन मिडिल स्कूलों में यह अनुपात 37:1, सेकंडरी में 40:1 और हायर सेकंडरी में 54:1 दर्ज है। जिलों की स्थिति और भी चिंताजनक है. टीकमगढ़ में मिडिल स्कूलों का पीटीआर 57:1 है, जो राज्य औसत से काफी अधिक है। सेकंडरी स्तर पर अशोक नगर में 66:1 का अनुपात दर्ज हुआ। वहीं, हायर सेकंडरी में टीकमगढ़ का पीटीआर 112:1 पाया गया, जो राज्य औसत से 58 अंक अधिक है।

    —————

  • गाँधीसागर वन्यप्राणी अभयारण्य में गिद्धों की हुई वृद्धि, 1013 गिद्धों के साथ बना सुरक्षित ठिकाना

    गाँधीसागर वन्यप्राणी अभयारण्य में गिद्धों की हुई वृद्धि, 1013 गिद्धों के साथ बना सुरक्षित ठिकाना

    मंदसौर। मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में स्थित गाँधीसागर वन्यप्राणी अभयारण्य एक बार फिर गिद्धों के प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा है। ‘प्रदेशव्यापी गिद्ध गणना 2025-26’ के तहत रविवार को संपन्न हुई, जिसमें यहां कुल 1013 गिद्ध पाए गए हैं।

    गणना का निरीक्षण मुख्य वन संरक्षक उज्जैन वृत्त, आलोक पाठक एवं वनमंडलाधिकारी मंदसौर, संजय रायखेरे द्वारा किया गया। बताया गया कि गाँधीसागर अभयारण्य केवल स्थानीय गिद्धों का ही नहीं, बल्कि विदेशी प्रजातियों का भी पसंदीदा ठिकाना है। गणना में पाए गए हिमालयन ग्रिफन, यूरेशियन ग्रिफन और सिनेरियस जैसे गिद्ध लंबी दूरी तय कर यहाँ पहुँचते हैं। ये मुख्य रूप से तिब्बत, मध्य एशिया, और हिमालय की ऊँचाइयों से शीतकाल के दौरान प्रवास करते हैं। ये प्रवासी गिद्ध आमतौर पर अक्टूबर-नवंबर के महीने में गाँधीसागर पहुँचते हैं और गर्मी शुरू होने से पहले यानी मार्च-अप्रैल तक यहाँ रुकते हैं।

    1. स्थानीय निवासी (4 प्रजातियाँ):

    ये गिद्ध वर्ष भर अभयारण्य में रहते हैं और यहीं प्रजनन करते हैं:

    भारतीय गिद्ध : चंबल की ऊँची चट्टानों पर घोंसले बनाने वाली मुख्य प्रजाति।

    सफेद पीठ वाला गिद्ध : पेड़ों पर बसेरा करने वाले ये गिद्ध पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं।

    राज गिद्ध : अत्यंत दुर्लभ और विशिष्ट लाल सिर वाली प्रजाति।

    मिस्र का गिद्ध : आकार में छोटे और सफेद रंग के स्थानीय गिद्ध।

    विदेशी मेहमान/प्रवासी (3 प्रजातियाँ):

    ये प्रजातियाँ शीतकाल (अक्टूबर-नवंबर से मार्च-अप्रैल) के दौरान तिब्बत, मध्य एशिया और हिमालय की ऊँचाइयों से प्रवास कर यहाँ पहुँचती हैं:

    हिमालयन ग्रिफन : हिमालय के ठंडे क्षेत्रों से आने वाले विशालकाय गिद्ध।

    यूरेशियन ग्रिफन : लंबी दूरी तय कर आने वाले अंतरराष्ट्रीय प्रवासी।

    सिनेरियस गिद्ध : दुनिया के सबसे भारी और बड़े गिद्धों में शुमार।

    गाँधीसागर ही क्यों है ‘गिद्धों का स्वर्ग’?

    निरीक्षण के दौरान डीएफओ संजय रायखेरे ने बताया कि सुरक्षित चट्टानें चंबल नदी के किनारे स्थित ऊँची और दुर्गम चट्टानें गिद्धों को सुरक्षित घोंसले बनाने और प्रजनन के लिए आदर्श स्थान प्रदान करती हैं। प्रचुर भोजन और जल: अभयारण्य में वन्यजीवों की अच्छी संख्या और आस-पास के क्षेत्रों में पशुधन की उपलब्धता के कारण इन्हें पर्याप्त भोजन मिलता है। चंबल का पानी इनके लिए बारहमासी जल स्रोत है। मानवीय हस्तक्षेप मुक्त: अभयारण्य का शांत वातावरण और सुरक्षित कॉरिडोर इनके फलने-फूलने में मदद करता है।

  • भारतीय सेना में भर्ती के लिए 01 अप्रैल तक कर सकते हैं ऑनलाइन आवेदन

    भारतीय सेना में भर्ती के लिए 01 अप्रैल तक कर सकते हैं ऑनलाइन आवेदन

    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित सेना भर्ती कार्यालय द्वारा भारतीय सेना में विभिन्न पदों पर भर्ती हेतु अधिसूचना को जारी की जा चुकी है। यह अधिसूचना भारतीय सेना की आधिकारिक वेबसाइट www.joinindianarmy.nic.in पर उपलब्ध है। सेना में भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 13 फरवरी प्रारंभ हो चुकी है, जो 01 अप्रैल 2026 तक खुली रहेगी।

    जनसम्पर्क अधिकारी अरुण शर्मा ने रविवार को जानकारी देते हुए बताया कि इच्छुक एवं पात्र अभ्यर्थी निर्धारित समयावधि के भीतर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। जारी अधिसूचना के अनुसार अग्निवीर पुरुष (जनरल ड्यूटी, तकनीकी, लिपिक/स्टोरकीपर, ट्रेडमैन दसवीं पास, ट्रेडमैन आठवीं पास), अग्निवीर महिला (सेना पुलिस) तथा स्थायी कैडर के अंतर्गत नर्सिंग असिस्टेंट, नर्सिंग असिस्टेंट वेट एवं सिपाही फार्मा के पदों पर भर्ती की जाएगी।

    भर्ती प्रक्रिया के अंतर्गत ऑनलाइन कॉमन एंट्रेंस एग्जाम 01 जून से 10 जून 2026 के मध्य आयोजित किए जाने की संभावना है। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे परीक्षा से संबंधित दिशा- निर्देश एवं पात्रता शर्तों का सावधानीपूर्वक अध्ययन करें।

  • जबलपुर में ओवर ब्रिज का एक हिस्सा धंसा, आवागमन प्रभावित

    जबलपुर में ओवर ब्रिज का एक हिस्सा धंसा, आवागमन प्रभावित

    जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित शहपुरा में नेशनल हाईवे 45 शहपुरा रेलवे ओवरब्रिज का हिस्सा रविवार शाम 5 बजे नीचे गिर गया। जिससे आवागमन पूरी तरह से बंद हो गया। ओवरब्रिज गिरने से शहपुरा नगर से यातायात को डायवर्ट किया गया है। जिससे ट्रैफिक जाम की स्थिति बन रही है।

    उल्लेखनीय है कि दिसंबर 2025 के मध्य में जबलपुर-भोपाल नेशनल हाईवे 45 पर स्थित शहपुरा रेलवे ओवरब्रिज का एक हिस्सा धंस गया था जिसके बाद वाहनों का आवागमन दुसरे बचे हुए हिस्से हो रहा था। लेकिन आज बढ़े हुए दबाव को वह दूसरा हिस्सा भी नहीं झेल पाया।

    इधर टोल प्लाजा के मैनेजर का कहना हे कि हमने टोल पर वाहनों को बिना किसी शुल्क दिए निकलने की अनुमति दे रखी है। इधर ,युवक कांग्रेस ने ओवर ब्रिज पर जाकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी है। खास बात यह है कि यह पुल मुश्किल से 3 साल पहले ही बना था और धंसने की वजह घटिया निर्माण और खराब इंजीनियरिंग बताई जा रही है।

    पुल का हिस्सा धंसने से जबलपुर से भोपाल और नरसिंहपुर की तरफ जाने वाला हाईवे प्रभावित हुआ है। लोगों ने इसे बड़ी लापरवाही बताते हुए निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठा रहे हैं।

  • बंदियों की सोच सकारात्मक बनाने के प्रयास हो : राज्यपाल पटेल

    बंदियों की सोच सकारात्मक बनाने के प्रयास हो : राज्यपाल पटेल


    भोपाल। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि बंदी
     पुनर्वास प्रयासों को समग्रता और बहुआयामी स्वरूप में किया जाना चाहिए। कार्य का दृष्टिकोण मानवतावादी हो। भाव संवेदनशील और विचारशील होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पुनर्वास प्रयासों में सकारात्मक सोच के निर्माण पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री का मन की बात कार्यक्रम बंदियों की सोच को रचनात्मक दिशा देने। भविष्य के प्रति विश्वास और आत्मबल को मजबूत करने में बहुत सहयोगी होगा।

    राज्यपाल श्री पटेल सोमवार को लोकभवन में गृह एवं जेल विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा कर रहे थे। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव गृह श्री शिव शेखर शुक्ला, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, विशेष महानिदेशक जेल श्री अखितो सेमा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

    राज्यपाल श्री पटेल ने अधिकारियों से कहा कि बंदी उत्पादक गतिविधियों के द्वारा बंदियों के परिवारों के जीवन निर्वाह में आर्थिक सहयोग के उद्देश्य से नियोजन गतिविधियों का संयोजन किया जाए। उन्होंने कहा कि जेलों में बंद मामूली अपराधों के विचाराधीन कैदियों को केवल दंड देना ही नहींबल्कि उन्हें सकारात्मक सुधार के जरिए समाज की मुख्य धारा में वापस भेजना पुनर्वास प्रयासों का मूलाधार होना चाहिए। भाव उनको अपराधी की पहचान से मुक्त होकर बेहतर नागरिक के रूप में स्थापित होने में मदद का होना चाहिए। समाज के नव-निर्माण में वे अपनी सक्रिय भूमिका निभा सकें।

    राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि ‘मन की बात’ कार्यक्रम को सुनकर जेल की दीवारों के पीछे एकाकी जीवन जी रहे बंदियों को देश की प्रगति और प्रेरक कहानियों से जुड़ने का अवसर मिलेगा। उनके जीवन में आशावाद और नव-निर्माण का संचार होगा। बंदियों के भीतर छिपी नकारात्मकता में कमी आएगी। सकारात्मक दृष्टिकोण और आत्म-सुधार की भावना जागृत होगी। उन्होंने जेलों में लंबित दया याचिकाओं, महिला बंदियों के बच्चों के उचित लालनपालन की व्यवस्थाओं, महिला बंदियों के पुनर्वास, दिव्यांग एवं बुजुर्ग बंदियों के लिए आवश्यक कृत्रिम उपकरणों की उपलब्धता और श्रम शक्ति के उत्पादक गतिविधियों में नियोजन के संबंध चर्चा की।

    अपर मुख्य सचिव गृह श्री शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि वर्ष 2025-26 में प्राप्त 18 दया याचिकाओं का प्रक्रिया के विभिन्न स्तरों पर परीक्षण किया जा रहा है। जेल विभाग द्वारा विगत पांच वर्षों में प्राप्त सभी दया याचिकाओं का परीक्षण कराया जा रहा है। विभाग द्वारा उनके त्वरित निराकरण के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर भी बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 180 देशों के 11 लाख लोगों के द्वारा देखे जाने वाले गीता पाठ के ऑनलाइन कार्यक्रम का प्रदेश की जेलों में प्रसारण की अभिनव पहल जेल विभाग द्वारा की गई है। साप्ताहिक प्रसारण में गीता के श्लोक का शुद्ध उच्चारण और श्लोक का भावार्थ कर समझाया जाता है।

  • पुराने विवाद का बदला लेने के लिए नाबालिगों ने किया चाकू से हमला, छात्र की दो उंगलियां भी कट गईं

    पुराने विवाद का बदला लेने के लिए नाबालिगों ने किया चाकू से हमला, छात्र की दो उंगलियां भी कट गईं


    भोपाल से आज की एक बेहद चौंकाने वाली और दिल दहलाने वाली खबर सामने आई है। राजधानी भोपाल के टीला जमालपुरा क्षेत्र में गणेश चौक स्थित एक स्नूकर क्लब में 10वीं के एक छात्र पर मात्र 30 सेकेंड में 27 बार चाकू से हमला किया गया। घटना का CCTV फुटेज 22 फरवरी को सामने आया और देखते ही देखते सोशल मीडिया और पुलिस दोनों में सनसनी फैल गई।

    बताया जाता है कि इस हमले के पीछे पुराने विवाद था। हमलावर और पीड़ित एक ही कोचिंग में साथ पढ़ते थे और किसी पिछले झगड़े में थप्पड़ मारने का मामला भी शामिल था। इसी विवाद का बदला लेने के लिए दो नाबालिग आरोपियों ने फिल्मी स्टाइल में क्लब में घुसकर अचानक ताबड़तोड़ हमला कर दिया। जैसे ही छात्र ने खुद को बचाने की कोशिश की, दोनों हमलावर 30 सेकेंड के भीतर लगातार 27 बार चाकू से वार कर फरार हो गए।

    हमले के कारण पीड़ित छात्र के हाथ में 10 से अधिक कट के निशान हैं। केवल इतना ही नहीं, छात्र की दो उंगलियां भी कट गई हैं और कंधे और पीठ पर गंभीर चोटों के निशान हैं। घटना के तुरंत बाद घायल छात्र को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की टीम उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बचाव में लगी हुई है।

    पुलिस ने बताया कि CCTV फुटेज में पूरी घटना स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। फुटेज में देखा जा सकता है कि दोनों नाबालिग आरोपियों ने अपने आप को बिल्कुल फिल्मी हीरो की तरह प्रस्तुत किया और अचानक हमला किया। घटना ने आसपास के इलाके में लोगों को डर और आश्चर्य में डाल दिया है।टीला जमालपुरा थाना ने घटना के बाद तुरंत जांच शुरू की। साधारण धाराओं में FIR दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आरोपियों के खिलाफ धाराओं को बढ़ाया जाएगा। आरोपी नाबालिग होने के कारण फिलहाल उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा जाएगा और बाल कल्याण समिति की निगरानी में रखा जाएगा।

    विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के हमले बच्चों में बढ़ती हिंसा और तनाव का संकेत हैं। पुराने विवाद और आपसी झगड़ों का बदला लेने की मानसिकता नाबालिगों को गंभीर अपराध करने के लिए उकसाती है। इस घटना ने यह भी दिखाया कि परिवार और शिक्षकों को बच्चों के बीच बढ़ते तनाव पर नजर रखनी कितनी जरूरी है।

    घटना के बाद टीला जमालपुरा इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। स्थानीय प्रशासन ने आस-पास के क्लबों और कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। पुलिस लगातार गश्त बढ़ा रही है और संदिग्धों की पहचान कर रही है।

    भोपाल की यह घटना न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे राज्य में चिंता का विषय बन गई है। शिक्षकों, अभिभावकों और प्रशासन को अब मिलकर नाबालिगों के बीच हिंसा और विवादों को रोकने के लिए कड़ा कदम उठाना होगा। पुलिस और परिवार दोनों ही पीड़ित छात्र के जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।आज का यह मामला एक चेतावनी की तरह है कि नाबालिग अपराध और हिंसा रोकने के लिए समय रहते जागरूकता संवाद और कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है।

  • ग्वालियर से यूथ कांग्रेस नेता गिरफ्तार, दिल्ली में विरोध प्रदर्शन का आरोप

    ग्वालियर से यूथ कांग्रेस नेता गिरफ्तार, दिल्ली में विरोध प्रदर्शन का आरोप


    ग्वालियर से एक यूथ कांग्रेस नेता को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया और उन्हें दिल्ली ले जाया गया। इस घटना ने कांग्रेस पार्टी में भी हलचल मचा दी है। जानकारी के अनुसार, हिरासत में लिए गए नेता का नाम जितेंद्र यादव है, जो ग्वालियर के यूनिवर्सिटी थाना क्षेत्र में रहते हैं और पूर्व प्रदेश सचिव भी रह चुके हैं। दिल्ली पुलिस को संदेह है कि वह हाल ही में दिल्ली में भारत मंडपम में आयोजित एआई इंपैक्ट समिट के दौरान हुए कांग्रेस विरोध प्रदर्शन में शामिल थे।

    समित कार्यक्रम के दौरान यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया था। पुलिस को इस प्रदर्शन के फुटेज और आधारों के माध्यम से यह अंदेशा है कि इसका उद्देश्य देश की छवि को प्रभावित करना हो सकता है। इसी के चलते दिल्ली पुलिस ने यूथ कांग्रेस नेता जितेंद्र यादव की तलाश शुरू की और उन्हें हिरासत में लिया।

    ग्वालियर में इस खबर ने जिला कांग्रेस में हलचल पैदा कर दी। कांग्रेस प्रवक्ता आर पी सिंह ने बताया कि हिरासत की जानकारी अभी तक आधिकारिक रूप से नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने जितेंद्र यादव के घर में प्रवेश करते समय पूरे परिवार को परेशान किया और उनके मोबाइल भी जब्त कर लिए। उन्होंने इस कार्रवाई को अराजकता और आतंकवादी जैसी हरकत करार दिया।

    आर पी सिंह ने आगे कहा कि सुबह से ही शहर और ग्रामीण कांग्रेस के पदाधिकारी थाने, एसपी कार्यालय और क्राइम ब्रांच सहित कई जगहों पर जाकर जानकारी लेने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन अभी तक किसी भी तरफ से सही जानकारी नहीं मिली है। उनका कहना है कि यदि कोई छात्र आंदोलन में शामिल हुआ है या किसी तरह के आरोप का सामना कर रहा है, तो परिवारों का अधिकार है कि वे यह जान सकें कि उनका बच्चा सुरक्षित है या नहीं।

    पुलिस के पदाधिकारी इस मामले पर कैमरे के सामने बोलने से बचते दिखे, जिससे परिवार और कांग्रेस नेताओं में चिंता और बढ़ गई। इस बीच, ग्वालियर में भी स्थानीय यूथ कांग्रेस कार्यकर्ता और आम जनता इस घटना की गंभीरता पर चर्चा कर रहे हैं।

    इस मामले ने राजनीतिक हलचल को और बढ़ा दिया है। यूथ कांग्रेस का कहना है कि इस तरह की कार्रवाइयां लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ हैं। वहीं पुलिस का कहना है कि यह हिरासत केवल जांच प्रक्रिया का हिस्सा है और आरोपियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा रही है।जैसे-जैसे मामले में आगे की जानकारी सामने आएगी, इसे लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिक्रिया और भी स्पष्ट होगी। 

  • लो प्रेशर एरिया और टर्फ ने बदल डाला मौसम, एमपी के 8 जिलों में बारिश का खतरा

    लो प्रेशर एरिया और टर्फ ने बदल डाला मौसम, एमपी के 8 जिलों में बारिश का खतरा


    मध्यप्रदेश में मौसम ने एक बार फिर से अपनी अनिश्चितता दिखाई है और मौसम विभाग ने बारिश का अलर्ट जारी कर दिया है। शहडोल, सिंगरौली, सीधी, अनूपपुर, उमरिया समेत आठ जिलों में आज बारिश के साथ आंधी चलने की संभावना जताई गई है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी पर सक्रिय लो प्रेशर एरिया और उस पर गुजर रही टर्फ के कारण प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में मौसम में बदलाव महसूस किया जा रहा है।

    पिछले रविवार को प्रदेश के दक्षिणी जिलों में मौसम की अचानक करवट देखी गई थी और अब सोमवार को पूर्वी जिलों में पानी गिरने की संभावना बढ़ गई है। मौसम विभाग का कहना है कि इस बार बारिश केवल मौसम को ठंडा ही नहीं करेगी बल्कि कई जगहों पर तेज आंधी भी चल सकती है। खासकर सिंगरौली, सीधी, शहडोल, अनूपपुर और उमरिया जिलों में लोगों को मौसम के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    बारिश की वजह से प्रदेश में दिन के तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। पचमढ़ी में रात का तापमान सबसे कम 10.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, राजगढ़ में 11 डिग्री, शहडोल जिले के कल्याणपुर में 11.2 डिग्री, करौंदी में 11.4 डिग्री और मंदसौर में 11.5 डिग्री के न्यूनतम तापमान का रिकार्ड बना। इस गिरावट ने मौसम को काफी ठंडा और राहत भरा बना दिया है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि लो प्रेशर एरिया और टर्फ के प्रभाव से न केवल बारिश की संभावना बढ़ी है बल्कि हवा में बदलाव भी देखा जा रहा है। इस वजह से पूर्वी और कुछ मध्य जिलों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। बारिश के चलते किसान, सड़क यात्री और स्थानीय लोग विशेष सतर्क रहें। अचानक मौसम बदलने से फसल, ट्रैफिक और रोजमर्रा की गतिविधियों पर असर पड़ सकता है।

    मौसम विभाग ने बताया कि आने वाले 24 घंटे में स्थिति के अनुसार और अपडेट जारी किए जाएंगे। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे भारी बारिश, तेज हवा और आकाशीय गतिविधियों से जुड़े समाचारों पर ध्यान दें और सुरक्षित स्थानों पर रहें। विशेष रूप से स्कूल, बाजार और ओपन एरिया में मौसम की स्थिति के अनुसार सतर्कता बरतें।

    प्रदेश में लगातार बदलते मौसम का असर न केवल जीवनशैली पर बल्कि आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ता है। कृषि क्षेत्रों में फसल की सुरक्षा और सिंचाई के प्रबंधन के लिए मौसम विभाग के अलर्ट का पालन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस समय मौसम में तेजी से बदलाव होने की वजह से विभाग ने नागरिकों से सावधानी बरतने और घरों में सुरक्षित रहने की अपील की है।

  • मध्यप्रदेश विधानसभा बजट सत्र में उठे संवेदनशील मुद्दे, सीएम डॉ मोहन यादव का रायसेन दौरा, बिजली दरों में संभावित बढ़ोतरी

    मध्यप्रदेश विधानसभा बजट सत्र में उठे संवेदनशील मुद्दे, सीएम डॉ मोहन यादव का रायसेन दौरा, बिजली दरों में संभावित बढ़ोतरी


    मध्यप्रदेश/भोपाल से आज की बड़ी खबर यह है कि मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का छठा दिन जोरदार चर्चा के साथ शुरू हुआ। सदन में गांधी मेडिकल कॉलेज की छात्रा रोशनी कलेश की दुखद मौत का मामला चर्चा का मुख्य केंद्र बना। कांग्रेस विधायक सेना पटेल ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए इस मुद्दे को उठाया। सदन में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान पर भी जोरदार बहस हुई। किसान समुदाय के लिए यह चिंता का विषय बन गया है और सदन में इसे गंभीरता से उठाया गया। अनुदान मांगों और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विधायक चर्चा कर रहे हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की आज की दिनचर्या भी काफी व्यस्त है। सुबह 10:45 बजे वह विधानसभा पहुंचे और 11 बजे से सदन की कार्यवाही में शामिल हुए। दोपहर 3:45 बजे के आसपास सीएम रायसेन के लिए रवाना होंगे और शाम 4:30 बजे हलाली डैम में आयोजित वन विभाग के कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री 5 गिद्धों को हलाली डैम क्षेत्र में मुक्त करेंगे, जो वन्य जीवन संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह कार्यक्रम स्थानीय लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं के लिए भी उत्साहजनक है।

    ग्वालियर की 14वीं बटालियन में आज सिपाही भर्ती परीक्षा का आयोजन हो रहा है। इस परीक्षा में कुल 5500 अभ्यर्थी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। भर्ती प्रक्रिया 14 मार्च तक चलेगी और प्रत्येक दिन लगभग 400 उम्मीदवार परीक्षा देंगे। यह अवसर युवाओं के लिए नौकरी पाने का महत्वपूर्ण मौका है और क्षेत्र में काफी उत्साह देखा जा रहा है।

    मध्यप्रदेश में बिजली महंगी होने की संभावना भी अब लोगों की चिंता का विषय बन गई है। राज्य की बिजली वितरण कंपनियों ने विद्युत नियामक आयोग को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 10.19 प्रतिशत दर बढ़ोतरी का प्रस्ताव भेजा है। अगर यह प्रस्ताव स्वीकृत हो गया तो 1 अप्रैल 2026 से नई दरें लागू होंगी। इससे प्रदेश के एक करोड़ से अधिक घरेलू उपभोक्ताओं को आर्थिक झटका लग सकता है और चर्चा का विषय बन जाएगा।

    मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में जनजातीय चित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रदर्शनी 28 फरवरी तक चलेगी। इसमें डिंडोरी के पाटनगढ़ निवासी गौंड चित्रकार कुम्हार सिंह धुर्वे के चित्र प्रदर्शित किए गए हैं, जो बिक्री के लिए भी उपलब्ध हैं। इन चित्रों में पशु-पक्षी, जंगल और पहाड़ी जीवन की झलक दिखाई देती है। कुम्हार सिंह धुर्वे ने चित्रकला अपने बच्चों के साथ सीखते हुए इस क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। यह प्रदर्शनी कला प्रेमियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

    आज का दिन मध्यप्रदेश के लिए कई महत्वपूर्ण गतिविधियों और निर्णयों से भरा है। विधानसभा में उठाए गए संवेदनशील मुद्दे, सिपाही भर्ती की तैयारियां, सीएम के पर्यावरण संरक्षण प्रयास और बिजली दरों में संभावित बढ़ोतरी सभी जनता के ध्यान में हैं। साथ ही जनजातीय कला को सम्मान देने वाला यह प्रदर्शनी भी राज्य में सांस्कृतिक समृद्धि को बढ़ा रही है।

  • बाबा महाकालेश्वर में भव्य भस्म आरती, त्रिनेत्र और त्रिशूल से अलंकृत महाकाल का अद्भुत श्रृंगार

    बाबा महाकालेश्वर में भव्य भस्म आरती, त्रिनेत्र और त्रिशूल से अलंकृत महाकाल का अद्भुत श्रृंगार


    उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार तड़के 4 बजे भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि के अवसर पर मंदिर के कपाट खोले गए और पुजारियों ने भगवान महाकाल का दिव्य श्रृंगार आरंभ किया। गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का पूजन करने के बाद बाबा महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके उपरांत पंचामृत से भगवान का अभिषेक किया गया जिसमें दूध, दही, घी, शहद और फलों का रस शामिल था।

    इस दिन बाबा महाकाल का श्रृंगार अत्यंत मनोहारी था। चंदन के त्रिपुंड, त्रिनेत्र और भांग से अलंकृत महाकाल ने श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींचा। भस्म अर्पित करने से पहले प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया और मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया। इसके बाद कपूर आरती के माध्यम से ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढंककर भस्म अर्पित किया गया।

    श्रद्धालुओं की भक्ति और उत्साह देखते ही बनता था। रजत के मुकुट और मुण्डमाल से महाकाल का अलंकरण किया गया। रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों की माला से भगवान का श्रृंगार और भी अद्भुत लग रहा था। मंदिर के गर्भगृह में महाकाल के जयकारे गुंज रहे थे और प्रत्येक श्रद्धालु अपने मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु नंदी महाराज के पास जाकर आशीर्वाद प्राप्त कर रहा था।

    भस्म आरती के दौरान मंदिर का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण था। सुबह-सुबह सैकड़ों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन करने पहुंचे। कुछ श्रद्धालु अपने सिर पर त्रिशूल अर्पित कर आभूषणों से सजाए गए महाकाल का मनोहारी श्रृंगार देखकर भावविभोर हो गए। पूरी नगरी और मंदिर जयकारों से गूंज रहा था। श्रद्धालु भक्तों ने नंदी महाराज के कान के समीप जाकर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना की।

    मंदिर के प्रत्येक कोने में भस्म और पुष्पों की महक ने वातावरण को दिव्यता से भर दिया। इस विशेष अवसर पर भगवान महाकाल का अलंकरण और श्रृंगार अत्यंत भव्य था। भस्म आरती का यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था बल्कि यह भक्तों के लिए आध्यात्मिक अनुभव का अनोखा अवसर भी साबित हुआ।

    श्रद्धालु इस पावन अवसर पर अपने परिवार और मित्रों के साथ आए और दिव्य अनुभव का आनंद लिया। बाबा महाकाल का भव्य श्रृंगार, मंत्रोच्चार, पंचामृत अभिषेक और भस्म आरती सभी के लिए अनंत पुण्य का स्रोत बनी। उज्जैन का यह पावन दृश्य हर श्रद्धालु के हृदय में अमिट छाप छोड़ गया।