Category: Madhya Pradesh

  • शक्ति प्रदर्शन के बीच भाजपा कार्यालय की नई शुरुआत क्या इस बार खड़ी होंगी दीवारें

    शक्ति प्रदर्शन के बीच भाजपा कार्यालय की नई शुरुआत क्या इस बार खड़ी होंगी दीवारें


    सीहोर । मध्यप्रदेश के सीहोर जिले में भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर अपने नए जिला कार्यालय के निर्माण को लेकर बड़ा कदम उठाया है लेकिन इस बार के भूमिपूजन के साथ ही पुरानी यादें और अधूरे वादे भी चर्चा में आ गए हैं। स्थापना दिवस के मौके पर आयोजित इस कार्यक्रम में पार्टी ने पूरे उत्साह और शक्ति प्रदर्शन के साथ नए कार्यालय के निर्माण का शंखनाद किया हालांकि राजनीतिक गलियारों में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या इस बार यह परियोजना जमीन से उठकर वास्तव में पूरी हो पाएगी।

    इछावर रोड स्थित निर्धारित भूमि पर आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए और भूमिपूजन की औपचारिकता पूरी की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने इसे एक तरह के राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का रूप दे दिया।

    पार्टी के जिला अध्यक्ष नरेश मेवाड़ा के अनुसार प्रस्तावित कार्यालय आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा और करीब 10 हजार वर्गफीट क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। इस भवन के निर्माण पर लगभग डेढ़ से ढाई करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। इसमें संगठन के विभिन्न पदाधिकारियों के लिए अलग अलग कक्ष मीटिंग हॉल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा और चुनावी रणनीति तैयार करने के लिए एक अत्याधुनिक वार रूम भी बनाया जाएगा। साथ ही बाहर से आने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं के ठहरने के लिए गेस्टहाउस की व्यवस्था भी की जाएगी।

    हालांकि इस पूरे प्रोजेक्ट को लेकर सबसे बड़ी चुनौती इसकी विश्वसनीयता को लेकर है क्योंकि यह पहला मौका नहीं है जब इस कार्यालय के निर्माण की घोषणा हुई हो। इससे पहले भी कई बार भूमिपूजन हो चुका है लेकिन निर्माण कार्य कभी धरातल पर नहीं उतर सका। वर्ष 2016 में पहली बार भूमि क्रय कर शिलान्यास किया गया था लेकिन इसके बाद भी योजनाएं कागजों तक ही सीमित रहीं। यही वजह है कि फिलहाल पार्टी का जिला कार्यालय किराए के भवन में संचालित हो रहा है जिससे संगठनात्मक कामकाज में अस्थिरता बनी रहती है।

    इस बार पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट लक्ष्य तय करते हुए दावा किया है कि निर्माण कार्य एक वर्ष के भीतर पूरा कर लिया जाएगा और 6 अप्रैल 2027 को इसका विधिवत लोकार्पण किया जाएगा। यह घोषणा कार्यकर्ताओं में नई उम्मीद जरूर जगाती है लेकिन पिछले अनुभवों को देखते हुए लोगों के मन में आशंका भी बनी हुई है।

    कुल मिलाकर यह परियोजना केवल एक भवन निर्माण तक सीमित नहीं है बल्कि यह संगठन की साख और भरोसे से भी जुड़ी हुई है। अब देखना यह होगा कि क्या इस बार भाजपा अपने इस लंबे समय से लंबित वादे को पूरा कर पाती है या फिर यह पहल भी पिछले प्रयासों की तरह अधूरी रह जाएगी। फिलहाल नजरें 2027 की तय समयसीमा पर टिकी हैं जो इस पूरे प्रोजेक्ट की असली परीक्षा साबित होगी।

  • इंदौर में दर्दनाक हादसा दुल्हन संग लौट रही बारात की कार ट्रक में घुसी 4 की मौत

    इंदौर में दर्दनाक हादसा दुल्हन संग लौट रही बारात की कार ट्रक में घुसी 4 की मौत


    इंदौर ।
    मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है जहां एक भीषण सड़क हादसे ने खुशियों को पल भर में मातम में बदल दिया। देर रात हुए इस हादसे में चार लोगों की दर्दनाक मौत हो गई जबकि पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए जिनका अस्पताल में इलाज जारी है। बताया जा रहा है कि जिस कार का एक्सीडेंट हुआ उसमें कुल 11 लोग सवार थे और सभी एक शादी समारोह से लौट रहे थे।

    घटना खुड़ैल थाना क्षेत्र के ट्रेंचिंग ग्राउंड के पास की है जहां दुल्हन को लेकर लौट रही बारात की कार अचानक हादसे का शिकार हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सामने चल रहे एक मालवाहक वाहन ने अचानक ब्रेक लगा दिया जिससे पीछे तेज रफ्तार में आ रही कार संभल नहीं पाई और सीधे ट्रक के पिछले हिस्से में जा घुसी। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के अगले हिस्से के परखच्चे उड़ गए और मौके पर ही चीख पुकार मच गई।

    इस हादसे में इरफान आरिश फरहान और रहीश खान की मौके पर ही मौत हो गई। सभी मृतक सदर बाजार क्षेत्र के निवासी बताए जा रहे हैं। वहीं हादसे में घायल हुए अन्य लोगों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया जहां उनका इलाज जारी है। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है।

    हादसे के बाद मौके पर अफरा तफरी का माहौल बन गया और जैसे ही घटना की खबर परिजनों तक पहुंची वे बड़ी संख्या में घटनास्थल पर पहुंच गए। अपनों की मौत की खबर सुनकर गुस्साए परिजनों ने सड़क पर चक्काजाम कर दिया और आक्रोश में आकर दुर्घटनाग्रस्त वाहन में आग लगाने की भी कोशिश की। स्थिति को बिगड़ता देख पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद हालात को काबू में किया।

    पुलिस अधिकारियों ने परिजनों को समझाइश देकर शांत कराया और यातायात बहाल कराया गया। प्रारंभिक जांच में हादसे का मुख्य कारण ट्रक चालक द्वारा अचानक ब्रेक लगाना बताया जा रहा है हालांकि पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है ताकि दुर्घटना के पीछे की सटीक वजह सामने आ सके।

    यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े करता है। तेज रफ्तार और लापरवाही किस तरह पल भर में कई जिंदगियां छीन सकती है यह घटना उसका दर्दनाक उदाहरण बन गई है। शादी जैसे खुशी के मौके से लौट रहे परिवार के लिए यह सफर जिंदगी का सबसे बड़ा हादसा बन गया जिसने कई घरों की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं।

  • किसानों के लिए बड़ी खबर मध्यप्रदेश में 3627 केंद्रों पर गेहूं खरीदी शुरू तैयारी पूरी

    किसानों के लिए बड़ी खबर मध्यप्रदेश में 3627 केंद्रों पर गेहूं खरीदी शुरू तैयारी पूरी


    भोपाल । मध्यप्रदेश में गेहूं खरीदी को लेकर तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं और राज्य के किसानों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। 10 अप्रैल से प्रदेश के इंदौर उज्जैन भोपाल और नर्मदापुरम संभागों में गेहूं खरीदी की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। इसके साथ ही पंजीकृत किसान 7 अप्रैल से स्लॉट बुकिंग कर सकेंगे ताकि वे तय समय पर अपने उपज को बेच सकें और अनावश्यक भीड़ से बचा जा सके।

    प्रदेश के अन्य संभागों में यह प्रक्रिया 15 अप्रैल से शुरू होगी जिससे पूरे राज्य में चरणबद्ध तरीके से खरीदी सुनिश्चित की जा सके। इस बार गेहूं उपार्जन के लिए किसानों ने बड़े पैमाने पर पंजीयन कराया है। आंकड़ों के अनुसार लगभग 19 लाख 4 हजार 644 किसानों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया है जो इस बात का संकेत है कि इस बार खरीदी का दायरा और भी व्यापक रहने वाला है।

    राज्य सरकार ने भी इस बार व्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। पूरे मध्यप्रदेश में कुल 3627 उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं जहां किसानों से गेहूं की खरीदी की जाएगी। अनुमान है कि इस सीजन में करीब 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया जाएगा। इसके लिए बारदाने की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की गई है और अतिरिक्त बारदाना खरीदने की प्रक्रिया भी तेजी से जारी है ताकि कहीं कोई कमी न रह जाए।

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि उपार्जन केंद्रों पर किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो इसके लिए सभी जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं। बिजली पानी बैठने की व्यवस्था छाया प्रसाधन और पार्किंग जैसी सुविधाएं हर केंद्र पर उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसानों को लंबी कतारों में न खड़ा रहना पड़े और उनकी उपज का तौल समय पर हो सके।

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि खरीदी शुरू होने से पहले सभी केंद्रों का गहन निरीक्षण किया जाए और तौल कांटों की सटीकता को लेकर किसी भी तरह की शिकायत की गुंजाइश न रहे। साथ ही यह भी कहा गया है कि किसानों के खातों में भुगतान समय पर और पारदर्शी तरीके से किया जाए ताकि उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।

    इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने किसानों की स्थिति को लेकर चिंता जताई है और कहा है कि किसान पहले से ही कई समस्याओं का सामना कर रहा है ऐसे में सरकार को और संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए।

    कुल मिलाकर देखा जाए तो मध्यप्रदेश में इस बार गेहूं खरीदी को लेकर प्रशासन पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है और कोशिश की जा रही है कि किसानों को अधिकतम सुविधा और न्यूनतम परेशानी के साथ उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके। यह खरीदी अभियान न केवल किसानों की आय को मजबूत करेगा बल्कि राज्य की कृषि व्यवस्था को भी नई दिशा देगा।

  • अलर्ट जारी! मध्य प्रदेश के 24 जिलों में आंधी-बारिश का खतरा, मौसम रहेगा अस्थिर

    अलर्ट जारी! मध्य प्रदेश के 24 जिलों में आंधी-बारिश का खतरा, मौसम रहेगा अस्थिर

    भोपाल। मध्य प्रदेश में 9 अप्रैल तक आंधी-बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। सक्रिय टर्फ सिस्टम के चलते सोमवार को ग्वालियर-चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के कुल 24 जिलों में इसका असर देखने को मिलेगा। मौसम विभाग के अनुसार 7 अप्रैल से एक नया मौसम सिस्टम भी सक्रिय हो रहा है, जिससे गतिविधियां और बढ़ेंगी।

    सोमवार को जिन जिलों में आंधी, बारिश और गरज-चमक का अलर्ट जारी किया गया है, उनमें ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, सिवनी और बालाघाट शामिल हैं। मौसम विभाग ने बताया कि प्रदेश में फिलहाल सिस्टम सक्रिय है और 7 अप्रैल से एक वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) भी असर दिखाएगा। इसके चलते कहीं तेज आंधी तो कहीं बारिश की स्थिति बन सकती है।

    इससे पहले 4 और 5 अप्रैल को प्रदेश में मौसम ने जोरदार करवट ली थी। शनिवार को 14 जिलों में ओलावृष्टि हुई, जबकि 39 जिलों में तेज आंधी और बारिश दर्ज की गई। ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुर, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, सागर, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, दमोह, पन्ना, जबलपुर, डिंडौरी, मंडला, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, सिवनी, अनूपपुर, सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज, सीधी, कटनी, बड़वानी, बैतूल, नर्मदापुरम, रायसेन, भोपाल, विदिशा, राजगढ़, खरगोन, धार, इंदौर, मंदसौर और खंडवा में बारिश दर्ज की गई। ओलावृष्टि मंदसौर, श्योपुर, शिवपुरी, ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, छतरपुर, विदिशा, रायसेन, राजगढ़, बैतूल, नरसिंहपुर और सागर जिलों में हुई। इसके साथ ही कई इलाकों में तेज हवाएं भी चलीं।

    हवा की रफ्तार की बात करें तो जबलपुर में 59 किमी/घंटा, सागर में 54 किमी/घंटा, बड़वानी में 50 किमी/घंटा, शिवपुरी में 43 किमी/घंटा, कटनी, मुरैना और अशोकनगर में 41 किमी/घंटा, सीधी, गुना और ग्वालियर में 37 किमी/घंटा, इंदौर और रीवा में 33 किमी/घंटा, चित्रकूट और सतना में 31 किमी/घंटा, मंदसौर और धार में 28 किमी/घंटा तथा बैतूल में 26 किमी/घंटा की रफ्तार दर्ज की गई।

    रविवार को भी मौसम में बदलाव बना रहा, जहां कई स्थानों पर आंधी और बारिश देखने को मिली। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में भी तेज हवाएं चलेंगी। कुछ जिलों में हवा की गति 50 से 60 किमी/घंटा तक पहुंच सकती है, जबकि अन्य क्षेत्रों में 30 से 40 किमी/घंटा की रफ्तार से आंधी चलने का अनुमान है।

  • MP Politics: विधायक संजय पाठक का अनोखा ऐलान, 51% से कम समर्थन मिला तो छोड़ देंगे कुर्सी

    MP Politics: विधायक संजय पाठक का अनोखा ऐलान, 51% से कम समर्थन मिला तो छोड़ देंगे कुर्सी


    कटनी।
    मध्य प्रदेश की राजनीति में एक अलग तरह का प्रयोग सामने आया है। प्रदेश के चर्चित और संपन्न विधायकों में गिने जाने वाले संजय सतेंद्र पाठक ने अपने कार्यकाल के बीच ही जनता से खुद का मूल्यांकन कराने का बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने घोषणा की है कि ढाई साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद वे अपने विधानसभा क्षेत्र में “जनादेश” कराएंगे। यदि इस प्रक्रिया में उन्हें 51 प्रतिशत से कम समर्थन मिला, तो वे तत्काल इस्तीफा दे देंगे।

    कटनी जिले की विजयराघवगढ़ विधानसभा से विधायक पाठक ने यह घोषणा कैमोर नगर परिषद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान की। उन्होंने कहा कि जनता के बीच जाकर यह परखा जाना चाहिए कि वे विधायक बने रहने योग्य हैं या नहीं।

    उन्होंने स्पष्ट कहा कि जनादेश के जरिए जनता से सीधे पूछा जाएगा कि उनके ढाई साल के कामकाज को कितने अंक मिलते हैं। यदि 51 प्रतिशत से अधिक समर्थन मिला तो वे पद पर बने रहेंगे, अन्यथा इस्तीफा देकर घर बैठ जाएंगे।

    विधायक ने यह भी बताया कि वे मई-जून के आसपास इस प्रक्रिया को दोबारा अपनाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके तहत वे घर-घर जाकर लोगों से फीडबैक लेंगे और खुद को जनता के “कटघरे” में रखेंगे।

    गौरतलब है कि यह प्रयोग वे पहले भी कर चुके हैं। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले भी उन्होंने अपने क्षेत्र में जनादेश कराया था। चार दिन चली इस प्रक्रिया में 75 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं ने उनके पक्ष में समर्थन दिया था। कुल 2.33 लाख मतदाताओं में से करीब 1.37 लाख लोगों ने मतदान किया था, जिसमें से लगभग 1.03 लाख मत उनके समर्थन में पड़े थे।

    हालांकि, संजय सतेंद्र पाठक हाल के समय में कई विवादों के कारण सुर्खियों में भी रहे हैं। सहारा जमीन घोटाला, एक्सिस माइनिंग से जुड़ा मामला और करोड़ों के जुर्माने सहित अन्य मुद्दे उनके लिए चुनौती बने हुए हैं।

    ऐसे में उनका यह नया राजनीतिक दांव आने वाले समय में उनके लिए राह आसान करेगा या नई मुश्किलें खड़ी करेगा, यह देखना दिलचस्प होगा। साथ ही, यह पहल प्रदेश की राजनीति में एक नई परंपरा की शुरुआत भी कर सकती है।

  • MP को बड़ी सौगात… 22 Km 4-लेन टाइगर कॉरिडोर के लिए 758 करोड़ रुपये स्वीकृत

    MP को बड़ी सौगात… 22 Km 4-लेन टाइगर कॉरिडोर के लिए 758 करोड़ रुपये स्वीकृत


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के इटारसी-बैतूल सेक्शन (Itarsi-Betul section.) में स्थित 22 किलोमीटर लंबे ‘टाइगर कॉरिडोर’ (‘Tiger Corridor’) को अब चार लेन हाईवे (Four Lane Highway) में विकसित किया जाएगा। केंद्र सरकार (Central Government) ने इस परियोजना के लिए 758 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है, जिससे क्षेत्र में कनेक्टिविटी और विकास को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस फैसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से इटारसी-बैतूल क्षेत्र की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलेंगी।

    NH-46 को मिलेगी स्पीड
    राष्ट्रीय राजमार्ग-46 (NH-46) के इस हिस्से को चार लेन में अपग्रेड करने से क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी। बेहतर सड़क संपर्क से न केवल आम लोगों की आवाजाही आसान होगी, बल्कि कृषि और खनिज आधारित अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। यह इलाका कोयला, तांबा, ग्रेफाइट और अन्य प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है, जिससे माल ढुलाई तेज और सुरक्षित हो सकेगी।


    जानिए कहां से कहां को जुड़ेगा

    केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार, इस परियोजना के तहत 11 विशेष अंडरपास और ओवरपास बनाए जाएंगे, जिससे वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित किया जा सके। इससे सड़क दुर्घटनाओं और जानवरों की मौत में कमी आने की संभावना है।

    यह कॉरिडोर बैतूल को आगे नागपुर से जोड़ेगा, जिससे उत्तर और दक्षिण भारत के बीच संपर्क और बेहतर होगा। इसके अलावा, ग्वालियर-बैतूल कॉरिडोर के इस शेष हिस्से के चार लेन बनने से पूरा मार्ग हाई-स्पीड कनेक्टिविटी वाला बन जाएगा।


    समय की होगी बचत

    परियोजना के पूरा होने से न केवल यात्रा समय कम होगा, बल्कि पहाड़ी इलाकों में सड़क सुरक्षा भी बेहतर होगी। साथ ही सतपुरा टाइगर रिजर्व, महादेव नेशनल पार्क और रातापानी वाइल्डलाइफ सेंचुरी जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने से इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा।

  • MP: ओबेदुल्लागंज के वेयर हाउस में सड़ गया 35 करोड़ रुपये कीमत का हजारों टन गेहूं!

    MP: ओबेदुल्लागंज के वेयर हाउस में सड़ गया 35 करोड़ रुपये कीमत का हजारों टन गेहूं!


    रायसेन।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के रायसेन (Raisen) से चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां ओबेदुल्लागंज (Obedullaganj) के वेयर हाउस (Warehouses) में रखे हजारों टन गेहूं (Thousands Tons Wheat) के खराब होने की बात कही जा रही है. करीब 35 करोड़ रुपये कीमत का गेहूं सड़ गया, जबकि इसे बचाने के नाम पर भारी खर्च भी किया गया.

    वेयर हाउस में करीब 22 हजार टन गेहूं लंबे समय तक रखा रहा. इसे सुरक्षित रखने के लिए 30 से ज्यादा बार कीटनाशक छिड़काव किया गया, लेकिन हालत इतनी खराब हो गई कि यह अनाज अब उपयोग के लायक भी नहीं बचा. गेहूं से दुर्गंध आने की बात कही जा रही है. वह पशुओं के चारे के लिए भी अनुपयोगी हो चुका है।

    इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतना बड़ा स्टॉक वेयर हाउस में सालों तक क्यों रखा गया और समय रहते इसकी निकासी या उपयोग क्यों नहीं किया गया? जानकारी सामने आई है कि यह गेहूं मूल रूप से सीहोर जिले के बख्तरा से साल 2022 में यहां शिफ्ट किया गया था, जबकि उससे पहले भी इसके खराब होने की आशंका जताई जा चुकी थी।

    किसान नेता राहुल गौर ने कहा कि नूरगंज और देववटिया वेयर हाउस का मामला संज्ञान में आया. मैंने जानकारी ली तो पता चला कि गेहूं 16-17 में बख्तरा में तुला था. साल 2022 में इसे नूरगंज और देववटिया शिफ्ट किया गया. ये गेहूं शिफ्ट होते समय अधिकारियों के द्वारा बता दिया गया था कि ये गेहूं खराब हो चुका है. गेहूं की आज ये स्थिति है कि आप उस क्षेत्र में अगर खड़े होते हैं तो वो गेहूं वेयर हाउस के बाहर स्मेल कर रहा है. 35 करोड़ के गेहूं पर 150 करोड़ शासन खर्च कर चुका है।

    वेयर हाउस कॉरपोरेशन औबेदुल्लागंज के प्रबंधक सीएस डूडवे ने कहा कि 2022 में 22,900 मीट्रिक टन गेहूं आया था. उसके बाद डिलिवरी भी हो गई. अभी 12,300 मीट्रिक टन बचा हुआ है. बखतरा से ही खराब आया था. इस गेहूं को लेकर शासन स्तर से कार्यवाही होगी।

    शाखा प्रबंधक होने के नाते रेगुलर पत्राचार कर रहे हैं और शासन के संज्ञान में ला रहे हैं. जितना जल्दी हो सके, इसका निराकरण कराने का प्रयास कर रहे हैं. ये है कि जल्दी निराकरण हो जाए तो अच्छा है. स्पेस मिल जाए और नए उपार्जन का भंडारण भी हो जाए. यहां से रेगुलर पत्राचार किया जा रहा है।


    पूरे मामले को लेकर तहसीलदार ने क्या कहा?

    तहसीलदार नीलेश सरवटे ने कहा कि अभी ये बात संज्ञान में आई है. वरिष्ठों को भी इसकी जानकारी है. इस पूरे मामले की जांच होगी और विस्तृत जांच के बाद जो भी निर्णय होगा, वो वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किया जाएगा।

    कलेक्टर के निर्देश पर गोरगंज तहसील के सभी वेयर हाउस एक-एक कर चेक किए जा रहे हैं. कल कई गोदाम चेक कर लिए हैं. विस्तृत रिपोर्ट के बाद ही जो वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा निर्णय लिया जाएगा, जैसे निर्देश होंगे, वैसे कार्य किया जाएगा. अभी जांच रिपोर्ट नहीं आई है, रिपोर्ट आने के बाद जो भी निर्णय होगा, उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

    प्रशासन की ओर से फिलहाल मामले की जांच शुरू कर दी गई है. सवाल यह है कि अगर गेहूं पहले से खराब था, तो उसे बार-बार शिफ्ट करने और लंबे समय तक स्टोर रखने की अनुमति किसने दी? और अगर यह स्टॉक समय रहते उपयोग में नहीं लाया गया, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है? फिलहाल प्रशासन जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है. रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होगा कि खराब गेहूं को नीलाम किया जाएगा या नष्ट किया जाएगा।

  • राज्य सरकार हर घड़ी किसानों के साथ, तय वक्त पर प्रारंभ होगी गेहूं खरीदी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    राज्य सरकार हर घड़ी किसानों के साथ, तय वक्त पर प्रारंभ होगी गेहूं खरीदी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश के किसानों का हर तरह से कल्याण हमारी प्रतिबद्धता है। हमारी सरकार हर घड़ी किसानों के साथ है। प्रदेश में तय वक्त पर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी प्रारंभ कर दी जाएगी। उपार्जन पोर्टल पर पंजीयन कराने वाले सभी किसानों का गेहूं खरीदा जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार देर शाम अपने निवास स्थित समत्व भवन में गेहूं उपार्जन कार्य के संबंध में सरकार द्वारा गठित मंत्री समूह के सदस्य एवं कृषक प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उपार्जन प्रक्रिया में पहले छोटे किसानों का गेहूं खरीदा जाएगा। इसके बाद मध्यम एवं बड़े किसानों के गेहूं की खरीदी की जाएगी। स्लॉट बुकिंग वाले सभी किसानों का गेहूं चरणबद्ध रूप से खरीदा जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बारदाने की कोई कमी नहीं है। सरकार सभी व्यवस्थाएं कर रही हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए विशेष रूप से संवेदनशील है। गेहूं उपार्जन में बारदान की उपलब्धता निरंतर बनाए रखने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश में गेहूं खरीदी में किसानों को किसी भी प्रकार से बारदाने की समस्या नहीं आने दी जाएगी। केन्द्र सरकार, जूट कमिश्नर सहित अन्य बारदान प्रदाय एजेंसियों से बारदान आपूर्ति के लिए राज्य सरकार लगातार सम्पर्क बनाए हुए है।


    उपार्जन शुरू होने से पहले कराएं तौल केन्द्रों का निरीक्षण

    मुख्यमंत्री ने कहा कि गेहूं उपार्जन व्यवस्था को सरल, सहज और सुविधाजनक बनाया जाये। किसानों को उपार्जन केन्द्र तक आने और गेहूं बेचने में किसी भी तरह की कठिनाई न होने पाये। उन्होंने उपार्जन व्यवस्था पर नियमित रूप से निगरानी के लिए एक राज्य स्तरीय एवं कृषि उपज मंडियों में भी कंट्रोल रूम बनाने के निर्देश खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को दिए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गेहूं उपार्जन के दृष्टिगत प्रदेश के सभी तौल केंद्रों का 10 अप्रैल से पहले गहन निरीक्षण करा लिया जाए, जिससे किसानों में किसी भी तरह का संशय न रहे। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सभी कृषि उपज मंडियों के वर्तमान ढांचे में क्रमबद्ध सुधार किया जाये। सभी मंडियों को वैश्विक जरुरतों के मुताबिक अपग्रेड कर इन्हें वर्ल्ड क्लास मंडी की तरह तैयार किया जाये।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि गेहूं उपार्जन केंद्रों में आने वाले किसानों को सभी प्रकार की बुनियादी सुविधाएं जैसे बिजली, पीने का पानी, बैठक, छाया, प्रसाधन एवं पार्किंग सुविधा उपलब्ध कराई जाये। किसी को भी किसी भी प्रकार की प्रक्रियागत या व्यवस्थागत असुविधा का सामना न करना पड़े। किसी भी केन्द्र में किसानों/ट्रेक्टर-ट्राली की लंबी-लंबी कतारें न लगें, सभी किसानों का सहजता से गेहूं तुल जाये, ऐसी व्यवस्थाएं की जाएं। जिन किसानों से गेहूं खरीदा जाये, कम से कम समय में उनके खातों में भुगतान कर देने की व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की जाएं।


    10 अप्रैल से प्रारंभ हो जाएगी गेहूं खरीदी

    खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की अपर मुख्य सचिव रश्मि अरुण शमी ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। प्रदेश में इंदौर, उज्जैन, भोपाल एवं नर्मदापुरम संभाग में 10 अप्रैल से एवं अन्य सभी संभागों में 15 अप्रैल से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं का उपार्जन प्रारंभ होने जा रहा है।

    उन्होंने बताया कि जिन संभागों में 10 अप्रैल से गेहूं खरीदी शुरू होनी है, उनके लिए आगामी मंगलवार, 7 अप्रैल से पंजीकृत किसानों की स्लॉट बुकिंग प्रारंभ हो जायेगी। शुक्रवार, 10 अप्रैल से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी प्रारंभ कर दी जाएगी। उपार्जन वर्ष 2026-27 में गेहूं उपार्जन के लिए प्रदेश के 19 लाख 4 हजार 644 किसानों ने अपना पंजीयन कराया है। गेहूं उपार्जन के लिए इस वर्ष प्रदेश में कुल 3627 उपार्जन केंद्र बनाये गये हैं। बीते उपार्जन वर्ष 2025-26 में 15 लाख 44 हजार 55 किसानों ने गेहूं उपार्जन के लिए पंजीयन कराया था। इस उपार्जन वर्ष के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,625 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। राज्य सरकार प्रदेश के किसानों को गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य के अतिरिक्त 40 रूपए प्रति क्विंटल बोनस का लाभ भी इस वर्ष देने जा रही है।

    अपर मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेश में 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन होना अनुमानित है। इसके लिए 3 लाख 12 हजार गठान बारदानों की आवश्यकता होगी। प्रदेश में गेहूं खरीदी आरंभ करने के लिए आवश्यक बारदान का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। केन्द्र सरकार की ओर से लिमिट भी तय कर दी गई है। राज्य सरकार को केन्द्र से हर जरूरी सहयोग भी मिल रहा है। जूट कमिश्नर कार्यालय सहित अन्य बारदाना प्रदायकर्ताओं से भी बारदान सामग्री प्राप्त की जा रही है। इसके साथ ही गेहूं उपार्जन के लिए गठित मंत्री-मंडलीय समिति के निर्देश पर अतिरिक्त बारदान खरीदने की प्रक्रिया भी तेजी से जारी है।

    बैठक में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा, कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना, खाद्य मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत, पशुपालन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित कृषक प्रतिनिधि और खाद्य, सहकारिता एवं अन्य विभागीय अधिकारी भी उपस्थित थे।

  • काशी की पावन धरा पर सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का हुआ भव्य समापन

    काशी की पावन धरा पर सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का हुआ भव्य समापन


    भोपाल।
    धर्म, संस्कृति और ज्ञान की अविनाशी नगरी काशी के बीएलडब्ल्यू मैदान में पिछले तीन दिनों से चल रहे सांस्कृतिक महाकुंभ (सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य) का रविवार की शाम गौरवमयी समापन हुआ। महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य के मंचन के अंतिम दिन बाबा विश्वनाथ के हजारों भक्तों, कला रसिकों, कला प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों ने भरपूर आनंद लिया।

    मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार के विशेष सहयोग से आयोजित महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ के अंतिम दिन वाराणसी की जनता का उत्साह अपने चरम पर रहा। समापन समारोह में उत्तर प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए।


    विक्रमादित्य नायक जन-जन के हृदय में लोकमान्य

    उत्तर प्रदेश के मंत्री सुरेश कुमार ने कहा कि भारत की माटी में भगवान श्रीराम और युगावतार श्रीकृष्ण के बाद यदि कोई नायक जन-जन के हृदय में लोकमान्य हुआ है, तो वे उज्जैन के अधिपति सम्राट विक्रमादित्य ही थे। उन्होंने कहा कि “इतिहास के पन्नों में सम्राट विक्रमादित्य ने दुर्दांत विदेशी आक्रांताओं को भारत की सीमाओं से खदेड़कर निर्णायक विजय प्राप्त की थी, जिसके उपलक्ष्य में गौरवशाली ‘विक्रम सम्वत्’ का प्रवर्तन हुआ।” उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सरकारें मिलकर अपनी गौरवशाली विरासत को विकास की मुख्यधारा से जोड़ रही हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थापित उज्जैन की ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ इसी सांस्कृतिक सेतु का जीवंत प्रमाण है।


    महानाट्य का सजीव मंचन: आँखों के सामने जीवंत हुआ इतिहास

    समापन की संध्या पर ‘विशाला’ संस्था उज्जैन के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। भव्य त्रि-आयामी मंच पर जब सैकड़ों कलाकारों ने एक साथ सम्राट के पराक्रम और उनके सुशासन को जीवंत किया, तो पूरा मैदान ‘जय श्री महाकाल’ के जयघोष से गूँज उठा।

    नाटक के निर्देशक संजीव मालवीय के कुशल निर्देशन में सम्राट की न्यायप्रियता, ‘सिंहासन बत्तीसी’ के प्रसंग और विदेशी शत्रुओं के दमन के दृश्यों को जिस भव्यता के साथ प्रस्तुत किया गया, उसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पार्श्व संगीत, युद्ध के सजीव दृश्य और प्रभावशाली संवादों ने यह सिद्ध कर दिया कि हमारी गौरवशाली संस्कृति आज भी जन-मानस के हृदय में धड़कती है।


    अभूतपूर्व प्रदर्शनी: सम्राट विक्रमादित्य और अयोध्या का अटूट संबंध

    मंचन के साथ-साथ आयोजन स्थल पर मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा ‘भारतीय ज्ञान परंपरा’ पर केंद्रित एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई। इस प्रदर्शनी ने वाराणसी के विद्वानों और आमजन को एक चौंकाने वाले ऐतिहासिक तथ्य से परिचित कराया कि अयोध्या में प्रभु श्रीराम के मंदिर का प्राचीन निर्माण सम्राट विक्रमादित्य द्वारा ही संपन्न कराया गया था। प्रदर्शनी में भारतीय ऋषि और विज्ञान, शिव पुराण और मध्य प्रदेश के पवित्र स्थलों की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रदर्शनी देखने आए विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने इसे ‘ज्ञान का खजाना’ बताया। कक्षा दसवीं की छात्रा रोहिणी यादव ने साझा किया कि उसे पहली बार अपनी समृद्ध वैज्ञानिक परंपरा और विक्रमादित्य के अयोध्या दर्शन के बारे में इतनी गहराई से पता चला।


    ‘माँ गंगा से नर्मदा तक’: पर्यटन और संस्कृति का ऐतिहासिक एमओयू

    इस आयोजन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच हुआ एमओयू रहा, जिसकी थीम माँ गंगा से नर्मदा तक” रखी गई। इसके माध्यम से काशी विश्वनाथ (वाराणसी) और महाकालेश्वर (उज्जैन) के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है। मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड के स्टॉल्स पर काशीवासियों को ‘लघु मध्य प्रदेश’ का अनुभव हुआ। व्हीआर बॉक्स के माध्यम से लोगों ने काशी में बैठे-बैठे ही ओरछा, सांची और खजुराहो की गलियों की यात्रा की। वहीं ‘माँ की रसोई’ में परोसे गए मालवा की प्रसिद्ध थाली, इंदौरी पोहा-जलेबी और कुल्हड़ चाय का स्वाद चखने के लिए लोगों का तांता लगा रहा।


    लोक कलाओं का मनोहारी संगम

    महानाट्य के मुख्य मंचन से पूर्व मध्य प्रदेश के लोक कलाकारों ने अपनी अद्भुत कला से काशी को सराबोर कर दिया। मालवा का मटकी नृत्य, निमाड़ का गणगौर, डिंडोरी का गुदम्बबाजा और उज्जैन के डमरू दल की गूँज ने दोनों राज्यों के साझा सांस्कृतिक डीएनए को प्रदर्शित किया।

    कार्यक्रम के अंत में अतिथियों का सम्मान विक्रम पंचांग और अंगवस्त्र भेंट कर किया गया। इस अवसर पर पंडित नरेश शर्मा, डॉ. राजेश कुशवाहा और राजा भोज शोध प्रभाग के निदेशक संजय यादव ने इस आयोजन को भारतीय गौरव को विश्व पटल पर लाने का एक ‘सांस्कृतिक अनुष्ठान’ बताया। जय महाकाल और जय बाबा विश्वनाथ के नारों के साथ इस ऐतिहासिक त्रिवार्षिक उत्सव का समापन हुआ, जिसने काशी और उज्जैन के बीच के सदियों पुराने आध्यात्मिक संबंधों को और भी प्रगाढ़ कर दिया।

  • MP: उज्जैन में महाकाल : द मास्टर ऑफ टाइम अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का समापन

    MP: उज्जैन में महाकाल : द मास्टर ऑफ टाइम अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का समापन


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में स्थित तारामंडल में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘महाकाल : द मास्टर ऑफ टाइम’ का रविवार देर शाम आयोजित पैनल चर्चा ‘वे फॉरवर्ड’ सत्र के साथ समापन हुआ। इस सत्र में देश के प्रमुख वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों ने अंतरिक्ष अनुसंधान, खगोल विज्ञान, स्वदेशी तकनीक, स्टार्टअप्स और भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका पर अपने विचार रखे।


    मानव संसाधन और स्टार्टअप की भूमिका रही महत्वपूर्ण

    पीआरएल, डीओएस अहमदाबाद के निदेशक प्रो. अनिल भारद्वाज ने सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रमों की सफलता के लिए कुशल मानव संसाधन सबसे महत्वपूर्ण आधार है। चंद्रमा पर मानव मिशन जैसे लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए भौतिकी, रसायन विज्ञान, गणित, जीव विज्ञान, चिकित्सा और इंजीनियरिंग जैसे विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की आवश्यकता होगी। उन्होंने अंतरिक्ष चिकित्सा, जैव विज्ञान और खाद्य प्रौद्योगिकी जैसे उभरते क्षेत्रों के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने शिक्षा संस्थानों और अनुसंधान संगठनों के बीच बेहतर समन्वय और सूचना के आदान-प्रदान को आवश्यक बताते हुए कहा कि देश में विकसित हो रहे स्टार्टअप अंतरिक्ष क्षेत्र की जटिल चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।


    स्वदेशी तकनीक और उद्योग सहभागिता पर जोर

    एनसीआरए-टीआईएफआर, एसपीपी परिसर पुणे के निदेशक प्रो. यशवंत गुप्ता ने खगोल विज्ञान की बड़ी परियोजनाओं में तकनीकी आत्मनिर्भरता और उद्योगों की भागीदारी को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि पहले कई तकनीकों के लिए भारत को विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन जीएमआरटी जैसे प्रोजेक्ट्स ने देश की तकनीकी क्षमता को साबित किया है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक परियोजनाओं में विकसित तकनीकों का साझा उपयोग किया जा सकता है, जिससे लागत कम होगी और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने अनुसंधान संस्थानों और उद्योगों के बीच मजबूत तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की आवश्यकता बताई।


    स्पेस साइंस की शिक्षा का विस्तार आवश्यक

    आईआईएसटी के कुलपति प्रो. दीपांकर बनर्जी ने बतायाकि पिछले कुछ वर्षों में स्पेस साइंस क्षेत्र में 300 से अधिक स्टार्टअप सामने आए हैं, जो इस क्षेत्र की बढ़ती संभावनाओं को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में एस्ट्रोनॉमी और एस्ट्रोफिजिक्स की शिक्षा सीमित संस्थानों तक ही केंद्रित है, इसलिए इस ज्ञान को व्यापक स्तर पर पहुंचाने की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि स्पेस साइंस और एस्ट्रोनॉमी जैसे विषयों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ा जाना चाहिए, जिससे विद्यार्थी प्रारंभ से ही इस क्षेत्र के प्रति प्रेरित हो सकें। प्रो. बनर्जी शिक्षा, उद्योग, तकनीक और अनुसंधान संस्थानों के संयुक्त प्रयासों को भविष्य के लिए आवश्यक बताया।


    भारतीय ज्ञान परंपरा और इतिहास के पुनर्पाठ पर बल

    इंडोलॉजिस्ट एवं चिंतक, पद्मश्री डॉ. भगवती लाल राजपुरोहित ने भारतीय इतिहास और ज्ञान परंपरा के प्रमाण आधारित अध्ययन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने उज्जैन और मालवा क्षेत्र की कालगणना एवं खगोल विज्ञान की समृद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि इतिहास को तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर पुनः समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि उज्जैन प्राचीन काल से समय गणना और खगोल अध्ययन का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है और इस विरासत को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पुनः स्थापित करने की आवश्यकता है।

    युवाओं के लिए अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में अपार अवसर
    पैनल विशेषज्ञों ने कहा कि भारत का अंतरिक्ष और खगोल विज्ञान क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है और इसमें युवाओं के लिए रोजगार और अनुसंधान की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। यदि शिक्षा, अनुसंधान संस्थानों और उद्योगों के बीच समन्वित प्रयास किए जाएं, तो भारत इस क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ सकता है। सम्मेलन ने उज्जैन की प्राचीन कालगणना परंपरा को आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान से जोड़ते हुए विज्ञान, इतिहास और भारतीय ज्ञान प्रणाली के समन्वय का एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।