Category: Madhya Pradesh

  • MP: गुना में युवक की पीट-पीटकर हत्या… पूर्व प्रेमिका से मिलने पहुंचा था…

    MP: गुना में युवक की पीट-पीटकर हत्या… पूर्व प्रेमिका से मिलने पहुंचा था…


    गुना।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के गुना (Guna) के चांचौड़ा क्षेत्र में एक दर्दनाक घटना घटी जहां एक शादीशुदा युवक (Married Young Man.) अपनी विवाहित प्रेमिका (Married Girlfriend) से मिलने उसके गांव गया था। वहां उसको महिला के ससुराल वालों ने देख लिया और बुरी तरह पीटना शुरू कर दिया। इससे युवक बुरी तरह जख्मी हो गया। उसको गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने 4 लोगों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया है। आरोपी फरार हैं और पुलिस उनकी तलाश कर रही है।


    पूर्व जनपद अध्यक्ष के भतीजे की पीट-पीटकर हत्या

    गुना के चांचौड़ा थाना क्षेत्र के कोन्याकला गांव में पूर्व जनपद अध्यक्ष के भतीजे की पीट-पीटकर हत्या किए जाने का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, फरियादी कृष्णगोपाल मीना निवासी तुलसीखेड़ी ने शिकायत में बताया है कि वह अपने दोस्त गिरीश मीना (32) के साथ अल्टो कार से कोन्याकला गांव पहुंचे थे। गिरीश अपनी एक महिला परिचित से मिलने स्कूल के पास गया था। इस दौरान कृष्णगोपाल कार में ही बैठा रहा।


    पीड़ित की इलाज के दौरान मौत

    इसी बीच गांव के कुछ लोग मौके पर पहुंचे और गिरीश को पकड़कर गालियां देते हुए मारपीट शुरू कर दी। मारपीट में गिरीश गंभीर रूप से जख्मी हो गया। पीड़ित किसी तरह अपनी जान बचाकर मौके से निकल गया और परिजनों को घटना की सूचना दी। कुछ देर बाद गिरीश को गंभीर हालत में अस्पताल ले जहां उसका इलाज शुरू किया गया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।


    पुलिस ने दर्ज किया केस

    डेडबॉडी को पोस्टमार्टम के लिए रखवा लिया गया है। पुलिस ने कृष्णगोपाल मीणा की रिपोर्ट पर आरोपी चंदू, रामविलास, मनीष और गोविंद मीणा के खिलाफ धारा 103(1), 296(ए) और बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर लिया है।


    दोनों शादीशुदा

    गिरीश की शादी हो चुकी है। वह जिस महिला से मिलने गया था। वह भी शादीशुदा है। दोनों स्कूल के पास मिल रहे थे तभी महिला के ससुराल वालों ने देख लिया। शादी से पहले से दोनों की पहचान थी। इंचार्ज थाना प्रभारी SI अरविन्द गौड़ ने बताया कि युवक की हत्या का मामला सामने आया है।पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोपी गांव से फरार हो गए हैं। उनकी तलाश में पुलिस लगी हुई है।


    घर में बांधकर हत्या का आरोप

    थाना प्रभारी ने बताया है कि जांच में सामने आया है कि युवक और युवती एक दूसरे को जानते थे। पीड़ित कई बार मिलने के लिए आ चुका था। मृतक युवक अपने दोस्त के साथ महिला से मिलने पहुंचा था। इस वारदात को लेकर मामला दर्ज कर लिया गया है। टीम में गठित करके आरोपियों की तलाश की जा रही है। मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि आरोपियों ने उसे घर में बांधकर पीट-पीटकर उसकी हत्या की है। आरोपी पहले भी कई बार मृतक को धमकी दे चुके थे।

  • ग्वालियर के 87 स्कूलों का रिजल्ट जीरो, नौनिहालों के भविष्य पर बड़ा सवाल

    ग्वालियर के 87 स्कूलों का रिजल्ट जीरो, नौनिहालों के भविष्य पर बड़ा सवाल

    ग्वालियर । मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले में कक्षा 5वीं और 8वीं के हालिया परीक्षा परिणामों ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के 87 स्कूल ऐसे सामने आए हैं, जहां एक भी छात्र पास नहीं हो पाया। यह स्थिति न केवल चिंताजनक है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि प्राथमिक शिक्षा की नींव कहीं न कहीं कमजोर हो रही है।

    इन 87 स्कूलों में 39 सरकारी और 48 निजी स्कूल शामिल हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 17 स्कूल ऐसे हैं, जहां केवल एक-एक छात्र था और वह भी परीक्षा में असफल हो गया। यह स्थिति बताती है कि समस्या केवल संसाधनों या ढांचे की नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता और निगरानी में भी कमी हो सकती है।

    जानकारी के अनुसार, जिन स्कूलों का परिणाम शून्य रहा है, वहां इंफ्रास्ट्रक्चर या शिक्षकों की कमी जैसी कोई स्पष्ट समस्या सामने नहीं आई है। इसके बावजूद एक भी छात्र का पास न होना शिक्षा प्रणाली की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि छात्रों की नियमित उपस्थिति, शिक्षकों की जवाबदेही और पढ़ाई के प्रति गंभीरता जैसे पहलुओं पर ध्यान देने की जरूरत है।

    इस पूरे मामले पर ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि कक्षा 5वीं और 8वीं जैसे आधारभूत स्तर पर इस तरह का परिणाम आना बेहद गंभीर विषय है। प्रशासन द्वारा अब इस पूरे मामले की गहन समीक्षा की जा रही है।

    कलेक्टर के अनुसार, स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था, छात्रों की उपस्थिति, शिक्षकों की नियमितता और पढ़ाने के तरीके सहित कई पहलुओं की जांच की जा रही है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि आखिर किन कारणों से इतने बड़े पैमाने पर छात्र असफल हुए।

    प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में इस दिशा में सख्त कदम उठाए जाएंगे। शिक्षकों की जवाबदेही तय करने के साथ ही स्कूलों की नियमित मॉनिटरिंग बढ़ाई जाएगी। इसके अलावा, शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए विशेष योजनाएं और बैठकों का आयोजन भी किया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह के परिणामों से बचा जा सके।

    यह मामला न केवल ग्वालियर बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक चेतावनी है कि अगर प्राथमिक स्तर पर शिक्षा मजबूत नहीं होगी, तो आगे की पढ़ाई और करियर पर भी इसका असर पड़ेगा। नौनिहालों का भविष्य सुरक्षित करने के लिए जरूरी है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जिम्मेदारी और गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन द्वारा लिए जाने वाले निर्णय कितने प्रभावी साबित होते हैं और क्या आने वाले वर्षों में इन स्कूलों के परिणामों में सुधार हो पाता है या नहीं।

  • दूषित पानी और GBS सिंड्रोम को मात देकर 67 वर्षीय महिला घर लौटी

    दूषित पानी और GBS सिंड्रोम को मात देकर 67 वर्षीय महिला घर लौटी


    इंदौर । इंदौर भागीरथपुरा की 67 वर्षीय पार्वती कोंडला ने एक ऐसा संघर्ष जीता जिसे देखकर डॉक्टर और परिजन दोनों हैरान हैं। दूषित पानी से फैलने वाले बैक्टीरिया के कारण उनके शरीर में गिलियन-बैरे सिंड्रोम  उत्पन्न हो गया जिसने उनकी नसों को प्रभावित कर लकवा पैदा कर दिया। इस दौरान 36 लोगों की मौत हुई लेकिन पार्वती ने 72 दिनों तक अस्पताल में जिंदगी के लिए जंग लड़ी और अंततः जीत हासिल की।

    28 दिसंबर को पार्वती के पति भेरूलाल कोंडला को उल्टी-दस्त की शिकायत हुई। शुरू में मामूली संक्रमण का अंदेशा था लेकिन जल्द ही दूषित पानी में मौजूद कैम्पीलोबैक्टर जेजुनी बैक्टीरिया ने उनके नर्वस सिस्टम पर हमला कर दिया। उसी दिन पार्वती को स्कीम 78 स्थित विवेक मेमोरियल अस्पताल में भर्ती किया गया। हालत बिगड़ने पर उन्हें आईसीयू में रेफर किया गया और फिर 2 जनवरी को बॉम्बे हॉस्पिटल में भर्ती किया गया।

    GBS सिंड्रोम में शरीर का इम्यून सिस्टम अपनी ही नसों को खत्म कर देता है। देखते ही देखते पार्वती का शरीर लकवाग्रस्त हो गया और किडनियों ने काम करना बंद कर दिया। डॉक्टरों ने शुरुआती तौर पर बचने की संभावना केवल 3-4 प्रतिशत बताई। इसके बाद उन्हें 16 दिन वेंटिलेटर और 22 दिन ICU में रखा गया। जब फेफड़ों ने साथ छोड़ दिया तो ट्रेकोस्टोमी कर गले में छेद बनाकर सांस लेने का रास्ता बनाया गया। 18 दिन तक पार्वती पूरी तरह बेहोश रहीं।

    भागीरथपुरा का यह मामला शासन की निगरानी में था। केंद्रीय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय कई बार अस्पताल पहुंचे और परिवार को ढांढस बंधाया कि वे किसी की बात की चिंता न करें। 72 दिनों के इलाज का खर्च लगभग 19.50 लाख रुपए शासन द्वारा कवर किया गया।

    48 दिन बाद पार्वती को HDU में रेफर किया गया और धीरे-धीरे स्वास्थ्य में सुधार हुआ। 6 मार्च को उनका ट्रेकोस्टोमी सिस्टम बंद किया गया और धीरे-धीरे लिक्विड डाइट शुरू की गई। 9 मार्च को उन्हें डिस्चार्ज किया गया। अब CMHO डॉ. माधव हसानी की टीम उनकी मॉनिटरिंग कर रही है।

    घर लौटने के बाद भी पार्वती की लड़ाई खत्म नहीं हुई। बेटे प्रदीप के अनुसार फिजियोथेरेपिस्ट केयर टेकर और दवाओं का खर्च महीने का 60-70 हजार रुपए आ रहा है। उन्हें दिन में 9 बार लिक्विड डाइट दी जाती है जिसमें 6 बार दूध और प्रोटीन और 3 बार अन्य लिक्विड ट्यूब के जरिए दिए जाते हैं।

    हालांकि घर आने के बाद उन्होंने हाथ उठाना और परिजनों को पहचान कर जवाब देना शुरू कर दिया है पर उनकी रिकवरी अभी भी चल रही है। प्रदीप ने कहा कि डॉक्टरों की मेहनत परिवार की श्रद्धा और मां की इच्छाशक्ति ने उन्हें मौत से वापस लौटाया।

    पार्वती की यह कहानी न सिर्फ जिंदगी की जंग जीतने का उदाहरण है बल्कि लोगों के लिए प्रेरणा भी है कि संकट और मुश्किलें कितनी भी बड़ी हों सही समय पर इलाज परिवार का सहयोग और मजबूत इच्छाशक्ति से हर चुनौती को पार किया जा सकता है।

  • भोपाल स्कूल में भय का माहौल, 600 से ज्यादा छात्र छोड़ चुके स्कूल

    भोपाल स्कूल में भय का माहौल, 600 से ज्यादा छात्र छोड़ चुके स्कूल


    भोपाल ।
    पंचशील नगर स्थित शासकीय नूतन सुभाष उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में छात्राओं और छात्रों के लिए सुरक्षा गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है। सालों से प्रतिष्ठित यह स्कूल अब असुरक्षा और भय के माहौल में संघर्ष कर रहा है। पहले यहां करीब 800 छात्र पढ़ते थे, लेकिन अब संख्या घटकर लगभग 200 रह गई है।

    स्कूल के आसपास नशाखोरों और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। छात्राएं और स्थानीय लोग बताते हैं कि रोजाना नशे में धुत लोग गेट के पास फब्तियां कसते हैं, आवाजें लगाते हैं और छेड़छाड़ करते हैं। छात्रा अनन्या ने बताया कि रास्ते में नशाखोरों की वजह से हर दिन डर के साए में गुजरता है। छात्रा निशा ने भी बताया कि कभी-कभी लड़के कमेंट पास करते हैं और एक बार तो बदतमीजी की कोशिश भी हुई, लेकिन शिक्षिका के आने पर वे भाग गए।

    छात्र शुभम ने बताया कि स्कूल में लगभग 40 दृष्टिहीन छात्र पढ़ते हैं, जो रोजाना 1 से 1.5 किमी पैदल आते हैं और कई बार बदसलूकी का सामना करते हैं। ऐसे माहौल में पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो गया है।

    स्कूल परिसर में भी सुरक्षा गंभीर समस्या बनी हुई है। प्रिंसिपल डॉ. अभिषेक बैस ने बताया कि एक साल पहले कुछ लोग स्कूल में घुसे और बाथरूम में एक व्यक्ति की हत्या कर शव जला दिया। यहां तलवार और महिलाओं के कपड़े भी मिल चुके हैं। कई बार स्कूल के गेट के ताले तोड़ दिए गए, बेंच उठाई या तोड़ी गईं, और छात्रों से चाकू दिखाकर पैसे लूटे गए।

    स्कूल के बाहर का माहौल भी भयावह है। मीट शॉप्स, बार्बर शॉप्स और शराब पीने वाले लोग स्कूल के पास जमा रहते हैं। केवल 100 मीटर के दायरे में पूरा क्षेत्र नशाखोरी का केंद्र बन चुका है। छात्राएं और महिलाएं स्वयं को असुरक्षित महसूस करती हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि अतिक्रमण और असामाजिक गतिविधियों के कारण स्कूल परिसर तक सुरक्षा की गंभीर कमी है।

    इस भयावह माहौल के कारण पिछले दो साल में 600 से ज्यादा छात्र-छात्राएं स्कूल छोड़ चुके हैं। छात्राओं की संख्या घटकर महज 12–15 रह गई है। जो बच्चे आते हैं, उनका ध्यान पढ़ाई पर कम और सुरक्षा पर ज्यादा रहता है।

    पुलिस ने कहा है कि क्षेत्र स्लम है और यहां असामाजिक गतिविधियां होती रहती हैं। टीटी नगर थाना प्रभारी गौरव सिंह ने बताया कि पेट्रोलिंग बढ़ाई गई है और स्कूल प्रबंधन को संपर्क नंबर दिए गए हैं। हालांकि, अभिभावक और शिक्षक मानते हैं कि मौखिक शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

    प्रिंसिपल बैस का कहना है कि कभी प्रतिष्ठित रहा यह स्कूल अब अपनी पहचान बचाने की लड़ाई लड़ रहा है। शराबी और असामाजिक तत्व दिन और रात परिसर में घुस आते हैं। शिकायतें विधायक, कलेक्टर और मुख्यमंत्री तक पहुंच चुकी हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।

    यह स्थिति स्कूल के अस्तित्व और छात्रों की सुरक्षा पर सीधा असर डाल रही है। अभिभावक डरते हैं कि यदि उन्होंने स्कूल की स्थिति उजागर की तो बच्चों को स्कूल से हटवा दिया जाएगा। ऐसे में पढ़ाई और सुरक्षित शिक्षा का अधिकार गंभीर संकट में है।

  • महाकाल के दरबार पहुंची एक्ट्रेस कावेरी प्रियम, भस्म आरती में शामिल हुईं, बोलीं- यहां की ऊर्जा है अलौकिक

    महाकाल के दरबार पहुंची एक्ट्रेस कावेरी प्रियम, भस्म आरती में शामिल हुईं, बोलीं- यहां की ऊर्जा है अलौकिक


    उज्जैन। उज्‍जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के भस्म आरती के दौरान टीवी और फिल्म एक्ट्रेस कावेरी प्रियम भगवान महाकाल के दर्शन करने पहुंचीं। सुबह करीब 4 बजे उन्होंने आरती में भाग लिया और नंदी हॉल में बैठकर इस दिव्य अनुष्ठान का अनुभव किया। आरती के बाद उन्होंने मंदिर की देहरी से भगवान महाकाल को जल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

    ‘भस्म आरती में मिलती है अद्भुत ऊर्जा’


    दर्शन के बाद कावेरी प्रियम ने अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा कि बाबा महाकाल के दरबार की शक्ति को शब्दों में व्यक्त करना आसान नहीं है। उन्होंने बताया, “मैं पिछले तीन वर्षों से यहां लगातार आ रही हूं। भस्म आरती के समय जो ऊर्जा महसूस होती है, वह सच में अद्भुत और अलौकिक है।”

    टीवी से फिल्मों तक बनाया खास मुकाम


    कावेरी प्रियम ने अपने करियर की शुरुआत टीवी शो नागिन 2 में बीके के किरदार से की थी। इसके बाद उन्होंने ये रिश्ते हैं प्यार के में कुहू माहेश्वरी राजवंश और जिद्दी दिल माने ना में डॉ. मोनामी महाजन की भूमिका निभाकर दर्शकों के बीच पहचान बनाई। फिल्मों में उन्होंने तिश्नगी से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की।
  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने माखनलाल चतुर्वेदी की जयंती पर किया पुण्य स्मरण

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने माखनलाल चतुर्वेदी की जयंती पर किया पुण्य स्मरण


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के गौरव पत्रकारिता जगत के नक्षत्र माखनलाल चतुर्वेदी की जयंती पर उन्हें नमन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि माखनलाल चतुर्वेदी की कृतियां आज भी समाज और राष्ट्र के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उनके लेखन और चिंतन ने न केवल पत्रकारिता की दुनिया में नया मार्ग प्रशस्त किया बल्कि समाज के नवनिर्माण और लोक कल्याण के संदेश भी दिए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विशेष रूप से यह कहा कि माखनलाल चतुर्वेदी के प्रखर विचार और गहन चिंतन उनके समय के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए भी मार्गदर्शक सिद्ध होंगे। उनके योगदान और राष्ट्रसेवा का प्रभाव अनंतकाल तक अविस्मरणीय रहेगा।

    माखनलाल चतुर्वेदी जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में क्रांतिकारी माना जाता है ने अपने लेखन और समाजसेवा के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रनिर्माण में अमूल्य योगदान दिया। उनके विचार और दृष्टिकोण आज भी पत्रकारिता साहित्य और समाज सेवा के क्षेत्र में आदर्श माने जाते हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अवसर पर सभी नागरिकों को प्रेरणा लेनी चाहिए कि वे समाज और राष्ट्र की भलाई के लिए अपने कर्तव्यों का पालन करें। माखनलाल चतुर्वेदी का जीवन यह दिखाता है कि साहसिक विचार और समाजहित में समर्पण किसी भी समय प्रासंगिक और प्रभावशाली हो सकता है।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पत्रकारिता जगत और आम नागरिकों से अपील की कि वे उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करें। उनके विचारों और लेखों का अध्ययन कर आने वाली पीढ़ी न केवल पत्रकारिता की उत्कृष्टता सीख सकती है बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी समझ सकती है।

    इस प्रकार माखनलाल चतुर्वेदी की जयंती पर मुख्यमंत्री द्वारा किया गया पुण्य स्मरण न केवल उनके योगदान को याद करने का अवसर है बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा स्रोत भी है। उनके आदर्श और समाज के प्रति समर्पण आज भी लोगों को सामाजिक चेतना और राष्ट्रसेवा की ओर अग्रसरित करते हैं।

  • बैंक घोटाले पर कसा शिकंजा सोनी इस्पात लिमिटेड डायरेक्टर गिरफ्तार दो आरोपी फरार

    बैंक घोटाले पर कसा शिकंजा सोनी इस्पात लिमिटेड डायरेक्टर गिरफ्तार दो आरोपी फरार

    जबलपुर । मध्यप्रदेश के जबलपुर में केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने करोड़ों रुपए के बैंक घोटाले के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए सोनी इस्पात लिमिटेड के डायरेक्टर राजीव लोचन सोनी को गिरफ्तार कर लिया है आरोपी को इंदौर से पकड़ा गया जहां वह जांच एजेंसी की नजर में था इस गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर बैंकिंग सिस्टम में फर्जीवाड़े और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं

    जांच एजेंसियों के अनुसार राजीव लोचन सोनी ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए भारतीय स्टेट बैंक से करीब 13 करोड़ रुपए का लोन हासिल किया था यह लोन वर्ष 2006 से 2011 के बीच कंपनी के नाम पर लिया गया था आरोप है कि लोन लेने के दौरान दस्तावेजों में गलत जानकारी दी गई और नियमों का उल्लंघन किया गया बाद में यह लोन खाता एनपीए घोषित हो गया जिससे बैंक को भारी आर्थिक नुकसान हुआ

    मामले की शुरुआत तब हुई जब बैंक ने अपने स्तर पर खाते की समीक्षा की और अनियमितताएं सामने आईं इसके बाद वर्ष 2022 में एसबीआई के क्षेत्रीय प्रबंधक ने इस पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई जिसके आधार पर सीबीआई ने केस दर्ज कर जांच शुरू की जांच के दौरान कई अहम तथ्य सामने आए जिनसे यह स्पष्ट हुआ कि लोन प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी की गई थी

    सीबीआई ने इस मामले में राजीव लोचन सोनी के अलावा विजय सोनी और जगदीश चन्द्र सारंग को भी आरोपी बनाया है हालांकि फिलहाल राजीव लोचन की गिरफ्तारी हो चुकी है जबकि अन्य दोनों आरोपी अभी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है जांच एजेंसी संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा

    गिरफ्तारी के बाद राजीव लोचन सोनी से पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस घोटाले में और कौन लोग शामिल थे और किस स्तर पर मिलीभगत हुई थी ऐसे मामलों में अक्सर कई स्तरों पर साजिश और सहयोग की परतें सामने आती हैं इसलिए जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना है

    यह मामला सिर्फ एक कंपनी या व्यक्ति तक सीमित नहीं है बल्कि यह पूरे वित्तीय तंत्र के लिए चेतावनी है कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे बड़े लोन हासिल करना और फिर उसे चुकाए बिना छोड़ देना किस तरह बैंकिंग व्यवस्था को नुकसान पहुंचाता है ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई ही भविष्य में इस तरह के अपराधों पर रोक लगा सकती है

    सीबीआई की यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत देती है कि आर्थिक अपराधों के खिलाफ एजेंसियां सक्रिय हैं और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं जो इस घोटाले की परतें और खोल सकते हैं

  • हादसे ने लिया उग्र रूप युवक की मौत के बाद पथराव और आगजनी से हाईवे पर हड़कंप

    हादसे ने लिया उग्र रूप युवक की मौत के बाद पथराव और आगजनी से हाईवे पर हड़कंप


    उज्जैन । मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले में एक सड़क हादसा उस समय हिंसक रूप ले बैठा जब एक युवक की मौत के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने जमकर हंगामा कर दिया घटना गरोठ नेशनल हाईवे पर बीती रात की है जहां दिल्ली से उज्जैन महाकाल दर्शन के लिए आ रही एक मिनी बस और ट्रैक्टर के बीच जोरदार टक्कर हो गई इस हादसे में 21 वर्षीय युवक विजय सोलंकी की दर्दनाक मौत हो गई जबकि चार अन्य लोग घायल हो गए जिनमें से दो की हालत गंभीर बताई जा रही है

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मिनी बस तेज रफ्तार में थी और तुलाहेड़ा टोल प्लाजा के पास उसने ट्रैक्टर को पीछे से टक्कर मार दी टक्कर इतनी भीषण थी कि ट्रैक्टर पलट गया और विजय सोलंकी उसके नीचे दब गया बताया जा रहा है कि वह करीब एक घंटे तक ट्रैक्टर के नीचे फंसा रहा और समय पर राहत नहीं मिलने के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई इस हादसे में उसका साथी राजेश शर्मा गंभीर रूप से घायल हो गया वहीं बस चालक शिवकुमार और यात्री बॉबी व धर्मेंद्र कुमार भी घायल हुए हैं गंभीर घायलों को निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया है

    हादसे के बाद जैसे ही युवक की मौत की खबर गांव में फैली लोगों में आक्रोश फैल गया बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और उन्होंने मिनी बस पर पथराव शुरू कर दिया देखते ही देखते गुस्सा इतना बढ़ गया कि बस में आग लगा दी गई आग इतनी तेजी से फैली कि पूरी बस और उसमें रखा यात्रियों का सामान जलकर खाक हो गया हालांकि राहत की बात यह रही कि सभी यात्री समय रहते बस से बाहर निकल गए और उनकी जान बच गई बाद में उन्हें अन्य वाहनों के जरिए उज्जैन रवाना किया गया

    घटना के बाद ग्रामीणों ने हाईवे पर चक्काजाम कर दिया और टोल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की उनका आरोप था कि टोल प्लाजा पर मौजूद कर्मचारियों की लापरवाही के कारण राहत कार्य में देरी हुई और यदि समय पर मदद मिल जाती तो विजय सोलंकी की जान बचाई जा सकती थी इस आरोप ने स्थिति को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया

    सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को काबू में करने की कोशिश की भारी पुलिस बल तैनात किया गया और समझाइश के बाद जाम खुलवाया गया प्रशासन ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है

    यह घटना न केवल एक सड़क हादसे की त्रासदी को दर्शाती है बल्कि यह भी बताती है कि समय पर राहत और जिम्मेदारी की कमी कैसे हालात को और बिगाड़ सकती है एक तरफ जहां एक युवक की मौत ने परिवार को गहरे दुख में डाल दिया वहीं दूसरी ओर गुस्से की आग ने एक और नुकसान की तस्वीर सामने ला दी अब देखना होगा कि जांच के बाद सच्चाई क्या सामने आती है और जिम्मेदारी तय होती है या नहीं

  • TET नियम पर सियासत तेज दिग्विजय सिंह ने CM मोहन यादव को लिखा पत्र लाखों शिक्षकों को राहत की मांग

    TET नियम पर सियासत तेज दिग्विजय सिंह ने CM मोहन यादव को लिखा पत्र लाखों शिक्षकों को राहत की मांग


    भोपाल । मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है इस मुद्दे ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है जब पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर इस नियम पर दोबारा विचार करने की मांग की है उन्होंने अपने पत्र में स्पष्ट तौर पर कहा है कि यह निर्णय लाखों शिक्षकों के भविष्य को प्रभावित कर रहा है इसलिए सरकार को संवेदनशीलता के साथ इस पर पुनर्विचार करना चाहिए

    दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में इस बात पर जोर दिया कि TET की अनिवार्यता को भूतलक्षी यानी पिछली तारीख से लागू करना न्यायसंगत नहीं है उन्होंने सुझाव दिया कि इसे भविष्यलक्षी प्रभाव से लागू किया जाना चाहिए ताकि पहले से कार्यरत शिक्षकों पर अचानक कोई अतिरिक्त बोझ न पड़े उनका कहना है कि जिन शिक्षकों ने वर्षों पहले नियुक्ति पाई है और लंबे समय से सेवा दे रहे हैं उनके लिए नए नियमों को अचानक लागू करना असमानता पैदा करता है

    इस फैसले के बाद राज्यभर में दो लाख से अधिक शिक्षकों के बीच चिंता का माहौल बन गया है खासतौर पर वे शिक्षक जो वर्ष 2009 से पहले नियुक्त हुए थे और जिनकी सेवा अवधि में अभी पांच साल से अधिक का समय शेष है उन्हें अब TET परीक्षा देना अनिवार्य किया गया है ऐसे में कई शिक्षकों को अपनी नौकरी और भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है

    दिग्विजय सिंह ने सरकार से यह भी मांग की है कि इस पूरे मामले में रिव्यू या क्यूरेटिव पिटीशन दायर करने पर विचार किया जाए ताकि न्यायिक स्तर पर भी इस मुद्दे का समाधान निकल सके उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि अंतिम निर्णय आने तक TET की अनिवार्यता को स्थगित रखा जाए ताकि शिक्षकों को मानसिक और पेशेवर दबाव से राहत मिल सके

    इस मुद्दे ने शिक्षा व्यवस्था के भीतर कई सवाल खड़े कर दिए हैं एक तरफ सरकार गुणवत्ता और मानकों को बेहतर बनाने की दिशा में कदम उठा रही है वहीं दूसरी ओर लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नीति को लागू करते समय संतुलन और व्यावहारिकता बेहद जरूरी होती है ताकि सुधार के प्रयासों का असर नकारात्मक न पड़े

    फिलहाल सभी की नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस मांग पर किस तरह प्रतिक्रिया देती है और क्या शिक्षकों को किसी तरह की राहत मिलती है या नहीं यह मुद्दा आने वाले समय में और ज्यादा चर्चा का विषय बन सकता है क्योंकि इससे सीधे तौर पर शिक्षा व्यवस्था और लाखों परिवारों का भविष्य जुड़ा हुआ है

  • तेज रफ्तार का कहर नर्मदापुरम हाईवे पर खड़े ट्रक से भिड़ी कार दो की दर्दनाक मौत

    तेज रफ्तार का कहर नर्मदापुरम हाईवे पर खड़े ट्रक से भिड़ी कार दो की दर्दनाक मौत


    नर्मदापुरम । मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले में नेशनल हाईवे 46 पर शनिवार तड़के एक दर्दनाक सड़क हादसे ने दो परिवारों को गहरे शोक में डुबो दिया सुबह करीब चार बजे हुई इस भीषण दुर्घटना में तेज रफ्तार कार सड़क किनारे खड़े ट्रक से पीछे से जा टकराई टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया

    प्राप्त जानकारी के अनुसार कार नागपुर के हिंगनघाट क्षेत्र से शाजापुर जिले के बेरछा गांव की ओर जा रही थी वाहन में तीन लोग सवार थे जो अपने परिचित के घर जा रहे थे लेकिन रास्ते में नर्मदापुरम के निटाया क्षेत्र के पास यह हादसा हो गया बताया जा रहा है कि कार तेज रफ्तार में थी और चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका जिसके चलते कार सीधे सड़क किनारे खड़े ट्रक में पीछे से घुस गई

    हादसा इतना भीषण था कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें बैठे लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला मौके पर ही विशाल बाड़कुरे निवासी हिंगनघाट नागपुर और ज्ञान सिंह मासोध निवासी बैतूल की मौत हो गई दोनों की मौत की खबर मिलते ही उनके परिवारों में कोहराम मच गया वहीं तीसरा युवक रूपेश गहलोत गंभीर रूप से घायल हो गया जिसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया

    घटना की सूचना मिलते ही इटारसी से 108 एम्बुलेंस मौके पर पहुंची आपातकालीन सेवा के कर्मचारियों ने बिना समय गंवाए राहत और बचाव कार्य शुरू किया ईएमटी विसराम अहिरवार ने घायल रूपेश को मौके पर प्राथमिक उपचार दिया जिससे उसकी स्थिति कुछ हद तक स्थिर हो सकी इसके बाद एम्बुलेंस पायलट प्रशांत ने तेजी दिखाते हुए उसे सरकारी अस्पताल नर्मदापुरम पहुंचाया जहां उसका इलाज जारी है और डॉक्टर उसकी हालत पर लगातार नजर बनाए हुए हैं

    हादसे के बाद पुलिस भी तुरंत मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है साथ ही दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है प्रारंभिक तौर पर तेज रफ्तार और वाहन पर नियंत्रण खोना हादसे की मुख्य वजह मानी जा रही है

    यह हादसा एक बार फिर तेज रफ्तार के खतरों की ओर इशारा करता है खासकर हाईवे पर जहां थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है सड़क किनारे खड़े वाहनों से टकराव के कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं लेकिन इसके बावजूद सावधानी बरतने में अक्सर चूक हो जाती है

    नर्मदापुरम का यह हादसा न केवल एक दुखद घटना है बल्कि यह एक गंभीर चेतावनी भी है कि यात्रा के दौरान सतर्कता और गति नियंत्रण कितना जरूरी है जरा सी जल्दबाजी कई जिंदगियों को हमेशा के लिए बदल सकती है