Category: Madhya Pradesh

  • भोपाल में पहली बार फेमिना मिस इंडिया 2026 का ग्रैंड फिनाले, सिवनी की धनुश्री चौहान बनीं विजेता

    भोपाल में पहली बार फेमिना मिस इंडिया 2026 का ग्रैंड फिनाले, सिवनी की धनुश्री चौहान बनीं विजेता


    भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में एक ऐतिहासिक और रोमांचक शाम देखने को मिली जब फेमिना मिस इंडिया2026 का राज्य स्तरीय ग्रैंड फिनाले पहली बार आयोजित हुआ। यह प्रतिष्ठित प्रतियोगिता 19 फरवरी 2026 को मिंटो हॉल में आयोजित हुई जिसमें पूरे प्रदेश से चयनित 16 प्रतिभागियों ने अपने हुनर आत्मविश्वास और पर्सनैलिटी से मुक़ाबला किया। इस पहले आयोजन से मध्यप्रदेश के युवाओं के लिए बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला।

    इस ग्लैमरस प्रतियोगिता में सिवनी जिले की धनुश्री चौहान ने शानदार प्रस्तुति देकर विजेता का खिताब अपने नाम किया। धनुश्री ने अपनी ग्रेस बुद्धिमत्ता और आकर्षक पर्सनैलिटी के दम पर निर्णायकों को प्रभावित किया और प्रदेश की प्रतिनिधि बनने का गौरव हासिल किया। उन्होंने कहा है कि वह न केवल भोपाल या मध्यप्रदेश बल्कि पूरे प्रदेश का नाम राष्ट्रीय मंच पर रोशन करेंगी।

    इस आयोजन की खास बात थी इसकी थीम सस्टेनेबिलिटी फर्स्ट ज़ीरो वेस्ट इवेंट सका उद्देश्य पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और एक साफसुथरा जिम्मेदार कार्यक्रम पेश करना था। इस थीम के अंतर्गत कार्यक्रम में कमी से कम बर्बादी करने और इकोफ्रेंडली प्रथाओं को अपनाने पर जोर दिया गया जो femina ब्रांड की नई दिशा को दर्शाता है।

    प्रतियोगिता में प्रारंभिक राउंड के लिए लगभग 150 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया था। विभिन्न राउंड के बाद श्रेष्ठ 16 को चुना गया और उन्होंने रैंप वॉक पब्लिक स्पीकिंग और टैलेंट राउंड में हिस्सा लिया। निर्णायकों ने उनकी प्रतिभा आत्मविश्वास और व्यक्तित्व के आधार पर विजेता का चयन किया।

    इस कार्यक्रम में फेमिना मिस इंडिया वर्ल्ड2024 की विजेता और खुद मध्यप्रदेश की बेटी निकिता पोरवाल नई विजेता धनुश्री को ताज पहनाया। यह पल स्थानीय युवाओं के लिए गर्व का क्षण था क्योंकि प्रदेश की बेटी ने अपने काम और प्रतिभा से यह प्रतिष्ठित मुकाम हासिल किया।

    धनुश्री की यह विजय सिवनी और मध्यप्रदेश के लिए गर्व की बात है। उनकी कहानी युवा महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है जो साबित करती है कि मेहनत आत्मविश्वास और समर्पण के साथ सपनों को हकीकत में बदला जा सकता है। इस प्रतिस्पर्धा से मध्यप्रदेश की युवा प्रतिभाओं को ब्यूटी टैलेंट और सामाजिक जिम्मेदारी को एक साथ प्रदर्शित करने का बेहतरीन मंच मिला है।

    अब धनुश्री चौहान राष्ट्रीय स्तर पर Femina Miss India 2026 प्रतियोगिता में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व करेंगी जहां वे देश भर की अन्य राज्य विजेताओं के साथ मुकाबला करेंगी और भारत के प्रतिष्ठित मंच पर अपनी पहचान बनाने का प्रयास करेंगी।

  • मध्य प्रदेश विधानसभा बजट सत्र2026: भागीरथपुरा दूषित पानी मामले पर स्थगन प्रस्ताव पर आज चर्चा, सियासी गरमाहट जारी

    मध्य प्रदेश विधानसभा बजट सत्र2026: भागीरथपुरा दूषित पानी मामले पर स्थगन प्रस्ताव पर आज चर्चा, सियासी गरमाहट जारी


    भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा बजट सत्र दौरान आज सदन में इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल और उससे हुए लोगों की मौत का मामला फिर से चर्चा में है। यह मुद्दा पहले भी बजट सत्र के दौरान उठाया जा चुका है और विपक्ष स्थगन प्रस्ताव पर विस्तृत बहस की मांग कर रहा है।

    भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने की वजह से कई लोगों को स्वास्थ्य समस्याएं हुईं और कई की मौत भी हुई जिससे स्थानीय लोग और विपक्ष दोनों ही सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत आधा दर्जन से अधिक कांग्रेस विधायक स्थगन प्रस्ताव के दौरान अपनी बात रखेंगे। इस मुद्दे पर विपक्ष ने पहले भी जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था और संसद में इसे गंभीर विषय के रूप में उठाया।

    विपक्ष का आरोप है कि इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल की आपूर्ति से बच्चों और बड़ों समेत अनेक लोगों को एक्यूट डायरिया जैसी बीमारी हुई जिसके चलते कम से कम 22 लोगों की मौत हुई है और कई दर्जन लोग अस्पताल में भर्ती रहे। कांग्रेस ने इसे सिस्टम की विफलता बताया और इसके लिए मंत्रियों की इस्तीफा की मांग भी की।

    सांसदों ने कहा कि दूषित पानी मामले को विस आवाज़ में उठाने के लिए स्थगन प्रस्ताव जरूरी है ताकि पूरे मुद्दे पर विस्तार से बहस हो और जवाबदेही तय की जा सके। विपक्ष ने तर्क दिया कि सरकार की तत्काल प्रतिक्रिया और पीड़ितों को दी गई मुआवजे की राशि अपर्याप्त है जबकि जिम्मेदार अधिकारियों और प्रतिनिधियों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

    सरकार की ओर से जवाब में कहा गया है कि इस मामले को गंभीरता से लिया गया है। स्वास्थ्य और नगर प्रशासन विभागों ने घटनास्थल पर कार्यवाही की है और दोषी अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मामला राजनीति से ऊपर है और पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने सहित राहत कार्य किये जा रहे हैं।

    सदन में इस मुद्दे को लेकर कई बार कार्यवाही स्थगित भी हुई क्योंकि विपक्ष ने इसे व्यापक रूप से उठाने की मांग की है। कांग्रेस ने दावा किया कि दूषित पानी से मरने वालों की संख्या आधिकारिक आंकड़ों से कहीं ज़्यादा हो सकती है और सरकार की जवाबदेही तय किये बिना इस मुद्दे पर आगे नहीं बढ़ा जाये।

    राज्यसभा में नेताओं ने जोर देकर कहा है कि सदी में स्वच्छ भारत की बात करते हुए यदि नागरिकों को सुरक्षित पीने का पानी न मिल रहा हो तो यह गंभीर समस्या है जिसे जल्द ही नीति स्तर पर भी संबोधित किया जाना चाहिए। स्थगन प्रस्ताव पर आज होने वाली चर्चा इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

  • नया मोड़: नर्मदापुरम में कॉलेज प्रिंसिपल से 1 करोड़ की ठगी मामले में एक और पीड़ित सामने, कहा गोल्ड का लालच देकर 15 लाख ठगे

    नया मोड़: नर्मदापुरम में कॉलेज प्रिंसिपल से 1 करोड़ की ठगी मामले में एक और पीड़ित सामने, कहा गोल्ड का लालच देकर 15 लाख ठगे


    नर्मदापुरम । मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम होशंगाबाद में डोलरिया के एक शासकीय कॉलेज के प्रिंसिपल के साथ हुई करोड़ों की धोखाधड़ी मामले में नया मोड़ सामने आया है। पहले प्राचार्य से लगभग ₹1 करोड़ 4 लाख की ठगी का केस सामने आया था जिस पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया है। अब एक और व्यक्ति पीड़ित बनकर थाने पहुंचा है और उसने भी आरोप लगाया है कि इसी आरोपी ने उससे ₹15 लाख ग़लत ढंग से लेकर ठगी की है।
    पहले मामले में प्राचार्य राकेश कुमार वर्मा को उनके ही ड्राइवर अंकित शर्मा ने गड़ी पड़ी सोने की पोटली का झांसा देकर झांसा दिया था। आरोपी ने कहा कि प्राचार्य के घर के नीचे जमीन में सोना दफन है जिससे वह डर गया और आरोपी को नकद ट्रांजैक्शन और गोल्ड लोन के माध्यम से 1 करोड़ 4 लाख रुपए दे दिए। बाद में पता चलने पर प्राचार्य ने शिकायत दर्ज कराई और पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था।
    अब एक नया पीड़ित अमित तिवारी पुलिस स्टेशन पहुंचा है और उसने बताया कि आरोपी ने पहले उसके साथ दोस्ती बढ़ाई फिर उसे अपना जीजा बताया और धीरे-धीरे ₹15 लाख ऐंठ लिए। उसने कहा कि आरोपी ने उसे एक बॉक्स दिखाया जिसमें उसने सोना होने का झांसा दिया लेकिन असल में उस बॉक्स में सिर्फ लोहे के टुकड़े थे जिन पर सोने जैसा रंग और सिंदूर लगा था। इसी लालच में तिवारी ने करीब ₹10 लाख का लोन लिया कुछ नकद दिए और अपनी गाड़ी बेचकर बाकी रकम दी।
    तिवारी ने बताया कि आरोपी का तौर-तरीका यही था कि पहले रिश्ता बनाता फिर पैसे उधार लेता और फिर लालच देकर वापस लेता रहता था। उसने कहा कि आरोपी की पत्नी और मां भी इस ठगी में शामिल थी और उन्होंने सहायता का भरोसा दिलाया कि सोना बेचकर पैसे लौटाए जाएंगे।

    थाना प्रभारी कंचन ठाकुर ने पुष्टि की है कि आरोपी को पहले ही गिरफ्तार किया गया था और उसके कब्जे से एक स्कॉर्पियो वाहन एक बुलेट मोटरसाइकिल लगभग 30 ग्राम सोना और कुछ नकद पैसे भी जब्त किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपी लोगों को गोल्ड के लालच में पैसे ऐंठ कर फिर उन्हें धोखा देता था। इसके अलावा उसने धोखाधड़ी से प्राप्त पैसों से कुछ प्रॉपर्टी भी खरीदी थी जिनके दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं।

    अब पुलिस तिवारी की शिकायत पर भी जांच कर रही है। मामले की जांच आगे बढ़ाई जाएगी और जो तथ्य सामने आएंगे उनके आधार पर आगे आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला एक बार फिर यह दिखाता है कि कैसे लालच और धोखे की साजिश में लोग आसानी से फँस सकते हैं चाहे वे शिक्षित हों या साबित पद पर हों और किस प्रकार अपराधी अपनी चालाकी से बड़ा आर्थिक नुकसान करवा देते हैं।

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बेमौसम बारिश से फसलें बर्बाद होने पर उठे सवाल पर सरकार को किया ज़िम्मेदार सर्वे और मुआवजे का आश्वासन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बेमौसम बारिश से फसलें बर्बाद होने पर उठे सवाल पर सरकार को किया ज़िम्मेदार सर्वे और मुआवजे का आश्वासन


    भोपाल। मध्य प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से अचानक बदला मौसम किसानों के लिए गंभीर चिंता का कारण बन गया है। तेज बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के चलते राज्य के कई जिलों में गेहूं चना लहसुन समेत कई रबी फसलों को भारी नुकसान हुआ है जिससे अन्नदाताओं में भारी मायूसी और परेशानी का माहौल है। समस्या इतनी गंभीर हो गई कि इसे मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में भी उठाया गया।

    उज्जैन जिले में लगातार दूसरे दिन बारिश ने तबाही मचाई। नागदा खाचरोद उन्हेल और महिदपुर तहसीलों में तेज बारिश और ओलावृष्टि से खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान हुआ है। पारा गिरने और मौसम में बदलाव के कारण किसानों के चेहरे पर निराशा साफ़ देखी जा रही है।

    रतलाम धार और शुजालपुर सहित अन्य जिलों में भी फसलें बर्बाद हुई हैं। रतलाम में कृषि क्षेत्र में लगभग 50% के आसपास नुकसान का अनुमान है जिसमें गेहूं चना और लहसुन शामिल हैं। नगरा और कांडरवासा जैसे इलाकों में किसान खासा प्रभावित हुए हैं। धार और शुजालपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में भी अति बारिश के कारण गेहूं और अन्य रबी फसलें बुरी तरह खराब हो गई हैं।

    इस गंभीर विषय को विधानसभा में भी उठाया गया। बजट सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने कहा कि पिछले दो दिनों में प्रदेशभर में हुई बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को व्यापक नुकसान हुआ है और तुरंत सर्वे कर मुआवजा दिया जाना चाहिए। इस पर सरकार ने जवाब दिया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पहले ही सभी कलेक्टर्स को प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे करने के निर्देश दे दिए हैं।

    सरकार ने कहा कि तहसीलदार और पटवारियों को खेतों में जाकर नुकसान का आकलन करने का आदेश दिया गया है। प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए सर्वे के आधार पर मुआवजा राशि दी जाएगी जिसमें अगर नुकसान 50% से अधिक पाया जाता है तो 32 000 रुपये और 50% से कम होने पर 16 000 रुपये तक का मुआवजा दिया जाएगा। इससे पहले भी सरकार ने सोयाबीन नुकसान पर 2 000 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की थी।

    मौसम विभाग ने भी चेतावनी दी है कि 23–24 फरवरी को फिर बारिश हो सकती है जिससे पहले से ही क्षतिग्रस्त फसलों के लिए और जोखिम बढ़ सकता है। तेज हवाओं ओलावृष्टि और बरसात से खेतों में खड़ी फसलें दब गई हैं और कृषि उत्पादन पर इसका नकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।

    किसानों ने प्रशासन से अपेक्षा जताई है कि सर्वे में निष्पक्षता बरती जाए और उन्हें समय पर मुआवजा दिया जाए ताकि बेमौसम बारिश से हुई क्षति का आर्थिक बोझ कम हो सके। कृषि और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमें प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर नुकसान का आकलन कर रही हैं और जल्द रिपोर्ट तैयार करने का आश्वासन दिया गया है।

    यह स्थिति यह भी दर्शाती है कि बदलते मौसम के पैटर्न से किसानों की खेती अहम है खासकर जब किसान पहले से ही मौसम-संवेदनशील खेती के दबाव में हैं।पर कितना सीधा प्रभाव पड़ता है और समय रहते राहत उपाय तथा सरकारी सहायता की आवश्यकता कितनी

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम के स्थापना दिवस पर प्रदेशवासियों को दी बधाई

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम के स्थापना दिवस पर प्रदेशवासियों को दी बधाई

    भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम के 39वें स्थापना दिवस के अवसर पर दोनों राज्यों के प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में दोनों राज्यों की समृद्धि और विकास की कामना की।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश, जो प्रकृतिक सौंदर्य, विविध संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं से परिपूर्ण है, निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहे और विकसित भारत के संकल्प को सशक्त रूप से आगे बढ़ाए। उन्होंने यह भी शुभकामना जताई कि अरुणाचल प्रदेश की युवा शक्ति और सांस्कृतिक विरासत राज्य को नई ऊँचाइयों तक ले जाए।

    साथ ही मुख्यमंत्री ने मिजोरम की बात करते हुए कहा कि यह राज्य अपने समृद्ध सांस्कृतिक विविधता और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मिजोरम हमेशा के लिए शांति, खुशहाली और विकास के नए आयाम स्थापित करता रहे। 20 फरवरी 1987 को, दोनों ही पूर्वोत्तर के राज्य अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला था। इससे पहले ये दोनों इलाके केंद्र शासित प्रदेश के रूप में शासनाधीन थे। इस बदलाव के साथ ही दोनों राज्यों ने भारतीय संघ के 23वें और 24वें राज्य के रूप में अपनी पहचान बनाई।

    अरुणाचल प्रदेश को उगते सूरज की भूमि के रूप में भी जाना जाता है और इसका नाम अरुणाचल सूर्य की किरणों से आलोकित पहाड़ियों के कारण पड़ा है। यह राज्य भारतीय संविधान के 55वें संशोधन के बाद 20 फरवरी 1987 को आधिकारिक तौर पर 24वें राज्य के रूप में स्थापित हुआ।  मिजोरम का इतिहास भी इसी दिन से जुड़ा हुआ है। पहले यह लुशाई हिल्स के नाम से असम का हिस्सा था और 1972 में इसे एक केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। अगले दशक में बातचीत औरसंविधान संशोधन के माध्यम से इसे 20 फरवरी 1987 को 23वें राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के बधाई संदेश ने एकता, सद्भाव और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना को भी उजागर किया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि दोनों राज्यों की संस्कृतियां और परंपराएँ समृद्ध होती रहें और ये राष्ट्र के उन्नयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहें।
     
    स्थापना दिवस का समारोह प्रत्येक वर्ष बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है, जिसमें सांस्कृतिक कार्यक्रम, ध्वजारोहण, और स्थानीय जनमानस के बीच उत्सव की भावना देखने को मिलती है। यह दिन राज्य की पहचान, उपलब्धियों और सामाजिक-आर्थिक विकास का प्रतीक है।  मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम के 39वें स्थापना दिवस के अवसर पर दोनों राज्यों के प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में दोनों राज्यों की समृद्धि और विकास की कामना की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश, जो प्रकृतिक सौंदर्य, विविध संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं से परिपूर्ण है, निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहे और विकसित भारत के संकल्प को सशक्त रूप से आगे बढ़ाए। उन्होंने यह भी शुभकामना जताई कि अरुणाचल प्रदेश की युवा शक्ति और सांस्कृतिक विरासत राज्य को नई ऊँचाइयों तक ले जाए। साथ ही मुख्यमंत्री ने मिजोरम की बात करते हुए कहा कि यह राज्य अपने समृद्ध सांस्कृतिक विविधता और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मिजोरम हमेशा के लिए शांति, खुशहाली और विकास के नए आयाम स्थापित करता रहे।

    20 फरवरी 1987 को, दोनों ही पूर्वोत्तर के राज्य अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला था। इससे पहले ये दोनों इलाके केंद्र शासित प्रदेश के रूप में शासनाधीन थे। इस बदलाव के साथ ही दोनों राज्यों ने भारतीय संघ के 23वें और 24वें राज्य के रूप में अपनी पहचान बनाई। अरुणाचल प्रदेश को उगते सूरज की भूमि के रूप में भी जाना जाता है और इसका नाम अरुणाचल सूर्य की किरणों से आलोकित पहाड़ियों के कारण पड़ा है। यह राज्य भारतीय संविधान के 55वें संशोधन के बाद 20 फरवरी 1987 को आधिकारिक तौर पर 24वें राज्य के रूप में स्थापित हुआ।

    मिजोरम का इतिहास भी इसी दिन से जुड़ा हुआ है। पहले यह लुशाई हिल्स के नाम से असम का हिस्सा था और 1972 में इसे एक केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। अगले दशक में बातचीत और संविधान संशोधन के माध्यम से इसे 20 फरवरी 1987 को 23वें राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के बधाई संदेश ने एकता, सद्भाव और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना को भी उजागर किया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि दोनों राज्यों की संस्कृतियां और परंपराएँ समृद्ध होती रहें और ये राष्ट्र के उन्नयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहें।

    स्थापना दिवस का समारोह प्रत्येक वर्ष बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है, जिसमें सांस्कृतिक कार्यक्रम, ध्वजारोहण, और स्थानीय जनमानस के बीच उत्सव की भावना देखने को मिलती है। यह दिन राज्य की पहचान, उपलब्धियों और सामाजिक-आर्थिक विकास का प्रतीक है।

  • समाज के रक्त में लोकतंत्र है, उसे दबाने की कोशिश करने वाला मिट्टी में मिल जाएगाः भैयाजी जोशी

    भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश जोशी उपाख्य भैयाजी जोशी ने कहा कि आपातकाल की घटना सिखाती है कि कोई तानाशाह बनने की कोशिश करेगा तो ये समाज, ये देश सहन नहीं करेगा। समाज के रक्त में लोकतंत्र है, जनतंत्र है, उसे दबाने की कोशिश करने वाला मिट्टी में मिल जाएगा।

    भैयाजी जोशी गुरुवार को आपातकाल के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में ‘आपातकाल और युवा‘ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय विमर्श को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे।


    कार्यक्रम का आयोजन हिन्दुस्थान समाचार बहुभाषी संवाद समिति और सैम ग्लोबल यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल, पूर्व राज्यसभा सदस्य कैलाश सोनी मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी के अध्यक्ष अरविंद भालचंद्र मार्डीकर ने की।

    भैयाजी जोशी ने कार्यक्रम के आयोजन के लिए हिन्दुस्थान समाचार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यहां शायद ही कुछ लोग होंगे, जिन्होंने उस आपातकाल का अनुभव किया है और बहुत से लोग हैं, जिन्होंने उस घटना के बारे में सुना है। जिन्होंने अनुभव किया, उनके लिए स्मृति से कई बातों को हटाना असंभव है। उन्होंने कहा कि देश का दुर्भाग्यपूर्ण काला इतिहास 26 जून 1975 को शुरू हुआ और मार्च 1977 को वह कालखंड समाप्त हुआ। उस समय, सत्ता में बैठी हुई व्यक्ति निरंकुश सत्ता चलाना चाहती थीं। हम कुछ भी करेंगे, उसके विरोध में कोई स्वर उठा न सके, हमें कोई रोक न सके, इस प्रकार का व्यक्ति केन्द्रित विचार करते हुए इस कानून का सहारा लेते हुए 25 जून की मध्य रात्रि को ये आपातकाल घोषित किया गया।

    उन्होंने कहा कि सब प्रकार के जनतंत्र द्वारा प्राप्त अधिकारों का हनन करते हुए केवल और केवल एक व्यक्तिगत इच्छा की पूर्ति के लिए उसने यह सब कानून बनाया। उस समय के प्रधानमंत्री के निर्वाचन को इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी गई, उनके खिलाफ चुनाव लड़ने वाले राजनारायण थे। उन्होंने उस निर्णय को चुनौती दी। न्यायालय में मामला चला, फैसला आ गया कि निर्वाचन अनुचित है, लेकिन इंदिरा गांधी ने हटने का मार्ग चयन नहीं किया, सारे देश को जेल बनाने का निर्णय लिया। अपनी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को दांव पर लगाकर इस देश के लोकतंत्र को समाप्त करने का एक वेदनादायक कदम उठाया। जो कानून लाया गया, उसे मीसा के नाम से जाना जाता है।

    भैयाजी जोशी ने कहा कि इस एक कानून के आधार पर अपने विरोधियों को सब प्रकार से प्रतिबंधित किया गया, जेल में डाला गया। इस कानून का भयानक सूत्र था कि इसके खिलाफ न्यायालय में भी नहीं जा सकते, इसके खिलाफ कुछ लिख नहीं सकते, जनसभाएं नहीं ले सकते, कोई आंदोलन खड़ा नहीं कर सकते। जो करेगा उसे देशद्रोही-समाजद्रोही माना जाएगा और उसे जेल के अंदर जाना पड़ेगा। इसके बाद 1977 में निर्वाचन घोषित कर दिया गया। चुनाव में 20-25 दिन बचे हैं। उन्हें लगा कि अलग-अलग दलों के जो नेता जेलों में हैं, उनकी आवाज दबी हुई है, वे क्या कर लेंगे। आश्चर्य की बात है कि सोया हुआ समाज नहीं था, जागृत समाज था। इसलिए जैसे ही अवसर प्राप्त हुआ समाज की शक्ति खुलकर सामने आ गई थी। उस डर के वातावरण में भी नेता बिना किसी भय के साहस के साथ जनता के बीच गए। नियोजित समय पर निर्वाचन हुआ और जनता ने उन्हें दिखा दिया कि तुम्हारा स्थान क्या है। इस देश का युवा वर्ग अपनी सूझ-बूझ के साथ खड़ा हुआ और काले कानून से मुक्त होते हुए मूल परम्पराओं के साथ चलना प्रारंभ किया। ये घटना दो बातें सिखाती हैं। एक बात है कि कोई तानाशाह बनने की कोशिश करेगा ये भारत यहां का समाज कभी भी इसका सहन करने वाला नहीं। दूसरी बात आती है समाज के रक्त में लोकतंत्र-जनतंत्र है, ये भारत की हजारों वर्षों की परम्परा है, यहां सभी को मत रखने का अधिकार है। इस अधिकार को जो भी समाप्त करने की कोशिश करेगा, वह मिट्टी में मिलेगा, यही उसकी नियति है।

    आपातकाल में किस तरह लोकतंत्र का अपहरण हुआ, युवाओं को यह जानना जरूरी: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

    कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि आपातकाल में जिस तरह से लोकतंत्र का अपहरण हुआ, इस विषय में जानने की सबसे ज्यादा जरूरत युवाओं को है, क्योंकि लोकतंत्र लंबे समय के संघर्ष के बाद स्थापित हुआ और देश की बेहतरी के लिए हुआ था, देश को फिर से विश्व गुरु के स्थान पर पहुंचाकर दुनिया का नेतृत्व करने के लिए हुआ था, जिससे दुनिया में शांति की स्थापना हो सके और हम लोकतंत्र को अमर बना सकें।

    उन्होंने कहा कि सत्ता के सदुपयोग और दुरुपयोग में क्या अंतर होता है और जब सत्ता का दुरुपयोग होता है तो स्थिति विकट हो सकती है, ये आपातकाल में हम लोगों ने देखा। जनता के आशीर्वाद से मिली हुई सत्ता इस बात के लिए नहीं है कि जो कुर्सी हमारे हाथ से जाने का खतरा आ जाए और वह भी उच्च न्यायालय के आदेश पर, तो हम ऐसी स्थिति पैदा कर दें कि लाखों लोगों को जेल के अंदर ठूस दिया जाए, प्रताड़ना दी जाए, प्रेस की स्वतंत्रता को समाप्त कर दिया जाए इससे भयावह स्थिति नहीं हो सकती। उन लोगों के लिए इससे बड़ी चिंता का विषय नहीं हो सकता कि लोगों ने लोकतंत्र की स्थापना एक बड़े मिशन की पूरा करने के लिए गई थी।

    उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने जब जनसंघ की पहली राष्ट्रीय कार्यकारिणी की पहली बैठक की तो उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया था कि समाज के अंतिम छोर पर बैठा व्यक्ति जिस दिन मुस्कराकर कह दे कि अब किसी प्रकार की समस्या हमारे सामने नहीं। हमारी सारी समस्याओं का समाधान हो गया, उस दिन मान जाना कि आपका राजनीति में आने का उद्देश्य पूरा हो गया। देश का सौभाग्य है कि भारत आर्थिक महाशक्ति बन रहा है। चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हमारा देश बन चुका है। ये युवाओं के लिए संतोष की बात है, क्योंकि आगे उनका लम्बा भविष्य है, लेकिन आर्थिक महाशक्ति बनने के साथ-साथ हमारी संस्कृति, हमारी विरासत और इसीलिए प्रधानमंत्री जी ने कहा है कि विरासत से विकास। हम अपना एक पैर जमीन में जमाकर और लम्बी छलांग लगाने की दिशा में देश को आगे ले जाने का काम होना चाहिए, जिससे विकास हमारे लिए अभिशाप न बने, बल्कि वरदान बने।

    इमरजेंसी की कल्पना करते ही शरीर में सिहरन पैदा हो जाती है : कैलाश सोनी

    पूर्व राज्यसभा सदस्य कैलाश सोनी ने 25 जून 1975 की रात को भारतीय लोकतंत्र का “काला अध्याय” बताया। उन्होंने कहा कि उस समय संविधान की आत्मा पर प्रहार किया गया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचल दिया गया। आपातकाल की कल्पना करते ही आज भी शरीर में सिहरन पैदा हो जाती है, क्योंकि मैंने उस दौर को स्वयं भोगा है। उन्होंने नई पीढ़ी को लोकतंत्र के संघर्षमय इतिहास से अवगत कराने की आवश्यकता पर बल दिया।

    कैलाश सोनी ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र मात्र चुनावी प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नागरिक स्वतंत्रता, संवैधानिक मूल्यों और जनसहभागिता से जीवित रहता है। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी जिस स्वतंत्र वातावरण में अपने विचार व्यक्त कर पा रही है, वह अनेक लोकतंत्र सेनानियों के त्याग और संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए कहा कि हिन्‍दुस्‍तान की दूसरी आजादी के लिए अनेक लोगों ने जेलों में यातनाएं सही। यह संघर्ष केवल राजनीतिक परिवर्तन का नहीं बल्कि लोकतंत्र की आत्मा को बचाने का अभियान था। उन्होंने कहा कि इतिहास की भूलों से सीख लेना आवश्यक है। यदि युवा वर्ग संविधान के मूल्यों के प्रति सजग रहेगा, तो भविष्य में कोई भी सत्ता नागरिक अधिकारों का हनन नहीं कर सकेगी। उन्होंने युवाओं को लोकतंत्र का प्रहरी बनने का आह्वान किया।

    कार्यक्रम में हिन्दुस्थान समाचार के अध्यक्ष अरविंद भालचंद्र मार्डीकर ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन सैम ग्रुप के चेयरमैन डॉ. हरप्रीत सलूजा ने दिया। हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी के क्षेत्रीय संपादक एवं मप्र ब्यूरो प्रमुख डॉ. मयंक चतुर्वेदी ने आभार प्रदर्शन किया और कार्यक्रम का संचालन डॉ. निवेदिता शर्मा ने किया। इस दौरान सैम ग्लोबल यूनिवर्सिटी की कुलाधिपति प्रीति सलूजा, विद्यार्थियों, प्राध्यापकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं जनप्रतिनिधियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

  • मप्र विधानसभाः षित जल कांड को लेकर कैलाश विजयवर्गीय के इस्तीफे पर अड़ी कांग्रेस

    मप्र विधानसभाः षित जल कांड को लेकर कैलाश विजयवर्गीय के इस्तीफे पर अड़ी कांग्रेस

    भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र का चौथा दिन हंगामेदार रहा। गुरुवार को अदाणी मुद्दे पर तीखी बहस, भागीरथपुरा मौत कांड पर टकराव और लाड़ली बहना योजना को लेकर उठे सवालों के बीच सदन
    का माहौल दिनभर गरमाता रहा। अंत में राज्यपाल के अभिभाषण पर कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके बाद सदन की कार्यवाही शुक्रवार सुबह तक के लिए स्थगित कर दी गई।


    मप्र विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन गुरुवार को सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले कांग्रेस विधायकों ने सदन के बाहर थाली बजाकर प्रदर्शन किया और बजट को “ख्याली पुलाव” बताया। सदन के भीतर अदाणी को लेकर चर्चा छिड़ी तो नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार बिजली खरीद के नाम पर 25 साल में एक से सवा लाख करोड़ रुपये देने की तैयारी में है। इस पर संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सबूत मांगे। बहस तेज हुई और इसी दौरान “औकात में रहो” टिप्पणी ने आग भड़का दी। करीब 40 मिनट तक जोरदार हंगामा हुआ और कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

    विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि गुस्सा दिखना चाहिए, आना नहीं चाहिए। विवाद बढ़ने पर विजयवर्गीय ने कहा कि वे अपने व्यवहार से प्रसन्न नहीं हैं और दुख व्यक्त किया। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने इसे पर्याप्त बताया, लेकिन कांग्रेस ने स्पष्ट माफी की मांग रखी। इसके बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि जाने-अनजाने में कोई शब्द निकले हों तो मैं माफी मांगता हूं। इसके बाद उमंग सिंघार ने भी खेद जताया और सदन की स्थिति सामान्य हुई।

    सड़क पर गूंजा विरोध, मंत्री का फूंका पुतला

    मंत्री की टिप्पणी से भड़के यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शिवाजी नगर में पुतला दहन किया। वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि 35 सरकारी हत्याओं के जिम्मेदार, आपराधिक मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने नेता प्रतिपक्ष को “औकात में रहो” कहा है। इसे उन्होंने सत्ता के अहंकार की पराकाष्ठा बताया। पटवारी ने कहा कि मंत्री ने प्रदेश की 8 करोड़ जनता को औकात की गाली दी है। उन्होंने ऐलान किया कि प्रदेशभर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कैलाश विजयवर्गीय के पुतले जलाकर कांग्रेस विरोध दर्ज कराएगी।

    इसके साथ ही इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जल से हुई मौतों का मामला भी विधानसभा में उठा। कांग्रेस नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग को लेकर अड़ी रही। लोक स्वास्थ्य विभाग देख रहे उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल का इस्तीफा भी मांगा गया। इसे लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच कई बार तीखी बहस हुई।

    विपक्ष ने आरोप लगाया कि ये मृत्यु नहीं हत्या है। सिस्टम ने 35 लोगों की जान ली है। सरकार की ओर से कैलाश विजयवर्गीय का बचाव किया गया। राजेंद्र शुक्ल ने आरोपों को नकारते हुए इस्तीफे की मांग पर कहा कि इस तरह के सवालों के जवाब देना मैं उचित नहीं समझता हूं। जिम्मेदार पद पर बैठे हुए लोगों की यह जिम्मेदारी है कि ऐसी घटना होने पर तत्काल राहत, बचाव और सुरक्षा के काम करें न कि इस प्रकार की मांगों को पूरा करें।

    इसके बाद हंगामा प्रारंभ हो गया। विपक्ष और फिर सत्ता पक्ष के सदस्य आसंदी के समक्ष आमने-सामने आ गए। चार बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। अंत में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने विपक्ष को आश्वस्त किया कि शुक्रवार को इस विषय पर वे चर्चा कराएंगे।

    दूषित जल का प्रश्न आने से पहले मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, पूर्व अध्यक्ष डा.सीतासरन शर्मा ने इस पर चर्चा न कराने के पक्ष में तर्क रखे। उन्होंने कहा कि इसकी न्यायिक जांच चल रही है, ऐसे में चर्चा नहीं करवाई जा सकती। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि जब सदन में 45 मिनट कुत्तों पर चर्चा कराई जा सकती है तो फिर जिस मामले में इतने व्यक्तियों की जान गई है तो उस पर क्यों नहीं? सरकार की असंवेदनशीलता का यह आलम है कि सांप, बिच्छू के काटने से मौत होने पर चार लाख रुपये दिए जाते हैं लेकिन यहां दो-दो लाख रुपये दिए गए। छिंदवाड़ा में कफ सीरप का मामला हो या भागीरथपुरा का नैतिकता के आधार पर मंत्रीद्वय कैलाश विजयवर्गीय और राजेंद्र शुक्ल को इस्तीफा देना चाहिए।

    इस पर उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, प्रहलाद सिंह पटेल, रामेश्वर शर्मा सहित अन्य भाजपा सदस्यों ने यूनियन कार्बाइड, सिख दंगे के आधार पर पलटवार करते हुए कहा कि तब कांग्रेस की नैतिकता कहां गई थी। मरीजों में मिला ई-कोलाई व कालरा बैक्टीरिया विधानसभा में राजेंद्र शुक्ल ने भागीरथपुरा के 22 लोगों की मौत एक्यूट डायरिया से होने की बात स्वीकारी। उन्होंने बताया कि कोलकाता स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट फार रिसर्च इन बैक्टीरिया इंफेक्शन, इंदौर के एमजीएम मेडिकल कालेज इंदौर और इंदौर की जिला लोक स्वास्थ्य प्रयोगशाला की लैब में बीमार मरीजों के मल की जांच में खतरनाक ई-कोलाई और कालरा बैक्टीरिया भी मिले हैं।

    लाड़ली बहना, आरक्षण और ब्रांडिंग पर सवाल

    अभिभाषण पर बोलते हुए नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने दो साल से नई लाड़ली बहनों के पंजीयन बंद होने का मुद्दा उठाया। आउटसोर्स भर्ती में आरक्षण न होने, ब्रांडिंग पर 200 करोड़ खर्च और जीआईएस पर 81 करोड़ रुपये के उपयोग पर भी सवाल खड़े किए। साइबर फ्रॉड और किसानों के 1.69 लाख करोड़ कर्ज का मुद्दा भी उठाया।

    सिंघार ने लाड़ली बहन में पंजीयन नहीं करने का मामला उठाते हुए कहा कि 18 साल से अधिक उम्र की बहनों को पंजीयन में क्यों शामिल नहीं किया जा रहा है, 2 साल से पंजीयन क्यों नहीं हो रहा है। मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री सीएम जगदीश देवड़ा बार-बार एक ही बात को घुमा फिरा कर बता रहे हैं सरकार को जमीनी हकीकत में फर्क समझने की जरूरत है। नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने सामाजिक न्याय की बात करते हुए कहा कि कुछ विभाग में 27% आरक्षण दिया जा रहा है जबकि कुछ भी विभागों में नहीं दिया जा रहा है आखिर यह स्थिति क्यों है। उन्होंने कहा कि आउटसोर्स में कोई आरक्षण नहीं है आखिर ऐसा क्यों है?

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान अपने दल को सुनने की नसीहत देनी चाहिए थी। लोकतंत्र की खूबसूरती यही है, इसलिए जनता उन्हें लंबे समय से विपक्ष में बैठा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार जो कहती है, करके दिखाती है, प्रधानमंत्री ने उनके क्षेत्र में टेक्सटाइल पार्क की सौगात दी। कपास अब निर्यात होगा। मुहासा-बाबई प्लांट के लिए जमीन की मांग बढ़ रही है, जिसे पूरा किया जा रहा है। बीजेपी सरकार ने सिंचाई रकबा तेजी से बढ़ाया। सकारात्मक सुझावों का स्वागत है। नक्सलवाद के खात्मे का भी जिक्र किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार बच्चों को डॉक्टर बनाने के लिए लोन दिलाने में मदद कर रही है और प्रदेश में अब 40 मेडिकल कॉलेज हो चुके हैं। आयुर्वेद का एम्स भी मिलने वाला है। भावांतर योजना के तहत किसानों को MSP का लाभ देने के लिए 2300 करोड़ रुपये खर्च किए गए। उन्होंने कहा कि बजट 4.21 लाख करोड़ से बढ़कर 4.38 लाख करोड़ रुपये से अधिक हुआ है। उन्होंने कर्ज के मुद्दे पर कहा कि प्रदेश गठन से अब तक का पूरा कर्ज उनके माथे न जोड़ा जाए, पुराने कर्ज का ब्याज भी सरकार चुका रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश में बेरोजगारी दर सबसे कम, करीब 1 से 1.25 प्रतिशत है और दूसरे राज्यों के लोग यहां खेती के लिए आ रहे हैं। उन्होंने माना कि अंडा उत्पादन में कमी आई है, लेकिन दूध उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। सांची ब्रांड को और मजबूत किया जाएगा तथा 26 हजार गांवों को डेयरी नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। सरकार खेतों में सोलर पैनल लगाकर सौर ऊर्जा उत्पादन और खेती साथ-साथ करने की नीति पर काम कर रही है। पंप स्टोरेज के जरिए दिन में बिजली और बेहतर सिंचाई सुविधा देने की तैयारी है।
  • 52वाँ अंतर्राष्ट्रीय खजुराहो नृत्य समारोह आज से, 7 दिन शास्त्रीय शैलियों के नृत्य एवं संवाद का होगा समागम

    52वाँ अंतर्राष्ट्रीय खजुराहो नृत्य समारोह आज से, 7 दिन शास्त्रीय शैलियों के नृत्य एवं संवाद का होगा समागम


    खजुराहो। विश्वविख्यात मंदिर की पृष्ठभूमि में आयोजित होने वाला 52वां अंतर्राष्ट्रीय खजुराहो नृत्य समारोह इस वर्ष भी भारतीय शास्त्रीय नृत्य की विविध शैलियों का अद्भुत संगम प्रस्तुत करेगा। इस 7 दिवसीय सांस्कृतिक महोत्सव में देश-विदेश के ख्यातिप्राप्त कलाकार अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगे। समारोह में भरतनाट्यम, कथक, ओडिसी, कुचिपुड़ी, मणिपुरी और मोहिनीअट्टम जैसी प्रमुख शास्त्रीय शैलियों की प्रस्तुति दी जाएगी। प्राचीन मंदिरों की भव्यता और प्रकाश सज्जा के बीच कलाकारों की अभिव्यक्ति भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा को जीवंत करेगी। हर वर्ष की तरह इस बार भी देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक और कलारसिक शामिल होंगे। यह समारोह न केवल सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देता है, बल्कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य की वैश्विक पहचान को भी सशक्त करता है।

    संस्कृति विभाग की उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी द्वारा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग, दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, नागपुर एवं जिला प्रशासन – छतरपुर के सहयोग से ‘52वाँ खजुराहो नृत्य समारोह’ 20 से 26 फरवरी, 2026 तक मंदिर परिसर, खजुराहो में आयोजित किया जा रहा है। इस 7 दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त आयोजन में देश के सुप्रतिष्ठित एवं उदीयमान नर्तक – नृत्यांगनाएं अपनी साधनारत प्रस्तुतियों से भारतीय शास्त्रीय नृत्य की विविध परम्पराओं को मंच पर साकार करेंगी। साथ ही इस समारोह को सांस्कृतिक समागम बनाने की दृष्टि से विविध कला विधाओं से सम्बंधित गतिविधियों को आयोजित किया जा रहा है, ताकि यह समारोह भव्य और स्मरणीय बन सके।

    ‘नटराज’ थीम : नृत्य, लय और सृजन का प्रतीक

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के विजन अनुसार इस वर्ष खजुराहो नृत्य समारोह को शास्त्रीय नृत्य की प्रेरणा और आधार ‘नटराज’ की थीम पर केंद्रित किया गया है। यह थीम भारतीय दर्शन, सृजन और लयबद्ध जीवन दृष्टि का प्रतीक है, जो समारोह को एक गहन आध्यात्मिक आयाम प्रदान करेगा। पद्म पुरस्कार प्राप्त, संगीत नाटक अकादमी सम्मानित एवं राष्ट्रीय – राज्य स्तरीय अलंकरणों से विभूषित कलाकारों के साथ उदीयमान प्रतिभाओं को समान मंच प्रदान किया जा रहा है, जिससे नृत्य की गुरु – शिष्य परम्परा और निरंतर एवं सुदृढ़ हो सके। समारोह में कथक की 6, भरतनाट्यम की 4, ओडिसी की 5, मणिपुरी की 2, कथकली की 1, कुचिपुड़ी की 2, मोहिनीअट्टम की 1, सत्रिया की 1 एवं छाऊ नृत्य की 1 प्रस्तुतियाँ होगी।

    52वें खजुराहो नृत्य समारोह में प्रथम बार सांस्कृतिक रैली में विभिन्न विधाओं एवं परंपराओं के नृत्य कलाकार खजुराहो के विभिन्न मार्गों से होते हुए मुख्य कार्यक्रम स्थल तक पहुंचेंगे। महोत्सव में देश के 10 से 16 वर्ष आयु वर्ग के युवा शास्त्रीय नृत्य कलाकारों को सहभागिता के लिए एक राष्ट्रीय मंच “राष्ट्रीय बाल नृत्य महोत्सव – 2026” प्रदान किया जा रहा है। प्रस्तुति देने के लिए वरिष्ठ कला गुरुओं द्वारा 31 नृत्य कलाकारों का चयन किया गया है।

    पर्यटकों और संस्कृति प्रेमियों के लिए खजुराहो नृत्य समारोह के दौरान आनुषंगिक गतिविधियों का संचालन किया जाएगा। इसमें खजुराहो कार्निवाल, ‘नटराज’ प्रदर्शनी में 50 नृत्यरूपों का प्रदर्शन, लयशाला : नृत्य शैलियों के श्रेष्ठ गुरुओं एवं शिष्यों का संगम, कलावार्ता : कलाविदों एवं कलाकारों के मध्य संवाद, आर्ट – मार्ट : चित्रकला प्रदर्शनी, सृजन : पारम्परिक शिल्प निर्माण तकनीक का प्रदर्शन, हुनर : पारम्परिक शिल्पों का प्रदर्शन सह विक्रय और स्वाद : देशज व्यंजन प्रमुख आकर्ष होंगे।

    खजुराहो पर्यटन की दृष्टि से आकर्षक एवं लोकप्रिय स्थल है। खजुराहो नृत्य समारोह के दौरान मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग की ओर से विशेष गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। विगत वर्षों में भी पर्यटन गतिविधियों ने पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित किया है। इस वर्ष विशेष रूप से घुमन्तू समुदायों के साथ गाँवों की सैर, एक दिवसीय भ्रमण कार्यक्रम (कैम्पिंग गतिविधि), नेचर वॉक, खजुराहो विलेज टूर, ई – बाइक टूर, वॉटर स्पोर्ट्स, हॉट एयर बैलून एवं फेम टूर जैसी रोमांचकारी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

    20 से 26 फरवरी तक की नृत्य प्रस्तुतियां सायं 6:30 बजे से

    20 फरवरी, 2026

    पद्मश्री ममता शंकर, कोलकत्ता – कथक

    अनुराधा वेंकटरमन, चेन्नई – भरतनाट्यम

    शुभदा वराडकर, मुम्बई – ओडिसी

    21 फरवरी, 2026

    विश्वदीप, दिल्ली – कथक

    अक्मादल काईनारोवा, कजाकिस्तान – भरतनाट्यम

    प्रभात मेहतो, झारखंड – छाऊ

    22 फरवरी, 2026

    एसएनए अवार्डी थोकचोम इवेमुबि देवी, मणिपुर – मणिपुरी

    पद्मश्री दुर्गाचरण रनवीर, ओडिसा – ओडिसी

    सत्रिया केन्द्र समूह, असम – सत्रिया

    23 फरवरी, 2026

    नव्या नायर, चेन्नई – भरतनाट्यम

    एसएनए अवार्डी कोट्टक्कल नंदकुमार नायर, केरल – कथकली

    पद्मश्री पद्मजा रेड्डी, हैदराबाद – कुचिपुड़ी

    24 फरवरी, 2026

    शिंजनी कुलकर्णी, दिल्ली – कथक

    पद्मश्री इलियाना सिटर, भुवनेश्वर – ओडिसी

    पद्मश्री कलामंडलम क्षमावेती, केरल – मोहिनीअट्टम

    25 फरवरी, 2026

    एसएनए अवार्डी शाश्वती सेन, दिल्ली – कथक

    मोहंती, भुवनेश्वर – ओडिसी

    एसएनए अवार्डी नयनसखी देवी, मणिपुर – मणिपुरी

    खुशबू पांचाल, उज्जैन – कथक समूह  

    26 फरवरी, 2026

    सुनयना हजारीलाल, मुम्बई – कथक

    पद्मश्री प्रतिभा प्रहलाद, बैंगलुरु – भरतनाट्यम

    एसएनए अवार्डी सुश्री भावना रेड्डी, दिल्ली – कुचीपुड़ी

    प्रभुतोष पाण्डा, भुवनेश्वर – ओडिसी।

  • एआई से आर्थिक विकास और सुशासन को सशक्त करेगा मध्यप्रदेश

    एआई से आर्थिक विकास और सुशासन को सशक्त करेगा मध्यप्रदेश


    भोपाल!
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार 20 फरवरी को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026 में शामिल होंगे। समिट में वे उच्च-स्तरीय पैनल से चर्चा करेंगे। इसमें राज्य स्तर पर एआई के उपयोग से आर्थिक विकास 

    को गति देने, डिजिटल सुशासन को सशक्त बनाने और मजबूत अवसंरचना विकसित करने के उपायों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव एआई कंप्यूटिंग, सायबर सुरक्षा संरचना, क्लाउड इको सिस्टम, जनरेटिव एआई एकीकरण और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में अग्रणी प्रमुख वैश्विक तकनीकी कंपनियों के साथ वन टू वन बैठक भी करेंगे। बैठक में एडवांस्ड सेमीकंडक्टर ऐक्सीलरेशन, क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा सेंटर और सॉवरेन एआई मॉडलिंग जैसे विषयों पर विचार-विमर्श होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव टियर-2 शहरों से उभर रहे स्टार्ट-अप और नव प्रवर्तकों से भी मुलाकात कर उनके एआई आधारित कार्यों की जानकारी लेंगे।

    समिट में मध्यप्रदेश पेवेलियन हॉल 4, प्रथम तल,बूथ संख्या 4F-32 और 4F-34 में “एआई इनेबल्ड गवर्नेंस फॉर ऐन एम्पावर्ड भारत” थीम पर लगाया गया है। इसमें 14 एआई स्टार्ट-अप, आईआईटी इंदौर और आईआईटीआई दृष्टि सीपीएस फाउंडेशन जैसे शैक्षणिक संस्थान और 4 प्रमुख शासकीय विभाग शामिल हैं। मध्यप्रदेश पेवेलियन में धरातल पर लागू किए जा चुके एआई समाधान प्रदर्शित किए जा रहे हैं। यह पेवेलियन दर्शाता है कि पारदर्शिता बढ़ाने, सेवाएं समय पर पहुंचाने और बेहतर निर्णय लेने के लिए एआई का उपयोग शासन व्यवस्था में कैसे किया जा रहा है। मध्यप्रदेश का विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, एमपीएसईडीसी के सहयोग से, इस राष्ट्रीय मंच पर राज्य की योजनाबद्ध और लक्ष्य-आधारित एआई पहलों को प्रस्तुत कर रहा है।

  • MP: मुस्लिम MLA ने गाय को लेकर उठाई मांग पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद खुश… बोले-ये हिंदू विधायकों पर कलंक जैसा

    MP: मुस्लिम MLA ने गाय को लेकर उठाई मांग पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद खुश… बोले-ये हिंदू विधायकों पर कलंक जैसा

    Swami Avimukteshwaranand 

    भोपाल। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल के एक मुस्लिम विधायक (Muslim MLA) ने गौमाता को लेकर ऐसी कुछ मांग कर दी है कि जिससे ज्योतिर्मठ पीठ (Jyotirmath Peeth) के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Shankaracharya Swami Avimukteshwarananda Saraswati) बहुत खुश हो गए हैं और उन्होंने विधायक की जमकर तारीफ करते हुए हिंदू विधायकों को उनसे सीख लेने के लिए कहा है। दरअसल भोपाल उत्तर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने हाल ही में मध्य प्रदेश विधानसभा में एक अशासकीय संकल्प पेश करते हुए गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की है, साथ ही गाय की मृत्यु पर उसकी अंतिम संस्कार करने और उसके मांस व चमड़े के व्यापार पर रोक लगाने की मांग भी की है। विधायक की इस मांग के बारे में जानने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद प्रतिक्रिया देते हुए ना केवल मुस्लिम MLA की तारीफ की बल्कि यहां तक कह दिया कि अगर उनका यह प्रस्ताव असफल रहता है तो यह हिंदू विधायकों के ऊपर बहुत बड़ा कलंक होगा।

    इस मामले को लेकर जारी एक वीडियो में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, ‘उस वक्त बड़ा आश्चर्य होता है, जब हम जिससे आशा करते हैं वह हमारी आशा को पूरा नहीं करता है, और जिससे हमारी आशा ही ना हो, वह आगे बढ़कर के हमारे हृदय के पास खड़ा हो जाता है। ऐसा ही एक दृश्य मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से निकलकर आया है। जहां पर भोपाल उत्तर सीट से विधायक आतिफ अकील ने विधानसभा में एक अशासकीय संकल्प पेश करते हुए गौमाता को राष्ट्रीय पशु का दर्जा देने की मांग की है। साथ ही उन्होंने गौमाता के मांस और चमड़े के व्यापार पर भी पूरी तरह से रोक लगाने और गोकशी करने वाले लोगों के ऊपर सख्ती बरतने के लिए कहा है।’ शंकराचार्य ने बताया कि अकील ने गौमाता की मृत्यु होने पर पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार करने की व्यवस्था करने की मांग भी की है।’


    ‘हिंदू अपना धर्म पालन करने में चूक रहे’

    आगे राज्य के हिंदू विधायकों को निशाने पर लेते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि ‘यह मांग स्वयं को हिंदू कहने वाले विधायकों के द्वारा की जानी चाहिए थी, यह संकल्प उनके द्वारा प्रस्तुत किया जाना चाहिए था, लेकिन हिंदू ना केवल अपना धर्म पालन करने में चूक रहे हैं, बल्कि अपने आप को हिंदू कहलवाने में भी चूक रहे हैं।’


    ‘हिंदू विधायकों के पास अब भी एक मौका’

    आगे अकील की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा, ‘आज MP विधानसभा में जितने भी हिंदू विधायक हैं, आतिफ अकील कहीं ना कहीं उनसे बढ़त ले चुके हैं। लेकिन कोई बात नहीं, अभी भी मौका है, इनके द्वारा जो संकल्प प्रस्तुत किया गया है, उस संकल्प को पारित करके सभी विधायक, इस अच्छे कार्य में अपने आप को सहभागी बना सकते हैं और सभी अभिनंदनीय हो सकते हैं।’


    ‘तो हिंदू विधायकों पर होगा बहुत बड़ा कलंक’

    आगे उन्होंने मध्य प्रदेश के हिंदू विधायकों को कहीं ना कहीं चुनौती देते हुए कहा कि ‘अगर यह प्रस्ताव असफल रहता है तो मध्य प्रदेश के हिंदू विधायकों के ऊपर बहुत बड़ा कलंक होगा, यही हम कहना चाहते हैं। साथ ही हम भोपाल उत्तर विधानसभा सीट के कांग्रेस विधायक आतिफ अकील का खूब-खूब अभिनंदन करना चाहेंगे, साथ ही उनके परिवार को और उनके इष्ट मित्रों का भी अभिनंदन करना चाहेंगे जिन्होंने उनको यह बल दिया कि वह विधानसभा में इस तरह का प्रस्ताव ला सकें।’


    ‘संसद में भी यही हाल, मुस्लिम सांसद कर रहे मांग’

    आगे उन्होंने कहा कि संसद में भी हम देख रहे हैं कि मुस्लिम सांसद तो कह रहे हैं कि गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करो, लेकिन तथाकथित जो अपने आप को हिंदू कहने वाली पार्टी है, या जो अपने आप को हिंदू कहने वाले सांसद हैं, दूसरी पार्टियों के, वो लोग कहीं ना कहीं इस मामले में चूक रहे हैं। इसलिए इस मामले में हमारा सबसे यही कहना है कि, आपकी जो भी आस्था है, या आपकी आस्था अगर मर भी गई है तो भी आप जिनके प्रतिनिधि हैं उस जनता की तरफ से इस प्रस्ताव का समर्थन करने की और इस तरह का प्रस्ताव लाने की आवश्यकता है।


    हिंदुओं से की गौमाता के पक्ष में खड़े होने की अपील

    अपनी बात खत्म करते हुए अंत में अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, ‘हर हिंदू से हम कहना चाहेंगे, गौमाता के पक्ष में खड़े होकर के अपने आपको असली हिंदू घोषित करिए, नहीं तो जनता की नजर में आप नकली हिंदू होंगे, नकली हिंदू का कोई मतलब नहीं। इसलिए गौमाता के पक्ष में खड़े होइये।’


    आतिफ अकील बोले- भाजपा की कथनी और करनी में फर्क

    बता दें कि भोपाल उत्तर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने मंगलवार 17 फरवरी को विधानसभा में एक अशासकीय संकल्प प्रस्तुत करते हुए गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की थी। इस बारे में बताते हुए आतिफ अकील ने कहा था, ‘मैंने गाय को लेकर विधानसभा में अशासकीय संकल्प लगाया है कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करना चाहिए। क्योंकि हिंदू धर्म अगर गाय को माता मानता है तो बिल्कुल उसे राष्ट्रीय पशु घोषित करना चाहिए। वहीं गाय की मौत होने पर उसका अंतिम संस्कार भी होना चाहिए और गाय के चमड़े का व्यापार भी बंद होना चाहिए।’ आगे उन्होंने भाजपा की कथनी और करनी में अंतर का आरोप लगाते हुए कहा कि साल 2017 में मेरे पिता ने भी यही मांग की थी, और उस वक्त भी भाजपा की सरकार थी, लेकिन बहुमत होने के बाद भी यह संकल्प पारित नहीं हो पाया था।