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  • इनोवेशन अपनाकर मध्य प्रदेश बनेगा उद्यमिता का हब : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    इनोवेशन अपनाकर मध्य प्रदेश बनेगा उद्यमिता का हब : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश तेजी से विकास के पथ पर अग्रसर है। आज प्रदेश का युवा अपनी सोच को आकार देकर नए-नए इनोवेशन कर आईटी तकनीकी के माध्यम से स्टार्टअप कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी की मंशा के अनुरूप वर्ष 2047 तक मध्य प्रदेश स्टार्टअप एवं इनोवेशन को अपनाते हुए उद्यमिता विकास का हब बन जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को इंदौर के सिंहासा में स्थित आईटी पार्क में बने लॉन्चपैड इनक्यूबेशन एवं इनोवेशन सेंटर के लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से आज दुनिया तेजी से बदल रही है। वर्तमान समय में इंसान को उसके ज्ञान से ही मापा जाता है। उन्होंने कहा कि युवा नवीन तकनीकी को अपनाएं और स्टार्टअप करें एवं दूसरों को रोजगार देने वाले सफल उद्यमी बने। उन्होंने कहा कि भोपाल में प्रदेश की पहली नॉलेज और एआई सिटी बन रही है। उज्जैन को साइंस सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है। नवाचार और विज्ञान के माध्यम से अनेक कार्य हो रहे हैं। लोग कभी जमीन और प्रापर्टी को अपना सब कुछ समझते थे। अब तो ज्ञान ही सबसे बड़ा खजाना है। ज्ञान होने से मनुष्य अपने आप धनवान हो जाता है। नॉलेज के बलबूते पर उन्नति के मार्ग पर तेजी से जा सकते हैं। सत्यवादी मार्ग पर बढ़ने का यही समय है। भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन रहा है।

    उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भोपाल के अलावा इंदौर और उज्जैन क्षेत्र मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में विकसित होने वाले हैं। हमारे सभी संसाधन भविष्य की दृष्टि से विकसित किए जाएंगे। मध्य प्रदेश को इनोवेशन हब बनाकर प्रदेश की भूमिका को सशक्त करना है। मध्य प्रदेश नवाचार और उद्यमिता का केंद्र बन रहा है। मध्य प्रदेश स्टार्ट-अप पॉलिसी, फंडिंग सपोर्ट के माध्यम से इन्क्यूबेशन नेटवर्क स्थापित कर भारत की स्टार्टअप क्रान्ति को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रदेश के युवा एआई पर आधारित एग्रीटेक स्टार्टअप, हेल्थटेक, स्किलटेक, ग्रीन इनोवेशन और डिजिटल सॉल्यूशन में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर स्टार्टअप हब बन रहे हैं।


    लांचपैड सेंटर का किया निरीक्षण

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लॉन्चपेड इनोवेशन सेंटर के लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान युवाओं द्वारा अपनी सोच को नवीन तकनीकी से आकर देकर निर्मित की गई अत्याधुनिक मशीनों का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि गत वर्ष इस सेंटर का भूमि-पूजन किया था और आज उसके लोकार्पण अवसर पर युवाओं की आधुनिक सोच एवं आइडियाज को देखकर अति प्रसन्नता हो रही है।


    स्टार्टअप वाले युवाओं से किया संवाद

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने अपने आइडिया से स्टार्टअप शुरू करने वाले युवा उद्यमियों से संवाद किया। उन्होंने युवा उद्यमियों से जाना की वे किस क्षेत्र में कार्य कर रहे है। युवाओं के कार्यों के बारे में जानकर उनका हौंसला बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी कार्य को करने की अगर हमारी मंशा सही है तो उस कार्य में सफलता अवश्य मिलती है।

    भारतीय औद्योगिक प्रबंध संस्थान इंदौर के निदेशक सुभाष एस जोशी ने बताया कि “लॉन्चपैड : इन्क्यूबेशन एवं इनोवेशन सेंटर” की स्थापना आईआईटीआई दृष्टि सीपीएस फाउंडेशन (आईआईटी इंदौर का टेक्नोलॉजी ट्रांसलेशन एवं रिसर्च पार्क) तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी) के संयुक्त सहयोग से की गई है। इस केंद्र का उद्देश्य डीप-टेक नवाचार को प्रोत्साहित करना, उच्च प्रभाव वाले स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना, उन्नत विनिर्माण तथा उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में प्रदेश को सशक्त बनाना और उद्योग एवं अकादमिक जगत के बीच सहयोग को मजबूत करना है।


    विभिन्न कंपनियों के उद्यमियों से की चर्चा

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सूचना एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कार्य कर रही विभिन्न कंपनियों के उद्यमियों से चर्चा भी की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने सभी उद्यमियों से कहा कि अपनी कंपनियों में युवाओं को काम करने का मौका दें एवं उन्हें अधिक से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए। हमारे देश में युवाओं के पास एक नई एवं आधुनिक सोच है हमारा देश चौथी अर्थव्यवस्था के रूप में उभर कर आगे बढ़ रहा है। कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, विधायक गोलू शुक्ला, मालिनी गौड़, राजेश मेंदोला, मनोज पटेल, अध्यक्ष सुमित मिश्रा, पवन सोनकर सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

    मध्य प्रदेश में नवाचार और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने की दिशा में इंदौर के सिंहासा आईटी पार्क में स्थापित “लाँचपैड : इन्क्यूबेशन एवं इनोवेशन सेंटर” एक महत्वपूर्ण पहल है। इस केंद्र की स्थापना आईआईटीआई दृष्टि सीपीएस फाउंडेशन (आईआईटी इंदौर का टेक्नोलॉजी ट्रांसलेशन एवं रिसर्च पार्क) तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी) के संयुक्त सहयोग से की गई है।


    “लॉन्चपैड : इन्क्यूबेशन एवं इनोवेशन सेंटर” एक महत्वपूर्ण पहल

    इंदौर के सिंहासा में स्थित आईटी पार्क में बने लगभग 10 हजार वर्ग फुट क्षेत्र में विकसित इस अत्याधुनिक केंद्र में 5 हजार वर्ग फुट का को-वर्किंग एवं इन्क्यूबेशन स्पेस और 5 हजार वर्ग फुट की उन्नत प्रयोगशाला अवसंरचना विकसित की गई है। केंद्र में स्थापित इंटेलिजेंट मैन्युफैक्चरिंग लैब के माध्यम से उत्पादों की प्रोटोटाइपिंग, परीक्षण और सत्यापन की सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। यह केंद्र विचार से लेकर व्यावसायीकरण तक संपूर्ण नवाचार प्रक्रिया को सहयोग प्रदान करेगा। साथ ही एआई,एमएल,इंडस्ट्री 4.0, रोबोटिक्स, डिजिटल हेल्थकेयर और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं, एमएसएमई और नवाचारकर्ताओं को आवश्यक तकनीकी एवं संस्थागत समर्थन उपलब्ध कराया जाएगा।

    लगभग 10 करोड़ रुपये के अवसंरचना निवेश और 20 करोड़ रुपये के स्टार्टअप समर्थन प्रावधान के साथ यह केंद्र आगामी 7 वर्षों में 100 स्टार्टअप्स को विकसित करने और 200 से 300 रोजगार अवसर सृजित करने का लक्ष्य लेकर कार्य करेगा। यह केंद्र डीप-टेक नवाचार को प्रोत्साहित करने, उच्च प्रभाव वाले स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने, उन्नत विनिर्माण तथा उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में प्रदेश की क्षमताओं को मजबूत करने और उद्योग तथा अकादमिक जगत के बीच सहयोग को सुदृढ़ करने का कार्य करेगा।

  • माँ नर्मदा के आशीर्वाद से प्रदेश में बह रही है विकास की नई धारा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    माँ नर्मदा के आशीर्वाद से प्रदेश में बह रही है विकास की नई धारा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मां नर्मदा प्रदेश की जीवन रेखा है और उनके आशीर्वाद से मध्य प्रदेश में विकास की नई धारा प्रवाहित हो रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को इंदौर में आयोजित नर्मदा के चतुर्थ चरण के भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक रूप से भी होलकर साम्राज्य ने मां नर्मदा के आशीर्वाद से कठिन परिस्थितियों में सनातन संस्कृति को सशक्त बनाए रखा और देशभर के प्रमुख तीर्थ स्थलों पर घाट, धर्मशालाएं एवं अन्नक्षेत्र विकसित किए।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में नर्मदा परियोजनाओं को नई गति मिली है। सरदार सरोवर परियोजना के माध्यम से गुजरात, राजस्थान एवं मध्यप्रदेश के निमाड़ क्षेत्र सहित व्यापक भू-भाग में जल उपलब्धता सुनिश्चित हुई है, जिससे कृषि, उद्योग एवं पेयजल की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने इंदौर शहर को पेयजल व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण के लिये मां नर्मदा जल के चतुर्थ चरण के तहत अमृत 2.0 योजना में 1356 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का भूमि-पूजन किया। इससे शहर की पेयजल आपूर्ति संबंधित बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी और नागरिकों को बेहतर जलापूर्ति सुविधाएं प्राप्त होंगी। मुख्यमंत्री ने इंदौर के रामसर साइट सिरपुर में 62.72 करोड़ रुपये लागत से निर्मित एसटीपी प्लांट का लोकार्पण भी किया।

    मुख्यमंत्री ने संकल्प से समाधान अभियान के तहत विभिन्न योजनाओं के तहत हितग्राहियों को हितलाभ का वितरण किया। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल पर संचालित किए गए इस संकल्प से समाधान अभियान के तहत इंदौर जिले में एक लाख 44 हजार से अधिक हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि “संकल्प से समाधान” अभियान में इंदौर जिले में एक लाख 44 हजार 912 आवेदनों का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया है। यह अभियान प्रदेश के सभी 55 जिलों में प्रभावी रूप से संचालित हुआ। प्रदेश में अब “जल गंगा संवर्धन अभियान” प्रारंभ किया गया है, जिसके अंतर्गत लगभग पौने तीन लाख कुएं, बावड़ी, तालाब एवं नहरों का निर्माण एवं जल संरचनाओं पुनर्जीवित किया जाएगा। यह अभियान गुड़ी पड़वा से प्रारंभ हो गया है, जो गंगा दशमी तक जारी रहेगा।

    उन्होंने कहा कि केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना से बुंदेलखंड क्षेत्र के 25 जिलों को लाभ मिलेगा, वहीं पार्वती-कालीसिंध-चंबल (PKC) परियोजना से मध्यप्रदेश एवं राजस्थान के 13 जिलों में सिंचाई एवं पेयजल की सुविधाएं सुदृढ़ होंगी। उन्होंने शिप्रा नदी के पुनर्जीवन के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि आगामी सिंहस्थ-2028 में श्रद्धालु शिप्रा के स्वच्छ जल में स्नान कर सकेंगे। इसके लिए बड़े पैमाने पर वर्षा जल संग्रहण एवं निरंतर जल प्रवाह सुनिश्चित किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में जल संरक्षण एवं प्रबंधन के लिए व्यापक कार्य किए जा रहे हैं। कान्ह नदी के जल को शुद्ध कर कृषि कार्यों में उपयोग हेतु उपलब्ध कराया जाएगा। प्रत्येक बूंद जल के संरक्षण के माध्यम से प्रदेश को समृद्ध बनाने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि तेजी से विकसित हो रहे इंदौर शहर के लिए आगामी 25 वर्षों की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए समग्र योजना बनाई गई है, जिससे क्षेत्र में पेयजल की समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र देश के प्रमुख विकास केंद्रों में शामिल हो रहा है। आने वाले समय में यह क्षेत्र लगभग डेढ़ करोड़ की आबादी के साथ देश का दूसरा सबसे बड़ा मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र बनेगा।

    कार्यक्रम को नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधायक मालिनी लक्ष्मण सिंह गौड़ तथा सुमित मिश्रा ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर सांसद शंकर लालवानी, जिला पंचायत अध्यक्ष रीना सतीश मालवीय, विधायक रमेश मेंदोला, महेन्द्र हार्डिया, गोलू शुक्ला, मधु वर्मा, उषा ठाकुर, मनोज पटेल, सावन सोनकर, प्रताप करोसिया, श्रवण चावड़ा सहित जनप्रतिनिधि, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह, कलेक्टर शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल विशेष रूप से मौजूद थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत 1356 करोड रुपए के पेयजल आपूर्ति संबंधी कार्यों का भूमि पूजन किया। इन कार्यों में पैकेज-एक के अंतर्गत 1650 एमएलडी इंटेक, 400 एमएलडी ट्रीटमेंट प्लांट, पंपिंग स्टेशन एवं आधुनिक जल इंफ्रास्ट्रक्चर, पैकेज-2 के अंतर्गत 39 किलोमीटर ग्रेविटी पाइपलाइन, 2870 मीटर लंबी टनल एवं क्लोरिनेशन प्लांट, पैकेज-3 के अंतर्गत 20 नए ओवर हैड टैंक, 29 पुराने टैंकों का उन्नयन, 685 किलोमीटर पाइपलाइन और 1.26 लाख नवीन कनेक्शन तथा पैकेज-4 के अंतर्गत 20 नए ओवर हेड टैंक, 46 पुराने टैंको का उन्नयन, 892 किलोमीटर पाइपलाइन और 1.21 लाख नवीन कनेक्शन देने के कार्य शामिल है।

    दशहरा मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न विभागों द्वारा विकासात्मक गतिविधियों पर केन्द्रित प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं और उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस प्रदर्शनी का अवलोकन किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने माँ नर्मदा के पवित्र जल का अर्पण भी किया और उपस्थित साधू-संतों से आशीर्वाद प्राप्त किया।

  • अधोसंरचना विकास के साथ शिक्षा में गुणात्मक विकास आवश्यक- उप मुख्यमंत्री शुक्ल

    अधोसंरचना विकास के साथ शिक्षा में गुणात्मक विकास आवश्यक- उप मुख्यमंत्री शुक्ल


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि अधोसंरचना विकास के साथ शिक्षा में गुणात्मक विकास आवश्यक है। रीवा में शिक्षा, स्वास्थ्य व रोजगार को बेहतर बनाने के सभी प्रयास जारी हैं। हमारा प्रयास है कि गुणात्मक शिक्षा व बेहतर इलाज की सभी व्यवस्थायें रहें ताकि यहां के लोगों को उच्च शिक्षा व इलाज के लिये बाहर न जाना पड़े।

    उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रविवार को यह विचार ीवा में लगभग 3 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा भवन के लोकार्पण अवसर पर व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपने संभाग को आदर्श संभाग बनायें। महाविद्यालय के प्राचार्यों का दायित्व है कि वह अपने महाविद्यालय में नवीन पाठ¬क्रम संचालन के लिये प्रयासरत रहें तथा प्राध्यापकों व विद्यार्थियों के साथ जीवंत संबंध बनायें रखें।

    उन्होंने कहा कि अच्छा प्रशासक वही है जो जमीनी फीड बैक लेकर कार्य करे। यह भवन उच्च स्तरीय सुविधाओं से युक्त है। जब कार्यालय अच्छा होता है तो कार्य करने की इच्छा भी बढ़ जाती है। इस कार्यालय भवन के द्वारा संभाग के सभी महाविद्यालयों के विकास व उच्च शिक्षा के गुणात्मक सुधार के सभी प्रयास तत्परता से होंगे।

    अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा डॉ. आर.पी. सिंह ने बताया कि लगभग 3 करोड़ रूपये से निर्मित भवन में सभी सुविधाएँ हैं। यहां से शासकीय, अशासकीय व अनुदान प्राप्त महाविद्यालयों पर नियंत्रण होगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने विधि विधान से पूजन अर्चन कर भवन का लोकार्पण किया। इस अवसर आयुक्त रीवा संभाग बीएस जामोद, अध्यक्ष नगर निगम व्यंकटेश पाण्डेय सहित महाविद्यालयों के प्राचार्य, प्राध्यापक व विद्यार्थी उपस्थित रहे।

  • ग्वालियर में तीन दिवसीय अग्नि सुरक्षा मेला में उमड़ी भीड़, मंत्री-सांसद भी पहुंचे

    ग्वालियर में तीन दिवसीय अग्नि सुरक्षा मेला में उमड़ी भीड़, मंत्री-सांसद भी पहुंचे

    ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर मे रविवार को तीन दिवसीय अग्नि सुरक्षा मेला शुरू हुआ। यहा मेला पहले ही दिन से शहरवासियों के आकर्षण का केन्द्र बन गया है।

    ग्वालियर शहर ही नहीं, ग्रामीण अंचल के निवासी भी अग्नि सुरक्षा मेले में पहुँचकर अग्नि दुर्घटना से बचने की बारीकियां सीख रहे हैं। साथ ही मेले में मिल रही विशेष छूट पर अग्नि सुरक्षा उपकरण भी खरीदकर ले जा रहे हैं। सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर एवं सांसद भारत सिंह कुशवाह भी रविवार को अग्नि सुरक्षा मेला पहुँचे। साथ ही उन्होंने अग्नि सुरक्षा उपकरण चलाने की प्रक्रिया समझी और उपकरण भी खरीदे।

    ग्वालियर व्यापार मेला में दस्तकारी हाट (शिल्प बाजार) परिसर में रविवार से शुरू हुआ अग्नि सुरक्षा मेला 31 मार्च तक लगा रहेगा। पुलिस महानिरीक्षक अरविंद कुमार सक्सेना, कलेक्टर रुचिका चौहान, अपर कलेक्टर कुमार सत्यम, नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय व जिला पंचायत के सीईओ सोजान सिंह रावत सहित जिला प्रशासन के अन्य अधिकारी भी अग्नि सुरक्षा मेले में मौजूद रहे।

    मंत्रीद्वय नारायण सिंह कुशवाह व प्रद्युम्न सिंह तोमर एवं सांसद भारत सिंह कुशवाह को कलेक्टर रुचिका चौहान ने अग्नि सुरक्षा मेला में लगी दुकानों का भ्रमण कराया। साथ ही एसडीआरएफ की टीम के माध्यम से आग बुझाने की प्रक्रिया का व्यवहारिक प्रदर्शन (डेमोस्ट्रेशन) भी कराया। मंत्री द्वय एवं सांसद ने जिला प्रशासन द्वारा लगाए गए फायर सेफ्टी मेले की सराहना की।

    तीनों वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों ने जिलेवासियों से अपील की है कि अग्नि सुरक्षा मेले में आकर आग बुझाने की बारीकियां सीखें। साथ ही अपने घर, प्रतिष्ठान, औद्योगिक इकाई इत्यादि के लिये अग्नि सुरक्षा उपकरण भी लेकर जाएं। यदि सभी के घर व प्रतिष्ठानों में अग्निशमन उपकरण होंगे तो आग लगने की आपात स्थिति में प्रारंभिक अवस्था में ही आग पर काबू पाया जा सकता है।

    सांसद कुशवाह ने कहा कि अग्नि सुरक्षा को लेकर इसी प्रकार के जनजागरण कार्यक्रम ग्रामीण अंचल में भी आयोजित किए जाएं। उन्होंने व्यवहारिक रूप से अग्नि सुरक्षा उपकरण चलाने की प्रक्रिया सीखी और डेमोस्ट्रेशन में आग भी बुझाई। सांसद ने कहा कि अग्निशमन यंत्र खरीदने के लिये किसानों को भी प्रोत्साहित किया जाए।

    अग्नि सुरक्षा मेले में आ रहे लोगों को एसडीआरएफ की टीम द्वारा पानी, बिजली व गैर रिसाव से लगने वाली आग बुझाने की प्रक्रिया व्यवहारिक रूप से समझाई जा रही है। सरकारी व निजी अस्पतालों के स्टाफ को विशेष रूप से आग बुझाने की बारीकियां सिखाई जा रही हैं। मेला परिसर के एक हिस्से में आग बुझाने का डेमोस्ट्रेशन भी किया जा रहा है। अग्नि सुरक्षा मेले में घर, प्रतिष्ठान व औद्योगिक इकाईयोंसे संबंधित छोटे से लेकर बड़े अग्निशमन यंत्र विशेष छूट पर उपलब्ध हैं। जिला प्रशासन की पहल पर कंपनियों द्वारा इन उपकरणों पर विशेष छूट दी जा रही है।

  • सीएम डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन: ओडीओपी, शिल्प और पर्यटन को मिलेगी नई गति

    सीएम डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन: ओडीओपी, शिल्प और पर्यटन को मिलेगी नई गति


    भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में वाराणसी में 31 मार्च को एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है यह सम्मेलन निवेश, निर्यात, ओडीओपी, शिल्प और पर्यटन के क्षेत्र में नई दिशा और गति प्रदान करेगा

    इस सम्मेलन के माध्यम से अंतरराज्यीय सहयोग का नया मॉडल गढ़ने की दिशा में निर्णायक पहल की जा रही है सम्मेलन में ओडीओपी, जीआई टैग उत्पाद, पारंपरिक शिल्प, कृषि एवं फूड उत्पादों को ब्रांडिंग, मार्केटिंग और निर्यात से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा साथ ही निवेश और पर्यटन को एकीकृत करते हुए एक व्यापक आर्थिक इकोसिस्टम तैयार करने की योजना है

    कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के अध्ययन भ्रमण से करेंगे इस दौरान क्राउड फ्लो डिजाइन, अधोसंरचना लेआउट और तीर्थयात्री प्रबंधन प्रणालियों का गहन अवलोकन किया जाएगा इसके बाद सम्मेलन में विभिन्न विषयों पर विस्तृत संवाद और कार्यशालाओं के माध्यम से राज्यों के सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा होगी

    एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन से दोनों राज्यों के व्यवसायिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है इसके तहत पारंपरिक शिल्प और कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने के लिए रणनीतियां बनाई जाएंगी निवेशकों को आकर्षित करने और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भी विशेष पहल की जाएगी इस तरह यह सम्मेलन दोनों राज्यों के लिए आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती लाने का एक महत्वपूर्ण अवसर साबित होगा

  • मध्य प्रदेश शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला: हायर सेकेंडरी स्कूल से हटाए गए अतिथि स्पेशल एजुकेटर

    मध्य प्रदेश शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला: हायर सेकेंडरी स्कूल से हटाए गए अतिथि स्पेशल एजुकेटर


    भोपाल। मध्य प्रदेश शिक्षा विभाग ने हायर सेकेंडरी स्कूल में पदस्थ अतिथि स्पेशल एजुकेटर को हटाने का बड़ा फैसला किया है ये स्पेशल एजुकेटर अतिथि शिक्षक के रूप में स्कूलों में दिव्यांग बच्चों को पढ़ाते थे और प्रदेश भर में हजारों ऐसे शिक्षक कार्यरत हैं

    शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि शिक्षा अभियान की आगामी स्वीकृति के संबंध में भारत सरकार से कोई दिशा निर्देश प्राप्त नहीं हुआ इस स्थिति में अतिथि स्पेशल एजुकेटर की सेवाएं 31 मार्च तक ही ली जाएंगी

    पहले आदेश के अनुसार इनकी सेवाएं 30 अप्रैल 2026 तक लेने का निर्देश था, लेकिन इसे तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है आदेश में स्पष्ट किया गया कि 31 मार्च के बाद यदि कोई स्पेशल एजुकेटर पदस्थ पाया जाता है तो उसकी जिम्मेदारी संस्था प्राचार्य और जिला शिक्षा अधिकारी की होगी

    इस फैसले के बाद स्कूलों में दिव्यांग बच्चों की पढ़ाई और शिक्षा संचालन पर असर पड़ सकता है, क्योंकि स्पेशल एजुकेटर बच्चों को विशेष रूप से पढ़ाने और उनकी जरूरतों को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं शिक्षा विभाग के इस कदम को लेकर शिक्षा जगत और अभिभावकों में चिंता का माहौल है

    प्रदेश में अतिथि शिक्षक लंबे समय से सामाजिक और विशेष शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे हैं और उनकी सेवाओं का अचानक समाप्त होना स्कूलों के संचालन में व्यवधान पैदा कर सकता है इस फैसले के बाद संबंधित स्कूलों और जिला प्रशासन को सुनिश्चित करना होगा कि पढ़ाई प्रभावित न हो और बच्चों को आवश्यक शिक्षा समय पर मिलती रहे

  • एक मंडप तीन दुल्हनें अनोखी शादी ने मचाया तहलका मध्यप्रदेश से आई चौंकाने वाली कहानी

    एक मंडप तीन दुल्हनें अनोखी शादी ने मचाया तहलका मध्यप्रदेश से आई चौंकाने वाली कहानी

    अलीराजपुर । मध्यप्रदेश के अलीराजपुर जिले के नानपुर गांव से सामने आई एक अनोखी शादी इन दिनों पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है जहां एक शख्स ने अपनी एक नहीं बल्कि तीन प्रेमिकाओं के साथ एक ही मंडप में सात फेरे लेकर सबको हैरान कर दिया। यह शादी सिर्फ एक निजी समारोह नहीं रही बल्कि सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होती हुई एक ऐसी कहानी बन गई जिसने परंपरा समाज और रिश्तों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

    समरथ मौर्य नाम के इस व्यक्ति ने अपनी तीनों प्रेमिकाओं के साथ जनजातीय रीति रिवाजों के अनुसार विवाह किया। यह विवाह एक दिन का नहीं बल्कि पूरे तीन दिनों तक चलने वाला आयोजन था जिसमें गांव के सैकड़ों लोग शामिल हुए और इस अनोखे पल के गवाह बने। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि इस शादी में उनके छह बच्चे भी शामिल हुए जिन्होंने अपने पिता की बारात में जमकर नृत्य किया और इस आयोजन को एक अलग ही रंग दे दिया।

    बताया जाता है कि समरथ मौर्य का अपनी पहली प्रेमिका के साथ रिश्ता साल 2003 से जुड़ा हुआ था और समय के साथ बाकी दो महिलाएं भी उनके जीवन का हिस्सा बन गईं। पिछले करीब 15 वर्षों से ये सभी एक साथ लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे थे और एक परिवार की तरह जीवन बिता रहे थे। लंबे समय तक बिना शादी के साथ रहने के बाद आखिरकार उन्होंने सामाजिक मान्यता और पारिवारिक पहचान के लिए विवाह करने का निर्णय लिया।

    इस फैसले के पीछे दो मुख्य कारण सामने आए हैं। पहला यह कि उनके बच्चों को समाज में किसी तरह की असहज स्थिति का सामना न करना पड़े और उन्हें एक स्पष्ट पहचान मिल सके। दूसरा कारण जनजातीय परंपराओं से जुड़ा हुआ है जहां किसी भी धार्मिक या सामाजिक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए विवाहित होना आवश्यक माना जाता है। ऐसे में इस परिवार ने अपने रिश्ते को औपचारिक रूप देने का रास्ता चुना।

    इस अनोखी शादी को लेकर कानूनी पहलुओं पर भी चर्चा तेज हो गई है। सामान्य परिस्थितियों में एक से अधिक विवाह भारतीय कानून के तहत मान्य नहीं होते लेकिन जनजातीय समुदायों को उनके पारंपरिक रीति रिवाजों के अनुसार कुछ विशेष छूट दी गई है। इसी वजह से यह विवाह उस समाज की परंपराओं के अंतर्गत वैध माना जा रहा है।

    सोशल मीडिया पर इस शादी की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। कोई इसे प्रेम और जिम्मेदारी का उदाहरण बता रहा है तो कोई इसे सामाजिक मान्यताओं के खिलाफ मानकर सवाल उठा रहा है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम ने एक बात साफ कर दी है कि भारत के अलग अलग हिस्सों में परंपराएं और सामाजिक संरचनाएं आज भी विविधता से भरी हुई हैं जहां रिश्तों को देखने का नजरिया भी अलग अलग हो सकता है।

    यह शादी अब सिर्फ एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं रही बल्कि एक ऐसी कहानी बन गई है जो यह दिखाती है कि बदलते समय के बीच भी परंपराएं किस तरह लोगों के जीवन को प्रभावित करती हैं और कैसे लोग अपने हालात और सामाजिक जरूरतों के अनुसार फैसले लेते हैं।

  • युद्ध का सीधा असर इंदौर के उद्योगों पर 30 फीसदी तक महंगा कच्चा माल शटडाउन की आशंका

    युद्ध का सीधा असर इंदौर के उद्योगों पर 30 फीसदी तक महंगा कच्चा माल शटडाउन की आशंका


    इंदौर । मध्यप्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों पर इज़राइल ईरान संघर्ष का असर अब साफ तौर पर दिखाई देने लगा है जहां कच्चे माल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी और सप्लाई में बाधा ने उद्योगों के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। खासतौर पर इंदौर जैसे बड़े औद्योगिक केंद्रों में हालात तेजी से बदल रहे हैं और कई यूनिट्स अब उत्पादन घटाने या सीमित करने को मजबूर हो गई हैं।

    उद्योग जगत के मुताबिक कच्चे माल की कीमतों में 20 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है जबकि लॉजिस्टिक लागत 4 से 5 गुना तक बढ़ चुकी है। इसका सीधा असर उत्पादन लागत पर पड़ रहा है जिससे तैयार उत्पाद महंगे हो रहे हैं और बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है। स्थिति यह है कि 10 से 15 प्रतिशत उद्योग अब दो शिफ्ट की बजाय केवल एक शिफ्ट में ही काम कर रहे हैं जबकि कुछ जगहों पर शटडाउन की नौबत बनती दिख रही है।

    सबसे ज्यादा असर फार्मा इंडस्ट्री पर देखा जा रहा है जहां दवाइयों के निर्माण में उपयोग होने वाले कच्चे माल के दाम तेजी से बढ़े हैं। पैरासिटामॉल जैसे सामान्य उत्पाद के कच्चे पाउडर की कीमत एक ही दिन में 290 रुपए से बढ़कर 360 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई। इसके अलावा प्लास्टिक दाना और अन्य पैकेजिंग सामग्री भी महंगी हो चुकी है जिससे उत्पादन लागत और बढ़ गई है।

    इंदौर के पीथमपुर सांवेर रोड और पालदा जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित हजारों उद्योगों की लगभग 60 प्रतिशत निर्भरता मिडिल ईस्ट से आने वाले कच्चे माल पर है। बहरीन कतर और सऊदी अरब जैसे देशों से बल्क ड्रग्स और पेट्रोकेमिकल्स की सप्लाई प्रभावित होने के कारण उत्पादन पर सीधा असर पड़ा है। वहीं स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय शिपिंग भी प्रभावित हुई है जिससे चीन और यूरोप से आने वाला माल भी समय पर नहीं पहुंच पा रहा।

    एक तरफ जहां कच्चे माल की कमी है वहीं दूसरी ओर उसकी कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। इससे उद्योगों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। फुटवियर और प्लास्टिक उद्योगों में लागत 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ गई है जबकि मुनाफा सीमित होने के कारण कारोबारी नुकसान की स्थिति में पहुंच रहे हैं।

    एलपीजी की कमी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। उद्योगों को अब पीएनजी पर निर्भर होना पड़ रहा है और गैस कंपनियों ने उधार की सुविधा भी बंद कर दी है जिससे तत्काल भुगतान का दबाव बढ़ गया है। इसके अलावा कंटेनर भाड़ा 5 गुना तक बढ़ने और बीमा मिलने में दिक्कतों के कारण एक्सपोर्ट भी प्रभावित हो रहा है।

    उद्योग संगठनों का कहना है कि यदि हालात अगले 10 से 15 दिनों तक नहीं सुधरे तो कई फैक्ट्रियों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ सकता है। खासकर फार्मा और केमिकल सेक्टर में स्थिति ज्यादा संवेदनशील है क्योंकि इनकी निर्भरता आयातित कच्चे माल पर अधिक है।

    कुल मिलाकर वैश्विक तनाव का यह असर अब स्थानीय उद्योगों तक पहुंच चुका है और यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो इसका प्रभाव न केवल उत्पादन बल्कि रोजगार और बाजार पर भी गहराई से पड़ सकता है।

  • पानी और विकास की डबल डोज इंदौर दौरे पर सीएम मोहन यादव देंगे हजारों करोड़ की योजनाओं की सौगात

    पानी और विकास की डबल डोज इंदौर दौरे पर सीएम मोहन यादव देंगे हजारों करोड़ की योजनाओं की सौगात


    इंदौर । मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री सीएम मोहन आज इंदौर दौरे पर रहेंगे जहां वे शहर को विकास की कई बड़ी सौगात देने जा रहे हैं। संकल्प से समाधान अभियान के तहत दशहरा मैदान में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होकर वे विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को लाभ वितरित करेंगे और साथ ही शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण परियोजनाओं का भूमिपूजन भी करेंगे।

    इस दौरे का सबसे अहम हिस्सा नर्मदा पेयजल परियोजना के चौथे चरण का भूमिपूजन है जिसे शहर के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तेजी से बढ़ती आबादी और पानी की बढ़ती मांग को देखते हुए यह परियोजना इंदौर के लिए राहत का बड़ा माध्यम बनेगी। वर्तमान में शहर की जलापूर्ति नर्मदा नदी पर आधारित है जहां से लगभग 70 किलोमीटर दूर से पानी पंप कर शहर तक पहुंचाया जाता है।

    अब अमृत 2.0 योजना के तहत जल आपूर्ति को और अधिक सुदृढ़ और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। इस योजना के तहत शहर की जल क्षमता को वर्तमान स्तर से बढ़ाकर आने वाले वर्षों की जरूरतों के अनुरूप विकसित किया जाएगा। अनुमान है कि 2040 तक इंदौर की आबादी करीब 58 लाख से अधिक हो जाएगी जिसके लिए 1200 एमएलडी से ज्यादा पानी की आवश्यकता होगी। ऐसे में यह परियोजना भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है।

    भूमिपूजन के तहत कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर कार्य शुरू किए जाएंगे जिनमें लंबी पाइपलाइन बिछाना, आधुनिक टनल निर्माण और पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए क्लोरिनेशन सिस्टम की स्थापना शामिल है। इसके अलावा शहर में नए ओवरहेड टैंक बनाए जाएंगे और पुराने टैंकों का सुदृढ़ीकरण किया जाएगा जिससे पानी का वितरण अधिक प्रभावी और सुचारू हो सके।

    इस परियोजना के जरिए लाखों घरों तक नए जल कनेक्शन दिए जाएंगे और स्मार्ट वाटर मीटर लगाए जाएंगे जिससे 24 घंटे दबावयुक्त जलापूर्ति सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। खास बात यह है कि शहर में शामिल नए गांवों तक भी पहली बार नियमित जलापूर्ति पहुंचाई जाएगी जिससे वहां के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।

    इसके साथ ही मुख्यमंत्री सिरपुर तालाब के संरक्षण से जुड़ी एक महत्वपूर्ण परियोजना का लोकार्पण भी करेंगे। इस पहल के तहत सीवेज को सीधे तालाब में जाने से रोका जाएगा और आधुनिक तकनीक से उसका शोधन किया जाएगा। इससे न सिर्फ तालाब का पानी साफ होगा बल्कि उपचारित जल का उपयोग शहर के बगीचों और अन्य कार्यों में भी किया जा सकेगा।

    संकल्प से समाधान अभियान के तहत भी इंदौर जिले में बड़ी सफलता मिली है जहां लाखों आवेदनों का निराकरण कर हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया गया है। इस अभियान के जरिए सरकार ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि हर पात्र व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचे।

    कुल मिलाकर यह दौरा इंदौर के लिए विकास की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है जिसमें बुनियादी सुविधाओं से लेकर जल प्रबंधन तक कई अहम क्षेत्रों में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

  • घर से निकला फिर नहीं लौटा युवक 4 दिन बाद नदी में मिला शव डिप्रेशन एंगल की जांच

    घर से निकला फिर नहीं लौटा युवक 4 दिन बाद नदी में मिला शव डिप्रेशन एंगल की जांच


    डबरा मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश के डबरा क्षेत्र से एक दुखद और रहस्यमयी मामला सामने आया है जहां चार दिन से लापता युवक का शव सिंध नदी के स्टॉप डैम के पास तैरता हुआ मिला है। इस घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और परिवार में गहरा मातम पसरा हुआ है।

    जानकारी के अनुसार आरुषि गांव निवासी 21 वर्षीय सूर्यभान रावत 23 मार्च की सुबह अचानक घर से लापता हो गया था। बताया जा रहा है कि वह अपना मोबाइल फोन घर पर ही छोड़कर निकला था जिससे परिजनों की चिंता और बढ़ गई थी। जब देर तक उसका कोई पता नहीं चला तो परिवार ने उसकी तलाश शुरू की लेकिन कहीं कोई सुराग नहीं मिला।

    अगले दिन 24 मार्च को उसकी बाइक सिंध नदी के पुल पर खड़ी मिली जिसके बाद मामला और गंभीर हो गया। इस सूचना के बाद पुलिस और बचाव टीम सक्रिय हो गई और राज्य आपदा आपातकालीन प्रतिक्रिया बल की टीम ने नदी में युवक की तलाश शुरू की। बोट और अन्य संसाधनों की मदद से लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया गया लेकिन शुरुआती दिनों में कोई सफलता नहीं मिली।

    इसी बीच इलाके के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली गई जिसमें सूर्यभान करीब चार घंटे तक इधर उधर घूमता हुआ दिखाई दिया। इसके बाद उसका कोई सुराग नहीं मिला जिससे परिजनों की चिंता और गहरी होती चली गई। आखिरकार चार दिन बाद युवक का शव सिंध नदी के स्टॉप डैम के पास तैरता हुआ मिला। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्रारंभिक तौर पर यह मामला आत्महत्या से जुड़ा हुआ प्रतीत हो रहा है लेकिन पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है।

    परिजनों के अनुसार सूर्यभान लंबे समय से मानसिक तनाव में था और डिप्रेशन से जूझ रहा था। बताया गया है कि करीब छह महीने पहले भी उसने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या का प्रयास किया था लेकिन समय पर इलाज मिलने से उसकी जान बच गई थी। इस बार हालांकि वह बच नहीं सका और परिवार को गहरा सदमा देकर चला गया।

    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के असली कारणों का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा। फिलहाल परिजनों से पूछताछ की जा रही है और मामले की हर एंगल से जांच जारी है। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता और समय पर मदद कितनी जरूरी है। एक युवा जिंदगी का इस तरह खत्म हो जाना न केवल परिवार बल्कि समाज के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है।