Category: Madhya Pradesh

  • महाशिवरात्रि से पहले खजुराहो में वन विभाग ने संभाली सुरक्षा, मगरमच्छ को सुरक्षित स्थान पर किया स्थानांतरित

    महाशिवरात्रि से पहले खजुराहो में वन विभाग ने संभाली सुरक्षा, मगरमच्छ को सुरक्षित स्थान पर किया स्थानांतरित


    खजुराहो में शिवसागर तालाब पिछले कुछ समय से मगरमच्छ के लगातार दिखाई देने से चर्चा में था। यह तालाब भारतीय पुरातत्व विभाग के अधीन आता है और शहर के पर्यटन स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। मगरमच्छ की उपस्थिति ने स्थानीय लोगों और बाहर से आने वाले पर्यटकों के बीच भय पैदा कर दिया था। खासकर विदेशी पर्यटक इस दृश्य से डरे हुए थे और पर्यटन गतिविधियों पर असर पड़ने की संभावना थी।

    स्थानीय लोगों की शिकायत और सुरक्षा की गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने 3 फरवरी को आयोजित मेला महाशिवरात्रि की बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि शिवरात्रि से पहले तालाब से मगरमच्छ को निकालकर सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाए।

    इस आदेश के बाद वन मंडल अधिकारी ऋषि मिश्रा के नेतृत्व में वन विभाग और जिला आपदा प्रबंधन अमला, जिला छतरपुर ने संयुक्त रूप से कार्य शुरू किया। उन्होंने पर्यटकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए तालाब का निरीक्षण किया और मगरमच्छ को सुरक्षित रूप से पकड़ने की योजना बनाई।

    वन विभाग की टीम ने सावधानी और कुशलता के साथ मगरमच्छ को पकड़कर उसके जीवन और पर्यावरण दोनों की सुरक्षा का ध्यान रखा। तालाब से मगरमच्छ को हटाकर अन्य सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया। इस कार्य के पूरा होने के बाद पर्यटकों और स्थानीय लोगों में राहत की लहर दौड़ गई। अब शिवसागर तालाब के आसपास के क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियां बिना किसी डर के हो सकेंगी।

    वन विभाग ने कहा कि यह कार्य पर्यावरण और पर्यटन दोनों के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण था। मगरमच्छ को केवल खतरनाक माना जाता है, लेकिन उसका जीवन भी संरक्षण योग्य है। इस कार्रवाई ने यह सुनिश्चित किया कि पर्यटक सुरक्षित रहें और तालाब का पारिस्थितिकी संतुलित रहे।

    स्थानीय व्यापारियों और होटल संचालकों ने भी इस पहल की सराहना की। उनका कहना था कि मगरमच्छ की वजह से पिछले दिनों पर्यटक डर कर दौरे कम कर रहे थे, लेकिन अब सुरक्षा सुनिश्चित होने से पर्यटन में वृद्धि होगी। वन विभाग ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों को यह भी चेतावनी दी कि तालाब के पास जाते समय सतर्क रहें और वन्यजीवों को परेशान न करें।

    इस तरह, महाशिवरात्रि 2026 से पहले खजुराहो में वन विभाग ने कुशलता से मगरमच्छ को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करके न केवल पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित की बल्कि पर्यटन नगरी की प्रतिष्ठा और स्थानीय विश्वास भी बनाए रखा।

  • भोपाल में महाशिवरात्रि पर हुई पहली किन्नर शंकराचार्य की नियुक्ति, धर्मांतरित किन्नरों की घर वापसी

    भोपाल में महाशिवरात्रि पर हुई पहली किन्नर शंकराचार्य की नियुक्ति, धर्मांतरित किन्नरों की घर वापसी


    भोपाल में महाशिवरात्रि 2026 के पावन अवसर पर एक अनूठा और विवादित धार्मिक आयोजन हुआ। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में देश की पहली किन्नर शंकराचार्य का पट्टाभिषेक संपन्न हुआ, जिसमें हिमांगी सखी को नियुक्त किया गया। इस अवसर पर जगद्गुरु और महामंडलेश्वरों की घोषणा भी की गई।

    कार्यक्रम का आयोजन उस समय सुर्खियों में आया, जब धर्मांतरित किन्नरों की घर वापसी का भी आयोजन किया गया। इस दौरान कुछ मुस्लिम किन्नर वापस हिंदू धर्म में लौटे और शुद्धिकरण के rites संपन्न हुए। इस आयोजन के लिए राजस्थान के पुष्कर पीठ को देश की पहली विवादित किन्नर शंकराचार्य के लिए चुना गया।

    कार्यक्रम में किन्नर अखाड़ा के संस्थापक ऋषि अजय दास भी मौजूद रहे और उन्होंने इस आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हिमांगी सखी के शंकराचार्य बनने के बाद भव्य पट्टाभिषेक संपन्न हुआ और मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठान और मंत्रोच्चारण का माहौल देखने को मिला।

    हालांकि इस नियुक्ति को लेकर धार्मिक समुदाय में विवाद और आलोचना भी सामने आई। साधु संत सन्यासी समिति के कार्यकारी अध्यक्ष स्वामी अनिलानंद ने कहा कि किन्नरों की सनातन धर्म में वापसी को कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन अलग से किन्नर शंकराचार्य बनाना अत्यधिक आपत्तिजनक है। उनके अनुसार, धर्मशास्त्र में केवल चार शंकराचार्य ही मान्य हैं।

    स्वामी अनिलानंद ने आगे कहा कि ऋषि अजय दास इस मामले में पाखंड कर रहे हैं और धर्म का मजाक बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि किन्नरों और उनके नाम पर आर्थिक लाभ लेने का प्रयास किया गया है। इस पर शिकायत दर्ज कराई गई है और धर्म विरोधी कृत्यों और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के मामलों में वैधानिक कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग की गई है।

    इस आयोजन को लेकर सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों में भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आई हैं। कुछ लोग इसे समावेशी धार्मिक पहल मान रहे हैं, जबकि कई धार्मिक विद्वान और समाजिक संगठन इसे धार्मिक परंपरा का उल्लंघन मान रहे हैं।

    भोपाल में आयोजित इस कार्यक्रम ने न केवल धार्मिक दृष्टि से चर्चाओं को जन्म दिया, बल्कि किन्नर समुदाय की धार्मिक पहचान और अधिकारों पर भी ध्यान आकर्षित किया। हिमांगी सखी के शंकराचार्य बनने की प्रक्रिया और धर्मांतरित किन्नरों की वापसी ने समाज में धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक बहस को एक नई दिशा दी है।

    साथ ही, यह मामला यह सवाल उठाता है कि परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जाए और धर्म के अधिकार और मर्यादा के बीच किस तरह की संवेदनशीलता बरती जाए।

  • महाशिवरात्रि पर CM डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के बड़वाले महादेव में की विशेष पूजा, प्रदेश की खुशहाली की कामना

    महाशिवरात्रि पर CM डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के बड़वाले महादेव में की विशेष पूजा, प्रदेश की खुशहाली की कामना


    भोपाल में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपनी आस्था और भक्ति के प्रति गहरी श्रद्धा दिखाई। सुबह के समय मुख्यमंत्री भोपाल के प्राचीन और प्रसिद्ध बड़वाले महादेव मंदिर पहुंचे। यह मंदिर अपने प्राचीन ज्योतिर्लिंग के लिए जाना जाता है और महाशिवरात्रि के दिन यहाँ श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है।

    मुख्यमंत्री ने मंदिर में पहुँचते ही भगवान शिव के दर्शन किए और जलाभिषेक कर आराधना में लीन हो गए। उन्होंने प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली के लिए विशेष प्रार्थना की। इस दौरान वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ रुद्राभिषेक और अन्य अनुष्ठान संपन्न हुए। मंदिर परिसर में मुख्यमंत्री की उपस्थिति ने श्रद्धालुओं के बीच उत्साह और भक्ति का माहौल और बढ़ा दिया।

    पूजा-अर्चना के दौरान CM डॉ. मोहन यादव ने भक्तों के साथ मिलकर ‘हर हर महादेव’ के जयकारे लगाए और सभी को महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि भगवान शिव की भक्ति, समर्पण और आत्मिक शक्ति का महापर्व है। मुख्यमंत्री ने भोलेनाथ से प्रार्थना की कि वे पूरे मध्य प्रदेश पर अपनी कृपा बनाए रखें और राज्य में शांति, समृद्धि एवं विकास का मार्ग प्रशस्त करें।

    महाशिवरात्रि के दिन प्रदेश भर में शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई। उज्जैन के महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर और अन्य प्रमुख मंदिरों में भी लाखों श्रद्धालु दर्शन करने के लिए पहुंचे। भोपाल के बड़वाले महादेव मंदिर में सुबह से ही भक्तों की कतार लगी रही, और मुख्यमंत्री की उपस्थिति से मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक उत्साह देखने को मिला।

    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि भगवान शिव की भक्ति में जीवन को सरल और सकारात्मक बनाने की शक्ति है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में संयम, धर्म और परस्पर सहयोग की भावना बनाए रखें। उन्होंने यह भी कहा कि महाशिवरात्रि केवल पूजा का पर्व नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक जागरूकता और समाज में भाईचारे को बढ़ावा देने का अवसर भी है।

    प्रदेश में सरकार भी धार्मिक स्थलों के सुचारु संचालन और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए तैयारियों में लगी रही। बड़वाले महादेव मंदिर में सुरक्षा और व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा गया ताकि श्रद्धालुओं को बिना किसी परेशानी के दर्शन और पूजा का अवसर मिल सके।

    इस तरह महाशिवरात्रि 2026 पर CM डॉ. मोहन यादव की भक्ति, प्रदेश की खुशहाली की कामना और जनता के बीच सामूहिक उत्साह का अद्भुत नजारा देखने को मिला। यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा और आस्था का संदेश भी देता है।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने डॉ. शंभूदयाल गुरु के निधन पर जताया दुःख

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने डॉ. शंभूदयाल गुरु के निधन पर जताया दुःख

    भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने डॉ. शंभूदयाल गुरु के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि डॉ. गुरु ने संचालक गजेटियर सहित अन्य महत्वपूर्ण दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन किया।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि डॉ. गुरु ने मध्यप्रदेश से संबंधित महत्वपूर्ण अभिलेखों के संरक्षण और पुराने ग्रंथों के पुनर्प्रकाशन में विशेष योगदान दिया। उनके कार्य ने इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    डॉ. यादव ने दिवंगत आत्मा की शांति की कामना करते हुए शोकाकुल परिवार को इस दुःख को सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़वाले महादेव मंदिर में मनाई महाशिवरात्रि, शिव बारात में लिया भाग

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़वाले महादेव मंदिर में मनाई महाशिवरात्रि, शिव बारात में लिया भाग


    भोपाल। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर रविवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के प्राचीन बड़वाले महादेव मंदिर में पहुंचकर शिवभक्तों के साथ पूजा-अर्चना की और महापर्व को उत्साहपूर्वक मनाया। मुख्यमंत्री ने उपस्थित नागरिकों को महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं दी और सभी के साथ इस पर्व की महत्ता को साझा किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंदिर में भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर अभिषेक किया। पूजा के दौरान स्थानीय शिवभक्तों और युवाओं ने पारंपरिक ढंग से डमरू दल की प्रस्तुति दी, जबकि पुलिस बैंड ने भव्य संगीत के माध्यम से कार्यक्रम को और आकर्षक बनाया। मंदिर परिसर भक्तों की उपस्थिति से गुलजार रहा और हर-हर महादेव के जयघोष से वातावरण मंत्रमुग्ध कर देने वाला था।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने शिव बारात का रथ रवाना किया और स्वयं रथ खींचकर बारात की अगुवाई की। स्थानीय नागरिकों ने उत्साह और उमंग के साथ इस बारात में भाग लिया। हर-हर महादेव और जय महाकाल के सामूहिक उद्घोष ने मंदिर परिसर को भक्तिमय माहौल में बदल दिया।

    महाशिवरात्रि कार्यक्रम में अनेक जनप्रतिनिधि और शिव भक्त भी शामिल हुए। इनमें सांसद श्री आलोक शर्मा, भोपाल की महापौर श्रीमती मालती राय, विधायक श्री भगवानदास सबनानी, श्री रविंद्र यति, श्री राहुल कोठारी सहित महाशिवरात्रि पर्व आयोजन समिति के पदाधिकारी और सदस्य मौजूद थे। सभी ने मिलकर इस धार्मिक महोत्सव में भाग लिया और भक्तों के साथ त्योहार का आनंद साझा किया।

    कार्यक्रम के दौरान भक्तों ने न केवल भगवान शिव की पूजा अर्चना की, बल्कि पारंपरिक संस्कृति और धार्मिक उत्सव के महत्व को भी महसूस किया। बड़वाले महादेव मंदिर की भव्य सजावट और आयोजन ने इसे और भी खास बना दिया। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन और भागीदारी ने इस पर्व को और भी प्रभावशाली और यादगार बना दिया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महाशिवरात्रि केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह समाज में भाईचारा, भक्ति और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि पर्व का आनंद ले और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ इसे मनाएं।

    इस तरह भोपाल के प्राचीन बड़वाले महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि का पर्व श्रद्धा, भक्ति और उमंग के साथ मनाया गया। शिवभक्तों की भीड़, पारंपरिक बारात और मुख्यमंत्री की उपस्थिति ने इस अवसर को और भी विशेष बना दिया।

  • राज्यपाल श्री पटेल से केरल के पार्षदों की शिष्टाचार भेंट, भोपाल की स्वच्छता प्रबंधन की सराहना

    राज्यपाल श्री पटेल से केरल के पार्षदों की शिष्टाचार भेंट, भोपाल की स्वच्छता प्रबंधन की सराहना


    भोपाल। राजधानी भोपाल में रविवार को राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल से केरल राज्य के विभिन्न स्थानीय निकायों के पार्षद एवं जनप्रतिनिधियों ने शिष्टाचार भेंट की। लोकभवन में आयोजित इस मुलाकात में राज्यपाल ने सभी का गर्मजोशी से स्वागत किया और उनका परिचय प्राप्त किया। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी उपस्थित थे।

    भेंट के दौरान राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि मध्यप्रदेश भ्रमण पर आए केरल के जनप्रतिनिधि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सबका साथ-सबका विकास के मंत्र के साथ समाज और राष्ट्र की सेवा करें। उन्होंने आग्रह किया कि प्रदेश सरकार द्वारा अपनाए गए नवाचारों और जनकल्याणकारी कार्यों के अनुभवों को अपने क्षेत्रों में लागू करें। उन्होंने स्थानीय शासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनभागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया। राज्यपाल ने कहा कि गरीब, वंचित और जरूरतमंदों की सेवा में आपके प्रयास महत्वपूर्ण हैं, और योजनाओं को अंतिम पंक्ति तक पहुंचाना आपके लिए प्राथमिकता होनी चाहिए।

    केरल के पार्षदों ने मध्यप्रदेश भ्रमण के अनुभव साझा किए। उन्होंने विशेष रूप से भोपाल को देश की स्वच्छतम राजधानी बनाने के लिए किए गए सफाई प्रबंधन कार्यों की सराहना की। इसके साथ ही उन्होंने जल प्रबंधन, स्मार्ट सिटी परियोजनाओं, कचरा निस्तारण और सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में प्रदेश की उपलब्धियों की जानकारी प्राप्त की।

    राज्यपाल ने इस अवसर पर कहा कि स्थानीय निकायों का सशक्त होना राष्ट्र की आधारशिला मजबूत करता है। उन्होंने सुझाव दिया कि अनुभव साझा करने और नवीन तकनीकों को अपनाने से पार्षद अपने क्षेत्रों में विकास और जनकल्याण को अधिक प्रभावी रूप से लागू कर सकते हैं।

    भेंट कार्यक्रम में राजभवन के अधिकारी और प्रदेश में निवासरत मलयाली समाज के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। इस अवसर ने मध्यप्रदेश और केरल के स्थानीय नेतृत्व के बीच आपसी संवाद और अनुभव साझा करने का अवसर प्रदान किया। पारदर्शिता, नवाचार और जनसहभागिता के महत्व पर जोर देते हुए राज्यपाल ने सभी को अपने क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित किया।

    कार्यक्रम के अंत में सभी पार्षदों ने राज्यपाल की सलाह और मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया। यह भेंट कार्यक्रम न केवल औपचारिकता का अवसर था, बल्कि राज्यों के स्थानीय प्रशासन और जनता कल्याण के प्रयासों में अनुभव साझा करने और सीखने का भी महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।

  • ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में महाशिवरात्रि: ब्रह्म मुहूर्त में साधु-संतों ने किए दर्शन, फूलों से सजा परिसर

    ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में महाशिवरात्रि: ब्रह्म मुहूर्त में साधु-संतों ने किए दर्शन, फूलों से सजा परिसर


    खंडवा। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में अद्भुत दृश्य देखने को मिला। रविवार की ब्रह्म मुहूर्त में रात तीन बजे से ही मंदिर परिसर भक्तों और साधु-संतों की उपस्थिति से गुलजार रहा। फूलों से सजे भव्य मंदिर में साधु-संतों ने विशेष दर्शन और पूजा की, जिसके बाद आम श्रद्धालुओं के लिए रात 3:30 बजे मंदिर के पट खुले।भक्तों ने मां नर्मदा में स्नान कर ज्योतिर्लिंग पर जल अर्पित किया। इस अवसर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने पुराने पुल से श्रद्धालुओं को मंदिर की ओर प्रवेश कराया, जबकि नए झूला पुल के माध्यम से बाहर निकाला गया। इस व्यवस्था से श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की गई।

    रात के समय मंगला आरती के बाद मंदिर के कपाट खोले गए। बैंड बाजो की ध्वनि और बम भोले की गूंज के साथ सन्यासी और साधु-संतों ने शोभायात्रा निकाली और सबसे पहले भगवान शिव के दर्शन किए। मंदिर में फूलों की भव्य सजावट ने भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। फूलों से सजा परिसर रात और दिन दोनों समय आकर्षण का केंद्र रहा। मंदिर ट्रस्ट की ओर से दोपहर में भोग आरती का आयोजन भी किया गया। इस दौरान भगवान शिव को 151 किलो मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया। इसके साथ ही तीर्थ नगरी के आश्रमों और नगर के विभिन्न हिस्सों में खिचड़ी और प्रसादी का वितरण किया गया, जिससे श्रद्धालुओं में आनंद और धार्मिक उमंग का माहौल बना रहा।

    मंदिर में यह विश्वास है कि भगवान शिव साक्षात् रूप में ओंकारेश्वर में निवास करते हैं। दिनभर सृष्टि का संचालन करने के बाद वे रात में नर्मदा किनारे विश्राम करते हैं। इसलिए आज मंदिर में चौपड़-पांसे और झूला नहीं सजाया गया और रात में आरती का आयोजन नहीं होगा। महाशिवरात्रि के अवसर पर ओंकारेश्वर में मंदिर प्रशासन और सुरक्षा अधिकारियों ने पूरी तत्परता दिखाई। भारी भीड़ के बावजूद सुव्यवस्थित व्यवस्था और श्रद्धालुओं का सहयोग इसे सफल आयोजन बनाने में सहायक रहा।

    भक्तों ने कहा कि ओंकारेश्वर में ब्रह्म मुहूर्त में दर्शन करने का अनुभव अलौकिक और अद्वितीय रहा। फूलों से सजे मंदिर परिसर, भव्य शोभायात्रा, और नर्मदा स्नान के साथ जल अर्पण ने इस महापर्व की महिमा को और बढ़ा दिया। यह महाशिवरात्रि न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रही, बल्कि भक्तों के लिए आध्यात्मिक अनुभव और उमंग का केंद्र भी बनी। मंदिर में पवित्र माहौल, सुरक्षा और सुव्यवस्था ने इसे श्रद्धालुओं के लिए यादगार अवसर बना दिया।

  • पानी आया, लेकिन बिल आ रहे 3 साल से: इंदौर महापौर की जनता चौपाल में फूटा गुस्सा

    पानी आया, लेकिन बिल आ रहे 3 साल से: इंदौर महापौर की जनता चौपाल में फूटा गुस्सा


    इंदौर। नर्मदा लाइन के पानी के आगमन के बाद भी नगर निगम के पुराने बिलों की उलझन और जल व्यवस्था की समस्याएं जनता के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। शनिवार को वार्ड 41 में महापौर पुष्यमित्र भार्गव द्वारा आयोजित जनता चौपाल में नागरिकों ने अपनी नाराजगी और समस्याएं खुलेआम रखीं। चौपाल में शहरवासियों ने बताया कि नर्मदा लाइन के पानी के बावजूद नगर निगम लगातार तीन साल से पेयजल बिल भेज रहा है, जिससे आम लोगों पर वित्तीय बोझ पड़ा है। कुछ निवासियों ने कहा कि उन्होंने समय पर बिल भरे, लेकिन निगम की लापरवाही और पुराने रिकॉर्डों की गलतियों के कारण परेशानी अभी भी बनी हुई है।

    इस अवसर पर जनता ने महापौर के सामने ड्रेनेज और सड़कों की समस्याओं को भी उठाया। कई इलाकों में सड़कें टूटी हुई हैं और बारिश या पानी के रिसाव से वहां की स्थिति और खराब हो गई है। लोगों ने कहा कि कई बार शिकायत करने के बावजूद भी निगम ने ठोस कदम नहीं उठाए, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ है। विशेष रूप से भागीरथपुरा कांड के डेढ़ महीने बाद भी शहर में पेयजल की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ है। गणराज नगर के एक स्कूली छात्र ने महापौर से सीधे कहा कि नर्मदा लाइन के पानी में अब भी गंदगी मिल रही है। इस पर महापौर ने सुधार के निर्देश देने का आश्वासन दिया।

    जनता चौपाल के दौरान महापौर ने जनता से संवाद करते हुए कहा कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया जा रहा है और जल्द समाधान के प्रयास किए जाएंगे। हालांकि, लोगों का गुस्सा निगम की लगातार लापरवाही और पुराने बिलों के कारण बढ़ा हुआ था। कई निवासी इस बात पर असंतोष व्यक्त कर रहे थे कि पानी तो अब उपलब्ध है, लेकिन पिछले तीन साल के बिल अभी भी लोगों के घरों में आ रहे है विशेषज्ञों का मानना है कि नगर निगम को तकनीकी सुधार और डेटा अपडेट पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। साथ ही जल गुणवत्ता की निगरानी और शिकायत निवारण प्रणाली को तेज करने की आवश्यकता है।

    इस चौपाल ने यह भी दिखा दिया कि शहर में सुधार की दिशा में कदम उठाने के बावजूद नागरिकों की अपेक्षाएं बढ़ गई हैं। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने आश्वासन दिया कि जल आपूर्ति, बिल प्रणाली और सड़क-ड्रेनेज जैसी समस्याओं का निराकरण प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। शहरवासियों की चिंता और नाराजगी यह संकेत देती है कि इंदौर निगम को अपनी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, तेजी और जवाबदेही लाने की आवश्यकता है। जनता चौपाल ने नागरिकों को अपनी बात सीधे महापौर तक पहुँचाने का अवसर दिया और उम्मीद जताई कि जल्द ही इन समस्याओं का स्थायी समाधान होगा।

  • उज्जैन महाकाल मंदिर में टीम इंडिया की जीत के लिए विशेष रुद्राभिषेक

    उज्जैन महाकाल मंदिर में टीम इंडिया की जीत के लिए विशेष रुद्राभिषेक


    उज्जैन । T20 वर्ल्ड कप के रोमांचक मुकाबले से पहले आज भारत-पाकिस्तान के बीच होने वाले मुकाबले को लेकर देशभर में उत्साह चरम पर है। इसी बीच उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में टीम इंडिया की जीत के लिए विशेष पूजा का आयोजन किया गया। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर मंदिर में पुजारियों ने गर्भगृह में विशेष रूप से भगवान महाकाल का पूजन और रुद्राभिषेक किया।

    पूजा के दौरान भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों की फोटो बाबा महाकाल के चरणों में रखी गई, और उनके लिए विशेष वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विजय की कामना की गई। पुजारियों ने मंत्रों और आराधना के माध्यम से यह प्रार्थना की कि भारतीय टीम इस महत्त्वपूर्ण मुकाबले में सफलता अर्जित करे और पाकिस्तान पर करारी जीत हासिल हो।

    मंदिर में उपस्थित श्रद्धालुओं ने भी पूजा में भाग लिया और इस अवसर को देशभक्ति और खेल प्रेम का अनूठा संगम बताया। रुद्राभिषेक के दौरान गर्भगृह में चल रही मंत्रोच्चार की गूंज ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। पुजारियों ने कहा कि इस प्रकार की पूजा से खिलाड़ियों के मनोबल और देशवासियों के उत्साह में वृद्धि होती है।

    भारत-पाकिस्तान मुकाबला हमेशा ही क्रिकेट प्रेमियों के लिए खास होता है, और T20 वर्ल्ड कप जैसे बड़े आयोजन में इसका रोमांच और भी बढ़ जाता है। इसी रोमांच को देखते हुए देशभर के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चन की जा रही है। उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर भी इस श्रृंखला में शामिल हुआ और भारतीय टीम की विजय के लिए विशेष रूप से भगवान महाकाल की उपासना की गई।

    मंदिर प्रशासन ने बताया कि इस अवसर पर सुरक्षा और व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा गया था, ताकि पूजा-संस्कार और खेल प्रेम का यह संगम सुरक्षित और सुचारू रूप से संपन्न हो सके। कई श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए और उन्होंने अपने विश्वास और आस्था के साथ टीम इंडिया के लिए विजय की प्रार्थना की।

    क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह आयोजन उत्साह और आस्था का प्रतीक बन गया है। उज्जैन महाकाल मंदिर की पावन गलियों में मंत्रों की ध्वनि और भारतीय टीम की जीत के लिए किये जा रहे विशेष रुद्राभिषेक ने माहौल को गरिमा और उमंग से भर दिया।

    इस प्रकार महाकालेश्वर मंदिर ने न केवल धार्मिक महत्व को जीवित रखा, बल्कि खेल और देशभक्ति के प्रति श्रद्धा को भी उजागर किया। आज का दिन भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के लिए यादगार बन गया है, और उम्मीद जताई जा रही है कि टीम इंडिया के लिए यह पूजा शुभ और फलदायी सिद्ध होगी।

  • ग्वालियर के डॉ. श्रीवास्तव ने किया देहदान प्रदेश सरकार के निर्णय अनुसार दिया गया गार्ड ऑफ़ ऑनर

    ग्वालियर के डॉ. श्रीवास्तव ने किया देहदान प्रदेश सरकार के निर्णय अनुसार दिया गया गार्ड ऑफ़ ऑनर


    द्वारा गार्ड ऑफ़ ऑनर दिया जाता है। ग्वालियर में लम्बे समय तक शासकीय चिकित्सक रहे डॉ. अरुण श्रीवास्तव का शुक्रवार की रात लम्बी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनकी इच्छा अनुरूप उनके परिजनों ने उनकी पार्थिव देह को गजराराजा मेडिकल कॉलेज को दान कर दिया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशानुसार ग्वालियर कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने पार्थिव देह को गार्ड ऑफ़ ऑनर देने के लिये आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित किये। निर्देशानुसार डॉ. श्रीवास्तव की पार्थिव देह को ग्वालियर के गांधीनगर में गार्ड ऑफ़ ऑनर दिया गया। गार्ड ऑफ़ ऑनर के बाद दिवंगत डॉ. श्रीवास्तव के परिजनों ने गजराराजा मेडिकल कॉलेज पहुँचकर देहदान की औपचारिकताएं पूरी की।