Category: Madhya Pradesh

  • MP में 16 फरवरी के बाद करवट बदलेगा मौसम, बादल छाने की संभावना, दिन गर्म-रातें रहेंगी ठंडी

    MP में 16 फरवरी के बाद करवट बदलेगा मौसम, बादल छाने की संभावना, दिन गर्म-रातें रहेंगी ठंडी



    भोपाल। मध्य प्रदेश के मौसम में 16 फरवरी के बाद एक बार फिर बदलाव देखने को मिल सकता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टरबेंस) के असर से राज्य में बादल छा सकते हैं। फिलहाल, भोपाल, इंदौर और अन्य शहरों में दिन का तापमान बढ़ा हुआ है, जबकि पचमढ़ी, खजुराहो और कटनी में रातें काफी ठंडी बनी हुई हैं। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, फरवरी के इस महीने में मौसम का यह मिजाज जारी रहेगा। दिन में गर्मी, रातों में ठंडक रहेगी, लेकिन तेज सर्दी और घना कोहरा नहीं रहेगा।

    पश्चिमी विक्षोभ का असर
    सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि वर्तमान में वेस्टर्न डिस्टरबेंस के चलते कुछ जिलों में हल्के बादल हैं। 16 फरवरी से नया सिस्टम पश्चिमी हिमालय क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है, जिससे प्रदेश में बादल छाए रह सकते हैं और न्यूनतम तापमान में 2-3 डिग्री की वृद्धि हो सकती है।

    हल्की सर्दी का दौर जारी
    मौसम विभाग के अनुसार, फिलहाल पहाड़ों में बर्फबारी हो रही है। सिस्टम के गुजरने और बर्फ पिघलने के बाद राज्य में मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा और हल्की सर्दी का एक और दौर आ सकता है।

    दिन और रात का तापमान
    15 फरवरी को दिन का तापमान भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, बैतूल, धार, गुना, नर्मदापुरम, खंडवा, खरगोन, रतलाम, दमोह, खजुराहो, मंडला, नरसिंहपुर, सागर और सिवनी में 30 डिग्री के पार रहा। सबसे अधिक 33.5 डिग्री खंडवा में दर्ज किया गया।

    रात के तापमान की बात करें तो अधिकांश शहरों में 10 डिग्री से ऊपर ही है। कटनी के करौंदी में 8.9 डिग्री, पचमढ़ी में 9.2 डिग्री, खजुराहो में 10.4 डिग्री, राजगढ़ में 10.6 डिग्री, मंदसौर में 10.7 डिग्री, नौगांव-रीवा में 10.8 डिग्री और उमरिया में 10.9 डिग्री दर्ज किया गया। पांच बड़े शहरों में ग्वालियर में सबसे कम तापमान 12.5 डिग्री रहा।

    अगले दो दिनों का पूर्वानुमान
    15 फरवरी – कुछ जिलों में हल्का कोहरा रहेगा, बारिश का कोई अलर्ट नहीं। दिन में बादल छा सकते हैं।
    16 फरवरी – कुछ ही जिलों में हल्का कोहरा रहेगा, बारिश का अलर्ट नहीं। दिन में बादल जरूर छाए रहेंगे।

  • नोहलेश्वर महोत्सव आस्था के साथ संस्कृति, परम्परा और सामाजिक समरसता का उत्सव : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    नोहलेश्वर महोत्सव आस्था के साथ संस्कृति, परम्परा और सामाजिक समरसता का उत्सव : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नोहलेश्वर महादेव की महिमा ऐसी है जो यहाँ एक बार आता है, उसका मन बार-बार यहां आने को करता है। कृपावंत, कृपाशंकर भगवान नोहलेश्वर महादेव के आशीर्वाद से हम प्रदेश के विकास और जनकल्याण के लिए पूरी ऊर्जा और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ रहे हैं। नोहलेश्वर महोत्सव आस्था ही नहीं, स्थानीय संस्कृति, परम्परा और सामाजिक समरसता का भी उत्सव है। हमारी सरकार आस्था के स्थलों के संरक्षण और पर्यटन विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को दमोह जिले के ग्राम नोहटा में नोहलेश्वर महोत्सव मेले के अवसर पर आयोजित किसान सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मेले का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। साथ ही नोहलेश्वर मंदिर परिसर और मेला परिसर में विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई विकास प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्षेत्रीय जनता की मांग पर नोहटा को परीक्षण के उपरांत नगर परिषद बनाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दमोह में 2 करोड़ रूपए की लागत से गीता भवन का निर्माण किया जाएगा। दमोह जिले में बांदकपुर-सेमरखो जलाशय की क्षमता में वृद्धि कर 600 करोड़ रूपए की नई सिंचाई परियोजना विकसित की जाएगी। इससे जिले के 33 गांवों के खेतों को सिंचाई के लिये भरपूर पानी मिलेगा। दमोह में 10 करोड़ रूपए की लागत से वॉटर स्पोर्ट्स, बोट क्लब सहित अन्य पर्यटन गतिविधियों का विकास किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि तेंदूखेड़ा और हटा में खेल गतिविधियों के प्रोत्साहन के लिए नए स्टेडियम बनाए जाएंगे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सुप्रसिद्ध भजन गायिका शहनाज अख्तर का अभिनंदन भी किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार दमोह के साथ पूरे बुंदेलखंड के विकास के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। दमोह के तेंदूखेड़ा में 165 करोड़ की नई योजना को स्वीकृति दी गई है। दमोह के लिए नया फोर लेन भी मंजूर किया गया है। दमोह में पर्यटन के साथ उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि सहित सभी क्षेत्रों में समान रूप से प्रयास कर रही है। दमोह जिले में जैविक खेती के प्रोत्साहन के लिए जैविक हाट लगाए जा रहे हैं। अब तक जिले में 69 जैविक हाटों में 28 लाख रुपए के उत्पादों की बिक्री हुई है। उन्होंने जिला प्रशासन द्वारा किसानों को खाद वितरण के लिए की गई ई-टोकन की व्यवस्था की सराहना की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान हमारे अन्नदाता हैं। उनकी खुशहाली और समृद्धि से ही देश खुशहाल बनेगा। उन्होंने कहा कि हम खेती के साथ पशुपालन को भी प्रोत्साहन दे रहे हैं। कृषि, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण बढ़ाना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पशुपालन से दूध उत्पादन बढ़ेगा। हमने प्रदेश का दूध उत्पादन 9 से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक करने का लक्ष्य रखा है। हमारी सरकार पशुपालन, गौपालन और गौ-संरक्षण की दिशा में निरंतर प्रयासरत है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किसी भी देश के साथ रिश्तों में किसानों के हितों से कभी समझौता नहीं किया। खेतों में किसान और सीमा पर जवान, दोनों हमारे लिए बराबर सम्मान रखते हैं। राज्य सरकार किसानों के स्वास्थ्य का भी विशेष ध्यान रख रही है। विकास कार्यों को गति देने में हमारी सरकार सदैव जनता के साथ खड़ी है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में माताओं-बहनों का स्थान सर्वोपरि है। हम अपने देश को भी माता का दर्जा देते हुए भारत माता कहकर सम्मान देते हैं। माताएं-बहनें हमारे परिवार की गरिमा हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार हमेशा लाड़ली बहनों के साथ है। लाड़ली बहनों को हर महीने 1500 रुपए की सहायता राशि दी जा रही है। वे अपनी मेहनत और निष्ठा से पूरे कुल, खानदान, परिवार का लालन-पालन करती हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दमोह में औद्योगिक प्रक्षेत्र के विकास के साथ क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। सूखे खेत को पानी मिल जाए, तो फसल सोने जैसी हो जाती है। दमोह जिले को देश की पहली नदी जोड़ो केन-बेतवा लिंक परियोजना से सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने पहली बार श्रीकृष्ण जन्माष्ठमी और गीता जयंती को भव्यता के साथ मनाने की शुरुआत की। मध्यप्रदेश, देश का एकमात्र राज्य है, जो विकास के साथ विरासत का भी संरक्षण कर रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नोहटा का नोहलेश्वर मंदिर 1100 साल से अधिक प्राचीन है, जिसे कलचुरी साम्राज्य में महारानी नोहला ने बनवाया था। नोहलेश्वर महोत्सव के आयोजन से इस क्षेत्र के पर्यटन को नई ऊर्जा मिल रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की धरती पर चीतों के पुनर्स्थापन से नया चमत्कार हुआ है। श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में विदेश से 20 चीता लाए गए थे, अब 35 चीते प्रदेश की धरती पर दौड़ लगा रहे हैं, चीतों का परिवार बढ़ रहा है। कुछ दिन पहले मादा चीता आशा ने 5 शावकों को जन्म दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इसी साल जून में नौंरादेही अभयारण्य में चीतों को छोड़ा जाएगा। मध्यप्रदेश टाइगर, चीता, गिद्ध और घड़ियाल के मामले में देश में शीर्ष स्थान पर है। उन्होंने कहा कि वन्य जीव पर्यटन को बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने होम-स्टे योजना बनाई है। इससे लोगों को रोजगार मिलेगा और वे पर्यटकों को अपने घरों में होम-स्टे बनाकर ठहरा सकेंगे। होम-स्टे तैयार करने वाले हितग्राहियों को शासकीय अनुदान भी दिया जा रहा है। उन्होंने होम-स्टे संचालनकर्ताओं से कहा कि जब पर्यटक आएं, तो उनकी अच्छी तरह मेहमाननवाज़ी करे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिन पर्यटन क्षेत्रों में होम-स्टे चल रहे हैं, वहाँ होम-स्टे से ग्रामीणों की आय तेजी से बढ़ रही है।

    संस्कृति, पर्यटन एवं धार्मिक न्यास और धर्मस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र सिंह लोधी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है। मध्यप्रदेश ने ऊर्जा के क्षेत्र में प्रगति करते हुए आज 26 हजार मेगावॉट से अधिक बिजली उपलब्धता सुनिश्चित की है। मध्यप्रदेश में किसानों को ब्याज रहित ऋण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ‘मैन ऑफ आइडियाज’ हैं। उन्होंने अनेक जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारा है।

    दमोह सांसद राहुल सिंह लोधी ने कहा कि दमोह में मेडिकल कॉलेज बनकर तैयार हो रहा है। बुंदेलखंड में सबसे बड़ी समस्या पानी की थी, जो अब दूर होती जा रही है। देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना केन-बेतवा लिंक से दमोह जिले के 300 से अधिक गांवों को सिंचाई और पेयजल के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा। प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश के गरीब, किसान, युवा और नारी, हर वर्ग को सरकार की जनहितैषी योजनाओं का लाभ मिल रहा है। श्याम शिवहरे ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 100 करोड़ की लागत से जागेश्वर महादेव मंदिर के विकास कार्य की घोषणा की थी, जिसका काम जारी है।

    किसान सम्मेलन में पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल, पूर्व मंत्री एवं दमोह विधायक जयंत मलैया, पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रंजीता गौरव पटैल, उपाध्यक्ष श्रीमती मंजु धर्मेन्द्र कटारे, विधायक हटा श्रीमती उमा खटीक, पूर्व मंत्री दशरथ सिंह लोधी, पूर्व सांसद चन्द्रभान सिंह, वरिष्ठ नेता विद्यासागर पांडे, भावसिंह लोधी सहित अन्य जनप्रतिनिधि, लाड़ली बहनें, युवा और बड़ी संख्या में क्षेत्रीय किसान बंधु उपस्थित थे।

  • शहडोल में कोल माफिया का दुस्साहस: रेंजर से मारपीट, वर्दी फाड़ने तक की वारदात, FIR में देरी का आरोप

    शहडोल में कोल माफिया का दुस्साहस: रेंजर से मारपीट, वर्दी फाड़ने तक की वारदात, FIR में देरी का आरोप


    शहडोल । मध्यप्रदेश शहडोल जिले के सोहागपुर थाना क्षेत्र के खितौली बीट में कोल माफिया और अवैध कोयला खनन के खिलाफ कार्रवाई करने पहुंची वन विभाग की टीम पर माफियाओं ने जमकर हमला किया। अवैध उत्खनन रोकने गए वन रेंजर रामनरेश विश्वकर्मा से मारपीट की गई और उनकी वर्दी भी फाड़ दी गई, जिससे विभाग व स्थानीय लोग सकते में हैं। स्थानीय वन अधिकारियों और डीएफओ ने इस घटना को खतरनाक कृत्य बताया है और साथ ही पुलिस पर एफआईआर दर्ज कराने में देरी का गंभीर आरोप लगाया है।

    घटना 11 फरवरी की रात खेतावली गांव के ऊपर टोला में हुई, जब वन विभाग को सूचना मिली कि कुछ ग्रामीणों ने अवैध कोयला लेकर जा रहे ट्रैक्टर को रोक रखा है। ग्रामीणों ने पुलिस और वन विभाग दोनों को सूचना दी थी, लेकिन वन विभाग की टीम पहले मौके पर पहुंची जबकि पुलिस देर से आई। यहीं अवसर पाकर कोल माफिया ने वन टीम पर झपट्टा मारा, रेंजर की गाड़ी रोकी, उन्हें बाहर खींचा और मारपीट की। रेंजर, जैसे-तैसे वहां से भागकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचे।

    डीएफओ श्रद्धा पंद्रे ने आरोप लगाया कि पुलिस की भूमिका संदिग्ध रही। रेंजर घटनास्थल के बाद सोहागपुर थाना पहुंचे और रात लगभग 11 बजे एफआईआर दर्ज कराने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने 24 घंटे से अधिक तक कोई कार्रवाई नहीं की। पुलिस ने तीन बार रेंजर के आवेदन को बदलने को कहा और एफआईआर दर्ज करने में अनावश्यक विलंब किया। इसके अलावा अधिकारियों ने फोन कॉल तक नहीं उठाए, जिससे वन विभाग में नाराजगी और बढ़ गई।

    पुलिस ने अंततः गुरुवार देर रात रेंजर रामनरेश की शिकायत के आधार पर बिट्टन सिंह, चिंटू सिंह, राजू सिंह समेत अन्य के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा, झगड़ा, तोड़फोड़ और गाली-गलौज के आरोप में केस दर्ज किया है।

    ग्रामीणों ने बताया कि यह समस्या नई नहीं है। खितौली इलाके में घोड़सा नाला के पास अवैध कोयले का खनन लंबे समय से चल रहा है। हर दिन दर्जनों ट्रैक्टर अवैध कोयला लेकर गुजरते हैं और ग्रामीणों ने कई बार पुलिस और प्रशासन से शिकायत की, लेकिन पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा के बावजूद कोयले भरे ट्रैक्टर तेज रफ्तार में चलते हैं, जिससे दुर्घटना का जोखिम बना रहता है।

    घटना के दौरान कुछ स्थानीय लोगों ने कहा कि जब ग्रामीणों ने अवैध कोयला ले जा रहे ट्रैक्टर को रोक लिया, तो ट्रैक्टर चालक ने फोन पर सूचना दी और कुछ ही देर में 15-20 लोग हथियारों से लैस वहां पहुंच गए। वे ग्रामीणों को धमकी भी दे रहे थे। इस बीच वन विभाग की टीम पहुंचते ही स्थिति और गंभीर हो गई।

    यह मामला केवल एक व्यक्तिपरक संघर्ष से आगे बढ़कर खनन माफिया के हौसले, अवैध उत्खनन की त्वरित बढ़त और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच सहयोग की कमी को उजागर करता है। स्थानीय लोग और वन विभाग दोनों ही जल्द प्रभावी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, ताकि वन संपदा तथा ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

  • समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिए 20 हजार से अधिक किसानों ने कराया पंजीयन, मंत्री राजपूत ने 7 मार्च तक अपील की

    समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिए 20 हजार से अधिक किसानों ने कराया पंजीयन, मंत्री राजपूत ने 7 मार्च तक अपील की


    इंदौर से शुक्रवार 13 फरवरी 2026 को बड़ी खबर सामने आई है। रबी विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिए अब तक 20 हजार 98 किसानों ने पंजीयन कर लिया है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने किसानों से अपील की है कि निर्धारित समय 7 मार्च तक पंजीयन अवश्य कराएं। उन्होंने बताया कि पंजीयन की प्रक्रिया किसानों के लिए सहज और सुगम बनाई गई है।

    मंत्री राजपूत ने पंजीयन के आंकड़े साझा करते हुए कहा कि इंदौर संभाग में 4084 किसान, उज्जैन में 9524, ग्वालियर में 476, चम्बल में 123, जबलपुर में 788, नर्मदापुरम में 900, भोपाल में 3602, रीवा में 68, शहडोल में 83 और सागर में 450 किसानों ने पंजीयन कर लिया है। उन्होंने किसानों को बताया कि कुल 3186 पंजीयन केंद्र पूरे प्रदेश में बनाए गए हैं, जिससे किसान आसानी से अपनी फसल का पंजीयन करा सकते हैं।

    केंद्र सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए गेहूँ का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2585 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 160 रुपये अधिक है। यह बढ़ोतरी किसानों की आय को स्थिर रखने और फसल के उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    पंजीयन की व्यवस्था दो तरह से की गई है। नि:शुल्क पंजीयन ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत कार्यालयों में स्थापित सुविधा केंद्रों, तहसील कार्यालयों में उपलब्ध सुविधा केंद्रों तथा सहकारी समितियों और सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित केंद्रों पर किया जा सकता है। वहीं सशुल्क पंजीयन एमपी ऑनलाइन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेंटर कियोस्क, लोक सेवा केंद्र और निजी साइबर कैफे पर किया जा सकता है।

    मंत्री राजपूत ने किसानों की सुविधा के लिए कहा कि पिछले वर्ष रबी और खरीफ के पंजीयन में जिन किसानों के मोबाइल नंबर उपलब्ध हैं, उन्हें एसएमएस के माध्यम से पंजीयन की जानकारी भेजी जाएगी। इसके अलावा गांव में डोंडी पिटवाकर ग्राम पंचायतों के सूचना पटल पर पंजीयन संबंधी सूचना प्रदर्शित कराई जाएगी और समिति तथा मंडी स्तर पर बैनर लगवाने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।

    राज्य सरकार की यह पहल किसानों की फसल की बिक्री और आय सुनिश्चित करने के लिए अहम कदम माना जा रहा है। मंत्री राजपूत ने दोहराया कि समय पर पंजीयन कराने से किसान अपने गेहूँ को समर्थन मूल्य पर बेच सकेंगे और फसल का सही मूल्य प्राप्त कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार पूरी तैयारी के साथ किसानों के हितों की रक्षा कर रही है।

    कुल मिलाकर रबी विपणन वर्ष 2026-27 में किसानों के लिए पंजीयन प्रक्रिया सुगम, पारदर्शी और व्यापक स्तर पर उपलब्ध है। अब किसानों की जिम्मेदारी है कि वह 7 मार्च तक अपने पंजीयन को पूरा करें ताकि समर्थन मूल्य का लाभ उन्हें समय पर मिल सके।

  • एमपी की दो ताप विद्युत यूनिट्स का कमाल, चचाई ने 500 दिन और सारनी ने 100 दिन सतत उत्पादन का बनाया रिकॉर्ड

    एमपी की दो ताप विद्युत यूनिट्स का कमाल, चचाई ने 500 दिन और सारनी ने 100 दिन सतत उत्पादन का बनाया रिकॉर्ड


    भोपाल। मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी की दो ताप विद्युत इकाइयों ने बिना रुके लगातार बिजली उत्पादन कर नया इतिहास रच दिया है। मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के अंतर्गत संचालित अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई की 210 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट नंबर-5 ने लगातार 500 दिन विद्युत उत्पादन का कीर्तिमान बनाया है, जबकि सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी STPS की 250 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट नंबर-10 ने 100 दिन निरंतर उत्पादन कर उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की है।

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार चचाई की यूनिट नंबर-5 ने 1 अक्टूबर 2024 से सतत विद्युत उत्पादन जारी रखते हुए 500 दिन का आंकड़ा पार किया। यह उपलब्धि सार्वजनिक क्षेत्र में देश की तीसरी तथा स्टेट सेक्टर में पहली यूनिट के रूप में दर्ज हुई है। इससे पहले सार्वजनिक क्षेत्र में NTPC Limited की दो इकाइयाँ क्रमशः 644 और 559 दिन तक संचालित रह चुकी हैं। इस उपलब्धि को प्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र में मील का पत्थर माना जा रहा है।

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि पावर जनरेटिंग कंपनी के इतिहास में किसी भी यूनिट द्वारा हासिल किया गया यह अब तक का सबसे लंबा निरंतर संचालन रिकॉर्ड है। उन्होंने कहा कि बिना किसी बड़े आउटेज के 500 दिन तक सतत संचालन, अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई की पेशेवर प्रतिबद्धता, तकनीकी दक्षता और कुशल प्रबंधन का प्रमाण है।

    चचाई यूनिट नंबर-5 के प्रदर्शन आंकड़े भी इसकी विश्वसनीयता को दर्शाते हैं। यूनिट ने 98.64 प्रतिशत प्लांट अवेलेबिलिटी फैक्टर 95.30 प्रतिशत प्लांट लोड फैक्टर तथा 9.28 प्रतिशत ऑक्ज़िलरी कंजम्प्शन दर्ज किया है। यह उच्च स्तरीय ऑपरेशनल दक्षता और तकनीकी उत्कृष्टता का संकेत है। इंडेक्स प्लांट टीम द्वारा निरंतर निगरानी और समन्वित प्रयासों से यह उपलब्धि संभव हो सकी।

    वहीं सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी की यूनिट नंबर-10 ने 5 नवम्बर 2025 से लगातार उत्पादन करते हुए 100 दिन का रिकॉर्ड बनाया। इस अवधि में यूनिट ने 100.16 प्रतिशत प्लांट अवेलेबिलिटी फैक्टर, 92.85 प्रतिशत प्लांट लोड फैक्टर तथा 8.23 प्रतिशत ऑक्ज़िलरी खपत दर्ज की। यह आंकड़े यूनिट की परिचालन क्षमता और तकनीकी मजबूती को रेखांकित करते हैं। उल्लेखनीय है कि सारनी की यही यूनिट इसी वित्तीय वर्ष में 200 दिन से अधिक लगातार उत्पादन का रिकॉर्ड भी बना चुकी है।

    प्रदेश में बिजली की बढ़ती मांग के बीच इन दोनों यूनिट्स का निरंतर और स्थिर उत्पादन न केवल ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती देता है, बल्कि औद्योगिक और घरेलू उपभोक्ताओं को भी विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित करता है। यह उपलब्धि राज्य के ऊर्जा क्षेत्र में तकनीकी सुधार, बेहतर रखरखाव और प्रबंधन क्षमता का सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।

  • शिवजलाभिषेक, हल्दी-मेहंदी और शोभा यात्रा: महाशिवरात्रि पर श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब

    शिवजलाभिषेक, हल्दी-मेहंदी और शोभा यात्रा: महाशिवरात्रि पर श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब


    इंदौर । महाकाल रोड पर संस्था नमो नवगृह (शनि) एवं सत्यमेव जयते द्वारा महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर 13 से 15 फरवरी तक भव्य महाशिवरात्रि महाकुंभ का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन के तहत शिव जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और भव्य शोभायात्रा का कार्यक्रम रखा गया है।

    आज शुक्रवार को महोत्सव का श्री गणेश हुआ। संस्था के सरंक्षक पूर्व पार्षद केके यादव और पार्षद शिवम यादव ने बताया कि क्षेत्र में पिछले 22 सालों से यह आयोजन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य सनातन धर्म की ध्वजा बुलंद करना और युवाओं एवं मातृशक्तियों को एकजुट करना है।

    आज शुक्रवार दोपहर 11:30 बजे हल्दी मेहंदी और कुमकुम रस्म का आयोजन शुभ मुहूर्त में हुआ, जिसमें सैकड़ों महिलाएं शामिल रहीं। महाकाल मार्ग पर यह शिव स्तुति का सबसे बड़ा आयोजन है, जिसमें शहर और प्रदेश के सनातन धर्म के प्रेमी भक्तजन उमड़ते हैं।

    मेहंदी रस्म में मातृशक्तियों ने शिव और माता पार्वती के प्रति आस्था व्यक्त की। हाथों में, त्रिशूल और शिवलिंग पर विशेष मेहंदी लगाई गई। इस दौरान भक्तगण भजनों पर झूमते रहे और सभी ने शहर, प्रदेश और देश की खुशहाली की कामना की। मुख्य रूप से श्रीमती मंजू यादव, तारा यादव, अर्चना गायकवाड, रीना यादव, पार्वती चौधरी, मंजू खंडेलवाल, कमलेश केवट, अनीता वाघरकर, आरती कुर्मी, रचना शर्मा, प्रियंका सेन, सावित्री यादव और करिश्मा प्रजापत सहित सैकड़ों महिलाएं शामिल रहीं।

    14 फरवरी, शनिवार को रात्रि जागरण और संगीत कार्यक्रम होगा। इसके बाद 15 फरवरी को बाणेश्वर कुंड से मरीमाता चौराहे तक भव्य शोभा यात्रा निकलेगी। इसमें 10 हजार से अधिक महिलाएं सिर पर कलश लेकर शामिल होंगी। कलश में पांच पवित्र नदियों का जल रहेगा। शोभायात्रा में बग्घी-घोड़े, झांकियां, साधु-संत-महंत, पहलवान, खिलाड़ी और प्रतिभाशाली क्षेत्रीय लोग भी शामिल होंगे, सभी “ॐ नमः शिवाय” का जाप करते हुए चलेंगे।

    इस आयोजन में 100 से अधिक बस्तियों के लोग सहभागी बनेंगे। इसके साथ ही सामाजिक संदेश भी दिए जाएंगे, जैसे बेटी बचाओ, पर्यावरण संरक्षण, जल बचत, यातायात नियमों का पालन और बच्चों को मोबाइल से दूर रखना।इस भव्य महोत्सव ने न केवल धार्मिक आस्था को प्रदर्शित किया, बल्कि मातृशक्तियों और युवाओं को एकजुट करने का संदेश भी दिया।

  • एमपी में ब्यारमा नदी से 33 गांवों तक पानी पहुंचेगा, मुख्यमंत्री ने 600 करोड़ की धुनय धाम परियोजना की दी मंजूरी

    एमपी में ब्यारमा नदी से 33 गांवों तक पानी पहुंचेगा, मुख्यमंत्री ने 600 करोड़ की धुनय धाम परियोजना की दी मंजूरी


    दमोह । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को दमोह जिले के नोहटा में ‘नोहलेश्वर महोत्सव 2026’ और किसान सम्मेलन में पहुंचे। उन्होंने जिले के विकास के लिए कई बड़े ऐलान किए और करोड़ों रुपए की परियोजनाओं की आधारशिला रखी।

    ब्यारमा नदी से 33 गांवों तक पहुंचेगा पानी

    सीएम ने घोषणा की कि दमोह के 33 गांवों के किसानों के लिए ब्यारमा नदी से पानी पहुंचाने हेतु 600 करोड़ रुपए की धुनय धाम सिंचाई परियोजना को मंजूरी दी गई है। इस परियोजना से हजारों किसानों को खेती के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा और क्षेत्र में कृषि गतिविधियों को मजबूती मिलेगी।

    मानस भवन अब ‘गीता भवन’ बनेगा


    मुख्यमंत्री ने दमोह के मानस भवन को गीता भवन के रूप में विकसित करने की भी घोषणा की। इसके कायाकल्प और निर्माण कार्यों के लिए 2 करोड़ रुपए की राशि मंजूर की गई है। सरकार की योजना है कि प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में ऐसे गीता भवन बनाए जाएं, जो सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र होंगे।
    नोहलेश्वर महोत्सव में सांस्कृतिक रंग
    नोहटा में मुख्यमंत्री का स्वागत जल संसाधन मंत्री धर्मेंद्र सिंह और पशुपालन मंत्री लखन पटेल ने किया। सम्मेलन में हजारों किसान और ग्रामीण मौजूद थे। मुख्यमंत्री के संबोधन से पहले मशहूर गायिका शहनाज अख्तर ने भजनों की प्रस्तुति दी, जिससे माहौल भक्तिमय हो गया।

    पर्यटन और अन्य घोषणाएं

    मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने दमोह के राजनगर, सीतानगर और सत्धरू डैम में पर्यटन विकास के लिए भी मंजूरी दी। उन्होंने लाडली बहनों को 1500 रुपए देने की योजना का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर तीखे आरोप लगाए। सीएम ने कहा कि कांग्रेस सरकार के पास पैसे नहीं होने का बहाना बनाती है और साधु-संतों पर गोलियां चलाने जैसे आरोपों को भी उन्होंने विपक्ष पर लगाए।

    बता दें कि‍ नोहटा से मुख्यमंत्री छतरपुर के लिए रवाना होंगे, जहां वे बागेश्वर धाम में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम और कन्या विवाह महोत्सव में भाग लेंगे। यह दौरा दमोह और आसपास के ग्रामीण इलाकों में विकास और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया है।

  • जनगणना 2027 से तय होगी विकास की नई दिशा: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

    जनगणना 2027 से तय होगी विकास की नई दिशा: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव


    भोपाल । भोपाल में आयोजित जनगणना 2027 के प्रथम चरण के राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सम्मेलन को संबोधित करते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि जनगणना केवल आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने की रणनीति तय करने का आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शासन की योजनाएं, संसाधनों का वितरण और नीतिगत निर्णय जनगणना के आंकड़ों पर आधारित होते हैं, इसलिए यह अभियान प्रशासनिक प्रक्रिया से आगे बढ़कर राष्ट्र के भविष्य की दिशा निर्धारित करने वाला कार्य है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत आज विश्व का सर्वाधिक आबादी वाला देश है और ऐसे में जनगणना का महत्व राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक स्तर पर भी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा डिजिटल जनगणना कराने के ऐतिहासिक निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि तकनीक के उपयोग से आंकड़ों की सटीकता और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। सम्मेलन में मुख्य सचिव अनुराग जैन, रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि जनगणना के दौरान गांवों, मजरों टोलों और यहां तक कि बेचिराग गांवों का भी समुचित आंकलन किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सड़क, अस्पताल, स्कूल जैसी आधारभूत संरचनाओं की योजना जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही बनती है। इसलिए कलेक्टर और कमिश्नर समय सीमा में इस कार्य को पूर्ण करें और इसे उच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष रणनीति अपनाने पर भी जोर दिया।

    उन्होंने कहा कि जनगणना प्रशासन की दक्षता, संवेदनशीलता और पारदर्शिता की परीक्षा है। मैदानी अधिकारी इस पूरी प्रक्रिया की सफलता के केंद्र में हैं। राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किए जाने का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कृषि योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन, दलहन तिलहन उत्पादन वृद्धि और नरवाई जलाने की घटनाओं को शून्य करने के प्रयासों पर बल दिया। साथ ही खनिज, पंजीयन और आबकारी से जुड़े राजस्व लक्ष्यों को समय पर प्राप्त करने के निर्देश भी दिए।

    मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा कि चुनाव और जनगणना प्रशासनिक दृष्टि से सबसे चुनौतीपूर्ण कार्यों में हैं। इस बार तकनीक और जीआईएस प्रणाली के उपयोग से आंकड़े शीघ्र उपलब्ध होंगे। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में लगभग 1 लाख 27 हजार मजरे टोले हैं, जिनका सटीक विवरण भविष्य की योजना निर्माण में सहायक होगा। उन्होंने प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत रखने और आमजन में जनगणना के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।

    जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा कि जनगणना संवैधानिक दायित्व होने के साथ लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार स्तंभ है। विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों का निर्धारण जनसंख्या के आधार पर होता है। इस बार पहली बार डिजिटल माध्यम से जनगणना होगी और नागरिकों को स्व गणना का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा, जिससे वे मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा जनगणना कार्य को उच्च प्राथमिकता देने की सराहना की।

    जनगणना 2027 दो चरणों में आयोजित होगी। प्रथम चरण में 1 मई से 30 मई 2027 तक मकान सूचीकरण किया जाएगा, जिसमें मकानों की स्थिति, सुविधाएं और परिसंपत्तियों का विवरण एकत्रित होगा। द्वितीय चरण में फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना होगी, जिसमें आयु, लिंग, वैवाहिक स्थिति, धर्म, दिव्यांगता, मातृभाषा, साक्षरता, शैक्षणिक योग्यता, आर्थिक गतिविधि, प्रवास और प्रजननता से संबंधित जानकारी संकलित की जाएगी।

     भोपाल में आयोजित जनगणना 2027 के प्रथम चरण के राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सम्मेलन को संबोधित करते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि जनगणना केवल आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने की रणनीति तय करने का आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शासन की योजनाएं, संसाधनों का वितरण और नीतिगत निर्णय जनगणना के आंकड़ों पर आधारित होते हैं, इसलिए यह अभियान प्रशासनिक प्रक्रिया से आगे बढ़कर राष्ट्र के भविष्य की दिशा निर्धारित करने वाला कार्य है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत आज विश्व का सर्वाधिक आबादी वाला देश है और ऐसे में जनगणना का महत्व राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक स्तर पर भी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा डिजिटल जनगणना कराने के ऐतिहासिक निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि तकनीक के उपयोग से आंकड़ों की सटीकता और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। सम्मेलन में मुख्य सचिव अनुराग जैन, रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि जनगणना के दौरान गांवों, मजरों टोलों और यहां तक कि बेचिराग गांवों का भी समुचित आंकलन किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सड़क, अस्पताल, स्कूल जैसी आधारभूत संरचनाओं की योजना जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही बनती है। इसलिए कलेक्टर और कमिश्नर समय सीमा में इस कार्य को पूर्ण करें और इसे उच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष रणनीति अपनाने पर भी जोर दिया।

    उन्होंने कहा कि जनगणना प्रशासन की दक्षता, संवेदनशीलता और पारदर्शिता की परीक्षा है। मैदानी अधिकारी इस पूरी प्रक्रिया की सफलता के केंद्र में हैं। राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किए जाने का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कृषि योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन, दलहन तिलहन उत्पादन वृद्धि और नरवाई जलाने की घटनाओं को शून्य करने के प्रयासों पर बल दिया। साथ ही खनिज, पंजीयन और आबकारी से जुड़े राजस्व लक्ष्यों को समय पर प्राप्त करने के निर्देश भी दिए।

    मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा कि चुनाव और जनगणना प्रशासनिक दृष्टि से सबसे चुनौतीपूर्ण कार्यों में हैं। इस बार तकनीक और जीआईएस प्रणाली के उपयोग से आंकड़े शीघ्र उपलब्ध होंगे। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में लगभग 1 लाख 27 हजार मजरे टोले हैं, जिनका सटीक विवरण भविष्य की योजना निर्माण में सहायक होगा। उन्होंने प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत रखने और आमजन में जनगणना के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।

    जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा कि जनगणना संवैधानिक दायित्व होने के साथ लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार स्तंभ है। विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों का निर्धारण जनसंख्या के आधार पर होता है। इस बार पहली बार डिजिटल माध्यम से जनगणना होगी और नागरिकों को स्व गणना का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा, जिससे वे मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा जनगणना कार्य को उच्च प्राथमिकता देने की सराहना की।

    जनगणना 2027 दो चरणों में आयोजित होगी। प्रथम चरण में 1 मई से 30 मई 2027 तक मकान सूचीकरण किया जाएगा, जिसमें मकानों की स्थिति, सुविधाएं और परिसंपत्तियों का विवरण एकत्रित होगा। द्वितीय चरण में फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना होगी, जिसमें आयु, लिंग, वैवाहिक स्थिति, धर्म, दिव्यांगता, मातृभाषा, साक्षरता, शैक्षणिक योग्यता, आर्थिक गतिविधि, प्रवास और प्रजननता से संबंधित जानकारी संकलित की जाएगी।

  • मुरैना में 12 राउंड फायरिंग से दहला केन्थरी, पुलिस की सुस्ती पर उठे सवाल

    मुरैना में 12 राउंड फायरिंग से दहला केन्थरी, पुलिस की सुस्ती पर उठे सवाल


    मुरैना । मुरैना जिले के चंबल अंचल में कानून व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सराय छोला थाना क्षेत्र के केन्थरी गांव में गुरुवार शाम बदमाशों ने ससुर और दामाद को घेरकर उन पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। हैरानी की बात यह है कि पीड़ित पक्ष ने वारदात से एक दिन पहले ही थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए जान का खतरा बताया था लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। नतीजागांव गोलियों की आवाज से दहल उठा और दो लोग खून से लथपथ हो गए।

    घटना गुरुवार शाम करीब पांच बजे की बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक 24 वर्षीय देवेंद्र गुर्जर और उनके 50 वर्षीय ससुर औतार गुर्जर को सुनियोजित तरीके से घेरकर करीब 12 राउंड फायरिंग की गई। चश्मदीदों के अनुसार अचानक चली गोलियों से इलाके में अफरा तफरी मच गई। देवेंद्र की जांघ को चीरती हुई गोली निकल गई जबकि औतार गुर्जर के पैर के आर पार गोली लगने से वे गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों को तत्काल प्राथमिक उपचार के बाद ग्वालियर रेफर किया गया है जहां उनका इलाज जारी है। पुलिस ने मौके से पांच खाली खोखे बरामद किए हैं।

    इस खूनी वारदात की जड़ें एक दिन पहले हुई मारपीट में बताई जा रही हैं। बुधवार को नेशनल हाईवे 44 पर आरोपी गीताराम गिर्राज और छोटू गुर्जर ने देवेंद्र के साथ मारपीट की थी। आरोप है कि शिकायत करने पर उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी गई। देवेंद्र ने सराय छोला थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई लेकिन परिजनों का कहना है कि पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। यदि आरोपियों की समय पर गिरफ्तारी होती तो शायद यह जानलेवा हमला टल सकता था।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने सक्रियता दिखाई है। सीएसपी दीपाली चन्दौरिया के अनुसार घायलों के बयान दर्ज करने के लिए टीम ग्वालियर भेजी गई है। उन्होंने माना कि पुरानी रंजिश और मारपीट की घटना के चलते ही फायरिंग हुई। हालांकि पुलिस का यह कहना कि वे आरोपियों को पकड़ने जाने ही वाले थे लेकिन उससे पहले वारदात हो गईपीड़ित परिवार को स्वीकार्य नहीं है। ग्रामीणों में भी पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर आक्रोश देखा जा रहा है।

    घटनाक्रम पर नजर डालें तो बुधवार को मारपीट और धमकी उसी रात एफआईआर लेकिन कोई गिरफ्तारी नहीं; और गुरुवार शाम खुलेआम घेराबंदी कर 12 राउंड फायरिंगयह सिलसिला पुलिस की सुस्ती पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। फिलहाल आरोपी फरार हैं और उनकी तलाश में दबिश दी जा रही है। चंबल क्षेत्र में आपराधिक घटनाओं की पुनरावृत्ति ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या समय पर की गई पुलिस कार्रवाई ऐसी वारदातों को रोक सकती है। केन्थरी गांव की यह घटना न केवल दो जिंदगियों को खतरे में डाल गई बल्कि कानून व्यवस्था की हकीकत भी उजागर कर गई।

  • Holi Special Train: जबलपुर से अयोध्या, दिल्ली, मथुरा, प्रयागराज और वाराणसी के लिए दौड़ेंगी स्पेशल ट्रेनें, यात्रियों को बड़ी राहत

    Holi Special Train: जबलपुर से अयोध्या, दिल्ली, मथुरा, प्रयागराज और वाराणसी के लिए दौड़ेंगी स्पेशल ट्रेनें, यात्रियों को बड़ी राहत


    जबलपुर। रंगों के महापर्व होली पर घर लौटने और धार्मिक स्थलों पर रंगोत्सव मनाने वाले यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है। पश्चिम मध्य रेल ने जबलपुर से दो प्रमुख दिशाओंअयोध्या और दिल्लीके लिए विशेष ट्रेनों के संचालन का निर्णय लिया है। ये दोनों स्पेशल ट्रेनें 2 से 11 मार्च के बीच सप्ताह में एक दिन संचालित होंगी और दो-दो फेरे लगाएंगी। इनके लिए आरक्षण भी शुरू कर दिया गया है, जिससे यात्रियों को कन्फर्म सीट मिलने की संभावना बढ़ गई है।

    पहली स्पेशल ट्रेन जबलपुर-अयोध्या धाम के बीच चलेगी। ट्रेन क्रमांक 01705 तीन और 10 मार्च को शाम 7.40 बजे जबलपुर जंक्शन से रवाना होगी। यह सिहोरा रोड, कटनी जंक्शन, मैहर, सतना, मानिकपुर, मिर्जापुर और जौनपुर जैसे प्रमुख स्टेशनों पर ठहरते हुए मध्यरात्रि 2.15 बजे प्रयागराज छिवकी, सुबह 7.05 बजे वाराणसी और सुबह 11.25 बजे अयोध्या धाम पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन क्रमांक 01706 चार और 11 मार्च को दोपहर 1.30 बजे अयोध्या धाम से चलकर अगले दिन सुबह 6.45 बजे जबलपुर पहुंचेगी। इस ट्रेन में दो सेकेंड एसी, पांच थर्ड एसी, आठ स्लीपर और दो एसएलआरडी कोच रहेंगे।

    दूसरी स्पेशल ट्रेन जबलपुर से हजरत निजामुद्दीन दिल्ली के लिए चलाई जाएगी। ट्रेन क्रमांक 01701 दो और नौ मार्च को रात 8.20 बजे जबलपुर से रवाना होगी। यह कटनी मुड़वारा, दमोह, सागर, झांसी, ग्वालियर, आगरा, मथुरा और कोशी कला होते हुए दिल्ली पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन क्रमांक 01702 तीन और 10 मार्च को अपराह्न 3.45 बजे निजामुद्दीन से चलकर अगले दिन सुबह 9.30 बजे जबलपुर पहुंचेगी। 24 कोच वाली इस ट्रेन में चार जनरल, नौ स्लीपर, छह थर्ड एसी, दो सेकेंड एसी और एक फर्स्ट एसी कोच शामिल होगा।

    होली के दौरान मथुरा और काशी जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी यह ट्रेनें बड़ी सुविधा साबित होंगी। नियमित ट्रेनों में सीटों की कमी के कारण यात्रियों को काफी परेशानी होती है, ऐसे में इन स्पेशल ट्रेनों से भीड़ का दबाव कम होगा। अयोध्या स्पेशल ट्रेन के मिर्जापुर ठहराव से विंध्याचल धाम जाने वाले श्रद्धालुओं को भी लाभ मिलेगा।

    इसके अलावा रीवा-भोपाल-दानापुर रूट पर भी विशेष ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। रानी कमलापति से रीवा और दानापुर के लिए सुपरफास्ट एवं स्पेशल ट्रेनों की तिथियां घोषित कर दी गई हैं, जिससे मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश-बिहार के बीच यात्रा करने वालों को अतिरिक्त विकल्प मिलेंगे।

    रेल प्रशासन का मानना है कि इन स्पेशल ट्रेनों से न केवल त्योहार के दौरान घर लौटने वाले यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। होली के रंगों के बीच सुरक्षित और सुगम यात्रा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह पहल की गई है। यात्रियों से समय पर आरक्षण कराने और निर्धारित समय-सारिणी की जानकारी प्राप्त करने की अपील की गई है।