Category: Madhya Pradesh

  • दतिया हार पर भाजपा का बड़ा मंथन, सीएम आवास में समीक्षा बैठक, संगठन में सख्ती की तैयारी

    दतिया हार पर भाजपा का बड़ा मंथन, सीएम आवास में समीक्षा बैठक, संगठन में सख्ती की तैयारी


    दतिया । दतिया विधानसभा उपचुनाव में 6016 वोटों से मिली हार के बाद भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक स्तर पर व्यापक समीक्षा शुरू कर दी है। मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आवास पर महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है जिसमें प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित चुनाव से जुड़े मंत्री, पदाधिकारी और संगठन के प्रमुख नेता शामिल होंगे। इस बैठक में हार के कारणों का विश्लेषण करने के साथ-साथ संगठन की कार्यप्रणाली, चुनावी रणनीति और भीतरघात की शिकायतों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

    पार्टी सूत्रों के अनुसार समीक्षा बैठक में उपचुनाव के प्रभारी भारत सिंह कुशवाह, प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी, उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, मंत्री राव उदय प्रताप सिंह, राकेश शुक्ला सहित करीब दो दर्जन वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। बैठक में चुनावी प्रबंधन की हर स्तर पर समीक्षा होगी और यह भी देखा जाएगा कि किन कारणों से पार्टी अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी।

    सूत्रों का कहना है कि दतिया शहर में भाजपा को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी लेकिन वहां कांग्रेस ने बढ़त बना ली जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा को अपेक्षाकृत बेहतर समर्थन मिला। संगठन की प्रारंभिक रिपोर्ट में कुछ पार्षदों पर पार्टी विरोधी गतिविधियों और भीतरघात के आरोप सामने आए हैं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर दर्जनभर पार्षदों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर भी विचार किया जा सकता है। समीक्षा बैठक के बाद इस संबंध में अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।

    हार के बाद पार्टी के भीतर भी आत्ममंथन की आवाजें तेज हो गई हैं। पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर आत्ममंथन का समय बताते हुए दतिया उपचुनाव का उल्लेख किया। वहीं टीकमगढ़ जिला पंचायत अध्यक्ष उमिता राहुल सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि जब कार्यकर्ताओं की जगह अधिकारी खुद को शीर्ष नेतृत्व तक सीधी पहुंच वाला बताने लगते हैं तब चुनाव परिणाम प्रभावित होना स्वाभाविक है। उनके इस बयान को भी संगठन के भीतर चल रही चर्चा से जोड़कर देखा जा रहा है।

    भाजपा संगठन जिलाध्यक्ष रघुवीर कुशवाह सहित कुछ स्थानीय पदाधिकारियों के खिलाफ मिली शिकायतों की रिपोर्ट भी तैयार कर रहा है। बताया जा रहा है कि यह रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व के माध्यम से केंद्रीय संगठन तक भेजी जा सकती है ताकि आगे की रणनीति तय की जा सके।

    पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने टिकट नहीं मिलने के बावजूद भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के समर्थन में पूरे चुनाव अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई थी। हालांकि पार्टी के भीतर यह आकलन किया जा रहा है कि प्रत्याशी बदलने के बाद संगठन के सभी कार्यकर्ता पूरी मजबूती से एकजुट नहीं हो पाए और इसका असर चुनाव परिणाम पर दिखाई दिया।

    समीक्षा बैठक में सोशल मीडिया की भूमिका भी जांच के दायरे में रहेगी। चुनाव के दौरान वायरल हुए कथित फर्जी पत्रों और भ्रामक पोस्ट की जांच कराई जाएगी। संगठन ऐसे लोगों की सूची भी तैयार कर रहा है जिन्होंने इन पोस्ट को प्रसारित किया था ताकि उनकी भूमिका स्पष्ट की जा सके।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि लोकतंत्र में जनता का निर्णय सर्वोपरि होता है और भाजपा जनादेश को पूरी विनम्रता के साथ स्वीकार करती है। वहीं प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि पार्टी हार की तथ्यपरक समीक्षा करेगी और भविष्य की चुनावी रणनीति को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा ताकि आगामी चुनावों में बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित किया जा सके।

  • दहेज प्रताड़ना केस में 8 साल बाद गिरफ्तारी, कार्यक्रम के कार्ड ने खोल दिया फरार पिता-पुत्र का राज

    दहेज प्रताड़ना केस में 8 साल बाद गिरफ्तारी, कार्यक्रम के कार्ड ने खोल दिया फरार पिता-पुत्र का राज


    ग्वालियर । ग्वालियर पुलिस ने दहेज प्रताड़ना के एक बहुचर्चित मामले में आठ वर्षों से फरार चल रहे पिता-पुत्र को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपी लंबे समय से पुलिस की पकड़ से बचने के लिए गुजरात के अलग-अलग शहरों में अपनी पहचान और ठिकाने बदल-बदलकर रह रहे थे। लगातार की जा रही तलाश के बावजूद पुलिस उनके करीब नहीं पहुंच पा रही थी लेकिन एक पारिवारिक कार्यक्रम का निमंत्रण कार्ड ऐसा सुराग बना जिसने उनकी फरारी का अंत कर दिया।

    महिला सुरक्षा डीएसपी शिखा सोनी के अनुसार नवविवाहिता की शिकायत पर महिला थाने में उसके पति मंगल सिंह उर्फ पुतुआ राजावत और ससुर सुरेश सिंह राजावत के खिलाफ दहेज प्रताड़ना सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। आरोप था कि विवाह के बाद दोनों ने कार और नकदी की मांग करते हुए महिला पर लगातार दबाव बनाया और प्रताड़ित कर उसे घर से निकाल दिया।

    मामला दर्ज होने के बाद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था लेकिन जमानत मिलने के बाद वे फरार हो गए। इसके बाद से पुलिस लगातार उनकी तलाश में जुटी रही। संभावित ठिकानों पर कई बार दबिश दी गई लेकिन दोनों हर बार पुलिस को चकमा देकर स्थान बदल लेते थे।

    आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए महिला थाना प्रभारी रश्मि भदौरिया के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई थी। टीम पिछले चार दिनों से गुजरात में संभावित ठिकानों पर लगातार कार्रवाई कर रही थी। दो दिन पहले पुलिस एक ऐसे ठिकाने पर पहुंची जहां आरोपी कुछ समय पहले तक रह रहे थे लेकिन वहां से वे निकल चुके थे। तलाशी के दौरान पुलिस को एक पारिवारिक कार्यक्रम का निमंत्रण कार्ड मिला जिसमें भिंड का पता दर्ज था। यही कार्ड जांच का सबसे अहम सुराग साबित हुआ।

    पुलिस ने तुरंत रणनीति बदलते हुए भिंड में निगरानी शुरू की और सोमवार रात कार्यक्रम स्थल पर दबिश दी। वहां दोनों आरोपी मौजूद मिले जिन्हें मौके से गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे गिरफ्तारी से बचने के लिए हर कुछ महीनों में अपना ठिकाना बदल लेते थे और वर्षों बाद पहली बार किसी पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने अपने गांव पहुंचे थे। इसी चूक की वजह से वे पुलिस के हत्थे चढ़ गए।

    अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि फरारी के दौरान किन लोगों ने दोनों आरोपियों को शरण दी और उन्हें पुलिस से बचाने में मदद की। यदि किसी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    पूरी कार्रवाई में एएसआई संतपाल सिंह, वीर सिंह राजावत, प्रधान आरक्षक असीम कृष्ण यादव, मुकेश यादव, आरक्षक अंकुर शर्मा, राजदीप जाट और महिला आरक्षक काजल जादौन की अहम भूमिका रही। पुलिस मंगलवार को दोनों आरोपियों को अदालत में पेश कर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी करेगी। यह कार्रवाई लंबे समय से लंबित मामले में बड़ी सफलता मानी जा रही है और फरार आरोपियों के खिलाफ पुलिस की लगातार कार्रवाई का अहम उदाहरण भी है।

  • टाइगर स्टेट पर संकट के बादल, सबसे ज्यादा वन क्षेत्र गंवाने वाला राज्य बना मध्य प्रदेश, जंगल बचाने पर उठे गंभीर सवाल

    टाइगर स्टेट पर संकट के बादल, सबसे ज्यादा वन क्षेत्र गंवाने वाला राज्य बना मध्य प्रदेश, जंगल बचाने पर उठे गंभीर सवाल


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश एक बार फिर पर्यावरण संरक्षण को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बन गया है। संसद में केंद्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से पेश भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट ने राज्य के जंगलों को लेकर चिंताजनक तस्वीर सामने रखी है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2021 से 2023 के बीच मध्य प्रदेश में 371.54 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र कम हो गया है। यह देश के सभी राज्यों में सबसे बड़ी गिरावट मानी गई है। इसी के साथ विकास परियोजनाओं के लिए वनभूमि के उपयोग में बदलाव के मामले में भी मध्य प्रदेश पहले स्थान पर है जिससे पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

    रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2021 में राज्य का कुल वन आवरण 77444.98 वर्ग किलोमीटर था जो वर्ष 2023 में घटकर 77073.44 वर्ग किलोमीटर रह गया। यह गिरावट ऐसे समय दर्ज हुई है जब देश के कई राज्यों ने अपने वन क्षेत्र में वृद्धि दर्ज कराई है। बिहार गुजरात कर्नाटक केरल मिजोरम ओडिशा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों ने वन क्षेत्र बढ़ाने में सफलता हासिल की जबकि मध्य प्रदेश में लगातार कमी दर्ज हुई।

    सिर्फ वन क्षेत्र कम होने का मामला ही चिंता का विषय नहीं है बल्कि पिछले पांच वर्षों में विकास परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर वनभूमि का उपयोग बदला गया है। एक अप्रैल 2021 से 31 मार्च 2026 के बीच देशभर में 105594 हेक्टेयर से अधिक वनभूमि गैर वानिकी कार्यों के लिए स्वीकृत की गई। इनमें अकेले मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 24970 हेक्टेयर रही जो पूरे देश की कुल डायवर्ट की गई वनभूमि का लगभग चौथाई हिस्सा है। इससे साफ है कि सड़क निर्माण खनन ऊर्जा परियोजनाओं और अन्य विकास कार्यों के लिए सबसे अधिक वनभूमि मध्य प्रदेश में ही दी गई।

    खनन परियोजनाएं इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह मानी जा रही हैं। देशभर में खनन और उत्खनन के लिए हजारों हेक्टेयर वनभूमि स्वीकृत हुई जिसमें मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही। इसके अलावा सड़क निर्माण जलविद्युत परियोजनाओं सिंचाई योजनाओं और बिजली ट्रांसमिशन लाइनों के लिए भी बड़ी मात्रा में जंगलों की जमीन का उपयोग बदला गया। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि विकास आवश्यक है लेकिन इसके लिए प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन भविष्य में गंभीर पर्यावरणीय संकट पैदा कर सकता है।

    मध्य प्रदेश को टाइगर स्टेट कहा जाता है और यहां कान्हा बांधवगढ़ पन्ना तथा सतपुड़ा जैसे विश्व प्रसिद्ध टाइगर रिजर्व मौजूद हैं। लगातार वन कटाई और आधारभूत ढांचा परियोजनाओं के विस्तार से इन अभयारण्यों के बीच मौजूद प्राकृतिक वन्यजीव कॉरिडोर प्रभावित होने की आशंका बढ़ रही है। इससे बाघों सहित अन्य वन्यजीवों की आवाजाही बाधित हो सकती है और मानव वन्यजीव संघर्ष के मामलों में भी वृद्धि हो सकती है।

    केंद्र सरकार का कहना है कि वनभूमि के उपयोग में बदलाव की अनुमति मिलने पर प्रतिपूरक वनीकरण अनिवार्य किया जाता है। इसके साथ ही नेट प्रेजेंट वैल्यू के रूप में जमा राशि का उपयोग CAMPA के माध्यम से नए जंगल विकसित करने में किया जाता है। सरकार ने वर्ष 2030 तक देश में 26 मिलियन हेक्टेयर बंजर और अवक्रमित भूमि को पुनर्जीवित करने का लक्ष्य भी तय किया है। इसके लिए राष्ट्रीय वनीकरण कार्यक्रम और हरित भारत मिशन के तहत कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं।

    वहीं विपक्ष ने सरकार की वन नीति पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बड़े उद्योगों और खनन परियोजनाओं को प्राथमिकता देने के कारण जंगलों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि प्रतिपूरक वनीकरण की गुणवत्ता का डिजिटल ऑडिट किया जाए और पर्यावरणीय प्रभावों की स्वतंत्र समीक्षा नियमित रूप से हो ताकि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन कायम रखा जा सके। मध्य प्रदेश के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यही है कि विकास की गति भी बनी रहे और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरियाली और वन संपदा भी सुरक्षित रह सके।

  • कवच योजना बनी किसानों की नई उम्मीद, डिफॉल्टर किसानों को फिर मिलेगा खेती का सहारा

    कवच योजना बनी किसानों की नई उम्मीद, डिफॉल्टर किसानों को फिर मिलेगा खेती का सहारा


    भोपाल । मध्य प्रदेश सरकार किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। सहकारी बैंकों और समितियों में हुई वित्तीय अनियमितताओं के कारण डिफॉल्टर घोषित हुए हजारों किसानों को राहत देने के लिए राज्य सरकार कवच योजना लागू करने की तैयारी में है। इस योजना के प्रस्ताव को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में मंजूरी मिल सकती है। योजना का उद्देश्य उन किसानों को दोबारा आर्थिक मुख्यधारा से जोड़ना है जिन्होंने अपना कर्ज और खाद-बीज का बकाया समय पर जमा कर दिया था लेकिन बैंक अधिकारियों और समिति कर्मचारियों की गड़बड़ी के कारण उनकी राशि बैंक खातों में दर्ज नहीं हो सकी।

    जानकारी के अनुसार प्रदेश में ऐसे करीब पांच हजार किसान हैं जिन्होंने सहकारी बैंकों और समितियों में अपनी बकाया राशि जमा कर दी थी लेकिन कुछ बैंक प्रबंधकों और कर्मचारियों ने वह राशि बैंक में जमा करने के बजाय उसका गबन कर लिया। किसानों ने भरोसे के आधार पर बिना रसीद के पैसा जमा कराया था क्योंकि उन्हें आश्वासन दिया गया था कि बाद में आधिकारिक रसीद उपलब्ध करा दी जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और बैंक रिकॉर्ड में राशि जमा नहीं होने के कारण किसान डिफॉल्टर घोषित हो गए।

    डिफॉल्टर घोषित होने का सबसे बड़ा नुकसान किसानों को यह हुआ कि वे दोबारा सहकारी बैंकों से कृषि ऋण लेने के पात्र नहीं रहे। इसके साथ ही उन्हें खाद बीज और अन्य कृषि सुविधाओं से भी वंचित होना पड़ा। इससे उनकी खेती प्रभावित हुई और आर्थिक स्थिति भी कमजोर होती चली गई। कई किसानों ने लगातार इस समस्या को सरकार के सामने उठाया जिसके बाद सहकारिता विभाग ने समाधान के लिए कवच योजना तैयार की।

    योजना के तहत ऐसे किसानों पर दर्ज बकाया राशि का भार राज्य सरकार और अपेक्स बैंक मिलकर वहन करेंगे ताकि किसानों के नाम से डिफॉल्टर का रिकॉर्ड हटाया जा सके। इसके बाद प्रभावित किसान फिर से सहकारी बैंकों से ऋण ले सकेंगे और खाद बीज सहित अन्य कृषि सुविधाओं का लाभ भी उठा पाएंगे। सरकार का मानना है कि किसानों की गलती न होने के बावजूद उन्हें सजा नहीं मिलनी चाहिए इसलिए यह योजना उनके हितों की रक्षा के लिए लाई जा रही है।

    सहकारिता विभाग के अनुसार जिन बैंक प्रबंधकों और समिति कर्मचारियों पर गबन के आरोप सिद्ध हुए हैं उनके खिलाफ कार्रवाई भी की गई है। कई मामलों में राशि की वसूली की प्रक्रिया जारी है। हालांकि जब तक पूरा पैसा वापस नहीं आता तब तक किसानों को राहत देने के लिए सरकार ने यह अंतरिम व्यवस्था तैयार की है ताकि उनकी खेती और आजीविका प्रभावित न हो।

    आज होने वाली कैबिनेट बैठक में इस योजना के अलावा विभिन्न विभागों की कई योजनाओं को वर्ष 2031 तक जारी रखने के प्रस्तावों पर भी विचार किया जाएगा। साथ ही मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान की तैयारियों की भी समीक्षा होगी। यह अभियान 7 अगस्त से शुरू किया जाएगा जिसमें मंत्रियों को अपने प्रभार वाले जिलों में जाकर योजनाओं की निगरानी और जनता से सीधा संवाद करने के निर्देश दिए जाएंगे।

    कवच योजना को किसानों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है क्योंकि इससे उन लोगों को नई उम्मीद मिलेगी जो वर्षों से बिना किसी गलती के बैंकिंग व्यवस्था की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे थे। सरकार का यह कदम न केवल किसानों का भरोसा बहाल करेगा बल्कि सहकारी बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

  • दतिया के जनादेश पर कांग्रेस का बड़ा संदेश, जीतू पटवारी ने CM से की श्वेत पत्र जारी करने की मांग

    दतिया के जनादेश पर कांग्रेस का बड़ा संदेश, जीतू पटवारी ने CM से की श्वेत पत्र जारी करने की मांग


    भोपाल । दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में नया सियासी संदेश सामने आया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को खुला पत्र लिखकर सरकार से नई राजनीतिक परंपरा शुरू करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि दतिया का जनादेश केवल एक सीट का चुनाव परिणाम नहीं बल्कि पूरे प्रदेश की जनता की सोच और अपेक्षाओं का संकेत है। जनता अब केवल घोषणाएं और वादे नहीं बल्कि पारदर्शी शासन जवाबदेही और ठोस परिणाम चाहती है। यही समय है जब सत्ता और विपक्ष दोनों मिलकर लोकतंत्र को और मजबूत बनाने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाएं।

    जीतू पटवारी ने अपने पत्र में कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जनता का विश्वास होता है और यह विश्वास तभी कायम रह सकता है जब सरकार अपने कामकाज का पूरा ब्यौरा जनता के सामने रखे। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि प्रदेश में श्वेत पत्र जारी करने की नई परंपरा शुरू की जाए ताकि सरकार की उपलब्धियां चुनौतियां और भविष्य की योजनाएं पूरी पारदर्शिता के साथ जनता तक पहुंच सकें। उनका कहना है कि इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था अधिक मजबूत होगी और जनता को सही जानकारी भी मिलेगी।

    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सुझाव दिया कि सरकार बिजली और पेयजल व्यवस्था शिक्षा स्वास्थ्य किसानों की स्थिति कृषि क्षेत्र युवाओं के रोजगार कानून व्यवस्था महिलाओं की सुरक्षा आदिवासी समाज और दलित पिछड़ा वर्ग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर क्रमवार श्वेत पत्र जारी करे। इन दस्तावेजों में वर्तमान स्थिति अब तक हुए कार्य भविष्य की योजनाएं और चुनौतियों का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए ताकि जनता वास्तविक तस्वीर देख सके और सरकार की जवाबदेही भी तय हो सके।

    पत्र में उन्होंने यह भी कहा कि दतिया का परिणाम इस बात का संकेत है कि लोग अब राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप से आगे बढ़कर विकास और परिणाम आधारित राजनीति देखना चाहते हैं। प्रदेश की जनता चाहती है कि राजनीतिक दल केवल एक दूसरे पर आरोप लगाने के बजाय समस्याओं के समाधान पर चर्चा करें। ऐसे में सरकार यदि श्वेत पत्र जारी करती है तो इससे जनता के बीच पारदर्शिता का संदेश जाएगा और लोकतांत्रिक संवाद को भी मजबूती मिलेगी।

    जीतू पटवारी ने भरोसा दिलाया कि कांग्रेस भी इस पहल में पूरी जिम्मेदारी के साथ भागीदारी निभाने को तैयार है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के तौर पर कांग्रेस सरकार के सामने तथ्य आधारित सुझाव और अपने विचार रखेगी। लोकतंत्र में स्वस्थ बहस का आधार आंकड़े और तथ्य होने चाहिए न कि केवल राजनीतिक बयानबाजी। यदि सरकार इस दिशा में कदम बढ़ाती है तो यह मध्य प्रदेश की राजनीति में एक नई और सकारात्मक शुरुआत होगी।

    उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि दतिया के जनादेश को केवल चुनावी जीत या हार के नजरिए से न देखा जाए बल्कि इसे प्रदेश की जनता की उम्मीदों और बदलते राजनीतिक संदेश के रूप में स्वीकार किया जाए। यदि सरकार और विपक्ष दोनों जनहित के मुद्दों पर खुलकर संवाद करेंगे तो इससे शासन व्यवस्था अधिक जवाबदेह बनेगी और प्रदेश के विकास को भी नई दिशा मिलेगी। कांग्रेस का मानना है कि पारदर्शिता और उत्तरदायित्व ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत हैं और अब मध्य प्रदेश की राजनीति को इसी दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

  • भोपाल में पानी का संकट, बड़ा तालाब की सप्लाई प्रभावित; प्रभावित क्षेत्रों के लिए टैंकर की व्यवस्था

    भोपाल में पानी का संकट, बड़ा तालाब की सप्लाई प्रभावित; प्रभावित क्षेत्रों के लिए टैंकर की व्यवस्था


    भोपाल  भोपाल के हजारों परिवारों के लिए मंगलवार का दिन पानी की परेशानी लेकर आया है। शहर के प्रमुख जल स्रोत बड़ा तालाब से होने वाली जलापूर्ति आज पूरी तरह प्रभावित रहेगी। नगर निगम ने करबला पंप हाउस और मनुआभान टेकरी स्थित जलशोधन संयंत्र पर आवश्यक मरम्मत और तकनीकी सुधार कार्य के चलते कई इलाकों में पानी की सप्लाई बंद रखने का निर्णय लिया है। अधिकारियों के अनुसार यह कार्य सुबह 9 बजे से शुरू होकर शाम 7 बजे तक चलेगा जिसके कारण दोपहर और शाम के समय होने वाला जलप्रदाय पूरी तरह प्रभावित रहेगा। निगम ने भरोसा दिलाया है कि मरम्मत कार्य पूरा होते ही बुधवार से सभी प्रभावित क्षेत्रों में नियमित रूप से जलापूर्ति बहाल कर दी जाएगी।

    नगर निगम के मुताबिक करबला पंप हाउस पर 800 एमएम व्यास की रॉ वॉटर पाइपलाइन में लीकेज को ठीक किया जाएगा जबकि मनुआभान टेकरी जलशोधन संयंत्र में जरूरी तकनीकी सुधार किए जाएंगे। इन दोनों कार्यों के कारण बड़ा तालाब से जुड़े जल वितरण नेटवर्क को कुछ समय के लिए बंद रखना जरूरी है ताकि मरम्मत सुरक्षित और प्रभावी तरीके से पूरी की जा सके। निगम का कहना है कि यह काम भविष्य में जलापूर्ति को बेहतर और बाधारहित बनाए रखने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

    इस शटडाउन का असर करोंद सहित करीब 40 इलाकों पर पड़ेगा। जिन क्षेत्रों में आज पानी की सप्लाई नहीं होगी उनमें ब्लू मून कॉलोनी नवाब कॉलोनी प्रेम नगर सुंदर नगर प्रीत नगर शिवशक्ति नगर शिव नगर फेज 1 2 और 3 कल्याण नगर प्रताप नगर चंदन नगर रासलाखेड़ी बिहारी कॉलोनी पटेल नगर मालीखेड़ी भानपुर रोड हाउसिंग बोर्ड करोंद देवकी नगर अमन कॉलोनी कमल नगर सईद कॉलोनी पंचवटी कॉलोनी रतन कॉलोनी कृषक नगर रिंग गार्डन बृज कॉलोनी गोया कॉलोनी पूजा कॉलोनी शिवानी होम्स नवजीवन कॉलोनी छोला मंदिर सत्यज्ञान नगर शंकर नगर उड़िया बस्ती टिम्बर मार्केट नगर निगम कॉलोनी और चांदबाड़ी सहित अन्य क्षेत्र शामिल हैं। इन इलाकों के लोगों को पानी का उपयोग बेहद सोच-समझकर करने और आवश्यक जरूरतों के लिए पहले से पानी संग्रहित रखने की सलाह दी गई है।

    नगर निगम ने नागरिकों की परेशानी कम करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी तैयार की है। अधिकारियों का कहना है कि जिन क्षेत्रों से पानी की मांग प्राप्त होगी वहां निगम के टैंकर भेजे जाएंगे ताकि किसी भी इलाके में पेयजल संकट गहराने न पाए। नागरिक जरूरत पड़ने पर नगर निगम के संबंधित जोन कार्यालय या कंट्रोल रूम से संपर्क कर टैंकर की मांग दर्ज करा सकते हैं। निगम ने स्पष्ट किया है कि मरम्मत कार्य निर्धारित समय पर पूरा होने के बाद बुधवार से सभी प्रभावित क्षेत्रों में पहले की तरह नियमित जलापूर्ति शुरू कर दी जाएगी।

    नगर निगम ने नागरिकों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि यह अस्थायी असुविधा भविष्य में बेहतर जलापूर्ति व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है। इसलिए लोग धैर्य रखें और पानी का उपयोग केवल आवश्यक कार्यों के लिए करें ताकि किसी भी परिवार को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

  • मध्यप्रदेश के निजी स्कूलों के लिए नए नियम, मनमानी पर भारी जुर्माना और मान्यता रद्द करने की चेतावनी

    मध्यप्रदेश के निजी स्कूलों के लिए नए नियम, मनमानी पर भारी जुर्माना और मान्यता रद्द करने की चेतावनी


    भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने निजी विद्यालयों के संचालन को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से नई गाइडलाइन लागू कर दी है। अब प्रदेश में संचालित निजी हाईस्कूल और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों को मान्यता प्राप्त करने से लेकर उसके नवीनीकरण तक सरकार द्वारा निर्धारित सभी नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा। यदि कोई विद्यालय निर्धारित मानकों का पालन नहीं करता है तो उसे पहले नोटिस जारी किया जाएगा और सुधार का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद भी स्थिति नहीं सुधरने पर विद्यालय की मान्यता निलंबित या निरस्त की जा सकती है तथा एक लाख से दो लाख रुपए तक का जुर्माना भी लगाया जा सकेगा।

    स्कूल शिक्षा विभाग ने निजी विद्यालयों की स्थापना मान्यता नवीनीकरण मान्यता विस्तार संकाय वृद्धि माध्यम परिवर्तन स्थान परिवर्तन और नाम परिवर्तन की पूरी प्रक्रिया को नई व्यवस्था के तहत संचालित करने का निर्णय लिया है। अब किसी भी विद्यालय को संचालन की अनुमति पाने के लिए छात्र संख्या के आधार पर सुरक्षा निधि यानी सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा करनी होगी। इसके साथ ही विद्यालयों में पर्याप्त भवन आधुनिक आधारभूत सुविधाएं प्रशिक्षित शिक्षक प्रयोगशाला पुस्तकालय सूचना एवं संचार तकनीक की व्यवस्था और सुरक्षा संबंधी सभी मानकों को पूरा करना अनिवार्य होगा।

    नई व्यवस्था के तहत राज्य स्तर पर एक राज्य मान्यता समिति का गठन किया जाएगा। इस समिति में स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव अथवा सचिव लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त और माध्यमिक शिक्षा मंडल के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। समिति निजी विद्यालयों की मान्यता नवीनीकरण विस्तार संकाय वृद्धि स्थान परिवर्तन और नाम परिवर्तन जैसे मामलों में अंतिम निर्णय लेने के साथ नीति और दिशा निर्देश भी तय करेगी।

    सरकार ने पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया है। अब विद्यालयों को निर्धारित दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन करना होगा। हर वर्ष 30 सितंबर तक प्राप्त आवेदन उसी शैक्षणिक सत्र के लिए विचार किए जाएंगे जबकि इसके बाद आने वाले आवेदन अगले सत्र के लिए मान्य होंगे। बिना नई मान्यता प्राप्त किए किसी भी विद्यालय को नई शाखा शुरू करने की अनुमति नहीं मिलेगी।

    ऑनलाइन आवेदन मिलने के बाद संबंधित अधिकारी को 45 दिनों के भीतर अंतिम निर्णय देना होगा। यदि आवेदन में कोई कमी या त्रुटि पाई जाती है तो 15 दिनों के भीतर इसकी सूचना आवेदक को दी जाएगी और निर्धारित समय सीमा में संशोधित आवेदन प्रस्तुत करना होगा। इससे पूरी प्रक्रिया समयबद्ध और पारदर्शी बनेगी।

    सरकार ने नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई का भी प्रावधान किया है। यदि कोई विद्यालय निर्धारित मानकों का पालन नहीं करता है तो पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर आर्थिक दंड लगाया जाएगा और गंभीर मामलों में राज्य मान्यता समिति की अनुमति से विद्यालय की मान्यता समाप्त की जा सकेगी। इससे शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन और गुणवत्ता सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।

    नई गाइडलाइन में अपील का अधिकार भी दिया गया है। यदि किसी विद्यालय का आवेदन अस्वीकार हो जाता है या उसकी मान्यता समाप्त कर दी जाती है तो संबंधित संस्था 30 दिनों के भीतर लोक शिक्षण आयुक्त के समक्ष अपील कर सकेगी। यदि वहां से भी राहत नहीं मिलती है तो राज्य मान्यता समिति के समक्ष दूसरी अपील की जा सकेगी। प्रत्येक अपील के साथ पांच हजार रुपए का शुल्क निर्धारित किया गया है।

    राज्य सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने से निजी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर होगी और छात्रों को सुरक्षित तथा आधुनिक सुविधाओं से युक्त शैक्षणिक वातावरण मिलेगा। साथ ही मान्यता प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर प्रभावी नियंत्रण भी स्थापित किया जा सकेगा।

  • कांग्रेस का संगठनात्मक रिपोर्ट कार्ड तैयार, दिल्ली बैठक में 10 जिला अध्यक्षों की छुट्टी पर हो सकता है फैसला

    कांग्रेस का संगठनात्मक रिपोर्ट कार्ड तैयार, दिल्ली बैठक में 10 जिला अध्यक्षों की छुट्टी पर हो सकता है फैसला


    भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस में संगठन सृजन अभियान के तहत नियुक्त किए गए जिलाध्यक्षों की आज सबसे बड़ी परीक्षा होने जा रही है। पिछले वर्ष अगस्त में लंबी प्रक्रिया के बाद बनाए गए जिला कांग्रेस अध्यक्षों के कामकाज की समीक्षा के लिए कांग्रेस हाईकमान ने दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इस बैठक के नतीजे प्रदेश संगठन में बड़े बदलाव का रास्ता खोल सकते हैं और खराब प्रदर्शन करने वाले कई जिलाध्यक्षों की जिम्मेदारी भी छिन सकती है।

    दिल्ली में आयोजित इस समीक्षा बैठक की कमान कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल संभालेंगे। बैठक दो चरणों में आयोजित होगी। पहले चरण में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और मध्य प्रदेश के प्रभारी हरीश चौधरी के साथ संगठन की स्थिति और जिलों की रिपोर्ट पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। इसके बाद दूसरे चरण में विभिन्न जिलाध्यक्षों से सीधे संवाद कर उनके कार्यों का मूल्यांकन किया जाएगा।

    सूत्रों के अनुसार कांग्रेस ने प्रदेश के सभी जिलाध्यक्षों को उनके कामकाज और संगठन विस्तार के आधार पर चार श्रेणियों ए बी सी और डी में विभाजित किया है। सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले ए श्रेणी के जिलाध्यक्षों को इस बैठक में नहीं बुलाया गया है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि इन जिलाध्यक्षों ने संगठन निर्माण अभियान में उत्कृष्ट कार्य किया है। इन्हें भविष्य में अलग से दिल्ली बुलाकर राहुल गांधी स्वयं संवाद करेंगे और आगामी रणनीति में उनकी भूमिका तय की जाएगी।

    बी श्रेणी में शामिल जिलाध्यक्षों को आज की बैठक में शामिल किया गया है। इनसे उनके संगठनात्मक प्रदर्शन की समीक्षा की जाएगी और यह बताया जाएगा कि उन्हें किन क्षेत्रों में सुधार कर ए श्रेणी तक पहुंचना है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि इन जिलों में संगठन और अधिक मजबूत हो तथा आगामी चुनावों के लिए बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाई जाए।

    सी श्रेणी में आने वाले जिलाध्यक्षों को अंतिम अवसर दिया जाएगा। समीक्षा के बाद उन्हें निश्चित समय सीमा में संगठनात्मक प्रदर्शन सुधारने के निर्देश मिलेंगे। यदि निर्धारित अवधि में अपेक्षित परिणाम नहीं मिले तो भविष्य में उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

    सबसे अधिक निगाहें डी श्रेणी के जिलाध्यक्षों पर टिकी हैं। इन्हें कमजोर प्रदर्शन करने वाला माना गया है और ऐसे करीब दस जिलाध्यक्षों को बैठक के बाद पद से हटाया जा सकता है। माना जा रहा है कि समीक्षा पूरी होते ही इनके स्थान पर नए चेहरों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी ताकि संगठन को अधिक सक्रिय और चुनावी दृष्टि से मजबूत बनाया जा सके।

    हाल ही में दतिया निकाय चुनाव में मिली सफलता के बाद कांग्रेस नेतृत्व संगठन को और मजबूत करने के मूड में है। पार्टी अब केवल राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहना चाहती बल्कि बूथ स्तर तक मजबूत नेटवर्क तैयार करने पर जोर दे रही है। यही वजह है कि संगठन सृजन अभियान के तहत नियुक्त पदाधिकारियों की जवाबदेही तय की जा रही है और प्रदर्शन को ही आगे की जिम्मेदारी का आधार बनाया जा रहा है।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दिल्ली में होने वाली यह समीक्षा बैठक मध्य प्रदेश कांग्रेस के लिए निर्णायक साबित हो सकती है। इससे न केवल संगठन में नई ऊर्जा आएगी बल्कि आगामी चुनावों की रणनीति भी इसी के आधार पर तैयार की जाएगी। बैठक के बाद होने वाले फैसलों पर प्रदेशभर के कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की नजरें टिकी हुई हैं।

  • भोपाल के मिक्स लैंड यूज विवाद पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, हजारों भूखंड मालिकों की निगाहें फैसले पर

    भोपाल के मिक्स लैंड यूज विवाद पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, हजारों भूखंड मालिकों की निगाहें फैसले पर


    भोपाल । भोपाल में आवासीय भवनों में वर्षों से संचालित हो रही व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होने जा रही है। इस मामले पर शहर के हजारों व्यापारी और बड़ी संख्या में रहवासी नजर बनाए हुए हैं क्योंकि अदालत का फैसला आगे की कार्रवाई की दिशा तय कर सकता है। रहवासियों का कहना है कि वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई में शामिल होंगे और हाल ही में नगर निगम द्वारा की गई कार्रवाई के फोटो और वीडियो भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।

    दरअसल राजधानी के अरेरा कॉलोनी रोहित नगर बावड़ियाकलां 10 नंबर 11 नंबर और 12 नंबर मार्केट सहित कई इलाकों में लंबे समय से आवासीय भवनों से व्यवसाय संचालित किए जा रहे हैं। इसको लेकर स्थानीय रहवासियों ने लगातार आपत्ति जताई और हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की थी। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा जहां से सख्त रुख अपनाए जाने के बाद नगर निगम ने कई प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी कर कार्रवाई शुरू की। कुछ दुकानों को सील किया गया जबकि कई व्यापारियों ने स्वेच्छा से अपने प्रतिष्ठान बंद कर दिए थे।

    हालांकि इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की अध्यक्षता में जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हुई जिसमें व्यापारियों की समस्याओं पर भी चर्चा की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि पूरे मामले की समीक्षा के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय समिति बनाई जाएगी। यह समिति सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का अध्ययन कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि समिति की रिपोर्ट आने तक व्यापारियों को अनावश्यक घबराने की जरूरत नहीं है। इसी निर्णय के बाद सोमवार को अधिकांश बंद दुकानें दोबारा खुल गईं।

    रहवासी संगठन इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद नगर निगम ने अपेक्षित कार्रवाई पूरी नहीं की और जिन प्रतिष्ठानों को बंद किया गया था उनके दोबारा खुलने से अदालत के आदेशों की भावना प्रभावित हुई है। उनका मानना है कि आवासीय क्षेत्रों में लगातार बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों से ट्रैफिक जाम पार्किंग की समस्या शोर प्रदूषण और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां बढ़ रही हैं जिससे लोगों का सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है।

    दूसरी ओर व्यापारी संगठन इस पूरे मामले को व्यावहारिक नजरिए से देखने की मांग कर रहे हैं। भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज का कहना है कि वर्ष 2005 के बाद नया मास्टर प्लान लागू नहीं होने के कारण शहर में पर्याप्त व्यावसायिक भूखंड उपलब्ध नहीं हो सके। ऐसी स्थिति में हजारों व्यापारियों ने मजबूरी में आवासीय परिसरों से अपना कारोबार शुरू किया। संगठन का कहना है कि व्यापारी नियमित रूप से व्यावसायिक दर पर संपत्ति कर बिजली बिल और अन्य सभी सरकारी शुल्क का भुगतान कर रहे हैं जिससे शासन को करोड़ों रुपए का राजस्व भी प्राप्त हो रहा है।

    व्यापारियों ने गुजरात की तर्ज पर मिक्स लैंड यूज व्यवस्था लागू करने की मांग दोहराई है ताकि आवासीय क्षेत्रों में नियंत्रित और नियमानुसार व्यवसाय संचालित किए जा सकें। उनका कहना है कि इससे व्यापार भी प्रभावित नहीं होगा और आम नागरिकों को आवश्यक सेवाएं भी अपने क्षेत्र में मिलती रहेंगी।

    अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत के निर्देश न केवल भोपाल बल्कि प्रदेश के अन्य शहरों में भी आवासीय और व्यावसायिक उपयोग से जुड़े मामलों के लिए महत्वपूर्ण आधार साबित हो सकते हैं। सरकार की समीक्षा समिति की रिपोर्ट और न्यायालय के निर्देशों के बाद ही इस लंबे समय से चले आ रहे विवाद का स्थायी समाधान निकलने की उम्मीद है।

  • एमपी में 6 अगस्त से फिर सक्रिय होगा मानसून, दो दिन भारी बारिश के आसार नहीं

    एमपी में 6 अगस्त से फिर सक्रिय होगा मानसून, दो दिन भारी बारिश के आसार नहीं


    भोपाल। मध्य प्रदेश में फिलहाल बारिश की रफ्तार थमी हुई है। सोमवार को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में केवल बादल और हल्की बूंदाबांदी देखने को मिली। मौसम विभाग के अनुसार, 4 और 5 अगस्त तक इसी तरह का मौसम बना रहेगा। हालांकि 6 अगस्त से पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टरबेंस) के सक्रिय होने के बाद प्रदेश के कई जिलों में फिर से तेज और भारी बारिश का दौर शुरू होने की संभावना है।

    औसत से 16% कम बारिश
    पिछले चार दिनों से भारी बारिश नहीं होने के कारण प्रदेश में वर्षा का कुल आंकड़ा सामान्य से पीछे चल रहा है। मौसम विभाग के मुताबिक, अब तक प्रदेश में 404.2 मिमी (15.9 इंच) बारिश दर्ज हुई है, जबकि इस समय तक 482 मिमी (19 इंच) वर्षा होनी चाहिए थी। यानी प्रदेश में अब तक करीब 16 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

    पूर्वी मध्य प्रदेश में सबसे अधिक कमी
    प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बारिश की कमी अधिक दर्ज की गई है। जबलपुर, शहडोल, रीवा और सागर संभाग में औसतन 20 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। इन संभागों का कोई भी जिला सामान्य बारिश के स्तर तक नहीं पहुंच सका है। अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़ और उमरिया में 1 से 42 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    पश्चिमी हिस्से में भी सामान्य से कम वर्षा
    भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल संभाग में औसतन 11 प्रतिशत कम बारिश हुई है। आगर-मालवा, अलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, भोपाल, दतिया, धार, गुना, ग्वालियर, हरदा, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में भी सामान्य से कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है।

    इन जिलों में सामान्य से अधिक बारिश
    मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी मध्य प्रदेश के बड़वानी, भिंड, बुरहानपुर, देवास, इंदौर, खंडवा और खरगोन ऐसे जिले हैं, जहां अब तक औसत से अधिक बारिश दर्ज की गई है।

    तीन मौसम प्रणालियां सक्रिय, लेकिन असर कमजोर
    मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, प्रदेश के ऊपर दो साइक्लोनिक सर्कुलेशन और एक मानसून ट्रफ सक्रिय हैं, लेकिन इनका प्रभाव फिलहाल मध्य प्रदेश पर नहीं पड़ रहा है। इसी कारण अधिकांश इलाकों में तेज बारिश नहीं हो रही है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 6 अगस्त से पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के चलते प्रदेश में मानसून दोबारा जोर पकड़ सकता है और कई जिलों में भारी बारिश देखने को मिलेगी।