Category: Madhya Pradesh

  • शिवपुरी में कब्रिस्तान की जमीन बदलने की मांग पर विवाद, बजरंग दल कार्यकर्ता को धमकी देने के आरोप में FIR दर्ज

    शिवपुरी में कब्रिस्तान की जमीन बदलने की मांग पर विवाद, बजरंग दल कार्यकर्ता को धमकी देने के आरोप में FIR दर्ज

    मध्य प्रदेश: के शिवपुरी जिले के बैराड़ में कब्रिस्तान की भूमि को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की मांग को लेकर विवाद सामने आया है। इस मामले में बजरंग दल के कार्यकर्ता प्रिंस प्रजापति को जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया गया है। शिकायत के आधार पर बैराड़ थाना पुलिस ने साबिर खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। मामले को लेकर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

    जानकारी के अनुसार, 10 अक्टूबर को बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने स्थानीय हिंदू समाज के लोगों के साथ मिलकर बैराड़ की हनुमान कॉलोनी में हनुमान मंदिर के सामने आवंटित कब्रिस्तान की भूमि को अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने की मांग उठाई थी। इस संबंध में तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा गया था। इसके दो दिन बाद, 12 अक्टूबर को प्रिंस प्रजापति को फोन पर धमकी दिए जाने का आरोप सामने आया।

    विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष राम सिंह यादव के मुताबिक, साबिर खान ने कथित तौर पर फोन करके प्रिंस प्रजापति को जान से मारने की धमकी दी थी। संगठन ने दावा किया है कि इस बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध है। हालांकि, धमकी से जुड़े आरोपों की विस्तृत पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    मामले में एक अन्य घटना गुरुवार को सामने आने का आरोप है। राम सिंह यादव के अनुसार, प्रिंस प्रजापति शिवपुरी से बैराड़ पहुंचे थे और मोटरसाइकिल से अपने घर जा रहे थे। इसी दौरान पशु चिकित्सालय के पास साबिर खान ने कथित तौर पर उन्हें रास्ते में रोक लिया। आरोप है कि यहां उनके साथ गाली-गलौज की गई।

    शिकायत के मुताबिक, कब्रिस्तान की जमीन को स्थानांतरित करने की मांग को लेकर दोबारा आवाज उठाने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। आरोप है कि प्रिंस प्रजापति को जान से मारने और उनके हाथ-पैर तोड़ने की बात कही गई। घटना के बाद प्रिंस प्रजापति थाने पहुंचे और पुलिस को शिकायत दी। इसके बाद पुलिस ने साबिर खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली।

    इस मामले को लेकर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के प्रतिनिधियों ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की है। संगठनों का कहना है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की गंभीरता से जांच की जानी चाहिए और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कदम उठाए जाने चाहिए।

    राम सिंह यादव ने दावा किया कि साबिर खान के खिलाफ पहले भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। इस आधार पर संगठनों ने उसके आपराधिक रिकॉर्ड की जांच कराने और नाम गुंडा सूची में शामिल करने की मांग की है। इसके साथ ही जिला बदर की कार्रवाई शुरू करने तथा प्रिंस प्रजापति की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई है।

    संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि 24 घंटे के भीतर कार्रवाई नहीं की गई तो जिलेभर में आंदोलन किया जाएगा। फिलहाल, बैराड़ थाना पुलिस ने साबिर खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। मामले में पुलिस की जांच और आगे की कार्रवाई को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

  • शिवपुरी के बदरवास रेलवे स्टेशन पर बढ़ेंगी सुविधाएं? सिंधिया ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर मांगों पर तत्काल पहल का किया आग्रह

    शिवपुरी के बदरवास रेलवे स्टेशन पर बढ़ेंगी सुविधाएं? सिंधिया ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर मांगों पर तत्काल पहल का किया आग्रह

    मध्य प्रदेश। के शिवपुरी जिले में बदरवास और आसपास के क्षेत्रों में रेल सुविधाओं के विस्तार की मांग को लेकर रेलवे सुविधा संघर्ष समिति ने पहल की है। समिति की ओर से प्रस्तुत मांग पत्र को शिवपुरी-गुना के सांसद और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संज्ञान में लेते हुए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखा है। उन्होंने रेल मंत्री से मांग पत्र में उठाए गए मुद्दों पर तत्काल और सार्थक पहल करने का आग्रह किया है। इन मांगों का उद्देश्य क्षेत्र में रेल संपर्क को बेहतर बनाना और यात्रियों को अधिक सुविधाजनक आवागमन उपलब्ध कराना है।

    समिति के अनुसार, बदरवास और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग शिक्षा, चिकित्सा, व्यापार और धार्मिक यात्राओं के लिए दूसरे शहरों का रुख करते हैं। ऐसे में प्रमुख ट्रेनों का ठहराव बढ़ने और स्टेशन पर आवश्यक सुविधाएं विकसित होने से यात्रियों को लाभ मिल सकता है। समिति ने अपनी मांगों में धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान बनाने के साथ ही दिल्ली, मुंबई, इंदौर और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों से संपर्क बेहतर करने पर जोर दिया है।

    बदरवास रेलवे स्टेशन पर कई प्रमुख ट्रेनों के ठहराव की मांग उठाई गई है। इनमें उज्जैनी एक्सप्रेस, झांसी-बांद्रा एक्सप्रेस, लक्ष्मीबाई नगर इंदौर-योगनगरी ऋषिकेश एक्सप्रेस, ग्वालियर-बेंगलुरु एक्सप्रेस और अमृतसर-इंदौर एक्सप्रेस शामिल हैं। समिति का मानना है कि इन ट्रेनों का ठहराव मिलने से यात्रियों को उज्जैन, हरिद्वार, मथुरा-वृंदावन और अमृतसर जैसे धार्मिक स्थलों तक जाने में सुविधा होगी। साथ ही दिल्ली, मुंबई, इंदौर और बेंगलुरु जैसे शहरों की यात्रा के लिए भी बेहतर विकल्प उपलब्ध हो सकेंगे।

    रेलवे स्टेशन के विकास को लेकर भी समिति ने कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। इनमें बदरवास स्टेशन को अमृत भारत स्टेशन योजना में शामिल करना, दूसरा प्लेटफॉर्म बनाना और फुट ओवरब्रिज का निर्माण करना शामिल है। समिति ने यात्रियों को धूप और बारिश से बचाने के लिए प्लेटफॉर्म पर लंबे टीनशेड लगाने की मांग भी की है। फुट ओवरब्रिज बनने से यात्रियों को एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म तक जाने के लिए रेलवे ट्रैक पार नहीं करना पड़ेगा। इससे आवागमन अधिक सुरक्षित बनाने में मदद मिल सकती है।

    यात्री सुविधाओं को बेहतर करने के लिए स्टेशन पर टिकट रिजर्वेशन काउंटर खोलने, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की आउटपोस्ट स्थापित करने और ट्रेनों की जानकारी देने के लिए कोच डिस्प्ले बोर्ड लगाने का प्रस्ताव भी दिया गया है। समिति का कहना है कि इन सुविधाओं से यात्रियों को टिकट संबंधी सेवाओं, सुरक्षा और ट्रेन में अपने कोच की स्थिति जानने में सहूलियत मिलेगी। इसके अलावा क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्टेशन पर रैक प्वाइंट विकसित करने की मांग भी शामिल की गई है।

    समिति ने क्षेत्रीय रेल संपर्क मजबूत करने के लिए गुना, अशोकनगर या रुठियाई से ग्वालियर के बीच मेमू ट्रेन चलाने का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही इंदौर-ऊना हिमाचल एक्सप्रेस को प्रतिदिन संचालित करने की मांग की गई है। उधना-बनारस एक्सप्रेस और ग्वालियर-दौंड एक्सप्रेस के फेरे बढ़ाकर सप्ताह में तीन से चार दिन करने का आग्रह भी किया गया है। इन प्रस्तावों का उद्देश्य यात्रियों को अधिक नियमित रेल सेवाएं उपलब्ध कराना है।

    समिति के गोविंद अवस्थी ने बताया कि इन मांगों के पूरा होने से बदरवास और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को शिक्षा, इलाज, व्यापार और धार्मिक यात्राओं के लिए बेहतर परिवहन सुविधा मिल सकती है। ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से रेल मंत्री को पत्र भेजे जाने के बाद समिति को उम्मीद है कि रेलवे मंत्रालय इन प्रस्तावों पर विचार करेगा और क्षेत्र में रेल सुविधाओं के विस्तार की दिशा में आवश्यक कदम उठाएगा। हालांकि, इन मांगों पर रेलवे मंत्रालय की ओर से निर्णय और उनके क्रियान्वयन की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।

  • इंदौर एयरपोर्ट से 25 अक्टूबर को बदलेगा फ्लाइट शेड्यूल, मुंबई और अहमदाबाद के यात्रियों को मिलेंगे नए विकल्प

    इंदौर एयरपोर्ट से 25 अक्टूबर को बदलेगा फ्लाइट शेड्यूल, मुंबई और अहमदाबाद के यात्रियों को मिलेंगे नए विकल्प

    मध्य प्रदेश: के इंदौर स्थित देवी अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट पर 25 अक्टूबर 2026 से उड़ानों का नया विंटर शेड्यूल लागू होने जा रहा है। इसके तहत मुंबई और अहमदाबाद जाने वाले यात्रियों को अतिरिक्त उड़ानों के विकल्प मिलेंगे। अहमदाबाद के लिए तीसरी सीधी फ्लाइट शुरू करने की तैयारी है, जबकि मुंबई के लिए सुबह की नई उड़ान उपलब्ध होगी। इसके अलावा गोवा और पुणे के रास्ते कोच्चि जाने वाले यात्रियों के लिए भी कनेक्टिंग फ्लाइट के विकल्प रहेंगे।

    नए शेड्यूल में अहमदाबाद और मुंबई के रूट पर विशेष बदलाव किए गए हैं। इन दोनों शहरों के बीच इंदौर से बड़ी संख्या में लोग कारोबार, नौकरी, पढ़ाई और अन्य निजी कार्यों के लिए यात्रा करते हैं। उड़ानों के समय में बदलाव और नए विकल्प मिलने से यात्रियों को अपनी जरूरत के अनुसार यात्रा की योजना बनाने में सुविधा होगी।

    अहमदाबाद के लिए तीसरी सीधी उड़ान

    इंदौर से अहमदाबाद जाने वाले यात्रियों को नए विंटर शेड्यूल में तीसरी सीधी उड़ान का विकल्प मिलेगा। इस रूट पर पहले से संचालित दोनों उड़ानों के समय में भी बदलाव किया जाएगा। दोनों मौजूदा फ्लाइट अब अपने वर्तमान प्रस्थान समय से 30 मिनट पहले रवाना होंगी। इससे यात्रियों को उपलब्ध उड़ानों के समय के अनुसार अपना कार्यक्रम तय करना होगा।

    नई उड़ान दोपहर 12:05 बजे अहमदाबाद से इंदौर पहुंचेगी। इसके बाद विमान शाम 5 बजे इंदौर से अहमदाबाद के लिए रवाना होगा। वापसी के क्रम में अहमदाबाद से शाम 7:25 बजे उड़ान भरने के बाद विमान रात 8:35 बजे इंदौर पहुंचेगा। इस तरह अहमदाबाद रूट पर उड़ानों की संख्या बढ़ने से यात्रियों को यात्रा के समय के अधिक विकल्प मिल सकेंगे।

    अहमदाबाद व्यापार और कारोबार के लिहाज से इंदौर के लिए महत्वपूर्ण शहर है। दोनों शहरों के बीच व्यावसायिक गतिविधियों के साथ निजी कामों के लिए भी यात्रियों की आवाजाही होती है। ऐसे में तीसरी सीधी उड़ान शुरू होने से यात्रियों को पहले से उपलब्ध सेवाओं के अलावा एक अतिरिक्त विकल्प मिलेगा।

    मुंबई के लिए सुबह 8 बजे उड़ान

    मुंबई जाने वाले यात्रियों के लिए भी 25 अक्टूबर से नया विकल्प उपलब्ध होगा। एयर इंडिया इस रूट पर तीसरी इंदौर-मुंबई उड़ान शुरू करेगी। यह फ्लाइट सुबह 8 बजे इंदौर से रवाना होगी। इससे मुंबई जाने वाले यात्रियों को सुबह के समय हवाई यात्रा करने का एक और विकल्प मिलेगा।

    इंदौर और मुंबई के बीच कारोबारी बैठकों, नौकरी, पढ़ाई और अन्य जरूरी कामों के लिए लगातार यात्रा होती है। कई यात्रियों को सुबह मुंबई पहुंचने की आवश्यकता होती है। नई उड़ान से वे अपनी जरूरत और निर्धारित समय के अनुसार यात्रा की योजना बना सकेंगे।

    गोवा और पुणे के रास्ते कोच्चि की कनेक्टिंग फ्लाइट

    इंदौर से कोच्चि जाने वाले यात्रियों के लिए गोवा और पुणे के रास्ते कनेक्टिंग फ्लाइट की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। गोवा के रास्ते जाने वाले यात्रियों की उड़ान शाम 5:25 बजे इंदौर से रवाना होकर शाम 7 बजे गोवा पहुंचेगी। इसके बाद रात 8 बजे गोवा से कोच्चि के लिए विमान रवाना होगा और रात 9:20 बजे कोच्चि पहुंचेगा।

    वापसी में कोच्चि से दोपहर 1:20 बजे उड़ान भरने वाला विमान दोपहर 3:10 बजे गोवा पहुंचेगा। वहां से शाम 4:50 बजे इंदौर पहुंचने का निर्धारित समय है।

    पुणे के रास्ते कोच्चि जाने के लिए इंदौर से रात 10:25 बजे उड़ान मिलेगी। यह विमान रात 11:40 बजे पुणे पहुंचेगा। इसके बाद रात 12:40 बजे पुणे से कोच्चि के लिए रवाना होगा और अगले दिन तड़के 2:25 बजे कोच्चि पहुंचेगा।

    टिकट बुक करने से पहले जांचें समय

    25 अक्टूबर या उसके बाद यात्रा करने वाले यात्रियों को टिकट बुक करने से पहले नई उड़ानों का समय जांच लेना चाहिए। जिन यात्रियों ने पहले ही टिकट बुक कर लिया है, उन्हें भी अपनी फ्लाइट का प्रस्थान समय दोबारा देखना चाहिए। विंटर शेड्यूल लागू होने के साथ उड़ानों के समय और संचालन में बदलाव हो सकता है। इसलिए यात्रा से पहले संबंधित एयरलाइन की वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर उपलब्ध नवीनतम जानकारी की पुष्टि करना उपयोगी रहेगा।

  • मध्य प्रदेश में बिजली संकट गहराया, किसानों को 10 घंटे के वादे के बदले सिर्फ 2 घंटे आपूर्ति का आरोप

    मध्य प्रदेश में बिजली संकट गहराया, किसानों को 10 घंटे के वादे के बदले सिर्फ 2 घंटे आपूर्ति का आरोप

    मध्य प्रदेश: में बिजली की मांग बढ़ने और उत्पादन प्रभावित होने के बीच बिजली आपूर्ति का मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। प्रदेश में खेती और सिंचाई के लिए बिजली की जरूरत बढ़ी है। इसी बीच कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि किसानों को निर्धारित समय के अनुसार बिजली नहीं मिल रही है। पार्टी का कहना है कि कई क्षेत्रों में किसानों को प्रतिदिन मुश्किल से दो घंटे बिजली मिल पा रही है, जबकि खेती और सिंचाई के लिए 10 घंटे बिजली देने का वादा किया गया था।

    प्रदेश में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए सरकार ने पंजाब और उत्तर प्रदेश से बिजली मांगी है। बिजली उत्पादन पर असर पड़ने और बोवनी में देरी के कारण मांग बढ़ने की बात सामने आई है। ऐसे हालात में बिजली की उपलब्धता और नियमित आपूर्ति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। किसानों के साथ घरेलू उपभोक्ता भी बिजली कटौती से प्रभावित हो रहे हैं।

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बिजली संकट को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि किसान गंभीर बिजली संकट का सामना कर रहे हैं। खेती के काम और सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली नहीं मिलने से उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। किसानों को जरूरत के मुताबिक बिजली उपलब्ध नहीं होने पर खेतों में सिंचाई का काम प्रभावित हो रहा है। इससे कृषि कार्यों को समय पर पूरा करने में भी परेशानी आ सकती है।

    पटवारी ने यह भी कहा कि बिजली की समस्या केवल किसानों तक सीमित नहीं है। आम लोगों को भी अघोषित बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। प्रदेश के कई इलाकों में 10-10 घंटे तक बिजली गुल रहने की शिकायतें सामने आने का दावा किया गया है। इस वजह से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के घरेलू उपभोक्ताओं की रोजमर्रा की जरूरतें प्रभावित हो रही हैं।

    बिजली की अनियमित आपूर्ति से ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई के अलावा पेयजल व्यवस्था पर भी असर पड़ने की बात कही गई है। बार-बार बिजली जाने से छोटे दुकानदारों और कारोबारियों को भी कामकाज में परेशानी होती है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली की नियमित उपलब्धता जरूरी है, लेकिन लंबे समय तक आपूर्ति बाधित रहने से दैनिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।

    किसानों के लिए सिंचाई के समय बिजली उपलब्ध होना महत्वपूर्ण है। यदि जरूरत के अनुसार बिजली नहीं मिलती, तो फसलों की बढ़वार और उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इससे किसानों की आमदनी और आर्थिक स्थिति पर भी दबाव पड़ सकता है। खेती की बढ़ती लागत और अन्य चुनौतियों के बीच बिजली की कमी किसानों के लिए अतिरिक्त परेशानी बन सकती है।

    कांग्रेस ने सरकार से सवाल किया है कि किसानों को तय समय के मुताबिक बिजली क्यों नहीं मिल रही है और घरेलू उपभोक्ताओं को अघोषित कटौती से राहत कब मिलेगी। पार्टी ने नियमित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग उठाई है। साथ ही, बिजली कटौती होने पर उसकी पूर्व सूचना देने और कटौती के कारणों की जानकारी सार्वजनिक करने की जरूरत पर जोर दिया है।

    बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच बने अंतर को दूर करना सरकार के सामने चुनौती है। ऐसे में किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने और घरेलू उपभोक्ताओं की परेशानी कम करने का मुद्दा अहम बना हुआ है। फिलहाल, बिजली संकट को लेकर कांग्रेस ने सरकार से जवाब मांगा है और नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।

  • ग्वालियर हादसे में भाई को बचाने 8 किलोमीटर दौड़ा सौरभ, हाइड्रा लेकर लौटा, लेकिन नहीं बचा सका गौरव की जान

    ग्वालियर हादसे में भाई को बचाने 8 किलोमीटर दौड़ा सौरभ, हाइड्रा लेकर लौटा, लेकिन नहीं बचा सका गौरव की जान

    मध्य प्रदेश: के ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास मेले के दौरान हुए सड़क हादसे ने कई परिवारों को गहरे दुख में डाल दिया। इस दुर्घटना में 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि 26 लोग घायल हुए हैं। हादसे के दौरान अपने भाई गौरव परिहार को बचाने के लिए सौरभ परिहार ने हर संभव कोशिश की। वह मदद जुटाने के लिए करीब आठ किलोमीटर तक दौड़ा और आखिरकार हाइड्रा मशीन लेकर घटनास्थल पर पहुंचा, लेकिन तब तक गौरव की मौत हो चुकी थी।

    यह हादसा उस समय हुआ, जब श्रद्धालु शीतला माता मंदिर में दर्शन करने जा रहे थे। इसी दौरान एक ट्रक भीड़ के बीच घुस गया। अचानक हुए इस घटनाक्रम से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। कई लोग ट्रक की चपेट में आ गए, जबकि कुछ घायल होकर सड़क पर गिर पड़े। हादसे के बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया।

    सौरभ परिहार के मुताबिक, वह अपने परिवार के साथ दर्शन के लिए जा रहा था। इसी दौरान दुर्घटना हुई। उसने देखा कि उसकी बहन का पैर ट्रक के टायर के नीचे दबा हुआ था। वह बहन की स्थिति देख रहा था, लेकिन उसे अपना भाई गौरव दिखाई नहीं दिया। इसके बाद उसे आशंका हुई कि गौरव ट्रक के नीचे फंसा हो सकता है।

    गौरव को बाहर निकालने के लिए भारी वाहन को उठाने वाली मशीन की जरूरत थी। सौरभ ने मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों से क्रेन या हाइड्रा मशीन मंगवाने का अनुरोध किया। उसे बताया गया कि कुछ ही मिनटों में मदद पहुंच सकती है। हालांकि, भाई की हालत को लेकर चिंतित सौरभ ने इंतजार करने के बजाय खुद मशीन की तलाश में निकलने का फैसला किया।

    मदद जुटाने के लिए सौरभ ने रास्ते में कई वाहनों को रोकने की कोशिश की। शुरुआत में कई वाहन चालकों ने गाड़ी नहीं रोकी। बाद में कुछ लोगों ने उसे लिफ्ट दी, जिससे वह विक्ट्री फैक्टरी तक पहुंच सका। वहां उसने हाइड्रा मशीन की व्यवस्था की और इसके लिए ऑनलाइन 800 रुपये का भुगतान किया। इसके बाद वह मशीन लेकर दुर्घटनास्थल पर वापस लौटा।

    घटनास्थल पर पहुंचने के बाद हाइड्रा की मदद से ट्रक को उठाया गया, ताकि उसके नीचे फंसे गौरव को बाहर निकाला जा सके। लेकिन सौरभ की तमाम कोशिशों के बावजूद उसके भाई की जान नहीं बच सकी। जिस उम्मीद के साथ वह मशीन लेकर लौटा था, वह पूरी नहीं हो पाई। हादसे के बाद सौरभ के संघर्ष का वीडियो भी सामने आया, जिसमें भाई को बचाने के लिए की गई उसकी कोशिशों का घटनाक्रम दिखाई देता है।

    इस दुर्घटना में अन्य परिवारों को भी गंभीर नुकसान हुआ है। मृतकों में एक किशोर और उसके ताऊ भी शामिल बताए गए हैं। दोनों परिवार के साथ मंदिर में दर्शन करने आए थे। हादसे में किशोर के माता-पिता और परिवार के दूसरे सदस्य भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घायलों का अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में उपचार चल रहा है।

    हादसे में शिवपुरी जिले की 20 वर्षीय जाह्नवी भी घायल हुई। वह अपनी बहन और सहेली के साथ मंदिर आई थी। दुर्घटना में उसका पैर फ्रैक्चर हो गया। जाह्नवी ने बताया कि ट्रक अचानक लोगों के बीच आ गया। स्थिति इतनी तेजी से बदली कि श्रद्धालुओं को संभलने का मौका नहीं मिला। उसे ऐसा लगा, जैसे अचानक कोई बड़ा तूफान आ गया हो। चारों तरफ चीख-पुकार मच गई और लोग बचने के लिए भागने लगे। इसी दौरान वह भी गिर गई। उसने बताया कि मृतकों में उसके गांव के दो लोग भी शामिल हैं।

    हादसे में कुल 41 लोग प्रभावित हुए हैं, जिनमें 15 की मौत हुई और 26 घायल हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, ट्रक चालक रास्ता तलाशने के लिए गूगल मैप का इस्तेमाल कर रहा था। मामले में पुलिस ने चालक और ट्रक मालिक को गिरफ्तार किया है। दुर्घटना की परिस्थितियों और जिम्मेदारी से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है।

  • नर्मदापुरम में गड्ढे से बिगड़ा तेज रफ्तार कार का संतुलन, सड़क से उतरकर पेड़ पर चढ़ी गाड़ी

    नर्मदापुरम में गड्ढे से बिगड़ा तेज रफ्तार कार का संतुलन, सड़क से उतरकर पेड़ पर चढ़ी गाड़ी

    मध्य प्रदेश: के नर्मदापुरम जिले में माखननगर क्षेत्र के आरी-सांगाखेड़ा मार्ग पर रविवार शाम एक तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पेड़ पर चढ़ गई। हादसा शाम करीब 7 बजे हुआ। राहत की बात यह रही कि दुर्घटना में किसी को चोट नहीं आई और कार में सवार सभी लोग सुरक्षित बच गए। शुरुआती जानकारी के अनुसार, सड़क पर मौजूद गड्ढे की वजह से कार का संतुलन बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    घटना के दौरान कार सड़क से नीचे उतर गई और सीधे पेड़ पर जा चढ़ी। हादसे के बाद आसपास के लोगों का ध्यान मौके पर पहुंची गाड़ी की ओर गया। दुर्घटना में किसी के घायल नहीं होने से लोगों ने राहत की सांस ली। हालांकि, इस घटना ने क्षेत्र की सड़क की स्थिति और वहां से गुजरने वाले वाहनों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

    स्थानीय किसान एवं ग्रामीण केशव साहू के मुताबिक, दुर्घटना रविवार शाम करीब 7 बजे हुई। उस समय एक कार सड़क से उतरकर पेड़ पर चढ़ गई। उन्होंने बताया कि हादसे में किसी को चोट नहीं आई और सभी लोग सुरक्षित हैं। दुर्घटना की वजह तेज रफ्तार के दौरान सड़क के गड्ढे में कार का संतुलन बिगड़ना मानी जा रही है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में हादसे के कारण की आधिकारिक पुष्टि का उल्लेख नहीं है।

    ग्रामीणों के अनुसार, आरी और सांगाखेड़ा कला क्षेत्र से होकर गुजरने वाली सड़क पर इन दिनों भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ी हुई है। इसकी एक प्रमुख वजह तवा पुल का क्षतिग्रस्त होने के कारण बंद रहना बताई गई है। पुल बंद होने से भारी वाहनों को दूसरे रास्ते से निकाला जा रहा है। इस मार्ग पर आरी और सांगाखेड़ा कला होते हुए वाहनों का आवागमन जारी है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार भारी वाहनों के गुजरने से सड़क की हालत खराब हो गई है। जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जिससे छोटे वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सड़क की खराब स्थिति के कारण ग्रामीणों को भी आवागमन में दिक्कतें हो रही हैं। विशेष रूप से शाम और रात के समय गड्ढों के कारण वाहन चालकों के लिए रास्ते पर संभलकर चलना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

    ग्रामीणों के मुताबिक, इस मार्ग पर आए दिन दुर्घटनाएं होने की स्थिति बनी रहती है। सड़क पर गड्ढों और भारी वाहनों के दबाव को देखते हुए उन्होंने मार्ग की मरम्मत कराने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि सड़क की स्थिति में सुधार होने से स्थानीय लोगों और इस रास्ते से गुजरने वाले वाहन चालकों को राहत मिल सकती है।

    ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से सड़क का निर्माण या जरूरी मरम्मत कराने की मांग की है। उनका आग्रह है कि क्षतिग्रस्त हिस्सों को दुरुस्त किया जाए, ताकि आवागमन सुरक्षित हो सके और दुर्घटनाओं की आशंका कम हो। रविवार शाम हुई कार दुर्घटना में सभी सवारों का सुरक्षित रहना राहत की बात है, लेकिन सड़क पर बने गड्ढों और बढ़ते यातायात के कारण पैदा हो रही समस्याओं का समाधान स्थानीय लोगों की प्रमुख मांग बना हुआ है।

  • भोपाल की झुग्गी से अंतरराष्ट्रीय फैशन रैंप तक पहुंचने का सपना, 22 साल की प्रीति प्रजापति के लिए बहन ने सिले कपड़े, पिता बने ताकत

    भोपाल की झुग्गी से अंतरराष्ट्रीय फैशन रैंप तक पहुंचने का सपना, 22 साल की प्रीति प्रजापति के लिए बहन ने सिले कपड़े, पिता बने ताकत

    मध्य प्रदेश: की राजधानी भोपाल की एक झुग्गी बस्ती से निकलकर मॉडलिंग की दुनिया में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहीं 22 वर्षीय प्रीति प्रजापति की कहानी मेहनत, पारिवारिक सहयोग और बड़े सपने देखने के हौसले की मिसाल है। लहारपुर के रामेश्वरम एक्सटेंशन की तंग गलियों में रहने वाली प्रीति के परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य है। उनके पिता मिस्त्री का काम करते हैं, जबकि मां गृहिणी हैं। इसके बावजूद परिवार ने प्रीति के सपनों को आगे बढ़ने से नहीं रोका। आज वह मॉडलिंग के क्षेत्र में आगे बढ़ने और अंतरराष्ट्रीय फैशन रैंप पर अपनी प्रतिभा दिखाने का सपना देख रही हैं।

    प्रीति के पास शुरुआत में न तो मॉडलिंग के लिए कोई बड़ा स्टूडियो था और न ही महंगे डिजाइनर कपड़े खरीदने के पर्याप्त संसाधन। ऐसे में उन्होंने अपने घर के सामने की गली को ही अभ्यास का स्थान बना लिया। वहीं रैंप वॉक की तैयारी की और अपने वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने शुरू किए। धीरे-धीरे उनके वीडियो लोगों तक पहुंचने लगे और उनकी मेहनत को पहचान मिलने लगी। जिस गली में उन्होंने अपने मॉडलिंग सफर की शुरुआत की थी, वहां से आगे बढ़कर अब वह बड़े रैंप वॉक कार्यक्रमों में भी नजर आने लगी हैं।

    बहन ने अपने हुनर से पूरा किया बहन का सपना

    प्रीति की इस यात्रा में उनकी बहन रेखा प्रजापति का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। मॉडलिंग के लिए महंगे कपड़े खरीदना परिवार के लिए आसान नहीं था। ऐसे में रेखा ने अपनी सिलाई के हुनर का इस्तेमाल करते हुए प्रीति के लिए कपड़े तैयार किए। इससे प्रीति को अपने अभ्यास और कार्यक्रमों के लिए जरूरी परिधान मिल सके।

    रेखा का भी फैशन की दुनिया में अपनी पहचान बनाने का सपना है। वह फैशन डिजाइनर बनना चाहती हैं। इस तरह दोनों बहनें अपने-अपने हुनर के सहारे आगे बढ़ने की कोशिश कर रही हैं। एक बहन मॉडलिंग में अपनी जगह बनाने के लिए मेहनत कर रही है, जबकि दूसरी कपड़े सिलने की कला को फैशन डिजाइनिंग के क्षेत्र तक ले जाना चाहती है। उनका साथ दिखाता है कि सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार के भीतर मौजूद प्रतिभा और सहयोग बड़े सपनों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

    मिस्त्री पिता और गृहिणी मां ने बढ़ाया हौसला

    प्रीति के पिता मोतीलाल प्रजापति मिस्त्री का काम करते हैं और उनकी मां कलिंदा प्रजापति गृहिणी हैं। परिवार में दो भाई और तीन बहनें हैं। सभी तीन कमरों के छोटे से मकान में रहते हैं। आर्थिक परिस्थितियां सामान्य होने के बावजूद माता-पिता ने प्रीति की महत्वाकांक्षाओं पर पाबंदी नहीं लगाई।

    प्रीति की मां अपनी बेटी को आगे बढ़ते देखकर खुश हैं। वहीं पिता भी उसका पूरा सहयोग करते हैं और चाहते हैं कि वह अपनी मेहनत से परिवार का नाम रोशन करे। परिवार का यह समर्थन प्रीति के लिए आगे बढ़ने की प्रेरणा बना हुआ है।

    गली में अभ्यास से बड़े रैंप तक का सफर

    जब प्रीति घर के सामने की गली में रैंप वॉक का अभ्यास करती थीं, तब आसपास के लोग उनसे पूछते थे कि वह ऐसा क्यों कर रही हैं। उस समय उनके मॉडलिंग के सपने को लेकर लोगों के मन में सवाल थे। हालांकि, प्रीति ने अभ्यास जारी रखा और धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ती रहीं। अब उनके प्रयासों को देखकर पड़ोसी भी उनकी तारीफ करते हैं।

    प्रीति ने पॉलिटिकल साइंस में स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। कोरोना काल में पढ़ाई प्रभावित होने के बाद उन्होंने मॉडलिंग के क्षेत्र में आगे बढ़ने का फैसला किया। अब उनका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय फैशन मंचों पर रैंप वॉक करना और अपनी प्रतिभा को व्यापक पहचान दिलाना है।

    प्रीति के लिए यह सफर केवल मॉडल बनने तक सीमित नहीं है। वह अपने परिवार के सहयोग और अपनी मेहनत के दम पर आगे बढ़ना चाहती हैं। उनकी कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण अपने सपनों को पूरा करने में कठिनाई महसूस करते हैं।

  • छतरपुर में मिला 8 फीट लंबा दुर्लभ सफेद अजगर, पहली बार ऐसा सांप देखकर सर्प विशेषज्ञ भी रह गए हैरान

    छतरपुर में मिला 8 फीट लंबा दुर्लभ सफेद अजगर, पहली बार ऐसा सांप देखकर सर्प विशेषज्ञ भी रह गए हैरान


    मध्य प्रदेश:  के छतरपुर जिले में एक दुर्लभ सफेद अजगर दिखाई देने से इलाके में लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई। सनातन हिंदू एकता रथयात्रा के अंतिम दिन सामने आए इस नजारे ने वहां मौजूद लोगों का ध्यान खींचा। करीब 8 फीट लंबे इस सफेद अजगर को देखकर लोग हैरान रह गए। इसकी असामान्य रंगत के कारण इसे अल्बिनो अजगर बताया जा रहा है। सांप को देखने के बाद स्थानीय लोगों ने सर्प पकड़ने वाले विशेषज्ञों को सूचना दी, जिसके बाद मौके पर पहुंची टीम ने काफी मशक्कत करते हुए उसका सुरक्षित रेस्क्यू किया।

    रथयात्रा के समापन से जुड़े आयोजनों के बीच इस दुर्लभ सांप का दिखाई देना लोगों के लिए कौतूहल का विषय बन गया। सफेद रंग और लगभग 8 फीट लंबाई वाले इस अजगर को देखकर मौके पर मौजूद लोग आश्चर्यचकित रह गए। सूचना मिलने के बाद सर्प रेस्क्यू टीम ने स्थिति को संभाला और भीड़ के बीच सावधानीपूर्वक अजगर को पकड़ने की प्रक्रिया शुरू की।

    कड़ी मशक्कत के बाद किया गया सुरक्षित रेस्क्यू
    स्थानीय लोगों ने विशालकाय सफेद अजगर को देखने के बाद तुरंत सर्प पकड़ने वाले विशेषज्ञों को इसकी जानकारी दी। सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। अजगर की लंबाई और आसपास मौजूद लोगों की भीड़ को देखते हुए उसे सुरक्षित तरीके से पकड़ने के लिए सावधानी बरती गई। काफी मशक्कत के बाद टीम ने करीब 8 फीट लंबे अजगर का रेस्क्यू कर लिया।इस दौरान अजगर के असामान्य सफेद रंग ने लोगों की उत्सुकता और बढ़ा दी। रेस्क्यू करने वाले विशेषज्ञ ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में पहली बार इस तरह का पूरी तरह सफेद अजगर देखा है। उनके लिए भी यह अनुभव असामान्य था। घटना के बाद इलाके में इस दुर्लभ सांप को लेकर चर्चा होने लगी।

    क्या होता है अल्बिनो जीव?

    अल्बिनो ऐसे जीवों को कहा जाता है, जिनके शरीर में मेलेनिन नामक रंगद्रव्य की प्राकृतिक रूप से कमी होती है। मेलेनिन त्वचा, बालों और कई जीवों के शरीर के बाहरी हिस्सों में रंग निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब इसकी मात्रा बहुत कम होती है, तो त्वचा या शरीर का रंग सामान्य से काफी हल्का दिखाई दे सकता है।सांपों में भी रंगद्रव्य की कमी के कारण उनका रंग सामान्य प्रजाति के दूसरे सांपों से अलग नजर आ सकता है। ऐसे जीवों का रंग सफेद या बहुत हल्का दिखाई दे सकता है। हालांकि, केवल रंग के आधार पर किसी जीव को निश्चित रूप से अल्बिनो घोषित नहीं किया जा सकता। छतरपुर में मिले अजगर के अल्बिनो होने की आधिकारिक पुष्टि के लिए वन्यजीव विशेषज्ञों की जांच जरूरी है। फिलहाल इसे असामान्य सफेद रंग वाला दुर्लभ अजगर बताया जा रहा है।

    सांप दिखाई देने पर क्या करें?
    इस घटना के बाद लोगों से वन्यजीवों के प्रति सावधानी बरतने की अपील की गई है। जंगल, खेत या रिहायशी इलाके के आसपास सांप दिखाई देने पर घबराकर उसके पास जाने या उसे पकड़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। सांप को छेड़ने, नुकसान पहुंचाने या उसके साथ किसी तरह का प्रयोग करने से इंसानों और वन्यजीवों दोनों के लिए खतरा पैदा हो सकता है।ऐसी स्थिति में वन विभाग या प्रशिक्षित सर्प रेस्क्यू टीम को सूचना देना उचित है। विशेषज्ञ आवश्यक सावधानियों के साथ सांप को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की प्रक्रिया अपनाते हैं। छतरपुर में मिले सफेद अजगर की घटना ने एक बार फिर वन्यजीवों के संरक्षण और उनके साथ सुरक्षित व्यवहार के महत्व को सामने रखा है।

  • इंदौर में 23 अक्टूबर से सेमीकंडक्टर समिट, 50 से अधिक कंपनियां दिखाएंगी तकनीक; 6,200 करोड़ के निवेश पर नजर

    इंदौर में 23 अक्टूबर से सेमीकंडक्टर समिट, 50 से अधिक कंपनियां दिखाएंगी तकनीक; 6,200 करोड़ के निवेश पर नजर

    मध्य प्रदेश: में सेमीकंडक्टर उद्योग के विस्तार और निवेश की संभावनाओं को बढ़ावा देने के लिए इंदौर में 23 और 24 अक्टूबर को मध्य प्रदेश सेमीकंडक्टर समिट-2026 का आयोजन किया जाएगा। दो दिवसीय यह कार्यक्रम ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में होगा। इसमें सेमीकंडक्टर क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों, निवेशकों, उद्योग विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और स्टार्टअप प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले दिन उद्घाटन सत्र को संबोधित करेंगे।

    समिट में सेमीकंडक्टर उद्योग की विभिन्न तकनीकों, विनिर्माण की संभावनाओं और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में नए अवसरों पर चर्चा होगी। चिप डिजाइन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन और आधुनिक तकनीकी समाधानों को लेकर विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे। आयोजन का प्रमुख उद्देश्य प्रदेश में इस क्षेत्र के लिए निवेश आकर्षित करना और उद्योग से जुड़े लोगों के बीच सहयोग बढ़ाना है।

    समिट के दौरान 50 से अधिक कंपनियां अपनी तकनीक, उत्पादों और समाधानों का प्रदर्शन करेंगी। प्रदर्शनी में चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर पैकेजिंग एवं टेस्टिंग, तकनीकी उपकरण, विनिर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन से जुड़ी कंपनियां शामिल होंगी। कार्यक्रम में आठ पैनल चर्चाएं, पांच राउंडटेबल बैठकें और दो मुख्य व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे। इनके माध्यम से उद्योग की जरूरतों, तकनीकी विकास और निवेश से संबंधित मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

    पहले दिन की चर्चाओं में मध्य प्रदेश को सेमीकंडक्टर पैकेजिंग एवं टेस्टिंग हब के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा फैबलेस इकोसिस्टम, सेमीकंडक्टर विनिर्माण और आपूर्ति शृंखला को मजबूत बनाने जैसे विषय भी एजेंडे में शामिल हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए जरूरी अधोसंरचना, बौद्धिक संपदा और इस क्षेत्र में शिक्षण संस्थानों की भूमिका पर भी चर्चा होगी।

    दूसरे दिन का कार्यक्रम चिप टेक्नोलॉजी, AI और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के निर्माण पर केंद्रित रहेगा। डिजाइन सेवाओं, अनुसंधान एवं विकास और तकनीकी रूप से प्रशिक्षित युवाओं को तैयार करने की जरूरत पर भी विचार किया जाएगा। इसके साथ ही फोटोनिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) से जुड़े विषयों पर बैठकें होंगी। इन चर्चाओं में तकनीकी नवाचार और उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुरूप कौशल विकास के अवसरों पर ध्यान दिया जाएगा।

    कार्यक्रम के समापन समारोह में मध्य प्रदेश सेमीकॉन स्टार्टअप प्रतियोगिता के अंतिम चरण में चयनित विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा। इस प्रतियोगिता का उद्देश्य सेमीकंडक्टर क्षेत्र में काम कर रहे स्टार्टअप और नए तकनीकी समाधानों को प्रोत्साहित करना है। इससे इस क्षेत्र में नए उद्यमों को सामने लाने और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने की कोशिश की जाएगी।

    सेमीकंडक्टर उद्योग में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार ने मध्य प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति-2025 को मंजूरी दी है। इस नीति के तहत पात्र निवेश परियोजनाओं के लिए 25 प्रतिशत सब्सिडी और 10 साल तक दो रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इन प्रोत्साहनों के जरिए प्रदेश में सेमीकंडक्टर से संबंधित औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ाने की योजना है।

    इसी क्षेत्र में पारस सेमीकंडक्टर्स ने 6,200 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश से उन्नत सेमीकंडक्टर असेंबली एवं टेस्टिंग (OSAT) सुविधा स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। प्रस्तावित परियोजना से प्रदेश में सेमीकंडक्टर विनिर्माण और उससे जुड़ी औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं हैं। समिट में निवेश के अवसरों और नीतिगत प्रोत्साहनों पर चर्चा के साथ उद्योग, शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी जोर रहेगा। तकनीकी अधोसंरचना, अनुसंधान, नवाचार और कुशल मानव संसाधन का विकास इस क्षेत्र के विस्तार से जुड़े प्रमुख विषय होंगे।

  • विजयादशमी पर मध्यप्रदेश में होगा शस्त्र-पूजन, इंदौर में मुख्यमंत्री मोहन यादव करेंगे पूजा, 31 जिलों में मंत्री संभालेंगे जिम्मेदारी

    विजयादशमी पर मध्यप्रदेश में होगा शस्त्र-पूजन, इंदौर में मुख्यमंत्री मोहन यादव करेंगे पूजा, 31 जिलों में मंत्री संभालेंगे जिम्मेदारी

    मध्यप्रदेश: में विजयादशमी के अवसर पर 20 अक्टूबर 2026 को प्रदेशव्यापी शस्त्र-पूजन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। राज्य सरकार ने इस आयोजन के लिए जिलों के अनुसार जिम्मेदारियां तय की हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव इंदौर में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होकर शस्त्र-पूजन करेंगे। वहीं, प्रदेश के 31 जिलों में मंत्री और अन्य प्रमुख जनप्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। शेष 24 जिलों में कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक कार्यक्रम की जिम्मेदारी संभालेंगे।

    सरकार की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विजयादशमी पर शस्त्र-पूजन की परंपरा को आगे बढ़ाना और सुरक्षा, साहस तथा राष्ट्र के प्रति सम्मान के भाव को रेखांकित करना है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस परंपरा को देश की सैन्य शक्ति, सुरक्षा और स्वतंत्रता के प्रति सम्मान का प्रतीक बताया है। उनका कहना है कि शस्त्र-पूजन को साहस, आत्मरक्षा और अन्याय के खिलाफ खड़े होने की भावना से जोड़कर देखा जाना चाहिए।

    इन जिलों में प्रमुख नेता करेंगे शस्त्र-पूजन
    राज्य सरकार ने कई जिलों में मंत्रियों और प्रमुख जनप्रतिनिधियों को कार्यक्रम की जिम्मेदारी सौंपी है। इंदौर में मुख्यमंत्री मोहन यादव शस्त्र-पूजन करेंगे। ग्वालियर में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर कार्यक्रम की अगुवाई करेंगे। मंदसौर में उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और रीवा में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल शस्त्र-पूजन में शामिल होंगे।

    राजधानी भोपाल में मंत्री विश्वास सारंग पूजा-अर्चना करेंगे। धार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। नरसिंहपुर में मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल और जबलपुर में मंत्री राकेश सिंह शस्त्र-पूजन करेंगे। सीहोर में मंत्री करण सिंह वर्मा तथा नर्मदापुरम में मंत्री उदय प्रताप सिंह कार्यक्रम की जिम्मेदारी संभालेंगे।इनके अलावा प्रदेश के अन्य जिलों में भी मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों को जिम्मेदारियां दी गई हैं। सरकार की योजना के अनुसार, कुल 31 जिलों में मंत्री स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

    24 जिलों में प्रशासन संभालेगा जिम्मेदारी
    प्रदेश के बाकी 24 जिलों में शस्त्र-पूजन कार्यक्रम के संचालन की जिम्मेदारी जिला प्रशासन को दी गई है। इन स्थानों पर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक मिलकर आयोजन की व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे। इस तरह सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों में कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है।प्रशासनिक अधिकारियों की भागीदारी के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि निर्धारित कार्यक्रम संबंधित जिलों में आयोजित हो सके। शस्त्र-पूजन में सुरक्षा से जुड़े विभागों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी।

    विजयादशमी पर शस्त्र-पूजन का धार्मिक महत्व
    सनातन परंपरा में शस्त्रों को शक्ति, साहस और आत्मरक्षा का प्रतीक माना जाता है। विजयादशमी पर शस्त्र-पूजन की परंपरा का उद्देश्य शक्ति के सदुपयोग और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की भावना को मजबूत करना है। इस अवसर पर सैनिक और पुलिसकर्मी अपने हथियारों की पूजा करते हैं, जबकि कई अन्य क्षेत्रों में लोग अपने कामकाज से जुड़े औजारों का पूजन करते हैं।


    शस्त्र-पूजन की एक मान्यता महाभारत काल से जुड़ी है। धार्मिक कथाओं के अनुसार, पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान अपने हथियार शमी के पेड़ के नीचे छिपाए थे। अज्ञातवास पूरा होने के बाद अर्जुन ने शमी के पेड़ से अपने शस्त्र निकाले और राजा विराट के राज्य की रक्षा के लिए कौरवों की सेना का सामना किया। इसी मान्यता के कारण कई स्थानों पर विजयादशमी के दिन शमी के पेड़ और शस्त्रों की पूजा की जाती है।

    राम और दुर्गा की विजय से जुड़ा पर्व
    विजयादशमी को भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और मां दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध की मान्यताओं से भी जोड़ा जाता है। दोनों प्रसंग बुराई, अन्याय और अधर्म पर अच्छाई की जीत का संदेश देते हैं। इसी भावना के साथ शस्त्र-पूजन में शक्ति का इस्तेमाल सही उद्देश्यों, सुरक्षा और धर्म की रक्षा के लिए करने का संकल्प लिया जाता है।

    मध्यप्रदेश में होने वाला यह आयोजन धार्मिक परंपरा के साथ-साथ सुरक्षा और जिम्मेदारी के महत्व को भी सामने रखेगा। प्रदेश के सभी 55 जिलों में तय व्यवस्था के अनुसार कार्यक्रम संपन्न कराने की जिम्मेदारी मंत्रियों और प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपी गई है।