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  • मध्यप्रदेश को मिल सकते हैं 13 नए IAS अधिकारी, दिल्ली में आज DPC बैठक, चार विवादित नामों पर टिकी नजरें

    मध्यप्रदेश को मिल सकते हैं 13 नए IAS अधिकारी, दिल्ली में आज DPC बैठक, चार विवादित नामों पर टिकी नजरें


    मध्यप्रदेश: को जल्द ही भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 13 नए अधिकारी मिल सकते हैं। सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक आयोजित होनी है। इसमें राज्य प्रशासनिक सेवा के 39 अधिकारियों के नामों पर विचार किया जाएगा। वरिष्ठता और निर्धारित मूल्यांकन प्रक्रिया के आधार पर 13 अधिकारियों को आईएएस अवॉर्ड दिए जाने की संभावना है। हालांकि, प्रस्तावित सूची में शामिल चार अधिकारियों के नाम विवादों से जुड़े होने के कारण बैठक के फैसले पर सबकी नजरें टिकी हैं।

    यह बैठक मध्यप्रदेश के प्रशासनिक ढांचे के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। समिति अधिकारियों की गोपनीय रिपोर्ट, सेवा रिकॉर्ड और वरिष्ठता सहित निर्धारित मानकों के आधार पर उनके नामों का मूल्यांकन करेगी। इसके बाद तय होगा कि आईएएस अवॉर्ड के लिए किन अधिकारियों के नामों को मंजूरी मिलती है।

    इन 13 अधिकारियों के नाम सूची में शामिल
    प्रस्तावित सूची में सामान्य प्रशासन विभाग के उप सचिव जयेंद्र कुमार विजयवत का नाम शामिल है। राज्य निर्वाचन आयोग में उप सचिव मनोज मालवीय और परिवहन विभाग के उप सचिव कमल नागर भी आईएएस अवॉर्ड के दावेदारों में हैं।

    इसके अलावा शहडोल की अपर कलेक्टर मिनिषा पांडेय, भोपाल जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी इला तिवारी और इंदौर संभाग में उपायुक्त (राजस्व) सपना एम. लोवंशी का नाम भी सूची में शामिल है। बुरहानपुर की अपर कलेक्टर नीता राठौर और शाजापुर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी शैलेंद्र सिंह सोलंकी भी इस दौड़ में हैं।

    अन्य दावेदारों में भोपाल स्थित लोकायुक्त कार्यालय की उप सचिव रानी पासी, आयुष विभाग की उप सचिव रंजना देवड़ा, महिला एवं बाल विकास विभाग की उप सचिव माधवी नागेंद्र और पर्यावरण विभाग की उप सचिव वर्षा सोलंकी शामिल हैं। माध्यमिक शिक्षा मंडल की अतिरिक्त सचिव प्रियंका गोयल का नाम भी प्रस्तावित 13 अधिकारियों की सूची में है।

    चार विवादित नामों पर क्यों टिकी नजरें?
    आईएएस अवॉर्ड की प्रक्रिया में चार नामों को लेकर विवाद की चर्चा है। महीप किशोर तेजस्वी के नाम पर कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने आपत्ति दर्ज कराई है। वहीं, आरटीआई कार्यकर्ता अजय दुबे ने सपना एम. लोवंशी के नाम पर विरोध जताया है।

    हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि सामान्य प्रशासन विभाग ने इन आपत्तियों को स्वीकार किया है या नहीं। यह भी साफ नहीं है कि तेजस्वी और लोवंशी उन चार अधिकारियों में शामिल हैं या नहीं, जिनके नामों को लेकर विवाद बताया जा रहा है। इसलिए अंतिम सूची में इन अधिकारियों की स्थिति का पता बैठक के निर्णय के बाद ही चलेगा।

    चार नाम अटके तो इन अधिकारियों को मिल सकता है मौका
    यदि विवादित नामों पर सहमति नहीं बनती है या कुछ नाम चयन प्रक्रिया में आगे नहीं बढ़ पाते हैं, तो वरिष्ठता क्रम में अन्य अधिकारियों पर विचार किया जा सकता है। संभावित विकल्पों में हरदा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी नरोत्तम प्रसाद भार्गव, मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग में अपर नियंत्रक निधि सिंह राजपूत, सामान्य प्रशासन विभाग के कार्मिक शाखा में उप सचिव निमिषा जायसवाल और उज्जैन जिला पंचायत एवं विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संदीप कुमार सोनी के नाम शामिल हैं। हालांकि, इन अधिकारियों के चयन की संभावना भी अंतिम मूल्यांकन और उपलब्ध पदों के आधार पर तय होगी।

    चार श्रेणियों में होगा अधिकारियों का मूल्यांकन
    प्रस्तावित 39 अधिकारियों के नामों पर विचार करते समय उनकी गोपनीय चरित्रावली (CR) और वरिष्ठता को महत्व दिया जाएगा। मूल्यांकन के तहत अधिकारियों को आउटस्टैंडिंग, वेरी गुड, गुड और अनफिट जैसी श्रेणियों में रखा जा सकता है। पहले आउटस्टैंडिंग श्रेणी के अधिकारियों पर विचार होगा। इसके बाद उपलब्ध कोटे के अनुसार वेरी गुड और गुड श्रेणी के अधिकारियों के नामों पर विचार किया जाएगा।

    यह प्रक्रिया सामान्य पदोन्नति से अलग है। इसे योग्यता के आधार पर नियुक्ति की प्रक्रिया माना जाता है। इसमें अधिकारियों की पिछले पांच वर्षों की गोपनीय रिपोर्ट महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसी कारण किसी अधिकारी की वर्तमान वरिष्ठता के बावजूद उसका चयन मूल्यांकन के परिणाम पर निर्भर कर सकता है।

    अब दिल्ली में होने वाली बैठक के निर्णय से तय होगा कि मध्यप्रदेश के किन अधिकारियों को आईएएस अवॉर्ड मिलता है। साथ ही विवादित नामों की स्थिति और संभावित वैकल्पिक अधिकारियों के चयन को लेकर भी तस्वीर स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • मध्यप्रदेश में घी की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल, 50 से ज्यादा नमूने जांच में फेल, 42 उत्पाद वापस मंगाने के निर्देश और 8 पर बिक्री रोक

    मध्यप्रदेश में घी की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल, 50 से ज्यादा नमूने जांच में फेल, 42 उत्पाद वापस मंगाने के निर्देश और 8 पर बिक्री रोक


    मध्यप्रदेश:
    में घी की गुणवत्ता को लेकर खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चिंता बढ़ गई है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन की जांच में घी के 50 से ज्यादा नमूने निर्धारित गुणवत्ता जांच में फेल पाए गए हैं। इसके बाद विभाग ने 42 उत्पादों को बाजार से वापस मंगाने के निर्देश दिए हैं, जबकि आठ उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाई गई है। उपभोक्ताओं से संबंधित उत्पाद नहीं खरीदने और यदि पहले खरीद चुके हैं तो उन्हें वापस करने की अपील की गई है।

    घी भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाला प्रमुख खाद्य पदार्थ है। ऐसे में बड़ी संख्या में नमूनों का जांच में असुरक्षित पाया जाना उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण मामला है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में सभी नमूनों के फेल होने के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं की गई है। इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि प्रत्येक उत्पाद में मिलावट ही पाई गई है। गुणवत्ता संबंधी खामी का वास्तविक कारण विस्तृत जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

    जांच में इन ब्रांडों के नाम आए सामने

    जांच में जिन घी उत्पादों के नमूने असुरक्षित बताए गए हैं, उनमें अनिक घी, सात्विक केश देसी घी, श्रीमूल एगमार्क शुद्ध घी और एसआरएमएआई मिल्क क्रीम एगमार्क घी शामिल हैं। इसके अलावा अमृत शुद्ध घी, नंद कृष्ण घी और मधुसूदन देसी घी के नमूने भी जांच में फेल बताए गए हैं।

    सूची में देसी गाय का घी संगठन, जवासी काउ देशी घी, संगठन काउ घी, डेयरी सरस घी और जेबीएस ऑर्गेनिक गाय का घी भी शामिल हैं। खुशबू ब्रांड घी, गसांता प्रीमियम काउ घी, गुमर योर काउ घी, श्री शुद्ध एगमार्क घी और वास्तु एगमार्क घी के नमूने भी असुरक्षित पाए जाने की जानकारी दी गई है।

    जिलों में उत्पादों की बिक्री पर कार्रवाई
    जांच के बाद प्रदेश के अलग-अलग जिलों में कुछ उत्पादों की बिक्री रोकने के आदेश जारी किए गए हैं। छिंदवाड़ा में पतंजलि काउ घी के पैक की बिक्री पर रोक लगाई गई है। कटनी में अनिक घी और नर्मदापुरम में संगठन काउ घी की बिक्री रोकने के निर्देश दिए गए हैं।

    धार जिले में चार घी उत्पादों की बिक्री रोकने की जानकारी सामने आई है। इनमें अनिक देसी घी, श्रीमूल घी, एसआरएमएआई मिल्क क्रीम एगमार्क घी और अमृत शुद्ध घी शामिल हैं। वहीं, इंदौर में पीवर इंदौरी लाल मिर्च पाउडर की बिक्री पर रोक लगाई गई है। इससे स्पष्ट होता है कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच केवल घी तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य खाद्य उत्पाद भी जांच के दायरे में हैं।

    उपभोक्ता क्या सावधानी बरतें
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    विभाग ने जिन उत्पादों को लेकर निर्देश जारी किए हैं, उन्हें खरीदने से बचने और पहले से खरीदे गए संबंधित उत्पादों को वापस करने की अपील की है। उपभोक्ताओं को पैकेट पर लिखे ब्रांड, उत्पाद का नाम और बैच संबंधी जानकारी ध्यान से देखनी चाहिए। किसी उत्पाद के असुरक्षित पाए जाने की सूचना मिलने पर उसे इस्तेमाल करने के बजाय संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग से मार्गदर्शन लेना उचित है।

    जांच में नमूना फेल होने का अर्थ यह है कि संबंधित उत्पाद निर्धारित जांच मानकों पर खरा नहीं उतरा। हालांकि, इससे अपने आप यह साबित नहीं होता कि उसे खा चुके प्रत्येक व्यक्ति की सेहत को नुकसान हुआ है। उपलब्ध जानकारी में ऐसे उपभोक्ताओं पर स्वास्थ्य प्रभाव को लेकर कोई निश्चित निष्कर्ष नहीं दिया गया है।

    तेज जांच और पारदर्शिता की जरूरत
    इस मामले ने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच की गति और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों ने जांच प्रक्रिया तेज करने और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया है। समय पर जांच और कार्रवाई होने से असुरक्षित उत्पादों की बिक्री रोकने में मदद मिल सकती है।

    घी के 50 से ज्यादा नमूनों का असुरक्षित पाया जाना उपभोक्ताओं के लिए सतर्क रहने का संकेत है। अब जांच के निष्कर्षों, उत्पादों की वापसी और बिक्री पर लगाई गई रोक के प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान देना जरूरी होगा।

  • दशहरे पर इंदौर-उज्जैन समेत MP के पश्चिमी हिस्से में बारिश के आसार, 15 जिलों में अलर्ट

    दशहरे पर इंदौर-उज्जैन समेत MP के पश्चिमी हिस्से में बारिश के आसार, 15 जिलों में अलर्ट


    भोपाल। मध्यप्रदेश में दशहरे के दिन बारिश उत्सव के रंग में खलल डाल सकती है। मौसम विभाग ने 20 अक्टूबर को इंदौर, उज्जैन, रतलाम समेत पश्चिमी मध्यप्रदेश के कई जिलों में आंधी-बारिश की संभावना जताई है। इस दौरान हवा की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। सोमवार को भी प्रदेश के 15 जिलों में बारिश का अनुमान है। इनमें भोपाल, उज्जैन, आगर-मालवा, राजगढ़, शाजापुर, देवास, सीहोर, विदिशा, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर और दमोह शामिल हैं।

    मौसम विभाग के अनुसार, 20, 21 और 22 अक्टूबर को पश्चिमी मध्यप्रदेश में बारिश का दौर जारी रह सकता है। वहीं, पूर्वी हिस्से में मौसम अपेक्षाकृत साफ रहने और धूप निकलने की संभावना है।

    दशहरे पर इन जिलों में बारिश के आसार

    दशहरे के दिन इंदौर, उज्जैन, रतलाम, झाबुआ, आलीराजपुर, बड़वानी, धार, खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा, देवास, शाजापुर, हरदा और बैतूल में बारिश हो सकती है। इन इलाकों में गरज-चमक के साथ तेज हवा चलने की आशंका भी है। ऐसे में दशहरा आयोजन, रावण दहन और खुले मैदानों में होने वाले कार्यक्रमों के दौरान मौसम पर नजर रखना जरूरी होगा।

    रविवार को तेज बारिश से पंडालों में भरा पानी

    रविवार को इंदौर, सीहोर और शाजापुर सहित कई इलाकों में तेज बारिश हुई। सीहोर में बारिश और हवा के कारण माता के पंडालों के टेंट उड़ गए। महू में गरबा और माता की स्थापना के लिए तैयार किए गए पंडालों में पानी भर गया। बारिश के कारण रावण के पुतले भी भीग गए।

    गुना शहर में रविवार शाम अचानक मौसम बदला और आधे घंटे से अधिक समय तक तेज बारिश हुई। बेमौसम बरसात से शहर की प्रमुख सड़कों पर पानी भर गया, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

    ट्रफ और चक्रवाती परिसंचरण से बदला मौसम

    मौसम विभाग के मुताबिक, पश्चिमी मध्यप्रदेश के ऊपर से एक ट्रफ गुजर रही है। इसके साथ ही चक्रवाती परिसंचरण यानी साइक्लोनिक सर्कुलेशन का प्रभाव भी बना हुआ है। इन मौसमी प्रणालियों के कारण प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में आंधी और बारिश की गतिविधियां बढ़ी हैं। अगले चार दिन तक इस क्षेत्र में रुक-रुककर बारिश होने की संभावना है।

    3 अक्टूबर को लौट चुका है मानसून, फिर भी बारिश

    मध्यप्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई 3 अक्टूबर को हो चुकी है, लेकिन सक्रिय मौसमी प्रणालियों के कारण बारिश का सिलसिला फिर शुरू हो गया है। बीते एक सप्ताह से पूर्वी और पश्चिमी, दोनों हिस्सों के कई जिलों में आंधी-बारिश दर्ज की गई है। पिछले चार दिनों में कुछ इलाकों में तेज बारिश भी हुई है।

    मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, अक्टूबर में गर्मी, बारिश और रात के तापमान में गिरावट का मिला-जुला असर सामान्य तौर पर देखने को मिलता है। इस बार भी यही स्थिति बन रही है। महीने की शुरुआत में मौसम साफ होने और दिन में धूप निकलने के साथ रातों में ठंडक महसूस की गई, जबकि अब कई जिलों में फिर बारिश हो रही है। इस साल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून करीब 100 दिन तक सक्रिय रहा।

  • दतिया के उड़ीना गांव में त्रयोदशी भोज के बाद बिगड़ी ग्रामीणों की तबीयत, रसगुल्लों की गुणवत्ता पर उठे सवाल

    दतिया के उड़ीना गांव में त्रयोदशी भोज के बाद बिगड़ी ग्रामीणों की तबीयत, रसगुल्लों की गुणवत्ता पर उठे सवाल

    मध्य प्रदेश। के दतिया जिले के भांडेर तहसील अंतर्गत उड़ीना गांव में त्रयोदशी भोज के बाद कई ग्रामीणों की तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आया है। 15 अक्टूबर को आयोजित इस कार्यक्रम में भोजन करने के बाद लोगों को उल्टी, पेट दर्द और सिरदर्द जैसी शिकायतें होने लगीं। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में शिविर लगाकर प्रभावित लोगों का इलाज शुरू किया। हालांकि, ग्रामीणों के बीमार पड़ने की वास्तविक वजह की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    जानकारी के अनुसार, गांव के निवासी तिलक सिंह यादव के पिता एदल सिंह पटेल का बीमारी के चलते निधन हो गया था। उनके निधन के बाद परिवार की ओर से त्रयोदशी का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसमें शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे थे। भोजन के दौरान लोगों ने अन्य व्यंजनों के साथ रसगुल्ले भी खाए। इसके बाद कई लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी और गांव में स्वास्थ्य संबंधी परेशानी को लेकर चिंता बढ़ गई।

    इस घटना में लगभग एक हजार लोगों के बीमार होने की बात सामने आई है। हालांकि, इस संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए प्रभावित लोगों की वास्तविक संख्या को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से उपलब्ध जानकारी के आधार पर ही बीमारी के दायरे का सही आकलन किया जा सकेगा।

    ग्रामीणों के बीमार पड़ने के बाद रसगुल्लों की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे। आशंका जताई जा रही है कि मिठाई तैयार करने में इस्तेमाल किया गया मावा खराब हो सकता था। मावा या खोया दूध को पकाकर तैयार किया जाता है और कई प्रकार की मिठाइयों में इसका उपयोग होता है। यदि मिठाई बनाने में इस्तेमाल की गई सामग्री दूषित हो, तो उसे खाने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। हालांकि, उड़ीना गांव की घटना में खराब मावे को बीमारी का कारण मानने की अभी पुष्टि नहीं हुई है।

    मामले में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर उठ रही आशंकाओं के बीच जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। यह स्पष्ट होना बाकी है कि रसगुल्ले तैयार करने में किस सामग्री का इस्तेमाल किया गया था, मावा कहां से लाया गया था और मिठाई बनाने की प्रक्रिया में साफ-सफाई के मानकों का पालन हुआ था या नहीं। जांच पूरी होने से पहले किसी खाद्य सामग्री या व्यक्ति को घटना के लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।

    घटना की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने 17 अक्टूबर को गांव में चिकित्सा शिविर लगाया। शिविर में बीमार ग्रामीणों की जांच की गई और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया गया। कुछ मरीजों को जिला अस्पताल के अलावा इंदरगढ़ और भांडेर के अस्पतालों में भी इलाज के लिए जाना पड़ा। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने प्रभावित लोगों की स्थिति का आकलन किया और जरूरत के अनुसार उपचार दिया।

    भांडेर के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. जयंत यादव के अनुसार, गांव में लगाए गए शिविर के दौरान जांच किए गए लोगों में गंभीर लक्षण नहीं पाए गए। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई गई है और किसी गंभीर समस्या की जानकारी सामने नहीं आई है। इसके बावजूद घटना के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है, ताकि बीमारी के स्रोत का पता लगाया जा सके।

    यह घटना सार्वजनिक और पारिवारिक आयोजनों में भोजन की गुणवत्ता तथा स्वच्छता के महत्व को रेखांकित करती है। ऐसे कार्यक्रमों में खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, उसे तैयार करने के तरीके और सुरक्षित रखरखाव पर ध्यान देना आवश्यक है। भोजन करने के बाद उल्टी, पेट दर्द या सिरदर्द जैसे लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेना चाहिए। उड़ीना गांव में ग्रामीणों के बीमार पड़ने के मामले में अब बीमारी के वास्तविक कारण की पुष्टि और प्रभावित लोगों की स्थिति पर आगे की जानकारी महत्वपूर्ण रहेगी।

  • इंदौर गरबा विवाद में बीजेपी नेता कमल सिंह चौहान पर पॉक्सो की धाराएं, एफआईआर में नाबालिग ने लगाए गंभीर आरोप

    इंदौर गरबा विवाद में बीजेपी नेता कमल सिंह चौहान पर पॉक्सो की धाराएं, एफआईआर में नाबालिग ने लगाए गंभीर आरोप


    मध्य प्रदेश:
    के इंदौर में गरबा आयोजन के दौरान नाबालिग लड़की के साथ कथित अभद्रता का मामला सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी के मंडल अध्यक्ष कमल सिंह चौहान की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उनके खिलाफ पॉक्सो एक्ट की धारा 7 और 8 के साथ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 74 और 75(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। शिकायत में लड़की ने आरोप लगाया है कि चौहान ने उसका हाथ पकड़ा, खींचा और सीने पर हाथ मारते हुए धक्का दिया। दूसरी ओर, चौहान ने अपने ऊपर लगे आरोपों पर सफाई देते हुए पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।

    यह मामला विधानसभा क्षेत्र क्रमांक दो में आयोजित मां कनकेश्वरी गरबा उत्सव से जुड़ा है। घटना 15 और 16 अक्टूबर की दरमियानी रात की बताई गई है। शिकायत 17 वर्षीय लड़की ने 17 अक्टूबर को दर्ज कराई। आयोजन के दौरान लड़की को धक्का दिए जाने का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में आया। इसके बाद पार्टी ने भी चौहान से जवाब मांगा और उन्हें तीन दिन के भीतर अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया।

    एफआईआर में दर्ज शिकायत के मुताबिक, लड़की की छोटी बहन गरबा आयोजन में शामिल थी। गरबा करते समय उसे प्यास लगी तो बड़ी बहन ने उसे पानी पिलाया। इस दौरान छोटी बहन का पास बड़ी बहन के पास ही रह गया। वह पास लौटाने के लिए अपनी बहन को आवाज लगा रही थी। इसी बीच कमल सिंह चौहान वहां पहुंचे और उससे पूछने लगे कि वह पास क्यों बदल रही है।

    लड़की ने शिकायत में बताया कि उसने चौहान को स्पष्ट किया कि वह पास नहीं बदल रही, बल्कि उसकी बहन का पास उसके पास रह गया है। आरोप है कि इसके बाद चौहान ने उसका हाथ गलत तरीके से पकड़ा और खींचा। लड़की के मुताबिक, उन्होंने उसके सीने पर हाथ मारते हुए जोर से धक्का भी दिया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि चौहान ने कहा कि यहां हजारों लड़कियां आती हैं और उन्हें मालूम है कि वे क्या करती हैं। लड़की ने कहा कि इस तरह छुआ जाना उसे अच्छा नहीं लगा। उसने अपने पिता के साथ भी गलत व्यवहार किए जाने का आरोप लगाते हुए पुलिस से कार्रवाई की मांग की।

    मामले में पॉक्सो एक्ट की धारा 7 और 8 लगाए जाने की वजह भी शिकायत में दर्ज आरोपों से जुड़ी है। धारा 7 के तहत बच्चे के साथ यौन मंशा से शारीरिक संपर्क बनाने या ऐसा कृत्य करने का आरोप आने पर कार्रवाई हो सकती है। इसमें कपड़ों के ऊपर से किया गया संपर्क भी परिस्थितियों और कथित मंशा के आधार पर शामिल हो सकता है। धारा 8 में इस अपराध के लिए सजा का प्रावधान है। दोष सिद्ध होने पर तीन से पांच साल तक की कैद और जुर्माना लगाया जा सकता है।

    इसके अलावा, बीएनएस की धारा 74 महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने की नीयत से हमला करने या आपराधिक बल के इस्तेमाल से संबंधित है। धारा 75 यौन उत्पीड़न से जुड़े कृत्यों को परिभाषित करती है, जब
    कि इसकी उपधारा 75(2) में संबंधित अपराध के लिए सजा का प्रावधान है। इन धाराओं के तहत कार्रवाई का आधार शिकायत में लगाए गए आरोप हैं। आरोप सही हैं या नहीं, इसका अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगा।

    उधर, कमल सिंह चौहान ने वीडियो जारी कर अपनी सफाई दी है। उन्होंने कहा कि वह पिछले दस वर्षों से गरबा आयोजन में सेवा दे रहे हैं और अब तक ऐसी घटना नहीं हुई। चौहान का दावा है कि लड़की के पिता शराब पीकर आयोजन में आए थे। उनके मुताबिक, वह पिता को समझाने पहुंचे थे, तभी लड़की बीच में आ गई और उनसे बहस करने लगी। उन्होंने आरोप लगाया कि लड़की ने गाली भी दी और समझाने के बावजूद नहीं मानी। चौहान ने कहा कि जब उन्होंने उसे बाहर निकाला, तब यह घटना हुई।

    चौहान ने यह भी कहा कि यदि उनके व्यवहार से किसी को बुरा लगा है तो वह माफी मांगते हैं। उन्होंने लड़की से भी माफी मांगने की बात कही और मुख्यमंत्री, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष तथा नगर अध्यक्ष से मामले की जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि जांच में वह दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें फांसी पर चढ़ा दिया जाए। फिलहाल, मामला दर्ज होने के बाद आरोपों की जांच और दोनों पक्षों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

  • दिग्विजय सिंह ने डेली कॉलेज में संघ के आयोजन पर जताई आपत्ति, सिंधिया से पूछा ग्वालियर में कार्यक्रम क्यों नहीं कराते

    दिग्विजय सिंह ने डेली कॉलेज में संघ के आयोजन पर जताई आपत्ति, सिंधिया से पूछा ग्वालियर में कार्यक्रम क्यों नहीं कराते


    मध्य प्रदेश।
    के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इंदौर के डेली कॉलेज में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रस्तावित आयोजन पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में राजनीतिक कार्यक्रम नहीं होने चाहिए। इस मामले में उन्होंने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से भी चर्चा की है। दिग्विजय सिंह के मुताबिक, उन्होंने सिंधिया से सवाल किया कि संघ का कार्यक्रम ग्वालियर स्थित सिंधिया स्कूल में क्यों नहीं कराया जाता। उन्होंने यह भी बताया कि इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत को पत्र लिखकर आयोजन का स्थान बदलने की मांग करेंगे।

    दिग्विजय सिंह इन दिनों अपनी प्रस्तावित सनातन यात्रा की तैयारियों में जुटे हैं। इसी सिलसिले में इंदौर पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री ने कई राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर अपनी बात रखी। डेली कॉलेज में होने वाली आरएसएस की अखिल भारतीय कार्यकारिणी की बैठक को लेकर उन्होंने संस्थान के प्रबंधन के सामने भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। इस बैठक में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत सहित देशभर से राष्ट्रीय और प्रांत स्तर के पदाधिकारियों के शामिल होने का कार्यक्रम है। इसके अलावा 28 अक्टूबर को यहां करीब एक लाख स्वयंसेवकों के जुटने का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है।

    दिग्विजय सिंह ने बताया कि इस मुद्दे पर उनकी डेली कॉलेज बोर्ड के चेयरमैन विक्रम पंवार और अन्य सदस्यों के साथ बैठक हुई थी। बातचीत के दौरान इस बात पर सहमति बनी कि कॉलेज परिसर में राजनीतिक कार्यक्रम नहीं होने चाहिए। हालांकि, उनके अनुसार बोर्ड चेयरमैन ने यह भी कहा कि इस बार संघ के आयोजन को रोकना संभव नहीं है। दिग्विजय सिंह ने इसी निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा कि शैक्षणिक परिसर में इस तरह के आयोजन से बचना चाहिए।

    उन्होंने बताया कि डेली कॉलेज के संरक्षक केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से भी उन्होंने इस विषय पर बात की थी। दिग्विजय सिंह के मुताबिक, उन्होंने सिंधिया से कहा कि कॉलेज में संघ का कार्यक्रम नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने सवाल किया कि इस आयोजन के लिए ग्वालियर के सिंधिया स्कूल का चयन क्यों नहीं किया जाता। दिग्विजय सिंह ने दावा किया कि उनके इस सवाल पर सिंधिया ने कोई जवाब नहीं दिया।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वह इस मामले में डॉ. मोहन भागवत को पत्र लिखने जा रहे हैं। पत्र के माध्यम से वह आयोजन का स्थान बदलने की मांग करेंगे। उन्होंने कहा कि जब वह दस साल तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, तब इस दौरान डेली कॉलेज में कभी कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं हुआ। उन्होंने ये बातें इंदौर में स्टेट प्रेस क्लब के रूबरू कार्यक्रम के दौरान कहीं।

    राजनीतिक मतभेदों के बीच आपसी संबंधों पर बात करते हुए दिग्विजय सिंह ने मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को अपना पुराना मित्र बताया। उन्होंने कहा कि विजयवर्गीय के साथ उनकी मित्रता करीब 30 से 35 साल पुरानी है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दोस्ती के बावजूद राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में कोई कमी नहीं रहती। दोनों एक-दूसरे की आलोचना भी करते हैं। उनके मुताबिक, राजनीति में मतभेद होना जरूरी है, लेकिन मनभेद नहीं होना चाहिए।

    दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनके संबंध पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर, विक्रम वर्मा और सुंदरलाल पटवा जैसे नेताओं के साथ भी मित्रतापूर्ण रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह विक्रम वर्मा के यहां शादी में शामिल हुए थे और सुंदरलाल पटवा के घर दाल-बाफले खाने भी जाते थे। उन्होंने कहा कि राजनीतिक जीवन में इस तरह के आपसी संबंधों की परंपरा बनी रहनी चाहिए और असहमति को व्यक्तिगत दुश्मनी में नहीं बदलना चाहिए।

    मध्य प्रदेश पर बढ़ते कर्ज को लेकर भी दिग्विजय सिंह ने सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि राज्य पर करीब 5.50 लाख करोड़ रुपये का कर्ज हो गया है, जबकि जब उन्होंने मुख्यमंत्री पद छोड़ा था, तब यह लगभग 23 हजार करोड़ रुपये था। लाड़ली बहना योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भी संकेतों में इस योजना को आर्थिक बोझ बता चुके हैं। उन्होंने सवाल किया कि जब फिलहाल योजना के तहत 1,250 रुपये की किस्त दी जा रही है, तो इसे बढ़ाकर 3,000 रुपये करने पर स्थिति क्या होगी। इस मुद्दे पर उन्होंने कहा कि आगे की स्थिति को शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री मोहन यादव देखेंगे।

  • राहुल गांधी ने उठाए एमपी में 27% ओबीसी आरक्षण, हॉस्टलों की बदहाली और बालाघाट के आदिवासी परिवारों के गंभीर मुद्दे

    राहुल गांधी ने उठाए एमपी में 27% ओबीसी आरक्षण, हॉस्टलों की बदहाली और बालाघाट के आदिवासी परिवारों के गंभीर मुद्दे

    नई दिल्ली ।लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक ऑडियो संदेश के जरिए पिछले एक महीने के दौरान अपने दौरों, मुलाकातों और उठाए गए मुद्दों का जिक्र किया। उन्होंने मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की मांग से लेकर छात्रों की समस्याओं और बालाघाट के आदिवासी परिवारों की परेशानियों पर अपनी बात रखी। इसके साथ ही उन्होंने चुनाव प्रक्रिया, संस्थाओं की जवाबदेही और निष्पक्ष परीक्षाओं से जुड़े सवाल भी उठाए।

    राहुल गांधी ने इंदौर में आयोजित छात्रों के कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां युवाओं के साथ शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई विषयों पर चर्चा हुई। छात्रों ने सत्य निकेतन की घटना, शिक्षा बजट में कटौती, छात्रावासों की कमी और परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं जैसे मुद्दे सामने रखे। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान जरूरी सुविधाएं मिलनी चाहिए और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

    अपने संदेश में राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर भी आरोप लगाए। उनका कहना था कि इनके नेतृत्व में एक खास विचारधारा से जुड़े लोगों का संस्थानों पर प्रभाव बढ़ रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि व्यवस्था को सवाल पूछने वाले छात्रों के बजाय अंधसमर्थक चाहिए। ये टिप्पणियां राहुल गांधी के राजनीतिक आरोपों और शिक्षा व्यवस्था को लेकर उनकी चिंताओं का हिस्सा थीं।

    राहुल गांधी ने महाराष्ट्र के नासिक में आदिवासी छात्रों से हुई मुलाकात का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि छात्रावासों की खराब स्थिति और वहां लागू कड़े नियमों को लेकर उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा था। उनके अनुसार, इसके बाद छात्रावास में रहने के लिए निर्धारित आयु सीमा से संबंधित नियम वापस ले लिया गया। उन्होंने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की परीक्षा में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों के प्रति समर्थन भी जताया।

    मध्य प्रदेश के संदर्भ में राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लिखे पत्र का उल्लेख किया। उन्होंने राज्य में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को पूरी तरह लागू करने की मांग की। यह मुद्दा प्रदेश में आरक्षण व्यवस्था और उससे जुड़े कानूनी तथा प्रशासनिक फैसलों के बीच महत्वपूर्ण बना हुआ है। राहुल गांधी ने अपने संदेश में इस मांग को प्रमुखता से उठाया और राज्य सरकार से इस दिशा में कदम उठाने की अपील की।

    उन्होंने बालाघाट के दौरे के दौरान आदिवासी परिवारों से हुई मुलाकात को भी याद किया। राहुल गांधी ने उन परिवारों की पीड़ा का जिक्र किया, जिन्होंने कुपोषण और गंभीर बीमारियों के कारण अपने छोटे बच्चों को खो दिया था। उन्होंने कहा कि कुछ दुख इतने गहरे होते हैं कि उन्हें शब्दों में व्यक्त करना मुश्किल हो जाता है। उनके मुताबिक, इस दौरे का उद्देश्य पीड़ित परिवारों की बातें सुनना और उनके दुख में सहभागी बनना था।

    राहुल गांधी ने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे उठाते हुए दिल्ली की बेला एस्टेट झुग्गी बस्ती का उदाहरण दिया। उन्होंने दावा किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के बाद वहां 729 लोगों में से 728 लोगों का मतदान का अधिकार छिन गया। उन्होंने निष्पक्ष परीक्षाओं की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का भी उल्लेख किया। राहुल गांधी ने इन घटनाओं को लोकतांत्रिक संस्थाओं और संविधान से जुड़े सवालों के रूप में पेश किया तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा देने की मांग की।

    अपने ऑडियो संदेश में राहुल गांधी ने 30 सितंबर को नई दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में हुई इंडिया गठबंधन की बैठक का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, बैठक में आम नागरिकों के मतदान के अधिकार की रक्षा पर चर्चा हुई। इसके अलावा उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली में दिशा समिति की बैठक और विकास कार्यों की समीक्षा, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से मुलाकात तथा दो अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती पर राजघाट जाकर श्रद्धांजलि देने की जानकारी भी साझा की।

  • नाबालिग से कथित अभद्रता पर भाजपा मंडल अध्यक्ष पर केस, कमल चौहान ने वीडियो जारी कर मांगी निष्पक्ष जांच

    नाबालिग से कथित अभद्रता पर भाजपा मंडल अध्यक्ष पर केस, कमल चौहान ने वीडियो जारी कर मांगी निष्पक्ष जांच


    इंदौर । इंदौर के कनकेश्वरी गरबा पंडाल में 15 वर्षीय नाबालिग बालिका के साथ कथित अभद्रता और धक्का-मुक्की का मामला लगातार चर्चा में है। इस मामले में भाजपा मंडल अध्यक्ष कमल चौहान के खिलाफ हीरा नगर पुलिस द्वारा प्रकरण दर्ज किए जाने के बाद उनका वीडियो सामने आया है। वीडियो में कमल चौहान अपनी सफाई देते हुए निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि वह दोषी साबित होते हैं तो उन्हें कड़ी सजा दी जाए। उनके इस बयान के बाद मामले को लेकर बहस और तेज हो गई है।
    जानकारी के मुताबिक कनकेश्वरी गरबा पंडाल में नाबालिग बालिका के साथ कथित अभद्रता और धक्का-मुक्की का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो सामने आने के बाद विवाद बढ़ा और मामले में कार्रवाई की मांग उठने लगी। इसके बाद हीरा नगर पुलिस ने कमल चौहान के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया। मामले में पॉक्सो कानून के तहत कार्रवाई की बात सामने आने के बाद इसकी गंभीरता को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। हालांकि आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
    प्रकरण दर्ज होने के बाद कमल चौहान ने अपना पक्ष रखते हुए वीडियो जारी किया। उन्होंने दावा किया कि बालिका के पिता शराब के नशे में पंडाल पहुंचे थे और बालिका भी आयोजन स्थल के अंदर आने का प्रयास कर रही थी। कमल चौहान ने कहा कि वह कई वर्षों से गरबा आयोजन में सेवाएं देते आ रहे हैं। उन्होंने अपनी ओर से हुई गलती के लिए माफी मांगते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की अपील की।
    अपने बयान में कमल चौहान ने यह भी कहा कि यदि जांच में वह दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें राजवाड़ा चौराहे पर फांसी पर लटका दिया जाए। उनके इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक ओर कमल चौहान अपनी सफाई और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं तो दूसरी ओर लोग नाबालिग से जुड़े मामले में तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
    इस मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की आयोजन में मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। खबर के अनुसार घटना के कुछ समय बाद मुख्यमंत्री इसी गरबा आयोजन में पहुंचे थे और उन्होंने कन्या पूजन किया था। इसके बाद यह सवाल उठ रहा है कि घटना की जानकारी मुख्यमंत्री तक समय पर पहुंची थी या नहीं और पुलिस कार्रवाई में देरी क्यों हुई। इन सवालों पर स्थिति जांच और संबंधित अधिकारियों के बयान के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
    मामले को लेकर सोशल मीडिया पर सरकार की कार्रवाई और कानून व्यवस्था को लेकर भी बहस हो रही है। कुछ लोग इस घटना की तुलना उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था से कर रहे हैं। हालांकि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच के तथ्यों का सामने आना जरूरी है। नाबालिग से जुड़े इस संवेदनशील मामले में निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई महत्वपूर्ण है। फिलहाल कमल चौहान के खिलाफ दर्ज प्रकरण में आरोपों की पुष्टि होना बाकी है और आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर बनी हुई है।

  • महाअष्टमी पर मां अष्टभुजा के दरबार में भक्तों का महाकुंभ, कन्या पूजन और भंडारे में उमड़े हजारों श्रद्धालु

    महाअष्टमी पर मां अष्टभुजा के दरबार में भक्तों का महाकुंभ, कन्या पूजन और भंडारे में उमड़े हजारों श्रद्धालु


    मऊगंज । मध्यप्रदेश के मऊगंज जिले में स्थित ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के अष्टभुजा धाम नईगढ़ी में शारदीय नवरात्रि की महाअष्टमी पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। रविवार को मां अष्टभुजा के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। मंदिर में दर्शन करने वाले भक्तों की संख्या 50 हजार से अधिक बताई गई। सुबह से ही मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भक्तिमय माहौल बना रहा। मां के जयकारों से पूरा धाम गूंज उठा और श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देर तक लगी रहीं।
    महाअष्टमी के पावन अवसर पर मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का पहुंचना तड़के ही शुरू हो गया था। सुबह करीब तीन बजे से ही मंदिर के बाहर भक्तों की कतारें लगने लगीं। जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा वैसे-वैसे श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ती गई। भक्तों ने मां के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। कई श्रद्धालु मध्यप्रदेश के अलग-अलग जिलों के अलावा उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से भी अष्टभुजा धाम पहुंचे। रीवा सीधी सतना प्रयागराज और वाराणसी सहित कई स्थानों से आए भक्तों ने मां के दरबार में माथा टेका।
    दर्शन और पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। मंदिर परिसर में सत्यनारायण भगवान की कथा का आयोजन हुआ और भजन-कीर्तन के माध्यम से भक्तों ने देवी की आराधना की। नवरात्रि के इस विशेष अवसर पर कई परिवारों ने बच्चों के मुंडन और कर्णछेदन जैसे धार्मिक संस्कार भी संपन्न कराए। मंदिर परिसर के आसपास मेले जैसा माहौल रहा और बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने धार्मिक गतिविधियों में भाग लिया।
    महाअष्टमी के अवसर पर अष्टभुजा धाम में विशेष हवन और पूजन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। इसके बाद नौ कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनका पूजन किया गया। कन्याओं को भोजन कराया गया और दक्षिणा तथा उपहार भेंट कर आशीर्वाद लिया गया। इसके बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण किया। जिले के दूसरे देवी मंदिरों और दुर्गा पंडालों में भी हवन कन्या पूजन और भंडारे आयोजित किए गए।
    महाअष्टमी पर केवल अष्टभुजा धाम ही नहीं बल्कि पूरे मऊगंज जिले में भक्ति का माहौल दिखाई दिया। मां जालपा धाम दूबी और बसदेईन माता वसिगड़ा देवी धाम सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर भी सुबह से भक्तों की भीड़ रही। नईगढ़ी हनुमना शाहपुर खटखरी पहाड़ी और देवतालाब सहित कस्बों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में सजे दुर्गा पंडालों में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की। जगह-जगह भजन और धार्मिक आयोजनों के बीच नवरात्रि का उत्साह नजर आया।
    इस अवसर पर मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और देवतालाब विधायक गिरीश गौतम भी अपने परिवार के साथ अष्टभुजा धाम पहुंचे। उन्होंने मां के दर्शन कर चुनरी अर्पित की और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। उन्होंने अपने परिवार के साथ क्षेत्र की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।
  • इंदौर में विशाल चुनरी यात्रा शुरू, बड़ा गणपति से बिजासन माता मंदिर तक निकलेगा जुलूस, कई रास्तों पर ट्रैफिक डायवर्जन

    इंदौर में विशाल चुनरी यात्रा शुरू, बड़ा गणपति से बिजासन माता मंदिर तक निकलेगा जुलूस, कई रास्तों पर ट्रैफिक डायवर्जन


    इंदौर । नवरात्रि के पावन अवसर पर इंदौर में मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी विशाल चुनरी यात्रा की शुरुआत हो गई है। रविवार को बड़ा गणपति चौराहे पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यात्रा का शुभारंभ किया। इस दौरान प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सहित कई जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। यात्रा में हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। लाखों सितारों से सुसज्जित ढाई किलोमीटर से अधिक लंबी चुनरी बिजासन माता को अर्पित की जाएगी।
    आयोजन को लेकर शहर में व्यापक तैयारियां की गई हैं और यात्रा मार्ग पर व्यवस्था संभालने के लिए तीन हजार चुनरी रक्षकों को तैनात किया गया है।
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने निर्धारित कार्यक्रमों के तहत पहले लालबाग पहुंचे। इसके बाद वे एमवाय अस्पताल में मशीन के लोकार्पण कार्यक्रम में शामिल हुए। यहां से मुख्यमंत्री बड़ा गणपति चौराहे पहुंचे और चुनरी यात्रा की शुरुआत की। वे कार्यक्रम स्थल पर करीब 10 से 12 मिनट तक रुके और संक्षिप्त संबोधन दिया। इस दौरान उन्होंने लोगों को नवरात्रि दशहरा और दीपावली की शुभकामनाएं दीं। इसके बाद वे सुसज्जित वाहन में पहुंचे और वहां से रवाना हो गए।
    यात्रा बड़ा गणपति मंदिर से शुरू होकर वायरलेस चौराहा और कालानी नगर होते हुए एरोड्रम थाना क्षेत्र से गुजरेगी। इसके बाद श्रद्धालुओं का जत्था पंचशील नगर और बाबू मुराई कॉलोनी से होते हुए एयरपोर्ट प्रवेश द्वार के रास्ते बिजासन माता मंदिर पहुंचेगा। यात्रा का प्रमुख आकर्षण लाखों सितारों से सजी विशाल चुनरी है जिसे माता को अर्पित किया जाएगा। नवरात्रि के दौरान आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में श्रद्धालुओं की बड़ी भागीदारी की उम्मीद है।
    आयोजन को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए तीन हजार चुनरी रक्षकों की तैनाती की गई है। ये रक्षक प्रमुख चौराहों पर यातायात और श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियंत्रित करने में सहयोग करेंगे। यात्रा संयोजकों ने नागरिकों से भी व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की है। यात्रा के दौरान कई प्रमुख मार्गों पर यातायात डायवर्ट रहेगा ताकि भीड़ के बीच वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित किया जा सके।
    यात्रा के कारण गंगवाल और राजमोहल्ला चौराहे पर सिटी बसों तथा बड़े वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से भेजा जाएगा। नगर निगम चौराहे पर भी बड़े वाहनों के लिए डायवर्जन रहेगा। महेश नगर में कार और दोपहिया वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। गोराकुंड और अंतिम चौराहे से बड़ा गणपति की ओर आने वाले वाहनों को दूसरे रास्तों से भेजा जाएगा। टोरी कॉर्नर पर मल्हारगंज की ओर से आने वाले वाहनों को गोराकुंड की तरफ मोड़ा जाएगा जबकि गोपाल बिल्डिंग के पास वाहनों को कैलाश मार्ग की ओर डायवर्ट किया जाएगा।
    एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को भी यात्रा मार्ग पर संभावित भीड़ और यातायात बदलाव को ध्यान में रखने की सलाह दी गई है। एरोड्रम जाने के लिए वाहन चालक मरीमाता से किला मैदान और टाटा स्टील होते हुए 60 फीट एसएफए टर्निंग तथा पंचशील मार्ग का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा छोटा बांगड़दा से सुपर कॉरिडोर होते हुए एयरपोर्ट पहुंचने का विकल्प भी रहेगा। भंवरकुआं अन्नपूर्णा और महू नाका की ओर से आने वाले यात्री चंदन नगर सिरपुर जवाहर टेकरी और चोइथराम अस्पताल चौराहे से नावदा तथा ग्राम रिजलाय होते हुए हिंकारगिरी के रास्ते एयरपोर्ट जा सकेंगे।
    यात्रा संयोजक सुदर्शन गुप्ता ने नागरिकों से सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक बड़ा गणपति मंदिर से बिजासन माता मंदिर तक के मार्ग पर अनावश्यक आवागमन से बचने की अपील की है। जरूरी काम होने पर वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करने और यातायात पुलिस के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को उड़ान के समय से पर्याप्त पहले घर से निकलने को कहा गया है ताकि रास्ते में संभावित जाम के कारण परेशानी न हो।