Category: Madhya Pradesh

  • मध्य प्रदेश में अगले 2 दिन गर्माहट बढ़ाएगी राहत, फिर पहाड़ों में बर्फ पिघलते ही लौटेगी ठिठुरन

    मध्य प्रदेश में अगले 2 दिन गर्माहट बढ़ाएगी राहत, फिर पहाड़ों में बर्फ पिघलते ही लौटेगी ठिठुरन


    भोपाल। मध्य प्रदेश के मौसम में अगले दो दिनों तक आम नागरिकों को सर्दी से कुछ राहत मिल सकती है। मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में अधिकतम और न्यूनतम तापमान में 3-4 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि होने का अनुमान है। हालांकि, पहाड़ों से गुजरने वाले साइक्लोनिक सर्कुलेशन और बर्फ पिघलने के बाद ठंडी हवाओं के लौटने से फिर से ठिठुरन बढ़ सकती है।

    मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, फरवरी महीने में तापमान में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहेगा। फिलहाल प्रदेश में बारिश की संभावना कम है। मौसम विभाग ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम राजस्थान के ऊपर सक्रिय साइक्लोनिक सर्कुलेशन और पहाड़ों में बर्फबारी तथा बारिश की वजह से अगले दो दिन तक प्रदेश में तापमान बढ़ेगा। भोपाल, इंदौर, उज्जैन समेत कई हिस्सों में सोमवार को तेज धूप रही, जिससे दिन का तापमान सामान्य से ऊपर दर्ज किया गया। रात और अलसुबह ठंड का असर अभी भी महसूस होगा।

    आगे बदलेगा मौसम

    मौसम विभाग ने बताया कि जब साइक्लोनिक सिस्टम गुजर जाएगा और पहाड़ों की बर्फ पिघलेगी, तो 13, 14 और 15 फरवरी को ठंड का असर फिर से बढ़ेगा। इस दौरान उत्तर से ठंडी हवाओं का प्रभाव भी महसूस होगा।

    13 शहरों में रात का तापमान 10 डिग्री से कम

    रविवार और सोमवार की रात में प्रदेश के 13 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया। सबसे ठंडा स्थान कटनी का करौंदी रहा, जहां न्यूनतम तापमान 5.9 डिग्री सेल्सियस था। अन्य ठंडे स्थानों में शहडोल (6.4), पचमढ़ी (7.4), अमरकंटक (7.8), दतिया (8.1), रीवा (8.3), राजगढ़ (8.6), उमरिया (8.8), शिवपुरी (9), मंडला (9.4), मलाजखंड (9.5) और नौगांव (9.8) डिग्री सेल्सियस दर्ज किए गए। पांच प्रमुख शहरों में न्यूनतम तापमान इस प्रकार रहा: भोपाल 10.2, इंदौर 11.2, ग्वालियर 10.6, उज्जैन 12.4 और जबलपुर 11.4 डिग्री सेल्सियस।

    अगले 2 दिन मौसम का हाल

    11 फरवरी: दिन में तेज धूप और तापमान में बढ़ोतरी, रात और सुबह ठंड महसूस होगी।
    12 फरवरी: तापमान 3-4 डिग्री तक बढ़ेगा, दिन में धूप जारी रहेगी।

  • MP: इंदौर में घर खाली कराने पहुंची टीम तो बैंककर्मी ने गोली मारकर की खुदकुशी

    MP: इंदौर में घर खाली कराने पहुंची टीम तो बैंककर्मी ने गोली मारकर की खुदकुशी


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के इंदौर शहर (Indore city) के विजय नगर में सोमवार शाम को सिनर्जी अस्पताल के पास रहने वाले एक बैंककर्मी (Bank Employee.) ने खुद को गोली मारकर खुदकुशी कर ली। मृतक का नाम हेमंत पुत्र एसडी ब्रह्मवंशी बताया गया है। वह को-ऑपरेटिव बैंक में काम करता था।

    जानकारी के मुताबिक, हेमंत ने अपने मकान को गिरवी रखकर बैंक ऑफ महाराष्ट्र से ढाई करोड़ का कर्ज ले रखा था। डेढ़ साल से किश्त न चुकाने पर सोमवार को बैंक की टीम मकान खाली कराने पहुंची थी। बैंक के कर्मचारी मकान की पहली मंजिल पर लिखा-पढ़ी कर रहे थे, इसी दौरान शाम करीब साढ़े पांच बजे हेमंत ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली।

    विजय नगर थाना प्रभारी चंद्रकांत पटेल ने बताया कि हेमंत ने अपनी लायसेंसी बंदूक से सिर पर गोली मारी। वह अपने रूम में अकेला बैठा था। कर्ज के चलते काफी समय से वह डिप्रेशन में था। इलाज भी चल रहा था। बडे़ बेटे ने इसकी पुष्टि की है। थाना प्रभारी के मुताबिक, कर्ज चुकाने को लेकर बैंक से कई बार नोटिस तामील हुए थे। हेमंत उसका जबाव नहीं देता था। हेमंत के परिवार में दो लड़के, एक लड़की और मां हैं। हेमंत का बड़ा बेटा एक आईटी कंपनी में कार्यरत है। उनका दूसरा बेटा वर्तमान में पढ़ाई कर रहा है। बेटी पुणे में अध्ययनरत है। हेमंत अकाउंट सेक्शन में पदस्थ था।

  • MP: मुरैना में निर्माणाधीन मंदिर की गुमंद टूटकर गिरने से तीन बच्चियों की मौत, पति-पत्नी और 5 बच्चियां घायल

    MP: मुरैना में निर्माणाधीन मंदिर की गुमंद टूटकर गिरने से तीन बच्चियों की मौत, पति-पत्नी और 5 बच्चियां घायल


    मुरैना।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मुरैना जिले (Morena district) के ग्राम अहरौली में सोमवार को दोपहर में निर्माणाधीन चामड़ माता के मंदिर (Chamad Mata Temple) की गुमंद गिर गई। इस हादसे में मलबे में दबकर तीन बच्चियों की मौत हो गई, जबकि पांच अन्य बच्चियां और एक दंपत्ति घायल हो गए हैं।

    जानकारी के अनुसार, कैलारस थाना क्षेत्र अंतर्गत अहरौली गांव के चामड़ माता मंदिर पर सोमवार को दोपहर करीब दो बजे मुंगावली निवासी सतीश गौड़ अपनी पत्नी गुड्डी व बच्ची मानसी के साथ पूजा करने गया था। पूजा के पश्चात गांव की बच्चियों को बुलाकर प्रसाद ग्रहण कराया जा रहा था। इसी दौरान निर्माणाधीन गुमंद की पटिया टूटकर नीचे गिर गईं, जिसमें आठ बच्चियों सहित सतीश व उसकी पत्नी गुड्डी भी दब गए। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया और हादसे की सूचना पुलिस प्रशासन को दी। मलबा हटाकर घायलों और शवों को बाहर निकाला। सूचना पर एसडीएम जौरा शुभम शर्मा, पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। घायलों को कैलारस अस्पताल में भर्ती कराया। यहां सामान्य घायल दो बच्चियों का इलाज किया जा रहा है। वहीं, गंभीर घायल पति-पत्नी व पांच बच्चियों सहित 7 घायलों को मुरैना जिला चिकित्सालय लाया गया। इनमें से एक बालिका को इलाज के लिए ग्वालियर भेज दिया गया है। हादसे में तीन बच्चियों की मौके मौत हो गई।

    मृतक बच्चों की पहचान वैष्णवी सिकरवार (11) पुत्री जीतू सिकरवार, करिश्मा गोस्वामी (9) पुत्री अशोक गोस्वामी और छाया गोस्वामी (7) पुत्री अशोक गोस्वामी के रूप में हुई है। देर शाम तीनों मृतक बच्चियों का कैलारस के अस्पताल में पोस्टमार्टम करने के बाद शव परिजनों को सौंप दिये गये। हादसे में गुंजन (12) पुत्री योगेंद्र सिंह, परी (8) पुत्री योगेंद्र सिंह, विद्या (6) पुत्री योगेंद्र सिंह, सतीश गौड (45), पृथ्वी गौड (40) पत्नी सतीश गौड, मानसी गौड (14) पुत्री सतीश गौड और पल्लवी गोस्वामी घायल हुई। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।

    हादसे की जानकारी मिलते ही स्थानीय विधायक पंकज उपाध्याय मौके पर पहुंच गये। इसके साथ ही उन्होंने कैलारस चिकित्सालय में घायलों का बेहतर इलाज करने हेतु प्रबंधन को अवगत कराया। विधायक पंकज उपाध्याय ने मौके के बाद अस्पताल पहुंचकर मृतक बच्चियों के परिजनों को ढांढ़स बंधाया, वहीं हरसंभव मदद का भरोसा भी जताया। इसके साथ ही जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी कमलेश भार्गव ने जांच कराने का आश्वासन दिया है। इसमें दोषी पाये जाने पर कार्यवाही की जायेगी। सीईओ ने मृतक व घायल परिजनों को नियमानुसार आर्थिक सहायता दिये जाने का भरोसा दिलाया।

  • मुरैना में मंदिर की छत गिरने से मातम प्रसाद लेने गईं तीन मासूम बच्चियों की दर्दनाक मौत

    मुरैना में मंदिर की छत गिरने से मातम प्रसाद लेने गईं तीन मासूम बच्चियों की दर्दनाक मौत


    मुरैना/मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से एक बेहद दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है, जहां मंदिर की छत गिरने से तीन मासूम बच्चियों की मौत हो गई। यह हादसा उस वक्त हुआ जब बच्चियां मंदिर में प्रसाद लेने गई थीं। अचानक हुए इस हादसे ने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया और गांव में मातम का माहौल बन गया।

    घटना मुरैना जिले के कैलारस थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एहरौली गांव की है। यहां स्थित चमड़ा माता मंदिर में रोज की तरह श्रद्धालु पूजा और प्रसाद लेने पहुंचे थे। इसी दौरान अचानक मंदिर की छत भरभराकर गिर गई। छत गिरते ही वहां अफरा तफरी मच गई और लोग इधर उधर भागने लगे। मलबे के नीचे कई लोग दब गए।

    प्रसाद लेने गईं तीन बच्चियां छत के नीचे दब गईं। मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। तीनों बच्चियों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। इस हादसे में तीन अन्य बच्चियां और एक पति पत्नी भी गंभीर रूप से घायल हो गए।

    घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग और ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। मलबा हटाने का काम शुरू किया गया और घायलों को बाहर निकाला गया। सभी घायलों को तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार कुछ घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है, जिन पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

    हादसे की जानकारी मिलते ही कैलारस थाना पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने घटनास्थल को घेर लिया और मलबे का निरीक्षण किया। प्रारंभिक जांच में मंदिर की जर्जर हालत सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि मंदिर की छत काफी पुरानी थी और लंबे समय से उसकी मरम्मत नहीं कराई गई थी।

    इस हादसे के बाद ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि मंदिर की हालत पहले से खराब थी, लेकिन इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया। यदि समय रहते मरम्मत कराई जाती तो शायद यह हादसा टल सकता था।

    घटना के बाद गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। जिन परिवारों ने अपनी मासूम बेटियों को खोया है, उनका रो रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता और घायलों को बेहतर इलाज मुहैया कराने की मांग की है।फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है। प्रशासन की ओर से भी मौके पर अधिकारियों को भेजा गया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।

  • बाइक को पब्लिक ट्रांसपोर्ट की तरह इस्तेमाल करना गैरकानूनी: इंदौर हाईकोर्ट ने दिया स्पष्ट निर्देश

    बाइक को पब्लिक ट्रांसपोर्ट की तरह इस्तेमाल करना गैरकानूनी: इंदौर हाईकोर्ट ने दिया स्पष्ट निर्देश


    इंदौर । मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के इंदौर खंडपीठ से एक महत्वपूर्ण और दिशा-निर्देशात्मक फैसला सामने आया है, जिसमें बाइक का सार्वजनिक परिवहन जैसे उपयोग पर स्पष्ट रूप से रोक लगाई गई है। न्यायालय ने कहा है कि धारा 66 के तहत किसी भी वाहन को बिना परमिट सार्वजनिक परिवहन के लिए इस्तेमाल करना अवैध है और ऐसे उपयोग को रोकना राज्य सरकार और परिवहन विभाग की जिम्मेदारी है।

    मामला यह है कि इंदौर शहर सहित पूरे प्रदेश में ओला, उबर, रैपिडो जैसी ट्रांसपोर्ट एग्रीगेटर कंपनियां दो-पहिया वाहनों बाइक का उपयोग सार्वजनिक परिवहन की तरह कर रही हैं, जबकि इन वाहनों के पास किसी भी प्रकार का पब्लिक ट्रांसपोर्ट परमिट नहीं है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि ऐसे प्रयोग से न केवल कानून का उल्लंघन होता है, बल्कि सड़क सुरक्षा और यात्री संरक्षण के मानकों को भी खतरा होता है।

    हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और परिवहन विभाग को निर्देश दिए हैं कि वे कानून के तहत परमिट नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें और बिना वैध अनुमति वाले वाहनों को सार्वजनिक परिवहन के रूप में उपयोग से रोकें। आदेश में यह भी कहा गया कि परिवहन विभाग को नियमों के अनुरूप परमिट जारी करने, मॉनिटरिंग और अनुपालन की प्रक्रिया को सशक्त बनाना होगा, ताकि कानून का सही ढंग से पालन हो सके।

    दरअसल, मोटर व्हीकल एक्ट के प्रावधान स्पष्ट हैं कि सार्वजनिक परिवहन के लिए वाहन का उपयोग तभी किया जा सकता है जब वह वैध परिवहन परमिट/लाइसेंस धारक हो। बिना परमिट वाहन को जनता के आवागमन में शामिल करना गैरकानूनी और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरे से भरा माना जाता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि निजी वाहनों का सार्वजनिक परिवहन की तरह उपयोग कानून के तहत स्वीकार्य नहीं है, चाहे वह तकनीकी प्लेटफॉर्म के माध्यम से ही क्यों न होता हो।

    स्थानीय प्रशासन और परिवहन विभाग को आदेश दिया गया है कि वे ऐसी गतिविधियों पर निगरानी रखें और किसी भी निजी वाहन के बिना परमिट पब्लिक ट्रांसपोर्ट संचालन को रोका जाए। अदालत का यह आदेश राज्य में सार्वजनिक परिवहन सुरक्षा के मानकों की पूर्ति और सड़कों पर नियम-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से जारी किया गया है।

    विशेष रूप से हाईकोर्ट ने यह भी कहा है कि यदि कोई प्लेटफॉर्म इस तरह के वाहनों को सार्वजनिक परिवहन के रूप में संचालित करने की अनुमति चाहता है, तो उसे परिवहन नियमों के अनुकूल वैध परमिट और लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य होगा। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब इलेक्ट्रॉनिक और ऐप-आधारित मोबिलिटी सेवाओं का विस्तार तेजी से हो रहा है। अदालत की यह टिप्पणी कानून-व्यवस्था और सड़क यातायात नियमों के स्पष्ट पालन को सुनिश्चित करने के प्रयासों का हिस्सा है।

  • महिला से मारपीट मामले को लेकर कांग्रेस का सरकार पर तीखा हमला: पीसी शर्मा बोले आरोपी बीजेपी के, सच छुपाने की कोशिश

    महिला से मारपीट मामले को लेकर कांग्रेस का सरकार पर तीखा हमला: पीसी शर्मा बोले आरोपी बीजेपी के, सच छुपाने की कोशिश


    भोपाल । मध्यप्रदेश के सीधी जिले में महिला के साथ मारपीट की घटना को लेकर कांग्रेस ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री श्री पीसी शर्मा ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी इस मामले में झूठ फैला रही है और वास्तविक आरोपियों को कांग्रेसी बताकर जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास किया जा रहा है।

    श्री शर्मा ने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। एक महिला को डंडों से पीटा जा रहा है और मौके पर मौजूद लोग ‘मारो-मारो’ के नारे लगा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकार की घटनाओं में शामिल लोग भाजपा से जुड़े हुए हैं, लेकिन राजनीतिक लाभ के लिए उन्हें जबरन कांग्रेस से जोड़ा जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि ‘लाड़ली बहन’ और ‘लाड़ला भैया’ जैसी योजनाओं के दावे करने वाली सरकार में महिलाओं के साथ खुलेआम मारपीट हो रही है, जो बेहद शर्मनाक है। कांग्रेस नेता ने सरकार से मांग की कि दोषियों पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए, उन्हें पार्टी से निष्कासित किया जाए और जेल भेजा जाए।

    पूर्व मंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश में बलात्कार, मारपीट और अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। भाजपा केवल भ्रम फैलाने का काम कर रही है, जबकि सच्चाई यह है कि ऐसे अहंकारी और हिंसक नेता उसी पार्टी से जुड़े हुए हैं।

    नकल माफिया पर गंभीर आरोप

    पीसी शर्मा ने बोर्ड परीक्षाओं और नकल माफिया का मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रदेश में वर्षों से संगठित रूप से नकल कराई जा रही है। हर साल पेपर लीक होते हैं, लेकिन जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने ग्वालियर-चंबल, विंध्य और निमाड़ अंचल को नकल माफिया का बड़ा केंद्र बताते हुए कहा कि इसका खामियाजा प्रदेश के छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है।

    निगम-मंडल नियुक्तियों पर सवाल
    उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा में निगम और मंडल के पद भ्रष्टाचार की राजनीति के लिए भरे जाते हैं। बिना लेन-देन के कोई नियुक्ति नहीं होती। जिला प्रभारियों की नियुक्ति भी संभावित नुकसान को नियंत्रित करने के उद्देश्य से की गई है। पार्टी के भीतर पदों को लेकर गुटबाजी और टकराव की स्थिति बनी हुई है, जिसमें असली कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हो रही है।

    विजय शाह प्रकरण पर बयान
    विजय शाह मामले को लेकर पीसी शर्मा ने कहा कि उन्हें न्यायालय से बड़ी उम्मीद है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है और उन्हें विश्वास है कि न्याय होगा। उन्होंने कहा कि चार बार माफी मांगने के बावजूद विजय शाह को अपने पद से हाथ धोना ही पड़ेगा।

    संघ और जनसंख्या बयान पर प्रतिक्रिया

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख के तीन बच्चों वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि देश में बेरोजगारी चरम पर है, रोजगार के अवसर नहीं हैं और ऐसे समय में जनसंख्या बढ़ाने की बात करना चिंताजनक है। उन्होंने संघ की मानसिकता पर सवाल उठाते हुए इसे असंवेदनशील बताया।

    BLO और SIR को लेकर आरोप

    पीसी शर्मा ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया में गड़बड़ी की जा रही है। जबरन नाम काटे और जोड़े जा रहे हैं। BLO पर दबाव बनाया जा रहा है और उनका वेतन भी रोका जा रहा है। उन्होंने इसे भाजपा की सुनियोजित साजिश करार दिया। कांग्रेस ने इन सभी मुद्दों पर सरकार से जवाबदेही तय करने और पारदर्शी कार्रवाई की मांग की है।

  • 8वें वेतन आयोग के नाम पर साइबर ठगी का नया जाल: APK फाइल से खाली हो सकते हैं खाते, पुलिस ने जारी की चेतावनी

    8वें वेतन आयोग के नाम पर साइबर ठगी का नया जाल: APK फाइल से खाली हो सकते हैं खाते, पुलिस ने जारी की चेतावनी


    इंदौर । मध्यप्रदेश में साइबर अपराध के मामलों में लगातार नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं। जहां एक ओर पुलिस साइबर अपराधों को लेकर सतर्कता और जागरूकता बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर साइबर ठग भी सरकारी कर्मचारियों को निशाना बनाने के लिए नए हथकंडे अपना रहे हैं। ताजा मामला 8वें वेतन आयोग में वेतन वृद्धि के नाम पर की जा रही साइबर ठगी से जुड़ा हुआ है, जिसे लेकर इंदौर क्राइम ब्रांच पुलिस को विधिवत एडवाइजरी जारी करनी पड़ी है।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हाल के दिनों में बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों के मोबाइल फोन पर “8वें वेतन आयोग में आपकी सैलरी कितनी होगी” जैसे आकर्षक संदेश प्राप्त हो रहे हैं। इन संदेशों के साथ एक APK फाइल भी भेजी जा रही है। जैसे ही कोई व्यक्ति इस फाइल को डाउनलोड करता है, उसका मोबाइल फोन साइबर अपराधियों के नियंत्रण में आ सकता है, जिससे बैंक अकाउंट, यूपीआई और अन्य डिजिटल माध्यमों से पैसे निकाले जाने का गंभीर खतरा उत्पन्न हो जाता है।

    इंदौर क्राइम ब्रांच ने स्पष्ट किया है कि यह एक संगठित साइबर फ्रॉड है, जिसमें सरकारी कर्मचारियों की जिज्ञासा और वेतन वृद्धि की उम्मीद का दुरुपयोग किया जा रहा है। APK फाइल डाउनलोड होते ही मोबाइल में मौजूद संवेदनशील जानकारियां, जैसे बैंक डिटेल्स, ओटीपी और पासवर्ड साइबर अपराधियों तक पहुंच सकते हैं। इसके परिणामस्वरूप पीड़ित का बैंक खाता पूरी तरह खाली हो सकता है।

    इस संबंध में अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त एडिशनल डीसीपी श्री राजेश दंडोतिया ने बताया कि यह एक नया और खतरनाक साइबर फ्रॉड है, जिससे बचाव के लिए जनजागरूकता बेहद जरूरी है। उन्होंने सभी सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान नंबर या स्रोत से प्राप्त APK फाइल को डाउनलोड न करें और न ही ऐसे संदेशों पर विश्वास करें।

    पुलिस द्वारा जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि वेतन आयोग, वेतन वृद्धि या अन्य शासकीय लाभों से जुड़ी कोई भी आधिकारिक जानकारी केवल सक्षम शासकीय विभागों और अधिकृत पोर्टलों के माध्यम से ही साझा की जाती है। ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की फाइल या लिंक मोबाइल पर भेजे जाने की प्रक्रिया पूरी तरह संदिग्ध मानी जानी चाहिए।

    क्राइम ब्रांच ने यह भी सलाह दी है कि यदि किसी व्यक्ति को इस प्रकार का संदेश प्राप्त होता है, तो वह तुरंत अपने नजदीकी पुलिस थाने या साइबर क्राइम सेल को इसकी सूचना दे। समय रहते सतर्कता बरतने से न केवल आर्थिक नुकसान से बचा जा सकता है, बल्कि साइबर अपराधियों तक पहुंचने में भी पुलिस को सहायता मिल सकती है। पुलिस प्रशासन ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे डिजिटल लेन-देन में सावधानी बरतें, किसी भी लालच भरे संदेश से दूर रहें और साइबर सुरक्षा नियमों का पालन कर स्वयं को सुरक्षित रखें।

  • इंदौर जिला न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला: गर्भस्थ शिशु को भी आश्रित मानते हुए मुआवजे का आदेश

    इंदौर जिला न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला: गर्भस्थ शिशु को भी आश्रित मानते हुए मुआवजे का आदेश

    इंदौर । इंदौर जिला न्यायालय ने सड़क दुर्घटना से संबंधित एक प्रकरण में अत्यंत संवेदनशील, मानवीय एवं दूरदर्शी निर्णय पारित करते हुए न्यायिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत किया है। न्यायालय ने आरक्षक की मृत्यु के उपरांत मुआवजा निर्धारण करते समय उसकी पत्नी के गर्भ में पल रहे अजन्मे शिशु को भी मृतक का आश्रित मानते हुए मुआवजा प्रदान करने का आदेश दिया है।

    यह मामला सीहोर जिले के जवरा थाना क्षेत्र में घटित एक भीषण सड़क दुर्घटना से संबंधित है। जानकारी के अनुसार आरक्षक सतीश, पिता कैलाश रुडेलें, जो उस समय झाबुआ जिले में पदस्थ थे, कार से यात्रा कर रहे थे। इसी दौरान तेज रफ्तार एवं लापरवाही से चल रहे एक ट्रक ने उनकी कार को जोरदार टक्कर मार दी। दुर्घटना की गंभीरता इतनी अधिक थी कि आरक्षक सतीश सहित एक अन्य व्यक्ति की मौके पर ही मृत्यु हो गई।

    दुर्घटना के समय मृतक की पत्नी रेखा सात माह की गर्भवती थीं। पति की असमय मृत्यु के बाद परिवार पर गंभीर आर्थिक और सामाजिक संकट उत्पन्न हो गया। इसके पश्चात पीड़ित परिवार की ओर से न्यायालय में मुआवजा प्राप्त करने हेतु दावा याचिका प्रस्तुत की् की गई।

    सुनवाई के दौरान न्यायालय ने इस तथ्य को अत्यंत गंभीरता से लिया कि मृतक की पत्नी गर्भवती थी और गर्भ में पल रहा शिशु भी मृतक पर पूर्ण रूप से आश्रित माना जाना चाहिए। इस आधार पर न्यायालय ने गर्भस्थ शिशु को भी आश्रितों की श्रेणी में सम्मिलित करते हुए मुआवजे का निर्धारण किया।

    अधिवक्ता श्री राजेश खंडेलवाल के अनुसार, न्यायालय ने मृतक की पत्नी, दो नाबालिग बच्चों, माता, गर्भस्थ शिशु तथा साथ रहने वाले छोटे भाई को आश्रित मानते हुए कुल 50 लाख 88 हजार रुपये का मुआवजा स्वीकृत किया है। इसके अतिरिक्त 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज जोड़ने पर यह राशि लगभग 60 लाख रुपये तक पहुंच गई है।

    कानूनी विशेषज्ञों ने इस निर्णय को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह फैसला गर्भस्थ शिशु के अधिकारों को न्यायिक मान्यता देने की दिशा में एक सशक्त कदम है। यह निर्णय भविष्य में ऐसे मामलों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा। वहीं पीड़ित परिवार ने न्यायालय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय उनके जीवन को पुनः स्थिरता देने में सहायक सिद्ध होगा। यह फैसला न केवल न्याय की भावना को सुदृढ़ करता है, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं में पीड़ित परिवारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में स्थापित हुआ है।

  • 350 करोड़ का मास्टरप्लान: इंदौर को मिलने जा रहा है नया एलिवेटेड कॉरिडोर 15 फरवरी से रखी जाएगी नींव जानिए क्या है पूरा रूट मैप

    350 करोड़ का मास्टरप्लान: इंदौर को मिलने जा रहा है नया एलिवेटेड कॉरिडोर 15 फरवरी से रखी जाएगी नींव जानिए क्या है पूरा रूट मैप


    नई दिल्ली। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर की ‘लाइफलाइन’ कहे जाने वाले एबी रोड पर रोजाना सफर करने वाले लाखों वाहन चालकों के लिए एक बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। शहर के सबसे व्यस्ततम इलाकों में शुमार पलासिया, गीता भवन और नवलखा जैसे क्षेत्रों में लगने वाले भारी ट्रैफिक जाम और लंबे सिग्नलों से अब जल्द ही मुक्ति मिलने वाली है। इंदौर के बुनियादी ढांचे में एक ऐतिहासिक बदलाव की पटकथा लिखी जा चुकी है, जिसके तहत LIG चौराहे से लेकर नवलखा तक लगभग 7 किलोमीटर लंबा एक भव्य एलिवेटेड कॉरिडोर आकार लेने जा रहा है। करीब 350 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले इस प्रोजेक्ट के पूरा होते ही शहर की रफ्तार को एक नई दिशा मिलेगी।

    इस कॉरिडोर की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्तमान में राजीव गांधी चौराहे से LIG तक का जो सफर भारी ट्रैफिक के कारण 40 से 45 मिनट ले लेता है, इस कॉरिडोर के बनने के बाद वह महज 15 मिनट में सिमट जाएगा। यह न केवल लोगों के कीमती समय की बचत करेगा, बल्कि ईंधन की खपत और प्रदूषण को कम करने में भी मील का पत्थर साबित होगा। यह प्रस्तावित कॉरिडोर LIG चौराहे से शुरू होकर गिटार चौराहा, पलासिया, गीता भवन, शिवाजी वाटिका और GPO जैसे प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों के ऊपर से होते हुए सीधे नवलखा तक पहुंचेगा।

    प्रोजेक्ट के तकनीकी पहलुओं पर गौर करें तो इस पूरे रूट पर तीन विशाल रोटरी बनाई जाएंगी, जो ट्रैफिक के सुगम प्रबंधन के लिए LIG, शिवाजी वाटिका और नवलखा पर स्थित होंगी। इसके अलावा, गिटार चौराहा और व्हाइट चर्च रोड जैसे महत्वपूर्ण जंक्शनों पर कनेक्टिंग आर्म्स (रैम्प) दिए जाएंगे, ताकि आसपास की कॉलोनियों और अंदरूनी सड़कों से आने वाला ट्रैफिक भी बिना किसी बाधा के सीधे कॉरिडोर पर चढ़ सके। हालांकि, पहले इसे 6 लेन बनाने का विचार था, लेकिन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद इसे 4 लेन करने का निर्णय लिया गया है।

    दिलचस्प बात यह है कि यह प्रोजेक्ट पिछले करीब 4 सालों से फाइलों और तकनीकी उलझनों में अटका हुआ था। साल 2009 में केंद्र से हरी झंडी मिलने के बाद कई बाधाएं आईं, लेकिन अब पीडब्ल्यूडी (PWD) विभाग ने इसे धरातल पर उतारने की पूरी तैयारी कर ली है। वर्तमान में प्रस्तावित रूट पर मिट्टी की जांच (Soil Testing) का काम तेजी से चल रहा है और 15 फरवरी से कॉरिडोर की नींव रखने का मुख्य काम शुरू कर दिया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इस विशाल निर्माण कार्य के दौरान ट्रैफिक को व्यवस्थित रखने के लिए विशेष मैनेजमेंट प्लान भी तैयार किया गया है।

    सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो अगले 2 सालों के भीतर यह कॉरिडोर बनकर तैयार हो जाएगा। इंदौर के विकास में यह एलिवेटेड रोड न केवल एक नई पहचान जोड़ेगी, बल्कि शहर के बढ़ते विस्तार और भविष्य की ट्रैफिक जरूरतों को पूरा करने में रीढ़ की हड्डी साबित होगी।

  • कलयुगी पति का खौफनाक चेहरा: कुल्हाड़ी से पत्नी की निर्मम हत्या, शव झाड़ियों में फेंककर फरार

    कलयुगी पति का खौफनाक चेहरा: कुल्हाड़ी से पत्नी की निर्मम हत्या, शव झाड़ियों में फेंककर फरार


    पन्ना । मध्यप्रदेश के पन्ना जिले से रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। शाहनगर थाना अंतर्गत ग्राम खमतरा में एक कलयुगी पति ने अपनी ही पत्नी की बेरहमी से हत्या कर दी। इस जघन्य हत्याकांड के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ है।

    घटना ग्राम खमतरा के रामपुर खजुरी हार क्षेत्र की बताई जा रही है। यहां 40 वर्षीय मीरा बाई का शव 8 फरवरी को झाड़ियों में संदिग्ध अवस्था में मिला था। सूचना मिलते ही शाहनगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि महिला की हत्या धारदार हथियार से की गई है।

    पुलिस जांच आगे बढ़ी तो चौंकाने वाला सच सामने आया। मृतका की हत्या किसी और ने नहीं, बल्कि उसके पति निर्भय सिंह राठौर ने ही की थी। आरोपी ने आपसी विवाद के चलते कुल्हाड़ी से पत्नी पर ताबड़तोड़ वार किए, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। हत्या के बाद आरोपी ने साक्ष्य मिटाने के इरादे से शव को झाड़ियों में फेंक दिया और फरार हो गया।

    अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक वंदना सिंह चौहान ने जानकारी देते हुए बताया कि आरोपी पति निर्भय सिंह राठौर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रारंभिक तौर पर हत्या का कारण आपसी कलह बताया जा रहा है, हालांकि पुलिस सभी पहलुओं से मामले की गहन जांच कर रही है।

    इस निर्मम हत्या की खबर सामने आने के बाद से क्षेत्र में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि आरोपी का व्यवहार पहले भी अक्सर आक्रामक रहता था, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि वह इस हद तक चला जाएगा। पुलिस का कहना है कि आरोपी से पूछताछ जारी है और जल्द ही पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा। यह घटना एक बार फिर घरेलू हिंसा और रिश्तों में बढ़ती असहिष्णुता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।