Category: Madhya Pradesh

  • लापरवाही से गई जान: बैतूल में पानी की टंकी से गिरकर मजदूर की मौत, बिना सुरक्षा काम करवा रहा था ठेकेदार

    लापरवाही से गई जान: बैतूल में पानी की टंकी से गिरकर मजदूर की मौत, बिना सुरक्षा काम करवा रहा था ठेकेदार


    बैतूल। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले से एक बेहद गंभीर और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां सरकारी योजना के तहत बन रही पानी की टंकी एक मजदूर की मौत का कारण बन गई। यह हादसा न सिर्फ एक व्यक्ति की जान जाने का मामला है, बल्कि सिस्टम और ठेकेदारी व्यवस्था की भारी लापरवाही को भी उजागर करता है।

    बैतूल जिले की बडोरा ग्राम पंचायत में जल जीवन मिशन के तहत निर्माणाधीन पानी की टंकी से गिरकर एक मजदूर की दर्दनाक मौत हो गई। मृतक की पहचान मुकेश सिरसाम, निवासी हमलापुर के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, मुकेश करीब 100 फीट ऊंची पानी की टंकी पर पुताई का काम कर रहा था। हैरानी की बात यह है कि वह बिना सेफ्टी बेल्ट, बिना हेलमेट और बिना किसी सुरक्षा उपकरण के काम कर रहा था।

    काम के दौरान अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया और वह ऊंचाई से नीचे गिर पड़ा। हादसे में उसके सिर में गंभीर चोटें आईं। मौके पर मौजूद लोगों ने उसे तुरंत जिला अस्पताल बैतूल पहुंचाया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

    नियम साफ कहते हैं कि ऊंचाई पर काम करने वाले मजदूरों के लिए सुरक्षा उपकरण अनिवार्य हैं। इसके बावजूद ठेकेदार द्वारा बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के मजदूर से काम करवाया जाना गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या जल जीवन मिशन के नाम पर मजदूरों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है? क्या ठेकेदार खुद को कानून से ऊपर समझ रहे हैं?

    बताया जा रहा है कि यह पानी की टंकी पीएचई लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अंतर्गत ठेकेदार के माध्यम से बनाई जा रही थी। हैरानी की बात यह है कि हादसे के बाद न तो ठेकेदार सामने आया है और न ही पीएचई विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है। मृतक मजदूर के परिजनों को अब तक किसी तरह की आर्थिक सहायता या राहत की घोषणा भी नहीं की गई है।

    मुकेश सिरसाम की मौत सिर्फ एक दुर्घटना नहीं है, बल्कि यह उस लापरवाह सिस्टम का नतीजा है, जिसमें गरीब मजदूरों की जान की कीमत कुछ भी नहीं मानी जाती। सवाल यह भी है कि क्या इस मामले में जिम्मेदार ठेकेदार पर कार्रवाई होगी, क्या पीएचई विभाग अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करेगा या फिर यह मामला भी अन्य हादसों की तरह फाइलों में दबा दिया जाएगा। स्थानीय लोगों में घटना को लेकर आक्रोश है और वे दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाता है।

  • 20 साल मंत्री रहे गोपाल भार्गव ने छलका दर्द, बोले- दिग्विजय ने कांग्रेस में आने का ऑफर दिया था

    20 साल मंत्री रहे गोपाल भार्गव ने छलका दर्द, बोले- दिग्विजय ने कांग्रेस में आने का ऑफर दिया था


    सागर: बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पिछले 40 वर्षों से विधायक रहे गोपाल भार्गव ने मोहन कैबिनेट में जगह न मिलने का अपना दर्द सार्वजनिक रूप से साझा किया। सागर में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने अपने राजनीतिक संघर्ष और अनुभवों का जिक्र करते हुए कहा कि लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद अपेक्षित सम्मान न मिलना गहरा दुख देता है।

    गोपाल भार्गव ने बताया कि उन्होंने 20 साल तक लगातार मंत्री पदों पर रहते हुए कठिन परिस्थितियों का सामना किया, जबकि आज के दौर में लोग 20 महीने भी नहीं टिक पाते। उन्होंने कहा, राजनीति में उपेक्षा किसी भी व्यक्ति को भीतर से तोड़ देती है। अगर किसी व्यक्ति की बात सरकार नहीं सुनती, तो उसका मन टूट जाता है।

    कार्यक्रम में उन्होंने यह भी खुलासा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने उन्हें एक बार कांग्रेस में शामिल होने का प्रस्ताव दिया था। इस प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए भार्गव ने कहा, मैंने साफ कह दिया था कि यह माल टिकाऊ है, बिकाऊ नहीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्होंने हमेशा सिद्धांतों की राजनीति की है और किसी भी प्रकार के राजनीतिक सौदे से खुद को दूर रखा।

    गोपाल भार्गव ने संकेत दिया कि लंबे समय तक पार्टी को समर्पित रहने के बावजूद उन्हें अपेक्षित सम्मान न मिलना उनकी पीड़ा का मुख्य कारण है। उन्होंने कहा, मैंने पार्टी को जीवन दिया है, और यह सीधे तौर पर मंत्री नहीं बनाए जाने की पीड़ा की ओर इशारा करता है।उल्लेखनीय है कि गोपाल भार्गव सागर जिले की रहली विधानसभा से लगातार नौ बार विधायक चुने गए हैं। वे भाजपा के सबसे वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं और पूर्व में लोक निर्माण विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास सहित कई महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री रह चुके हैं।

    इससे पहले दिए गए एक बयान में उन्होंने कहा था, हर जगह सिर्फ ब्राह्मणों को ही टारगेट किया जा रहा है। इस बयान ने प्रदेशभर में राजनीतिक और सामाजिक हलचल मचा दी। उनके हालिया बयान और मंत्री न बनने की पीड़ा भविष्य में पार्टी और प्रदेश की राजनीति पर क्या असर डालेगी, यह आने वाले समय में देखने वाली बात होगी।

    गोपाल भार्गव की यह खुलकर कही गई भावनाएं वरिष्ठ नेताओं के अनुभव और पार्टी में वरिष्ठता के महत्व को भी उजागर करती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीति में स्थायित्व, सेवा और नैतिकता उनके लिए हमेशा प्राथमिकता रही है, और कोई भी पद उनके सिद्धांतों से ऊपर नहीं है।सागर और प्रदेश के राजनीतिक जानकार मानते हैं कि भार्गव के बयान आने वाले दिनों में पार्टी के अंदर और समाज में हलचल पैदा कर सकते हैं। वरिष्ठ नेताओं की अपेक्षाएं, सम्मान और उनके अनुभव को अगर नजरअंदाज किया गया, तो राजनीतिक समीकरणों पर इसका असर पड़ सकता है

  • पचमढ़ी चौरागढ़ मेला प्रशासन की चाक-चौबंद व्यवस्था में भक्तों की आस्था का जीवंत दर्शन

    पचमढ़ी चौरागढ़ मेला प्रशासन की चाक-चौबंद व्यवस्था में भक्तों की आस्था का जीवंत दर्शन


    सतपुड़ा की पहाड़ियों में स्थित पचमढ़ी इन दिनों भक्ति और श्रद्धा से सराबोर नजर आ रहा है महाशिवरात्रि के अवसर पर आयोजित चौरागढ़ मेला पूरे जोश के साथ चल रहा है चारों ओर हर-हर महादेव के जयघोष ढोल-नगाड़ों की गूंज और भक्तों की आस्था से वातावरण पूरी तरह शिवमय हो गया है भगवान शिव के दर्शन के लिए देशभर से लाखों श्रद्धालु कठिन पहाड़ी रास्तों को पार कर चौरागढ़ शिखर तक पहुंच रहे हैं

    कठिन और पथरीली चढ़ाई के बावजूद श्रद्धालु अपने कंधों पर भारी त्रिशूल उठाकर मंदिर तक जाते हैं मान्यता है कि मनोकामना पूरी होने पर त्रिशूल चढ़ाया जाता है इसी कारण दिनभर नहीं बल्कि देर रात तक भी भक्तों की कतार शिखर मंदिर तक बनी रहती है भक्त नाचते गाते जयकारे लगाते हुए भोलेनाथ के दर्शन कर रहे हैं पहाड़ी की ठंडी हवा और थकान भी आस्था के आगे कमजोर साबित हो रही है

    मेले में भारी भीड़ के बीच अपनों से बिछड़ने वालों के लिए प्रशासन द्वारा बनाया गया खोया-पाया केंद्र काफी कारगर साबित हो रहा है पब्लिक एड्रेस सिस्टम के जरिए लगातार घोषणाएं की जा रही हैं हाल ही में सिवनी जिले का आठ वर्षीय बालक शौर्य नायक भीड़ में खो गया था जिसे कंट्रोल रूम की सतर्कता से ढूंढकर परिजनों को सौंपा गया इसी तरह छिंदवाड़ा निवासी आशा राठौर को भी उनके भाई से मिलवाया गया

    कलेक्टर सोनिया मीणा के निर्देश पर मेला व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जा रही है जिला पंचायत सीईओ हिमांशु जैन और एसडीएम आकिब खान स्वयं पैदल भ्रमण कर व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर रहे हैं कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पल-पल की जानकारी लेकर आवश्यक निर्देश दे रही हैं सुरक्षा, यातायात और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया गया है

    मेले में सुरक्षा के लिए पुलिस बल चौबीस घंटे तैनात है परिवहन विभाग यह सुनिश्चित कर रहा है कि श्रद्धालुओं से अतिरिक्त किराया न वसूला जाए वहीं स्वच्छता व्यवस्था बनाए रखने के लिए सफाई मित्र सुबह से सक्रिय रहते हैं शौचालयों की नियमित सफाई कचरा प्रबंधन और ब्लीचिंग पाउडर के छिड़काव से स्वच्छ वातावरण बनाए रखा जा रहा है

    पचमढ़ी का चौरागढ़ मेला न केवल धार्मिक आयोजन है बल्कि कठिन परिस्थितियों में भी आस्था की जीत का जीवंत उदाहरण बन गया है त्रिशूल लेकर शिखर तक पहुंचते भक्त प्रशासन की सजग व्यवस्था सुरक्षा और स्वच्छता का अनुभव कर आस्था और विश्वास से परिपूर्ण हो रहे हैं इस मेला ने यह दिखा दिया है कि कठिन मार्ग और भारी भीड़ के बीच भी श्रद्धा कभी कमजोर नहीं होती है

  • बालाघाट में कृषि कैबिनेट, तलाकशुदा पुत्री को भी मिलेगी पेंशन ,डॉ. मोहन सरकार के बड़े फैसले, 18 फरवरी को पेश होगा बजट

    बालाघाट में कृषि कैबिनेट, तलाकशुदा पुत्री को भी मिलेगी पेंशन ,डॉ. मोहन सरकार के बड़े फैसले, 18 फरवरी को पेश होगा बजट


    भोपाल। मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने एक के बाद एक कई बड़े और अहम फैसले लिए हैं। मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सामाजिक, कृषि, सांस्कृतिक और विकास से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगी। बैठक की शुरुआत वंदेमातरम गान के साथ हुई। कैबिनेट मंत्री चेतन कश्यप ने फैसलों की जानकारी मीडिया को दी।

    कैबिनेट में तय किया गया कि बालाघाट जिले में कृषि कैबिनेट का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए जल्द ही तारीख तय की जाएगी। मंत्री चेतन कश्यप ने बताया कि बालाघाट के नक्सल मुक्त होने के बाद यह निर्णय लिया गया है। यहां होने वाली कृषि कैबिनेट में जिले के समग्र विकास, कृषि, किसानों और स्थानीय जरूरतों को लेकर अहम फैसले लिए जाएंगे।

    प्रदेश सरकार ने जू में रेस्क्यू सेंटर बनाने का भी बड़ा निर्णय लिया है। इस रेस्क्यू सेंटर में घायल और बीमार वन्य जीवों का इलाज किया जाएगा। इससे वन्य जीव संरक्षण को मजबूती मिलेगी और समय पर उपचार संभव हो सकेगा। सामाजिक स्तर पर एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए डॉ. मोहन यादव सरकार ने तलाकशुदा पुत्री को भी पेंशन देने का निर्णय लिया है। मंत्री चेतन कश्यप ने बताया कि यह प्रावधान पहली बार किया गया है। इसके तहत पारिवारिक पेंशन में विशेष व्यवस्था की गई है। साथ ही 2005 की नई पेंशन योजना को लेकर भी निर्णय लिया गया है, जिसके अंतर्गत 2026 में नए नियम बनाए गए हैं।

    संस्कृति और परंपरा को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 19 मार्च को गुड़ी पड़वा पर्व सरकारी स्तर पर मनाने का फैसला लिया है। इससे प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को नई पहचान मिलेगी।विकास योजनाओं की बात करें तो धरती आवा कार्यक्रम के तहत 63 हजार आदिवासी घरों तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके लिए 366 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी।

    कैबिनेट ब्रीफिंग में यह भी जानकारी दी गई कि 18 फरवरी को विधानसभा में बजट पेश किया जाएगा। यह बजट संतुलित और विकासोन्मुख होगा। इसके अलावा स्वास्थ्य क्षेत्र में भी प्रदेश ने उपलब्धि हासिल की है। नेशनल हेल्थ इंडेक्स में मध्य प्रदेश ने बेहतर प्रदर्शन किया है। प्रदेश में मातृ मृत्यु दर 173 से घटकर 142 हो गई है, जिसे सरकार ने बड़ी सफलता बताया है।कुल मिलाकर डॉ. मोहन यादव सरकार के ये फैसले सामाजिक सुरक्षा, सांस्कृतिक सम्मान, विकास और प्रशासनिक मजबूती की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

  • ग्वालियर में रेबीज का कहर: पांच दिन में तीन मौतें, वैक्सीन भी नहीं बचा सकी मासूम

    ग्वालियर में रेबीज का कहर: पांच दिन में तीन मौतें, वैक्सीन भी नहीं बचा सकी मासूम

     
    ग्वालियर । में रेबीज ने हड़कंप मचा दिया है। महज पांच दिनों में तीन लोगों की मौत ने स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही को उजागर कर दिया है। इनमें सबसे चौंकाने वाला मामला दतिया जिले के छह वर्षीय मासूम हंस प्रजापति का है। बच्चे को डॉग बाइट के बाद समय पर एंटी-रेबीज वैक्सीन के तीन डोज लगाए गए थे लेकिन इसके बावजूद वह बीमारी की चपेट में आ गया और उसकी जान चली गई। यह घटना न केवल चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है बल्कि प्रशासन के आवारा कुत्तों को लेकर दावों की भी पोल खोलती है।

    मासूम हंस के पिता अशोक उर्फ कल्लू प्रजापति ने बताया कि जिस दिन उनके बेटे को कुत्ते ने काटा उसी दिन डॉक्टर की सलाह पर इलाज शुरू करवा दिया गया। पहले इंजेक्शन 13 जनवरी को, दूसरा 16 जनवरी को और तीसरा 21 जनवरी को लगाया गया। चौथा डोज 10 फरवरी को लगना था लेकिन बीते शुक्रवार से बच्चे में रेबीज के लक्षण दिखाई देने लगे। बच्चा अचानक चौंकने लगा, हवा और पानी से डरने लगा। परिजन उसे तत्काल कमलाराजा अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद उसे दतिया ले जाया गया जहां शनिवार-रविवार की दरम्यानी रात उसकी मौत हो गई।

    इस मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था और वैक्सीन की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यही है कि जब पीड़ित को डॉक्टरों द्वारा बताई गई तारीखों पर सभी इंजेक्शन लगाए गए, तो फिर रेबीज कैसे हुआ। विशेषज्ञ मानते हैं कि एंटी-रेबीज वैक्सीन के तीन डोज के बाद रेबीज होना बेहद दुर्लभ है। यह घटना rare to rarest category में आती है और इसकी जांच बहुस्तरीय होनी चाहिए।

    ग्वालियर में सामान्य रूप से सड़कों पर घूम रहे आवारा कुत्तों ने पहले ही लोगों को भयभीत किया हुआ है। प्रशासन और स्वास्थ्य तंत्र की नाकामी अब जानलेवा साबित हो रही है। न्यू जयारोग्य चिकित्सालय में बीते पांच दिनों में रेबीज से तीन मरीजों की मौत हो चुकी है। इनमें एक ग्वालियर का, दूसरा टीकमगढ़ का और सबसे गंभीर मामला दतिया जिले के छह वर्षीय हंस प्रजापति का है।

    जयारोग्य चिकित्सालय के वरिष्ठ चिकित्सक और जनसंपर्क अधिकारी डॉ. मनीष चतुर्वेदी ने स्वीकार किया कि बीते पांच दिनों में डॉग बाइट के शिकार तीन लोगों की मौत बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि मासूम बच्चे की मौत को लेकर जांच बहुस्तरीय होगी जिसमें इलाज की प्रक्रिया, देखरेख और वैक्सीन की गुणवत्ता की भी समीक्षा शामिल होगी।

    इस घटना ने लोगों के बीच डर बढ़ा दिया है। हवा, पानी और कुत्तों से लगने वाले जोखिम को लेकर परिजन और आम जनता चिंतित हैं। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन को अब न केवल आवारा कुत्तों की समस्या को गंभीरता से लेना होगा बल्कि रेबीज वैक्सीन की आपूर्ति, गुणवत्ता और समय पर इलाज सुनिश्चित करना होगा।

  • ‘वोकल फॉर लोकल’ का असर: गुना में 50 से अधिक स्टॉलों के साथ हस्तशिल्प प्रदर्शनी का शुभारंभ

    ‘वोकल फॉर लोकल’ का असर: गुना में 50 से अधिक स्टॉलों के साथ हस्तशिल्प प्रदर्शनी का शुभारंभ


    गुना: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान का असर अब जमीन पर साफ नजर आने लगा है। इसका ताजा उदाहरण मध्य प्रदेश के गुना जिले में देखने को मिला, जहां स्थानीय और देशभर के हस्तशिल्पियों के लिए हस्तशिल्प प्रदर्शनी-2026 का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य कारीगरों की आमदनी बढ़ाना और उनके उत्पादों को राष्ट्रीय व वैश्विक पहचान दिलाना है।

    कपड़ा मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से मध्य प्रदेश राज्य सहकारी संघ मर्यादित और विकास आयुक्त हस्तशिल्प द्वारा आयोजित इस प्रदर्शनी का शुभारंभ 9 फरवरी की रात प्रताप छात्रावास, गुना में किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने किया। इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक दुबे, अमित सहारे और सहायक निदेशक, हस्तशिल्प विकास आयुक्त सेवा केंद्र, ग्वालियर भी मौजूद रहे।

    प्रदर्शनी में हैदराबाद, जयपुर, दिल्ली, आगरा, बेंगलुरु, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, गुजरात समेत कई राज्यों से आए हस्तशिल्पियों ने करीब 50 स्टॉल लगाए। यहां जूट बैग, जरी वर्क, एम्ब्रॉयडरी, बांस शिल्प, कलमकारी, बनारसी साड़ी, मीनाकारी, ज्वेलरी, पेंटिंग, क्ले और क्रॉकरी, लेदर आर्ट, तोरण आर्ट, दरी-बेडशीट और लकड़ी के खिलौने सहित पारंपरिक हस्तशिल्प प्रदर्शित किए गए।

    कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने स्टॉलों पर संबंधित कारीगरों और उनके राज्यों के नाम स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से न केवल कारीगरों को बाजार मिलता है, बल्कि आमजन को भी भारत की समृद्ध कला और संस्कृति के करीब जाने का अवसर मिलता है। उन्होंने गुनावासियों से अपील की कि अधिक से अधिक लोग आएं, हस्तशिल्प को देखें, सराहें और पसंद आने पर खरीदारी करें।

    प्रदर्शनी ने कई हस्तशिल्पियों की जिंदगी बदलने की कहानी भी बताई। गुजरात से आए मोनू गुजराती ने कहा कि पहले उनकी स्थिति कठिन थी, लेकिन इस मंच के मिलने से आमदनी में सुधार हुआ। बनारस से आए जलालुद्दीन अंसारी ने बताया कि अब उन्हें ग्राहक तक सीधी पहुंच मिल रही है और बीच का मार्जिन बच रहा है। राजस्थान के जयपुर से आए नीरज कुमार सैनी और नागपुर की शकुन ठाकुर ने भी अपनी आमदनी में बढ़ोतरी की कहानी साझा की।

    पश्चिम बंगाल के बप्पा दास और सेवोसी दे ने बताया कि पहले गांव-गांव जाकर सामान बेचना मुश्किल था, लेकिन अब सीधे बाजार तक पहुंच बन गई है। गुना के स्थानीय लोग भी इस पहल से प्रभावित नजर आए। महेंद्र नायक ने कहा कि हाथों की कलाकारी आम जनता तक पहुंचनी चाहिए। गायत्री शर्मा ने बताया कि कारीगरों को रोजगार मिला है और ग्राहकों को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद।

    उपायुक्त सहकारिता मुकेश जैन ने आमजन से अपील की कि यह प्रदर्शनी 16 फरवरी तक प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से रात 10 बजे तक प्रताप छात्रावास, मेन रोड, गुना में आयोजित रहेगी। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक लोग आएं, हस्तशिल्प का लाभ उठाएं और देश की पारंपरिक कला को प्रोत्साहित करें।

  • मां शारदा मंदिर में शस्त्र पूजा का वीडियो वायरल, प्रशासन और मंदिर सुरक्षा पर दबाव

    मां शारदा मंदिर में शस्त्र पूजा का वीडियो वायरल, प्रशासन और मंदिर सुरक्षा पर दबाव


    मैहर स्थित मां शारदा मंदिर एक बार फिर विवादों में घिर गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में दिख रहा है कि बाहुबली नेता और उत्तर प्रदेश के विधायक राजा भैया ने मंदिर के गर्भगृह में शस्त्र पूजा की। यह घटना मंदिर प्रशासन के नियमों और सुरक्षा प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ाने वाली मानी जा रही है। मंदिर परिसर में अस्त्र-शस्त्र ले जाना पूरी तरह से प्रतिबंधित है और इसे धार्मिक और सुरक्षा दोनों दृष्टियों से संवेदनशील माना जाता है।

    वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि गर्भगृह में विधिपूर्वक पूजा के दौरान राजा भैया ने शस्त्रों के साथ आराधना की। मंदिर प्रशासन के अनुसार श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गर्भगृह में किसी भी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र ले जाने पर सख्त प्रतिबंध है। बावजूद इसके नियमों की अनदेखी की गई। यह मामला प्रशासन, सुरक्षा और धार्मिक नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

    स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का कहना है कि सामान्य भक्तों के लिए जहां सख्त नियम लागू होते हैं वहीं प्रभावशाली नेताओं के लिए अलग मापदंड अपनाए जा रहे हैं। राजा भैया की बाहुबली छवि के कारण उन्हें विशेष अनुमति दी गई और इससे नियमों में भेदभाव का आरोप लग रहा है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर किसी आम भक्त ने ऐसा किया होता तो क्या प्रशासन की कार्रवाई इतनी ढीली होती।

    मां शारदा मंदिर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं और नवरात्र जैसे पर्वों पर यह संख्या लाखों में पहुंच जाती है। ऐसे में गर्भगृह तक शस्त्र ले जाने की घटना सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। श्रद्धालुओं ने चिंता जताई है कि नियमों का इस तरह उल्लंघन होने पर किसी बड़ी अनहोनी की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    बताया जा रहा है कि पूजा पूरी तरह से विधिपूर्वक मंदिर के पुजारी द्वारा कराई गई। हालांकि मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन की ओर से अभी तक इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कई यूजर्स ने इसे नियमों का खुला उल्लंघन बताया है और मामले की जांच की मांग की है।

    मंदिर प्रशासक दिव्या सिंह पटेल और एसडीएम मैहर से संपर्क किया गया लेकिन वे इस मामले पर कोई टिप्पणी देने के लिए तैयार नहीं हैं। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है और लोग प्रशासन की भूमिका और मंदिर सुरक्षा के स्तर पर सवाल उठा रहे हैं। इस घटना ने धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा नियमों के पालन की गंभीरता को एक बार फिर उजागर किया है।

  • रणझी की छोटी विक्टोरिया बनी बड़ी उम्मीद 45 करोड़ का 100 बेड अस्पताल दो लाख लोगों को देगा राहत

    रणझी की छोटी विक्टोरिया बनी बड़ी उम्मीद 45 करोड़ का 100 बेड अस्पताल दो लाख लोगों को देगा राहत


    जबलपुर के उपनगरीय क्षेत्र रणझी में स्थित सिविल अस्पताल जिसे लोग वर्षों से छोटी विक्टोरिया के नाम से जानते हैं अब इतिहास रचने जा रहा है यह वही अस्पताल है जो अब तक केवल रेफरल सेंटर बनकर रह गया था लेकिन अब इसकी पहचान पूरी तरह बदलने वाली है करीब 45 करोड़ रुपये की लागत से तैयार चार मंजिला हाईटेक 100 बिस्तरों वाला नया अस्पताल भवन क्षेत्र के लाखों लोगों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आया है

    इस अस्पताल के शुरू होने के बाद रणझी और आसपास के इलाकों के लगभग दो लाख लोगों को इलाज के लिए शहर की ओर दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी अब तक हार्ट अटैक ब्रेन स्ट्रोक और ब्रेन हेमरेज जैसे गंभीर मामलों में मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल मेडिकल कॉलेज या निजी अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता था इस प्रक्रिया में 20 से 25 मिनट का कीमती समय निकल जाता था जो कई बार मरीज की जान के लिए खतरा बन जाता था

    नए भवन के संचालन में आने के बाद हालात पूरी तरह बदलने की उम्मीद है अस्पताल में आधुनिक जांच मशीनें स्थापित की गई हैं 100 बिस्तरों की सुविधा शुरू होने के साथ ही डॉक्टरों की संख्या बढ़ाई जाएगी साथ ही नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ की भी पर्याप्त तैनाती होगी इससे सामान्य बीमारियों के साथ साथ गंभीर रोगों का इलाज भी यहीं संभव हो सकेगा

    रणझी सिविल अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 300 से 350 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं लेकिन संसाधनों की कमी के कारण अब तक उन्हें सीमित सुविधाएं ही मिल पाती थीं नए अस्पताल भवन के शुरू होने से मरीजों को बेहतर जांच सही समय पर उपचार और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सुविधा मिलेगी

    रणझी के छह वार्डों के अलावा मटामर सोनपुर मानेगांव मोहनिया खमरिया पिपरिया और उमरिया जैसे क्षेत्रों की बड़ी आबादी इसी अस्पताल पर निर्भर है इन इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए यह अस्पताल किसी वरदान से कम नहीं है मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ संजय मिश्रा के अनुसार नए भवन के चालू होने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा काफी बढ़ जाएगा अस्पताल में जरूरी जांच सुविधाएं विशेषज्ञ चिकित्सक और पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध कराया जाएगा जिससे गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मिल सकेगा

    इस चार मंजिला अस्पताल भवन की संरचना भी पूरी तरह आधुनिक है पहली मंजिल पर प्रशासनिक ब्लॉक बनाया गया है दूसरी मंजिल पर पुरुष और महिला वार्ड की सुविधा है तीसरी मंजिल पर अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर बनाए गए हैं भवन में सीढ़ी रैंप और तीन लिफ्ट की सुविधा दी गई है साथ ही बाहर पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था भी की गई है

    अस्पताल में दो आधुनिक ऑपरेशन थिएटर बनाए गए हैं जहां माइनर ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध होगी इसके अलावा एक पैथोलॉजी लैब भी बनाई गई है जिसमें जरूरी जांच की सुविधाएं होंगी नई ओपीडी वार्ड इमरजेंसी वार्ड और अन्य संसाधन भी मरीजों को उपलब्ध कराए जाएंगे कुल मिलाकर छोटी विक्टोरिया के नाम से पहचाने जाने वाले इस अस्पताल का यह नया रूप रणझी और आसपास के इलाकों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं में एक नई शुरुआत साबित होगा जहां समय पर इलाज मिलने से न सिर्फ लोगों की जान बचेगी बल्कि शहर पर स्वास्थ्य सेवाओं का दबाव भी कम होगा

  • जलपक्षियों की राजधानी बना जबलपुर एशियाई वॉटरबर्ड गणना में प्रदेश में नंबर वन

    जलपक्षियों की राजधानी बना जबलपुर एशियाई वॉटरबर्ड गणना में प्रदेश में नंबर वन


    जबलपुर /मध्यप्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर ने एक बार फिर अपनी प्राकृतिक समृद्धि का लोहा मनवाया है। एशियाई वॉटरबर्ड सेंसरस में जबलपुर पूरे प्रदेश में सबसे आगे निकल गया है। जलपक्षियों के लिए जबलपुर अब सबसे सुरक्षित और पसंदीदा ठिकाने के रूप में उभर कर सामने आया है। हाल ही में संपन्न हुई 40वीं एशियाई वॉटरबर्ड गणना के आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि जबलपुर के जलाशय जैव विविधता के लिहाज से बेहद समृद्ध हैं।

    इस वॉटरबर्ड सेंसरस में मध्यप्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व और वन मंडलों को शामिल किया गया था। पहली बार पूरे प्रदेश में स्थानीय और प्रवासी जलपक्षियों की एक साथ वैज्ञानिक तरीके से गणना की गई। इस व्यापक सर्वेक्षण में जबलपुर वन मंडल ने सबसे अधिक जलपक्षियों की मौजूदगी दर्ज कर प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है जबकि राजधानी भोपाल दूसरे नंबर पर रहा।

    जबलपुर वन मंडल के एसडीओ एम एल बरकड़े के अनुसार यह गणना पूरी तरह आधुनिक तकनीक के माध्यम से की गई। ई बर्ड ऐप के जरिए पक्षियों की प्रजातियों और संख्या को डिजिटल रूप से दर्ज किया गया जिससे आंकड़े अधिक सटीक और पारदर्शी बन सके। यह तरीका न केवल विश्वसनीय है बल्कि भविष्य में जल स्रोतों के संरक्षण और प्रबंधन के लिए भी बेहद उपयोगी साबित होगा।

    सर्वेक्षण में जबलपुर के पनागर क्षेत्र स्थित मोहारी तालाब जलपक्षियों का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बनकर सामने आया है। यहां कुल 139 प्रजातियों के देशी और विदेशी जलपक्षी देखे गए। बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों ने इस तालाब को अपना अस्थायी बसेरा बनाया है जो इस क्षेत्र की अनुकूल जलवायु और सुरक्षित पारिस्थितिकी तंत्र को दर्शाता है।

    मोहारी तालाब में इंडियन स्पॉट बिल्ड डक साइबेरियन और यूरेशियन प्रजातियों के पक्षी ग्रेलेग गूज नॉर्दर्न पिंटेल गार्गेनी पर्पल मूरहेन कॉमन कूट ब्लैक विंग्ड स्टिल्ट रेड वॉटल्ड लैपविंग लिटिल ग्रीब इंडियन कॉर्मोरेंट डार्टर ग्रे हेरॉन व्हाइट ब्रेस्टेड किंगफिशर स्टॉर्क बिल्ड किंगफिशर और पाइड किंगफिशर जैसे कई दुर्लभ और आकर्षक पक्षी देखे गए। इन पक्षियों की मौजूदगी यह साबित करती है कि मोहारी तालाब अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रवासी पक्षियों के लिए भी सुरक्षित ठिकाना बन चुका है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि जबलपुर के जलाशयों में पर्याप्त पानी स्वच्छ वातावरण और मानवीय हस्तक्षेप की सीमित मौजूदगी ने इन पक्षियों को आकर्षित किया है। यह उपलब्धि केवल एक आंकड़ा नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में जबलपुर की बड़ी सफलता है। इससे यह संकेत भी मिलता है कि यदि जल स्रोतों का सही तरीके से संरक्षण किया जाए तो जैव विविधता को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

    एशियाई वॉटरबर्ड सेंसरस में मिली यह उपलब्धि जबलपुर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाली है। यह न केवल पर्यटन की संभावनाओं को बढ़ाएगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता को भी मजबूत करेगी। जलपक्षियों की यह बढ़ती संख्या आने वाले समय में जबलपुर को बर्ड वॉचिंग के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित कर सकती है।

  • भोपाल: गांधी मेडिकल कॉलेज की MBBS छात्रा की संदिग्ध मौत, खाली एसिड की बोतल मिली पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

    भोपाल: गांधी मेडिकल कॉलेज की MBBS छात्रा की संदिग्ध मौत, खाली एसिड की बोतल मिली पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार


    भोपाल । भोपाल में एक बार फिर मेडिकल छात्रा की संदिग्ध मौत ने सनसनी फैला दी है। राजधानी के गांधी मेडिकल कॉलेज की MBBS प्रथम वर्ष 2025 बैच की छात्रा कोहेफिजा इलाके के एक प्राइवेट पीजी में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गई। पुलिस सूत्रों के अनुसार छात्रा डे-स्कॉलर थी और कोहेफिजा थाना क्षेत्र में स्थित पीजी में रह रही थी। मंगलवार सुबह उसे उसके कमरे के बाथरूम में बेसुध अवस्था में पाया गया।

    परिजनों और दोस्तों ने कमरे और बाथरूम का दरवाजा तोड़कर छात्रा को बाहर निकाला लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। शव के पास एक खाली एसिड की बोतल बरामद हुई है जिससे मौत की वजह पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रारंभिक जांच में आत्महत्या की आशंका जताई जा रही है लेकिन एसिड की मौजूदगी ने मामले को और जटिल बना दिया है।

    इस घटना ने इलाके में सनसनी फैला दी है और पुलिस के लिए यह स्पष्ट करना बड़ी चुनौती बन गया है कि क्या यह आत्महत्या थी या किसी अन्य साजिश का हिस्सा। अभी तक कोई स्पष्ट सुराग सामने नहीं आया है लेकिन एसिड की बोतल होने के कारण जांच की दिशा और भी गंभीर हो गई है।

    पुलिस ने तुरंत ही मामले की जांच शुरू कर दी है। शव को पोस्टमार्टम के लिए हैमिडिया अस्पताल भेजा गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही यह पता चलेगा कि छात्रा की मौत एसिड के कारण हुई थी या किसी अन्य वजह से।

    कोहेफिजा थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है। पीजी में रहने वाले अन्य छात्रों और आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है। साथ ही छात्रा के मोबाइल बैग और अन्य सामानों को भी कब्जे में लिया गया है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि छात्रा के साथ कोई मानसिक दबाव तो नहीं था या किसी प्रकार का दबाव/हैरानी वाली घटना तो नहीं हुई।

    इस घटना के बाद मेडिकल कॉलेज और आसपास के छात्रों में डर और चिंता का माहौल बना हुआ है। कई छात्रों और परिजनों ने सुरक्षा व्यवस्था और छात्रावास/पीजी में रहने वाली छात्राओं की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं अब पुलिस की नजर पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर है जो इस केस की दिशा तय करेगी। यदि रिपोर्ट में एसिड से संबंधित कारण सामने आते हैं तो मामला और गंभीर हो जाएगा। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि छात्रा ने स्वयं ही आत्महत्या की या किसी ने उसे मारकर मामले को आत्महत्या जैसा दिखाने की कोशिश की।