Category: Madhya Pradesh

  • महाष्टमी पर कन्या भोज कब करें, 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे तक शुभ समय, अभिजीत मुहूर्त में भी कर सकेंगे पूजन

    महाष्टमी पर कन्या भोज कब करें, 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे तक शुभ समय, अभिजीत मुहूर्त में भी कर सकेंगे पूजन


    उज्जैन । नवरात्रि के दौरान महाष्टमी का पर्व इस बार 18 और 19 अक्टूबर को मनाया जा रहा है। उज्जैन में अष्टमी तिथि को लेकर श्रद्धालुओं के बीच पूजन के समय को लेकर विशेष उत्सुकता है। पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 27 मिनट पर शुरू हुई और 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि का आरंभ हो जाएगा। तिथि की अवधि और पूजा की पारंपरिक मान्यताओं के कारण कुछ घरों में रविवार को जबकि कुछ घरों में सोमवार सुबह महाष्टमी का पूजन किया जाएगा।
    ज्योतिषाचार्य अमर डिब्बेवाला के अनुसार जिन परिवारों में रात्रि के समय अष्टमी पूजन करने की परंपरा है वे 18 अक्टूबर को पूजा कर सकते हैं। वहीं सुबह पूजन करने वाले परिवार 19 अक्टूबर को अष्टमी तिथि के दौरान पूजा कर सकते हैं। परंपराओं और पंचांग की गणना में अंतर के कारण पूजा के समय में भिन्नता देखने को मिल रही है। ऐसे में श्रद्धालुओं को अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा का समय तय करना चाहिए।
    उज्जैन में सोमवार को नगर पूजा का भी आयोजन होगा। शहर के प्रसिद्ध चौबीस खंभा माता मंदिर में महामाया और महालया माता की पूजा की जाएगी। इस परंपरा के अंतर्गत कलेक्टर द्वारा माता को मदिरा का भोग अर्पित किया जाएगा। नगर पूजा उज्जैन की विशिष्ट धार्मिक परंपराओं में शामिल है और हर वर्ष नवरात्रि के दौरान इसका आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर धार्मिक विधि-विधान के साथ पूजा संपन्न कराई जाएगी।
    ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस नवरात्रि में दो सर्वार्थ सिद्धि योग और दो रवि योग भी बन रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं में इन योगों को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। इसी आधार पर साधना और उपासना के साथ भूमि या भवन की खरीदारी तथा वाहन और संपत्ति से जुड़े कार्य करने की भी मान्यता है। हालांकि किसी भी महत्वपूर्ण खरीदारी या शुभ कार्य के लिए संबंधित तिथि और स्थानीय पंचांग का ध्यान रखना उचित माना जाता है।
    महाष्टमी पर पूजा करने वालों के लिए समय का विशेष महत्व है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार रात्रि पूजन की परंपरा निभाने वाले श्रद्धालु 18 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे के बीच पारंपरिक पूजा कर सकते हैं। वहीं सुबह पूजा करने वाले परिवारों को 19 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 30 मिनट से पहले पूजन संपन्न करने की सलाह दी गई है। अलग-अलग पंचांगों में अष्टमी तिथि को लेकर गणना का अंतर भी बताया गया है। अष्टगामी ग्रह लाघवी पद्धति में अष्टमी 18 अक्टूबर को 60 घटी की मानी गई है जबकि चित्रा केतकी पंचांग में इसे 19 अक्टूबर को बताया गया है।
    कन्या पूजन और कन्या भोज के लिए भी 19 अक्टूबर को विशेष समय बताया गया है। अष्टमी तिथि के दौरान सूर्योदय से सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक कन्या पूजन और भोज कराया जा सकता है। यदि किसी कारणवश श्रद्धालु इस अवधि में पूजा नहीं कर पाते हैं तो दोपहर 11 बजकर 43 मिनट से 12 बजकर 30 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त में भी कन्या पूजन और भोज करा सकते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार अभिजीत मुहूर्त को शुभ और सिद्धिदायक माना जाता है इसलिए इस अवधि में भी पूजा करना उचित बताया गया है।
    महाष्टमी के अवसर पर देवी दुर्गा की आराधना के साथ कन्या पूजन और भोज को विशेष महत्व दिया जाता है। श्रद्धालु छोटी कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनकी पूजा करते हैं और भोजन कराकर आशीर्वाद लेते हैं। नवरात्रि के इन अंतिम दिनों में मंदिरों और घरों में पूजा-पाठ का सिलसिला जारी है। श्रद्धालुओं को सलाह है कि वे अपने क्षेत्र के पंचांग और पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजन करें।

  • सिंहस्थ से पहले अतिक्रमण पर नगर निगम का एक्शन, जयसिंहपुरा में महासिद्ध आश्रम के निर्माण ढहाए, दो नोटिस के बाद कार्रवाई

    सिंहस्थ से पहले अतिक्रमण पर नगर निगम का एक्शन, जयसिंहपुरा में महासिद्ध आश्रम के निर्माण ढहाए, दो नोटिस के बाद कार्रवाई


    उज्जैन । उज्जैन में आगामी सिंहस्थ को लेकर प्रशासन ने सिंहस्थ क्षेत्र की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई तेज कर दी है। इसी अभियान के तहत रविवार तड़के नगर निगम की टीम ने जयसिंहपुरा क्षेत्र में नरसिंह घाट के पास स्थित महासिद्ध आश्रम यानी एमएस सुकृत ट्रस्ट के परिसर में बने अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की। सुबह करीब पांच बजे पहुंची टीम ने तीन पोकलैंड मशीनों की मदद से नवनिर्मित भवन के कुछ हिस्सों को ध्वस्त किया। हालांकि भवन के भीतर रखा सामान निकालने के लिए समय दिए जाने के बाद कार्रवाई को अस्थायी रूप से रोक दिया गया।
    नगर निगम के भवन अधिकारी राजकुमार राठौर के अनुसार आश्रम परिसर में सिंहस्थ के लिए सुरक्षित रखी गई भूमि पर हाल ही में तीन अलग-अलग पक्के भवनों का निर्माण किया गया था। निगम प्रशासन ने इन निर्माणों को हटाने के लिए आश्रम संचालक को पहले ही दो बार नोटिस जारी किए थे। निर्धारित समय सीमा में निर्माण नहीं हटाए जाने के बाद रविवार सुबह ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गई। प्रशासन का उद्देश्य सिंहस्थ क्षेत्र की भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराना है ताकि आयोजन के दौरान जरूरी व्यवस्थाओं के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध रह सके।
    कार्रवाई के दौरान अधिकारियों को पता चला कि नवनिर्मित भवन के अंदर आश्रम का काफी सामान रखा हुआ है। ऐसे में सामान को बाहर निकालने के लिए समय दिया गया। इसके बाद नगर निगम की टीम ने फिलहाल कार्रवाई रोक दी और मौके से लौट गई। अधिकारियों के मुताबिक दी गई समय सीमा समाप्त होने के बाद शेष अवैध निर्माण हटाने की प्रक्रिया फिर शुरू की जाएगी। इस तरह भवन के कुछ हिस्सों पर कार्रवाई हो चुकी है जबकि बाकी निर्माण हटाने की प्रक्रिया सामान खाली होने के बाद आगे बढ़ेगी।
    सिंहस्थ क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने का अभियान पिछले कुछ समय से लगातार चलाया जा रहा है। प्रशासन का जोर उन जमीनों को खाली कराने पर है जिन्हें सिंहस्थ के आयोजन और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं के लिए सुरक्षित रखा गया है। ऐसे क्षेत्रों में पक्के निर्माण होने से भविष्य में आयोजन संबंधी सुविधाओं और आवागमन की व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसी को देखते हुए नगर निगम की टीमें अलग-अलग स्थानों पर पहुंचकर निर्माणों की जांच कर रही हैं और नियमों के अनुसार कार्रवाई कर रही हैं।
    महासिद्ध आश्रम पर कार्रवाई से दो दिन पहले नगर निगम की टीम ने इसी क्षेत्र में स्थित हरियाणा वाले सत्यगिरि महाराज के आश्रम में किए गए अवैध निर्माण को भी पोकलैंड मशीन की मदद से ध्वस्त किया था। लगातार हो रही कार्रवाई से स्पष्ट है कि प्रशासन सिंहस्थ क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के अभियान को आगे बढ़ा रहा है। हालांकि हर मामले में संबंधित निर्माण की स्थिति और जारी नोटिस के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।
    सिंहस्थ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन के लिए भूमि और यातायात प्रबंधन महत्वपूर्ण माना जाता है। श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए प्रशासन को अस्थायी सुविधाओं और अन्य व्यवस्थाओं के लिए पर्याप्त जगह की जरूरत होगी। ऐसे में अतिक्रमण हटाने की मुहिम को आयोजन की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। महासिद्ध आश्रम के मामले में फिलहाल कार्रवाई आंशिक रूप से पूरी हुई है और सामान हटाने के लिए निर्धारित समय बीतने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • ग्वालियर में देर रात भीषण हादसे से मचा कोहराम, दर्शन के लिए कतार में खड़े श्रद्धालुओं को कुचला, CSP हटाए गए और 8 निलंबित

    ग्वालियर में देर रात भीषण हादसे से मचा कोहराम, दर्शन के लिए कतार में खड़े श्रद्धालुओं को कुचला, CSP हटाए गए और 8 निलंबित


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसे ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया। चीनौर रोड पर दर्शन के लिए कतार में खड़े श्रद्धालुओं को धान से भरे एक बेकाबू ट्रक ने कुचल दिया। इस हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई जबकि 26 लोग घायल हुए हैं। घायलों में दो पुलिसकर्मियों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई और मंदिर परिसर के आसपास चीख-पुकार सुनाई देने लगी।
    जानकारी के मुताबिक हादसा शनिवार देर रात करीब डेढ़ बजे हुआ। उस समय शीतला माता मंदिर में दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। कई लोग सड़क किनारे कतार में खड़े थे। इसी दौरान चीनौर की ओर से आ रहा धान से भरा ट्रक ढलान पर अचानक बेकाबू हो गया। बताया गया है कि घटनास्थल पर सड़क का ढलान काफी तीखा है। ट्रक लोगों को रौंदता हुआ आगे बढ़ा और पुलिस चेकपोस्ट को तोड़ते हुए मंदिर की बाहरी दीवार तथा गेट से जा टकराया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि मंदिर की दीवार ढह गई और कई लोग मलबे में दब गए।
    ट्रक चालक ने पुलिस को बताया कि वाहन के ब्रेक फेल हो गए थे। खबर के मुताबिक वह गूगल मैप की मदद से ट्रक चला रहा था। हालांकि हादसे के वास्तविक कारणों और उसमें किसी तरह की लापरवाही की पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। घटना के बाद पुलिस और राहत दल ने घायलों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया। घायलों को ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां डॉक्टर उनका इलाज कर रहे हैं। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई गई है।
    हादसे में घायल थाटीपुर निवासी अभिषेक ने बताया कि वह उस समय हाथ-पैर धो रहे थे जब अचानक सामने से ट्रक आ गया। उनके मुताबिक ट्रक उन्हें घसीटते हुए आगे ले गया। एक व्यक्ति ने उन्हें तलाशकर बाहर निकाला जिससे उनकी जान बच सकी। हादसे में अपने परिजनों को खोने वाले परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। अस्पताल में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के बाद मृतकों के शव उनके परिजनों तक पहुंचाए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
    घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए। झांसी रोड के सीएसपी रवि भदौरिया को पद से हटाया गया है। इसके साथ ही आठ पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित किया गया है। इनमें झांसी रोड थाना प्रभारी शक्ति सिंह यादव और आंतरी थाना प्रभारी गीतेश शर्मा सहित यातायात पुलिस के अधिकारी तथा अन्य पुलिसकर्मी शामिल हैं। यह कार्रवाई हादसे के दौरान कथित लापरवाही के मामले में की गई है।
    मुख्यमंत्री ने मृतकों की मौत पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि इस कठिन समय में सरकार प्रभावित परिवारों के साथ है। उन्होंने हादसे में घायल सभी लोगों का निशुल्क इलाज कराने की घोषणा की है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी घटना पर दुख जताया और मृतकों को श्रद्धांजलि देते हुए घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
    अष्टमी के अवसर पर मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही जारी रहने के बीच इस हादसे ने धार्मिक स्थलों के आसपास सुरक्षा और यातायात प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तीखे ढलान वाले मार्गों पर भारी वाहनों की आवाजाही और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा जरूरी मानी जा रही है। हादसे की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि ट्रक के बेकाबू होने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा में चूक के लिए कौन से कारण जिम्मेदार थे।

  • इंदौर में चुनरी यात्रा को लेकर ट्रैफिक अलर्ट, कई प्रमुख रास्तों पर डायवर्जन, एयरपोर्ट जाने वालों के लिए वैकल्पिक मार्ग जारी

    इंदौर में चुनरी यात्रा को लेकर ट्रैफिक अलर्ट, कई प्रमुख रास्तों पर डायवर्जन, एयरपोर्ट जाने वालों के लिए वैकल्पिक मार्ग जारी


    इंदौर । इंदौर में नवरात्रि के अवसर पर आज विशाल चुनरी यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। इस धार्मिक आयोजन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी शामिल होंगे। बड़ा गणपति मंदिर से शुरू होकर बिजासन माता मंदिर तक पहुंचने वाली इस यात्रा में हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। आयोजन को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं। लाखों सितारों से सुसज्जित ढाई किलोमीटर से अधिक लंबी चुनरी माता को अर्पित की जाएगी। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ और यातायात व्यवस्था को संभालने के लिए तीन हजार चुनरी रक्षकों की तैनाती की गई है।
    यात्रा सुबह 10 बजे बड़ा गणपति मंदिर से शुरू होगी। इसके बाद श्रद्धालुओं का जत्था वायरलेस चौराहा और कालानी नगर होते हुए एरोड्रम थाना क्षेत्र से गुजरेगा। यात्रा पंचशील नगर और बाबू मुराई कॉलोनी से होते हुए एयरपोर्ट प्रवेश द्वार के रास्ते बिजासन माता मंदिर पहुंचेगी। यात्रा संयोजक और भाजपा के पूर्व विधायक सुदर्शन गुप्ता के मुताबिक आयोजन को व्यवस्थित बनाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। प्रमुख चौराहों पर तैनात चुनरी रक्षक यातायात और श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियंत्रित करेंगे। आपसी तालमेल बनाए रखने के लिए उनके पास वॉकी-टॉकी भी रहेंगे।
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यक्रम में बदलाव हुआ है। वे एयरपोर्ट पहुंचने से पहले लालबाग गए और इसके बाद एमवाय अस्पताल में मशीन के लोकार्पण कार्यक्रम में शामिल हुए। यहां से उनके बड़ा गणपति चौराहे पहुंचकर चुनरी यात्रा में शामिल होने का कार्यक्रम है। आयोजन में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सहित कई जनप्रतिनिधियों के भी मौजूद रहने की जानकारी दी गई है।
    यात्रा के चलते शहर के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित रहने की संभावना है। गंगवाल और राजमोहल्ला चौराहे पर सिटी बसों और बड़े वाहनों को वैकल्पिक रास्तों से भेजा जाएगा। नगर निगम चौराहे पर भी बड़े वाहनों और सिटी बसों के लिए डायवर्जन रहेगा। महेश नगर में कार और दोपहिया वाहनों की आवाजाही को बदला जाएगा। गोराकुंड और अंतिम चौराहे पर बड़ा गणपति की ओर आने वाले वाहनों को दूसरे मार्गों से निकाला जाएगा। टोरी कॉर्नर पर मल्हारगंज की ओर से आने वाले वाहन गोराकुंड की तरफ भेजे जाएंगे जबकि गोपाल बिल्डिंग के पास वाहनों को कैलाश मार्ग की ओर डायवर्ट किया जाएगा।
    कर्णावतपुरा तिराहे और बड़वाली चौकी से बड़ा गणपति की ओर जाने वाले वाहन भी वैकल्पिक मार्गों से गुजरेंगे। वायरलेस चौराहे और कालानी नगर की ओर जाने वाले वाहनों के लिए भी अलग-अलग स्थानों पर डायवर्जन की व्यवस्था की गई है। दिलीप नगर टी से बिजासन माता मंदिर की ओर जाने वाले वाहनों को दूसरे रास्तों से भेजा जाएगा। सुपर कॉरिडोर चौराहे से बिजासन टी की ओर जाने वाले वाहन चालकों को भी यातायात पुलिस के निर्देशों का पालन करना होगा।
    एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। एरोड्रम की ओर जाने के लिए वाहन चालक मरीमाता से किला मैदान और टाटा स्टील होते हुए 60 फीट एसएफए टर्निंग तथा पंचशील मार्ग का इस्तेमाल कर सकते हैं। दूसरा विकल्प छोटा बांगड़दा से सुपर कॉरिडोर होते हुए एयरपोर्ट पहुंचने का है। भंवरकुआं और अन्नपूर्णा सहित महू नाका की ओर से आने वाले वाहन चंदन नगर और सिरपुर होते हुए जवाहर टेकरी तथा चोइथराम अस्पताल चौराहे से नावदा और ग्राम रिजलाय के रास्ते हिंकारगिरी होकर एयरपोर्ट जा सकेंगे।
    आयोजकों ने नागरिकों से सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक यात्रा मार्ग पर अनावश्यक आवागमन से बचने की अपील की है। जरूरी काम से निकलने वाले लोगों को वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करने और यातायात पुलिस के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को उड़ान के समय को ध्यान में रखकर घर से पर्याप्त समय पहले निकलना चाहिए ताकि सड़क पर संभावित जाम के कारण परेशानी न हो।

  • मध्य प्रदेश में मौसम का बदला मिजाज, कई जिलों में बारिश से गिरा तापमान, 20 अक्टूबर के बाद बढ़ेगी रात की ठंडक

    मध्य प्रदेश में मौसम का बदला मिजाज, कई जिलों में बारिश से गिरा तापमान, 20 अक्टूबर के बाद बढ़ेगी रात की ठंडक


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी बारिश का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रदेश के कई हिस्सों में पिछले 72 घंटे से आंधी और बारिश का दौर जारी है। ग्वालियर-चंबल संभाग के जिलों में भी मौसम का असर देखने को मिल रहा है। लगातार बदलते मौसम के कारण दिन के तापमान में 2.8 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने रविवार को प्रदेश के 15 जिलों में बारिश की संभावना जताते हुए अलर्ट जारी किया है। वहीं अनुमान है कि 20 अक्टूबर के बाद रात के तापमान में गिरावट के साथ ठंडक बढ़ने लगेगी।
    मौसम केंद्र भोपाल के मुताबिक रविवार को नीमच मंदसौर श्योपुर शिवपुरी गुना अशोकनगर निवाड़ी टीकमगढ़ छतरपुर पन्ना मऊगंज सीधी सिंगरौली सिवनी और बालाघाट में बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ मौसम बदलने की संभावना है। पश्चिमी और उत्तरी मध्य प्रदेश में सक्रिय चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से इंदौर उज्जैन ग्वालियर चंबल और जबलपुर संभाग के कई जिलों में मौसम प्रभावित हुआ है। शुक्रवार और शनिवार को भी इन क्षेत्रों में बारिश दर्ज की गई थी। बड़वानी जिले के सेंधवा सीहोर और पीथमपुर में भी पानी गिरा जबकि रीवा और सागर संभाग के कई इलाकों में बादल छाए रहे।
    मौसम विभाग के अनुसार 18 और 19 अक्टूबर को प्रदेश के कुछ जिलों में आंधी और बारिश का दौर जारी रह सकता है। इसके बाद मौसम में बदलाव आने की संभावना है। 20 अक्टूबर के बाद रात के तापमान में गिरावट होने से ठंडक बढ़ सकती है। अक्टूबर में दिन के समय गर्मी रात में हल्की ठंडक और बीच-बीच में बारिश का मौसम देखने को मिलता है। इस बार भी प्रदेश में मौसम का यही मिला-जुला रूप दिखाई दे रहा है।
    गौर करने वाली बात यह है कि मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून 3 अक्टूबर को ही लौट चुका है। इसके बावजूद नए मौसमी सिस्टम सक्रिय होने से बारिश का दौर दोबारा शुरू हो गया है। मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार पिछले दस वर्षों के आंकड़ों में अक्टूबर के दौरान बारिश गर्मी और ठंड तीनों का असर देखने को मिलता रहा है। इस बार भी प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसी ही परिस्थितियां बन रही हैं। महीने की शुरुआत में कई जिलों में मौसम साफ हुआ था और तेज धूप निकली थी लेकिन बाद में आंधी और बारिश ने मौसम का मिजाज बदल दिया।
    प्रदेश में बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो पूर्वी हिस्से के जबलपुर रीवा सागर और शहडोल संभाग में कुल बारिश का आंकड़ा सामान्य से करीब चार प्रतिशत अधिक बताया गया है। हालांकि कुछ जिलों में अब भी बारिश की कमी बनी हुई है। बालाघाट छिंदवाड़ा दमोह जबलपुर नरसिंहपुर पांढुर्णा रीवा सागर और सिवनी में सामान्य के मुकाबले पांच से 21 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है।
    पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में भी बारिश की कमी सामने आई है। आलीराजपुर अशोकनगर बड़वानी बैतूल देवास धार हरदा इंदौर झाबुआ खंडवा मंदसौर मुरैना नर्मदापुरम नीमच रायसेन रतलाम सीहोर शाजापुर उज्जैन और विदिशा में सामान्य से नौ से 51 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है। वहीं भोपाल राजगढ़ बुरहानपुर खरगोन कटनी मंडला डिंडौरी ग्वालियर गुना दतिया पन्ना छतरपुर टीकमगढ़ निवाड़ी मैहर आगर-मालवा भिंड श्योपुर सिंगरौली सीधी सतना मऊगंज शहडोल उमरिया और अनूपपुर सहित 25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा होने की जानकारी दी गई है।
    इस साल जून में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआत में तेज बारिश के कारण आंकड़ों में सुधार हुआ लेकिन बाद में मानसून के दो बार कमजोर पड़ने से कई दिनों तक बारिश नहीं हुई। मानसून के अंतिम दौर में सक्रिय हुए मजबूत सिस्टम के बावजूद जून की कमी पूरी नहीं हो सकी। इसी वजह से प्रदेश में कुल बारिश सामान्य से करीब चार प्रतिशत कम रही। मध्य प्रदेश में औसत मौसमी बारिश लगभग 37.3 इंच मानी जाती है।
    राजधानी भोपाल सहित इंदौर ग्वालियर जबलपुर और उज्जैन में अक्टूबर के दौरान तापमान में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। ग्वालियर में इस महीने दिन का तापमान कई बार 38 डिग्री के पार पहुंच चुका है जबकि इंदौर में अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में रात की ठंडक बढ़ने लगती है। जबलपुर और उज्जैन में भी इस महीने बारिश के साथ तापमान में बदलाव का इतिहास रहा है। फिलहाल प्रदेश के कई जिलों में लोगों को गर्मी से राहत मिल रही है लेकिन मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए बारिश और तेज हवाओं की संभावना वाले इलाकों में सतर्क रहने की जरूरत है।

  • ब्रेस्ट में गांठ को न करें नजरअंदाज, कम उम्र में भी हो सकता है कैंसर, इलाज से पहले फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन पर दें ध्यान

    ब्रेस्ट में गांठ को न करें नजरअंदाज, कम उम्र में भी हो सकता है कैंसर, इलाज से पहले फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन पर दें ध्यान


    इंदौर । ब्रेस्ट कैंसर को अक्सर बढ़ती उम्र से जुड़ी बीमारी माना जाता है लेकिन अब कम उम्र की महिलाओं में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं। इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में सामने आए कुछ मामलों ने इस बीमारी के शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से लेने की जरूरत को फिर उजागर किया है। एक निजी कंपनी में काम करने वाली 30 वर्षीय युवती को ब्रेस्ट कैंसर होने के बाद इलाज के साथ भविष्य में मां बनने की चिंता भी सताने लगी। वहीं उज्जैन की 35 वर्षीय महिला ने स्तन में गांठ को शुरुआत में सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज किया लेकिन जांच कराने पर कैंसर की पुष्टि हुई। एक अन्य 33 वर्षीय महिला के मामले में पारिवारिक इतिहास की जांच के दौरान आनुवंशिक कारण सामने आया।
    ये मामले बताते हैं कि स्तन में होने वाले बदलावों को नजरअंदाज करना नुकसानदायक हो सकता है। अक्टूबर को दुनिया भर में ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है। इस दौरान विशेषज्ञ महिलाओं को बीमारी के जोखिम कारकों शुरुआती लक्षणों और उपलब्ध उपचार विकल्पों के बारे में जागरूक रहने की सलाह देते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक समय पर पहचान और उचित उपचार से बीमारी से लड़ने की संभावनाएं बेहतर हो सकती हैं।
    इंदौर के कंसल्टेंट मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. प्रांजिल मंडलोई के अनुसार अल्कोहल का सेवन धूम्रपान मोटापा और शारीरिक गतिविधियों की कमी जैसे कारकों पर ध्यान देना जरूरी है। नियमित शारीरिक गतिविधि वजन नियंत्रित रखने और हार्मोनल तथा मेटाबॉलिक स्वास्थ्य बेहतर बनाए रखने में मदद करती है। कुछ अध्ययनों में नियमित व्यायाम करने वाली महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम कम पाया गया है। हालांकि किसी एक जीवनशैली कारक से हर महिला में कैंसर होने या न होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
    कम उम्र में कैंसर का पता चलने पर इलाज के साथ भविष्य में परिवार बढ़ाने की चिंता भी सामने आती है। विशेषज्ञों के मुताबिक कुछ महिलाएं उपचार पूरा होने के बाद मां बन सकती हैं। लेकिन गर्भधारण का सही समय कैंसर के प्रकार उसकी अवस्था और इस्तेमाल किए जाने वाले उपचार पर निर्भर करता है। कुछ दवाएं और कीमोथेरेपी प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए उपचार शुरू करने से पहले ही डॉक्टर से इस विषय पर चर्चा करना उपयोगी है। जरूरत के अनुसार एग फ्रीजिंग या एम्ब्रियो फ्रीजिंग जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। इलाज के बाद गर्भधारण की योजना कैंसर विशेषज्ञ और प्रजनन विशेषज्ञ की सलाह से बनानी चाहिए।
    ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम का आकलन करते समय पारिवारिक इतिहास भी महत्वपूर्ण होता है। यदि मां बहन नानी मौसी या परिवार के अन्य करीबी सदस्यों को ब्रेस्ट कैंसर हुआ हो तो डॉक्टर से जांच और आनुवंशिक जोखिम के बारे में चर्चा करनी चाहिए। कुछ मामलों में BRCA1 और BRCA2 जैसे जीन में बदलाव बीमारी का खतरा बढ़ा सकते हैं। विशेषज्ञ की सलाह पर आनुवंशिक जांच कराई जा सकती है। यदि किसी परिवार में ऐसे बदलाव की पुष्टि होती है तो दूसरे सदस्यों के जोखिम और स्क्रीनिंग की योजना भी व्यक्तिगत आधार पर तय की जा सकती है।
    डॉक्टरों के मुताबिक सामान्य जोखिम वाली महिलाओं को 40 वर्ष की उम्र के बाद मैमोग्राफी स्क्रीनिंग के बारे में चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। हालांकि जांच शुरू करने की उम्र और अंतराल व्यक्तिगत जोखिम तथा लागू दिशा-निर्देशों के आधार पर तय होते हैं। जिन महिलाओं में आनुवंशिक या पारिवारिक जोखिम अधिक है उन्हें कम उम्र से ही विशेष निगरानी की जरूरत हो सकती है।
    ब्रेस्ट कैंसर के उपचार में भी कई विकल्प उपलब्ध हुए हैं। अब हर मरीज को कीमोथेरेपी देना जरूरी नहीं होता। कैंसर की बायोलॉजी और स्टेज के अनुसार हॉर्मोन थेरेपी टार्गेटेड थेरेपी इम्यूनोथेरेपी और एंटीबॉडी ड्रग कॉन्जुगेट जैसी दवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है।
    कुछ मरीजों में जीनोमिक टेस्ट से उपचार के फैसले में मदद मिलती है। वहीं चुनिंदा एडवांस्ड मामलों में लिक्विड बायोप्सी के जरिए खून में मौजूद कैंसर से जुड़े आनुवंशिक बदलावों की जानकारी मिल सकती है। कौन सा उपचार उपयुक्त होगा यह मरीज की रिपोर्ट और बीमारी की स्थिति पर निर्भर करता है।
    सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. रितेश तपकिरे के अनुसार स्तन में नई गांठ आकार में बदलाव त्वचा पर सिकुड़न या गड्ढा निप्पल का अंदर की ओर मुड़ना अथवा असामान्य स्राव जैसे लक्षणों पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। हर गांठ कैंसर नहीं होती लेकिन उसकी वजह की पुष्टि जांच से ही हो सकती है। इसलिए लक्षण बने रहने पर देर किए बिना डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।

  • भोपाल में कुएं में मिला युवक का शव, दो साल से चल रहा था इलाज, मर्ग कायम कर मौत की परिस्थितियों की जांच में जुटी पुलिस

    भोपाल में कुएं में मिला युवक का शव, दो साल से चल रहा था इलाज, मर्ग कायम कर मौत की परिस्थितियों की जांच में जुटी पुलिस


    भोपाल । भोपाल के सुखी सेवनिया इलाके में रविवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब सुरभि कॉलेज के पास स्थित एक कुएं में 23 वर्षीय युवक का शव मिला। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कुएं से बाहर निकलवाया। मृतक की पहचान विशाल वंशकार पिता छोटेलाल वंशकार निवासी सुखी सेवनिया के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि विशाल पिछले चार दिनों से घर नहीं लौटा था। हालांकि परिजनों ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज नहीं कराई थी। युवक का शव मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
    जानकारी के अनुसार रविवार सुबह सुरभि कॉलेज के पास स्थित कुएं में ग्रामीणों ने एक युवक का शव देखा। इसके बाद उन्होंने पुलिस को सूचना दी। पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव को कुएं से बाहर निकलवाया। पहचान की प्रक्रिया पूरी होने पर मृतक के परिजनों को सूचना दी गई। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए गांधी मेडिकल कॉलेज की मर्चुरी भेजा गया। रविवार दोपहर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
    मृतक के बड़े भाई राजेश वंशकार ने बताया कि विशाल के दिमाग का पिछले करीब दो साल से इलाज चल रहा था। उनके अनुसार बीते कुछ समय से उसकी मानसिक स्थिति में परेशानी बढ़ गई थी। वह कई-कई दिनों तक बिना किसी को बताए घर से बाहर चला जाता था और फिर कुछ समय बाद वापस लौट आता था। परिवार के मुताबिक पहले भी उसके घर से बाहर रहने की ऐसी स्थिति बनती रही थी।
    परिजनों ने बताया कि इसी वजह से जब विशाल चार दिनों तक घर नहीं लौटा तो उन्होंने उसकी गुमशुदगी दर्ज नहीं कराई। परिवार को उम्मीद थी कि वह पहले की तरह खुद ही वापस आ जाएगा। हालांकि इस बार उसका शव कुएं में मिलने की खबर सामने आई। घटना के बाद परिवार में शोक का माहौल है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार परिजनों ने किसी व्यक्ति पर संदेह जताते हुए कोई आरोप नहीं लगाया है।
    पुलिस अब इस बात का पता लगाने में जुटी है कि विशाल कुएं तक कैसे पहुंचा और उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई। युवक के घर से निकलने से लेकर शव मिलने तक की घटनाओं को समझने के लिए सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है। कुएं में गिरने की आशंका समेत अन्य संभावित परिस्थितियों की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी। अभी मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं हुई है।
    सुखी सेवनिया पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर लिया है। पुलिस के मुताबिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद मौत के कारणों को समझने में मदद मिलेगी। जांच के दौरान जरूरी तथ्यों और परिस्थितियों का भी सत्यापन किया जाएगा। फिलहाल मामले में किसी तरह की आपराधिक घटना की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि युवक की मौत कैसे हुई। घटना ने इलाके में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है।

  • नवाबों की रुबात में VIP कोटे पर क्यों मचा घमासान, आम हाजियों के लिए बनी सुविधा के आवंटन पर उठे सवाल

    नवाबों की रुबात में VIP कोटे पर क्यों मचा घमासान, आम हाजियों के लिए बनी सुविधा के आवंटन पर उठे सवाल


    भोपाल । भोपाल रियासत के नवाबों और बेगमों की ओर से हज यात्रियों को राहत देने के उद्देश्य से बनाई गई रुबात की सुविधा एक बार फिर चर्चा में है। मक्का में हाजियों के ठहरने के लिए उपलब्ध इस व्यवस्था के आवंटन को लेकर शनिवार को आयोजित कुर्रा यानी लॉटरी के दौरान विवाद हो गया। औकाफ-ए-शाही भोपाल की ओर से आयोजित प्रक्रिया में भोपाल सीहोर और रायसेन के कुल 1288 आवेदकों में से 200 हाजियों का चयन किया गया। इसके अलावा 25 आवेदकों को प्रतीक्षा सूची में रखा गया। लेकिन चयन के लिए निर्धारित 200 सीटों में से 10 सीटें वीआईपी कोटे के लिए आरक्षित रखने के मुद्दे पर हंगामा खड़ा हो गया। आम हाजियों और उनके परिजनों ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सभी आवेदकों को समान अवसर देने की मांग की।
    कुर्रा शनिवार सुबह करीब 10:30 बजे कोहेफिजा स्थित सूफिया मस्जिद में आयोजित किया गया। प्रक्रिया शुरू होते ही वीआईपी कोटे को लेकर आपत्ति सामने आने लगी। विरोध कर रहे लोगों का कहना था कि रुबातें आम हाजियों को ठहरने की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई थीं। इनका मकसद यात्रियों को मक्का में महंगे होटलों के खर्च से राहत देना था। ऐसे में जब सीमित सीटों के लिए बड़ी संख्या में लोग आवेदन कर रहे हैं तो कुछ सीटें विशेष श्रेणी के लिए आरक्षित रखने का आधार स्पष्ट होना चाहिए। लोगों ने चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और सभी आवेदकों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने की मांग उठाई।
    रुबात की व्यवस्था भोपाल रियासत के नवाबों और बेगमों की उस पहल से जुड़ी है जिसके तहत भोपाल सीहोर और रायसेन के हाजियों को पवित्र शहरों में ठहरने की सुविधा देने का प्रयास किया गया था। हज यात्रा के दौरान आवास पर होने वाला खर्च यात्रियों के कुल बजट का बड़ा हिस्सा हो सकता है। ऐसे में रुबात में ठहरने की सुविधा मिलने से हाजियों को आर्थिक राहत मिलती है। इसी वजह से हर साल बड़ी संख्या में आवेदक इस सुविधा के लिए उम्मीद लगाए रहते हैं। इस बार भी 1288 लोगों के आवेदन आने से सीमित सीटों के मुकाबले मांग का अंतर साफ दिखाई दिया।
    कुर्रा के आयोजन स्थल को लेकर भी चर्चा हुई। आमतौर पर यह प्रक्रिया मोती मस्जिद में आयोजित की जाती रही है लेकिन इस बार कार्यक्रम को कोहेफिजा स्थित सूफिया मस्जिद में रखा गया। औकाफ-ए-शाही की ओर से स्थान बदलने की वजह पार्किंग की समस्या बताई गई। हालांकि आयोजन स्थल में बदलाव के साथ ही वीआईपी कोटे को लेकर उठे सवालों ने कार्यक्रम के दौरान असंतोष को और बढ़ा दिया।
    रुबात की सुविधा पिछले कुछ वर्षों से विवादों और कानूनी पेचीदगियों के कारण प्रभावित रही है। इसके चलते हाजियों को ठहरने के लिए अपने स्तर पर होटल की व्यवस्था करनी पड़ती है और यात्रा पर अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है। रुबातों के संचालन और आवंटन को लेकर स्थानीय मुस्लिम समाज तथा औकाफ-ए-शाही की भूमिका पर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में इस बार का विवाद केवल सीटों के बंटवारे तक सीमित नहीं है बल्कि यह भी सवाल सामने ला रहा है कि इस सुविधा का लाभ जरूरतमंद हाजियों तक किस तरह पहुंचाया जाए।
    कार्यक्रम में शहर काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी शहर मुफ्ती अबुल कलाम उत्तर भोपाल विधायक आतिफ अकील और औकाफ-ए-शाही की एग्जीक्यूटिव कम एडवाइजरी कमेटी के सदस्य आजम अली खान मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत कुरान की तिलावत से हुई और समापन शहर काजी की दुआ के साथ किया गया। चयन प्रक्रिया के लिए स्टेट हज कमेटी से प्राप्त सूची का इस्तेमाल किया गया।
    अब विवाद के केंद्र में यह सवाल है कि जब 1288 आवेदकों के मुकाबले केवल 200 हाजियों को सुविधा मिलनी है तो वीआईपी कोटे के लिए सीटें आरक्षित करने का आधार क्या है। आवंटन प्रक्रिया को लेकर उठी आपत्तियों के बीच पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना अहम हो गया है। आम हाजियों की मांग है कि रुबात जैसी जनहित की सुविधा में चयन के नियम स्पष्ट हों और आवंटन को लेकर किसी तरह का संदेह न रहे।

  • जनादेश के आगे साबुन के बुलबुले की तरह फूटे सत्ता परिवर्तन के सपने, शिवराज ने विपक्ष को घेरा, कल खोलेंगे राज

    जनादेश के आगे साबुन के बुलबुले की तरह फूटे सत्ता परिवर्तन के सपने, शिवराज ने विपक्ष को घेरा, कल खोलेंगे राज


    भोपाल । केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सत्ता परिवर्तन यानी रिजीम चेंज की बहस के बीच कांग्रेस और विपक्षी दलों पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। सोशल मीडिया पर साझा की गई अपनी पोस्ट में उन्होंने रिजीम चेंज गैंग का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि कुछ लोग सत्ता परिवर्तन के सपने देख रहे हैं और इसके लिए तरह-तरह के नैरेटिव गढ़ रहे हैं। शिवराज ने कहा कि जनता के जनादेश के सामने ऐसे सपने साबुन के बुलबुले की तरह फूट जाते हैं। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए सवाल किया कि आखिर भारत में उनकी दाल क्यों नहीं गल रही। साथ ही उन्होंने ऐलान किया कि अगर विपक्ष को अपनी स्थिति समझ नहीं आती तो वे अगले दिन इसका जवाब देंगे।
    शिवराज सिंह चौहान की यह टिप्पणी ऐसे समय सामने आई है जब देश की राजनीति में रिजीम चेंज को लेकर बयानबाजी तेज है। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा चुनाव के जरिए सरकार बदलने की बात कह चुके हैं। वहीं वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने भी सत्ता परिवर्तन की लड़ाई का उल्लेख किया था। इन बयानों के बाद राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर बहस जारी है। शिवराज ने अपनी पोस्ट में किसी नेता का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया लेकिन रिजीम चेंज गैंग कहकर विपक्षी खेमे पर निशाना साधा।
    केंद्रीय मंत्री ने अपने तंज में चुनावी नतीजों और छात्र संगठनों की जीत का भी उल्लेख किया। उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी और दिल्ली यूनिवर्सिटी में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी की जीत का जिक्र किया। इसके साथ ही ओडिशा के 13 विश्वविद्यालयों में एबीवीपी को मिली सफलता को भी अपने तर्क का हिस्सा बनाया। शिवराज का कहना था कि इन नतीजों को जनता के रुख के संकेत के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने गुजरात के निकाय चुनावों और असम पश्चिम बंगाल तथा पुडुचेरी के उपचुनावों का भी उल्लेख किया।
    शिवराज सिंह चौहान ने अपनी पोस्ट में कहा कि गांव हो या शहर युवा हों या आम नागरिक जनता का मूड कुछ और है जबकि रिजीम चेंज गैंग की स्क्रिप्ट कुछ और चल रही है। उनके बयान का संकेत इस ओर था कि राजनीतिक विरोधियों की रणनीति और जनता के वास्तविक रुझान के बीच अंतर है। उन्होंने सवाल उठाया कि लगातार चुनावी हार के बाद भी विपक्ष अपनी रणनीति पर आत्ममंथन क्यों नहीं कर रहा है।
    केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष को सलाह देते हुए कहा कि उसे अपनी स्थिति का आकलन करना चाहिए और यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि जनता उसके संदेश को किस तरह स्वीकार कर रही है। उनके मुताबिक केवल सत्ता परिवर्तन की बात करने या राजनीतिक नैरेटिव तैयार करने से जनसमर्थन हासिल नहीं किया जा सकता। लोकतंत्र में जनता का फैसला सबसे अहम होता है और चुनावी नतीजे उसी का संकेत देते हैं।
    अपनी पोस्ट के अंत में शिवराज ने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि रिजीम चेंज गैंग आत्ममंथन के बाद भी बात नहीं समझ पाता तो वे अगले दिन बताएंगे कि उसकी दाल क्यों नहीं गल रही। उनके इस बयान ने राजनीतिक चर्चा को और तेज कर दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि शिवराज सिंह चौहान अगले दिन अपने वादे के मुताबिक क्या नया तर्क रखते हैं और विपक्ष की ओर से इस टिप्पणी पर कैसी प्रतिक्रिया आती है। फिलहाल उनका बयान सत्ता परिवर्तन की बहस के बीच भाजपा और विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक जुबानी जंग का नया हिस्सा बन गया है।

  • MP में 27% OBC आरक्षण लागू करने की मांग फिर तेज, राहुल गांधी बोले- छात्रों की आवाज दबाई जा रही, संस्थाओं पर कब्जे का आरोप

    MP में 27% OBC आरक्षण लागू करने की मांग फिर तेज, राहुल गांधी बोले- छात्रों की आवाज दबाई जा रही, संस्थाओं पर कब्जे का आरोप


    भोपाल । लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक ऑडियो संदेश जारी कर बीते एक महीने के अपने कार्यक्रमों और लोगों से मुलाकातों का ब्योरा साझा किया है। इस संदेश में उन्होंने मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी आरक्षण को पूरी तरह लागू करने की मांग के साथ आदिवासी परिवारों की परेशानियों और छात्रों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। राहुल गांधी ने इंदौर में आयोजित छात्रों की गूंज कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए शिक्षा व्यवस्था और छात्रावासों की स्थिति पर सवाल उठाए। उन्होंने केंद्र और राज्य की राजनीति से जुड़े कई मुद्दों पर अपनी बात रखते हुए आरोप लगाया कि देश की संस्थाओं पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है।
    राहुल गांधी ने छात्रों के बीच अपनी बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि मौजूदा व्यवस्था में छात्रों की समस्याओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में एक समूह देश की संस्थाओं पर अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि सिस्टम को अंधभक्त चाहिए छात्र नहीं। राहुल ने इंदौर में छात्रों के साथ शिक्षा बजट में कटौती और छात्रावासों की कमी जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की बात भी कही।
    उनके मुताबिक छात्रों ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर अपनी चिंताएं साझा कीं। उन्होंने सत्य निकेतन की त्रासदी का भी उल्लेख किया और कहा कि शिक्षा से जुड़े सवालों को गंभीरता से समझने की जरूरत है। राहुल गांधी ने महाराष्ट्र के नासिक में भूख हड़ताल कर रहे आदिवासी छात्रों से मुलाकात का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि छात्रावासों के नियमों और परिस्थितियों को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा गया था। राहुल के अनुसार इसके बाद हॉस्टल में रहने की आयु सीमा वापस ले ली गई। उन्होंने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों को समर्थन देने की बात भी कही।
    मध्य प्रदेश के संदर्भ में राहुल गांधी ने इंदौर के कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण पूरी तरह लागू करने की मांग किए जाने की जानकारी दी। यह मुद्दा प्रदेश में लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी चर्चा का विषय बना हुआ है। राहुल गांधी ने कहा कि पिछड़े वर्गों को उनका अधिकार मिलना चाहिए। हालांकि आरक्षण के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं और सरकारी फैसलों पर निर्भर करती है।
    राहुल गांधी ने बालाघाट में उन आदिवासी परिवारों से मुलाकात का भी उल्लेख किया जिन्होंने कुपोषण और बीमारी के कारण अपने बच्चों को खोया था। उन्होंने इस मुलाकात को बेहद भावुक बताते हुए कहा कि कुछ दुख ऐसे होते हैं जिनके सामने शब्द भी कम पड़ जाते हैं। उनके अनुसार उस दौरान उनका उद्देश्य परिवारों का दर्द सुनना और उनकी परिस्थितियों को समझना था। इस मुद्दे के जरिए उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ी चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया।
    अपने ऑडियो संदेश में राहुल गांधी ने दिल्ली की बेला एस्टेट झुग्गी बस्ती का दौरा करने का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के बाद वहां 729 में से 728 लोगों ने मतदान का अधिकार खो दिया। यह राहुल गांधी का दावा है। उन्होंने निष्पक्ष परीक्षाओं की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों की बातों का उल्लेख करते हुए पुलिस कार्रवाई और गोलीबारी से जुड़े आरोप भी सामने रखे।
    राहुल गांधी ने वोट चोरी के आरोपों को संस्थाओं और संविधान से जोड़ते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। इसके अलावा उन्होंने 30 सितंबर को नई दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में इंडिया गठबंधन के नेताओं के साथ हुई बैठक का जिक्र किया। उनके अनुसार बैठक में मतदान के अधिकार की रक्षा के तरीकों पर चर्चा हुई। राहुल ने रायबरेली में विकास कार्यों की समीक्षा के लिए हुई दिशा बैठक और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से मुलाकात का भी उल्लेख किया। महात्मा गांधी की जयंती पर राजघाट जाकर श्रद्धांजलि देने की बात के साथ उन्होंने संदेश समाप्त किया। उनके इस बयान के बाद मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण और छात्रों की समस्याओं को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।